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दीदी- अरे भैया, यह चुदाई ही एक ऐसा खेल है। जिसमें पार्टनर को जितना आनंद दोगे आपको उससे दोगुना ज्यादा आनंद मिलता है। आपका लण्ड तो पूरी तरह से तैयार है भैया। जल्दी से मेरे बीच में आ जाइये। कहीं दमऊ भैया उठ ना जाएं और यहाँ ना आ जायें।
रामू- उसकी चिंता मत करो दीदी। वो यहाँ पे नहीं आएगा। और आ भी गया तो कुछ भी नहीं कहेगा।
दीदी- सच भैया, पर कैसे?
रामू- “मुझे उसका एक गहरा राज मालूम है...” कहकर रामू भैया ने अपने लण्ड का सुपाड़ा मेरी फुद्दी में घुसाया तो मेरे मुँह से एक आहह... सी निकली। रामू ने कहा- “क्यों दीदी, तकलीफ हो रही है?”
दीदी- नहीं भैया, वो आपका लण्ड आपके जीजाजी से बड़ा है ना... कुछ तकलीफ तो होगी पर मजा भी तो उतना ही आएगा। वैसे भी लण्ड लिए 25 दिन हो गये। आज तो मजा ही आएगा। पर आपको दमऊ भैया का कौन सा राज पता है की वो अगर हम दोनों को कहीं पकड़ भी लिया इस तरह चुदवाते हुए तो भी कुछ नहीं कहेगा। बोलिए ना भैया।
रामू- पर आपको क्यों जानना है दीदी?
दीदी- इतना तो मैं समझती हूँ भैया की वो राज लण्ड चूत से संबधित ही है। क्यों मैंने सही कहा है ना?
रामू- हाँ दीदी.. पर कहीं आप उससे नाराज ना हो जाएं?
दीदी- अरे बाबा नाराज नहीं होऊँगी उससे। मैं भी तो इधर आपसे चुदा रही हूँ।
रामू- वो तो है... पर वो एकदम गहरे रिश्ते में चुदाई कर बैठा है।
दीदी- गहरे रिश्ते में? हे भगवान्... कहीं उसने मम्मीजी को तो नहीं चोद दिया है? अगर ये बात सही है तो मैं उससे माफ नहीं करूंगी हाँ.. आप बताओ।
रामू- देखिए आप नाराज हो रही हैं। इसीलिए तो नहीं बता रहा था। अभी थोड़ी देर पहले आप ही तो कह रही थी की जमाना कहाँ से कहाँ आगे निकल गया। और मैं अपने दोस्त की बहन को चोद नहीं पा रहा हूँ। अभी आप दमऊ पर नाराज हो रही हैं।
दीदी- “अच्छा... अच्छा... चल ठीक है नाराज नहीं होऊँगी। भले ही उसने मेरी और उसकी मम्मी को ही चोद दिया हो। अब तो ठीक है ना...”
रामू उसकी बुर में धक्के पे धक्का लगाते जाता था... इधर दीदी भी नीचे से चूतड़ उछालती हुई लण्ड अपनी बुर में पेलवा रही थी।
दीदी- हाँ... बताओ ना रामू भैया... दमऊ भैया का राज?
रामू- कहीं आप उसे ब्लैकमेल करके चुदवाने लगी तो फिर मेरा क्या होगा?
दीदी- आप भी ना... रामू भैया छीः छीः छीः कैसी गंदी बात करते हैं? भला मैं उससे कैसे चुदवाऊँगी? वो मेरा सगा भाई है।
रामू और आप मुझसे तो चुदवा ही रही हैं।
दीदी- पर आप मेरे भैया के दोस्त हैं। मैं आपसे तो चुदवा ही सकती हैं। पर दमऊ भैया से नहीं।
रामू- हाँ... पर सच बताओ कि आपने दमऊ का लण्ड भी तो देखा था ना? कैसा लगा, आपको उसका लण्ड?
दीदी- सुंदर था उसका लण्ड भी। आपके जैसे ही।
रामू- तो आपका एक बार भी मन नहीं किया उससे चुदवाने को।
दीदी- वो... वो सब छोड़िए भैया। और चोदए ना... धक्का लगाइए ना... खूब मजा आ रहा है। मैं तो सोच रही थी की आपके विशाल लण्ड से चुदवाने में मुझे नानी याद आएगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मुझे मजा बहुत आ रहा है और आपको?
