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चूतो का समुंदर

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मैने फिर से आलोक की बात मानी और गेट की तरफ बढ़ा...और गेट के बाहर देख कर मुझे अपने सवाल का जवाब मिल गया....

मैं- आपने सही कहा...यहाँ से निकलने वाले 2 लोग ही है...

आलोक- ह्म्म...तुम कैसे समझे...

मैं- वो...खून के निशान...ये बाहर की तरफ है....मतलब सॉफ है कि कातिल को जाते हुए कील लगी और खून की बूंदे सॉफ बताती है कि बंदा बाहर निकला...अंदर नही...

आलोक- वेरी गुड....अब तुमने पोलीस की तरह सोचा...हाहाहा...

मैं- ह्म..संगत का असर है सर...पर थोड़ा सा...

आलोक- कोई नही...साथ रहो...सब सीख जाओगे....वैसे अब मैं बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज रहा हूँ....और तुम इनके घरवालो को न्यूज़ दे दो...हाँ...

मैं- क्या...मैं...नही सर...ये मुझसे नही होगा...और..मैं क्या कहता हूँ...क्या आप ये बात कुछ देर तक छिपा सकते है...प्ल्ज़...

आलोक- कुछ देर तो ठीक है बट न्यूज़ तो देनी ही होगी...

मैं- हाँ...वो मेरी ज़िम्मेदारी...पर बाद न्यूज़ देने के पहले मुझे थोड़ा टाइम चाहिए....

आलोक- ह्म्म ..ओके...ये बात तब तक सामने नही आयगी...जब तक तुम ना बोलो...पर याद रहे सिर्फ़ शाम तक का वक़्त है तुम्हारे पास....

मैं- जी सर...अब मैं चलता हूँ....मुझे सोचना भी है कि आख़िर मैं इनकी फॅमिलीस से कहुगा क्या....

और फिर मैं वहाँ से निकल आया...पर कार चलाते हुए मुझे ये समझ ही नही आ रहा था कि जाउ कहाँ....

मेरा माइंड तो जैसे सुन्न पड़ा था...कभी मुझे सुषमा की लाश दिखती तो कभी विनोद की...

सच कहूँ तो मुझे उनकी मौत का उतना गम नही था...जितना गम उनकी फॅमिली के लिया था.......

एक तरफ सोनू और सोनम ...और दूसरी तरफ मेघा, अनु और रक्षा.....ये सब मेरे दिल के करीब थे....इसलिए उनको ये गमगीन न्यूज़ देने की हिम्मत ही नही हो रही थी....

मैं काफ़ी देर तक अपने आप से जवाब पूछता रहा कि क्या करूँ...पर कोई जवाब नही मिला....फिर मुझे कुछ याद आया और मैने कार अकरम के घर घुमा दी....

थोड़ी देर बाद मैं अकरम के रूम मे था....

मैं(अकरम को सुषमा और विनोद की मौत की खबर बता कर)- अब तू ही बता ...मैं क्या करूँ...मेरा तो माइंड जैसे काम ही नही कर रहा....इसलिए तेरे पास आया...क्योकि जो किसी से ना बोल पाओ वो साला दोस्त से ही बोल सकते है....

अकरम- हाँ भाई...तूने अच्छा किया...और ये भी सही किया कि संजू को नही बोला....नही तो वो भी टूट जाता. ..उसका चाचा था वो....

मैं- यार...मैं अब करूँ क्या...मैं उन लोगो के सामने ये बात बोल ही नही सकता....कैसे भी नही....

अकरम- तू पहले पानी पी...थोड़ा रिलॅक्स हो जा...तेरा चेहरा लाल पड़ गया...ले पानी पी...

फिर अकरम ने जबरन मुझे पानी पिलाया और मेरा कंधा सहलाने लगा....

अकरम- भाई....तू टेन्षन मत ले...पोस्टपार्टम रिपोर्ट आ जाने दे फिर मैं तेरे साथ चल कर उनको ये खबर दे दूँगा...

मैं- सच मे...वेल मैने भी यही सोचा था कि तुझसे कहलावा दूं...थॅंक्स यार...

अकरम- अरे यार....मुझे थॅंक्स बोलेगा....

मैं- अरे वो तो....अच्छा ये बता...तू मुझे कुछ बताने वाला था...क्या था वो...बोल...

अकरम- हाँ...पर अभी बताना ठीक होगा...आइ मीन तू पहले से इतनी टेन्षन मे है..और फिर...डॅड....आइए....

अकरम बात पूरी करता उसके पहले उसकी नज़र गेट पर खड़े वसीम पर पड़ी और उसने उसे अंदर बुलाया...

वसीम भी अकरम के कहने पर अंदर आया और मैं उसे आते हुए घूर्ने लगा...पर जैसे ही वसीम ने मुझे देखा तो मैने नज़रें चुरा ली...

वसीम ने थोड़ी देर तक हम से बात की और फिर निकल गया...और मैं उसे जाते हुए भी लगातार घूरता रहा...

अकरम- क्या हुआ भाई...

मैं- क्क्क..कुछ नही...तू आज ही बता...जो तुझे बताना था....

अकरम- ओहक...तो रुक...तुझे कुछ दिखता हू...तू खुद ही समझ जायगा...

मैं- ओके...और सुन...एक काम कर....

अकरम- हाँ बोल ना...

फिर मैने अकरम को काम बोला और अकरम के दिए हुए सामान को देख कर सोच मे पड़ गया...असल मे , मैं शॉक्ड हो गया था.....

अकरम- शॉक लगा ना....मुझे भी लगा था...जब मैने ये सब देखा था....

मैं- तो क्या...सच मे वसीम तेरे डॅड...(मैं कहते-कहते रुक गया)

अकरम- तू सब पढ़ने के बाद भी पूछ रहा है....नही...वो मेरे डॅड नही...मेरे डॅड तो....

और इसी के साथ अकरम की आँखे नम होने लगी....

मैं- अकरम...सम्भालो अपने आप को...और हाँ...ये बात तूने किसी को कही तो नही....

अकरम- सिर्फ़ सादिया आंटी से...

मैं- पर क्यो...क्या तू नही जानता कि अगर ये बात तेरी फॅमिली आइ मीन तेरी बहनो को पता चली तो क्या होगा....तू ये तो समझ की तेरी मोम ने किसी वजह से ये बात तुम सब से छिपाई होगी....हां....

अकरम- जानता हूँ यार...पर अब मैं क्या करूँ...मेरा तो दिमाग़ ही नही चल रहा ....वो इंसान जिसे आज तक अपना बाप समझ कर जीता रहा...एक पल मे पराया हो गया....और फिर ये सब...वो विदेवे और ये पेपर्स....इन्हे देख कर तो उस इंसान से नफ़रत सी हो गई मुझे....

