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उधर राज मन ही मन मुस्करा रहा था कि क्या मज़ा आ गया । माँ को लगता है उसका लौड़ा बहुत पसंद आ गया है। शायद जल्दी ही माँ भी उसे चोदने देगी। उसकी आशाओं को जैसे पंख लग गए थे।
वह टेबल पर आ कर नाश्ता किया और माँ से गले लगकर बाई कहकर स्कूल के लिए बस स्टॉप की ओर गया।
आज शीला आंटी उसके साथ नहीं बैठी, पर वह बीच बीच मैं उसको देख रही थीं।
स्कूल पहुँचकर वह धीरे से बाहर आकर नदीम का इन्तेजार करने लगा। तभी बाइक में नदीम आया और वह उसके पीछे बैठ गया और दोनों चल पड़े।
नदीम: तो तय्यार है ना मेरा दोस्त अपनी पहली चुदायी के लिए?
राज: यार मुझे डर लग रहा है। आंटी मान गई है क्या?
नदीम: मैंने उनको अभी बताया धोड़े ही है ।
राज: मतलब? तू उनको बिना बताए मुझे वहाँ ले जा रहा है? मरवाएगा क्या बे?
नदीम: अरे वहाँ अपना राज है यार। तुझे तो बताया था ना कि अम्मी मेरी बीवी की तरह रहती है मेरे साथ। जो मैं चाहूँगा वही होगा हमारे घर में। तू चिंता ना कर।
राज थोड़ा नर्वस हो रहा था कि पता नहीं आंटी कैसे बर्ताव करेंगी।
वह फिर से पूछा: सच बता इससे पहले भी तू आंटी को किसी और से ठुकवा चुका है क्या?
नदीम: तुझे बोला था ना कि अम्मी का भी ये पहली बार है मेरे किसी दोस्त के साथ।
राज थोड़ा चिंतित था कि पता नहीं आज क्या बवाल मचने वाला है इसके घर में।
तभी उसका घर आ गया। वहाँ बरामदे में एक गंजा और मोटा सा आदमी जिसकी उम्र करीब ५० साल की होगी बैठा हुआ पेपर पढ़ रहा था । अभी समय भी ८ भी नहीं बजे थे सुबह के ।वह बानियान और लूँगी में था।
राज ने उसे नमस्कार किया , नदीम ने बताया की वह उसके अब्बा हैं। उसने देखा कि अंकल उसे बड़े ग़ौर से देख रहे थे।
अंदर जाके राज को सोफ़े पर बैठकर नदीम ने अम्मी को आवाज़ दी।
आयशा बाहर आइ और राज को देखकर सवालिया नज़र से नदीम की ओर देखने लगी।
नदीम: अम्मी ये राज है मेरा दोस्त।
आयशा: वही राज जिसकी मम्मी हमारे यहाँ आयीं थीं।
नदीम: हाँ अम्मी वही है। पर अब बात सब साफ़ हो गयी है।
अब कोई गिला शिकवा नहीं है।
आयशा: तुझे नहीं होगा पर मुझे तो है। जाने क्या क्या बोल गयीं थीं वह जब यहाँ आयीं थीं।
नदीम : अम्मी चलो ना गोली मारो पुरानी बात को। चलो चाय पिलाओ।
आयशा राज को घूरते हुए चली गयी।
नदीम राज की तरफ़ मुस्करा कर देखा और बोला: यार तू चिंता ना कर अभी सब कुछ ठीक कर दूँगा।
राज की तो आंटी के हाव भाव से ही फट गई थी, वो तो भागने की कोशिश में था। अब नदीम अंदर किचन में गया और थोड़ी देर में वहाँ से बहस की आवाज़ें आने लगीं। राज थोड़ा परेशान हो गया और उठकर भागने की सोचने लगा।
फिर सोचा कि देख तो लूँ किमाँ बेटा किस बात पर बहस कर रहे हैं।
वो किचन के पास गया और उनकी बातें सुनने लगा , खिड़की के पास आकर। नदीम : अम्मी अब पुरानी बात को भूल जाओ ना। और कौन सा राज ने झूठ कहा था कि हम एक दूसरे से फँसे हुए हैं।
आयशा: बेटा, तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? तुम अपने अम्मी को किसी और से कैसे करवा सकते हो?