रामू- मुझे भी खूब मजा आ रहा है। आपको दमऊ से चुदवाने में भी उतना ही मजा आएगा। प्लीज दीदी उससे भी एक बार चुदवा लो ना।
दीदी- बेशर्म... भाई, पहले आप तो चोदो। फिर उसे देखेंगे।
रामू- बैंक यू दीदी की आपने हाँ कर दी।
दीदी- हाँ... पर मैं उससे अंधेरे में ही चुदवाऊँगी जैसे अभी आपसे चुदवा रही हूँ। उजाले में तो मैं शर्म के मारे धरती में समा जाऊँगी।
रामू- ठीक है दीदी, अपनी चुदाई खतम होते ही मैं उसे अभी कमरे में भेज दूंगा।
दीदी- अभी... पागल हो गये हो क्या?
रामू- कुछ नहीं होगा दीदी। आपको डबल मजा आयेगा।
दीदी- पर डबल मजा के चक्कर में अपने ही भाई से? नहीं नहीं भैया, मुझे शर्म आ रही है।
रामू- कुछ नहीं होगा। अभी आपको मजा आ रहा है की नहीं?
दीदी नीचे से चूतड़ उछालते हुए- “आपके साथ बहुत अच्छा लग रहा है, रामू भाई। हाँ आप दमऊ भाई का बता रहे थे, राज खाल दो।
रामू- पहले कसम खाओ, दीदी की आप सुनने के बाद उसे माफ कर दोगे।
दीदी- आपने जो चुदाई का मजा दिया है भैया। चलो, मैंने पहले ही उसे माफ कर दिया। अगर उसने अपनी सगी अम्मा को भी चोदा होगा तो भी उसे माफ... चलो अब बोलो।
रामू और एक शर्त? आप उससे चुदवाओगी?
दीदी- पर आप उसे कैसे समझाओगे?
रामू- कुछ नहीं... मैं उसे उठाऊँगा, और बोलूंगा कि गेस्टरूम में एक शानदार माल ले आया हूँ। बत्ती बिना जलाए चोदने के शर्त पर चोदना है। वैसे भी बत्ती नहीं है, क्या बोलती हैं आप?
दीदी- हाँ हाँ भैया, मैं इस शर्त पर तैयार हूँ। मैं दमऊ भैया से चुदवा भी नँगी और उसे मालूम भी नहीं पड़ेगा। ये आइडिया बहुत ही ठीक है।
रामू- तो तय रहा। अपनी चुदाई के बाद आप दमऊ से भी चुदवाओगी।
दीदी- अच्छा चल वादा रहा। पर उसका राज तो बता दो?
रामू- एक तो उसने अपनी बुआ की लड़की को चोदा है और दूसरी सगी बुआ को। याने की कजरी दीदी और मंजरी बुआ।
दीदी- क्या? क्या कहा आपने? कजरी दीदी और माजरी बुआ? हे राम... ये दमऊ तो बड़ा ही कमीना निकला।
रामू- मेरा निकल रहा है दीदी, कहाँ निकालूं?
दीदी- “मेरी फुद्दी में ही छोड़ दो भैया। वैसे भी दमऊ आ रहा है ना चोदने को। चूत गीली रहेगी तो तकलीफ नहीं होगी। और ले मेरा भी निकला रे... धक्का बंद मत करो भैया... धक्का तेज करो। हाँ हाँ मेरा निकला रे... निकला..."
रामू- धीरे-धीरे दीदी... अपने ही तो कहा था कि बगल के कमरे में दमऊ सो रखा है। उठ गया तो?
दीदी- उठने दो उसे, मैं क्या डर रही हूँ? आने से ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? मेरी फुद्दी में लण्ड ही तो डालेगा। ना। वैसे भी मैं चुदवाने के लिए तो तैयार ही हूँ।
सासूमाँ- अच्छा बेटी, तूने तो कहा था की पहली बार बस में ही रामू भैया से चुदवा ली। तो ये कहानी क्या तेरा सपना था बेटे?
दीदी- आप उंगली करते रहिए अम्माजी। आम खाओ, गुठली क्यों गिन रही हो? कहानी आगे बढ़ने दो। राज एक-एक करके सामने आएगा। हाँ तो हम दोनों पशीने से लथपथ हो गये। और एक-दूसरे से लिपट गये। थोड़ी देर में रामू भैया उठे। और...
रामू- तो दीदी, मैं जाता हूँ और दमऊ को भेज रहा हूँ।
दीदी- हाँ हाँ... जाओ, पर उसे अकेले ही भेजना। आप उसके रूम में सो जाना।
रामू- “मैं समझता हूँ दीदी। आपको शर्म आएगी। वैसे भी मैं यह देख नहीं सकता था। ठीक है, मैं उसे समझाकर
आपके पास भेज रहा हूँ। और आप ऐसे ही नंगे रहना। उसे भी नंगा ही भेजूंगा.” रामू भैया कमरे से बाहर निकले, बिना अपना कपड़ा पहने। मुझे ये खयाल बाद में आया।
सासूमाँ चम्पा की चूत में उंगली चलते हुए बोली- “फिर क्या हुआ बेटी?”
