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चूत देखी वहीं मार ली compleet

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12

रामू गेट बंद करके, जैसे ही अपने रूम में पहुँचा तो, उसकी पत्नी अंजू उस पर बरस पड़ी……”क्यों रे तेरी गान्ड मे फिर से कीड़े रेंगने लगे….जो तू उनको शांत करने के लिए इसको बुला लाया था……पूरी दोपहर तू उस छोकरे के साथ पीछे कमरो मे गान्ड मरवाता रहा….फिर भी तेरा दिल नही भरा….जो एक और नया लड़का ढूँढ लाया……

रामू: ओहो अंजू तुम भी ना…..कुछ बोलने से पहले एक बार कुछ सोच समझ तो लिया करो… किसी के सामने कुछ भी बकती है तू भी….साली जब देखो रंडी की तरह मूह से आग उगलती रहती है…अर्रे बोलने से पहले ये तो जान लेती कि, वो कॉन है…..

अंजू: क्यों किसी मिनिस्टर की औलाद है काया….?

रामू: नही मिनिस्टर के औलाद नही है…..पर वो ऐसा लड़का भी नही है समझी…..मेरी तो मति ही मारी ही गयी थी…..जो मेने तेरे बारे मे सोचा….

अंजू: (मूह बनाते हुए) अबे हिजड़े अगर मेरे बारे मे सोचता होता तो, आज तक मैं 5 बच्चों की माँ बन चुकी होती….पर तुझे तो बस तेरी गान्ड मे नये-2 लौन्डो का लंड चाहिए…..(अंजू बर्तन पर बन रही सबाज़ी की तरफ देखते हुए बोली….)

रामू: देखा-2 साली रांड़ का अभी भी मूह बंद नही हो रहा…….अब भगवान ने मुझे ऐसा बनाया है तो इसमे मेरा क्या कसूर…..साली तेरे चक्कर में मेने उसका कोरा लंड आज तक अपनी गान्ड मे नही लिया……

अंजू: (बेलन उठा कर रामू को दिखाते हुए) आबे गान्डू चुप कर…….सब जानती हूँ…..साला नमार्द कही का…तू क्या खाक सोचेगा मेरे बारे मे….

रामू: साली छिनाल तुझसे मिलवाने लाया था मैं उसको……

अंजू: (रामू की बात सुन कर हैरान होते हुए) क्या मुझसे मिलवाने….क्यों…..ओह्ह्ह अच्छा-2 कही वो भी तेरी तरह गान्डू तो नही है…..कि इसीलिए तू मुझे उससे मिलवा कर ये दिखाना चाहता था कि, देख इस दुनाया में मै ही अकेला गान्डू नही हूँ…..

रामू: साली सीधी बात तो तुझे समझ ही नही आती….तू सुन छिनाल रंडी ये ये इतना लंबा लंड है उसका…..साला कसम से जब खड़ा होता है, तो…….(रामू बोलते-2 चुप हो गया….)

अंजू हैरानी से रामू के हाथ की तरफ देख रही थी…..जिससे उसने विनय के लंड की लंबाई को हाथ से बताया था…..”क्या इतना बड़ा….तो साले मादरचोद अब तक तूने उसे छोड़ कैसे दिया…” अंजू ने साड़ी के ऊपेर से ही अपनी चूत को खुजाते हुए कहा….”तेरे लिए छोड़ दिया. साली एक दम कोरा लंड है……एक दम मस्त….तू रात को मुझे तंग करती रहती है…..साली ने लंड के चुप्पे लगा-2 कर मुरझा दिया है…..

अंजू: (शर्मा कर मुस्कुराते हुए) कहाँ अब कहाँ लगाने देते हो तुम…..15 दिन हो गये…. चूत में जाने लायक तो तुम्हारा खड़ा होता ही नही….

रामू: देख अंजू……लड़का एक दम कोरा है….जवान है…..और मुझसे खुला हुआ भी है….हर तरह की बात हम आपस मे कर लेते है….साली तेरी चूत के लंड का इंतज़ाम किया था….और तूने अपनी भयानक आवाज़ सुना कर भगा दिया…

अंजू: क्या सच मे उस लड़के का लंड इतना बड़ा है…..

रामू: कसम मुझे अपनी गान्ड के कीड़ों की…..साली लंड तो मस्त है उसका…..हां पर है कच्चा खिलाड़ी…..मेने अपनी आँखो से देखा है उसका लंड….पकड़ा भी है….बोल क्या कहती है…..

अंजू: अब तुम मुझे स्कूल के बच्चे से चुदवाओगे…..

रामू: साली अब नखरे मत कर…..ऐश करेगी….

अंजू: वो तुम्हारी पत्नी को चोदेगा और तुम्हे बुरा नही लगेगा…..

रामू: देख मैं तुम्हे वो सुख नही दे सकता…..जो एक पति अपनी पत्नी को देता है….पर तुझे वो सुख दिलवा तो सकता ही हूँ…..मुझे क्या ऐतराज होगा….हां पर इसके बदले में मुझे भी कुछ चाहिए…..

अंजू: हां बोल क्या चाहिए….

रामू: देख आज के बाद तू मुझे दोबारा कभी नही रोकेगी…..

अंजू: वो तो बाद की बात है….पहले ये तो देख लूँ कि जितनी तारीफ तू उसके लंड की कर रहा है…..उसमे सच मे इतना दम है भी या नही…..

रामू: है मेरी जान है…..

अंजू: चल अगर तेरे बात सही हुई तो, फिर तुम्हे कभी किसी बात के लिए नही रोकूंगी….

रामू: और मुझ पर गुस्सा भी नही करोगी…..

दूसरी तरफ जब विनय घर पहुँचा तो, शाम के 7 बज चुके थे……उसकी मामी बाहर गेट पर ही खड़ी थी….शायद वो विनय को ही ढूँढ रही थी…..जैसे ही उसने विनय को देखा तो उसने राहत के साँस ली…..”कहाँ चला गया था तू….कब से तुम्हे ढूँढ रही हूँ…..कितना वक़्त हो गया है….”

विनय: वो मामी अपने दोस्त के घर चला गया था….

किरण: दोस्त के घर चला गया था…..और ये तूने अपनी क्या हालत बना रखी है…चल अंदर चल कर हाथ मूह धो ले….ऐसे ही मत घुमा कर……

विनय अंदर चला गया……और जाते ही बाथरूम में घुस गया…..फ्रेश होकर बाहर आया, और वशाली के साथ बैठ कर टीवी देखने लगा…..रात के 9 बजे करीब सब ने खाना खाया और ममता वशाली और विनय के साथ ऊपेर छत पर जाने की तैयारी करने लगी…वशाली विनय और ममता ने अपने-2 बिस्तर उठाए और एक के पीछे एक लाइन से चलते हुए ऊपेर जाने लगे….. सबसे आगे वशाली चढ़ रही थी….उसके पीछे ममता और लास्ट में अपना विनय. ममता जानबूज कर कुछ धीरे धीरे सीढ़ियाँ चढ़ रही थी….वशाली सबसे पहले ऊपेर पहुँची, और अपना बिस्तर रख कर बिछाने लगी….तब तक विनय और ममता भी ऊपेर आ गये और बिस्तर बिछाने लगे….

ममता ने देखा कि वशाली अपना बिस्तरा लगा चुकी है…..”वशाली बेटा एक काम कर तू नीचे से पानी की बॉटल ले आ….नही तो प्यास लगने पर नीचे जाना पड़ेगा रात मे….” ममता ने अपने बिस्तर को जल्दी -2 बिछाते हुए कहा…

वशाली: ठीक मासी जी ले आती हूँ….

और जैसे ही वशाली सीढ़ियों से नीचे उतरी तो ममता तेज़ी से सीडयों की तरफ गयी….और कुछ सीढ़ियाँ नीचे उतर कर, उसने विनय को आवाज़ दी….जब विनय ने ममता की तरफ देखा तो वो कामुकता के साथ मुस्कुराते हुए उसे अपने पास आने का इशारा कर रही थी…..विनय भी तो कब से तड़प रहा था….वो तेज़ी से उठा और सीढ़ियों पर दो कदम नीचे उतर कर ममता के सामने जाकर खड़ा हो गया….ममता ने एक बार फिर से नीचे की तरफ नज़र डाली और फिर एक दम विनय को अपने बाहों में भरते हुए, अपने से चिपका लिया….और उसके गालो और माथे पर चूमते हुए बोली….”ओह्ह्ह मेरे शोना कहाँ था सारा दिन….पता है इतना अच्छा मोका था आज…..दीदी और वशाली शीतल दीदी के घर गये थे….आधे घंटे बाद वापिस आए….पर तू पता नही कहाँ गायब हो गया था….”

विनय: वो मैं तो दोस्त के घर चला गया था….

ममता: चल वो सब छोड़……आज अपनी दोस्त को प्यार कर ले…..कल तो मैं घर जा रही हूँ….

विनय: (चोन्कते हुए) क्या कल घर जा रही हो आप…..?

ममता: हां मम्मी पापा ने बुलाया है…..चल वो सब बाद में बात करेंगे…..

ये कहते हुए ममता ने अपने सुर्ख रसीले होंटो को विनय के होंटो से लगा दया…..जैसे ही विनय के मूह मे ममता के सुर्ख होन्ट का रस घुला, तो उसकी आँखे मस्ती मे बंद होती चली गयी…..आँखे तो ममता की भी बंद होने लगी थी….पर वशाली कभी भी ऊपेर आ सकती थी…विनय ने कुछ ही पॅलो मे ममता के होंटो को अपने होंटो मे दबा-2 कर चूसना शुरू कर दिया…..उसका लंड उसके शॉर्ट मे एक दम तन चुका था…..जिसे ममता अपनी सलवार के ऊपेर से अपनी चूत पर रगड़ ख़ाता हुआ सॉफ महसूस कर पा रही थी…..ममता का दिल तो कर रहा था कि, वो अभी अपनी सलवार उतार कर विनय के लंड को चूत में घुसवा ले, और विनय उसके जबरदस्त चुदाई करे…..