मैं(अकरम के कंधे को पकड़ कर)- अकरम...मैं समझ सकता हूँ कि तेरे दिल मे क्या चल रहा है..पर तुझे अपने इमोशन्स पर काबू रखना होगा...देख...अभी जूही की हालत ठीक नही और ये हम दोनो जानते है कि जूही वसीम से कितना प्यार करती है...और अगर अभी ये बात उसे पता चली तो...नही...मेरे हिसाब से अभी चुप रहना ही बेहतर होगा....

अकरम- पर ...कब तक...कब तक मुझे उस इंसान को डॅड बोलना पड़ेगा जिसने ना सिर्फ़ हमारे साथ बल्कि सादिया और गुल के साथ भी धोखा किया....क्या धोखेबाज को सज़ा नही मिलनी चाहिए...हाँ...

मैं- बिल्कुल मिलनी चाहिए...और मिलेगी भी...पर उसके लिए तुझे अपने आप को काबू मे रखना होगा...पहले हम ये तो पता कर ले कि वसीम ख़ान किस हद तक नीचे गिर सकता है....

अकरम(चौंक कर)- क्या मतलब....क्या उसने और कुछ भी किया है...

मैं- हाँ...पर इस वक़्त मैं कुछ नही बता सकता...असल मे मुझे अभी पता नही..आइ मीन पक्का नही ...बस डाउट है....

अकरम- कैसा डाउट...

मैं- मुझे लगता है कि हमारी फॅमिलीस से वसीम ख़ान का बहुत कुछ लेना-देना है...और ...

अकरम- और क्या...बोल...

मैं(लंबी साँस ले कर)- और...मुझे लगता है कि वो अकेला नही...और हाल ही मे हुई सारी घटनाओ से वसीम का कुछ कनेक्षन ज़रूरी है....

अकरम(सहम उठा)- तू किस बारे मे बोल रहा है...कही तू इन मर्डर्स....

मैं- हाँ...मुझे लगता है कि...

अकरम(बीच मे, खड़ा हो कर)- तो चल फिर और सामने से बात करते है....

मैं(अकरम का हाथ पकड़ कर)- नही...तू कही नही जा रहा...तू बस रेस्ट कर....और बाकी मुझ पर छोड़ दे....बिलीव मी....मैं सब पता कर लूगा...बस थोड़ा टाइम दे...

अकरम- ओके ..तू कहता है तो ठीक...मैं इंतज़ार करूँगा...और हाँ...मेरी ज़रूरत हो तो बताना...मैं अब ठीक हूँ...ओके...

मैं- ह्म्म...अब मैं चलता हूँ...और जब तक मैं ना बोलू ऐसी कोई हरक़त मत करना जिससे....

अकरम(बीच मे)- समझ गया भाई...मैं चुपचाप लेटा रहुगा...ओके..

अकरम की बात सुन कर मैं मुस्कुरा फिया और अकरम का दिया हुआ सामान ले कर वहाँ से निकल गया........

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पोलीस स्टेशन मे..............

अकरम के घर से निकल कर मैं सीधा पोलीस स्टेशन पहुँचा और जाते ही इनस्पेक्टर.आलोक पर सवाल दाग दिया....

मैं- आप यहाँ क्या कर रहे है....

आलोक- क्या मतलब...पोलीस वाले पोलीस स्टेशन मे नही होंगे तो कहा होगे...हाँ...

मैं- अरे..मेरा मतलब ये था कि आपको तो हॉस्पिटल मे होना चाहिए....वो पोस्तमार्टम चल रहा होगा ना....

आलोक- अच्छा...हाँ पोस्तमार्टम चल रहा है...बट डोंट वरी...वहाँ मेरे भरोशेमंद लोग है...आओ अंदर आओ....

फिर आलोक मुझे कॅबिन मे साथ ले जाने लगे तभी मेरी नज़र लॉक-अप मे क़ैद रफ़्तार पर पड़ी...वो मुझे खा जाने वाली नज़रों से देख रहा था....

पर इस वक़्त मैने उसे इग्नोर कर दिया क्योकि मेरे पास उससे ज़्यादा ज़रूरी काम थे...

आलोक(बैठते हुए)- आओ बैठो...और आराम से बताओ कि तुम अर्जेंट मे क्यो मिलना चाहते थे...

मैं(बैठ कर)- अरे बात ही ऐसी है....ये देखो....

फिर मैने एक पेपर आलोक को पकड़ा दिया...जिसे देख कर आलोक थोड़ा कन्फ्यूज़ हो गया....

आलोक- क्या है ये...

मैं- ब्लड रिपोर्ट है और क्या...देखो ना...

आलोक(पेपर को टेबल पर रख कर)- वो मैं जानता हूँ...पर ये मुझे क्यो दिखा रहे...आइ मीन तुम कहना क्या चाहते हो ...

मैं- ओके..बताता हूँ...देखो..उस फार्महाउस पर हमे गेट के पास खून मिला है ना....तो मुझे लगता है कि आपको उस खून को इस रिपोर्ट से मॅच करना चाहिए....शायद आपको वो इंसान मिल जाए....

आलोक(चौंक कर रिपोर्ट को वापिस उठाया)- सच मे....पर ये है किसकी...(नाम पढ़ कर)- क्या तुम श्योर हो...ये वही है...

मैं- हाँ...बिल्कुल...बस आप कन्फर्म कर दे तो कोई डाउट नही रहेगा...

आलोक- ह्म्म..ठीक है...रिपोर्ट आने दो...फिर मिलवाता हूँ...

मैं- ह्म...आइ होप आपको एक आदमी तो मिल ही जायगा...और उसकी हेल्प से दूसरा भी...

आलोक- देखते है...वैसे मेरे पास भी एक न्यूज़ है तुम्हे बताने के लिए...

मैं- आपके पास...बताइए...

आलोक- असल मैं मुझे रिपोर्ट मिली थी कि जिस हॉस्पिटल मे सोनम अड्मिट है...वहाँ से कोई मास्क पहने निकला था...और वो बंदा उसी फार्महाउस तक गया जहाँ कतल हुए....

मैं- सच मे...कितने लोग थे...1 या 2

आलोक- 2 लोग....इसीलिए मैने वहाँ के डॉक्टर को उठाया और उसका ट्रीटमेंट कर के हमे बहुत कुछ पता चल गया.....

मैं- ट्रीटमेंट....

आलोक(मुस्कुरा कर)- हाँ भाई...पोलीस वालो का स्पेशल ट्रीटमेंट होता है...सारे मर्ज बाहर आ जाते है....

मैं- समझ गया....तो फिर क्या पता चला आपको...

आलोक- पता ये चला कि सोनम और सोनू ...दोनो तुम्हे धोखा दे रहे थे...

मैं- क्या...आपका मतलब क्या है...मुझे धोखा...कैसे...

आलोक- असल मे सोनम की चोट मामूली थी...उसे कोई स्पेशल ट्रीटमेंट की ज़रूरत नही थी...पर उन दोनो भाई-बेहन ने मिल कर ये नाटक किया...तुमसे पैसे लेने के लिए...और इस प्लान मे वो डॉक्टर भी शामिल था ...

