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दो भाई दो बहन compleet

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12

गतान्क से आगे.......

जय को याद आ रहा था कि उस दिन वो एक पेइसे बिकिनी मे कितनी सुंदर

लग रही थी. आज जो उसने बिकनी पहनी थी उससे उसके बदन का हर अंग

दिखाई पड़ रहा था, जय था कि उसकी नज़रें अपनी बेहन की

चुचियों और कटी प्रदेश से हटे नही हट रही थी. आज रिया ने

अपने बदन पर तेल की मालिश की थी जिससे उसका बदन काफ़ी चिकना

दीख रहा था उसका बदन साथ ही धूप की रोशनी मे चमक भी

रहा था. दोनो पूल मे बॉल से खेल रहे थे. जब भी वो रिया से

बॉल छीनने जाता तो उसका बदन रिया के बदन से टकरा जाता कई बार

तो ऐसा होता कि वो उसे पकड़ने की कोशिश करता तो उसका बदन तेल

लगे होने की वजह से उसके हाथों से फिसल जाता और उसके हाथ कभी

उसकी चुचियों पर या फिर उसकी कमर पर आ कर अटक जाते.

जब भी उसका हाथ रिया की किसी अंग से टकराता तो उसके बदन मे एक

झुरझारी सी दौड़ जाती.

रिया ने देखा कि जय उसे अजीब सी नज़रों से देख रहा था, "क्या

तुमने कभी किसी लड़की को आज तक छुआ है?" रिया ने जय से पूछा.

"इतनी देर से तो तुम्हे छू रहा हू." जे ने उसे याद दिलाते हुए

कहा.

"किसी लड़की की चुचियों या कमर को हाथ लगाने को छूना नही

कहते, मेरा मतलब है कि कभी किसी लकड़ी के बदन को प्यार से छुआ

या सहलाया है?" रिया ने पूछा.

"नही पहले कभी नही." जय ने जवाब दिया.

"क्या तुम मेरे नंगे बदन का अहसास करना चाहोगे?" रिया ने कहा.

"लेकिन तुम मेरी बेहन है." जे ने कहा.

"लेकिन खेलते वक़्त जब तुम मेरी चुचियों को मसल देते होतब तो नही

सोचा तुमने ऐसे..." रिया ने कहा. "तुम्हे डर लग रहा है ना?"

सच मे जय को डर लग रहा था, लेकिन अब भी उसकी निगाह बेहन की

चुचियों पर गढ़ी हुई थी, उसका लंड जो शॉर्ट्स के अंदर तन कर

खड़ा था.... उसने डरते डरते अपने हाथ रिया की चुचियों की ओर

बढ़ाए.."

"अरे आगे बढ़ो इतना डर क्यों रहे हो?" रिया ने उसे उकसाते हुए कहा.

आख़िर हिक्किचाते हुए जय ने रिया की बिकनी को नीचे से पकड़ा और

उसके सिर के उपर उठा उसे उतार दिया. उसकी नज़रें रिया की उभरी

हुई चुचियों पर जा टिकी. गुलाबी गुलाबी उर्रोज और उसपर भूरे रंग

का निपल. पानी मे खड़ी रिया बहोत ही सुन्‍दर दिखाई दे रही थी.

उसका आधा शरीर पूल के अंदर था और उसकी चुचियों जो ठीक पानी

के सतेह पर थी ऐसा लग रहा था की जैसे उनपर तेर रही हो.

थोड़ी देर चुचियों को निहारने के बाद उसने अपनी हथेली उसकी

चुचियों के नीचे से रख उन्हे अपने हाथों मे ले लिया और अपनी

उंगली और अनूठे से उसके निपल को सहलाने लगा. फिर धीरे से अपनी

हथेली का दबाव बढ़ाते हुए वो उन्हे मसल्ने लगा. चुचि मसल्ने के

साथ वो निपल को भी भींच देता.

रिया उसके हाथो के स्पर्श का मज़ा लेते हुए सिसक रही थी. रिया को

सिसकते देख जय की हिम्मत और बढ़ गयी, वो और जोरोंसे उसकी

चुचियों को मसल्ने लगा. फिर अपने चेहरे को झुकते हुए पहले तो

उसने उसकी चुचियों को धीमे से चूमा फिर अपन जीब उसकी चुचियों

के निपल के चारों और घूमाने लगा. जीब घूमाते घूमाते उसने

अपने होंठ और खोले और निपल को मुँह मे ले चूसने लगा.

फिर अपने चेहरे को उपर उठाते हुए उसने अपने होंठ रिया के होठों

पर रख दिए और अपनी जीब से उसके होठों को खोलते हुए उसने अपनी

जीब उसके मुँह मे डाल दी. रिया भी काम विभोर हो अपने मुँह को खोल

उसकी जीब से अपनी जीब मिला उसे चूमने लगी

जय को चूमते चूमते रिया ने अपना हाथ जय की कमर पर रखा और

उसे सहलाते हुए अपने हाहत को और नीचे की और बढ़ने लगी. फिर

रिया ने अपना हाथ उसकी अंडरवेर मे फँसा अपना हाथ अंदर डाला और

उसके खड़े लंड को अपनी मुट्ठी मे पकड़ लिया. होठों की गर्मी के

साथ साथ रिया के हाथो की गर्मी ने जय को तो जैसे पागल कर दिया.

