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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete

. दोहरी सुहाग रात_Dohri Suhaag Raat

हाय, मैं हुमा हूँ। आशा करती हूँ की आप लोगों को यह कहानी पसंद आयेगी। मेरी माँ रजनी और मौसी मीता दोनों एक ही गली में रहती हैं, मेरे भाई का नाम अमोल और मेरा नाम मीना है, मौसी की लड़की का नाम हिना और लड़के का नाम हिमांशु है, मेरा और हिमांशु का और हिना और अमोल का विवाह हो चुका है, हिमांशु स्टेट बैंक में काम करता है और अमोल बैंक आफ बरोडा में आफिसर है, दोनों की उमर कोई 25 साल के करीब है और मैं और हिना देल्ही में एक पब्लिक स्कूल में टीचर्स हैं और हमारी उमर 23 और 22 साल है, शादी से पहले तो मैं हिमांशु को भैया कहती थी और हिना अमोल को भैया कहती थी लेकिन हमारी शादी के बाद सब कुछ बदल गया।

मैं तो हिमांशु के लण्ड की दीवानी हो चुकी हूँ। मुझे हिमांशु बहुत पसंद है बस वो जरा अधिक ही जेंटलमैन बनता है और मेरी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करता है। हिमांशु का लण्ड 6 इंच का है लेकिन बहुत ही कड़ा रहता है। हिमांशु का कद 6 फीट है और वो दिखने में बहुत ही हैंडसम है और मैं एक साँवली औरत हूँ, मेरी चूची काफी बड़ी है और मेरा पति मेरे निपल्स को बहुत प्यार से चूमता है। मेरा कद 5’6” है और मेरे चूतड़ बहुत आकर्षक हैं, ये मुझे मेरा पति बताता है।

मेरा पति अक्सर मेरे चूतड़ों को किस करता है और ऐसा करने से वो काफी उत्तेजित हो जाता है, कई बार हिमांशु ने मेरी गाण्ड मारने की इच्छा जाहिर की है लेकिन मैंने उसको इजाजत नहीं दी है। मुझे अपने पति का लण्ड चूत में ही बहुत मजे देता है तो गाण्ड मरवाने का क्या फायदा?

मेरे भैया अमोल भी हिना को बहुत प्यार करते हैं और उनकी आपस में बहुत पटती है, हिना भी बहुत सेक्सी है बस उसका शरीर मुझसे अधिक भरा हुआ है। उसका गदराया हुआ बदन देखकर कई बार मेरे पति की नजर भी अपनी बहन की चूची और गाण्ड पर चली जाती है, जिसका दोष मैं अपने पति को नहीं देती।

अगर हिना के जिश्म का मजा मेरे भैया की किश्मत में लिखा है तो कोई क्या कर सकता है। एक दिन अमोल और हिना हमारे घर आए हुए थे और अमोल और हिमांशु शराब पी रहे थे। हिना उनको खाने के लिए स्नैक्स देने गयी तो हिमांशु का हाथ हिना के गुदाज चूतड़ों को छू गया तो मैंने देखा की उसका लण्ड एकदम से तन गया।

हिना को जब इसका एहसास हुआ तो वो शर्मा गयी। उस रात जब मेरा पति मुझे चोद रहा था तो बार-बार मुझे गाण्ड मरवाने के लिए कह रहा था। मैंने जब मना कर दिया तो वो मेरे चूतड़ों को चूमने लगा और मेरी गाण्ड में जुबान घुसाकर अंदर-बाहर करने लगा। मुझे पता चल गया था की मेरे पति के मन से अभी अपनी बहन के चूतड़ों के स्पर्श का एहसास गया नहीं था।

हिमांशु मुझे पसंद करता था और कभी-कभी मेरी 36सी की चूचियों को मौका देखकर दबा देता था। एक दिन जब वो सनडे को मेरे घर आया तो अमोल मौसी के घर के लिए रवाना हो चुका था। मैंने हिमांशु को बताया की भैया तो उनके घर उनसे मिलने गये हैं।

उसने मुझे बाहों में भर लिया और कहने लगा- “मैं तो तुमसे ही मिलने आया हूँ, अमोल से नहीं, अब मैं तुझे दूर से देखकर और तड़पना नहीं चाहता, तुझसे प्यार करता हूँ और शादी करना चाहता हूँ, बोलो मंजूर है तुझे?”

मैं मुश्कुराकर बोली- “हिमांशु भैया, यह सब तो ठीक है लेकिन माँ को क्या बोलूँगी मैं, की मैं हिमांशु भैया से शादी करना चाहती हूँ…”

हिमांशु अपनी जिद दिखाते हुए बोला- “तुझे बार-बार मुझे भैया कहना क्यों अच्छा लगता है? मैं तेरा मौसेरा भाई हूँ कोई असली नहीं, और शादी की बात मैं खुद मौसी से कर लूँगा, तुम बस यही कह देना की तुझे ये शादी मंजूर है, ओके…”

उसी दिन शाम को माँ और मौसी ने जब यह सुना तो वो हमारी शादी के लिए मान गयीं। तभी अमोल भैया और हिना बाहर से आए तो माँ ने पूछ लिया- “क्यों बेटे अमोल, अगर तुम चाहो तो तेरी और हिना की भी शादी करा दी जाए? हिमांशु और मीना तो कर ही रहे हैं, तुम एक दूजे के साले भी बन जाओगे और जीज़्जा भी… घर की बात घर में रह जाएगी। हम किसी बाहर के आदमी पर इतना विश्वास भी नहीं कर सकते…”

हिना शर्मा गयी और अमोल मुश्कुरा पड़ा। मुझे तो पहले ही पता था की वो दोनों भी एक दूसरे को प्यार करते हैं। इस तरह हम लोगों की शादियां एक ही दिन हो गयीं। मुझे अपनी खुशकिश्मती पर विश्वास नहीं हो पा रहा था। मैंने और हिमांशु ने सुहगरात बड़े मजे से मनाई और चुदाई का खूब आनंद लिया। हिना भी अगले दिन काफी खुश नजर आ रही थी।

जब मैंने हिना को रात के बारे में पूछा तो वो शरमाते हुए बोली- “तेरा भाई तो एकदम से जानवर है, ही इस आ बीस्ट, योउ नो… देखो मेरा क्या हाल कर दिया है? मैं तो ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ, अमोल ने मेरी चूत की बुरी हालत बना दी है। उसका लण्ड क्या कोई आम लण्ड है, कम से कम 8 इंच का होगा और मैं बेचारी कमसिन लड़की, तेरे भैया को तो कोई मस्त रंडी औरत चाहिए जो उसकी वहशत को झेल सकती हो। मुझे तो उसने सारी रात सोने नहीं दिया। मेरी चूत सारी रात पानी बहाती रही और चुदती रही। यह देखो मेरी चूची का क्या हाल हुआ है?”

फिर हिना ने मुझे अपने गाउन के नीचे से अपनी चूचियां दिखाते हुए कहा- “देखो, तेरे भैया ने कैसे काट खाया है मुझे, साला दाँत ऐसे मारता है जैसे चोदना नहीं खाना चाहता हो मुझे, लण्ड तो इतनी जोर से पेलता है अमोल की सारा शरीर हिल जाता है। मेरी चूत भी सूजी पड़ी है, मुझे कम से कम दो दिन का आराम चाहिए तेरे भैया की चुदाई से। तू सुना हिमांशु की चुदाई कैसी है?”

मैंने हिना को सब बता दिया की हिमांशु बहुत प्यार से चुदाई करता है और चूमता है। मुझे बहुत मजा आता है।

हिना हँस पड़ी और बोली- “चलो तुझे तो मेरा भाई खुश कर देता है। काश… मुझे भी कोई ऐसा ही मर्द मिलता जो आराम से प्यार से मेरी चुदाई करता? हिमांशु का लण्ड कितना बड़ा है? अमोल का तो कम से कम 8 इंच का होगा, मेरा तो हाल बुरा कर दिया है…”

मैंने हिना को बताया की हिमांशु का तो केवल 6” का है।

तो वो बोली- “मुझे तुमसे जलन होने लगी है, काश… मेरे पति का लण्ड भी 6” का होता और मुझे तकलीफ ना होती चुदाने में…”

मैंने हँसते हुए मजाक किया- “तो फिर ठीक है, हम अपने पति बदल लेते हैं, तुम अपने भाई से चुदाई करवा लो और मैं अपने भाई से चुदवा लेती हूँ, क्यों क्या ख्याल है?”

और हम दोनों ही शरारत से हँस पड़ी, लेकिन इस विचार ने मेरे मन में जगह कर ली। क्या भैया का लण्ड बहुत बड़ा है? क्या वो बहुत जबरदस्त चुदाई करने में विश्वास रखते हैं? मेरे मन में जबरदस्त चुदाई की इच्छा पैदा होने लगी औे मैं अमोल भैया से चुदवाने का प्लान बनाना शुरू कर दी। इस विचार से ही मेरी चूत से पानी गिरने लगा और मैं फिर से चुदासी होने लगी।

उस दिन शाम को हमने सिमला हनीमून पर जाने का प्रोग्राम बनाया था। हम दोनों जोड़ियां हवाई जहाज से चंडीगढ़ और फिर सिमला पहुँची।


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अमोल भैया ने हमारी बुकिंग होटेल में, जो की शहर से बाहर था, पहले ही करवा ली थी। हमने एक बहुत बड़ा कमरा बुक करवा लिया था जिसको दो कमरों में बदला जा सकता था, क्योंकी उसके बीच में एक दरवाजा था। जब तक हम कमरे में पहुँचे तो हमारे पति बहुत मस्ती में आ चुके थे और जाते ही उन्होंने हम औरतों को दबोच लिया और हमको दरवाजा बंद करने का मौका भी नहीं दिया और हमारे कपड़े उतारने शुरू कर दिये। अमोल भैया के उतावलेपन को देखकर मुझे भी गर्मी आ गयी और मैंने हिमांशु का लण्ड अपने हाथ में लेकर मूठ मारनी शुरू कर दी।

हिमांशु का लण्ड तन गया और मैंने उसके लण्ड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, हिमांशु का सुपाड़ा मेरे मुँह में फूलने लगा और उसने मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया। मेरे पति ने मेरी जांघों को फैलाया और मेरी चूत को चूमने लगा। मेरी चूत में पानी भरने लगा और मेरा पति मेरी चूत का रस पीने लगा। मैंने भी उसका लण्ड मुँह में लेकर मजा लेना शुरू कर दिया। उसके सुपाड़े से रस की बूँद टपक रही थी और मेरी जुबान पर उसका नमकीन स्वाद बहुत ही अच्छा लग रहा था।

उधर हिना और अमोल की चुदाई की आवाज़ें आने लगी, हिना फुसफुसा रही थी- “अमोल मेरे यार, धीरे से, तेरा लण्ड इतना बड़ा और मोटा है की मुझे अपनी तंग चूत में लेने में बहुत मुश्किल हो रही है। प्लीज… आराम से पेल ना, तुझ से तो भैया का लण्ड अच्छा है जो की 6 इंच का है और तेरी बहन मीना को कोई परेशानी नहीं होती, भैया से चुदवाने में। अब जल्दी से पेल दो ना, मेरी चूत कसमसा रही है लण्ड के लिए। प्लीज… मुझे आराम से चोदो जैसे भैया तेरी बहन को चोदते हैं। काश… मुझे भी भैया जैसा 6 इंच का लण्ड आराम से चुदाई की जन्नत दिखा पाता?”

