बॉस2- नही पता...मतलब कि अब तक पता नही चला....पर हाँ...जल्द ही पता चल जायगा....
रिचा- मुझे ज़रूर बताना....पर मुझे नही लगता की सरफ़राज़ भी ऐसा करेगा....क्योकि दोनो माँ-बेटी तो उसकी रखेल ही थी...और कोई प्राब्लम भी नही थी उनके बीच....
बॉस2- ह्म्म...पता करता हूँ...
रिचा- वैसे एक बात बताओ...तुम इतने आराम से बातें कैसे कर रहे हो...वो भी इतनी सुबह....बीवी नही है क्या...
बॉस2- है तो..पर अभी मैं कामिड पर बैठा हूँ...यहाँ कोई नही...
रिचा- हहहे...सही जगह है....
तभी रिचा की डोरबेल बजी और रिचा ने जल्दी से कॉल कट कर दी....
रिचा- कौन है...
रिया- मोम...मैं हूँ रिया...
रिचा(खुश हो कर )- रिया.....
और रिचा गेट खॉक कर रिया के गले लग गई और खुशी के आँसू बहाने लगी....
रिचा- मेरी बच्ची....कैसी है तू...ठीक तो है ना....
रिया- हाँ मोम...मैं बिल्कुल ठीक हूँ...
रिचा- थॅंक गॉड तू ठीक है....उस कमीने ने तुझे कुछ किया तो नही ना...
रिया- कमीना...कौन कमीना...
रिचा(मन मे)- शायद अंकित ने इसे चेहरा ना दिखाया हो...ह्म्म्मभ...हो सकता है...
रिया- बोलो मोम...किसकी बात कर रही हो...
रिचा- वही कमीना...जो तुझे किडनॅप किए हुए था...और कौन...
रिया- नही मोम...वो कमीना नही था....वो तो फरिश्ता था....जिसने मुझे जिंदगी की सच्चाई से बाकीफ कराया....
रिचा(गुस्से से)- क्या मतलब....तुझे जबरन उठा ले जाने वाला फरिश्ता हो गया....हाँ...और कौन सी सच्चाई है जिंदगी की...
रिया- मोम ...वो जबरन उठा ज़रूर ले गया था...पर उसने कोई जबर्जस्ति नही की...और सच्चाई की बात रही तो वो मेरी जिंदगी की सच्चाई है....मैं जान गई...यही बहुत है...ओके...
रिचा- ओह्ह...तो वो फरिश्ता हो गया...ऐसा क्या जादू कर दिया उसने जो तू उसकी तरफ बोलने लगी...
रिया- नही मोम...मैं किसी की तरफ नही बोल रही...बस सच बोल रही हूँ...वो अच्छा इंसान है...
रिचा- अच्छा...तो ये बता की उस अच्छे इंसान ने तेरे कपड़े क्यो उतारे...
रिया- कपड़े...अरे नही मोम...उसने कपड़े चेंज करने बोला था...उतारे नही...और फिर उन्हे धोने भी भिजवाया था...पर वो वापिस नही आ पाए शायद...
रिचा- आएँगे भी नही....क्योकि उन कपड़ो का बुरा हाल किया उसने....
और फिर रिचा ने रिया को पार्सल वाली बात बता दी....
रिया- ओह माइ गॉड....उसने ऐसा किया....पर क्यो...
रिचा- मुझे डरने के लिए...और किस लिए....वो अपनी बात मनवाना चाहता था मुझसे....और क्या...
रिया- मन की बात....पर आपसे उसका क्या लेना-देना...वो आपको किस बात के लिए फोर्स कर रहा था...
रिचा(सकपका कर)- वो...वो...पैसा...हाँ...पैसा चाहिए था उसे...और क्या...
रिया(मुँह पर हाथ रख कर)- ओह्ह..तो कितना पैसा लिया उसने...
रिचा- वो...5 लाख...हाँ..पूरे 5 लाख ले गया कल रात को...तब तुझे चोदा...
रिया- पर उसने तो मुझे कल शाम को ही छोड़ दिया था....
रिचा(चौंक कर)- क्या....तो तू रात भर कहाँ थी...
रिया- मैं मेरे फ्रेंड के घर रुक गई थी....सोचा कि आपको सुबह सर्प्राइज़ दूगी...
रिचा- ओह्ह....
रिया- ये तो चोट हो गई मों...मुझे चोदने के बाद आपसे पैसे ले गया...सॉरी मोम...काश मे साम को घर आ जाती तो पैसे बच जाते ना...
रिचा(मन मे)- उसे पैसो की क्या ज़रूरत...वो तो मेरी बजा गया...और अब तेरी बजाना चाहता है...पर बात संह नही आई....जब उसने रिया को छोड़ ही दिया था तो फिर डिमॅंड क्यो की...क्या चक्कर है...क्या वो मुझे आजमा रहा था....ह्म्म...यही होगा...
