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जवान रात की मदहोशियाँ complete

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'' अभी बहुत ताक़त है मेरे लण्ड में '' अजय ने एक जोरदार शॉट मारते हुए कहा ।

''जब तक किसी का लण्ड खलास नहीं हो जाता है। न, तबतक लगता है कि बहुत ताकत है मेरे लण्ड में । यही बात है। आपके साथ में भी और आपके लण्ड की रफ्तार बता रही है आपके लंड को खलास होने में ज्यादा देर नहीं है। और आपका लण्ड खलास हुआ कि आप गये काम से ।'' गुलाबी इस तरह बोली मानो उसे मर्दो के लण्ड का बहुत ज़्यादा अनुभव हो ।

पहले चोदने दीजिए जमकर अपनी बुर को । खलास तो हर लण्ड को अन्तः मे होना ही है। अगर लण्ड खलास न हो तो बुर की क्या दुर्गती होगी यह

कभी सोचा है आपने । कहते हुए अजय दनादन गुलाबी की बुर् पर अपने लण्ड से आक्रमण करता रहा । ।

थोड़ी ही देर के बाद अजय ने अपनी सारी ताकत लगा दी अपने लण्ड के पीछे और बड़ी तेजी से अपने लण्ड को बाहर निकाल-निकाल कर गुलाबी की बुर को चोदने लगा । चचचच पॅच पॅच फॅक फॅक फच फच की आवाज निकल रही थी चुदाई से ।। लेकिन अजय के लण्ड की यह रफ्तार टिक नहीं पाई और शीघ्र ही उसका लण्ड गरम-गरम वीर्य उगलने लगा गुलाबी की बुर में । वीर्य उगलते-उगलते अजय के लण्ड का जोश धीमा पड़ने लगा

और अन्तः में थम गया अजय का लण्ड ।। |

'' चल हठ अजय अब तुझे क्या तेरे लण्ड का काम तमाम । अब मैं गुलाबी की बुर को चोदूंगा '' संजय ने कहा अजय से ।

अजय आहिस्ते से उठा और बगल में नीचे बैठकर आराम करने लगा और संजय लपका गुलाबी की बुर की ओर । | गुलाबी की बुर का छेद तो बिचका हुआ था ही । संजय ने तपाक से अपने को चोदने की पोजिशन में लाया और गुलाबी की पतली कमर को पकड़ कर अपना लण्ड पेल दिया गुलाबी की बुर में।

दो-तीन बार संजय ने धीरे-धीरे गुलाबी की बुर में धक्का मारा । और संजय ने देखा कि उसका लण्ड का निशाना बिल्कुल ठीक हैं तथा उसका लण्ड सीधा उस औरत की बुर में घुसता चला जा रहा है तो उसने एक जोरदार शॉट मारा । | संजय का लण्ड सीधा औरत को बुर को चीरता हुआ पुरा का पुरा औरत की बुर में घुस गया।

'' आपके लंड का निशाना तो बड़ा सटीक है शहरी है '' । मुस्कुराते हुए गुलाबी बोली-

'' चोदे हुए बुर में और बीचके हुये बुर में भी अगर लण्ड का निशाना सटीक अगर न बैठे तो बेकार है बुर का चोदना संजय ने हंसते हुए कहा । |

 
'' हां शहरी बाबू मेरी बुर में तो रास्ता आपके दोस्त ने ही बना दिया है। अब दिल खोलकर अपना लण्ड पुरी मस्ती में पेलते जाइये । सीसियाते हुए गुलाबी बोली। |

यह सुनते ही संजय दनादन औरत की बुर में अपना लण्ड पेलने लगा। और औरत ने मुकेश के लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और चूमने लगी । मुकेश और राजु उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को मसलने लगे . मुकेश की मन हो रहा था कि वह संजय की हटाकर अपने लण्ड को पेल दे औरत की

बुर में, लेकिन उसने किसी तरह अपने लण्ड को काबू में रखा । राजु का लण्ड भी धमाल मचा रहा था चूत चोदने के लिए लेकिन उसके पास भी धैर्य रखने और अपनी बारी का इंतजार करने के सिवा कोई रास्ता नहीं था ।।

