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चूत देखी वहीं मार ली compleet

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वशाली और ममता विनय को छेड़ते हुए उसकी टाँग खेंच रही थी…उधर किरण भी किचन मे खड़ी विनय की तरफ देख कर मुस्करा रही थी…विनय वहाँ से उठ कर अपने रूम मे चला आया….विनय को गुस्से मे रूम की तरफ जाते देख…किरण भी उसके पीछे चली गई…विनय ने अपने रूम की लाइट ऑन की और मिरर के सामने खड़े होकर अपने गाल को देखने लगा….उसके गाल पर किरण की लिपस्टिक से बना हुआ किरण के होंठो का निशान था…विनय ने खीजते हुए उसे अपने हाथ से सॉफ करना शुरू कर दिया….गाल सॉफ करने के बाद वो जैसे ही बाहर जाने के लिए मुड़ा तो, किरण रूम मे आ गई…”क्या हुआ विनय….इतने गुस्से मे क्यों हो….”

विनय: वो कुछ नही…यहाँ पर आपकी वो वो लिपस्टिक का निशान बन गया था… सब मुझ पर हंस रहे थे…

किरण: तो क्या हुआ…हँसने दो सब को…कह देना था कि मामी ने प्यार दिया है….

किरण विनय के पास आई….”ला ज़रा दिखा तो सही निशान तो बाकी नही है..” किरण ने उसकी चिन पकड़ कर देखते हुए कहा…और फिर से उसके गालो पर अपने होंठो को लगा दिया….विनय बिदक कर पीछे हो गया…”क्या मामी…” किरण हँसते हुए बाहर चली गई…मामी जिस तरह उससे लगाव दिखा रही थी….विनय के मन मे उसके प्रति जो नफ़रत थी….वो अब वैसे-2 ख़तम होती जा रही थी…विनय ने अपने गाल को सॉफ किया और बाहर आ गया…

रात को खाना खाने के बाद जैसे-2 किरण ने अरेंज किया था…वैसे-2 सब लोगो अपने अपने रूम्स मे जाकर सोने लगे….किरण ने वशाली को पहले अपने रूम मे सोने के लिए भेज दिया…और विनय को अपने साथ काम मे लगाए रखा…करीब 30 मिनट बाद किरण ने विनय को भी रूम मे जाकर सोने के लिए….विनय के जाने बाद, किरण ने जल्दी-2 काम निपटाया और अपने रूम मे चली गई…रूम मे पहुँच कर उसने डोर को अंदर से लॉक किया….और बेड की तरफ बढ़ी…

वशाली पहले ही सो चुकी थी…पर विनय अभी सोया नही था….”क्या हुआ नींद नही आ रही है….?” किरण ने लाइट बंद करके, 0 वॉट का बल्ब ऑन करते हुए कहा…फिर किरण बेड पर आकर वशाली और विनय दोनो के बीच मे लेट गई….उसने विनय की तरफ करवट बदली, और विनय के गाल को अपने हाथ सहलाते हुए धीरे से बोली…..”विनय आज के बाद तुम मुझसे कभी नाराज़ नही होना….नही तो तुम्हारी मामी मर जाएगी…” विनय मामी की बात सुन कर भावुक हो गया….और किरण की आँखो मे झाँकते हुए बोला. “प्लीज़ मामी जी आप ऐसी बात मत करो…मे आगे से कभी भी आपसे नाराज़ नही होउंगा…” विनय की बात सुन कर किरण विनय की तरफ खिसक कर उसके और करीब हो गई. और अपनी एक बाजू को उसके पीठ पर कसते हुए, उसके गाल पर अपने दहकते हुए होंठो को लगा दिया….

विनय का गाल चूमने के बाद किरण पीछे हुई, तो विनय की नज़र मामी की लिपीसटिक लगे होंठो पर पड़ी….और उसे शाम वाली घटना याद आ गई…विनय जल्दी से अपनी गाल को सॉफ करने लगा तो, किरण हँसने लगी….”क्या हुआ…?” किरण ने विनय से हंसते हुए पूछा….”वो शाम को सब मेरा मज़ाक उड़ा रहे थे…” विनय ने किरण के आँखो मे देखते हुए कहा…

.”उड़ाने दो मज़ाक…वो क्या समझेंगे…ये तो मेरा प्यार है..मेरे शोना के लिए…और वैसे भी अब सब तो सो चुके है…कॉन देखेगा….” ये कहते हुए उसने फिर से विनय के गाल को चूम लिया…विनय फिर से अपने गाल को हाथ रगड़ते हुए सॉफ करने लगा…दोनो के फेस एक दूसरे के बिकुल करीब थी. किरण ने वासना से भरी नज़रों से विनय की तरफ देखा और फिर विनय को अपनी बाहों मे कसते हुए, उसके गालो को चूमने लगी…उसने विनय के गालो को चूमते हुए हल्का सा उसके होंठो को भी चूम लिया….

विनय मामी की इस हरक़त से एक दम चोंक गया…मामी की गरम साँसे उसके फेस पर टकरा कर उसके बदन मे सिहरन पैदा कर रही थी…उसका लंड आज भी फिर मामी के आगोश की गरमी से खड़ा होने लगा था…शॉर्ट्स मे तन रहे विनय के लंड को किरण अपनी साड़ी के ऊपेर से चूत पर महसूस करके एक दम से रोमांचित हो गई… उसने अपनी एक टाँग उठा कर विनय की कमर पर रख ली…और अपनी कमर को आगे की तरफ सरकाते हुए, अपनी साड़ी के ऊपेर से चूत को विनय के लंड के साथ सटा दिया… किरण का हाथ अब और तेज़ी से विनय के पीठ पर चल रहा था….और वो विनय के माथे को चूम रही थी…तभी दोनो की नज़रें आपस मे टकराई, तो मानो कुछ पलों के लिए वक़्त ठहर सा गया हो…दोनो एक दूसरे की उखड़ी हुई गरम सांसो को अपने चेहरे पर महसूस कर रहे थे….

पर तभी अचानक किरण के पीछे लेटी वशाली ने करवट बदली, तो दोनो एक दम से हड़बड़ा गए…किरण विनय से अलग होकर पीठ के बल सीधी लेट गई…उसका दिल रोमांच और डर के मारे जोरो से धड़क रहा था…वो तिरछी नज़रों से बार शॉर्ट्स मे तने हुए विनय के लंड को देख कर ठंडी आहे भर रही थी….पर दिल मे ये भी डर था कि, कही वशाली उठ ना जाए…अगर वो कुछ देख लेती, तो लेने के देने पड़ जाते. करीब वो 1 घंटे तक वासना के आग मे तड़पती रही…विनय का भी हाल बुरा था…नींद उसके आँखो मे भी नही थी…वो सिर्फ़ आँखे बंद किए हुए लेटा हुआ था….

किरण ने विनय और वशाली दोनो की तरफ देखा….दोनो की आँखें बंद थी…किरण ने समझा कि विनय भी अब सो चुका है….किरण की चूत मे आग बहुत ज़्यादा दहक रही थी…किरण ने धीरे-2 अपनी साड़ी और पेटिकोट को अपनी कमर तक ऊपेर उठा लिया. और अपनी वाइट कलर की पैंटी मे हाथ डाल कर अपनी चूत को अपनी उंगलियों से मसलने लगी…..उसकी हल्की-2 सिसकारियाँ जैसे ही विनय के कानो मे पड़ी, तो विनय ने जैसे ही आँखे खोल कर देखा, तो विनय के दिल की धड़कने थम गई… किरण अपनी पैंटी मे हाथ डाले हुए तेज़ी से अपनी चूत को मसल रही थी….

उसके आँखे मस्ती मे बंद हो चुकी थी….और उसके होंठ कामुकता मे काँपते हुए गजब का नज़ारा पेश कर रहे थे….

विनय वैसे लेटे -2 अपनी मामी को अपनी चूत मसलते हुए देखता रहा…उसका बस नही चल रहा था…नही तो वो मामी का हाथ उसकी कच्छि से निकाल कर उसकी चूत मे अपना लंड डाल देता…पर उसका पिछला अनुभाव मामी के साथ बहुत बुरा रहा था..इसीलिए विनय की कुछ करने की हिम्मत नही हुई….जब उंगलियों से भी किरण की चूत की आग ठंडी नही हुई तो, वो तड़प कर रह गई….

अगली सुबह विनय जब उठा, तो उस वक़्त वो रूम मे अकेला था….किरण किचन मे सब के लिए नाश्ता तैयार कर रही थी…विनय उठ कर मामी के ड्रेसिंग टेबल के सामने गया….और अपने गालो पर लगे मामी के होंठो के निशान को सॉफ करके बाहर आया…और फ्रेश होने के लिए चला गया…जब वो फ्रेश होकर बाहर आया तो किरण डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा रही थी….उसने विनय को भी नाश्ता करने के लिए कहा….तभी बाहर से अजय और किरण के पापा आए…वो सुबह-2 कही गये थे…”पापा आप लोग सुबह-2 कहाँ से आ रहे हो…?” किरण ने अपने पापा से कहा….”वो बेटा सामने जो मकान खाली पड़ा है ना….उसको एक 15 दिन पर किराए पर लिया है…उसी की बात करने गए थे….”

किरण : पर उसकी ज़रूरत ही क्या थी….

अजय: मेने भी कहा था….पर पापा माने ही नही….

“वो बेटी शादी मे बहुत सारे मेहमान आने वाले है….इसलिए किराए पर मकान ले लिया…नही तो बाद मे . होती….” किरण के पापा और अजय भी डाइनिंग टेबल पर बैठ कर नाश्ता करने लगे….आज सब लोग शॉपिंग के लिए जा रहे थी….अंजू सुबह 11 बजे घर का सारा काम निपटा कर चली गई थी….ममता ने किरण को भी साथ मे चलने के लिए कहा तो, किरण ने मना कर दिया….किरण और विनय को छोड़ कर सब शॉपिंग के लिए चले गए…किरण ने कुछ पैसे देकर वशाली को भी साथ मे भेज दिया….ताकि वो अपने लिए कुछ शॉपिंग कर सके….और उसे विनय के साथ घर पर अकेले रहने का मोका मिले….सब लोग अब शाम से पहले वापिस नही आनने वाले थे. सब के जाने के बाद किरण ने गेट बंद किया और मूड कर हाल मे वापिस आई तो, देखा विनय हॉल मे बैठा हुआ टीवी देख रहा था….

वो सीधा किचन मे चली गई…..और परात मे आटा डाल कर पानी के साथ ले आई. उसने परात को नीचे रखा और आटे मे पानी डाल कर उसके गॉन्ठने के लिए नीचे पैरो के बल बैठ गई…किरण ने ऑरेंज कलर की साड़ी पहनी हुई थी… बैठने से पहले उसने अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से हटा कर अपनी कमर मे फँसा लिया था….और अपनी साड़ी और पेटिकोट को अपनी जाँघो तक ऊपेर उठा लिया था… टीवी देख रहे विनय का ध्यान जैसे ही किरण पर पड़ा…तो विनय की आँखे खुली की खुली रह गई…किरण का गोरा बदन उस ऑरेंज कलर की साड़ी मे और भी ज़्यादा गोरा लग रहा था….उसकी चुचियाँ उसके कसे ब्लाउज मे से बाहर आने को तड़प रही थी.. और उसकी गोरी-2 मांसल जांघे देख विनय का कलेजा मुँह को आ गया…

 


साड़ी और पेटिकोट के बीच से किरण की जाँघो का अन्द्रुनि भाग काफ़ी अंदर तक दिखाई दे रहा था…विनय बार-2 चोर नज़रों से उसकी जाँघो के बीच मे छुपी हुई चूत को देखने की कॉसिश कर रहा था….इस बात का अहसास किरण को भी हो गया था…वो मंद-2 मुस्कराते हुए बीच-2 मे विनय के फेस पर आई हुए बेसबरी को देख रही थी….किरण ने आटा गूँथा और फिर खड़ी होकर परात को किचन मे रखने चली गई…किरण किचन से निकल कर शवर लेने के लिए बाथरूम मे चली गई…विनय उठ कर अपने रूम मे चला गया….किरण शवर लेने के बाद अपने रूम मे आई, और अपने अगले कदमो के बारे मे सोचने लगी…तभी उसके दिमाग़ मे कुछ आया.