रिया(मन मे)- तुम कितना भी सोच लो मोम...सच कभी नही जान पाओगे....हाँ..मैं सब सच जान चुकी हूँ....थॅंक्स तो अंकित....
रिचा- वो सब छोड़ ये बता कि उस कमीने ने तेरे साथ कोई हरक़त....
रिया(बीच मे)- मॉम प्ल्ज़...वो कमीना नही...ओके...
रिचा- चुप कर...तुझे इंसान को समझने कि ज़रा भी अकल नही...तुझे क्या पता कि भोले चेहरे के पीछे कितना बड़ा कमीना छिपा है...
रिया- ह्म्म...ये बात सही कही...मैं इंसान को समझ नही पाती...चेहरा देख कर ही उसको अच्छा समझ लेती हूँ...पर अब ऐसा नही होगा...मैं इंसान जी फ़ितरत समझ चुकी हूँ....भोले चेहरे के पीछे सच मे बड़े-बड़े कमीने छिपे होते है...और कमीनी भी...है ना मोम...
रिचा- ह्म...अच्छा तू बैठ ...मैं तेरे लिए चाय बनाती हू...
रिया- नही मोम...आप बैठो...मैं बनाती हूँ...वैसे भी आप थक गई होगी ना....इतनी मेहनत जो की...
रिचा- क्या...क्या कहा...
रिया- मतलब कि आप मेरे लिए रात भर परेशान हुई होगी ना....आप बैठो..मैं चाय लाती हूँ...
फिर रिया किचन मे निकल गई और रिचा अंकित से रिया को बचाने का प्लान सोचने लगी......
मैं- क्या मतलब कि पैसे नही मिल सकते...क्या मेरे अकाउंट मे पैसे नही है....
एंप्लायी- है सर...बहुत है...पर आप पैसे निकाल नही सकते....
मैं- पर क्यो....वही तो पूछा मैने...जब पैसे है तो निकाल क्यो नही सकता...
एंप्लायी- क्योकि ये जॉइंट अकाउंट है...मिस्टर.आकाश मल्होत्रा के साथ...
मैं- जानता हूँ..वो मेरे डॅड है....और जॉइंट अकाउंट मे मेरा नाम है ना...तो मैं क्यो नही निकाल सकता...
एंप्लायी- आप निकाल सकते है...पर अभी नही....अभी इस अकाउंट से एक भी पैसा नही निकल सकता....
मैं- पर क्यो...उसकी कोई वजह तो होगी....
एंप्लायी- वजह है आपके डॅड की पार्ट्नरशिप ...और उस पार्ट्नरशिप का अग्रीमेंट....
मैं- क्या मतलब...मैं कुछ समझा नही...आप ज़रा डीटेल मे बतायगे....
एंप्लायी- जी सर...सुनिए....
मिस्टर.आकाश , मिस्टर.वर्मा और मिस्टर.सक्षेना पार्ट्नर्स है ...उनके अग्रीमेंट के हिसाब से अगर कोई भी पार्ट्नर ये पार्ट्नरशिप ख़त्म करने के लिए अप्लाइ करेगा तो फिर जब तक वो अप्लिकेशन या तो वापिस नही होती या फिर पार्ट्नरशिप टूट ती नही...तब तक कोई भी पार्ट्नर अपने अकाउंट से पैसे नही ले सकता...
उन तीनो ने जो अकाउंट दिए थे...ये उनमे से एक है...इसलिए पैसे नही निकाल सकते...
मैं- क्या बकवास है. .ये कहाँ का रूल है...
एंप्लायी- ये अग्रीमेंट इन तीनो ने बनवाया तो इन पर ये रूल लागू होता है...
मैं- ओके...पर ये अप्लिकेशन दी किसने...
एंप्लायी- मिस्टर.वर्मा ने...
मैं(दाँत पीस कर)- वर्मा....आइ न्यू इट...साला कमीना...
एंप्लायी- सॉरी सर....वी कॅंट डू तीस ..
मैं- ओके...गो टू हेल...
और मैं वहाँ से गुस्से मे निकल आया और डॅड को कॉल किया...
मैने जब डॅड से पूछा तो उन्होने भी वही बात बोली...मतलब ये था कि अब मैं पैसे नही निकाल सकता....
मैं- साला...आज मुझे दुख हो रहा कि मैने सेप्रेट अकाउंट क्यो नही खोला...डॅड ने कितनी बार कहा...पर मैं ही...हॅट्ट्ट...
अब मैं सोनू को क्या मुँह दिखाउन्गा....कहाँ से पैसे लाउन्गा....सोनम का ट्रीटमेंट कैसे होगा....ओह गॉड...ये क्या मुसीबत दे दी...पैसा होते हुए भी यूज़ नही कर सकता...हाटत्त ...