मैं- नही...ये नही हो सकता...मैं दोनो को जानता हूँ...वो मेरे साथ ऐसा धोखा...नही...मैं नही मानता...

आलोक- शायद तुम सही हो...क्योकि ये पैसा उन्होने अपने लिए नही लिया...असल मे वो सारा पैसा तुमसे ले कर उन 2 नकाबपोशो को दिया था...

मैं- उनको...पर क्यो...

आलोक- अब ये तो वही जाने...क्योकि ये बात तो डॉक्टर को भी नही मालूम...

मैं- मुझे लगता है कि कुछ गड़बड़ है...आइ मीन उनकी कोई मजबूरी होगी .नही तो वो ये सब कर ही नही सकते...

आलोक- अब ये तो वही बता सकते है...

मैं- सही कहा ....एक काम कीजिए...आप ये रिपोर्ट मॅच कराओ....तब तक मैं पता करता हूँ कि आख़िर वो मजबूरी थी क्या...

आलोक- ओके...शाम तक काम हो जायगा...

मैं- ह्म्म..और अगर मैं सही हूँ तो शाम तक आपको कातिल भी मिल जायगा....और मुझे मिलेगे मेरे सवालो के जवाब......

और ये बोलते हुए मैं वहाँ से गुस्से से भरा हुआ निकला और हॉस्पिटल की तरफ कार दौड़ा दी......
 
हॉस्पिटल मे.............

जैसे ही मैं सोनम के रूम मे दाखिल हुआ तो सामने सोनम लेटी हुई थी और सोनू वही चेयर पर बैठा था....

मुझे देखते ही सोनू उठकर मेरे पास आया और इससे पहले की वो कुछ बोलता ....मैने एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर रसीद कर दिया.....

मैं- साले....तेरी ये हिम्मत....

सोनू(संभाल कर)- अंकित...क्या..हुआ क्या आख़िर....

मैं(गुस्से से)- तेरी तो..अभी भी पूछ रहा है...तू ...तूने...

और एक और थापड़ सोनू के गाल पर पड़ा और इस बार सोनू ने गिरते हुए बेड पर हाथ टिका दिया....

जैसे ही सोनू बेड से टिका तो सोनम आँखे खोल कर बैठ गई....

सोनम(मेरे पास आ कर)- अंकित...प्ल्ज़ मेरी बात सुनो...

मैं- तू सामने से हट जा...तूने भी मुझे धोखा दिया...हाँ...अब दूर हो जा वरना मैं तुझे भी....हट ज़ाआाआ.....

मैने सोनम को साइड किया और सोनू की कॉलर पकड़ ली...

मैं- बोल...क्यो किया ये सब....बोल...नही तो आज...

सोनम(चिल्ला कर)- अंकित...प्ल्ज़ छोड़ दो भाई को....मेरी बात सुनो....

मैं- तू ऐसे नही बोलेगा ना....नही बोलेगा....

और मैने सोनू को धक्का दे कर बेड पर पटक दिया....

सोनम(ज़ोर से)- हम ने ये सब मोम के लिए किया.....प्ल्ज़ भाई को छोड़ दो....

सोनम की बात सुनकर मैने एक नज़र सोनू को देखा और फिर सोनम के पास पहुँचा...

मैं- अगर ये बात थी तो मुझे बोल नही सकते थे...क्या मैं हेल्प नही करता...भरोशा नही मुझ पर...हाँ...

सोनू(खड़ा हो कर)- अंकित...तेरा गुस्सा जायज़ है...पर एक बार हमारी बात सुन लो...फिर चाहे तो हमे मार भी डालो तो प्राब्लम नही...पर एक बार हमारी बात सुन लो...प्ल्ज़्ज़....

मैं(अपने सांसो को कंट्रोल कर के)- मैं वही जानने आया हूँ...आख़िर ऐसी क्या बात थी कि तुम दोनो को ये नाटक करना पड़ा...चलो बताओ...जल्दी....

फिर सोनू ने अपनी मोम के किडनॅप और उनके बदले पैसे मागने की पूरी बात बता दी ....जिसे सुन कर मुझे गुस्सा भी आ रहा था और दुख भी हो रहा था ....

मैं- अगर ऐसा था तो मुझे बोल देते...मैं पैसे दे देता...इतना नाटक किसलिए....

सोनम- हम क्या करते...हम मजबूर थे...इसलिए जैसा उनलोगो ने बोला बस हम वैसा ही करते गये....

मैं- ओहक...अच्छा ये बताओ कि वो कौन थे....उन्हे देखा है ना.....

सोनू- नही...हम ने उनका चेहरा नही देखा...वो मास्क लगाए थे....

मैं- ये लो...सला पता भी नही की कौन है...क्या है और बस आँख बंद कर के बात मानते रहे...

सोनम- सॉरी अंकित....हम तो...

मैं(बीच मे)- अरे सॉरी गई भाड़ मे...तुम्हे पता है कि तुमने कितनी बड़ी बेवकूफी कर दी....

सोनू- हाँ...ग़लती तो हुई है हम से....पर हम क्या करते...हम मजबूर थे...और...और तुम क्या कह रहे थे...बेवकूफी....तुम्हे कुछ पता है क्या...हाँ...

मैं- नही...मैं तो बस..ऐसे ही...(मन मे)- अब तुम्हे कैसे बताऊ कि तुम्हारी मोम....

सोनू- अंकित...प्ल्ज़ हमारी मोम को बचा लो ...एक तो पहले से ही हम डॅड को ले कर परेशान है और अब मोम....पता नही क्यो लोग हमारे पीछे पड़ गये...हम ने किसी का क्या बिगाड़ा था....

मैं(मन मे)- क्या ये सब मेरी वजह से हुआ....शायद हाँ....सिर्फ़ मैं ही वो कड़ी हूँ जो इन लोगो को दुश्मनो से जोड़ती है.....

सोनम- पता नही ..हमारे मोम-डॅड किस हालत मे होंगे.....

मैं- क्क..कुछ नही...कुछ नही होगा...तुम लोग टेन्षन मत लो...और हाँ...तुम दोनो...ह्म्म..चलो मेरे साथ....

और फिर मैं उन दोनो को लेकर हॉस्पिटल से निकल गया.....और मैं कार चलाते हुए सोच मे पड़ गया....

मैं(मन मे)- अब मैं क्या करूँ...इनकी मोम को तो मैं वापिस नही ला सकता....पर इन्हे इनकी मोम का कातिल तो सौंप ही सकता हूँ....हाँ...शायद इनका दर्द थोड़ा कम हो जाए....और मैं जानता हूँ कि इसके लिए मुझे क्या करना है....

और मैने कार रिचा के घर दौड़ा दी....

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रिचा के घर.............

डोरबेल बजते ही रिचा ने गेट खोला और मुझे सामने देख कर सकपका गई.....

रिचा- टीटी..तुम यहाँ....अब क्या हुआ....

मैं- ह्म...कुछ तो हुआ है मेरी जान...तभी तो मैं यहा हूँ...वैसे रिया कहाँ है....