नदीम: अम्मी , असल में मैंने राज की मम्मी नमिता को देखा है और मैं उसे चोदना चाहता हूँ। राज ने आजतक किसी को चोदा नहीं है। मैं चाहता हूँ कि एक बार अगर उसे चुदाई का मज़ा मिल गया तो वह अपनी माँ को नहीं छोड़ेगा और फिर वह मुझे भी अपनी माँ दिलवा देगा।
आयशा: ये बताओ कि नमिता में क्या है जो मुझमें नहीं है। मैं तो तुझे मज़ा देती ही हूँ ना, फिर तुझे वह क्यों चाहिए।
नदीम: अम्मी, पता नहीं क्यों आपके साथ मुझे वह भी चाहिए।
ऐसा कहते हुए उसने अम्मी की छाती पकड़ ली और दबाने लगा। आयशा आऽऽह करके उसको बोली: आऽऽऽह चल छोड़, जा नमिता की पकड़। मैं तो तुमको पसंद नहीं हूँ ना।
नदीम अब उसकी बुर को सलवार के ऊपर से पकड़ लिया और दबाते हुए बोला: अम्मी आप तो मस्त माल हो, और नमिता भी माल है। मुझे दोनों का मज़ा चाहिए।
आयशा अब हाय्य्य्य्य्य्य्य कमीने छोओओओओओओओओड ना कहते हुए उसका हाथ हटाने लगी।
नदीम अब उसकी बुर और छाती दबा कर उसको गरम कर दिया।
आयशा बोली: आह अच्छा बाबा जो तू कहेगा मैं करूँगी, बस अब छोड़ मुझे।
नदीम ने अम्मी के होंठ चूसते हुए कहा: अम्मी, राज को मस्त मज़ा दे देना। अपना ग़ुलाम बना लेना उसको।
आयशा: अरे तेरे अब्बा को बाहर भेज दे ना। उनके सामने मुझे किसी और से करवाने में ख़राब लगेगा, तेरी बात और है।
नदीम: अरे अम्मी उनको क्या प्रॉब्लम होगी। वह तो और मस्ती से भर कर आपको राज से भी चुदवाते देखेंगे।
आयशा: और तू क्या करेगा?
नदीम: अगर आप चाहो तो हम दोनों आपको एक साथ चोद लेंगे।
आयशा: मैं कभी एक साथ दो लोगों से नहीं करवायी हूँ। पता नहीं ले पाऊँगी कि नहीं।
नदीम उसकी बुर दबाते हुए अपना दूसरा हाथ उसके पिछवाड़े में ले गया और उसकी गाँड़ के छेद में सलवार के ऊपर से ऊँगली करते हुए बोला: अम्मी आपकी गाँड़ तो मैं कई बार मार चुका हूँ। आज भी मैं गाँड़ मार लूँगा और राज बुर । ठीक है ना? आपको भी डबल मज़ा मिल जाएगा। ये सुनकर राज का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया।
आयशा हाऽऽऽऽऽय्य्य्य्य। चल ऊँगली निकाल। ठीक है जो चाहे कर लेना। अभी छोड़ ।
नदीम हँसते हुए बोला: अम्मी तो चलो चाय लाओ फिर मज़ा देना।
वह बाहर आने लगा तो मैं सोफ़े पर आकर बैठ गया और नदीम मेरे पास आकर बोला: अम्मी मान गई।
तभी अंकल भी अंदर आए और बोले: आयशा चाय पिलाओ ।
आयशा चाय लायी और तीनों को दी और ख़ुद भी पीने लगी।
नदीम: अम्मी यहाँ आओ ना हमारे पास बैठो । और ऐसा कहते हुए उसने अपने और राज के बीच में जगह बना दी।
आयशा थोड़ी से झेंपती हुई उनके बीच में आकर बैठ गई।
अब चाय पीते हुए नदीम ने अम्मी की जाँघों पर हाथ फेरना चालू किया। आयशा थोड़ा घबरा रही थी। पर कुछ नहीं बोली। रहमान ( नदीम के अब्बा) नदीम की हरकतों को ग़ौर से देख रहे थे और सोच रहे थे कि ये अपने दोस्त के सामने क्या कर रहा है?
उधर नदीम ने अम्मी के गाल चूमते हुए बोला: अम्मी आप बहुत अच्छी अम्मी हो। मुझे पड़ी प्यारी लगती हो। राज भी आपको पसंद करता है। क्यों राज, सही कहा ना?
