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जेम्स बीच बीच में फोन पर हाथ रखकर कल्पना को बता रहा था कि डायना से क्या बात हो रही है। डायना की माँ की हालत और बिगड़ गई थी और वह उसे जल्दी बुला रही थी। फिर भी बोली थी कि उन लोगों का खयाल रखना, कल्पना को ‘फुल्ली सैटिस्फाई’ करना। वे लोग इतनी दूर से आए हैं। माँ अगर स्टेबल हो गई तो वह भी आएगी।
जेम्स वार्तालाप के दौरान कमर को धीरे-धीरे हिला रहा था – अपने को सख्त रखने के लिए। नीचे से कभी-कभी कल्पना भी बीच-बीच में हिलकर सहयोग कर रही थी।
वार्तालाप समाप्त कर जेम्स पुनः सक्रिय हुआ।
‘तुम बहुत सेक्सी है, डायना बार-बार बोला तुमको फुल्ली सटिस्फाय (पूरी तरह संतुष्ट) करना।’ उसने कल्पना की बगलों के नीचे हाथ टिकाया और फिर से शुरू हो गया।
फैल और झेल चुकी योनि में अब संकोच और अवरोध दोनों ही दूर हो गए थे, चिकनी राह पर आराम से गाड़ी चल रही थी पर उस चिकने संघर्ष में भी कसाव के एहसास की कमी नहीं थी।
‘मेरा फकिंग तुमको कैसा लगता? मैं तुमको अच्छा से चोदती कि नहीं?’
कल्पना आँख मूंदे चुप रहकर इस फूहड़पन को सह रही थी। एक कुलीन परिष्कृत औरत से पुरुष पूछ रहा था कि वह उसको अच्छे से ‘चोद’ रहा कि नहीं। कल्पना के लिए आज का दिन कई सदमों का था।
‘तुम तो आँख बंद रखता, मेरा चुदाई नहीं देखता।’ उसने कल्पना के सिर के नीचे दो दो तकिया लगा दिया ‘अब देखो।’
कैसा पागल है, ‘चुदाई’ को देखने के लिए बोलता है। किस तरह की औरतें मिली हैं स्वैपिंग में इसको?
जेम्स ने बिस्तर के सिरहाने लगा हेड लैम्प भी जला दिया, जलते ही उसकी रोशनी में ठुड्डी से लेकर कमर तक सब कुछ इतना बेपरदा हो गया कि कल्पना ने घबराकर छातियाँ ढक लीं।
जेम्स ने ‘नो नो’ करते हुए उसके हाथ खींचकर छातियों पर से हटा दिए- let me watch (मुझे देखने दो।) तुम भी देखो।’
उसने कल्पना के हाथ खींचकर अपने हाथों के नीचे दबा लिये।
कल्पना देख रही थी पानी में फूले मुनक्के की तरह तने चूचुकों को! कैसी ढिठाई से खड़े थे। जेम्स की नजर उन पर सुइयों की तरह चुभ रही थीं। कल्पना को उन्हें सहलाकर राहत पाने की तलब हो रही थी, मगर हाथ दबे थे।
जेम्स ने वह राहत जल्दी ही प्रदान कर दी।
सिर ऊँचा होने के बाद लिंग के अंदर-बाहर होने की क्रिया साफ दिख रही थी। लिंग पूरी लंबाई में अंदर जाता, फिर अंदर के रस से लिथड़ा हेडलैम्प और ट्यूबलाइट की रोशनी में चमकता हुआ बाहर निकलता।
उसकी गुलाबी गरदन की झलक मिलती और फिर वापस अंदर सरक जाता।
पेड़ू की दो सतहें – एक गोरी-चिकनी, एक साँवली बालदार – परस्पर सटतीं, अलग होतीं। इतनी ‘स्पष्ट’ चुदाई तो कल्पना ने पति के साथ भी नहीं की थी।
जेम्स वार्तालाप के दौरान कमर को धीरे-धीरे हिला रहा था – अपने को सख्त रखने के लिए। नीचे से कभी-कभी कल्पना भी बीच-बीच में हिलकर सहयोग कर रही थी।
वार्तालाप समाप्त कर जेम्स पुनः सक्रिय हुआ।
‘तुम बहुत सेक्सी है, डायना बार-बार बोला तुमको फुल्ली सटिस्फाय (पूरी तरह संतुष्ट) करना।’ उसने कल्पना की बगलों के नीचे हाथ टिकाया और फिर से शुरू हो गया।
फैल और झेल चुकी योनि में अब संकोच और अवरोध दोनों ही दूर हो गए थे, चिकनी राह पर आराम से गाड़ी चल रही थी पर उस चिकने संघर्ष में भी कसाव के एहसास की कमी नहीं थी।
‘मेरा फकिंग तुमको कैसा लगता? मैं तुमको अच्छा से चोदती कि नहीं?’
कल्पना आँख मूंदे चुप रहकर इस फूहड़पन को सह रही थी। एक कुलीन परिष्कृत औरत से पुरुष पूछ रहा था कि वह उसको अच्छे से ‘चोद’ रहा कि नहीं। कल्पना के लिए आज का दिन कई सदमों का था।
‘तुम तो आँख बंद रखता, मेरा चुदाई नहीं देखता।’ उसने कल्पना के सिर के नीचे दो दो तकिया लगा दिया ‘अब देखो।’
कैसा पागल है, ‘चुदाई’ को देखने के लिए बोलता है। किस तरह की औरतें मिली हैं स्वैपिंग में इसको?
जेम्स ने बिस्तर के सिरहाने लगा हेड लैम्प भी जला दिया, जलते ही उसकी रोशनी में ठुड्डी से लेकर कमर तक सब कुछ इतना बेपरदा हो गया कि कल्पना ने घबराकर छातियाँ ढक लीं।
जेम्स ने ‘नो नो’ करते हुए उसके हाथ खींचकर छातियों पर से हटा दिए- let me watch (मुझे देखने दो।) तुम भी देखो।’
उसने कल्पना के हाथ खींचकर अपने हाथों के नीचे दबा लिये।
कल्पना देख रही थी पानी में फूले मुनक्के की तरह तने चूचुकों को! कैसी ढिठाई से खड़े थे। जेम्स की नजर उन पर सुइयों की तरह चुभ रही थीं। कल्पना को उन्हें सहलाकर राहत पाने की तलब हो रही थी, मगर हाथ दबे थे।
जेम्स ने वह राहत जल्दी ही प्रदान कर दी।
सिर ऊँचा होने के बाद लिंग के अंदर-बाहर होने की क्रिया साफ दिख रही थी। लिंग पूरी लंबाई में अंदर जाता, फिर अंदर के रस से लिथड़ा हेडलैम्प और ट्यूबलाइट की रोशनी में चमकता हुआ बाहर निकलता।
उसकी गुलाबी गरदन की झलक मिलती और फिर वापस अंदर सरक जाता।
पेड़ू की दो सतहें – एक गोरी-चिकनी, एक साँवली बालदार – परस्पर सटतीं, अलग होतीं। इतनी ‘स्पष्ट’ चुदाई तो कल्पना ने पति के साथ भी नहीं की थी।