सुस्त पड़ा अजय चुपचाप देख रहा था । संजय को चोदते हुये । उसका लंड अब सिकड़कर छोटा हो गया था। लग रहा था जैसे उसका लंड मर गया हो ।* अजय की चलती सांस अब धीमी होने लगी थी । मुकेश और राजु कभी उसकी चुचियों को मसलते तो कभी उसकी चुचियों में दांत से काट लेते तो कभी चुचियों में नाखुन गडा देते । इन दोनों से भी अपने लंड के जोश को रोकना बड़ा कठिन हो रहा था । | गुलाबी की बुर भी बहुत गरम हो रही थी,

लेकिन उसे अभी दो और लंड की गरमी उतारनी थी । इसलिए गुलाबी अपनी बुर को नियंत्रण में रखी हुई थी ताकि उसकी बुर मुकेश और राजु के

लंड को खलास किये बिना ही न खलास हो जाय । । ।

संजय के लंड ने भी रफ्तार पकड़ ली । गुलाबी की बुर के अन्दर का रास्ता तो बहुत ही गीला था इसलिए उसका लंड बड़े आराम से उसकी बुर में घुस

रहा था और निकल रहा था । पुरी मस्ती में संजय डाले जा रहा था गुलाबी की बुर में ।

'' क्या शहरी बाबू, मजा आ रहा है न चोदने में मेरी बुरिया को ।। '' गुलाबी पूछी संजय से ।

'' बुर चोदने में भी अगर मजा नहीं आएगा तो मजा आएगा किस काम में। किसी भी मर्द के लिए इससे ज्यादा आनन्दायक काम दुनिया में है ही नहीं ।'' संजय ने जबाव दिया । ।

'' ठीक है तो आप भी अपने लंड की ताकत को दिखला ही दीजिए मुझे भी देखना है कि आप चारों दोस्तों में से किसका लंड सबसे तगड़ा और दमदार है ?'' गुलाबी मुस्कुराते हुए बोली ।। ।

यह सुनकर संजय को ओर जोश आ गया क्योंकि उसके लंड की प्रतिष्ठा का सवाल उत्पन्न हो गया। उसने मन ही मन सोच लिया। कि किसी भी कीमत पर उसे अपने लड की प्रतिष्ठा बचानी है, ताकि गुलाबी यह न समझ ले कि संजय का लंड अन्य मित्रों के लंड की तुलना में कमजार है । इसलिए वह और जोर-जोर से गुलाबी की बुर में धक्का मारने लगा। । प्रत्येक धक्के के साथ संजय का लंड फ़चाक से गुलाबी के बुर में घुस जाता और फिर तुरंत ही बाहर भी निकल जाता । बाहर निकलते ही उसका लण्ड फिर से गुलाबी की बुर पर हमला कर देता ।। काफ़ी तेजी से संजय का लंड गुलाबी की बुर

पर हमला किये जा रहा था ।

 


गुलाबी को भी चुदवाने में खुब मजा आ रहा था । उसका मन इसी तरह की चुदाई चाहता भी था । कमजोर चुदाई औरत की बुर को पसंद नहीं थी

इसलिए.कमजोर मर्दो की ओर औरत की नजर भी नहीं जाती थी । जितनी ताकवर औरत की बुर होती है उतना ही ताकतवर वह मर्द का लण्ड भी

खोजती है ।

तगड़ा लंड पाने की तलाश में ही गुलाबी ने अपने लिए पति चुना था । अपने पति को पति बनाने से पूर्व यह आठ-दस बार उसके लंड से चुदवाकर

देख ली थी कि उसके लण्ड में उसकी बुर को परास्त करने की क्षमता है या नहीं, क्योंकि जीवन भर का सवाल था ।।

