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ठरकी दामाद complete



जल्द ही अजय का लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया....अब उसे और उसके लंड को बॉस का डर भी नही था,इसलिए पहले से ज़्यादा कड़क हो चुका था वो...

अंजलि की चूत में तो घमासान मचा हुआ था....अब उसे किसी भी कीमत पर लंड अपनी चूत में चाहिए था...

वो एक बार फिर से उठी और सोफे पर आकर उसने खन्ना को लिटा दिया...और खुद उसके उपर जा चढ़ी ..खन्ना के मोटे लंड को अपनी चूत पर रखकर वो बड़े ही सेक्सी अंदाज में बोली : "अनिल की बीबी हूँ मैं ....अजय के ऑफीस में जो इसका दोस्त है...उसकी बीबी हूँ ...''

वो तो ये सोचकर बोल गयी की भला खन्ना को क्या पता की अनिल कौन है...पर अंजलि के मुँह से अनिल का नाम सुनकर खन्ना तो हैरान रह गया....वो एक शरीफ बंदा था (अनिल कितना बदमाश था ये तो सिर्फ़ अजय ही जानता था) और अनिल जैसे शरीफ एंप्लायी की बीबी ऐसी रंडी हो सकती है,ये उसने सोचा भी नही था...लेकिन जो भी था, वो चूत कमाल की थी....अपने पति के दोस्त से चुदवाने के लिए उसके साथ ऑफिस ही आ गयी...और साथ ही उसके बॉस को भी दोस्त समझ कर उससे भी चुदवाने को तैयार हो गयी....ऐसी जिस्म की आग बहुत कम देखने को मिलती है...

खेर, उसे अब वैसे भी किसी बात से फ़र्क नही पढ़ने वाला था...चाहे ये बाजारू औरत भी होती तो वो उसे चोद ही रहा होता...अब तो ये जानकार की वो उसके एंप्लायी की बीबी है, उसकी ताक़त में दुगना इज़ाफा हो चुका था...और उसने भरभराते हुए उसकी गांड पर उंगलियाँ रखकर उसकी चूत में अपना लंड एक ही बार में पेल दिया...

''आआआआआआआआआआआआआअहह....... उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़.... मजाआा आsssss गयआआआआअ''

इतना मोटा लंड जब चूत में गया तो अंजलि के मुँह से सिर्फ़ यही निकला...

अपना पूरा रॉकेट उसकी चूत में दागने के बाद वो थोड़ा रुका, उपर लटक रहे आमों पर उगे बेर खाए और उन्हे चूसते हुए अपनी पूरी ताक़त से अंजलि की चूत मारने लगा...

और एक बार जब उसने चुदाई की गाड़ी चलानी शुरू की तो बिना रुके वो उसे भगाता ही चला गया....और उसके झटकों को अपने अंदर महसूस करती हुई अंजलि किसी बकरी की तरह मिमियाती रह गयी और अपने मुँह से सिसकारियों की बारिश करती हुई ज़ोर -2 से चिल्लाने भी लगी...

''आआआआआआआआआआअहह ...... भेंन चोद ...................क्या लॅंड है तेरा............. अहह और ज़ोर से चोद भोंसड़ीके................. अहह .... बहन के लंड ....... डाल दे अपना पूरा लौड़ा मेरे अंदर .................अहह.... .''

और अजय को देखकर वो बोली : "ओह अजय ...तू भी आआआआआआआआ........ डाल दे पीछे से मेरे अंदर .................... आज अपना सपना पूरा करना चाहती हूँ .................. अहह जल्दी आ अजय ..... डाल अपना लंड मेरी गाआअंड में ................. ओह अजय...........''

अजय ने भी अपने लंड पर ढेर सारी थूक मली और सोफे पर आकर पीछे से अपना लौड़ा उसकी गांड पर लगा दिया....थोड़ी देर के लिए खन्ना को अपनी चुदाई की रेलगाड़ी रोकनी पड़ी...और जब अजय ने दो चार झटके मारकर उसकी गांड में अपना लॅंड फँसा दिया

धीरे-2 फिर से वो गाड़ी चल दी...इस बार अजय और खन्ना के झटके एक ही लय में आ रहे थे....

अंजलि की गांड और चूत में एक साथ लंड था....ऐसा सपना उसने अपनी जवानी के दिनों से देखा था, पर आज जाकर पूरा हुआ था....और वो भी कहाँ पर, अपनी ही पति के ऑफीस में ...एक पति का दोस्त और दूसरा उनका बॉस,जिसके बारे उसे पता भी नही था..में .लेकिन उसके लंड को अपनी चूत में लेकर मज़ा बहुत आ रहा था उसे...

''ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ भेंन के लौंडों ................ क्या लंड है तुम्हारे.............. अहह.... ऐसी चुदाई तो मेरी आज तक नही हुई................... ऐसे मोटे लंड रोज मिले तो मेरा जीवन सफल हो जाए................. अहह... चोदो भोसडीवालों ... और ज़ोर से चोदो मुझे ..... मारो मेरी गांड अजय ....... फाड़ दे मेरी चूत ओये खन्ना ...... फाड़ दे आजज्जsssssss ....''

इतना कहते-2 उसने नीचे झुककर खन्ना के होंठों को चूस लिया....अपनी मोटी ब्रेस्ट पकड़कर उसके मुँह में ठूस दी और उसके सिर को पकड़ कर अपनी छातियों पर ज़ोर -2 से मारने लगी...

ऐसी पगलाई और गर्म औरत की चूत मारकर तो आज खन्ना भी खुश हो गया....

और जल्द ही उसकी खुशी उसके लंड से निकल कर अंजलि की चूत में जाने लगी....वो झड़ा तो ऐसा झड़ा मानो आज अपने ही केबिन में बाढ़ ला देगा.....

पीछे से अजय के लंड ने भी एक के बाद एक गोलियाँ चलाकर उसकी गांड भेद डाली....

और अंजलि तो ना जाने कितनी बार झड़ चुकी थी.....हर धक्के में उसे ओर्गास्म का एहसास हुआ था... उसे तो याद भी नही था की वो कितनी बार झड़ी आज....लेकिन जो भी हुआ, उसकी जिंदगी का आज बहुत यादगार दिन था.

जब तूफान थमा तो पुर केबिन में लिसलिसेपन की खुश्बू थी....उस गर्म पानी की सुगंध थी जो अजय और खन्ना के लंड से निकला था...उस मीठे शहद की महक थी जो अंजलि की चूत से नीचुड़कर बाहर आया था...

ये महक तो कई दिनों तक खन्ना को फील होने वाली थी अपने केबिन में ..

अजय ने उसके बाद वहां ज़्यादा रुकना सही नही समझा...अंजलि को उसने आँखो का इशारा करके जल्दी से अपने कपड़े पहनने को कहा...खन्ना की उम्र हो चली थी,इसलिए ऐसी जबरदस्त चुदाई के बाद उसके शरीर मे जान ही नही बची थी...वो अपनी चेयर पर नंगा ही लेटा हुआ सुस्ता रहा था..

अजय और अंजलि ने कपड़े पहने और बाहर निकल आए...अंजलि ने पूरे रास्ते खन्ना या ऑफीस से संबंधित कोई सवाल नही किया...वो बस अजय से ये जानने को उत्सुक थी की ऐसी चुदाई और भी मिलेगी या नही...अजय ने भरोसा दिलाया की अब ऐसे मौके मिलते रहा करेंगे..

अजय ने उसे मार्केट में उतार दिया और फिर आराम से घर की तरफ चल दिया...

कल रचना और आज की अंजलि की चुदाई ने उसे काफ़ी थका दिया था...इसलिए घर जाकर अब वो आराम करना चाहता था.

पर आराम शायद उसकी और उसके लंड की किस्मत में था ही नही.

आज उसकी सालियो ने ऐसा प्लान बनाकर रखा था जिसकी उसे भी उम्मीद नही थी..

अजय घर आया तो प्राची के पास उसकी सास बैठी थी...प्राची की तबीयत थोड़ी खराब थी...जैसा की ऐसी अवस्था में होता है...उसने शायद थोड़ी देर पहले उल्टी की थी...वो बिल्कुल निढाल सी होकर पड़ी थी..अजय ने डॉक्टर से फोन पर बात की तो उसने इसे नॉर्मल बताया...

रात को अजय ने एहतियात के तौर पर अपनी सास को वहीं प्राची के साथ रुकने को कहा...और खुद दूसरे कमरे में जाकर लेट गया..

आज भले ही अजय की सास वहीं उसके घर पर थी...पर उनके साथ कुछ करने के बारे में अजय सोच भी नही सकता था..अपनी बीबी के होते हुए वो ये रिस्क नही लेना चाहता था...वैसे भी अपनी बीबी के आगे वो किसी और बात को तवज्जो नही देना चाहता था..

अजय अपने कमरे में लेटा हुआ था और उसके दिमाग़ में कल और आज की हुई चुदाई की सारी तस्वीरे घूम रही थी...और वो सब सोचते-2 उसका लंड कब खड़ा हो गया उसे भी पता नही चला...जब उसे लंड के खड़े होने का एहसास हुआ तो ना चाहते हुए भी उसका हाथ वहां पहुँच गया..और वो उसे बड़े ही प्यार से सहलाने लगा...

वो उसे किसी पालतू जानवर की तरह सहला रहा था...

आख़िर पिछले एक साल में उसे जो भी मज़े मिले है वो इसी की बदौलत ही तो मिले है.

शादी से पहले उसके लंड ने एक भी चूत को नही चखा था, और उन दिनों वो रोजाना उसकी तेल से मालिश करके कभी ना कभी होने वाली चुदाई के लिए तैयार किया करता था...आज उसी मालिश की वजह से उसका लंड इतना मोटा और लंबा हो चुका था, जिसे अपनी चूत में लेने के बाद हर औरत और लड़की, जो उसने पिछले एक साल में पेली थी,उसकी दीवानी हो चुकी थी..

अजय ने सोचा की चलो आज एक बार फिर से अपने लंड को तेल पिलाया जाए..आख़िर इतनी मेहनत के बाद उसकी सेवा करना भी तो बनता है..

ये सोचकर अजय जल्दी से तेल की शीशी उठा लाया और हथेली पर ढेर सारा तेल उड़ेल कर अपने लंड को उससे नहला दिया...और उसे उपर से नीचे तक तर बतर करके रगड़ने लगा..

ऐसा करते हुए उसे बहुत मज़ा भी आ रहा था और आज तक की हुई हर चुदाई भी याद आ रही थी...अपनी सुहागरात पर प्राची की चुदाई... बाद में अपने दोस्त अनिल की बीबी अंजलि की... और फिर अपनी सास रजनी और मौसेरी सास नीलम की भी चुदाई याद आई उसको...अपनी साली पूजा की कॉलेज वाली सहेली सोनी को भी उसने जम कर छोड़ा था अपने इसी पठानी लंड से...और बाद में अपनी कमसिन साली पूजा को भी...
 
53

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अब आगे

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पूजा की चुदाई सोचकर ही उसके मुँह से एक सिसकारी निकल गयी...उस जैसी कच्ची कली जैसे मज़े उसे आज तक किसी ने नही दिए थे...यहाँ तक की उसकी सेक्रेटरी रचना ने भी नही...हालाँकि वो भी कुँवारी ही थी जब अजय ने उसे कल ऑफीस में पहली बार चोदा था...पर पूजा जैसा करारापन उसे आज तक किसी और में नही मिला था...उसे बस एक ही लड़की टक्कर दे सकती है और वो है उसकी दूसरी साली रिया..

रिया भी चुदाई के अलावा सब कुछ करवा चुकी थी...उसकी छोटी सी,टाइट वाली चूत को अपने मोटे लंड से भेदने में जो मज़ा आएगा,उसे सोचकर ही अजय सिहर उठा...और उसने पूरी तेल की शीशी अपने लंड पर उड़ेल दी..

अपने लंड को मसलते हुए वो सीसीया उठा : ''ओह रिया ......मेरी जान .... एक दिन तेरी चूत में अपना ये मोटा लंड डालूँगा.... ऐसे ही तेल लगाकर चोदूँगा तेरी कुंवारी चूत को..... उम्म्म्ममममम........''

वो ये बड़बड़ा ही रहा था की उसके कमरे का दरवाजा खुला और उसकी सास सामने आ गयी....

अजय के ख़ूँख़ार हो चुके लंड को इस हालत में देखकर रजनी की चूत के पसीने निकल गये...

अजय ने भी नही सोचा था की ऐसे एकदम से उसकी सास कमरे में आ जाएगी...उसे डर लग रहा था की कहीं उसने रिया वाली बात सुन तो नहीं लो, वैसे भी उसे अब पहले जैसा डर नहीं रह गया था अपनी सास से,पर फिर भी एक पर्दा जरुरी होता है ऐसे रिश्तों को एक दूसरे से अलग रखने के लिए .

पर शायद वो प्राची के लिए पानी लेने उठी थी , क्योंकि अजय को इस हालत में देखकर जब वो उसे एकटक निहार रही थी तो पीछे से प्राची की आवाज़ आई : "मम्मी....कहाँ रह गये....जल्दी पानी लाओ, मेरा गला सूख रहा है...''

अजय की सास ने अपना गला सॉफ करके वहीं से आवाज़ लगाई : "उ....हानन.....लाई बस.....''

इतना कहकर वो वापिस मुड़ी और किचन से पानी लेकर अपनी बेटी के पास पहुँच गयी.

एक पल के लिए तो अजय को ये एहसास हुआ था की उसकी सास उसे इस हालत में देखकर अपने आप पर काबू नही रख सकेगी और उस पर टूट पड़ेगी..पर प्राची के घर पर होते हुए ऐसा होना संभव नही था...

लेकिन अब तो अजय को तलब लग चुकी थी...उसे किसी भी हालत में अपने लंड को शांत करना ही था...और वो उसे मुठ मारकर तो शांत करवाना नही चाहता था.

पर उपर वाला उसके उपर बहुत मेहरबान था.

वो कैसे अपनी सास की चूत मारे, ये सोच ही रहा था की उसके मोबाइल पर मैसेज बज उठा..

वो रिया का व्हाट्सअप मैसेज था : ''जीजू....क्या कर रहे हो....''

अब अजय क्या बोलता की अपने लंड को तेल पिला रहा हूँ ताकि तेरी चूत मार सकूँ इससे...पर वो ऐसा लिख नही पाया...सिर्फ़ ये लिखा : ''बस...लेटा हुआ हूँ ...नींद नही आ रही...तुम क्या कर रही हो...''

रिया : "बताऊँ ..मैं क्या कर रही हूँ ...''

अजय के लंड में करंट दौड़ने लगा जब ऐसा शरारती सा मैसेज पड़ा उसने...अजय ने झट्ट से रिप्लाइ किया : "बताओ...क्या कर रही हो...''

कुछ देर के इंतजार के बाद रिया ने एक क्लिप भेजी...

और अजय ने जब उसे देखा तो उसके पसीने छूट गये...

उस छोटे से एम एम एस में दोनों बहनें नंगी होकर एक दूसरे से मजे ले रही थी, रिया ने अपनी उँगलियाँ पूजा की रसीली चूत में डुबोई हुई थी और बड़ी ही लगन से उसको मास्टरबेशन का मजा दे रही थी

रिया ने मोबाइल को बेड पर इस एंगल से रखा था की पूजा की वो 1-2 बार चुदी चूत बड़े परदे पर लगी सुपरहिट मूवी की तरह लग रही थी

अजय तो उनके बारे में सोचकर ही सिहर उठा...ऐसी मस्ती करने की उन्हें सूझी कैसे।।

वैसे सही भी था, माँ घर पर नहीं थी, बाप दूसरे कमरे में गहरी नींद में सो रहा था, और पिछले कुछ दिनों में जो उन दोनों बहनों के बीच हुआ था, उसके बाद तो ऐसी नजदीकियां आनी बनती ही है

काश वो दोनो इस वक्त यहाँ होती तो मज़ा ही आ जाता...दोनो के नंगे जिस्मों से खेलने में कितना आनंद मिलता...

फिर अचानक उसके दिमाग की घंटी बजी, पूजा की चुदाई करके भी वो अपनी ठरक मिटा सकता था अभी के लिए...

उसने तुरंत मैसेज किया : "मेरे बिना ऐसी मस्तियाँ करके क्या फ़ायदा ...कहो तो मैं आ जाऊं वहां पर...''

अजय को डर था की कहीं वो दोनों इसके लिए मना ना कर दे...पर वो बेचारा ये नही जानता था की ये उन दोनो का ही प्लान था...

पिछले कई दिनों से अजय ने उन्हे ढंग से प्यार नही किया था...पूजा की चूत तो उसका लंड लेने के बाद से ही कुलबुला रही थी...ऐसे में रात को रिया ने उसकी चूत पर हाथ फेरकर उसे कहीं का नहीं छोड़ा ,मौका भी था, और मौके का फायदा उठाने वाला ठरकी जीजा भी..

बस फिर क्या था, रिया ने रिप्लाई कर दिया : "नेकी और पूछ -२ ''

अजय का तो लंड कसमसा उठा ये मैसेज पड़कर ।

उसने तुरंत कपड़े पहने, अपना मोबाइल जेब में डाला...और बाहर निकल आया..

वो अपने कमरे से निकला, और सामने के कमरे से एक बार फिर से उसकी सास बाहर निकल कर आ गयी..

अजय ये सोच ही रहा था की क्या बोले अपनी सास को, की वो मुस्कुराती हुई उसके करीब आई और धीरे से बोली : "मुझे सब पता है तुम कहां जा रहे हो... पर थोड़ा संभलकर जाना, ज़्यादा शोर मत करना वहां ... और ज़्यादा शरारत भी नही ...समझे ....''

इतना कहकर वो दरवाजे तक आई और दरवाजा खोल दिया...

इसका मतलब, रिया या पूजा ने उन्हे पहले से ही फोन या मैसेज कर दिया था की अजय वहां आ रहा है... ये कैसी माँ है, अजय को खुद ही अपनी दूसरी बेटी के पास भेज रही है... और वो भी वहां पर जहाँ एक और कुँवारी साली पहले से मौजूद है...

पर उसे क्या ,उसे और उसके लंड को तो इस वक़्त सिर्फ़ पूजा और रिया के नंगे जिस्म और उनकी चूतें ही दिख रही थी...वो तुरंत बाहर निकला और जाते-2 उसने एक बार फिर से अपनी सैक्सी सास को देखा...वो बोली : "तुम प्राची की फ़िक्र ना करना, मैं देख लूँगी...''

इतना कहकर उसने दरवाजा बंद कर लिया..

वो लगभग कंगारू की तरह उछलता हुआ नीचे पहुँचा और पड़ोस में अपने ससुराल के दरवाजे पर जा पहुँचा, वो दरवाजा पहले से ही खुला था, वो दबे पाँव अंदर आया, दरवाजा बंद किया और अपने पंजों पर चलता हुआ, बिना आवाज़ किए, घर के आख़िर में बने पूजा के बेडरूम तक जा पहुँचा...दरवाजा हल्का सा खुला था...अजय उसे धकेल कर अंदर आ गया...

पर ये क्या,पूरे कमरे में घुप्प अंधेरा था...

तभी रिया की आवाज़ सुनाई दी : "जीजू...दरवाजा बंद कर दो और लाइट जला दो...''

अजय ने वैसा ही किया...

और जब लाइट जला कर वो उनकी तरफ पलटा तो उसके दिल ने धड़कना ही छोड़ दिया..

रिया ने पूजा को घोड़ी बना रखा था, और उसके बाल खींचकर वो उसकी चूत में एक बड़ा सा डिल्डो धकेल रही थी..और पूजा भी कुतिया बनकर, अपनी आँखे बंद करके, सिसकारी मारकर उस नकली लंड की चुभन को अपनी गीली चूत पर महसूस करके, आगे पीछे हो रही थी

ऐसा सैक्सी सीन देखकर उसकी तो हालत ही खराब हो गयी...

