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जुड़वाँ बहनों की चुदाई compleet

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जुड़वाँ बहनों की चुदाई

लेखक: पार्तो सेनगुप्ता

मेरा नाम हेमा है। मेरी एक जुड़वा बहन सीमा है। मैं बहुत ही सैक्सी हूँ लेकिन वो सैक्स में ज्यादा रुचि नहीं लेती। हम दोनों दिखने में एक जैसी हैं। कोई भी हम दोनों को देख कर नहीं बता सकता कि कौन सीमा है और कौन हेमा। हम दोनों की आवाज़, बोलने की स्टाइल, सारा बदन, सब एक जैसा है। हम दोनों की शादी पाँच महीने पहले ही हो चुकी है। हम दोनों की कोई भी बात एक दूसरे से छिपी नहीं है। मेरे पति का नाम धरम है और सीमा के पति का नाम राज है।

मेरे पति धरम और सीमा के पति राज, दोनों ही बहुत ज्यादा सैक्सी हैं। दोनों में फर्क केवल लंड के साइज़ का है। धरम का लंड आठ इंच लंबा और बहुत मोटा है लेकिन राज का लंड पाँच इंच ही लंबा है। धरम मेरी खूब चुदाई करते हैं। संडे को तो वो मुझे पूरे दिन में कई बार चोदते है। राज भी सीमा को खूब चोदते हैं लेकिन सीमा को सैक्स करना ज्यादा पसंद नहीं है। राज भी संडे को धरम कि तरह ही सीमा कि खूब चुदाई करते है लेकिन सीमा चुदवाते समय चुपचाप पड़ी रहती है।

एक बार मैं सात दिन के लिये सीमा के घर गयी। मैं अपना कोई भी सामन नहीं ले गयी थी, इसलिये मैं सीमा के ही कपड़े पहनती थी। राज जीजू भी मुझे नहीं पहचान पाते थे। कभी-कभी वो मुझे सीमा समझ कर मुझे पकड़ लेते थे। मेरे मन में एक दिन शरारत सूझी। मैं बहुत ही सैक्सी हूँ इसलिये मैंने सोचा एक दिन राज जीजू से चुदवा कर मज़ा लेना चाहिये। संडे का दिन था। राज अभी सो रहे थे और सीमा को अपनी एक फ्रैंड के घर जाना था। सीमा ने मुझसे कहा, “राज को जगा देना और नाश्ता करा देना। मैं दो-तीन बजे तक वापस आ जाऊँगी। कोई शरारत मत करना।”

मैंने कहा, “ठीक है।”

इतना कहने के बाद सीमा अपनी फ्रैंड के घर चली गयी। सीमा के जाने के बाद मैं नहाने चली गयी। नहाने के बाद मैंने अपने बदन पर एक टॉवल लपेट लिया और और ऊँची हील वाली चप्पल पहन कर राज जीजू को जगाने के लिये उनके रूम में पहुँच गयी। मैंने जीजू को जगाया तो वो उठ गये। उन्होंने मुझे सीमा समझ कर पूछा, “हेमा सो रही है क्या?”

मैं मन ही मन खुश हो गयी और कहा, “वो अपनी एक फ्रैंड के पास गयी है। दो-तीन बजे तक वापस आ जायेगी।”

इतना सुनते ही उन्होंने मुझे बेड पर खींच लिया और मुझे चूमने लगे। मैं भी राज को चूमने लगी। थोड़ी देर बाद वो बोले, “हेमा बहुत ही सैक्सी है और तुम हो कि तुम्हें सैक्स में मज़ा ही नहीं आता।”

मैं चुप रही। उन्होंने मेरे बदन पर लिपटा टॉवल खींच लिया तो मैं एक दम नंगी हो गयी। राज ने भी कपड़े उतारने शुरु कर दिये। अब हम दोनों एक दम नंगे हो चुके थे।

राज ने मुझे पलंग पर लिटा दिया और मेरे ऊपर सिक्स्टी-नाईन की पोज़िशन में हो गये। उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरु कर दिया और मुझसे अपना लंड चूसने को कहा। मैंने जीजू का लंड मुँह में ले लिया और बड़े प्यार से चूसने लगी। आज पहली बार कोई दूसरा मेरी चूत को चाट रहा था। मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। थोड़ी ही देर बाद जीजू का लंड खड़ा हो गया। मैंने उनका लंड अपने मुँह के अंदर बाहर करना शुरु कर दिया तो जीजू बोले, “सीमा, लगाता है कि आज तुम मूड में हो।”

मैंने कहा, “हाँ राज, आज मैं चूत चुदवाने के मूड में हूँ। हेमा सुबह मुझे धरम और अपना किस्सा बता रही थी इसलिये मुझे भी आज थोड़ा जोश आ गया। आज मेरा मन भी कई बार चुदवाने का हो रहा है।”

राज बोले, “तब तो आज खूब मज़ा आयेगा।”

राज अभी भी मेरी चूत चाट रहे थे और मैं बहुत ज्यादा जोश में आ चुकी थी। थोड़ी ही देर में मैं झड़ गयी तो राज ने कहा, “आज तो तुम्हारी चूत ने पानी भी छोड़ दिया।”

मैंने कहा, “हाँ, आज मैं भी जोश में हूँ।”

उसके बाद राज मेरे ऊपर से हट कर मेरी टाँगों के बीच आ गये। उन्होंने मेरी टाँगों को उठा कर मेरे पैरों को अपने कंधे पर रख लिया। मेरे पैरों में अभी भी हील वाली चप्पल मौजूद थी। फिर उन्होंने मेरी चूत की लिप्स को फैला कर अपने लंड का टोपा बीच में रख दिया। मेरी चूत पर आज पहली बार किसी दूसरे आदमी ने अपना लंड रखा था इसलिये मैं जोश के मारे एक दम पागल सी होने लगी। मेरे सारे बदन में सनसनी सी दौड़ गयी। तभी राज ने एक धक्का मारा तो उनका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। वो बोले, “क्या बात है। आज तुम्हारी चूत एक दम ढीली लग रही है। मेरा पूरा का पूरा लंड बिना किसी रुकावट के अंदर चला गया।”

मैं तो धरम के आठ इंच लंबे लंड से चुदवाने की आदी थी और राज का लंड केवल पाँच इंच का था। मैंने कहा, “आज मैं ज्यादा जोश में हूँ और एक बार झड़ भी चुकी हूँ इसलिये तुम्हें मेरी चूत धीली लग रही होगी।”

राज कुछ नहीं बोले और उन्होंने मुझे तेजी के साथ चोदना शुरु कर दिया। वो एक दम धरम कि तरह मेरी चुदाई कर रहे थे। अंतर केवल इतना था कि राज का लंड धरम के लंड से छोटा था। मैं बहुत ज्यादा जोश में थी इसलिये पाँच मिनट में ही झड़ गयी। मेरी चूत से पानी निकलता देखकर राज बहुत ज्यादा जोश में आ गये और उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो मुझे एक दम आँधी कि तरह चोदने लगे। पूरा बेड हिलने लगा और रूम में फच-फच की आवाज़ होने लगी। लगभग पंद्रह मिनट बाद राज के लंड ने पानी छोड़ दिया और मेरी चूत भरने लगी। राज के साथ ही साथ मैं भी फिर से झड़ गयी। पूरी तरह से झड़ जाने के बाद राज ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और हट गये। मैंने राज को अपनी तरफ़ खींच लिया और उनका लंड चाटने लगी। वो बहुत खुश हो गये और बोले, “तुम तो मेरा लंड झड़ने के बाद अपने मुँह में नहीं लेती थी लेकिन आज तो तुम मेरा लंड भी चाट रही हो। आज तो चुदाई में मज़ा आ गया।”

उसके बाद मैं राज के साथ फिर से बाथरूम में नहाने चली गयी। हम दोनों ने एक दूसरे के बदन पर खूब साबून लगाया और नहाने लगे। हम दोनों बाथरूम से नहा कर नंगे ही बाहर आ गये। मैंने कहा, “मैं नाश्ता बनाने जाती हूँ।”

मैं कपड़े पहनने लगी तो राज बोले, “घर में तो कोई भी नहीं है। आज तुम ऐसे ही नाश्ता बना लो।”

मैं सिर्फ ऊँची हील वाली चप्पल पहने एक दम नंगी ही नाश्ता बनाने चली गयी। थोड़ी देर बाद मैं नाश्ता लेकर आयी तो मैंने देखा कि राज भी एक दम नंगे ही सोफ़े पर बैठ कर नाश्ते का इंतज़ार कर रहे थे। हम दोनों नाश्ता करने लगे। नाश्ता करने के बाद राज ने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया और मुझे सोफ़े पर लिटा दिया। उन्होंने प्लेट से ढेर सारा बटर उठाया और मेरी चूत में भरने लगे। धरम ने मेरे साथ आज तक ऐसा कभी नहीं किया था इसलिये मुझे मज़ा आ रहा था।

