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जवान रात की मदहोशियाँ complete

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धनतेरस की आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ
 
चुची को चुसे जाने से गुलाबी की बुर की आग और बढ़ गयी । गुलाबी भी अपने आपको उचका-उचका कर मुकेश के लण्ड के जोरदार हमलों का जवाब देने लगी । लेकिन जितनी तेजी से लण्ड आक्रमण कर रहा था बुर पर उतनी तेजी से गुलाबी की बुर नहीं उछल रही थी क्योंकि गुलाबी सोच रही थी कि अभी उसके बुर् को एक और लण्ड का सामना करना है इसलिए बुर् की शक्ति को बचाकर भी रखना है ताकि अंत में चोदने वाले को निराशा हाथ न लगे ।

मुकेश तो एकदम पागल की तरह चोदे जा रहा था, गुलाबी की मस्त बुर से चचे-चचफुक फकफ़च फव्च की आवाज निकलने लगी । बुर और लण्ड के जोरदार मुकाबले से । बड़ी तेजी से मुकेश की कमर उपर नीचे हो रही थी । और उतनी ही तेजी से उसका लण्ड बुर को चोद चोद कर बेहाल किये जा रहा था।

'' हां जी आपको लण्ड में भी बहुत दम है। ''

'' क्या मेरा लंड सबसे तगड़ा है ? ''

'' तगड़ा लण्ड ही तो मस्त करता है बुर को ।''

'' मस्ती मिल रही है न ? ''

'' बहुत मस्ती मिल रही है। ''

करीब दस मिनट तक मुकेश अपनी पुरी रफ्तार में गुलाबी की बुर को दनादन चोदता रहा तो गुलाबी का शरीर निहाल हो गया लण्ड की मस्ती से ।

'' वाह ! वाह ! आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हक्या लण्ड है आपका ''।

'' धन्यबाद मेरे लण्ड को तारीफ के लिए । ''

''मेरी बुर तो आपको लण्ड की दिवानी हुई जा रही है । ''

''मेरा लण्ड भी आपके बुर का दिवाना होता जा रहा है। ऐसा बुर कभी-कभी ही चोदने को मिलता हैं । ''

''चोदिए, चोदिए, जमकर चोदते जाइए । मुश्किल से होती है ऐसी चुदाई '' औरत बोली ।

बिल्कुल मशीनी अंदाज में मुकेश चोदे जा रहा था औरत की बुर को, लेकिन थोड़ी देर के बाद ही मुकेश का लण्ड भी गरमा गरम वीर्य उगलने लगा बुर के अंदर । थोड़ी ही देर में मुकेश का लण्ड सारा वीर्य उगलकर शांत हो गया। बुर के अंदर ही ।। और मुकेश का शरीर भी सुस्त हो गया। उसकी सांस अभी भी तेज रफ्तार से ही चल रही थी । उसका लंड अभी भी बुर के अंदर ही था। मुकेश का शरीर भी सुस्त हो गया । उसको सांसे अभी भी तेज रफ्तार से हो चल रही। थी।

तभी राजु बोला '' हट मुकेश अब तू भी जा संजय के पास बैठ और मेरे लंड कोअब गुलाबी की बुर की शक्ति आजमाने दे ।''

धीरे-धीरे मुकेश उठा और संजय के बगल में जाकर बैठ गया । कपड़े से अपने लंड को उसने ढका और संजय के बगल में जाकर बैठ गया । कपड़े

से अपने लंड को उसने पोंछ लिया क्योंकि बहुत गंदा हो गया था उसका लंड ।

 


अब राजु अकेला था गुलाबी के लिए और गुलाबी भी अकेली थी राजु के लिए । राजु ने तपाक से गुलानी को अपनी बाहों में भर लिया। और उसके रसीले होठों को चूमने लगा।

होठों को चूमते-चुमते ही उसने अपने शरीर की बुर चोदने की पोजीशन में ले आया ।

''आपका लंड कितना ताकतवर है?''

'' यह तो अभी आपको पता चल जाएगा । ''

''अब हम दो ही हैं मैदान में । ''

''अच्छा है कि आखिरी बारी मेरी है।''

'' ऐसा क्यों ?''

