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उसने योनि में मुँह जोड़े रखकर अपने बदन के निचले हिस्से को कल्पना के सिर की तरफ घुमाना शुरू कर दिया।
69 की गहरी फँतासी… जब से उसने उसके भगों से अपने होठों को जोड़ा है, उसके लिपस्टिक रंगे होठों के बीच अपना लिंग समाने की कामना कर रहा है।
कल्पना ने उसके पाँव पकड़ लिए, जेम्स समझ गया कि अपना समय आ गया। उसने सिर उठा लिया। कल्पना को लगातार स्खलनों की पीड़ा से छुटकारा मिला, वह जेम्स की जाँघों पर सिर टिकाकर साँस लेने लगी।
जेम्स अधीरता से इंतजार कर रहा था।
स्वैप में उसने कितनी औरतों की योनि चाटी थी मगर बदले में वे औरतें खुद उसके लिंग को चूसने के लिए इच्छुक नहीं होती थीं। यह सबसे प्रिय स्त्री स्वेच्छा से प्रत्युत्तर दे रही है।
कल्पना के नथुनों में वही खास अजीब गंध तीव्रता से आ रही थी जो संभोग के बाद पति के लिंग से आती थी। वीर्य और योनि की मिश्रित गंध। जेम्स का लिंग उसके सामने था – आधा ढलका हुआ। इतने पास से देखकर अजीब-सा लग रहा था – मानो छोटी घास के बीच उगे मोटे पेड़ को किसी ने तने से काट दिया हो और ऊपर ठूँठ से कुछ नीचे तक छीलकर अजीब गोल ढलवाँ आकार दे दिया हो। ठूँठ के मुँह पर मानो कुल्हाड़ी की धार लगने से कट गया हो जहाँ से पेड़ का रस रिस रहा हो।
कल्पना को खुशी हुई कि यह ठूँठ उसके पति की अपेक्षा मोटा और लम्बा है और यह उसके अंदर घुसा है। आखिर उसके मूल्यवान पातिव्रत्य को तोड़ने वाला लिंग पति से बढ़-चढ़कर तो होना ही चाहिए। अपने इस खयाल पर मुस्कुरा पड़ी और जीभ बढ़ाकर लिंग के मुँह पर से रिसते रस को छू लिया।
जेम्स की साँस रुक गई।
कल्पना ने लिंग के माथे को चूमा, उस पर जीभ फेरी और होंठों में घेर लिया। अभी वह मुँह के द्वार पर ही था कि जेम्स ने अधीर होकर इतनी जोर से अंदर ठेला कि कल्पना की हलक में जा टकराया और गों गों की आवाज निकल गई।
कल्पना ने उबकाई और खाँसी आ गई, उससे उबरकर उसने समझाया- ‘धीरज धरो, धीरज धरो।
जेम्स को फिर से एहसास हुआ कि वह उससे बड़ी है।
69 की क्रिया परस्पर सहयोग मांगती है, एक साथ लिंग और योनि पर मुँह और जीभ की कोमल प्यारभरी सहलाहटें, चुम्बन, एक-दूसरे को अधिक से अधिक आनन्दित करके कृतज्ञ करने की इच्छा, योनि की कोमलतम तहों में जब मधुर संवेदनों की झड़ी शुरू हो गई हो तो कल्पना जैसी प्यारी स्त्री के दिल में प्यार के सिवा और कोई भाव हो भी कैसे सकता था।
जेम्स चकित था… कोई अपने मन से और इतनी कुशलता से चूस सकता है?
क्रमशः धीरे-धीरे आगे बढ़ना – पहले सिर्फ गरदन, उसकी निचली सतह को जीभ से घिसना-सहलाना, फिर धीरे धीरे खींचते हुए मुँह में आधे से अधिक भी अंदर ले लेना, एक क्षण के लिए होठों को लिंग की जड़ के पास बालों में सटा देना, फिर हट जाना।
कभी मुँह में चाँपकर कस लेना, कभी मुँह को अंदर से फुलाकर बस अंदर की गरमाहट में नहलाते रहना। कभी पूरा अंदर लेकर गले में समा लेने का एहसास दिलाना, कभी बाहर-बाहर ही उसे आइसक्रीम की तरह चाटना।
हर तरह का परिवर्तन- कभी दाँत गड़ाना, कभी जीभ से ही मालिश कर देना।
एक बार उसने लिंग के गुलाबी माथे को दाँतों के बीच लेकर धीरे-धीरे दबाना शुरू कर दिया, दबाव बढ़ाते-बढ़ाते वहाँ तक ले गई जहाँ जेम्स के मुँह से दर्द से सीऽऽऽऽ न निकल गई।
आनन्द, आनन्द के बाद दर्द, और फिर उस दर्द के असहनीय होने की हद… जेम्स का पूरा शरीर दर्द और आनन्द से थरथरा पड़ा था। और फिर चुभन की पीड़ा को घटाती जीभ की सहलाहटें।
इतनी टेकनीक से, इतने निस्वार्थता से किसी ने उसे नहीं चूसा था।
हद है यह स्त्री! एक साथ इतनी दूर, इतनी समीप।