रिचा- रिया...वो तो....अंकित...तुम मेरी बेटी को छोड़ दो प्ल्ज़...

मैं- अरे..तुम तो बात शुरू होने से पहले ही गिडगिडाने लगी....हाँ...

रिचा- अंकित प्ल्ज़...मेरी बात सुनो...मेरी बेटी....

मैं(मुँह पर उंगली रख कर)- सस्शीईए....बोला ना...अभी बात शुरू नही हुई...तो अब शांत रहो और मेरी बात ध्यान से सुनो....

रिचा- मेरी बेटी को...

मैं(बीच मे)- चुप...क्या बेटी-बेटी बक रही है...मैं यहाँ तेरी बेटी के लिए नही आया ....समझी...

रिचा- तो...तो क्या हुआ फिर....हां..

मैं- बोला ना...चुप रहो. .और पहले गेस्ट के लिए कॉफी ले आओ....मैं बुलाता हूँ उन्हे...

रिचा- गेस्ट...कौन गेस्ट...

मैं- बुलाता हूँ...सोनू...अंदर आ जाओ...

मेरे बुलाने पर सोनू और सोनम भी अंदर आ गये और हम सब बैठ कर कॉफी का वेट करने लगे...जबकि रिचा कॉफी बनाने निकल गई.....

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अकरम के घर............

वसीम जब से उस फार्महाउस से वापिस आया था तभी से उसका माइंड झटका हुआ था.....

उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि अचानक से ये सब कैसे हो गया.....एक तो उसके हाथ से एक खून हो गया और उपर से अंकित का उसे इस तरह घूर्ना...उसे दिल ही दिल मे काफ़ी परेशान कर रहा था.....

वसीम अपनी परेशानी कम करने के लिए रूम मे बैठ पेग पर पेग लगाए जा रहा था....

बहुत देर तक ड्रिंक करने के बाद उसको कुछ याद आया और वो रूम को अंदर से लॉक कर के अपने सीक्रेट रूम मे दाखिल हुआ....और वहाँ की हालत देख कर उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई.....

वसीम- ये..ये क्या हुआ...किसने किया ...ओह माइ गॉड...ये तो...नही...मेरा सामान....मेराअ.....नहियीई....ये नही हो सकता....आआअहह.....

अकरम गुस्से और डर की वजह से अपना सिर पकड़ कर चीखता रहा और पूरे रूम मे अपने सामान को ढुड़ने की बेबजह कोसिस करता रहा.....

वसीम- आख़िर यहाँ आया कौन....कौन है जिसे ये ....क्या सबनम...नही...सादिया....नही मेरे घर मे कोई नही हो सकता....ये रूम तो सिर्फ़ मैं जानता हूँ....सिर्फ़ मैं.....तो फिर कौन है वो......

वसीम काफ़ी देर तक घर के एक-एक मेंबर के बारे मे सोचता रहा...तब उसके माइंड को फिर से झटका लगा और वो खड़ा हो गया .....

वसीम- अकरम...हाँ वही है....अब पता चला कि उसकी आँखो मे क्या छिपा था...उसका मुझे ऐसा देखना....हाँ वही है....ओह माइ गॉड....अकरम ....तूने ये क्यो....ष्हीत्त्त...

और वसीम गुस्से से तमतमाता हुआ वहाँ से निकला और अपने कवरड से गन ले कर निकालने ही वाला था कि उसका फ़ोन बज उठा.....

( कॉल पर )

वसीम- कौन है...

रिचा- क्या...नाम नही देखा क्या....

वसीम- तू है...नही...नही देखा...काम बोल...मेरे पास टाइम नही....

रिचा- तुम अभी मेरे घर आओ...तुमसे...

वसीम(बीच मे)- बोला ना....मेरे पास टाइम नही...रख...

रिचा- टाइम नही तो निकालो...क्योकि यहाँ आना ज़रूरी है...वरना तुम गये समझो....

वसीम(सीरीयस हो कर)- क्या मतलब...

रिचा- मतलब....ये बताओ कि वो वीडियो कहाँ है...मेरे बचपन का....

वसीम- कौन सा वीडियो...

रिचा(गुस्से से)- वही जिसमे मेरा बाप मरा था....याद आया....

वसीम- वो तो....तुम्हे उससे क्या.....वो सेफ है...

रिचा(चिल्ला कर)- नही है...वो मैने अभी-अभी देखा....और उसे भेजने वाला कौन है जानते हो....

वसीम(सहमा हुआ)- कौन....

रिचा- तेरा दुश्मन....अंकित....

वसीम(चौंक कर)- अंकित....शिट....(मन मे)- लगता है अकरम ने ही वो वीडियो उसे दिया होगा....अब अकरम से बात करने का कोई फ़ायदा नही....

रिचा- शिट छोड़...ये समझ कि अगर मैं मरी ना तो तुम्हे भी जीने भी दूगी...समझा....

वसीम- रिचा...तू रिलॅक्स का....मैं आता हूँ ना...कुछ नही होगा....ओके...और रही बात अंकित की तो लगता है कि अब उसे उसकी माँ के पास भेजने का टाइम आ गया है.....

रिचा(गुस्से से)- मैं कुछ नही जानती...तुम पहले यहाँ आओ...नही तो मैं...

वैईं(बीच मे)- बस....तू कुछ नही करेगी....आ रहा हूँ मैं....

और फिर वसीम ने कॉल कट की और रिचा के घर निकल पड़ा.....

वसीम(मन मे)- अगर रिचा की बात सच है तो इसका मतलब अंकित बहुत कुछ जान चुका है....इससे पहले कि वो कुछ और जाने....या किसी को बोले...मुझे उन दोनो को ख़त्म करना होगा....हाँ...यही एक रास्ता है मेरे बचने का....फिर रह गया अकरम...तो उसे मैं संभाल लुगा....

एक तरफ वसीम अपना प्लान बना रहा था और वहाँ दूसरी तरफ रिचा ने कॉल कट होते ही सामने खड़ी अपनी बेटी को देखा....जो इस टाइम मेरे गन पॉइंट पर थी....

रिचा- अंकित....इसे छोड़ दो...मैने वही किया जो तुमने कहा...अब छोड़ दो मेरी बेटी को...

मैं(मुस्कुरा कर)- अरे...इतनी भी क्या जल्दी....अभी तो पार्टी शुरू हुई है... हाहाहा....

रिचा- अंकित...

मैं- चिल्ला मत...चुपचाप वो करती जा जो मैं कहता हूँ...वरना तू तो मरेगी ही साथ मे तेरी बेटी भी मरेगी....

फिर मैने सोनू को रिया को ले जाने बोला और सोनू उसे ले कर एक रूम मे चला गया और साथ मे सोनम भी गई....

और मैं रिचा के साथ बैठ कर वसीम का वेट करने लगा.......

रिचा- देखो अंकित...मैने तुम्हारी हर बात मानी...अब प्ल्ज़ मेरी बेटी को छोड़ दो....