हम हिना की आवाज सुनकर चौंक पड़े।

कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और हिमांशु के लण्ड को मैंने चूस-चूसकर खलास कर दिया।

दूसरे कमरे से हिना की आवाज तेज हो रही थी- “अमोल, बहनचोद धीरे से चोद… मुझे कोई रंडी समझ रखा है, मैं तेरी बहन हूँ और अब पत्नी बनी हुई हूँ… प्यार से चोद मुझे, जैसे मेरा भाई तेरी बहन की चुदाई करता है। मेरी चूत की भोसड़ी बन गयी है तेरे लण्ड से। अमोल मैं झड़ने को हूँ, मेरी चूत तेरे मूसल लण्ड पर झड़ रही है, ओह भैया मैं झड़ी…”

मैं और हिमांशु यह सब सुनकर दरवाजे पर जा पहुँचे और देखा की अमोल भैया ने हिना को घोड़ी बनाया हुआ था और पीछे से उसकी चुदाई झुक कर कर रहे थे। भैया का लण्ड काफी मोटा था और हिना की चूत के रस से भीगा हुआ था और उसकी गाण्ड से होता हुआ हिना की चूत को कुत्ते की तरह चोद रहा था। अमोल अपनी पत्नी के चूतड़ों पर जोर-जोर से हाथ मार रहे थे और उसके कंधों पर दाँत गड़ा रहे थे। हिना की पीठ और कंधों पर भैया के दातों के निशान पड़े हुए थे।

हिना कसमसा रही थी, तड़प रही थी, लेकिन भैया बेदर्दी से चुदाई कर रहे थे। अमोल और हिना की मजे के कारण आँखें बंद थीं। भैया के चूतड़ आगे पीछे हो रहे थे जब अमोल के लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी। कुछ देर में दोनों थक कर लेट गये।

हिमांशु और मैं वहीं सोफे पर बैठकर आराम करने लगे, शाम को 6:00 बजे भैया और हिना उठ गये और हमको देखकर हैरान हो गये और अपने नंगे जिश्म को ढकने की कोशिश करने लगे।

मैंने कहा- “हिना, हमसे क्या शरमाना? तुम मेरी भाभी बन चुकी हो और मैं तेरी भाभी बन चुकी हूँ। हम हनीमून पर इसलिए लाई गयी हैं कि हमारे पति हमारी चूत की सारी ऐंठन निकाल दें, हमारी चूत को जितनी भी लण्ड की भूख है हमारे पति उसको एक बार अच्छी तरह से मिटा देंगे। आज हमारे हनीमून की शुरुआत है तो कोई खास तरीके से सेलीब्रेट करना चाहिए। हिमांशु, क्या तेरी बहन ने कभी शराब पी है? मैंने एक बार पी थी, क्यों ना हम सभी दो-दो घूँट पीकर अपने हनीमून को आगे बढ़ाएं, इससे हमारी शरम और झिझक खतम हो जाएगी, क्यों भैया?”

अमोल ने मेरी हाँ में हाँ मिला दी।

हम सभी ने कपड़े पहन लिए और हिमांशु और अमोल शराब लेने चले गये। मैं और हिना नहाने चली गयी और जब हम बाथरूम से बाहर निकलीं तो हमने पारदर्शी गाउन पहन लिए। हिना के जिश्म पर भैया के काटने की निशान मुझे उत्तेजित कर रहे थे। मुझे तमन्ना थी की कोई मुझे जानवरों की तरह जबरदस्त प्यार करे और बेरहमी से चोद डाले। लेकिन मेरा पति तो बहुत कोमल किस्म का इंसान था, असल में मुझे अमोल भैया जैसा पति चाहिए था। मैंने एक बार हिना के जिश्म के उन भागों को चूमना शुरू कर दिया जहां-जहां पर भैया ने काटा था।

हिना भी उत्तेजना से कराहने लगी।

मैंने स्कीम बनानी शुरू कर दी की कैसे अपने भैया के लण्ड का स्वाद लिया जाए। मैंने हिना से कहा- “मेरी प्यारी हिना, मुझे तुम पर बहुत प्यार आ रहा है। काश… मैं कुछ कर सकती, जिससे तेरी चुदाई हिमांशु जैसे कोमल आदमी से हो सकती और अमोल जैसा जानवर तुझे तंग ना कर पाता, काश… तेरी मुश्किल मैं आसान कर सकती? तेरा सारा दर्द मैं ले लेती और सारी खुशी तुझे दे सकती…”

हिना मेरे प्यार को देखकर मुश्कुरा पड़ी और मेरे होंठों पर किस करने लगी। हम दोनों किस कर रही थी जब हमारे पति वापिस आ गए।

अमोल ने अपनी पत्नी को बाहों में लेना चाहा लेकिन मैंने भैया को रोक दिया- “भैया, पहले तो तुम दोनों नहाकर आओ, और फिर प्यार करना। दूसरा हिना का क्या हाल बना दिया है तुमने? कोई औरत को ऐसे प्यार किया जाता है? अगर प्यार करना है तो वैसे करो जैसे हिमांशु मेरे साथ करता है। बेचारी हिना की बुरी हालत कर दी है तुमने। अगर मेरी हालत हिमांशु ऐसी कर देता तो तुझे कैसा लगता?”

अमोल भैया हँसते हुए बोले- “मेरी बहना, शादी के बाद प्यार इसी तरह किया जाता है जैसे मैंने किया है। अगर हिना को मजा नहीं आया तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं है, क्यों हिमांशु? मैं तो इसी तरह प्यार करना जानता हूँ…”

तभी वो दोनों नहाने चले गये और बाहर आकर हिमांशु ने पेग बनाए और हम सभी पीने लगे। शराब ने हम पर असर करना शुरू कर दिया। एक बार हिमांशु ने हिना को गलती से अपने आगोश में गिरा लिया क्योंकी उसने समझा की वो औरत मैं हूँ। हम दोनों ने सफेद गाउन पहने हुए थे तो गलती होना स्वाभाविक था।

मैंने अपने पति को मजाक से झिड़क दिया- “बहन और पत्नी में फरक तो देख लिया करो…”

तो वो हँसते हुए कहने लगा- “तुम दोनों में मुझे कोई फरक ही नहीं दिखता तो मैं क्या करूँ? मुझे तो तुम दोनों ही सेक्सी लग रही हो…”

मैं- “तो भैया कहीं थोड़ी देर में मुझे ही अपने बिस्तर में मत ले जाना क्योंकी तुझे अपनी बहन और बीवी एक ही जैसी लग रही है…”

अमोल भी हँसता हुआ बोला- “तो क्या है? अगर ऐसा हुआ तो, मुझे मीना मिल जाएगी और इस तरह हमारा हनीमून भी डबल हो जाएगा, क्यों हिमांशु? हिना और मीना को भी हनीमून में दो-दो मर्दों का स्वाद मिल जाएगा और हम दोनों को दो-दो पत्नियां मिल जाएंगी। मैं तो इस विचार से ही उत्तेजित हो रहा हूँ की क्यों ना पत्नियों की अदला-बदली भी कर ली जाए और वो भी जब अदला-बदली में चोदने के लिए हमको अपनी बहन मिलेगी। मैं तो हमेशा से ही मीना को चोदने का सपना देखता आया हूँ…”


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अमोल ने फिर हिमांशु से पूछा- “क्यों हिमांशु तेरा क्या खयाल है, हिना को चोदने के बारे में?”

हिमांशु के दिमाग पर शराब का नशा चढ़ा हुआ था और उसने नशे में अपनी बहन को गले से लगाकर उसकी चूची मसल डाली। मुझे अपनी स्कीम कामयाब होती नजर आ रही थी, शराब का दौर चलता रहा और हम बहकते चले गये,। कुछ ही देर में मैं अमोल की गोद में और हिना अपने भाई की गोद में मचल रही थी। अब हमारे दोहरे हनीमून की शुरूवात हो रही थी। मुझे शादी के बाद अदला-बदली की सोच पर उत्तेजना बहुत होने लगी थी।

मैंने हिना को बाहर जाने के लिए कहा और उसको अपने भाई के साथ खुलकर चुदाई का मजा लेने के लिए प्रेरित किया।

जब हम वापिस रूम में आई तो मैंने हिमांशु और अमोल दोनों से कहा- “हम अदला-बदली के लिए एक शर्त पर सहमत होंगी, की यह अदला-बदली सिर्फ़ एक बार के लिए नहीं होगी। यह हमारे बीच परमानेंट अदला-बदली का सिस्टम होगा। हम चारों जब भी किसी से भी चुदायी का आनंद लेना चाहें तो ले सकती हैं, इसका मतलब है की हम दो पति और दो पत्नियां हैं, जो आपस में जिसके साथ चुदाई करना चाहें किसी को बी आपत्ति ना होगी। हम सभी एक दूसरे के चुदाई के पार्टनर्स बने रहेंगे। मैं अमोल भैया और हिमांशु की पत्नी हूँ और हिना भी हिमांशु और अमोल की पत्नी होगी। इस बात को हम किसी बाहर के आदमी को नहीं बताएंगे, क्यों मंजूर है सभी को?”