''और चोदिए, जमकर चोदिए । दिखा दीजिए की शहरी लण्ड में भी ताकत होती है पहाड़ी बुर को पछाड़ने की। पहली बार में शहरी लंड से चुदवा रही हूं। अभी तक तो पहाडी लंड से ही पाला पड़ा। था । औरत ने बोला ।

यह सुनकर संजय को और जोश आ गया और उसने अपने लण्ड के पीछे और ताकत लगा दी ताकि गुलाबी को यह अहसास न हो कि शहरी बाबु केवल उपर से देखने में जोशीले नजर आते हैं, और उनके लण्ड में कोई ताकत होती हो नहीं। जमकर चोदना और औरत की बुर को संतुष्ट करना

संजय के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया। ।

खुब जोर-जोर से धक्के मारते हुए संजय ने पुछा गुलाबी से, '' कैसी हो रही है आपकी बुर की चुदाई । आपकी बुर के लायक चुदाई हो रही है । या नहीं।''

'' हां हां, आपका लंड तो मस्ती में चोद रहा है मेरी बुर को। और ताकत हो आपके लंड में तो दिखाइए । शायद ऐसा मौका फिर न मिले। '' औरत बोली

यह सुनकर संजय ने अपनी पूरी ताकत लगा दी अपने लंड के पीछे । अपने लंड की प्रतिष्ठा बरकरार रखने के लिए क्योंकि सवाल उसके लंड की प्रतिष्ठा का ही नहीं था ।। सभी शहरी लोगों के लंड की प्रतिष्ठा का सवाल था । वह नहीं चाहता था कि शहरी लंड की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल जाए । * इतनी तेजी से संजय का लंड औरत के बुर में आ जा रहा था । कि ऐसा लग रहा था कि संजय के लंड में कोई स्पींग फैट कर दिया हो जिससे उसका लंड टकटटकट औरत के बुर में घुस रहा है और निकल रहा है। |

लंड और बुर की लड़ाई में चचचच की आवाज निकलने लगी क्योंकि औरत का बुर बहुत गीला था । पुरी मस्ती में संजय टूटे पड़ा था औरत के बुर पर । इस वक्त अगर औरत कि बुर के उपर बड़े-बड़े घने झांट न होते तो संजय और औरत की हड्डियां टकराती खूब जोर से ।। | औरत की बुर के उपर घने झांट इस वक्त गदा का काम कर रहे थे नहीं तो बुर के उपर की हड्डी और लंड के उपर को हड्डी दोनों में खुब टकराव होता । और तब संजय के लिए इतने जोर-जोर से औरत के बुर में धक्के मारना सम्भव भी नहीं होता ।।

 
संजय के इन धक्कों से औरत की बुर भी मस्त हो उठी । लंड के ऐसे ही आक्रमणों से गुलाबी की बुर पर मस्ती छाती थी । गुलाबी भी नीचे से चूतड़ उछला-उछला कर संजय की लंड के आक्रमण का जबाव देने लगी ।

बाह ! क्या चुदाई हो रही है । मुकेश बोला।। । अरे संजय ! इतना जोर से मत चोदो कि गुलाबी का बुर तहस-नहस हो जाये और हमलोगों को चोदने लायक ही नहीं रहे ।

आखिर हमलोगों का लंड इस वक्त कहां जाएगा बुर की तलाश में। राजु ने हंसते हुए कहा ।। |

आप दोनों चिंता मत कीजिए | इनका लंड से मेरे बुर का कुछ नहीं बिगड़ने वाला है। आप दोनों के लंड की शक्ति को भी बड़े आराम से देखेगी मेरी

बुर । बहुत ही मजबूत है मेरी बुर गुलाबी बोली ।।

इतनी तेजी से संजय का लड चोदे जा रहा था कि ऐसा लग रहा था मानो पागल हो गया है संजय का लंड ।

तुम्हारा लंड पगला गया है क्या संजय ? मुकेश पूछा ।

""हां "" संजय ने कहा ।।

""क्यों ? ""

"" मस्त बुर को ताकत देखकर ।""

"" तो ठीक है अपने लंड का पागलपन उतार ही लो । ""

""बिल्कुल उतार लूंगा ।""

"" कुछ भी बाकी मत रखना ।""

"" बिल्कुल नहीं रखेंगा ।""

'' क्यों ? ""

'' ताकि औरत को बुर को अहसास हो जाये । ""

""किस बात का ? ""

""यह कि शहरी बाबु का लंड में भी ताकत होती है ? ""

"" ठीक है चोदते जाओ कुल स्पीड से । ""

 
"" और स्पीड बढाउं क्या ?""