मैं जोश में आने लगी। उन्होंने ढेर सारा बटर मेरी चूत में भर दिया और फिर मेरी चूत से बटर चाटने लगे। मैं एक दम पागल सी होने लगी। फिर उन्होंने दो ब्रैड लिये और मेरी चूत में अँगुली डाल डाल कर बटर निकालने लगे। उन्होंने वो बटर ब्रैड पर लगाना शुरु कर दिया। उसके बाद राज ने एक ब्रैड मुझे दिया और दूसरा खुद खाने लगे और बोले, “बहुत ही स्वाद है इस ब्रैड में।”

मैं भी मुस्कुराते हुए ब्रैड खाने लगी। ब्रैड खाने के बाद उन्होंने मुझे ज़मीन पर डॉगी स्टाइल में कर दिया और अपना लंड एक ही झटके से मेरी चूत में डाल दिया। बटर लगा होने की वजह से उनका लंड मेरी चूत में एक दम जड़ तक घुस गया। उसके बाद राज ने मेरी चुदाई शुरु कर दी। बटर लगा होने कि वजह से उनका लंड स्लिप करते हुए मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था और मुझे कुछ भी पता नहीं चल रहा था। मुझे बहुत कम मज़ा आ रहा था। वो मुझे लगभग तीस मिनट तक चोदने के बाद बोले, “तुम जानती हो कि मैंने तुम्हारी चूत में बटर क्यों लगाया?”

मैंने कहा, “नहीं।”

राज बोले, “मैं इस बार बहुत देर तक चोदना चाहता था। इस बटर की वजह से मेरा लंड तुम्हारी चूत में स्लिप करते हुए अंदर बाहर हो रहा है। इस वजह से हम दोनों जल्दी नहीं झड़ पायेंगे।”
 


अब जाकर मैं समझ पायी कि राज ने मेरी चूत में बटर क्यों लगाया। वो मेरी चुदाई बहुत ही तेजी के साथ कर रहे थे। लगभग बीस मिनट तक और चोदने के बाद राज ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और बोले, “अब मैं थक गया हूँ। लाओ तुम्हारी चूत को साफ कर दूँ।”

उसके बाद उन्होंने टॉवल से मेरी चूत को एक दम साफ कर दिया और फिर अपना लंड साफ़ करने लगे। उसके बाद उन्होंने फिर से मेरी चूत में एक झटके से अपना लंड घुसा दिया। चूत ड्राई हो जाने की वजह से इस बार मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मेरे मुँह से एक सिसकरी सी निकल पड़ी। उसके बाद उन्होंने तेजी के साथ मेरी चुदाई शुरु कर दी। दस मिनट चुदवाने के बाद मैं झड़ गयी लेकिन वो रुके नहीं। मुझे चोदते रहे। लगभग बीस मिनट तक और चोदने के बाद राज भी झड़ गये। उनके साथ ही साथ मैं भी फिर से एक बार झड़ गयी। उसके बाद उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और बोले, “चाटोगी या मैं टॉवल से साफ़ कर दूँ।”

मैंने कहा, “नहीं, अपना लंड इधर करो। मैं इसे चाट-चाट कर साफ़ करूँगी।”

उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह के पास कर दिया और मैं उनका लंड चाट चाट कर साफ़ करने लगी। अब तक दोपहर के ग्यारह बज चुके थे। दो-तीन बजे सीमा आने वाली थी। मैंने सोचा अब राज को मालूम हो जाना चाहिये कि वो सीमा को नहीं अपनी साली हेमा को चोद रहे थे। मैं एक दम नंगी ही खाना बनाने चली गयी। खाना बनाने के बाद हम दोनों ने खाना खाया। फिर आराम करने लगे। जब दोपहर के एक बज गये तो मैंने राज से कहा, “राज, अब एक बार मैं तुम्हें चोदना चाहती हूँ।”

वो बोले, “इसमें पूछने की कौन सी बात है। आज ही तो तुम्हें चोदने में मज़ा मिला है।”

मैंने राज का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। जब उनका लंड खड़ा हो गया तो मैं उनके ऊपर आ गयी। मैंने उनका लंड अपनी चूत में डाल लिया और धक्के लगाने लगी। पाँच मिनट बाद मेरी चूत से पानी निकलने लगा लेकिन मैंने धक्का लगाना ज़ारी रखा। लगभग पंद्रह मिनट बाद जब राज का बदन अकड़ने लगा तो मैं समझ गयी कि अब वो झड़ने वाले हैं। मैं भी दूसरी बार अब झड़ने ही वाली थी। मैंने सोचा अब यही मौका है कि राज को मालूम हो जाना चाहिये कि मैं सीमा नहीं हेमा हूँ। मैंने और तेज धक्के लगाने शुरु कर दिये और जोश में आ कर कहने लगी, “ओह जीजू, आज मज़ा आ गया आप से चुदवा कर।”

वो बोले, “तुम पागल तो नहीं हो गयी हो। मुझे जीजू कह रही हो?”

मैंने धक्के लगाते हुए ही कहा, “जीजू, मैं सीमा नहीं हेमा हूँ। सीमा तो अपनी फ्रैंड के पास गयी है। आप जानते हैं कि मैं बहुत सैक्सी भी हूँ। मैं आप से चुदवाना चाहती थी इसलिये झूठ बोल दिया था।”

वो मुझे अपने ऊपर से हटाना चाहते थे कि तभी उनके लंड से पानी निकलना शुरु हो गया। वो चाह कर भी ना तो मुझे अपने ऊपर से हटा पाये और ना ही अपने लंड का पानी रोक पाये। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली। उनके साथ ही साथ मेरी चूत से भी पानी निकलने लगा। जब हम दोनों पूरी तरह झड़ गये तो मैं राज के ऊपर से हट गयी और उनके बगल में लेट गयी। थोड़ी देर बाद राज ने अपनी आँखें खोली और बोले, “मैं सुबह से ही सोच रहा था कि आज सीमा को क्या हो गया है। वो मुझसे खूब चुदवा रही है। मैं नहीं जानता था कि मैं सीमा को नहीं हेमा को चोद रहा हूँ। तुम बड़ी शैतान हो। खैर अब जाने दो। जो हुआ सो हुआ। अगर सीमा को पता चल गया तो क्या होगा।”

मैंने कहा, “कुछ भी नहीं होगा। वो जानती है कि मैं बहुत ही नटखट और सैक्सी हूँ और कुछ भी कर सकती हूँ। मैं सीमा को भी सैक्सी बना सकती हूँ। अगर आपको कोई ऐतराज़ ना हो तो आप सीमा को दस दिन के लिये मेरे साथ भेज दो। मैं उसे दस दिनों में ही बहुत ज्यादा सैक्सी बना दुँगी। लेकिन आपको एक बात बर्दाश्त करनी पड़ेगी।”

राज ने पूछा, “वो क्या?”

मैंने कहा, “सीमा को सैक्सी बनाने के लिये मुझे शायद उसकी चुदाई धरम से करवानी पड़े।”

राज ने कहा, “मुझे मंज़ूर है। लेकिन धरम से चुदवा कर वो सैक्सी कैसे बन जायेगी। आखिर मैं भी तो उसे खूब चोदता हूँ।”

मैंने कहा, “मैं सीमा से पूरी तरह वकिफ़ हूँ। मैं ये अच्छी तरह जानती हूँ कि उसे कैसे सैक्सी बनाया जा सकता है।”

राज ने कहा, “मुझे तो सैक्सी बीवी ही चाहिये जो मुझसे खूब चुदवाये। तुम सीमा को अपने साथ ले जाना।”

मैंने कहा, “ठीक है, मैं उसे अपने साथ ले जाऊँगी लेकिन आप सीमा से कुछ मत बताना। नहीं तो वो कभी भी मेरे साथ जाने के लिये तैयार नहीं होगी।”

राज ने कहा, “ठीक है।”

तभी कॉलबेल बजी। मैं अपने रूम में चली गयी और रूम का डोर अंदर से लॉक कर लिया। राज ने एक टॉवल लपेट लिया और डोर खोला। सीमा ने राज से पूछा, “हेमा कहाँ है।”

राज ने कहा, “वो सो रही है।”

सात दिनों में मैंने मौका पा कर राज से कई बार चुदवाया और जब वापस अपने घर आने लगी तो राज ने सीमा से कहा, “तुम बहुत दिनों से बाहर नहीं गयी। तुम भी दस दिनों के लिये हेमा के साथ चली जाओ। तुम्हारा मन बहल जायेगा।”