आज पहली बार किसी लड़की ने उसे इस तरह छुआ था.

"जय तुम्हे नही पता कि आज तक तुम किस चीज़ से वंचित थे..."

रिया ने उसके लंड को जोरों से मसल्ते हुए कहा.

रिया जानती थी कि उसके भाई को इसके पहले इन सब बातों का अनुभव

नही था, इसलिए वो खिलखिलते हुए उसके लंड को और मसल्ने लगी.

रिया जय को धकेलते हुए पूल के किनारे तक ले आई और जब जय की

कमर पानी के सतेह से उपर हो गयी तो उसने उसकी अंडरवेर को नीचे

खिसका दिया और अब उसके लंड को और अछी तरह अपने हाथो मे ले

मसल्ने लगी. उत्तेजना मे जय ने पूल के किनारे को पकड़ लिया और

जोरों से हुंकार भरने लगा.

रिया ने तिर्छि नज़रों से अपने भाई के चेहरे की तरफ देख, जो

उत्तेजना मे सिसक रहा था, एक प्यारी सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ

गयी. रिया ने भी इसके पहले एक दो बार ही अपने बॉयफ्रेंड के लंड को

चूसा था, इसलिए इस क्रिया मे वो भी नयी थी.

जय को खुश होते देख वो और जोरों से उसके लंड को चूसने लगी.

अपने चेहरे को नीचे कर वो उसके लंड को अपने गले तक लेती और उपर

होते हुए उसके लंड को अपनी जीब से जोरोसे भींचती. जब उसने जय के

बदन को अकड़ता महसूस किया तो वो समझ गयी कि उसका लंड पानी

छोड़ने वाला है. जय के शरीर की सारी नसें तनने लगी और उसके

लंड एक ज़ोर की पिचकारी के साथ रिया के मुँह मे पानी छोड़ दिया. रिया

उसके लंड को चूस्ति गयी और जय पानी पर पानी उसके मुँह मे छोड़ता

गया.

"रिया में तुमसे बहोत प्यार करता हूँ," जय ने प्यार से अपनी बेहन

से कहा.

रिया तिर्छि नज़रों से अपने भाई को देखते हुए उसके लंड को जब तक

चूस्ति रही जबतक कि उसके वीर्य की आखरी बूँद भी नही बची.

रिया की चूत मे आग लगी हुई थी. वो अपने भाई के लंड को अपनी

चूत मे महसूस करना चाहती थी.

तभी रिया की आवाज़ ने जय को ख़यालों से वापस लौटा दिया.

"चलो जय कमरे मे चलते है.' रिया ने उसके लंड को मुँह से

निकलते हुए कहा.

जय रिया के पीछे पीछे उसके कमरे मे आ गया. रिया ने कमरे का

दरवाज़ा बंद किया और दोनो अंधेरे मे कपड़े उतारने लगे. फिर रिया

ने जय का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर पर ले आई. दोनो चादर के

नीचे एक दूसरे के साथ घुस गये.

"जय मुझे तुम्हारी और राज की दोस्ती से कभी कभी जलन होने लगती

है. में तुम दोनो को इतने सालों से देख रही हूँ. कितनी गहरी

दोस्ती है तुम दोनो के बीच. दोनो एक दूसरे की मदद करते हो, कोई

दुखी होता है तो तुम दोनो उसे हँसते हो हर काम मे सहयोग देते

हो." रिया ने अपना हाथ अपने भाई की छाती पर फिराते हुए कहा.

"तुम्हारी भी तो कई सहेलियाँ है" जय ने कहा.

"हाँ है पर ऐसी कोई नही जिसे में साची सहेली कह सकूँ, जिससे

में अपनी खुशी अपना दर्द बाँट सकूँ. तुम्हारे और राज के बीच

कुछ वैसा ही अप्नत्व है. और शायद आज की रात में ही फ़साद की

जड़ थी, मेने तुम्हारी प्राब्लम सॉल्व करना की बजाय उसे और बढ़ा

दिया." रिया ने जवाब दिया.

जय कुछ देर सोचता रहा फिर धीरे से बोला, "पर शायद आज के

बाद राज मुझसे नफ़रत करने लगेगा, हम शायद हमारे बीच पहले

जैसे दोस्ती ना हो."

"नही जय एक छोटी सी ग़लती से दोस्ती नही टूटती," रिया ने

कहा, "सुबह हम सब मिलकर सब ठीक कर लेंगे. लेकिन सबसे पहले

इसकी समस्या तो ठीक करें" रिया उसके खड़े लंड को हाथों मे लेते

हुए बोली.

