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चूत देखी वहीं मार ली compleet

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किरण जानती थी कि, हस्तमैथुन कितनी गंदी आदत है….और इससे विनय के आने वाली जिंदगी पर क्या असर पड़ता है….वो इस सब का कसूरवार अपने आप को मान रही थी. क्यों कि वो यही समझती थी कि, उसने ही विनय को इस दलदल मे झोंका है…वो अपने रूम मे बैठी यही सब सोच रही थी….थोड़ी देर बाद किरण उठी और सीडीयों का डोर बंद करके बाथरूम मे नहाने के लिए घुस गयी….बाथरूम में पहुँच कर उसने अपनी साड़ी उतारी और फिर ब्रा और पैंटी उतार कर नहाने से पहले उसको धोने लगी…वो बेखायाली मे बाथरूम का डोर भी बंद करना भूल गयी थी…

तभी अचानक डोर खुला तो, किरण ने चोन्कते हुए डोर की तरफ देखा…तो डोर पर विनय अपने लंड को हाथ मे पकड़े खड़ा था….उसका लंड झटके खाते हुए फूँकार रहा था…विनय के लंड का सुपाडा अंदर जल रही सीएफएल की लाइट से एक दम चमक रहा था… किरण ने काँपती सांसो के साथ पहले विनय और फिर विनय के फुंफ़कार रहे लंड की तरफ देखा….”मामी प्लीज़ इसका कुछ करो ना….कितने दिन हो गये आप ने मेरे साथ वो सब नही किया….” विनय ने झुक कर मामी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया…..किरण बुत बनी कभी विनय को देखती तो, कभी विनय के झटके खाते लंड को……तभी किरण को अहसास हुआ कि, शायद उसे पहले ही ये सब कुछ नही करना चाहिए था….

उसने हड़बड़ाते हुए अपने हाथ को विनय के लंड से हटा लिया…और खड़े होते हुए विनय की तरफ पीठ करते हुए बोली…”ये क्या बदतमीज़ी है….बाहर जाओ विनय….और आइन्दा ऐसी हरक़त मत करना…” विनय किरण की बात सुन कर बाहर आ गया…किरण ने अंदर से डोर बंद किया…और अपना सर पकड़ कर नीचे बैठ गयी…आधे घंटे बाद किरण नहा कर बाहर आई और किचन मे छाई बनाने के लिए चली गयी…चाइ बनाने के बाद उसने तीन कप मे चाइ डाली और 1 कप उठा कर नीचे दुकान पर आ गयी… कप काउंटर पर रखते हुए बोली...”वशाली अब तुम ऊपेर जाओ…..किचन मे तुम्हारी और विनय की चाइ पड़ी है…खुद भी पी लेना और विनय को भी दे देना..”

वशाली: पर माँ विनय भैया तो, थोड़ी देर पहले ही बाहर गये है…..

किरण: क्या बाहर गया है…..? कुछ बता कर गया है किधर जा रहा है…?

वशाली: पता नही बड़े गुस्से मे था….

किरण: अच्छा ठीक है तू ऊपेर जाकर चाइ पी…

वशाली वहाँ से उठ कर ऊपेर चली गयी….दूसरी तरफ विनय घूमता हुआ अपने पुराने घर की तरफ आ पहुँचा….वो पुराने घर की चाबी साथ ले आया था..उसने घर का लॉक खोला और घर के अंदर आ गया….और ऊपेर रूम मे पड़े एक पुराने बेड पर लेट गया….विनय की आँख लग गयी…शाम के 7 बज चुके थे…दूसरी तरफ किरण विनय को लेकर बेहद परेशान हो चुकी थी…विनय अभी तक घर नही लौटा था….वो बार -2 बाहर देख रही थी…विनय कभी किसी दोस्त के भी यहाँ आता जाता नही था….

