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जेम्स की कल्पना

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लेखक:-लीलाधर

कहानी के बारे में –

दो दम्पति अपने साथियों की अदला-बदली के लिए मिलते हैं। जेम्स दूसरे दंपति की बीवी कल्पना के साथ सेक्स संबंध स्थापित करता है मगर एक दुखद घटनावश उसकी अपनी पत्नी डायना का दूसरे के पुरुष के साथ संभोग नहीं हो पाता और विनिमय कार्य अधूरा रह जाता है। यह उसी अधूरे विनिमय के अंतर्गत जेम्स और कल्पना के संयोग के बेहद उत्तेजक कामुक अनुभवों की कहानी है।

जेम्स की कल्पना

दरवाजा बंद हो गया।

अंदर से चिटखिनी लगने की खट-खुट मेरे कानों में गूंजती रह गई…

बाहर का ताला कुछ क्षण तक झूलकर स्थिर हो गया। मैं कुछ देर तक उस बंद दरवाजे के सामने खड़ा रहा। एक बार इच्छा हुई कि घूमकर पीछे की तरफ जाऊँ और खिड़की से झाँककर अंदर देखूँ। लेकिन निश्चित लगा कि खिड़की बंद होगी। इतनी सावधान और संकोची स्त्री खिड़की खुला थोड़े ही रहने देगी।

अंदर उसके साथ एक पुरुष मिल रहा था – पहली बार

जेम्स…

अभी भी सोचता हूँ कि अंदर क्या हुआ था। उससे पूछो तो कुछ बताती ही नहीं है। बस कह देगी मालूम तो है तुम्हें कि क्या हुआ था। यही न चाहते थे? और क्या होना है?

लेकिन मैं तो घटना का विवरण जानना चाहता था। एक-एक ब्योरा। क्या-क्या हुआ, कैसे-कैसे हुआ, चरण-दर-चरण।

यही बात डायना भी कहती है अपने पति जेम्स के बारे में… कि वह बताता ही नहीं है।

बोलती है पहली बार जेम्स को किसी औरत ने इस तरह ‘प्रभावित’ किया है।

उन लोगों ने पहले भी दो-तीन दंपतियों से स्वैपिंग की है, सबके बारे में दोनों खुलकर बात करते थे पर कल्पना के साथ पहली बार जेम्स रिजर्व है, बस कहता है ‘इट वाज ए फैन्टास्टिक एक्सपीरिएंस (यह एक विलक्षण अनुभव था)।’

उल्टे डायना मुझी से पूछती है- कल्पना क्या कहती है?

अब भला मैं क्या कहूँ!

जेम्स..

बाइक पर मैं उसे दूर से ही पहचान गया था। ईमेल से भेजी अपनी फोटो जैसा ही था – सजीला, हँसमुख, भरे बदन का।

मुझसे काफी युवा!

बाइक रोककर उत्साह से मिला।

हम दो साल से संपर्क में थे और आपसी फोन-वार्ता के साथ-साथ फोटो का आदान-प्रदान कर चुके थे।

जब मैं उसे साथ लेकर होटल के कमरे में गया और अपनी पत्नी से उसका परिचय कराया तो वह हिचका नहीं, तुरंत किसी परिचित की तरह ‘हाय’ बोला।

मुझे उम्मीद कम ही थी कि कल्पना जवाब देगी।

जेम्स उसे कभी सीधे, कभी तिरछी नजर से देख रहा था… इसी औरत के साथ… कितने दिनों से वह उसके सपने देख रहा था।

फोन पर उसकी आवाज ही उसे काफी रोमांचित कर देती थी।

यद्यपि कल्पना उससे बड़ी थी – 8 साल, मगर वह उम्र से बहुत कम लगती थी। प्रत्यक्ष में सामने बैठी हुई तो और प्रभावशाली लग रही थी। उसके शरीर की गठन और चेहरे पर ताजगी देखकर जेम्स के मन में उत्साह की तरंगें उठ रही थीं।

मैं भी उसकी नजर से अपनी पत्नी को देख रहा था। नीले बुश्शर्ट और जीन्स में पलंग पर बैठी वह कोई एरिस्टोक्रैट फैमिली की कन्या लग रही थी। नहाने से बाल अभी भी गीले थे और पीठ पर नीली चौकोर धारियों वाली पतली शर्ट पर फैले थे। उसकी बदन और बालों की खुशबू अभी भी हवा में तैर रही थी।

जेम्स के विपरीत मैं पहली मुलाकात की हिचक और अटपटापन महसूस कर रहा था। हमारे लिए किसी दम्पति से स्वैपिंग (पत्नियों की अदला-बदली) के लिए मिलने का यह पहला मौका था।

लेकिन जेम्स अनुभवी था, अगर मैं फ्रैंक होता तो वह भी खुल जाता।

उसके पास ज्यादा समय नहीं था। दुर्भाग्यवश कल डायना की माँ को बड़ा हार्ट अटैक आया था, डायना उसके पास अस्पताल में थी। हम इतनी दूर से कोलकाता से आ चुके थे इसलिए इस काम को छोड़ा भी नहीं जा सकता था।

पहले हम चारों साथ मिलने वाले थे लेकिन माँ की घटना के बाद डायना ने कल्पना को बताया था कि पहले जेम्स जाकर ‘कर’ लेगा।

उसके बाद जेम्स हॉस्पिटल आएगा और तब वह स्वयं आएगी।

इस तरह से बारी-बारी से ‘विनिमय’ कार्य पूरा होगा।

जेम्स के साथ हमने बहुत थोड़ी देर रस्मी बातें कीं, जरूरी बातें फोन पर पहले हो चुकी थीं। जेम्स ने हमारी हिचक तोड़ने के लिए अपना मोबाइल निकाला और उसमें अपनी पत्नी और एक दूसरे दम्पति की स्त्री के साथ सेक्स की एक वीडियो क्लिपिंग दिखाई। दोनों स्त्रियाँ बारी बारी से उसका लिंग चूस रही थीं।

मुझे देखकर कैसा तो लगा। मैं जानता था मेरी पत्नी यह नग्नता नहीं सह पाएगी, मैंने मोबाइल उसे लौटा दिया।

जेम्स ने अपनी पत्नी को फोन लगाया और उसे बताया कि वह हमारे पास पहुँच गया है। हम दोनों ठीक तरह से हैं। उसने बात करके मुझे फोन दे दिया ताकि मैं डायना से बात कर लूँ।

डायना ने मुझे गुड माँर्निंग किया और दुहराया कि माँ की बीमारी की वजह से एक साथ नहीं आ पा रही है।

बोली- जेम्स बोल रहा है कि तुम बहुत स्मार्ट-लुकिंग और हैंडसम है। आय एम ईगर टु सी यू। लेट हिम फिनिश फर्स्ट देन आय विल कम… (मैं तुम्हें देखने को उत्सुक हूँ। उसे निपट लेने दो फिर मैं आऊंगी।)

मैंने पत्नी की ओर देखा, वह अटपटेपन से बचने के लिए कभी बिस्तर, कभी टेबल, कभी दीवार को देख रही थी।

मैं समझ नहीं पा रहा था क्या करूँ।

वैसे हम पति-पत्नी आपस में चर्चा कर चुके थे कि अकेले कमरे में करना बेहतर रहेगा ताकि पूरी तरह फ्री महसूस कर सकें पर यहाँ मैं मौके के अनुसार अलग निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र था।