सीमा बहुत खुश हो गयी। मैं सीमा के साथ अपने घर आ गयी। मैं अपने घर पहुँची तो सीमा बाथरूम चली गयी। मौका पाकर मैंने धरम को सारी बात बता दी। मैंने ये भी बता दिया कि मैंने राज से चुदवाया है। धरम पहले तो नाराज़ हुए फिर मान गये। मैंने धरम को ये भी बता दिया कि मैं सीमा को उनसे चुदवा कर सैक्सी बनाना चाहती हूँ और इसी लिये सीमा को साथ लायी हूँ। मैंने धरम से ये भी वादा ले लिया कि वो सीमा को तब तक नहीं चोदेंगे जब तक वो उनसे चुदवाने के लिये तड़पने ना लगे।

धरम ने कहा, “ठीक है। जैसा तुम कहोगी मैं वैसा ही करुँगा।”

हमारा घर केवल एक ही रूम का था। रात में जब सोने का वक्त आया तो सीमा ने कहा, “मैं तो भूल गयी थी कि तुम्हारा घर केवल एक ही रूम का है। अगर मुझे याद होता तो मैं यहाँ कभी नहीं आती। तुम बहुत सैक्सी हो। मेरे यहाँ रहने पर तुम दोनों को बड़ी दिक्कत होगी। तुम जीजू से कैसे चुदवाओगी।”

मैंने कहा, “तू तो जानती है कि मुझे बिना चुदवाये नींद नहीं आती। जब धरम मुझे चोदेंगे तो तुम अपना सिर दूसरी तरफ़ कर लेना।”

सीमा बोली, “मुझे शरम आयेगी।”

मैंने कहा, “इसमें शरम की कौन सी बात है। आखिर वो भी तो तुम्हारे जीजू हैं।”

 
रूम में एक ही बेड भी था। सोने का वक्त हो चुका था। सीमा ये भी जानती थी कि हम दोनों नंगे ही सोते हैं। मैंने अपने कपड़े उतारने शुरु कर दिये तो वो बोली, “तुझे शरम नहीं आती। कम से कम मैं जब तक यहाँ पर हूँ तब तक तो कपड़े पहन कर सो जाओ।”

मैंने कहा, “तुम्हारे सामने कैसी शरम। तू तो मेरी जुड़वा बहन है और मेरी दोस्त भी। तुझसे मेरी कोई बात छुपी भी नहीं है। अभी तो धरम भी अपने सारे कपड़े उतार कर एक दम नंगा हो जायेगा, तब क्या करेगी।”

वो बोली, “तुम दोनों बड़े बेशरम हो।”

उसके बाद वो चुप हो गयी। जब धरम भी अपने कपड़े उतारने लगा तो सीमा ने अपना मुँह दूसरी तरफ़ कर लिया।

धरम बोला, “साली जी, क्या मैं इतना बदसूरत हूँ कि आपने अपना मुँह फेर लिया।”

सीमा ने बड़े प्यार से कहा, “नहीं जीजू, ऐसी बात नहीं है। आप नंगे हो रहे हैं, इसलिये मुझे शरम आ रही है।”

कपड़े उतारने के बाद धरम ने मुझसे कहा, “सीमा से कहो कि वो भी अपने कपड़े उतार दे। तब ही साथ साथ सोने में मज़ा आयेगा। मैं उसके साथ कुछ नहीं करुँगा, आखिर वो मेरी साली है।”

मैंने सीमा से कहा, “सुना तूने, तेरे जीजू क्या कह रहे हैं। तू भी अपने कपड़े उतार दे।”

सीमा बोली, “मैं जीजू के सामने अपने कपड़े नहीं उतारुँगी। मुझे शरम आयेगी।”

मैंने कहा, “कैसी शरम, सीमा। आखिर हम दोनों भी तो तेरे सामने एक दम नंगे हैं।”

सीमा बोली, “तुम दोनों बड़े बेशरम हो। तुम दोनों को शरम नहीं आती। मुझे तो आती है।”

मैंने आगे बढ़ कर सीमा की साड़ी खींच कर निकाल दी। उसके बाद मैंने बटन खोल कर उसका ब्लाऊज़ भी उतार दिया। फिर मैंने उसका पेटीकोट भी उतार दिया। अब सीमा केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैंने जब उसकी ब्रा और पैंटी भी उतारनी चाही तो वो बोली, “बस, अब रहने दे। मैं एक दम नंगी नहीं हो सकती।”

धरम ने सीमा को देखते हुए कहा, “तुम दोनों तो एक दूसरे की कॉपी हो। तुम दोनों को देख कर ये बता पाना मुश्किल है कि कौन सीमा है और कौन हेमा।”

उसके बाद धरम बेड पर लेट गये। उनके बगल में मैं लेट गयी और उसके बाद सीमा। मैंने धरम का लंड सहलाना शुरु कर दिया। जब उनका लंड खड़ा हो गया तो मैं बेड पर डॉगी स्टाइल में हो गयी।

धरम ने मेरे पीछे आकर अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मुझे चोदने लगे। सीमा ने अपना सिर दूसरी तरफ़ कर रखा था। थोड़ी देर बाद जब धरम जोश में आ गये तो मुझे बहुत ही तेजी के साथ चोदने लगे। वो जोर जोर से धक्के लगा रहे थे। मैंने जान बूझ कर ऊऊहहह... आहहह... करना शुरु कर दिया जिससे सीमा को थोड़ा जोश आ जाये लेकिन वो तो अपना सिर दूसरी तरफ़ किये हुए चुपचाप पड़ी थी। धरम सीमा कि तरफ़ देखते हुए मुझे खूब जोर-जोर से चोद रहे थे। पूरा बेड हिल रहा था। मैंने सीमा को चिढ़ाने के लिये उसे कई बार पुकारा लेकिन वो नहीं बोली। फिर मैंने अँगुली से उसको कुरेदा तो वो बोली, “बेशरम, चुपचाप तू अपना काम कर। मुझे क्यों परेशान कर रही है। मुझे सोने दे।”

मैंने कहा, “तू कुछ ना कर। अपना सिर तो मेरी तरफ़ कर सकती है। देख मुझे धरम कैसे चोद रहा है।”

वो कुछ नहीं बोली तो मैंने फिर से उसे कुरेदा। उसने इस बार मेरा हाथ झटक दिया।

मैंने कहा, “सीमा, काहे को शर्मा रही है। हम दोनों की कोई बात एक दूसरे से छुपी नहीं है। मैंने तुझे ये भी बताया है कि धरम मुझे कैसे चोदता है। फिर कैसी शरम।”

मैंने उसे दो-तीन बार और कुरेदा तो वो नाराज़ हो कर बोली, “तू नहीं मानेगी, ले मैं अपना सिर तेरी तरफ़ कर लेती हूँ। अब खुश है।”

उसने अपना सिर मेरी तरफ़ कर लिया लेकिन उसने अपनी आँखें बंद कर ली।

धरम ने कहा, “साली जी, अपनी आँखें तो खोलिये। आप तो बस केवल ये देखिये कि मैं हेमा को कैसे चोद रहा हूँ। मैं आपके साथ थोड़े ही कुछ करुँगा। “

वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कहा, “मेरी ना सही, तू अपने जीजू कि बात तो मान जा।”

 


मैंने उसे फिर से कुरेदा तो उसने अपनी आँखें खोल दी। वो शरमायी आँखों से मुझे चुदवाते हुए देखने लगी। थोड़ी ही देर में उसकी आँखें जोश से भर कर एक दम गुलाबी हो गयी। अब तक धरम को मुझे चोदते हुए बीस-पच्चीस मिनट हो चुके थे। उनके लंड ने मेरी चूत को भरना शुरु कर दिया और साथ ही साथ मैं भी झड़ गयी।

धरम ने पूरा पानी निकल जाने के बाद अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरे मुँह के पास कर दिया। मैंने बड़े प्यार से उनका लंड चाटना शुरु कर दिया। सीमा धरम के लंड को बड़े ध्यान से देख रही थी। उसने अपनी जाँघें एक दूसरे पर कस रखी थी और कसमसा रही थी। जब मैंने धरम का लंड चाट-चाट कर साफ़ कर दिया तो फिर धरम ने मेरी चूत को चाटना शुरु कर दिया। मैंने देखा कि सीमा कि निगाहें अभी भी धरम के लंड पर थी।

वो कुछ नहीं बोली। उसके बाद हम सोने लगे। दूसरे दिन रात में जब हम सोने के लिये बेड पर जाने लगे तो मैंने और धरम ने अपने कपड़े उतार दिये। सीमा ने भी बिना कुछ कहे अपने कपड़े उतार दिये लेकिन उसने आज भी अपनी ब्रा और पैंटी नहीं उतारी। लेकिन जब मैंने उसकी ब्रा और पैंटी उतारने की कोशिश कि तो उसने मुझे रोका नहीं। मैंने उसकी ब्रा और पैंटी उतार दी। अब सीमा भी एक दम नंगी हो गयी। उसके बाद हम सब बेड पर आ गये।

धरम ने सीमा से कहा, “साली जी, अगर आपको कोई ऐतराज़ ना हो तो मैं हेमा की चुदाई शुरु कर दूँ।”

वो शरमाते हुए बोली, “जीजू, मैं कैसे मना कर सकती हूँ। आखिर ये आप कि बीवी है।”

धरम ने अपना लंड मेरे मुँह के पास कर दिया। मैंने धरम का लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। आज सीमा ने अपना सिर दूसरी तरफ़ नहीं किया। वो मुझे धरम का लंड चूसते हुए बड़े ध्यान से देख रही थी। मैं समझ गयी कि अब उसे मज़ा आने लगा है।

जब धरम का लंड खड़ा हो गया तो मैं लेट गयी। धरम ने अपना लंड मेरी चूत के बीच रखा और एक ही झटके में अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। उसके बाद उन्होंने मेरे बूब्स को पकड़ कर मसलना शुरु कर दिया और जोर जोर से धक्के लगाते हुए मुझे चोदने लगे। सीमा बड़े ध्यान से धरम का लंड मेरी चूत के अंदर बाहर आता जाता देख रही थी।

धरम ने सीमा से कहा, “साली जी, कैसा लग रहा है। मैं ठीक से चोद रहा हूँ ना हेमा को?”

