एमएलए के घर से निकल कर मैं अपने घर आया ...इस टाइम घर मे सुजाता नही थी....मैं समझा कि साली ऑफीस मे होगी...पर जैसे ही मैं उपर पहुँचा तो देखा कि डॅड अपने रूम मे है...
मैं- तो क्या सुजाता अकेली ऑफीस गई...नही....वो अकेली नही जा सकती...पर अगर ऑफीस नही तो फिर कहा...ह्म्म...लगता है इसकी कुंडली फिर से देखनी पड़ेगी...
फिर मैं अपने रूम मे आया और तभी मुझे कुछ याद आया तो मैं वो पार्सल मे आई फोटोस ले कर डॅड के पास पहुँचा..
आकाश(फोटो देख कर)- ये सब तुम्हे कहाँ से मिली...
मैं- वो सब बाद मे बताउन्गा...पहले आप मुझे मेरी फॅमिली से मिलवाओ...ये पिक्स किस-किस की है...
आकाश- ह्म...और..और ये है मेरी माँ...इनके लिए मैं ही सब कुछ था....बेटा ..मैं आज भी इनको अपने करीब पाता हू...ये मुझसे दूर गई ही नही...
इतना बोलते हुए डॅड की आँखे भर आई...मैं समझ गया कि उनके दिल मे क्या चल रहा है. .पर मैने उन्हे टोका और वो आँसू पोछ कर बाकी फोटोस को बताने लगे...
आकृति ब्या, योगेंद्रा चाचा, धर्मेश, सुभाष....इन सबके बारे मे बताते रहे...
फिर मैने एक पिक उठाई और बोला...
मैं- और ये...ये कौन है डॅड...
आकाश- ये...इसे मैं नही जानता...ये पिक कहाँ से मिली...ये...नही..मैं नही जानता इसे...
मैं- ओह्ह..ये शायद ग़लती से साथ मे आ गई...कोई नही...अच्छा डॅड आप ये फोटोस रखो...मैं थोड़ा आता हूँ...
फिर मैं डॅड को सारी पिक दे आया..बस वो पिक साथ ले ली जिसे डॅड ने पहचाना नही...
मैं(मन मे)- डॅड ने इसे नही पहचाना...ये कैसे हो सकता है...ह्म्म..कुछ तो बात है ..क्या ये पिक असली है...या फिर मैं जो सोच रहा हूँ...नही...मैं कुछ ज़्यादा ही सोचने लगा...पर...पता तो करना ही होगा...आख़िर डॅड ने इसे पहचाना क्यो नही....???
फिर मैने वो पिक अपनी जेब मे रखी और बॅंक निकल गया..
बॅंक जा कर मैने पैसे निकाले...क्योकि वर्मा ने एपॉलिकेशन वापिस जो ले ली थी..तो मुझे आसानी से पैसे मिल गये...
पर जैसे ही मैं वहाँ से निकालने को हुआ तो वर्मा मेरे सामने आ गया...
वर्मा- ह्म्म..तो पैसे मिल ही गये...अब अहसान मान मेरा...मेरी वजह से तुझे पैसे मिले है...
मैं(मुस्कुरा कर)- अहसान...कैसा अहसान बे...तू यहा दुम हिलाते आया क्योकि ये तेरे मालिक का हुकुम था...और तू जानता है कि तेरे मालिक ने तुझे ऐसा हुकुम क्यो दिया...क्योकि उसके बाप ने उसे ऐसा कहने को बोला था...और उसका वो बाप मैं हूँ...समझा...
वर्मा(गुस्से से)- क्या बकता है...
मैं- बकता नही..सच यही है...जा कर पूछ ले उस एमएलए से...ओह्ह्ह...मतलब एक्स.एमएलए से....अब वो एमएलए भी नही रहा...और इसका क्रेडिट भी मुझे ही जाता है....
वर्मा(गुस्से से)- अगर ये सच भी है तो क्या...पैसे मिल गये ना..बस...लेकिन कुछ दिन मे तू और तेरा बाप रास्ते पर ज़रूर आएगा...याद रख ...वाई दा वे...कुछ टाइम मागा था तूने...है ना...भूला तो नही...हाँ...
मैं- मिस्टर.वर्मा...ये मेरी एक ख़ासियत है कि मैं कुछ भी नही भूलता...अच्छा या बुरा...मुझे सब याद रहता है....और यकीन मानो...मैं चाहू तो तुझे अभी रोक सकता हूँ...पर मैं ऐसा करूँगा नही...मैने तेरे लिए कुछ और ही सोचा है...कुछ बड़ा...
फिर मैं हॉस्पिटल गया और सोनू को सारे पैसे दे दिए..
सोनू- अंकित...मैं..