दूसरी तरफ विनय के दिमाग़ मे अभी भी कसमस जारी थी….उसे समझ मे नही आ रहा था कि, मामी ये सब उसके साथ जान बुझ कर रही है या फिर ये सब उसके दिमाग़ का वहम है…तभी किरण ने उसे आवाज़ देकर अपने रूम मे आने के लिए कहा… विनय अपने ख्यालों की दुनिया से बाहर आया…और उठ कर बाहर गया…और किरण के रूम मे चला गया….जैसे ही विनय किरण के रूम मे दाखिल हुआ…विनय के पाँव वही रुक गए….मामी उसकी तरफ पीठ किए हुए खड़ी थी….किरण के बदन पर रेड कलर का पेटिकोट और रेड कलर की ब्रा थी…अपनी मामी को वो पहली बार इस तरह ब्रा मे खड़ी देख रहा था….उसके लंड को मानो जैसे करेंट लगा हो….विनय का लंड एक दम से उछलते हुए खड़ा हो गया…किरण ने फेस घुमा कर पीछे खड़े विनय की तरफ देखा, “विनय ज़रा मेरी ब्रा का हुक्स तो लगा दे….मुझसे बंद नही हो रहा…”

ये कहते हुए किरण ने अपना फेस आगे की तरफ कर लिया…अपनी मामी की नंगे पीठ और कमर देख कर विनय का लंड उसके शॉर्ट्स में जबरदस्त झटके पे झटके मार रहा था. वो काँपते हुए कदमो से किरण की तरफ बढ़ा….और किरण के पीछे जाकर खड़ा हो गया. उसके हाथ पैर बुरी तरह से कांप रहे थे….”विनय…” किरण ने विनय को आवाज़ दी… तो विनय जैसे सपनो की दुनिया से बाहर आया हो…विनय ऐसे बोखला गया…”जी जी मामी….” उसने अपनी मामी की नंगी पीठ और कमर की तरफ देखते हुए कहा…. “ब्रा के हुक बंद कर दे जल्दी….” किरण ने आगे की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा… तो विनय ने अपने काँप रहे हाथो को उठाया…और धीरे-2 किरण के ब्रा के स्ट्रॅप्स को पकड़ कर हुक लगाने के लिए जैसे ही खेंचा तो, किरण के मुँह से आहह निकल गई.

मामी के मुँह से आह सुनते ही, विनय की हालत और पतली हो गई….उसने जल्दी-2 किरण के ब्रा का हुक लगाया…और मूड कर जैसे ही वापिस जाने लगा तो, किरण ने उसे आवाज़ देकर रोक लिया…उसने अपनी साड़ी के पल्लू से रेड कलर की ब्रा मे कसी हुई चुचियों को ढकते हुए, विनय की तरफ पलट कर देखा…..और मुस्कराते हुए बोली. “विनय मेरा एक काम करेगा…?” किरण ने विनय की तरफ बढ़ते हुए कहा… तो विनय के माथे पर पसीना उभर आया…उसके होंठ सूखने लगी….”जी जी कहिए मामी….” विनय ने अपने गाले का थूक गटकते हुए कहा….

किरण: वो जो मिनी आंटी है ना रिंकी के घर के बगल मे रहती है…..?

विनय: जी….

किरण: उसके पास इस साड़ी का ब्लाउज ले जा…..और कह देना कि मामी ने इसे थोड़ा टाइट करने के लिए कहा है…बहुत ढीला है….(किरण ने सोफे पर बैठते हुए कहा….)

विनय: कहाँ है ब्लाउज…..?

किरण: वो वहाँ बेड पर पड़ा है…

किरण ने अपनी एक बाजू को उठा कर कोहनी से मोड़ कर सोफे की पुष्ट को पकड़ते हुए कहा….किरण के ऐसा करने से विनय की नज़रो के सामने मामी की एक साइड सॉफ नज़र आ रही थी….मामी के आर्मपिट और कसी हुई रेड कलर की ब्रा को देख कर विनय का लंड बुरी तरह से अकड़ गया….

विनय बेड की तरफ बढ़ा….और वहाँ पड़े हुए रेड कलर के ब्लाउज को उठा कर जैसे ही वापिस मुड़ा, तो मामी ने अपनी जवानी की कातिल अदाओं से जैसे विनय के दिल पर छुरी चला दी हो….किरण सोफे की पुष्ट के साथ अब झुक कर लगभग अध लेटी हुई हालत मे बैठी हुई थी….उसकी साड़ी का पल्लू सरक कर उसकी जाँघो पर आ चुका था…किरण के गोरे-2 रंग की मोटी चुचियाँ उसकी रेड कलर के ब्रा मे से बाहर आने को तड़प रही थी….विनय के लंड मे ये सब देख कर तेज सरसराहट होने लगी थी….

विनय जल्दी से किरण के रूम से बाहर चला गया….विनय के जाते ही, किरण ने अपनी चुचियों को फिर से पल्लू को ढक लिया….और सोफे पर बैठे -2 मुस्कराने लगी…करीब 20 मिनट बाद विनय घर वापिस आया…और गेट लॉक करके सीधा मामी के रूम मे चला गया….और ब्लाउज अपनी मामी को दे दिया….किरण खड़ी हुई, और उसकी तरफ पीठ करके ब्लाउज पहनने लगी…ब्लाउज पहनने के बाद वो विनय की तरफ मूडी….और फिर प्यार से उसका गाल सहलाते हुए बोली…”थॅंक्स विनय…..”

विनय बहुत ज़्यादा कन्फ्यूज़्ड हो गया था…..उसे भले ही इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि, मामी उसे लाइन दे रही है….पर फिर भी वो खुद कुछ करने से कतरा रहा था…”अब ठीक है….ये ब्लाउज अब बिल्कुल मेरी फिटिंग का हो गया है….विनय तुम्हे पता है…मे ये साड़ी शादी के दिन पहनने वाली हूँ….इसलिए आज पहन कर देख लिया. नही तो शादी के दिन पता चलता तो उस समय क्या करती…अच्छा अब मे चेंज करके आती हूँ….” ये कह कर किरण रूम से बाहर चली गई….विनय वही बैठ गया. किरण बाथरूम के पास जाकर खड़ी हो…और कुछ देर उसने वही खड़े होकर अपने रूम की तरफ देखा….जब विनय बाहर नही आया तो, वो जल्दी से बाथरूम मे घुस गई….और अपनी साड़ी ब्लओज पेटिकोट ब्रा पैंटी सब कुछ उतार कर ब्लॅक कलर की ब्रा और डार्क ब्लू कलर की प्रिंटेड पैंटी पहन ली….किरण की पैंटी उसके चुतड़ों के हिसाब से थोड़ी छोटी थी…

वो अपने उतारे हुए कपड़ों को पकड़ कर वैसे ही बाहर आ गई….और अपने रूम के डोर के पास पहुँच कर उसने अंदर झाँका तो, देखा कि, विनय बेड पर लेटा हुआ है. वो कुछ देर वही रुकी….और फिर ऐसे रूम मे दाखिल हुई, जैसे उसे लग रहा हो कि, उसके रूम मे और कोई ना हो…जैसे ही किरण रूम के अंदर आई, विनय अपनी मामी को सिर्फ़ ब्रा और पैंटी मे देख कर एक दम से चोंक गया…उसकी आँखे खुली की खुली रह गई….तभी किरण ने विनय की तरफ देखा और ऐसे रिएक्ट किया….जैसे वो विनय को देख कर घबरा गई हो….”ओह्ह्ह्ह विनय तुम हो….तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी…मेने सोचा कि तुम अपने रूम चले गए होगे….” किरण ने होंठो पर कातिल मुस्कान लाते हुए कहा….तो विनय बेड से नीचे उतरने लगा….

किरण: नही-2 लेटे रहो….वो तो मे डर गई थी…तुम ही तो हो….और अपने शोना से क्या शरमाना…(किरण ने विनय की नज़रों का पीछे करते हुए कहा…)

विनय की नज़रें मामी की पैंटी के ऊपेर से बाहर झाँक रही उसकी काली घनी झान्टो पर अटकी हुई थी….उसका लंड शॉर्ट्स मे रह-2 कर झटके खा रहा था…मामी ने तो आज उसके लंड पर बहुत ज़्यादा अत्याचार कर दिया था….तभी विनय ने मामी के चेहरे की तरफ देखा, तो उसे पता चला कि, मामी ने उसको उसकी झान्टो की तरफ घुरते हुए देख लिया है…अब गड़बड़ हो गई है…विनय ने अपना सर झुका लिया…. “ये पैंटी छोटी हो गई है…ठीक से फिट भी नही आ रही….

किरण ने अलमारी खोली और अपने कपड़े लेकर बाथरूम मे चली गई….थोड़ी देर बाद डोर बेल बजी तो किरण ने बाथरूम से आवाज़ देते हुए, विनय को गेट खोलने के लिए कहा…जब विनय ने गेट खोला तो, देखा के सामने शीतल अपने बच्चों को लेकर खड़ी थी….शीतल अंदर आ गई तो विनय ने गेट बंद कर दिया…शीतल और किरण दोनो हॉल मे बैठ कर बातें करने लगी….विनय भी वही बैठा हुआ था….तभी विनय की नज़र टेबल पर पड़ी मेडिसिन की एक बॉटल पर पड़ी….”मामी ये किसकी दवाई है..?” विनय ने मेडिसिन की बॉटल किरण को दिखाते हुए कहा…

किरण: ये तो पापा की दवाई है….जा उनके रूम मे रख आ…उनकी नींद की गोलियाँ है….(ये कह कर किरण वशाली को खाना देने के लिए रूम मे चली गई….)

विनय बॉटल लेकर ऊपेर चला गया…वो टॅब्लेट्स की बॉटल को जैसे ऊपेर जाकर टेबल पर रखने लगा तो, अचानक से उसके दिमाग़ मे कुछ आया…उसने जल्दी से घबराते हुए उस बॉटल से दो टॅब्लेट्स निकाल ली….और उसे पॉकेट मे डाल कर नीचे आ गया…नीचे आने के बाद वो सीधा अपने रूम मे चला गया…उसने अपने रूम मे वियाग्रा की टॅब्लेट्स छुपा कर रखी थी….जो उसको रामू ने खरीद कर दी थी. विनय ने उसमे एक टॅबलेट निकाली और बाकी की सभी टॅब्लेट्स वही छुपा कर रख दी…विनय जैसे ही बाहर आया तो, किरण अपने रूम से निकल रही थी…”विनय तुम्हारे लिए भी खाना लगा दूं…” किरण ने मुस्कराते हुए कहा…..

विनय: जी मामी लगा दीजिए…

किरण किचन मे अपने लिए और विनय के लिए खाना लेने चली गई…खाना खाने के बाद वो काफ़ी देर वहाँ बैठे किरण से बातें करती रही…और फिर शीतल और किरण दोनो वही चटाई पर ही सो गई….शीतल के बच्चे और विनय सब विनय के रूम मे जाकर सो गए….शाम के 6 बजे डोर बेल बजी तो, किरण नींद से उठी… उसने बाहर जाकर गेट खोला तो देखा कि सभी शॉपिंग करके वापिस आ चुके थे…आज विनय और किरण दोनो ही काफ़ी देर तक सोते रहे थे….इसलिए आज वो बहुत ज़्यादा फ्रेश महसूस कर रहे थे….रात को खाना खाने बाद सब लोग धीरे-2 अपने कमरो मे जाने लगे…किरण ने विनय और वशाली के लिए दूध ग्लास मे निकाला वशाली को आवाज़ दी…कि वो आकर अपने लिए और विनय के लिए दूध ले जाए….