काफ़ी देर तक सोचने के बाद मुझे एक ही उपाए समझ आया...कि मैं वर्मा से मिल कर उसे अप्लिकेशन वापिस लेने को कहूँ...बस कुछ दिन के लिए...जितना उसने मुझे टाइम दिया था...तब तक मेरा काम भी हो जायगा...
यही सोच कर मैं वर्मा के ऑफीस निकल गया...कुछ देर बाद मैं वर्मा के कॅबिन मे उसके सामने खड़ा था....
वर्मा- तो ये बात है...पर मैं अप्लिकेशन वापिस क्यो लूँ...मेरा क्या फ़ायदा...ह्म..
वर्मा ने एक ड्रिंक का सीप मारते हुए बोला ...जब मैने उसे बॅंक की कंडीशन याद दिलाई...
मैं- फ़ायदा...फ़ायदा तो नही...पर नुकसान भी नही...
वर्मा- वही तो...तो मैं तेरी बात किस लिए मानु...
मैं- तुमने मुझे 15 दिन का टाइम दिया था ना...तो 15 दिन तक ये सब मत करो...फिर कर लेना...
वर्मा(मुस्कुरा कर)- 15 दिन तो तुझे सोचने को दिए थे कि तू ऐसे ही पैसे देगा या मैं कोर्ट मे जाउ.....समझे...
मैं- ह्म्म..पर मुझे पैसो की ज़रूरत है...और वो पैसे तो मेरे है....इसलिए वो अप्लिकेशन वापिस ले लो...
वर्मा(पेग गटक कर)- ज़रूरत...ह्म्म..पैसा चीज़ ही ऐसी है...पर मैं तेरी हेल्प क्यो करूँ...
मैं- हेल्प नही...मैं सिर्फ़ वेट करने का बोल रहा हू...कुछ दिन बस...
वर्मा(दूसरा पेग बना कर)- ओके...मैं तेरी बात मानुगा...पर एक शर्त पर...
मैं- कौन सी शर्त...
वर्मा(एक साँस मे पेग गटक कर)- तू बस अपने घुटनो पर बैठ कर मुझ से मदद की भीख माग ले...हाहाहा...
मैं(गुस्से से चिल्ला कर)- वर्मा...अपनी औकात मत भूल....
वर्मा- हाहाहा...मेरी औकात क्या है...ये मत समझा...या तो भीक माग या दफ़ा हो जा यहा से....
मैं- जाता हूँ...पर एक बात सुन ले...अब तक मैं सिर्फ़ तुझे सबक सीखना चाहता था..पर अब मैं तेरी जिंदगी नरक से बदतर कर दूँगा...याद रखना...
वर्मा(गुस्से से)- चल जा यहा से...
मैं(गुस्से से)- याद रखना....2 दिन..और तू ख़तम....
और मैं वहाँ से गुस्से मे निकल आया और कार दौड़ा दी...
मैं(कार मे)- इसकी माँ की...मुझसे भीक मँगवाएगा....अब बताता हूँ साले को...इसको जीते जी नरक मे ना पहुँचाया तो मेरा नाम भी अंकित नही...
तभी मेरा फ़ोन बज उठा और मैने नंबर देख कर अपना गुस्सा काबू किया और फ़ोन पर बात की...
मैं- ओके...मैं अभी आया...
फिर मैं बस स्टॅंड पहुँचा और फिर उससे मिला जिसको लेने मैं यहाँ आया था ...
मैं- ह्म्म..अब देखना...आपके आ जाने से मेरा प्लान किस तरह कामयाब होगा....बस मज़ा आ जायगा....चलिए....
मैने अपने गेस्ट को एक सुरक्षित जगह पर ठहराया और वहाँ से निकल गया....
जब मैं कार मे था तो मेरा फ़ोन बज उठा...ये रक्षा का नंबर. था जो सुबह से कॉल पर कॉल किए जा रही थी....
( कॉल पर )
मैं- हाँ बेटा...बोलो ..
रक्षा(गुस्से मे) - क्या बोलूं...आपको इतना भी टाइम नही कि मुझसे बात कर ले...अरे कम से कम कॉल तो ले ले...हाँ....
मैं- अरे यार...गुस्सा क्यो होती हो...बिज़ी था...
रक्षा- वाह...मुझे उस कुत्ते के सामने भेज दिया और खुद बिज़ी हो गये...एक बार ये भी नही सोचा कि इस छोटी सी जान की क्या हालत हुई होगी...हाँ...
मैं- नही...क्योकि मैं अपनी रक्षा को जानता हूँ...तू बडो-बडो को पानी पिला दे...फिर वो मामूली कुत्ता तेरा क्या बिगाड़ सकता था...
रक्षा- ओह हो...तो आप इतना कुछ जानते है मेरे बारे मे...
मैं- ह्म्म...अच्छा ये बताओ कि वजह हुआ क्या...