पर अब उसे अपने लंड से उस तेल की वसूली करनी थी जो कुछ देर पहले उसने पिलाया था...और वो वसूली कितनी ख़तरनाक होगी, इसका अंदाज़ा तो उसने खुद भी नहीं लगाया था.

घोड़ी बनी पूजा ने नशीली आँखो से अजय को देखा और अपने गीले होंठों को दांतो तले दबाकर फुसफुसाई : "बहुत देर कर दी हुज़ूर आते-आते....''

वो तो जैसे जानती थी की आज की रात अजय ज़रूर आएगा...उसे चोदने.

अजय भी बुदबुदाया : "अब आया हूँ तो कुछ लेकर ही जाऊंगा ...''

पूजा ने अपने बालों को रिया के हाथों से छुड़वाया और उठकर अजय की तरफ चल दी...

जब पूरी नंगी हालत में चलती हुई वो अजय की तरफ जा रही थी तो ऐसा लग रहा था मानों कोई हिरनी तालाब में पानी पीने जा रही है...

ऐसी नज़ाकत से वो अपनी गांड मटकाती हुई उसकी तरफ आई की अजय ने उसे पकड़कर अपनी छाती से चिपका लिया..

पूजा ने उसकी आँखो में देखकर पूछा : "क्या लेकर जाओगे...?''

अब अजय थोड़ा बेशर्म हो गया और उसी अंदाज में बोला : "तुम्हारी चूत .....''

ये एक ऐसा वर्ड था जिसे सुनकर दोनों की चूतो में से पानी निकल आया

रिया तो अपनी गीली चूत में उस डिल्डो को ही जोर से रगड़ने लगी

और पूजा पर जैसे कोई पागलपन सवार हो गया और उसने अजय के सिर को पकड़कर उसके होंठों को चूस डाला...और ऐसा चूसा जैसे जोंक किसी का खून पीती है...

अजय के हाथ उसके नंगे शरीर पर फिसल रहे थे...वो उसके मुम्मो और उभरी हुई गांड को ज़ोर-2 से दबा रहा था...पूजा भी अजय की केप्री के उपर से ही उसके लंड को पकड़कर अपनी गीली चूत पर रगड़ने का प्रयत्न कर रही थी..पर अजय की लंबाई थोड़ी ज़्यादा थी इसलिए उसकी चूत अजय के लंड तक पहुँच ही नही पा रही थी...अजय ने उसकी हालत समझी और उसे किसी फूल की तरह अपनी गोद में उठा लिया...

पूजा ने भी अपनी टांगे उसकी कमर पर लपेट दी और अब उसका कपड़ो की सतह में छुपा लंड ठीक उसकी रस टपकाती चूत के नीचे था..

पूजा ने उसके गले में अपनी बाहें डाल दी..और एक बार फिर से दोनो एक गहरी स्मूच में डूब गये...

उन दोनो ने नोट ही नही किया की उनके पीछे खड़ी रिया उनके इस मिलन को देखकर कैसे अपने बूब्स और पुस्सी को रगड़ रही है...

उसे पता था की अभी तक उसका नंबर नही आया है,इसलिए वो इस तरह से दूर खड़ी होकर अभी के लिए तो बस यही कर सकती थी...पर वो छुटकी ऐसी थी नही...वो जानती थी की आजकल की दुनिया में ऐसे दूर रहकर कुछ नही मिलने वाला...बड़े लोग हमेशा छोटो को दबाते है..उनके हक को खुद छीनकर ले जाते है...भले ही अभी के लिए इन दोनों बहनों में ऐसी कोई भी भावना नही थी पर इस तरह दूर खड़े होकर वो निश्चिन्त तौर पर कुछ खो ही रही थी...या ये कह लो की उसकी बहन सारे मज़े खुद लेकर उसे ऐसे मज़े से वंचित रख रही थी..

और कुछ पाने के लिए वो उन दोनो के करीब आ गयी...

वो भी तो नंगी ही थी...इसने अपना वो नंगा बदन अपने जीजू से लेजाकर चिपका दिया...

क्योंकि वो जानती थी की जो भी उसके साथ होगा वो जीजू के चर-कमलों द्वारा ही होगा...

अजय को जब उसके गर्म बदन का एहसास हुआ तो उसने अपनी किस्स तोड़ी और रिया की तरफ देखा...पूजा भी उसे देखकर समझ चुकी थी की उसकी चूत में भी अब कुलबुलाहट शुरू हो चुकी है....दोनो ने मुस्कुराते हुए रिया को भी अपनी बाहों मे जगह देकर उसे अंदर घुसा लिया....और फिर एक साथ तीनो ने अपने-2 मुँह आगे कर दिए और तीन तरफ़ा स्मूच शुरू हो गयी....

दोनो बिलियों की तरह अजय के होंठों को ही चूसने का प्रयास कर रही थी...अजय भी कभी एक को तो कभी दूसरी को स्मूच कर रहा था...ऐसे अलग-2 नर्म होंठों को चूसने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था...ऐसा ही कुछ वो उनकी चुतों के साथ भी करना चाहता था.

अजय ने तुरंत वो सामूहिक किस्स तोड़ी और पूजा को नीचे उतार दिया...वो तो उसपर से उतरने को ही राज़ी नही हो रही थी...पर जब अजय ने उसकी गर्म चूत में उंगली डाली तब जाकर वो नीचे उतरी...

उन दोनो को बेड के करीब लेजाकर अजय ने उन्हे धक्का दे दिया और दोनो बेड पर जा गिरीं ...

अजय ने एक-2 करके अपने कपड़े उतारने शुरू किए...दोनो बहने उसे ऐसा करते हुए देख रही थी और अपनी चूत में उंगली और मुम्मो पर पंजा लाकर उसके नंगे होने का इंतजार कर रही थी...

अजय ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके..उसके लण्ड को देखकर दोनो की चूत में से नींबू पानी निकल पड़ा...

अजय ने दोनो की बहती हुई चूत देखी और वो उनके पैरों के पास आकर बैठ गया...अब तक दोनो समझ चुकी थी की उनके साथ क्या होने वाला है...दोनो ने एक दूसरे का हाथ जोरों से पकड़ लिया...

अजय ने सबसे पहले पूजा की चूत में अपना मुँह डाला...वहाँ से इतना गीलापन निकल रहा था की उसे एक पल के लिए ऐसा लगा की वो लिम्का पी रहा है...एकदम खट्टा-मीठा सा स्वाद था उसकी चूत के रस का...

कुछ देर तक उसे चूसने के बाद वो रिया की तरफ पलटा...और अपनी जीभ लगाकर उसका स्वाद चखा...वो थोड़ा मीठा था...उसने अपने होंठों और दाँतों से उसकी चूत पर हमला कर दिया...

वो बिलख उठी...और तड़पकर उसने पास लेटी पूजा को पकड़कर अपने उपर खींच लिया...और उसके मम्मों को जोरों से चूसने लगी...

''आआआआआआआआआहह माय बैबी...''

पूजा को अपनी छोटी बहन अपनी बच्ची जैसी लग रही थी...जो अभी पैदा भी नही हुई थी...वो उसे माँ बनकर अपना दूध पिलाने लगी...नीचे से अजय उसकी चूत चूस रहा था और उपर से वो पूजा के मुम्मे चूसकर अपना सारा मज़ा आगे ट्रान्स्फर कर रही थी...

कुछ देर बाद अजय फिर से पूजा की चूत पर आ लगा...और ऐसा उसने करीब 3-4 बार किया....कभी रिया तो कभी पूजा...

रिया के ऊपर पूजा थी, इसलिए दोनों की चूत एक के ऊपर एक लगकर अजय के सामने थी

रिया काफ़ी देर से बिलख रही थी...और आख़िरकार उसकी चूत ने पानी छोड़ ही दिया...

वो भरभराकर झड़ने लगी....अजय और पूजा ने मिलकर उसकी चूत का पानी पी डाला..

अब अजय की बारी थी...वो दामाद था उस घर का और अब उसकी दामाद वाली खातिरदारी शुरू हुई...

पूजा ने उसे बेड पर लिटा कर पीछे पिल्लो लगा दिया और खुद उसकी टाँगो के बीच पहुँच गयी...दूसरी तरफ से रिया भी आ गयी...फिर दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देखा और मिलकर अजय के लंड पर टूट पड़ी...

अजय ने तो बेड की चादर को ज़ोर से पकड़ लिया जब उसपर ये हमला हुआ तो...पूजा ने उसके लण्ड को निगल लिया था और रिया ने उसकी गोटियों को....

ऐसा लग रहा था जैसे भूखे इंसानों को 1 महीने बाद कुछ खाने को मिला है...

अजय के लंड को चबर-2 करके दोनों खाने लगी...उनकी गर्म जीभे , तेज दाँत और नर्म होंठों के मिश्रण से उसे बहुत गुदगुदी भी हो रही थी...पर उससे ज़्यादा मज़ा भी बहुत आ रहा था...

अजय ने हाथ आगे करके दोनों के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए...दोनो के निप्पल एकदम कड़क हो चुके थे...उन्हे मसलने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था...

दोनों अजय के लंड को बुरी तरह से चूस रहे थे, एक गोटियां चूस रही थी तो दूसरी लंड.
 
54

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अब आगे

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अब अजय से बर्दाश्त होना मुश्किल हो रहा था, वो कभी भी झड़ सकता था , वो बीएड से खड़ा हो गया और अपने लंड को जोरों से रगड़ने लगा, दोनों बहनें एक दूसरे की चूत में उँगलियाँ डालकर आने वाली बारिश का इन्तजार करने लगी

और वो जल्द ही झड़ने लगा, और वो भी जोरों से

पूरी तरह झड़ने के बाद अजय एक कोने में जा कर लेट गया

पूजा ने आँखो ही आँखो मे रिया को कुछ इशारा किया और अगले ही पल रिया ने अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए...और लगभग सारे कपड़े पहन कर,चुननी लेकर, चप्पल डाल कर वो बाहर निकल गयी...

अजय हैरानी से उसे जाते हुए देखता रह गया...उसने पूजा से पूछा की वो कहाँ जा रही है पर उसने कुछ नही बताया...वो अजय के पास आकर लेट गयी और उसका लंड चूसने लगी...और उसे असली चुदाई के लिए तैयार करने लगी

वो बेचारा अभी ये सोच ही रहा था की आख़िर रिया कहाँ गयी की तभी दरवाजा खुला ..

उसे लगा की रिया वापिस आ गयी...

पर ये क्या...

ये तो उसकी सास थी...

यानी रिया उसके घर जाकर प्राची के पास रुक गयी थी और उसने अपनी मौसी यानी अजय की सास को वहां भेज दिया..

इसका मतलब ये उनका प्लान था...

और शायद इसलिए उसकी सास ने बड़े इत्मीनान से उसे अपने घर भेज दिया था...

क्योंकि कुछ ही देर में वो भी आने ही वाली थी...

सच में ...दोनो माँ -बेटियों ने मिलकर क्या प्लान बनाया था..

अजय की सास अंदर आई और अपनी बेटी को अजय का लंड चूसते देखकर वो सिहर उठी...

ये उसका पहला मौका था जब वो अपनी बेटी के होते हुए अजय के सामने थी...

पूजा अभी तक अजय का लंड चूसने में लगी हुई थी...

कुछ देर तक उन दोनो को देखते रहने के बाद रजनी ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए..

रजनी ने एक-२ करके अपने सारे कपड़े उतार दिए , और आखिर में अपनी ब्लेक कलर की शमीज भी उतार कर उसने अपने मदमस्त मुम्मे अपने दामाद और बेटी के सामने उजागर कर दिए

अजय तो अपनी सास की सख्त चूचियाँ देखता रह गया , ऐसी उम्र में भी कितनी केडी करके रखी थी उन्होंने अपनी चूचियाँ

और कुछ ही देर मे वो पूरी नंगी होकर खड़ी थी...

उस कमरे में जहाँ अजय था...उसकी छोटी बेटी थी...और वो खुद...और सब के सब नंगे...

आज बहुत भयंकर चुदाई होने वाली थी वहां पर..

और वो भी दोनों माँ-बेटी की

घर के दामाद अजय के द्वारा

भले ही अजय का लंड इस वक़्त पूजा चूस रही थी, पर उसका सारा ध्यान अपनी सास पर ही था...

आजतक वो उनके पुर भरे हुए शरीर को इतनी बारीकी से देख ही नही पाया था...आज देख पा रहा था...वो उपर से नीचे तक सेक्स की देवी लग रही थी...सास बन जाने के बाद भी उसका शरीर ऐसा था की अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाए की वो अपनी बेटियों की माँ है या बहन..

अजय तो शुरू से ही उनके मोटे-2 मुम्मों का दीवाना था...आज एक बार फिर से उन्हे नंगा देखकर उसके हाथ मे खुजली होने लगी और उसकी उंगलियाँ उन मुम्मों को दबाने के लिए मचलने लगी..

उसकी सास भी अजय की नज़रों को अपनी छाती की तरफ देखते हुए समझ गयी की छोटे संतरों के सामने उसके तरबूज ही अजय को भा रहे हैं....इसलिए वो जान बूझकर अपने बूब्स को अपने हाथों में लेकर मसलने लगी...

अजय बेचारे का बुरा हाल हो गया, अब वो किसी भी कीमत पर उन्हे दबोच लेना चाहता था...

कुछ ही देर में रजनी उसके सामने आकर बैठ गयी...अपनी बेटी के बिल्कुल बगल में, वो भी अजय की टाँगो से अपनी बॉडी टच करके बैठी थी....अजय से सब्र तो पहले ही नही हो रहा था, उनके शरीर का करंट मिलते ही वो बेकाबू सा हो गया और उसने अपने हाथ आगे करके उन मोटे-2 मुम्मों को पकड़कर निचोड़ डाला..और अपना मुंह ऊपर करके उन मोटे -२ मम्मों को चूसने लगा

वो आनन्दमयी चीख के साथ कुलबुला उठी

''आआआआआआआआअहह....... सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... धीरे करो दामाद जी....... धीरे .....''

कितना अजीब लगता है ना,एक सास अपने दामाद को अपने मुम्मे धीरे चूसने के लिए कह रही थी...और वो भी अपनी नंगी बेटी के सामने...

पर अजय तो मानने वाले दिन पैदा ही नही हुआ था...

वो और जोरों से उनके मुम्मों को चूसने लगा...

उन्हे निचोड़ने लगा...

उनके निप्पल्स को अपनी उंगलियों के बीच दबाने लगा..

अजय के तगड़े हाथ अपने मुम्मों पर पाकर वो भी उछलने कूदने लगी... उसे सच में बहुत मज़ा आ रहा था..

रजनी पर उत्तेजना का नशा चड चुका था....वो अपनी बेटी के कान में फुसफुसाई

''चल,पीछे हट थोड़ी देर...मैं दिखाती हूँ इसे सासू माँ स्पेशल....''

वो तो ऐसा मानों इसलिए कह रही थी जैसे अपनी बेटी को कुछ नया सिखाने जा रही हो...और उसने सिखाया भी....आख़िर वो थी ही इतनी एक्सपीरिएंस वाली औरत...

अभी तक पूजा ने अजय के लंड को पकड़ कर उसे मुँह में लिया हुआ था और उसके सुपाड़े वाले हिस्से को जोरों से चूस रही थी...रजनी ने अजय के लंड को पकड़कर अपनी दोनों छातियों के बीच रख दिया, और उसके मोटे और लम्बे लंड के ऊपर अपने मुलायम हाथों का जादू बिखेरते हुए वो उसे सहलाने लगी, उसे पुचकारने लगी....... आखिर उसी लंड के पीछे ही तो वो इस तरह नंगी होकर वहां बैठी थी

फिर रजनी ने अजय के लंड के नीचे हाथ डालकर अपने अंगूठे और बाकी उंगलियों के बीच में बनाए पंजे के अंदर उसकी गोटियों और लंड की जड़ को एक साथ दबोच लिया...और ये उसने थोड़े सख़्त हाथों से भी किया...जिसके परिणामस्वरूप अजय अपनी सीट से उछल सा गया...अपनी सास के इस हमले के लिए वो तैयार नही था.

रजनी ने अपने पंजे में उसके लंड और बॉल्स को पकड़कर और बाहर की तरफ उभार दिया और अपनी जीभ से उन्हे चाटने लगी...

ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी जीभ से किसी तन्दुरी मुर्गे पर बटर लगा रही है...वो तंदूरी मुर्गा, यानी अजय का लंड उसकी लार में नहाकर बुरी तरह से चमक उठा...और साथ ही वो पहले से ज़्यादा कठोर और लंबा भी हो गया...

रजनी ने उस चमकीले लंड को अपने मुम्मे पर रगड़ा, उसके लंड के टोपे से अपने निप्पल्स को कुरेदा और ऐसा करते हुए वो अंदर तक कसमसा रही थी...

 


पूजा आँखे फाड़े अपनी माँ के इस कारनामे को देख रही थी...समझ रही थी...और सीख भी रही थी....

अभी तक जिस लंड चुसाई को वो इतना मामूली सा काम समझ कर करती आ रही थी उसे उसकी माँ ने कितना रोचक बना दिया था...

और औरत के किसी भी काम से अगर मर्द को मज़ा आए तो समझ लेना चाहिए की वो काम उसके साथ बार-2 करना चाहिए...

अगली बार के लिए पूजा अब ऐसी और भी सामग्री इकट्ठी करना चाहती थी..

इसलिए वो भी बड़े चाव से अपनी माँ की क्लास अटेंड करने बैठ गयी..

अजय के लंड को पूरा खड़ा करने के बाद रजनी ने उसे अपने बूब्स के अंदर फंसाया और एक जबरदस्त टिट फकिंग का मजा भी दिया

अब अजय का एक हाथ पूजा की ब्रेस्ट पर था और दूसरा अपनी सासू माँ की...पूजा अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर खुद ही चूत को मसल रही थी...

चुदाई का नशा पूरे कमरे में फ़ैल चूका था , गर्म साँसों से पूरा कमरा महक चुका था

आज की रात बहुत यादगार होने वाली थी

नीचे उसकी माँ अजय को टिट फकिंग का मजा दे रही थी, ऊपर अजय पूजा के मुम्मे चूसने में लगा था

अजय के लंड को अच्छी तरह अपनी नरम छातियों के बीच मसलने के बाद रजनी ने अपने सेक्सी होंठों को एक बार फिर से खोल और उसके लंड को निगल कर जोरों से चूसने लगी

रजनी ने बड़ी ही लगन से अजय की गोटियों को चूस-चूस्कर उन्हे कड़ा कर दिया...

और फिर उसके लंड के साथ भी ऐसा ही किया...

अब अजय का लंड एक रॉकेट की तरह ऊपर मुँह करके खड़ा था....वो अब दोनो में से किसी की भी चूत के अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार था..

अजय बेड पर लेट गया और दोनो हुस्न की परियों की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा...दोनो माँ बेटियों ने एक दूसरे की तरफ देखा और आँखो ही आँखो में पूजा ने अपनी माँ का मान रखते हुए उन्हे पहले चुदाई करवाने के लिए कहा...

और कोई मौका होता तो रजनी मना कर भी देती और अपनी बेटी को आगे कर देती, पर इस उम्र में जब चूत में आग लगती है तो किसी भी बात की तमीज़ नही रहती, इसलिए वो बदतमीज़ सी होकर आगे बड़ी और एक ही झटके में अपनी टांगे उसके उपर घुमा कर अजय के लौड़े पर चढ़ गयी....अजय को ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई भाप वाला इंजन उसके लंड के करीब आकर रुक गया है...

और फिर रजनी ने अपनी कददू जैसी मोटी गांड को हवा में उठाया और उसके खड़े हुए लंड के उपर अपनी चूत को लगाकर सीटियां मारती हुई उसके लंड पर फिसलती चली गयी..