वशाली: मम्मी मैं बाथरूम मे जा रही हूँ….प्लीज़ आप विनय को बोल दो ना…

विनय तो जैसे इसी मोके की तलाश मे बैठा हुआ था….वो जल्दी से किचन मे गया….”मुझे दे दो मामी जी….मैं ले जाता हूँ….” किरण ने दोनो ग्लास विनय को पकड़ाए और विनय दूध के दोनो ग्लास बाहर लेकर आ गया….फिर वो सीधा किरण के रूम मे गया…और दोनो ग्लास टेबल पर रख दिए…ममता और किरण दोनो किचन मे बिज़ी थी….बाकी के सभी लोग अपने -2 रूम्स मे जा चुके थे… विनय ने जल्दी से अपनी पेंट की पॉकेट से एक पूडिया निकाली….जिसमे उसने उन दोनो टॅब्लेट्स को पीस कर पाउडर बना रखा था…उसने उस पाउडर को एक ग्लास मे डाल कर जल्दी से मिक्स किया और फिर पेंट की पॉकेट से वियाग्रा की टॅबलेट निकाली और दूध के साथ उसे निगल गया.

उसके बाद विनय बेड पर बैठ कर आराम से दूध पीने लगा….दूध ठंडा था… थोड़ी देर बाद वशाली अंदर आई, तो उसने दूध का ग्लास उठाया और एक ही साँस मे पूरा का पूरा ग्लास ख़तम विनय की तरफ देखा…”तुमने दूध पी लिया हो तो लाओ मे ग्लास मम्मी को दे आती हूँ….” विनय ने भी ग्लास खाली किया और वशाली को पकड़ा दिया….वशाली ग्लास लेकर किचन मे चली गई….और फिर ग्लास किरण को देने के बाद वापिस आई और बेड पर लेट गई….

10 मिनट मे ही नींद की गोलयों ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था…और अगले 5 ही मिनट मे वशाली सपनो की दुनिया मे पहुँच चुकी थी…10 मिनट और बीते तो, किरण रूम मे आई…विनय अपनी आँखे बंद किए हुए ऐसे लेटा हुआ था. जैसे कि वो गहरी नींद मे सो रहा हो…पर किरण जानती थी कि, विनय जाग रहा है…क्योंकि वो दोनो दोपहर को काफ़ी देर तक सोते रहे थे….और इतनी जल्दी नींद आना मुस्किल था….किरण ने रूम मे आने के बाद….अपनी साड़ी उतारी और ब्लाउज और पेटिकोट उतार कर अलमारी मे रख दिया..और एक पतला सा साड़ी पेटिकोट और ब्लाउज निकाल कर पहन लिया…किरण ने लाइट ऑफ की और 0 वॉट का बल्ब जला कर बेड पर चढ़ गई…. …

किरण विनय के पास आकर लेट गई….उसने विनय के सर को हिलाते हुए धीरे-2 से आवाज़ दी…”विनय सो गए क्या….?” तो विनय ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया…किरण ने करवट बदली और पीठ के बल सीधी होकर लेट गई….किरण ने वशाली की तरफ देखा..जो उनकी तरफ पीठ करके सो रही थी…किरण मन ही मन सोच रही थी कि, कितना अच्छा होता अगर वशाली इस रूम मे ना होती….तो आज रात तो वो ज़रूर अपनी चूत की प्यास को बुझा ही लेती…किरण वैशाली की माजूदगी से सतर्क थी…इसीलिए किरण अपने अंदर छुपी हुई वासना की आग को दबाए हुए थी…उसने वशाली की तरफ मुँह करके करवट बदली और सोने की कॉसिश करने लगी…वो नही चाहती थी कि, वो कुछ ऐसा करे कि, उसकी चूत की आग फिर से सुलगने लग जाए…और उसे तड़पते हुए सोना पड़े….

 


किरण इस बात से अंज़ान थी कि, विनय ने आज के लिए क्या प्लान कर रखा है….इधर विनय के लंड पर वियाग्रा का असर अब उफ्फान पर था…उसका लंड शॉर्ट्स को फाड़ कर बाहर आने के लिए मचल रहा था….पर अभी भी उसकी हिम्मत नही हो रही थी कि, वो कुछ कर सके….वो करवट के बल लेटा हुआ मामी की पीठ को देख रहा था…मामी की साड़ी और पेटिकोट मे उभरी हुई गान्ड को देख कर उसका लंड झटके पे झटके खा रहा था… करीब 20 मिनट तक वो ऐसे ही लेटा रहा….किरण को अब नींद आनी शुरू हो गई थी….उसकी आँखे नींद के कारण भारी होने लगी थी…. किरण भी सपनो की वादियों मे पहुँच चुकी थी…विनय की भी अब बर्दास्त से बाहर हो चुका था. रात के करीब 12 बाज चुके थे….किरण को अपने चुतड़ों की दरार मे कुछ गरम और सख़्त से चीज़ चुभती हुई महसूस हुई,

जो उसकी गान्ड के छेद पर रगड़ खा रही थी….किरण अपनी गान्ड के छेद पर हो रही सरसराहट के कारण उठ गई थी…जब उसे अहसास हुआ कि, कोई मोटी और सख़्त चीज़ उसके चुतड़ों की दरार मे आगे पीछे हो रही है, तो उसने अपनी आँखे खोली तो उसका कलेजा मुँह को आ गया….उसकी साड़ी उसके चुतड़ों तक ऊपेर उठी हुई थी….उसकी पैंटी उसकी जाँघो तक नीचे उतरी हुई थी….और विनय का हाथ उसकी नाभि के पास था…विनय उससे बिकुल चिपका हुआ था…

उसका लंड किरण अपनी गान्ड के छेद पर रगड़ ख़ाता हुआ सॉफ महसूस कर पा रही थी…जब विनय के लंड का गरम सुपाडा उसकी गान्ड के छेद पर रगड़ ख़ाता तो, किरण के रोम-2 मे मस्ती की लहर दौड़ जाती… और उसके चूतड़ आपस मे भिन्चने लगते….

किरण बहुत ज़्यादा घबरा गई थी….दूसरी तरफ वशाली पीठ के बल लेटी सो रही थे… उसके दिल मे इस बात का खोफ़ बैठा हुआ था कि, कही वशाली ने उठ कर उसे और विनय को इस हालत मे देख लिया तो, बहुत बड़ी गड़बड़ जो जाएगी….और ना ही वो विनय को माना कर सकती थी….क्योंकि अगर वो विनय को रोकती, तो विनय को पता चल जाता कि वो सो नही रही थी…इससे पहले कि किरण कुछ सोच पाती…विनय ने अपना हाथ उसके पेट से उठा कर उसकी दोनो जाँघो के बीच मे रखते हुए, उसकी ऊपेर वाली टाँग को हल्का सा उठा कर आगे की तरफ सरका दिया…जैसे ही किरण की ऊपेर वाली टाँग नीचे वाली टाँग से उतरी, तो विनय का लंड उसकी गान्ड के छेद पर रगड़ ख़ाता हुआ लंड का सुपाडा किरण की चूत की फांको के बीचो-बीच आ लगा…

अपने भानजे के लंड के सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही, उसकी चूत पिघल उठी….विनय को अपने लंड के सुपाडे पर मामी की चूत से रिस्ता हुआ गरम पानी सॉफ महसूस हो रहा था…जिसे महसूस करके विनय एक दम मदहोश हो गया था…उसने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर मामी की चूत के छेद पर सेट करते हुए आगे की तरफ पुश किया तो, लंड का सुपाडा मामी की पानी से लबलबा रही चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा…”सीईईईईईईईईईईईईईईईईईई” किरण ने सिसकते हुए बेड शीट को अपनी मुट्ठी मे दबोच लिया….अपने भान्जे के लंड के गरम सुपाडे को अपनी चूत के छेद मे दहकता हुआ महसूस करते ही, किरण की आँखे मस्ती मे बंद होती चली गई….उसकी चूत के छेद ने विनय के लंड के सुपाडे को ऐसे दबाना शुरू कर दिया… जैसे उसकी चूत विनय के लंड को दबा कर अंदर की ओर ले लेना चाहती हो…

किरण जिस हालत मे थी….उसे डर था कि, कही वशाली ना उठ जाए…फिर किरण ने सोचा कि शायद विनय उस दिन की तरह थोड़ी देर अंदर रुकने के बाद ढीला पड़ जाएगा..और वो खुद ही सो जाएगा….तभी उसे अपनी चूत की दीवारो पर विनय के लंड के सुपाडे की रगड़ महसूस हुई….उसे अपनी चूत की दीवारें बुरी तरह खुलती हुई महसूस हो रही थी….विनय का लंड धीरे-2 मामी की चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर घुसता जा रहा था….किरण को अपनी चूत पूरी तरह से भरती हुई महसूस हो रही थी…किरण अपनी मस्ती से भरी अध खुली आँखो से वशाली की तरफ देख रही थी. धीरे-2 विनय का पूरा लंड किरण की चूत की गहराइयों मे समा गया…”हाइई इस कंज़र का इतना बड़ा है…..मेरी पूरी फुद्दि भर दी…काश आज वशाली यहाँ ना होती. तो उछल -2 कर तेरे लंड को अपनी चूत मे लेती….” किरण ने मन ही मन सोचा…

विनय के लंड का सुपाडा किरण की चूत की गहराइयों मे कोहराम मचा रहा था… जिसे किरण अपनी बच्चेदानी को चूमता हुआ महसूस कर रही थी…किरण के रोंगटे रोमांच के मारे खड़े हो चुके थे….विनय कुछ देर ऐसे ही रुका रहा…फिर उसने धीरे-2 अपने लंड को बाहर निकालना शुरू किया….तो किरण को फिर से मस्त कर देने वाली रगड़ अपनी चूत की दीवारो पर महसूस हुई, तो उसने अपने दाँतों मे तकिये को दबा कर अपने आप को सिसकने से रोका….और फिर जैसे ही विनय का लंड आधे से ज़यादा बाहर आया तो, विनय ने फिर से अपने लंड को अंदर करना शुरू कर दिया….किरण अपनी चूत की दीवारो को रगड़ते हुए विनय के लंड को महसूस करते हुए मदहोश होती जा रही थी…1 घस्सा….अहह दूसरा आहह उंह सीईईईईईई ओह्ह्ह्ह तीसरा.. रुक जा विनय उंह

किरण मस्ती के सागर मे गोते खाते हुए, विनय के धक्कों को गिन रही थी….ये सोच कर कि विनय अब झड जाएगा….पर किरण क्या जाने उसके लाड़ले ने आज उसकी क्या हालत करनी है…चार ओह हाइईए आज खैर नही किरण….उंह सीईईईईईई….” इधर विनय अब धीरे-2 अपनी रफ़्तार को बढ़ाने लगा था….मामी ने किसी बच्चे को जनम नही दिया था…इसलिए उसकी चूत ममता जितनी ही टाइट थी…विनय भी आज मामी के स्वर्ग के द्वार पर पहुँच कर मदहोश हुआ जा रहा था…मामी की चूत भी अपने भानजे के लंड पर अपने कामरस का लेप लगा कर उसे चिकना बना रही थी. जिससे विनय का लंड मामी की गरम चूत मे फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था.

