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ठरकी दामाद complete

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उसने जल्दी से अपनी पेंट उपर खींची और दरवाजा खोल दिया....और बाहर खड़ी रिया और पूजा को वहां से भागने का मौका भी नही मिल सका...तीनो की नज़रे मिली और सभी के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गयी..

पूजा : "जीजू....आप मॉम को समझाओ...हम दीदी को रोक कर रखते है...''

इतना कहकर वो दोनो अंदर घुस गयी और अजय बाहर आ गया....जहाँ किचन मे उसकी सास खड़ी होकर सभी के लिए नाश्ता बना रही थी..

आज उसकी इम्तेहान की घड़ी थी...पूजा और रिया को समझाकर उसने आधी परीक्षा तो पास कर ली थी...अब अपनी सास को भी समझाकर उसे अव्वल आना था...

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अब आगे

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रोज सुबह की तरह आज भी उसके ससुर अपने दोस्तो के साथ पार्क में बैठकर ताश खेल रहे थे...इसलिए अपनी सास को 'खुल' कर समझाने का इससे अच्छा मौका नही मिल सकता था अजय को.

रजनी की पीठ थी अजय की तरफ लेकिन उसके आने का आभास हो चुका था उसे...इस घड़ी का कैसे सामना करे,उनकी भी समझ मे नही आ रहा था...लेकिन अपने और अजय के उपर उसे बेइंतहा गुस्सा आ रहा था...जिसके परिणामस्वरूप वो सही से नाश्ता भी नही बना पा रही थी..

जब से वो वापिस आई थी उसके मन में बस यही चल रहा था की वो वहां गयी ही क्यो...ना वो वहां

जाती और ना ही उसे अपनी बेटी और भांजी के सामने शर्मिंदा होना पड़ता...

लेकिन फिर कुछ और विचार भी आ जाते की अगर वो वहां जाती ही नही तो उसे ये कैसे पता चलता की अजय और उसकी बेटी पूजा के बीच भी नाजायज़ संबंध चल रहे है...और क्या पता रिया की भी मार ली हो अजय ने...आख़िर है तो ठरकी ही ना...

अजय धीरे-2 चलकर उसके पीछे आकर खड़ा हो गया...रजनी ने साडी पहनी हुई थी और उसके ब्लाउस का गला पीछे से काफ़ी गहरा था, जिसकी वजह से उसकी मांसल पीठ का काफ़ी बड़ा हिस्सा नंगा था, जिसपर हल्की-2 पसीने की बूंदे चमक रही थी...अजय का मन तो हुआ की अपनी जीभ से उसके शरीर का नमक चाट ले...लेकिन अभी के लिए तो उसे अपनी सासू माँ को मनाना था पहले..

उसने हिम्मत करते हुए अपनी बाहों का घेरा उसके पेट पर डाल कर अपना सिर उनके कंधे पर रख दिया..

रजनी एकदम से काँप सी गयी...और छिटककर दूर होने लगी पर अजय ने उसे कस कर पकड़े रखा, क्योंकि छोड़ने के बाद वो सही से समझा नहीं सकता था ...

अजय : "बस....बस.....शांत हो जाओ....कोई नही आएगा....पूजा और रिया प्राची के पास है, वो उसे संभाल लेंगी....कोई भी यहाँ नही आएगा...''

इतना कहकर अजय ने अपनी सास को अपनी तरफ खींचा और अच्छी तरह से उनसे सट कर खड़ा हो गया..

और फिर उसने बोलना शुरू किया : "मुझे पता है की आप मुझसे नाराज़ है....मुझसे ही नही पूजा से भी....लेकिन इन सभी में किसी की भी कोई ग़लती नही है...ये सब अपने आप होता चला गया....आपसे भी तो अपने आप पर सब्र नही हुआ...हम तो फिर भी जवान लोग है....जब आपके अंदर इतनी आग है तो उसके बारे में सोचो....वो भी तो आपकी ही बेटी है...''

कहकर उसने अपने हाथ उपर करके रजनी के मुम्मे पकड़ने चाहे पर उसने अजय के हाथ को पकड़कर झटक दिया और गुस्से मे फुफ्कारी : "तुम्हारे लिए तो ये सब कहना और करना काफ़ी आसान है, पर मेरे नज़रिए से भी सोचो...मैं उसकी माँ हूँ ...और अपनी बेटी से मैं अब पूरी जिंदगी नज़रें नही मिला सकूँगी...एक बेटी के सुहाग पर डाका मारकर मैं दूसरी बेटी के सामने रंगे हाथो पकड़ी गयी हूँ ...ये ज़िल्लत मुझे चैन से जीने नही देगी...मैं कभी भी पूजा से नज़रें नही मिला सकूँगी...''

अजय ने भी उसे बोलने से नही रोका, वो यही चाहता था की एक बार उनके अंदर का गुबार निकल जाएगा तभी वो उसकी बात समझ सकेंगी..

वो आगे बोली : "तुमने मेरे साथ जो किया सो किया, पूजा के साथ वो सब करने की क्या ज़रूरत थी...वो तो अभी कुँवारी है...प्राची की हालत तो ऐसी है की उसे इस बात की भनक भी लग गयी तो उसका क्या हाल होगा, ये तुम भी अच्छी तरह समझते हो...वो प्रेगञेन्ट ना होती तो मैं तुम्हारा सारा भंडा आज ही फोड़ डालती...''

वो अजय को धमकी दे रही थी...लेकिन अजय के पास भी इस धमकी का जवाब था..

वो बोला : "ये सब तो मैने आपसे ही सीखा है मेरी प्यारी सासू माँ ..आप भी तो अपने जीजे के साथ ये सब कर चुकी है....अब वही काम अगर पूजा ने मेरे साथ कर लिया तो आपको क्यो बुरा लग रहा है...''

अपने जीजाजी के साथ समंध वाली बात का खुलासा होते देखकर वो चोंक गयी...और पलटकर अजय की तरफ हैरानी से देखने लगी

अजय : "जी हाँ ...मुझे सब पता है....ये भी पता है की मौसा जी ने कैसे अपनी बीबी को नशे की गोली खिलाकर सुला दिया था और आपने उनके साथ पूरी रात कैसे रंगीन की थी...और ये काम आज से नही, ना जाने कब से चल रहा है...''

रजनी तो सकपका कर रह गयी जब अजय ने सबूत के तौर पर वो नशे वाली शीशी निकाल कर उनकी आँखो के सामने लहरा दी...बेचारी की बोलती ही बंद हो गयी.

अजय : "ये है आपकी असलियत , इसलिए मुझे इस तरह की धमकी देने की कोशिश आगे से कभी नही करना...और रही बात पूजा की तो हम ऐसा कोई काम ही नहीं करेंगे जिससे प्राची या किसी को भी हमारे रीलेशन के बारे में पता चले...ये काम तो वो बाहर रहकर भी कर सकती थी...सोचिए ज़रा, अगर उसका कोई बाय्फ्रेंड होता,जो उसे भगाकर ले जाता और उसकी चुदाई करके छोड़ देता तो क्या करती आप...या फिर उसे बाहर किसी लड़के से प्यार हो जाए और वो रोज उससे चुदवा कर घर आए, आपको तो कुछ पता ही नही चलेगा ना...ये भी ना चलता, अगर आप बिना बताए घर ना आई होती...लेकिन अब इस बात को हम सभी को संभालना होगा...पूजा को मैने समझा दिया है...आपसे ना तो वो नाराज़ है और ना ही किसी तरह की नफ़रत करती है...वो और रिया आज के बाद ऐसे बिहेव करेंगी जैसे कुछ हुआ ही ना हो..''

रजनी को जैसे विश्वास ही नही हो रहा था की अजय जो कह रहा है वो सच है या नही...

अजय ने उसकी मांसल कमर पर दबाव डालते हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया और तब रजनी को ये एहसास हुआ की अजय का लंड इस वक़्त पूरी तरह से खड़ा हुआ है और वो उसकी चूत के उपर बुरी तरह से चुभ रहा था...

कोई और मौका होता तो वो उसके लंड को निचोड़ ही डालती...पर ऐसी सिचुएशन में भी अजय को ये सब सूझ रहा है, ऐसा ठरकीपन उसने आज तक किसी में नही देखा था.

पर ना चाहते हुए उसके अंदर भी कुछ -2 होने लगा...अभी कुछ देर पहले तक जिस अजय को वो जी भरकर कोस रही थी,अब उसी की बाहों मे कसमसा रही थी वो...शायद अजय के कहने का उसपर असर हो चुका था...वो भी तो यही चाहती थी की अपनी बेटी के सामने शर्मिंदगी भरा चेहरा लेकर ना घूमे वो..लेकिन अजय के आश्वासन के बाद उसका वो डर अब दूर हो चुका था...उसके अंदर की नारी ने उसे एक बार फिर से उकसाना शुरू कर दिया था...वही नारी जो उससे आज सुबह -2 चुदवाकर आई थी..

पूजा वाले वाकये की वजह से वो अजय की चुदाई की तारीफ भी नही कर पाई थी....सच में , ऐसी चुदाई तो उसने सिर्फ़ ब्लू फ़िल्मो में होती देखी थी...जिसमे एक कसरती जवान आदमी उसकी उम्र की औरत को शावर के नीचे बुरी तरह से चोदता है...अगर वो पूजा वाला किस्सा ना हुआ होता तो वो एक बार और चुदवा चुकी होती अजय से वही पर...और अब उसे आगे होने वाली चुदाई फिर से नज़र आने लगी थी...लेकिन इस वक़्त घर पर ये सब करना सही नही था...भले ही पूजा और रिया ने प्राची को संभाल कर रखा हुआ था अंदर, लेकिन कोई भी ,किसी भी वक़्त बाहर आ सकता था..

वो कुनकुंनाती हुई बोली : "अच्छा ठीक है...समझ गयी मैं ...अब तो छोड़ो ...कोई आ जाएगा...''

अजय ने जवाब मे उसे और कसकर पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचते हुए अपने लंड को उनकी चूत पर जोरदार तरीके से रगड़ा और बोला : "कोई नही आएगा....अभी तो सिर्फ़ 5 मिनट ही हुए है...''

इतना कहते हुए अजय ने अपने होंठ अपनी सास के होंठों पर रख दिए और उन्हे चूस डाला...

रजनी का सुलग उठी...ऐसा लगा की उसके पेट्रोल से भीगे जिस्म पर किसी ने माचिस की तिल्ली फेंक दी हो...

''आआआअहह .... नही अजय....... अभी नही....''

अजय भी मस्ती के मूड में आ गया....और उनकी गर्दन और मुम्मो के उपर वाले हिस्से को चूमता हुआ बोला : "उम्म्म्मममम.....पहले बोलो....आप अब गुस्सा नही हो....''

''आआआआआआआअहह,.......... ऐसे करोगे....तो ....तो.....बोलना ही पड़ेगा......अहह.....नही हू गुस्सा.......ठीक है......अब तो........ छोड़ो......अहह''

वो बोलती भी जा रही थी छोड़ने के लिए और अजय के सिर को पकड़कर अपनी छाती पर ज़ोर से दबा भी रही थी....और साथ ही साथ अपनी कमर मटका कर अपनी चूत पर उसके लंड से खुजली भी करवा रही थी...

अजय : "ऐसे नही.........अपने इन होंठों से....... उसे चूमकर बोलो..... की..... अब नाराज़ नही हो.....''

वो तो वैसे भी यही चाहती थी की अजय के लंड को चूस डाले...पर ऐसे मौके पर ये मुमकिन नही था...

''नही अजय.......प्लीज़......फिर कभी...... शाम को....... रात को..........पर अभी नही.....अहह....प्लीज़......''

पर अजय ना माना.....और उसने रजनी की साडी का पल्लू नीचे गिरा दिया...और उनके एक मुममे को पकड़ कर बाहर निकाल दिया....और उसे चूसने लगा..

''आआआआआआअहह..... मत करो ऐसा......अजय..............मत करो.................. अहह...... मार डालोगे तुम तो मुझे...... ये देखो.....''

उसने अजय के हाथ को पकड़कर अपनी चूत के उपर रख दिया, जिसमे से पानी ऐसे टपक रहा था जैसे कोई नलका खोल दिया हो....उसकी साड़ी भी भीग चुकी थी उस जगह से....अजय का मन तो किया की वहीँ उसकी साड़ी उठा कर गीली चूत में लंड पेल दे...पर इतना रिस्क लेना भी सही नही था....अभी के लिए उससे लंड ज़रूर चुसवाना चाहता था वो...

अपने अधखुले ब्लाउस को संभालती हुई रजनी आख़िर कार उसकी जिद्द के आगे झुक ही गयी...और उसके सामने बैठकर उसने एक झटके में उसके लंड को बाहर निकाला और मुँह में लेकर जोरदार तरीके से चुप्पा मारा...

और फिर उसे बाहर निकाल कर चूमा और बोली : "मुच्च्छ्ह ...... मैं अब नाराज़ नही हूँ ....समझे.... खुश ना....''

फिर वो उठ खड़ी हुई...और अपने मुम्मे को भी अंदर कर दिया...अजय ने भी लंड वापिस अंदर ठूसा और एक बार फिर से अपनी सासू माँ के करीब आया और उनके बालों को पकड़कर बड़े ही रफ़ तरीके से अपनी तरफ खींचा और बोला : "आज के बाद तुम वही करोगी जो मैं कहूँगा....कभी भी....कहीं भी....''

रजनी को भी उसने पूजा की तरह अपने मोह्पाश में बाँध लिया था...बेचारी हाँ के अलावा कुछ बोल ही नही सकी...वैसे भी ऐसे जवान और तगड़े लंड का गुलाम बनकर रहना किसे पसंद नही आएगा..