रक्षा- अरे मेरे भोले भैया...इतने मासूम मत बनो...आपको तो अब तक पता चल ही गया होगा कि रफ़्तार को पोलीस ले गई...
मैं(हंस कर)- हाँ मेरी जान...वो तो पता है...पर ये बताओ कि तूने ये सब कैसे किया....
रक्षा- ह्म्म...उस ठर्कि ने बहुत मेहनत करवाई...सुनो सुरू से बताती हूँ...
फिर रक्षा ने रफ़्तार के साथ पार्क मे हुई पूरी घटना बता दी..जिसे सुन कर मेरी हँसी निकल गई....
रक्षा- आपको हँसी आ रही है...पता है...अगर थोड़ी सी भी गड़बड़ हो जाती तो वो कमीना मेरे साथ...
मैं(बीच मे)- हे...तूने सोच भी कैसे लिया कि मैं तुझे उस कमीने के सामने अकेला भेजुगा...
रक्षा- क्या मतलब...
मैं- मतलब ये डार्लिंग...कि वहाँ भीड़ मे मेरे आदमी भी थे...कही कुछ गड़बड़ होती तो वो सब संभाल लेते...उनकी नज़र थी तुम पर....
रक्षा- ओह...अच्छा अब बताओ...मेरा इनाम कब मिलेगा...
मैं- बहुत जल्द...थोड़ा फ्री होने दो..फिर 2 दिन सिर्फ़ तुम्हारे ...
रक्षा- ह्म्म..उसके लिए मैं वेट कर लूगी...पर मुझे आज एक छोटा सा इनाम तो दो...
मैं- आज..नही...आज टाइम नही..बिज़ी हूँ...
रक्षा- टाइम नही...ह्म्म...लगता है आप ऐसे नही मानोगे...मुझे ही कुछ करना होगा...
मैं- ओके..कर लो फिर....देखे तो क्या करती हो...
रक्षा- ओके...फिर देख ही लो..बाइ...
रक्षा ने फ़ोन कट कर दिया और मेरे माइंड मे एक सवाल छोड़ गई....आख़िर अब ये लड़की करने क्या वाली है.....????
थोड़ी देर बाद जब मैं अपने घर पहुँचा तो पता चला कि रक्षा पारूल के रूम मे है..और मेरा वेट कर रही है....
रक्षा पूरे पॅशन के साथ मेरे होंठो को चूस रही थी...मेरा सिर उसने दोनो हाथो की गिरफ़्त मे कर के मेरे होंठ चूसना सुरू कर दिया...और उसके नुकीले हो उठे निप्पल मेरे सीने मे चुभाने लगी...
रक्षा की गर्मी देख कर मैं भी गरम हो गया और मैने रक्षा को बाहों ने भर कर उपर उठा लिया और रक्षा ने भी अपनी टांगे मेरी कमर मे लपेट दी और किस्सिंग जारी रखी...
किस करते हुए मैं लगातार रक्षा की बड़ी हो चली गान्ड दबाता रहा और रक्षा और ज़्यादा जोश के साथ मेरे होंठ चूस्ति रही...
थोड़ी देर बाद जब रक्षा को सास लेने की ज़रूरत पड़ी..तब उसने मेरे होंठो को छोड़ा...
रक्षा- आअहह...भैया...मज़ा आ गया...
मैं- मज़ा...वो तो अभी सुरू हुआ है मेरी जान...
और मैने फिर से रक्षा को बेड पर पटक दिया...बेड पर गिरते ही रक्षा ने अपने जीन्स को ओपन किया और गान्ड उठा कर उसे नीचे कर दिया...बाकी का काम मैने जीन्स को पैरो से निकाल कर किया..
जीन्स बाजू फेक कर मैं पलटा तो पाया कि रक्षा के पैर हवा मे थे और वो पैंटी निकाल रही थी...
मैने तुरंत उसकी पैंटी को भी पैरो से अलग कर दिया और फिर खुद भी नंगा हो गया...
रक्षा- उउउंम...अब आ भी जाओ भैया...भुजा दो मेरी प्यास...ओह्ह्ह..भैया...आओ ना...
मैने तुरंत रक्षा की टांगे खोली और गान्ड से पकड़ कर उसकी कमर को हवा मे लटका दिया और उसकी चिकनी चूत पर अपना मुँह लगा दिया....
कुछ देर तक रक्षा लंड चूस्ति रही और मैं उसके बूब्स सहलाता रहा...फिर मैं वापिस नीचे आया और लंड को रक्षा की चूत पर टीकाया कि तभी रक्षा ने मुझे रोक दिया....
मैं- क्या हुआ....मेरा नही हुआ..तेरा हो गया क्या...
रक्षा- नही...आप मुझे पीछे से करो..कुतिया बना कर...
मैं(मुस्कुरा कर)- अच्छा...मेरी कुतिया बनना है...
रक्षा- हाँ...वैसे मे ज़्यादा मज़ा आता है...करो ना...