पर समय इसकी इजाज़त नही दे रहा था…..विनय के हाथ खुद ब खुद ही, ममता के कुर्ते के ऊपेर से उसकी चुचियों पर आ चुके थे….और जैसे ही विनय ने ममता की चुचियों को अपने हाथो मे लेकर दबाया तो, ममता के रोम-2 में मस्ती की लहर दौड़ गयी…..पर तभी उसे किसी के सीढ़ियों पर चढ़ने की आवाज़ आए तो, वो एक दम से विनय से अलग हो गयी… “लगता वशाली ऊपेर आ रही है….दोनो वापिस ऊपेर जाकर बिस्तरों पर बैठ गये…

नीचे बिस्तर पर बैठ कर, कुछ देर वो ऐसे ही इधर उधर की बातें करते रहे….अजय अभी तक नही आया था….तीनो रात के 10 बजे तक आपस में बातें करते रहे….फिर धीरे-2 सब को नींद आने लगी….अजय कब आया उन तीनो को पता नही चला….सुबह-2 5 बजे का वक़्त था….आज आसमान मे घने बदल छाए हुए थे….बेहद ठंडी हवा चल रही थी……ऊपेर से कूलर की ठंडी हवा से कूलर के सबसे नज़दीक लेटी वशाली की नींद खुल गयी….

ऊपेर हल्की-2 सर्दी लग रही थी……इसीलिए वो उठ कर नीचे जाने लगी….और जैसे ही उसने नीचे जाने के लिए सीढ़ियों का डोर खोला तो, उसकी आवाज़ सुन कर ममता भी जाग गयी….उसने अपनी अध खुली नींद से भरी आँखो से सीढ़ियों के डोर की तरफ देखा….जहाँ से वशाली नीचे उतर गयी…..उसने थोड़ी देर वेट किया और फिर सीढ़ियों के डोर पर जाकर नीचे देखा. वशाली नीचे जा चुकी थी….उसने जल्दी से सीढ़ियों के डोर को फिर से लॉक किया…..और तेज़ी से विनय के पास आकर नीचे बैठते हुए उसके गालो को थपथपाते हुए जगाना शुरू कर दिया…..

 


13

विनय ने आँखे खोल कर देखा तो ममता उसके बगल मे बैठी हुई, उसकी तरफ अजीब सी नज़रो से देखते हुए मुस्कुरा रही थी……आसमान में अभी भी हल्का-2 अंधेरा था…..उसने दूसरी तरफ नज़र डाली, जिस तरफ वशाली सोई हुई थी……जब उसको पता चला कि, वशाली ऊपेर नही है, तो उसे ममता की मुस्कुराहट के पीछे छुपे हुए राज़ का पता चल गया…..जब ममता ने विनय को वशाली की तरफ देखते हुए देखा तो, वो मुस्कुराते हुए धीरे से फुसफुसा कर कहा… “नीचे चली गयी है…..” ममता ने इधर उधर देखा, पास के घर की छत पर भी कुछ लोग सोए हुए थे….

ममता: (धीरे से फुसफुसाते हुए) विनय मैं बाथरूम में जा रही हूँ….थोड़ी देर बाद तुम भी आ जाना….

ममता खड़ी हुई, पास वाले घर की छत पर नज़र डाली, और फिर धीरे-2 बाथरूम की तरफ बढ़ी, छत पर एक छोटा बाथरूम था….जो कम ही यूज़ किया जाता था…..और फिर जैसे ही ममता बाथरूम में घुसी, तो विनय भी उठ कर बाथरूम की तरफ चल पड़ा….उसकी नज़रें भी बाथरूम की तरफ जाते हुए, चारो तरफ का मुआईना कर रही थी….फिर वो जैसे ही विनय बाथरूम में एंटर हुआ, तो ममता ने बाथरूम का डोर बंद करते हुए, विनय को अपनी चुचियों से कस्के चिपका लिया…..

सुबह-2 जैसे ही विनय को जैसे ही अपनी चेस्ट मे ममता की चुचियों के तने हुए निपल्स महसूस हुए, तो विनय की सारी सुस्ती और नींद एक दम से गायब हो गयी……ममता ने कुछ पलों के लिए विनय के होंटो को चूमा और फिर विनय से अलग होते हुए तेज़ी से हड़बड़ाते हुए बोली. “विनय जल्दी करो….अपना शॉर्ट्स उतारो…….” विनय ने झुक कर अपने शॉर्ट्स को जैसे ही नीचे किया तो, उसका लंड जो की मॉर्निंग बोनर के कारण एक दम तना हुआ था, बाहर आकर झटके खाने लगा….ममता ने लपक कर विनय के लंड को अपने हाथ मे भर कर हिलाया….तो उसका लंड और भी तन गया……..

ममता: (विनय के लंड को छोड़ते हुए) चल पूरा उतार दे……

विनय ने जैसे ही अपना शॉर्ट्स उतार कर अपनी टाँगो से निकाला तो, ममता ने उसका शॉर्ट्स पकड़ कर हॅंगर पर टाँग दिया….”चल जल्दी से वहाँ पर बैठ जा” ममता ने कमोड की तरफ इशारा करते हुए कहा….विनय कमोड पर बैठ गया……ममता ने जल्दी से अपनी सलवार का नाडा खोला और फिर अपनी सलवार और पेंटी के जबरन में उंगलियों को फन्साते हुए दोनो को एक ही साथ मे उतारते हुए, अपनी टाँगो से निकाल कर हॅंगर पर टाँग दिया….विनय तरसती हुई नज़रों से ममता की तरफ देख रहा था…….उसकी चूत की एक झलक पाने के लिए उसका मन नज़ाने कब से तरस रहा था….

अभी भी ममता की बिना बालो वाली चूत उसकी नज़र के सामने नही थी…..ममता के कुर्ते का पल्ला उसकी जाँघो तक को ढके हुए था….जब ममता ने विनय को इस तरह अपनी जाँघो की तरफ घुरता पाया, तो उसके होंटो पर तीखी कामुक मुस्कान फेल गयी….वो समझ गयी कि, विनय की नज़रें किस चीज़ को तलाश कर रही है……पर आज वो विनय के दिल की हर खावहिश पूरा कर देना चाहती थी…..क्योंकि उसके बाद तो, वो 20 दिन के लिए अपने मायके जा रही थी…..वो अपनी गान्ड को मटकाते हुए विनय सामने आकर खड़ी हो गयी…….

और फिर अपने कुर्ते के पल्ले को पकड़ कर धीरे-2 अपनी कमर तक उठा दिया……जैसे ही विनय की नज़र ममता की जाँघो में कसी हुई चूत पर पड़ी, तो विनय के लंड ने जबरदस्ता झटका खाया…..जिसे देख ममता मंद-2 मुस्कुराते हुए बोली……”इसे ही ढूँढ रही थी ना जनाब की नज़रें…..अब ऐसे बैठे देखते ही रहोगे, या फिर इसको छू कर भी देखना है…..” विनय ने ऊपेर सर उठा कर देखा तो, ममता की आँखो में वासना के लाल डोरे तैर रहे थी. विनय ने गाले का थूक गटकते हुए, हां में सर हिला दिया……

उसने अपने काँपते हुए हाथ को धीरे से जैसे ही ममता की चूत की फांको पर रखा, तो ममता ने सिसकते हुए, अपनी जानफहो को खोल कर फेला दिया….”श्िीीईईईईई विनय हाआँ ज़ोर से मसल इसको……” विनय ने अपनी पूरी हथेली उसकी जाँघो के बीच में लेजाते हुए, चूत की फांको के ऊपेर रखते हुए धीरे-2 उसकी चूत को मसलना शुरू किया, तो ममता का पूरा बदन थरथरा गया……अभी विनय ने कुछ ही देर ममता की छूट को मसला था कि, ममता ने उसके हाथ को अपनी चूत से हटाते हुए, विनय की जाँघो के दोनो तरफ पैर करके खड़ी हो गयी….

फिर एक हाथ नीचे लेजा कर विनय के लंड को पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर सेट करते हुए धीरे-2 नीचे की ओर अपनी चूत को दबाने लगी, तो विनय के लंड का सुपाडा ममता की चूत की फांको को चूत के छेद पर तरफ खेंचता हुआ थोड़ा सा ही अंदर घुस पाया…..ममता की चूत एक दम सुखी थी…..सुबह-2 उसकी चूत बिल्कुल भी नम नाही थी….ममता ने अपनी गान्ड को विनय की जाँघो से ऊपेर उठाया…..और फिर एक हाथ को अपने मूह के सामने लाते हुए, उसमे ढेरे सारा थूक अपने मूह से उगल दिया…..

विनय ये सब पहली बार देख रहा था…..उसे इतना तो समझ आ गया था कि, आज मासी की चूत उस दिन की तरह पानी नही छोड़ रही है…..पर वो अपने हाथ पर थूक क्यों रही है….ये बात विनय की समझ से परे थी…..ममता ने अपने हाथ मे थूक लेकर हाथ को नीचे किया…और फिर विनय के लंड पर उस हाथ से अपने थूक को फैलाते हुए मलने लगी…..फिर जो थोड़ा सा थूक उसके हाथ मे बचा था, उसने उसे जल्दी से अपनी चूत के छेद और फांको पर लगा दिया……उसने फिर से विनय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर सेट किया, और जैसे ही थोड़ा सा वजन उसने नीचे की ओर डाला तो, ममता के थूक से सना हुआ विनय का लंड फिसल कर सुपाडे तक ममता की चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा…..

ममता: श्िीीईईईईईई उंह बन गया काम……ओह्ह्ह्ह विनय…….

ममता ने तब तक अपनी चूत को विनय के लंड के सुपाडे पर दबाना जारी रखा, जब तक विनय का पूरा लंड ममता की चूत की गहराइयों मे समा नही गया….अपनी चूत को विनय के लंड से पूरी तरह भरा हुआ महसूस करके, ममता के पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी… उसने विनय के होंटो पर अपने तपते हुए होंटो को लगा दिया……दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंटो को चूसने लगी….

ममता अब विनय की जाँघो पर बैठी हुई, तेज़ी से अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी…. विनय का लंड भी उसी रफतार से ममता की चूत के अंदर बाहर हो रहा था…..कुछ ही पलों मे ममता इतनी गरम हो गयी कि, उसकी चूत जो थोड़ी देर पहले एक दम खुसक थी. अब उसमे मानो जैसे पानी की बाढ़ आ गयी हो….अब विनय का लंड भी ममता की चूत से निकल रहे कामरस से भीग कर आसानी से अंदर बाहर होने लगा था….