मैं(बीच मे)- अभी कुछ नही...सोनम को ठीक करा....फिर बात करेंगे...ओके...चल तू ये पैसे जमा करवा देना...मुझे थोड़ा काम है...
इतना बोलकर मैं हॉस्पिटल से निकला और थोड़ी देर बाद मैं एक रूम मे खड़ा था....
मैं(जेब से पिक निकाल कर)- ये फोटो ध्यान से देखो...
""क्या...है...ये फोटो तुम्हारे पास कैसे आई ...""
मैं- वो सब छोड़ो...ये बताओ कि ये फोटो किसकी है...
""ये..मेरी बेटी की है..मतलब..""
मैं(बीच मे)- मतलब समझ गया...अब ये बताओ कि ये पिक तुमने किसे दी थी...
और फिर जो जवाब मैने सुना..उसे सुनकर मेरे जिस्म का रोम-रोम खड़ा हो गया....और मैं दाँत पीसते हुए बोला...
मैं- नही...ये नही हो सकता......(चिल्ला कर)- ये नही हो सकता..........
मेरी हालत इस वक़्त कुछ इस तरह थी जैसे किसी मछली को गर्म रेत पर डाल दिया हो.....जो तड़फ़ड़ने के अलावा कुछ नही कर सकती.....
मैं(मन मे)- हे गॉड...ये मेरे साथ ही क्यो होता है...मैं जिस रास्ते पर सेफ महसूस करता हूँ उसी रास्ते मे आप दलदल क्यो बना देते हो...क्यो....
अपनी लाइफ मे आज मे फिर से एक बार बेबसी महसूस कर रहा हूँ....जो चाह कर भी कुछ नही कर पा रहा...और उसकी वजह...वजह सिर्फ़ एक है...कि मेरे पास कोई सबूत नही....
मैं आज जान कर भी अंजाना हूँ...मुझे लगता था कि मैं लोगो की पहचान करने लगा हूँ...पर आपने एक बार फिर से मुझे ग़लत साबित कर दिया...थॅंक यू गॉड...थॅंक यू....
तभी मेरे सामने से आवाज़ आई जिसने मुझे दुनिया मे वापिस खीच लिया....
""क्या हुआ...आपने बताया नही कि ये फोटो आपको मिली कहाँ से... ""
मैं- क्या तुम...तुम्हे पूरा यकीन है कि ये पिक तुमने उसी को दी थी....
""हाँ...और ये बहुत पहले की बात है...जब हम आपसे मिले भी नही थे....""
मैं- हुह...तुम रेस्ट करो...मैं बाद मे आता हूँ...
और मैं वहाँ से अपने दिल मे कुछ नये सवाल ले कर निकल गया .....
और सीधा अपने रूम मे क़ैद हो गया....
आज एक बार फिर से मैं अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा था....
मेरी लाइफ की तरगडी देखो...जो कुछ चाहा...कुछ ना मिला...जिसको अपना माना...वो पराया निकला....जिसको प्यार किया....वो दूर चला गया....कुल मिला कर मेरी जिंदगी मे कुछ अच्छा नही हुआ...सिबा मेरी सेक्स लाइफ के.....
मैं अपने रूम मे लेटा हुआ अपने दिल मे चल रही उलझनो मे डूबा हुआ था कि तभी मेरा फ़ोन बजा....
स्क्रीन पर नाम देख कर मेरे दिल के किसी कोने मे खुशी उमड़ पड़ी....ये रेणु दी का कॉल था....
( कॉल पर )
मैं- उः...हाई डार्लिंग....
रेणु- हाई जान....कैसे हो...
मैं- वाह...खुद ही दर्द देकर दिल का हाल पूछती हो....गुड....
रेणु- क्या...क्या कहा तुमने...मैने अपनी जान को कौन सा दर्द दे दिया...
मैं( आह भर कर)- तुम नही समझोगी....ये काफ़ी...काफ़ी उलझा हुआ है...
रेणु- तो तू समझा दे ना मेरी जान...
मैं- अच्छा...वैसे आज इतना प्यार कैसे आ गया....अब तक तो मुझे भूल ही गई थी ना....
रेणु- नही मेरी जान....जब तक इस दिल.मे धड़कन है...तब तक ये सोचना भी मत...
मैं- ओह दी...हिला डाला...वेल..इतनी ही चाहत है तो मिलने आ जाओ ना...
रेणु- ह्म...पर इस बार मैं नही...तुम मिलने आओगे ...मेरे घर ...
मैं(चौं कर)- क्या....ये कैसे हो सकता है...आप जानती हो कि..
रेणु(बीच मे)- सब जानती हूँ...इसलिए बोल रही हूँ कि अब तुम मुझसे मिलने आओगे....
