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Guest
रेणु के घर............
मदन(चौंक कर)- ये क्या बोल रहे हो....ये नही हो सकता....
समर- मुझे भी यही लगा था...पर अब मैं पूरे कॉन्फिडेंट के साथ बोल सकता हूँ कि इसके पीछे ज़रूर कोई और है....
मदन- पर और कौन हो सकता है....जिसे रिचा से कोई फ़ायदा या नुकसान हो....
समर- पता नही...पर कोई तो है...जिसने रिचा को गायब किया है....
मदन- हो सकता है कि ये उसी लड़के की कोई चाल हो....
समर- ह्म..हो सकता है...पर वो ऐसा क्यो करेगा....उल्टा वो तो रिचा से सच उगलवा कर हम सबकी बॅंड बजा देता....नही...वो अपना नुकसान नही करेगा....
मदन(सोच कर)- ह्म...तो फिर कौन हो सकता है....
समर(आँखे दिखा कर)- कही कोई हमारा साथी तो नही...कोई हमे धोखा देना चाहता हो....या फिर हमे फसाना....
मदन- ऐसा कौन हो सकता है....
समर- हो सकता है कोई करीबी हो...जो अंकित से प्यार करता हो...शायद उसी ....
मदन(बीच मे)- नही...रेणु ये कभी नही करेगी....वो अंकित को मारना नही चाहती...मैं जानता हूँ...पर वो रिचा को क्यो गायब करेगी...नही....उस पर शक मत करो...
समर- ओके...मान लिया...पर अब क्या...कही अंकित को सच्चाई पता लग गई हो तो...रिचा ने सब बक दिया हो तो...फिर क्या...सब ख़त्म....
मदन- नही...तुम...तुम घबराओ मत...ये पता करने का तरीका है मेरे पास...
समर(चौंक कर)- कैसा तरीका....
मदन(मुस्कुरा कर)- ह्म....तरीका बड़ा पुराना है दोस्त....बस देखते जाओ....
और फिर मदन , समर जो वेट करने का बोल कर अंदर चला जाता है...और कुछ देर बाद बाहर आ कर समर और रघु को साथ ले कर घर से निकल जाता है.....
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यहाँ मैं अपने आपको कोस्ता बैठा हुआ था कि मुझे अपने पीछे किसी के होने का अहसास हुआ और मैं पलटा....
पलट के जब सामने खड़े सक्श को देखा तो मैं हैरान रह गया....आख़िर इसे कैसे पता की मैं यहाँ हूँ....
मैं(अपनी आँखे पोछ कर)- तुम....यहाँ...कैसे....????
""तुम्हारे लिए अभी ये जानना ज़रूरी नही कि मैं यहाँ कैसे....अभी ये जानना ज़रूरी है कि रिचा कहाँ गई....है ना...""
मैं(शॉक्ड)- क्या....तुम कैसे....और ये कैसे पता कि रिचा गायब हो गई...हाँ....
""क्योकि वो मैं ही हूँ....जिसने उसे गायब किया है....समझे....""
उसकी बात सुन कर तो मेरी हैरानी का ठिकाना ही नही रहा....
मैं(मन मे)- रिचा को इसने गायब किया....पर क्यो.....??????????
अब तक मैं सोच-सोच कर परेशान हो रहा था कि रिचा को किसने गायब किया होगा...पर अब जब उसे गायब करने वाला मेरे सामने खड़ा था...तो मुझे यकीन ही नही हो रहा था...
क्योकि मेरे सामने जो सक्श खड़ा था....उसकी रग-रग से मैं वाकिफ़ था....क्यूंकी वो और कोई नही...बल्कि मेरा खास दोस्त संजू था.....
संजू- इतना मत सोच भाई...मैं सच बोल रहा हूँ....बिलीव मी....
मैं(झटके से)- तू...पर...हुह...तूने रिचा को गायब किया....वो भी मेरे सामने से...हाँ...
संजू- हाँ बिल्कुल.....
मैं(सिर हिला कर)- नो...नो...तू नही हो सकता....मैं...आहह...तू कैसे हो सकता है....
संजू(आगे बढ़ कर)- मैं जानता हूँ कि तू हैरान है ये सब सोच कर...पर ये सच है भाई....मैने ही रिचा को गायब किया है....
मैं- ओहक...चल मान लिया...पर क्या ये बताने की जहमत उठाएगा की तूने ये सब किसके कहने पर किया....ह्म...
संजू- किसी के नही...मैने उसे गायब किया....अपने लिए...
मैं(हैरानी से)- ओह...अच्छा...तूने ये सब अपने लिए किया...हाँ....पर ये तो बता कि ये सब करने से तेरा क्या फ़ायदा...हा...
संजू मेरी बात सुन कर खामोश रहा और फिर इधर-उधर देखने लगा...
मैं(उंगली दिखा कर)- देखा...पकड़ा गया....मैं जानता था....तू झूठ बोल रहा है...बिल्कुल झूठ...पर क्यो...कोई तो है...जिसके लिए तूने मुझसे झूठ बोला...कौन ..कौन है वो....???