मैं- हाँ बेटा...अभी कुतिया बनाता हूँ...
और अपना लंड निकाल कर रक्षा को पलटा दिया...रक्षा भी पोज़ मे आकर अपनी मदमस्त गान्ड को हवा मे उठा कर लंड का वेट करने लगी...
रक्षा ने मुझे पीछे से चूत मारने को कहा था...पर उसकी चिकनी गान्ड देख कर मेरा मन मचल गया और मैने गान्ड के छेद पर लंड लगा दिया....
उसकी वजह यह थी कि उन फोटोस मे एक फोटो मेरे दादाजी , आज़ाद की भी थी...जिसे मैं पहचान गया था...
असल मे डाइयरी के साथ मुझे कुछ फोटोस भी मिले थे...जिनमे दादाजी की सेम यही फोटो थी...
मैं(मन मे)- ये फोटोस...आख़िर भेजी किसने...
मैने पार्कल को अच्छी तरह से चेक किया...बुत उस पर भेजने वाले का कोई नाम नही था...
मैं एक-एक कर के सारे फोटोस देखने लगा...पर उनमे से मुझे कोई भी पहचान वाला नही दिखा...
मैं- मेरे दादाजी के साथ ये बाकी की फोटोस है किन लोगो की...साला इन्हे तो मैं पहचानता ही नही...
इससे पहले कि मैं कुछ और सोचता या आगे देखता...मुझे किसी के आने की आहट हुई...
जब मैने गेट की तरफ देखा तो बाजार से सुजाता चली आ रही थी...
मैने जल्दी से पार्सल को वापिस बंद किया और सुजाता को देखने लगा...
आज सुजाता कुछ परेशान दिख रही थी...उसके माथे पर थोड़ा पसीना भी दिखाई दे रहा था....
मैं- और आंटी...कहाँ से...
सुजाता- क्क .क्या...ओह अंकित...सॉरी मैने देखा ही नही..
मैं- कोई नही...वैसे आप कहाँ गई थी...
सुजाता- मैं...वो..हाँ...मैं तुम्हारे ऑफीस गई थी...थोड़ा काम था. .
मैं- ओके..और डॅड...वो कहाँ है...
सुजाता- वो..वो वही ऑफीस मे है...
मैं- क्या बात है आंटी...आप टेन्षन मे दिख रही है...सब ठीक तो है ना...
सुजाता(अपना चेहरा सॉफ कर के)- टेन्षन...नही...नही तो...मुझे क्या टेन्षन...वो तो बाहर धूप है ना....इसलिए ये पसीना...अच्छा बेटा..मैं थोड़ा फ्रेश हो लूँ...फिर आती हूँ...
और इतना कह कर सुजाता जल्दी से रूम मे भाग गई....
मैं(मन मे)- कुछ तो बात है....आज तक मेरे डॅड का ओफ्फिस बोलने वाली मेरा ऑफीस बोल रही है...उपर से झूट कि डॅड ऑफीस मे है...वो तो एक क्लाइंट के पास थे अभी....और ये चेहरा....ह्म्म..इसे देख कर सब समझ आ रहा है कि कोई बड़ी बात है...पर क्या....पता लगाना होगा....कही इसकी टेन्षन मेरे लिए कोई टेन्षन ना ले आए...
और ये फोटोस....इनको बाद मे देखेगे...पहले पैसो का इंतज़ाम कर लूँ...वो ज़्यादा ज़रूरी है...
फिर मैने वो पार्सल अपने रूम मे रखा और घर से निकल गया.....
आज सुबह से...जब से वसीम का सामना अंकित से हुआ था...तबसे वसीम काफ़ी परेशान हो गया था.....
वसीम को रह-रह कर अंकित की आँखे याद आ रही थी...अंकित का उसे इस तरह घूर्ना वसीम की परेशानी की वजह थी....
वसीम(मन मे)- अंकित आख़िर मुझे ऐसे क्यो देख रहा था...क्या ये सिर्फ़ मेरा बहम था...या फिर कुछ ऐसा था जो अंकित ढूँढने की कोसिस कर रहा था....
अंकित ने जिस तरह से मुझे हॉस्पिटल मे धमकाया था...उससे ये तो सॉफ हो गया कि उसे मेरे बारे मे कुछ पता है...
पर सवाल ये है कि उसे आख़िर पता क्या है...क्या वो सब जान गया...या सिर्फ़ मुझ पर शक है...
नही...ये शक नही हो सकता...शक की वजह से वो मुझे धमकी नही दे सकता....पक्का उसे कुछ तो पता चला है ...
और हो ना हो...ये ज़रूर उस रिचा ने बका होगा....साली कुछ भी कर सकती है...उसका कोई भरोशा नही....और सवाल उसकी बेटी का था...तब तो...हाँ...उसी ने बका होगा....
पहले उस कमीनी को देखता हूँ...पता तो चले कि साली ने क्या-क्या उगल दिया....