कल्पना ने समर्पित पत्नी की तरह सबकुछ मुझ पर छोड़ दिया था, मुझे लग रहा था, पहले से तय नीति पर चलना ही बेहतर होगा। सामने रहूंगा तो वह संकोच में पड़ जाएगी।

हालाँकि मुझे अफसोस हो रहा था बाहर निकलने में… मेरी इच्छा थी यहीं साथ रहकर उन दोनों के बीच की क्रिया को देखूँ।

इसके अलावा, एक अनजान पुरुष के साथ अपनी सुंदर, कोमलहृदय, कोमलांगी पत्नी को अकेले छोड़ते डर भी लग रहा था। कुछ कर बैठे तो? दिल को काफी कड़ा करके मैंने दोनों को बाइ किया, अच्छे अनुभव के लिए विश किया और… बाहर निकल आया।

दरवाजा लगाने जेम्स ही उठा था।

पीछे ‘खट’ की हिचकती सी आवाज के साथ पल्ला बंद हुआ और अंदर से छिटकिनी लगने की छोटी सी ‘खुट खुट’… मेरी चेतना पर जैसे कील-हथौड़े से खुद गई।

बाहर कुंडी में झूलता ताला मुझे मुँह चिढ़ा रहा था। मैं कुछ देर उसे देखता खड़ा रहा। अपने को फालतू महसूस कर रहा था। होटल का लम्बा गलियारा आखिरी सिरे तक सूना था। अगर किसी कमरे से कोई बाहर निकले तो उसे मुझे यों ही बंद दरवाजे के सामने खड़े देखकर कैसा अजीब लगेगा!

बाहर लॉन में जाड़े की गुनगुनी धूप थी। बंगलोर में वैसे भी गरमी नहीं पड़ती। शाल के पेड़ों की विरल छाया में सीमेंट के बेंच खाली पड़े थे। होटल सुंदर था। चारों तरफ हरियाली के घेरे के बीच कुछेक कमरों का छोटा-सा होटल… विलासितापूर्ण नहीं, सुरुचिपूर्ण।

जेम्स ने ही बुक कराया था।

 
हल्की हवा में हिलते पेड़ मानों किसी बुजुर्ग की तरह सिर हिलाकर मेरी मानसिक स्थिति समझने का इशारा कर रहे थे। खयाल आया कि यहीं बाहर बेंच पर बैठकर उन दोनों के ‘निपटने’ का इंतजार करूँ।

पर यूँ बैठना बुरा लगा।

गलियारे से लॉन में उतरकर एक बार मैंने पीछे खिड़की की तरफ जाने के लिए कदम बढ़ाए पर अजीब लगा, खिड़की जरूर बंद होगी। और उन लोगों ने मुझे झाँकते देख लिया तो कैसा बुरा लगेगा।

मैं वापस घूमा और निकलकर बाहर चला आया, बाहर बजरी की सड़क पर।

एक बार घूमकर उस गलियारे को देखा जिसके आखिरी छोर पर मेरी पत्नी का कमरा था।

दूर से दिखता सपाट बंद दरवाजा… अंदर कैसी गरम उत्तेजक गतिविधि चल रही होगी। दिल में एक लहर-सी उठी, मैंने सिर घुमा लिया।

बजरी की सूनी सड़क पर पेड़ों की छाया थी। सूखे पीले पत्ते गिरे हुए थे। कुछ दूर जाकर यह रास्ता मुख्य सड़क से मिलता था, जहाँ इक्का-दुक्का गाड़ियाँ दौड़ रही थीं।

आज रविवार का दिन था। मैं पैरों को ठेलता मुख्य सड़क पर चला आया। कुछ देर यात्रियों के लिए बनी शेड में बैठा रहा… कहाँ जाऊँ!

दो तीन बसें आईं, गुजर गईं। एक बार सोचा पैदल ही चलता दूर चला जाऊँ… उठा भी, पर फिर बैठ गया।

पैदल चलने की इच्छा मर गई थी।

सामने दुकानों के पल्ले बंद थे, आज संडे है।

एक खाली ऑटो आ रही थी, शोर करती… मैंने उसे इशारा किया। कल आते समय रास्ते में लगभग पंद्रह मिनट पहले एक पार्क और उससे सटा बिग बाजार का मॉल दिखा था।

मैंने ऑटो वाले को जगह बताई और उसमें सवार हो गया।

जेम्स-डायना… इंटरनेट पर स्वैप के कितने ही विज्ञापन आजमाने के दौरान मिले अनुकूल दंपति। चैटिंग, फोन से एसएमएस और वार्तालाप और फिर तस्वीरों की अदला-बदली। दोनों सरल, ईमानदार और उत्साही प्रतीत हुए थे। चारों की आपसी बातचीत का सिलसिला चल निकला था।

जेम्स उम्र में कुछ छोटा होने के कारण कभी कभी कुछ किशोर-सी भावुक या बचपने जैसी बातें कह देता – ‘आई लव यू!’ वह फोन पर कुछ ज्यादा खुलकर कामुक बातें करना चाहता।

कल्पना को अखरता पर वह समझदारी से सम्हाल लेती।

फोन पर जेम्स उसकी ‘स्वीट’ आवाज पर फिदा होता। आज उसे उस ‘स्वीट’ आवाज की आनंदभरी सिसकारियाँ सुनने को मिलेंगी… उसे कैसी लगेंगी?

पर क्या जेम्स उसे आज ‘फक’ कर पाएगा? कल्पना बड़ी मजबूत मन वाली है। फोन पर भी कल्पना ही प्रबल रहती थी, जेम्स उसके सामने प्रार्थना ही करता नजर आता था।

पता नहीं आज क्या होगा, कहीं कल्पना उसे डाँट या टाल न दे? यह खयाल मुझे असह्य लगा। नहीं नहीं, कल्पना मस्ट बी फक्ड टुडे। इतनी दूर से इसीलिए आए हैं। वो एक बार चुद जाए, बस।

लेकिन अगर बंद कमरे में संभोग के लिए तैयार बैठी औरत के साथ नहीं कर पाया तो? तो फिर लानत है ऐसे मर्द पर। जेम्स की कल्पना के प्रति दीवानगी मुझे भरोसा दिलाती थी कि जब वह करेगा तो पूरे दिल से करेगा और कल्पना की पसंद को ऊपर रखेगा।

पर इस समय सचमुच के मौके पर मुझे शंका भी हो रही थी। खाली हाथ आया तो एक लात दूंगा साले की चूतड़ पर। किस बात के लिए मर्द पैदा हुआ है बे? कमरे में चुदने के लिए परोसी हुई औरत से डर गया? धिक्कार है!

पर मेरा मन नहीं मानता। सेक्स के लिए ही मिले दो जवान स्त्री-पुरुष के बीच अकेले कमरे में सेक्स न हो, असंभव है। उस पर से जेम्स तो और भी स्वैपिंग का अनुभवी और बेशर्मी की हद तक बेझिझक है, वह कल्पना को नहीं छोड़ेगा।

मेरा मन उल्टे कल्पना करता है – वहाँ बंद कमरे में यौवन की नदी उमड़ रही होगी। जेम्स उसमें डूब-डूबकर नहा रहा होगा। कल्पना की भरी-भरी मांसल बाँहें, जो मुझे अपनी गर्दन और कंधों पर महसूस होती थीं, वे जेम्स के गले में कस रही होंगी… मुझे आश्चर्य हुआ क्या सचमुच ऐसा हो रहा होगा?