विनय भी अब पूरी तरह मदहोश हो चुका था…..उसके हाथ खुद ब खुद ममता की चुचियों पर आ गये थे……और जैसे ही उसने ममता की चुचियों को पकड़ कर मसलना शुरू किया, तो ममता एक दम जोश से भर उठी, उसने पूरे जोश मे आते हुए तेज़ी से अपनी गान्ड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया…..”अह्ह्ह्ह ओह विनय श्िीीईईईई ओह मज़ा आ रहा है ना……श्िीीईईई मेरी फुददी मार कर…..” ममता ने सिसकते हुए विनय की आँखो मे देखते हुए बोला…..

विनय: अहह हाआँ बॅ बहुत मज़ा आ रहा है ओह……

ममता ने विनय के हाथो पर अपने हाथ रखे, और उसके हाथो को अपनी चुचियों से हटाते हुए, अपनी कमर के पीछे लेजाना शुरू कर दिया….ये सब करते हुए ममता की कमर लगतार आगे पीछे होते हुए हिल रही थी….उसने विनय के हाथो को पीछे लेजा कर अपने मोटे-2 चुतड़ों पर रख दिए….”ष्हिईीईईई ओह विनय इन्हे भी मसलो……श्िीीईईईई” जैसे ही विनय के हाथ ममता के मोटे चुतड़ों पर लगे तो, विनय का दिल और तेज़ी से धड़कने लगा….आज पहली बार वो ममता के चुतड़ों को छू रहा था….विनय ने ममता के चुतड़ों को पकड़ कर धीरे-2 मसलना शुरू कर दिया….”श्िीीईईईईई ओह विनय हाआंस ऐसीए हीए और ज़ोर से दबा मेरी गान्ड को….”

विनय तो पहले ही बहुत मस्त हो चुका था…..इसीलिए अब वो ममता के चुतड़ों को पागलो की तरह अपनी हथेलियों मे दबोचते हुए मसल रहा था…….ममता ने अब अपनी गान्ड को पूरी रफ़्तार से हिलाना शुरू कर दिया था…..”ओह श्िीीईईईई विनय ओह हइई देख आह मेरी फुद्दि पानी छोड़ने वाली है अहह उंह शियीयीयैआइयीयीयियी” ममता बुरी तरह से मचलते हुए झड़ने लगी……और साथ ही विनय के लंड से वीर्य की धार निकल कर उसकी चूत को अंदर तक भरने लगी…..

सुबह के 9 बज रहे थे…..ममता अपने मायके जाने के लिए तैयार थी……विनय बाहर बरामदे मे एक कोने मे बैठा हुआ, तरसती हुई नज़रों से ममता को बार-2 देख रहा था. कैसा रोग वो उस मासूम को लगा कर उससे दूर जा रही थी……अब मैं ये सब किसके साथ करूँगा…..अब तो मासी 20 दिन बाद ही वापिस आएँगी…..इतने दिन तक कैसे वेट करूँगा..

“विनय जा ममता को बस स्टॉप तक छोड़ आ…..” अपनी मामी किरण की आवाज़ सुन कर विनय अपने ख़यालों की दुनिया से बाहर आया….”जी छोड़ आता हूँ……” विनय ने उदासी के साथ सर को झुका लिया, तभी ममता भी अपना बॅग उठा कर विनय के पास आ गयी…..फिर ममता ने किरण से विदा ली, और विनय के साथ बाहर आ गयी…..दोनो गली मे चलते हुए रोड की तरफ जाने लगे….

ममता: क्या बात है उदास लग रहे हो….?

विनय: नही तो……

ममता: ह्म्म्म्म जानती हूँ……तुम्हे मेरा जाना अच्छा नही लग रहा ना…..?

विनय: (हां मे सर हिलाते हुए) जी…..

ममता: दिल छोटा मत करो मेरे शोना……मैं जल्दी वापिस आने की कॉसिश करूँगी…..

विनय: कब तक आ जाएँगी आप…..?

ममता: अभी तो कुछ कह नही सकती……पर जल्दी से सारा काम ख़तम करके वापिस आने की पूरी कॉसिश करूँगी……मेरा भी अब तुम्हारे बिना कहाँ दिल लगेगा…..

ममता की बात सुन कर विनय को तसल्ली हुई, कि ममता भी तो उससे दूर जान बुझ कर नही जा रही है…..रोड पर जाकर दोनो बस स्टॅंड पर खड़े हो गये…….”अब ऐसे मूह लटका कर रखोगे तो मुझे सारे रास्ते मे तुम्हारा ये उदास चेहरा नज़र आता रहेगा…..” ममता ने स्माइल करते हुए कहा….तो विनय ने जबरन अपने होंटो पर मुस्कान लाते हुए कहा….”आप मेरी चिंता मत करिए……आप वहाँ जाकर जल्दी से काम ख़तम करके आ जाना…..मैं वेट करूँगा…”

इतने मे बस आ गयी…..ममता ने प्यार से विनय के गाल को चूमा और फिर बस मे चढ़ गयी…..विनय ने बाहर खड़े होकर हाथ हिलाते हुए उससे विदा किया, और उसके बाद उदास चेहरा लिए हुए घर की तरफ लौटने लगा……

 
14

तभी सामने से विनय को रामू आता हुआ दिखाई दिया….उसके हाथ मे भी बॅग था…..विनय को देख उसके होंटो पर मुस्कान फेल गयी…..जैसे ही वो विनय के पास पहुचा तो, उसने अपना बॅग नीचे रखा और इधर उधर देखते हुए बोला….”अर्रे विनय बाबू पता है सुबह से आपके घर के सामने से 5 चक्कर लगा चुका हूँ…”

विनय: क्यों……कोई ज़रूरी काम था…..?

रामू: हां वो मेरे पिता जी की तबीयत खराब हो गयी है…..इसीलिए गाओं जा रहा हूँ….कल आपको बताया था ना कि आज शाम को घर पर आना है…..?

विनय: हां कहा था तो….?

रामू: वही बताना चाहता था…..कि आज मैं गाओं जा रहा हूँ…..20 दिन बाद ही आउन्गा…. जब स्कूल शुरू होंगे तब…..आप दोपहर को 12 बजे स्कूल मे चले जाना….मेरी पत्नी अंजू वही होगे…..उससे मिल लेना…..वो तुम्हे बता देगे कि, मैने तुम्हे क्यों बुलाया था…..

विनय: ना ना मैं नही जाता उसके सामने……मुझे तो बहुत डर लगता है तुम्हारी पत्नी से…..

रामू: आप क्यों फिकर कर रहे है….उसको समझा दिया है…..उसने तो आपको बुलाया है….देखना वो आपसे माफी भी माँगेगी….

विनय: नही फिर भी मैं अकेला नही जाउन्गा उसके पास….

रामू: अच्छा एक काम करो…..ये ये पैसे लो….और अभी स्कूल जाओ…जब वो बाहर आए तो, उसे ये पैसे देना और बोलना कि, मेने भेजे है….अगर तुम्हे लगे कि वो अभी भी तुम्हारे साथ ठीक से पेश नही आ रही है तो, फिर दोपहर को मत जाना ठीक है……

विनय: (कुछ देर सोचने के बाद….) पर करना क्या है वहाँ मेने जाकर सॉफ-2 बाताओ….

रामू: (उसके सामने चुदाई का इशारा करते हुए) ये करना है…..साली की चूत में बहुत आग लगी हुई…..साली को ठंडा कर देना….

रामू के मूह से ये बात सुन कर विनय एक दम भौचक्का रह गया…उसे यकीन नही हो रहा था कि, रामू उससे खुद कह रहा है, कि उसकी पत्नी को चोद दे….रामू ने मुस्कुराते हुए विनय के कंधे पर हाथ मारा…..”अच्छा अब मैं निकलता हूँ, ट्रेन का टाइम हो रहा है….जानना ज़रूर.” रामू ने अपना बॅग उठाया और आगे निकल गया…..कुछ पलों के लिए विनय वहाँ से हिल भी नही पाया….उसे समझ मे नही आ रहा था कि, आख़िर ये सब उसके साथ हो क्या रहा है.

अभी विनय चलने ही लगा था कि, रामू ने उसे फिर से आवाज़ लगाई, वो थोड़ी दूरी पर एक मेडिसिन की दुकान पर खड़ा था….शायद कुछ ले रहा था…..विनय धीरे-2 उसकी तरफ बढ़ा, इतने मे रामू भी दुकान से उसकी तरफ आया, और फिर इधर उधर देखते हुए एक छोटा सा पॅकेट उसके हाथ मे पकड़ा दया…..

विनय: ये क्या है….?

रामू: (मुस्कुराते हुए) व्याग्रा है……

विनय: (पॅकेट खोल कर अंदर पड़ी टॅब्लेट्स की तरफ देखते हुए….) इन गोलियों का मैं क्या करूँगा……

रामू: शीई धीरे बोल……सुन ये गोलियाँ बहुत काम की चीज़ है…..देख जब तू दोपहर को स्कूल मे जाएगा तो, जाने से 1 घंटा पहले 1 टॅबलेट खा लेना…..

विनय: क्यों……..?

रामू: अर्रे यार इससे लंड एक दम लोहे के जैसे सख़्त हो जाता है….बड़ी-2 गस्तियो की बस हो जाती है….अगर इसको खा कर किसी के ऊपेर चढ़ जाओगे……तुम्हारा लंड झड़ने के बाद भी नही बैठेगा…..उस साली रांड़ की ऐसे ठुकाइ करना कि, साली तेरे लंड की गुलाम हो जाए…..

विनय: यार इसे खाने से कोई गड़बड़ तो नही होगी……

रामू: नही होती यार मेने खुद खा कर देखी है…..और वो मनीष है ना…..उसने भी एक बार ये गोली खा कर मेरे ऐसे ठुकाइ की थी, कि साला 4 दिन तक तो चल ही नही पाया था…अच्छा अब मैं चलता हूँ….नही तो ट्रेन मिस हो जाएगी…..