थोड़ी देर उसके लंड को मसल्ने के बाद रिया बोली, "तुम्हारी कोई

ख़ास पसंद है इसे ठीक करने की?"

"शायद में जो कहूँ वो तुम्हे पसंद ना आए." जय ने जवाब दिया.

"पहले तो तुम इसे मेरी चूत मे घुसा कर मेरी चूत की आग को

ठंडा करो, बाद मे तुम्हे जो पसंद हो वो कर लेना." रिया ने उसके

लंड को जोरों से भींचते हुए कहा.

"सच मे?" जय ने पूछा.

 
रिया देख रह थी कि अजीब सी खुशी उसके छोटे भाई के चेहरे पर

छाई हुई थी.

"आज पता नही क्यो में बहोत खुश हूँ, तुम मुझसे आज कुछ भी

बाँट सकते हो, अपनी हर ख्वाइश हर ख़याल" रिया ने कहा,

"सच मे रिया आज में अपनी वो ख्वाइश पूरी करना चाहता हूँ जो पूरे

हफ्ते से में तुम्हे लेकर देख रहा हूँ."

"में कुछ समझी नही." रिया ने कहा.

"अभी समझ जाओगी." कहकर जय ने दो तकिया बिस्तर पर से उठाए

और रिया को पेट के बल लिटाते हुए वो तकिये उसके पेट के नीचे लगा

दिया. ऐसा करने से रिया की चूतड़ हवा मे उठ गये थे और उसकी

चूत और गंद का छेद सॉफ दिखाई दे रहा था.

जय उसके उपर लेट गया और धीरे से उसके कान मे कहा, "अब तुम्हे

मज़ा आएगा रिया जब तुम ये नही जानती होगी कि मेरा लंड तुम्हारी

गंद मे घुसेगा की तुम्हारी चूत मे... है ना अजीब खेल"

जय की बात सुनकर रिया के बदन मे भी एक अजीब मस्ती भर गयी. वो

सोचने लगी सही मे क्या अजीब खेल है कि उसे खुद नही मालूम होगा

की लंड कौन से छेद मे आएगा.

जय ने पहले उसकी चूत और गंद के छेद को थोड़ा सहलाया फिर अपने

लंड को उसकी चूत के द्वार पर रख कर धीर धीरे अंदर घुसाने

लगा.

"उः उईईईईई" वो सिसक पड़ी.

जय ने एक धक्का मार अपने लंड को बाहर निकाल लिया, रिया सोच मे पड़

गयी कि पता नही अब ये कौन से छेद मे घुसेगा पर जय ने वापस

अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा दिया. उसकी चूत उत्तेजना मे बह

पड़ी, दो तीन धक्कों के बाद उसने फिर अपने लंड को बाहर खींच

लिया.

जय अब उसकी चूत से बहते रस से अपने लंड को गीला कर उसकी गंद के

छेद पर अपने लंड को रगड़ता हुआ उसके छेद को गीला कर रहा था.

रिया को लगा कि अब जय अपना लंड उसकी गंद मे डालेगा लेकिन रिया की

सोच के विपरीत उसने अपन लंड एक बार फिर उसकी चूत मे पेल दिया.

"रिया मुझे यहाँ से तो दिखाई नही देगा लेकिन तुम अपनी चुचियों

से खेलो, अपने निपल को भींचो....मेने देखना चाहता हूँ तुम्हे

अपने आपसे खेलते हुए." जय ने उसकी चूत मे धक्के मारते हुए कहा.

रिया ने खिलखिलाते हुए अपने दोनो हाथ अपनी छाती के नीचे किए और

अपने दोनो निपल को उंगलियों मे ले भींचने लगी, अब वो अपनी

चुचियों को मुठ्ठी मे भर मसल रही थी.

जय अब ज़ोर के धक्के मार रहा था. बिना रुके वो ज़ोर से और अंदर ताल

डालते हुए उसे चोद रहा था. एक नई उत्तेजना रिया के शरीर मे भरती

जा रही थी, उसका बदन अकड़ रहा था.

"ओह जय चोदो मुझे ओह हाआँ ज़ोर से और जोए से.. ओह कितना

अच्छा लग रहा है... चोडओवू और चूओड़ो

पर जय था कि आज वो रिया को पागल कर देना चाहता था, एक बार फिर

उसने अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया. रिया की चूत से छूटे रस

और खुद के वीर्य से भीगे अपने लंड को वो एक बार फिर रिया की गंद

पर घिसने लगा. गंद मे लंड घुसाने से वो डर रहा था...... हर

बार रिया को लगता कि वो अभी घुसाएगा... एक अजीब मस्ती उसकी चूत

और गंद मे फैली हुई थी..... उसे लगा की जय अब लंड उसकी गंद मे

घुसाएगा तो जय ने एक बार फिर अपना लंड उसकी चूत मे घुसा धक्के

मारने लगा.