वैसी ही जोर से? या फिर कल्पना संकोच में होगी? उसके होंठों का अनूठा स्वाद, उसकी साँसों की मादक गंध! क्या जेम्स उन पर…? मुझे पैंट के अंदर एक सुगबुगाहट महसूस हुई।

साले अपनी बीवी को दूसरे के पास छोड़ के आया है, कैसा मर्द है बे तू? मैंने खुद को गाली दी।

 
पार्क में कुछ बच्चे क्रिकेट का सामान लिए खेलने आ रहे थे, दोपहर के आरंभ का समय था, पार्क खाली-सा था, सूनी डालियों पर चिड़ियाँ चहचहा रही थीं, हल्की हवा में मंद-मंद पेड़ हिल रहे थे, ऊपर बादल रहित आकाश में चीलें उड़ रही थीं।

नई नई ब्रा… फिरोजी रंग की… ‘अमान्ते’ कंपनी की अत्यंत महंगी लिंगरी! इस मौके के लिए खास खरीदी गई।

पतली अर्द्धपारदर्शी जाली पर बेलबूटे का सुंदर काम… कल्पना के वक्ष उभारों पर ऐसे फिट बैठती थी मानों उन्हीं के लिए बनी हो।

उसका अर्द्धचंद्राकार अंडरवायर स्तनों की जड़ में पसलियों पर चिपककर बैठ जाता था और वक्षों को अपने कपों में सुंदर आकार में ढाल देता था।

कपों में बेलबूटों की पारदर्शी फाँकों से अंदर की गोरी त्वचा ऐसे झाँकती थी कि लगता बेलबूटे त्वचा पर ही कढ़े हुए हों।

खरीदने के बाद फिटिंग देखने के लिए जब कल्पना ने पहना था तभी देखा था, आज जेम्स उसका उद्घाटन कर रहा होगा! कैसा लग रहा होगा उसे?

क्या कल्पना उसे देखने छूने-सहलाने दे रही होगी? कपों में खूबसूरती से उभरे लचकदार भारी स्तन… जेम्स की नजर उन पर चिपकी होगी, वह उन्हें सहला रहा होगा।

ब्रा की रेशमी छुअऩ! पीछे हाथ बढ़ाकर पीठ पर उसकी हुक खोल रहा होगा… नंगे स्तन प्रकट हो रहे होंगे अपने भार से किंचित झूलते! भरे हुए मांस पिंड, हाथों में समाते, अनुकूल आकारों में ढलते…

जेम्स पागल हो रहा होगा!

मुझे विस्मय हुआ… क्या सचमुच ऐसा हो रहा होगा! खुशी की एक तरंग मुझमें दौड़ गई। मैं एब्नार्मल तो नहीं हूँ?

मैं उठा और एक नल खोलकर उसके नीचे हथेलियों का दोना बनाकर पानी पीने लगा।

पानी गले के अंदर जाने पर महसूस हुआ कि मुझे प्यास लगी थी। मुँह का पानी हाथ से पोछकर पैंट में पोंछ लिया। पार्क के पार बिग बाजार का बड़ा सा साइनबोर्ड धूप में चमक रहा था।

मैं चलता एक बेंच पर बैठ गया। पृष्ठभूमि की सफेदी पर काले अक्षर अधिक चमक रहे थे।

मैं यहाँ खाली बैठा हूँ और वहाँ मेरी बीवी का काम चल रहा होगा।

कितनी पुरानी इच्छा! पत्नी के किसी परपुरुष से संभोग होने की।

वह उसके भार के नीचे दबी, उसके लिंग की मोटी कील से भिदी, छटपटा रही हो और वह वार पर वार किए जा रहा हो और वह पानी छोड़ती सीत्कारें भर रही हो, जबर्दस्त मैथुन से चौड़ी होकर योनि के होंठ किंचित खुल गए हों… उनके अंदर का गुलाबी अंधेरा झाँक रहा हो… वह चरमसुख प्राप्ति के बाद आँखें मूंदें निढाल पड़ी हो थकी हुई… गहरी साँसें लेती, होंठों के किनारे से लार और योनि से डबडब वीर्य बहाती, बिस्तर को भिगोती… कितने ही दृश्य, कितनी ही कल्पनाएँ… सबकुछ कल्पना को ही लेकर।

मुझे आश्चर्य होता था कि मुझमें स्वयं दूसरी औरत से मैथुन की उतनी रंग-बिरंगी फंतासी नहीं थी। हालाँकि कल्पना को ‘विनिमय’ के लिए राजी करते समय मैंने किसी दूसरी औरत से संभोग-सुख लेने की गहरी इच्छा को ही कारण बताया था।

जेम्स बांका नौजवान है, कमउम्र, मुझसे ज्यादा ताकत से मैथुन करेगा।

आज उस वीडियो दृश्य में उसका लिंग साइज भी मुझसे बड़ा लगा।

अगर करेगा या कर रहा होगा तो कल्पना की हड्डी-हड्डी चटखा देगा… आज घर्षण से उसकी योनि फूल जानी चाहिए। लाल, टुस-टुस दुखती!

मुझमें रक्त की एक लहर सी उठी, मैंने मुट्ठी में दबोचकर उसे एक बार जोर से मरोड़ा ‘ओ जानेमन, आज तुम्हारा बेड़ा पार ही हो जाए..!!’

मैं मॉल के अंदर चला गया, कुछ देर तक स्टॉल में लगी वस्तुओं को देखता रहा पर जल्दी ही बाहर चला आया, बिना कुछ खरीदे खाली घूमना भी ठीक नहीं लगा।

बादल, बच्चे, क्रिकेट… दोपहर, धूप… आकाश… चीलें… बिग बाजार मॉल… दबते स्तन… गीले लार से चमकते चूचुक… रेशमी गुलाबी ब्रा… साँय साँय करती साँसें… गूंजते सीत्कार… बंद कमरे के अंदर जांघों पर पड़ती थापें थप थप थप…

मैंने अपनी पैंट की जोड़ चेक की, वहाँ गीलापन तो नहीं आ गया? हालाँकि अंदर सख्ती नहीं थी।

घड़ी में देखा, ग्यारह बज रहे थे, एक घंटा हो गया था, मैंने मोबाइल से जेम्स का नंबर मिलाया, फिर सोचा रहने दो। ज्यादा देर का मतलब है दोनों की ज्यादा देर की नजदीकी, ज्यादा संभोग।

मैं चाहता था कि आज पहले अनुभव में कल्पना की वो ठुकाई हो कि वो उसकी दीवानी हो जाए, दोनों में बार बार सेक्स होता रहे।

मेरी पत्नी की बार बार चुदाई… वल्ले वल्ले…

कुछ देर बाद मैंने कल्पना को फोन लगाया, उधर से जेम्स की आवाज आई!

तो इतनी जल्दी दोनों में दोस्ती हो गई?

जेम्स बोला- हो गया है, जल्दी आ रहे हैं।

तो क्या हो गया है? क्या उसने कल्पना को?