सभी ने मुश्कुराकर हामी भर दी। मैंने भी अमोल भैया के लण्ड को हाथ में लेकर मसल दिया और साथ बैठी हिना की चूची पर अपने होंठ सटा दिए। हिमांशु भी नशे में आकर अपनी बहन को सेक्सी नजर से देखने लगा और उसके होंठों को किस करने लगा। मैंने शराब का ग्लास खाली किया और नये पेग बना दिए। चारों पर नशा हावी हो रहा था, हम बेशरमी से एक दूसरे से लिपटने लगे, किस करने लगे, एक दूसरे को नंगा करने लगे,। तीसरा जाम पीने के बाद हम चारों के जिश्म पर एक भी कपड़ा नहीं था।

मैंने अपने पति को छेड़ते हुए कहा- “क्यों पतिदेव जी अपनी पत्नी को दूसरे मर्द के सामने पेश करते हुए कोई परेशानी तो नहीं हो रही है? मेरा भाई तो मेरे साथ मजे लेने को तड़प रहा है, और मैं भी अपने भैया के लण्ड की तारीफ तेरी बहन से सुनकर तड़प रही हूँ। आज की रात तुम भी बहनचोद बन जाओगे। हिमांशु, आज हम चारों में कोई फरक ना रहेगा और हमारा हनीमून यादगार बन जाएगा…”

हिना ने हिमांशु को पलंग की तरफ खींच लिया और अमोल ने मुझे अपनी गोद में ले लिया। हमारा चुदाई का दौर शुरू हो चुका था। अमोल ने कमरे की बत्ती बुझा डाली और मुझे अपनी बाहों में लेकर पलंग पर पटक दिया। मैंने उसके लण्ड को मुठियाना शुरू कर दिया।

तो अमोल बेशरमी से बोला- “मीना, मेरी बहना अब तुम अपने भाई से चुदाने को तैय्ययर हो जाओ, हिना तो मेरे लण्ड को देखकर ही डर गयी थी। मैं अपनी बहन को अपना बना लेना चाहता हूँ। आज मैं अपनी सगी बहन के साथ सुहगरात मनाना चाहता हूँ। मेरी बहना मुझे बहनचोद बना लो, मुझे अपनी चूत समर्पित कर दो, देखो तुम्हारे भैया का लण्ड कैसे फनकार रहा तेरी चूत में घुसने के लिए। मुझे तेरा हुश्न दीवाना बन रहा है। अपने भैया के लण्ड को मुँह में ले लो और मुझे अपनी चूची का अमृत पीने दो, अपनी चूत के रस का स्वाद चखने दो, मुझे अपनी चूत में जुबान घुसाकर चाथ लेने दो मेरी बहना, मैं दीवाना हुआ जा रहा हूँ…”

फिर अमोल ने मेरे चूतड़ों को कसकर जकड़ लिया और मेरी चूत की फांकों को खोलकर अपनी जुबान मेरी चूत में घुसेड़ डाली। उधर हिना भी अपनी पीठ के बल लेटी हुई थी और हिमांशु उसकी नाभि को चूम रहा था और चूची को मसल रहा था। हिमांशु का लण्ड उसकी बहन के मुँह के पास था और हिना उसके लण्ड को चाट रही थी। कमरे में वासना का माहौल बना हुआ था।

हिना बार-बार अपने भैया को पुकार रही थी। हिमांशु जीभ से लपलप अपनी बहन की चूत को चाट रहा था, हिना की टाँगें चौड़ी हुई थी और दोनों भाई बहन मस्ती में डूब चुके थे। हिना कह रही थी- “भैया, बहुत मजा आ रहा है, खूब चूसो मेरी चूत को, साली मस्ती में चूर है तेरी बहन की चूत। तुम देख सकते हो की कैसे तेरी पत्नी अपने भाई को बहनचोद बना रही है। तुम भी अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बन जाओ। मेरे राजा भैया, आज से तुम मेरे भैया भी हो और पतिदेव भी, मुझे अपने मस्त लाड से प्यार से चोदकर अपनी पत्नी का दर्जा दे दो। मेरे भैय्या, मेरी चूत तेरे लण्ड की राह देख रही है…”

अमोल का लण्ड असल में एक हलब्बी लण्ड था, पूरा 8 इंच का मस्त लण्ड, उसपर मोटा गुलाबी सुपाड़ा। मेरे मुँह में एक लोलीपोप महसूस हो रहा था और मेरा भाई अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूंस रहा था जैसे की किसी चूत को चोद रहा हो। मैंने भाई के अंडकोष अपने हाथ में लेकर मसल दिए जिससे भाई के मुँह से वासनात्मक सिसकारी निकल गयी, चूमा चाटी की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। अमोल ने अचानक अपनी जुबान मेरी गाण्ड के छेद में डाल दी।

और मैं चिहुँक उठी- “ओह्ह… बहनचोद भैया, मेरी गाण्ड में क्या कर रहे हो? अपनी बहन की चूत से दिल नहीं भरा क्या जो उसकी नाजुक गाण्ड से छेड़-छाड़ कर रहे हो। ओह्ह… भैया, तेरी इस अदा से भी मुझे बहुत मजा आ रहा है, मेरी गाण्ड को चोद, अपनी जुबान से मेरे भाई…”

अमोल पूरे जोश में आ चुका था- “मीना, मेरी रंडी बहन, बहुत चुदासी है तू, अपने भाई के लण्ड की तड़प तेरे अंदर बहुत देर से है, तू भी माँ की तरह किसी छोटे लण्ड से संतुष्ट नहीं हो सकती। हमारी माँ भी चुदक्कड़ है, तेरी तरह, मैं सपने में तुझे और माँ को चोदता आ रहा हूँ, एक दिन मैं वो सपना सच करके दिखा दूँगा। मेरी बहना, मैं एक ही बिस्तर में अपनी बहन और माँ को चोदूँगा…”

हिमांशु भी अमोल की बात सुनकर बहुत उत्तेजित होने लगा और हिना को जोर-जोर से चूमने लगा।

हिना उत्तेजना में बोल रही थी- “भैया, आज अपनी बहन के साथ सुहगरात मना लो, मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो। जिस तरह तुम्हारी पत्नी अपने भैया से चुदाने को तैय्यार है, उसी तरह मुझे चोद लो मेरे भैया, मुझे अपना लण्ड दे दो मेरे भैया… हिमांशु, तुम अपनी माँ, मीता को नहीं चोदना चाहोगे क्या? जैसे अमोल चाहता है। मीता भी काफी सेक्सी है, ना जाने माँ और मौसी बिना लण्ड के किस तरह गुजारा करती होंगी? उनको भी तो चुदाई करवानी ही पड़ती होगी, बिना लण्ड के औरत रह नहीं सकती। अगर तुम दोनों चाहो तो एक नहीं चार चार औरतों को चोद सकते हो। और फिर माँ और मौसी को भी लण्ड के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। तुम दोनों घर में ही हम सभी को चुदाई का सुख दे सकते हो…”

हिमांशु पर माँ और मौसी की चुदाई की बातों का अजीब असर पड़ रहा था। उसने अपनी बहन को लिटा दिया और उसकी जांघों को उठाकर अपने कंधों पर रखा और अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख दिया। हिना तड़प उठी… उसके भाई का लण्ड उसकी चूत पर दस्तक देने लगा।

और हिना कराह उठी और हिमांशु को लण्ड पेलने के लिए मिन्नत करने लगी- “ओह्ह… भैया, अब नहीं रहा जाता, पेल दो अपना लण्ड मेरी चूत में, मेरी चूत की आग बुझा दो, मुझे अपने लण्ड से संतुष्ट कर दो, मेरी चूत की गहराई में अपना लण्ड डाल दो, बहुत प्यासी है मेरी चूत अपने भाई के लण्ड के लिए, अपने लण्ड के पानी को अपनी बहन की चूत में गिरा दो मेरे भैया…”

हिमांशु ने अपना लण्ड बिना कुछ बोले पेल दिया। एक ही झटके में लण्ड चूत में समा गया। हिना नीचे से अपनी गाण्ड उचकाने लगी और हिमांशु अपने चूतड़ आगे पीछे करके अपनी बहन को चोदने लगा।

मैंने भी अमोल को चुदाई करने को कहा तो वो बोला- “मीना, पहले अपनी पत्नी को तेरे पति से चुदते हुए तो देख लेने दो, तभी तो मैं तुझे मस्ती से चोदूँगा, मैं पत्नी और बहन में कोई फरक नहीं करूँगा। मैं तुझे भी उसी तरह बेरेहमी से चोदूँगा, तेरी मस्त चूची को चुसूंगा…” इसके साथ ही भैया ने मेरी चूची को अपने मुँह में लेकर जोर से चूस लिया और अपने दाँत मेरे निपल्स पर रखकर काट लिया।


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मैं दर्द से तिलमिला उठी- “ओह्ह… बहनचोद, काट क्यों रहे हो? मेरी चूची है कोई खाने की चीज नहीं है। मुझे दर्द होती है जब तुम अपने दाँत से काटते हो मेरे निपल्स को, प्यार से करो जो कुछ करना है…”

अमोल ने मुझे चूमते हुए अपने होंठ मेरी चूत की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया। वो मेरे पेट को, नाभि को चूमता हुआ, चाटता हुआ मेरी चूत पर अपने होंठ लगाने लगा, मेरी चूत के होंठों को अपने मुँह में लेकर चूमने लगा, मेरी चूत के होंटों को हल्के-हल्के काटने लगा। मेरी चूत पर दाँत लगाने से दर्द भी होने लगा लेकिन मजा इतना आ आ रहा था की मुझे दर्द का एहसास ही नहीं हुआ। भैया मेरे चूतड़ से खेल रहा था, मसल रहा था, मेरी गाण्ड को छेड़ रहा था।

मैंने अपनी गाण्ड उठाना शुरू कर दिया और भाई का लण्ड जोर से पकड़ लिया और उसके लण्ड को अपनी चूत की तरफ खींचना शुरू कर दिया। भैया के लण्ड की सुगंध मुझे बहुत भा रही थी, मेरी चूत से रस की बारिश होने लगी। भैया के लण्ड से प्री कम निकालने लगा।