राज थोड़ा शर्मा कर बोला: जी आंटी आप बहुत अच्छी लगती हैं।
उसका लौडा पूरा तना हुआ था।
अब नदीम ने कहा: अम्मी ये चुन्नी उतार दो ना। ये कहते हुए उसने अम्मी की चुन्नी उतार दी। अब कुर्ते में कसे उसकी छातियाँ जो आधी नंगी थीं साफ़ दिखने लगी।
नदीम ने अम्मी की छातियों को दिखाकर राज से कहा: देखो राज अम्मी की चूचियाँ कितनी मस्त हैं ना? ये कहते हुए उसने एक चुचि पकड़ ली और दबाते हुए बोला: यार तू भी दबा , देख क्या मस्त नरम और बड़ी चूचियाँ हैं।
राज थोड़ा सा हिचक रहा था तब नदीम ने उसका हाथ पकड़कर अम्मी की दूसरी चुचि पर रख दिया। अब राज भी हिम्मत करके उनकी चुचि दबाने लगा। तभी राज की निगाह रहमान अंकल पर पड़ी। वो अपनी लूँगी के ऊपर से अपना लंड दबा रहे थे। उनकी आँखें दोनों के हाथों पर थीं। अब राज का भी डर जाता रहा और वह आयशा की चुचि दबाने लगा। आयशा ने आँखें बंद कर रखी थी।
अब नदीम बोला: अम्मी ये कुर्ता उतार दीजिए ना।
आयशा ने आँख खोली और उसको देखा , फिर धीरे से उठी और अपनी कुर्ते के हुक खोले और कुर्ता उतार दिया। अब ब्रा में से उसके बड़े बड़े गोरे कबूतर बहुत ही गजब ढा रहे थे। वह अब वैसे ही आकर सोफ़े पर बैठने लगी तो नदीम ने खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया।
अब नदीम अम्मी के खुले दूधों को चूमने लगा और राज को बोला: ले यार मज़ा ले । अम्मी के दूध देख क्या मस्त बड़े बड़े हैं?
राज भी अब अपना हाथ नहीं रोक सका और मज़े से उनको ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। अब नदीम ने ब्रा के हुक खोल दिए और अम्मी की बड़ी बड़ी चूचियाँ नंगी हो गयीं। राज ने देखा कि शीला आंटी से भी बड़ी चूचियाँ थीं। वह अब मस्ती से उनको मुट्ठी में भर के दबाने लगा।उसके निपल्ज़ भी काले और पूरे खड़े थे। तभी उसकी निगाह रहमान पर पड़ी। अब वह ज़ोर ज़ोर से अपने हाथ को लूँगी में डालकर हिला रहा था।
अब नदीम ने अम्मी की चुचि में ले ली और चूसने लगा। उसने राज को भी चूसने का इशारा किया। अब राज भी एक चुचि मुँह में लेकर चूसने लगा। आयशा अब दोनों से चूचियाँ चूस्वाते हुए सीइइइइइइइ कर रही थी और उसके मुँह से हाय्ह्य्य्य्य्य्य्य निकल रही थी।
नदीम ने फिर कहा: अम्मी सलवार खोल दो ना। आप पैंटी तो नहीं पहनी हो ना?