मेरे दिमाग में उन दोनों के संभोग की संभावना प्रबल हो गई, लिंग में रक्त दौड़ गया।

मैंने जेम्स को बता दिया कि मै कहाँ पर हूँ।

मैं सड़क की तरफ ही बैठा था।

कल्पना के फोन पर जेम्स… कल्पना के होंठों पर जेम्स के होंठ, उसके जननांगों पर उसका प्रहार!

अगर यह हो गया है तो आज का दिन याद रखूंगा… 17 अक्टूबर, मेरीपत्नी के बेवफा संभोग का बेहद खास दिन!

लेकिन पता नहीं ऐसा होगा भी कि नहीं।

कल्पना काफी तेज और सबल है, जेम्स उससे जबर्दस्ती नहीं कर सकता, अगर नहीं करने दिया तो फिर क्या किया एक घंटा उन दोनों ने?

 
मोबाइल बजा, कल्पना थी- कहाँ हैं?

उसकी मीठी आवाज में खनक थी, गुस्सा या व्यंग्य नहीं, मेरे उत्तर देने से पहले ही दूर मोड़ पर प्रकट होती जेम्स की मोटरसाइकिल दिख गई।

वह आ रही थी, जेम्स सामने हैंडिल पकड़े था, सीना फैलाए, पीछे से झाँकती कल्पना!

मेरी आँखों में यह दृश्य बैठ गया।

जब बाइक सामने आकर रुकी तो मुझे खुशी हुई। अभी एक घंटा पहले जो स्त्री अपने स्वाभाविक अभिमान में तनी हुई थी वह अभी उसी की भोग्या बनकर उससे सटकर बैठी थी। हालाँकि उसने जेम्स की कमर में बाँह नहीं डाल रखी थी, जैसा कि मैं चाहता था। लेकिन इतना भी कोई कम मजेदार नहीं था।

मेरी आशंका के विपरीत वह मुस्कुरा रही थी, हालाँकि वह मुस्कुराहट औपचारिक भी हो सकती थी।

जेम्स के चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ परेशानी भी थी।

मैं पूछना चाहता था, काम हुआ?

पर डायना की माँ ही हालत और खराब हो गई थी और उसे फोन पर फोन आ रहे थे। ऐसे में मुझे उसे डायना को शीघ्र भेजने के लिए कहने में भी संकोच हो रहा था।

पर उसने हमें आश्वस्त किया कि वह जाकर डायना को जल्दी भेज देगा।

जेम्स के जाने के बाद कल्पना सीरियस हो गई थी, उससे मैंने पूछा, कहाँ चलोगी? होटल या कहीं और?

वह कुछ उखड़ी सी बोली- मैं नहीं जानती।

थकी-सी लग रही थी।

हमें एम जी रोड देखना था, उसके विलासितापूर्ण बाजार की बड़ी चर्चा सुनी थी। मैंने एक ऑटो रुकवाया और वहीं चल पड़ा।

ऑटो में कल्पना मुझ पर लदकर बैठी। इतनी सुस्त पड़ गई कि लगभग सारे बदन का बोझ मुझ पर डाल दिया। मैं उसे सम्हाले था, नहीं तो गिर पड़ ही जाती।

उसकी यह हालत देखकर मुझे आश्चर्य हो रहा था। ऐसी थकान!! भला और किस चीज की हो सकती है? पक्का यह चुद चुकी है और भरपूर चुदी है।

वाह रे जेम्स! क्या हालत कर दी इसकी!

रति-क्लांत औरत…

उसे मैं खुद पर सम्हाले था, दिल कर रहा था ऑटो का सफर यूँ ही चलता रहे।

कोई और कार्यक्रम भी तो नहीं था। जब तक उन लोगों का फोन नहीं आता, इंतजार ही करना था।

कल्पना आँखें मूंदे सो रही थी या जगी, पता नहीं, मैं उसे प्यार से, कभी ममता से, कभी ईर्ष्या से, कभी बस ‘वो मेरी औरत है’ इस एहसास से उसे देखता था, मन में गाने की पंक्तियाँ गूंज रही थीं ‘गाता रहे मेरा दिल!’

एमजी रोड सचमुच विलासितापूर्ण जगह है। पर वह कलकत्ते की महानगरीय विलासिता की तुलना नहीं कर सकता। यहाँ ऐसी कितनी ही जगहें हैं।

कल्पना की थकान देखते हुए मैंने ज्यादा घूमना-फिरना नहीं किया, हम एक रेस्तराँ में गए, कल्पना ने कुछ नहीं खाया। कहीं डूबी-सी थी। ऐसा बंद हो गई थी कि उससे कुछ कहना-पूछना संभव नहीं था।

मैंने अपनी प्रचंड उत्सुकता को दबा रखा था, चलो बाद में पता लगेगा।

उन लोगों का फोन नहीं आ रहा था, मैं जब भी उनका फोन लगाता, व्यस्त आता। हमें संदेह होने लगा था कि कहीं धोखा तो नहीं दे रहे वे लोग?

कल्पना गुस्सा कर रही थी। मुझे डर हो रहा था कहीं डायना की माँ बहुत ही सीरियस तो नहीं हो गई। ऐसी हालत में डायना भला कैसे आएगी।

कल्पना का गुस्सा मैं समझ रहा था।

दो घंटे बाद हमपर गाज गिरी, उनका SMS आया – Diana’s mother expired. Pray for her soul!

हम दोनों एक-दूसरे को देखते रह गए। हार्ट अटैक का मामला होने के कारण मुझे डर तो था, लेकिन मर ही जाएगी इसका यकीन नहीं था।

अब?

हमारे सामने जैसे बंद दीवार थी, नाटक का पर्दा जैसे कहानी के बीच में ही गिर गया था, कल्पना की कुंठा का अंत नहीं था, बुरी तरह ठगी गई थी बेचारी… दूसरा पुरुष उसे भोगकर चला गया था और जाकर अंगूठा दिखा दिया था।

उसका गुस्सा फूट पड़ा, उसने उन लोगों को बुरा-भला कहते हुए मुझे इतनी झाड़ लगाई कि मुझे सचमुच लगने लगा कि मैं दुनिया का सबसे नाकारा, सबसे गधा, सबसे मुँहचोर, सबसे घोंचू आदमी हूँ। जिस औरत को भोगने आया था उस औरत का मुँह तक नहीं देख पाया था।

मैं उन लोगों को एक फोन तक नहीं कर पा रहा था, डूब मरने की बात थी।

भला कौन सा ऐसा मर्द होगा जो अपनी बीवी को चुदवाकर यूँ अपना-सा मुँह लिए लौट जाए?