मैं लण्ड के लिए तड़पने लगी- “भैया, अब मुझे भी चोद दो जिस तरह तेरी पत्नी को उसका भाई चोद रहा है। मेरे भैया मुझे भी उसी तरह से चोदना जिस तरह से हिना को चोदा था, तुमने सुहगरात को। आज अपनी बहन के साथ सुहगरात मानाओ मेरे राजा। तेरी मीना तेरे सामने चूत फैलाए पड़ी है, अपना मूसल लण्ड डाल दो मेरी प्यासी चूत में, मुझे रौंद डालो एक रंडी की तरह, मेरी चूत की खुजली मिटा दो मेरे भैया। हिमांशु का 6 इंच का लण्ड मेरी चूत की खुजली ठीक से नहीं मिटा सका। मेरे पति का लण्ड उसकी बहन के लिए और मेरे भैया का लण्ड मेरे लिए बना है। मेरे राजा, अब अपनी बहन का उद्घाटन कर दो मेरे भाई…”

मैंने ऐसा कहा तो भैया जोश में आ गये। अमोल ने मुझे मेरी चूत के आस-पास की जगह पर काठ लिया था और उसके काटने के निशान मेरी चूची और मेरी चूत पर पड़ गये थे, लेकिन मुझे मजा इतना आ रहा था की मैंने दाँत के निशान की कोई परवाह नहीं की और ना ही दर्द की परवाह की।

भैया ने अपना लण्ड मेरी चूत पर रगड़ा और मेरी चूत को पूरी तरह से खोल दिया- “आह मेरी बहना अब देख अपने भाई के लण्ड का कमाल, मेरे लण्ड को कब से अपनी बहन की चूत की तलाश थी। देखना कैसे तारे दिखाता है मेरा लण्ड मेरी बहन को। मेरी बहना अपनी जांघों को मेरी कमर पर बाँध लो, मुझे अपनी चूत में समाने दो। आज अपनी सगी बहन की चुदाई करने जा रहा है मेरा खुशकिश्मत लौड़ा, जरा संभाल कर, मेरी रानी बहना, ये लो…” और भैया ने अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दिया।

उनका लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ जड़ तक चला गया, मेरी टाँगें भैया की कमर पर और मेरी एंड़ियां भैया के चूतड़ों पर थी और भैया जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मेरे भैया का लण्ड मुझे फ्रॉंटियर मेल की तरह चोदने लगा।

मैंने कहा- “ओह्ह… भैया, तेरे लण्ड के सामने हिमांशु का लण्ड बहुत छोटा और पतला है, मुझे तेरे जैसा ही लण्ड चाहिए। भैया मैं तेरी छिनाल बहन हूँ, अपनी छिनाल को अच्छी तरह से चोद डालो, और जोर से पेलो मेरे राजा, मेरी चूत की धन्य कर दो, मुझे चोदकर माँ बना दो, मुझे पेलो मेरे भाई…”

और भाई ने मुझे ताबड़तोड़ चोदना शुरू कर दिया। भैया का लण्ड मुझे जन्नत का आनंद दे रहा था, मैं अपनी चूत भैया के लण्ड पर जोर-जोर से उचका रही थी और भैया के टट्टे मेरी गाण्ड से टकराने लगे।

भैया तड़प के बोले- “आह मेरी रानी, तेरी चूत कितनी टाइट है, मैं तेरी गाण्ड को भी चोदना चाहता हूँ। मेरी रानी बहना मेरा लण्ड पानी छोड़ने को है, मेरा रस मेरी बहना की चूत में गिरने को है, मेरी रानी बहना उधर देख हिना और हिमांशु भी झड़ने वाले हैं, देख कैसे मेरी पत्नी की चूत छूटने वाली है? कैसे मेरी बीवी चुदा रही है तेरे पति से? ओह्ह… मेरी बहन, मैं झड़ा…” भैया ने कहा।

हमारे शरीर पसीने से भीग चुके थे। मेरी चूत से रस की गंगा-जमुना बह रही थी और उधर हिमांशु और हिना भी चुदाई के अंतिम शिखर पर पहुँचे हुए थे। उन दोनों ने भी खलास होने के बाद आँखें बंद कर लीं और हम चारों मस्ती की नींद सारी रात सोते रहे।

उस दिन डबल सुहगरात के बाद हम कभी भी किसी को भी चोद रहे हैं और किसी को भी कोई एतराज नहीं होता बल्कि खुशी होती है। हम जल्दी ही माँ और मौसी को भी अपनी चुदाई ग्रूप में शामिल करने की प्लान बना रहे हैं।


***** END समाप्त *****

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गैंगबैंग_ज़ारा का (Zara Ka Gangbang)

लड़कियां दो वजह से रखैल बनती हैं। एक ये कि उनको ये सब अच्छा लगता है या दूसरी वजह ये कि उनको पैसा चाहिए होता है। जबकि मेरी ऐसी कोई मजबूरी नहीं। मैं एक अमीर खानदान से हूँ, और मुझे अपने गुरूर की सजा मिली है।

ये सब तब शुरू हुआ जब मैंने एम॰काम॰ के बाद प्राइवेट कालेज में लेक्चररशिप शुरू की, क्योंकी मुझे पढ़ाना अच्छा लगता है। अरे मैंने अपना पूरा परिचय दिया ही नहीं। मेरा पूरा नाम “ज़ारा जब्बार” है, मेरा रंग गोरा और मेरा फिगर 38-32-40 है, और मैं लाहोर की रहने वाली हूँ, और इस वक्त मेरी उमर 28 साल है और मैं अविवाहित हूँ।

मेरे घर में सिर्फ़ अब्बू हैं। क्योंकी मेरी अम्मी का मेरे बचपन में ही इंताकल हो गया था। जिस वक्त मैंने एम॰काम॰ किया उस वक्त मेरी उमर 23 साल की थी और मेरा फिग 34-28-36 था… और मुझमें गुरूर कूट-कूटकर भरा हुआ था। क्योंकी मैं नाज़ों से पली बढ़ी हूँ। और मेरी हर फरमाइश बिना माँगे पूरी की जाती है। अब सोचती हूँ कि काश… मुझमें ये गुरूर ना होता तो आज मैं इतनी बड़ी मुसीबत में होती।

एम॰काम॰ मुकम्मल करने तक कई लड़कों ने मुझसे बात करने की कोशिश की और दोस्ती के लिए भी हाथ आगे बढ़ाया मगर मैंने किसी को लिफ्ट नहीं दी। और एम॰काम॰ के बाद मैंने जाब करने का फैसला किया और पापा ने भी मेरी हिमायत की। सो मैं एक अच्छे से कालेज में पढ़ाना शुरू कर दिया जो कि अब्बू के एक दोस्त का था। कालेज काफी बड़ा है और दो गार्ड जो कि पठान हैं उनके नाम ‘हामिद खान’ और ‘जुनेद खान’ हैं। वो कालेज की चोकीदारी करते हैं, और अंकल के बहुत भरोसेमंद आदमी हैं।

उस वक्त मैं ग्रॅजुयेशन तक के स्टूडेंट्स को अकाउंटिंग पढ़ाती थी। 6 महीने ठीक गुजर गए लेकिन एक रोज एक ऐसा वाकिया हुआ कि जिसने मुझे गुस्सा दिला दिया। मेरे एक स्टूडेंट ने 14 फरवरी (रोज डे) पे मेरी क्लास की एक फीमेल को कालेज कैंपस में सबके सामने किस कर दी (उसने अपने दोस्तों से इसकी शर्त लगाई थी जो मुझे बाद में पता चला।) वो लड़की रोती हुई वहाँ से निकल गई।

मुझे उस लड़के पे बहुत गुस्सा आया हुआ था और मैंने प्रिन्सिपल से बात करके उसको कालेज से निकलवा दिया। जिससे उसका एक साल जाया हो गया। उसने मुझसे और प्रिन्सिपल से माफी माँगने की बहुत कोशिश की। लेकिन मैं उसकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी और मैंने ये तक कह दिया कि इस कालेज में या तो मैं रहूंगी या ये रहेगा। सो उसको कालेज से निकाल दिया।

यहाँ से असल कहानी शुरू होती है। मैंने उसको तो निकलवा दिया लेकिन ये भूल गई कि इनका पूरा ग्रूप कालेज में पढ़ता है या काम करता है। कुछ दिन ठीक गुजरे और उसके बाद जो कुछ हुआ, वो बहुत बुरा हुआ।

क्या हुआ था? आइए मैं आपको बताती हूँ।

वो दिन बाकी दिनों से अलग था। उस दिन मौसम बहुत खूबसूरत था, एकदम रोमँटिक। मैंने काले रंग की शलवार-कमीज और मैचिंग ब्रा अंडरवेर पहना था। उस दिन तो मेरा भी दिल कर रहा था कि इस मौसम में कोई मेरे साथ भी होता। कालेज में एग्ज़ॅम्स चल रहे थे और उस दिन सटर्डे था। मेरे अब्बू ुबई गए हुये थे और उन्होंने मंडे को वापस आना था। दोपहर तक सब स्टूडेंट्स चले गए थे। अब कालेज में सिर्फ़ टीचर्स और लैब स्टाफ था। शाम 4:00 बजे तक पूरा कालेज खाली हो गया सिर्फ़ मेरे अब्बू के दोस्त अली (प्रिन्सिपल), मैं और लैब स्टाफ रह गया था।

और यहीं से उनका प्लान शुरू हुआ। उन्होंने कालेज के हर एरिया में कैमरे फिट किए हुये थे। जो कि अंकल ने ही कहा था लैब असिस्टेंट को। 4 लोग कंप्यूटर लैब में काम करते थे। अंकल ने मुझे साथ लेकर जाना था क्योंकी उस दिनमैं अपनी गाड़ी में नहीं आई थी।

उन्होंने मेरा पूछा तो लैब असिस्टेंट ने कह दिया कि मैं जा चुकी हूँ लेकिन मैं अपने केबिन में बैठी पेपर्स चेक कर रही थी और बेखबर थी कि क्या हो रहा है। अंकल चले गए और मुझे पता भी नहीं चला।

5 बजे लैब असिस्टेंट मेरे रूम में आया और कहा- “ज़ारा अब बस करो और चलो बाहर चलो। मिलकर मौसम एंजाय करते हैं…”

मैं उससे बेताकल्लूफ नहीं थी तो मैंने उसको झिड़क दिया और बाहर जाने को कहा। उसने फौरन अपना लहजा बदल लिया और बोला- “गश्ती तुझे एक बार में बात समझ में नहीं आती?”