''आआआआआआआअहह ....... सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स........ आआआआआआआआआ आआहह मेरे राजा ..........चोद मुझे ''

अपनी माँ के मुँह से एक बाजारू औरत जैसी भाषा सुनकर पूजा भी मुस्कुरा दी... शायद उनके ऊपर चढ़ी चुदासी को वो भी एन्जॉय कर रही थी

वैसे भी एक माँ को चुदते देखने का सोभाग्य हर बेटी की किस्मत में नही होता....

पूजा इस खेल को बहुत ज़्यादा एंजाय कर रही थी....उसने देखा की अजय का लंड कैसे भाले की तरह उसकी माँ की चूत में घुस गया है...और अंदर जाकर जैसे वो अटक ही गया...

लेकिन वो भला क्या जानती थी की वो अटका नही था, बल्कि उसकी माँ अपने जमाई राजा के लंड को अंदर तक लेने के बाद उसे अच्छी तरह अपनी चूत की दीवारों पर मसल रही थी...

उसके सुपाड़े से अपनी चूत के दाने की मालिश करवा रही थी...

और ऐसा करते हुए रजनी की आँखे बंद थी...

अजय का भी यही हाल था...वो अपनी आँखे बंद किए अपनी सास के तरबूज जैसे मुम्मों को जोरों से मसल रहा था...

उनके निप्पल्स को अपनी उंगलियों से कटोच कर बाहर निकाल रहा था और उन्हे और भी ज़्यादा सूजा रहा था...

धीरे-2 रजनी की गांड ने थिरकना शुरू कर दिया...

जैसे स्टेशन से गाड़ी निकलती है और धीरे-2 रफ़्तार पकड़ती है, ठीक वैसे ही रजनी की 'गरमचूत एक्सप्रेस' ने जब स्टेशन छोड़ा तो अजय के चिकने लंड की पटरी पर ऐसे दौड़ना शुरू किया जैसे अब ये ट्रेन रुकेगी ही नही...ब्रेक ही फैल ही गये साली की ट्रेन के...दे दना दन बस भागी चली जा रही थी उसकी 'गरमचूत एक्सप्रेस' ..

अजय की आँखे खुली और उसने पूजा की तरफ देखा...वो अपनी छोटी छातियों को खुद ही मसल कर अपनी माँ की ये गरमा गरम चुदाई देख रही थी..अजय ने उसे भी बेड पर आने का न्योता दिया...वो किसी हिरनी की तरह उछल कर उपर जा चढ़ी ...अजय ने उसे अपने चेहरे पर बैठने को कहा...पूजा को भला क्या प्राब्लम हो सकती थी...वो अपनी माँ की तरफ मुँह करके उसके चेहरे पर बैठ गयी...और अजय की पेनी और गर्म जीभ सीधा उसकी चूत के अंदर घुस गयी...और जैसी सिसकारी कुछ देर पहले उसकी माँ ने मारी थी, ठीक वैसी ही पूजा ने भी मार डाली...

''ओह फक ........................... म्*म्म्मममममममम जीजूजूउssssssss....... एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...... सककककककक मिईीईईईई''

उसका कहने का तरीका इतना सैक्सी था की ऐसा लग रहा था मानो लंड उसकी माँ की चूत में नही बल्कि उसकी चूत में है...पर ताजा चुदी लड़की के लिए एक ठरकी की जीभ भी किसी लंड से कम नही होती...वो उसे ही लंड मानकर और अंदर लेकर खुशी से उछल कूद मचा रही थी...

अजय का अब बुरा हाल होने लगा था...

नीचे वाले हिस्से में उसकी सास और उपर उसके मुँह पर उसकी साली उछल रही थी...

दोनो ने उसके शरीर को खेल का मैदान बना रखा था...

भले ही अजय को मज़ा आ रहा था पर उसके शरीर को मिल रहे झटकों ने सारे पेच हिला डाले थे उसके...

पर फिर भी वो अच्छे बच्चे की तरह, अपनी सास और साली की सेवा करने में लगा रहा...

रजनी के उछलने की गति बता रही थी की वो झड़ने के बहुत करीब है

और वो जब झड़ी तो ऐसा लगा जैसे कमरे में कोई ज़लज़ला आ गया है...

वो ज़ोर-2 से चिल्लाती हुई....., अपने दामाद के उपर कूदते हुए....., झड़ने लगी.

''आआआआआआआआआआआअहह उूुुुउउफफफ्फ़ .... .मैं तो गयी रे ................. अहह मजा आआआआअ गय्आआआआआआ ...... ओह ........ उम्म्म्ममममममममममममम.....''

पूजा भी अपनी माँ को इतने करीब से झड़ते देखकर मुस्कुरा दी और उसने अपनी माँ के होंठों पर होंठ लगा कर एक गहरी स्मूच कर दी...वो उसने इसलिए भी किया क्योंकि वो हद से ज़्यादा चिल्ला रही थी...

उसे डर था की उनकी आवाज़ कहीं बाहर ना चली जाए..

पर वो आवाज़ शायद बाहर जा चुकी थी...

क्योंकि अगले ही पल कमरे का दरवाजा खुला और अजय का ससुर अंदर आ गया...

सबसे पहले दरवाजा खुलते हुए पूजा ने देखा और अपने पापा को देखते ही उसकी फट्ट कर हाथ में आ गयी...

वो तुरंत बेड के दूसरी तरफ कूद गयी और बेड पर पड़ी चादर से अपने आप को धक कर उसके अंदर छुप गयी...

और फिर अजय की नज़र अपने ससुर पर पड़ी.... और उनके गुस्से से तमतमाए चेहरे को देखकर उसका खड़ा हुआ लंड सिकुड कर सूखे करेले जैसा रह गया...

पर रजनी तो अभी तक ऑर्गॅज़म के नशे में उसके लंड पर कूद रही थी.... सिसकारी मार रही थी...

इस बात से अंजान की उसके पीछे उसका पति खड़ा है....जिसने अपनी बीबी को अपने ही दामाद से चुदते हुए रंगे हाथो पकड़ लिया है...

अजय तो समझ ही नही पा रहा था की उपर वाला उससे किस जन्म का बदला ले रहा है...

इस एंगल के बारे में तो उसने सोचा भी नही था... अभी तक उसने सिर्फ ये मन्नत मांगी थी की उसकी बीबी प्राची को उसके ठरकिपन और चुदाई के किस्सों के बारे में पता ना चले पर अपने ससुर के बारे में तो उसने सपने में भी सोचा नहीं था

अब उसका क्या होगा ये तो उपर वाला ही जानता था.
 
55

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अब आगे

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रजनी जब चुदाई के नशे से उबरी तो उसने देखा की पूजा एक कोने में दुबक गयी है और अजय के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही है...उसने तुरंत दरवाजे की तरफ देखा, जहाँ उसका पति खड़ा था.

एक पल के लिए तो उसके चेहरे के भाव भी बदल गये...

पर अगले ही पल जो हुआ उसे देखकर और सुनकर तो अजय के साथ -2 पूजा भी स्तब्ध रह गयी

रजनी ने गुस्से से भरी नज़र से अपने पति को देखा और गरज कर बोली : "क्या है....बोला था ना मेरे मामलों से दूर रहा करो....एक बार की बात समझ नही आती क्या ??''

उसकी तेज आवाज़ और गुस्सा देखकर तो अजय भी सहम गया.... ये तो वही बात हुई थी, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ..

क्योंकि रंगे हाथो तो वो खुद पकड़ी गयी थी और सुना अपने पति को रही थी...

और वो भी ऐसी अकड़ के साथ जैसे कुछ हुआ ही ना हो..

अजय के ससुर का चेहरा जो अभी कुछ देर पहले तक गुस्से से तमतमा रहा था,भीगी बिल्ली जैसा हो गया...

वो हकलाता हुआ बोला : "पर.... पर ... रजनी .... कुछ तो शर्म करो.... अपने ही घर पर... अपने ही बच्चों के साथ....''

इस बार तो रजनी का सिर ही घूम गया.... वो कुशल घुड़सवार की तरह अजय के घोड़े जैसे लौड़े से उछल कर नीचे उतर गयी और नंगी ही चलती हुई अपने पति के पास आई और बोली : "इतनी औकात नही है तुम्हारी जितना बोल रहे हो... समझे .... इतनी ही इज़्ज़त की फ़िक्र होती तो पहले अपने इस लंड को काबू में रखते...मेरा मुँह ना खुलवाओ, वरना अभी अपने इन्ही घर के बच्चों के सामने ऐसी शर्मिंदगी का सामना करना पढ़ेगा की यहीं डूब कर मर जाना चाहोगे... मेरी ज़ुबान ना खुलवाओ और ना ही मेरे किसी भी काम में दखल दो.... समझे.... चलो दफ़ा हो जाओ इस कमरे से...''

इतना कहकर उसने अपने पति को लगभग धक्का देते हुए कमरे से बाहर निकाल दिया...और दरवाजा ज़ोर से पटक कर बंद कर दिया...

और बुदबुदाती हुई बेड के करीब आई : "साला ... मुझे नसीहत देने आया था... अपनी गांड में दम नही है और मुझे शराफ़त का पाठ पढ़ाने निकला है.... मादरचोद साला ....''

अजय के लिए तो ये बिल्कुल नया था, पूजा के लिए भी किसी शॉक से कम नही था.... उसने आज तक अपने माँ बाप के बीच ऐसी नफ़रत कभी नही देखी थी.... और उसके पापा किस बात से दबकर रह गये की अपनी बीबी और बेटी को चुदते देखकर भी कुछ ना कर पाए.... ज़रूर कोई बड़ी बात है.... पर ये मौका नही था उस बात को जानने का, उसकी मॉम का मूड काफ़ी खराब सा लग रहा था...अजय भी चुप ही रहा .....उसने भी ज़्यादा कुरेदना सही नही समझा इस वक़्त...

रजनी का मूड ऑफ सा हो चुका था... पर फिर भी अपने चेहरे पर थोड़ी स्माइल लाते हुए वो अजय और पूजा के करीब आई और बोली : "फ़िक्र मत करो.... वो अब अंदर नही आएँगे... तुम एंजाय करो.... मैं तब तक वॉश करके आती हूँ ...''

इतना कहकर वो अपनी फेली हुई गांड मटकाती हुई बाथरूम की तरफ चल दी..

अजय और पूजा ने एक दूसरे को देखा और अगले ही पल दोनो बुरी तरह से हँसने लगे... उन्हे तो विश्वास ही नही हो रहा था की इतनी बड़ी मुसीबत से वो निकल चुके है...और यही सोचकर उनकी हंसी रुक ही नही रही थी

पूजा : "ओह्ह माय गॉड ..... मुझे तो अभी भी विश्वास नही हो रहा है.... पापा ने मुझे और मॉम को तुम्हारे साथ देख लिया और फिर भी सब नॉर्मल है. ... वाउ.... आई कांट बिलिव इट....''

वो नंगी ही उछलती हुई उपर आई और बेड पर चड़कर अजय से लिपट गयी.

अजय : "हाँ यार.... हैरान तो मैं भी हूँ .... ऐसा कौनसा मर्द होगा जो अपनी बीबी और बेटी की चुदाई देखकर भी इस तरह से चुप रह जाए.... और तुम्हारी माँ की बातें सुनकर लग रहा था की ज़रूर कोई बहुत बड़ा सस्पेंस है, जिसे जानना ज़रूरी है...''

पूजा ने उसका ध्यान अपनी तरफ खींचा और बोली : "अरे छोड़ो ना जीजू .... जब पापा आए थे तो मुझे लगा था की पहले मॉम की फकिंग करवाकर मैने तो अपना चांस खो ही दिया है....पर अब सब्र नही हो रहा है...जो हो गया सो हो गया.... अब प्लीज़ देर ना करो..... मेरी पुस्सी में अभी तक सेंसेशन हो रहा है... आपने जो कमाल अपनी जीभ से दिखाया है वो ज़रा 'इससे' भी दिखाओ ना.....''

इतना कहते हुए उसने अजय का लंड को पकड़ कर ज़ोर से निचोड़ दिया..

अजय कराह उठा उसकी उंगलियों के प्रहार से...और बोला : "आऊउच.... ओके ... ओके .... पर पहले बताओ तो सही, 'ये' होता क्या है...''

पूजा भी शायद बात को लंबा खींचने के मूड में नही थी... वो झट से बोली : "लंड ..... अपना लंड डालो जल्दी से मेरी पुस्सी में .....''

अजय मुस्कुराया और बोला : "ओके मेरी जान. ... पहले इसे तैयार तो करो ....ससुरजी को देखकर साला बैठ ही गया है ''

इतना कहते हुए उसने पूजा के सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबा दिया....वो भी किसी प्यासी मछली की तरह उसके लंड का पानी पीने के लिए कूद पड़ी...

और कुछ ही देर में उसने अजय के लंड को पहले जैसा ताकतवर बना दिया.

उसके लंड को चूसते हुए वो नीचे तक आती और उसकी बॉल्स को सहलाकर वापिस चली जाती.

ऐसा करते हुए उसने अपने जीजे के लंड को अपनी कमसिन चूत के लिए जल्द ही तैयार कर लिया...

वैसे भी जीजाओं के लंड अपनी सालियों के लिए हमेशा तैयार ही रहते है..

अजय ने तुरंत उसे बेड पर लिटाया और उसकी टांगे खोलकर बीच में आ खड़ा हुआ....और अपना लंड उसने पूजा की चूत पर लगाया और धीरे से धक्का मारकर उसकी मखमली मांद में दाखिल होता चला गया...

''आआआआआआआअहह.... सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स........ मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी.................. उफफफफफफफफफफफ्फ़ जीजू ........ पहली बार जाने में हमेशा दर्द करता है.....''

बेचारी ने बड़े ही भोलेपन से अपने जीजू को शिकायत भी कर दी....

अजय मन ही मन बोला : 'थोड़ा टाइम और रुक जा मेरी जान, ये पहली बार का दर्द भी जल्द गायब हो जाएगा...'

और मुस्कुराते हुए वो ज़ोर-2 से उसकी चूत मारने लगा.

पूजा अपनी कमर उठा कर अधलेटी हालत में अपने जीजू के लंड को अपने अंदर जाते हुए देख रही थी.

और बुदबुदाई : "उम्म्म्ममममममममम पहले तो ...आह लगता ही नही था....... की ..... की .... आअहह .... इतना मोटा लंड ..... ऊहह ... अंदर चला जाएगा..... अहह पर देखो तो ज़रा...... स्स्स्स्स्स कैसे अंदर तक जा रहा है....''

सच में लड़कियों की चूत कमाल की होती है.... बड़े से बड़ा लंड निगल जाती है....

और मज़े अलग लेती है...

और वो मज़े इस वक़्त पूजा लेने में लगी थी..

अजय ने नीचे झुककर उसके मुम्मे चूम लिए और बोला : "अभी तो ऐसे और भी कमाल देखने है मेरी जान....''

अजय का इशारा उसकी गांड के छेद की तरफ था.... जिसमें लंड घुसना और भी मुश्किल होता है... पर अभी उसके बारे में बोलकर वो मज़ा खराब नही करना चाहता था... इसलिए चुदाई पर ही पूरा ध्यान लगाकर वो अपना लंड उसकी चूत में पेलता रहा..

अब तक रजनी भी बाहर आ चुकी थी..... उसकी चूत की हरारत अभी तक शायद ख़त्म नही हुई थी...

तब तक अजय ने पूजा को घोड़ी बना दिया था....और बेड के करीब पड़े छोटे सोफे पर झुकाकर पीछे से उसकी चूत को चोदने में लगा था...

रजनी तुरंत अजय की टाँगो के नीचे से घुसती हुई अपनी बेटी की चूत के नीचे मुँह करके उल्टी बैठ गयी और अपनी बेटी की चुद रही चूत पर जीभ लगाकर वहां से निकल रहा शहद चाटने लगी.

उसे तो ऐसा एहसास हो रहा था जैसे आइस्क्रीम की फेक्ट्री में घुसकर उसने सीधा मशीन पर ही मुँह लगा दिया है.... क्योंकि उसके दामाद के धक्को से, घर्षण के बाद जो मलाई जैसी क्रीम निकलकर बाहर आ रही थी, वो सीधा मुँह उचकाए रजनी के चेहरे और होंठों पर गिर रही थी.

इतना ताज़ा माल शायद ही किसी ने खाया होगा...और अपनी बेटी का तो शायद किसी माँ ने खाया ही नही होगा...

और रजनी की इस हरकत से पूजा और अजय पर जो बीती उसका तो कोई हिसाब ही नही था...

अपनी माँ के गर्म होंठ और ठंडी जीभ की चुभन उसे नीचे से अपनी चूत पर महसूस हो रही थी.... और उसी चूत में उसके जीजू के लंड ने कोहराम मचा रखा था....

उसकी आज तक हुई चुदाई में से ये सबसे मजेदार थी....

क्योंकि ऐसे आनंद की अनुभूति उसे आज तक नही हुई थी....

ऐसा लग रहा था जैसे वो आसमान में उड़ रही है....

उसे किसी बात की चिंता नही थी.....

ना तो इसकी की उसका जीजा उसे चोद रहा है

और ना ही इस बात की की उसकी माँ उसकी चूत को चूस रही है....

ऐसे आनंद की अनुभूति पाकर वो उत्तेजना के शिखर पर पहुँच गयी और ज़ोर -2 से चिल्लाने लगी...

''आआआआआआआआअहह माआआआआआआअ.... मज़ा आ रहा है .................. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... मम्मी..... ऐसे ही सक्क करो..... प्लीज़....... अहह ओह्ह्ह यस्स..... मॉम .... ऐसे ही ........ ऑहहह फककक ....हस्स्स्स्स ....''

बीच-2 में रजनी अपनी जीभ और होंठों से अपने ठरकी दामाद की सेवा भी कर देती थी....

अपनी लंबी जीभ निकाल कर वो जब अजय के लंड को टच करती तो वो काँप सा जाता और दुगनी ताक़त से उसकी बेटी की पिलाई करने में जुट जाता...

रजनी की चूत में हो रही खुजली और भी ज़्यादा बढ़ चुकी थी.... वो तुरंत बेड पर आकर लेट गयी....

घोड़ी बनी पूजा ने उसका इशारा समझा और अजय के लंड को अंदर लिए-2 ही वो अपनी बेलगाड़ी लेकर बेड के किनारे पर पहुँच गयी और टांगे फेलाइ हुई अपनी माँ की चूत के उपर मुँह रखकर उसे चाटना और चूसना शुरू कर दिया.

''आआआआआआआअहह मेरी जाअँ..... मेरी बच्ची .... शाबाश....... ऐसे ही चाट मेरी चूत को..... आआआआआआहह .... अंदर तक....''

वो एक आज्ञाकारी बेटी की तरह अपनी माँ की बात मानकर उसे चूसने लगी और पीछे से अजय उसकी मटकती हुई गांड को अपने हाथों से मसलता हुआ उसकी चूत को रौंदता रहा...

और जल्द ही अजय की गन और पूजा की जीभ ने अपना-2 कमाल दिखना शुरू कर दिया और साथ ही साथ अपनी साली की तंग गलियों जैसी चूत के चुंगल में फंसकर अजय के लंड ने भी जवाब दे दिया... और सभी एक साथ झड़ने लगे...

अजय अपनी साली पूजा की चूत में......

और रजनी अपनी बेटी पूजा के मुँह में .

यानी दोनो तरफ का हलवा पूजा ने अपनी चूत और मुँह में समेट लिया...

अजय ने उसकी चूत से अपना रस से लिबड़ा लंड निकाला

और पीछे -2 ढेर सारा सफेद रस भी बहकर बाहर निकल आया जो उसकी जांघों से होता हुआ नीचे गिरने लगा..

अजय : "आआआआआआआहह....... साली .... मेरे लंड का सारा पानी ऐसे ले गयी जैसे तेरे बाप की प्रॉपर्टी है ये ..''