रामू- उसकी चिंता मत करो दीदी। वो यहाँ पे नहीं आएगा। और आ भी गया तो कुछ भी नहीं कहेगा।
दीदी- सच भैया, पर कैसे?
रामू- “मुझे उसका एक गहरा राज मालूम है...” कहकर रामू भैया ने अपने लण्ड का सुपाड़ा मेरी फुद्दी में घुसाया तो मेरे मुँह से एक आहह... सी निकली। रामू ने कहा- “क्यों दीदी, तकलीफ हो रही है?”
दीदी- नहीं भैया, वो आपका लण्ड आपके जीजाजी से बड़ा है ना... कुछ तकलीफ तो होगी पर मजा भी तो उतना ही आएगा। वैसे भी लण्ड लिए 25 दिन हो गये। आज तो मजा ही आएगा। पर आपको दमऊ भैया का कौन सा राज पता है की वो अगर हम दोनों को कहीं पकड़ भी लिया इस तरह चुदवाते हुए तो भी कुछ नहीं कहेगा। बोलिए ना भैया।
रामू- पर आपको क्यों जानना है दीदी?
दीदी- इतना तो मैं समझती हूँ भैया की वो राज लण्ड चूत से संबधित ही है। क्यों मैंने सही कहा है ना?
रामू- हाँ दीदी.. पर कहीं आप उससे नाराज ना हो जाएं?
दीदी- अरे बाबा नाराज नहीं होऊँगी उससे। मैं भी तो इधर आपसे चुदा रही हूँ।
रामू- वो तो है... पर वो एकदम गहरे रिश्ते में चुदाई कर बैठा है।
दीदी- गहरे रिश्ते में? हे भगवान्... कहीं उसने मम्मीजी को तो नहीं चोद दिया है? अगर ये बात सही है तो मैं उससे माफ नहीं करूंगी हाँ.. आप बताओ।
रामू- देखिए आप नाराज हो रही हैं। इसीलिए तो नहीं बता रहा था। अभी थोड़ी देर पहले आप ही तो कह रही थी की जमाना कहाँ से कहाँ आगे निकल गया। और मैं अपने दोस्त की बहन को चोद नहीं पा रहा हूँ। अभी आप दमऊ पर नाराज हो रही हैं।
दीदी- “अच्छा... अच्छा... चल ठीक है नाराज नहीं होऊँगी। भले ही उसने मेरी और उसकी मम्मी को ही चोद दिया हो। अब तो ठीक है ना...”
रामू उसकी बुर में धक्के पे धक्का लगाते जाता था... इधर दीदी भी नीचे से चूतड़ उछालती हुई लण्ड अपनी बुर में पेलवा रही थी।
दीदी- हाँ... बताओ ना रामू भैया... दमऊ भैया का राज?
रामू- कहीं आप उसे ब्लैकमेल करके चुदवाने लगी तो फिर मेरा क्या होगा?
दीदी- आप भी ना... रामू भैया छीः छीः छीः कैसी गंदी बात करते हैं? भला मैं उससे कैसे चुदवाऊँगी? वो मेरा सगा भाई है।
रामू और आप मुझसे तो चुदवा ही रही हैं।
दीदी- पर आप मेरे भैया के दोस्त हैं। मैं आपसे तो चुदवा ही सकती हैं। पर दमऊ भैया से नहीं।
रामू- हाँ... पर सच बताओ कि आपने दमऊ का लण्ड भी तो देखा था ना? कैसा लगा, आपको उसका लण्ड?
दीदी- सुंदर था उसका लण्ड भी। आपके जैसे ही।
रामू- तो आपका एक बार भी मन नहीं किया उससे चुदवाने को।
दीदी- वो... वो सब छोड़िए भैया। और चोदए ना... धक्का लगाइए ना... खूब मजा आ रहा है। मैं तो सोच रही थी की आपके विशाल लण्ड से चुदवाने में मुझे नानी याद आएगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मुझे मजा बहुत आ रहा है और आपको?
रामू- मुझे भी खूब मजा आ रहा है। आपको दमऊ से चुदवाने में भी उतना ही मजा आएगा। प्लीज दीदी उससे भी एक बार चुदवा लो ना।
दीदी- बेशर्म... भाई, पहले आप तो चोदो। फिर उसे देखेंगे।
रामू- बैंक यू दीदी की आपने हाँ कर दी।
दीदी- हाँ... पर मैं उससे अंधेरे में ही चुदवाऊँगी जैसे अभी आपसे चुदवा रही हूँ। उजाले में तो मैं शर्म के मारे धरती में समा जाऊँगी।
रामू- ठीक है दीदी, अपनी चुदाई खतम होते ही मैं उसे अभी कमरे में भेज दूंगा।
दीदी- अभी... पागल हो गये हो क्या?
