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पायल उठ कर अलमारी में पैसे रख कर वापिस बेड पर आकर लेट गई… रवि भी आँखें बंद किए लेटा हुआ था….
पायल: जी सो गए क्या ?
रवि: ह्म्म यार बहुत नींद आ रही है.शाम होते ही फिर से जाना है..थोड़ा आराम करने दो….
थोड़ी देर बाद रवि घोड़े बेच कर सो जाता है….पायल की अभी आँख लगी ही थी, कि नेहा डोर पर दस्तक देती है….
पायल: अर्रे भाभी आओ ना अंदर..
नेहा: वो तुम्हारी मा का फोन आया है…आकर बात कर लो…..पायल उठ कर नेहा के साथ उसके रूम में आ गई….वहाँ कुलवंत सिंग और साहिल बेड पर सो रहे थी….पायल ने रेसिवेर कान पर लगाया और कहा…..
पायल: हां बोलो मा क्या बात है…
नीलम: (दूसरी तरफ फोन पर) बेटा तुम्हारे मामा का फोन आया था.
पायल: हां क्या कह रहे थे मामा जी…
नीलम: तेरे भाई (पायल के मामा का लड़का) मोहित के लिए लड़की देखी,है उनकी मँगनी पर बुला रहे है….हम सब जा रहे है, तू भी चल साथ में..
पायल: नही मा में नही जा पाउन्गि..आपको तो पता है ना मा घर पर कितना काम होता है…
नीलम: हां जानती हू. मुझे पता था, तू मना कर देगी….अच्छा सुन एक काम तो कर दे मेरा…
पायल: हां बोलो मा….
नीलम: बेटा हम तो सब जा रहे है…पीछे घर पर कोई नही रहेगा. तो तू शाम को इधर आ जाना.भैंसो को पानी और चारा डाल देना…और हां रात को यही सो जाना….तुझे तो पता है..आज कल कितनी चोरियाँ हो रही है…
पायल: ठीक है मा..में उधर आ जाउन्गि…
जैसे ही पायल की मा ने उसे अपने यहाँ रात को रुकने के लिए कहा… पायल का शैतानी दिमाग़ कार की स्पीड पर दौड़ने लगा. फिर उसके होंठो पर लंबी मुस्कान फेल गई…नेहा बेड पर बैठी पायल को देख रही थी…
नेहा: क्या बात है, किस बात पर खुस हो रही हो…..
पायल: वो दीदी मेरे मामा के लड़के की मँगनी है सब वहाँ जा रहे है..
नेहा: अच्छा ये तो बहुत खुशी की खबर है….तू भी जाएगी साथ में..
पायल: नही दीदी में नही जा रही…
नेहा: अर्रे क्यों ?
पायल: देखो ना दीदी इतनी गरमी है, और तुम्हे तो पता है वंश गरमी में कितना तंग करता है.वहाँ पर भीड़ भाड़ होगी, तो और तंग करेगा..
नेहा: हां वो तो है..
पायल: हां वो मा बोल रही थी कि, रात को में उनके यहाँ चली जाउ. और रात को वही सो जाउ क्यों कि आज कल बहुत चोरियाँ हो रही है….
नेहा: हां तो चली जाना ना.वैसे भी इन दोनो भाइयों ने तो, शाम को ही निकल जाना है….
पायल: पर दीदी में वहाँ अकेली, नही मुझे डर लगता है अकेले….
नेहा: अर्रे तो क्या हुआ…साहिल को साथ में लेजा….
नेहा की ये बात सुनते ही पायल के दिल के सितार झंझणा उठे….नेहा ने तो खुद उसकी मन की मुराद पूरी कर दी थी….पर फिर भी वो ऐसे दिखा रही थी..जैसे उसको नेहा की बहुत चिंता हो….
पायल: पर दीदी आप भी तो घर में अकेली हो जाओगी….