मैं- पर बुआ...वो मुझे देख कर खुश नही होगी....वो तो मुझसे नफ़रत...
रेणु- वो पुरानी बात है....आज की डेट मे वो तुम्हे ही याद करती है...समझे बुद्धू...
मैं- आप मज़ाक कर रही हो ना...हाँ...
रेणु- नही मेरे सोना....रूको...मैं अभी साबित करती हूँ...तुम खुद उनसे बात करो....
मैं- क्या..पर मैं...
रेणु(बीच मे)- ह्म्म...वो खुद चाहती है....तुम बस बात करो....1मिनट...
फिर रेणु ने कुछ देर फ़ोन होल्ड पर रखा और फिर मुझे फ़ोन पर वो आवाज़ सुनाई दी जिसे सुनने को मैं सालो से बेकरार था ...मेरी बुआ की आवाज़...
आकृति- हह..हेलो...
मैं(असमंजस मे )- ह..हेलो....आप...आप कैसी हो...बुआ...
आकृति- मैं...मैं ठीक हूँ ..बेटा...
मैं- बेटा....(और बेटा शब्द सुन कर मेरी आँखो से आसू छलक गये)
आकृति भी मेरी सिसकी सुनकर इमोशनल हो गई थी....पर वो अपने आप को संभाले हुए थी....
आकृति- हाँ बेटा...तू कैसा है...
मैं- ठीक...मैं ठीक हूँ बुआ....बस...अब बिल्कुल ठीक....आपने बेटा बोल दिया...तो..तो मैं ...उम्म्म..बिल्कुल ठीक हूँ .....
आकृति- बेटा...मैं जानती हूँ कि ये सब सुनने मे अजीब लगेगा तुझे...पर सच यही है कि मैं हमेशा से तुम्हे बेटा बुलाना चाहती थी...पर ....मैं ..
मैं- मैं जानता हूँ बुआ....आप मेरे डॅड से गुस्सा थी...और शायद इसी वजह से....
आकृति- हाँ बेटा...पर इसमे तेरा क्या कसूर...मुझे तुम्हारे साथ ऐसा नही करना चाहिए था...सॉरी बेटा...
मैं- नही बुआ...आप सॉरी मत बोलिए...मैने आपको कभी ग़लत नही समझा...बस दिल मे एक कसक थी कि कभी आप मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरे ...मुझे अपना माने...मुझे बेटा कह कर...
(और मैं बोलते-बोलते रो पड़ा...शायद बुआ के लिए दिल मे क़ैद प्यार उमड़ पड़ा.....)
आकृति- नही बेटा...तू रो मत...तू बस घर आ जा...मैं तुझे जी भर कर प्यार करना चाहती हूँ....बस घर आ जा....
(और बुआ भी सिसकने लगी..)
थोड़ी देर तक हम दोनो बस रोते रहे....फिर रेणु ने बुआ से फ़ोन लिया और मुझे घर आने को बोला और कॉल कट हो गई.....
फ़ोन रख कर मैं बुआ के बारे मे...उनकी कही बातों के बारे मे सोचते हुए नीद की आगोश मे खो गया......
और वहाँ बुआ के घर फ़ोन कट होते ही बुआ फुट-फुट कर रोने लगी और उनके पास खड़ी रेणु और उसका बाप ठहाके मारने लगे....
आकृति(रोते हुए)- तुम लोगो का कभी भला नही होगा.. तुम लोग जो कर रहे हो...उसका अंजाम बुरा होगा...समझे....
रेणु- हहहे...तू अंजाम की फ़िक्र ना ही करे तो ठीक...तू बस वो कर जो हम कहते है...वरना...तेरा बेटा ...
आकृति- रेणु...मैने तुझे सग़ी माँ से ज़्यादा प्यार किया और तूने...
रेणु(बीच मे)- मेरी सग़ी माँ मर गई...और उसे तेरे भाई ने मारा....समझी...और मैं उसका बदला ले कर रहूगी....हर एक बात का बदला....समझी तू...
फिर रेणु ने अपने बाप से आगे का प्लान डिसकस किया और कुछ देर बाद ही उसका बाप अपने आदमी और आकृति के बेटे के साथ वहाँ से निकल गया....
रेणु- अब रेडी हो जा....मुझे यकीन है कि वो पागल तुम्हारा रोना सुन कर तुमसे मिलने भाग कर आयगा...तो...रेडी हो जा...और अब मैं भी कुछ तैयारी कर लूँ...मेरा बुद्धू आशिक़ जो आ रहा है...मज़े तो करना ही होगा ना..हहहे...
और फिर रेणु निकल गई और आकृति बैठी -बैठी आँसू बहाती रही....