वो भी मज़ाक मे बोली : "बाप का तो मुझे अब कोई डर ही नही है.... मेरी मॉम के आगे उनकी एक नही चलती.....क्यों मॉम ...''

अपनी बेटी और दामाद की बात सुनकर वो भी मुस्कुराइ और अपनी चूत को और भी ज़्यादा उभार कर उसने अपनी बेटी के आगे कर दिया....

पूजा ने अपनी माँ की चूत से निकला गाड़ा और सफेद रस अपनी जीभ को चम्मच बनाकर इकठ्ठा किया और गटक गयी

तीनों पर मस्ती चढ़ी हुई थी , अजय तो दोनों माँ बेटियों की मदमस्त गांड का दीवाना हो चुका था , इसलिए उसके हाथ उनपर ही फिसले जा रहे थे, दोनों ने मस्ती में आकर अपनी -२ गांड उसके चेहरे पर घिसनी शुरू कर दी

सभी हंसी में लोट पोट होकर ऐसे ही काफी देर तक मजे लेते रहे

कुछ देर बाद एक दूसरे के नंगे जिस्मों को रगड़ने के बाद उन्होंने अपने -२ कपड़े पहने और बाहर निकल आये, पर अजय के दिमाग में यही प्रश्न घूम रहा था की उसके ससुर की अपनी बीबी से इतनी फटती क्यों है , यही सोचता- २ वो अपने घर आ गया, जहाँ उसकी साली रिया उसका इन्तजार कर रही थी

दरवाजे पर पहुँचकर उसने बेल नही बजाई वरना प्राची के जाग जाने का ख़तरा था...उसने रिया के मोबाइल पर मिस कॉल मारी,उसने तुरंत दरवाजा खोल दिया..रिया अजय को देखकर मुस्कुरा दी..वो भी हंस दिया..क्योंकि वो जानता था की इस वक़्त रिया अच्छी तरह से जानती है की वो उसकी मौसी और कजिन को चोद कर आ रहा है...

अंदर आकर अजय ने प्राची को बेडरूम में जाकर चेक किया...वो खर्राटे मारकर सो रही थी..वो बाथरूम में गया और कपड़े बदलकर बाहर आ गया...अब उसने एक शॉर्ट और सेंडो पहनी हुई थी.

अजय का बदन पूरा टूट रहा था...वो सोफे पर आकर बैठा तो रिया ट्रे में उसके लिए एक ग्लास ले आई...उसने सोचा की पानी है...पर पहला घूँट भरते ही उसे एहसास हुआ की ये तो दारु है..

रात के 2 बजने वाले थे...इतनी रात को रिया उसके लिए दारू ले आई थी...आख़िर चाहती क्या थी वो..

अजय : "ये क्या...इस वक़्त ये क्यों ले आई....''

अजय ने एक और सीप भरते हुए कहा..

रिया : "मुझे लगा की जीजू इतनी मेहनत करके आए है तो थोड़ी थकान मिटानी चाहिए आपकी...''

इतना कहकर वो घूमकर उसके सामने आई और अजय की गोद में बैठ गयी..

अजय की तो हालत खराब हो गयी...उसकी नर्म और कुँवारी गांड उसके लंड के ठीक उपर थी...और वो लंड इस वक़्त सूज कर आलू जैसा हुआ पड़ा था...इतनी भयंकर चुदाई के बाद उसमे हल्का सा दर्द भी था..ऐसे में रिया उसके साथ इस तरह के मज़े ले रही थी...और वैसे भी,उसके बेडरूम का दरवाजा खुला हुआ था...अगर प्राची की नींद खुल गयी तो अनर्थ हो जाएगा...

अजय ने जब बेडरूम की तरफ देखा तो रिया समझ गयी की जीजू की फट रही है...वो उछलकर खड़ी हुई और भागती हुई बेडरूम तक गयी और उसे बाहर से लॉक कर दिया...और एक बार फिर से आकर वो उसकी गोद में बैठ गयी.

अब थोड़ी तसल्ली थी उसे पर दर्द तो लंड में अब भी हो रहा था..

वो बोला : "मुझे लगता है की अब तुम्हे घर जाना चाहिए...रात काफ़ी हो गयी है...''

रिया ने बड़े ही प्यार से उसके गले में बाहे डाली और बोली : "चली जाउंगी ....यहाँ बैठकर जो ड्यूटी दी है मैने उसके चार्जस तो ले लूँ पहले...''

इतना कहते हुए उसने अपने होंठ आगे करके अजय के होंठों पर रख दिए..

अजय तब तक एक ग्लास गटक चुका था...भले ही वो इस वक़्त कुछ भी करने के मूड में नही था, पर रिया के गुलाब जैसी पंखुड़ी वाले होंठों को अपने मुँह में पकड़ा तो उससे भी सब्र नही हुआ और उसने उसकी किस्स का जवाब स्मूच से देना शुरू कर दिया..

और अगले ही पल दोनो एक दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे..रिया की आँखे गुलाबी हो गयी...उसकी साँसे तेज़ी से चलने लगी...

एक मिनट के बाद जब दोनो साँस लेने के लिए अलग हुए तो रिया के चेहरे पर कुछ और करने की चाहत देखकर अजय धीरे से बोला : "ओह्ह्ह रिया.... प्लीज़ समझने की कोशिश करो...अभी ज़्यादा कुछ पासिबल नही है.... पूजा और मॉम तुम्हारा वेट कर रहे है....तुम जाओ...''

पर रिया पर तो जैसे अपनी मज़दूरी के बदले कुछ 'ख़ास' वसूलने का भूत चढ़ चुका था ...

वो बोली : "प्लीज़ जीजू.... थोड़ी देर और.... आप समझते क्यो नही.... पूजा दीदी और मौसी की तरह मेरा बदन भी उसी आग में जल रहा है, उनकी आग तो आपने शांत कर दी, पर मेरा क्या... आप तो पता नही कब महूरत निकलोगे मेरे लिए... पता है पिछले कुछ टाइम से तो कुछ ज़्यादा ही मन कर रहा है.... प्लीज़ जीजू... कुछ करो... वरना मैं पागल हो जाउंगी ..''

इतना कहते-2 उसने अपनी टी शर्ट को नीचे करके अपनी एक ब्रेस्ट बाहर निकाल ली...

उस पके हुए आम जैसे मम्मे को देखकर और रिया की बातें सुनकर अजय का मन पिघल गया...

उसका बस चलता तो अभी के अभी उसे वहीँ नंगा करके चोद देता...पर वो एक इंसान था, कोई रोबोट नही...

दिन में अंजलि भाभी की ऑफीस में चुदाई और अभी कुछ देर पहले पूजा और अपनी सास की डबल चुदाई करने के बाद उसके लंड में ज़रा भी ताक़त नही बची थी.... उसके लंड को दोबारा तैयार होने में करीब 5-6 घंटे का टाइम लगना था...पर रिया को इस बात से कोई मतलब नही था...वो तो आज ही अपनी चूत में अपने जीजू के लंड का ठप्पा लगवा लेना चाहती थी..

रिया ने अपनी टी शर्ट को पूरा उतार दिया और अब वो टॉपलेस होकर अजय के सामने थी...अजय के मुँह में पानी आ गया उन गोरी-2 छातियों को देखकर

और उसने पूजा को अपनी तरफ खींचकर अपने होंठ लगा दिए उसके मुम्मों पर और जोरों से चूसने लगा..

रिया ने अजय के सिर को पकड़कर और ज़ोर से अपनी छाती में घुसा लिया और चिल्लाई : "ओह जीजू........ ज़ोर से सुक्क्क करो..... बहुत परेशान करते है ये.... दबाओ इन्हे..... चूसो.... काट लो दांतो से..... अहह ...ओह जीजू ...... सस्सस्स ..''

अजय ने उसके बूब्स पर मार्क बनाने शुरू कर दिए...

कुछ देर तक अपनी ब्रेस्ट चुसवाने के बाद वो बड़े ही प्यार से बोली : "जीजू..... मुझे भी चूसना है...''

अजय मुस्कुरा दिया उसके भोलेपन को देखकर...

कितनी मासूमियत से वो खुद ही उसके लंड को चूसने के लिए बोल रही थी...

इससे उसके उतावलेपन का सॉफ पता चल रहा था...

अजय जानता था की वो ज़्यादा देर तक तो इस खेल को बड़ा नही पाएगा, पर जितने मज़े वो ले सकता है उतने वो ले लेना चाहता था.

अजय ने हामी भर दी..
 
56

**********

अब आगे

*********

वो खुशी -2 उसकी गोद से उठी और सबसे पहले उसने अजय के लिए एक और पेग बना कर दिया, ताकि अपना लंड चुस्वाते हुए वो आराम से किसी राजा की तरह सीप भरता हुआ अपनी साली से लंड चुस्वाई का मज़ा ले.

पेग देकर वो अजय के सामने बैठ गयी और उसने निक्कर नीचे करके अजय के शक्तिशाली योद्धा को बाहर निकाला, जो आज ना जाने कितनी जंग लड़कर आया था..

वो थोड़ा ढीला था अभी तक...पर रिया जानती थी की उसे जीवित कैसे करना है...

उसने उसे धीरे से मुँह में लिया और अपनी जीभ और दांतो के बीच दबाकर धीरे-2 चूसने लगी...अजय तो सीसीया उठा... ऐसी चुसाई उसने कहाँ से सीखी ये सोचते हुए उसने अपने हाथ से उसके सिर को सहलाना शुरू कर दिया...वो भी अपने जीजू से प्रोत्साहन पाकर और ज़ोर से उनका लंड चूसने लगी...

अजय ने नोट किया की उसका एक हाथ अपनी चूत पर था...और वो उसे जोरों से रगड़ रही थी...

यानी इस वक़्त वो अगर उसे नंगा करके अपने लंड पर बिठा ले तो वो हंसते-2 अपना कुँवारापन उसे सौंप देती...

पर आगे कुछ होता या ना होता, उससे पहले ही एक बार फिर से अजय की जिंदगी हिल गयी...

क्योंकि बेडरूम का दरवाजा अंदर से खड़कने लग गया था...

और प्राची की आवाज़ भी आ रही थी..

''अजय......अजय.....कहाँ हो तुम....जल्दी से दरवाजा खोलो.....अजय....''

दोनो के चेहरे पत्थर से हो गये....

अजय की ये सोचकर की अगर दरवाजा खुला होता तो उसकी जिंदगी का आज आख़िरी दिन होता

और

रिया ये सोचकर की लिया दिया कुछ नही और ऐसे में पकड़ी जाएगी तो वो पूरी जिंदगी किसी को मुँह दिखाने के काबिल नही रहेगी...

अंदर से दरवाजा खड़के जा रहा था...

रिया ने झट से अपना टॉप वापिस पहन लिया.... और अजय ने अपना लंड अंदर ठूसकर प्राची को जवाब दिया...

"यस ...डार्लिंग....एक मिनट आया....''

बोल तो उसने दिया पर उनके पास एक मिनट भी नही था....

अजय ने सबसे पहले तो रिया को घर से बाहर निकाला.... और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया....

और भागकर उसने ड्रॉयिंग रूम का टीवी ऑन कर दिया.... और अपनी पसंद का इंग्लीश मूवी चैनल लगा दिया...

और फिर भागकर गया और बैडरूम का दरवाजा खोला....

अंदर से बदहवास सी प्राची बाहर निकली

"ये क्या था..... मुझे अंदर बंद करके तुम कर क्या रहे थे....''

उसने चारों तरफ देखते हुए कहा

अजय की तो ज़ुबान अंदर फँस कर रह गयी थी.... उससे कुछ बोला ही नही गया...

प्राची ने टाइम देखा... रात के ढाई बज रहे थे..... अजय ने सबसे पहले तो उसे पानी का ग्लास दिया....शायद पानी पीने के लिए ही वो उठी थी...

और उसे सोफे पर बिठा कर बड़े ही प्यार से बोला : "बैठो....ज़्यादा परेशान ना हो .... मुझे नींद नही आ रही थी... इसलिए मैं बाहर आ गया... और टीवी ओंन करके देखा तो मेरी पसंद की मूवी भी आ रही थी.... सो इसलिए.... दरवाजा बंद कर दिया ताकि तुम डिस्टर्ब ना हो जाओ...''

प्राची ने सारी बातें इत्मीनान से सुनी .... तब तक उसने टेबल पर पड़ा दारु का ग्लास भी देख लिया था...

"वो सब तो ठीक है पर ये क्या टाइम है ड्रिंक करने का.... आज से पहले तो तुमने इतनी लेट कभी ड्रिंक नही किया...''

अब वो क्या बोलता उसे की साली ने पिलाया ही इतने प्यार से था की वो मना ही नही कर पाया..

अजय : "यार....आई नो... बट तुम्हे तो पता है.... आजकल ऑफीस का काम ही इतना रहता है की ड्रिंक का टाइम ही नही मिलता... इसलिए सोचा की जब जाग ही रहा हूँ तो एक ग्लास पी लेता हूँ ...''

प्राची : "पर ये सब तुम सिंप्ली दरवाजा बंद करके भी तो कर सकते थे.... बाहर से कुण्डी क्यो लगाई.... पता है, मुझे कितनी घबराहट हो रही थी ....''

अजय : "ओह्ह माय सॉरी बैबी..... आई एम सॉरी.....''

और इतना कहते हुए उसने उसे अपनी तरफ खींच लिया....और ऐसा करते ही प्राची का हाथ उसके खड़े लंड से आ टकराया

उसके चेहरे पर शरारती स्माइल आ गयी

"आपका तो मैं समझ सकती हूँ की नींद नही आ रही...पर इन महाशय को क्या हुआ है....ये क्यों उठे हुए है....'' उसने अजय के खड़े लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा...

अजय ने बात संभाली : "वो क्या है ना डार्लिंग.... मूवी देखते हुए एक बाथ सीन आ रहा था.... और मुझे अपने हनीमून का वो सीन याद आ गया जब हमने एकदम न्यूड होकर ऐसे ही नहाये थे..''

प्राची जो अभी तक डरी हुई सी बातें कर रही थी, अजय की ऐसी चिकनी बातें सुनकर उसपर भी खुमारी चड़ने लगी...और वो बड़े ही लाड से बोली

''ओले..ओले...तो मेले बेबी को वो शब यादू आ रा है....तभी आपके छोटे सिपाही रात को भी ऐसी मुस्तैदी से खड़े है....ह्ममम.''

अजय मुस्कुरा दिया....

प्राची : "मुझे पता है डार्लिंग, मेरी प्रेगञेंसी की वजह से मैं आपको वो सब नही दे पा रही हूँ जो एक पत्नी को देना चाहिए....बट आई केन हेंडल हिम इन अदर वे...''

इतना कहते हुए उसने अजय को अपने सामने खड़ा किया, उसकी शॉर्ट्स को नीचे खिसका दिया और उसके खड़े हुए लंड को पकड़ कर हिलाने लगी...

अजय : "डार्लिंग.... इट्स ओके .... मुझे कोई प्राब्लम नही है..... (तुम्हारी माँ और बहनें मेरा अच्छे से ख्याल रख रही है...) "

प्राची : "नही, मैं नही चाहती की इस वजह से आपकी नज़र इधर-उधर फिसले... ''

अब वो बेचारी को क्या बोलता, की वो नज़र और लंड तो कब के फिसल चुके हैं...

प्राची ने अपनी जीभ निकाल कर उसके लंड को लिक किया...

ये वही लंड था, जिसे कुछ घंटे पहले तक उसकी माँ और बहन अपने मुँह और चूत में ले चुकी थी ....

और अभी कुछ देर पहले तक उसकी कजिन रिया भी इसे अपने मुँह में लेकर चूस रही थी.

अब वही लंड घूम-फिरकर वापिस अपनी असली मालकिन यानी प्राची के पास पहुँच चुका था...

और उसके गुलाबी होंठों को देखकर वो किसी पालतू कुत्ते की तरह ऐसे उछलने लगा जैसे अपने खोए हुए मालिक को देख लिया हो...

अजय हंस दिया, क्योंकि उसे खुद ही अपने स्टेमीना पर ताज्जुब हो रहा था....

सुबह से वो एक मजदूर की तरह चुदाई में लगा हुआ था, फिर भी एक नये मौके को देखकर उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था... ऐसा लंड मिले तो आदमी को अपने उपर गुमान तो होता ही है...

प्राची ने उसकी गोटियों को हथेली में भरकर उसके लण्ड को हवा में झटके दिए...और अपने चेहरे पर मारती हुई बोली : "बोल मेरे राजा.... क्या करूं तेरे इस शेर के साथ.... खा जाऊं .. पी जाऊं .. या अंदर ले लू....''

इतने लुभावने ऑफरस सुनकर अजय अपने पंजों पर खड़ा हो गया...

उसके हाथ मे अभी तक दारू का ग्लास था...उसने एक ही झटके में उसे खाली किया और बोला : "अभी तो यही करो जो शुरू किया है.... ''

वो अपनी प्रेगञेन्ट बीबी की चूत मारकर उसे ज़्यादा तकलीफ़ नही देना चाहता था...

प्राची ने मुस्कुराते हुए अपने गाउन की डोरियाँ खोल कर उसे निकाल कर फेंक दिया , उसे पता था की अजय को उसके बूब्स कितने पसंद है

अब वो सिर्फ एक काली कच्छी में बैठी अपनी मोटी - 2 छतियाँ अजय के सामने लहरा रही थी

और उसके तने हुए, मोटे-2, कच्चे दूध से भरे मुम्मों को देखकर अजय के मुँह में पानी आ गया....

प्रेगनेंसी के बाद उसकी छातियाँ काफ़ी बड़ी हो चुकी थी.... अब तो उसकी ब्रा भी उसे नही आती थी, इसलिए पूरा दिन बिना ब्रा के ही रहती थी...

अपने हाथों से अपने मम्मे उठा कर वो बोली : "ये देखो, तुम्हारे ये बच्चे भी तुम बिन उदास से हो गये हैं....''

अजय ने मुस्कुराते हुए नीचे झुक कर उन्हे चूम लिया... चूम क्या लिया उन्हे चूस लिया.... प्राची भी अपने सपूतों को अजय के हवाले करके ज़ोर से कराह उठी

''आआआआआआआआअहह....... सकककककक इट हाआआाआर्ड अजय....... ज़ोर से चूसो...... उम्म्म्ममममममम''

अजय ने अपने दाँतों से उसके मोटे-2 फालसे के दाने जैसे निप्पल्स को काट लिया.... उसके मोटे मुम्मों को जितना हो सकता था अपने मुँह में लेकर चुभला दिया.... और उसकी इस हरकत से वो जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी...

उसने अजय के लंड को पकड़ा और उसे मुँह में लेकर फिर से चूसना शुरू कर दिया

और इस बार इतनी ज़ोर से सकिंग करी की अजय बुरी तरह से तड़प उठा...

और इस बार इतनी ज़ोर से सकिंग करी की अजय बुरी तरह से तड़प उठा...

''आआआआआआआअहह धीरे करो मेरी जान.... धीरे, अभी इससे पूरी लाइफ काम चलाना है तुम्हे...''

अजय ने उसके तेज दांतों से बचाने के लिए लैंड बाहर निकाल लिया , फिर उसके प्लीस कहने पर ही वापिस अंदर डाला

प्राची ने अपनी स्पीड धीरे कर दी, पर अपनी पकड़ नही....

वो उसके लंड को उतनी ही ज़ोर से पकड़ कर दबाती रही, चूसती रही... काटती रही...

और अंत में वो वक़्त भी आ गया जब अजय के लंड से खुशियों भरा संगीत, फव्वारा बनकर बह निकला.... और उस रिमझिम पानी को अपने चेहरे और छातियों पर गिराकर प्राची की आत्मा भी तृप्त सी हो गयी... उसने बचा हुआ माल अपने मुँह में लेकर निगल लिया... एक तो पहले ही उसका चेहरा इतना शाइन कर रहा था, इस माल को खाकर वो उसे और भी ज़्यादा चमका देना चाहती थी..