उसके बाद अजय वापिस बाहर आ गया...और सीधा प्राची के बेडरूम में गया...जहा तीनों बहने बैठकर बाते कर रही थी..

अजय को वापिस आया देखकर प्राची बोली : "आप नाश्ता करो...मैं बस नाहाकर आती हूँ ..आपको ऑफीस के लिए भी तो देर हो रही होगी ना...''

इतना कहकर वो टावल उठा कर अंदर चली गयी.

उसके जाते ही रिया ने चहककर पूछा : "मान गयी क्या मौसी....समझा दिया ना उन्हे सही से....''

वो कुछ बोल पता की पूजा बोल पड़ी : "हाँ ....समझा ही दिया होगा...देख नही रही....छोटे जीजाजी कितने खुश है...''

उसका इशारा अजय के लंड की तरफ था...जो उसकी पेंट में सॉफ चमक रहा था...

दोनो के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी...अजय ने उन्हे सारी बाते बता दी की वो अब समझ गयी है...कोई भी अब इन बातों को एक दूसरे के सामने नही करेगा...अब सब ठीक था...

उसके बाद सबने मिलकर नाश्ता किया....और अजय अपने ऑफीस के लिए निकल पड़ा.

आने वाले दिनों में वो सबको कैसे मैनेज करेगा, इसका हिसाब लगाता हुआ वो ऑफीस पहुँच गया...जहां एक और ठरक से भरा दिन उसका इंतजार कर रहा था.

 
45

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अब आगे

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ऑफीस पहुँचते ही उसे रचना का दीदार हो गया...वो मेन गेट पर रखे अटेंडेंस रजिस्टर पर साइन कर रही थी...टेबल पर झुकी होने की वजह से उसकी बाहर की तरफ निकली हुई गांड बड़ी मोहक लग रही थी...ऐसा लग रहा था जैसे कोई चंचल हिरनी पानी पी रही हो...अजय को तो रचना भी इस वक़्त पूरी नंगी होकर उसी हिरणी की तरह झरने में झुककर पानी पीती हुई दिख रही थी

ऐसी उभरकर निकली हुई गांड को देखकर उसे छूने का मन कर गया अजय का...और वो तुरंत आगे आकर,उसकी गांड से अपने दाँये हाथ को रगड़ता हुआ उसके साइड में आकर खड़ा हो गया..

रचना ने उस एहसास को महसूस किया और अगले ही पल अजय को अपने इतने करीब देखकर वो सकपका सी गयी..और फिर उसकी आँखो में एक अजीब सी खुशी उभर आई और वो बड़े ही प्यार से मुस्कुरा कर बोली : "गुड मॉर्निंग सर....हाउ आर यू ....''

अजय उसे मुस्कुराते हुए देखता रहा और उसके विश का जवाब दिया...और साथ ही साथ वो उसके गले से झाँक रहे बूब्स को भी निहार रहा था...झुके होने की वजह से उसकी टाइट कुरती के गले से झाँक रहे उसके ब्रा में क़ैद नन्हे बूब्स बड़े ही कमाल के लग रहे थे...उन्हे दबाने और चूसने में जो मज़ा आएगा ये तो सिर्फ़ अजय ही जानता था...उसके जाने के बाद उसने भी एंट्री की और अपनी सीट पर आ गया.

कुछ ही देर में उसकी बॉस के साथ मीटिंग थी. कंपनी को एक बहुत ही बड़ा प्रॉजेक्ट मिला था..और अजय को प्रोमोट करके प्रॉजेक्ट मॅनेजर बना दिया गया था...ये अजय के लिए बहुत खुशी की बात थी...उसे अब क्यूबिकल केबिन के बदले अपना एक बड़ा सा , बंद कमरे वाला केबिन मिल गया..अजय के बॉस को उसपर बहुत भरोसा था और इस प्रॉजेक्ट को सही से निपटाने की पूरी उम्मीद भी..इसलिए उन्होने अजय को अपनी एक सेक्रेटरी रखने की भी इजाज़त दे दी.

अजय ने तुरंत रचना को अपनी सेक्रेटरी बनने की बात बोल डाली...हालाँकि वो ऑफीस को-ओर्डीनेटर थी और पूरे ऑफीस का काम देखती थी..लेकिन इतने बड़े प्रॉजेक्ट के लिए उसके बॉस ने वो बात एक ही बार में मान ली..

अजय खुशी-2 बाहर निकला और सबसे पहले उसने अनिल को अपनी प्रमोशन वाली खबर सुनाई..वो भी बहुत खुश हुआ और दोनो उसके नये केबिन में आ गये...

इतना आलीशान केबिन था वो...अटैच बाथरूम और एक बड़ा सा सोफा भी...एक कॉर्नर में उसके असिस्टेंट के लिए टेबल था, जिसपर रचना आकर बैठने वाली थी, अजय तो ये सब देखकर कुछ अलग ही सपने बुनने लगा..

वो अपने सपनो में खोया ही हुआ था की दरवाजा खटका और रचना अंदर आ गयी..

रचना ने आते ही अजय को प्रमोशन की बधाई दी और ये भी बताया की अभी-2 बॉस ने उसे बुलाकर ये कहा है की आज से वो अजय को एसिस्ट करेगी...अजय उसके चेहरे को देखकर ये जानने की कोशिश करने लगा की उसे इस बात की खुशी तो है ना...लेकिन वो उससे पहले ही बाहर निकल गयी...शायद अपना सारा समान समेटने गयी थी वो..

अनिल : "साले ..तू तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला...अपनी प्रमोशन के लपेटे में तूने रचना को भी लपेट लिया....सही है बॉस....वैसे भी इस प्रॉजेक्ट की वजह से बॉस तुझे किसी भी काम के लिए मना नही करेगा...चाहे तू उसकी बीबी की भी चूत मार ले इस वक़्त... हा हा..''

बात तो सही थी....अजय के अलावा इस प्रॉजेक्ट को कोई और पूरा भी नही कर सकता था...उसने काफ़ी मेहनत की थी इस प्रॉजेक्ट को लाने के लिए...

अजय : "भाई, जब उपर वाला मेहरबान होता है ना तो ऐसा ही होता है...आजकल मेरी लाइफ में जो चल रहा है ना उसके सामने तो ये कुछ भी नही है...चल ये सब छोड़, तू सुना, अंजलि भाभी का क्या हाल है...''

अनिल : "यार...आजकल पता नही क्या हो गया है उसे...तुझे बहुत याद करती है...''

अजय तो ये सुनते ही एकदम से घबरा गया...लेकिन फिर संभलकर बोला : "क्यो भाई...आजकल तू उन्हे खुश नही रखता क्या जो मुझे याद करती है....''

ऐसा मज़ाक उनमे अक्सर चलता रहता था...

अनिल : "अबे , ऐसा कुछ नही है...लेकिन पिछले एक हफ्ते में अक्सर तेरा कोई ज़िक्र छेड़ देती है...मैने तो कल बोल भी दिया की इतनी ही याद आ रही है तो उसे घर बुला लो... हा हा''

वो बेवकूफ़ हंस तो रहा था..पर ये नही जानता था की ये काम तो वो कब का कर चुकी है..

अजय : "भाई...एक बात सुन ले...जिस तरह से हम मर्दों का मन करता है ना बाहर की बिरयानी खाने का, उनका भी दिल मचलता है किसी और की टंगड़ी कबाब चूसने का...ये मैं अपने पर्सनल एक्सपीरिएंस से बोल रहा हू...समझा...''

ये सुनते ही अनिल एकदम सीरियस सा हो गया...जैसे ये बात उसे ही सुनाने के लिए कही थी अजय ने...

अजय : "अरे ...तू क्यो परेशान हो गया....अपने उपर ना ले ये सब...तू बस रचना के उपर फोकस रख...''

अनिल भी रचना के पीछे हाथ धोकर पड़ा हुआ था.

अनिल : "अब क्या रचना पर फोकस रखू...उसे तो तूने अपनी सेक्रेटरी बना लिया है...अब तो वो मेरे पास आने से रही...लेकिन अपना वादा याद है ना...जब भी मिलेगी, मिल बाँटकर खाएँगे...''

अजय : "हाँ ..भाई...याद है...पहले मेरा नंबर तो लगने दे...''

और जिस हिसाब से उसकी स्टोरी रचना के साथ चल रही थी और उपर वाला उसपर मेहरबान था, वो नंबर भी जल्द ही लगने वाला था..

कुछ देर बैठकर अनिल अपनी जगह वापिस चला गया...रचना का कंप्यूटर और सारा सामान अजय के केबिन में शिफ्ट कर दिया गया, लंच के बाद रचना के साथ बैठकर उसने प्रॉजेक्ट से जुड़ी सारी बाते समझाई...और उसका बॉस होने के नाते उसे मन लगाकर काम करने की हिदायत भी दी...और साथ ही उसकी सैलेरी भी बड़ा दी ताकि उसे ये सब करने में थोड़ा मोटीवेशन भी मिले..

वो तो पहले से ही अजय की सेक्रेटरी बनने से काफ़ी खुश थी, उपर से इन इनक्रिमेंट ने तो उसे बहुत खुश कर दिया...उसकी समझ में नही आ रहा था की वो अजय को कैसे थेंक्स बोले..

शाम के समय,एक पेपेर को फोटोकॉपी करते हुए जब वो नीचे गिरे पेपर को उठाने के लिए झुकी तो अजय का लंड एक बार फिर से हिनहीना उठा.....वो तुरंत खड़ा हुआ और रचना के पीछे जाकर खड़ा हो गया...और धीरे से उसने अपने शरीर को उसके बदन से सटा दिया.

रचना एकदम सहम गयी....ऑफीस में ये कैसी हरकत कर रहे है अजय...बस यही सोचकर उसने दरवाजे की तरफ देखा...

अजय ने उसके पेट पर हाथ रखते हुए कहा : "फ़िक्र ना करो...मेरे केबिन में मुझसे बिना पूछे कोई नही आएगा...''

और इतना कहकर उसने झुककर उसकी गर्दन पर एक छोटी सी किस्स कर दी..

वो सिहर उठी.

अजय : "तुम खुश तो हो ना...कही तुम्हे ऐसा तो नही लग रहा की मैने तुम्हे फँसा दिया है यहाँ ...बोलो...''

रचना : "नही नही...ऐसा बिल्कुल नही है....इन्फेक्ट मुझे तो इस बात की बहुत खुशी है...आप नही जानते ,मैं तो खुद आपको थेंक्स बोलने वाली थी...''

अजय उसकी गांड में अपने लंड को चुभोता हुआ बोला : "तो बोलो ना....रोका किसने है...''

रचना उसकी तरफ पलटी....उसका चेहरा शर्म से लाल हुआ पड़ा था...आँखो में गुलाबीपन था ...वो धीरे से बोली : "ऐसे नही....ढंग से बोलूँगी आपको थेंक्स ..घर जाते हुए...कार में ...''

और अजय के खड़े हुए लंड को घिसते हुए वो वापिस अपनी चेयर पर जाकर बैठ गयी..

अजय तो उसके बोलने का तात्पर्य समझकर ही उत्तेजना के पेड़ पर जा बैठा ..वो सोचने लगा की काश इस वक़्त वो उसके साथ कार में होता...या कहीं और, जहां किसी बात का डर ना होता तो वो उसे वही नंगा करके चोद डालता...

लेकिन ,जब शेर का पेट भरा होता है तो वो अपने नये शिकार के साथ थोड़ा खेलता है...यही अजय भी करना चाहता था...अपनी कॉलेज लाइफ में और कुंवारेपन में जो मज़े वो नही ले पाया था, वो अब रचना के साथ लेना चाहता था...चुदाई के लिए तो अभी उसके पास काफ़ी माल था...

रचना के लिए तो अजय एक पहले प्यार जैसा ही था...थोड़ी बहुत छेड़ छाड़ ,किस्सस, गले मिलना और रोमांस करना ही नये प्यार करने वालो के लिए बहुत है...हालाँकि अजय कई चूतें मार चुका था, लेकिन इस नये प्यार के एहसास ने उसके भी दिल की तरंगे बजा दी थी ..

और दोनों अपने-२ एहसासों में डूबे शाम का इन्तजार करने लगे

शाम को जब छुट्टी का टाइम हुआ तो अजय अपने बॉस के पास बैठा हुआ था...वो बॉस के केबिन में बैठकर देख पा रहा था की एक-एक करके सारे एंप्लायीस घर जा रहे है...लेकिन रचना अभी तक उसके केबिन में ही रुकी हुई थी...शायद उसे अजय का इंतजार था,आज की शाम उसे थेंक्स बोले बिना वो भी नही जाना चाहती थी.

लेकिन अजय के बॉस ने एक ऐसा टॉपिक छेड़ा हुआ था की वो मीटिंग एक घंटे से पहले निपटने वाली नही थी..अजय कुछ बोल भी नहीं सकता था..आख़िरकार नयी-2 प्रमोशन जो मिली थी उसको.

और करीब 15 मिनट तक अजय का इंतजार करने के बाद रचना भी अपना बेग समेटकर केबिन से बाहर निकल आई....जाते हुए वो उनके केबिन की तरफ ही देख रही थी...और उसके चेहरे को देखकर सॉफ पता चल रहा था की वो काफ़ी उदास है...

लेकिन अजय कुछ कर नही सकता था...बेचारा अपना लंड मसोसकर रह गया...कुछ ही देर में पूरा ऑफीस खाली हो गया...