रिचा- अच्छा है....चल अब ये बता कि तू क्या खाएगी...मैं जल्दी से बना देती हूँ...फिर मुझे जाना है...
रिया- कहाँ मोम...आज तो छुट्टी का दिन है....
रिचा- हाँ...वो...वो मुझे दामिनी को देखने जाना है...
रिया- ह्म...ओके मोम...चली जाना...पर मुझे आपसे एक सवाल पूछना था...
रिचा- हाँ पूछ ना...
रिया- आपके लिए दुनिया मे सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेंट क्या है...
रिचा- मेरे लिए...ये कोई पूछने के जैसा है...मेरे लिए तू ही सबकुछ है बेटी...
रिया(मुस्कुरा कर)- सच मे....तो ये बताइए कि कभी आपको मुझे किसी और चीज़ के बदले चुनना पड़ा तो...आप किसे चुनेगी...
रिचा(गुस्सा दिखा कर)- क्या पागलो जैसा सवाल है...मैं तेरे लिए सबकुछ छोड़ सकती हूँ...अपनी जान भी...समझी...
रिया(रिचा के गले लग कर)- ओह मोम...गुस्सा मत हो...मैं तो ऐसे ही..
रिचा(बीच मे)- ऐसे भी कभी सोचना भी मत...मेरे लिए तू ही सबकुछ है...समझी ना....
रिया- हाँ मोम....समझ गई...सॉरी ....आइ लव यू...
रिचा(रिया को बाहों मे कस कर )- लव यू 2 बेटी...
रिया(अलग हो कर)- मोम..वैसे आप अंधेरे की जगह उजाले मे देखना शुरू कर दो...ये आपके लिए और आपकी बेटी के लिए सही होगा..ओके. .
और इतना बोलकर रिया रूम से निकल गई और रिचा उसकी कही बात के बारे मे सोचने लगी...
रिचा- आज रिया कुछ बदली-बदली सी है...क्या वजह हो सकती है..कही अंकित ने इसे कुछ ...नही...अगर ऐसा कुछ होता तो रिया मुझसे पूछती ज़रूर...और सबसे बड़ी बात... मेरी बेटी मेरे खिलाफ कुछ सुन ही नही सकती..मैं भी ना...कुछ भी सोचने लगती हूँ....धत्त...
रिया(बाहर निकल कर)- चलो ये तो जान गई कि मोम के लिए आज भी मैं ही सबसे इम्पोर्टेंट हूँ....काश मोम मेरी बातों का सही मतलब समझ जाए तो ठीक...वरना कुछ और सोचना पड़ेगा....कुछ भी हो जाए...मैं मोम को सही रास्ते पर ला कर रहूगी..भले ही इसके लिए मुझे उनको हर्ट ही क्यो ना करना पड़े ...और जो ग़लती उन्होने की है...उन्हे उनकी सज़ा तो भुगतनी ही पड़ेगी...आइ प्रोमिस मोम...पक्का प्रोमिस .....
सोनू(बीच मे)- वो बाद मे देखेगे...अभी पहले मोम को छुड़ा लू..फिर देखते है...जो होगा सो होगा...चल...मैं चलता हूँ...
फिर सोनू डॉक्टर के बताए रूम मे बैठ कर किसी का वेट करने लगा...और बैठा-बैठा सोचने लगा कि वो इस मुसीबत मे फसा कैसे.....
फ़्लासेबकक.........
सोनम को गोली लगने के बाद जब अंकित अकरम के पास था तो सोनू को डॉक्टर ने अंदर बुलाया....
सोनू जब सोनम से मिला तो सोनम होश मे थी......पर डरी हुई...और सोनम ने उंगली से एक तरफ इशारा किया....
सोनू ने देखा कि वहाँ 1 आदमी हाथ मे पिस्टल लिए खड़ा था...और साथ मे डॉक्टर भी था...
जब सोनू ने उससे पूछा तो पता चला कि वो 20 लाख रुपये चाहते है....सोनू ने उन्हे बोला कि उसके पास रुपये नही तो उसने सोनू की बात उसकी माँ से कराई..जो उनके कब्ज़े मे थी...
उस आदमी ने बताया कि उसकी 2 मागे है...पहली...पार्क मे हुई घटना के बारे मे मुँह बंद रखे...किसी को ना बोले कि उसने किसके कहने पर गोली चलाई...
दूसरी...20 लाख रुपये....जो कि अब अंकित देगा...
पर सवाल था कि कैसे...इसके लिए उस आदमी ने डॉक्टर को बोला...डॉक्टर पैसो मे बिक चुका था...
और फिर डॉक्टर ने ये बात अंकित के सामने कही...क्योकि वो आदमी जानता था कि अंकित पैसो की वजह से सोनम को मरने नही देगा...