फिर सारी सॉफ-सफाई करके दोनो अपने रूम में आ गये..

और सोते हुए अजय के दिमाग़ में पूरे दिन की पिक्चर चल रही थी.... पहले अपने ससुर द्वारा पकड़ा गया और बाद में प्राची के हाथों भी बाल-2 बचा...वो अगर पकड़ा जाता तो क्या होता,ये उसे बताने की ज़रूरत नही थी..

पर उपर वाला शायद उसके साथ था, इसलिए उसने भगवान का शुकराना किया और सो गया.

अगले दिन ऑफीस का रुटीन काम चलता रहा .. पूरे हफ्ते वो अपने उसी प्रॉजेक्ट में बिज़ी रहा....

इतना बिज़ी की 4-5 दिन तक तो चुदाई ही नही की... हालाँकि उसकी सैक्सी सेक्रेटरी हमेशा उसके सामने थी, पर ऐसा कोई मौका ही नही मिला की वो उसे दोबारा चोद पाता... घर आते-2 भी इतना लेट हो जाता था की अपने ससुराल में जाकर पहले चुदाई करने का टाइम ही नही बचता था...

और इसी तरह पूरा हफ़्ता निकल गया...

अब वो पूरे हफ्ते की कसर दो दिनों में निकालना चाहता था...

क्योंकि अगले हफ्ते उसे उसी प्रॉजेक्ट के सिलसिले में मुंबई जाना था...

और इन दो दिनों में वो इस बात का भी पता लगाना चाहता था की उसकी सास से उसके ससुर की इतनी क्यो फाटती है...

अपना बेग समेट कर अजय गाड़ी की तरफ चल दिया.... और हमेशा की तरह उसकी सेक्रेटरी रचना पार्किंग के सामने वाली केंटिन में उसका इंतजार कर रही थी... अजय ने कार निकाली और रचना को उसमे बिठाकर घर की तरफ चल दिया... आज फ्राइडे था... वो फ्रेश होने के मूड में था... घर जाकर चिल्ड बियर पीकर और अपनी सास या सालियों में से किसी की चूत मारकर वो पूरे हफ्ते की थकान मिटा देना चाहता था..

और दूसरी तरफ रचना का भी यही हाल था... उसे भी पूरे हफ्ते अजय का लंड देखना नसीब नही हुआ था... ऑफीस में बिज़ी रहने के बाद घर जाते हुए वैसे भी लेट हो जाता था... इसलिए उसकी कुंवारी चूत भी बुरी तरह से खुज़िया रही थी इस वक़्त..

रचना : "अजय सर....आजकल आप मेरी तरफ तो ध्यान ही नही देते...''

उसकी इस मासूम सी शिकायत का मतलब वो अच्छी तरह से समझ गया था... वो अपनी चूत पर ध्यान देने की बात कर रही थी...

अजय (मुस्कुराते हुए) : "आई नो डार्लिंग... पर पूरा हफ़्ता तुमने देखा ना कितना काम था... आज थोड़ा रिलेक्स् फील कर रहा हूँ ...''

रचना : "आई नो... पर फिर भी, ऐसे थोड़े ही होता है.... अब आपने जो चस्का मुझे लगवा दिया है,उसके बिना तो एक भी दिन काटना मुश्किल लगता है...आपने तो हफ़्ता निकाल दिया...''

सच में वो इस समय चुदासी में भरकर बुरी तरह से तड़प रही थी...अब उसे किसी भी कीमत में अपनी चूत में अजय का लंड चाहिए था

अजय ने अपना हाथ खिसका कर उसकी जाँघ पर रहा दिया, और उसके बदन की गर्मी महसूस करके वो खुद भी काँप उठा... वो कहते है न की जवान चूत में से जो आग निकलती है, उसमे अच्छे -2 जल जाते है, वही हाल इस वक़्त अजय का भी हुआ, उसका लंड भी एकदम से अकड़ गया... रात के 8 बज रहे थे, अंधेरा बढ़ने के बाद तो जिस्मों की आग और भी ज़्यादा सुलगती है...रचना की आग भी भयानक रूप ले चुकी थी.... उसने अजय के हाथ को पकड़कर सीधा अपनी सुलग रही चूत पर रख दिया..अजय को ऐसा लगा उसकी चूत से निकल रहे गर्म थपेड़ों में उसका हाथ झुलस जाएगा...

वो तड़प कर बोल उठी : "प्लीज़ सर.... कुछ करिए.... ये मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा है....''

अजय : "अभी ???"

रचना : "हाँ सर ... अभी..... वरना मैं कुछ कर बैठूँगी...''

अजय को तो डर सा लग गया की कहीं ये अपनी गली मोहल्ले के किसी लोंडे से ना चुदवा बैठे.... वैसे भी उसने अक्सर बताया था की उसे देखकर गली के लड़के टोन्ट मारते हैं.... ऐसी हालत में उनमे से अगर एक भी लफँडर सामने पड़ गया तो ये खुद उसके लंड को पकड़ लेगी...

यानी उसे उसकी चूत मारनी ही पड़ेगी..रचना की सील आज तोड़नी ही पड़ेगी

अजय बेचारा फँस कर रह गया... वो तो घर जाकर अपनी सास की चूत मारने की सोच रहा था , ये बिन बुलाई चुदाई बीच में कहाँ से आ गयी....

हालाँकि उसे रचना की कुंवारी चूत मारने में अपनी सास से ज़्यादा मज़ा आने वाला था, पर एक प्लान सा बन चुका था उसके दिमाग़ में ..की घर जाएगा...बियर-शियर पिएगा और बाद में सास की चुदाई करेगा...

पर ऐसी हालत में रचना को छोड़ना भी सही नही था.... बेचारी कैसी लालसा भरी नज़रों से उसे देख रही थी..

अजय ने उसकी हालत और अपने खड़े हो चुके लंड पर तरस खाकर गाड़ी को हाइवे की तरफ मोड़ लिया.

वो जानता था की उस हाइवे पर दोनो तरफ घना जंगल है... और उनमें अपनी गाड़ियाँ खड़ी करके कई प्रेमी जोड़े प्यार के खेल खेलते है....आज अजय ने भी उसी एडवेंचर को महसूस करने की सोच ली..आज वो जंगल में मंगल मनाना चाहता था

अजय ने उसका हाथ पकड़ कर अपने खड़े हो चुके लंड पर रख लिया... उसने झट से उसके लंड पर झुककर जीप खोली और लंड को आज़ाद कर लिया...

गाड़ियाँ तेज़ी से निकल रही थी, पर उनकी गाड़ी के अंदर क्या चल रहा था ये कोई नही जानता था..कोई अगर देख भी लेता तो उसे यही लगता की अजय अकेला गाड़ी चला रहा है..

रचना ने अजय के लंड को बाहर निकाला और उसपर अपनी गर्म साँसे छोड़ने के बाद उपर से नीचे तक अपनी जीभ से नाप डाला...उसे तर कर दिया.... चाट डाला उपर से नीचे तक..

अजय के लिए गाड़ी चलना मुश्किल सा हो रहा था... उसने स्पीड कम करके अपनी लेफ्ट में गाड़ी चलानी जारी रखी...

रचना के दोनो मुम्मे उसकी टाँगों पर रगड़ खा रहे थे....अजय ने गियर चेंज करने के बाद अपना हाथ उसकी शर्ट के अंदर डाल कर पीछे से उसकी ब्रा के स्ट्रेप खोल दिए...और अपना हाथ उसकी चिकनी पीठ पर फेरने लगा...

रचना ने उसके लंड को अपने मुँह से बुरी तरह पकड़ रखा था...आज जैसी चुसाई उसने आज तक नही की थी... और ऐसी चुदासी में उसे चूसने में भी बहुत मज़ा आ रहा था..वो अजय के लंड को पूरी तरह से एंजाय कर रही थी...

कुछ देर आगे चलकर अजय को एक पगडंडी अंदर की तरफ जाती दिख गयी....उसने कार अंदर डाल दी...और अंदर लेते ही लेफ्ट मोड़ लेकर एक बड़े से पेड़ के नीचे रोक दी.

ये जगह रोड से ज़्यादा दूर नही थी... वहां से कोई अंदर भी आता तो उन्हे पता चल जाता...

गाड़ी रुकते ही अजय ने रचना को अपनी तरफ़ खींचा और दोनो एक दूसरे पर पागलों की तरह टूट पड़े...

अजय ने आनन फानन में उसकी शर्ट के बटन खोल दिए, उसकी ब्रा तो पहले से ही उतरी हुई थी, शर्ट को बाहर निकालते ही वो उपर से नंगी होकर अजय के सामने थी..

उसके हाथ एक बार फिर से अजय के लंड पर आ टीके...और वो उसे उपर नीचे करते हुए मसलने लगी..

अजय ने नीचे झुककर उसके बूब्स पर अपना मुँह लगा दिया..और उसके निप्पल्स के थ्रू उसकी मस्तियाँ निचोड़कर पीने लगा..

वो जोर से चीख़ी

''आआआआआआआआआआआआआआआआआआहह ओह माय डार्लिंग ........ सिर.......उम्म्म्ममममममममममममममममममम''

अगर वो कार में ना होते तो जंगल के हर जानवर को उसकी चीख सुनाई दे जानी थी....

ऐसी मस्ती भरी लड़की से चुसवाने और चूसने में अलग ही मज़ा मिलता है.

अजय ने अपनी शर्ट उतार फेंकी और पेंट खोलकर उसे भी नीचे खिसका दिया..
 
57

**********

अब आगे

*********

रचना ने भी अपनी जीन्स खोलकर पिछली सीट पर फेंकी और अपनी लंबी टाँग को लहरा कर उसने अजय के दूसरी तरफ किया और झट्ट से उसकी गोद में आ बैठी...

कार का ठंडा-2 एसी चल रहा था....अजय का लण्ड उसकी गीली चूत की परतों को छू रहा था...

रचना ने अजय के दोनो हाथों को पकड़ कर अपने उरोजों पर रखा और उन्हे दबा दिया...

और उपर मुँह करके खुद ही तड़प उठी...

चुदाई के खेल में उसे मुममे मसलवाना सबसे ज़्यादा पसंद था...

जब से उसने जवानी की दहलीज पर कदम रखा था, उनमे हमेशा से एक मीठा-2 दर्द होता रहता था....

अजय के जादुई हाथों से पीसकर उसकी ब्रेस्ट का वो मीठा दर्द एक सरूर सा बनकर उसके सिर चढ़ जाता था...

और फिर उस मीठे दर्द को वो बंद आँखों से पूरी तरह एंजाय करती थी...

आज भी वो यही कर रही थी.... अजय के हाथों को अपनी छाती पर लगाकर वो बड़बड़ाने लगी...

''ऑहहह अजय सर.... दबाओ इन्हे....हाँ ....ज़ोर से..... काट लो..... चबा जाओ...... उम्म्म्ममममम ...यसस्सस्स मेरे निप्पल्स ..... इन्हे मरोड़ो....... उफफफफफफ्फ़.फ...... सर ........ हाआन्ं... ऐसे ही ........ऑहहह माय गॉड ..... मर जाउंगी मैं ....... सर...... कुछ करो सर....... मर जाउंगी .......फक्क मी नाउ सर ...... फक्क्क्क्क्क मीीीीsssss ''

अब उसकी तड़प को देखकर अजय ने एकसाथ दो काम किए.....

पहला तो उसने उसके मोटे मुम्मों को पकड़कर उसके निप्पल्स को पूरा बाहर की तरफ उभार दिया.... और अपना मुँह उनपर लगाकर ज़ोर-2 से उन्हे चूसने लगा....

और दूसरा

नीचे हाथ लेजाकर उसने अपने लंड का रॉकेट उसकी चूत की दरार में फँसाया और एक जोरदार मर्दाना झटका मारकर उसके अंदर दाखिल हो गया...

बेचारी गरगरा कर रह गयी...अजय ने एक ही झटके में उसकी कुंवारी चूत में लंड पेलकर उसे लड़की से औरत बन दिया , कली से फूल बन दिया, उसकी जवानी को हर लिया उसने

''आआआआआआआआआआहहगगगह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ........ अजय ........... मररर्ररर गयी......... अहह''

उसकी चीख पूरे जंगल में गूँज गयी,

उसने अजय के सिर पर हाथ रखकर उसे अपनी छातियों में समेट लिया,दर्द तो उसे हुआ पर मजा उससे कही ज्यादा आया , धीरे-२ वो हल्का सा दर्द भी गायब हो गया और वो पूरी मस्ती में आ गयी

और वो खुद अपनी मोटी और फेली हुई गांड लहरा-2 कर उसके उपर कूदने लगी.... उसके लंड को अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों पर महसूस करने लगी.... अपनी चूत के दाने पर उसके लंड के सुपाड़े की गर्मी का एहसास लेने लगी....

और ये सब करते हुए उसके मुँह में जो आ रहा था वो बोल रही थी....

खुद को चोदने के लिए अजय को गलियां तक दे रही थी.... उसे उकसा रही थी.... वो ये भी भूल चुकी थी की वो उसका बॉस है.... चुदाई के इस नशे में वो एक रंडी बनकर अपनी चूत पिलवा रही थी और जिंदगी का असली मज़ा ले रही थी...

और ऐसा करते हुए वो करीब 3 बार झड़ भी गयी...

अजय को हर बार उसके निढाल हो रहे शरीर को उपर की तरफ करना पड़ता था और अगले ऑर्गॅज़म का एहसास होने के बाद वो फिर से छलांगे मारने लगती.... फिर झड़कर निढाल हो जाती...

अजय ने जो माल पूरे हफ्ते से जमा कर रखा था वो किसी ज्वालामुखी की तरह फटा और उसकी चूत के चिथड़े उड़ाता हुआ अंदर तक उसे भर गया....

''आआआआआआआआअहह ओह माय डार्लिंग...... आई एम कमिंग......''

हर एंगल से चुदी वो रचना, अजय ने उस छोटी सी कार में जगह बदल - 2 कर चोदा उसे

रचना बेचारी में तो हिम्मत भी नही बची थी की अजय से कुछ बोल पाती....

पर उसके लंड से निकली पिचकारी को महसूस करके वो एक बार और ज़रूर झड़ गयी...

और उसके बाद वो काफ़ी देर तक उसकी गोद में ऐसे ही बैठी रही....

अजय ने कार में रखे पेपेर टिश्यू नीचे लगा दिया जब वो उसके लंड से उठी...और करीब आधा कटोरी शरबत निकला उसकी चूत से....जिसमे ज़्यादा माल अजय का था....जो उसकी कुंवारी चूत से निकले खून में मिलकर गुलाबी रंग का हो चूका था

अपनी चूत और अजय के लंड को अच्छी तरह से सॉफ करने के बाद वो ऐसे ही नंगी कार से बाहर निकल गयी... और कुछ दूर बैठकर मूतने लगी...

अजय भी कपड़े पहेनटे हुए उसे पेशाब करते देखता रहा....

कुछ देर बाद दोनो ने अपने-2 कपड़े पहने और वहाँ से निकल आए.... एक और कुंवारी चूत को अपने लण्ड से चोदने के बाद उसमें एक नयी एनर्जी आ चुकी थी

हमेशा की तरह अजय ने उसे घर से थोड़ा दूर उतार दिया...और जाते-2 रोज की तरह रचना ने उसके गले से लगकर एक जोरदार स्मूच की.और आज के स्पेशल दिन के लिए उसने थेंक्स भी कहा , और ये भी बोली की ये रात वो हमेशा याद रखेगी

अजय जब घर पहुँचा तो साढ़े नो बज रहे थे.... सब उसका इंतजार कर रहे थे...

आज प्राची की तबीयत थोड़ा नाज़ुक सी थी... उसकी प्रेगञेंसी का आख़िरी महीना चल रहा था... आज उसकी माँ यानी अजय की सास रजनी ने रात को उनके घर रुकने का फेसला किया था..

और अजय और रजनी दोनो अच्छी तरह से जानते थे की आज की रात वो जबरदस्त चुदाई होने वाली हैं...

और साथ ही अजय को उस राज से भी पर्दा उठाना था, जिसने उसे पूरे हफ्ते से परेशान किया हुआ था..की उसका ससुर अपनी बीबी से इतना डरता क्यों है

डिन्नर के बाद प्राची जल्दी ही सो गयी... अजय बाहर बैठकर टीवी देखने लगा.उसकी सास किचन का काम निपटाने के बाद बाथरूम में नहा रही थी.

वो आराम से बैठकर टीवी देख रहा था की अचानक पीछे से उसकी सास रजनी आई और उसने अजय के गले में बाहें डालकर उसे पीछे से गले लगा लिया..

आज वो कुछ ज़्यादा ही महक रही थी.

उनके भीगे हुए बाल अजय के चेहरे पर आ गिरे...

ठंडे-2 गाल वो उसके गालों पर रगड़ने लगी...

और रजनी के जिस्म से आ रही भीनी-2 खुश्बू ने एक मिनट में ही अजय के लंड को खड़ा कर दिया.

और कोई मौका होता तो वो उन्हे पीछे से खींचकर अपनी गोद में गिरा लेता और वहीं शुरू हो जाता..

पर आज उसे पहले अपने सवालों जा जवाब चाहिए था, उसके बाद ही उसने कुछ करने का सोच रखा था.

अजय की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना होते देखकर वो उसके कानो को जीभ से चाटती हुई बोली : "क्या हुआ जमाई राजा... आज इतने ढीले क्यो हो...''

उसका इशारा अजय के लंड की तरफ भी था, जिसका उभार उसे चाहकर भी नही दिख रहा था.

अजय ने अपने गर्दन से उसकी बाहें निकाली और खड़ा हो गया..

सबसे पहले उसने अपने बेडरूम की तरफ देखा, दरवाजा बंद था, पिछली बार की तरह बाहर से बंद नही किया था उसे... पहले बाहर से जब कुण्डी लगाई थी तो प्राची घबरा गयी थी, अब उसे दोबारा उसी सिचुएशन में नही डालना चाहते थे ये लोग..

रजनी : "प्राची की चिंता ना करो... वो दवाई लेकर गहरी नींद सो रही है....वो नही उठेगी...घबराओ मत..''

अजय : "मुझे पता है की दवाई लेकर वो नही उठती... पर मुझे चिंता इस वक़्त उसकी नही है... मुझे पहले वो बात बताओ जो पिछले हफ्ते हुई थी... ससुर जी ने क्यों आपको और मुझे रंगे हाथ पकड़ने के बाद भी कुछ नही कहा... ऐसा क्या है जो उन्हे कुछ भी करने या कहने से रोकता है.''

रजनी : "मुझे पता था की तुम्हे जब भी मौका मिलेगा, ये सवाल ज़रूर पूछोगे .. पर तुम्हे एक वादा करना पड़ेगा, ये सच जानने के बाद तुम हमारे खानदान के बारे में कुछ बुरा नही सोचोगे... क्योंकि तुम हमारे घर के दामाद हो, ये सच जानने के बाद सबसे ज़्यादा फ़र्क तुमपर ही पड़ेगा...''

अजय : "अब आप मुझे ज़्यादा उलझाओ मत... जो भी बात है, मुझे सच बताओ... एन्ड आई प्रोमिस, मेरे नज़रिए और हमारे संबंधो में कोई फ़र्क नही पड़ेगा...''

ये सुनकर वो थोड़ा आश्वस्त हुई...

क्योंकि रजनी को सबसे ज़्यादा डर इस बात का था की सच सुनने के बाद वो अजय का लंड कभी ले पाएगी या नही..

रजनी उसके पास आकर सोफे पर बैठ गयी... और अतीत में जाती चली गयी.