मैं- छोड़ देगे....थोड़ा रूको तो...मैने कहा था ना कि अभी पार्टी शुरू हुई है...ख़त्म नही...

रिचा- तुम कहना क्या चाहते हो...मैं कुछ समझी नही...

मैं- सब समझ जाओगी....पहले गेट ओपन करो...मेरा आदमी आ गया है....

रिचा- पर मैने तो डोरबेल की आवाज़ ...

(तभी डोरबेल बज उठी...और रिचा मुझे अजीब नज़रों से देखने लगी...)
 
मैं- डरो मत ...गेट खोलो....सब समझा दूँगा...जाओ...

रिचा ने जैसे ही गेट खोला तो सामने रॉनी खड़ा हुआ था....

मैं- आओ रॉनी....अंदर आ जाओ...

रॉनी- कहिए बॉस...क्या हुकुम है...

मैं- मैने बताया तो था फ़ोन पर....

रॉनी- अरे हाँ सर, पता है...मैं तो बस ऐसे ही...हाहाहा...

मैं- अच्छा ये बताओ....ये काम कर पाओगे...आइ मीन...मुझे तुम पर भरोशा है...पर कोई गड़बड़ तो नही होगी...

रॉनी- डोंट वरी सर....रॉनी पर भरोशा रखो...और वैसे भी ये काम मैने पहले भी किया था....आप बस भरोसा रखिए...

मैं- ओके...तो फिर काम पर लग जाओ...

रिचा- कोई मुझे भी बतायगा कि ये सब क्या हो रहा है...

मैं(रिचा के पास जा कर)- हाँ मेरी जान...तू ही तो मैं आइटम है आज की पार्टी मे....चल बैठ...बताता हूँ कि तुझे क्या करना है....आजा...

करीब 30-40 मिनट बाद वसीम रिचा के घर पहुँचा और जाते ही उसने अपनी गन को लोड किया और फिर डोरबेल बजाई.....

गेट खुलते ही उसकी नज़र सामने खड़ी रिचा पर पड़ी जो वसीम को देख कर मुस्कुरा रही थी....

वसीम(हैरानी से)- तू मुस्कुरा क्यो रही है...हाँ...और...वो कहाँ है....

रिचा- अरे...इतना गुस्सा किसलिए....वो यही पर है...रिलॅक्स...

वसीम- रिलॅक्स गया भाड़ मे ..तू ये बता कि उसने क्या बोला तुझे...और मुझे ये समझा कि तू मुस्कुरा क्यो रही है...

रिचा- हहहे....हैरान रह गये ना...

वसीम(गुस्से से गन निकाल लेता है)- अब बोलेगी या तुझे उसके पहले ही उपर पहुँचा दूं...हाँ....

जैसे ही वसीम ने गन की नोक रिचा की गर्दन पर चुभाई तो रिचा की मुस्कुराहट छु हो गई और चेहरे पर डर के भाव छा गये.....

रिचा- मेरी...मेरी बात तो सुनो...

वसीम- अब आई ना औकात पर...बोल कहाँ है वो...और ये पहले बोलना कि तू हंस क्यो रही थी...कही तू उसके साथ तो...

रिचा(बीच मे)- नही...मैं तुम्हारे साथ हूँ...वो तो मैं इसलिए हँस रही थी क्योकि...क्योकि मैने पहले ही उस पर काबू पा लिया....

वसीम- क्या..तूने...हाहाहा...तू साली रंडी..तूने अंकित को काबू मे कर लिया...हॅट...मैं नही मानता....

रिचा(गुस्से से)- तूने मुझे समझा ही कहाँ....मैं वो कर सकती हूँ जो तुझ जैसे 10 लोग ना कर पाए...समझा...

वसीम(चिल्ला कर)- चुप साली....अब सॉफ-सॉफ बोल कि तूने क्या किया ...और वो है कहाँ....

रिचा- ये गन हटाओ पहले...चुभ रही है...

वसीम(गन हटा कर)- हाँ बोल..

रिचा- वो सब बेसमेंट मे है...उन्हे बाँध कर रखा है...

वसीम(हैरानी से)- सब...सब का मतलब...और कौन है उसके साथ...

रिचा- सोनू और सोनम ...

वसीम- ओह्ह...तो वो भी आ गये उसके झाँसे मे...सालो ने अपने माँ-बाप को खो दिया फिर भी....चलो...उनका दिमाग़ भी ठिकाने पर लाते है....

रिचा- ह्म..जो करना है करो...बस याद रखना कि मेरी बेटी पर आँच नही आनी चाहिए....

वसीम- ठीक है..चल अब...मैं बहुत बेसब्री से इस वक़्त का इंतज़ार कर रहा था....चल ...

फिर वसीम रिचा के साथ बेसमेंट की तरफ चल पड़ा....

बेसमेंट एक ख़ुफ़िया कमरे की तरह था....उसका एंट्रेन्स हॉल के बीच मे कार्पेट के नीचे छिपा था......

रिचा ने कार्पेट हटाया और वहाँ लगा गेट ओपन किया....और गेट ओपन होते ही सीडीयाँ सामने आ गई...जो नीचे जा रही थी....और साथ मे गेट ओपन होते ही बेसमेंट लाइट की रोशनी से जगमगा उठा...

वसीम(रिचा को देख कर)- तेरा दिमाग़ भी बहुत चलता है ...हाँ...

रिचा(मुस्कुरा कर)- वो तो है...अब चलो अंदर...

वसीम(गन दिखा कर)- पहले तू चल...हुह..

रिचा वसीम को घूरते हुए सीडीयों से उतरने लगी और वसीम भी रिचा को गन पॉइंट पर लिए हुए उसके पीछे जाने लगा....

जैसे ही दोनो नीचे पहुँचे तो सामने का नज़ारा देख कर वसीम हैरान रह गया...जबकि रिचा वसीम को देख कर इतराने लगी....

वसीम- ये सब...तुमने...आख़िर कैसे....

रिचा- बस...अपनी अदाएँ ही ऐसी है....हहहे.....

वसीम- हसना बंद कर...सॉफ-सॉफ बोल कि क्या किया इन्हे....मुझे अब भी यकीन नही हो रहा कि तूने इनकी ऐसी हालत की....

वसीम ने जब देखा कि मैं, सोनू और सोनम चेयरे से बँधे बैठे हुए है तो उसे बहुत हैरानी हुई....उसे विश्वास ही नही हो रहा था कि रिचा ये सब कर सकती है..वो भी अकेले....

वसीम- बोल ना...कैसे किया तूने....

रिचा- अरे...बस नसीली कॉफी पीला दी...और फिर अपनी बेटी की हेल्प से इन सबको बाँध दिया....खैर अब तो ये होश मे है...देखो...

वसीम- गुड....सही टाइम पर होश मे आ गया साला....मैं भी यही चाहता था कि जब मैं इसे मारु तो इसकी आँखो मे मौत का डर देखु...वो तड़प देखु...जो मरने वालो को होती है....हह...