रामू जल्दी से रोड की तरफ चला गया….विनय धीरे-2 घर की तरफ जाने लगा…..वो बार बार हाथ मे पकड़े हुए पैसो को देख रहा था……उसे समझ मे नही आ रहा था कि, वो अब क्या करे, रह-2 कर उसके दिमाग़ मे अजीब-2 से ख़याल आ रहे थे….कि, कही उसकी पत्नी मुझे किसी चक्कर मे ही ना फँसा दे…अगर कुछ गड़बड़ हुई तो, घर पर मेरे बारे मे सब क्या सोचेंगे…..एक हाथ मे पैसे, और एक पॉकेट मे व्याग्रा के 10 टॅब्लेट्स, विनय को ऐसा लग रहा था. कि जैसे वो कोई नशे का समान चोरी छिपे कहीं ले जा रहा हो…..

रास्ते मे जाते हुए जब कभी कोई पहचान वाला दिखाई देता तो, विनय डर के मारे सर झुका लेता. पहले तो इन पैसो को ठिकाने लगाना है….घर गया और मामी ने मेरे पास ये पैसे देख लिए तो क्या जवाब दूँगा….वो इसी सोच मे चलता हुआ स्कूल के पास पहुच गया था…. वो मन ही मन सोच रहा था कि, रामू तो स्कूल के बिल्कुल पीछे वाले रूम मे रहता है. अगर गेट बंद हुआ तो बहुत ज़ोर-2 खटकाना पड़ेगा….और अगर किसी ने देख लिया तो क्या जवाब दूँगा कि, बंद स्कूल मे क्या काम है…..

बोल दूँगा कि, रामू ने पैसे भेजे है वही पकड़ाने है……जवाब तो विनय के पास तैयार ही था….पर जैसे ही वो स्कूल के सामने पहुँचा तो ये देख कर उसकी जान मे जान आए, कि रामू की पत्नी अंजू स्कूल के बाहर गली मे खड़ी हुई थी….और सब्जी वाले से सब्जी ले रही थी…..उसने मिक्स लाइट पिंक और वाइट कलर की साड़ी पहनी हुई थी….वो झुंक कर ठेले से सब्जी उठा रही थी……जैसे ही अंजू की नज़र विनय पर पड़ी, तो उसने होंटो पर कामुक मुस्कान लाते हुए विनय की तरफ देखा, तो विनय एक दम से हैरान हो गया…..वो धीरे-2 आगे उसकी तरफ बढ़ रहा था……”जाओ भैया इसमे से कोई भी तरकारी ताज़ी नही है….नही लेने मुझे..” उसने जब विनय को पास आते हुए देखा तो, उसने सब्जी वाले को भागना ही सही समझा….

 
सब्जी वाला भुन्भुनाता हुआ आगे चला गया….विनय अंजू के पास आया….और अंजू की तरफ पैसे बढ़ाते हुए बोला……”ये पैसे वो अंकल ने दिए थी आपको देने के लिए…” अंजू ने मुस्कराते हुए विनय को ऊपेर से नीचे की तरफ देखा, जैसे बिल्ली चूहे को खाने से पहले देख रही हो, कि कितना गोश्त है उसमे……उसने विनय के हाथ से पैसे लेते हुए, उसके सामने ही अपने ब्लाउस मे हाथ डालते हुए अंदर रख लिए……

अंजू: (कातिल अदा के साथ मुस्कराते हुए) और कुछ तो नही कहा था……?

विनय: (कुछ सोच कर हकलाते हुए) हां वो वो कहा था कि, आप को कुछ काम है मुझसे इसीलिए 12 बजे आपके पास आने के लिए कहा था…..

अंजू: (होंटो पर तीखी जानलेवा मुस्कान लाते हुए…..)और कुछ नही कहा क्या……

विनय: ना नही और कुछ नही कहा….

अंजू: (मन ही मान रामू को कोसने लगी कि, रामू ने उसे सॉफ-2 क्यों नही बताया….अंजू सोच रही थी कि, अब इस चिकने लौन्डे को खुद ही अपने काम जाल मे फसाना होगा..) चल कोई ना…..फिर 12 बजे आ रहे हो ना…..

विनय: जी आ जाउन्गा…..

अंजू: (विनय के बिल्कुल करीब जाकर खड़े होते हुए….इतना करीब कि विनय के नथुनो से निकलने वाली हवा उसे अपनी ब्लाउस के ऊपेर से झाँक रही चुचियों पर महसूस होने लगी. विनय की हालत तो एक दम पतली हो गयी थी…..) ठीक है आ जाना…..मैं तुम्हारा इंतजार करूँगी….

ये कह कर जैसे ही अंजू मूडी, तो उसके ब्लाउस मे कसी हुई चुचियाँ विनय के कंधे से रगड़ खा गई……विनय का पूरा बदन झंझणा उठा…”अहह……” अंजू ने जान बुज कर सिसकते हुए विनय की आँखो मे देखा और फिर कातिल अदा के साथ मुस्कुराते हुए स्कूल के अंदर चली गयी. विनय वापिस घर की तरफ जाने लगा…..वो सारे रास्ते मे अपने ही ख्यालों मे डूबा हुआ था. जैसे ही वो घर के पास पहुचा तो उसे अपने पेंट की पॉकेट मे पढ़ी हुई व्याग्रा टॅब्लेट्स का ख़याल आया……उसका दिल जोरो से धड़क रहा था…..

कि कही मामी की नज़र उसकी पेंट की फूली हुई जेब पर ना पड़ जाए….विनय ने डरते हुए डोर बेल बजाई, तो थोड़ी देर बाद वशाली ने गेट खोला…..विनय ने अंदर आते हुए वशाली से पूछा, “वशाली मामी जी कहाँ है…..”

वशाली: वो अभी शीतल बुआ के घर पर गयी है….

जैसे ही विनय ने सुना कि मामी घर पर नही है, तो उसकी जान मे जान आई…..वो जल्दी से अपने रूम की तरफ चला गया…..रूम मे पहुच कर वो ऐसी जगह तलाश करने लगा. जहाँ पर वो उन टॅब्लेट्स को रख सके…तभी विनय को अपने पिग्गी बॅंक का ख़याल आया….जिसमे उसने पिछले एक साल से काफ़ी पैसे जोड़ कर रखे हुए थे…..उसने जल्दी से अपने पीगी बॅंक का लॉक खोला और उसमे एक टॅबलेट को छोड़ कर बाकी सब रख दी…..

क्योंकि विनय जानता था कि, उसके पिग्गी बॅंक को कोई भी हाथ नही लगाता….और वैसे भी उसके पिग्गी बॅंक के लॉक की चाबी सिर्फ़ उससे के पास रहती थी…..उसके बाद विनय ने घड़ी मे टाइम देखा तो अभी सिर्फ़ 9:30 बज रहे थे….तभी उसे बाहर से मामी और मासी शीतल की आवाज़ सुनाई दी….दोनो घर आ चुकी थी…..विनय जब रूम से बाहर निकल कर बरामदे मे आया तो, देखा किरण मामी और शीतल मासी के साथ उनके दोनो बच्चे भी आए हुए थे…..

विनय को देखते ही, पिंकी और अभी दोनो उसके पास आ गये……..”चलो भाई हाइड & सीक खेलते है…..” अभी ने विनय का हाथ पकड़ते हुए कहा….विनय का मन तो नही था. पर 12 बजने मे अभी बहुत टाइम था…..इस लिए टाइम पास तो करना ही था….”चलो फिर ऊपेर चलते है…..” विनय ने अभी की ओर देखते हुए कहा…..तो पिंकी वशाली के रूम की तरफ जाने लगी…..”मैं वशाली दीदी को भी बुला कर लाती हूँ…..” और फिर वो वशाली के रूम मे चली गयी…..थोड़ी देर बाद जब वशाली रूम से बाहर आई, तो उसके साथ रिंकी भी थी….रिंकी को देखते ही, विनय को कुछ दिन पहले हुई अलमारी वाली घटना याद आ गयी….

रिंकी बड़ी हसरत भरी नज़रों से विनय की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी…..अब विनय कुछ-2 लड़कियों के चेहरे के हावभाव समझने लग गया था…

15

विनय रिंकी की टीशर्ट में कसी हुई चुचियों को एक टक घुरे जा रहा था…..उसकी चुचियाँ ममता से थोड़ी ही छोटी थी……जब रिंकी ने उसे अपनी चुचियों की तरफ इस तरह घुरता हुआ पाया तो, उसने मुस्कुराते हुए धीरे-2 से वशाली के कान में कुछ कहा, तो वशाली ने भी विनय की नज़रों का पीछा काया, और फिर रिंकी की तरफ देखने लगी…..फिर दोनो एक दम से हँस पढ़ी…..विनय को समझ आ गया कि, ये दोनो उसकी बेफ़्कूफी पर हंस रही है…..इसीलिए उसने शर्मिंदा होते हुए अपने सर को झुका लिया……..

वशाली: अब ऐसे ही कबूतर की तरह खड़ा टुकूर-2 देखता रहेगा……या फिर कुछ करेगा भी…..?

वशाली ने रिंकी की कमर में कोहनी मारते हुए, विनय से कहा तो, विनय एक दम से हड़बड़ा गया…..”क्या क्या करना है…….” वशाली और रिंकी दोनो एक दूसरे की तरफ देख कर फिर से खिलखिलाने लगी…..”कुछ नही भौंदू राम…..तुम लोग ऊपेर जाकर छुपो…..सबसे पहले में टर्न देती हूँ……” वशाली ने आँखो ही आँखो से रिंकी को इशारा करते हुए कहा….

विनय: क्या बात है, आज बड़ी दयालु हो रही है तू हम सब पर……

वशाली: मेरी मरजी अब जाओ ऊपेर जाकर छुपो ना……में काउंटिंग स्टार्ट करने लगी हूँ…..

वशाली ने इतना कहा ही था कि, सब ने ऊपेर की तरफ दौड़ लगा दी….पिंकी और अभी दोनो अलग -2 कमरो में छुप गये…..जबकि विनय उसी रूम की तरफ बढ़ रहा था…..जहाँ पर वो कुछ दिन पहले रिंकी के साथ अलमारी के अंदर छुपा था…..विनय का दिल उस रूम की तरफ जाते हुए जोरो से धड़क रहा था….कारण ये था कि, रिंकी आज भी उसके पीछे-2 ही आ रही थी…..रूम में पहुँच कर, विनय ने वो अलमारी खोली, और अंदर घुस गया….तो बाहर खड़ी रिंकी ने मिन्नत भरे लहजे में कहा……”विनय में भी अंदर आ जाउ…..”