और मजबूरी मे सोनू और सोनम को ये नाटक करना पड़ा...अपनी माँ को बचाने के लिए......
तभी रूम मे किसी के आने की आहट हुई और सोनू होश मे आया...
सोनू- ये लो .....पूरे 20 लाख है...जितने तुमने मागे थे.....
सोनू ने अंकित से लिए हुए पैसे एक सक्श के हाथ मे थमाते हुए कहा...
सोनू के सामने इस वक़्त 2 आदमी खड़े थे...दोनो ने ही अपने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था.....
सोनू- अब मेरी माँ को छोड़ दो...
आदमी- इतनी जल्दी भी क्या है बच्चे...आराम से...
सोनू- नही...तुमने कहा था कि पैसे मिलते ही तुम मेरी माँ को छोड़ दोगे....
आदमी- हाहाहा....तू भी बड़ा भोला है....तुझे क्या हम बेवकूफ़ नज़र आते है...हाँ...
सोनू(सहम कर)- नही...नही तो...मैने कुछ बोला क्या....
आदमी(अपनी पिस्टल को सोनू के कंधे पर रख कर)- सही किया जो बोला नही...वरना...हाहाहा....
सोनू(डरते हुए)- देखो...मैने तुम्हारा काम कर दिया है...अब मेरी माँ को छोड़ दो प्ल्ज़...
आदमी2- अरे बच्चे....अगर हम तेरी माँ को छोड़ देगे तो तू अंकित से सच नही बोल देगा....हाँ...
सोनू- नही..बिल्कुल नही...मैं उससे कुछ नही कहुगा...रहा सवाल पैसो का...तो वो मैं उसे वापिस कर दूँगा...जब मेरे पास होंगे...
आदमी2- अरे बच्चे...तू समझा नही...क्या है कि अब हमारा मूड चेंज हो गया....
सोनू- क्या मतलब...
आदमी2- मतलब ये कि तूने हमे सोने का अंडा देने वाली मुर्गी दिखा दी...तो अब तुम ही बताओ कि हम एक अंडा ले कर कैसे छोड़ दे उसे...
सोनू(थोड़ा गुस्से मे)- मतलब क्या है तुम्हारा....
आदमी2- मतलब ये कि अब हमे 20 लाख और चाहिए...तब हम तेरी माँ को छोड़ेगे....
सोनू(बौखला कर)- नही..तुम ऐसा नही कर सकते...हमारी डील हुई थी...
आदमी(बीच मे)- चुप...डील हुई थी तो क्या....अब हमे 20 लाख और चाहिए...समझे...और तुझे देना ही होगा...वरना तेरी माँ...
सोनू(बीच मे)- पर मेरे पास पैसे नही...कहाँ से लाउगा...
एक आदमी औरत की चूत मे सतसट लंड पेल रहा था और दूसरा औरत की गांद मे...और औरत भी मज़े से दोनो लंड को अपने छेदों मे पिलवा रही थी...
कुछ देर बाद तीनो झड गये और चुदाई का महॉल शांत हो गया...
औरत- अब मुझे जाने दो...तुम कहो तो मैं चुदने आ जाया करूगी...पर अभी मुझे जाने दो...
आदमी1- अरे ऐसे कैसे जाने दूं..हाँ...अभी तो मज़े करना बाकी है...और हमारा काम पूरा कहाँ हुआ....
आदमी2- और तुझे जाना क्यो है...तू यही रह..हमारी रंडी बन कर...और मज़े कर...हाहाहा...
फिर वो दोनो हँसने लगे और औरत आँसू बहाने लगी...
औरत- प्ल्ज़...छोड़ दो मुझे ...मुझे घर जाने दो..
तभी आदमी1 ने पिस्टल उठाई और औरत के सीने पर लगा दी...
आदमी1- घर जाना है...अब एक शब्द भी निकाला तो ठोक दूँगा...घर नही सीधा उपर जाएगी...समझी..
औरत(गुस्से से)- तो मार दो ...ऐसी जिंदगी से तो मौत भली...मार दो...
औरत ने पिस्टल पकड़ ली और फाइयर करने का बोलने लगी...
आदमी1- छोड़...अरे गोली चल जाएगी...छोड़...
पर औरत मानने को तैयार नही थी...वो चिल्लाती हुई बार-बार फाइयर करने का बोलने लगी और आदमी1 उससे पिस्टल च्छुड़वाने लगा...
तभी अचानक किसी ने लात मार कर रूम का गेट खोला और एक फाइयर के साथ औरत की चीख रूम मे गूँज उठी...
औरत- आआआआअहह.....
और इसी के साथ तीसरा आदमी रूम मे दाखिल हुआ.....