हम लोगों ने उसी रात मद्रास वापसी की बस पकड़ ली। हालाँकि हमारे पास कल शाम की वापसी यात्रा का ट्रेन टिकट था।

रात को जेम्स का फोन आया, उस समय हम लोग बस में बैठे थे। उसने जल्दी-जल्दी में ही गहरा अफसोस प्रकट किया, कई बार सॉरी कहा, माफी मांगी।

घटना ऐसी हो गई थी कि क्या किया जा सकता था, डायना बहुत रो रही है, सगे-संबंधियों से घिरी है, बाहर के लोग जल्दी-जल्दी पहुँच रहे हैं, वगैरह।

हमने उसे नहीं बताया कि हम आज ही लौट रहे हैं। बताकर क्या करना था।

अगले दिन दोपहर को डायना का फोन आया- तुम कहाँ हो, किस समय लौट रहे हो, स्टेशन पर तुम्हें कम से कम देखने आऊंगी।

मैंने अपने को बेइंतहा बेवकूफ महसूस करने के बावजूद उससे संवेदना जताई – तुम हमारी चिंता मत करो, हम ठीक से हैं, माँ काजाना बहुत बड़ा नुकसान है, तुम उनकी अकेली बेटी हो, अंतिम क्रियाओं को पूरा करो, हम फिर कभी मिलेंगे, हम बाहर घूमने निकल पड़े हैं, उधर से ही मद्रास चले जाएंगे, वगैरह।

मेरी कल्पना में उसका रोता आँसू भरा चेहरा आ रहा था, कैसी माँ की लाश पड़ी होगी, लोग-बाग जमा होंगे, वह रो रही होगी। ऐसे में सेक्स की बात सोची भी कैसे जा सकती है।

लेकिन कल्पना फुँफकार रही थी- उसे डाँटा क्यों नहीं, माँ की ऐसी हालत थी तो हमें क्यों बुलाया? धोखेबाज कहीं की, अपने पति के लिए औरत जुटा रही थी। वही हर समय बढ़-बढ़कर बात करती रही थी, फिर स्वैप के लिए पहले खुद क्यों नहीं आई? जेम्स को पहले क्यों भेज दिया? वह धूर्त है, अपना काम निकाल लिया, अब उसको क्या पड़ी है। तुम उसको बोलो कि अब क्रिया-करम निपटाकर तुम एक महीने के बाद कलकता आओ। अब उसको आना पड़ेग, उसको झाड़ो कस कर!

मैं मनों क्या, टनों शर्म में दबा जा रहा था।

न कोई असावधानी थी, न धोखा, न मक्कारी।

यह हद से हद डायना के गलत अंदाजे और जल्दबाजी का नतीजा था, माँ बीमार थी, एक महीने से उसको अस्पताल में भर्ती करना, निकालना चल रहा था, तो ऐसे में इंतजार करना चाहिए था, हम लोग बाद में भी आ सकते थे।

हमने कहा भी था कि माँ को ठीक हो जाने दो, फिर आएंगे लेकिन डायना शुरू से ही जल्दबाज थी, उसने कहा कि नहीं, इतने दिन से इंतजार कर रहे हैं। अब प्लान कर लिया है और टिकट भी हो गया है तो आ ही जाओ, हम मैनेज कर लेंगे।

अब एकदम से माँ को हार्ट अटैक ही आ जाएगा इसकी भविष्यवाणी कौन कर सकता था। दोष आधा डायना की जल्दबाजी का, आधा परिस्थिति का था।

मुझे खुशी थी कि कल्पना का काम हो गया था, अपने बारे में तो शंकित पहले से ही था, कल्पना का कराना जरूरी था। मैं बल्कि डायना को धन्यवाद ही दे रहा था कि उसने पहले जेम्स को भेजा और इस तरह कल्पना का सतीत्व टूटा। लेकिन मैं यह खुशी उससे बाँट नहीं सकता था।

जिस समय वह गुस्से में नथुने फुलाए फुँफकार रही थी उस वक्त भी मैं उसकी योनि की तहों में जेम्स के घूमते वीर्य की कल्पना कर रहा था।

मुझे खुद के लिए उतना अफसोस नहीं था। ये जरूर था कि मैं भी कर लेता तो अच्छा रहता।

हमने एक दिन रुककर मद्रास देखा और एक लम्बी कहानी को समाप्त करते हुए वापस कलकत्ता लौट गए।

लगभग एक साल लगे कल्पना को इस घटना पर थोड़ा थोड़ा बात करने लायक नॉर्मल होने में। उसके बाद टुकड़ों में सुन-सुनकर मैंने घटनाओं की कड़ियाँ जोड़ीं। जेम्स और कल्पना ने मिलकर उस दिन उस कमरे में जो किया था वह कुछ इस तरह था :

कहानी जारी रहेगी

 
दोस्तो अब तक आप मेरी कहानियां सलील नाम से पढ़ते रहे थे पर मेरी रिकवेस्ट पर एडमिन जी ने मेरा रियल नाम जो सतीश है बदल दीया है तो दोस्तो आगे सतीश नाम से ही कहानियां पोस्ट करूँगा धन्यवाद आशा करता हु आपका प्यार मिलता रहेगा आपका अपना

........सतीश

 
लगभग एक साल लगे कल्पना को इस घटना पर थोड़ा थोड़ा बात करने लायक नॉर्मल होने में। उसके बाद टुकड़ों में सुन-सुनकर मैंने घटनाओं की कड़ियाँ जोड़ीं। जेम्स और कल्पना ने मिलकर उस दिन उस कमरे में जो किया था वह कुछ इस तरह था :

दरवाजा बंद करके जेम्स घूमा तो एक क्षण ठहर गया, पलंग के सिरहाने थोड़ा सा पीठ टिकाकर तिरछे बैठी कल्पना नजर नीची किए अपने पैरों की ओर देख रही थी जहाँ उसकी उंगलियाँ फर्श को कुरेद रही थीं।

पति के जाने के बाद जेम्स उसे अभी भरपूर नजर से देख रहा था।

यौवन से भरपूर लड़की…

लड़की ही लगती है, उम्र में बड़ी होने के बावजूद… कसे बदन की… ताजगी और सुंदरता से भरी!

उसके अपने शब्दों में एकदम ‘हॉट’ ‘सेक्स’ और ‘फकिंग’ के लिए ही बनी हुई।

दो सुडौल पाँव, नीली जींस में कसे, उनके बीच की जगह छिपी हुई, ऊपर शरीर पर नीले शर्ट की पतली मादक परत…

कद में ज्यादा लम्बी नहीं, जोड़ी लगने लायक… लुकिंग ग्रेसफुल!

उसके मन में आया कि इस पहले मिलन के अवसर पर भेंट करने के लिए एक फूल ले लेता तो अच्छा रहता। लेकिन क्या करता, अस्पताल से जल्दी में आना पड़ा था।

कल्पना ने एक क्षण को सिर उठाया तो नजरें मिल गईं और फिर तुरंत ही झुक गईं।

इस एक क्षण का मिलना और झुक जाना जेम्स को बहुत ही अच्छा लगा, उसने उसी क्षण में अपनी मुसकुराहट दिखला दी।

वह उससे मिलन के लिए कब से तरस रहा था, कब से वह उसकी आवाज सुनकर, उसकी फोटो देखकर ‘गर्म’ हो रहा था। आज जब वह सामने मिली तो ‘गर्मी’ पर काबू पाना मुश्किल होने लगा।

उसके पति के साथ बात करने तक में वह किसी प्रकार ठहरा रहा था, लेकिन कमरे में उसके साथ अकेले होते ही उसकी उत्तेजना सनसनाकर उफन गई, साँस फूलने लगी।

उसने कमरे की खिड़कियाँ बंद कीं, परदे फैला दिए और पलंग पर आकर उसके पास बैठ गया।

कमरे में केवल ट्यूबलाइट की रोशनी रह गई।

‘हाऊ आर यू?’ वह आकर पास बैठ गया।

‘फाइन…’ सिर झुकाई कल्पना का उत्तर आया।

उसके बालों की सोंधी गंध ने जेम्स को आकर्षित किया।

‘बहुत दिन से मिलने का वेट कर रही थी। अब चांस मिली।’ जेम्स की अपने किस्म की हिंदी का नमूना, जिसे कल्पना ने फोन पर काफी बार सुना था।

