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Guest
जल्द ही अजय का लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया....अब उसे और उसके लंड को बॉस का डर भी नही था,इसलिए पहले से ज़्यादा कड़क हो चुका था वो...
अंजलि की चूत में तो घमासान मचा हुआ था....अब उसे किसी भी कीमत पर लंड अपनी चूत में चाहिए था...
वो एक बार फिर से उठी और सोफे पर आकर उसने खन्ना को लिटा दिया...और खुद उसके उपर जा चढ़ी ..खन्ना के मोटे लंड को अपनी चूत पर रखकर वो बड़े ही सेक्सी अंदाज में बोली : "अनिल की बीबी हूँ मैं ....अजय के ऑफीस में जो इसका दोस्त है...उसकी बीबी हूँ ...''
वो तो ये सोचकर बोल गयी की भला खन्ना को क्या पता की अनिल कौन है...पर अंजलि के मुँह से अनिल का नाम सुनकर खन्ना तो हैरान रह गया....वो एक शरीफ बंदा था (अनिल कितना बदमाश था ये तो सिर्फ़ अजय ही जानता था) और अनिल जैसे शरीफ एंप्लायी की बीबी ऐसी रंडी हो सकती है,ये उसने सोचा भी नही था...लेकिन जो भी था, वो चूत कमाल की थी....अपने पति के दोस्त से चुदवाने के लिए उसके साथ ऑफिस ही आ गयी...और साथ ही उसके बॉस को भी दोस्त समझ कर उससे भी चुदवाने को तैयार हो गयी....ऐसी जिस्म की आग बहुत कम देखने को मिलती है...
खेर, उसे अब वैसे भी किसी बात से फ़र्क नही पढ़ने वाला था...चाहे ये बाजारू औरत भी होती तो वो उसे चोद ही रहा होता...अब तो ये जानकार की वो उसके एंप्लायी की बीबी है, उसकी ताक़त में दुगना इज़ाफा हो चुका था...और उसने भरभराते हुए उसकी गांड पर उंगलियाँ रखकर उसकी चूत में अपना लंड एक ही बार में पेल दिया...
''आआआआआआआआआआआआआअहह....... उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़.... मजाआा आsssss गयआआआआअ''
इतना मोटा लंड जब चूत में गया तो अंजलि के मुँह से सिर्फ़ यही निकला...
अपना पूरा रॉकेट उसकी चूत में दागने के बाद वो थोड़ा रुका, उपर लटक रहे आमों पर उगे बेर खाए और उन्हे चूसते हुए अपनी पूरी ताक़त से अंजलि की चूत मारने लगा...
और एक बार जब उसने चुदाई की गाड़ी चलानी शुरू की तो बिना रुके वो उसे भगाता ही चला गया....और उसके झटकों को अपने अंदर महसूस करती हुई अंजलि किसी बकरी की तरह मिमियाती रह गयी और अपने मुँह से सिसकारियों की बारिश करती हुई ज़ोर -2 से चिल्लाने भी लगी...
''आआआआआआआआआआअहह ...... भेंन चोद ...................क्या लॅंड है तेरा............. अहह और ज़ोर से चोद भोंसड़ीके................. अहह .... बहन के लंड ....... डाल दे अपना पूरा लौड़ा मेरे अंदर .................अहह.... .''
और अजय को देखकर वो बोली : "ओह अजय ...तू भी आआआआआआआआ........ डाल दे पीछे से मेरे अंदर .................... आज अपना सपना पूरा करना चाहती हूँ .................. अहह जल्दी आ अजय ..... डाल अपना लंड मेरी गाआअंड में ................. ओह अजय...........''
अजय ने भी अपने लंड पर ढेर सारी थूक मली और सोफे पर आकर पीछे से अपना लौड़ा उसकी गांड पर लगा दिया....थोड़ी देर के लिए खन्ना को अपनी चुदाई की रेलगाड़ी रोकनी पड़ी...और जब अजय ने दो चार झटके मारकर उसकी गांड में अपना लॅंड फँसा दिया
धीरे-2 फिर से वो गाड़ी चल दी...इस बार अजय और खन्ना के झटके एक ही लय में आ रहे थे....
अंजलि की गांड और चूत में एक साथ लंड था....ऐसा सपना उसने अपनी जवानी के दिनों से देखा था, पर आज जाकर पूरा हुआ था....और वो भी कहाँ पर, अपनी ही पति के ऑफीस में ...एक पति का दोस्त और दूसरा उनका बॉस,जिसके बारे उसे पता भी नही था..में .लेकिन उसके लंड को अपनी चूत में लेकर मज़ा बहुत आ रहा था उसे...
''ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ भेंन के लौंडों ................ क्या लंड है तुम्हारे.............. अहह.... ऐसी चुदाई तो मेरी आज तक नही हुई................... ऐसे मोटे लंड रोज मिले तो मेरा जीवन सफल हो जाए................. अहह... चोदो भोसडीवालों ... और ज़ोर से चोदो मुझे ..... मारो मेरी गांड अजय ....... फाड़ दे मेरी चूत ओये खन्ना ...... फाड़ दे आजज्जsssssss ....''
इतना कहते-2 उसने नीचे झुककर खन्ना के होंठों को चूस लिया....अपनी मोटी ब्रेस्ट पकड़कर उसके मुँह में ठूस दी और उसके सिर को पकड़ कर अपनी छातियों पर ज़ोर -2 से मारने लगी...
ऐसी पगलाई और गर्म औरत की चूत मारकर तो आज खन्ना भी खुश हो गया....