रामू- कुछ नहीं होगा दीदी। आपको डबल मजा आयेगा।
दीदी- पर डबल मजा के चक्कर में अपने ही भाई से? नहीं नहीं भैया, मुझे शर्म आ रही है।
रामू- कुछ नहीं होगा। अभी आपको मजा आ रहा है की नहीं?
दीदी नीचे से चूतड़ उछालते हुए- “आपके साथ बहुत अच्छा लग रहा है, रामू भाई। हाँ आप दमऊ भाई का बता रहे थे, राज खाल दो।
रामू- पहले कसम खाओ, दीदी की आप सुनने के बाद उसे माफ कर दोगे।
दीदी- आपने जो चुदाई का मजा दिया है भैया। चलो, मैंने पहले ही उसे माफ कर दिया। अगर उसने अपनी सगी अम्मा को भी चोदा होगा तो भी उसे माफ... चलो अब बोलो।
रामू और एक शर्त? आप उससे चुदवाओगी?
दीदी- पर आप उसे कैसे समझाओगे?
रामू- कुछ नहीं... मैं उसे उठाऊँगा, और बोलूंगा कि गेस्टरूम में एक शानदार माल ले आया हूँ। बत्ती बिना जलाए चोदने के शर्त पर चोदना है। वैसे भी बत्ती नहीं है, क्या बोलती हैं आप?
दीदी- हाँ हाँ भैया, मैं इस शर्त पर तैयार हूँ। मैं दमऊ भैया से चुदवा भी नँगी और उसे मालूम भी नहीं पड़ेगा। ये आइडिया बहुत ही ठीक है।
रामू- तो तय रहा। अपनी चुदाई के बाद आप दमऊ से भी चुदवाओगी।
दीदी- अच्छा चल वादा रहा। पर उसका राज तो बता दो?
रामू- एक तो उसने अपनी बुआ की लड़की को चोदा है और दूसरी सगी बुआ को। याने की कजरी दीदी और मंजरी बुआ।
दीदी- क्या? क्या कहा आपने? कजरी दीदी और माजरी बुआ? हे राम... ये दमऊ तो बड़ा ही कमीना निकला।
रामू- मेरा निकल रहा है दीदी, कहाँ निकालूं?
दीदी- “मेरी फुद्दी में ही छोड़ दो भैया। वैसे भी दमऊ आ रहा है ना चोदने को। चूत गीली रहेगी तो तकलीफ नहीं होगी। और ले मेरा भी निकला रे... धक्का बंद मत करो भैया... धक्का तेज करो। हाँ हाँ मेरा निकला रे... निकला..."
रामू- धीरे-धीरे दीदी... अपने ही तो कहा था कि बगल के कमरे में दमऊ सो रखा है। उठ गया तो?
दीदी- उठने दो उसे, मैं क्या डर रही हूँ? आने से ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? मेरी फुद्दी में लण्ड ही तो डालेगा। ना। वैसे भी मैं चुदवाने के लिए तो तैयार ही हूँ।
सासूमाँ- अच्छा बेटी, तूने तो कहा था की पहली बार बस में ही रामू भैया से चुदवा ली। तो ये कहानी क्या तेरा सपना था बेटे?
दीदी- आप उंगली करते रहिए अम्माजी। आम खाओ, गुठली क्यों गिन रही हो? कहानी आगे बढ़ने दो। राज एक-एक करके सामने आएगा। हाँ तो हम दोनों पशीने से लथपथ हो गये। और एक-दूसरे से लिपट गये। थोड़ी देर में रामू भैया उठे। और...
रामू- तो दीदी, मैं जाता हूँ और दमऊ को भेज रहा हूँ।
दीदी- हाँ हाँ... जाओ, पर उसे अकेले ही भेजना। आप उसके रूम में सो जाना।
रामू- “मैं समझता हूँ दीदी। आपको शर्म आएगी। वैसे भी मैं यह देख नहीं सकता था। ठीक है, मैं उसे समझाकर
आपके पास भेज रहा हूँ। और आप ऐसे ही नंगे रहना। उसे भी नंगा ही भेजूंगा.” रामू भैया कमरे से बाहर निकले, बिना अपना कपड़ा पहने। मुझे ये खयाल बाद में आया।
सासूमाँ चम्पा की चूत में उंगली चलते हुए बोली- “फिर क्या हुआ बेटी?”