और ये सब सोच कर वसीम ने रिचा को कॉल किया और मिलने बुलाया...
कुछ देर बाद दोनो एक होटल के रूम मे मिले....
रिचा- हाँ..तो इतना अर्जेंट क्यो बुलाया...पता है मुझे कितने बहाने बनाने पड़े....
वसीम- तुझे किस से बोलने की ज़रूरत पड़ गई...है कौन तेरे घर...हाँ...
रिचा- अरे...बताना ही भूल गई...मेरी बेटी वापिस आ गई...
वसीम(शोक्ड)- क्या...पर कैसे...
रिचा- अंकित ने उसे छोड़ दिया...
वसीम- छोड़ दिया...ऐसे ही..नही-नही...वो इतना सरीफ़ भी नही...बिना किसी मक़सद के वो कुछ नही करता...ज़रूर इसकी कोई वजह होगी...
रिचा- वजह है ना...वो साला मेरी बेटी के साथ सोना चाहता है...
वसीम- बस...
रिचा(गुस्से से)- बस...क्या मतलब बस...क्या ये छोटी बात है...
वसीम- और किसी के लिए शायद बड़ी बात हो...पर अंकित के लिए छोटी बात ही है...
वसीम(बीच मे)- मैं तुम्हारी बेटी के लिए कुछ नही बोल रहा...मैं बस ये बोल रहा हूँ कि अंकित के लिए सेक्स कोई बड़ी बात नही...इसलिए कह रहा हूँ...ज़रूर कोई और वजह होगी...कोई बड़ी वजह ....
रिचा(सोचते हुए)- ह्म्म...कह तो तुम ठीक रहे हो...इस बारे मे सोचना पड़ेगा....खैर...अभी ये तो बताओ कि मुझे बुलाया किस लिए...
वसीम- हाँ..मैं बात तो भूल गया...मुझे ये जानना है कि तुमने अंकित को मेरे बारे मे क्या-क्या बताया....
रिचा(सहम कर) - मैने...मैने तो कुछ नही...आअहह...
वसीम(रिचा के बाल खीच कर)- झूट मत बोलो मुझसे...मैं जानता हूँ कि एक तू ही है जो ये जानती है कि सरफ़राज़ ख़ान कोई और नही...बल्कि मैं हूँ...समझी...
रिचा- नही...वो..वो दामिनी भी जानती है...
वसीम- वो सिर्फ़ मेरा नाम जानती है...चेहरा नही...ये सिर्फ़ तू जानती है कि वसीम ख़ान ही सरफ़राज़ है...हाँ..
रिचा- हां..पर मैने तो कुछ भी नही..
वसीम- तू ऐसे नही मानेगी...साली रंडी...
और वसीम ने रिचा को एक झन्नाटेदार थप्पड़ मार दिया...और रिचा फर्श पर गिर गई....
वसीम- अब बोलती है कि नही..वरना आज तेरी वो हालत करूगा की ...बोल साली...
रिचा- एम्म..मैने कुछ नही...आआहह...
रिचा ने ना बोला ही था कि वसीम ने झुक कर एक और थप्पड़ रिचा को जड़ दिया.....
वसीम- जितना झूठ बोलेगी...उसना दर्द होगा...सराफ़ात से मुँह खोल दे...वही तेरे किए अच्छा है....सच बोल साली...जल्दी...
रिचा- बताती हूँ...मुझे...बोलने तो दो....
वसीम(रिचा को खड़ा कर के)- हाँ बोल...क्या बोला उसे...
रिचा- मैने सिर्फ़ उसे ये बताया कि तुम्हारी उसके परिवार से दुश्मनी है...बस...
वसीम- और..
रिचा- और ये..कि तुम उसके परिवार को मिटाना चाहते हो...
वसीम- और...
रिचा(डरते हुए)- और..और कुछ नही...
वसीम(रिचा का गला पकड़ कर)- सच बोल...और क्या बोला...
रिचा- वो...वो जानता है कि तुम उसे मारना चाहते हो...बस यही बताया...और कुछ नही...
वसीम- और भी कुछ है...बोल साली वरना मार दूँगा.....
रिचा- तो मार दो...पर मैने और कुछ नही बोला था...
वसीम- क्या उसने दुश्मनी की वजह नही पूछी...
रिचा- पूछा था...पर मैने बोला कि मुझे पता नही...
वसीम- ह्म्म..तो अब सुन...उसे इसके अलावा कुछ भी पता चला ना...तो मैं पहले तेरी बेटी को मारूगा...फिर तुझे...तू तो जानती ही है की किसी को मारना मेरे लिए कितनी मामूली बात है....है ना...
रिचा- ह्म...जानती हू...मैं कुछ नही बोलुगी...हमे कुछ नही करना...प्ल्ज़्ज़...
वसीम- ओके...अब जल्दी से नंगी हो जा...