वो बोली : "तुमने मेरी बहन नीलम को तो देखा ही है... वो शुरू से ही बहुत चंचल थी... मुझसे ज़्यादा खूबसरत भी... मेरी शादी के बाद मेरे पति भी उसके रूप के दीवाने हो गये... और मुझे जब तक पता चलता , उन दोनो में बहुत कुछ हो चुका था...''

इतना कहकर वो चुप हो गयी.

अजय समझ गया की उसके ससुर ने अपनी कुंवारी साली की खूब बजायी थी

वो आगे बोली ''जब प्राची पैदा होने वाली थी, उस वक़्त वो मेरे घर रहने आई थी... मेरी देखभाल करने.. और उन दिनों में तुम्हारे ससुर ने उसे दिन रात रोंदा... कोई भी मौका नही होता था जब वो उनके कमरे में नही होती थी.... शक तो मुझे शुरू से ही था, पर एक दिन मैने उन्हे रंगे हाथों पकड़ लिया...उन दोनो ने फिर कभी भी वैसा कुछ ना करने की कसम खाई... पर जब मेरी सिस्टर वापिस घर गयी तो उसका फोन आया...वो 2 महीने से प्रेगञेन्ट थी....हमने आनन-फानन में उसका अबोर्शन करवा कर उसकी शादी दूर के रिश्ते में करवा दी... और वो हमेशा के लिए मुंबई शिफ्ट हो गयी...पर मेरे पति का झुकाव अब भी उसकी तरफ था और वो काम के सिलसिले में अक्सर मुंबई जाने के बहाने ढूंढते रहते थे, कई बार तो मुझे भी जबरदस्ती साथ ले जाते थे, और वहां जाकर उनकी हरकतें मेरी नजरों से छुपी नही रहती थी , वहां भी मैंने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया ''

वो फिर चुप हो गयी.

अजय ये सब सुनकर अपनी सास को देखे जा रहा था...

रजनी आगे बोली : "उस दिन के बाद मैने भी सोच लिया की जो इंसान अपनी बीबी के प्रति वफ़ादार नही है, उसके साथ वफ़ादारी करके क्या मिलेगा मुझे...इसलिए, मैने भी अपनी सारी सीमाएँ लांघ दी... और.... और...आवेश में आकर..और बदले की भावना में भरकर....मैने भी अपने जीजा से संबंध बना लिए....''

अजय का सिर चकरा गया ये सुनकर....

पर बात सिर्फ़ इतनी ही नही थी..

वो आगे बोली : "और...उस अफेयर का परीणाम ये हुआ की मैं एक बार फिर से प्रेगनेंट हुई... और पूजा पैदा हुई...''

ओ तेरी ....

यानी अपने पति से बदला लेने के चक्कर में अजय की सासू माँ अपने जीजा से जा चुदी...

रजनी : "उन्ही दिनों मेरी बहन भी प्रेग्नेंट थी, पूजा के जन्म के 2 महीने बाद ही उसने रिया को जन्म दिया, और मैं अच्छी तरह से जानती थी की वो असल में किसकी औलाद है"

यानी...

वो रिया...

मौसा जी की नही , बल्कि उसके ससुर की नाजायज़ औलाद थी..

अपनी साली को चोदकर पैदा की थी उन्होने वो रिया.

दोनो मर्दों ने अपनी-2 सालियों के थ्रू एक-2 लड़की पैदा की..

अजय : "पर...ये सब जानने के बाद भी आपके पति आपसे इतना डरकर क्यों रहते हैं... जो ग़लती उन्होंने की थी,वही आपने भी तो की, फिर फ़र्क क्या रह गया दोनो के बीच...''

रजनी : "फ़र्क है.... और वो ये की मैं तो उस राज को जानती हूँ , पर मेरे पति नही... उन्हे आज तक नही पता की पूजा उनकी बेटी नही है.... और रिया उनकी बेटी है, इस बात को लेकर मैं उन्हे अक्सर खरी खोटी सुनाती रहती हूँ , और अपने मामलो से दूर रहने की सलाह देती हूँ .... इसलिए वो डरते हैं... उन्हे ये तो पता है की मेरे कई लोगो से संबंध है, पर पूजा वाली बात उन्हे नही पता.... वो पता चल गयी तो ये डर उनके मन से हमेशा के लिए निकल जाएगा...

अजय समझ गया की इस खानदान में तो बहुत लोचे हैं,

अजय : "तो इसका मतलब, आपके मौसा जी के अलावा भी कई लोगो के साथ संबंध हैं ....''

रजनी : "हैं नही थे, पिछले २ सालों में सिर्फ तुम्हारे साथ ऐसा हुआ है, और उससे पहले का जानकर तुम्हे कुछ नहीं मिलेगा... सालों पहले जब मुझे अपने पति की बेवफ़ाई के बारे में पता चला तो एक पल तो मैने यही सोचा की उन्हे छोड़कर कहीं और चली जाऊ , पर ऐसा करके तो मैं उन्हे खुल्ले सांड की तरह नहीं छोड़ना चाहती थी... और मुझे अपनी बहन का भी पता था, भले ही मैं अपने पति को छोड़ देती, पर नीलम इन्हे कभी ना छोड़ती, मेरे बाद तो वो इनसे और भी ज़्यादा घुल मिल जाती और हो सकता है की अपना घर-बार छोड़कर इनके पास ही आ जाती... इसलिए मैने रुकने का फेसला किया और हर तरह से अपनी लाइफ को भी एंजाय करने का... शुरू-2 में तो उन्हे बहुत बुरा लगता था, पर मेरे धमकाने पर और समाज में अपनी इज़्ज़त बनाए रखने के डर से ये कुछ नही बोलते .... उस दिन जब इन्होने मुझे और तुम्हे रंगे हाथो पकड़ा था, उससे 2 दिन पहले वो मुझसे पूछ भी रहे थे की मैने तुम्हे भी अपने जाल मे फँसा लिया है क्या ?... तब भी मैने उन्हे खूब खरी खोटी सुनाई थी और ये कहा था की मैं अगर ऐसी बनी हूँ तो सिर्फ़ आपकी वजह से,उन्होंने अपने उपर अगर कंट्रोल किया होता तो शायद आज ये दिन ना देखना पड़ता... और जब उस दिन तुम घर आए तो कमरे रहा है , उनसे शायद बर्दाश्त नही हुआ की उनका दामाद भी इस दलदल में उतर रहा है ...वो सामने तो आ गये पर मेरा गुस्सा देखकर एक बार फिर से दबकर रह गये...''

इतना कहकर वो चुप हो गयी...

अजय को इस वक़्त अपनी सास पर बहुत तरस आ रहा था...और उसकी चालाकी पर हंसी भी ।

वैसे तो वो जानना चाहता था की उसके और मौसा जी के अलावा उन्होने और भी लोगों से चुदवाया है

पर वो उस बात को गोल कर गयी थी...

शायद इस वक़्त वो कुछ ज़्यादा बताना नही चाहती थी...

अजय ने भी ज़्यादा पूछना ज़रूरी नही समझा

क्योंकि जो बात उसे जाननी थी वो उसे पता चल ही चुकी थी.

अजय को चुप देखकर रजनी बोली : "अब ज़्यादा ना सोचो इन सब बातों के बारे में .. और एंजाय करो...''

अजय की नज़रें जब अपनी सास की तरफ उठी तो वो दंग रह गया...

उन्होने अपने गाउन की गले वाली चैन खोल दी थी...

और उसमे से झाँकति हुई उनकी मोटी-2 छातियाँ उसे सॉफ नज़र आ रही थी.

इतना सब होने के बाद भी अजय की सास के सिर से सैक्स का भूत नही उतरा था....

उसकी क्लीवेज बहुत सेक्सी लग रही थी

और बोली : "चलो ना, दूसरे बेडरूम में चलते हैं....यहाँ कितनी गर्मी है...''

अब वो एक बार फिर से अपने सैक्सी रूप में आ चुकी थी....

अजय भी उसके मुम्मों को देखकर दीवाना सा होकर उसके पीछे चल दिया..

और वो अपनी मोटी गांड मटकाती हुई बेडरूम में घुस गयी.

अजय ने एक बार वापिस जाकर प्राची को चैक किया, वो आराम से गहरी नींद में सो रही थी...

वापिस आकर वो दूसरे बेडरूम में घुस गया, जहाँ प्राची की माँ यानी उसकी सास अपना रसीला बदन लिए उसकी सेवा करने के लिए तैयार थी..

अजय के गले से अभी तक अपनी ससुराल वालो की लाइफ का काला सच नीचे नही उतर रहा था...

उसके ससुर ने अपनी साली की चुदाई करके उसे माँ बना दिया

और उसकी सास ने बदले की भावना में भरकर अपने जीजा से चुदाई करवाई और उसके बच्चे की माँ बन गयी..

दोनो तरफ एक से बढ़कर एक कमीने थे...

अजय सोचने लगा की देखा जाए तो उससे बड़ा कमीना तो और कोई है ही नही

क्योंकि

उसने ना तो अपनी मौसेरी सास को छोड़ा,जिसकी चूत मारकर उसके ससुर ने रिया जैसा माल पैदा किया..

और ना ही अपनी सास और उसकी बेटी पूजा को... इस खानदान की सारी औरतों और लड़कियों को उसने चोद डाला था... सिर्फ रिया ही तो बची थी, और वो भी चुदने को लगभग तैयार थी.

अपने कमीनेपन पर उसे खुद ही हँसी आ गयी..और ना चाहते हुए भी उसे अपने लंड पर गुमान हो गया, जिसकी चाहत ने उसके आस पास की सभी चुतो को गीला करके चुदने पर मजबूर कर दिया था..

पर इसमें उसकी ठरक के साथ-2 उसके ससुराल वालों की चुदासी की भावना भी शामिल थी, वरना वो तो अपनी बीबी की चूत मारकर ही खुश था..ताली एक हाथ से तो नही बजती ना..

ये सोचकर उसने अपने दिमाग़ से उन सारी बातों को निकाल कर फेंक दिया जिसकी वजह से उसे अपने कमीनेपन का एहसास हो रहा था...

और चल पड़ा एक और जबरदस्त चुदाई के लिए...

अपनी प्यार सासू माँ की..

जो अपने कपड़े उतारकर उसका लंबा लंड लेने के लिए तैयार हो चुकी थी..

और एक बार जब अजय को नंगा बदन दिख जाता है तो उसके दिमाग़ में जो भी चल रहा होता है वो अपने आप ही बंद सा हो जाता है... क्योंकि उसके बाद तो सिर्फ लंड का दिमाग़ ही काम करता है...

 
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अब आगे

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उसके लंड ने काम करना शुरू कर दिया था....

पूरा खड़ा होकर उसने शॉर्ट्स में टेंट बना लिया था...

उसकी सास अपनी कमर लचकाती हुई उसके करीब आई और बड़े ही प्यार से उसके गले में बाहें डालकर उसके गले से लग गयी... अपनी सास का नंगा बदन अपनी बाहों में भींचकर अजय ने एक सिसकारी मारी..

रजनी ने उसके कान में धीरे से एक गान गाया : ''आजा तुझे जन्नत दिखाउंगी ...''

और इतना कहते हुए वो उसके उसी कान को पूरा का पूरा अपने मुँह में निगल गयी..और धीरे-२ अपना गीला मुंह नीचे करके उसकी गर्दन भी चूस डाली

अजय सिसक उठा...

रजनी ने अपना हाथ उसके शॉर्ट्स में डालकर उसके शेर को दबोच लिया...

और एक बार फिर से फुसफुसाई : "बड़ा उछल रहा है ये तो... आज इसकी 'अच्छे' से खबर लेती हूँ ...''

वो अपना लाड उसके लंड पर लुटा रही थी... जैसा एक माँ करती है, फ़र्क इतना था की ये उसकी सासू माँ थी और जिसपर वो लाड लुटाने को तैयार थी वो उसका लंड था..

अपने एक हाथ में उसके लंड को पकड़कर उसने दबाए रखा और दूसरे हाथ से शॉर्ट्स को नीचे खिसकाते हुए वो भी नीचे बैठ गयी...

अब उसके भूखे चेहरे के सामने था अजय का मोटा लंड ....

एक पल के लिए तो वो उसे देखती रह गयी और फिर उसके लंड को अपने चेहरे पर हर जगह लगाया

उसके लंड को पकड़ कर अपनी आँखो पर सुरमे की तरह पिरोया ...

अपने होंठों पर लिपस्टिक की तरहा रगड़ा...

और गालों पर किसी पाउडर की तरह घिस दिया....

और फिर अपने होंठों को गोल करके अपने दाँतों में फँसाया और उसे निगल लिया...

अजय तो चिंचिया उठा उसके इस प्रहार से....

उसने अपनी सास के बालों को ज़ोर से पकड़ कर पीछे खींचना चाहा पर वो उसके लंड पर किसी जोंक की तरह चिपकी रही...

हालाँकि उसने दांतो की पकड़ थोड़ी कम कर दी थी पर फिर भी अजय उसके मुँह में अपने लंड को रखे रहने से अब घबरा सा रहा था...

उसने उसके बालों को दोनो हाथों से मसलते हुए धीरे-2 उसके मुँह को अपने लंड पर मारना शुरू किया.... अब उसे भी मज़ा आ रहा था और अजय के लंड से निकल रहे प्रीकम को महसूस करके रजनी को भी...

वो काफ़ी देर तक उसके लंड को चूसती रही....

बाहर निकालती....

उसे देखती और उसे पप्पी करके फिर से निगल जाती....

फिर निकालती और फिर उसके टट्टों को मुँह में लेकर उन्हे चुभलाती....

उसके लंड को और उसके आस पास के पाँच इंच के रेडियस में जो कुछ भी था, हर चीज़ को उसने चूस डाला .... अपनी गर्म जीभ से धो डाला...

अब अजय के लंड का पारा बहुत उपर तक जा चुका था...

इतना उपर की वो चाहकर भी अपने माल को निकलने से नही रोक पाया और उसने बड़ी ही बेदर्दी से अपनी सास के जुंडे पकड़कर अपने लंड का पानी उसके मुँह में निकाल दिया..

रजनी को तो जैसे मन चाही मुराद मिल गयी...

हर सास की किस्मत में उसके दामाद के लंड का पानी कहाँ लिखा होता है...

रजनी की किस्मत में था...

और उसे महसूस करके वो अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर उसे पीती चली गयी....

अजय ने लंड को बाहर निकाल कर बचे हुए सफेद पेंट से उसका चेहरा रंग दिया....

भले ही झड़ा अजय था, पर संतुष्टि के भाव रजनी के चेहरे पर ज़्यादा थे..

बिना झड़े ही उसे एक अजीब सा एहसास अंदर तक मिल चुका था, अपने दामाद के गरमा गरम वीर्य की ठंडक ने उसके शरीर के तापमान को काफ़ी हद तक गिरा दिया था...

वो अपने चेहरे से सारी मलाई समेट कर निगल गयी और पास पड़े टॉवल से चेहरे को सॉफ करके बिस्तर पर जाकर लेट गयी... और उसने अपनी टांगे दोनो दिशाओं में फेला डाली...

अजय उसकी फेली हुई चूत देखता हुआ उसकी तरफ बढ़ने लगा.. इसी चूत से निकली प्राची को उसने ना जाने कितनी बार चोदा था... आज उसे इतने गोर से देखकर उससे सब्र नही हुआ और वो अपनी जीभ लपलपता हुआ उसकी टाँगो के बीच लेट गया और उसकी चूत के रस का प्याला एक ही बार में पी डाला..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स अहह अजय.................. मेरा बच्चा ........ अआहह.. ..... ज़ोर से ...... चूसो...... अहह''

इस उम्र की औरतों में चूत चुसवाने की चाह कितनी बलवंत होती है,ये आज अजय को पता चल रहा था....

रजनी ने उसके सिर को अपनी टाँगो के बीच भींच सा लिया, की कहीं वो निकल कर भाग ना जाए...

और उसके बालों को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ खींचे जा रही थी....

उसकी जीभ जब -2 उसकी क्लिट से टकराती वो अपनी गांड हवा में उभार कर अपनी खुशी प्रकट करती....

अजय भी उसके मटर दाने को चुभलाता हुआ , अंदर से निकल रहा फ्रेश लाइम जूस पीने में लगा था....

आज जैसा स्वाद उसे पहले कभी नही आया था.... शायद आज उसकी सास ज़रूरत से ज़्यादा उत्तेजित थी..

इसलिए अजय पूरी लगान से सासू माँ की सेवा कर रहा था...

रजनी ने अजय को बेड पर खींच लिया और उसे चित्त लिटा कर उसके मुँह पर सवार हो गयी....

ये पोज़िशन अजय को हमेशा से पसंद थी... इस आसन में उपर से जब रसीली चूत का दबाव पूरे शरीर के भार के साथ मुँह पर पड़ता है तो उसे चूसने में बड़ा मज़ा आता है...

और साथ ही नर्म मुलायम गांड को भी मसलने का मौका मिल जाता है..

अजय उनकी चूत चूस्कर अंदर से शहद निकालने में जुट गया.

और जल्द ही अपनी खुली चूत को उसके चेहरे पर रगड़ती हुई रजनी ओर्गास्म के करीब पहुँच गयी...

वो अपनी चूत की दरारों के नीचे अजय के होंठों को, उसकी ठुड्डी को रगड़ रही थी... यहाँ तक की उसकी नाक को भी रगड़ती हुई उसने अपनी चूत के अंदर भींच डाला था....

और अंदरूनी दाने को मिल रही रगड़ को महसूस करके उसके अंदर उत्तेजना का भयंकर संचार होता चला गया जो एक ज्वालामुखी के रूप में उसकी चूत फाड़कर बाहर निकल आया...

और अजय के चेहरे को पूरा भिगो दिया..

''आआआआआआआआआआआआआआहह अजय ......................... माय गॉड ...... मैं तो गयी रे...... अजय.... मैं तो गयी.....''

इतना कहकर वो आगे की तरफ लुडक गयी....

अजय की जीभ पक्क की आवाज़ के साथ उसकी चूत से निकल गयी....

और रजनी आधी बेहोशी वाली हालत में गहरी साँसे लेने लगी..

पर अब अजय का लंड एक बार फिर से खड़ा हो चुका था...

उसने बिना कोई देरी किए अपनी सास को घोड़ी बनाया और अपने लंड को ताज़ा झड़ी चूत के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का मारकर अंदर घुस गया..

बेचारी कराह भी नही पाई क्योंकि उसकी चूत तो सुन्न सी हुई पड़ी थी....

पर कुछ देर बाद जब उसकी चूत में हल्का-2 सेंसेशन आना शुरू हुआ तो उसे होश सा आया...

और अपने प्यारे दामाद को अपने उपर चड़ा हुआ देखकर वो अपनी छातियाँ खुद ही दबाने लगी...

''आआआआहह ..अजय..... येस्स..... .ज़ोर से..... चोदो अजय..... अपनी सास की चूत को आज फाड़ कर रख दो.... अहह और ज़ोर से अजय..... आज अपना ये मूसल लंड अंदर तक ठोंक दो.... फाड़ डालो मेरी चूत को ..... अपनी सास को चोदो अजय... अपनी सास को चोदो .... अहह.... सस्सस्स्स्स्स्स ....... सस्स..... ऐसे ही. ...... अहह..... ''

वो बुदबुदाती जा रही थी और अजय पागलों की तरह उसकी चूत चोदने में लगा रहा....

और अंत में दोनो के बदन ऐसे ऐंठने लगे जैसे कोई बुरी आत्मा ने कब्जा कर लिया हो....

और वो ऐंठन तब निकली जब अजय के लंड का पानी उसकी सास की चूत में पूरा भर गया...

और वो उनके बदन पर ओंधे लेटकर गहरी साँसे लेने लगा..

और रजनी उसके बालों को सहलाती हुई बड़े ही प्यार से उसके चेहरे को चूमती रही..