आयशा: तूने मुझे पैंटी पहनने को मना किया है तो कैसे पहन सकती हूँ। वह खड़ी हो गयी और अपनी सलवार खोल कर धीरे धीरे नीचे करने लगी। पहले उसकी बुर दिखायी दी उसके बाद भरी हुई जाँघें ।
अब नदीम ने उनको उलटा घुमाकर उनके बड़े बड़े मस्त चूतरों के दर्शन राज को कराया।
राज मस्ती से उसकी नंगी जवानी को देख रहा था। उसका लौडा मानो टूट कर गिर जाएगा ऐसी हालत में था।
रहमान ने अपनी लूँगी पूरी उठा दी थी और उसका सुकड़ा हुआ लंड वह अभी भी मसल रहा था।
राज ने आयशा के चूतरों को दबाना चालू किया । नदीम भी उसकी जाँघों को चूमता हुआ उसके चूतरों को काटने लगा।
आयशा आऽऽऽहहहह करके मुड़ गई और सामने उसकी बुर देखकर नदीम ने उसकी बुर की चुम्मी ले ली। अब राज भी उसकी बुर को चूमने लगा। आयशा हाऽऽऽऽय्य्य्य्य मर गईइइइइइइइइइइ चिल्लाई।
आयशा: तुमने मुझे पूरा नंगी कर दिया और दोनों कपड़े पहने हुए हो।
नदीम हँसते हुए राज को बोला: चल यार हम भी नंगे हो जाते हैं।
रहमान बोला: अरे बेडरूम में चले जाओ ना , ये भी कोई चुदाई करने की जगह है।
नदीम ने नंगी अम्मी तो बाहों में उठाया और लेज़ाकर बिस्तर पर रख दिया। अब वो दोनों कपड़े उतारने लगे। जब राज और नदीम सिर्फ़ चड्डियों में थे तो रहमान भी अंदर आया । उसने लूँगी निकाल दी थी और वह अपने नरम लंड को सहला रहा था।
बिस्तर पर आयशा पूरी नंगी पड़ी थी और राज और नदीम अपनी चड्डियाँ नीचे किए और अपने लौड़े बाहर निकाले। रहमान भी अपना ढीला लंड सहला रहा था। आयशा ने राज का लौड़ा देखा तो उसकी आँखें हैरत से भर गयीं। १८ साल की उम्र में क्या जवान मर्द है उसे अपने भय्या की याद आयी जब उसने अपनी भाभी की चुदाई करते हुए देखा था, उनका भी लौड़ा ऐसा ही था।
नदीम का सामान्य साइज़ का था। वह अपने अब्बा पर गया था , काश अपने मामू पर जाता तो मम्मम - वह क्या सोचने लगी, उसने अपना सिर झटका और तभी दोनों लड़के उसकी दोनों तरफ़ लेट गए और उसको चूमने लगे। नदीम ने होंठ चूसे और राज तो जैसे उसकी छातियों से चिपक गया था। वह उन्हें दबाने के साथ ही चूसे भी जा रहा था। नदीम के हाथ अम्मी के बदन पर घूम रहे थे।
राज भी अब आयशा के होंठ चूसने लगा। अचानक राज को अपने लौड़े पर किसी नरम हाथ का अहसास हुआ, उसने देखा कि आंटी ने उसका लौड़ा पकड़ लिया था और उससे खेल रही थी। असल में आयशा ने दोनों के ही लौड़े पकड़ लिए थे और उनको सहला कर मस्त हुए जा रही थी।
अचानक राज को लगा कि उसके बॉल्ज़ भी कोई सहला रहा है। उसने पलट कर देखा कि अंकल उसके पीछे खड़े होकर ये हरकत कर रहे हैं। उसका लौड़ा और कड़क हो गया। अब वह आंटी की बुर सहला रहा था और उसमें ऊँगली डाला। आयशा सोचने लगी कि राज उतना अनाड़ी भी नहीं है जितना दिखता है। शायद वह पहले भी चुदाई कर चुका है। तभी नदीम उठा और अम्मी की टांगों को मोड़कर उनकी छाती पर रख दिया और राज को बुलाया।
राज को अम्मी को खुली हुई बुर दिखा कर बोला: देख ऐसी होती है बुर। फिर उसने फाँकों को फैलाकर कहा: ये बुर का गुलाबी छेद है, इसीमे लौड़ा डालते हैं। और इसी छेद से मैं बाहर निकला हूँ। और अब यहाँ वापस अपनी जीभ और फिर अपना लौड़ा डालूँगा, देख ठीक से। ये कहते हुए उसने अपनी जीभ उसकी बुर में डाल दी और चाटते हुए जीभ अंदर बाहर करने लगा। आयशा हाय्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइ कहकर अपनी कमर उछालने लगी। फिर नदीम ने अपना लौंडे का सुपाड़ा उस छेद में रख कर हल्के से धक्का लगाया और आधा लौड़ा बुर में समा गया। आयशा आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे बेटेएएएएएएएए कह कर कमर उछाली और पूरा लौड़ा अंदर कर ली।
अब नदीम ने ज़ोर ज़ोर से १०/१२ धक्के लगाए और पलंग हिल गया।
अब राज का लौड़ा जो रहमान सहला रहा था मस्ती से प्रीकम छोड़ दिया। जिसे रहमान ने अपनी ऊँगली में लपेट लिया और उसे सूंघकर चाट लिया।
वह टेबल पर आ कर नाश्ता किया और माँ से गले लगकर बाई कहकर स्कूल के लिए बस स्टॉप की ओर गया।
आज शीला आंटी उसके साथ नहीं बैठी, पर वह बीच बीच मैं उसको देख रही थीं।
स्कूल पहुँचकर वह धीरे से बाहर आकर नदीम का इन्तेजार करने लगा। तभी बाइक में नदीम आया और वह उसके पीछे बैठ गया और दोनों चल पड़े।
नदीम: तो तय्यार है ना मेरा दोस्त अपनी पहली चुदायी के लिए?