रिचा- तुम बिना चोदे नही मानोगे...जानती थी...
और रिचा ने बड़े प्यार से अपने कपड़े निकाले और नंगी हो कर बेड पर लेट गई...
रिचा- अब जल्दी करो..मुझे जाना भी है...
वसीम(रिचा के सारे कपड़े उठा कर(- ह्म..तो जा ...अब तू नंगी ही जाएगी...
और वसीम गेट तक पहुँच गया...तब रिचा गिडगिडाते हुए बोली...
रिचा- वसीम...ऐसा क्यो कर रहे हो...मैने क्या किया....ऐसा मत करो...प्ल्ज़्ज़...
वसीम- ये तेरे मुँह खोलने की सज़ा है...जा..नंगी ही जा...तेरे जैसी रंडी के लिए क्या बड़ी बात है....जा...
और वसीम बिना कुछ सुने कपड़े ले कर रूम से निकल गया और रिचा गेट के पास आ कर रोने लगी...कुछ देर बाद ....
रिचा(आँसू पोछ कर)- सरफ़राज़ ख़ान...अब तू देख ये रंडी क्या करती है...
और रिचा ने एक कॉल लगाया.....
रिचा- हेलो....होटल **** मे रूम नो. *** मे आ जाओ...अगर ये जानने की इक्षा हो की असल मे तुम्हारी फॅमिली के साथ हुआ क्या था.....
और हाँ...आते हुए मेरे लिए कपड़े ले आना...मैं बिल्कुल नंगी खड़ी हूँ...कोई मेरे कपड़े ले कर भाग गया...ओके...जल्दी आना....बाइ....
रिचा(कॉल कट कर के)- सरफ़राज़...अब ये रंडी....तुझे बहुत भारी पड़ेगी...तेरी कहानी ख़त्म....हुह...
पोलीस स्टेशन के अंदर जाते ही मेरे नज़र सामने बैठे इंस्पेक्टर.आलोक पर पड़ी....
मैं- हेलो सर...मे आइ कम इन....
आलोक- ओह..अंकित...आओ-आओ...
मैं आलोक की तरफ आगे बढ़ा ही था कि मेरी नज़र साइड मे बने लॉक-अप पर पड़ी....
मैं- ओह हो. .ये तो कमाल हो गया...हाहाहा....पोलीस वाला खुद लॉक-अप मे...क्या आलोक सर...ये क्या हो रहा है...ह्म्म...क्या किया इसने....
आलोक- क्या करे अंकित...जब क़ानून की रक्षा करने वाले ही क़ानून के दुश्मन हो जाए तो ऐसा करना ही पड़ता है...क्योकि क़ानून तो सबके लिए एक समान है...चाहे आम जनता हो...या कोई क़ानून का रक्षक ही क्यो ना हो....
मैं- वाह सर..वेल सेड...आप जैसे कुछ ऑफिसर्स की वजह से ही पोलीस पर लोगो का भरोसा कायम है...वरना इन जैसे कमीनो ने तो पोलीस की इज़्ज़त कब की लूट ली....
रफ़्तार(लॉक-अप के अंदर से)- हे लड़के....तेरी तो...
आलोक(बीच मे)- रफ़्तार....शांत रहो...और अंकित...आओ मेरे साथ ...अंदर बैठते है...वही बताता हूँ कि इसने क्या कुकर्म किया....
मैं- ह्म...
फिर मैं मुस्कुराता हुआ आलोक के साथ अंदर चला गया...थोड़ी देर बाद आलोक को किसी काम से बाहर जाना पड़ा...और मैं उठ कर रफ़्तार के पास पहुँच गया....
मैं- और रफ़्तार...क्या हुआ...थम गई ना तेरी रफ़्तार....हाँ....
रफ़्तार- चला जा यहाँ से...वरना ठीक नही होगा....
मैं- हाहाहा...क्या कर लेगा तू...हाँ...अब ना तू पोलीस वाला रहा और ना ही आम आदमी...तू एक मुजरिम है बस....एक हवसि..हाहाहा....
रफ़्तार- लड़के....चुप कर...
मैं(हँसते हुए)- ओके..ओके...पर ये तो बता...कि अपनी बेटी की एज की लड़की के साथ...छी-छी....इतनी ही तड़प थी तो अपनी बेटी को ही....
रफ़्तार(चिल्ला कर)- लड़के....एक शब्द भी निकाला ना...तो मार डालूँगा...समझा...
मैं- ओह हो...इतना गुस्सा..सिर्फ़ बेटी की बात सुनी तो ये हाल है...जब मैं उसके साथ चुदाई...
रफ़्तार- चुप हो जा कमीने....वरना..
मैं(गुस्से से)- अबे चुप...तू कुछ नही कर सकता....समझा...और ये बता कि तेरी बेटी की बात पर इतना गुस्सा ...हाँ..तो क्या वो किसी की बेटी नही थी..जो तू उसकी इज़्ज़त लूटने चला था...हाँ...बोल साले...बोल...