 


उसके होंटो पर मासूम सी स्माइल थी……विनय ने हां में सर हिलाया तो, रिंकी जल्दी से उस अलमारी में घुस गयी……अलमारी में घुसते ही, विनय ने जैसे ही अलमारी के डोर को बंद किया, तो, रिंकी ने उसी दिन की तरह ही, अपनी स्कर्ट को आगे से ऊपेर उठा लिया….ताकि वो अपने मुनिया का संगम उसके बलमा यानी विनय के लंड से करवा सके….जैसे ही डोर बंद हुआ, तो अंदर एक दम अंधेरा छा गया……दोनो एक दूसरे की तरफ मूह करके आमने सामने खड़े थे…..दोनो की साँसे एक दूसरे के चेहरे पर टकरा रही थी…..”आहह यहाँ खड़ा होना सच में बहुत मुस्किल है….” रिंकी ने अपने दोनो हाथो को विनय के कंधे पर रखते हुए कहा…

रिंकी को अपने इतना करीब पाकर विनय का दिल भी जोरो से धड़क रहा था….रिंकी बदन से उठ रही भीनी-2 मादक खुसबु उसे दीवाना बनाए जा रही थी…..दोनो अंधेरे में ही एक दूसरे के आँखो में झाँकने के कॉसिश कर रहे थे…..जब रिंकी को अपनी जाँघो के बीच इस बार विनय के लंड का दबाव महसूस नही हुआ, तो उसने अपनी टाँगो को खोल कर अपनी चूत को विनय की पेंट के ऊपेर से लंड वाले हिस्से पर धीरे-2 रगड़ना शुरू कर दिया…..इतना धीरे कि विनय को अंदाज़ा लगाना भी मुस्किल हो रहा था कि, रिंकी ये सब जानबूझ कर कर रही है…..या फिर जगह तंग होने के कारण वो सही से खड़े नही हो पा रही…….

पर जो भी था, रिंकी की पेंटी में कसी हुई चूत की तपिश उसके लंड तक ज़रूर पहुँच गयी थी……जिसके कारण उसका लंड उसकी पेंट में अब धीरे-2 खड़ा होने लगा था….विनय को भी लगने लगा था कि, रिंकी भी उसकी तरह वासना की आग में जल रही है….उसने हिम्मत करते हुए और अंज़ान बनते हुए अपना एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया…..जैसे ही रिंकी को विनय का हाथ अपनी कमर पर महसूस हुआ, तो रिंकी के बदन में सिहरन से दौड़ गयी…..उसने अपनी पैंटी के ऊपेर से चूत पर विनय का तना हुआ लंड रगड़ ख़ाता हुआ महसूस होने लगा था…

दोनो कुछ देर चुप रहे…..दोनो की साँसे धौंकनी की तरह तेज चल रही थी…..रिंकी की चूत से पानी रिस-2 कर उसकी पेंटी को गीला करने लगा था…..यही हाल विनय का भी था…उसका लंड तो मानो जैसे बागवत पर उतर आया था….वो पेंट फाड़ कर रिंकी की चूत में घुस जाना चाहता था….और रिंकी की चूत भी विनय के लंड को अपने अंदर महसूस करने के लिए धुनकने लगी थी…..और फिर जब मदहोश होकर विनय ने अपना दूसरा हाथ भी रिंकी की कमर पर रखा. तो रिंकी एक दम से सिसकते हुए विनय से एक दम चिपक गये……

उसकी गोल-2 चुचियाँ विनय की चेस्ट में दब से गयी…..लंड रिंकी की चूत पर पैंटी के ऊपेर से अंदर जाने के लिए दबाव बढ़ाता जा रहा था…..”श्िीीईईईईईई विनय…….” रिंकी ने सिसकते हुए, जैसे ही अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ा तो, मानो जैसे विनय पर कहर बरस गया हो….विनय के लंड ने झटके खाते हुए अपना लावा उगलना शुरू कर दिया….उसकी साँसे उखाड़ने लगी थी…..

और फिर धीरे-2 उसका लंड सिकुड़ने लगा……एक अजीब सी शर्मिंदगी उसके दिल दिमाग़ पर हावी होने लगी थी……झड़ने के बाद पता नही क्यों अब उसका और मन नही था….वहाँ खड़े रहने का….उसने अलमारी का डोर खोला, और बाहर आ गया…..रिंकी भी अपनी स्कर्ट ठीक करते हुए उसके पीछे बाहर आ गयी……रिंकी को भी विनय की हालत का कुछ-2 अंदाज़ा हो गया था. “क्या हुआ विनय बाहर क्यों आ गये…..” रिंकी ने जब विनय को सर झुकाए देखा तो, उसने विनय से पूछा……”क क कुछ नही……मेरा मन नही है…..खेलने का…..”

तभी रिंकी की नज़र विनय के पेंट पर पड़ी, जो उसके वीर्य के कारण आगे से गीली हो चुकी थी……..”हाईए इसका तो इतनी जल्दी हो गया…….फट्टू साला……” रिंकी ने मन ही मन विनय को गाली दी….क्योंकि, विनय ने उसे मज़धार में ही छोड़ दिया था….वो कामवासना की आग में सुलग रही थी……और मन ही मन विनय को कोस रही थी…..इतने में वशाली भी आ गयी…..इससे पहले कि वशाली कुछ बोलती, विनय रूम से बाहर चला गया….विनय को इस तरह गुस्से से बाहर जाता देख, वशाली ने रिंकी से पूछा…….

वशाली: क्या हुआ रिंकी, विनय इतने गुस्से में बाहर गया है क्यों……?

रिंकी: (एक घमंडी मुस्कान होंटो पर लाते हुए…..) हूँ कुछ नही…….तेरा भाई दो मिनट भी नही टिक पाया…..सारा मज़ा किरकिरा कर दया…..पेंट में ही लीक हो गया उसका…..

वशाली: श्िीीईई धीरे बोल….पागल है तू भी….अभी उसकी उम्र ही क्या है……

रिंकी: पर इतनी जल्दी…..मुझे तो लगता है…..तेरा भाई नमार्द है……

वशाली: देख रिंकी अगर आज के बाद तूने विनय के बारे में ऐसा कुछ बोला तो, मुझसे बुरा कोई ना होगा…..

रिंकी: ठीक है……में भी आज के बाद तुमसे कोई बात नही करूँगी…..में जा रही हूँ…..

रिंकी और वशाली दोनो इस बात से अंज़ान थी कि, विनय रूम के बाहर खड़ा छुप कर उनकी बातें सुन रहा है…..एक बार तो उसे वशाली पर इतना गुस्सा आया कि, वो अभी जाकर उसके मूह पर थप्पड़ मार दे….पर वशाली ने उसकी साइड ली थी…..जिसके कारण उसका गुस्सा थोड़ा ठंडा ज़रूर हो गया था……विनय वापिस नीचे चला गया…..और अपने रूम में जाकर एक हाफ पेंट ली, और बाथरूम में घुस गया…..उसने उस धब्बे को सॉफ किया, और फिर हाफ पेंट पहनी और उसमे से व्याग्रा की टॅबलेट निकाल कर अपने शॉर्ट्स के पॉकेट में रख ली…..

उसके मन में अजीब तरह का डर घर कर गया था…….कि कही अगर अंजू के पास जाकर भी उसके साथ ऐसा ही हुआ तो, कही वो भी उसका मज़ाक ना उड़ाए….पर रामू की कही हुई बात उसे याद थी…..कि इस टॅबलेट को खाने से क्या होता है….रिंकी अपने घर जा चुके थी…..11 बज चुके थे…..विनय ने पहले से ही अपने रूम में पानी की बॉटल रखी हुई थी….उसने जब देखा कि सब लोग बाहर बरामदे में बैठे है, तो उसने व्याग्रा की टॅबलेट खा ली…फिर बाहर आकर अपनी मामी के पास बैठ गया…..और 12 बजने का वेट करने लगा…..

पर बाहर जाने के लिए भी तो कोई ना कोई बहाना तो लगाना ही था……पर विनय जानता था कि, उसकी मामी इतनी तेज धूप में उसको घर से बाहर आसानी से नही जाने देगी….विनय ने करीब 10 मिनट तक काफ़ी तरह के बहाने सोचे…..फिर आख़िर कार उसके दिमाग़ में कुछ आया तो वो अपनी मामी से बोला……

विनय: मामी वो मुझे आकाश के घर जाना है…..

किरण: आकाश कॉन आकाश…..

विनय: मेरे क्लास में…..सुबह जब में मासी को छोड़ कर आ रहा था….तब मुझे अपनी मम्मी के साथ मिला था रास्ते में…..उसकी मम्मी बोल रही थी कि, तुम आकाश को आकर इंग्लीश का होमे वर्क करवा देना……

किरण: तो शाम को चले जाना……इतनी धूप में क्यों जाना है…..?

विनय: वो मामी उसका होमवर्क बहुत पीछे चल रहा है…..इसीलिए……

किरण: अच्छा चले जाना…..पर बाहर मत घूमना ज़्यादा….जा पहले कुछ खा ले…..

विनय: नही मामी में आकर खा लूँगा….

किरण: देख ज़िद्द नही करते…..पता नही वहाँ तुझे कितना टाइम लगे….चल बैठ रसोई में अंगूर रखे है……में लाकर देती हूँ…..

विनय: जी मामी…….