'' इसलिए कि मेरा लंड ही आपके बुर की गरमी को शांत करेगा '' राजु बोला । -

'' हां यह बात तो सही है। ''

राजू ने बिना कोई निशाना बनाए बिना औरत की बुर को विचकाए और बुर के छेद को टटोले पुरी ताकत के साथ एक जोरदार आक्रमण किया अपने

मस्ताने लण्ड से । राजु का लण्ड बिना किसी हिचकिचाहट के गुलाबी की बुर की चीरता हुआ तपाक से अंदर पुरा का पुरा घुस गया ।

'' वाह ! आपका तो पहला शाट ही जोरदार है। मेरे राजा आझ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह''

'' अभी और शॉट देखिए ।'' यह कहकर राज ने गुलाबी की दोनों चुचियों को कसकर पकड़ा और दनादन शॉट लगाने लगा । एक चूची को उसने अपने मुंह में ले लिया और दुसरी के निप्पल को वह हाथ से मसलने लगा। -

गुलाबी ने भी राजु को अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसे चुमने लगी । चुमते हुए वह भी अपनी बुर को उछल-उछला कर राजु के लण्ड के जोरदार हमलों का जबाव देने लगी।

चूंकि अब कोई लण्ड बाकी नहीं था । यह आखिरी लण्ड था इस लिए गुलाबी ने अपनी बुर को भी पूरी रफ्तार में खुला छोड़ दिया चुदवाने के लिए ।

ताकि राजु के लण्ड के साथ ही उसकी बुर भी खलास ही जाए ।

'' मस्ताना लण्ड है न मेरा ?'' पूछा राजु ने -

''हां बहुत जानदार है। ''

''चूदायी अच्छी है न । ''

''लण्ड को थोडा बाहर निकाल निकाल कर पेलिए न । ''

यह सुनकर राजु अपने लण्ड को चूत से बाहर निकाल करीब पांच छह इंच बाहर ले जाता और तब फिर आक्रमण करता ।

'' हां यह चुदायी अच्छी है । ''

''ठीक है। ''

करीब 5 मिनट तक राजु के लंड और गुलाबी की बुर में धमासान लड़ाई चलती रही । और धीरे-धीरे लण्ड और बुर दोनों जोश और उतेजना की सीमा रेखा के पास पहुंचने लगे।

राजु ने गुलाबी के गाल में दांत से काट लिया । गुलाबी भी राज की गाल में दांत से काट ली । बहुत गर्मी में आ चुकी थी गुलाबी की बुर और राजु का लंड । दोनों की मस्ती में ये मस्त चुदाई चल रही थी । दोनों एक दूसरे से बुरी तरह लिपटे हुए थे । एक-दूसरे को अपनी बांहों में जकड़े हुए थे । |

;''ओह...आह...मजा....आ...रहा ...है पेलिए.....ओर पेलिए........लंड को....खूब.....पेलिए ....मस्ती.....में....है....मेरी....बु.र....। '' गुलाबी के मुँह से उत्तेजना से भरपूर आवाज़ें निकलने लगी । इसके साथ ही उसका बुर खलास होने लगा । और तभी राजु का लंड भी गरम गरम वीर्य उगलने लगा। दोनों एक ही साथ खलास हो गये। ।

कुछ देर तक राजु गुलाबी की देह पर ही पड़ा रहा। दोनों की.. सांसे धीरे-धीरे थम रही थी- फिर राजु भी गुलाबी की देह पर से उतर गया और अपने लण्ड को पोछने लगा ।

''अब बताइए कि कैसा रहा, यह कार्यक्रम ।'' गुलाबी पुछी सभी से ।

'' बहुत ही अच्छा, बहुत शानदार ? '' सभी ने एक साथ में कहा।

''क्या और बुर चोदने का इरादा है। आपलोगों का ?''

'' चोदेगें तो जरूर लेकिन शराब का एक दौर पहले चल जाये तो अच्छा है मुकेश ने कहा ।''

'' तो चला दीजिए ।''

मुकेश ने दुसरी बोतल निकाल ली और चौकी पर बैठकर सब लोग जाम से जाम टकराने लगे । किसी के शरीर पर कोई कपड़ा नही था । बिल्कुल मारदजात नंगे थे सब के सब । मश्ती से पैग पर पैग पीने लगे और बचा हुआ मुर्गा खाने लगे ।

 
धनतेरस की आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ
 
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करीब एक घंटा तक सबलोग जमकर शराब पीते रहे । शराब की लाली आंखों में उतरने लगी । नशे से मन झुमने लगा-इतने में अजय उठा और

गुलाबी को अपनी बाहों में भरकर उसे चूमने लगा। |

'' क्या आपका लण्ड कर तैयार हो गया मेरे बुर को चोदने के लिये '' गुलाबी पुछी-

'' हां बिल्कुल तैयार हो गया। ''

''तो ठीक है आ जाइये मेरी बुर के मैदान में ।''

संजय ने ग्लास और बोतल को हटाकर एक ओर रख दिया ताकि अजय को चोदने में कोई परेशानी न हो !