जब विनय का पूरा लंड किरण की चूत मे घुसता तो, विनय की जांघे मामी के चुतड़ों पर चिपक जाती….अपने चुतड़ों को विनय की जाँघो के नीचे दबते हुए महसूस करके, किरण के बदन मे कपकपि सी दौड़ जाती…किरण अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी…तभी किरण की दूसरी तरफ लेटी वशाली नींद मे हिली तो, किरण एक दम से घबरा गई….और बिना पलके झपकाए वशाली की तरफ देखती रही…पर विनय तो जैसे अपने ही धुन मे मगन था….अब वो अपने लंड को सुपाडे तक मामी की चूत से बाहर निकाल-2 कर पेल रहा था…वशाली के हिलने से खोफ़ज़ादा किरण धीरे-2 उल्टी होने लगी…ये सोच कर कि, विनय का लंड उसकी चूत से बाहर आ जाएगा….पर जैसे -2 वो पेट के बल उल्टी होती गई…वैसे-2 विनय उसके ऊपेर आता गया…

और फिर एक पल ऐसा आया कि, जब विनय अपनी मामी के ऊपेर लेटा हुआ अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था….उसने मामी की चूत मे धक्के मारते हुए किरण की कमर को दोनो तरफ से पकड़ा और उसको ऊपेर उठाने लगा….किरण को भी मजबूरी मे अपनी गान्ड को उठाते हुए घुटनो के बल होना पड़ा….जैसे ही किरण घुटनो के बल होकर डॉगी स्टाइल मे आई…विनय एक दम से जोश मे भर उठा….

 


उसने अपने लंड को पूरी रफ़्तार से मामी की चूत की गहराईयो मे उतारना शुरू कर दिया…किरण ने भी हालात के सामने अपने हथियार डाल दिए…और विनय के लंड को अपनी चूत मे अंदर बाहर होते हुए रगड़ खाते महसूस करने लगी….विनय के लंड का सुपाडा जब उसकी चूत की गहराइयों मे जाकर उसकी बच्चेदानी से टकराता तो, किरण के पूरे बदन मस्ती की लहर दौड़ जाती…..

विनय के जबरदस्त झटको से किरण झड़ने के करीब पहुँच गई…उसकी चूत ने अंदर ही अंदर विनय के लंड को दबाना शुरू कर दिया….किरण को अपनी चूत मे तेज खीचाव महसूस होने लगा…उसका बदन अकड़ने लगा…और फिर झड़ते हुए उसकी कमर ने झटके खाने शुरू कर दिए…झड़ते हुए किरण की चूत ने विनय के लंड को अपनी दीवारो मे ऐसा भींचा कि, विनय भी और देर ना टिक पाया…और मामी की चूत की गहराइयों मे अपने वीर्य की बोछार कर दी….विनय अपने लंड को किरण की चूत की गहराइयों मे दबाए हुए, तेज-2 साँसे लेता रहा…फिर जैसे ही विनय का लंड सिकुड कर किरण की चूत से बाहर आया…तो किरण बेड पर लूड़क गई….

विनय ने अपना शॉर्ट्स जल्दी से उठाया…और पहन कर डोर खोल कर बाहर चला गया… विनय के जाने के बाद किरण बदहवास सी उठी और उठ कर बैठते हुए अपनी चूत की तरफ देखने लगी…उसकी चूत के झान्टे और फांके दोनो उसके कामरस और विनय के वीर्य से सनी हुई थी….उसने अपनी पैंटी को पकड़ और अपनी चूत और झान्टो पर लगे हुए पानी को सॉफ किया….

तो ये देख कर किरण की आँखे खुली की खुली रह गई…कि उसके पैंटी उस पानी से पूरी तरह भीग गई थी…आज तक उसकी चूत ने भी इतना पानी नही फेंका था…

किरण ने अपनी चूत को पैंटी से सॉफ किया…और बेड पर लेट गई…..विनय भी अपने लंड को सॉफ करके वापिस रूम मे आ गया….और बेड पर लेट गया….विनय दिल ही दिल मे खुशी से झूम रहा था…वो अपनी मामी की तरफ करवट किए हुए लेटा हुआ था…मामी की कमर के कटाव को देखते हुए उसका लंड फिर से उसके शॉर्ट्स मे झटके खाने लगा था…मामी के किसी तरह का विरोध और गुस्सा ना करने से विनय की हिम्मत अब बढ़ चुकी थी….वो फिर से मामी की तरफ खिसक कर मामी के पीछे से लिपट गया…जैसे ही किरण को अपनी साड़ी के ऊपेर से विनय के तने हुए लंड का अहसास हुआ तो, किरण एक दम से चोंक गई….”हाइए इस कंज़र का तो अभी भी कितना सख़्त खड़ा है….लगता है आज रात ये मुझे सोने नही देगा….और ज़रूर मुझे मरवाएगा…” हालाकी विनय के लंड के ताँव को महसूस करके किरण की चूत भी फडफडाने लगी थी….

पर उसे पास मे लेटी हुई वशाली के जाग जाने का डर था…इसीलिए अब वो और रिस्क नही लेना चाहती थी….उसने विनय के हाथ को पकड़ कर झटक दिया…और धीरे से फुसफुसा..वशाली जाग जाएगी…विनय मन ही मन मुस्करा पड़ा…किरण कहाँ जानती थी कि, विनय ने उसे नींद की गोलियाँ दे रखी है…पर वो ये बात अपनी मामी को बताने से डर रहा था…इसीलिए विनय ने भी चुप चाप सो जाना ही सही समझा…अगली सुबह जब विनय उठा तो, बेड पर कोई नही था….विनय ने टाइम देखा तो सुबह के 9 बज चुके थे….विनय जब उठ कर बाहर आया तो, किरण सभी फॅमिली मेंबर्ज़ के साथ बैठी हुई बातें कर रही थी…अजय अपनी शॉप पर जा चुका था…किरण के पापा कह रहे थे कि, वो और उनकी पत्नी आज रिस्तेदारो को कार्ड बाँटने के लिए जा रहे है…और ममता अपने पति और भाई के साथ अपने ससुराल जा रही है…..क्योंकि जब से ममता का पति अब्रॉड से वापिस आया था…वो अपने घर नही गया था….

किरण ने विनय को फ्रेश होने के लिए कहा….जब विनय फ्रेश होकर आया तो, किरण ने उसका नाश्ता टेबल पर लगा दिया…विनय नाश्ता करने लगा…नाश्ते के बाद वो वही बैठ कर टीवी देखने लगा…ममता उसका हज़्बेंड और उसका भाई ममता की ससुराल मे जाने की तैयारी कर रहे थे…किरण ने ममता को वशाली को भी साथ मे लेजाने के लिए कहा तो, ममता खुशी-2 मान गई….दोपहर के करीब 1 बजे सब लोग एक साथ घर से निकल गए…पीछे विनय और किरण घर अकेले रह गए….सब लोगो के जाने बाद किरण ने गेट बंद किया और हॉल मे आ गई….जहाँ पर विनय बैठा टीवी देख रहा था…किरण ने अपनी साड़ी के पल्लू से अपने चुचियों पर आए हुए पसीने को सॉफ करते हुए विनय की तरफ देखा तो, पाया कि वो उसके ब्लाउज के ऊपेर से झाँक रही चुचियों को तरस रही नज़रों से देख रहा था….

किरण: (होंठो पर कामुक मुस्कान लाते हुए….) विनय तुम बहुत खराब होते जा रहे हो आज कल….

विनय मामी के बात सुन कर एक दम से हड़बड़ा गया…..कल रात जो भी हुआ था…वो खामोशी से हुआ था….और विनय इस बात के लिए बिल्कुल भी तैयार नही था कि, जब मामी से आमना सामना होगा तो वो क्या जवाब देगा….विनय ऐसे चोंक कर हड़बड़ाया जैसे नींद से जागा हो..”जी जी क्या…?” किरण विनय की हालत पर मुस्कुराते हुए बोली…” क्या जी जी तुम बहुत शैतान हो गए हो….कल रात कितना तंग किया मुझे….तुम्हे शरम नही आई मेरे साथ ये सब करते हुए…मे तो वशाली की वजह से तुम्हे कुछ कह भी नही पाई….” ये सुनते ही जैसे विनय की गान्ड से हवा निकल गई….उसके चेहरे का रंग एक दम से उड़ गया….वो कुछ पल अपने सर को झुकाए हुए सहमा सा बैठा रहा….”अब बोलता क्यों नही….” किरण ने विनय का हाथ पकड़ कर हिलाते हुए कहा…तो विनय ने किरण के चेहरे की तरफ देखा…..

और अपने गाले का थूक निगलते हुए बोला….”वो वो आप मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो…” विनय की बात सुन कर किरण के होंठो पर जो मुस्कान थी वो और फेल गई… “अच्छा अच्छी लगती हूँ तो वो सब करेगा मेरे साथ बोल….” किरण ने झुक कर अपने ब्लाउज मे कसी हुई चुचियों को दिखाते हुए कहा…पर विनय मामी की बात का कोई जवाब नही दे पाया…”बोल ना तुम्हे पता है तुमने कितना बड़ा ग़लत काम किया है..? “ अब विनय की हालत और पतली हो गई….किरण भी इस बात को भाँप गई थी कि, विनय बातो का खेल खेलना नही जानता….”हां पता है….” विनय ने नीचे सर झुकाए हुए कहा….”पता है फिर भी तुमने वो ग़लत काम मेरे साथ किया…?” अब विनय ने भी अपनी बात क्लियर करने का फैंसला कर लिया था…”मुझसे कंट्रोल नही होता. “ विनय ने आख़िर अपनी दिल की बात कह ही दी….

किरण: किस पर कंट्रोल नही होता..क्या कंट्रोल नही होता तुझसे…?

विनय: जब मैं आपको देखता हूँ….

किरण: मुझे देखता है तो क्या….अच्छा जैसे तू अब मेरे मम्मो को देख रहा है…

 
किरण ने आग मे और घी डाल कर उसको भड़काया….”अच्छा क्या दिल करता है..जब तू मेरे मम्मो को देखता है….” विनय चुप रहा अब और आगे बोलने की हिम्मत नही हुई…”बोल क्या दिल करता है कि, मामी के मम्मो को चुसू….” किरण ने खुद ही विनय के मन मे छुपी हुई बात को कह दिया…और विनय के पास आकर सोफे के ऊपेर झुकते हुए अपनी चुचियों को उसके चेहरे के करीब ले गई…”बोल विनय तुम्हारा यही दिल करता है ना….कि तुम मेरे मम्मो को चूसो….?” विनय ने अपने सर को उठा कर मामी की आँखो मे देखा….और फिर घबराते हुए हां मे सर हिला दिया… “अच्छा मेरे मम्मे चूस कर तेरे कलेजे को ठंडक मिल जाएगी…बोल…जल्दी बोल…?” किरण ने इस बार विनय की चिन को पकड़ कर उसकी आँखो मे देखा…तो विनय ने फिर से अपने गाले का थूक गटकते हुए हां कह दिया….”हाइए विनय तू कितना बेशरम हो गया है….देख रात को तू मुझे तंग मत करना…अगर वशाली देख लेती तो तेरी क्या हालत करनी थी तेरे मामा ने तू सोच भी नही सकता….”