करीब आधे घंटे बाद अजय के बॉस ने वो मीटिंग ख़त्म की...अजय ने अपने पेपर्स समेटे,केबिन में जाकर लॅपटॉप बेग में डाला और बुझे मन से ऑफीस से बाहर निकल आया.

बाहर का मौसम करवट ले चुका था..पूरे दिन घने बादल रहने के बाद अब बरस उठे थे...घनघोर बारिश हो रही थी...अजय ने मन में सोचा 'काश इस सेक्सी मौसम में रचना मेरे साथ होती..'

तभी पीछे से आवाज़ आई : "मेरे बारे में सोच रहे हो क्या ?''

 
अजय ने तुरंत पलट कर देखा, वो रचना थी...जो जाने कितनी देर से , ऑफीस के बाहर एक पेड़ के नीचे रुककर अजय का इंतजार कर रही थी..बारिश की बौछारों से उसका बदन भीग भी गया था, लेकिन वो पूरी नही भीगी थी..

अजय का चेहरा उसे देखकर फिर से खिल उठा , वो तो उसके बदन से बारिश की बूँदों को फिसलते देखकर मंत्रमुग्ध सा हो गया.

''अब देखते ही रहोगे या दरवाजा भी खॉलोगे....आई एम टोटली वेट्ट ...''

वो वेट्ट कहाँ -2 से है, ये अजय भी देखना चाहता था..

''ओह्ह्ह ...हाँ .....येस्स .....आओ जल्दी....'' अजय ने इतना कहकर तुरंत गाड़ी खोल दी और रचना दूसरी तरफ से अंदर आकर बैठ गयी.

अंदर बैठते ही रचना ने अपने बेग से एक हेंड टावल निकाला और अपने सिर और बाजुओं को पोंछने लगी....और अजय उसे ऐसा करते हुए एकटक देख रहा था.

रचना तो भाँप ही चुकी थी की अजय की नज़रें उसकी तरफ ही है.

वो बोली : "ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे...पहले कभी देखा नही क्या...''

अजय : "देखा तो है...लेकिन मुझे नही पता था की भीगने के बाद तुम और भी निखर जाती हो...बिल्कुल गुलाब की तरह...''

अजय की ये बात सुनकर वो शरमा गयी...लड़कियो को अपनी तारीफ और ऐसी बातें बहुत पसंद आती है...ये अजय बेख़ुबी जानता था.

अजय : "तुम तो नैचुरल ब्यूटी हो....पानी से धुलने के बाद तुम्हारा चेहरा इस लुक में और भी प्यारा लग रहा है...

वो कांपती आवाज़ में बोली : "अब बस भी करो सर ....और यहां से चलिए...''

अजय ने भी वहां से निकलने में भलाई समझी...क्योंकि उसके पीछे-2 उसके बॉस भी निकलने वाले थे और वो नही चाहता था की वो रचना को उसकी कार में देखे..

भारी बारिश की वजह से लोग सड़को पर नही थे...अजय भी कार बड़े आराम से चला रहा था...उसे पता था की अभी के लिए उसे और क्या-2 करना है.

उसने कार एक सुनसान सी जगह पर रोक दी....मैन हाइवे से थोड़ा अंदर लेजाकर ...चारों तरफ घने पेड़ थे, अँधेरा भी काफी था.

रचना समझ तो गयी थी की उसने कार क्यों रोकी है...फिर भी उसने पूछा : "क्या हुआ सर ....गाड़ी क्यों रोक दी...''

अजय : "देखो ना...कितनी बारिश है...एक्सीडेंट हो गया तो...तुम्हारे घर वाले तो मुझे ही पकड़ेंगे ना...''

वो हंस दी..साफ दिख रहा था की वो अब नर्वस हो रही है.

अजय : "तो....कैसे थेंक्स करना चाहती थी मुझे ''

अजय सीधा मुद्दे की बात पर आ गया.

सो सकपका सी गयी...और थोड़ा रुककर बोली : "मुझे शर्म आ रही है...''

अजय : "तो आँखे बंद कर लो...''

रचना : "मेरी आँखे बंद होने से कुछ नही होगा....आप बंद करो अपनी.''

अजय ने मुस्कुराते हुए आँखे बंद कर ली...और सोचा 'चाकू खरबूजे पे गिरे या खरबूजा चाकू पर,एक ही बात है, तू ही आजा'

फिर अजय को उसके हिलने का एहसास हुआ...और वो अपना घुटना सीट पर रखकर उसकी तरफ झुकी.

अजय को उसके परफयूम की महक बहुत करीब से महसूस हुई...वो उसे किस्स करने आई थी...अजय की आँखे बंद थी..

वो कुछ देर तक उसके भोले से चेहरे को देखती रही और बहुत ही धीमी आवाज़ में बोली : "थेंक्स अजय...थेंक्स फॉर एवरिथिंग ...''

और इतना कहकर उसने अपने लबों को अजय के होंठों से सटा दिया.

ये पहला मौका नही था जब अजय ने उसके होंठों को छुआ था...लेकिन इस वक़्त जो माहौल बना हुआ था उसका मुकाबला उस अंधेरी गली से नही किया जा सकता था जहाँ उन्होने पिछली बार किस्स की थी.

बारिश की बूंदे कार की छत पर तड़ातड़ बरस रही थी...और अंदर इतनी गर्म लड़की अजय को किस कर रही थी...अजय से और सब्र नही हुआ...उसने अपनी आँखे खोल दी...सामने रचना थी जो अपनी आँखे बंद करके अजय के होंठों को चूसने का लुत्फ़ उठा रही थी...अजय ने उसकी कमर मे हाथ डालकर उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसकी किस्स का जवाब अपने तरीके से देने लगा.

वो भी कसमसाती हुई...आउच बोलती हुई, उसकी गोद में खींचती चली आई...ऐसा करने से अजय को दुगने मज़े का एहसास हुआ...एक तो उसकी मदमस्त गांड ठीक उसके खड़े लंड के उपर आकर टिक गयी...और उपर से उसके बूब्स भी अजय की छाती से पीसकर अपने नरम और कड़क पन के एहसास को एकसाथ छोड़ने लगे.

अजय ने अपने लंड को किसी तीर की तरह उसकी गांड में चुभोते हुए अपनी कमर हवा में उठा दी....और उसकी चुभन के एहसास से रचना भी काँप उठी...आख़िर लंड की छुवन होती ही ऐसी है...किसी भी जवान लड़की को अंदर तक गीला कर देती है...जो शायद इस वक़्त रचना के साथ भी हो चुका था...बाहर से तो उसका बदन भीग ही चुका था, अंदर से भी भीग जाने के बाद तो उसे ऐसा लगने लगा की वो पूरी गीली हो गयी है...और उसे ये 'गीलापन' बहुत अच्छा लग रहा था.

तभी एक जोरदार गर्जना के साथ बिजली चमकी ...और डरकर रचना और ज़ोर से लिपट गयी उससे...अजय को अपनी छाती पर उसके शूल चुभते हुए से महसूस हुए...वो धीरे-2 अपने हाथ उनपर ले गया...लेकिन रचना ने उन्हे पकड़कर नीचे कर दिया...उनकी किस्स अभी तक चल रही थी...दोनो एक दूसरे के होंठों को किसी पनीर के टुकड़े की तरह मज़े ले-लेकर चूस रहे थे..

अजय ने एक बार फिर से अपना हाथ उपर किया...और रचना के विरोध के बावजूद उसने रचना के बूब्स को पकड़ ही लिया..

उसे तो ऐसा लगा जैसे कोई सख़्त नारियल पकड़ लिया हो...उतने ही बड़े और लगभग उतने ही कठोर...ऐसे कड़क मुम्मे तो उसने आज तक नही पकड़े थे...शायद उसकी बॉडी का सारा खून इस वक़्त उसकी चुचियों में आकर जम चुका था...और उन्हे पत्थर बना दिया था...लेकिन अजय भी घाघ किस्म का आदमी था, उसने अपनी उंगलियों से जब उसके निप्पल को छेड़ा तो वो सारा खून एक पल में ही पिघल गया...और वो बूब्स अब किसी पानी से भरे गुब्बारे की तरह उसकी हथेली में फिसल रहा था...गीले कपड़े के साथ मुम्मे को पकड़ने में इतना मज़ा आता है ये अजय को आज ही पता चला..

अगले 5 मिनट तक अजय के हाथ उसके पूरे जिस्म पर घूमते रहे...कभी वो दोनो हाथों से उसके बूब्स दबाता...कभी हाथो को नीचे लेजाकर उसकी नाभि वाले हिस्से को मसलता...फिर पीछे लेजाकर उसकी गद्देदार गांड को मसलता.... और कभी उसकी जांघों की चर्बी को रगड़ता ...कुछ ही देर में उसने किसी कुशल और ठरकी दर्जी की तरह उसके हर अंग का सही से नाप ले लिया...

फिर जब साँस लेने के लिए दोनो के होंठ अलग हुए तो ऐसा लग रहा था जैसे तेज़ी से भागती हुई दुनिया रुक गयी है..रचना अपना पूरा भार लिए अजय की गोद में चड़कर बैठी हुई थी...उसके कपड़े अस्त-व्यस्त हो चुके थे...अंदर से भावनाए जाग उठी थी...अजय ने कुछ बोलना या करना चाहा की तभी उसका मोबाइल बाज उठा...वो प्राची का फोन था.

अजय ने फोन उठा कर कान से लगा लिया...रचना ने भी देख लिया था की उसकी वाइफ का फोन है...फिर भी वो उसकी गोद ने नही उतरी...बल्कि अपना सिर उसके कंधे पर रखकर अपने होंठों से उसकी गर्दन पर किस्स करने लगी...उसे चूसने लगी.

प्राची को अजय की चिंता हो रही थी...बारिश काफ़ी तेज थी...वो उसे संभलकर घर आने के लिए बोल रही थी..अजय तो बस हूँ हाँ करता रहा ...क्योंकि उसकी गोद में बैठी रचना बड़े ही सैक्सुअल तरीके से अपने शरीर को घिसती हुई उसे किस्स कर रही थी..

कार में इस वक़्त ऐसा माहौल बन चुका था की अगर अजय चाहता तो वो इस वक़्त कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाती...पहले आशिक़ के हाथों अपनी जवानी मसलवाने में जो मज़ा आता है वो इस वक़्त रचना उठा रही थी...

लेकिन अजय तो हमेशा से ही तड़पाकर मज़े देने में एक्सपर्ट था...उसके हिसाब से अभी के लिए इतना बहुत था...क्योंकि आगे के लिए उसके पास और भी काफ़ी धांसू आइडिया थे जिसमे वो रचना के साथ हर तरह के मज़े ले सकता था.

अजय : "प्राची परेशान हो रही है...आई थिंक अब हमे चलना चाहिए....''

बेचारी रचना का चेहरा उतर सा गया...शायद वो भी सोच रही थी की ये कैसा आदमी है जो इतने अच्छे मौके का फयदा नही उठा रहा है...बेचारी बेमन से उसकी गोद से उतरकर वापिस अपनी सीट पर चली गयी...अजय ने गाड़ी स्टार्ट की और संभलकर चलाते हुए दोनो घर की तरफ चल दिए.

थोड़ी देर बाद दोनो नॉर्मल बातें करने लगे..और ऐसे ही बाते करते-2 उनका घर आ गया...

उसका तो उतरने का भी मन नही कर रहा था...लेकिन वो भी जानती थी की अभी के लिए तो कुछ पॉसिबल नही है...और वैसे भी ये मौके तो अब हर रोज आया करेंगे..

वो एक बार फिर से उसकी तरफ झुकी और एक छोटी सी किस्स करके जल्दी से उतर गयी.

और अजय वापिस अपने घर की तरफ चल दिया.

और घर जाते हुए एक बार फिर से उसके दिमाग़ में उसकी दोनो सालियों और सासू माँ के चेहरे घूम गये...आज की रात वो किसका शिकार करेगा ये तो वो नही जानता था...लेकिन जो भी होने वाला था उसके साथ उसके लिए तो वो खुद भी तैयार नही था.
 
46

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अब आगे

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अजय हमेशा की तरह अपने ससुराल गया पहले, दरवाजा उसकी सासू माँ ने खोला.वो देख नही पाया लेकिन वो थोड़ी मायूस सी थी..

अजय ने उनके सेक्सी शरीर को निहारा और अंदर आते हुए उसे रगड़ता हुआ प्राची के रूम की तरफ चल दिया.

पीछे से उसकी सास ने कहा : "प्राची वहां नही है...वो वापिस चली गयी ...अपने घर..''

अजय एकदम से चोंक गया...ये कैसे हो गया...वो अपनी सास की तरफ पलटा और उसने सवालो की झड़ी लगा दी.

''लेकिन क्यो....उसे तो डॉक्टर ने मना किया था अभी...ऐसे क्यो किया, इतनी उपर सीडिया कैसे चढ़ गयी वो...''

रजनी ने सब बाते आराम से सुनी और बोली : "वो डॉक्टर से बात कर चुकी है...उन्होने ही ऐसा करने को कहा था,अगर कोई प्राब्लम ना हो तो...और वैसे भी,प्राची काफ़ी दिनों से कह रही थी की उसे अब तुम्हारी बहुत याद आ रही है...वो यहाँ बोर हो रही थी...''

अजय : "मेरी याद आ रही है...हम तो रोज मिलते है...इसमे उदास होने वाली क्या बात है...''

रजनी (मंद-2 मुस्कुराते हुए) : "समझने की कोशिश करो अजय....वो तुम्हे किस तरह से मिस कर रही है...''