रफ़्तार(दाँत पीसते हुए)- मैने कुछ नही किया...वो लड़की ही रंडी थी...समझा....
मैं- ह्म्म..कुछ नही किया तो ये हाल है...अब सोच..कुछ कर देता तो क्या होता...सोच...
फिर मैं रफ़्तार को देख कर मुस्कुराने लगा.....
रफ़्तार(गुस्से से)- एक बार वो लड़की मिल जाए...फिर मैं देखता हूँ उसे....
मैं- उसे देखने से पहले तुझे अपने बाप से निपटना होगा....समझा...
रफतात(घूर कर )- मतलब ...ये सब....तू...
मैं(बीच मे)- ह्म्म...चलो...जान कर खुशी हुई कि तू अपने बाप को जानता है....हाहाहा...
रफ़्तार(गेट पीट कर)- लड़के...ये तूने ठीक नही किया...अब देखना...मैं उस लड़की की वो हालत करूगा कि वो मौत की भीक माँगेगी...और उसके परिवार की तो...
मैं(बीच मे)- चुप...तू कुछ तब करेगा..जब यहाँ से निकलेगा....और मैं तुझे यहाँ से निकलने नही दूँगा....तो ये गुस्सा अपनी गान्ड मे डाल और मुफ़्त की रोटिया तोड़....मैं चलता हूँ...फिर आउगा...
रफ़्तार(पीछे से)- हाहाहा....तू मुझे जानता नही लड़के....ये सलाखे मुझे ज़्यादा देर तक रोक नही सकती...मैं यहा से निकला...और वो लड़की गई समझो...हाहाहा.....
मैं(पलट कर)- और तू मुझे नही जानता....मैं जानता हूँ कि तू क्या सोच रहा है...पर याद रखना...मेरी सोच तेरी सोच से कही आगे है...तू ये जल्दी समझ जाओगे....
फिर मैं स्टेशन से बाहर निकला और रक्षा को कॉल किया....
मैं- हेलो रक्षा...मेरी बात ध्यान से सुन ...
रक्षा- जी भैया...बोलो....
मैं- ओके..एक काम कर.....
फिर मैने रक्षा को काम समझा कर कॉल कट कर की और वहाँ से निकल गया......
स्टेशन से निकल कर मैं फिर से पैसो के बारे मे सोचने लगा....कि कहाँ से इंतज़ाम करू पैसो का....
असल मे , मैं पैसो के लिए एक आदमी के पास ही जा रहा था ...पर आलोक ने कॉल कर के मुझे स्टेशन बुला लिया...मोहिनी/मोना मर्डर केस के बारे मे बात करने के लिए.....
मैने कार चलाते हुए काफ़ी सोचा...और फिर जब कुछ समझ नही आया तो मैने अपने आदमी को कॉल कर दिया....
( कॉल पर )
मैं- हेलो...कहाँ है आप...
स- बस...यही हूँ....बोलो क्या हुआ...मिल लिए रफ़्तार से....
मैं- ह्म...मिल लिया...पर उसके तेवेर बिल्कुल नही बदले...वो रक्षा को नुकसान पहुँचा सकता है....
स- अरे नही...अंकित...उस बच्ची को कुछ नही होने देना....
मैं- डोंट वरी...मैने उसी का इंतज़ाम करने जा रहा हूँ...
स- ह्म....तो बोलो..मुझे कैसे कॉल किया....
मैं- एक छोटा सा काम था...मुझे 20 लाख रूप्यी चाहिए...2 दिन मे...
स- 20 लाख....पर तुम्हे पैसो की ज़रूरत कैसे पड़ गई ..तुम्हारे पास तो...
मैं(बीच मे)- टाइम सर...टाइम...टाइम खराब हो तो कुछ भी हो सकता है...फिलहाल ये बताओ कि आप इंतज़ाम कर लोगे कि नही...
स- अब तुम्हे ना थोड़े बोलूँगा...हो जायगा...पर कल तक...
मैं- ओके...कोई प्राब्लम नही...कल कर देना....और हाँ...अभी एक काम करो...होटल **** मे आज रात के लिए एक रूम बुक करो....
स- क्यो..रूम क्यो...
मैं- सब बताउन्गा...आप करो तो....अभी...
स- ओके...कर देता हूँ....
मैं- ओके बाइ..बाद मे बात करूगा....बब्यए....
मैने कॉल रखा ही था कि शीला का कॉल आ गया....पर मैने उसका कॉल नही लिया....मैं पिछली रात से उसका कॉल लगातार इग्नोर कर रहा था.......
शीला फिर भी कॉल करती रही और मैं उसे इग्नोर करते घर पहुँच गया...और वहाँ से रेडी हो कर अपनी मंज़िल की तरफ निकल गया....
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