वो बोली, “आप बड़े बेशरम हैं।”

सीमा को भी जोश आने लगा था और वो अपनी जाँघों को एक दूसरे पर रगड़ रही थी। धरम ने मेरी चुदाई जारी रखते हुए सीमा से कहा, “साली जी, आप के बूब्स बहुत ही अच्छे लग रहे हैं। मैं हाथ लगा कर देख लूँ?”

वो कुछ नहीं बोली। मैं समझ गयी कि सीमा जोश में है। धरम ने अपना हाथ सीमा के बूब्स पर रख दिया। सीमा के मुँह से एक सिसकरी निकली। उसने धरम को मना नहीं किया और ना ही उसका हाथ हटाने की कोशिश की। धरम की हिम्मत बढ़ गयी और उन्होंने सीमा के बूब्स को मसलना शुरु कर दिया। वो सीमा के बूब्स को मसलते हुए मुझे चोद रहे थे। बीस-पच्चीस मिनट तक चोदने के बाद धरम झड़ गये। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और सीमा की तरफ़ कर दिया।

मैंने सीमा से कहा, “मैंने तुझसे कहा था ना कि धरम का लंड आठ इंच का है और तू नहीं मानती थी। तूने धरम का लंड अपनी आँखों से देख लिया। अब तो तुझे विश्वास हो गया ना। कैसा लगा धरम का लंड।”

सीमा ने शरमाते हुए कहा, “बहुत ही अच्छा है। लेकिन तू इतना बड़ा लंड कैसे पूरा अंदर ले लेती है। तुझे ज़रा भी तकलीफ नहीं होती?”

मैंने कहा, “शुरु-शुरु में कुछ दिन हुई थी। लेकिन अब ये मेरी चूत में आराम से घुस जाता है और मुझे खूब मज़ा आता है।”

तभी धरम बोले, “साली जी, ध्यान से देख लो मेरा लंड। इतना लंबा और मोटा लंड तुम्हारी बहन पूरा का पूरा अपनी चूत के अंदर ले लेती है।”

वो बोली, “क्या जीजू, आप को शरम नहीं आती कि आप अपना लंड मुझे दिखा रहे हो।”

धरम बोले, “मैं तो केवल दिखा रहा हूँ, कुछ कर थोड़े ही रहा हूँ। अगर तुम कहोगी तो मैं जरूर इसका मज़ा तुम्हें भी दे सकता हूँ।”

सीमा शरमाते हुए बोली, “धत्त!”

धरम का लंड अभी भी सीमा के मुँह के पास था और सीमा चुपचाप धरम के लंड को देख रही थी। उसकी आँखों में भी मस्ती दिख रही थी। थोड़ी देर बाद उसने अपनी आँखें बंद कर ली तो धरम ने अपना लंड हटा लिया। मैंने धरम का लंड चाट-चाट कर साफ़ किया और धरम ने मेरी चूत को चाट- चाट कर साफ़ किया। उसके बाद हम सो गये। तीसरे दिन संडे था। सुबह के आठ बजे हम सब उठ गये।

धरम ने सीमा से कहा, “हेमा ने तो तुम्हें बताया होगा कि संडे को क्या होता है।”

सीमा ने शरमाते हुए कहा, “मुझे सब मालूम है। आपको कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है।”

हम सब अभी भी एक दम नंगे ही थे। अब सीमा ज्यादा नहीं शरमाती थी। धरम मेरे ऊपर सिक्स्टी नाईन की पोज़िशन में हो गये। उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरु कर दिया और मैंने धरम का लंड चूसना शुरु कर दिया। सीमा चुपचाप देखती रही। उसे भी जोश आ रहा था और जोश के मारे उसकी आँखें गुलाबी सी होने लगी। जब धरम का लंड खड़ा हो गया तो उन्होंने मेरे चूतड़ सीमा के बगल में बेड के किनारे पर रख कर मुझे लिटा दिया और खुद ज़मीन पर मेरी टाँगों के बीच खड़े हो गये। उसके बाद उन्होंने मेरी चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और मुझे चोदने लगे। धरम जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे।

थोड़ी देर बाद उन्होंने सीमा के बूब्स पर अपना हाथ रखा तो सीमा कुछ नहीं बोली। वो बड़े ध्यान से धरम का लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होता हुआ देख रही थी। धरम ने सीमा के बूब्स को मसलते हुए मेरी चुदाई ज़ारी रखी। वो जोर-जोर से धक्के लगाते हुए बहुत ही तेजी के साथ मुझे चोद रहे थे। थोड़ी देर बाद धरम ने अपना हाथ सीमा की जाँघों पर फिराना शुरु कर दिया तो सीमा ने मना नहीं किया। धरम ने उसकी जाँघों को सहलाना शुरु कर दिया। वो भी जोश में आ गयी थी। धरम की स्पीड अब बहुत तेज़ हो गयी थी। उन्होंने सीमा की जाँघों को सहलाते हुए धीरे से अपना हाथ उसकी चूत की तरफ़ बढ़ा दिया। जब सीमा ने फिर भी कुछ नहीं कहा तो धरम ने उसकी चूत को सहलाना शुरु कर दिया।

थोड़ी देर तक सहलाने के बाद सीमा सिसकरियाँ भरने लगी लेकिन उसने धरम को बिल्कुल नहीं रोका। धरम सीमा की चूत को सहलाते हुए मुझे चोद रहे थे। थोड़ी देर बाद जब सीमा की चूत से पानी निकलने लगा तो उसने धरम का हाथ हटा दिया। बीस-पच्चीस मिनट की चुदाई के बाद धरम झड़ गये। मैं भी उनके साथ ही साथ झड़ चुकी थी। धरम ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और सीमा के मुँह के पास कर दिया और कहा, “देखो ध्यान से, इस पर हेमा की चूत का और मेरे लंड का पानी लगा हुआ है। कैसा दिख रहा है मेरा लंड। मुँह में लोगी इसे।”
 
सीमा बोली, “धत्त, जीजू, तुम बड़े गंदे हो। मैं इसे मुँह में कैसे ले सकती हूँ।”

धरम ने कहा, “ठीक है, मुँह में मत लो। हाथ में तो पकड़ सकती हो।”

धरम ने सीमा हाथ पकड़ कर अपने लंड के पास कर दिया। सीमा ने शरमाते हुए धरम का लंड अपने हाथ में ले लिया। उसका हाथ मेरी चूत और धरम के लंड के पानी से भीग गया तो वो अपना हाथ बेड के चदर से साफ़ कर करने लगी।

धरम ने कहा, “तुम्हें ये पानी अच्छा नहीं लग रहा है। लो मैं अपना लंड साफ़ कर देता हूँ। फिर तुम इसे हाथ में ले लेना।”

धरम ने टॉवल से अपना लंड साफ़ कर दिया और फिर से सीमा के हाथ के पास कर दिया। सीमा ने इस बार बिना कुछ कहे धरम का लंड अपने हाथ में ले लिया और देखने लगी।

थोड़ी देर बाद सीमा बोली, “दस बज रहे हैं, नहाना नहीं है क्या?”

