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कार नजदीक आई तो मैंने देखा की उसमें दो आदमी हैं और मैंने सोचा कि ये रुकेंगे, लेकिन वो चले गये तो मैंने भगवान को धन्यवाद दिया।
ये सब टेंशन से मैं इतनी गरम हो गई थी कि बिना छुये ही झड़ने लगी।
भगत मुझे कार में ले गया और फिर अपनी हथेली से मेरी चूत को महसूस करते हुये कहा- “आदिती सही में तू एक मस्त औरत है, तेरा ऐसा मस्त जिस्म और तेरा लण्ड चूसना… मज़ा आ गया। अच्छा बोल आदिती, दोपहर को मेरा लण्ड देखके तुझे कैसा लगा?”
एक बार झड़ने के बावजूद भी मैं बहुत गर्म थी तो मैंने भगत को अपनी नंगी चूचियों पर खींचकर कहा- “भगत, दोपहर को जब मैंने तेरा लण्ड देखा तो मैं शर्मा गयी, लेकिन जब तेरी बातें सुनी की तू मुझे नींद में चोद रहा है तो मेरे बदन में गरमी भर गयी और मेरे बदन की गरमी कितनी बढ़ गयी, इसका सबूत यह है की ज़िंदगी में पहली बार खुली सड़क पे क़िसी पराये मर्द ने मुझे नंगी किया है, और मेरे जिस्म से खूब खेला है। यह सब तेरा लण्ड देखकर ही हुआ है…”
मेरे निपल्स को मसलते, चिकोटते हुये भगत ने कहा- “आदिती, तूने मेरा लण्ड चूस के मुझे बहुत मज़ा दिया है, अब तू यह बता की मैं तुझे कहाँ और कैसे चोदूं?”
मैं नीचे झुकी और भगत का लण्ड अपने मुंह में ले लिया और उसको चूमने और चूसने के बाद कहा- “भगत, तेरा लण्ड पूरी ताकत से मेरी चूत में पेलकर और मेरी चूचियां मसलके, दबाके और चूसके इतना चोद की मुझमें चलने की ताक़त ना रहे राजा…”
मेरी दोनों चूचियों को मसलते हुये, अपने हाथ में मेरे कपड़ों को लेकर भगत ने मुझे कार के नीचे उतारा, और कार को बंद करते हुये मुझे पास की झाड़ियों, पेड़ों में ले गया। मैं उसके बगल में नंगी ही चल रही थी और वो मेरे शरीर के साथ खेल रहा था।
जब हम जंगल में एक सुनसान जगह पर पहुंच गये तो भगत ने वहाँ मुझे एक पेड़ के साथ खड़ा कर दिया और मेरे पैरों में बैठकर अपने हाथों से मेरी चूत को खोला और अपनी जीभ डालकर एक कुत्ते की तरह मेरी चूत चूसने लगा। पहले ये सब वो धीरे-धीरे कर रहा था लेकिन फिर वह पागलों की तरह मेरी चूत चूमने, चूसने, काटने लगा और मेरे चूतड़ों को दबाने लगा। मुझे खड़ा रहने में मुश्किल हो रही थी लेकिन भगत ने मुझे बैठने नहीं दिया। अब उसने पीछे से मेरी गाण्ड में एक उंगली डाल दिया और साथ-साथ ‘गाण्ड में उंगली’ करना शुरू कर दिया।
मेरे लिये ये सब असहनीय था और मैं उसके ऊपर लगभग ढह गई।
भगत ने मुझे अपने ऊपर लेते हुये एक जोरदार चुम्मा लिया और कहा- “आदिती, तुझे चूत चुदवानी है ना… तो पकड़ मेरा लण्ड और डाल ले अपनी चूत में और चोद मुझे। मैं नीचे सोता हूँ और तू ऊपर से मुझे चोद…”
मैंने भगत को कहने की कोशिश की कि वो मेरे ऊपर आकर मुझे चोदे, लेकिन उसने मेरी बात को सुना ही नहीं। तो आखीर में मैं उसके सीने पर बैठने लगी तो भगत ने अपना लण्ड हाथ में पकड़कर मेरी चूत को धीरे-धीरे अपने उछलते लण्ड पर दबा दिया और मेरी गरम चूत ने उसको जकड़ लिया। धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसका लण्ड मेरी चूत में घुसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।
आख़िरकार उसका पूरा लण्ड जब मेरी चूत में चला गया तो मेरी गाण्ड पकड़ के भगत बोला- “आदिती ले अब चुदा ले अपनी चूत, चल ऊपर से चोदना शुरू कर…”