अजय ने औरत को चित लिटा दिया चौकी पर और उसके उपर बढ़ गया । चढ़ते ही उसने गुलाबी की चुचियों को पकड़ा और उसकी बुर में अपना

लण्ड पेल दिया ।

गुलाबी की बुर में लण्ड पेलने के साथ ही अजय दनादन दनादन बुर को चोदने लगा। उसके लण्ड ने तुरंत रफ्तार पकड़ ली । अन्य तीनों दोश्तों के

लण्ड में भी नया उत्साह आ गया । वे तीनों भी लपके गुलाबी के नंगे शरीर की ओर । ।

अजय तो गुलाबी को चोद ही रहा था । बाकी तीनों दोश्त भी गुलाबी की चुचियों को उसके गोरे गालों को नोचने खसोटने लगे । संजय ने गुलाबी के मुंह में अपना लंड डाल दिया । और इस तरह से चुदाई का दूसरा दौर प्रारम्भ हो गया। चार नग्न मर्द और एक अकेली नग्न औरत। चारों मर्द भी जोश में और औरत भी जोश में । जवानी का जोरदार खेल-

'' गजब क्षमता है आपकी बुर में भी ।''

'' अभी-अभी चार मर्दों से चुदवाने के तुरंत बाद चार मदों से चुदवाने को तैयार हो गया। संजय बोला-

'' यह पहाड़ी औरत की बुर है ।'' संजय के लण्ड को अपने मुंह से निकालकर औरत बोली । ।

'' अजय के बाद मैं चोदूंगा '' मुकेश बोला।

'' नहीं मैं चोदूंगा इसके बाद'' संजय बोला ।

''आपलोग चोदने के लिए विवाद क्यों करते हैं । पहली बार जिस क्रम में आपलोगों ने चुदायी की थी उसी क्रम में इस बार भी चोदिए ।'' औरत बोली

'' हां यही ठीक रहेगा '' संजय बोला -

यह सुनकर मुकेश और राजू भी चुप हो गये क्योंकि यही क्रम उन्हें ठीक लगा । गुलाबी का बुर इतना गीला था कि पूछिये मत ! हल्के धक्के में ही पूरा

का पुरा लण्ड उस की बुर के भीतर चला जाता था, इसलिए अजय बड़े आराम से गुलाबी की बुर को चोद रहा था।

चोदते चोदते अजय ने एक बार गुलाबी की चुची में दांत काट लिया ।

'' इसस्स्सस्स आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...औरत के मुंह से निकला ।

 


धीरे-धीरे अजय का लण्ड पुरे जोश में आ गया और दनादन गुलाबी की बुर पर आक्रमण करने लगा । फॅक फॅक फ़च फ़च की आवाज के साथ

अजय का लण्ड गुलाबी की बुर को चीरता हुआ घूसने लगा और निकलने लगा।

चोदते, - चोदते इतना जोश आ गया कि अजय को कि पूछिये मत ! वह अपना चूतड़ उछाल-उछाल कर गुलाबी की बुर पर आक्रमण करने लगा ।

'' बहुत मस्ती छा रही है लण्ड पे '' गुलाबी ने पूछी?

''हां बहुत ।। | ''

'' तो ठीक है चोदते चले जाइये ।''

अजय ने चोदने की रफ्तार बढ़ा दी और उसके लण्ड का जोश बढ़ता जा रहा था। उसने कसकर पकड़ लिया । औरत को और शानदार ढंग से चोदने

लगा। दोनों की झांटें आपस में टकरा जाती थी । जब लण्ड बुर में पुरा का पुरा घुस चुका होता था । झाट न होती तो हड्डियां टकराती आपस में ।।

| लेकिन थोड़ी देर के बाद ही लण्ड गरमा-गरम वीर्य उगलने लगा गुलाबी की बुर में । और गुलाबी की बुर ने वीर्य को पीना शुरू कर दिया । वीर्य को

उगलते ही अजय का लौड़ा ठण्डा पड़ गया। और अजय भी सुस्त पड़ गया ।

''हट ना यार अब काहे को गुलाबी पर पड़ा है। तुम्हारे लौड़ा ने तो जवाब दे दिया। अब हमें चोदने दो ।'' संजय ने अजय को हिलाते हुए कहा।