राज: यार मुझे डर लग रहा है। आंटी मान गई है क्या?
नदीम: मैंने उनको अभी बताया धोड़े ही है ।
राज: मतलब? तू उनको बिना बताए मुझे वहाँ ले जा रहा है? मरवाएगा क्या बे?
नदीम: अरे वहाँ अपना राज है यार। तुझे तो बताया था ना कि अम्मी मेरी बीवी की तरह रहती है मेरे साथ। जो मैं चाहूँगा वही होगा हमारे घर में। तू चिंता ना कर।
राज थोड़ा नर्वस हो रहा था कि पता नहीं आंटी कैसे बर्ताव करेंगी।
वह फिर से पूछा: सच बता इससे पहले भी तू आंटी को किसी और से ठुकवा चुका है क्या?
नदीम: तुझे बोला था ना कि अम्मी का भी ये पहली बार है मेरे किसी दोस्त के साथ।
राज थोड़ा चिंतित था कि पता नहीं आज क्या बवाल मचने वाला है इसके घर में।
तभी उसका घर आ गया। वहाँ बरामदे में एक गंजा और मोटा सा आदमी जिसकी उम्र करीब ५० साल की होगी बैठा हुआ पेपर पढ़ रहा था । अभी समय भी ८ भी नहीं बजे थे सुबह के ।वह बानियान और लूँगी में था।
राज ने उसे नमस्कार किया , नदीम ने बताया की वह उसके अब्बा हैं। उसने देखा कि अंकल उसे बड़े ग़ौर से देख रहे थे।
अंदर जाके राज को सोफ़े पर बैठकर नदीम ने अम्मी को आवाज़ दी।
आयशा बाहर आइ और राज को देखकर सवालिया नज़र से नदीम की ओर देखने लगी।
नदीम: अम्मी ये राज है मेरा दोस्त।
आयशा: वही राज जिसकी मम्मी हमारे यहाँ आयीं थीं।
नदीम: हाँ अम्मी वही है। पर अब बात सब साफ़ हो गयी है।
अब कोई गिला शिकवा नहीं है।
आयशा: तुझे नहीं होगा पर मुझे तो है। जाने क्या क्या बोल गयीं थीं वह जब यहाँ आयीं थीं।
नदीम : अम्मी चलो ना गोली मारो पुरानी बात को। चलो चाय पिलाओ।
आयशा राज को घूरते हुए चली गयी।
नदीम राज की तरफ़ मुस्करा कर देखा और बोला: यार तू चिंता ना कर अभी सब कुछ ठीक कर दूँगा।
राज की तो आंटी के हाव भाव से ही फट गई थी, वो तो भागने की कोशिश में था। अब नदीम अंदर किचन में गया और थोड़ी देर में वहाँ से बहस की आवाज़ें आने लगीं। राज थोड़ा परेशान हो गया और उठकर भागने की सोचने लगा।
फिर सोचा कि देख तो लूँ किमाँ बेटा किस बात पर बहस कर रहे हैं।
वो किचन के पास गया और उनकी बातें सुनने लगा , खिड़की के पास आकर। नदीम : अम्मी अब पुरानी बात को भूल जाओ ना। और कौन सा राज ने झूठ कहा था कि हम एक दूसरे से फँसे हुए हैं।
आयशा: बेटा, तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? तुम अपने अम्मी को किसी और से कैसे करवा सकते हो?