मुझे तो झटका लगा। मैंने जोर से एक तमाचा उसके मुँह पे मार दिया। उसकी आँखें गुस्से से लाल हो गईं। मैं भागकर बाहर निकली और अंकल के आफिस में गई। वो वहाँ नहीं थे। मैं जल्दी से वहाँ से भागने लगी, लेकिन मेरी किश्मत कि वो 4 लैब असिस्टेंट दरवाजे में खड़े हुए थे और मेरी तरफ घूरकर देख रहे थे। मेरा तो डर के मारे गला खुश्क हो गया। अब वो चारों हँस रहे थे। उन चारों के नाम ये हैं जमील, इमरान, इरफान, सैफ। मैंने इमरान को थप्पड़ मारा था।

इमरान मेरे करीब आने लगा।

मैं- देखो, मेरे करीब मत आओ। तुम जानते हो ना कि मैं किसकी बेटी हूँ। अगर मुझे कुछ किया तो तुम जानते हो कि तुम बच नहीं पाओगे। वो मेरी बात सुनकर और जोर से हँसने लगा। मेरा तो गला खुश्क हो गया डर के मारे। मैंने उनको पैसों की आफर भी की लेकिन वो नहीं माने।

तभी इरफान बोला- “साली, तूने हमारे जिगरी दोस्त साहिल को कालेज से निकलवाया है। आज तो तुझे नहीं छोड़ेंगे…”

मैंने कहा- मैं उसका अड्मिशन दोबारा करवा दूँगी। और माफी भी माँगूँगी, लेकिन प्लीज़ मुझे जाने दो…”

लेकिन वो कहाँ मानने वाले थे। तभी मैंने देखा कि वहाँ 6 लोग और आ गए जो कि इसी कालेज क स्टूडेंट्स थे। जिनमें साहिल भी शामिल था। मैंने सबके सामने हाथ जोड़ दिए, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ।

साहिल- “अरे मेडम… हमें पैसे नहीं आप चाहिए… तभी तो मेरे बदला पूरा होगा। और आप हैं कि मुझे अड्मिशन दिलवाओगी। देखना…”

मैंने उससे माफियां माँगी मगर वो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं था।

साहिल- “मेडम एक डील करते हैं। आप हम सबके सामने नाचें और मेरे लण्ड को चूसकर उसका पानी निकल दें, तभी हम आपको जाने देंगे…”

मैं तो सुनकर चकित रह गई। मैंने उसे मनाने की बहुत कोशिश की।

लेकिन वो नहीं माना और बोला- “देखो मेडम, अगर आप ऐसा नहीं करोगी तो हमें मजबूरन आपका रेप करना पड़ेगा, और उसमें आपका अपना ही नुकसान है…”

मैं- “ठीक है… लेकिन मेरी शर्त है कि बाकी सब लोग बाहर जायेंगे, और यहाँ के सभी कैमरे को बंद करो…”


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उसने इनकार कर दिया- “अरे मेडम, हम सब इकट्ठे एंजाय करेंगे आपका डान्स, और रही बात वीडियो की तो वो इसलिए बनेगी कि भविष्य में आप हमारे विरुद्ध कोई शिकायत ना कर दें…”

सब लोग मेरे आस-पास सोफे पे बैठ गए और मैं कमरे के बीच में खड़ी थी। गाना शुरू हुआ लेकिन मैं नाचने में हिचकिचा रही थी।

साहिल बोला- “आए गश्ती… अगर तूने 5 गिनने तक नाचना शुरू नहीं किया तो हम सब तेरे कपड़े फाड़कर तुझे यहीं चोदना शुरू कर देंगे- 1… 2… 3… 4…

और मैंने नाचना शुरू कर दिया। मुझे नाचना तो नहीं आता था लेकिन मैंने अपनी कमर और चूतड़ों को सेक्सी तरह से हिलना शुरू कर दिया। 5 मिनट बाद दूसरा गाना चला। इस तरह मैंने 5 गानों पे डान्स किया। मैंने देखा कि सब अपने लण्ड बाहर निकालकर हिला रहे हैं।

ये देखते ही मेरी तो चूत गीली हो गई।

साहिल ने मुझे अपने पास बुलाया- “ओ गश्ती… इधर आ और मेरा लण्ड मुँह में ले…”

मैं उसकी तरफ जाने लगी।

तो वो बोला- “साली, चारों हाथों-पैरों पे कुतिया की तरह आ…”

मैं चारों हाथों-पैरों पे कुतिया बनकर उसकी तरफ गई। उसके लण्ड को हाथ में पकड़ने लगी।

तभी उसने जोर से मेरे मुँह पर थप्पड़ मार दिया और बोला- “साली, तुझे किसने बोला लण्ड को हाथ लगाने को?”

मेरा दिमाग घूम गया। उसने मुझे बालों से पकड़कर खींचा तो मेरी चीख निकल गई और मेरी आँखों में आँसू आ गए।

उसने मुझे अपने लण्ड पे झुकाया तो मैंने अपना पूरा मुँह खोल दिया और उसके लण्ड का टोपा मुँह में लेकर चूसने लगी। उसने मेरा मुँह पकड़कर अपने लण्ड पे दबा दिया। उसका लण्ड मेरे गले तक चला गया। अभी आधा लण्ड ही गया था और मेरी तो तो साँस रुक गई थी। उसने मुझे बालों से पकड़कर अपना लण्ड मेरे मुँह में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। 5 मिनट में ही मेरे जबड़े दर्द करने लग गए।

उसके मुँह से- “ऊऊऊओह… आआअह्ह… साल्ली… क्या गरम मुँह है तेरा? छिनाल्ल…” की आवाजें निकल रही थीं, और जब वो लण्ड मुँह में डालता तो थोड़ी देर रुक जाता। जब बाहर निकालता तो मैं साँस लेती और उसके बाद जब उसका लण्ड मुँह के अंदर जाता तो मेरी साँस रुक जाती।

तभी उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से निकाल लिया। मेरे मुँह से उसके लण्ड तक प्री-कम की वजह से तार सी बनी हुई थी। चल साली मेरी गोटियां चूस… और मेरे सिर को अपनी गोटियों से लगा दिया।

एक-एक करके मैंने उसकी दोनों गोटियां चूसनी शुरू कर दीं। मुझे तो उबकाई आ रही थी। मगर मैं कर भी क्या सकती थी।

बाकी 9 लोग इस शो को एंजाय कर रहे थे। उसने मेरे बालों से पकड़कर अपने चेहरे के करीब किया और मुझे रंडी की औलाद, साली, गश्ती आदि गालियां देने लगा। तभी उसने मेरा मुँह जो कि आधा खुला था, में अपनी थूक फेंकी और मुझे घुटने पे झुका दिया। मैं थूक बाहर निकालने लगी तो उसने जबरदस्ती मेरा मुँह बंद कर दिया। मजबूरन मुझे उसको निगलना पड़ा। उसने मेरे मुँह में एक और बार थूका और दोबारा मुझे अपने लण्ड पे झुका दिया। तभी उनमें से किसी ने मेरे हाथ पीछे खींच लिए। मैं ये ना देख सकी कि वो कौन है। और उन्होंने मेरे दोनों हाथ बाँध दिए। इधर साहिल तेजी से मेरे मुँह को चोद रहा था।

बाकी लोगों ने भी अपने कपड़े निकाल दिए, और मेरे आस-पास घेरा बनाकर मूठ मरने लगे। मैं देख तो नहीं सकती थी पर सबकी आवाजें सुन सकती थी। उन्होंने एक कैंची निकाली और मेरी कमीज को काटना शुरू कर दिया। मैं विरोध करना चाह रही थी, मगर मुँह की चुदाई और हाथ बँधे होने की वजह से कुछ ना कर सकी। थोड़ी देर में मैं अपनी ब्रा में थी और सब लोग सीटियां मारने लगे और आवाजें कसने लगे- “हाए गश्ती, इसकी माँ को चोदूं, भोसड़ी की, छिनाल आदि गालियां भी देने लगे।

मैं साहिल का लण्ड मुँह से निकालना चाह रही थी मगर उसकी मजबूत पकड़ ने ऐसा नहीं करने दिया। तभी मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी शलवार काट रहा है। मैं बचना चाह रही थी मगर मेरे मुँह से सिवाए ‘म्‍म्म्मह… न्‍नहिँ’ के सिवा कुछ नहीं निकल सका। फिर उन्होंने यही हाल मेरी ब्रा और पैंटी के साथ किया। अब मैं बिल्कुल नंगी उन 10 लोगों के सामने थी। मैं हिल भी नहीं पा रही थी।

तभी साहिल का लण्ड मेरे मुँह में फूलने लगा और उसकी आवाज आई- “साली रंडी, अगर एक भी बूँद नीचे गिरी तो हम तेरी गाण्ड में 2-2 लण्ड घुसेड़ेंगे और वो भी बिना तेल के… पी जा मेरा पानी… साली रांड…” इसके साथ ही 1… 2… 3… 4… 5…

इसके आगे तो मैं भूल गई और उसके पानी को जल्दी-जल्दी गले से नीचे उतारने लगी। 5 मिनट तक उसने कम से कम 20-25 पिचकारियां छोड़ी होंगी। शायद वो बहुत अरसे से नहीं झड़ा था। मेरा तो पेट बिल्कुल भर गया था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मैंने खूब डटकर खाना खाया हो। उसने फिर भी लण्ड मेरे मुँह से नहीं निकाला और अगले 5 मिनट तक धक्के मारता रहा। उसके बाद उसने लण्ड बाहर निकाला तो मुझे बहुत जोर से खाँसी आने लगी। फिर उसके कहने पे मैंने उसका लण्ड चाट-चाटकर साफ कर दिया।

इस बीच इन 10 लोगों में से कोई मुझे किस कर रहा था, कोई मेरे चूतर दबा रहा था, कोई गाण्ड में उंगली कर रहा था, कोई चूचियों के साथ खेल रहा था। मतलब ये कि मेरे जिश्म का कोई हिस्सा ऐसा नहीं था जो मसला ना गया हो और मैं घुटनों के बल जमीन पे बैठी थी… या ऐसे कहूँ कि उन्होंने मुझे जबरदस्ती बिठा दिया था और मुझे मुँह खोलकर जबान बाहर निकालने को कहा।