लंड चूत मे घुसते हुए फिर एक नई मस्ती रिया के बदन मे दौड़

गयी. जय ने अपने हाथ रिया के बदन के नीचे किए और उसके दोनो

हाथ को पीठ पर कर पकड़ लिया. उसने रिया की हाथो को ठीक किसी

घोड़े की लगाम की तरह पकड़ रखा था. जय अब ज़ोर ज़ोर से उसकी

चूत मे धक्के मारने लगा जैसे के किसी घोड़ी की सवारी कर रहा हो.

रिया ने कई बार अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर हर बार जय ने

उसके हाथों को कस कर पकड़ लिया. रिया को पता नही क्यों ऐसा लग

रहा था कि उस पर चढ़ा इंसान उसका भाई नही कोई अजनबी है जो

बरसों से उसके सपने मे आ उसे इसी तरह चोद्ता था.

जय ने अपने लंड को एक बार फिर बाहर निकाला और उस बार उसकी गंद के

छेद पर रख ज़ोर लगाने लगा. रिया को लगा कि उसकी गंद फॅट

जाएगी....

'उउईईई माआआ" एक दर्द की सिसकारी उसके मुँह से निकली, उसे लगा

की उसकी गंद फ़ैलते हुए जय के लंड को जगह दे रही है. जय प्यार

से और धीरे धीरे अपने लंड को अपनी बेहन की गंद मे घुसा रहा

था. थोड़ी ही देर मे रिया को मज़ा आने लगा, उसे लगा कि लंड उसकी

गंद मे नही बल्कि उसकी चूत मे है.

आज उसे पता चला की गंद मराने मे भी उतना ही मज़ा आता है. जय

ने उसके हाथों को छोड़ दिया और उसके कुल्हों को पकड़ अब ज़ोर ज़ोर से

अपने लंड को उसकी गंद मे पेलने लगा.

'ओह जे हाआआं फाड़ दो मेरी गाअंड कूऊव ऑश क्या मज़ाअ आ

रहा हाईईइ ऑश हाँ और ज़ोर से ऑश फाड़ दो मेरी गंद आाज."

जय के शरीर मे उबाल आ रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने

लगा. आख़िर उसने ज़ोर का धक्का आर अपना वीर्य अपनी बेहन की गंद मे

छोड़ दिया, जय तब तक धक्के मारता गया जब तक कि उसके अंडकोषों ने

वीर्य की एक एक बूँद ना उगल दी.

दोनो थक कर अलग हो गये....

"क्या तुम्हे कभी पिताजी की याद आती है?" जय ने रिया से पूछा.

"बहोत कम....." रिया ने साफ साफ जवाब दिया, "जय वो इंसान किसी

काम का नही है... उसे याद कर अपना समय बर्बाद मत करो."

रिया को जय पर गुस्सा आ रहा था वो सोने ही जा रही थी जय ने ये

सवाल पूछ लिया था. अब उसके जेहन मे फिर उस नमकूल इंसान की

छवि रहेगी और वो चाह कर भी सो नही सकेगी. एक अंजाने भय ने

उसके ख़यालों ने घेर लिया.... उसे याद आने लगा जब वो फिर से

अपने बाप से मिली थी..........

रिया को फिर एक बार जय पर गुस्सा आ रहा था, जिन बातों को वो याद

नही करना चाहती थी, जय ने फिर वही विषय छेड़ दिया था... उसके

बाप का. वो फिर उस दिन को याद करने लगी जिस दिन घर से जाने

के बाद पहली बार उसकी अपने बाप से मुलाकात हुई थी.

रिया उन दिनो हाइवे पर बने एक छोटे रेस्टोरेंट कम शॉपिंग स्टोर

मे काम कर रही थी.

"सोचा था कभी मुझसे यहाँ मुलाकात होगी." उसके पिता ने उसे वहाँ

देख कर पूछा .

उसके पिता ने एक फेडेड जीन्स और एक प्लैइन शर्ट पहन रखी थी. वो

उसके भरे और गदराए बदन को घूर रहा था. दुकान की गुलाबी ड्रेस

मे वो बहोत ही सुन्दर दिखाई दे रही थी. उसकी कल्पनाए उसके

ख़याल ज़ोर पकड़ने लगे जो वो रिया के बचपन से जवानी की दौर मे

देखता रहा था.

"पिताजी आप यहाँ," उसकी बढ़ी हुई दाढ़ी और मूछों के पीछे से

अपने पिता को पहचानते हुए उसने कहा.

"काफ़ी बड़ी हो गयी हो?" उसके पिता ने उसकी उभरी हुई चुचियों की ओर

देखते हुए कहा.

"आप यहाँ क्या कर रहे है?" उसने पूछा.

"आज कल में एक ट्रैलोर नुमा वॅन चला रहा हूँ, इससे मेरे रहने का

खर्चा भी बच जाता है. में जानता हूँ कि ये कोई बड़ा काम नही

है फिर भिग़ुज़ारा हो जाता है. मैने तुम्हारी लिए भी कुछ बचा

रखे है."

"मेरे लिए?" उसने चौंकते हुए पूछा.