नदीम: अम्मी , असल में मैंने राज की मम्मी नमिता को देखा है और मैं उसे चोदना चाहता हूँ। राज ने आजतक किसी को चोदा नहीं है। मैं चाहता हूँ कि एक बार अगर उसे चुदाई का मज़ा मिल गया तो वह अपनी माँ को नहीं छोड़ेगा और फिर वह मुझे भी अपनी माँ दिलवा देगा।
आयशा: ये बताओ कि नमिता में क्या है जो मुझमें नहीं है। मैं तो तुझे मज़ा देती ही हूँ ना, फिर तुझे वह क्यों चाहिए।
नदीम: अम्मी, पता नहीं क्यों आपके साथ मुझे वह भी चाहिए।
ऐसा कहते हुए उसने अम्मी की छाती पकड़ ली और दबाने लगा। आयशा आऽऽह करके उसको बोली: आऽऽऽह चल छोड़, जा नमिता की पकड़। मैं तो तुमको पसंद नहीं हूँ ना।
नदीम अब उसकी बुर को सलवार के ऊपर से पकड़ लिया और दबाते हुए बोला: अम्मी आप तो मस्त माल हो, और नमिता भी माल है। मुझे दोनों का मज़ा चाहिए।
आयशा अब हाय्य्य्य्य्य्य्य कमीने छोओओओओओओओओड ना कहते हुए उसका हाथ हटाने लगी।
नदीम अब उसकी बुर और छाती दबा कर उसको गरम कर दिया।
आयशा बोली: आह अच्छा बाबा जो तू कहेगा मैं करूँगी, बस अब छोड़ मुझे।
नदीम ने अम्मी के होंठ चूसते हुए कहा: अम्मी, राज को मस्त मज़ा दे देना। अपना ग़ुलाम बना लेना उसको।
आयशा: अरे तेरे अब्बा को बाहर भेज दे ना। उनके सामने मुझे किसी और से करवाने में ख़राब लगेगा, तेरी बात और है।
नदीम: अरे अम्मी उनको क्या प्रॉब्लम होगी। वह तो और मस्ती से भर कर आपको राज से भी चुदवाते देखेंगे।
आयशा: और तू क्या करेगा?
नदीम: अगर आप चाहो तो हम दोनों आपको एक साथ चोद लेंगे।
आयशा: मैं कभी एक साथ दो लोगों से नहीं करवायी हूँ। पता नहीं ले पाऊँगी कि नहीं।
नदीम उसकी बुर दबाते हुए अपना दूसरा हाथ उसके पिछवाड़े में ले गया और उसकी गाँड़ के छेद में सलवार के ऊपर से ऊँगली करते हुए बोला: अम्मी आपकी गाँड़ तो मैं कई बार मार चुका हूँ। आज भी मैं गाँड़ मार लूँगा और राज बुर । ठीक है ना? आपको भी डबल मज़ा मिल जाएगा। ये सुनकर राज का लौड़ा पूरा खड़ा हो गया।
आयशा हाऽऽऽऽऽय्य्य्य्य। चल ऊँगली निकाल। ठीक है जो चाहे कर लेना। अभी छोड़ ।
नदीम हँसते हुए बोला: अम्मी तो चलो चाय लाओ फिर मज़ा देना।
वह बाहर आने लगा तो मैं सोफ़े पर आकर बैठ गया और नदीम मेरे पास आकर बोला: अम्मी मान गई।
तभी अंकल भी अंदर आए और बोले: आयशा चाय पिलाओ ।
आयशा चाय लायी और तीनों को दी और ख़ुद भी पीने लगी।
नदीम: अम्मी यहाँ आओ ना हमारे पास बैठो । और ऐसा कहते हुए उसने अपने और राज के बीच में जगह बना दी।
आयशा थोड़ी से झेंपती हुई उनके बीच में आकर बैठ गई।
अब चाय पीते हुए नदीम ने अम्मी की जाँघों पर हाथ फेरना चालू किया। आयशा थोड़ा घबरा रही थी। पर कुछ नहीं बोली। रहमान ( नदीम के अब्बा) नदीम की हरकतों को ग़ौर से देख रहे थे और सोच रहे थे कि ये अपने दोस्त के सामने क्या कर रहा है?
उधर नदीम ने अम्मी के गाल चूमते हुए बोला: अम्मी आप बहुत अच्छी अम्मी हो। मुझे पड़ी प्यारी लगती हो। राज भी आपको पसंद करता है। क्यों राज, सही कहा ना?