किरण: देख मे तुम्हे अपने मम्मे चुसवा देती हूँ…पर इससे आगे कुछ करने की कॉसिश भी मत करना….और ना दोबारा मुझे तंग करना…

ये कहते हुए किरण ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया…और विनय की जाँघो के दोनो तरफ अपने घुटनो को टिकाते हुए सोफे पर बैठ गई…उसने मुस्कराते हुए विनय की तरफ देखा….और फिर अपने ब्लाउज के हुक्स खोलने लगी..विनय ये सब अपनी हैरानी से भरी आँखो से देखते हुए अपने गले का थूक बार-2 गटक रहा था….जैसे जैसे मामी के ब्लाउज के हुक्स खुल रहे थी….वैसे वैसे विनय की आँखो के सामने मामी के ब्लॅक कलर की ब्रा में कसी हुई चुचियाँ सामने आती जा रही थी…विनय की हालत देख कर किरण अंदर ही अंदर ख़ुसी से उछल रही थी....किरण ने अपने ब्लाउज के हुक्स खोल कर अपनी ब्रा के कप्स को नीचे से पकड़ कर ऊपेर उठाया तो, उसकी चुचियाँ उछल कर ब्रा के क़ैद से बाहर आ गई…..

विनय अपनी मामी की कसी हुई गुदाज चुचियों और उसके काले रंग मोटे-2 निपल्स को आँखे फाडे घुरे जा रहा था…”अब जल्दी कर ऐसे क्या देख रहा है….” किरण ने अपनी राइट चुचि को पकड़ कर दबाया तो, उसके चुचि का निपल और नोकदार बन कर सामने की ओर उभर आया…विनय ने फिर से मामी की आँखो मे झाँका तो, किरण ने ऐसे बोला जैसे वो ये सब जल्द से जल्द निपटा लेना चाहती हो….विनय ने अपने काँपते हुए होंठो को खोल कर जैसे ही मामी के निपल्स पर रखा…किरण का बदन बुरी तरह से झंझणा गया….उसने मस्ती से बंद होती आँखो से विनय की तरफ देखा…और फिर जैसे ही विनय ने उसकी चुचि को अपने होंठो मे भर कर चूसा तो, उसकी आँखे बंद हो गई….उसने अपने आप को सिसकने से रोकने के लिए अपने होंठो को अपने दाँतों मे भींच लिया…और विनय के सर को पकड़ कर अपने चुचि पर दबाते हुए मस्ती भरी आवाज़ मे बोली….”सीईईई विनय जल्दी कर ना……मुझे घर का काम भी करना है…”

विनय का लंड उसके शॉर्ट्स मे अब तन चुका था…जो उसकी जाँघो के ऊपेर बैठी मामी की गान्ड की दरार मे घुसने की कॉसिश कर रहा था…किरण भी अपने भान्जे के लंड को अपनी गान्ड की दरार मे चुभते हुए महसूस करके और मचल उठी…” ओह्ह्ह विनय…..” तभी बाहर एक दम से डोर बेल बजी…” किरण और विनय दोनो जल्दी से अलग हुए….और किरण ने अपनी चुचियों को ब्रा के अंदर करते हुए ब्लाउज के हुक्स को बंद करते हुए कहा…”जा देख कर आ कॉन आ गया इस टाइम….” किरण ने झुनझूलाते हुए कहा….विनय गेट की तरफ चला गया…जब उसने जाकर गेट खोल तो, देखा सामने रिंकी मम्मी खड़ी थी….”बेटा किरण कहाँ है….”

साहिल: जी अंदर है….

रिंकी मम्मी अंदर चली गई तो, विनय भी उसके पीछे आ गया…..किरण ने रिंकी की माँ की तरफ देखा तो, किरण मन ही मन उसे गलियाँ देने लगी….” दीदी आप आइए बैठिए….” किरण ने अपने होंठो पर जबरन मुस्कान लाते हुए कहा…रिंकी की मम्मी सोफे पर बैठ गई…किरण ज़रा विनय को मेडिसिन की दुकान पर से ये दवाई तो मंगवा दे….मेरे बच्चे तो आज बाहर गए हुए है घूमने घर पर कोई नही है…” रिंकी मम्मी ने मेडिसिन की स्लिप और पैसे देते हुए किरण को कहा….”जी लाइए….विनय सुन जाकर बाज़ार से आंटी को ये मेडिसिन तो लादे…..” किरण ने विनय को मेडिसिन लाने के लिए कहा तो, विनय स्लिप और पैसे लेकर चला गया….”दीदी क्या लेने आप चाइ या ठंडा….” किरण ने फॉरमॅलिटीस करते हुए कहा….

“नही नही किरण तकलीफ़ करने की कोई ज़रूरत नही…तुम बैठो कहाँ गुम रहती हो आज कर दिखाई ही नही देती…..” रिंकी की माँ ने किरण का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बैठा लिया….”दीदी गुम कहाँ…घर पर मेहमान आए हुए है…इसलिए वक़्त ही नही मिलता बाहर निकलने का….” किरण ने सोफे पर बैठते हुए कहा….”तुम्हे पता भी है आज कल हमारे मोहल्ले मे क्या-2 हो रहा है….?” किरण उसकी बात सुन कर चोन्कते हुए बोली…”क्या हुआ दीदी अपने मोहल्ले मे….”

“तुम्हे नही पता….वो जो नुक्कड़ पर घर है ना सिमरन का….”

किरण: हां दीदी….

“हां वही सिमरन पेट से है….”

किरण: तो क्या हुआ दीदी….पेट से ही तो है….

“हुआ क्यों नही….5 साल से तो उसके बच्चा नही हो रहा था…पिछले 6 महीने से उसके पति का चचेरा भाई यहाँ आया हुआ है….कॉलेज मे पढ़ता है…उसी के साथ उस कलमूहि ने चक्कर चला लिया होगा…पति तो उसका है ही मरियल सा…उससे तो उसकी तसल्ली होती नही होगी…और फँसा लिया अपने देवर को..फिर क्या..हो गई पेट से….दो दिन हो गए…रोज उनके घर इसी बात को लेकर लड़ाई हो रही है…लोग भी थू थू कर रहे है..अर्रे हरामजादी की चूत मे इतनी ही आग लगी थी तो, कॉंडम क्यों नही चढ़वा कर चुदवाती थी……”

किरण रिंकी की माँ की बातें सुन कर बुरी तरह घबरा गई….उसकी शादी को भी 7 साल हो चुके थे….और अब तक उसे कभी पेट नही ठहरा था….कल रात विनय ने उसकी चूत मे अपने लंड का पानी डाल दिया था….किरण के चेहरे का रंग ये सुन कर उड़ गया था….

अभी दोनो बातें ही कर रही थी कि, विनय वापिस आ गया…..और स्लिप और पैसे रिंकी की मम्मी को देते हुए बोला….”आंटी आज सनडे है ना….ईस्सईलिए मेडिसिन की शॉप आज 1 बजे ही बंद हो गई…रिंकी की मम्मी ने पैसे और स्लिप ली…”ओह्ह मे तो भूल ही गई थी कि आज सनडे है….अच्छा किरण अब मैं चलती हूँ….” ये कहते हुए रिंकी मम्मी खड़ी हुई और बाहर चली गई….विनय भी उसके पीछे चला गया. और गेट बंद करके जैसे ही वापिस आया तो, देखा के किरण थोड़ी सी परेशान बैठी हुई थी. पर विनय के ऊपेर तो वासना का भूत सवार हो चुका था…..किरण मन ही मन सोच रही थी कि, आज तो मेडिसिन के शॉप्स भी बंद है, आज कॉंडम भी खरीद कर नही लाए जा सकते….

 


विनय किरण के सामने जाकर खड़ा हो गया….किरण विनय की तरफ देखा तो वो समझ गई कि, विनय इस तरह उसके सामने क्यों खड़ा है….किरण के दिमाग़ मे रिंकी की मम्मी की बात घर कर गई थी….वो किसी भी कीमत पर रिस्क नही लेना चाहती थी….”क्या हुआ ऐसे क्यों खड़ा है…?” किरण ने थोड़ी सी सख्ती दिखाते हुए कहा. “वो मामी वो आप मुझे….” विनय बेचारा अपनी बात भी पूरी ना कर सका और चुप हो गया….”विनय आज मेरा मूड बहुत अपसेट है….आज और नही…तुम जाओ अपने रूम मे और पढ़ाई करो….मुझे घर का काम करने दो…”

ये कहते हुए किरण अपने रूम मे चली गई….विनय को कुछ समझ नही आ रहा था कि, अचानक से मामी को हो क्या गया है….विनय मुँह लटका कर अपने रूम मे चला आया….उसका लंड अभी भी उसके शॉर्ट्स मे कोहराम मचाए हुए था…वो बेचैन सा अपने रूम मे बैठा हुआ था….किरण घर की सफाई मे लगी हुई थी…वो सफाई करते हुए जैसे ही ममता के रूम मे पहुँची, तो झाड़ू लगाते हुए, उसकी नज़र नीचे फर्श पर गिरी कॉंडम के पॅकेट पर पड़ी….किरण ने उस पॅकेट को उठा कर देखा. तो उसके होंठो पर तेज मुस्कान फेल गई…उसके अंदर एक कॉंडम अभी भी था…किरण ने कॉंडम को ब्लाउज के अंदर रखा और जल्दी से झाड़ू लगा कर विनय के रूम मे गई…..

विनय बेड पर लेटा हुआ था…..”सो गया क्या विनय….” किरण ने बेड पर बैठते हुए कहा..तो विनय ने करवट बदल कर उसके तरफ पीठ कर ली….किरण समझ गई कि, विनय उससे नाराज़ है….किरण मन ही मन सोचने लगी कि, उसे विनय के साथ प्यार से बात करनी चाहिए थी…और प्यार से टालना चाहिए था..वो खुद विनय की वासना की आग को भड़का रही थी….और खुद ही उसे वासना की आग मे तड़पता हुआ छोड़ कर पीछे हट गई थी…ऐसा वो विनय के साथ जाने अंजाने मे दो बार कर चुकी थी…किरण वहाँ से उठी और डोर की तरफ गई…विनय ने फेस घुमा कर बाहर जाती मामी की तरफ देखा और फिर किरण डोर के पास जाकर रुक गई….और डोर को बंद करके विनय की तरफ पलटी…

ये देख विनय का दिल जोरो से धड़कने लगा…उसे समझ मे नही आ रहा था कि, आख़िर मामी चाहती क्या है…क्यों बार-2 वो उसे तड़पाती रहती है…किरण बिना कुछ बोले विनय की बगल मे लेट गई…उसने विनय के कंधे पर हाथ रख कर उसे अपनी तरफ घुमाया तो, विनय ने उसकी तरफ फेस करके करवट बदल ली….”नाराज़ हो मुझसे…?” किरण ने विनय के गाल पर हाथ रखते हुए कहा…. “आप मुझसे दूर रहिए…मुझे अब आपसे कोई भी बात नही करनी…”

किरण: मैं जानती हूँ विनय तुम मुझसे नाराज़ हो…बार-2 मैं तुम्हारा दिल दुखा देती हूँ. पर विनय हर औरत की कुछ मजबूरिया होती है…और तुम अभी उन बातों को नही समझ सकते….जब तुम बड़े हो जाओगे तो तुम्हे पता चल जाएगा…कि तुम्हारी मामी ने तुम्हारा दिल जानबूज कर नही दुखाया है….

विनय: पर अब क्यों आई हो पास मेरे…?

किरण ने विनय की आँखो मे झाँकते हुए एक हाथ से अपने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए….

विनय की देखते ही देखते किरण ने अपने ब्लाउज के हुक्स खोल दिए... जैसे ही किरण का ब्लाउज खुला तो, उसकी चुचियाँ उछल कर बाहर आ गई...इस बार किरण ने ब्रा नही पहनी हुई थी...अपनी मामी की गोरे रंग की चुचियों को देख कर विनय के लंड मे तेज सरसराहट हुई...मामी की गोरी चुचियों पर ब्राउन रंग के बड़े-2 गहरे और मोटे-2 तने हुए निपल्स तो विनय की काम वासना को और भड़का रहे थे...किरण ने मुस्कराते हुए विनय की ओर देखा और फिर एक हाथ से उसके सर के नीचे रखते हुए दूसरे हाथ से अपने राइट माममे को पकड़ते हुए नोक दार बनाया और विनय के होंठो से अपने निपल को लगा दिया...विनय ने अपनी मामी की आँखो मे देखा....वो अपनी मामी की चुचियों को देखते ही सारा गुस्सा भूल गया था....