अपनी सास की बात सुनकर वो समझ गया की आख़िर प्राची ने ऐसा क्यो किया....उसकी चूत में खुजली हो रही होगी...और अपने मायके में रहकर वो रोज तो चुदाई नही करवा सकती ना...और शायद इसलिए रजनी के चेहरे पर मायूसी थी, क्योंकि प्राची के वापिस घर आ जाने के बाद अजय रात को उनकी चुदाई तो बिल्कुल भी नही कर पाएगा..

रजनी के साथ-2 अजय भी परेशान था, रजनी को अपनी चुदाई की चिंता थी और अजय को उनके साथ-2 पूजा और रिया की भी...काश वो पहले ही रिया की मार लेता, अब तो पूजा और रजनी की मारनी भी मुश्किल लग रही है..

लेकिन ये सब बाते बाद में सोची जा सकती थी, पहले उसे प्राची को देखना था, उसे इस वक़्त प्राची की काफ़ी चिंता हो रही थी.

वो तुरंत अपने घर की तरफ चल दिया

जाते-2 रजनी ने ये भी बता दिया था की इस वक़्त पूजा और रिया प्राची के साथ ही है.

वो सीधा उपर गया,दरवाजा पूजा ने खोला, अपनी माँ की तरह उसका चेहरा भी उतरा हुआ था.

लेकिन इस वक़्त अजय को उससे ज़्यादा अपनी वाइफ की चिंता थी...थोड़ा डांटना भी था उसे.

लेकिन उसके पास पहुँचते ही वो सब भूल गया, प्राची ने जैसे ही उसे देखा वो उसके पास आई और गले से लिपट कर ज़ोर से हग किया...प्राची को इस वक़्त अपनी बहनो की भी चिंता नही थी जो अपनी आँखे फाड़े अपनी बहन को अपने जीजू के साथ चिपके देख रही थी...ऐसा प्राची कभी नहीं करती थी,किसी के सामने उसने पहली बार अजय को इस तरह से हग किया था.

अजय (थोड़ी चिंता भरे स्वर में ) : "प्राची....ये क्या है...तुम्हे डॉक्टर ने मना किया था ना, फिर क्यों इतनी सीडियां चड़कर उपर आई....तुम्हारा हर हफ्ते चेकअप है...ऐसे बार-2 सीडिया उतरना-चड़ना तुम्हारे और बच्चे के लिए सही नही है...''

प्राची : "अजय....मैने अपनी गायनो से बात कर ली थी सुबह ....और तभी मैं आई हूँ ...उन्होने कहा है की लास्ट के 2-3 हफ्ते ही बचे है...और वो घर आकर मेरा चेकअप कर लिया करेगी...वैसे भी काफ़ी दिनों से मैं वहां रहकर बोर सी हो गयी थी....एंड ..आई वाज़ मिस्सिंग यू .....''

उसकी बात सुनकर रिया और पूजा एक साथ बोल पड़ी : "ओहो......ओहो......''

उन्हे इस तरह से छेड़ता देखकर प्राची शरमा सी गयी...और अजय के सीने में सिर घुसा कर छुप गयी..

रिया : "चलो दीदी....अब यहां हमारी कोई ज़रूरत नही है....यहाँ से निकलना ही बेहतर है....ही ही..''

और दोनो बहने हँसती हुई बाहर की तरफ जाने लगी...

तभी पीछे से प्राची ने आवाज़ लगाई और बोली : "अच्छा सुनो....तुम दोनो में से एक को तो यही रुकना पड़ेगा ना...रात को अगर मुझे कोई हैल्प चाहिए होगी तो...और सुबह अजय का टिफिन भी तो तैयार करना होगा...मम्मी कहाँ तक करेंगी ये सब....''

प्राची की बात सुनकर दोनो के चेहरे पर चमक आ गयी....और दोनो ने एक साथ चहकते हुए कहा : "ओके ...ठीक है...मैं रुकूंगी...''

दोनो को एक साथ इतने इंटरस्ट से वहां रुकने के लिए लालायित होते देखकर प्राची भी मुस्कुरा दी...पर उसके पीछे का सच उसके अलावा तीनो ही जानते थे...

अजय ने बात संभाली , ताकि प्राची को एकदम से कोई शक़ ना हो जाए

वो बोला : "रिया, तुम नही, तुम्हारा तो कल एग्जाम है ना, नये कॉलेज में इस तरह से बेफिक्री से रहोगी तो फ़ेल हो जाओगी...तुम घर जाकर पढ़ाई करो, पूजा संभाल लेगी यहाँ ...''

बेचारी बुदबुदाती हुई वहां से निकल गयी....पूजा का दिल और चूत एक साथ पुलकित हो उठे...उसे अपना काम तो बनता हुआ दिख रहा था आज की रात...लेकिन वो नही जानती थी की अजय का उसे रोकने के पीछे कोई ख़ास मकसद नही था, वो प्राची के रहते हुए ऐसा कोई रिस्क नही लेना चाहता था जिसकी वजह से कोई परेशानी हो..

और वैसे भी अपने घर आने के बाद प्राची आज की रात जम कर चुदवायेगी और उसके बाद पूजा को चोदने के लिए रस बचना ही नही था उसके अंदर...

खैर...रिया के जाने के बाद पूजा किचन में जाकर रात के खाने का इंतज़ाम करने लगी...अजय भी फ्रेश होकर प्राची के साथ आकर बैठ गया,और एक अच्छी पत्नी की तरह प्राची ने पहले से ही फ्रिज से ठंडी बियर की बॉटल्स निकाल कर टेबल पर लगा दी..वो भी जानती थी की पीने के बाद अजय उसकी जमकर चुदाई करता है..

अजय ने वही बैठकर पी और किचन में काम कर रही पूजा को भी देखता रहा..और इस बात का ध्यान भी रख रहा था की प्राची ऐसा करते हुए उसे ना पकड़ पाए..

अजय के दिमाग़ में भी कुछ-2 चल रहा था...ताकि पूजा को कम से कम वहां रुकने का कुछ तो इनाम मिले...

और जब कुछ देर के लिए अपने बेडरूम में गयी तो अजय उठकर पूजा के पास गया और बोला : "तुम्हारे यहाँ रुकने के पीछे जो मकसद है, वो आज की रात तो पूरा नही हो सकेगा...''

पूजा (मुस्कुराते हुए) : "कोई बात नही...मेरे लिए इतना ही बहुत है की मैं आपके साथ हूँ ....आज ही नही मिलोगे ना...कब तक बचोगे मुझसे...''

वो अपने होंठों को दांतो तले दबाकर इतने सेक्सी अंदाज में बोली की अजय ने एकदम से आगे होकर उसके होंठों को चूम लिया...ऐसा करने से पहले उसने देख लिया था की प्राची वापिस नही आ रही है..

पूजा तो इतने मे ही खुश हो गयी...उसका भी मन करने लगा की वो भी किस्स करे...पर वो पासिबल नही था...

अजय : "अच्छा सुनो....लाइव टेलीकास्ट देखना चाहोगी...आज की रात का...थोड़ा टाइम पास हो जाएगा तुम्हारा भी...''

ये सुनते ही पूजा की आँखे चमक उठी...वो समझ गयी की अजय किस लाइव टेलीकास्ट की बात कर रहा है..

उसने तुरंत हाँ कर दी...अजय भी वापिस अपनी सीट पर आकर बैठ गया..

पूजा को अपनी चुदाई दिखाकर वो उसे कुछ नया ज्ञान भी देना चाहता था, क्योंकि अपनी पहली चुदाई में उसने वो सब नही किया था जो एक चुदक्कड़ औरत को करना चाहिए...और ये सीखने का इससे अच्छा अवसर और कोई हो ही नही सकता था..

अब अजय और पूजा दोनो को रात के शो का इंतजार था.

खाना खाने के बाद जब कपड़े बदलकर अजय बेडरूम में लेटा हुआ था तो बाहर का काम समेट कर प्राची अंदर आई...और उसने अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिया और चिटकनी लगा दी.

उसने एक बड़ी ही सेक्सी नाइट ड्रेस पहनी हुई थी.

उसे ऐसा करते देखकर अजय बोला : "लगता है मेरे क़त्ल का इरादा है जनाब का...लेकिन ये दरवाजा बंद क्यो कर दिया...''

प्राची (मुस्कुराते हुए) : "ताकि, तुम्हारा जब क़त्ल हो तो पूजा ना देख पाए...''

अजय उठकर उसके पास आया और उसे अपनी बाहों में लेकर बोला : "डार्लिंग...वो अपने कमरे में ही होगी, उसकी वैसे भी इतनी हिम्मत नही है की हमारे कमरे की तरफ आए...पहले भी तो रह चुकी है वो यहाँ ऐसे...इस तरह से कमरा बंद करने से अच्छा नही लगेगा..ये लाइट बंद कर दो,सब ठीक हो जाएगा...''

अजय तो पूजा को नाइट शो का प्रोमिस कर चुका था, इसलिए उसे किसी भी सूरत में ये दरवाजा खुला रखना था, ताकि वो अंदर झाँककर उनकी चुदाई देख सके..

अजय ने चिटकनी खोल दी और लाइट बंद कर दी.

प्राची ने उसके बाद कुछ नही बोला, वैसे भी वो सैक्स के टाइम किसी भी बात पर बहस करके अपना और अजय का मूड खराब नही करती थी.

लेकिन दरवाजा बंद होने के बाद पूरे कमरे में घुपप अंधेरा छा गया...उन दोनो को कुछ भी दिखाई नही दे रहा था...इसलिए अजय ने नाइट बल्ब जला दिया...और प्राची को लेकर बेड की तरफ आ गया...जाते-2 उसने हल्का सा दरवाजा भी खोल दिया ताकि उसमें से पूजा अंदर झाँक कर देख सके....

ऐसी सिचुएशन में भी बड़ी चिंता हो रही थी अजय को अपनी साली की...ऐसा जीजा सभी को मिलना चाहिए...वैसे जीजा तो सभी को ऐसा ही मिलता है,बस सालियां ही अपने जीजे के मन की बात नही समझती.

खैर, इधर अजय के रूम का दरवाजा बंद होते ही अपने कमरे में बैठी पूजा किसी बिल्ली की तरह चौकन्नी हो गयी, उसे पता चल चुका था की अब किसी भी पल शो शुरू हो सकता है..कुछ देर रुककर वो दबे पाँव बाहर निकली, पूरे घर की लाइट्स बंद थी, सिर्फ़ अजय के बेडरूम से हल्के नाइट बल्ब की रोशनी बाहर की तरफ आ रही थी...पूजा दबे पाँव दरवाजे तक गयी और छुपकर अंदर देखने लगी.

अंदर अजय ने प्राची को बेड पर लिटा दिया था...और धीरे-2 उसने उसकी टी शर्ट को उपर करके उसके फूले हुए पेट को उजागर किया...इस बेडोल शरीर के बाद भी प्राची बहुत सेक्सी लग रही थी...उसका दूध से नहाया हुआ बदन नाइट बल्ब की रोशनी में चमक उठा...अजय ने झुककर उसके पेट पर एक हल्की सी किस्स कर दी.

अजय के गीले होंठों की चुभन से प्राची सिहर उठी..और बिस्तर पर किसी नागिन की तरह मचलने लगी..

''ओह अजय..............माय डार्लिंग.....''

अजय के किस्स को बाहर खड़ी पूजा ने भी महसूस किया...ठीक उसी जगह पर जहाँ प्राची को किस्स किया था उसने...पूजा ने अपनी टी शर्ट उठा कर अपनी उंगलियों को मुँह में डालकर थोड़ा सा गीला किया और पेट के उसी हिस्से पर लगा दी..उसे यही एहसास हुआ की उसे भी वो किस्स मिल गयी है.

वो धीरे से बुदबुदाई : "ओह जीजू.............माई डार्लिंग.....''

अजय ने प्राची की टी शर्ट को उपर तक उठा दिया और उसके मोटे ताजे बूब्स उछल कर बाहर निकल आए....उसने ब्रा नही पहनी थी.

अजय ने दोनो को जी भरकर देखा और अपने होंठों को जीभ से गीला किया...प्राची ने उसके सिर पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ खींच लिया, और अपने बूब्स को उसके मुँह में ठूस दिया..और चिल्लाई

''चूसूऊऊऊऊऊऊऊऊऊसो अजय................ उम्म्म्मममममममममम..... ज़ोर से सकक्क करो इन्हे....''

अजय ने बिना कोई देरी किए अपने दाँतों और होंठों से उसे चूसना शुरू कर दिया..

 
बाहर खड़ी प्रिया ने भी अपने उरोजों को बेपर्दा कर दिया और उनपर वो गीली उंगलियाँ लगा कर अपने निप्पल्स को ज़ोर से दबा दिया, उसे ठीक वही एहसास हुआ जैसा उसके जीजू बूब्स चूस्टे हुए देते है...उसके पूरे शरीर में जल तरंग सी बज उठी.मस्ती भरी एक लहर उसके बूब्स से होती हुई नाभि तक और फिर दक्षिण में स्थित चूत तक जा पहुँची.. जिसके एहसास ने उसे सिसकारी मारकर अपने पंजों पर खड़े होने पर मजबूर कर दिया.

अजय ने अपने सारे कपड़े उतार दिए, और प्राची को भी नंगा कर दिया,

अजय उठकर प्राची के सिर के पास आ गया और उसने अपना चॉकलेटी लॅंड उसे चूसने के लिए दे दिया..