वसीम ये सब बोलते-बोलते जोश मे आ गया...उसका चेहरा गुस्से से लाल होने लगा....

और दूसरी तरफ मैं भी चेयर से बँधा हुआ वसीम को देख कर झटपटाने लगा......

मेरी झटपटाहत देख कर वसीम और रिचा के चेहरे पर कमीनी मुस्कान नाचने लगी....
 
मैं- तो ये है वो...जिसके लिए तूने मुझे धोखा दिया....क्यो...ये ही है ना सरफ़राज़ ख़ान...हाँ...

वसीम- वाह...तो मेरा शक़ सही था...तू मेरे बारे मे सब कुछ जान गया....सब कुछ...

मैं- हाँ....सब कुछ...वो भी जो तूने किसी को नही बताया...

वसीम(घूर कर)- अच्छा....इतना कुछ जानता है....तब तो तुझे मारना होगा...छे..छे...च..च..च...बेचारा....

मैं- नही सरफ़राज़...तुम मुझे नही मार सकते ....मैं जानता हूँ....

वसीम- ओह्ह...तू मेरे बारे मे इतना कुछ जानता है ...तब भी बोल रहा है कि मैं तुझे मार नही सकता.....

मैं- हाँ ..क्योकि मैं जानता हूँ कि सरफ़राज़ ख़ान अब वसीम ख़ान बन चुका है...और वसीम ख़ान किसी को मार नही सकता....

वसीम(ठहाका मार कर)- हाहाहा....बच्चे....नाम बदलने से इंसान की सख्सियत नही बदलती...समझा....

मैं- सही कहा....और तुम्हारी सख्सियत तुम्हारे बाप की देन है...अली ख़ान की...और मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि अली ख़ान क्या सख्सियत रखते थे....

वसीम- सही कहा...पर शायद तू ये नही जानता कि जब किसी सरीफ़ इंसान की मौत होती है तो उसका नतीजा बहुत भयानक होता है....

मैं- जानता हूँ...वो नतीजा मेरे सामने है....

वसीम- अच्छा हुआ तुझे सब समझ आ गया....अब तुझे मरते वक़्त कोई मलाल नही रह जायगा.....

मैं- नही...तुम मुझे नही मार सकते....

वसीम- हाहाहा....एक..एक वजह तो बता की तुझे छोड़ दूं....हाँ...

मैं- मेरी छोड़...तुम एक वजह बता सकते हो मुझे मारने की....

वसीम(सीरीयस हो कर)- ह्म्म ..तू एक वजह की बात कर रहा है...मेरे पास तीन वजह है ...तीन.....समझा....

मैं- वही तो मैं जानना चाहता हूँ...कम से कम मुझे पता तो रहेगा कि मैं मर क्यो रहा हूँ...

वसीम- ह्म...तेरी बात मे दम है...पर उससे पहले तू मुझे बतायगा....

मैं- क्या...मैं...मैं क्या बताउन्गा....

वसीम- तू ये बतायगा कि तू मेरे बारे मे क्या-क्या जानता है...और ये भी बता कि तू कब्से और कैसे जानता है कि मैं ही सरफ़राज़ हूँ....हाँ....

मैं- अच्छा....इतनी सी बात....कोई नही....मुझे बताने मे क्या प्राब्लम....सुनो...सब बताता हूँ.....

फिर मैने वसीम को शुरू से बताना चालू किया...कि कैसे मुझे दामिनी से सरफ़राज़ का नाम पता चला और फिर उसके साथियों का...

फिर कैसे मैने रिचा के मुँह से सरफ़राज़ की असलियत जानी और तब मुझे पता चला कि वसीम ख़ान ही सरफ़राज़ ख़ान है....

मेरी बात सुन कर वसीम अपने दाँत पीसते हुए रिचा को देखने लगा....तब मैं फिर से बोला...

मैं- उसे मत घूरो...मैने ही उसे मजबूर कर दिया था ....आख़िर उसकी बेटी का सवाल था...तो बेचारी चुप कैसे रहती...हैं...

वैसे मुझे ये भी पता है कि तुम सिर्फ़ कमीने नही...एक नंबर के ठर्की हो....तूने अपने दोस्त सरद की बीवी और बेटी के साथ नाजायज़ संबंध बनाए....और हाँ...वो तेरी साली....उसे भी नही छोड़ा.....उसकी तो गोद ही भर दी....हाहाहा...

और तेरे हवसिपन की हद तो तब हो गई...जब मुझे पता चला कि तू साला अपनी बेटी को ही ठोकता है...हैं ना....

वैसे वो है ही हॉट...उउउंम्म....एक दम कड़क....

वसीम(गन टानकर मेरी तरफ बड़ा)- चुप कर....मेरी बेटी के बारे मे एक शब्द भी कहा तो....

मैं(बीच मे)- बेटी...हाहाहा....वो तेरी बेटी कहाँ से हो गई...असल मे तेरी एक ही बेटी है...गुल...सही कहा ना....

वसीम- वाह बच्चे...मान गये...काफ़ी तेज है तू...

मैं(मुस्कुरा कर)- थॅंक यू...पर पिक्चर अभी बाकी है....मैं एक बात तो भूल ही गया...तेरी एक नही दो बेटी है...है ना....ह्म...(मुस्कुराने लगा)

वसीम(शॉक्ड)- त्त्त...तुझे कैसे पता...

मैं- बोला था ना...मुझे वो भी पता है जो किसी और को पता नही....

वसीम- मान गये बच्चे ...सच मे...तूने तो अपने बाप को भी पीछे छोड़ दिया....ग्रेट...पर क्या फ़ायदा....इतना तेज दिमाग़ बस कुछ ही देर का मेहमान है....

मैं- वसीम ख़ान...मैं अब भी यही कहता हूँ कि तुम मुझे मार नही सकते....

वसीम(रिचा को देख कर)- लगता है बच्चा शॉक मे है.....

मैं- उससे क्या पूछ रहे हो...मुझसे बात करो....शॉक तो अभी तुम्हे मिलेगा...मेरी बात अब तक ख़त्म नही हुई....

वसीम(मुझे घूरते हुए)- अच्छा...और क्या जानता है तू....

मैं- आहह...मैं वो जानता हूँ जो कोई नही जानता....मैने कहा था...याद है ना...

वसीम(दाँत पीसते हुए)- तो बोल ना...मैं भी तो सुनू....

मैं- अनवर, सकील, परवेज़, गुलनार, जावेद, परवीन.....हाँ ..कुछ समझा...या डीटेल बताऊ....

वसीम(हैरानी से)- तो तूने सब पढ़ लिया....गुड...पर तू मुझे इनके नाम क्यो बता रहा है...मैं सबको जानता हूँ....

मैं- हाँ ..मैं जानता हूँ कि तू सब जानता है...असल मे मैं इनकी मौत की बात कर रहा था...जिंदगी की नही....

वसीम(शॉक्ड)- क्क़..क्या मतलब...तू कहना क्या चाहता है...
 