राज थोड़ा शर्मा कर बोला: जी आंटी आप बहुत अच्छी लगती हैं।
उसका लौडा पूरा तना हुआ था।
अब नदीम ने कहा: अम्मी ये चुन्नी उतार दो ना। ये कहते हुए उसने अम्मी की चुन्नी उतार दी। अब कुर्ते में कसे उसकी छातियाँ जो आधी नंगी थीं साफ़ दिखने लगी।
नदीम ने अम्मी की छातियों को दिखाकर राज से कहा: देखो राज अम्मी की चूचियाँ कितनी मस्त हैं ना? ये कहते हुए उसने एक चुचि पकड़ ली और दबाते हुए बोला: यार तू भी दबा , देख क्या मस्त नरम और बड़ी चूचियाँ हैं।
राज थोड़ा सा हिचक रहा था तब नदीम ने उसका हाथ पकड़कर अम्मी की दूसरी चुचि पर रख दिया। अब राज भी हिम्मत करके उनकी चुचि दबाने लगा। तभी राज की निगाह रहमान अंकल पर पड़ी। वो अपनी लूँगी के ऊपर से अपना लंड दबा रहे थे। उनकी आँखें दोनों के हाथों पर थीं। अब राज का भी डर जाता रहा और वह आयशा की चुचि दबाने लगा। आयशा ने आँखें बंद कर रखी थी।
अब नदीम बोला: अम्मी ये कुर्ता उतार दीजिए ना।
आयशा ने आँख खोली और उसको देखा , फिर धीरे से उठी और अपनी कुर्ते के हुक खोले और कुर्ता उतार दिया। अब ब्रा में से उसके बड़े बड़े गोरे कबूतर बहुत ही गजब ढा रहे थे। वह अब वैसे ही आकर सोफ़े पर बैठने लगी तो नदीम ने खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया।
अब नदीम अम्मी के खुले दूधों को चूमने लगा और राज को बोला: ले यार मज़ा ले । अम्मी के दूध देख क्या मस्त बड़े बड़े हैं?
राज भी अब अपना हाथ नहीं रोक सका और मज़े से उनको ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। अब नदीम ने ब्रा के हुक खोल दिए और अम्मी की बड़ी बड़ी चूचियाँ नंगी हो गयीं। राज ने देखा कि शीला आंटी से भी बड़ी चूचियाँ थीं। वह अब मस्ती से उनको मुट्ठी में भर के दबाने लगा।उसके निपल्ज़ भी काले और पूरे खड़े थे। तभी उसकी निगाह रहमान पर पड़ी। अब वह ज़ोर ज़ोर से अपने हाथ को लूँगी में डालकर हिला रहा था।
अब नदीम ने अम्मी की चुचि में ले ली और चूसने लगा। उसने राज को भी चूसने का इशारा किया। अब राज भी एक चुचि मुँह में लेकर चूसने लगा। आयशा अब दोनों से चूचियाँ चूस्वाते हुए सीइइइइइइइ कर रही थी और उसके मुँह से हाय्ह्य्य्य्य्य्य्य निकल रही थी।
नदीम ने फिर कहा: अम्मी सलवार खोल दो ना। आप पैंटी तो नहीं पहनी हो ना?