यह सुनकर अजय धीरे से उठा और नीचे बैठकर अपने लण्ड को कपड़े से पोछने लगा। संजय लपका गुलाबी की बुर की ओर ।। पास जाकर उसने

तुरंत खुद को चोदने की पोजिशन में किया और गुलाबी की कमर को पकड़कर अपना लौड़ा पेलने लगा दे दनादन दे दनादन और गुलाबी की बुर में कुछ ही मिन्टों में मुकेश का लौड़ा भी गरम-गरम वीर्य उगलने लगा गुलाबी की बुर के अंदर और बुर पी गया मुकेश के लौड़ा के वीर्य को भी । इसके साथ ही मुकेश का लौड़ा भी खामोश हो गया और वह धीरे से उतर कर नीचे संजय की बगल में बैठ गया और अपने लौड़ा को पोछने लगा। । अब आखिरी बारी आयी राज की । मुकेश के हटते ही राजु ने गुलाबी को अपनी बाहों में जकड़ लिया और सीधे उसकी बुर में अपना लौड़ा पेल दिया । गुलाबी की बुर भी दुबारा बहुत गरम हो चुकी थी, इसलिए उसने भी राजु को अपना बाहों में जकड़ लिया।

गुलाबी के रसीले होठ चुसते हुए राजु बड़े प्रेम से उसकी गीले बुर को पेलने लगा। गुलाबी भी राजु के होठों को चूसने लगी तथा बुर को उचका-उचका

कर राजु के लौड़ा से चुदवाने लगी । । धीरे-धीरे राजु के लौड़ा की रफ्तार बढ़ने लगी तो औरत की बुर की रफ्तार भी बढ़ने लगी । किसी प्रकार की कोई हड़बड़ी नहीं थी रफ्तार बुर और लैडा की अपने आप बढ़ती जा रही थी। - थोड़ी देर में राजु के लौड़ा की रफ्तार बढ़ गयी तो औरत ने भी अपनी

बुर की रफ्तार बढ़ा ली। गुलाबी की चुचियों को भी राजु खूब जोर-जोर से मसले जा रहा था, जो बुर की रफ्तार को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा था

'' दुबारा मस्ती आ रही है या नहीं ?''

'' बिना मस्ती के लौड़ा कभी भी बुर को चोदता ही नहीं है । '' बोला राजू-

'' जमकर चोदिए । हल्का चुदायी पसंद नहीं हैं ?''

'' नहीं बिल्कुल नहीं । ''

'' ठीक है अभी देखिए ''

इससे राजू ने दुबारा ताकत लगा दी अपने लौड़ा के पीछे ताकि गुलाबी की बुर को भरपुर सन्तुष्ट मिले ! बड़ी तेजी से उसका लंड बुर में घुसने और

निकलने लगा । मस्ती की सीमा रेखा करीब आने लगी बुर और लौड़ा दोनों की ।।

करीब पांच मिनट तक यह जोरदार चुदाई चलती रही। उसके बाद बुर और लौड़ा दोनों ने एक ही साथ आत्म समर्पण कर दिया। राजू के लौड़ा से

गरमा-गरम वीर्य निकलने लगा और गुलाबी का बुर भी खलासे होने लगा।

खलास हो जाने के बाद कुछ देर तक राज औरत के शरीर पर यूं ही पड़ा रहा और उठकर नीचे उतर गया और अपने लण्ड को पोंछने लगा

'' और एक दौर चलेगा चुदाई का या अब सोया जाये'' औरत पूछी।

'' अब सोया जाये ।'' सबों ने एक साथ उतर दिया क्योंकि सब थक गये थे। उसके बाद सब लोग सो गये चौकी पर तथा औरत चली गयी दुसरी झोपड़ी में । ।

सुबह पेट्रोल मंगवा लिया गया । नास्ता करने के बाद चारों दोस्त चलने लगे तो उनलोगों ने गुलाबी का शुक्रिया अदा किया और उसे बेहतर मेहमानवाजी के लिए पांच सौ रुपये देने चाहे लेकिन औरत ने लेने से बिल्कुल इंकार कर दिया और बोली-मेहमानों से कभी पैसे नहीं लिए जाते हैं । |

बहुत जिद करने के बाद भी गुलाबी नहीं मानी और इतना आग्रह की कि. जब भी इधर से गुजरियेगा तो एक बार जरूर मिल लीजिएगा । अंत मे मारूती कर चल पड़ी चारों दोस्तों को लेकर ।

दोस्तो ये कहानी यहीं समाप्त होती है फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ , आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त,

 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 
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