मैं- वही जो तू सोच रहा है....उनकी मौत की वजह....और हम दोनो ही जानते है कि वो सब कैसे मारे गये....

वसीम- क्या...क्या बकता है...

मैं(चिल्ला कर)- बकता नही....सच बोल रहा हूँ....उन सब की मौत की वजह भी तू है...समझा....

वसीम- हाहाहा....तू..तू समझता क्या है...तू जो बोलेगा वो सच हो जायगा...हाँ...

मैं- नही...बिल्कुल नही...असल मे, मैं सच ही बोल रहा हूँ....

वसीम(गन तां कर)- चुप कर...वरना अभी तेरा भेजा बाहर कर दूँगा....

मैं- अच्छा...तुझे अब भी लगता है कि तू मुझे मार सकता है...हाँ...

वसीम- नही...लगता नही...मैं तुझे आज मार कर ही जाउन्गा....

मैं- ह्म..चलो ठीक है..मैं तुम्हारी बात मान लेता हूँ....तो तुम्हारे हिसाब से आज मैं मरने वाला हूँ...

वसीम- हाँ बिल्कुल...

मैं- ओके...मान लिया...तो क्या तुम मरने वाले की आख़िरी ख्वाहिश पूरी नही करोगे....

वसीम- हाहाहा...मुझे क्या वो वकील समझ रखा है जो फासी के वक़्त आख़िरी ख्वाहिस पूछता है....

मैं- नही...पर मैं चाहता हूँ कि मैं अपने सवालों के जवाब लेकर मरूगा तो शांति से मर पाउन्गा....बस और कुछ नही....

वसीम(एक चेयर ले कर बैठ गया)- ह्म..रिचा...तू भी बैठ जा...और तेरी बेटी को भी बैठा ले....क्योकि मैं इसके सारे सवालो के जवाब देने वाला हूँ...तो थोड़ा टाइम लगेगा....ह्म्म...तो बोल बच्चे...क्या सवाल है तेरा...

मैं- थॅंक्स...तो मेरा पहला सवाल ये है कि वो क्या वजह है जिस वजह से तुम मुझे मरने वाले हो...और मेरी फॅमिली के पीछे क्यो पड़े हो....क्यो तुम सरफ़राज़ से वसीम बने...हाँ....

वसीम मेरी बात सुनकर अपने अतीत मे खो गया और देखते ही देखते उसका चेहरा गुस्से से लाल होने लगा....

मैं- अब चुप क्यो हो गया...बोल ना...

वसीम(चिल्ला कर)- क्या जानना है तुझे....मेरे परिवार की बर्बादी...हाँ...तो सुन....

मेरे पिता अली ख़ान तेरे दादाजी आज़ाद को भाई से बढ़ कर मानते थे....और आज़ाद ने...उस आज़ाद ने मेरे माँ-बाप को जिंदा जला दिया....जला दिया....

मैं- पर क्यो....क्या इसलिए कि तुम्हारी माँ का मेरे दादाजी के साथ नाजायज़ रिश्ता था....

वसीम(गुस्से से तमतमाया हुआ)- हराम्जादे....मैं तुझे....

वसीम उठकर मुझे मारने बढ़ा पर रिया ने उसे रोक लिया....

वसीम- ये लड़की..मेरा हाथ छोड़ वरना...

मैं(बीच मे)- वसीम ख़ान...मैने ये बात इसलिए बोली क्योकि मुझे यही वजह बताई गई थी...

वसीम(चिल्ला कर)- किसने बोला...

मैं- तेरे बाजू मे देख...वही है...रिचा...

वसीम ने रिया से हाथ झटका और रिचा को एक जोरदार थप्पड़ खीच दिया....रिचा अपनी चेयर के साथ ज़मीन पर लूड़क गई....

वसीम(रिचा पर गन तान कर)- साली रंडी...तेरी ये हिम्मत की मेरी माँ के बारे मे....अब सबसे पहले तू मरेगी....

रिया(वसीम के सामने आकर)- नही अंकल...प्ल्ज़ मेरी माँ को मत मारिए...प्ल्ज़ अंकल....

रिचा- म्म..मैं क्या कहती...इसने मेरी बेटी की आड़ मे मुझसे पूछ लिया...और..तुमने असलियत बताने को मना किया था...तो मैने...

वसीम(रिचा को लात मार कर)- तो तू मेरी माँ को बदनाम करेगी....रुक जा रंडी...इसका हिसाब तो तुझे देना होगा....पहले ज़रा इस लड़के से निपट लूँ...

वसीम फिर से चेयर पर बैठ गया और गुस्से से सासे लेने लगा....

वसीम- सुन लिया ना...ऐसा कुछ नही था....आज़ाद अयाश था...पर उसकी नज़रों मे दोस्ती की वॅल्यू थी...

मैं- वाह...तुम फिर भी ये मानते हो कि मेरे दादाजी ने तुम्हारे घरवालो को जला दिया....

वसीम- हाँ...ये सच है...बिल्कुल सच....उसी ने जलाया...मेरे अब्बू...अम्मी...आमिर...(और वसीम ख़ान रोने लगा....)

मैं- नही...मैं नही मानता....मेरे दादाजी बिना किसी वजह के....

वसीम(चिल्ला कर)- वजह थी...और वो वजह थी तेरे दादाजी की झूठी शान...और उनकी वो कमीनी बेटी...आरती.....

मैं- क्या....ये क्या बोल रहे हो...आरती बुआ ने क्या किया....

वसीम- बताता हूँ...आज सब बताता हूँ....

मेरे और तुम्हारे परिवार मे बहुत अच्छा संबंध था.....और ये आज़ाद और अली की दोस्ती का नतीजा था....

आज़ाद और अली की तरह ही उन दोनो की बीवियों और बच्चो मे भी बहुत प्यार था....

मेरे भाई आमिर और आज़ाद की बेटी आरती के बीच भी बहुत अच्छी दोस्ती थी...दोनो साथ मे खेलते...साथ मे पढ़ते और साथ मे ही स्कूल जाते थे....

पर उमर बढ़ने के साथ-साथ उन दोनो की दोस्ती भी एक नया रूप लेने लगी....

मेरे भाई आमिर के दिल मे आरती के लिए मुहब्बत जाग उठी....

आमिर तो आरती से बेइंतहा मोहब्बत करने लगा...पर आरती को बोल नही पाया...असल मे उसे डर लगता था कि कही वो आरती को खो ना दे....

दूसरी तरफ आरती एक सरारती लड़की थी...वो आमिर के साथ भी शरारातें करती रहती थी...पर आमिर कभी नही समझ पाया कि आरती के दिल मे उसके लिए कुछ है भी या नही....

नतीज़ा ये हुआ कि वक़्त के साथ आमिर का प्यार बढ़ता गया...पर वो डर की वजह से आरती से कुछ नही कह पाया...इस वजह से वो अंदर ही अंदर घुटने सा लगा था....पर उसने ये बात किसी को नही कही ....