मैंने इनकार किया तो एक जोरदार थप्पड़ मेरे गालों को लाल कर गया और मुझे दिन में तारे नजर आने लगे। मजबूरन मुझे उनकी बात माननी पड़ी।

अब बाकी 9 लोग मेरे इर्द-गिर्द खड़े होकर मूठ मार रहे थे। थोड़ी देर बाद सब ने झड़ना शुरू कर दिया। सब लोग झड़ रहे थे और मुझे कुतिया, रांड़, आदि बोलते जा रहे थे। और अपना पानी मेरे जिश्म पर निकालते गए। मैं सबके पानी से पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मेरे जिश्म का कोई हिस्सा ऐसा नहीं था जिस पे उन लोगों का पानी ना लगा हो। मैं अपनी आँखें भी नहीं खोल सकती थी। जब सब लोग फारिघ हो गए तो मुझे देखकर हँसने लगे और मेरा दिल कर रहा था कि अभी जमीन फट जाए और मैं उसमें समा जाऊँ।

अब उन्होंने मेरे हाथ खोल दिए, और मुझे उठाकर अंकल अली के आफिस के अटैच बाथरूम में ले गए। और मेरे जिश्म को अच्छी तरह रगड़-रगड़कर धोया। मेरी चूत और गाण्ड में उंगलियां भी कीं। फिर हम सब बाहर आ गए। मैंने टाइम देखा तो 9:00 बज रहे थे। इसका मतलब कि मुझे ये सब करते 4 घंटे हो चुके थे। मेरे गले और जबड़ों में बहुत दर्द हो रहा था।

बड़ी मुश्किल से मैंने उनसे कहा- “प्लीज़… अब तो मुझे जाने दो। जो कुछ तुमने कहा, वो मैंने किया है। प्लीज़ अब मुझे जाने दो…”

तभी इमरान बोला- “मेरी रांड़… इतनी भी क्या जल्दी है… अभी हमें अपने जिश्म से जी भरके खेलने तो दे। हमारे पास आज की पूरी रात और कल का पूरा दिन है। लेट्स एंजाय…”


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मैंने इनकार करना चाहा लेकिन मेरे ‘ना’ बोलने से पहले ही मेरे गाल पे एक जोरदार थप्पड़ लग चुका था। तभी एक चौकीदार हामिद खान अंदर आया (जिन दो का पहले ऊपर जिकर किया है, उनमें से एक) और अंदर का नजारा देखकर हैरतज़दा हो गया। पहले उसने सबको गुस्से से देखा तो मेरी जान में जान आ गई कि शायद अब मैं बच जाऊँ लेकिन ये मेरी भूल थी।

अब आगे चलते हैं।

हामिद खान की मुश्कुराहट को देखकर मैं परेशान हो गई, और बाकी सब खुश हो गए। वो मुझे उठाकर स्टाफ रूम में ले आए।

मैंने बहुत कोशिश की उनसे छूटने की लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ। इतनी देर में जुनेद खान भी आ गया और मुझे देखकर पहले हैरान हुआ और फिर बहुत खुश हुआ। वो सब मेरे आस-पास खड़े हुए थे।

साहिल बोला- “गश्ती… चल अब देख तेरे 12 यार तुझे कैसे चोदेंगे? छिनाल…”

मेरी आँखों में आँसू आ गये। लेकिन उनपे इसका असर नहीं हुआ। मैं अपने हाथों से अपने जिश्म को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। अब कमरे में 12 लोग थे। उनके नाम बता दूँ- साहिल, जमील, इमरान, इरफान, सैफ, बाकी 5 लोग जमाल, अल्फ़ा, कामरन, काशिफ, माज और दो पठान जिनके लण्ड इन सबसे बड़े और मोटे थे- हामिद और जुनेद।

मैं सोच रही थी कि मेरे साथ क्या होगा।

फिर साहिल आगे आया और उसने मुझे पकड़कर अपने साथ चिपटा लिया, और मेरे होंठ चूसने लगा।

मेरे मुँह से सिर्फ़ “म्‍म्म्ममह… उउम्म्म्ममह…” की आवाज निकल सकी।

सब लोग मेरे आस-पास खड़े हो गए और मुझे चूमने लगे। मेरे जिश्म का अंग-अंग उन्होंने चूमा चूसा। मेरे जिश्म पर हर जगह पे निशान पड़ गए। मेरा जिश्म गरम हो गया था। मैं उन सब को रोकना चाह रही थी लेकिन साहिल मेरे होंठ नहीं छोड़ रहा था।

मेरे मुँह से सिर्फ़ “न्नहीं म्म्ममम… प्लीज़… म्‍म्म्ममह…” की आवाजें निकल रही थीं। जब कि मेरा जिश्म मेरा साथ नहीं दे रहा था।

इतनी देर में हामिद मेरी चूत को हाथ से सहलाने लगा। मेरी चूत से पानी बह रहा था। ये देखकर वो बोला- “साली छिनाल को मजा आ रहा है। ऐसे ही नखरे कर रही है…” और वो सब हँसने लगे।

जबकि मैं शरम से पानी पानी हो गई।

तभी साहिल ने मुझे टेबल पे लिटा दिया और कहने लगा- “मेडम को सबसे पहले मैं चोदूँगा क्योंकी मेडम से मैंने बदला लेना है…”

सब मान गए।

उसने मेरी चूत पे अपना लण्ड रखा और उसको रगड़ने लगा। मेरी तो हालत पतली हो गई। मैं चाहती थी कि वो जल्दी से अंदर डाल दे। इसलिये मैंने अपनी कमर उचकानी शुरू कर दी। ये देखकर उसने अपना लण्ड पीछे खींच लिया। उसने 2-3 दफा ऐसा किया।

फिर आखिर मैं बोल पड़ी- “आआअह्ह… प्लीज़्ज़… डाल दो ना… आआअह।ह…”

साहिल- क्या डालूँ, मेरी गश्ती?

मैं- “प्लीज़्ज़… अब और नाअ तड़पाओ…”

साहिल- “तू जब तक नहीं कहेगी कि तुझे क्या चाहिए? मुझे कैसा पता चलेगा?”

मैं- “प्लीज़… आआअह्ह… अपना लण्ड म्‍म्म्मेरी चूत मेंई डालो नाअ… ऊऊऊईई…”

मेरी बात पूरी होते ही उसने एक बहुत जोर का धक्का मारा था और उसका लण्ड 4 इंच तक मेरी चूत में घुस गया था और मेरे मुँह से बहुत जोर की चीख निकल गई।

इसपे वो बोला- “साली 4 इंच घुसने में इतना चिल्ला रही है। जब पूरा अंदर जाएगा तो फिर क्या होगा?”

मेरी चूत से खून निकल रहा था। अब मैं लड़की से औरत बन चुकी थी। मैं उसको परे ढकेलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हो पा रहा था। उसने 3 बहुत जोरदार धक्के मारे और पूरा लण्ड मेरी चूत के अंदर था। मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे मैं मार जाऊँगी लेकिन मुझे मौत भी तो नहीं आ रही थी। और चूत में उठने वाला दर्द ना काबिल-ए-बर्दाश्त था।

अब मुझमें चीखने की हिम्मत भी नहीं थी। वो पूरा लण्ड अंदर डालकर थोड़ी देर रुका और फिर बाहर करने लगा। मेरी सिसकियां फिर से निकलने लगीं। ऐसे लग रहा था कि जैसे मेरी चूत में मिर्चें डाल दी हो किसी ने। आहिस्ता-आहिस्ता मेरा दर्द जाता रहा और मुझे मजा आने लगा। मेरी चूत गीली हो गई और कब मेरी टांगें उसके गिर्द लिपट गईं, मुझे पता भी नहीं चला। अब वो तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था और मैं मजे से हवाओं में उड़ रही थी।

मेरी आवाजें निकालने लगी- “ऊऊऊओह… उउफफफ्फ़… माँ… सस्स्स्स्स्स्स्शह… प्लीज़्ज़… और जोर से… आआअह्ह… एसे ही… हाआईयी…” और मैं पहली बार लण्ड चूत में जाने के बाद झड़ने लगी। और ना जाने कितनी देर तक झड़ती रही, और उसके बाद सुस्त पड़ गई।

लेकिन साहिल के धक्कों में कोई कमी नहीं आई थी। वो मुझे लगतार उसी रफ्तार से चोदता रहा और गालिया देता रहा- “साली छिनाल, रंडी… मजे ले रही है…” और जोर-जोर से मुझे चोदता रहा।

मैं फिर से गरम हो गई और अपने आप कमर हिलाने लगी।


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उसने मुझे अपनी आँखों में देखने का कहा तो मैं उसकी आँखों में देखकर कमर हिला रही थी। मुझे और भी ज्यादा मजा आ रहा था। मुझे कोई होश नहीं था। मैं सिर्फ़ जानती थी कि मेरे चूत में उसका लण्ड तेजी से अंदर-बाहर हो रहा है और मेरी बच्चेदानी पर चोट कर रहा है, और मेरा झड़ना फिर से चालू हो गया- “ऊऊओह… आआअह्ह… म्‍म्म्ममह… सस्स्स्स्स्स्स… ऐसे ही… ऊऊऊओह… मैं गईई… आआह्ह… मम्म्मम… उउफफफ्फ़…” पाँच मिनट में मैं दूसरी बार झड़ रही थी।

मुझे इतना मजा आ रहा था कि उसको लफ्जों में बयान करना मुश्किल है। मैंने अपनी बाहें उसके गिर्द कस लीं और उसको अपनी तरफ खींचकर पूरी शिद्दत से चूमने लगी। और साथ-साथ अपनी कमर उचकाने लगी।

थोड़ी देर बाद वो बोला- “मेडम, मेरी रखैल बनेगी…”

मैं- “हाँ…” मेरे मुँह से आवाज निकली।

“जिससे मैं कहूंगा उससे चुदवाएगी…”

मैं- “हाँ…”

साहिल- “अपनी गाण्ड मरवाएगी…”

मैं- “हाँ…”

साहिल- “एक साथ 3 लण्डों से चुदवाएगी…”

मैं- “हाँ…”