जेम्स का गला सूख रहा था, उसने मेज पर से बोतल लेकर पानी का घूँट लिया।

‘आने में कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुआ? बहुत लम्बा जर्नी है।’ उसने कल्पना का हाथ अपने हाथ में लिया। कोमल हाथ के स्पर्श से उसके लिंग में रक्त दौड़ गया।

‘नहीं… हाँ…’

उसके झुके चेहरे के नीचे छाती पर शर्ट के बटनों का खिंचाव देखकर जेम्स अंदर के भराव का अंदाजा लगा रहा था। उसने कितनी बार कल्पना से टॉपलेस या खाली ब्रा में फोटो मांगी थी, पर कल्पना ने साड़ी-ब्लाउज पहनी फोटो से आगे कुछ नहीं दिया था। उसको ही देखकर कितनी बार हस्तमैथुन कर चुका था।

‘तुम दोनों हस्बैंड-वाइफ बहुत सुंदर है। वेरी हैण्डसम पेयर(बहुत सुंदर जोड़ी!)’ जेम्स हिन्दी में ‘आप’ और ‘तुम’ के बारे में अनिश्चित रहता था।

‘थैंक्स! आप लोग भी सुंदर हैं।’ कल्पना ने चेहरा उठाया, नजर मिली, इतने पास से कि फिर झुक गई।

ಸುಂದರ ಮಹಿಳೆಇಂದು.ನಾನು ಅವಳ ಫಕ್ ಹಾಗಿಲ್ಲ (सुंदर माहिले. इन्दु नानु अवला फक हागिल्ला – सुंदर औरत, आज मैं इसको फक करूंगा।)

‘अभी आप डायना को नहीं देखा।’ उसने खिसककर पैंट में सख्त हो गए लिंग को एडजस्ट किया।

‘वो भी तो आ रही है ना, देख लेंगे।’

‘तुम उससे बहुत सुंदर है और sexy. Really, this is not a joke (सचमुच, यह मजाक नहीं है।) तुमारा फोन पर voice भी very sexy था।’

‘सेक्सी…’ कल्पना ने यह शब्द पहले भी सुना था। डायना से भी अधिक सेक्सी होने की प्रशंसा अजीब लगी।

‘में तुमारा फोटो देख के बहुत excited थी। लेकिन सामने में you are more sexy looking than….’ कहते कहते जेम्स की साँस और तेज हो गईं।

कल्पना को चुप रहते देखकर उसने पूछा- क्या में तुमको पसंद नहीं हुआ?

‘नहीं नहीं!’ कल्पना के मुँह से हड़बड़ाकर निकला।

‘तो ठीक है…’ कहते हुए उसने कल्पना की ओर होंठ बढ़ा दिए। ज्यादा औपचारिकता बरतने का उसके पास धैर्य नहीं था, उसने उसके चेहरे को पकड़कर अपनी ओर खींचा। होंठों से होंठ टकराए और कल्पना ने दबाव में मुँह खोल दिया।

कल्पना का मन था अभी और बात होती, थोड़ा समय बीतता, लेकिन वह जिस तरह हाँफने लगा था, उसके लिए संभव नहीं था।

दो जोड़ी होंठों की परतें जल्दी ही एक-दूसरे से गीली हो गईं। कल्पना ने सह लिया, हालाँकि जेम्स की गंध और स्वाद बुरे नहीं थे।

जब वे अलग हुए तो कल्पना ने पाया कि वह भी थोड़ी हाँफ रही है। यह एक अनुभवी पुरुष का चुम्बन था, इसका असर नहीं होना मुश्किल था।

 
जेम्स की साँस धौंकनी की तरह चल रही थी। उसने उसकी शर्ट की ओर हाथ बढ़ाया। कल्पना कुछ अकबकाई सी पीछे हुई। अभी वह चुम्बन ही मान-मनुहार से न दे पाने का अफसोस कर रही थी कि जेम्स जल्दी जल्दी उसके बटन खोलने लगा। जहाँ बटन फँसी वहाँ लगभग तोड़ते हुए-सा बढ़ गया। वह ज्यादा परिष्कृत था भी नहीं, और जो कुछ परिष्कार था वह एक जवान ‘सेक्सी’ औरत को देखकर जवान मर्द में बनाए रखना मुश्किल था।

कल्पना को अजीब लग रहा था, यह क्या हो रहा है?

एक गैर मर्द का इस तरह से ‘हमला’?

मगर उसकी बेकाबू उत्तेजना और कुछ परवाह नहीं करने वाली लगभग रूखी-सी हड़बड़ी उसे दूसरे स्तर पर नई भी लग रही थी। यह उसके पति से कितना अलग है।

शर्ट खींचकर जेम्स ने उसी तेजी से उसकी पैंट की बेल्ट खोली और बिस्तर पर पीछे ठेलकर गिरा दिया। उसने उसके पाँव उठाए और पैंट पैरों से बाहर खींच दी।

सिर्फ ब्रा-पैंटी में देखकर जेम्स की आँखें जलने लगीं – जैसे लहकते आग के सामने से किसी ने पर्दा हटा दिया हो।

कल्पना के मन में कहीं आकांक्षा थी कि वह उसके बेहद खूबसूरत और महंगे ब्रा-पैंटी सेट की तारीफ करेगा मगर जेम्स ने जल्दी-जल्दी अपनी शर्ट-पैंट, गंजी-चड्डी उतारी और बिस्तर पर चढ़ गया।

उसका तना हुआ लिंग देखकर कल्पना को अजीब लगा।

यही उसमें ‘घुसने’ वाला था।

वह सिहर गई।

कोई पूर्व काम-क्रीड़ा नहीं।

अंधे आवेश में उसने कल्पना की कमर में हाथ डालकर पैंटी इस जोर से नीचे खींची कि अगर कल्पना कमर उठाकर सहयोग नहीं करती तो वह फट ही जाती, हालाँकि उस वक्त भी कल्पना हाथ से रोक रही थी।

जेम्स उसपर चढ़ गया और… इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कल्पना ने खुद टांगें फैलाईं कि जेम्स ने उन्हें जबरदस्ती फैलाया। जेम्स के हिंसक से व्यवहार और और उसके फन काढ़े लिंग को देखते हुए और कोई रास्ता था भी नहीं।

भय और लाज से मुंदती आँखों के बीच वह उसे जितना देख पाई थी उसमें यह उसे अपने पति की अपेक्षा बड़ा और मोटा लगा था।

जेम्स ने उसकी दरार में लिंग टिकाया और छिद्र खोजने लगा। योनि-होठों में नहाने का गीलापन बचा हुआ था और इस परिस्थिति की कामुक प्रत्याशा ने उनमें चिकनापन लाना शुरू कर दिया था।

लिंग वहाँ पहुँचकर अंदर सरकने लगा।

कल्पना हैरानी से सिर उठाकर देख रही थी कि कैसे वह कमर से नीचे बिल्कुल नंगी है और उसकी योनि में एक बड़ा-सा साँवला लिंग जोर लगा-लगाकर घुसता जा रहा है।

बालरहित उभार पर चल रही यह क्रिया ट्यूबलाइट की रोशनी में साफ दिख रही थी। वह जेम्स के चेहरे को देख रही थी जो उसकी तरफ से बेपरवाह जल्दी से पूरा अंदर धकेल देने में जुटा था।