धरम बोले, “नहाना है। पहले तुम एक बार मेरे लंड को चूम लो, फिर नहा लेंगे।”

सीमा ने इनकार कर दिया तो धरम ने अपना लंड सीमा के मुँह के पास कर दिया। धरम ने सीमा से फिर कहा, “प्लीज़! सीमा, एक बार चूम लो।”

सीमा ने शरमाते हुए धरम के लंड को चूम लिया। उसके बाद हम नहाने के लिये जाने लगे। अभी तक हम सब ने एक साथ नहीं नहाया था।

मैंने सीमा से कहा, “तुम भी साथ में नहाने चलो, हम सब साथ ही नहायेंगे।”

वो बोली, “नहीं, तुम दोनों नहा लो, मैं उसके बाद नहा लुँगी। मुझे शरम आती है।”

मैंने कहा, “अब काहे कि शरम। तुम धरम का लंड अपने हाथ से पकड़ चुकी हो। उसके लंड को चूम भी चुकी हो। मुझे धरम से चुदवाते हुआ भी देख चुकी हो। अब बाकी क्या बचा है। आ जाओ।”

मैं उसका हाथ पकड़ कर बाथरूम में ले गयी। धरम भी मेरे पीछे-पीछे बाथरूम में आ गया। धरम ने सीमा का हाथ पकड़ कर उसे शॉवर के नीचे खड़ा कर दिया तो उसका सारा बदन भीग गया। हम सब एक दूसरे से मज़ाक करते हुए नहाने लगे। मैं धरम के बदन पर साबून लगा रही थी और धरम मेरे बदन पर साबून लगा रहे थे।

मैंने सीमा से कहा, “तुम भी अपने जीजू के बदन पर साबून लगा दो।”

उसने शरमाते हुए धरम के बदन पर साबून लगाना शुरु कर दिया। धरम ने अपना लंड सीमा के सामने कर दिया और कहा, “इस पर भी तो साबून लगा दो।”

सीमा कुछ नहीं बोली और चुपचाप धरम के लंड पर भी साबून लगाने लगी। सीमा के साबून लगाने से धरम का लंड खड़ा हो गया तो धरम ने कहा, “सीमा, अब रहने दो। अब मैं तुम्हारे बदन पर साबून लगा देता हूँ।”

सीमा एक दम चुप रही। धरम ने सीमा के बदन पर साबून लगाना शुरु कर दिया। धरम ने सीमा के बूब्स को साबून लगा-लगा कर खूब मसला। उसके बाद सीमा की चूत पर साबून लगाना शुरु कर दिया। वो कुछ नहीं बोली। थोड़ी ही देर में वो जोश में आ गयी और सिसकरियाँ भरने लगी। धरम ने एक अँगुली सीमा की चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करना शुरु कर दिया। सीमा जोश के मारे एक दम पागल सी होने लगी। वो मुझे पकड़ कर मुझसे एक दम चिपक गयी और मेरे होंठों को चूमने लगी। वो बहुत ज्यादा जोश में आ चुकी थी।

थोड़ी देर बाद सीमा की चूत से पानी निकलने लगा। पूरा पानी निकल जाने के बाद सीमा ने धरम का हाथ पकड़ा और उसकी अँगुली अपने चूत से निकाल दी। धरम हट गये और शॉवर के नीचे नहाने लगे। सीमा थोड़ी देर तक मुझसे चिपकी रही, फिर उसके बाद वो बैठ गयी और नहाने लगी। जब धरम के बदन का सारा साबून धुल गया तो उन्होंने अपना लंड सीमा के मुँह के पास कर दिया और कहा, “चूसोगी इसे?”

सीमा ने चुपचाप धरम का लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। वो बड़े प्यार से धरम का लंड चूस रही थी। धरम ने उसके सिर पर अपना हाथ फिराना शुरु कर दिया। वो बहुत देर तक धरम का लंड चूसती रही। थोड़ी देर बाद धरम ने मुझे आँख मारी तो मैं समझ गयी कि वो झड़ने वाला है।

कुछ ही देर बाद सीमा के मुँह में धरम के लंड का पानी निकलने लगा। मैं सोच रही थी कि सीमा धरम के लंड का पानी थूक देगी लेकिन उसने धरम के लंड का सारा पानी निगल लिया। पूरा पानी निगल जाने के बाद उसने मेरी ही तरह धरम का लंड चाटना शुरु कर दिया और चाट-चाट कर एक दम साफ़ कर दिया। वो बहुत खुश थी और धरम भी बहुत खुश थे। उसके बाद हम सब नहाने लगे। नहाने के बाद हम सब बाथरूम से बाहर आ गये। सीमा ने कपड़े उठाने चाहे तो धरम ने कहा, “हमारे अलावा घर में तो कोई नहीं है। संडे को हम सारा दिन नंगे ही रहते हैं। आज तुम भी कपड़े मत पहनो।”

वो मना करने लगी तो मैंने सीमा से कहा, “अब मान भी जाओ। ज्यादा नाटक मत करो।”

वो बोली, “तू बड़ी बेशरम है और मुझे भी बेशरम बना रही है।”

मैंने कहा, “अब काहे की शरम। आज तुम ऐसे ही रहो।”

 
वो कुछ नहीं बोली। हम सब नंगे ही रहे। मैंने बस ऊँची हील के सैंडल पहन लिये क्योंकि धरम का और मेरा भी मानना था कि हाई हील के सैंडल पहनने से मेरा फिगर खासतौर से गाँड और भी ज्यादा सैक्सी लगती है और चाल में भी एक नज़ाकत आ जाती है । मैं खुद भी हाई हील के सैंडल पहन कर काफी सैक्सी महसूस करती हूँ। मैंने सीमा को भी ऊँची हील वाले सैंडल पहना दिये और उसका हाथ पकड़ा और किचन में नाश्ता बनाने चली गयी। हम दोनों ने नाश्ता बनाया और फिर नाश्ता ले कर बेडरूम में आ गये। बेड पर बैठ कर हम सब नाश्ता करने लगे।

धरम ने सीमा को छेड़ा, “सीमा, हेमा तो अपने बाल साफ़ करके रखती है लेकिन तुम अपने बाल साफ़ नहीं करती क्या?”

वो थोड़ा शरमाते हुए बोली, “मौका नहीं मिला। नहीं तो मैं भी अपने बाल साफ़ करके ही रखती हूँ।”

धरम बोले, “अगर तुमको ऐतराज़ ना हो तो लाओ मैं तुम्हारे बाल साफ़ कर दूँ। मैं तो हेमा के बाल साफ़ कर देता हूँ।”

वो बोली, “जीजू, रहने दो, मैं खुद ही साफ़ कर लुँगी।”

मैंने कहा, “अगर धरम कह रहे हैं तो आज उनसे ही अपने बाल साफ़ करा लो।”

वो कुछ नहीं बोली। नाश्ता करने के बाद मैं ड्रेसिंग टेबल से शेविंग किट निकाल कर ले आयी। धरम ने सीमा से कहा, “सीमा, अब तुम लेट जाओ।”

सीमा चुपचाप लेट गयी। धरम ने सीमा की टाँगें फैला दी और उसके बाल साफ़ करने शुरु कर दिये। सीमा को गुदगुदी होने लगी तो उसने सिसकरियाँ भरना शुरु कर दिया। थोड़ी ही देर में धरम ने सीमा की चूत के बाल साफ़ कर दिये। उसके बाद धरम ने उसकी चूत पर हाथ फिराना शुरु कर दिया और बोले, “अब तुम्हारी चूत अच्छी लग रही है।”

सीमा पहले ही बहुत ज्यादा जोश में आ गयी थी। धरम के हाथ फिराने से थोड़ी ही देर में वो झड़ गयी। उसकी चूत से पानी निकलता देख धरम ने कहा, “साली जी, तुम्हारी चूत से तो पानी निकाल रहा है।”

वो बोली, “जीजू, आज तक मेरी चूत को राज के अलावा किसी दूसरे ने नहीं साफ़ किया था इसलिये मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी। मैं अपने आपको रोक नहीं पायी और पानी निकल गया। मैं इसी लिये आप को मना कर रही थी।”

धरम ने कहा, “कोई बात नहीं है। मैं तो हेमा की चूत का पानी रोज ही चाट लेता हूँ। आज मैं तुम्हारी चूत का पानी भी चाट कर देखुँगा कि उसका टेस्ट कैसा है।”

इतना कह कर धरम ने सीमा के चूत पर अपनी जीभ लगा दी और उसकी चूत को चाटने लगे। सीमा पागल सी होने लगी। थोड़ी देर बाद जब उसकी चूत साफ़ हो गयी तो धरम हट गये। सीमा बेड पर पड़ी हुई अभी भी सिसकरियाँ भर रही थी। मैं चाहती थी कि सीमा खुद ही धरम से चुदवाने के लिये तैयार हो जाये। तब ही उसकी आग भड़केगी और मैं उसकी सैक्स की आग को भड़काना चाहती थी। थोड़ी देर बाद वो शाँत हो गयी।

दोपहर के बारह बजे धरम ने कहा, “रानी, चुदवाने के लिये तैयार हो जाओ।”

मैंने कहा, “मैं तैयार हूँ।”

धरम ने कहा, “अगर सीमा मेरे लंड को चूस कर खड़ा कर दे तो तुम्हें चोदने में और मज़ा आयेगा।”

मैंने कहा, “सीमा से पूछ लो।”

धरम ने अपना लंड सीमा के मुँह के पास कर दिया। सीमा थोड़ी देर तक देखती रही। फिर उसने शरमाते हुए धरम का लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। पहले वो थोड़ा शरमाते हुए चूस रही थी लेकिन जब वो जोश में आ गयी तो उसने तेजी के साथ धरम का लंड चूसना शुरु कर दिया।

जब धरम का लंड खड़ा हो गया तो उसने अपना लंड सीमा के मुँह से बाहर निकाला और मेरी चूत में घुसेड़ दिया। उसके बाद धरम ने मुझे चोदना शुरु कर दिया। सीमा भी जोश में आ गयी थी लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी। वो केवल धरम को मुझे चोदता हुआ ध्यान से देखती रही। धरम ने सीमा के बूब्स को पकड़ लिया और उसके बूब्स को मसलते हुए मुझे चोदने लगे। धरम ने सीमा से पूछा, “सीमा, कैसा चोद रहा हूँ हेमा को?”