थोड़ी देर बाद रजनी बोली : "अजय....एक बात बोलूं ... मना तो नही करोगे ना...''

अजय : "हम्म्म .......''

रजनी : "तुम नेक्स्ट वीक मुंबई जा रहे हो ना.......''

अजय : "हाँ ....''

रजनी : "तो...क्या तुम......तुम.....रिया को साथ ले जाओगे....प्लीस...''

अजय तो एकदम उठकर बैठ गया ये सुनकर... रिया उसकी बहन की बेटी थी, पर एक तरह से देखा जाए तो उसके पति की ही बेटी थी वो भी.... इसलिए शायद उसके साथ रजनी को शुरू से ही प्यार था..

और पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी घर में चल रहा था, वो सब चोरी छुपे था... पूजा और रिया का जब अपनी मॉम के सामने पर्दाफाश हुआ था , तबसे तीनो के बीच जो तालमेट अजय को देखने को मिल रहा था, वो उनके आपसी प्रेम को ही दर्शा रहा था...

ना तो रजनी ने अपनी बेटी पूजा को अजय से चुदने के लिए मना किया और ना ही पूजा ने अपनी माँ के बारे में कुछ ऑब्जेक्ट किया...

रिया को अभी तक चुदाई का मौका नही मिल पाया था पर वो भी अपनी तरफ से जितना हो सकता था अपनी कजिन और मौसी की चुदाई में पूरा साथ दे रही थी...

और शायद इसलिए रजनी चाहती थी की उसका भी नंबर लग जाए ताकि इतने दिनों से जो सुख वो नहीं ले पा रही है वो उसे मिल जाए ...

पर एक और भी कारण था इसका, जो रजनी ने खुद बताया

वो बोली : "मैं जानती हूँ की अपने घर की बेटी के बारे में ऐसा बोलना सही नही है.... पर मैने जो महसूस किया है और देखा है, उसके बाद मुझे लगता है की रिया के पहली बार के लिए तुम एकदम पर्फेक्ट रहोगे...

अजय समझ गया की अपनी पहली चुदाई का किस्सा पूजा ने भी जरूर अपनी माँ को सुनाया होगा

अजय ने मन में सोचा 'वो तो सासू माँ अगर तुम ना भी बोलती तो मैं उसे चोदने ही वाला था...'

पर एक बार परमिशन के साथ चुदाई करने को मिल जाए तो उसका मज़ा ही दुगना हो जाता है....

अब बात ही ऐसी थी की मना करने का सवाल ही नही उठता था.... उसने फ़ौरन हाँ कर दी.... वो क्या बोलकर अजय के साथ मुंबई जाएगी...ये उनकी सिरदर्दी थी...

उन्हे वहीं लेटा हुआ छोड़कर अजय वापिस अपने बेडरूम में आकर सो गया..

अब तो उसके मन में बस आने वाले हफ्ते में अपनी कुँवारी साली को जी भरकर चोदने के प्लान बनने शुरू हो चुके थे.

अगले दिन प्राची का रुटीन चेकप था...

अजय खुद उसे लेकर डॉक्टर के पास गया.... सब ठीक था...

सिर्फ़ एक महीना और बचा था डेलिवरी के लिए... कुछ ज़रूरी हिदायतें देकर डॉक्टर ने उन्हे वापिस भेज दिया.

वैसे तो प्राची का कल से ही चुदाई का मन कर रहा था, पर ऐसे में अजय ने चुदाई ना ही करना सही समझा... वो लास्ट टाइम में आकर कोई कॉम्पलीकेशन नही चाहता था...

इसी बीच अजय की सासू माँ ने रिया के साथ मिलकर एक प्लान बना लिया... ताकि उसे अजय के साथ भेजा जा सके..

उनके कहे अनुसार रिया ने घर पर ये कहा की कॉलेज की तरफ से उन्हे 4 दिन के लिए मंसूरी जाना है... अजय की सासू माँ तो पहले से ही उसके साथ मिली हुई थी... पूजा भी मिल गयी और उसे जाने के लिए एनकरेज करने लगी... हालाँकि 4 दीनो के लिए अपनी जवान बहन को इस तरह से बाहर भेजने पर प्राची ने कुछ आपत्ति उठाई थी, पर अजय के समझाने पर वो भी चुप हो गयी... रजनी ने अपनी बहन से बात करके उससे भी परमिशन ले ली... कुल मिलाकर रिया का प्रोग्राम पूरी तरह से सेट हो चुका था...

रिया के अनुसार उसे कॉलेज से ही बस के द्वारा मंसूरी निकलना था, जबकि असल बात ये थी की वो अजय से पहले एयरपोर्ट पहुँचकर उसका इंतजार करेगी , वो ये सब इसलिए कर रहे थे की किसी के मन में 1 पेर्सेंट भी शक की गुंजाइश ना रहे... क्योंकि दोनो ही 4 दीनो के लिए जा रहे थे.

रिया सुबह तैयार होकर कॉलेज निकल गयी...

अजय भी अपना बेग पेक करके तैयार हो गया...जाने से पहले वो प्राची के पास आया...अजय की सास किचन में कुछ काम कर रही थी..

वो सेंटी हो रही थी... वैसे ही लास्ट मंथ चल रहा था...ऐसे में उसे अजय का दूर जाना शायद थोड़ा उदास कर रहा था..उसकी आँखो में आँसू थे.

अजय : "ओले...मेरा बैबी उदास हो रहा है....बट मैं जल्दी आ जाऊंगा ..और डेली 3-4 बार कॉल भी करूँगा...ऑफीस का काम है,वरना तुम भी जानती हो की ऐसी हालत में तुम्हे छोड़कर जाने का मेरा भी मन नही है...''

प्राची उसके गले लग गयी...और बोली : "जानती हूँ अजय.... पर तुम इतने दिनों के लिए तुम जा रहे हो और वो भी इस समय,इसलिए थोड़ा अजीब लग रहा है....वरना यहाँ तो सब है मेरा ध्यान रखने के लिए...''

उसके बदन को भींचकर वो उसकी कमर सहलाने लगा...उसने ब्रा नही पहनी हुई थी...वैसे भी आजकल उसके मुम्मे फूले हुए से रहते थे...उसे ब्रा में काफ़ी तकलीफ़ होती थी.

उसे गले लगाते ही उसकी गहरी साँसे और तेज हो गयी...

अजय को पता था की कल से उसकी चूत में खुजली हो रही है,पर वो खुद ही उसे अवॉयड कर रहा था... पर कम से कम उसे किस्स तो कर ही सकता था...

उसने धीरे से उसका चेहरा आगे किया और उसे चूम लिया...

प्राची के चेहरे पर शरारत वाली हँसी आ गयी और बोली : "मरवाओगे तुम... मम्मी किचन में ही है.... वो देखेगी तो क्या सोचेगी...''

अजय : "वो यही सोचेगी की उनकी बेटी कितनी खुशनसीब है, उनका दामाद सुबह -2 उसे खुश कर रहा है....''

इतना कहकर उसने अपने होंठ प्राची के होंठों पर रख दिए...

वो तो खुद भी अंदर से कुछ करने को मचल रही थी....ऐसे में किस्स ही उसे बहुत मस्ती का एहसास दे गयी..उसके होंठ नम पड़ गये...और उनमें से मीठा रस निकलने लगा... जिसे अजय बुरी तरह से चूसने लगा..

अजय के हाथ उसके मुम्मों पर चले गये और उन्हे दबा दिया....

आजकल प्राची के बूब्स इतने बड़े और सख़्त हो चुके थे की उन्हे दबाने में अलग ही मज़ा मिलता था...

पर अजय को हमेशा लगता था की वो ज़ोर से दबा देगा तो उनमे से दूध ही ना निकल पड़े...

पर ऐसा कुछ हुआ नही...

पर उन्हे दबाने से प्राची की आग ज़रूर भड़क गयी...

वो अपनी छातियों को अजय के सीने पर रगड़ने लगी...

ठीक वैसे ही जैसे अपने होंठों से वो उसके होंठों को रगड़ रही थी..

अजय मस्ती में भरकर उसे स्मूच कर रहा था की अचानक उसे कमरे के दरवाजे पर अपनी सास दिखाई दी...

जो शायद प्राची का नाश्ता लेकर आई थी...

और उन्हे इस तरह से चूमते देखकर वहीं जड़वत होकर रह गयी....

अपने दामाद और बेटी को इस तरह चूमते देखकर उसकी चूत भी गुनगुना उठी और वो बिना कोई आवाज़ किए उन्हे ऐसा करते देखती रही...

प्राची की पीठ थी उनकी तरफ इसलिए वो बड़े इतमीनान से वो सब देख रही थी.

अजय भी अपनी सास के सामने उनकी बेटी को चूमकर अपने नाम एक नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका था...

ये काम वो ऑलरेडी पूजा और रिया के साथ उनके सामने कर चुका था...

सिर्फ़ प्राची ही बची थी

आज उसे भी उनके सामने स्मूच करके एक तरह से रजनी की सारी बेटियों को उनके सामने चूमने का कीर्तिमान बना लिया था...

अजय ने घड़ी देखी, जाने का वक़्त भी हो रहा था, वरना प्राची तो उसका लंड भी चूसने को तैयार थी इस वक़्त...

वक़्त की कमी और अपने लंड का माल रिया के लिए बचाने का लालच था अजय को ...

इसलिए उसने किस्स तोड़ दी....

और बड़े ही प्यार से बोला : "जान.... फ़िक्र ना करो... ये जुदाई के पल जल्द ख़त्म होंगे... वापिस आकर ये अधूरा काम पूरा करूँगा... लव यू ....''

इतना कहकर उसने अपना बेग उठा लिया.... प्राची ने भी मौके की नज़ाकत को समझा और हंसकर उसने अजय को एक और किस्स करके जाने की इजाज़त दे दी... तब तक रजनी वापिस जाकर एक बार फिर से कमरे में दाखिल हुई और अजय ने उन्हे और प्राची को सारी हिदायते दी और बाहर निकल आया...

नीचे टैक्सी उसका वेट कर रही थी.....

पूजा ने भी बाहर निकल कर अपने जीजू को बाइ कहा और रिया को आराम से चोदने की हिदायत दी...

अजय ने हंसते-2 घर से विदा ली और सीधा एयरपोर्ट पहुँच गया...

जहाँ पहले से ही रिया उसका वेट कर रही थी...

अजय जब उसे लेकर प्लान की तरफ जा रहा था तो ऐसा एहसास हो रहा था जैसे वो एक बार फिर से अपने हनिमून पर जा रहा है....

वैसे था तो वो एक हनिमून ही....

कम से कम रिया के लिए तो था...

क्योंकि वहाँ जाकर उसकी पहली बार चुदाई होने वाली थी...

जिसके लिए हर लड़की कितने सपने देखती है...

उसे तो विश्वास ही नही हो रहा था की जिस चुदाई के लिए वो इतने दिनों से अपने जीजू के पीछे पड़ी थी,वो आख़िरकार होने जा रही है...और वो भी मुंबई जैसे सपनों के शहर में .

और वो भी पूरे 4 दिनों के लिए....

जहाँ उन्हे रोकने टोकने वाला कोई नही होगा...

वो हर तरह से कुछ भी कर सकेंगे..

ऐसी आज़ादी अपने जीजू के साथ शायद ही उसे दोबारा मिलेगी...

इसलिए वो इस टाइम को पूरी तरह से एंजाय करना चाहती थी..

और रिया ने इसके लिए सारी तैयारी भी कर ली थी...

अपनी पूरी बॉडी को वॅक्स करवाया था उसने पार्लर जाकर ....

नये-2 कपड़े और अंडरगार्मेंट्स भी लिए थे...

वो अपनी खूबसूरती को पूरा उजागर करके दिखाना चाहती थी अपने प्यारे जीजू को..

और दूसरी तरफ अजय भी अपने आप को खुशकिस्मत समझ रहा था इस घर का दामाद बनने के बाद....

उसकी जैसी किस्मत का शायद ही कोई और दामाद होगा इस दुनिया में जिसे अपनी पत्नी, सास और सालियों से इतना प्यार मिला हो...

और वो भी एक से बढ़कर एक नये तरीकों के साथ...

भले ही वो मुंबई ऑफीस के काम से जा रहा था पर उसे काम से ज़्यादा इस वक़्त अपनी साली को चोदने का ख्याल था.. इसके लिए उसने भी ज़ोर शोर से तैयारी की थी..

उसका बॉस तो वैसे ही इस प्रॉजेक्ट के लिए अजय पर पूरा डिपेंड था, इसलिए उसे बड़िया से बड़िया 5 स्टार होटल में रहने की इजाज़त दे दी... और वहाँ रहकर खुल कर खर्चा करने की भी... आख़िर वो प्रॉजेक्ट करोड़ो का था, इसके लिए कुछ लाख खर्च भी हो जाए तो कोई परेशानी नही थी.

इसलिए अजय ने अपना रूम ताज महल होटल में बुक करवाया... जिसके सामने विशाल समुंदर बहुत ही हसीन लगता था.

प्लेन में बैठकर पूरे रास्ते रिया ने अजय का हाथ पकड़े रखा...

ठीक वैसे ही जैसे एक नव-विवाहित जोड़ा चिपक कर रहता है...

वो करीब 5 बजे होटेल में पहुँच गये...

अजय को अपने क्लाईंट से मिलना था, इसलिए वो रिया को होटल रूम में छोड़कर वहीं चला गया...

और आते-2 उसे 9 बज गये.

भले ही वो बेहद थका हुआ था, पर रिया से मिलने की चाहत ने उसकी सारी थकान दूर कर दी थी..

पर उसे क्या पता था की रिया ने होटेल रूम में उसकी थकान मिटाने का क्या-2 इंतज़ाम कर रखा है..

आज की रात दोनो के लिए एक यादगार रात होने वाली थी.
 
59

**********

अब आगे

*********

होटल पहुँचकर उसने नीचे से ही फोन करके बता दिया की वो आ चुका है.

अपने रूम के बाहर पहुँचकर उसने बेल बजाई तो अंदर से रिया की सेक्सी आवाज़ आई : "दरवाजा खुला है जीजू....आ जाओ..''

उसे इस वक़्त उसका "जीजू" इतना सैक्सी लग रहा था की उसके लंड ने अपन अकड़ दिखानी शुरू कर दी.

वो दरवाजा खोल कर अंदर आ गया...

पर ये क्या...

कमरे में तो अंधेरा था...

सिर्फ़ बाथरूम से हल्की रोशनी निकल कर बाहर आ रही थी...जहां अजय खड़ा था..

अंदर से फिर आवाज़ आई : "जीजू....आप अपने कपड़े वहीं उतार कर बाथरूम में जाओ...और नहाने के बाद सिर्फ़ टावल में ही बाहर आना...''

अजय को थोड़ा अजीब लगा रिया का ये रवैय्या..

उसकी आवाज़ में थोड़ा कड़कपन सा था...जैसे कोई हुक्म सुना रही हो.

वो तो ऐसे डोमिनेटिंग नेचर वाली थी ही नही, फिर क्यों वो उसपर हुक्म चला रही है...

पर फिर भी उसे उसका ये अंदाज पसंद आया...

उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए...

कमरा ए सी की वजह से बिल्कुल ठंडा हुआ पड़ा था...

जैसे-2 वो कपड़े उतार रहा था, उसके रोँये खड़े हो रहे थे...

लंड तो पहले से ही खड़ा था.

वो बोला : "तुम भी आओ ना....एक साथ नहाएँगे...''

उसकी खिलखिलती हुई सी आवाज़ आई : "अभी नही ना जीजू.... बाद में .. अभी आप जल्दी से नहाकर वापिस आओ...''

अजय भी अपना प्रोग्राम शुरू करने के लिए मरे जा रहा था...

वो अपना खड़ा हुआ लंड अपने हाथ से मसलता हुआ बाथरूम में घुस गया...

शावर चला कर उसने अपने पूरे शरीर पर शावर जैल लगाया और उसका पूरा शरीर खुश्बू से नहा उठा...और फिर वो जल्दी से टावल लपेट कर बाहर आ गया.

धीरे-2 चलता हुआ वो आगे गया. उसके पूरे शरीर में रोमांच सा भरा हुआ था..

और तभी रिया ने लाइट जला दी...

पूरा कमरा रोशनी से नहा उठा..

और तब उसे सामने खड़ी हुई रिया दिखाई दी...

और वो भी एकदम नंगी.

अपने नंगे शरीर की नुमाइश करते हुए उसे ज़रा भी शर्म नही आ रही थी... और आए भी क्यों, वो यहां शरमाने के लिए थोड़े ही आई थी...

बड़ी ही अदा से वो अपनी कमर को मटका कर अपना छरहरा नंगा बदन अपने प्यारे जीजू को दिखा रही थी

उसके नंगे बदन को उपर से नीचे तक निहारने के बाद अजय से कंट्रोल करना मुश्किल हो गया और उसने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया...

भले ही कमरा पूरा ठंडा था

पर रिया का बदन बहुत गर्म था....

ऐसा मखमली एहसास उसे आज तक कभी नही मिला था...

अपनी नंगी साली को अपनी बाहों में भरकर उसने उसे अपने सीने से रगड़ डाला..

नरम मुलायम छातियों को अपने शरीर से रगड़ने का एहसास अलग ही होता है , उसका कोई मुकाबला नही.

''आआआआआआआआआआआआआअहह ओह जीजू....... आई लव यू .....''

इतना कहते हुए रिया ने अपने प्यारे जीजू के होंठों पर अपने होंठ रखे और उन्हे चूसने लगी...

चूसने क्या लगी तो वो टूट ही पड़ी उनपर...

ऐसे पागलपन से वो अजय के होंठों को चूस रही थी जैसे वो उन्हे कच्चा ही चबा जाएगी...

उसके अंदर की आग ने ही उसके शरीर को इतना गर्म कर दिया था की वो हुंकारे मार-मारकर और हुमच-2 कर अपना शरीर और नन्हे मुम्मे अजय के सीने से घिस रही थी और उसे चूम रही थी.

अजय को कुछ करने की ज़रूरत ही महसूस नही हुई...

वो आराम से खड़ा हुआ रिया से अपने होंठ नुचवाता रहा...

रिया का हाथ नीचे गया और उसने टावाल के उपर से ही अजय के लॅंड को पकड़ लिया...

''ओह जीजू..... उम्म्म्मममममममममममम....... .कितना लंबा लग रहा है ये तो......''

अजय भी उसके कानो को मुँह में लेकर चुभलाता हुआ बोला : "अभी तो ये तेरी चूत में जाएगा मेरी जान.... तब पता चलेगा की ये कितना लंबा है....''

ये सुनकर तो वो बावरी सी हो गयी...

और अजय के गाल और गर्दन पर काटने लगी...

जैसे पागल बिल्ली हो.

और अजय को बेड की तरफ धक्का देते हुए बोली : "पहले तो इसे मैं अपने मुँह में लूँगी.... बाद मे डालना इसे जहां मर्ज़ी हो आपकी.....''

वैसे अजय भी यही चाहता था....

रिया ने उसका टावल निकाल कर फेंक दिया और अब वो भी रिया की तरह पूरा नंगा उसके सामने था.

रिया के तो मुँह में पानी आ गया अजय का लंड देखकर...

उसने उसे अपनी जीभ से चाट लिया

हालाँकि वो पहले भी उसका स्वाद चख चुकी थी, पर उसे एक बार फिर से मुँह मे लेने की ललक उसे पागल सा किए जा रही थी...

उसने अपनी जीभ के कोने से उसने लंड के छेद को छुआ

''आआआआआआआआआआआआआहह रिया........ मेरी ज़ाआाआआआअंन्न''

वो फुसफुसाई : "आप जब मुझे जान बोलते हो ना तो मुझे बहुत अच्छा लगता है....''

अजय ने उसके गालों को सहलाया और बोला : "जान तो तू है ही मेरी.... मेरी सबसे प्यारी साली है तू..... और मुझे जान से प्यारी भी है तू...''