"" अगर बढ़ा सकते हो तो बढ़ा ही दो ।। | ""

यह सुनकर संजय ने अपने लंड की रफ्तार बढ़ा दी । उसके लंड कि रफ्तार इतनी बढ़ गई कि उससे ज्यादा बढ़ाना अब संजय के बश के बाहर की बात थी ।

""तुम जितना चोद सको, चोदो । ""

""पीछे हमलोग भी हैं शहरी लंड का परिचय पहाड़ी बुर को देने के लिये ।"" मुकेश बोला ।

""वाह शहरी बाबू वाह । "" औरत के मुंह से निकला,"" क्या रफ्तार है चोदने की । मेरा बुर तुम्हारे लंड को धन्यवाद दे रहा है मस्ती में झूमते हुये ।"" चुदाई के नश में झूमती हुई औरत बोली ।।

""मस्ती आ रही है ? ""संजय पूछा ।

""हां, मस्ती आ रहा है "" औरत ने बोला।

""आपकी बुर को कोई कष्ट तो नहीं ?""

"" नहीं-नहीं कष्ट कैसा ?""

""बहुत मजा आ रहा है ?""

"" हां मजा आ रहा है पहाड़ी लंड से ज्यादा या कम । ""

""ज्यादा !""

"" ऐसा क्यों ? ""

""आपके लंड की रफ्तार का कारण । ""

""यह रफ्तार पहाडी लंडों में नहीं होता ।।""

""होती है लेकिन इतना नहीं। ""

""और रफ्तार बड़ा दें।""

"" अगर सम्भव हो तो बढाइये ।""

यह सुनकर संजय ने अपना लंड की रफ्तार को और बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन रफ्तार की सीमा खत्म हो चुकी थी इसलिए और बढ़ाना सम्भव नहीं था।

लंड और बुर का जबरदस्त मुकाबला चल रहा था जिसमें लंड की रफ्तार बहुत अधिक थी और बुर की कम । बिल्कुल मशीनी अंदाज में संजय का लंड औरत की बुर में घुस रहा था और निकल रहा था अंदर से बाहर निकलते ही तपाक से उसका लंड औरत की बुर में विलीन हो जाता है । | औरत का बुर भी बड़ा प्रसन्न हो रहा था इस शानदार चुदाई से मस्त होकर ।

अजय चुपचाप इस शानदार चुदाई को निहारे जा रहा था। क्योंकि उसकी बारी फिलहाल समाप्त हो चुका था ।।

 
दोस्तो आज का अपडेट दे दिया है

पर हमारा कोई भी नया यूज़र हमारा साथ नही दे रहा है सब सोए हुए हैं हद होती है यार बेशरमाई की भी
 
धन्यवाद दोस्तो

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अजय चुपचाप इस शानदार चुदाई को निहारे जा रहा था। क्योंकि उसकी बारी फिलहाल समाप्त हो चुका था ।।

इस जबरदस्त चुदाई के दौरान संजय ने औरत को बुरी तरह जकड़ रखा था अपनी बांहों में .