किरण उठ कर किचन में गयी…..और एक प्लेट में अंगूर डाल कर ले आई…..विनय ने अंगूर खाए…तो देखा कि, 12 बजने में सिर्फ़ 15 मिनट बचे है….विनय ने अपनी एक कॉपी और इंग्लीश की बुक उठाई और घर से बाहर आ गया…..स्कूल तो 5 मिनट की दूरी पर ही था….धूप इतनी तेज थी कि, गली एक दम सुनसान थी…..कोई भी बाहर नज़र नही आ रहा था…विनय अपनी गली से बाहर आ चुका था…..सामने ही स्कूल था….और जैसे ही वो स्कूल के गेट के सामने पहुँचा तो, उसने देखा कि स्कूल का छोटा गेट थोड़ा सा खुला हुआ था……

और अंदर की तरफ एक छोटे टेबल पर अंजू बैठी हुई बाहर की तरफ देख रही थी……उसने फरोज़ी कलर के साड़ी पहनी हुई थी…..जैसे ही उसने विनय को स्कूल के गेट के सामने देखा तो, उसने जल्दी से खड़े होकर गेट खोला और विनय को अंदर आने का इशारा काया…..विनय ने गली में दोनो तरफ देखा……गली में उस समय कोई भी ना था……विनय जल्दी से स्कूल के अंदर चला गया…..जैसे ही विनय अंदर गया….अंजू ने गेट बंद किया……

और फिर विनय की तरफ पलट कर मुस्कुराते हुए बोली…..”बड़े टाइम पर आ गये हो…..नही तो मुझे यहाँ गरमी में बैठना पड़ता…..चलो अंदर चलते है….” ये कह कर अंजू स्कूल की बिल्डिंग के पीछे बने हुए अपने रूम्स की तरफ जाने लगी…..अंजू के पीछे चलते हुए विनय का दिल जोरो से धड़क रहा था…..उसे अभी भी यकीन नही हो रहा था कि, क्या जो रामू ने उससे कहा है, वो सही है….आगे चल रही अंजू की मोटी मटकती हुई गान्ड को देख कर विनय के लंड में हलचल होने लगी थी…..धूप बहुत तेज थी….इसीलिए अंजू तेज़ी से चलते हुए कमरो की तरफ जा रही थी…..

उसने रूम के सामने पहुँच कर रूम का डोर खोला, और विनय को अंदर आने का इशारा करते हुए, रूम के अंदर चली गये….विनय भी उसके पीछे रूम में आ गया…..

टू बी कंटिन्यू....................

 
16

अंजू ने विनय को बेड की तरफ इशारा करते हुए बैठने को कहा….विनय बेड पर बैठते हुए इधर उधर देखने लगा…..”आज गरमी बहुत है ना……” उसने फ्रिज की ओर जाते हुए कहा… तो विनय ने हां मे सर हिलाते हुए हामी भर दी…..अंजू ने फ्रिज से ठंडे पानी की बॉटल निकाली और एक ग्लास मैं पानी डाल कर विनय को दिया….गरमी से वैसे भी विनय का गला सूख रहा था….जैसे ही ठंडा पानी विनय के हलक से नीचे उतरा तो, थोड़ी राहत मिली….विनय ने खाली ग्लास अंजू की तरफ बढ़ाया तो अंजू ने मुस्कराते हुए, विनय के हाथ से ग्लास पकड़ा और रूम मे बनी हुई सेल्फ़ पर रख दिया….

ग्लास रखने के बाद अंजू ने सभी विंडोस के आगे पर्दे कर दिए….जो पहले से ही बंद थी…..विनय का दिल जोरो से धड़क रहा था…..जब वो वापिस आकर विनय के पास बेड पर बैठी, तो उसने विनय से नज़र बचाते हुए, जान बुझ कर अपनी साड़ी का पल्लू को सरका दिया….उसके ब्लाउस के ऊपेर वाले दो हुक खुले हुए थे….जिसमे से उसकी 40 साइज़ की बड़ी-2 साँवले रंग की चुचियाँ बाहर आने को उतावली हो रही थी….जैसे ही विनय की नज़र अंजू के बड़े-2 साँवले रंग के तरबूजों पर पड़ी, तो विनय के लंड ने पेंट में अपना आकार बढ़ाना शुरू कर दिया. अगले ही पल उसकी आँखो के सामने ममता वशाली और मामी किरण की चुचियाँ एक एक करके घूम गयी….इन चारो मैं से अंजू की चुचियों का मुकाक़बला सिर्फ़ मामी किरण के साथ ही था…

अंजू की चुचियाँ उसकी मामी की चुचियों से भी कुछ बड़ी थी…..अपनी चुचियों को इस तरह घुरता देख अंजू मन ही मन मुस्कुराइ, और मुस्कराते हुए, उसने अपना एक हाथ विनय की जाँघ पर बिल्कुल उसके लंड पर रख दिया….विनय के पूरे बदन में झंझनाहट सी दौड़ गयी…..उसका केलज़ा मूह को आने को हो गया था…उसने सवालियाँ नज़रों से अंजू की आँखो में देखा और अंजू ने कातिल अदा के साथ मुस्कुराते हुए, अपने हाथ से उसकी जाँघ को सहलाते हुए कहा…..”विनय बाबू क्या लोगे…..चाइ या दूध…..” ये कहते हुए, अंजू ने अपने ब्लाउस के गले को थोड़ा से नीचे खेंचा तो, उसकी एक चुचि कुछ ज़्यादा ही बाहर आ गयी…..

अब तक विनय भी इन दोहरे अर्थ वाली बातो को कुछ-2 समझने लगा था…उसने अपने गले का थूक गटकते हुए बड़ी हिम्मत से कहा….”क क कॉन सा दूध….” अंजू विनय की बात सुन कर मुस्कुराइ, और फिर विनय की तरफ थोड़ा सा झुकते हुए बोली…..”जो तुम कहो….मैं मना नही करूँगी….” अब अंजू के हाथ की उंगलिया बार-2 विनय के लंड को पेंट के ऊपेर से टच हो रही थी….जिसके कारण विनय का लंड पेंट के अंदर एक दम टाइट हो चुका था….कामवासना अब विनय के सर पर चढ़ कर बोल रही थी……रामू तो उसे पहले ही बता गया था कि, अंजू लंड के लिए तड़प रही है…जिसके कारण विनय का हॉंसला कुछ बढ़ सा गया था….

उसने अपने काँपते हुए हाथ को उठा कर धीरे-2 अंजू की चुचियों की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….अंजू विनय के हॉंसले को देख कर मन ही मन मुस्कुराइ, और उसने अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे से नीचे सरका दया….विनय ने जैसे ही अपने काँपते हुए हाथ से अंजू की चुचियों को ब्लाउस के ऊपेर से पकड़ा तो, अंजू एक दम से सिसक उठी…उसने मस्ती से भरी आँखो से विनय को मुस्कुराते हुए देखा और फिर मदहोशी भरी आवाज़ में बोली…..” एक ही बाहर निकाल कर चूसना है….या फिर पूरी नंगी कर दूं इनको…..” विनय को अपने कानो पर यकीन नही हो रहा था….उसने कभी सोचा भी नही था कि, उसे एक और नयी चूत इतनी आसानी से मारने को मिल जाएगी…..

उसने तरसती हुई नज़रों से अंजू को देखा और फिर हां में सर हिला दिया….अंजू मुस्कुराइ और फिर बेड से उठ कर नीचे खड़ी हुई और, अपनी साड़ी उतारनी शुरू कर दी….अंजू ने अपनी साड़ी उतार कर टांगी और फिर अपने ब्लाउस के बाकी के बटन को खोलने लगी….जैसे -2 अंजू के ब्लाउस की बटन्स खुल रहे थे….वैसे-2 विनय का लंड उसकी पेंट में झटके पे झटके खा रहा था…. अंजू ने अपना ब्लाउस उतार कर बेड पर फेंक दिया….अब अंजू फरोज़ी कलर के पेटिकोट और वाइट कलर की ब्रा में विनय के सामने खड़ी थी….वाइट कलर की ब्रा में कसी हुई अंजू की चुचियों को देख कर तो विनय का लंड पेंट को फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो गया…

अंजू: (वासना से भरी आवाज़ से….) विनय बाबू अगर लंड तंग कर रहा हो तो, पेंट निकाल दो….

अंजू के मूह से ये बात सुन कर विनय एक दम हड़बड़ा गया……पर अंजू की तरफ से ये सॉफ संकेत था कि, अंजू उससे चुदवाने के लिए कितनी बेकरार है…अंजू ने अपने दोनो हाथो को पीछे लेजाते हुए, अपनी ब्रा के हुक्स खोल कर उसे भी अपने बदन से अलग कर दिया….अंजू के साँवले रंग की मोटी-2 गुदाज चुचियाँ उछल कर बाहर आई तो, विनय की जान उसके हलक में आकर फँस गयी……अब अंजू उसके सामने ऊपेर से बिल्कुल नंगी खड़ी थी…..उसकी चुचियों के काले रंग के मोटे-2 निपल्स एक दम तने हुए थे…..

अंजू धीरे-2 विनय की तरफ बढ़ी, और जैसे ही वो विनय के पास पहुँची तो, विनय ने अपना उतावला पन दिखाते हुए, अंजू की दोनो चुचियों को लपक कर अपने हाथों मे भर लिया….

और अगले ही पल उसने अंजू के अंगूर के जितने मोटे निपल को अपने मूह मे भर कर पागलों की तरह चूसना शुरू कर दिया……”श्िीीईईईईईईईईईईई ओह विनय उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…..” अंजू ने सिसकते हुए, विनय के सर को अपनी चुचियों पर दबाना शुरू कर दिया…..विनय की इस हरक़त से अंजू का पूरा जिस्म मस्ती में एक दम से कांप उठा….चूत की फांके कुलबुलाने लगी….उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए पेंट के ऊपेर से विनय के लंड को पकड़ कर धीरे-2 सहलाना शुरू कर दिया…जो पहले ही लोहे की रोड की तरह तना हुआ था….

जैसे ही अंजू को विनय के लंड की सख्ती और लंबाई मोटाई का अंदाज़ा हुआ, अंजू की चूत में तेज सरसराहट दौड़ गयी…चूत के अंदर धुनकि सी बजने लगी….एक पल भी और बर्दास्त करना उसके सबर से बाहर हो गया था….उसने विनय को अपने से अलग किया…और नशीली आँखो से विनय के तमतमाते चेहरे को देख कर बोली….”जल्दी करो विनय बाबू अब और इंतजार नही होता…उतार दो अपने कपड़े….” विनय भी तो इसी बात का इंतजार कर रहा था…उसने जल्दी से अपने कपड़े एक एक करके निकालने शुरू कर दिए….और फिर आख़िर मे जैसे ही उसने अपने अंडरवेर को नीचे उतारा…और उसका 7 इंच लंबा लंड हवा में आकर झटके खाने लगा तो,

हैरानी से अंजू की आँखे फेल गयी……उसे यकीन नही हो रहा था कि, इस ***** साल के लड़के की जाँघो के बीच इतना बड़ा और मोटा हथियार हो गया….उसका लंड एक दम तना हुआ ऊपेर की तरफ सर उठाए हुए था……फिर अंजू ने अपने पेटीकोटे के नाडे को खेंचते हुए खोल दिया…. और अगले ही पल अंजू का पेटिकोट उसकी कमर से सरक नीचे फर्श पर पड़ा धूल चाट रहा था……उसने विनय के पास आते हुए, विनय को पीछे बेड पर धकेल दिया….और जैसे ही विनय पीछे बेड पर लेटा तो, अंजू एक दम से उसके ऊपेर आ गयी…..