बस फिर क्या था.... रिया की गाड़ी के लिए इतना पेट्रोल बहुत था आज की रात पूरी तरह से अपने जीजू की बन जाने के लिए...

उसने अपना मुँह खोला और अजय के लंड को अपने मुँह के हाइवे पर रखकर दौड़ा दिया...

रिया की गर्म जीभ, पैने दाँत, गर्म साँसे और नर्म होंठों ने उसके लंड को किसी राजा की तरह ट्रीट करना शुरू कर दिया...

और वो अजय के लंड को उपर से नीचे तक चूसने लगी....

कभी उसके टोपे को मुँह में लेकर चुभलाती

तो कभी उसकी बॉल्स को...

ऐसा करते-2 उसने अपनी थूक से उस लौड़े को उपर से नीचे तक नहला डाला..

उसके चूसने की पावर ही इतनी तेज थी की अजय से कंट्रोल करना मुश्किल हो गया...

वो बोला : "रियाssssssss आआआआअ........ मेरा निकलने वाला है..... आई एम कमिंग.......''

उसका इतना कहना था की रिया ने अपना मुँह पूरा खोलकर उसके सामने थाली की तरह सज़ा दिया और बोली : "यसस्स जीजू..... म्म्म्म्म्म ..... कम ओंन माय फेस....... आई लव टू ड्रिंक योर कम''

रिया ये बात पहले भी उसे बता चुकी थी की उसे अजय के वीर्य का स्वाद बहुत पसंद है....

इसलिए आज भी वो अपनी प्यास उससे बुझा लेना चाहती थी.

अजय ने भी बिना देरी किए अपने लंड की पिचकारियों से उसे नहलाना शुरू कर दिया...

एक के बाद एक कई सफेद लकीरों ने रिया के चेहरे पर उसकी होने वाली चुदाई की भविष्यवाणी लिखनी शुरू कर दी...

रिया ने वो सारा माल अपनी उंगलियों से इकट्ठा किया और उसे अपने मुँह में लेकर निगल गयी....

बाद मे उसने अपना खाली मुँह दिखाकर अजय को बताया भी की वो सारा माल खा गयी है.

अजय मुस्कुरा दिया.

अब अजय को उसकी चूत चूसकर उसे चुदाई के लिए तैयार करना था..

और इसके लिए उसने रिया को बेड पर पटक दिया..

अब उसकी कुंवारी चूत उसके सामने थी...

जो उपरवाले की कारीगरी का उत्कर्ष नमूना थी

अजय ने अपने अंगूठे से उसकी चूत की परतों को फेला कर अंदर का रंगीन नज़ारा देखा..

उसे संकरी चूत में उसका मटर दाना नज़र आ गया....

दाना क्या नज़र आया उसे अपना लक्ष्य नज़र आ गया..

अजय ने उसकी टांगे फेला दी और उनके बीच अपना मुँह घुसेड़ दिया..

नरम चूत पर अपने जीजू के गर्म होंठों के एहसास से रिया सिसक उठी

''आआआआआआआआआआआआहह जीजू........... मेरी ज़ाआाआआनssssss ''

वो भी अपने जीजू को 'जान' कहकर उन्हे अपने प्यार का सबूत दे रही थी..

अजय ने रिया की चूत की परतों को अपनी जीभ से साइड करते हुए उसके दाने पर उसे रगड़ा....

और फिर एक गहरी साँस लेकर अपने होंठों को उसकी चूत के अंदरूनी भाग पर लगा दिया और जोरों से उसे सक्क करने लगा....रिया को तो ऐसा लगा की उसके जीजू उसकी चूत के थ्रू उसकी आत्मा निकाल कर अपने मुँह में खींच रहे हैं...

उसका पूरा शरीर झंझणा उठा....

मचल उठी वो ऐसे

जैसे कोई करंट लगा रहा हो उसकी टाँगो के बीच..

उसने अजय के बालों को पकड़ कर अपनी चूत पर किसी खीरे की तरह घिस डाला...

अजय की जोरदार पकड़ ने उसे ज़्यादा हिलने डुलने का मौका ही नही दिया...

वो बेचारी कसक कर अपनी काँपती टाँगो को अजय के सिर के चारों तरफ लपेटने के अलावा कुछ कर ही नही पाई..अजय उसकी चूत को बड़ी ही बेरहमी से चूस रहा था, जिसमें उसे एक अलग ही आनंद आ रहा था

और सच में

आज जैसी चुसाई उसकी चूत की कभी नही हुई थी....

ना तो अजय ने पहले उसे इस तरह से चूसा था

और ना ही उसकी बहन पूजा ने....

और सबसे बड़ी बात ये थी की आज वो खुलकर अपनी चूत चुस्वाई को एंजाय भी कर रही थी....

और ज़ोर से चीखें भी मार पा रही थी...

जो अपने घर मे रहकर वो आज तक नही कर पाई थी.

''आआआआआआआआआआआअहह जीजू...... सक मी हाआआाआरड् ...... यसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... चूसो मेरी पुस्सी को..... मेरी चूत को....... चाटो इसे अंदर तक..... चाटो मेरी फुददी..... ओह यसस्स... मेरे जीजू..... यस्स....... अहह ज़ोर से सकक् करो ना....... बुझा दो अंदर की ये आग .....उम्म्म्ममममममममम ऑश माय गॉड ...... वॉट ए फीलिंग जीजू...... यू आर सोssssss गुड ...... उम्म्म्ममममम...... आई एम कमिंग जीजू...... आई एम कमिंग......''

और जैसी पिचकारियाँ अजय ने अपने लंड से निकाल कर रिया का चेहरा रंगा था, ठीक वैसे ही रिया ने अपनी चूत के रस से उसके चेहरे को नहला दिया.

हिसाब बराबर.

और रिया की तरह अजय को भी उसकी चूत के रस का स्वाद बहुत पसंद था...

वैसे भी कुँवारी चूत के रस का तो कोई मुकाबला ही नही है...

अपनी जीभ और होंठो से वो उसकी चूत के हर हिस्से पर फिसल रही बूँदों को इकट्ठा करके चाट गया....

रिया ने उसे अपनी टाँगो के बीच से उठा कर उपर खींच लिया और दोनो एक बार फिर से एक गहरी स्मूच में डूब गये..

रिया ने खाने का ऑर्डर पहले से दे रखा था....

उसने फोन करके वो मंगवा लिया...

वेटर के आने से पहले अजय ने कपड़े पहन लिए पर रिया चादर मे नंगी ही घुस गयी, उसने अपना पूरा शरीर ढक लिया, सिर्फ़ गर्दन बाहर निकली रही.....और जब वेटर अंदर खाना रख रहा था तो अजय उसे देखकर मुस्कुरा रहा था... ऐसी शरारत तो प्राची ने भी नही की थी अपने हनिमून में ...

उसके जाने के बाद रिया बाहर निकल आई और नंगी ही खाना खाने में लग गयी.

भूख तो काफ़ी लगी थी उन्हे...

और वैसे भी पूरी रात पड़ी थी उनके पास.

 
60

**********

अब आगे

*********

अजय ने अपने लिए पेग बना लिया...और स्नेक्स आइटम्स के साथ आराम से बैठकर पीने लगा..

दोनो आमने-सामने बैठे थे की तभी अजय का फोन बज उठा..

वो प्राची का फोन था.

अजय ने मोबाइल पर चमकता हुआ प्राची का नाम रिया को दिखाया और मुस्कुराते हुए फोन उठा लिया.

दोनो ने कुछ देर तक इधर-उधर की बाते करते रहे...जैसे खाना खा लिया, तबीयत कैसी है, दवाई ली या नही... .प्राची की माँ उसी के पास थी, उन्होने सब संभाल रखा था.

अजय जैसे ही फोन रखने लगा तो प्राची ने कहा ''रूको, माँ भी तुमसे बात करना चाहती है....शायद मेरी कोई शिकायत लगानी होगी अपने प्यारे दामाद से इन्हे.... ये लो...''

इतना कहकर प्राची ने फोन अपनी माँ रजनी को दे दिया.

अजय समझ गया की वो क्या बात करना चाहती है.

फोन लेकर उन्होने भी कुछ देर इधर -2 उधर की बाते की और फिर बात करती-2 किचन में आ गयी...और फिर असली बात पूछी

रजनी : "क्यो बेटा.... कहाँ तक पहुँचे.... रिया का उद्घाटन कर दिया या नही...''

अजय ने मुस्कुराते हुए रिया को देखा, जो बड़े इत्मीनान से चिकन की टंगड़ी किसी लण्ड की तरह चूस रही थी..

अजय : "बस....वही सब चल रहा है.... ''

रजनी की आवाज़ थोड़ी भारी सी हो गयी....

शायद वो आँखे बंद करके रिया और अजय को चुदाई की कल्पना करके उत्तेजित हो रही थी.

रजनी : "बताओ ना अजय.... क्या -2 हो गया अभी तक...''

अजय समझ चुका था की वो प्राची से दूर आ चुकी है, वरना इतना खुलकर वो नही बोल रही होती...

उसने दारु का सिप लेते - 2 अभी तक की सारी बातें डिटेल में बता दी अपनी सासू माँ को...

और रजनी किचन में खड़ी होकर अपने हाथ को चूत पर ले गयी और बुरी तरह से उसकी घिसाई करते-2 अपने ठरकी दामाद के कारनामे सुनती रही....

और अंत में आकर जब अजय ने कहा की उसने रिया की चूत का सारा रस अपनी जीभ से चाट लिया तो इतना बहुत था रजनी को ओर्गास्म तक पहुंचाने के लिए...

वो किचन में खड़ी-2 ही झड़ गयी..

''ओह अजय.......... ज़ोर से चाटना उसे..... और वापिस आकर मेरी भी....... उम्म्म्ममममम लंड लेना है मुझे तेरा...... आहहssssss .... जल्दी आजा......... तब तक रिया भी तैयार हो जाएगी...... उम्म्म्मम...... पूजा भी तड़प रही है...... मेरी तरह....... सबकी प्यास तूने ही बुझानी है...... अहह.... एक साथ .... तीनो को ...... उम्म्म्मम .... चोदना तू....... माँ बेटियों को....... सभी को..... अहह....... ओह''

रिया खाना खाते हुए देख पा रही थी की अजय किस तरह से अभी तक की सारी जानकारी उसकी मौसी को दे रहा है, उसे भी सुनकर काफ़ी मज़ा आ रहा था...

और अब तो उसे फोन से निकल रही सिसकारियाँ भी सॉफ सुनाई दे रही थी...

वो समझ चुकी थी की उसकी मौसी फोन पर बात करते-2 मुठिया रही है...

अपनी बूढ़ी होती मौसी को ऐसे जवान लड़की की तरह हरकत करते देखकर वो भी मुस्कुरा दी...

उसका ध्यान अजय के लंड की तरफ गया, जो अब धीरे-2 अकड़ चुका था..

और अजय का लंड तो ये सोचकर खड़ा हो रहा था की अब वो एक ही कमरे में अपनी सास और दोनो सालियों को एक साथ चोदेगा.

उस रंगीन नज़ारे की तस्वीर उसकी नज़रों के सामने तैर गयी....

जहाँ उसकी सास और सालियन अपनी गांड फेलाए उसके सामने चुदने को तैयार बैठी थी.

अजय भी कुनमुनाया : "उम्म्म....... सासू माँ ..... आपका ये सपना वापिस आते ही पूरा करूँगा....आई प्रोमिस... अब आप फोन रखो... मुझे बाकी का बचा हुआ काम भी निपटाना है....''

फोन रखते-2 वो बोली : "सुनो अजय....आने से पहले उसकी गांड भी ज़रूर मार लेना.... ऐसी हिरनी की कसी हुई गांड कम ही मिलती है.... यहाँ आकर मरोगे तो उसकी चीखे सुनकर पूरा मोहल्ला आ जाएगा... बाद में वहाँ जैसा मौका मिले या नही....''

वो तो ऐसे कह रही थी जैसे उसकी गांड मरवा कर वो अपने पति से कोई बदला लेना चाहती हो...

पर उनकी इच्छा सुनकर अजय भी हंस दिया...

वैसे भी, रिया की गांड मारना तो उसके चुदाई के मेन्यू में आलरेडी था..

अजय ने फोन रखा और जल्दी-2 खाना निपटाने में लग गया.....

आज उसने मटन की डिश मँगवाई थी, उसे पता था की ताक़त की ज़रूरत पड़ेगी आज की रात...

साथ में वो विस्की के पेग भी ले रहा था....

जल्द ही उन्होने सब निपटा डाला...

अजय एक और पेग बनाने लग गया और रिया बाथरूम में हाथ-मुँह धोने चली गयी...

अजय ने वेटर को कॉल करके प्लेट्स उठाने के लिए कहा.

वेटर के जाने के बाद अजय ने रिया को पुकारा, कुछ देर में वो एक सेक्सी सी बेबी डॉल स्टाइल की नाईट ड्रेस पहन कर बाहर आ गयी...

और उस ड्रेस में वो कमाल की लग रही थी , ऊपर से उसके सेक्सी चेहरे पर आ रहे एक्सप्रेशन ग़ज़ब ढा रहे थे

क्योंकि उसे अच्छी तरह से पता था की अब वो घड़ी आ चुकी है जिसके लिए वो पिछले एक महीने से तड़प रही थी...

वो अपने जीजू के करीब आई और उसने अपनी बाहें अजय के गले में डाल दी

एक भीनी सी मादकता से भरी महक उसके बदन और बालों से आ रही थी...

अजय ने मदहोशी के सागर में डुबकी लगाते हुए उसके बदन को गले से लगा लिया और उसे एक बार फिर से बेतहाशा चूमने लगा..

रिया के हाथ भी हरकत मे आए और उसने अजय की शॉर्ट्स नीचे गिरा दी...

और उसके कदमों में बैठकर उसके लण्ड को मुँह में लेकर आख़िरी जंग के लिए तैयार करने लगी...

साथ ही साथ वो अपनी चूत में उंगली डालकर उसे भी चिकना कर रही थी.

और जल्द ही अजय का लंड स्टील जैसा हो गया...

अब तो वो किसी दीवार में भी छेद कर सकता था.

उसने रिया को उठाया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया...और एक - 2 करके उसके बदन के सारे कपडे उतार दिए , अब वो अजय की आँखों के सामने नंगी थी

रिया ने अपनी टांगे दोनो दिशाओ में फेला कर अजय के सामने अपनी अनचुदी फुददी रख दी.

अजय ने बड़े ही प्यार से उसके मदमस्त बदन को बिस्तर पर मचलते हुए देखा और फिर अपने लंड पर थूक लगाकर वो उसके उपर झुक गया...

लंड को उसकी चूत की फांको में रखकर वो उसकी आँखों में देखता हुआ बोला : "तुम तैयार हो ना रिया...''

रिया ने जवाब में अपनी टाँगो को अजय की गांड के उपर रखकर उसे अपनी तरफ खींचा और बड़े ही सेक्सी अंदाज में बोली : "हाँ मेरी जान.... बिल्कुल तैयार हूँ .....''

और उसके दबाव और अजय के धक्के की वजह से वो लंड उसकी चिकनी चूत में उतरता चला गया....

एक पल के लिए तो वो साँस लेना भी भूल गयी....उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने गर्म भुट्टा उसकी चूत में डाल दिया है....

दर्द तो ज़्यादा नही हुआ पर अजीब सा लगा...

उसे ऐसा लगा जैसे अजय के गर्म भुट्टे ने उसकी चूत में रेंग रही चींटियों को भून कर रख दिया हो, क्योंकि अब उसकी चूत में हो रही सनसनाहट की जगह हल्के दर्द और जलन ने ले ली थी

पर उसे समझ नही आ रहा था की जब इतना दर्द होता है और कुछ महसूस ही नही होता तो लड़कियाँ चुदाई के लिए क्यों मरी जाती है...

पर उसका जवाब भी उसे जल्द ही मिलने वाला था

अजय ने अगले दो झटको में अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया...

उसकी चूत हर बार ककड़ी की तरह चीरती चली जाती और अजय के लंड के लिए और जगह निकालती जाती ...

अब उसे बहुत ज्यादा दर्द महसूस हुआ..

''आआआआआआआआआहह जीजू........ मररर गयी........ आआआआआआहह दर्द हो रा है..... उफफफ्फ़ जीजू..... निकालो इसे.......''

अजय ने अपने लंड और चूत के मिलन स्थान को देखा.... उसका लंड पूरा अंदर घँस चुका था....

अजय ने धीरे-2 उसे निकालना शुरू किया...दोनो की नज़रें उसी पर थी.... अजय का लंड पूरा बाहर निकला और उसके सिरे पर हल्का सा खून लगा दिखाई दिया...

अजय ने उसकी आँखो मे मुस्कुराते हुए देखा और बोला : "मुबारक हो मेरी जान....अब तुम कली से फूल बन चुकी हो....''

वो भी मुस्कुरा दी...

पर अगले ही पल वो मुस्कान फिर से चीख में बदल गयी....

क्योंकि अजय ने अपना लंड एक बार फिर से उसकी चूत में घुसा दिया था..

''आआआआआआआआआआआआआआहह गंदे जीजू........................... उफफफफफफफफफफ्फ़.... निर्दयी कही के...... दर्द हो रहा है...... बोला तो है...... अहह.......... अब ज़्यादा मत हिलाओ..... उम्म्म्मम.... ऐसे ही रहो.... बस...''

पर अजय जानता था की ऐसे मौके पर लड़कियों की ज़्यादा नही सुननी चाहिए , वो एक सेकेंड के लिए रुका और फिर से उसने अपनी कमर मटकानी शुरू कर दी....

अब रिया को पहले जैसा दर्द नही हो रहा था....

बल्कि चूत के अंदर से हल्के-2 सेंसेशन निकलने शुरू हो चुके थे...

और उसने एक बार फिर से उसकी गांड पर पैर रखकर अपने अंदर खींचना शुरू कर दिया..

अजय समझ गया की उसपर चुदासी चढ़ रही है

उसने अपने धक्को की गति और तेज कर दी...

और अब तो सच मे रिया को मज़ा आने लगा था...

जिस चुदाई को कुछ देर पहले तक आम सी बात समझ रही थी, अब उसे पूरा मज़ा मिलने लगा था....

और उसके मुँह से अपने जीजू के लिए फूल बरसने लगे..

''अहह जीजू...... उम्म्म्मममममममम...... अब मज़ा आ रहा है.............. आआआआआअहह बहुत मज़ा ............. इसके लिए तो कब से तड़प रही थी...... उफफफफफफफफफफफफ्फ़... क्या चीज़ है ये लंड भी...... अंदर जाकर तो इसका मज़ा दुगने से भी ज़्यादा हो जाता है...... अहह....... यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स जीजू....... अब करो..... ज़ोर से करो........ चोदो मुझे......... आआआआआआआहह ज़ोर से चोदो अपनी जान को....... अपनी साली को....अपनी आधी घरवाली को ''

अब वो खुल कर चिल्ला भी रही थी और चूत से मिल रहे मज़े को महसूस करके अपने दिल की बातें भी बयान कर रही थी.

आज तक उसने अजय के लंड को सिर्फ़ मुँह में ही लिया था...

उसे उसकी असली जगह पर महसूस करके उसे दिल से खुशी हो रही थी...

अजय ने झुक कर उसके निप्पल को मुँह मे दबोच लिया...

रिया ने भी अपने जीजू को अपना दूध पिलाते हुए उनके लंड को चूत में लेना जारी रखा..

टाइट चूत की एक डिसएडवांटेज भी होती है....

सामने वाला बंदा जल्दी झड़ जाता है....

और यही अजय के साथ भी हुआ...

रिया की चूत की दीवारों ने उसके लंड को इतनी बुरी तरह से जकड़ रखा था की उसकी घिसाई से वो झड़ने के करीब पहुँच गया....

 
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