और अगले ही पल उसने किरण के निपल के साथ-2 जितना हो सकता था उसकी चुचि को मुँह मे भर लिया....किरण अपने निपल पर विनय की गरम और खुरदरी जीभ को महसूस करते ही, सिसक उठी....उसने मस्ती मे सिसकते हुए विनय को अपनी बाहों मे भर कर अपने ऊपेर खेंच लिया...मामी के ऊपेर आते ही, विनय और जोश से भर उठा...उसने किरण के निपल को अपने होंठो मे लेकर और ज़ोर-2 से दबाना शुरू कर दिया...."श्िीीईईई ओह विनय मेरीई लााअल पी ले चुस्स ले अपनी मामी के मम्मो को ओह.....आज के बाद जब तेरा दिल करेगा....मैं अपने मम्मे निकाल कर तुझे चुसवा दिया करूँगी... कभी मना नही करूँगी अपने शोना को....अह्ह्ह्ह हां और ज़ोर ज़ोर से चुस्स ओह्ह्ह्ह मेरीए बेटा....." ओह्ह्ह चूस ले बेटा…..किरण ने विनय के सर को अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा…

 


किरण की चूत की फांके अब फुदकने लगी थी…उसकी चूत किसी धौंकनी की तरह धुक-2 कर रही थी….चूत से कामरस सैलाब की तरह बाहर आ रहा था…विनय के तने हुए सख़्त लंड को अपनी साड़ी के ऊपेर से अपनी चूत पर महसूस करके किरण मदहोश होती जा रही थी…उसे अपनी चूत और विनय के लंड के बीच के कपड़ो की दीवार….अब बोझ लगने लगी थी…उसने अपने दोनो हाथो को नीचे लेजा कर विनय के शॉर्ट्स को दोनो तरफ से पकड़ कर नीचे सरकाना शुरू कर दिया….पर विनय के उसके ऊपेर लेटे होने के कारण, विनय का शॉर्ट्स उसकी कमर से नीचे उतरा, तो विनय ने मामी के दिल की मंशा समझते हुए मामी के ऊपेर से खड़ा हो गया….और बेड पर खड़े होते हुए खुद ही अपने शॉर्ट्स को घुटनो से नीचे तक सरका दिया….

जैसे विनय का लंड बाहर आकर झटके खाने लगा तो, किरण की आँखे विनय के तने हुए 7 इंच के लंड पर अटक गई…वो पहली बार सॉफ- 2 अपने भान्जे के लंड को अपनी आँखो के सामने देख रही थी…जब-2 विनय का लंड फूँकारता हुआ झटके ख़ाता….तब-2 किरण की चूत कुलबुला उठती….किरण का हाथ खुद बा खुद ही विनय के तने हुए लंड की तरफ उठ गया…और उसने विनय के लंड को अपनी मुट्ठी मे भर लिया….

जैसे ही किरण को अपने हाथ से विनय के लंड के तनाव का अहसास हुआ, किरण की चूत अपने भान्जे के लंड के नाम पर पिघल उठी…..अब किरण से बर्दास्त करना भी मुस्किल हो गया था. वो विनय के लंड को मूठ मारने वाले अंदाज़ मे हिलाने लगी….

किरण अपनी हथेली मे विनय के लंड की नसों को फूलता हुआ महसूस करके और गरम हो चुकी थी….किरण एक दम से उठ कर बैठ गई….और उसने अपने भान्जे के लंड को गल्प से मुँह मे ले लिया…अपने लंड के सुपाडे को मामी के गरम रसीले मुँह मे महसूस करते ही विनय मस्ती से सिसक पड़ा…उसकी कमर ने आगे की तरफ झटका खाया तो, विनय का 1 इंच लंड और किरण के मुँह मे घुस गया….किरण ने विनय के लंड को पकड़ कर अपने मुँह के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…

”ओह्ह्ह मामी जी…..” विनय ने सिसकते हुए किरण के सर को पकड़ लिया…किरण पागलो की तरह विनय के लंड के सुपाडे को चाटने लगी…कभी वो अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसके लंड को सुपाडे से लेकर जड तक चाटती तो, कभी उसके सुपाडे को मुँह मे लेकर चूसने लगती….

किरण ने विनय के लंड को मुँह से बाहर निकाला और बेड पर रखे हुए कॉंडम का रॅपर फाड़ कर कॉंडम बाहर निकाल लिया…विनय ने इससे पहले कभी कॉंडम नही पहना था…वो अजीब सी नॅज़ारो से कॉंडम को देख रहा था…किरण ने कॉंडम को विनय के लंड पर चढ़ाया और अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठाते हुए नीचे लेट गई…और अपने जाँघो को फैलाते हुए विनय को अपने जाँघो के बीच बैठने को कहा…विनय की नज़र मामी की फूली हुई चूत पर पड़ी, तो उसके लंड ने झटके खाते हुए मामी की चूत को सलामी दी….विनय मामी की जाँघो के बीच घुटनो के बल बैठ गया….और मामी के ऊपेर झुकते हुए, मामी के रसीले होंठो पर अपने होंठो को झुकाने लगा….किरण ने अपना हाथ नीचे लेजा कर विनय के लंड को पकड़ लिया….

विनय ने सिसकते हुए अपने मामी के होंठो अपने होंठो मे भर लिया....किरण की चूत ये सोच कर फड़फ़ड़ा उठी की, मासूम सा दिखाने वाला उसका भांजा उसके होंठो का रस निचोड़-2 कर पी रहा है…उसकी चूत की दीवारे आपस मे सटाने लगी…और चूत की दीवारो के आपस सटने से चूत की लार दबाव की वजह से बाहर बह निकली….किरण ने विनय के लंड को हाथ से छोड़ दिया…और अपने दोनो हाथो से विनय के सर के बालो को सहलाते हुए अपने भान्जे को अपने होंठो का रस पिलाने लगी…किरण ने भी अपने होंठो को खोल कर ढीला छोड़ दिया…विनय पागलो की तरह अपनी मामी के गुलाबी रसीले होंठो को चूसने लगा…..नीचे विनय का लंड उसकी चूत की फांको पर रगड़ खा रहा था…

किरण अपनी चूत की फांको पर विनय के लंड की रगड़ को महसूस करके बुरी तरह मचल रही थी….वो अपनी गान्ड को इधर उधर हिलाते हुए खुद भी अपनी चूत को विनय के लंड पर रगड़ने लगी….इसी बीच विनय का लंड किरण की चूत के छेद पर जा भिड़ा….किरण ने सिसकते हुए अपने होंठो को विनय के होंठो से अलग किया….और मदहोशी से भरी हुई आँखो से विनय की आँखो मे देखते हुए बोली… “सीईईईईई विनय डाल दे पुत्तर अब ले ले अपनी मामी की फुद्दि….” विनय को भी अपनी मामी की चूत के छेद से निकल रही गरमी का अहसास अपने लंड के सुपाडे पर हो गया था… उसने अपनी गान्ड को आगे की तरफ पुश करना शुरू किया तो, विनय के लंड का सुपाडा उसकी चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा….

किरण अपने भान्जे के लंड को अपनी चूत मे रगड़ ख़ाता हुआ घुसता महसूस करके और भी ज़्यादा गरम हो गई….उसने अपने दोनो हाथो को नीचे लेजाते हुए, विनय की गान्ड के ऊपेर रख कर उसे नीचे की तरफ दबाने लगी…विनय का लंड किरण की पानी से लबलबा रही चूत की गहराइयों मे धीरे-2 उतरता चला गया…किरण को अपनी चूत की दीवारे पूरी तरह खुलती हुई सॉफ महसूस होने लगी…और फिर जब विनय का 2 इंच लंड बाहर रह गया तो, विनय ने अपनी कमर को पूरी ताक़त के साथ आगे की तरफ धकेला तो, विनय का लंड किरण की चूत की गहराइयों मे उतरते हुए उसकी बच्चेदानी से जा टकराया…उसकी जांघे मामी के चुतड़ों से टकराई तो, ठप की तेज आवाज़ पूरे रूम मे गूँज गई…”अहह उंह सबशह मेरीई शियर पुत्तरर उंह सीईईईईईई”

किरण ने सिसकते हुए विनय के फेस को अपने हाथो मे पकड़ लिया और पागलो की तरह उसके होंठो को चूमने लगी….अपनी मामी को इस तरह मस्त होता देख कर विनय ने अपने लंड को धीरे-2 अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…विनय का लंड किरण की चूत के अंदर बाहर आता हुआ उसकी चूत की दीवारो पर रगड़ ख़ाता तो, किरण के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ जाती…”अह्ह्ह्ह ओह सीईईईईईईईईई सबाश मेरीए बाबर शेररर ओह मार ले अपनी मामी की फुदी ओह आज की बाद तुझे तेरी ये मामी कभी भी नही रोकेगी…रोज दूँगी मे अपने शेर पुत्तर को अहह बोल विनय रोज लेगा नाअ मेरी….” किरण ने सिसकते हुए कहा…तो विनय का जोश और बढ़ गया….और वो और तेज़ी से अपने लंड को किरण की चूत के अंदर बाहर करने लगा….

किरण: ओह्ह्ह्ह विनय सीईईईईई बहुत मज़ा आ रहा है…..हाइी मुझे नही पता था कि, तू इतनी अच्छी तरह चूत मार सकता है….उंघह हाइईए सीईईईई अहह आह सबाश मेरीए बबर शेररर और जोर्र दीए मार घसा अपनी मामी की फुदी मे अहह..

किरण ने भी धीरे-2 अपनी गान्ड को ऊपेर की और उछालना शुरू कर दिया…विनय और किरण दोनो पसीने से तरबतर हो चुके थे…किरण अपनी साड़ी के पल्लू से विनय के चेहरे पर आए हुए पसीने को सॉफ करने लगी…”सीईईईईईई हाइईए अहह सदके जावा अह्ह्ह्ह हाइईए बहुत मोटा है तेरा लंड अह्ह्ह्ह उंह ओह्ह्ह्ह छोड़ विनय और ज़ोर से मार मेरी फुद्दि अहह सीईईईईईईईईई हाइी ओईईए विनय….अहह देख विनय देख निकाल दिया तेरे लंड ने तेरी मामी की चूत से पानी अह्ह्ह्ह लीई विनयययी मे तो आह आह ओह हाइी मेरी फुद्दि अहह गाइए….लीयी ईए देख ये देख मेरी चूत लगी है पानी छोड़ने अहह……..

किरण ने अपनी टाँगो को उठा कर विनय की कमर पर कसते हुए तेज़ी से अपनी गान्ड को ऊपेर की तरफ उछालना शुरू कर दिया….फिर किरण बुरी तरह विनय से लिपट गई… विनय से लिपटी हुई किरण की कमर झड़ते हुए तेज़ी से झटके खाने लगी….विनय ने भी आख़िर दो चार शॉट लगा कर मामी की चूत मे रुके हुए पानी को बाहर का रास्ता दिखा दिया…और विनय भी बुरी तरह काँपते हुए झड़ने लगा…

 


विनय का लंड जब ढीला हुआ तो, उसका लंड किरण की चूत से बाहर आ गया…विनय अपने घुटनो के बल बैठ कर अपने ढीले पढ़ते हुए लंड पर चढ़े हुए कॉंडम को देखने लगा….किरण जल्दी से उठ कर बैठ गई….उसने विनय को जल्दी से पुराना न्यूज़ पेपर लाने को कहा….जो सामने टेबल पर ही पड़ा था…..विनय ने जल्दी न्यूज़ पेपर उठा कर किरण को दिया तो, किरण ने न्यूसपेपर को उसके लंड के नीचे करते हुए, एक हाथ से उसके कॉंडम को उतार कर न्यूज़ पेपर मे रख कर उसे फोल्ड कर दिया…और न्यूज़ पेपर नीचे फर्श पर रखते हुए बोली…..”जा विनय इसे ऊपेर छत पर जाकर पीछे जो खाली प्लॉट है वहाँ फेंक दे….” विनय ने जल्दी से अपना शॉर्ट्स पहना और न्यूसपेपर को उठा कर ऊपेर चला गया…किरण ने एक कपड़े से अपनी चूत को सॉफ किया….और अपनी साड़ी नीचे करके रूम से बाहर निकल कर बाथरूम मे चली गई….