नेहा: अर्रे मेरी छोड़ वैसे भी में माला को बुला लूँगी यहाँ सोने के लिए.
पायल: ठीक है दीदी….में शाम को साहिल के साथ चली जाउन्गि…
उसके बाद पायल अपने रूम में आ जाती है.आज पायल मन ही मन बहुत खुस थी..रात के बारे में सोच कर अभी से उसकी चूत में कुलबुलाहट हो रही थी….दूसरी तरफ नेहा भी बहुत खुस थी क्योकि आज माला उसके साथ सोने वाली थी….माला का घर उनके पड़ोस में ही था….उसका पति हर समय नशे में डूबा रहता था…
और माला भी अपनी चूत की आग को लेकर परेशान थी….इसीलिए माला अपने दिल का बोझ हलका करने के लिए नेहा के पास आ जाती थी…फिर माला और नेहा एक दूसरे की आग शांत करने का ज़रिया बन गई…दोनो एक दूसरे की चूत को खूब चुस्ती, उंगली करती….और अपने तन की आग ठंडा करती..
इसीलिए नेहा भी बहुत खुस थी….क्योंकि कुलवंत की हालत भी अपने भाई जैसी हो गई थी….पहले कुलवंत सिंग कुछ और काम करता था…पर दो साल पहले जब उसका काम बंद हो गया तो, वो अपने भाई के साथ भैंसो के व्यापार करने लगा था….तब से नेहा भी पायल की तरह चुदासी हो गई थी.पर पायल को इस बात की भनक नही थी कि नेहा और माला के बीच ऐसा कुछ है….
शाम के 4 बजे कुलवंत सिंग और रवि जाने की तैयारी करने लगे….पायल और नेहा ने मिल कर खाना बनाया..और कुलवंत सिंग और रवि खाना खा कर मंडी के लिए सहर निकल गए…जैसे ही दोनो मर्द घर से बाहर गए. पायल रात के बारे में सोच सोच कर मचलने लगी…और जल्दी -2 काम निपटा कर अपनी मा के घर जाने की तैयारी करने लगी…
पायल: जी सो गए क्या ?
रवि: ह्म्म यार बहुत नींद आ रही है.शाम होते ही फिर से जाना है..थोड़ा आराम करने दो….
थोड़ी देर बाद रवि घोड़े बेच कर सो जाता है….पायल की अभी आँख लगी ही थी, कि नेहा डोर पर दस्तक देती है….
पायल: अर्रे भाभी आओ ना अंदर..
नेहा: वो तुम्हारी मा का फोन आया है…आकर बात कर लो…..पायल उठ कर नेहा के साथ उसके रूम में आ गई….वहाँ कुलवंत सिंग और साहिल बेड पर सो रहे थी….पायल ने रेसिवेर कान पर लगाया और कहा…..
पायल: हां बोलो मा क्या बात है…
नीलम: (दूसरी तरफ फोन पर) बेटा तुम्हारे मामा का फोन आया था.
पायल: हां क्या कह रहे थे मामा जी…
नीलम: तेरे भाई (पायल के मामा का लड़का) मोहित के लिए लड़की देखी,है उनकी मँगनी पर बुला रहे है….हम सब जा रहे है, तू भी चल साथ में..
पायल: नही मा में नही जा पाउन्गि..आपको तो पता है ना मा घर पर कितना काम होता है…
नीलम: हां जानती हू. मुझे पता था, तू मना कर देगी….अच्छा सुन एक काम तो कर दे मेरा…
पायल: हां बोलो मा….
नीलम: बेटा हम तो सब जा रहे है…पीछे घर पर कोई नही रहेगा. तो तू शाम को इधर आ जाना.भैंसो को पानी और चारा डाल देना…और हां रात को यही सो जाना….तुझे तो पता है..आज कल कितनी चोरियाँ हो रही है…
पायल: ठीक है मा..में उधर आ जाउन्गि…
जैसे ही पायल की मा ने उसे अपने यहाँ रात को रुकने के लिए कहा… पायल का शैतानी दिमाग़ कार की स्पीड पर दौड़ने लगा. फिर उसके होंठो पर लंबी मुस्कान फेल गई…नेहा बेड पर बैठी पायल को देख रही थी…
नेहा: क्या बात है, किस बात पर खुस हो रही हो…..