 


अंजू के बड़ी-2 गुदाज चुचियाँ अब विनय के चेहरे के ऊपेर लटक रही थी….उसके निपल्स अब और ज़्यादा तीखे होकर तन चुके थे….नीचे विनय का लंड अंजू की चूत की फांको पर दस्तक दे रहा था….विनय के लंड के सुपाडे की गरमी को अपनी चूत की फांको पर महसूस करके अंजू एक दम से सिसक उठी….उसके रोम-2 मे वासना से भरी मस्ती की लहर दौड़ गयी…. अंजू की चूत तो तब से पानी छोड़ रही थी….जब से वो गेट पर बैठी हुई थी, विनय के आने का इंताजार कर रही थी…..अंजू को रामू ने शादी के बाद से सिर्फ़ 4-5 बार ही चोदा था….वो भी अपने 4 इंच के लंड से, इसीलिए अंजू की चूत बहुत ज़यादा टाइट थी….विनय तो जैसे जन्नत मे पहुँच गया था….वो अपने ऊपेर झूल रही अंजू की चुचियों को अपने हाथो मे पकड़ कर मसलते हुए ज़ोर -2 से चूस रहा था….

अंजू एक दम गरम हो चुकी थी….उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए विनय के लंड को पकड़ और अपनी चूत की गीली फांको के बीच रगड़ते हुए, चूत के छेद पर भिड़ा दिया…और फिर जैसे ही उसने अपनी गान्ड को नीचे की ओर करके अपनी चूत को विनय के लंड के सुपाडे पर दबाना शुरू किया…और जैसे ही विनय के लंड का मोटा सुपाडा उसकी चूत के छेद को फैलाता हुआ अंदर घुसा तो, अंजू एक दम से चीख पड़ी….उसकी चीख सुन कर विनय भी घबरा गया…..”क्या हुआ….?” विनय ने घबराते हुए पूछा,”

तो अंजू ने अपने होंटो पर मुस्कान लाते हुए कहा…..”कुछ नही…..”

विनय: तो चीख क्यों रही हो…..?

अंजू: (दर्द से मुस्कुराते हुए….) तुम्हारा समान बहुत मोटा है….इसीलिए….हाईए….

वासना के आगे दर्द कहाँ ठहरता, अंजू अपनी चूत को धीरे-2 विनय के लंड पर दबाती चली गयी….और विनय के लंड का सुपाडा अंजू की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर जा घुसा. “ओह हइई छोरे तेरे लौन्डे ने तो मेरी बुर को पूरा भर दिया…..उंह श्िीीई हाईए कितना मोटा लंड है रे तेरा….” विनय ने अंजू की चुचियों को चूस्ते हुए अपने दोनो हाथो को पीछे लेजा कर अंजू के चुतड़ों पर रखते हुए मसलना शुरू कर दिया….”ओह्ह्ह ओह उंह सबाश मेरे राजा……हां मसल दे मेरी गान्ड को आह मेरे गान्डू पति ने आज तक इन्हे छुआ भी नही….”

अंजू ने धीरे-2 अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे करते हुए कहा….विनय का लंड अंजू की चूत के गाढ़े लैस्दार पानी से गीला होकर अंदर बाहर होने लगा था….विनय को अपना लंड अंजू की चूत की दीवारो में बुरी तरह पिसता हुआ महसूस होने लगा था….दिमाग़ मे ज़्यादा उतेजना के कारण, वो झड़ने के करीब पहुँच गया था…..और जैसे ही उसे लगने लगा कि, उसका लंड पानी छोड़ने वाला है, तो विनय ये सोच कर घबरा गया कि, कही अंजू भी रिंकी की तरह उसका मज़ाक ना उड़ाये…..और कही उसे अंजू से भी हाथ ना धोना पड़े….

पर दूसरी तरफ तो जैसे अंजू मदहोशी मे पागल हो चुकी थी…..उसने अपनी गान्ड को पूरी रफतार से ऊपेर नीचे करते हुए, अपनी चूत को विनय के लंड पर पटकना शुरू कर दिया था….”श्िीीईईईईईईईईईईईई ओह ओह अह्ह्ह्ह अहह अहह हाईए विनय बाबू कितना मस्त लंड है अह्ह्ह्ह तुम्हारा….अह्ह्ह्ह मज़ाअ आ गया……” अंजू के भारी भरकम चूतड़ विनय की जाँघो से टकरा कर सर्प-2 की आवाज़ करने लगे थे….तभी विनय को अपने बदन का सारा खून अपने लंड की नसों की तरफ दौड़ता हुआ महसूस हुआ, और फिर विनय के लंड से वीर्य की बोछार अंजू की चूत में होने लगी…..

विनय आनंद के चरम पर पहुँच चुका था….पर उसने अपनी सिसकारियों को दबा रखा था. डर था कि कही अंजू भी रिंकी की तरह नाराज़ ना हो जाए…

 
विनय बुरी तरह झड रहा था….और अंजू की चूत में अपने वीर्य की बोछार किए जा रहा था….पर अंजू तो जैसे कामवासना के नशे मे बेसूध सी हो गयी थी….वो पूरी रफ़्तार से अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे उछलाते हुए, अपनी चूत को विनय के लंड पर पटक रही थी…. झड़ते हुए विनय की बर्दास्त से बाहर हो गया था…वो आँखे बंद किए हुए, किसी तरह अपनी उखड़ी हुई सांसो को संभालने की कॉसिश कर रहा था…कुछ पल बीते तो, विनय का झड़ना बंद हुआ, उसका लंड मानो जैसे सुन्न पढ़ गया हो….उससे अपने लंड पर क़िस्सी तरह का अहसास नही हो रहा था….

जब उसने अपनी आँखो को खोल कर देखा, तो अंजू अभी भी उसके ऊपेर थी….और जब उसने नीचे अपनी लंड की तरफ नज़र डाली तो, उसका लंड अभी भी लोहे की रोड की तरह खड़ा था. जो उसके वीर्य और अंजू की चूत से निकल रहे पानी से एक दम सना हुआ था….अंजू ने मुस्कराते हुए विनय की आँखो में देखा और फिर काँपती हुई मदहोशी से भरी आवाज़ में बोली..” आहह विनय बाबू तुम्हारा हथियार तो सच में कमाल का है….इतना सख़्त लंड ओह्ह्ह्ह हाई मैं तो वारी जाउ तुम्हारे लंड पर…अह्ह्ह्ह….उंह श्िीीईईईई हाईए आज तो अपनी बुर की प्यास भुजा कर ही रहूंगी……”

ये कहते हुए, उसने और तेज़ी से अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे करना शुरू कर दिया….अब विनय को फिर से उसके लंड पर अंजू की टाइट चूत की दीवारें रगड़ खाती हुई महसूस होने लगी थी…. विनय फिर से गरम होने लगा था…उसने अपने हाथो से जो कि पहले से अंजू के चुतड़ों के ऊपेर थे….अंजू की गान्ड को दोबच-2 कर दबाना शुरू कर दिया…”अहह सबाश छोरे आहह और मसल मेरी गान्ड को अहह उम्म्म्मममम आहह हां ऐसे ही और ज़ोर से…. आह्ह्ह्ह मेरी गान्ड में उंगली डाल कर पेल दे…आहह…”

ये सुन कर विनय को शॉक लगा कि, क्या कोई गान्ड मे उंगली भी डालता है…..पर विनय को अब हर चीज़ सीखनी थी….और इसीलिए उसने बिना ज़्यादा सोचे, अंजू के चुतड़ों को दोनो तरफ फेलाते हुए अपनी एक उंगली को उसकी गान्ड के छेद पर रख कर दो चार बार कुरेदा तो, अंजू मस्ती में एक दम से पागल हो गयी…..”ओह हाआन विनय बाबू आअहह घुस्साओ ना… ओह्ह्ह्ह हाईए….मेरी चूत ओह…..” अंजू का बदन भी ऐंठने लगा था….विनय के लंड का सुपाडा जब उसकी चूत के अंदर उसकी बच्चेदानी से जाकर रगड़ ख़ाता तो, अंजू मदहोश होकर सिसक उठती…

अंजू: अहह अहह ओह्ह्ह्ह पूरा भर दिया तूने मेरी चूत को ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बहुत बड़ा लंड है तेरा अह्ह्ह्ह…..ये ले ईए ले देख मेरी चूत पानी छोड़ने वाली है….हाई ओह्ह्ह ले मैं तो गयी…ओह ईए ले छोड़ दिया मेरी चूत ने पानी अहह उंह श्िीीईईईईईई….

अंजू का बदन झड़ते हुए बुरी तरह से काँपने लगा था….उसकी कमर रुक -2 कर झटके खाने लगी….अंजू विनय के ऊपेर ढेर हो चुकी थी….पर अभी तो विनय का लंड खड़ा था. अंजू ने पागलो की तरह विनय के गालो होंटो पर चूमना शुरू कर दिया….चुदाई का सुख क्या होता है……अंजू को आज पता चल रहा था….अंजू की चूत से पानी निकल कर विनय के बॉल्स तक को गीला कर रहा था…..अंजू को अपनी पानी छोड़ती चूत मे अभी भी विनय का लंड लोहे की रोड की तरह खड़ा हुआ सॉफ महसूस हो रहा था….जिसे नीचे लेटा विनय अपनी कमर को ऊपेर की तरफ धकेलते हुए, अंदर बाहर करने की कॉसिश कर रहा था….