जब विनय नीचे आया तो, किरण भी बाथरूम से बाहर आ चुकी थी…जब विनय सीढ़ियाँ नीचे उतर कर उसकी तरफ आ रहा था….तब वो विनय के शॉर्ट्स के अंदर उसके तने हुए हिलते लंड को देख कर हैरान रह गई…उसे अपनी आँखो पर यकीन नही हो रहा था…और दिमाग़ भी ये मानने के लिए तैयार नही हो रहा था…वो मन ही मन सोच रही थी कि, अभी-2 विनय ने उसे चोदा है….और थोड़ी देर पहले ही झड़ने के बावजूद भी उसका लंड इतनी जल्दी दोबारा कैसे खड़ा हो सकता है….किरण की नज़र उसके शॉर्ट्स मे बने तंबू पर अटकी हुई थी…जिसे देख उसकी चूत मे फिर से तेज सरसराहट होने लगी थी….एक लंबे अरसे के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ा था…और अपने भान्जे के लंड से संतुष्ट होकर जो स्वाद किरण ले चुकी थी…. वही स्वाद फिर से लेने के लिए उसकी चूत मे चीख पुकार मची हुई थी….

किरण का दिल तो कर रहा था कि, वो अभी वही फर्श पर लेट जाए…और विनय के लंड को अपनी चूत मे लेकर उससे फिर अपनी चूत मे हो रही खुजली को मिटा ले….पर प्रेगञेन्ट होने का डर उसके जेहन मे बैठ चुका था….और ना ही अब उसके पास और कोई कॉंडम था….दूसरी तरफ मामी की चूत की गरमी को अपनी लंड पर महसूस करने के बाद विनय भी फिर से मामी की चूत को चोदने के लिए बेताब हुआ जा रहा था. किरण सोफे पर जाकर बैठ गई….विनय भी उसके पास आकर बैठ गया…किरण जानती थी कि, विनय क्यों उसके पीछे घूम रहा है….किरण ने टाइम देखा तो 2 बज रहे थे… “खाना खाओगे भूक तो नही लगी…” किरण ने विनय के बालो मे हाथ फेरते हुए कहा…तो विनय ने ना मे सर हिला दिया…”नही अभी भूख नही है….”

अभी विनय आगे कुछ कहने की हिम्मत ही जुटा रहा था कि, डोर बेल बजी…किरण विनय को गेट पर जाकर देखने को कहा….विनय ने जाकर गेट खोला तो, देखा सामने शीतल खड़ी थी….उसके साथ उसके बच्चे भी थी….शीतल ने विनय को प्यार दिया और फिर अंदर आ गई….”आओ दीदी बैठो…” किरण ने मुस्कराते हुए कहा, तो शीतल उसके साथ सोफे पर बैठ गई…..”आज अभी को टीका लगवाने जा रही हूँ….” इसीलिए सोचा कि पिंकी को तुम्हारे यहाँ छोड़ जाती हूँ बाहर धूप बहुत है….”

किरण: अच्छा क्या दीदी वैसे आज तो सनडे है फिर आप अभी को टीका कहाँ लगवाने जा रही है….?

शीतल: वो ये स्कूल के पास डिसपॅन्सरी है ना…वही जा रही हूँ….सरकारी डिसपॅन्सरी है…सिर्फ़ सनडे को ही खुलती है….

किरण: ओह्ह अच्छा…(तभी अचानक से किरण के दिमाग़ के घोड़े दौड़े….) दीदी मे भी चलूं आपके साथ…

शीतल: हां चल…

किरण: विनय पिंकी का ख़याल रखना….हम थोड़ी देर मे आते है….

उसके बाद किरण शीतल और अभी के साथ डिसपॅन्सरी के लिए चली गई….जब दोनो वहाँ पहुँची, तो वहाँ आगे लाइन मे दो तीन ही लोग थे….शीतल अभी को लेकर लाइन मे लग गई…किरण वही बेंच पर बैठ गई…तभी उसका ध्यान उस काउंटर पर पड़ा जहा पर लोग डॉक्टर से मिलने के बाद मेडिसिन ले रहे थे…..जब शीतल का नंबर आया और शीतल अभी को लेकर अंदर गई, तो किरण जल्दी से खड़ी हुई, और मेडिसिन वाले काउंटर पर जाकर खड़ी हो गई…तब उसके आगे सिर्फ़ एक ही औरत खड़ी थी…जब वो औरत दवाई लेकर चली गई तो, अंदर खड़ी नर्स ने किरण के तरफ देखते हुए कहा.. “लाइए स्लिप दीजिए….”

किरण: जी वो स्लिप तो नही है….दरअसल मुझे कॉंडम चाहिए थे…..

नर्स: मेडम कॉंडम तो नही है हमारे पास….हां गर्भ निरोधक टॅब्लेट्स है. वो चाहिए तो दे देती हूँ…..

किरण: जी उससे कोई नुकसान तो नही होगा….?

नर्स: नही मेडम कोई नुकसान नही होगा….

किरण: ठीक तो फिर टॅब्लेट्स ही दे दीजिए….

नर्स ने उसे 20 टॅब्लेट्स दे दी…..और ये भी बता दिया के कब खाना खा… “जी कितने पैसे हुए…” किरण ने अपना पर्स खोलते हुए कहा….”आप यहाँ पहली बार आई है….” उस नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा….”जी…”

नर्स: ये सरकारी डिसपॅन्सरी है…यहाँ पर ये दवाए फ्री दी जाती है….

किरण: ओह्ह थॅंक्स….

किरण ने जल्दी से उन टॅब्लेट्स को अपने पर्स मे रखा और और फिर से बेंच पर आकर बैठ गई…थोड़ी देर बाद शीतल अभी को लेकर बाहर आई…”चल किरण….लग गया इसको टीका…” और फिर किरण खड़ी हुई और उसके साथ घर की तरफ चल पड़े…रास्ते मे शीतल ने भी उसे वही बात बताई….जो दो घंटे पहले रिंकी के मम्मी बता कर गई थी….बाते करते -2 दोनो घर पहुँच गई……शीतल अंदर आते ही सोफे पर पसर गई…..”विनय बेटा…”

विनय: जी मासी जी…..

शीतल: जा बेटा हम सब के लिए पानी तो ले आ….बाहर बहुत गरमी है….

विनय: जी अभी लाता हूँ….

ये कह कर विनय किचन मे गया….और पानी के बॉटल और तीन ग्लास ले आया… विनय ने सब को पानी पिलाया….और फिर ग्लास और बॉटल किचन मे रख कर वापिस आ गया… “मामी खाना दे दो….” विनय ने डाइनिंग टेबल पर बैठते हुए कहा…तो किरण उठ कर विनय के लिए खाना लेने चली गई….अभी उठ कर विनय के पास गया…” भैया मुझे वीडियो गेम लगा दो ना…” उसने विनय का हाथ पकड़ कर खेंचते हुए कहा तो, विनय वहाँ से उठ कर टीवी के पास गया…और अभी को वीडियो गेम लगा कर दी… फिर जब किरण वापिस आई तो, उसने खाना टेबल पर रखते हुए विनय की तरफ गुस्से से घूर कर देखा….दरअसल वो विनय पर इस लिए गुस्सा हो रही थी कि, उसने अभी को वीडियो गेम स्टार्ट करके दी थी…और अभी अब वहाँ से जल्दी हिलने वाला नही था….

 


विनय चुप चाप बैठ कर खाना खाने लगा…किरण ने शीतल से भी खाने के लिए पूछा तो शीतल ने ये कह कर मना कर दिया कि, वो घर से खाना खा कर ही यहाँ आई थी….किरण खुद भी खाना खाने लगी…खाना खाने के बाद किरण ने अपने और विनय के बर्तन उठाए किचन मे लेजा कर धोने लगी…शीतल ने किरण से कहा कि वो अब घर जा रही है….शीतल ने अभी को गेम बंद करके चलने के लिए कहा तो, अभी ने जाने से मना कर दिया….किरण ने भी ऊपेरी मन से कहा कि, अभी को गेम खलने दो…शीतल अभी को वही छोड़ कर पिंकी को साथ लेकर अपने घर चली गई….

बर्तन सॉफ करते हुए उसने विनय को आवाज़ दी….जब विनय किचन मे गया तो किरण खीजते हुए बोली…” क्यों लगा दी तूने उसे गेम मना नही कर सकता था…” विनय सर झुका कर खड़ा हो गया…जब से किरण को गर्भ निरोधक गोलयाँ मिली थी…उसकी चूत मे हो रही खुजली कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई थी….. “चल जा अब उसके पास जाकर बैठ….” किरण ने बर्तन सॉफ करते हुए कहा….तो विनय वहाँ से निकल कर अभी के पास जाकर नीचे चटाई पर बैठ गया….विनय बार-2 पीछे घूम कर अपनी मामी की तरफ देख रहा था…किरण ने बर्तन सॉफ किए और फिर अपने रूम मे चली गई… वहाँ पहुँच कर उसने अपने साड़ी उतारी और सब कुछ उतारने के बाद एक ग्रीन कलर के मॅक्सी पहन ली…..

किरण किचन का काम निपटा कर अपने रूम मे चली गई…..विनय वही बैठा मायूस होता रहा….किरण ने अपने रूम मे पहुँच कर अपनी पहनी हुई साड़ी उतार डी…उसके बाद सारे कपढ़े उतरने के बाद किरण ने एक ग्रीन कलर के मॅक्सी पहन ली…मॅक्सी पहनने के बाद किरण हॉल मे आई और सोफे पर बैठ कर विनय को देखने लगी… दोनो के जब भी नज़रें मिलती….तो किरण मुस्करा कर विनय की तरफ देखती… “विनय भैया आप खेलो ना मुझे नींद आ रही है…..” अभी ने गेम का रेमॉर्ट विनय के तरफ बढ़ाते हुए कहा….और जैसे ही विनय ने उसका हाथ से रेमॉर्ट लिया….अभी वही चटाई पर लेट गया…किरण ने देखा कि अभी को नींद आने लगी थी…..शायद टीके का कुछ असर हो रहा था….जब किरण को यकीन हो गया कि, अभी अब गहरी नींद मे सो चुका है…तो उसने धीरे से विनय को आवाज़ दी….

विनय ने अपनी मामी की तरफ देखा, तो किरण ने उसे इशारे से अंदर चलने के लिए कहा….और खुद खड़ी होकर हॉल के साथ वाले रूम की तरफ चली गई…विनय ने भी एक बार अभी को चेक किया और खड़ा होकर स्टोर रूम की तरफ चल पड़ा….स्टोर रूम मे एक खिड़की थी जो हॉल की तरफ खुलती थी….ताकि हॉल से कुछ रोशनी स्टोर रूम मे जाती रहे…जैसे ही विनय हॉल मे पहुँचा तो, किरण ने उसका हाथ पकड़ कर अपने से सटाते हुए उसके कमर मे अपनी बाहों को डाल दिया….और उसके होंठो पर अपने होंठो को रख दिया….विनय ने भी इस बार ज़्यादा देर ना करते हुए, मामी के होंठो को अपने होंठो मे लेकर चूसना शुरू कर दिया….