और सब औरतें किसी तरह कुछ ऊपर से बस थोड़ा से चूम-चाट करके काम चला देती थीं, हथेली से ही रगड़कर उसे स्खलित करा देती थीं, जो उसे धोखा देने-सा लगता था।
69 की गहरी फँतासी… जब से उसने उसके भगों से अपने होठों को जोड़ा है, उसके लिपस्टिक रंगे होठों के बीच अपना लिंग समाने की कामना कर रहा है।
कल्पना ने उसके पाँव पकड़ लिए, जेम्स समझ गया कि अपना समय आ गया। उसने सिर उठा लिया। कल्पना को लगातार स्खलनों की पीड़ा से छुटकारा मिला, वह जेम्स की जाँघों पर सिर टिकाकर साँस लेने लगी।
जेम्स अधीरता से इंतजार कर रहा था।
स्वैप में उसने कितनी औरतों की योनि चाटी थी मगर बदले में वे औरतें खुद उसके लिंग को चूसने के लिए इच्छुक नहीं होती थीं। यह सबसे प्रिय स्त्री स्वेच्छा से प्रत्युत्तर दे रही है।
कल्पना के नथुनों में वही खास अजीब गंध तीव्रता से आ रही थी जो संभोग के बाद पति के लिंग से आती थी। वीर्य और योनि की मिश्रित गंध। जेम्स का लिंग उसके सामने था – आधा ढलका हुआ। इतने पास से देखकर अजीब-सा लग रहा था – मानो छोटी घास के बीच उगे मोटे पेड़ को किसी ने तने से काट दिया हो और ऊपर ठूँठ से कुछ नीचे तक छीलकर अजीब गोल ढलवाँ आकार दे दिया हो। ठूँठ के मुँह पर मानो कुल्हाड़ी की धार लगने से कट गया हो जहाँ से पेड़ का रस रिस रहा हो।
कल्पना को खुशी हुई कि यह ठूँठ उसके पति की अपेक्षा मोटा और लम्बा है और यह उसके अंदर घुसा है। आखिर उसके मूल्यवान पातिव्रत्य को तोड़ने वाला लिंग पति से बढ़-चढ़कर तो होना ही चाहिए। अपने इस खयाल पर मुस्कुरा पड़ी और जीभ बढ़ाकर लिंग के मुँह पर से रिसते रस को छू लिया।
जेम्स की साँस रुक गई।
कल्पना ने लिंग के माथे को चूमा, उस पर जीभ फेरी और होंठों में घेर लिया। अभी वह मुँह के द्वार पर ही था कि जेम्स ने अधीर होकर इतनी जोर से अंदर ठेला कि कल्पना की हलक में जा टकराया और गों गों की आवाज निकल गई।
कल्पना ने उबकाई और खाँसी आ गई, उससे उबरकर उसने समझाया- ‘धीरज धरो, धीरज धरो।
जेम्स को फिर से एहसास हुआ कि वह उससे बड़ी है।
69 की क्रिया परस्पर सहयोग मांगती है, एक साथ लिंग और योनि पर मुँह और जीभ की कोमल प्यारभरी सहलाहटें, चुम्बन, एक-दूसरे को अधिक से अधिक आनन्दित करके कृतज्ञ करने की इच्छा, योनि की कोमलतम तहों में जब मधुर संवेदनों की झड़ी शुरू हो गई हो तो कल्पना जैसी प्यारी स्त्री के दिल में प्यार के सिवा और कोई भाव हो भी कैसे सकता था।
जेम्स चकित था… कोई अपने मन से और इतनी कुशलता से चूस सकता है?
क्रमशः धीरे-धीरे आगे बढ़ना – पहले सिर्फ गरदन, उसकी निचली सतह को जीभ से घिसना-सहलाना, फिर धीरे धीरे खींचते हुए मुँह में आधे से अधिक भी अंदर ले लेना, एक क्षण के लिए होठों को लिंग की जड़ के पास बालों में सटा देना, फिर हट जाना।
कभी मुँह में चाँपकर कस लेना, कभी मुँह को अंदर से फुलाकर बस अंदर की गरमाहट में नहलाते रहना। कभी पूरा अंदर लेकर गले में समा लेने का एहसास दिलाना, कभी बाहर-बाहर ही उसे आइसक्रीम की तरह चाटना।
हर तरह का परिवर्तन- कभी दाँत गड़ाना, कभी जीभ से ही मालिश कर देना।
एक बार उसने लिंग के गुलाबी माथे को दाँतों के बीच लेकर धीरे-धीरे दबाना शुरू कर दिया, दबाव बढ़ाते-बढ़ाते वहाँ तक ले गई जहाँ जेम्स के मुँह से दर्द से सीऽऽऽऽ न निकल गई।
आनन्द, आनन्द के बाद दर्द, और फिर उस दर्द के असहनीय होने की हद… जेम्स का पूरा शरीर दर्द और आनन्द से थरथरा पड़ा था। और फिर चुभन की पीड़ा को घटाती जीभ की सहलाहटें।
इतनी टेकनीक से, इतने निस्वार्थता से किसी ने उसे नहीं चूसा था।
हद है यह स्त्री! एक साथ इतनी दूर, इतनी समीप।
और सब औरतें किसी तरह कुछ ऊपर से बस थोड़ा से चूम-चाट करके काम चला देती थीं, हथेली से ही रगड़कर उसे स्खलित करा देती थीं, जो उसे धोखा देने-सा लगता था।