"हां, तुम हमेशा आगे पढ़ने के लिए कहा करती थी ना." उसने

जवाब दिया, "में जानता हूँ कि में कभी अच्छा बाप नही बन पाया,

पर में तुम्हारे लिए हमेशा सोचा करता था, इसलिए मेने पैसे

बचाने शुरू कर दिए."

"क्या सच मे" रिया ने अस्चर्य से कहा, उसे लगा कि जो आज तक वो इस

इंसान के बारे मे सोचती रही वो कितना ग़लत था.

"तुम्हारी शिफ्ट कब ख़तम होगी?

"करीएब 25 मिनिट के बाद." रिया ने अपनी घड़ी देखते हुए कहा.

"ठीक है फिर तुम्हारी शिफ्ट के बाद हम कुछ बात कर सकते हैं."

उसने कहा.

25 मिनिट तक वो रिया को ग्राहको से बात करते और उनके ऑर्डर का

सामान देते देखते रहा. उसे विश्वास नही हो रहा था कि उसकी बेटी

इतनी बड़ी और सुंदर हो गयी थी. उसकी नज़रें उसका ही पीछा करती,

वो उसके बदन उसकी मसल टाँगे, भरी हुई चुचियों को ही घूरे जा

रहे था.

क्रमशः..................
 
13

गतान्क से आगे.......

रेस्टोरेंट मे आने वाले ग्राहक भी ये जानते थे कि वो रिया को कभी

पा नही सकते पर एक बड़ी टिप का ललाच दे वो उसे ज़्यादा से ज़्यादा

देर अपनी टेबल पर रोक लेते. और इस बात का फ़ायदा उठाते कभी उसकी

हाथों को तो कभी उसकी कमर को छू लेते. कुछ तो उसकी स्कर्ट के

नीचे हाथ डाल उसके चूतदों तक को सहला देते थे. एक ग्राहक ने

तो हद ही कर दी थी उसने उसे खींच कर गोद मे बिठा लिया और उसके

गालों को चूम लिया था.

ये सब देख कर आज़य रिया का पिता गरमा उठा. टेबल के नीचे पॅंट

के अंदर उसका लंड उसे तकलीफ़ देने लगा, और रिया को पाने की लालसा

उसके मन मे और जाग उठी.

रिया की ड्यूटी ख़तम हुई तो वो अपने पिता के टेबल की ओर बढ़ गयी,

उसने उसे बैठने के लिए कहा तो वो लकड़ी की बनी कुर्सी पर उसके

सामने बैठ गयी.

"में तुम्हे काम करते देख रहा था, बहोत ही आछे तरीके से काम

कर रही थी तुम." उसने कहा, "और लगता है यहाँ आने वाले सभी

कोई तुम्हे पसंद भी करते है."

"रिया अपनी आँखे घूमा सोचने लगी, "थॅंक्स, लेकिन में सुंदर तो

हूँ लेकिन अगर मेरी जगह कोई भी लड़की ऐसी यूनिफॉर्म मे काम करेगी

तो वो लोग उसे पसंद करेंगे."

"हो सकता है तुम सही कह रही हो. फिर भी मुझे तुम पर नाज़ है."

आज़य ने अपनी बेटी को घूरते हुए कहा.

उसकी बात सुनकर रिया मुस्कुरा दी पर वो शंकित नज़रों से अपने बाप

को देखने लगी. आज जिंदगी मे पहली बार उसने उसके लिए कोई अछी

बात कही थी, उसे डर लगने लगा कि यहाँ आने का उसका कोई और

मकसद तो नही है.

"सॉरी हम बात के विषय से हट गये," उसने कहा, "में तुम लोगों

को छोड़ कर चला गया ये सब के लिए अच्छा ही हुआ, हालत ही कुछ

ऐसे थे कि में तुम लोगों को गुड बाइ नही बोल पाया, तुम्हारी मा

ने माहॉल ही ऐसा बना दिया था घर का."

रिया को बड़ा अजीब लग रहा था कि वो इस इंसान से क्या कहे, जो एक

दिन अचानक ही उन्हे छोड़ कर गायब हो गया था और आज अचानक किसी

भूत की तरह उसके सामने आ खड़ा हो गया था.

रिया के मन मे इस इंसान के लिए कोई लगाव या अप्नत्व नही था और

जो कुछ इज़्ज़त उसके मन मे अपने बाप के लिए थी वो बरसो पहले

ख़तम हो चुकी थी. अगर उसके मन कुछ था तो वो था उसका गुस्सा और

डर जिसकी बदौलत वो घर के हर प्राणी पर हुकुम चलता था.

थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने अपने हाथ मे अपनी बेटी रिया का

चेहरा लिया और उसके होठों को हल्के से चूम लिया, "अपने उन्नीसवे

जनमदिन की बधाई हो. में जनता हूँ कि कुछ महीने लेट हूँ फिर

भी मुझे याद है... है ना."