आयशा: तूने मुझे पैंटी पहनने को मना किया है तो कैसे पहन सकती हूँ। वह खड़ी हो गयी और अपनी सलवार खोल कर धीरे धीरे नीचे करने लगी। पहले उसकी बुर दिखायी दी उसके बाद भरी हुई जाँघें ।
अब नदीम ने उनको उलटा घुमाकर उनके बड़े बड़े मस्त चूतरों के दर्शन राज को कराया।
राज मस्ती से उसकी नंगी जवानी को देख रहा था। उसका लौडा मानो टूट कर गिर जाएगा ऐसी हालत में था।
रहमान ने अपनी लूँगी पूरी उठा दी थी और उसका सुकड़ा हुआ लंड वह अभी भी मसल रहा था।
राज ने आयशा के चूतरों को दबाना चालू किया । नदीम भी उसकी जाँघों को चूमता हुआ उसके चूतरों को काटने लगा।
आयशा आऽऽऽहहहह करके मुड़ गई और सामने उसकी बुर देखकर नदीम ने उसकी बुर की चुम्मी ले ली। अब राज भी उसकी बुर को चूमने लगा। आयशा हाऽऽऽऽय्य्य्य्य मर गईइइइइइइइइइइ चिल्लाई।
आयशा: तुमने मुझे पूरा नंगी कर दिया और दोनों कपड़े पहने हुए हो।
नदीम हँसते हुए राज को बोला: चल यार हम भी नंगे हो जाते हैं।
रहमान बोला: अरे बेडरूम में चले जाओ ना , ये भी कोई चुदाई करने की जगह है।
नदीम ने नंगी अम्मी तो बाहों में उठाया और लेज़ाकर बिस्तर पर रख दिया। अब वो दोनों कपड़े उतारने लगे। जब राज और नदीम सिर्फ़ चड्डियों में थे तो रहमान भी अंदर आया । उसने लूँगी निकाल दी थी और वह अपने नरम लंड को सहला रहा था।
बिस्तर पर आयशा पूरी नंगी पड़ी थी और राज और नदीम अपनी चड्डियाँ नीचे किए और अपने लौड़े बाहर निकाले। रहमान भी अपना ढीला लंड सहला रहा था। आयशा ने राज का लौड़ा देखा तो उसकी आँखें हैरत से भर गयीं। १८ साल की उम्र में क्या जवान मर्द है उसे अपने भय्या की याद आयी जब उसने अपनी भाभी की चुदाई करते हुए देखा था, उनका भी लौड़ा ऐसा ही था।
नदीम का सामान्य साइज़ का था। वह अपने अब्बा पर गया था , काश अपने मामू पर जाता तो मम्मम - वह क्या सोचने लगी, उसने अपना सिर झटका और तभी दोनों लड़के उसकी दोनों तरफ़ लेट गए और उसको चूमने लगे। नदीम ने होंठ चूसे और राज तो जैसे उसकी छातियों से चिपक गया था। वह उन्हें दबाने के साथ ही चूसे भी जा रहा था। नदीम के हाथ अम्मी के बदन पर घूम रहे थे।
राज भी अब आयशा के होंठ चूसने लगा। अचानक राज को अपने लौड़े पर किसी नरम हाथ का अहसास हुआ, उसने देखा कि आंटी ने उसका लौड़ा पकड़ लिया था और उससे खेल रही थी। असल में आयशा ने दोनों के ही लौड़े पकड़ लिए थे और उनको सहला कर मस्त हुए जा रही थी।
अचानक राज को लगा कि उसके बॉल्ज़ भी कोई सहला रहा है। उसने पलट कर देखा कि अंकल उसके पीछे खड़े होकर ये हरकत कर रहे हैं। उसका लौड़ा और कड़क हो गया। अब वह आंटी की बुर सहला रहा था और उसमें ऊँगली डाला। आयशा सोचने लगी कि राज उतना अनाड़ी भी नहीं है जितना दिखता है। शायद वह पहले भी चुदाई कर चुका है। तभी नदीम उठा और अम्मी की टांगों को मोड़कर उनकी छाती पर रख दिया और राज को बुलाया।
राज को अम्मी को खुली हुई बुर दिखा कर बोला: देख ऐसी होती है बुर। फिर उसने फाँकों को फैलाकर कहा: ये बुर का गुलाबी छेद है, इसीमे लौड़ा डालते हैं। और इसी छेद से मैं बाहर निकला हूँ। और अब यहाँ वापस अपनी जीभ और फिर अपना लौड़ा डालूँगा, देख ठीक से। ये कहते हुए उसने अपनी जीभ उसकी बुर में डाल दी और चाटते हुए जीभ अंदर बाहर करने लगा। आयशा हाय्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइ कहकर अपनी कमर उछालने लगी। फिर नदीम ने अपना लौंडे का सुपाड़ा उस छेद में रख कर हल्के से धक्का लगाया और आधा लौड़ा बुर में समा गया। आयशा आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरे बेटेएएएएएएएए कह कर कमर उछाली और पूरा लौड़ा अंदर कर ली।
अब नदीम ने ज़ोर ज़ोर से १०/१२ धक्के लगाए और पलंग हिल गया।
अब राज का लौड़ा जो रहमान सहला रहा था मस्ती से प्रीकम छोड़ दिया। जिसे रहमान ने अपनी ऊँगली में लपेट लिया और उसे सूंघकर चाट लिया।