पायल: वो दीदी मेरे मामा के लड़के की मँगनी है सब वहाँ जा रहे है..
नेहा: अच्छा ये तो बहुत खुशी की खबर है….तू भी जाएगी साथ में..
पायल: नही दीदी में नही जा रही…
नेहा: अर्रे क्यों ?
पायल: देखो ना दीदी इतनी गरमी है, और तुम्हे तो पता है वंश गरमी में कितना तंग करता है.वहाँ पर भीड़ भाड़ होगी, तो और तंग करेगा..
नेहा: हां वो तो है..
पायल: हां वो मा बोल रही थी कि, रात को में उनके यहाँ चली जाउ. और रात को वही सो जाउ क्यों कि आज कल बहुत चोरियाँ हो रही है….
नेहा: हां तो चली जाना ना.वैसे भी इन दोनो भाइयों ने तो, शाम को ही निकल जाना है….
पायल: पर दीदी में वहाँ अकेली, नही मुझे डर लगता है अकेले….
नेहा: अर्रे तो क्या हुआ…साहिल को साथ में लेजा….
नेहा की ये बात सुनते ही पायल के दिल के सितार झंझणा उठे….नेहा ने तो खुद उसकी मन की मुराद पूरी कर दी थी….पर फिर भी वो ऐसे दिखा रही थी..जैसे उसको नेहा की बहुत चिंता हो….
पायल: पर दीदी आप भी तो घर में अकेली हो जाओगी….
नेहा: अर्रे मेरी छोड़ वैसे भी में माला को बुला लूँगी यहाँ सोने के लिए.
पायल: ठीक है दीदी….में शाम को साहिल के साथ चली जाउन्गि…
उसके बाद पायल अपने रूम में आ जाती है.आज पायल मन ही मन बहुत खुस थी..रात के बारे में सोच कर अभी से उसकी चूत में कुलबुलाहट हो रही थी….दूसरी तरफ नेहा भी बहुत खुस थी क्योकि आज माला उसके साथ सोने वाली थी….माला का घर उनके पड़ोस में ही था….उसका पति हर समय नशे में डूबा रहता था…
और माला भी अपनी चूत की आग को लेकर परेशान थी….इसीलिए माला अपने दिल का बोझ हलका करने के लिए नेहा के पास आ जाती थी…फिर माला और नेहा एक दूसरे की आग शांत करने का ज़रिया बन गई…दोनो एक दूसरे की चूत को खूब चुस्ती, उंगली करती….और अपने तन की आग ठंडा करती..
इसीलिए नेहा भी बहुत खुस थी….क्योंकि कुलवंत की हालत भी अपने भाई जैसी हो गई थी….पहले कुलवंत सिंग कुछ और काम करता था…पर दो साल पहले जब उसका काम बंद हो गया तो, वो अपने भाई के साथ भैंसो के व्यापार करने लगा था….तब से नेहा भी पायल की तरह चुदासी हो गई थी.पर पायल को इस बात की भनक नही थी कि नेहा और माला के बीच ऐसा कुछ है….
शाम के 4 बजे कुलवंत सिंग और रवि जाने की तैयारी करने लगे….पायल और नेहा ने मिल कर खाना बनाया..और कुलवंत सिंग और रवि खाना खा कर मंडी के लिए सहर निकल गए…जैसे ही दोनो मर्द घर से बाहर गए. पायल रात के बारे में सोच सोच कर मचलने लगी…और जल्दी -2 काम निपटा कर अपनी मा के घर जाने की तैयारी करने लगी…