उसे विश्वास नही हो रहा था कि ये बाप जिसने उसे कभी बेटी नही

समझा उसका जनमदिन भी याद रख सकता है. "थॅंक यू डॅडी."

"क्या तुमने कॉलेज जाना शुरू किया?" उसने पूछा.

"में यहाँ फुल टाइम जॉब कर रही हूँ और एक एक पैसा अपनी पढ़ाई

के लिए जमा कर रही हूँ." उसने जवाब दिया. "अगले साल में

दाखिला ले लूँगी, तब तक अच्छे पैसे जमा हो जाएँगे, यहा टिप

अच्छी मिलती है."

आज़य अपने सामने रखी कोफ़ी के सीप लेने लगा. उसने अपनी नज़रें

घूम कर रेस्टोरेंट मे बैठे ग्राहकों को देखने लगा, सभी उसकी

सुंदर बेटी को देख रहे थे. उसने अपनी नज़रें फिर रिया के सुंदर

चेहरे पर कर दी, और अपना हाथ टेबल के नीचे कर उसकी नंगी

जांघों पर रख धीरे धीरे सहलाने लगा.

एक अजीब सी सनसनी दौड़ गयी रिया के शरीर मे लेकिन उसने वो हाथ

हटाया नही, "इस बढ़ी हुई दाढ़ी मुछ मे आप कितने अलग अलग दीखते

है." जब आपने मुझे चूमा तो आपकी मुछ मुझे गढ़ रही थी."

"में इन्हे बढ़ाना नही चाहता था लेकिन अगर तुम सड़क पर हो तो

हालात मजबूर कर देते है," उसने जवाब दिया.

वो उसकी आँखों मे झाँकते हुए अपने हाथ को उपर की ओर बढ़ाता रहा

और जब उसके हाथों ने उसकी पॅंटी की एलास्टिक के अंदर हाथ डाला तो

वो उछल पड़ी, एक शीत लहर दौड़ गयी उसके शरीर मे. वो उसके

पॅंटी की एलास्टिक से खेलता रहा और उसकी मुलायम चॅम्डी को सहलाता

रहा.

दोनो एक दूसरे की आँखों मे देख रहे थे कि आज़य का हाथ उसकी

जांघों के बीच पहौन्च गया.

उसके हाथों ने जैसे उस पर कोई जादू कर दिया हो ना चाहते हुए

उसकी टाँगे अपने आप खुल गयी और उसकी उंगलियाँ उसकी चूत के किनारे

को छूने लगी.

उसे पता था कि जो रहा है वो ग़लत है, दिमाग़ के किसी कोने से

आवाज़ आ रही थी कि वो इसे रोक दे पर दिल था कि ना जाने किस भावना

मे बहा हुआ था. पिता की जुदाई कर दर्द अब भी उसके सीने मे था,

हर लड़की को अपने बाप का साथ चाहिए, और रिया को अपने बाप की

काफ़ी ज़रूरत थी.

"क्या आज भी तुम पापा की वही पुरानी रिया हो? उसने प्यार भरी आवाज़

मे पूछा.

"रिया का चेहरा खुशी से उछल पड़ा और होठों पर एक मीठी मुस्कान

आ गयी, आज वो अपने पिता के साथ थी एक इंसान के साथ, एक जानवर

के साथ नही जो वो कभी बन गया था. "हाँ डॅडी में आज भी

आपकी वही प्यारी रिया हूँ, आप कहाँ चले गये थे मुझे छोड़ कर?

"में बहोत प्यार करता हू तुमसे...." कहकर उसने रिया को अपनी ओर

खींचा और उसके होठों को एक बार फिर चूम लिया.

इस प्यार ने रिया के दिल मे एक अजीब सी खुशी भर दी थी. उसने रिया

को अपने से अलग किया, "चलो में तुम्हे अपना वॅन दिखाता हूँ,

यहीं पास मे है."

रिया के दिमाग़ ने एक बार फिर उसे आगाह किया कि अब भी समय है वो

पीछे हट जाए, पर दिल था की मानने को तैयार नही था. वो अपने

पिता के साथ रहना चाहती थी, उसके प्यार को पाना चाहती थी जिसके

लिए वो बरसों से तड़प रही थी.

आज़य ने टेबल पर बिल के पैसे छोड़े और रिया का हाथ पकड़

रेस्टोरेंट के बाहर आ गया. रिया उसके हाथो मे हाथ डाले चल रही

थी. वहाँ पर खड़ी कई ट्रक और कारों को पार करते हुए वे उसकी

वॅन के पास आ गये

आज़य ने पॅसेंजर साइड का दरवाज़ा खोला और रिया की वॅन मे चढ़ने मे

मदद करने लगा. रिया की छोटी ड्रेस उपर चढ़ते समय जब उपर

हुई तो उसकी नज़र रिया की भरे हुए चूतदों पर पड़ी और साथ ही

उसकी निगाह उसकी पॅंटी पर गयी जहाँ एक धब्बा सा बना हुआ था.