वो भी किसी बागड बिल्ली की तरह उसपर झपट पड़ी..आख़िरकार लंड चूसना उसका सबसे फ़ेवरेट काम जो था..उसने अजय के लंड को सड़प -2 करके चूसा और अपने हाथ से उसकी गोटियां सहलाती रही...फिर कुछ देर बाद उसने उसकी गोटियों को चूसा और लंड सहलाती रही...ऐसा उसने करीब 3-4 बार किया..अजय को उसकी यही बात सबसे अच्छी लगती थी की वो उसके लंड को ऐसे चूस्कर पूरा सम्मान देती थी..

उसने अपना लंड चुस्वाते हुए दरवाजे की तरफ देखा,जहाँ छुपकर बैठी हुई पूजा भी अपनी 3 उंगलियों को किसी लंड की तरहा चूस रही थी...अजय उसे दिखाना चाहता था की ऐसे चूसा कर मुझे,ताकि जो मज़े इस वक़्त प्राची दे रही है वो भी दे सके..पूजा समझ गयी और उसने मन ही मन निश्चय कर लिया की अगला मौका मिलने तो दो जीजू,ऐसा चूसूंगी की लंड में दर्द हो जाएगा...

अजय का लंड अब एकदम कड़क हो चुका था, यानी चुदाई के लिए बिलकुल तैयार ..उसे ये भी पता था की ऐसी हालत में सिर्फ़ 2-4 आसन ही है जिनमे वो प्राची की चुदाई कर सकता है...ताकि उसे ज़्यादा झटके ना लगे..और मज़ा भी पूरा मिले.

वो प्राची की टाँगो के बीच आकर बैठ गया, और उसने उसकी बर्गर जैसी फूली हुई चूत को देखा..

वो एकदम लिसलिसा रही थी, अपने ही रस में डूबी हुई सी...अजय ने अपने गीले लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा और धीरे से झटका देकर उसे अंदर खिसका दिया..

''उूुुुउउम्म्म्मममममममममममम....... सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स............. आआआआअहह''

बस यही निकला प्राची के होंठों से...और उसने अपने पूए शरीर को बिस्तर पर पूरी तरह से फेला कर अपने आप को अजय के सामने बिछा दिया...दोनो हाथों को उपर की तरफ और टाँगो को नीचे से फेला कर वो चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगी.

और बाहर खड़ी पूजा ने जब ये सब होते हुए देखा तो उसने भी एक ही झटके में अपनी निक्कर नीचे गिरा दी..नीचे उसने पेंटी नही पहनी हुई थी...और फिर उसने अपने हाथ में पकड़ी एक मोमबत्ती ली और उसे अपनी चूत के अंदर घुसेड दिया..

ये मोमबत्ती उसने किचन से ली थी, ज़्यादा मोटी तो नही पर काफ़ी लंबी थी वो,उसकी लंबाई देखकर पूजा को पहली ही बार मे ये एहसास हो गया था जैसे जीजू के लंड का क्लोन है वो...उसने तुरंत वो मोमबत्ती अपने रूम में लेजाकर छुपा दी थी और अभी यहाँ आते हुए वो उठाती ले आई, उसे पता था की आज की रात ये केंडल बहुत काम आने वाली है.

केंडल के बत्ती वाले हिस्से को अपनी चूत में खिसका कर धीरे-2 धक्का दिया और वो किसी मालगाड़ी की तरह उसकी चूत की सुरंग में रेंगती हुई अंदर जाने लगी..

अंदर अजय की रेलगाड़ी भी अपनी स्पीड पकड़ चुकी थी...और उसने संभलकर धक्के लगाते हुए प्राची की चुदाई करनी शुरू कर दी..

प्राची मदहोशी में आकर चिल्लाए जा रही थी..

''आआआआआआआआअहह मेरे राजा............ उफफफफफफफफफफ्फ़ क्या मज़ा देता है ये लंड ............. अहह इतने दिनों से प्यास ही नही बुझ रही थी...... आआआआआआजजज मज़ा आया है......... आज जमकर चोदो मुझे....अजय ....... चोदो मेरी चूत को.......अपने मूसल जैसे लॅंड से......''

बाहर ज़मीन पर लेटकर अपनी चूत में मोबतती डालती हुई पूजा भी फुसफुसाई : "उम्म्म्मम ...मेरे राजा.....मेरी चूत में भी डालो ना अपना मूसल..... झटके दे-देकर चोदना मुझे तो....अपनी जान को...अपनी साली को....आअह मेरे सेक्सी जीजू............ मुझे भी चोदो ना....''

काश ऐसा सभी सालियां बोले तो अजय जैसे जीजों को बाहर मुँह ही ना मारना पड़े...घर की बात घर में ही रह जाए.

अजय अब बेड पर लेट गया और उसने बड़ी ही सावधानी से प्राची को अपने उपर बिठा लिया...प्रेग्नेन्सी के बाद उसका वजन काफ़ी बढ़ चुका था,लेकिन अजय भी काफ़ी ताकतवर था, उसने उसे बड़ी ही आसानी से संभाल लिया...और प्राची उसके लंड पर बैठकर धीरे-2 अपने शरीर को हिलाने लगी..अजय ने हाथ उपर करके उसके मुम्मों को पकड़ लिया और उन्हे निचोड़ डाला...उत्तेजना में भरकर प्राची ने उसके हाथ की उंगलियों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया...अब अजय का एक हाथ उसके मुँह में था और दूसरा उसके निप्पल्स पर..

पूजा ने केंडल निकाल कर अपनी 3 उंगलियाँ अपनी शहद उड़ेलती चूत में डाल दी और जितना शहद इकट्ठा हुआ था उसे समेट कर अपने मुँह तक ले आई और उसे चूस डाला...ठीक वैसे ही जैसे उसकी बहन प्राची इस वक़्त अजय की उंगलियों को चूस रही थी.

अजय के लंड पर उछल रही प्राची की स्पीड अब बड़ चुकी थी...लेकिन अजय ने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसके झटकों को कंट्रोल किया हुआ था...और ऐसे ही करते-2 प्राची की चूत ने पानी छोड़ दिया...जो अजय के लंड को पूरी तरह तर-बतर करता हुआ उसकी बॉल्स तक पहुँच गया...

अब एक बार फिर अजय ने प्राची को पीठ के बल लिटा कर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया...और उसकी दोनो जांघे पकड़ कर धीरे-2 उसे चोदने लगा..

पूजा ने भी अपनी केंडल एक बार फिर से अपनी चूत में डाल ली थी और उसे बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर करने लगी...वो भी अपने आख़िरी पड़ाव में थी अब...उसकी केंडल को अंदर बाहर करने की गति इतनी तेज थी की एक पल के लिए तो उसे ऐसा लगा की चूत के घर्षण से निकलने वाली गर्मी से वो केंडल ही ना जल उठे.

अजय भी झड़ने वाला था...प्राची को ये एहसास होते ही उसने कहा : "अजय...प्लीज़ ....मेरे उपर निकालो सारा पानी...मुझे अपने प्यार से भिगो दो आज...''

उसके ऐसा कहने की देर थी की अजय के लंड का बाँध फूट पड़ा...और उसने बिना कोई देरी किए अपना बाजूका उसकी चूत से निकाल कर अपनी हथेली में पकड़ा और प्राची के शरीर पर फायर करने लगा..एक के बाद एक सफेद और चिपचिपी गोलियाँ निकलती गयी उसकी गन से...जो उसके उभरे हुए पेट से लेकर उसके सख़्त मुम्मो तक और उसके भी उपर उसके मुँह और बालों तक को भिगो गयी ..

ऐसी बारिश में नहाने की कल्पना मात्र से ही बाहर सिसकारियाँ मार रही पूजा भी झड़ गयी...अपने जीजे के नाम की केंडल को चूत में लेकर..और बुदबुदाई : "उम्म्म्मममममममममम जीजू.....मेरे प्यारे जीजू...... सिर्फ़ मेरे जीजू..... मेरे ही मेरे जीजू.........''

अंदर प्राची और अजय की ट्रेन शांत हुई और बाहर पूजा की....

प्राची : "उम्म्म्म....मैं तो पूरी भीग गयी आपके पानी से.....''

और मुस्कुराती हुई वो उठ खड़ी हुई और बोली : "मैं ज़रा बाथरूम में जाकर गर्म पानी से शावर ले लेती हू...ये बालों में भी लगा है...ऐसे तो निकलेगा नही ये...''

अजय कुछ आयी बोला...वो तो अभी तक गहरी साँसे लेकर अपने ऑर्गॅज़म से उभरने की कोशिश कर रहा था.

प्राची को बेड से उठता देखकर पूजा भागकर अपने रूम में चली गयी और चादर उपर तान कर सोने का नाटक करने लगी..

प्राची भी रूम से निकलकर बाथरूम की तरफ गयी...और ना जाने क्या सोचकर वो पूजा के रूम की तरफ मुड़ गयी और उसके अधखुले दरवाजे से अपनी बहन को सोता हुआ देखकर वो मुस्कुराइ और फिर बाथरूम में गयी..

अगर इस वक़्त उसने उसकी चादर को खींच कर देख लिया होता तो वो जान लेती की वो भी मदरजात नंगी है इस वक़्त जैसी की वो थी...और वो भी अभी-2 झड़कर हटी थी जैसे की प्राची खुद.

लेकिन इस भेद को शायद सारी उम्र ऐसे ही रहना था,इसलिए प्राची के हाथो ऐसा कुछ नही हुआ..

उसके बाथरूम मे जाते ही पूजा उछलकर चादर से निकल आई...और बिल्ली की तरह दबे पाँव भागती हुई सी वो अपने जीजू के रूम में घुस गयी....और वो भी एकदम नंगी.
 
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अब आगे

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अजय बेड पर नंगा लेटा हुआ अपनी सांसो को नियंत्रित कर रहा था...हल्के बल्ब की रोशनी में उसका गठीला और नंगा शरीर बहुत सेक्सी लग रहा था..पूजा उसके करीब आई और झुक कर उसने अजय के होंठों पर होंठ लगा दिए..

अजय भी एकदम से चोंक गया..10 सेकेंड की स्मूच करने के बाद वो बुदबुदाया : "उम्म्म्मम...... दोबारा मन कर रहा है क्या डार्लिंग...''

पूजा : "जीजू...आँखे खोलो...ये मैं हूँ ..पूजा''

पूजा की आवाज़ सुनते ही अजय चोंककर बैठ गया,सामने पूजा थी और वो भी पूरी नंगी, उसने तो सोचा भी नही था की पूजा इस तरह की हिमाकत करेगी,उसकी बीबी इस वक़्त बाथरूम में थी और कभी भी आ सकती थी,उसने अगर पूजा को इस तरह से अपने बेडरूम में देख लिया तो उसका तो तलाक़ पक्का है..अजय की तो फट्ट कर हाथ मे आ गयी

वो दबी आवाज़ में चिल्लाया : "पूजा....तुम....यहाँ क्या कर रही हो...निकलो अभी के अभी...''

पर पूजा के सिर तो एक अलग ही खुमारी चढ़ चुकी थी, वो अपनी नशीली आँखो से अपने जीजू को देखती हुई उसके और करीब आई और बोली : "मैं चली जाउंगी पर मुझे ये चाहिए...आज..किसी भी कीमत पर...''

इतना कहकर पूजा ने अजय के निढाल हो चुके गीले लंड को पकड़कर ज़ोर से मरोड़ दिया...और फिर बिना किसी वॉर्निंग के नीचे झुकी और अपनी बहन की चूत से बाहर निकले उस लंड को अपने मुँह में लेजाकर अपनी लार से नहला दिया,जैसी स्मूच अपने जीजू के होंठो की ली थी,ठीक वैसी ही उसने उनके लंड की ले डाली.

अजय के हाथ अपने आप उसके नंगे शरीर पर जा लगे और ना चाहते हुए भी एक लंबी सी सिसकारी निकल गयी उसके मुँह से.

पूजा ने लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और उठकर बाहर जाती हुई एक बार फिर से बोली : "मैं वेट करूँगी, टेक युवर टाइम, बट आई वॉंट यू टू फ़क्क मी टुनाइट...''

इतना कहकर वो नंगी ही भागती हुई बाहर निकल गयी और फिर अपने कमरे में घुस गयी ..अजय बेचारा अपना चमकता हुआ लंड लेकर बेड पर हैरान परेशान बैठा रह गया.

2 मिनट बाद प्राची भी वॉश करके वापिस आ गयी,वो भी अभी तक नंगी ही थी

प्राची ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा और बोली : "ये कैसे बैठे हो...अभी और करने का मन है क्या...''

अजय तो जैसे सपने से बाहर आया...एक पल के लिए तो उसे लगा की ये उसका वहम था की पूजा उनके बेडरूम में आई थी,लेकिन फिर उसने जब अपने लंड की तरफ देखा तो उसपर चमक रही थूक को देखकर उसे एहसास हुआ की वो सच में यहां आई थी...वो अपने लंड को सॉफ करने लगा.

प्राची : "ऐसे क्यों कर रहे हो...बाहर जाओ,बाथरूम में ...वॉश करके आओ..फिर सोते है...मुझे तो अब बहुत तेज वाली नींद आ रही है..''

अजय उठा और बाथरूम की तरफ चल दिया..वाश्बेसिन पर खड़े होकर अपने लंड और गोटियों को अच्छी तरह से सॉफ करने के बाद वो वापिस बेडरूम में आ गया,प्राची तब तक अपना गाउन पहन कर लेट चुकी थी,अजय ने भी अपनी टी शर्ट और निक्कर पहनी और प्राची की गांड से चिपककर सो गया.