संजू(ज़ोर से)- अंकित....मैं सच बोल रहा हूँ....मैने ही रिचा को गायब किया...और वो भी सिर्फ़ मेरे लिए...और ये सच है....पूरा सच....
मैं(घूर कर)- तेरी आँखे बता रही है कि तू सच बोल रहा है...हुह....तब तो बड़ी प्राब्लम हो गई...है ना....तूने रिचा को गायब किया...वो भी मेरे सामने से....हाँ...
संजू(नज़रे झुका कर)- ह्म...
मैं(चिल्ला कर)- पर क्यो.....???
संजू- बताउन्गा...सब बताउन्गा...पर पहले एक वादा करना होगा....
मैं- कैसा वादा....
संजू(हाथ बड़ा कर)- अगर मुझ पर भरोसा है तो वादा कर...की जो मैं कहुगा वो तू मानेगा....बोल...वादा करता है....
मैं(हाथ मिला कर)- तुझ पर आज भी उतना ही भरोसा है...जितना पहले था....चल वादा...अब बोल....
फिर मैं संजू के साथ शाम ढलने तक वहाँ बैठा रहा....संजू ने काफ़ी कुछ बताया.....और उसकी बातें सुन कर मुझे अहसास हुआ कि क्यो संजू ने मुझे अमर की फॅमिली के बारे मे नही बताया....
संजू(नम आँखो से)- अब तू ही बता....मैं क्या करता...मेरे पास कोई दूसरा ऑप्षन था ही नही ...
मैं(संजू के कंधे पर हाथ रख कर)- आज से तू अकेला नही मेरे दोस्त....मैं तेरे साथ हूँ...
संजू- थॅंक्स...मुझे पता था कि तू मेरी बात समझ जायगा...फिर भी मुझे...मुझे डर था कि तू शायद...आइ म सॉरी....
मैं(मुस्कुरा कर)- तूने अंकित की दोस्ती को पहचाना ही नही सायद....कोई नही...अब जान गया ना....अब टेन्षन फ्री हो जा....और कर तुझे जो करना है....ह्म...
संजू(मुस्कुरा कर)- ह्म...चल अब...रात हो गई ...घर चलते है...
मैं- ह्म..रात तो हो गई...चल आज बियर पीते है...पहले की तरह...बियर वित चिकन...क्या बोलता है...
संजू(मुस्कुरा कर)- तू साला टेन्षन मे भी मज़े से जीता है...चल आजा ...
और फिर हम दोनो बियर पीने अपने पुराने अड्डे पर निकल गये.......
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मदन(चौंक कर)- ये क्या बोल रहे हो....ये नही हो सकता....
समर- मुझे भी यही लगा था...पर अब मैं पूरे कॉन्फिडेंट के साथ बोल सकता हूँ कि इसके पीछे ज़रूर कोई और है....
मदन- पर और कौन हो सकता है....जिसे रिचा से कोई फ़ायदा या नुकसान हो....
समर- पता नही...पर कोई तो है...जिसने रिचा को गायब किया है....
मदन- हो सकता है कि ये उसी लड़के की कोई चाल हो....
समर- ह्म..हो सकता है...पर वो ऐसा क्यो करेगा....उल्टा वो तो रिचा से सच उगलवा कर हम सबकी बॅंड बजा देता....नही...वो अपना नुकसान नही करेगा....
मदन(सोच कर)- ह्म...तो फिर कौन हो सकता है....
समर(आँखे दिखा कर)- कही कोई हमारा साथी तो नही...कोई हमे धोखा देना चाहता हो....या फिर हमे फसाना....
मदन- ऐसा कौन हो सकता है....
समर- हो सकता है कोई करीबी हो...जो अंकित से प्यार करता हो...शायद उसी ....
मदन(बीच मे)- नही...रेणु ये कभी नही करेगी....वो अंकित को मारना नही चाहती...मैं जानता हूँ...पर वो रिचा को क्यो गायब करेगी...नही....उस पर शक मत करो...
समर- ओके...मान लिया...पर अब क्या...कही अंकित को सच्चाई पता लग गई हो तो...रिचा ने सब बक दिया हो तो...फिर क्या...सब ख़त्म....
मदन- नही...तुम...तुम घबराओ मत...ये पता करने का तरीका है मेरे पास...
समर(चौंक कर)- कैसा तरीका....
मदन(मुस्कुरा कर)- ह्म....तरीका बड़ा पुराना है दोस्त....बस देखते जाओ....
और फिर मदन , समर जो वेट करने का बोल कर अंदर चला जाता है...और कुछ देर बाद बाहर आ कर समर और रघु को साथ ले कर घर से निकल जाता है.....
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यहाँ मैं अपने आपको कोस्ता बैठा हुआ था कि मुझे अपने पीछे किसी के होने का अहसास हुआ और मैं पलटा....
पलट के जब सामने खड़े सक्श को देखा तो मैं हैरान रह गया....आख़िर इसे कैसे पता की मैं यहाँ हूँ....
मैं(अपनी आँखे पोछ कर)- तुम....यहाँ...कैसे....????