सीमा बोली, “बहुत ही अच्छी तरह।”

बीस-पच्चीस मिनट की चुदाई के बाद धरम की स्पीड एक दम बढ़ गयी। सीमा भी जोश के मारे अपनी चूत को सहला रही थी। थोड़ी देर बाद जब धरम झड़ गये तो उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल कर सीमा के मुँह के पास कर दिया और पूछा, “चाटोगी इसे?”

सीमा तो जोश में थी। उसने धरम का लंड अपने हाथ में ले लिया और चाटने लगी। मैं मन ही मन खुश हो रही थी। मैंने सीमा से पूछा, “कैसा लग रहा है?”

वो बोली, “ठीक ही है।”

 
मैंने सीमा की चूत पर हाथ लगाया तो उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी। मैंने सीमा की चूत में अपनी अँगुली डाल दी और अंदर बाहर करने लगी। वो अभी भी धरम का लंड चाट रही थी। जोश में आकर वो सिसकरियाँ भरने लगी और थोड़ी ही देर बाद वो झड़ गयी।

जब उसने धरम का लंड चाट-चाट कर साफ़ कर दिया तो मैंने सीमा से कहा, “तुमने धरम का लंड तो चाट कर साफ़ कर दिया। अब मैं तुम्हारी चूत को भी चाट कर साफ़ कर देती हूँ।”

धरम ने मुझसे कहा, “तुम क्यों तकलीफ करती हो। मैं ही सीमा की चूत को चाट कर साफ़ कर देता हूँ।”

सीमा कुछ नहीं बोली। धरम ने सीमा की चूत को चाटना शुरु कर दिया। जब धरम ने सीमा की चूत को चाट कर साफ़ कर दिया तो मैंने धरम से कहा, “मेरी चूत को कौन चाट कर साफ़ करेगा?”

धरम ने कहा, “आज तुम सीमा से साफ़ करा लो।”

मैंने सीमा से कहा तो उसने मेरी चूत को चाट कर साफ़ करना शुरु कर दिया। उसके बाद हम सब बेड पर लेट कर आराम करने लगे। लगभग तीन बजे धरम ने मुझसे कहा, “हेमा, अगले राऊँड के लिये तैयार हो जाओ।”

मैंने कहा, “मैं तैयार हूँ।”

सीमा भी जाग रही थी। धरम ने सीमा से पूछा, “मेरा लंड चूसोगी?”

उसने शरमाते हुए कहा, “हाँ।”

धरम ने अपना लंड सीमा के मुँह के पास कर दिया और सीमा ने उसे मुँह में लेकर चूसना शुरु कर दिया। धरम मेरी चूत को चाटने लगे। सीमा इस बार धरम के लंड को बड़े प्यार से चूस रही थी। वो अपने हाथों से धरम की दोनों गोलियाँ भी सहला रही थी। जब धरम का लंड खड़ा हो गया तो उसने अपना लंड सीमा के मुँह से बाहर निकाला और सीमा से कहा, “मज़ा आ गया। इस बार तुमने मेरा लंड बड़े प्यार से चूसा है।”

धरम मेरे ऊपर आ गये और मुझे चोदने लगे। सीमा बैठ कर बड़े ध्यान से देख रही थी और अपनी चूत को सहला रही थी। उसकी आँखें एक दम गुलाबी हो गयी थी। धरम बहुत ही तेजी के साथ मुझे चोद रहे थे। दस मिनट चुदवाने के बाद मैं झड़ गयी तो धरम ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद जब मैं फिर से झड़ गयी तो धरम ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मुझसे डॉगी स्टाइल में होने को कहा। मैं डॉगी स्टाइल में हो गयी। धरम मेरे पीछे आ गये और मुझे चोदने लगे। वो बहुत ही तेजी के साथ मुझे चोद रहे थे। दस-पंद्रह मिनट तक और चोदने के बाद धरम झड़ गये और उनके साथ ही साथ मैं भी झड़ गयी। धरम ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर सीमा के मुँह के पास कर दिया तो सीमा ने धरम के लंड को चाटना शुरु कर दिया।

उसके बाद मैंने सीमा से अपनी चूत को चाटने को कहा तो उसने मेरी चूत को भी चाट-चाट कर साफ़ कर दिया। लगभग पाँच बजे धरम फिर से तैयार हो गये। इस बार सीमा ने बिना कुछ कहे ही धरम का लंड चूसना शुरु कर दिया। धरम मेरी चूत को चाट रहे थे।

जब धरम का लंड खड़ा हो गया तो धरम ने सीमा से कहा, “लेट जाओ।”

वो चुपचाप लेट गयी। धरम उसकी टाँगों के बीच आ गये और अपना लंड सीमा की चूत पर रख दिया। सीमा फिर भी कुछ भी नहीं बोली। मैं समझ गयी कि वो चुदवाने के लिये एक दम तैयार है। मैंने धरम से कहा, “ये क्या कर रहे हो?”

वो बोले, “कुछ नहीं। मैं केवल अपना लंड थोड़ी देर तक सीमा की चूत पर रगड़ुँगा।”

मैंने कहा, “अच्छा ठीक है। लेकिन कुछ और मत करना।” वो अपना लंड सीमा की चूत पर रगड़ने लगे। दो मिनट में ही सीमा झड़ गयी तो धरम हट गये।

सीमा ने धरम को पकड़ लिया और बोली, “आग लगा कर भाग रहे हो। अपने लंड के पानी से इस आग को बुझा दो प्लीज़।”

धरम ने कहा, “बाद में बुझा दुँगा।”

वो कुछ नहीं बोली। उसके बाद धरम ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मुझे चोदने लगे। बीस-पच्चीस मिनट की चुदाई के बाद जब धरम झड़ने वाले थे तो उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया और मुझसे बोले, “इस बार मैं अपने लंड के पानी से सीमा की चूत की आग बुझा देता हूँ।”

वो फिर से सीमा की टाँगों के बीच आ गये। उन्होंने सीमा की चूत पर फिर से अपना लंड रगड़ना शुरु कर दिया। सीमा जोश से पागल हुई जा रही थी। दो-तीन मिनट बाद धरम के लंड से पानी निकलने लगा तो धरम ने सारा पानी सीमा की चूत पर और उसके आसपास गिरा दिया। लंड का पूरा पानी गिरा देने के बाद धरम ने सीमा से पूछा, “मैंने आग पर पानी डाल दिया है। अब आग ठंडी हो गयी?”