उधर चुचियों का मसला जाना चल रहा था मुकेश और राजु के द्वारा । राजु के लंड को औरत मुंह से चुसती भी जा रही थी।

''चोदो.....चोदो और जमकर चोदो....।'' मुकेश ने संजय का उत्साह बढ़ाया चोदने में । और संजय पुरी ताकत के साथ औरत की बुर पर पड़ा हुआ था। उसकी सांस तेज चलने लगी थी बहुत तेजी से चोदने के कारण । | लेकिन थोड़ी देर में ही संजय का लंड वीर्य उगलने लगा औरत की बूर के अंदर औरत की बुर उसके गरम-गरम वीर्य को पीने लगी . और मस्ती में झूमने लगी . वीर्य उगलते-उगलते संजय का लंड शांत हो गया और साथ ही शांत हो गई संजय के शरीर की हरकत । सुस्त हो गया उसका लंड । ।

तभी मुकेश ने कहा-हो गया तेरे लंड का भी काम तमाम चल हटा अब मुझे चोदने.दे | यह सुनकर संजय धीरे से उठा और अजय की बगल में आकर बैठ गया और अपने लण्ड को एक कपड़े से पोछने लगा।

मुकेश के खड़े हुए लण्ड को आने हाथ मे लेकर तपाक से गुलाबी अपनी बुर से रगड़ते हुए हंसते हुए बोली '' हां, अब आप भी अपने लण्ड का बुखार उतार ही लीजिए ।

संजय ने हंसते हुए कहा- ''मेरा लण्ड भी बहुत मजबुत है गुलाबो ''।

गुलाबी ; ''सो तो अभी पता चल ही जायेगा ।''

मुकेश ; ''मेरा लण्ड संजय के लण्ड से ज्यादा ताकतवर है।''

'' हाथ कगन को आरसी क्या । पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या जो चोदकर गये है एक बार उन्हें देख लो शहरी बाबू ।''

यह सुनकर मुकेश पहले अपने आप को बुर चोदने की पोज़ीशन में ला कर और अपने लण्ड को औरत के बिचके हुए बुर के पास और धीरे-धीरे से धक्का मारा। बिना किसी बाधा के उसका लण्ड औरत की बुर में थोड़ा सा घुस गया ।

मुकेश ने दुबारा धक्का मारा तो उसका लण्ड थोड़ा और बुर के अन्दर चला गया। वह समझ गया कि बुर का लाईन एकदम किलीयर है और बस दनादन लण्ड को पेलते जाना है। आखिर औरत का बुर अब तक दो लण्डों से चुदवा चुका था। |

''जोर से धक्का मारिये, धीरे-धीरे क्या मेरे बुर को सहला रहे हैं।'' औरत बोली ।

''अभी बताती हूँ आपके ३ लंड बुर को आप क्या बताईएगा । चोद -चोदकर कर मज़े लीजिए । आखिर मेरा बुर है किसलिए भगवान ने बुर को बनाया ही है चुदवाने के लिए, क्या दुनियां में ऐसी कोई औरत है जिसका बुर चोदा नहीं जाता हो '' औरत कही।

 
यह सुनकर मुकेश ने एक जबरदस्त शॉट लगाया गुलाबी की बुर पर। बन्दुक की गोली की तरह उसका लण्ड औरत की बुर में घुसता चला गया। बुर के गीला होने की वजह से कोई दिक्कत नहीं हुई .

''मेरा लण्ड बहुत जोश में है'' मुकेश ने कहा। ।

''तो चदिए न जमकर कहते क्या हैं? ''

'' आपका बुर तो जी टी रोड बन गया है।''

'' दो-दो शहरी लण्डों को झेल चुका है। मजाक है क्या?'' औरत बोली ।

यह सुनते ही मुकेश ने दनादन गुलाबी की बुर पर हमला प्रारम्भ कर दिया । उसका लण्ड गुलाबी की बुरं में धड़ाधड़ घुसने और निकलने लगा ।

चुदवाते-चुदवाते गुलाबी की बुर की दिवार भी ढीली हो गई थी। और साथ ही दो-दो लण्डों ने उसके अन्दर अपना गरम-गरम वीर्य उगला था । इसलिए मुकेश के लण्ड को किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही थी । बुर के अंदर घूसने और निकलने में।

''आपके लण्ड के शॉट भी अच्छे हैं । '' गुलाबी ने अपनी चूत को उछालते हुए कहा

'' तो और क्या ? बिल्कुल नौ इंच का लण्ड है मेरा धमाकेदार और जायकेदार '' मुकेश ने कहा ।। |

'' मेरी बुर की गहराई भी कम नहीं है ।'' गुलाबी ने सीसियाते हुए कहा

'' सो तो मैं देख हो रहा हूं।''

'' देखिए नहीं जमकर चोदिए ।''

'' क्यों आपका बुर बहुत गरम है क्या ?''