और कुछ ही सेकंडों और झटकों की तो बात थी, उसके गोरा मांसल उभार साँवले हल्के बालयुक्त पेड़ू से ढक गया।

कल्पना को अंदर सख्त भराव महसूस होने लगा। यह उसके पति से निश्चय ही बड़े साइज का था।उस पर चढ़ी हुई योनि लिंग के साथ धड़कने लगी। कल्पना का मन विद्रोह करने लगा, यह क्या हो रहा है। क्या इसी के लिए इतनी दूर आई है? यह तो मशीन जैसा चालू हो गया।
 
योनि में लिंग की रगड़ में रूखापन तो नहीं था पर वह अभी इतनी गीली भी कहाँ हुई थी। जेम्स ने मौका ही नहीं दिया था।

ठक ठक ठक! जेम्स पल भर में ही पूरे वेग में आ गया। लिंग ने बस एक य़ा दो बार पूरे राह की लंबाई नापी थी और वह क्षण जब पुरुष को अपने ऊपर अधिकतम धैर्य रखकर अधिकतम कोमलता दिखानी चाहिए और स्त्री को उसके लिए फैलने का मौका देना चाहिए, जेम्स जल्दी-जल्दी चोट करने लगा था।

ओफ, यह जल्दबाज लड़का, फोन पर भी उतावली दिखाता था, ‘हाइ’, ‘हाउ आर यू’ के बाद सीधे सेक्स पर आ जाता था, जबकि कल्पना कुछ इधर-उधर की, दोस्ती के लिए बातें करना चाहती।

इस मशीनी संभोग में आनंद कहाँ। वैसे, लिंग का आकार, उसके भराव का एहसास और धक्कों की तीव्रता पति से बढ़-चढ़कर थे और इसकी चोटों की मार से तन हिचकोले खा रहा था लेकिन मन कहीं दूर अछूता पड़ा था।

हम्फ… हम्फ… हम्फ… कुछ ही सेकंड हुए कि जेम्स हाँफता हुआ उसके अंदर छूटने लगा।

अटपटेपन और शर्म से घबराकर कल्पना ने आँखें मूंद लीं।

यद्यपि वीर्य की अचानक आई चिकनाई ने योनि में घर्षण के एहसास को बेहतर बना दिया था, पर यह बेहद संक्षिप्त था। जेम्स हिचकियाँ खाता समाप्त होकर बगल में लुढ़क गया।

कल्पना अलग पड़ी थी। योनि बाढ़ से भरे खेत की तरह बह रही थी और मन बिन बारिश के खेत की तरह सूखा। वह यों ही सोचती पड़ी रही। सब कुछ यंत्रचालित सा एक झोंके में हो गया था।

न चाहते हुए भी उसकी आँख गीली हो गई। औरत की नियति : पुरुष उसको भूखे भेड़िए की तरह ही देखता है।

जेम्स उससे लिपटा पड़ा हुआ था, उसकी साँसें कल्पना के नंगे कंधे और गर्दन पर पड़ रही थीं।

कल्पना का मन हुआ कि उसको वैसे ही छोड़कर कमरे से निकल जाए लेकिन उस अवस्था में उससे एक अंतरंगता का एहसास मन में आए बिना रह नहीं सका, उसके साँसों की गंध अच्छी थी।

कल्पना ने घूमकर उसे देखा, ताकतवर सेक्स के बावजूद वह उस समय बच्चे-सा लगा, कल्पना ने हाथ उसकी पीठ पर रखा, फिर हटा लिया।

उसे पति की याद आई: कहाँ है और क्या कर रहा है? उसे दूसरी स्त्री का स्वाद लेने की बड़ी इच्छा है। यह सब वह उसी के लिए कर रही है। मेरा हो जाने के बाद वह डायना को कर सकेगा। आह, अपनी ख़ुशी के लिए मुझसे क्या क्या करवा रहा है। ऐसा भावहीन सेक्स वह जिंदगी मे पहली बार भुगत रही थी।

कल्पना ने अपने पेट पर से जेम्स का हाथ हटाना चाहा, पर वह और लिपट गया और उसके बदन पर हाथ फेरने लगा।

‘तुम बहुत सुंदर है।’ वह उठा और उसके चेहरे को देखने लगा, ‘very young looking (बहुत कमसिन दिखने वाली)।’

कल्पना को शर्म आने लगी। उसने चेहरा घुमा लिया।

‘लगता नहीं तुम फोर्टी (चालीस) का है। 26-27 का लगता।’ जेम्स ने उसके घूमे हुए चेहरे को, गले को चूमा। ‘श्याम बहुत लकी है। तुम और श्याम का बहुत nice pair (सुंदर जोड़ी) है। श्याम भी क्या स्मार्ट और हैंडसम है।’

 
उसने उसके स्तनों पर हाथ फेरा। ‘तुमारा बूब्स, wow! कितना big, round और full…! डायना का बी boobs बड़ा है, लेकिन वो hang करता, तुमारा जैसा सॉलिड नईं।’ कल्पना उसके हाथों को हल्के हल्के रोकती सिर घुमाए सुन रही थी। कितनी आसानी से जेम्स अपनी पत्नी की बुराई कर दे रहा था !

कल्पना के स्तन संवेदनशील थे। उसके चूचुक फिर सख्त हो गए थे। जेम्स उन्हें छेड़ रहा था। कल्पना उसका हाथ पकड़ लेती थी, मगर जेम्स उसको धोखा देता कभी इस चूचुक से, कभी उस चूचुक से खेल रहा था। कभी सहलाता, कभी मौका पाकर उन्हें चुटकी में पकड़कर हल्के हल्के मसल देता- ऐसा सुंदर चूची rare (दुर्लभ) है। Like small dates (नन्हें खजूर जैसे), with big circles (बड़े वृत्तों के साथ)!’

जेम्स की बातों से कल्पना के चूचुकों में और कड़ापन आ रहा था, चुटकी से पकड़ लेता तो सहना मुश्किल हो जाता – बड़ी गुदगुदी और सुरसुराहट होती।

एक बार उसने चुटकी ज्यादा जोर से दबा दी तो दर्द से कल्पना ने उसकी गरदन में दाँत गड़ा दिए।

इस डर से छुड़ाने की कोशिश नहीं की कि कहीं चुटकी में पकड़े चूचुक और न खिंच जाएं। लेकिन उस दर्द पर जेम्स की हथेली की अगली सहलाहट ने आनन्द की एक तीव्र लहर चढ़ा दी।

यह खेल बार-बार चल रहा था और कल्पना ‘उफ्फ उफ्फ’ कर रही थी। जेम्स इस खेल का पूरा आनन्द उठा रहा था। वह उसके विरोध को असफल करता हुआ कभी पूरे स्तन को ही हाथ में भरकर छाती के ऊपर इधर से उधर लचकाता, कभी उनके ऊपर हथेली को बस हल्का-सा चलाकर चूचुकों की सख्ती को हथेली की गुद्दी में महसूस करता, कभी चूचुकों को उंगली की नोक से दबाकर मांस में ही घुसा देता।