सिर्फ़ 5 मिनट के अंदर ही प्राची गहरी नींद में सो गयी,अजय उससे दूर हटकर लेटा रहा...उसके मन में उथल पुथल मची हुई थी,जाए या ना जाए..उसे पूजा पर गुस्सा भी आ रहा था की मना करने के बावजूद वो आज चुदवाने के लिए ज़ोर दे रही है...लेकिन उसमे उसकी भी कोई ग़लती नही थी,ऐसी उम्र में ,सिर्फ़ एक बार चुदने के बाद जो चुदासी चड़ती है,उसे दबाकर रखना वाकई में काफ़ी मुश्किल होता है,वैसे भी उसने खुद ही तो उसे अपनी चुदाई का लाईव टेलीकास्ट दिखाकर ऐसे तड़पने को विवश किया था..

लेकिन एक बात और थी,अपनी साली को अपनी बीबी के घर में होते हुए चोदने में जो मज़ा मिलेगा,वो अलग ही होगा, इसमे एक अलग ही किक्क मिलेगी..और वैसे भी,जब से वो उसके लंड को चूस कर गयी थी, उसका लंड उसकी गर्मी से अब तक जल रहा था,अब तो ये जलन उसकी चूत के पानी से ही बुझेगी.

इसी तरह से सोचते हुए उसे करीब आधा घंटा हो गया, अब उसने जाने का निष्चय कर लिया, वो जानता था की प्राची की नींद काफ़ी पक्की है,शादी के इतने महीने बीत जाने के बाद आज तक उसकी नींद नही टूटी थी रात के समय..लेकिन अपनी तरफ से वो पूरा निश्चिंत होकर चलना चाहता था, वो दवाई की शीशी भी उसके पास थी,पर प्रेगनेन्सी में वो उसका इस्तेमाल नही करना चाहता था,इसलिए वो चुपचाप उठा और दबे पाँव बेडरूम से निकल आया,और बाहर आकर उसने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया..

अब अगर प्राची की नींद खुल भी जाए तो कम से कम वो रंगे हाथो नही पकड़ा जाएगा,दरवाजा बंद करने का बहाना वो बाद में सोच लेगा..

वो अपने पंजों पर चलता हुआ दूसरे बेडरूम में जा घुसा..कमरे में घुप्प अंधेरा था,पूजा ने शायद नाइट बल्ब भी बंद कर दिया था..वो धीरे-2 चलता हुआ अंदर आया और धीरे से उसने अपनी साली को पुकारा : "पूजा...पूजा...कहाँ हो तुम...''

वो उसके पीछे ही खड़ी थी,बिलकुल नंगी

पूजा पीछे से आकर अजय से लिपट गयी..अपने मुम्मे उसने अजय की पीठ पर गाड़ दिए और अपने हाथों को आगे लेजाकर उसकी छाती को जकड़ लिया.और अंधेरे मे खड़े होकर वो उसकी पीठ पर किस्स करने लगी.

'' ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जीजू .... उम्म्म्म्म्म्म मुझे पता था की आप जरूर आओगे , आई लव यू जीजू, आई लव यू ''

अजय के हाथ उसके हाथों से होते हुए उसकी कमर तक आए...उसके नंगे बदन को अँधेरे में महसूस करते ही वो ऊपर से नीचे तक झनझना सा गया

अजय का गुस्सा तो एकदम गायब हो चुका था,पहले तो उसने सोचा था की जाकर उसे डाँटेगा और बाद में जो करना होगा वो करेगा..पर पूजा ने तो उसे सोचने के काबिल ही नही छोड़ा था..

औरत का नंगा जिस्म एक ऐसा हथियार है जो अच्छे से अच्छे मर्द की बोलती बंद कर सकता है..यही इस वक़्त अजय के साथ हो रहा था.

अजय ने उसके हाथो के फंदे से अपने आप को छुड़वाया और उसकी तरफ घूम गया..अंधेरा काफ़ी था,लेकिन उन दोनो के मुँह जब आगे हुए तो होंठ सीधा एक दूसरे पर ही जाकर लगे .

ये किस्स एक ऐसा खेल है जिसे खेलने के लिए आँखो की नही बल्कि दिल की ज़रूरत होती है...दोनो एक दूसरे के होंठों को मुँह में लेकर ऐसे चबा रहे थे मानो खा ही जाएँगे.अजय को इस घर की औरतों में ये बात सबसे ज़्यादा पसंद आई थी की वो सामने वाले को ऐसे चूमती थी मानो उसके होंठों में सोना छुपा है.जिसे कुरेदकर वो किसी भी कीमत में निकालकर ही रहेंगी , अभी कुछ देर पहले उसकी बहन प्राची ने उसके होंठों को चूस-चूसकर सूजा सा दिया था और अब ये बिल्ली की तरह उसके होंठों को काट रही है...चूस रही है..... चबा रही है

अजय ने उसके नंगे बदन को उपर से नीचे तक सहलाया..पहले धीरे-2 और फिर ज़ोर-2 से...ख़ासकर उसके मुम्मों को...एक मिनट के लिए जब पूजा साँस लेने के लिए अलग हुई तो अजय ने अपना मुँह नीचे किया और उसके दाँये मुम्मे को पकड़कर अपने मुँह में दबोचा और ज़ोर से काट लिया...वो किसी बकरी की तरह मिमिया उठी...और अपनी एक टाँग उठा कर उसने अजय की कमर से लपेट दी..अजय ने उसकी गांड पर हाथ रखकर उसे उचका लिया और पूजा ने दूसरी टाँग भी उसकी कमर से लपेट कर उसे जकड़ लिया..और अब वो अजय के गले में बाँहे डालकर झूल रही थी और अजय उसकी गोरी गांड को हाथों से मसलता हुआ उसके दोनो मुम्मों का दूध एक-2 करके पी रहा था.

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... उम्म्म्ममममममममममम.... जीजू.............. आई लव यू ..... मार्क बनाओ दांतो से..... प्लीज़............''

अजय को मालूम था की वो ऐसा क्यों कह रही है...वो बाद में ये निशानी रिया को दिखाकर उसे चिड़ाना चाहती थी..

अजय ने अपने दाँतों और जीभ का इस्तेमाल करके उसे निप्पल के थोड़ा उपर वाले हिस्से को चूसना शुरू कर दिया...और इतनी ज़ोर-2 से चूसा की उसके मुम्मे का सारा खून एक जगह इकट्ठा हो गया और एक गहरा लाल निशान बन गया..पहले एक मुम्मे को अच्छी तरह से चूसकर उसपर मार्क बनाया और फिर दूसरे को चूसकर उसके ऊपर भी..

अजय : "ये लो....अब ये निशान एक हफ्ते से पहले जाने वाले नही है...''

पूजा मुस्कुरा का बोली : "एक हफ्ते बाद फिर से बनवा लूँगी...आप कौन सा भागे जा रहे हो कही...''

और इतना कहकर वो एक बार फिर से एक गहरी स्मूच में डूब गये.

अजय ने उसे अपनी गोद से उतारा और बोला : "अब तुम भी तो लव बाइट दो मुझे ..यहाँ पर..''

इतना कहकर उसने पूजा के हाथ मे अपना लंड पकड़ा दिया...वही लंड जो सिर्फ़ एक घंटे पहले की जबरदस्त चुदाई से निढाल सा हुआ पड़ा था अब धीरे-2 होश में आने लगा था, अजय के लंड की नसें अभी तक चमक रही थी,पूजा ने उसे अपने मुँह में लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी,अजय की आँखे बंद होने लगी, उसने अपनी टी शर्ट उतार दी,निक्कर भी अपने आप नीचे जा गिरी

वो पीछे की तरफ गया और बेड पर बैठ गया...पूजा ने उसके लंड को चूसते हुए उसके सीने पर हाथ रखकर उसे पीछे की तरफ लेटने को कहा,वो लेट गया और पूजा ने अपने मुम्मे उसके घुटनों पर रगड़ते हुए उसके लंड की चुसाई शुरू कर दी..पूजा के निप्पलों की चुभन बता रही थी की वो कितनी उत्तेजित है इस वक़्त..

पूजा के लंड चूसने की गति पिछली बार से ज़्यादा थी,शायद अजय और प्राची की चुदाई देखकर वो थोड़ा और मन लगाकर चूसना सीख गयी थी, उसने ये बात नोट कर ली थी की जितनी ज़ोर से चूसोगे,मर्द उतना ही ज़्यादा खुश होगा..उत्तेजित होगा..

और यही इस वक़्त अजय के साथ हो रहा था, उसने पूजा के सिर पर हाथ रखकर उसके चूसने की स्पीड पर ब्रेक लगाया,वरना उसे डर था की ज़ोर से चूसने के चक्कर में उसके पैने दाँतों का शिकार ना हो जाए उसका छोटा सिपाही.

अजय के लंड को पूरी तहर चोपड़ने के बाद वो सीधा उपर जा चढ़ी और अपनी चूत वाले हिस्से को लंड के उपर फँसाकर ज़ोर से सिसकारी मारकर बोली : "उम्म्म्मममममममममम... जीजू ....... अब सब्र नही होता.... प्लीज़ फक्क मीइssssssss ..... चोदो मुझे...... आई वॉंट यू नाउ....''

अजय ने भी देरी करनी उचित नही समझी..उसे प्राची के उठने का भी डर सता रहा था,इसलिए जल्द से जल्द पूजा की चुदाई करके वो वापिस पहुँचना चाहता था.

पूजा ने उसके लंड को अपनी चूत की फांकों में फंसाकर कुछ देर तक अजय के लंड की अच्छे से मालिश की, ऐसा करने से ये फायदा हुआ की उसकी चूत से जो रस बुरी तरह से बाहर निकल रहा था,वो उसने अजय के लंड के ऊपर मलकर उसे पूरी तरह से रंवा कर दिया, अब वो एक ही झटके में अंदर घुस सकता था

अजय ने उसकी तरबूज जैसी टाइट गांड को पकड़ा और अपने चूतड़ हवा में उठाकर अपने लंड को उपर की तरफ धक्का दिया..कर्रर्र्ररर की आवाज़ के साथ वो लौड़ा एक बार फिर से पूजा की चूत में दाखिल हो गया...और उसने अपने दोनो मुम्मों से अजय के मुँह को दबा कर अपना पूरा भार उसके उपर डाल दिया.

 


''ईईईईईईईईईईईईई........ सस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... ओह जीजू ......... म्*म्म्ममम........ आई लव यूउुुुउउ''

और इतना कहकर उसने अपने ढीले और गीले होंठ अजय के होंठों पर रखकर उसे चूमना शुरू कर दिया..अजय की रेलगाड़ी चल पड़ी..वो उसकी फुददी को चोदता हुआ उसके नर्म मुलायम होंठों को चूस रहा था,अपनी छाती पर उसके नर्म मुम्मो को महसूस कर पा रहा था..

दोनो के शरीर आपस में घिस रहे थे और ऐसा लग रहा था की उनमे से आग निकल पड़ेगी..दोनो काफ़ी गर्म हो गये थे...और फिर वो वक़्त भी आ गया जब दोनो ही एक साथ चिल्ला पड़े...दोनो का ओर्गास्म एक साथ ही हो गया था.

''आआआआआआहह ओह माई गॉड ...................सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... ''

अजय भी सिसियाता हुआ सा उसके बालों में मुँह छुपा कर काफ़ी देर तक अपना माल उसकी चूत में छोड़ता रहा ....पूजा के साथ भले ही प्राची जितना टाइम नही लगा था, लेकिन इसकी चुदाई में मज़ा पहले से ज़्यादा आया था...

अजय ने पास ही पड़े पिल्लो को उठाया और उसका कवर निकाल लिया...और पूजा को धीरे से उठने के लिए कहा...जैसे ही वो उठी, अजय का लंड फिसलकर बाहर आ गया और पीछे -2 निकला ढेर सारा रस

जिसे अजय ने पिल्लो कवर लगा कर सोख लिया...और पूजा की चूत अच्छी तरह से सॉफ कर दी..पूजा को उसका ये केयरिंग अंदाज काफ़ी पसंद आया..उसके बाद अजय ने उसी कवर से अपना लंड भी सॉफ किया और उसे एक कोने में फेंक दिया..

थोड़ी देर तक दोनो ऐसे ही एक दूसरे से चिपककर लेटे रहे...चूमते रहे..अजय ने सोचा भी नहीं था की वो अपनी लाइफ में इस तरह का रिस्क लेगा ,अपनी बीबी के घर पर होते हुए अपनी साली की चुदाई करेगा, लेकिन जो भी उसने किया था, मजा बहुत मिला था दोनों को ।

फिर अजय वापिस चला गया..उसे प्राची का डर सता रहा था..गनीमत थी की वो अभी तक सो रही थी..वो वापिस उसके पीछे जाकर लिपटकर पहले जैसे सो गया,जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

अगले दिन फ्राइडे था,कुछ ख़ास नहीं हुआ, लेकिन वीकेंड पर कुछ ऐसा होने वाला था जो अजय की जिंदगी में एक और मसालेदार रंग भरने वाला था

शनिवार को अजय की छुट्टी थी, उसने पहले ही सोच रखा था की आज वो पूरा दिन आराम करेगा, बियर पीकर मस्त रहना चाहता था वो ...पूरे हफ्ते चुदाई कर-करके उसकी हालत खराब हो चुकी थी, अब इन 2 दिनों में वो प्राची के साथ बिना कुछ करे रहना चाहता था..

लेकिन चुदाई के देवता को शायद उसका ये आराम करने का प्लान पसंद नही आया था..जैसे ही वो नाश्ता करके हटा, उसके बॉस का फोन आ गया.

अजय : "जी बॉस, कहिए...''