असल मे आमिर बहुत इमोशनल भी था....उसे ज़रा सी बात का इतना दुख हो जाता था कि क्या कहे...हद से ज़यादा....यू कहे तो उसके लिए हर छोटी से छोटी बात दिल को छु जाने वाली बात होती थी....

फिर एक दिन ऐसा आया जब आमिर की इस हालत का अंदाज़ा रिचा को हो गया...असल मे रिचा इन दोनो के साथ ही पढ़ती थी....

फिर रिचा की जबर्जस्ति से आमिर को सच कबूलना पड़ा...और रिचा ने आमिर को एक आइडिया दिया....

उसने बोला कि एक गुलाब का फूल स्कूल के बगीचे मे रख दो...अगर आरती ने उठा लिया तो हा समझो और नही तो ना ...
 
दूसरी तरफ रिचा ने ये बात आरती को भी बता दी...और फिर उसी दिन स्कूल के लंच टाइम मे आमिर ने एक गुलाब का फूल आरती के थोड़े पास रखा और वहाँ से निकल गया.....

थोड़ी देर बाद आरती उठी और मुस्कुरा कर वो फूल उठा लिया....इसका मतलब था हां....

आमिर बहुत खुश हो गया और उसने रिचा के कहने पर अपने घरवालो से आरती के घर रिश्ते की बात करने को कहा....क्योकि आरती ने रिचा से कह दिया था कि हाँ बोलते ही रिश्ते की बात करनी होगी....

आमिर की बात सुन कर मेरे माँ-बाप भी खुश थे...कि चलो दोस्ती अब रिस्तेदारि मे बदलेगी....और इसी लिए वो रिश्ता ले कर आज़ाद के घर पहुँचे....

पर वहाँ जा कर पता चला कि आरती ने धर्मेश से शादी करने का तय किया है....और धर्मेश के घरवाले भी रिश्ता ले कर आए हुए थे....

ये सब देख कर मेरे घरवाले शर्मिंदा हुए ...पर आमिर टूट गया....और उपर से आरती ने भी आमिर को बहुत कुछ सुना डाला...जिसे सुन कर आमिर बिखर सा गया....

फिर बच्ची की इस बहस मे मेरे अब्बू ने आरती को समझाना चाहा तो आज़ाद को ये बात बुरी लग गई और उसने मेरे अब्बू को बेइज्जत कर के वहाँ से जाने को कहा.....

मेरे घरवाले वापिस आ गये...और जो हुआ उसे भूलने की कोसिस करने लगे....पर आमिर...वो तो जीते जी मर गया था....और वो अपने रूम मे क़ैद हो गया....

आमिर से आरती की बेवफ़ाई सही नही गई और उसने अपने आप को फासी पर लटका लिया....

शाम तक जब उसका गेट नही खुला तो मेरे अब्बू ने गेट तोड़ दिया और सामने आमिर की लाश देख कर मेरे माँ-बाप होश खो बैठे....

अब्बू-अम्मी आमिर को नीचे उतार कर उसकी लाश पर रो ही रहे थे कि तभी आज़ाद वहाँ आ गया....

आज़ाद को देख कर अब्बू आपा खो बैठे और उनको थप्पड़ मारने लगे और आमिर की मौत का ज़िम्मेदार उन्हे ठहरा दिया...और घर से निकाल दिया...

बस...आज़ाद से अपना अपमान बर्दास्त नही हुआ...उपर से उसे डर भी गया कि कही आमिर की मौत के लिए उसकी लाडली बेटी पर आँच ना आ जाए....

और फिर आज़ाद ने मेरे घर को जला डाला ....और सब ख़त्म हो गया....

जब आग से लाश निकली गई तो मेरे अब्बू-अम्मी आमिर को सीने से चिपकाए उसके दोनो तरफ लेटे थे....बस तभी मैने उसको आख़िरी बार देखा.....

और तभी से तय कर लिया था कि जिसने मेरी फॅमिली को तवाह किया है....मैं उसकी पूरी फॅमिली का नाम-ओ-निसान मिटा दूँगा......

अब जान गया....क्या वजह है मेरे बदले की...जान गया ना....

और इतना बोलकर वसीम ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा......

मैं- वाउ...क्या मस्त स्टोरी है...गुड...

वसीम(गुस्से से)- ये कोई स्टोरी नही...सच्चाई है...

मैं- हाहाहा....सच्चाई...ये शब्द तुझ जैसे कमीने के मुँह से अच्छा नही लगता...

वसीम- चुप कर....नही तो...

मैं- क्यो...सच कड़वा लगा...हाँ...

वसीम- मैं कमीना...हाँ हूँ कमीना...और मुझे कमीना बनाया तेरे दादा ने...आज़ाद ने...

मैं- ह्म्म..तू क्या सोचता है...तू कुछ भी कहेगा और मैं मान लुगा....

वसीम- मैने हर एक लब्ज सच कहाँ है लड़के...

मैं- तू और सच...हाहाहा...जिस इंसान ने आज तक हर काम ग़लत किया...वो अब सच बोलेगा....

वसीम(दाँत पीस कर)- कहना क्या चाहता है तू...

मैं- अरे..कहना क्या...जो इंसान अपनी दो-दो बीवियों को आज तक झूट बोलता आया ...उस पर मैं भरोसा करूँ..नही...बात कुछ और ही है...

वसीम- न्न्ंहिी....ये सब सच है....

मैं- जिसने अपनी साली से नाजायद औलाद पैदा की...वो सच बोलेगा क्या....हाँ...

वसीम- बच्चे....बहुत बोल लिया...अब चुप हो जा...

मैं- नही होउंगा....साला तू तो इतना बड़ा कमीना है कि खुद की बीवी को दूसरे के साथ सुलाता है....

वसीम(गुस्से से)- चुप कर...

मैं- और तो और..खुद की बेटी को अपनी रखेल बना लिया...

वसीम(आगे बढ़ कर)- बस...चुप हो जा...

मैं- अरे तू तो वो दरिन्दा है जो अपनी सग़ी बेटी तक को अपनी रखेल बना ले....फिर जूही तो....

वसीम(गुस्से से तमतमाता हुआ)- चुप हो जा वरना....

मैं- वरना क्या....अरे जूही को छोड़...तू तो रूबी और गुल को भी अपनी रखेल...

वसीम(चिल्ला कर)- चुप कर...

और फिर रूम मे सिर्फ़ गोली चलने की और चीखने की आवाज़े गूंजने लगी....

""ढ़हाईए...द्ड़हायईए....द्ड़हआइई......""

"आआआआअहह""

""आआंन्नकक्कीित्त्त्टतत्त....न्न्नहिईीईईईईईईईईई""

गोली की आवाज़ और लोगो की चीख के बाद पूरे बेसमेंट मे खामोशी छा गई.....

और रूम मे फैली इस खामोसी के बीच 4 आँखे फटी की फटी रह गई....2 आँखे रिचा की थी और 2 वसीम की....
 
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