 
सीमा बोली, “इस तरह तो आपने मेरी आग को और भड़का दिया। मेरी आग तभी ठंडी होगी जब आप हेमा की तरह ही मुझे भी खूब चोदेंगे।”

धरम बोले, “मेरा लंड तुमने देख ही लिया है। इसे अपनी चूत के अंदर ले पाओगी। तुम्हारी चूत फट जायेगी।”

वो बोली, “जब हेमा आपका इतना बड़ा लंड अपनी चूत के अंदर ले लेती है तो मैं भी इसे पूरा अंदर ले लुँगी। मैं अपनी चूत की आग में जल रही हूँ। मुझे तो बस केवल आपसे चुदवाना है भले ही मेरी चूत फट जाये। मेरी आग बुझा दो प्लीज़।”

धरम ने कहा, “अगर तू कहती हो तो मैं अगले राऊँड में तुम्हें चोद दुँगा। तुम हेमा से पूछ लो। उसको कोई ऐतराज़ तो नहीं है।”

हेमा बोली, “सीमा तैयार है तो भला मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है। आखिर ये मेरी बहन है।”

अब आगे की कहानी सीमा की ज़ुबानी:

रात के सात बजे मैंने धरम का लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। थोड़ी ही देर में धरम का लंड खड़ा हो गया। धरम ने मुझे लिटा दिया और मेरी टाँगों के बीच आ गये। उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरु कर दिया। मेरे सारे बदन ने सुरसुरी सी होने लगी। मैं जोश से पागल हुई जा रही थी। दो मिनट में ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने धरम को अपनी बाँहों में जोर से जकड़ लिया। धरम मेरे होंठों को चूमने लगे। थोड़ी देर बाद धरम ने मुझसे डॉगी स्टाइल में होने को कहा। मैं बहुत ज्यादा जोश में थी और तुरंत ही डॉगी स्टाइल में हो गयी। धरम मेरे पीछे आ गये। उन्होंने मेरी चूत की लिप्स को फैला कर अपने लंड का टोपा बीच में रख दिया। मेरे सारे बदन में गुदगुदी सी होने लगी और मैं सिसकरियाँ भरने लगी।

धरम ने मेरी कमर को पकड़ा और बोले, “सीमा, अब मैं तुम्हारी चूत में अपना लंड घुसाने जा रहा हूँ। अब तुम दर्द सहने के लिये तैयार हो जाओ।”

मैंने कहा, “मुझे चाहे जितना दर्द हो मैं तो बस केवल आपका पूरा लंड अपनी चूत के अंदर लेना चाहती हूँ। आपने मेरी सैक्स की आग को भड़का दिया है। मैं आप से खूब चुदवाना चाहती हूँ।”

हेमा बोली, “अगर तू ही चुदवाती रहेगी तो मेरा क्या होगा। मैं तो चुदवाये बिना नहीं रह सकती।”

मैंने कहा, “मुझे चुदवा लेने दे फिर तू भी चुदवा लेना।”

धरम ने अपना लंड मेरी चूत के अंदर दबाना शुरु कर दिया। उसका लंड धीरे-धीरे मेरी चूत के अंदर घुसता जा रहा था। पहले तो मुझे बहुत कम दर्द हुआ लेकिन जब उसका लंड और ज्यादा गहरायी तक मेरी चूत के अंदर चला गया तो मुझे दर्द होने लगा। मैंने धरम को रोका नहीं। वो अभी भी अपना लंड मेरी चूत में दबाता जा रहा था। उसका लंड मेरी चूत में और ज्यादा गहरायी तक घुसता जा रहा था। मैंने अपने होंठ जकड़ लिये जिससे मेरे मुँह से चींख ना निकले। जब मेरी चूत का दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैंने धरम से रुक जाने को कहा। वो रुक गया। मैंने पूछा, “कितना घुसा है तुम्हारा लंड?”

वो बोला, “अभी तो केवल पाँच इंच ही घुस पाया है!”

मैं राज के पाँच इंच के लंड से चुदवाने की आदी थी और धरम का लंड पाँच इंच तक मेरी चूत में घुस चुका था। मुझे बहुत ज्यादा दर्द इसलिये भी हुआ क्योंकि धरम का लंड राज के लंड से बहुत ज्यादा मोटा था। थोड़ी देर बाद मैंने धरम से और ज्यादा लंड चूत के अंदर ना घुसाते हुए चोदने को कहा।

उसने अपना लंड पाँच इंच तक ही मेरी चूत में डालते हुए अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। मेरी चूत ने धरम का लंड एक दम जकड़ रखा था। थोड़ी देर बाद जब मेरी चूत कुछ ढीली हो गयी तो मेरा दर्द काम हो गया।

मैं जोश में आ कर सिसकरियाँ भरने लगी। मैंने अपने चूतड़ भी आगे पीछे करने शुरु कर दिये। दो-तीन मिनट में ही मैं झड़ गयी। झड़ने के बाद मेरी चूत और ज्यादा गीली हो गयी तो धरम ने एक धक्का लगा दिया। मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ और मैं चिल्लाने लगी।

हेमा बोली, “क्या हुआ। अभी तो धरम का लंड केवल छः इंच ही घुसा है और तू चिल्ला रही है। अभी तो दो इंच बाकी है। जब धरम पूरा लंड अंदर डाल देगा तो तेरा क्या हाल होगा?”

“थोड़ा सब्र कर! मैं तो जीजू का पूरा लंड अपनी चूत के अंदर लुँगी, चाहे जो हो जाये।”

धरम ने हेमा से कहा, “तुम सीमा का मुँह जोर से दबा दो, जिससे मैं अपना पूरा लंड इसकी चूत में डाल दूँ। नहीं तो जैसे पहले तुम चिल्लाती थी उसी तरह ये भी बहुत चिल्लायेगी और मैं एक बार में पूरा लंड इसकी चूत में नहीं डाल पाऊँगा। पूरा लंड डालने के लिये मुझे सीमा की कई बार चुदाई करनी पड़ेगी और उसे कई बार दर्द होगा।”

हेमा ने मेरे मुँह जोर से दबा कर पकड़ लिया। धरम ने पूरी ताकत के साथ तीन-चार जोरदार धक्के और लगा दिये। मैं दर्द के मारे तड़पने लगी। मेरा बदन थरथर काँपने लगा। मुँह दबा होने की वजह से मेरे मुँह से केवल गूँ-गूँ की आवाज़ ही निकाल पा रही थी। मेरा पूरा चेहरा पसीने से भीग गया। धरम का लंड अब एक दम जड़ तक मेरी चूत में समा चुका था। हेमा मेरा मुँह दबाये रही और धरम ने धक्के लगाने शुरु कर दिये। वो अभी धीरे-धीरे धक्के लगा रहे थे। चार-पाँच मिनट में ही मैं फिर से झड़ गयी तो मेरी चूत एक दम गीली हो गयी। अब धरम का लंड मेरी चूत में थोड़ा आसानी से अंदर बाहर होने लगा था। मेरा दर्द भी कुछ हद तक काम हो चुका था। अब मैं ज्यादा नहीं चिल्ला रही थी। हेमा ने अपना हाथ मेरे मुँह से हटा लिया।

हेमा ने मुझसे पूछा, “धरम का पूरा लंड अब तुम्हारी चूत के अंदर है। कैसा लग रहा है?”

मैंने कहा, “अच्छा लग रहा है लेकिन अभी भी दर्द बहुत दर्द हो रहा है।”

हेमा बोली, “अभी जब धरम की स्पीड बढ़ जायेगी तब फिर से दर्द होगा। तुम ये दर्द बर्दाश्त कर लेना। फिर बाद में तुझे बहुत मज़ा आयेगा।”

इतना कह कर हेमा ने अपनी चूत मेरे मुँह के पास कर दी और बोली, “तुम मेरी चूत को चाटो। इससे तुम्हें दर्द काम महसूस होगा!”

 


मैं हेमा की चूत को चाटने लगी। धरम ने अपनी स्पीड थोड़ा तेज़ कर दी। मुझे फिर से दर्द होने लगा और मैं कराहने लगी। मैंने अपने दोनों होंठ एक दूसरे पर कस लिये। दस मिनट की चुदाई के बाद मैं फिर से झड़ गयी। अब तक मेरा दर्द और कम हो गया था। मेरे झड़ जाने के बाद धरम ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। मैं फिर से कराहने लगी।

लगभग दस मिनट तक और चुदवाने के बाद मैं फिर से झड़ गयी। अब धरम का लंड मेरी चूत में आराम से अंदर बाहर होने लगा था। मेरा दर्द एक दम कम हो गया था। अब मैं भी अपने चूतड़ आगे-पीछे करके धरम का साथ देने लगी थी। धरम ने मुझे अब गज़ब की स्पीड से चोदना शुरु कर दिया। उसका हर धक्का मेरी बच्चे-दानी को पीछे ढकेल रहा था। मेरे पेट में भी दर्द होने लगा। उसका हर धक्का मेरे ऊपर भारी पड़ रहा था। मेरा सारा बदन पसीने से नहा गया था। मेरी साँसें बहुत तेज़ चल रही थी। इस बार पाँच मिनट की चुदाई में ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।

मैंने हेमा से कहा, “मैं नहीं जानती थी कि चुदवाने में इतना मज़ा भी आता है। मैं राज से चुदवाने में उसका साथ नहीं देती थी। मैंने राज के साथ बहुत बुरा किया है। राज तो धरम की तरह ही सैक्सी है। दोनों में अंतर केवल लंड के साइज़ का है। मुझे सैक्स में मज़ा नहीं आता था। धरम जैसे तुम्हें खूब चोदता है वैसे ही राज भी मुझे खूब चोदना चाहता है। मैंने उसे बहुत तड़पाया है। अब मैं उसे बिल्कुल नहीं तड़पाऊँगी। उससे खूब चुदवाऊँगी।”

हेमा ने कहा, “चलो ठीक ही है। देर से ही सही तुम्हें ये बात तो समझ में आ गयी। जानती हो सीमा जब पति का पेट अपनी बीवी से नहीं भरता तो वो दूसरी औरत के पास अपनी भूख मिटाने चला जाता है। इसलिये हर औरत को अपने पति की सैक्स की भूख को शाँत रखना चाहिये।”