आदमी2- ये..ये क्या किया साले....तूने गोली मार दी...
आदमी3- अब सब मरेगे...जो भी बीच मे आया...सब मरेगे....
और आदमी3 ने एक और फाइयर किया और तभी खिड़की का काँच टूटने की आवाज़ आई...और फिर से एक चीख उस रूम मे गूँज उठी.......
""आआआअहह...आहह.....""
गोली चलने के बाद उस घर से एक आदमी तो भाग निकला , जो खिड़की तोड़ कर कूद गया था.....पर बाद मे आया आदमी वही पर ठिठक गया....और फर्श पर पड़े घायलो को देखने लगा जो कुछ समय बाद लाषो मे बदल गये.....
उसने जब अपने सामने पड़ी दो लाषो को देखा तो उसके होश उड़ गये.....और उसने गन को अंदर डाला और उन लाषो को ठीक से जमा कर वहाँ से भाग खड़ा हुआ...
अंकित के घर......
मैं बुआ से बात करने के बाद उनही के बारे मे सोचते हुए सो गया था...पर जब मेरी आँख खुली तो मेरे फ़ोन पर शीला का कॉल आ रहा था ...
जिसे देख कर मुझे याद आया कि अभी वर्मा का मामला फिक्स करना बाकी है....
बुआ से तो मिल लेगे...पर पहले वर्मा की बॅंड बजा दूं....और यही सोच कर मैने कॉल अटेंड किया....
( कॉल पर )
मैं- हेलो स्वीटी....
शीला- स्वीटी....मैं स्वीट तभी लगती हूँ जब कॉल करूँ..हाँ...बाकी तो मुझे याद भी नही करते....
मैं- आहह...ऐसा नही है...बस थोड़ा बिज़ी हो जाता हूँ तो....समझो ना....
शीला- कमाल है ना....कोई आपका बेसब्री से इंतज़ार करे और आप बिज़ी रहो....ह्म...
मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...कभी-कभी होता है यार....
शीला- अच्छा...वैसे तुम्हे पता होना चाहिए कि मेरी एक झलक पाने को लोग बेकरार रहते है....समझे...
मैं- ओह हो...तो फिर तुम उन लोगो पर तरस क्यो नही खाती ...ह्म...
शीला- क्योकि मैं....
मैं- हाँ हाँ...क्योकि तुम क्या...हाँ...
शीला- जाने दो...ये बताओ कि आज थोड़ा टाइम है जनाब के पास या आज भी बिज़ी...ह्म..
मैं- अरे मेरी जान...आपके लिए तो टाइम ही टाइम है...बोलो कब आ जाउ....
शीला- अच्छा...ऐसा क्या...
मैं- सच मे...बोल कर तो देखो....
शीला- ह्म्म..तो अभी आओ....तब मानु...देखे तो आप बातें ही करते हो या फिर...
मैं- फिर क्या...चलो मैं आज प्रूव कर ही देता हूँ...फ़ोन रखो...अब सामने ही बात होगी...बाइ....
और मैने कॉल कट की और थोड़ी देर बाद रेडी हो कर घर से निकल गया......और पहुँच गया....एमएच32....
फिर जैसे ही शीला ने गेट खोला तो उसे देखते ही मेरे अरमान जागना शुरू हो गये....
मैं(मन मे)- आज तो इसका काम पूरा करके ही जाउन्गा...भले ही इसका पति आए या और कोई.....
शीला(इतराते हुए)- अब यही खड़े हुए रात निकलोगे या फिर...
मैं(मुस्कुरा कर)- नही...आज की रात वेस्ट नही होगी...आज की रात कयामत की रात होगी....
शीला- ओह हो...पर कयामत किसकी आयगी....ह्म...
मैं- ये तो वक़्त बताएगा...फिलहाल तो तुम कयामत ढा रही हो...
और मैने आगे बढ़ कर शीला के गाल पर हाथ फेरा...तभी शीला ने मेरा हाथ थाम लिया....
और शीला चीखते हुए अपना चूत रस पिलाने लगी...और मैने भी पूरा रस पी कर सॉफ कर गया....
मैं- उउउनम्म्म...मज़ा आया ना...
शीला- ह्म्म्म्...पहली बार किसी ने मुझे जीभ से झड़ाया है....सच मे बहुत मज़ा आया....
मैं- अभी तो शुरुआत है मेरी जान...आगे भी मज़ा आयगा....
शीला- ह्म्म...मैं इंतज़ार कर रही हूँ....
मैं- तो आओ फिर....मुँह मीठा कर लो...
और मैने शीला को अपने लंड की तरफ इशारा किया और शीला ने भी देर नही की और मेरे लंड को आज़ाद कर के उसे निहारने लगी....
