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. मुम्बई के जुहू बीच पर बना एक खूबसूरत बंगला,
रात के लगभग डेढ़ बजे का वक्त,
बंगले के चारों तरफ 6 फिट ऊँची बाऊन्ड्री-वॉल.
और इसी बाऊन्ड्री-वॉल के पास,
"चलें...."-एक फुसफुसाती आवाज।
"पहले बीड़ी तो खत्म होने दे...."-दूसरी मध्यम आवाज।
लगभग एक मिनट बाद,
"चल...."
दोनों ने पारदर्शी मास्क पहना और बाऊन्ड्री-वॉल के ऊपर चढ़ गये।
"कूदूं....."
"हर चीज पूछ कर करेगा क्या....कूद.."
'धप्प्'
'धप्प्'
दोनों लॉन के किनारे ऊँगी झाड़ियों में उलझे पड़े थे।
"तेरी माँ का चोदू साले ......तुझे यही जगह मिली थी कूदने के लिये!"
"गलती हो गई भाई.....दिन में तो निशान लगया था लेकिन बारिस की वजह से....."
"चुपकर....."
दोनों जैसे-तैसे झड़ियों से आजाद हुये।
रात के लगभग डेढ़ बजे का वक्त,
बंगले के चारों तरफ 6 फिट ऊँची बाऊन्ड्री-वॉल.
और इसी बाऊन्ड्री-वॉल के पास,
"चलें...."-एक फुसफुसाती आवाज।
"पहले बीड़ी तो खत्म होने दे...."-दूसरी मध्यम आवाज।
लगभग एक मिनट बाद,
"चल...."
दोनों ने पारदर्शी मास्क पहना और बाऊन्ड्री-वॉल के ऊपर चढ़ गये।
"कूदूं....."
"हर चीज पूछ कर करेगा क्या....कूद.."
'धप्प्'
'धप्प्'
दोनों लॉन के किनारे ऊँगी झाड़ियों में उलझे पड़े थे।
"तेरी माँ का चोदू साले ......तुझे यही जगह मिली थी कूदने के लिये!"
"गलती हो गई भाई.....दिन में तो निशान लगया था लेकिन बारिस की वजह से....."
"चुपकर....."
दोनों जैसे-तैसे झड़ियों से आजाद हुये।