अंजू मुस्कुराते हुए जैसे ही विनय के ऊपेर से उठी….तो विनय का लंड पक की आवाज़ करता हुआ अनु की चूत से बाहर आ गया….अंजू विनय के बगल मे बैठ गयी….उसकी नज़रें विनय के झटके खाते हुए लंड पर अटक सी गयी थी….अंजू मन ही मन सोच रही थी. कि विनय के लंड में कितना दम है…..जो मेरे जैसी गरम औरत की चूत की गरमी को भी सहन कर गया….उसने विनय के झटके खाते हुए लंड को मुट्ठी मे पकड़ लिया….और विनय की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली….”वाह विनय बाबू आप के लंड ने तो कमाल कर दिया है…..” हाए ऐसे ही लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए नज़ाने कब से तड़प रही थी मैं…..

हाई कितना मोटा और लंबा मुनसल जैसा लंड है तुम्हारा….” और ये कहते हुए, अंजू ने झुक कर विनय के लंड को मूह मे भर लिया….जैसे ही उसने विनय के लंड को मूह में भर कर चुप्पे लगाने शुरू किए तो, विनय एक दम हैरान रह गया…..ये पहला मोका था…जब उसके लंड को कोई चूस रहा था….किसी ने मूह मे लिया था….सेक्स में ये सब भी होता है…विनय इन बातों से अंजान था…..विनय के बदन मे मस्ती की तेज लहर दौड़ गयी…..”ओह आंटी जी ये ये क्या कर रही है आप…..आह अह्ह्ह्ह छोड़िए…..”

अंजू: (विनय के लंड पर लगे विनय के वीर्य और अपनी चूत के पानी को चाट -2 कर सॉफ करते हुए…..) श्िीीईई ओह्ह्ह्ह विनय तुम्हारे लंड को प्यार कर रही हूँ मेरे राजा….इसने मेरी चूत की खुजली मिटाई है, तो इसकी देखभाल करना और इसकी सेवा करना अब मेरा धरम है….गल्प…

अंजू ने फिर से झुक कर विनय के लंड को मूह मे भर लिया और पागलो की तरह सर हिलाते हुए उसके लंड को चूसने लगी….विनय की मस्ती का तो कोई ठिकाना ही ना रहा….वो मदहोश होकर आँखे बंद किए लेटे हुए सिसकार रहा था….अंजू ने विनय के लंड को मूह से बाहर निकाला और उसकी बगल मे लेटते हुए बोली…..”आजा विनय ठोक दे अपना खुन्टा मेरी भोसड़ी मे..चल ऊपेर आजा….” उसने विनय को पकड़ कर जैसे ही अपने ऊपेर खेंचा तो, विनय जल्दी से उठ कर अंजू की जाँघो के बीच घुटनो के बल बैठ गया….अंजू ने अपनी चूत की फांको को दोनो हाथों से फेलाते हुए अपनी चूत का छेद विनय को दिखाते हुए कहा….”ले डाल दे अपना मुन्सल मेरी बुर मे…..फाड़ दे मेरी चूत….” विनय को तो मानो जैसे स्वर्ग मिल गया हो. उसने अपने लंड को पकड़ कर सुपाडे को अंजू की चूत पर टीकाया और एक ज़ोर दार धक्का मारा.

लंड का सुपाडा अंजू की गीली चूत के छेद को फैलाता हुआ अंदर घुसता चला गया….” अहह सबाश छोरे….ओह हइई…..हां आईसीए ही ज़ोर ज़ोर से थोक कर फाड़ दे मेरी भोसड़ी….ओह अह्ह्ह्ह और ज़ोर से कर ना……हाईए विनय मुझे नही पता था कि, तू इतनी अच्छी तरह चूत ओह्ह्ह्ह अहह मारता है….हाईए अब तो रोज अपनी बुर को तेरे लंड पिलवाउन्गी…..अहह श्िीीईईईईई हाईए ठोक दे पूरा ठोक दे…..” विनय भी अंजू की बातें सुन कर जोश में आ चुका था…..और अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाल कर-2 अंजू की चूत की गहराइयों मे उतार रहा था…बीच में जब कभी विनय का लंड उसकी चूत से बाहर आ जाता तो, अंजू झट से उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत मे डाल लेती…
 
जिस पुराने बेड पर चुदाई का ये खेल चल रहा था…..अब उसकी चूं-2 की आवाज़ निकलनि शुरू हो गयी थी…..विनय अंजू की चुचियों को कभी कसकस के दबाने लगता तो, कभी उन पर झुक कर उन्हे चूसने लगता……”अहह ओह हाआँ काट खा मेरी राजा खा जा मेरी चुचियों को अह्ह्ह्ह श्िीीईईईई उंह हाईए कहाँ था तू अब तक….मज़ा आ रहा है ना तुम्हे मेरी चूत मार कर…..हां बोल आ रहा है ना….”

विनय: आह हां आंटी बहुत मज़ा आ रहा है…..

अंजू: ओह ओह्ह्ह ऐसे नही बोल हाआँ मज़ा आ रहा है अंजू अंजू बोल मुझे बोल साली रांडी तुझे चोद कर बड़ा मज़ा आ रहा है ओह्ह्ह्ह बोल ना…..

विनय: अह्ह्ह्ह हाआँ मज़ाअ आ रहा है अंजू…….

अंजू: बोल ना विनय मुझे गाली दे…..बोल मैं रांड़ तेरी चूत की खुजली मिटाउंगा….

विनय: हान्ंनणणन् साली म्म मैं मिटाउंगा तेरी चूत की खुजली…..रांडी आहह….

अंजू: ओह्ह्ह्ह श्िीीईईई तू मिटाएगा अहह ले देख फिर इस रंडी की चूत की गरमी को आह ओह्ह्ह श्िीीईई श्िीीईईईईईई उंह अहह अहह्ा अहह…..

अंजू फिर से गरम होने लगी थी….वो पागलो की तरह अनशन बकते हुए अपनी गान्ड को तेज़ी से ऊपेर की ओर उठा कर अपनी चूत को विनय के लंड पर पटकने लगी….”आह ओह्ह्ह्ह और ज़ोर से ठोक साले अहह अहह हाआँ और ज़ोर से…..रुकना नही दिखा मुझे तेरे टट्टों मैं कितना दम है…आह अहह……..”

इधर विनय भी अब पूरे रंग में आ चुका था….और पूरी तेज़ी से अपने लंड को अंजू की चूत के अंदर बाहर करते हुए उसे चोद रहा था…अब विनय की जांघे उसके मोटे चुतड़ों से टकरा कर थप-2 की आवाज़ करने लगी थी….अंजू की चूत ने फिर से लावा उगलना शुरू कर दया था….”ओह अहह हइई ईए ले मेरी चूत ओह हाईए फॅट गाईए साली अहह ह लीयी यी ली देख साली फॅट गयी….निकल गया पानी आह अहह शियीयीयी..” पर विनय तो जैसे रुकने का नाम ही नही ले रहा था….अंजू बुरी तरह झाड़ रही थी…और अभी भी विनय का लंड किसी पिस्टन की तरह उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था….जिससे अंजू के झड़ने का मज़ा और दुगना हो गया था….

जब झड़ने के बाद अंजू की साँसे दुरुस्त हुई तो, उसे अहसास हुआ कि, विनय अभी भी शॉट पर शॉट लगाते हुए उसकी चूत की धज्जियाँ उड़ा रहा था….जब उसका लंड अंदर बाहर होता अंजू की चूत की दीवार से रगड़ ख़ाता तो, अंजू को अपनी चूत के अंदर तेज सरहसाराहट महसूस होती… दो बार झड़ने के बाद अंजू बहाल हो चुकी थी…..पर वो विनय को अब रोक कर उसे नाराज़ नही करना चाहती थी….विनय और अंजू दोनो के बदन पसीने से तर हो चुके थे….विनय की साँसे भी थकावट के कारण फूलने लगी थी….और उसके धक्कों की रफ़्तार भी कम हो चुकी थी….अंजू ने पास मे पड़ी अपने साड़ी उठाई, और विनय के माथे और चेहरे पर आए हुए पसीने को पोंछते हुए बोली…..”अभी तक हुआ नही तुम्हारा……” तो विनय ने धीरे-2 अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए ना मे सर हिला दिया….

अंजू: थक गया है…..

विनय: हां…..

अंजू: रुक एक मिनिट बाहर निकाल…

विनय ने अपना लंड जैसे ही अंजू की चूत से बाहर निकाला तो अंजू घूम कर डॉगी स्टाइल मे आ गयी…..उसने अपने सर और चुचियों को आगे की तरफ बिस्तर से सटाते हुए, अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उठाया और कमर को नीचे की तरफ दबाया तो, अंजू की चूत पीछे से बाहर निकल कर ऊपेर की तरफ उठ गयी…पीछे बैठे विनय ने जब ये नज़ारा देखा तो, उसके लंड ने ज़ोर से झटका खाया….क्या मस्त गान्ड थी अंजू की एक दम गोल मटोल गुदाज बड़े -2 फेले हुए चूतड़….अंजू ने अपनी जाँघो के बीच से अपना एक हाथ निकालते हुए, अपनी चूत की फांको को फेलाया और अपनी चूत का गुलाबी रस से भरा छेद दिखाते हुए बोली….

अंजू: आजो विनय बाबू और ठोक दो अपना मोटा लट्ठ इसमे….

विनय तो जैसे अंजू के इसी ऑर्डर का इंतजार कर रहा था…वो अंजू के पीछे आकर घुटनो के बल बैठ गया….और अपने लंड के सुपाडे को अंजू की चूत के छेद पर सेट करते हुए एक जोरदार शॉट मारा…लंड गछ की आवाज़ करता हुआ एक ही बार में अंजू की चूत की गहराइयों मे समाता चला गया…..”ओह श्िीीईईईईईई विनय…….हाआअँ ठोक दे पूरा का पूरा अंदर……” फिर क्या था, विनय बाबू शुरू हो गये…अंजू की बड़ी सी कमर को अपने दोनो हाथो मे थामे विनय पूरी ताक़त से अपने लंड को अंजू की चूत के अंदर बाहर करने लगा…..थप-2 के थपेड़ो की आवाज़ पूरी रूम मे गूँज गयी…..6-7 मिनिट बाद अंजू की चूत ने जैसे ही तीसरी बार लावा उगला तो अंजू काम मे बहाल हो गयी…….और फिर विनय ने भी ऐसे शॉट लगाए कि अंजू की चूत की धज्जियाँ उड़ गयी….और वो झाड़ता हुआ अपना पानी अंजू की चूत मे उडेलने लगा.
 
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

HAPPY NEW YEAR 2016

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