शीला- उउउंम्म...वेरी नाइस...आअहह.... माइ टॉय....
मैं- अब देखती ही रहोगी क्या....
शीला- देखने तो दो....दिखने मे तो मस्त है....पर कितना टिक पायगा...
मैं- डोंट वरी....तुम्हारी धज्जिया उड़ा कर ही चुप होगा....अब शुरू हो जाओ...
शीला- ह्म्म...ये सुपाडा तो बड़ा प्यारा है....सस्रररुउउउप्प्प्प्प्प....
मैं- आअहह. ..तो फिर गटक जाओ....देर किस बात की...
शीला- मुझे अपने हिसाब से मज़ा करने दो....कई दिन बाद मुझे लंड का सुख मिला है...
मैं- क्यो..तुम्हारा पति...
शीला(बीच मे)- उसका नाम मत लो....मुझे मज़ा करने दो....
मैं- ह्म...करो जो करना है....
फिर शीला ने थोड़ी देर सुपाडे पर अपनी जीभ फिराई और फिर सुपाडे को मुँह के अंदर लिया और जीभ को लंड के छेद पर घुमाने लगी...उसकी इस हरक़त से इस बार मैं मचल उठा....
मैं- ओह्ह्ह शीला....तुम तो कमाल हो...आअहह....लगी रहो....
शीला कुछ देर तक लंड के छेद से खेलती रही और फिर उसके सुपाडे को मुँह मे दबा कर चूसना शुरू कर दिया....
शीला पूरी मस्ती मे गंद उच्छाल कर चुदवा रही थी....और उसके उछलने से उसके बड़े-बड़े बूब्स हवा मे गुलतियां मार रहे थे...जिन्हे देखते हुए चोदने का मज़ा और ज़्यादा आ रहा था.....
मैने दोनो बूब्स को हाथ मे थमा और तेज़ी से दबाते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगा.......
शीला- आआहह....ज़ोर से दबाओ...एसस्स....आअहह...आहह...आअहह...
रॉनी- सर..बोला था ना कि आपके घर पहुँचने के पहले ही काम ख़त्म कर के पहुँच जाउन्गा...
मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म..मान गये यार....तो काम पूरा हो गया ना...
रॉनी- जो काम पूरा ना करे वो रॉनी ही क्या सर...लीजिए...ये रहा आपके काम का सामान...
फिर रॉनी ने मुझे 2 सीडीज़ पकड़ा दी...
मैं- ह्म्म..इसकी कॉपी है ना...
रॉनी- जी सर...एकदम रेडी...
मैं- ह्म्म..तो अब बताओ...पैसे कितने लगेगे...
रॉनी- ह्म...5000 उस लड़की के...और 2-3 हज़ार इस सीडी के लिए...
मैं- ओके...अंदर चलो....
फिर मैने कार पार्क की और अंदर से पैसे लाकर रॉनी को दे दिए....
रॉनी- सर ..ये तो 20000 है...मुझे तो बस....
मैं(बीच मे)- रख यार...ज़रूरत पड़ गई तो..चल अब तू निकल और रेस्ट कर...मैं भी रेस्ट कर लूँ थोड़ा...वैसे भी कल बहुत काम है तो रेस्ट बनता है ना...
रॉनी(मुस्कुरा कर)- एस सर....कल तो धमाका होगा....वेल..टेक रेस्ट सर...मिलते है...
मैं- यू टू...बब्यए....
और फिर रॉनी को भेज कर मैं भी रात की थकान मिटाने सो गया.....
मस्ती भरी रात के बाद जब मेरी आँख खुली तो एक झटके के साथ....असल मे इन्स.आलोक ने मुझे कॉल कर के जल्द से जल्द एक फार्महाउस पर बुलाया था....
मैं रेडी होकर घर से निकल कर उस फार्महाउस पर पहुँचा और सामने पड़ी लाषो को देख कर हैरान हो गया....
मैं- ये..ये तो सुषमा है...सोनू की मोम...और ये विनोद...
आलोक- विनोद ...ये वही है ना...रजनी का देवर....
मैं- जी हाँ...ये अनु के डॅड है..पर ये यहाँ...इस हाल मे...कैसे....
आलोक- अभी तक कुछ पता नही चला....वैसे ये दोनो हमे नंगे ही मिले...एक दूसरे से लिपटे हुए....शायद इनके बीच...
मैं- नही...ये नही हो सकता....ये दोनो तो एक-दूसरे को जानते तक नही थे...तो फिर इनने बीच कुछ....नही...ये पासिबल ही नही...
आलोक- ह्म्म..हो सकता है तुम सही हो...पर अभी के हालात देख कर तो यही लगता है...कि ये दोनो अपनी मस्ती मे खोए हुए थे और किसी ने आ कर इन्हे गोली मार दी....