जेम्स ने पूरे स्तनों में चेहरा दबा-दबाकर उनकी मांसलता का आनन्द लिया और फिर अपने नजदीक के दाहिने चूचुक को मुँह में खींच लिया। उत्तेजना और सनसनाहट से कल्पना का हाथ चल गया और जेम्स के गाल पर एक जोर का थप्पड़ जा लगा।

जेम्स हैरान हो गया।

कल्पना ने चिंतित होकर कि जेम्स कुछ और न समझ ले उसके चेहरे को खींच लिया और उसके होठों को चूसने लगी।

जेम्स ने भी उत्साह से चूसकर जवाब दिया मगर अगले ही क्षण अपने होठों पर दाँतों की तीखी चुभन महूसस कर अपने होंठ छुड़ा लिए। वह चकित था।

‘कमाल की सेक्सी है यह औरत! क्या एक्साइटमेंट होता है इसको!’ कल्पना पहली बार के जबरन दैहिक शोषण -जैसे संभोग की हैरान अवस्था से निकलकर क्रुद्ध सिंहनी बन चुकी थी।

जेम्स ने स्तन छोड़े और पेट, कमर, जाँघों को सहलाता नीचे उतरा, जांघों के बीच जाकर उसका हाथ रिसते वीर्य से भीग गया।

कल्पना ने उसके हाथ हटाने चाहे, मगर जेम्स आग्रही था, उसने उंगली घुसाकर चुभलाया, कल्पना ने उसका हाथ पकड़ लिया मगर योनि में उंगली चलाने दी।

जेम्स ने पीछे खिसककर अपने और उसके बीच जगह बनाई और कल्पना का दायाँ हाथ खींचकर उपने लिंग पर लगा दिया।

ओह ! कल्पना को अजीब लगा- यही है जिसने पहली बार उसकी योनि खोली थी। जेम्स उसको पकड़ने के लिए दबाव दे रहा था।कल्पना करे भी तो क्या… इसी के लिए तो आई थी, कुछ देर तक दुविधा में रहने के बाद उसने उसे पकड़ लिया।
 
‘मेरा लंड कैसी डार्लिंग?’

सुनकर कल्पना ने वितृष्णा से चेहरा घुमा लिया। उसकी भद्दी भाषा को कब से सहती आई थी, हिंदी ज्यादा नहीं जानता सोचकर!

‘श्याम की लंड मेरे से बड़ा है या छोटा?’ कल्पना को हँसी आ गई।

इतना कर लेने के बाद भी पति की तुलना में अपनी आश्वस्ति खोज रहा था।

‘बोलो ना?’

‘बोलो ना, प्लीज?’

कल्पना ने उसके लिंग को जरा जोर से सहला दिया, जेम्स खुश होकर उंगली और जोर से उंगली चलाने लगा।

कल्पना की आहें निकलने लगीं, जेम्स के लिंग पर उसका हाथ भिंचने लगा, उसके चूचुकों को पुनः जेम्स ने मुँह में सम्हाला।

कल्पना के लिए चूचुकों पर चूसने के खिंचाव और गुदगुदी को संभालना हमेशा से मुश्किल होता था। उसके मुँह से उफ-उफ और सिसकारियाँ निकलने लगीं और सिर तकिए पर दाएँ-बाएँ होने लगा।

जेम्स की उत्तेजना फिर उबाल खाने लगी, क्या गजब का माल है! उसने कल्पना को अपनी तरफ करवट किया और उसकी बाँयीं टाँग पकड़कर अपनी कमर के ऊपर चढ़ा लिया। कल्पना पाँव खींचने लगी तो उसने अपना पैर घुटने से मोड़कर उठा दिया और उसकी टाँग को अपनी कमर में फँसा लिया।

कल्पना की जाँघें खुल गईं और बीच की दरार अपने आप लिंग के मुख पर आ लगी। जेम्स ने वहाँ की चिकनाई में लिंग को कुछ बार ऊपर-नीचे फिसलाया, फिर निशाने पर लगाकर कल्पना के नितंब पर हाथ रखकर अपनी तरफ दबाया और स्वयं भी आगे खिसक गया।

इस बार रास्ता परिचित था, और चिकना भी, लिंग आराम से अंदर सरक गया। डबडबाती योनि से निकले वीर्य की बाढ़ कल्पना की गुदा की तहों के बीच चिपचिपाहट बढ़ाती हुई बिस्तर को भिगोने लगी।

‘आ… आ… आ… आ…!’ कल्पना का मुँह खुल गया और बहकी-सी आवाज निकलती रह गई।

जेम्स लिंग को अंदर रखते हुए करवट से ही उसके अंदर-बाहर होने लगा। कल्पना पीछे होना चाहती तो वह उसके नितंबों को अपनी तरफ दबा लेता, उसकी कमर में फँसी टाँग कल्पना को ज्यादा पीछे होने की गुंजाइश नहीं देती। लिंग का घर्षण कल्पना की गर्मी बढ़ा रहा था।

वह जेम्स को रोकने या खुद निष्क्रिय रहने की कोशिश करते करते कभी खुद भी कमर उचका देती।

कुछ देर की असुविधापूर्ण मेहनत के बाद जेम्स करवट से घूमकर उसके ऊपर आ गया, उसने अपने भार को लिंग पर स्थानांतरित किया और पूरी ताकत से उसमें घुस गया।

कल्पना फिर से उसी जबरदस्त भराव के एहसास से भर उठी, लिंग की चौड़ी जड़ उसके भग-होंठों को खींचकर फैलाती हुई अंदर की कोमल मांस को खुरचने लगी और लिंग का माथा एकदम अंदर तक घुसकर योनि के अंतिम सिरे पर गर्भद्वार पर दस्तक देने लगा।

कल्पना के लिए सहना मुश्किल हो रहा था लेकिन लिंग से ठुकी होने के कारण कमर को हिला पाने में भी असमर्थ थी।

जेम्स घमंड से कल्पना को कुछ देर यूँ ही अपने नीचे दबाए रहा फिर धीरे-धीरे आंदोलित होने लगा।

कल्पना को लग रहा था आज उसके शरीर ही नहीं मन के भी सारे बटन जेम्स के हाथों में हैं, उसकी बेबस आनन्दानुभूतियाँ फिर शुरू हो गईं।

योनि के अंदर गहराई से लेकर ऊपर पूरे पेड़ू में एक साथ घर्षण हो रहा था और उसका मन हो रहा था जेम्स को बाँहों में कसकर जकड़ ले, बिस्तर की चादर पकड़कर खुद को रोक रही थी।

तभी जेम्स के मोबाइल की घण्टी बजी, जेम्स के हाथ कल्पना की पीठ के नीचे दबे थे, कल्पना ने हाथ बढ़ाया और मेज पर से मोबाइल उठाकर जेम्स को दे दिया।

डायना का कॉल था।

“ಹಲೋ… ಏನಾಯಿತು? हलो… ईनायितु?’ कन्नड़ में अबूझ वार्तालाप। वैसा ही खाली, जैसा अभी उन दो शरीरों के बीच चल रहा था – किसी प्रेम या भावनात्मक तरलता से रहित खाली सेक्स!

अजीब था कि जेम्स एक दूसरी औरत में लिंग घुसाए अपनी पत्नी से बात कर रहा था। वैसे इस प्रकरण में बहुत कुछ अजीब था, माँ आईसीयू में, बेटी अपने स्वैप की बारी के इंतजार में, दामाद दूसरी औरत के साथ संभोगरत!
 
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