और जल्द ही उसकी खुशी उसके लंड से निकल कर अंजलि की चूत में जाने लगी....वो झड़ा तो ऐसा झड़ा मानो आज अपने ही केबिन में बाढ़ ला देगा.....
पीछे से अजय के लंड ने भी एक के बाद एक गोलियाँ चलाकर उसकी गांड भेद डाली....
और अंजलि तो ना जाने कितनी बार झड़ चुकी थी.....हर धक्के में उसे ओर्गास्म का एहसास हुआ था... उसे तो याद भी नही था की वो कितनी बार झड़ी आज....लेकिन जो भी हुआ, उसकी जिंदगी का आज बहुत यादगार दिन था.
जब तूफान थमा तो पुर केबिन में लिसलिसेपन की खुश्बू थी....उस गर्म पानी की सुगंध थी जो अजय और खन्ना के लंड से निकला था...उस मीठे शहद की महक थी जो अंजलि की चूत से नीचुड़कर बाहर आया था...
ये महक तो कई दिनों तक खन्ना को फील होने वाली थी अपने केबिन में ..
अजय ने उसके बाद वहां ज़्यादा रुकना सही नही समझा...अंजलि को उसने आँखो का इशारा करके जल्दी से अपने कपड़े पहनने को कहा...खन्ना की उम्र हो चली थी,इसलिए ऐसी जबरदस्त चुदाई के बाद उसके शरीर मे जान ही नही बची थी...वो अपनी चेयर पर नंगा ही लेटा हुआ सुस्ता रहा था..
अजय और अंजलि ने कपड़े पहने और बाहर निकल आए...अंजलि ने पूरे रास्ते खन्ना या ऑफीस से संबंधित कोई सवाल नही किया...वो बस अजय से ये जानने को उत्सुक थी की ऐसी चुदाई और भी मिलेगी या नही...अजय ने भरोसा दिलाया की अब ऐसे मौके मिलते रहा करेंगे..
अजय ने उसे मार्केट में उतार दिया और फिर आराम से घर की तरफ चल दिया...
कल रचना और आज की अंजलि की चुदाई ने उसे काफ़ी थका दिया था...इसलिए घर जाकर अब वो आराम करना चाहता था.
पर आराम शायद उसकी और उसके लंड की किस्मत में था ही नही.
आज उसकी सालियो ने ऐसा प्लान बनाकर रखा था जिसकी उसे भी उम्मीद नही थी..
अजय घर आया तो प्राची के पास उसकी सास बैठी थी...प्राची की तबीयत थोड़ी खराब थी...जैसा की ऐसी अवस्था में होता है...उसने शायद थोड़ी देर पहले उल्टी की थी...वो बिल्कुल निढाल सी होकर पड़ी थी..अजय ने डॉक्टर से फोन पर बात की तो उसने इसे नॉर्मल बताया...
रात को अजय ने एहतियात के तौर पर अपनी सास को वहीं प्राची के साथ रुकने को कहा...और खुद दूसरे कमरे में जाकर लेट गया..
आज भले ही अजय की सास वहीं उसके घर पर थी...पर उनके साथ कुछ करने के बारे में अजय सोच भी नही सकता था..अपनी बीबी के होते हुए वो ये रिस्क नही लेना चाहता था...वैसे भी अपनी बीबी के आगे वो किसी और बात को तवज्जो नही देना चाहता था..
अजय अपने कमरे में लेटा हुआ था और उसके दिमाग़ में कल और आज की हुई चुदाई की सारी तस्वीरे घूम रही थी...और वो सब सोचते-2 उसका लंड कब खड़ा हो गया उसे भी पता नही चला...जब उसे लंड के खड़े होने का एहसास हुआ तो ना चाहते हुए भी उसका हाथ वहां पहुँच गया..और वो उसे बड़े ही प्यार से सहलाने लगा...
वो उसे किसी पालतू जानवर की तरह सहला रहा था...
आख़िर पिछले एक साल में उसे जो भी मज़े मिले है वो इसी की बदौलत ही तो मिले है.
शादी से पहले उसके लंड ने एक भी चूत को नही चखा था, और उन दिनों वो रोजाना उसकी तेल से मालिश करके कभी ना कभी होने वाली चुदाई के लिए तैयार किया करता था...आज उसी मालिश की वजह से उसका लंड इतना मोटा और लंबा हो चुका था, जिसे अपनी चूत में लेने के बाद हर औरत और लड़की, जो उसने पिछले एक साल में पेली थी,उसकी दीवानी हो चुकी थी..
अजय ने सोचा की चलो आज एक बार फिर से अपने लंड को तेल पिलाया जाए..आख़िर इतनी मेहनत के बाद उसकी सेवा करना भी तो बनता है..
ये सोचकर अजय जल्दी से तेल की शीशी उठा लाया और हथेली पर ढेर सारा तेल उड़ेल कर अपने लंड को उससे नहला दिया...और उसे उपर से नीचे तक तर बतर करके रगड़ने लगा..
ऐसा करते हुए उसे बहुत मज़ा भी आ रहा था और आज तक की हुई हर चुदाई भी याद आ रही थी...अपनी सुहागरात पर प्राची की चुदाई... बाद में अपने दोस्त अनिल की बीबी अंजलि की... और फिर अपनी सास रजनी और मौसेरी सास नीलम की भी चुदाई याद आई उसको...अपनी साली पूजा की कॉलेज वाली सहेली सोनी को भी उसने जम कर छोड़ा था अपने इसी पठानी लंड से...और बाद में अपनी कमसिन साली पूजा को भी...