बॉस : "अजय , वो जो अमेरिका वाली पार्टी थी,जिसे तुमने प्रपोज़ल भेजा था, उनका फोन आया था मुझे अभी, वो हमारी सर्वीसेज़ लेने के लिए तैयार है...अब तुम जल्दी से उन्हे हमारे अभी तक के प्रोजेक्ट्स की एक प्रेज़ेन्टेशन बना कर भेज दो,और उसके साथ उनमे आई लागत और टेक्निक की डिटेल्स भी दे देना , प्रेज़ेन्टेशन ऐसी होनी चाहिए की वो ऑर्डर हमें ही दे...समझे..''

राहुल : "जी... जी बॉस...''

बॉस : "लेकिन इसके लिए हमारे पास सिर्फ़ आज और कल का दिन है...आई नो की ये छुट्टी वाले दिन है, बट तुम्हे कुछ मैनेज करना पड़ेगा...''

राहुल की तो सुलग गयी ये सुनकर...कहां तो उसने पूरा दिन आराम करने का सोचा हुआ था और ये बॉस है की उसका आज और कल दोनों दिन खराब करने में लगा है...वो जानता था की ये काम कितना बड़ा है, कम से कम 8-10 घंटे का काम था...और वो ये भी जानता था की उसके अलावा कोई और ये काम कर ही नही सकता..और वैसे भी हाल ही में मिली प्रमोशन के बाद तो उसकी ज़िम्मेदारी ज़्यादा बड़ चुकी थी..इसलिए उसने बुझे शब्दों में हाँ कर दी.

बॉस ने ये कहते हुए फोन रख दिया की अभी किसी के हाथ ऑफीस की चाभी उसके घर भिजवाता हूँ ..और ये भी कहा की अगर जरुरत पड़े तो वो भी ऑफिस आ जायेगा

फोन रखने के बाद उसने बुझे मन से जब ये बात प्राची को बताई तो वो बोली : "अरे , इसमें इतना परेशान होने वाली क्या बात है, ये तो तुम्हारा काम है, तुम्हे ज़रूर करना चाहिए, तुम जाओ ऑफीस, मेरी फ़िक्र ना करो, पूजा और रिया तो है ही ,उन्हे बुला लूँगी...''

कुछ ही देर में उसके बॉस का नौकर घर आकर ऑफीस की चाभी दे गया.

राहुल ने जीन्स और टी शर्ट पहनी और कार निकाल कर ऑफीस के लिए निकल पड़ा...कहां तो उसने दिन में आराम करते हुए बियर पीने का प्रोग्राम बनाया था और कहां तैयार होकर ऑफीस जाना पड़ रहा है.

घर से निकलकर उसने रचना को फोन किया,क्योंकि प्रॉजेक्ट से जुड़ी फाइल तो उसने ही रखी थी, वही बता सकती थी की वो फाइल कहाँ रखी हुई है...

रचना ने जब अपने बॉस का नाम अपने मोबाइल पर चमकता हुआ देखा तो उसके चेहरे की खुशी देखने वाली थी..

रचना : "गुड मॉर्निंग सर...आज छुट्टी वाले दिन मेरी याद कैसे आ गयी...और वो भी सुबह -2..''

उसकी बातों से छलकता प्यार सॉफ महसूस कर पा रहा था अजय...पर इस वक़्त उसका सारा ध्यान उस प्रॉजेक्ट पर था,जो उसे निपटाना था.

उसने रचना को सारी बात बताई और फाइल के बारे में पूछा.

रचना : "सर...वो मेरी डेस्क के साइड वाली लंबी फाइल केबनेट में है...आपको शायद वो मिलेगी नही...आप कहे तो मैं ऑफीस आकर निकाल दूँ वो...आपकी भी थोड़ी हेल्प कर दूँगी मैं ...''

ये सुनते ही अजय का दिमाग़ ठनका ..और अगले ही पल उसकी आँखे चमक उठी...इस बारे में तो उसने सोचा ही नही था...पूरा ऑफीस खाली होगा...वो आराम से रचना के साथ कुछ भी कर सकता है...कोई रोकने वाला नही होगा..किसी का डर भी नही होगा...उसके साथ मजे करने का इससे अच्छा मौका शायद उसे दोबारा ना मिले.

वो तुरंत बोला : "आर यू श्योर ...मतलब, तुम्हे कोई परेशानी तो नही होगी ना...आज तो ऑफ डे है...तुम्हारे मॉम डेड कुछ बोलेंगे तो नही ना...''

रचना को शायद अपना काम बनता नज़र आ रहा था,वो भी चहकते हुए बोली : "नो सर...ऐसा कुछ भी नही है...इन्फेक्ट मैं तो घर पर बोर ही हो रही हूँ ..आपके साथ रहूंगी तो मेरा भी टाइम पास हो जाएगा...''

अजय : "ओके ...आ जाओ फिर....मैं तुम्हारा वेट करूँगा...''

इतना कहकर अजय ने फोन रख दिया...उसके चेहरे से खुशी के भाव जा ही नही रहे थे...उसने तो नोट भी नही किया की कब उसका लंड उसकी जीन्स में खड़ा हो चुका था...अब तो उसके दिमाग़ में जबरदस्त आइडियास आने लगे थे...उसने गाड़ी रोककर रास्ते से बियर के केन ले लिए...आख़िर ऑफीस में उसके और रचना के अलावा कोई और तो होगा नही,अब वो जानता था की ऑफीस के इस बोरियत भरे दिन को कैसे मौज मस्ती में बदला जाए...कुछ ही देर में ऑफीस आ गया और ऑफीस खोलकर वो अंदर आ गया.

अभी तो सिर्फ़ 12 ही बजे थे...रचना को आने में अभी थोड़ा टाइम था..इसलिए उसने फोन करके पिज़्ज़ा का ऑर्डर दे दिया..वो जानता था की रचना को पिज़्ज़ा कितना पसंद है...थोड़ी बहुत भूख उसे भी लगी थी.तब तक उसने एक बियर केन खोला और मज़े से अपनी चेयर पर बैठकर पीने लगा.

करीब 5 मिनट बाद उसके मोबाइल पर रचना की कॉल आई.

अजय का तो दिल धक्क से रह गया, की कहीं मना करने के लिए तो फोन नही कर रही...शायद घर वाले छुट्टी वाले दिन ऑफीस जाने से मना कर रहे हों..

उसने फोन उठाया और बोला : "बोलो रचना...क्या हुआ...तुम आई नही अभी तक..''

रचना : "सर..मैं तो आ गयी हूँ ...पर आपने तो मैन गेट बंद कर रखा है...जल्दी से आकर खोलिए ना..''

अजय को ध्यान आया की अंदर आकर उसने गेट को अंदर से लॉक कर दिया था...ये डबल साइड वाला लॉक था जो एक ही चाभी से अंदर और बाहर दोनो तरफ से खुल जाता था...दरवाजे पर अंदर की तरफ कोई चिटखनी नही थी,ये घर तो था नही,ऑफीस में तो ऐसे ही दरवाजे होते है..

वो भागता हुआ सा गेट तक गया और दरवाजा खोल दिया..

बाहर रचना खड़ी थी.

ब्लैक कलर की एक सैक्सी सी ड्रेस पहन कर.

अजय तो एकटक उसे निहारता ही रह गया,उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी पार्टी में आई है .
 
48

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अब आगे

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रचना का मासूम सा चेहरा आज बहुत ही सैक्सी लग रहा था उसे..उसके चेहरे पर जो स्माइल थी,उसका तो कोई मुकाबला ही नही था आज ..

वो अपने बॉस को ''हैल्लो सर'' बोलती हुई अंदर आ गयी..

और अपने केबिन की तरफ चल दी.

अजय भी दरवाजा लॉक करके उसके पीछे-2 चल दिया...उसकी मटकती गांड को देखते हुए..आज वो अपनी कमर को कुछ ज़्यादा ही मटका कर चल रही थी..

अंदर पहुँचकर अजय अपनी चेयर पर बैठ गया और रचना केबनेट से फाइल निकालने लगी..

ऑफीस में आज उसके और रचना के सिवाए कोई भी नही था, ये एहसास अंदर तक रोमांचित कर रहा था उसे..

वो बियर के सीप भरता हुआ आराम से रचना के पिछवाड़े को देखने लगा..

रचना ने फाइल निकाली और उसे लेकर अजय के पास आई...उसे बियर पीते देखकर वो मुस्कुरकर बोली : "आज तो आप फुल मस्ती के मूड से आए है ऑफीस...''

इतना कहकर वो झुकी और अजय के सामने फाइल खोलकर रख दी..अजय ने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसकी उस नर्म गांड को,जिसे काफ़ी देर से वो घूरकर देख रहा था,अपने खड़े लंड के उपर लाकर ज़ोर से दबा दिया..

वो भी मुस्कुराती हुई सी,बिना किसी विरोध के अजय की गोद में बैठ गयी और अपनी एक बाहं उसके गले में लपेटते हुए उसे ज़ोर से हग कर दिया.

अजय ने भी मौके का फयडा उठाकर उसे ज़ोर से अपनी बाहों में भींच लिया, और उसके गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों को चूसने लगा..

उनकी ये किस्स करीब 2 मिनट तक चली, जिसके अंदर उन्होने एक दूसरे को बुरी तरह से चूस डाला..

किस्स तोड़कर रचना ने अपनी साँस पर नियंत्रण किया और फिर मुस्कुरा कर बोली : "पता है सर , जब से आपका फोन आया है,मेरे पेट में गुदगुदी सी हो रही थी...मन कर अरहा था की बस उड़कर पहुँच जाऊं यहाँ''

अजय भी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया और अपना हाथ उसके नर्म और मुलायम पेट पर रखकर बोला : "ज़रा मैं भी तो देखूं की कहाँ पर हो रही है ये गुदगुदी...''

अजय ने उसके पेट पर गुदगुदी करनी शुरू कर दी और वो मचलती हुई सी,अपने आप को बचाने का प्रयास करती हुई और ज़ोर-2 से हंसते हुए अपनी नर्म गांड को ज़ोर से उसके लंड पर रगड़ने लगी..

अजय के पास आज पूरा मौका था जब वो अपनी सेक्रेटरी को ऑफीस में ही चोद सकता था, पर जैसा की उसने शुरू से ही सोच रखा था की इसे सबसे आख़िर चोदेगा ,अभी के लिए तो बस उससे मज़े लेगा..भले ही आज जैसा मौका दोबारा ना मिले पर इस मौके को वो ऐसे ही हाथ से नही जाने देगा...चुदाई के अलावा जो भी सैक्स की किताब में लिखा होता है,वो आज रचना के साथ कर लेना चाहता था.

अजय ने जब एक और सीप बियर का पिया तो रचना अपनी नर्म उंगलियाँ उसके गीले होंठों पर फेरति हुई बोली : "आई लाईक दिस स्मेल....मुझे बियर की स्मेल बहुत पसंद है...कॉलेज टाइम में छुप -छुपकर हॉस्टल में मँगवाकर पिया करती थी हम सभी फ्रेंड्स...''

अजय ने केन उठाकर उसकी तरफ करते हुए कहा : "तो ये लो ना,एक सीप पीकर देखो, थोड़ा सरूर चढ़ेगा तो मज़ा आएगा..

रचना : "ऐसे नही...अपने होंठों से पिलाओ..डबल सरूर चढ़ेगा ...''

रचना तो उसकी उम्मीदों से ज़्यादा किंकी निकली..

अजय ने फ़ौरन एक बड़ा सा घूँट पिया और अपने होंठ उसके सामने कर दिए..रचना ने तुरंत अपने रसीले होंठों को अजय के होंठों के चारों तरफ लपेट कर उसे चूस लिया,अजय ने होंठों को पिचकारी बनाकर बियर उसके मुँह में छोड़ दी, जो वो गटागट पी गयी..और साथ ही हर घूँट पर वो उसके होंठों को ज़ोर से चबाती भी चली गयी..

अजय के हाथ उसके बूब्स पर पहुँच गये और वो होले -2 उन्हे प्रेस करने लगा..और फिर धीरे से बोला : "मुझे भी पीनी है...ये वाली बीयर...''

वो उसके निप्पल्स की नोक को पकड़कर दबा रहा था..

रचना चिहुंक उठी उसके इस प्रहार से...और बड़े ही सेक्सी अंदाज में बोली : "येस बॉस....''

और वो उठकर अजय के सामने खड़ी हो गयी..अजय ने पहले तो नोट नही किया था पर अब उसने गोर से देखा तो पता चला की उसने अपनी ब्लेक ड्रेस के अंदर ब्रा नही पहनी हुई है...पर ड्रेस के अंदर ही बूब्स को संभाल कर रखने के लिए एक्सट्रा पेड लगा रखे थे,जिससे वो बिना ब्रा के ना लगे...

अजय के लिए ये पहला मौका था जब वो रचना के मुम्मे देखने वाला था...रचना भी अपने बूब्स अपने बॉस को पहली बार दिखाने में थोड़ा शरमा रही थी...उसने आँखे बंद कर ली और धीरे से अपनी ड्रेस के गले वाले हिस्से को नीचे कर दिया...धीरे-2 सफेद पर्वत की तरह उसके गोरे-2 मुम्मे उजागर होने लगे..और फिर उसके निप्पल्स भी सामने आए जो गहरे लाल रंग के थे...अजय तो पलके झपकना भी भूल गया, रचना ने अपनी ड्रेस को मुम्मो के नीचे फँसा कर अटका दिया और अपने तने हुए मुम्मे अजय की आँखो के सामने लेकर खड़ी हो गयी.