परेशान होकर उसने शीतल के घर फोन किया…पर विनय वहाँ भी नही था. उल्टा शीतल भी विनय को लेकर परेशान हो गयी…और वो किरण के घर पहुँची, वो सब लोग विनय को आधी रात तक तलासते रहे…पर विनय को पता ठिकाना नही मिला…किरण के घर मातम छा गया था…रह रह कर किरण को बुरे-2 ख़याल आ रहे थे….रात के 1 बज रहे थे…वशाली सो चुकी थी…शीतल का पति वापिस अपने घर जा चुका था. क्योंकि वो बच्चों को घर पर अकेला छोड़ कर आया था…..

शीतल: क्या तुमने आज विनय को किसी बात पर डांटा था क्या….

किरण: हां दीदी….

शीतल: क्यों…..?

किरण: अब आप को क्या बताऊ दीदी….जो ग़लती मैं कर चुकी हूँ..वो अब मेरा पीछा नही छोड़ रही…..

शीतल: किरण खुल कर बता आख़िर हुआ क्या….?

फिर किरण ने शीतल को सारी बात बताई….”देख किरण जो भी है….सारी ग़लती तेरी है… अब ऐसे मामले मे मैं भी विनय से कैसे बात करूँ…अब जाने अंजाने तुमने विनय के साथ जो रिश्ता कायम किया है….उसे अब तुम्हे जिंदगी भर निभाना पड़ेगा. कही ऐसा ना हो कि, विनय कोई ग़लत कदम उठा बैठे…..”

किरण: दीदी जिस वजह से इतना सब कुछ हो गया….आप कह रही हो कि, मैं वही ग़लती दोबारा करूँ…

शीतल: ग़लती तो तूने पहले की थी…अब उसको सुधारने का वक़्त है….मैं जो कह रही हूँ…वोही तुम्हारे और विनय के लिए सही होगा….

शीतल वहाँ से उठ कर वशाली के पास आ गयी……अगली सुबह शीतल की आँख खुली तो, उसने देखा कि उसका मोबाइल बज रहा था…फोन उसके पति का था….शीतल ने फोन पिक किया….

शीतल: हेलो जी…..

विनोद: शीतल विनय मिल गया है…..

शीतल: क्या कहाँ पर था वो सारी रात…..

विनोद: वो तो मुझे पता नही..अभी अभी घर आया है….तुम जल्दी से घर आ जाओ…लगता है काफ़ी भूका है…

शीतल: ठीक है हम थोड़ी देर मे वहाँ पहुँचते है…..

शीतल ने कॉल कट की और किरण को जाकर बताया कि विनय उनके घर पर है….फिर उन्होने वशाली को उठाया और तीनो घर की तरफ चल पड़ी…शीतल ने किरण को रास्ते मे ही कह दिया था कि, जब तक विनोद घर पर है वो चुप रहे….थोड़ी देर बाद तीनो घर पहुँची, तो देखा विनोद जॉब पर जाने के लिए तैयार हो चुका था. जैसे ही वो तीनो घर पहुँची तो, विनोद जॉब के लिए निकल गया…जैसे ही किरण ने विनय को देखा तो, वो फवक कर रोते हुए उससे लिपट गयी….”कहाँ गया था तू कहाँ था सारी रात…तुम्हे हमारी थोड़ी बहुत फिकर है भी कि नही…हम पागलो की तरह सारी रात तुम्हे इधर उधर ढूँढते रहे…बोलता क्यों नही है…”

शीतल: किरण अभी शांत हो जाओ….और विनय जाकर पहले नहा धो लो…हम तुम्हारे कपड़े साथ लाए है….

ये कहते हुए शीतल ने विनय को कपड़े दिए और उसको बाथरूम मे भेज दिया…और खुद विनय के लिए नाश्ता बनाने लगी….नाश्ता करने के बाद विनय ने बताया कि, वो सारी रात पुराने घर पर रहा था….शीतल ने किरण को समझा कर विनय को साथ भेज दिया. और विनय को एक बार फिर से मामी का प्यार मिला…. मित्रो कहानी यही ख़तम होती है

ये कहानी आपको कैसी लगी अपने कमेंट ज़रूर देना

समाप्त

एंड

 
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