'' दो दो लण्डों को गरमी झाड़ने के बाद भी मेरा बुर गरम नहीं होगा '' औरत कही।

मुकेश ने औरत की दोनों चूचियों को अपने हाथ में ले लिया और उन्हें मसलते हुए चोदने लगा पुरी ताकत के साथ ।।

औरत के मुंह में राजु का लण्ड था जिसे वह आम की तरह चुसे जा रही थी मस्ती में ।

'' बुर और चुची दोनों को तुम अपने ही कब्जे में रखोगे तो मैं क्या खाली लण्ड चुसवाउन्गा गुलाबी से। कम से कम एक चुची तो मेरे लिए छोड़ दो ।'' राजु ने मुकेश से कहा ।। |

''चिंता भूत करो । अभी थोड़ी देर के बाद बुर और दोनों चुचियां यानी की पुरी गुलाबी तुम्हारे लिए फ्री हो जाएगी । तब तुम्हें अकेले जो कुछ करना होगा जमकर करते रहना । कोई बाधा नहीं डालेगा ।'' मुकेश ने कहा ।। |

 
''अच्छा ठीक है अब अपने लण्ड की गर्मी पहले शांत करो ।। फिर तो मेरे लण्ड और गुलाबी की बर का मुकाबला होगा। '' राजु ने कहा हंसते हुए ।

मुकेश दनादन गुलाबी की बुर में अपना लण्ड पेले जा रहा था । बड़ा ही दिलचस्प मुकाबला था बुर और लण्ड का जिसे चुपचाप बैठकर देख रहे थे

अजय और संजय ।।

'' आह ! हाइईईईईईईईईईईईईईईईईईई मेरे राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्जाअ क्या चुदाई करते हो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ''औरत बोली ।

'' मजा आ रहा है आपकी बुर । को ? '' मुकेश ने एक जोरदार शॉट लगाते हुए गुलाबी से पूछा

'' हाइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई बाबूऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ बहुत मजा आ रहा है । '' गुलाबी पूरी तरह मस्ताती हुई बोली

'' और रफ्तार बढाउ अपने लण्ड का ? '' मुकेश ने गुलाबी की चुचि के निपल को छेड़ते हुए पूछा

'' रफ्तार जितनी बढ़ाओगे मजा उतना ही आयेगा मेरे राजा ।''

'' बहुत रसीला है। आपका बुर । ''

'' आपका लण्ड भी कम मस्त नहीं ।''

'' ऐसी बुर को ऐसा ही लण्ड चाहिए ?..''

'' हां तभी मजा भी आता है चुदाई में ।''

'' आपकी चुचियों भी शानदार है । ''

'' उपर वाले की मेहरवानी है। ''

'' या मरद ने मसल-मसल कर बड़ा कर दिया है ''

'' ऊपर वाला अगर मेरी चुचियों को बनाने में उदार न होता तो मरद के मसलने से होता ही क्या ? दोनों के सहयोग से ही मेरी चुचियां मस्त-मस्त हैं । |''

'' आपका मिजाज भी रंगीला है । ''

''और दुनिया में है ही क्या ? चार दिनों की तो जिन्दगानी है फिर तो इस दुनिया से चल ही देना है। इसलिए जितनी मौज मस्ती से दिन गुजार ले उतना ही अच्छा है । *

चोदते-चोदते मुकेश गुलाबी की चुचियों को बुरी तरह मसलने लगा लेकिन वह सब गुलाबी को अच्छा लग रहा था । मुकेश औरत की चुची के निप्पल को मसलने लगा । चूसते चुसते वह कभी दांत भी काट लेता निप्पल को ।

 
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