किरण की चूत मे भी कुलबुलाहट मची हुई थी….वो एक बार से अपने भान्जे के लंड को जल्द से जल्द अपनी चूत के अंदर महसूस करना चाहती थी…किरण विनय से अलग हुई, और अपनी नाइटी को पकड़ कर ऊपेर उठाते हुए विनय से कहा…” विनय चल जल्दी से बाहर निकाल इसे….”,किरण ने विनय के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा. और अपनी वाइट कलर की कच्छि को पकड़ कर नीचे जाँघो तक सरका दिया….और खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई…विनय अपनी मामी के पीछे जाकर खड़ा हो गया….और अपने पाजामे को नीचे सरकाते हुए अपने लंड को बाहर निकाल लिया…किरण ने थोड़ा सा आगे की तरफ झुकते हुए, अपनी गान्ड को पीछे से बाहर के तरफ निकाल लिया….”विनय चल जल्दी कर डाल दे अब अपनी मामी की फुद्दि मे अपना लंड….”

किरण ने अपनी टाँगो को फेलाते हुए, अपनी गान्ड को ऊपेर उठा कर अपनी चूत के छेद को और बाहर की तरफ निकाल दिया…और अगले ही पल विनय के मुनसल लंड का दहकता हुआ सुपाडा किरण की चूत के साथ जा लगा….

विनय के लंड के सुपाडे की गरमी को अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही, किरण का पूरा जिस्म कांप गया….चूत ने अपने कामरस के खजाने को खोल दिया….और कुछ ही पलों मे उसकी चूत गीली हो गई…”हाइए विनय जल्दी कर डाल दे अपनी मामी की फुद्दि मे अपना लंड…आह ओह्ह्ह हाइए ओईए मार दिया अह्ह्ह्ह” विनय ने एक ही झटके मे अपना आधे से ज़्यादा लंड किरण की चूत मे पेल दिया था….किरण अपनी चूत को विनय के लंड के चारो तरफ बुरी तरह जकड़े महसूस कर रही थी…..और उसे अपनी चूत की दीवारों पर विनय के लंड के नसें सॉफ महसूस होने लगी….

किरण: आहह पुत्तर तेरा लंड तां बहुत मोटा हो गया है…..अपनी मामी की फुद्दि फाड़ कर रख दी तूने…आहह पुत्तर पर कोई परवाह नही करनी तूने मेरी…ज़ोर ज़ोर बाहर निकाल निकाल कर फुद्दि मे लंड ठोक बेटा….

विनय: धीरे अभी सुन ना ले….

किरण: नही सुनता बेटा….तू मार मेरी फुद्दि जैसे मर्ज़ी मार….

ये कहते हुए, किरण आगे की तरफ झुक गई….विनय ने अपने लंड को धीरे-2 किरण की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….विनय के लंड की रगड़ को अपनी चूत के दीवारों पर महसूस करके, किरण एक दम मस्त हो गई…और वो भी अपनी गान्ड को पीछे की तरफ धकेलते हुए, विनय के लंड को अपनी चूत की गहराइयों मे लेने के लिए मचलने लगी… विनय भी समझ चुका था कि, ये रांड़ भी अब पूरे रंग मे आ चुकी है… इसीलिए उसने किरण के चुतड़ों को दोनो हाथों से फैलाते हुए, तेज -2 झटके मारने शुरू कर दिए…..विनय के हर झटके के साथ किरण का पूरा बदन हिल जाता….और मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकल जाती…

किरण बार -2 ऐसे मुँह बना कर पीछे की तरफ विनय को देख रही थी… जैसे उसे विनय के मुनसल जैसे लंड को झेलने मे दिक्कत हो रही हो…”ओह्ह विनय आह बहुत मोटा है रे तेरा लाउडा आह लगता है आज आह अहह धीरे कर ना पुत्तर अहह तू मेरी फुद्दि फाड़ कर ही मानेगा…अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाइी कहा था तू इतने दिनो अह्ह्ह्ह….अपनी मामी का ख़याल रखा कर पुत्तर…तेरे बिना तेरी मामी की फुद्दि की सुध लेने वाला कोई नही है…”

विनय: हेया आहा आहह….तू फिकर ना कर मामी…मैं हूँ ना….तेरी फुद्दि की देखभाल के लिए अह्ह्ह्ह ईए ले…..अह्ह्ह्ह

किरण: हां बेटा एक तू ही तो है आह ले बेटा तेरी मामी की फुद्दि मूतने लगी हाई आह लीयी मैं आई और ज़ोर से अह्ह्ह्ह…..

विनय: अहह मामी भेगो दे मेरे लंड को अपनी फुद्दि के पानी से अहह अहह.

किरण: ले बेटा ले…..तेरे लिए तो है सब ले ले अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह माआ..

ये कहते हुए किरण का पूरा बदन अकड़ने लगा….मस्ती का तूफान अब ज़लज़ला बन गया था….और उसकी चूत से पानी की नदी बह निकली….विनय का लंड गीला होकर फॅक-2 की आवाज़ करते हुए अंदर बाहर होने लगा….और फिर एक हलकी सी घुर्राहट के साथ विनय के लंड ने भी किरण की चूत मे वीर्य की बोछार कर दी…..

 


किरण को अपनी चूत मे ऐसे महसूस हो रहा था….जैसे विनय ने उसकी फुद्दि के अंदर सैलाब ला दिया हो….उसे अपनी पूरी चूत उसके वीर्य से भरी हुई महसूस होने लगी….किरण आज बहुत दिनो बाद झड़ी थी…जैसे ही विनय का लंड किरण की चूत से बाहर आया…तो किरण सीधी हुई, उसके सीधे खड़े होते ही, उसकी चूत से वीर्य की धार बह कर बाहर निकलते हुए, उसकी जांघों मे अटकती पैंटी की ऊपेर पड़ने लगी…. उसके देखते ही देखते उसकी पैंटी उसके वीर्य से सन गई….

किरण: हाइी मा तू इंसान है या भैंसा…..कितना पानी छोड़ता हे रे तेरा लंड अह्ह्ह्ह….

ये कहते हुए किरण ने मुस्कुराते हुए, विनय की तरफ देखा, और अपनी पैंटी और सलवार को एक साथ ऊपेर कर सलवार का नाडा बांधने लगी….

विनय: मामी सॉरी वो आप की पैंटी खराब हो गई….आप बाद मे बदल लेना….

किरण: अर्रे नही पुत्तर ऐसे कोई बात नही….अब ये पैंटी तो मैं पूरा दिन ऐसे ही पहन कर रखूँगी…

विनय: क्यों ?

किरण: (मुस्कुराते हुए) ताकि तेरे लंड का पानी मेरी फुद्दि को ठंडा रखे. हा हहा…अच्छा अब तू जा….मे थोड़ी देर बाद बाहर आती हूँ….

विनय स्टोर से निकल कर बाहर आया तो, देखा कि अभी सो रहा था…फिर मामी की फुद्दि की खुजली मिटी तो उसको नींद आने लगी…वो अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट गई.. विनय वही चटाई पर अभी के साथ लेट गया….और कुछ ही पलों मे नींद ने उसे भी अपने आगोश मे ले लिया…शाम के 5 बज रहे थे….जब किरण की आँख खुली…वो उठ कर अपने रूम से बाहर आई, तो देखा विनय और अभी दोनो अभी तक हॉल मे सो रहे थे. उसने उन दोनो को जगाया और खुद किचन मे चाइ बनाने चली गई….चाइ पीने के बाद विनय अभी को उसके घर छोड़ने चला गया….इधर किरण अभी रात के खाने की तैयारी कर रही थी कि, उसका मोबाइल बजने लगा….

उसने किचन से बाहर कर अपना मोबाइल उठाया तो देखा, उसके पापा का फोन था… उसके पापा ने बताया कि, वो इस वक़्त अपने बड़े भाई के घर मे है…और आज रात वही रुकने वाले है…वो कल सुबह ही घर वापिस आएँगे…किरण ने जैसे ही कॉल कट की तो, उसके चेहरे पर तीखी मुस्कान फेल गई…अब घर पर रात पर तीन ही लोग मज़ूद होने वाले थे….एक वो दूसरा विनय और तीसरा किरण का पति अजय….जब से उनके घर किरण के मम्मी पापा आए हुए थे….तब से अजय घर पर शराब पी कर नही आ रहा था…और जब अजय रात को शराब पीकर आता था…तब वो खाना खाते ही बेड पर ढेर हो जाता था….उसने अपने पति का नंबर मिलाया…..तो थोड़ी देर बाद अजय ने कॉल पिक की…..

अजय: हेलो हां किरण बोलो….

किरण: जी वो आज मम्मी पापा अपने भाई के घर पर ही रहेंगे….कल आने वाले है. आप थोड़ा जल्दी आ जाना….घर पर आज वशाली भी नही है….

अजय: हां हां मे जल्दी आ जाउन्गा….

उसके बाद किरण ने कॉल कट की…वो जानती थी कि, ये खबर सुनने के बाद के आज उसके सास ससुर घर पर नही आने वाले है, तो वो ज़रूर दारू पी कर आएगा…और उसके बाद अजय को हॅंडल कैसे करना है…..वो ये अच्छी तरह से जानती है…

रात के 8 बज चुके थे….किरण खाना तैयार कर चुकी थी….और वो विनय के साथ हॉल मे बैठे हुए टीवी देख रही थी….कि तभी उसका मोबाइल बजने लगा….उसने मोबाइल उठा कर देखा, तो अजय की कॉल थी….अजय ने उसे बताया कि, वो आज रात नही आ सकता. एक ज़रूरी ऑर्डर है…जो उसे कल तक डिलीवर करना है….किरण ने अजय से बात करके कॉल कट की तो, उसके होंठो पर मुस्कान फेल गई….वो जानती थी कि, घर ना आने का ये अजय का बहाना है…दरअसल जब भी अजय का ज़यादा पीने का मूड होता….तो वो किरण की झिक-2 से बचने के लिए काम का बहाना बना लेता…और अपने ऑफीस मे ही रात को ठहर जाया करता था….किरण ने अपना मोबाइल सोफे पर रखा…और विनय के सर के बालो को सहलाते हुए उसके सर को अपनी जाँघो पर रख लिया…..

विनय: किसका फोन था मामी जी…

किरण: तुम्हारे मामा का….आज घर नही आएँगे…

विनय: क्या आज घर नही आएँगे….?

किरण: हां….

विनय: तो क्या आज हम सारी रात……(विनय बोलते-2 चुप हो गया….किरण उसके दिल की बात को जान कर मुस्करा उठी….)

किरण: बोल ना क्या हम आज सारी रात…

विनय: का कुछ नही….

किरण: अभी भी मुझसे छुपा रहा है….बोल ना….तू जो कहगा….वैसा ही होगा…एक बार बोल कर तो देख…..

विनय ने अपनी मामी की ऊपेर नीचे हो रही चुचियों को देखा…और अपने गाले को सॉफ करते हुए कहा….”सच…?” किरण विनय की तरफ देख कर मुस्कुराइ…और उसके बालो को सहलाते हुए बोली…”तू कह के तो देख….” विनय ने अपना सर किरण की जाँघो से उठाया और उठ कर बैठते हुए किरण की नाइटी मे ऊपेर नीचे हो रही चुचियों की तरफ इशारा करते हुए कहा….”मामी मुझे तुम्हारी चुचियों को देखना है….” किरण विनय की बात सुन कर मुस्कराने लगी…और उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली….”पहले खाना खा लेते है…फिर तुझे जो देखना होगा…वो सब दिखाउन्गी…”

 
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