मैंने कहा, “हाँ, अब मैं समझ गयी हूँ। तुमने मुझ पर बहुत उपकार किया है।”

अब तक मुझे चुदवाते हुए दस मिनट और बीत चुके थे। मैं पहले ही कई बार झड़ चुकी थी। धरम अभी भी मुझे उसी स्पीड में चोद रहे थे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं चाहती थी कि धरम मुझे इसी तरह पूरी रात चोदते रहें। थोड़ी ही देर में मेरी चूत से फिर से पानी निकलने लगा। मैं बहुत ज्यादा जोश में आ गयी थी और बड़े प्यार से हेमा की चूत को चाट रही थी। धरम ने अभी भी मुझे उसी स्पीड में चोदना जारी रखा था।

अब तक मुझे चुदवाते हुए लगभग बीस मिनट और हो गये थे। धरम की स्पीड और तेज़ हो गयी तो मैं समझ गयी कि अब धरम का नंबर आ गया है। तभी मैंने ने हेमा की चूत को और ज्यादा तेजी से चाटना शुरु कर दिया। मैं फिर झड़ने वाली थी। तभी धरम ने मेरी कमर को जोर से पकड़ लिया और रुक-रुक कर धक्के लगाने शुरु कर दिये। धरम के लंड से पानी निकलने लगा और मेरी चूत भरने लगी। धरम के साथ ही साथ मैं भी फिर से एक बार और झड़ गयी। जब हम दोनों पूरी तरह से झड़ गये तो धरम ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला। हेमा ने धरम के लंड को चाट-चाट कर साफ़ करना शुरु कर दिया और धरम मेरी चूत को चाट कर साफ़ करने लगा। धरम का लंड साफ़ करने के बाद हेमा मेरी चूत को देखने लगी तो मैंने कहा, “मेरी चूत को क्या देख रही है?”

हेमा बोली, “मैं देख रही हूँ कि आज पहली बार इतने मोटे और लंबे लंड से खूब चुदवाने के बाद तुम्हारी चूत कैसी दिख रही है।”

हेमा ने मेरी चूत को देखते हुए कहा, “धरम का लंड राज के लंड से बहुत लंबा और मोटा है। इसलिये तुम्हारी चूत तो एक दम चौड़ी हो गयी है और कई जगह से कट भी गयी है।”

मैंने कहा, “मैं भी अपनी चूत की हालत देखना चाहती हूँ।”

हेमा ड्रेसिंग टेबल से एक मिरर ले आयी और उस मिरर में मुझे मेरी चूत दिखाने लगी। मैंने अपनी चूत को मिरर में देखा तो मैंने कहा, “मैं नहीं जानती थी कि धरम से चुदवा कर मेरी चूत इतनी ज्यादा चौड़ी हो जायेगी। मेरी चूत तो कई जगह से कट भी गयी। जब राज मुझे चोदेंगे तो उनको पता चल जायेगा। मैं उनसे क्या कहुँगी। मैंने जोश में आ कर जीजू से चुदवा कर बहुत गलत काम किया है।”

हेमा बोली, “तुम्हें चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हें सैक्सी बनाने के लिये ही यहाँ लायी हूँ। मैंने राज से पहले ही कह दिया था कि तुम्हें सैक्सी बनाने के लिये मुझे तुम्हारी चुदाई धरम से करानी पड़ेगी। उस दिन जब तुम अपनी फ्रैंड के पास गयी थी तब राज ने मुझे सीमा समझा था और मुझे पकड़ लिया था। मैंने भी मज़ा लेने के लिये राज से खूब चुदवाया था। तुम केवल धरम से खूब चुदवाओ और मज़ा लो। राज की चिंता मत करो।”

थोड़ी देर बाद मेरी चूत एक दम डबल रोटी की तरह सूज गयी।

आगे की कहानी हेमा की ज़ुबानी:

रात के आठ बजे मैंने धरम के लंड को चूसना शुरु कर दिया। सीमा बोली, “हेमा, एक बार मुझे और चुदवा लेने दे।”

मैंने कहा, “आज संडे है और मैंने तुझे बताया था कि संडे को रात में धरम एक बार मेरी गाँड मारते हैं।”

सीमा बोली, “मैं तो भूल ही गयी थी। मैं भी ज़रा देखूँ कि तू इतना बड़ा लंड अपनी गाँड के अंदर कैसे लेती है।

मैंने कहा, “तू बस केवल देखती जा।”

धरम का लंड जब खड़ा हो गया तो मैं डॉगी स्टाइल में हो गयी। धरम ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मुझे चोदने लगे।

सीमा बोली, “तू मुझे बेवकूफ़ बना रही है। धरम तो तेरी चूत की चुदाई कर रहे हैं।”

मैंने कहा, “अभी जब मैं झड़ जाऊँगी तो धरम का लंड और मेरी चूत एक दम गीली हो जायेगी। वो पानी ऑयल का काम करेगा!”
 
पाँच मिनट बाद मैं झड़ गयी तो धरम का लंड एक दम गीला हो गया। धरम ने मेरी चूत का पानी मेरी गाँड पर लगा दिया। उसके बाद उन्होंने अपना लंड मेरी गाँड के छेद पर रखा और अंदर दबाने लगे। हेमा आँखें फाड़े देखती रही। थोड़ी ही देर में धरम का पूरा का पूरा लंड मेरी गाँड में घुस गया। उसके बाद धरम धक्के लगाने लगे। मैंने भी आगे पीछे होकर धरम का साथ देना शुरु कर दिया।

सीमा बोली, “ये तो पूरा तेरी गाँड के अंदर चला गया।”

मैंने कहा, “देख लिया ना तुमने। अगर तुम्हें भी गाँड मरवानी हो तो धरम को बता देना।”

सीमा बोली, “इतना बड़ा लंड मैं अपनी गाँड में कैसे ले पाऊँगी। मुझे तो धरम का लंड अपनी चूत के अंदर लेने में ही बहुत दर्द सहना पड़ा।”

मैंने कहा, “ये धरम का काम है। एक बार में तू धरम का पूरा लंड अपनी गाँड के अंदर नहीं ले पायेगी। इसके लिये तुझे धरम से कम से कम दो-तीन बार गाँड मरवानी पड़ेगी। तब कहीं जाकर तू इसका पूरा लंड अपनी गाँड के अंदर ले पायेगी लेकिन इसमें दर्द बहुत होगा। तुझे तो केवल दर्द बर्दाश्त करना पड़ेगा।”

अब तक धरम को मेरी गाँड मारते हुए बीस-पच्चीस मिनट हो चुके थे और वो झड़ने ही वाले थे। उन्होंने खूब जोर-जोर से धक्के लगाने शुरु कर दिये थे। दो-तीन मिनट में ही वो मेरी गाँड में झड़ गये। झड़ने के बाद जब धरम ने अपना लंड मेरी गाँड से बाहर निकाला तो सीमा मेरी गाँड देखने लगी। धरम ने अपना लंड टॉवल से साफ़ किया और लेट गये। हम तीनों नंगे ही सो गये। मैंने और सीमा ने तो अपने सैंडल भी नहीं उतारे थे।

दूसरे दिन सुबह धरम ने कहा, “अब कौन मुझसे चुदवायेगा।”

सीमा बोली, “मैं चुदवाऊँगी।”

सीमा ने धरम का लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। फिर थोड़ी ही देर बाद उसने धरम का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं समझ गयी कि अब सीमा की सैक्स की भूख जाग चुकी है। थोड़ी देर बाद जब धरम का लंड खड़ा हो गया तो उसने सीमा को बेड के किनारे लिटा दिया और खुद ज़मीन पर खड़े हो गये और उसकी टाँगों के बीच आ गये।

उन्होंने सीमा की टाँगों को पकड़ कर दूर-दूर फैला दिया और अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया। सीमा इतने ज्यादा जोश में थी कि उसने अपने चूतड़ ऊपर उठा दिये। धरम ने एक धक्का मारा तो सीमा के मुँह से एक आह सी निकाल गयी। धरम का लंड एक ही धक्के में आधे से ज्यादा सीमा की चूत में समा चुका था। धरम ने जब दूसरा धक्का लगाया तो सीमा फिर से चिल्ला पड़ी। धरम का पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। फिर धरम ने धक्के मारने शुरु कर दिये।

धरम भी नयी चूत पा कर बहुत ज्यादा जोश में था और खूब जोर जोर के धक्के लगा रहा था। सीमा भी जोश से पागल हुई जा रही थी और वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर धरम का साथ दे रही थी। इस बार धरम ने सीमा को लगभग पैंतालीस मिनट तक चोदा और फिर उसकी चूत में ही झड़ गये।

 
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