मैं- नही...ये हो ही नही सकता सर...ज़रूर कुछ और ही बात है...यहाँ कुछ और ही माजरा है....और प्ल्ज़...आप इन्हे यहाँ से...मैं...इन्हे ऐसे नही देख सकता....प्ल्ज़..
आलोक- ओके...1 मिनट..
फिर आलोक ने हवलदार को इशारा लिया और उसने दोनो बॉडी को कवर कर दिया....
मैं(दिमाग़ को ठंडा कर के)- वैसे आपको यहाँ कुछ और मिला...आइ मीन कुछ खास...
आलोक- कुछ खास तो नही...बस लाषो के अलावा सिर्फ़ खून ही मिला....
मैं- ह्म...
आलोक- वैसे एक बात कुछ खास है...आइ मीन मुझे खास लग रही है...
मैं- वो क्या...
आलोक- वो ये कि लाषो के पास तो खून मिलना आम बात है...पर हमे गेट पर भी कुछ खून मिला है...असल मे गेट की चोखट से एक कील बाहर निकली है....जो किसी को चुभि है...तभी वहाँ काफ़ी खून पड़ा है...
मैं- ह्म...हो सकता है कि वो कातिल का हो...
आलोक- हाँ हो सकता है...क्योकि इन लाषो मे कील चुभने का कोई निशान नही है...
मैं- तो पक्का उसी का होगा जिसने इन दोनो को मारा...मतलब कातिल का....
आलोक- असल मे अंकित...जैसे यहाँ कतल भी 2 हुए और वैसे ही कातिल भी 2 ही है....
मैं- क्या....क्या मतलब....आप कहना चाहते है कि 2 लोग आए थे इन्हे मारने....
आलोक- नही...ये तो नही पता कि कितने लोग आए थे...पर इतना पक्का कह सकता हूँ कि ये दोनो कतल 2 लोगो ने किए है...
मैं- अच्छा...
आलोक- हाँ..और एक कातिल तो हमारे सामने ही है...
मैं(हैरानी से)- क्या...सामने...इसका क्या मतलब...
आलोक- मतलब ये है हीरो कि इस औरत को मारने वाला यही आदमी है...जो इस वक़्त खुद मरा पड़ा है...
मैं(चौंक कर)- क्या कह रहे है आप....मतलब विनोद ने सुषमा को मारा....ऐसा कैसे बोल सकते है आप...नही..ये हो ही नही सकता.....
आलोक-पर ऐसा हुआ है... बड़ा सिंपल है यार...देखो...विनोद के हाथ मे गन अभी भी है...और हमे यहाँ से सिर्फ़ 2 बुलेट होल मिले है...इनमे से एक इसी गन का है जो विनोद के हाथ मे है...
मैं- ह्म्म...
आलोक- और अब ये तो तुम भी जानते हो की विनोद खुद तो अपने आप को गोली मारेगा नही...तो जाहिर सी बात है कि उसने सुषमा को ही गोली मारी होगी...
मैं- शायद आपकी बात सही हो...पर विनोद सुषमा को क्यो मारेगा...और फिर विनोद कैसे मारा...किसने मारा उसे...उसे सुषमा तो मार नही सकती ना...
आलोक- मज़ाक कर रहे हो....
मैं- नही..मैं तो बस...
आलोक- रहने दो....वेल...कोई तो था यहाँ...और शायद 2 लोग थे...
मैं- 2 लोग...अब ये आप कैसे कह सकते है...क्या कोई और बुलेट होल मिला...
आलोक- नही...पर तुम ये सोचो कि अगर कातिल गेट से गया ..जैसा की हमे लगता है तो फिर ये खिड़की का काँच क्यो टूटा...
मैं- हो सकता है कि हाथापाई मे टकरा गया हो कोई...ह्म..
आलोक- हो सकता था...असल मे तुम्हे खिड़की के नीचे देखना चाहिए....वहाँ की गीली मिट्टी तुम्हे बता देगी कि मैं क्या कहना चाहता हूँ...
मैने आलोक के कहने पर खिड़की से नीचे देखा तो सॉफ दिख रहा था कि वहाँ की मिट्टी पर जूतों के निशान है...मतलब कोई सच मे कूदा है...
मैं(वापिस मूड कर)- ह्म्म...सही है...पर हो सकता है कि कातिल गेट से आया हो और खिड़की से कूदा हो...और आते हुए उसे कील लगी हो...हाँ...
आलोक(मुस्कुरा कर)- नही अंकित...ऐसा भी नही हुआ....थोड़ा गेट की तरफ गौर से देखो...शायद समझ जाओ...