""तुम्हारे लिए अभी ये जानना ज़रूरी नही कि मैं यहाँ कैसे....अभी ये जानना ज़रूरी है कि रिचा कहाँ गई....है ना...""
मैं(शॉक्ड)- क्या....तुम कैसे....और ये कैसे पता कि रिचा गायब हो गई...हाँ....
""क्योकि वो मैं ही हूँ....जिसने उसे गायब किया है....समझे....""
उसकी बात सुन कर तो मेरी हैरानी का ठिकाना ही नही रहा....
मैं(मन मे)- रिचा को इसने गायब किया....पर क्यो.....??????????
अब तक मैं सोच-सोच कर परेशान हो रहा था कि रिचा को किसने गायब किया होगा...पर अब जब उसे गायब करने वाला मेरे सामने खड़ा था...तो मुझे यकीन ही नही हो रहा था...
क्योकि मेरे सामने जो सक्श खड़ा था....उसकी रग-रग से मैं वाकिफ़ था....क्यूंकी वो और कोई नही...बल्कि मेरा खास दोस्त संजू था.....
संजू- इतना मत सोच भाई...मैं सच बोल रहा हूँ....बिलीव मी....
मैं(झटके से)- तू...पर...हुह...तूने रिचा को गायब किया....वो भी मेरे सामने से...हाँ...
संजू- हाँ बिल्कुल.....
मैं(सिर हिला कर)- नो...नो...तू नही हो सकता....मैं...आहह...तू कैसे हो सकता है....
संजू(आगे बढ़ कर)- मैं जानता हूँ कि तू हैरान है ये सब सोच कर...पर ये सच है भाई....मैने ही रिचा को गायब किया है....
मैं- ओहक...चल मान लिया...पर क्या ये बताने की जहमत उठाएगा की तूने ये सब किसके कहने पर किया....ह्म...
संजू- किसी के नही...मैने उसे गायब किया....अपने लिए...
मैं(हैरानी से)- ओह...अच्छा...तूने ये सब अपने लिए किया...हाँ....पर ये तो बता कि ये सब करने से तेरा क्या फ़ायदा...हा...
संजू मेरी बात सुन कर खामोश रहा और फिर इधर-उधर देखने लगा...
मैं(उंगली दिखा कर)- देखा...पकड़ा गया....मैं जानता था....तू झूठ बोल रहा है...बिल्कुल झूठ...पर क्यो...कोई तो है...जिसके लिए तूने मुझसे झूठ बोला...कौन ..कौन है वो....???
संजू(ज़ोर से)- अंकित....मैं सच बोल रहा हूँ....मैने ही रिचा को गायब किया...और वो भी सिर्फ़ मेरे लिए...और ये सच है....पूरा सच....
मैं(घूर कर)- तेरी आँखे बता रही है कि तू सच बोल रहा है...हुह....तब तो बड़ी प्राब्लम हो गई...है ना....तूने रिचा को गायब किया...वो भी मेरे सामने से....हाँ...
संजू(नज़रे झुका कर)- ह्म...
मैं(चिल्ला कर)- पर क्यो.....???
संजू- बताउन्गा...सब बताउन्गा...पर पहले एक वादा करना होगा....
मैं- कैसा वादा....
संजू(हाथ बड़ा कर)- अगर मुझ पर भरोसा है तो वादा कर...की जो मैं कहुगा वो तू मानेगा....बोल...वादा करता है....
मैं(हाथ मिला कर)- तुझ पर आज भी उतना ही भरोसा है...जितना पहले था....चल वादा...अब बोल....
फिर मैं संजू के साथ शाम ढलने तक वहाँ बैठा रहा....संजू ने काफ़ी कुछ बताया.....और उसकी बातें सुन कर मुझे अहसास हुआ कि क्यो संजू ने मुझे अमर की फॅमिली के बारे मे नही बताया....
संजू(नम आँखो से)- अब तू ही बता....मैं क्या करता...मेरे पास कोई दूसरा ऑप्षन था ही नही ...
मैं(संजू के कंधे पर हाथ रख कर)- आज से तू अकेला नही मेरे दोस्त....मैं तेरे साथ हूँ...
संजू- थॅंक्स...मुझे पता था कि तू मेरी बात समझ जायगा...फिर भी मुझे...मुझे डर था कि तू शायद...आइ म सॉरी....
मैं(मुस्कुरा कर)- तूने अंकित की दोस्ती को पहचाना ही नही सायद....कोई नही...अब जान गया ना....अब टेन्षन फ्री हो जा....और कर तुझे जो करना है....ह्म...
संजू(मुस्कुरा कर)- ह्म...चल अब...रात हो गई ...घर चलते है...
मैं- ह्म..रात तो हो गई...चल आज बियर पीते है...पहले की तरह...बियर वित चिकन...क्या बोलता है...
संजू(मुस्कुरा कर)- तू साला टेन्षन मे भी मज़े से जीता है...चल आजा ...
और फिर हम दोनो बियर पीने अपने पुराने अड्डे पर निकल गये.......
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