"ओह्ह्ह्ह कितना अछी तरह से डेकरेट किया हुआ अंदर से," रिया वॅन के

अंदर की सुंदरता देखते हुए बोली.

"हाँ ये मेरा घर ना होते हुए भी घर है, एक चलता फिरता घर."

उसने कहा.

थोड़ी देर वॅन का निरक्षण करने के बाद वो एक छोटे से पलंग या

दीवान की ओर बढ़ गयी. दीवारों पर कई तस्वीरे लगी हुई थी.

"डॅडी! ये तो सब मेरी तस्वीरे है," दीवारों पर टेप सी चिपकी

तस्वीरों को पहचानते हुए बोली.

"मेने तुमसे कहा था ना कि तुम मेरी प्यारी गुड़िया हो." उसने कहा.

आज़य की बातों ने जैसे उसके दिल को छू लिया था, जिस इंसान को वो

नफ़रत करती थी आज उसी के लिए उसके दिल मे प्यार उमड़ पड़ा, "सही

मे में हूँ?"

उसने एक तस्वीर की ओर इशारा किया जिसमे वो और रिया घुटनो तक पानी

मे समुद्र मे खड़े थे, लहरें उनके पावं को छू कर लौट जाती.

उसने एक बिकिनी पहन रखी थी और सूरज की चमकती धूप मे उसका

बदन चमक रहा था.

"हाँ ये उस समय की तस्वीर है जब आप हमे गोआ ले गये थे," उसने

याद करते हुए कहा, "मुझे बहोत मज़ा आया था वहाँ लेकिन पानी

कितना ठंडा था है.. ना."

"तुम उन छुट्टियों को लेकर कितनी खुश थी ना." आज़य ने उसे याद

दिलाते हुए कहा.

"आप बहोत बदल गये है?" रिया उसके मधुर जाल मे आसानी से

फस्ते हुए बोली.

 
वो अपनी गुड़िया को देखने लगा जो दीवान पर करीब करीब लेटी थी,

पीछे की ओर सिर किए उसका मासल बदन उस गुलाबी ड्रेस मे लिपटा हुआ

था और उसकी सुडौल और लंबी टाँगे कितनी अछी लग रही थी साथ ही

उसकी भारी और कड़ी चुचियाँ.

"और तुम मेरी गुड़िया एक सुन्‍दर परी बन गयी हो." उसने कहा.

उसने झुकते हुए एक बार फिर उसके होठों को अपने होठों मे लिया और

इस बार उसके होठों कोखोलते हुए अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी. रिया

ने भी अपनी जीब उसकी जीब से मिला दी लेकिन इस वॅन मे अकेले मे उसे

डर लग रहा था.

उसे लगा कि एक शीत लहर ने उसके निपल को तना दिया है, लेकिन ये

उसका भ्रम था आज़य की उंगलिया उसकी गुलाबी ड्रेस के उपर से उसके

निपल को दबा रही थी. मन ही मन जितना वो उससे नफ़रत करती

शरीर की काम अग्नि उसकी हरकतों का उतना ही साथ दे रही थी. उसकी

चूत मे अजीब सी हलचल मची हुई थी जो गीली होती जा रही थी.

"ये सही नही है.. छोड़ दीजिए मुझे,"

"तुम अपने पापा से प्यार करती हो ना गुड़िया..." उसने उसे जोरों से

चूमते और उसके होठों को चूस्ते हुए कहा.

उसने उसके दाएँ हाथ को पकड़ा और उसकी मुलायम और नाज़ुक उंगलियों

को अपने तने लंड पर दबा दी. रिया ने ना चाहते हुए भी उसके लंड

को पॅंट के उपर से पकड़ लिया, वो तन रहा था. वो अपना हाथ खींच

लेना चाहती थी लेकिन उसके लंड की गर्मी ने उसके हाथो को जैसे

बाँध दिया हो. उसकी उंगलिया मन्त्र मुग्ध हो उसके लंड की लंबाई और

मोटाई मापने लगी.

रिया के मुँह से खेलने के बाद उसका जीब उसके कान की ओर बढ़ी, अपनी

सांसो की गरम भाप उसने उसके कान पर छोड़ी और फिर उसके कान की लौ

को चूमने लगी. एक अजीब खुशी उसके बदन मे दौड़ गयी.

"प्लीज़ पापा रुक जाइए ये सही नही है," रिया ने कहा चाहा लेकिन

उसकी आवाज़ गले मे घूट कर रह गयी और उसकी उंगलिया अब भी अपने

पापा के लंड से खेल रही थी.

"आराम से गुड़िया.." वो धीरे से उसके कान मे पुशफुसाया, "में भी

देखूं कि मेरी गुड़िया मेरी ग़ैरहज़री मे मुझे कितना मिस करती रही

थी."

रिया की चूत मे खुजली मचनी शुरू हो गयी थी, "मुझे डर लग

रहा है पापा."