उसके सीने पर अपने दोनों हाथ रखकर मैंने ऊपर-नीचे होना शुरू किया, इस प्रक्रिया में मेरी चूत चुदने लगी। मेरा पूरा शरीर झटके से जोर-जोर से हिल रहा था। मेरी चूचियों का हिलना नाचना देखकर भगत अपने को रोक नहीं सका और मेरे निपल्स को चुटकी से मसलते हुये मेरी दोनों चूचियों को अपनी हथेलियों में लेकर जोर से मालिश करना शुरू कर दिया और चूसने भी लगा।
इस तरह से चुदना मुझे एक स्वर्गीय आनंद दे रहा था।
उसको और जोर से चोदते हुये मैंने कहा- “भगत दोपहर को तेरा लण्ड देखा तो मुझे लगा कि उधर ही नंगी होकर तुझसे चुदवा लूं। क्योंकी पिछले 4 महीनों से मेरी चूत बहुत प्यासी हैं, जब से मेरा पति काम पे चला गया है। लेकिन अगर उधर चुदवाती तो जिस तरह से तूने मुझे रोड पे नंगा करवाया, वो मज़ा नहीं मिलता। भगत अगर वो कार रुकती तो क्या होता? मैं कितनी डर गयी थी…”
मेरे निपल्स को चिकोटते हुये भगत ने कहा- “आदिती, मेरा सपना था की तुझे ऐसे ही नंगा करके चोदूं। इसलिए अगर तू गेरेज में चुदवाना भी चाहती ना, तो मैं तुझे नहीं चोदता। और रही बात उस कार की, तो अगर वो कार रुकती तो मैं उन दोनों मर्दों को भी तुझे चोदने के लिए इन्वाइट करता। क्योंकि तू ऐसा मस्त चूसती और चुदवाती है की तुझे एक मर्द से मज़ा नहीं मिलता…”
उसके लण्ड को चोदते हुये मैंने कहा- “भगत ऐसा मत बोल, मैं वैसी औरत नहीं हूँ समझे…”
अब मेरी दोनों चूचियों को दबाते, रगड़ते हुये भगत ने कहा- “अरे आदिती, अगर तू वैसी औरत नहीं है तो मैं बना देता हूँ तुझे वैसी। आख़िर तुझमें इतनी गर्मी है, वो ठंडी कैसे होगी? अगर तुझे कोई मस्त लण्ड नहीं मिला तो?”
मेरी चूत का प्री-कम भगत के लण्ड के ऊपर से होकर, मेरी चूत से बाहर आकर भगत की गाण्ड में जा रहा था। चुदाई के कारण मेरे पैरों में दर्द शुरू हो गया, लेकिन मैं झड़ने के करीब थी तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी और आखीर में भगत के चेहरे को मेरे निप्पल पर कसकर दबाते हुये एक जोरदार धक्का दिया और मैं झड़ने लगी। फिर मैं उसकी छाती पर गिर पड़ी।
फ़िर भगत ने कसकर मुझे गले लगाया और मुझे पलटकर मेरे ऊपर आ गया। उस समय तक भगत बहुत उत्तेजित हो गया था। मेरे ऊपर आने के बाद वो मेरी चूत को जोर-जोर से चोदने लगा। इस तरह 3-4 मिनट तक जोर-जोर से चोदने के बाद वो मेरी चूत में झड़ गया और मेरे शरीर पर गिर पड़ा।
चुदाई के बाद खड़े होने पर, भगत ने सुझाव दिया कि- “मैं गेराज तक की यात्रा के दौरान कार में बिल्कुल नंगी बैठूं, क्योंकि कार की खिड़की में रंगीन शीशे लगे हुये थे तो कोई भी हमें देख नहीं सकता है…”
लेकिन मैंने कहा- “नहीं…”
तो भगत ने कहा- “आदिती, कम-से-कम कमर के नीचे कुछ मत पहनो ताकि मैं तेरी चूत से खेलते-खेलते कार चला सकूं…”
आखीर में मैं सहमत हो गई। और भगत मेरी नंगी चूत में उंगली करते हुये अपने गैरेज में आया। इस दौरान मैं बहुत गरम हो गई थी तो हमने उसके गेराज में भी एक बार फिर चुदाई की।
उसके बाद मेरी कार सप्ताह में 2-3 दिन उसके गैरेज में खड़ी रहती थी। और जब भी मेरी कार वहां पार्क रहती थी, तब भगत मेरी चूत में अपना लण्ड पार्क करके मेरी चूत की अच्छे से चुदाई और सर्विसिंग कर देता था।
***** THE END समाप्त *****
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