इस बात पे सब हँसने लगे।

तब मुझे होश आया कि ये मैं क्या कह गई हूँ। इसपे मैंने शर्माकर अपना मुँह उसके सीने में छुपा लिया। साहिल भी हँसने लगा। उसका लण्ड एक मिनट में 50-60 बार अंदर-बाहर हो रहा था। 30 मिनट गुजर चुके थे। मैं उसके धक्के खाकर बेहाल हो चुकी थी और मैं कितनी बार झड़ी, ये भी याद नहीं था। करीब 30 मिनट उसने मुझे और चोदा। मेरी चूत तब तक बिल्कुल खुश्क हो चुकी थी और मुझे जलन महसूस हो रही थी। मैं उसको रुकने को कहने लगी क्योंकी मेरी चूत का दर्द बढ़ने लगा था लेकिन वो नहीं रुका।

मैं फिर से चिल्लाने लगी- “ऊऊऊईई… प्लीज़्ज़… बस्स्सस्स… करोऊ… हायई… मेरीई… म्माँ…”

5 मिनट और चोदने क बाद वो झड़ने लगा और उसकी आवाज आई- “ऊऊऊओ… मेरी रांड मैं झड़ने वालाआ… हूँ… ले मेरा पानी… अपनी चूत में… आआह्ह… सस्स्स्सस्स… म्‍म्म्ममह…” और मेरी चूत में कहीं दूर जाकर झड़ा।

उसके झरने के साथ ही मैं एक बार फिर झड़ गई। मेरी चूत लबालब भर गई। मुझे बहुत राहत महसूस हुई और चूत की जलन बहुत कम हो गई। क्योंकी उसके पानी ने मेरी चूत में पानी का काम किया।

वो लंबी-लंबी साँसें लेने लगा।

मैं उसकी पीठ को सहलाने लगी। मैं इस वक्त बिल्कुल बेहोशी की हालत में पड़ी थी। इतनी जानदार चुदाई के बाद मुझमें हिलने की हिम्मत भी नहीं बची थी।

5 मिनट बाद वो मेरे ऊपर से हट गया। उसने लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाला।

मुझे ऐसे लगा कि जैसे मेरी चूत बिल्कुल खाली हो गई है। मेरी चूत से उसका और मेरा पानी आहिस्ता-आहिस्ता बाहर गिरने लगा। 10 मिनट मैं आँखें बंद किए लेटी रही। मुझे कोई होश नहीं था कि कोई मेरे बारे में क्या बात कर रहा है। फिर मैंने आँखें खोलीं और उठने लगी। लेकिन मैं खड़ी नहीं हो सकती थी और मेरी चूत फूलकर सूज गई थी।

साहिल मुझे उठाकर वाशरूम ले गया और मुझे गरम पानी से साफ किया। मुझे बहुत राहत मिली। फिर वो मुझे लेकर वाइस प्रिन्सिपल (मिस्टर आसिफ) के रूम में आ गए। साहिल ने मेरे होंठों को एक बार फिर चूमा और मेरे चूतड़ों को दबाया और उसके बाद बोला- “मेरी रांड़… अब तेरी गाण्ड मारेंगे?”

मैंने डरी हुई नजरों से उसकी तरफ देखा और इनकार में सिर हिलाया।

तभी वो बोला- “देख साली… तूने कहा था कि मैं जिससे कहूंगा, तू उसी से चुदवाएगी। अब ये ड्रामा बंद कर। वरना तुझे बाँध कर तेरा रेप कर देंगे। और तेरी गाण्ड और चूत में 2-2 लण्ड घुसेंगे…”

मैं चुप हो गई क्योंकी मैं जानती थी कि मुझे बचाने वाला कोई नहीं है।


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***** END समाप्त *****

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गैंगबैंग_सरिता का_Sarita Ka Gang Bang

हाय दोस्तों,

ये एक सच्ची घटना है जो करीब 10 साल पहले हुई थी। उस वक़्त मैं फर्स्ट एअर में था और मेरी बड़ी बहन सरिता फाइनल एअर में थी। कालेज देल्ही का ही था। बस इतना हिंट दूँगा कि गुंडागर्दी में सबसे बदनाम कालेज है। कालेज में बड़े सारे गुंडे थे और उनमें से एक जीतू भाई सबसे बड़ा और खतरनाक बंदा था।

जीतू की एक बहन थी जो मेरी क्लास में पढ़ती थी उसका नाम ज्योति था। ज्योति और मैं अच्छे दोस्त थे और अक्सर एक साथ कैंटीन में चाय पीने जाते थे। एक दिन किसी ने जीतू भाई को ये बोल दिया की मैं ज्योति से फ्लर्ट करने के कोशिश कर रहा हूँ। बस जीतू ने मुझे क्लास से बाहर बुलवा लिया और मुझे बहुत मारा। मेरे होंठों पर काफी चोट आई।

बात मेरी बहन सरिता के पास भी पहुँची और वो मुझे लेकर सीधा जीतू जो उस वक़्त कैंटीन में ही बैठा था पहुँच गयी। मैंने अपनी बहन को बहुत समझाया की जीतू बहुत बड़ा गुंडा है उसके पास नहीं जाना चाहिए, लेकिन उसने मेरी बात नहीं सुनी।

मैं आपको ये भी बता देता हूँ की मेरी बड़ी बहन अपनी स्लिम फिगर और सुंदरता पर बहुत घमंड करती थी, और सबसे तरी में ही बात करती थी। उसकी इमेज एक अरोगेंट लड़की की थी, घर में भी और बाहर भी। जब हम वहाँ पहुँचे तो जीतू अपने कुछ दोस्तों के साथ बैठा था।

सरिता ने उससे पूछा की उसने मुझे क्यूँ मारा?

जीतू बोला- “चल अपना काम कर, मैं लड़कियों के मुँह नहीं लगता…”

पर सरिता नहीं मानी और जीतू को दो-तीन इंग्लीश में गालियां दे दी।

गालियां सुनकर जीतू सटक गया और उसने सरिता को धक्का दे दिया, सरिता सरिता नीचे जमीन पर गिर गयी और गिरते वक़्त उसकी दोनों टाँगें खुल गयी और कमीज ऊपर चढ़ गयी, उसकी सलवार का नाड़ा तक नजर आ रहा था और पतली सलवार में उसकी डार्क कलर की पैंटी भी दिख रही थी।

मैंने अपनी बहन को उठाया और उसको वहाँ से खींचने लगा। पर वो नहीं मानी और जीतू को एक थप्पड़ लगा दिया।

अब बात बहुत बाद गयी थी, जीतू को गुस्सा आ गया था और बोला- “साली मुझे थप्पड़ मारा तूने, आज तुझे तेरे भाई के सामने नंगा करता हूँ। वो आगे बढ़ा ही था की जीतू की एक दोस्त, जिसका नाम अलका था और जो कालेज की सबसे बड़ी चुदक्कड़ लड़की थी, बीच में आ गयी और जीतू को रोकने लगी। इतने में कुछ टीचर्स भी आ गये और मैं और सरिता वहाँ से भाग निकले।

अगले दिन अलका हमारे पास आई और बोली- “तुम दोनों हमेशा एक साथ ही रहना, नहीं तो जीतू सच में तेरी बहन के साथ कुछ गलत कर देगा…”

लेकिन सरिता फिर बोली की वो जीतू से नहीं डरती और वो कुछ नहीं कर सकता।

इस पर अलका ने सरिता के गाल पर हल्के से हाथ लगाया और बोली- “सरिता, तेरे साथ क्या होगा तूने कभी सुना भी नहीं होगा…”

पर सरिता ने उसे इग्नोर कर दिया और अपना मुँह फेर के वहाँ से चली गयी। कुछ दिन बीते और मैं और सरिता जीतू को तकरीबन भूल ही गये और सोचा शायद वो भी भूल गया होगा सारी बातों को।

लेकिन हम दोनों गलत थे। उस दिन कालेज में फेस्टिवल था और पूरा कालेज फेस्टिवल ग्राउंड में था। मैं भी अपने ग्रूप के साथ फेस्टिवल का मजा ले रहा था। उस दिन सरिता ने येल्लो कलर की सलवार और कमीज पहना था। मैं आपको बता दूं कि सरिता एकदम गोरी, बाल काले लंबे और 5’5” क़द की एकदम स्लिम ट्रिम लड़की थी। उसकी चूचियां छोटी-छोटी थी लेकिन एकदम कटोर थी, उसकी गाण्ड एकदम गोल थी और पेट एकदम फ्लैट था। वो भी उस दिन अपने ग्रूप के साथ ही थी।

उस वक़्त दिन का एक बजा था, की अलका जो जीतू की गर्लफ्रेंड थी मेरे पास आई और मुझे साइड में ले गयी। उसने जो मुझसे कहा वो सुनकर मेरा रंग उड़ गया। अलका बोली- “जीतू और उसके दोस्त तेरी बहन को उठाकर कालेज की ओल्ड बिल्डिंग के यूनियन रूम में ले गये हैं और उसको रेप करने वाले हैं…”

मैं एकदम अपनी बहन को बचाने के लिए भागा।

लेकिन अलका ने मुझे रोक दिया और बोली- “अभी जाने का कोई फायदा नहीं क्यूँकि जब मैं वहाँ से आई तब तक वो सरिता को ऊपर से नंगी कर चुके थे और अब तक तो उसका फुल सीन चल रहा होगा और अगर ऐसे में तेरी बहना ने तुझे वहाँ देख लिया तो शायद वो शरम से कुछ कर ना ले…”

मैंने भी सोचा की अलका सही कह रही है, पता नहीं सरिता किस हालत में होगी और मैं उसे उस हालत में कैसे देखूँगा? लेकिन मैं फिर भी में ओल्ड बिल्डिंग में पहुँचा, पूरी बिल्डिंग एकदम खाली थी और किसी लड़की के चिल्लाने की आवाज़ें आ रही थी। मैं समझ गया कि वो आवाज सरिता सरिता की ही हैं। मैं बिल्डिंग की छत पर चढ़ गया और उस रूम के वेंटिलेटर से देखने लगा।

वो कुछ 7 लड़के थे, सरिता का कुरता नीचे फर्श पर पड़ा था और उसकी ब्रा कुछ दूर कोने में। सरिता को उन लोगों ने एक टेबल पर खड़ी कर रखा था और वो एकदम टापलेस थी। वो रो रही थी और जीतू से हाथ जोड़कर माफी माँग रही थी। उसने अपने हाथ से अपनी छाती छुपा रखी थी और उसकी नंगी कमर पीछे से एकदम चिकनी और गोरी दिख रही थी, सरिता की बेल भी एकदम खींची हुई थी और क्यूंकी उसकी सलवार अभी भी उसके ऊपर थी, उसकी गाण्ड का कटाव उसकी सलवार के नाते के ऊपर बहुत हाट लग रहा था।

जीतू बियर पी रहा था और उसको बोल रहा था- “हम कुछ नहीं करेंगे अगर तू अपने आप नंगी हो जाएगी। चल सलवार खोल के दिखा दे फिर तुझे जाने देंगे और अगर तू 5 मिनट में नंगी नहीं हुई तो तुझे आज शाम तक चोदेंगे कुतिया…”

सरिता ने कुछ सोचा और सुबकते हुए बोली- “क्या आप सच में मुझे जाने दोगे?”