रचना इस वक़्त शरमा भी रही थी और अपने तने हुए बूब्स अजय को दिखाकर थोड़ी इतरा भी रही थी...शायद वो जानती थी की ये बिल्कुल सही आकार और रंग के है जो हर मर्द को पसंद आएँगे ही...नापसंद करने का तो सवाल ही नही था..

वो बोली : "लीजिए सर...ये दोनो आपकी सेवा में हाजिर है...''

अजय तो किसी भेड़िए की तरह उसके मुम्मों पर झपट पड़ा...और दोनो हाथों में उन नंगे मुम्मो को पकड़कर पहले तो काफ़ी देर तक उन्हे दबाता रहा और फिर अपने होंठ आगे करके उसने एक-2 करके उसके पिंक निप्पल्स का दूध पीना शुरू कर दिया..

पहले धीरे-2 और फिर दाँतों की मदद से

रचना ने तो अजय का हेयर स्टाइल ही बिगाड़ कर रख दिया, वो अपनी उंगलियों को उसके बालों में घुमाती हुई पूरा दम लगाकर अपने मुम्मे उसके मुँह पर रगड़ रही थी, अजय उठकर खड़ा हो गया और उसने रचना की बगलों के नीचे हाथ रखकर उसे किसी गुड़िया की तरह उठाकर टेबल पर बिठा दिया और अपना खड़ा हुआ लंड उसके घुटनों पर रगड़ने लगा..

वो समझ गयी और उसने एक सैक्सी सी स्माइल देते हुए, अजय की आँखो में देखते हुए, उसकी जीप खोलकर उसके लंड को पकड़कर बाहर खींच लिया...

ये पहला मौका था जब रचना खुली रोशनी उसके में लंड को देख रही थी...एकदम गठीला लंड था अजय का..साउथ इंडियन केले की तरह मोटा और लंबा...और उतना ही सख़्त..उसके उपर चमक रही खून की नसें बता रही थी की इस वक़्त मिल रही सप्लाइ कितनी तेज है...उसने अपने गोरे-2 हाथों में उसे पकड़ लिया और उसे पकड़ते ही कांपती हुई सी आवाज़ मे अजय से लिपट गयी...शायद ये सोचकर की जब ये मोटा लंड उसकी चूत में जाएगा तो कैसा महसूस होगा

''उम्म्म्ममममममममम....... ओह सर .... यू आर सओओओओ हॉट......''

अजय मुस्कुरा दिया...और रचना ने उसे पीछे की तरफ धक्का देते हुए वापिस कुर्सी पर बिठा दिया...

और बोली : "आप बेठिये सर....लेट मी हेंडल हिम ...''

और इतना कहकर वो अजय के सामने घुटनो के बल बैठ गयी...

अजय ने किसी राजा की भाँति अपना जाम उठा लिया और एक सीप भरा,ठीक उसी वक़्त रचना का सिर भी झुका और उसने अजय के लंड को एक ही बार में पूरा मुँह में डाल कर जोरदार ढंग से चूस डाला...

अजय ने सिसकारी मारते हुए बियर को गले के नीचे उतारा..

''उम्म्म्मममममममममममममममम..... ओह रचना....... माय बैबी...''

और उसने उसके रेशमी बालों में हाथ डालकर उसे अपने लंड पर ज़ोर से दबा दिया...और रचना भी किसी सड़क की रंडी की तरह उसके लंड को पूरा निगल गयी...उसका लंड इस वक़्त रचना के गले के टॉन्सिल्स को छू रहा था,वो घूं-घूं करती रही,पर उसके लंड को बाहर नही निकाला...अजय ने उसके सर को पकड़कर जोर-२ से उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया, अजय का लंड उसके गले तक जा रहा था ,अजय ने ऐसी डीप थ्रोटिंग वाली चुसाई आज तक नहीं करवाई थी..

रचना ने लंड को पूरा चूसा और फिर बाहर निकाल कर उसपर लगी थूक चाट गयी...

और कांपती हुई आवाज़ में बोली : "आई लव दिस ....आई लव दी स्मेल ऑफ यूर कॉक....सर.....''

अजय मुस्कुरा दिया....सैक्स की दुनिया में शुरुवाती कदम रखने वाली हर लड़की को हर काम में आनंद आता है

उसके बाद तो रचना जैसे पागल सी हो गयी, उसने अजय के लंड के साथ-2 उसकी गोटियों को भी उतनी ही बुरी तरह से चूसा..ऐसा लग रहा था जैसे आज नाश्ता करके नही आई वो...उसके कपूरे खाकर वो अपना पेट भरना चाह रही थी.

अजय से अब और सब्र नही हो रहा था, वो उसकी कुँवारी चूत देखना और चाटना चाहता था...वो उसके बालों में उंगलियाँ फेरता हुआ बोला : "रचना....मुझे तुम्हे देखना है...पूरा का पूरा ....न्यूड....''

ये सुनते ही रचना के दिल की धड़कने तेज हो गयी...आज से पहले उसने अपना शरीर किसी को नही दिखाया था...और आज वो वक़्त आ गया था जब वो अपने शादीशुदा बॉस के सामने वो करने जा रही थी...लेकिन इसमे उसकी भी कोई ग़लती नही थी...अजय था ही ऐसा...अपने बॉस की इस इच्छा को भी वो बिना किसी प्राब्लम के पूरा करना चाहती थी..इसलिए उसने लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया और धीरे से बोली : "यस सर...जैसा आप कहे...''

अजय तो उसके जवाब को सुनकर खुश हो गया...ऐसी ही सेक्रेटरी होनी चाहिए,जो अपने बॉस के किसी भी काम को मना ना करे..

वो खड़ी हुई और उसने अपनी ड्रेस की जीप अजय से खुलवाई,जो पीठ पर थी...लेकिन जैसे ही वो उसे उतारने लगी तभी बाहर के मैन गेट पर ज़ोर-2 से किसी के चिल्लाने की आवाज़ें आने लगी...कोई दरवाजा पीट रहा था

 
अजय का रूम दरवाजे के पास ही था,इसलिए आवाज़ सॉफ सुनाई दे रही थी....एक ही पल में दोनो के चेहरे पीले पड़ गये...और पहला विचार जो अजय के जहन में आया वो था 'कहीं बॉस तो नही आ गये..'

ये सोचते ही उसकी तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी, मज़े करने के चक्कर में उसकी जॉब जाने की नौबत आ चुकी थी..

दोनो ने आनन फानन में अपने-2 कपड़े ठीक किए और अजय कांपता हुआ सा बाहर चल दिया..

रचना केबिन के दरवाजे पर ही खड़ी होकर अजय को देख रही थी...उसने अपने मुम्मे वापिस ड्रेस में ठूस लिए थे..किसी अनहोनी की आशंका से उसका दिल जोरो से धड़क रहा था.

अजय दरवाजे के पास पहुँचा और ज़ोर से बोला : "कौन है....? ? ''

बाहर से जो आवाज़ आई, उसे सुनकर अजय की जान में जान आई.

''पिज़्ज़ा डिलीवरी सर...''

अजय तो उसके बारे में भूल ही गया था, उसने रचना को धीरे से कहा की पिज़्ज़ा वाला है,उसके लिए ही मँगवाया था...और रचना को वापिस केबिन में भेजकर उसने दरवाजा खोलकर पिज़्ज़ा ले लिया...पैसे लेते वक़्त वो डिलीवरी बॉय अजय की हालत देखकर पूछ बैठा : "क्या हुआ सर...सब ठीक है ना...आपकी हालत कैसी हुई पड़ी है..''

अजय ने रिसेप्षन के पीछे की तरफ शीशे में देखा तो उसे समझ मे आया की वो ऐसा क्यो बोल रहा है...रचना ने उसे चूमते हुए जिस तरह से उसके बालों की ऐसी तैसी की थी, और उपर से दरवाजा खड़कने पर अजय की जो हालत हुई थी, उसकी वजह से उसका चेहरा बहुत अजीब सा लग रहा था..

वो बोला : "नो, आई एम फाइन...वो ऑफीस में काम बहुत था, इसलिए कल रात से यही हूँ ..थैंक्स ..ये लो पैसे और जाओ...''

वो बंदा पैसे लेकर चल दिया और अजय पिज़्ज़ा लेकर वापिस अपने केबिन की तरफ.

अब उसका दिमाग़ और लंड एक बार फिर से रचना की तरफ जा चुके थे.

पर केबिन मे पहुँचकर उसने देखा की वहां तो घुप्प अंधेरा था..

अंदर की लाइट बंद थी..अजय ने ऑफीस आकर सिर्फ़ अपने केबिन की लाइट ही जलाई थी,उसके अलावा पूरे ऑफीस की लाईट्स बंद थी, इसलिए केबिन की लाइट बंद होने से उसे कुछ दिखाई ही नही दे रहा था.

अजय : "रचना...कहाँ हो तुम....और ये लाइट कैसे बंद हो गयी....रचना...''

पर उसकी तरफ से कोई जवाब नही आया.

अजय मन में सोचने लगा की अब ये कौनसी भसूड़ि है..

वो अंधेरे में दीवार पर हाथ लगाकर लाईट्स के बटन टटोलता हुआ आगे बढ़ने लगा...

और अचानक उसका हाथ किसी गर्म चीज़ से टकराया..

और वो गर्म चीज़ थी

रचना का नंगा मुम्मा

अजय समझ गया की वो गेम खेल रही है

अजय ने उसके उस मुम्मे को पकड़कर ज़ोर से दबा दिया...रचना के मुँह से सुलगती हुई सी सिसकारी निकल गयी..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.... अहहsssssssssss ''

अजय के हाथ दूसरी ब्रेस्ट पर गये...उसे भी उसने निचोड़ डाला..अपने हाथ उपर करके उसने उसकी नंगी गर्दन को सहलाया, तब उसे पता चला की उसने कुछ भी नही पहन रखा है..उसने अपनी वो सिंगल पीस वाली ब्लेक ड्रेस उतार दी थी , और साथ में पेंटी भी...

ये महसूस करते ही अजय का लंड फिर से स्टील का बन गया.

रचना ने उसके हाथ को पकड़कर चूम लिया..और धीरे-2 करके खुद ही उस हाथ को नीचे ले जाने लगी..

अजय का हाथ उसकी छातियों से होता हुआ, उसके सपाट पेट तक आ गया...और फिर रचना ने एक जोरदार सिसकारी मारकर उसके हाथ को और नीचे धकेल दिया..

अपनी नंगी चूत पर

जो इस वक़्त किसी भट्टी की तरह सुलग रही थी.

उसकी चूत पर एक भी बाल नही था

लेकिन नमीं बहुत थी

ओस की बूंदे थी वहां पर

और अंदर से गर्म हवा ऐसे बाहर निकल रही थी जैसे मुँह से गर्म साँसे निकलती है

एक नन्ही सी जान थी ये चूत भी

अजय तो उसकी चूत पर हाथ रखकर काँप सा गया..ऐसी गर्म लड़की की चूत को वो कैसे संभाल पाएगा..यही सोचकर उसने अपना खड़ा हुआ लंड आगे करके उसकी चूत पर चिपका दिया और ज़ोर से दबा दिया

भले ही अजय का लंड इस वक़्त कपड़ो की परत के नीचे था, पर उसके लंड की गुनगुनाहट को वो सॉफ महसूस कर पा रही थी. वो उसके लंड की धड़कन अपनी चूत पर महसूस करके पागल सी हो गयी..और वो किसी बेल की भाँति अजय से लिपट गयी..

''ओह....अजय.........उम्म्म्ममममममममममम.......''

ये पहली बार था जब रचना ने अजय को उसके नाम से पुकारा था...पर अजय को उसकी सेक्सी आवाज़ में अपना नाम सुनना काफ़ी अच्छा लगा..

उसके बाद तो अजय काफ़ी देर तक अंधेरे में ही उसे चूमता रहा...उसके नंगे शरीर के हर हिस्से को उसने अपनी उंगलियों से नाप डाला..मसल डाला...निचोड़ डाला.

ख़ासकर उसकी चूत को

अजय के होंठ रचना के होंठो पर थे और उसकी एक उंगली रचना की चूत में ..

रचना ने अपना एक पैर उठाकर हवा मे रखा हुआ था ताकि अजय उसकी कजूत की ड्रिलिंग कर सके..

और इस काम में दोनों को बहुत आनंद आ रहा था..

लार उसके मुँह से बह रही थी और वो अपनी चूत में अपने बॉस से फिंगरिंग करवा रही थी.

कुछ देर बाद अजय ने किस्स तोड़ी और बोला : "लाइट तो जला लो...''

रचना कुनकुआई : "नो सर...रहने दो ना...ऐसे ही....मुझे, मुझे शर्म आएगी...''

अजय ने भी ज़ोर नही दिया...आख़िर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी...

अजय तो मन पक्का कर चुका था की चाहे कुछ भी हो जाए,वो उसकी चूत नही मारेगा अभी..बाकी के मज़े सब ले लेगा..

और शायद रचना भी ये बात जानती थी की उसके बॉस इतनी जल्दबाज़ी नही करेंगे...हर लड़की की तरह उसने भी पहली चुदाई के बारे में कुछ ख़ास सोच रखा था, कई सपने संजो रखे थे, काफी प्लानिंग कर रखी थी..

पर लड़कियों की चूत में जब खुजली होती है ना,तो उसके आगे उनकी सोच और प्लानिंग की धज्जियाँ उढ़ जाती है..

रचना ने अजय की टी शर्ट को उतार दिया...और उसकी जीन्स खोलकर उसे भी नीचे गिरा दिया.

अब उस ऑफीस के अंधेरे कमरे में रचना और अजय एकदम नंगे थे..
 
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