जीतू बोला- “हाँ… साली, जल्दी कर…”

सरिता ने अपनी छाती से अपने हाथ हटाए तो उसकी छोटी-छोटी गोल-गोल, गोरी-गोरी चूचियां दिखने लगीं। पता नहीं क्यूँ लेकिन उसको आधी नंगी देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया और मैं वहीं बैठकर अपनी बहन को नंगी होते देखने लगा। उसके चूचुक कुछ डार्क ब्राउन कलर के थे और एकदम तने हुए थे। वो धीरे-धीरे अपनी सलवार का नाड़ा खोल रही थी। नाड़ा खुलते ही उसकी सलवार नीचे गिर गयी और सरिता की गोरी चिकनी सुडौल लंबी टांगें दिखने लगीं। उसने एक-एक करके अपनी टाँगें उठाई और मुश्किल से अपनी हाइ हील सैंडल से सलवार को आजाद किया।

वो अब सिर्फ़ ब्लू कलर की स्ट्रिप्स वाली पैंटी में 7 लड़कों के सामने खड़ी थी। जीतू उसके पास आया और उसकी टाँगों पर हाथ फेरने लगा।


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सरिता रोते हुए बोली- “प्लीज… ऐसा मत कीजिए, आपने कहा था कि आप मुझे जाने देंगे…”

जीतू बोला- “साली तू पूरी नंगी कहाँ हुई है? तेरी पैंटी फाड़ दूं या खुद उतारेगी?”

वो बोली- “नहीं, मैं उतार देती हूँ…”

अब सरिता ने अपनी पैंटी की इलास्टिक में अपनअ अंगूठा डाला और धीरे से पैंटी को नीचे खींचा। मेरी धड़कन बढ़ गयी। अब उसकी पैंटी उसके एंड़ी में थी और उसका मुँह दूसरी तरफ था जिसकी वजह से मैं उसकी चूत नहीं देख पा रहा था। अब वो पैंटी को अपने सँडल्ज़ से निकालने के लिए नीचे झुकी तो उसकी गोल गाण्ड एकदम मेरी तरफ बाहर आ गयी और मैंने उसके छोटे से पिंकिश गाण्ड के छेद को देखा। पैंटी उतारने के बाद वो पूरी नंगी हो गयी और अपने हाथों से अपने बदन को छुपाने लगी। अब उसने रोना बंद कर दिया था।

जीतू और उसके दोस्त उसका नंगा जवान बदन आँखें फाड़कर देख रहे थे। जीतू बोला- “अब अपने हाथ ऊपर कर और घूमकर दिखा…”

ये सुनकर जैसे मेरे मुँह की बात सच हो गयी। अब सरिता मेरी तरफ मुड़ी तो उसके दोनों हाथ ऊपर होने की वजह से उसकी चूचियां और गोल हो गयीं, उसकी पसलियां उसकी चूचियां के नीचे से उभर आई और उसकी स्लिम कमर और फ्लैट पेट पर उसकी बेल एकदम टाइट हो गयी, उसकी चूत पर बहुत थोड़ी झांटें थीं। पूरा घूमने के बाद वो बोली- “अब मैं जाऊँ?

ये सुनकर सब हँसने लगे।

और इतने में वहाँ अलका भी आ गयी। सरिता को पूरी नंगी देखकर वो मुश्कुराई और बोली- “हुउंण… अच्छी लग रही है, तू कपड़े क्यूँ पहनती है। मैंने तुझे बोला था ना की तेरे साथ कुछ होने वाला है। अब देख अपने आपको कैसे नंगी खड़ी है सबके सामने। तेरे भाई को बूलाऊँ क्या?”

ये सुनकर सरिता ने हाथ जोड़ दिए और बोली- “प्लीज… अलका, ऐसा मत करना…”

अलका जीतू के पास गयी और बोली- “मैं तो सोच रही थी की अब तक तो इसकी दबाकर चुदाई चल रही होगी लेकिन तुम लोगों ने इसको सिर्फ़ नंगा किया है, क्या सिर्फ़ इतनी ही सजा दोगे इसे?”

जीतू बोला- “इसने जो सबके सामने मुझे स्लैप किया था इसलिए इसको पहले नंगी ही बाहर ले जाऊँगा और फिर इसको अपनी रंडी बनाऊँगा…”

ये सुनकर सरिता डर से काँपने लगी, और जोर-जोर से रोने लगी, साथ ही वो टेबल से उतरकर रूम के कोने में पहुँच गयी।

अलका के कहा- “चल सरिता, चलना तो तुझे पड़ेगा ही। तुझे मैंने बहुत समझाया लेकिन तू मानी नहीं, आज तो वैसे भी कैंटीन में बहुत भीड़ है नंगी लड़की देखकर सबको मजा आएगा…” और वो सब उसको नंगी ही बाहर ले जाने लगे।

इस पर सरिता ने अपने आपको को उनके हवाले कर दिया और बोलि- “सुनो प्लीज… मेरी बात सुनो… तुम जो मेरे साथ करना चाहते हो यहीं कर लो लेकिन मुझे ऐसे बाहर मत ले जाओ…”

अलका बोली- “पक्का… जो भी करना चाहते हैं कर लें?”

सरिता बोली- “हाँ…”

अब अलका ने कहा- “तो फिर ठीक है… अगर तूने फिर किसी भी काम के लिये ना कहा तो कालेज के बाहर तक मुँह काला करके ले जाएँगे…” फिर जीतू से कहा- “जीतू यार, यहीं कर ले लेकिन करियो जरा मस्ती से इतनी सेक्सी लड़की मैंने भी पहली बार देखी है…”

अब जीतू ने सरिता को बालों से पकड़ा और उसे फर्श पर रंडियों की तरह फेंक दिया। और बोला- “चल टेबल पर चढ़ जा और कुतिया बन जा…”

सरिता जल्दी से चढ़ गयी और डागी स्टाइल में झुक गयी। पर उसको चुडाई के लिए पोजीशन बनानी नहीं आती थी इसलिए अलका अपनी जगह से उठी और वो उसकी पोजीशन ठीक करवाने लगी। उसने उसके हाथ थोड़े से आगे को पुश किए और उसकी कोहनी तक उसके हाथ टेबल से सटा दिए। अब उसकी पतली कमर एक कर्व में आगे की तरफ झुक गयी और उसकी गाण्ड थोड़ी और ऊपर उठ गयी। अब अल्को पीछे आई और उसके घुटनों को थोड़ा खोल दिया और उसको अपनी गाण्ड और उठाने के लिए बोला। सरिता पूरी रंडियों की तरह उसकी सब बातें मान रही थी।

सरिता अब कुतिया के जैसे टेबल पर बैठी थी उसकी छोटी-छोटी चूचियां नीचे लटक गयी थीं और उसकी गाण्ड ऊपर उठ गयी थी। उसकी गाण्ड थोड़ी सी खुल गयी थी और उसकी गाण्ड का बहुत छोटा पिंक टाइट छेद उसके गोरे चूतड़ों में अब साफ दिख रहा था। उसकी छोटी सी नाजुक कुँवारी चूत भी बाहर को निकल आई थी और चुदवाने के लिए तैयार थी।

अब अलका ने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाली और उसको ऊपर की तरफ खींचा तो सरिता उतने में ही चिल्ला पड़ी। अलका बोली- “बस… अब हिलियो मत, एकदम ठीक पोजीशन है…” फिर वो अपने जगह वापिस आ गयी।

सरिता पूरी नंगी थी और अब पूरी तरह से अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई के लिए एकदम तैयार थी। उधर जीतू और उसके दोस्त भी अपनी पैंट उतार चुके थे और अपने-अपने लण्ड को खड़ा कर रहे थे। सबसे पहले जीतू सरिता के मुँह की तरफ गया और उसकी चूचियां मसलने लगा। दूसरे हाथ से उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया जो एकदम लोहे की रोड की तरह खड़ा था और करीब 9 इंच लंबा और 1½ इंच मोटा था।

सरिता उसको देखकर घबरा गयी।

जीतू बोला- “चल मेरा लण्ड मुँह में डाल और अच्छे से इसकी सफाई कर दे…” और वो अपना लण्ड उसके होठों पर रगड़ने लगा।

सरिता ने यहाँ फिर गलती कर दी और उसने अपना मुँह मोड़ लिया।

अब जीतू को और गुस्सा आ गया। उसने अलका को बुलाया और कहा- “अलका, ये साली रांड़ लण्ड नहीं चूस रही है जरा इसके हाथ पकड़…”

अलका ने सरिता के हाथ पकड़ लिए और इससे पहले सरिता और मैं भी कुछ समझ पाते, जीतू ने अपनी बेल्ट के दो फोल्ड किए और सरिता की छोटी सी गोरी और कमसिन गाण्ड पर बेल्ट की बरसात कर दी। सरिता अब चिल्लाने लगी- “अया… उऊः आह… आईईई… आह… बस माफ कर दो आआअह्ह… माँ आह्ह…”

सरिता की छोटी सी गाण्ड एकदम लाल हो गयी, और वो जोर-जोर से रोने लगी।

अब अलका बोली- “देख, अब मान जा की तू रंडी बन गयी है और वैसे भी रंडी बनने में कोई कसर बाकी रही नहीं। अब जल्दी से सबके लण्ड चूस…”


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