"कुछ नही होगा, इसमे डरने की क्या बात है, तुम्हे अपने पापा पर

भरोसा है ना.." उसने कहा.

उसने अपने पॅंट की ज़िप खोल कर अपनी पॅंट ढीली कर दी. रिया की

उंगलियाँ उसकी पॅंट के अंदर पहुँची और उसके नंगे खड़े लंड पर

जाकड़ गयी. जैसे ही उसकी हथेली ने तने हुए लंड को अपनी मुठ्ठी मे

लिया उसके दिल की धड़कने तेज हो गयी. वो उसके लंड को मसल्ने लगी

और वहीं उसकी चूत गीली होने लगी.

वो अपने घुटनो के बाल हो गया और रिया के चाहेरे को पकड़ अपना लंड

उसके मुँह के आगे कर दिया. रिया को जैसे ही अहसास हुआ कि वो क्या

करने जा रहा है उसने वहाँ से उठना चाहा तो रिया के चेहरे पर

उसकी पकड़ और कस गयी.

"तुम्हे मारने पर मुझे मजबूर मत करो..." उसने गुर्राते हुए कहा,

वो जानवर वापस आ गया था.

अपने बाप के गुस्से और मार का ख़ौफ़ आज भी उसके मन मे इतना था कि

रिया ने खुद को उसके हवाले कर दिया. उसने उसके होठों को अपने लंड

पर दबाया और उसका लंड रिया की खुले और गरम मुँह मे घुसता

चला गया.

उसके वीर्य की बूंदे के स्वाद ने उसके मुँह को नमकीन सा कर दिया

था, मन मे डर पर दिल मे चाहत लेते हुए रिया उसके लंड को चूसने

लगी.

"ऑश गुड़िया तुम्हारा मुँह मेरे लंड पर कितना अच्छा लग रहा है..."

वो खुशी मे सिसक पड़ा.

वो उसके सिर को पकड़े उसके सिर को अपने लंड पर उपर नीचे करने

लगा. कभी तो वह अपने लंड को उसके गले तक धकेल देता. रिया अब

मन लगाकर जोरों से उसके लंड को चूस रही थी.

"मुझे उमीद नही थी कि इस जनम मे तुमसे दुबारा मुलाकात होगी, ये

तो हमारा नसीब था कि हम टकरा गये," उसने झूट बोला, "हमे तो

मिलना ही था गुड़िया."

उसका एक हाथ उसके सिर पर से खिसक कर उसकी गर्दन पर आ गया और

उसकी गुलाबी ड्रेस की ज़िप को पीछे से नीचे तक खींचता चला

गया. रिया ने महसूस किया कि उसकी ड्रेस कुछ ढीली पड़ गयी है.

रिया उसके लंड को चूस रही थी और उसने आगे से उसकी ड्रेस को

नीचे करते हुए उसके भरी चुचियों को नंगा कर दिया. अब वो उन

चुचियों को अपने हाथों मे ले मसल्ने लगा, भींचने लगा.

"पापा की प्यारी गुड़िया अब काफ़ी बड़ी हो गयी है.." उसने कामुक भरी

आवाज़ मे कहा.

उसने अपने लंड को रिया के मुँह से निकाला और उसे थोड़ा धक्का देते

हुए पलंग पर चित लीटा दिया और खुद उसके बगल मे लेट गया.

आज़य रिया की आँखों मे झाँकने लगा जहाँ उसे डर के साथ चाहत

भी नज़र आई. वो मुस्कुराते हुए उसकी ओर बढ़ा और अपने होंठ उसके

होठों पर रख अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी. रिया पहले तो घबराई

लेकिन चाहत डर पर हावी हो गयी और उसने अपनी जीब उस जीब से मिला

दी और जोरों से उसकी जीब को चूसने लगी. वो उसकी खड़ी चुचियों

को मसल्ने लगा और रिया के मुँह से मादक सिसकारियाँ फूटने लगी.

"तुम्हारा शरीर कितना अछा लग रहा है," आज़य ने उससे कहा.

उत्तेजना अपने चरम सीमा पर थी. रिया उसे पाना चाहती थी, उसके

नाज़ुक हाथ उसके खड़े लंड पर जाकड़ गये और वो उसे ज़ोर से मसल्ने

लगी. चूत मे उठती गर्मी और खुजली से वो परेशान हो रही थी,

उससे रहा नही जा रहा था.

"ओह पापा मुझे चूओदिए प्लीज़ अब नही सहा जाताअ ओह पापा

अपना खड़ा लंड मेरी चूत मे डाल कर मुझे प्यार कीजिए पापा..." वो

सिसक पड़ी.

आज़य खुद पर मुस्करा पड़ा, उसे शुरू से ही पता था कि वो आज इसे पा

के रहेगा. उसकी हाथ उसकी चुचियों से खिसकते हुए नीचे की ओर

बढ़े, पहले तो उसने उसकी गुलाबी ड्रेस के उपर से उसके पेट को

सहलाया फिर अपने होठों से चूमने लगा.

फिर नीचे खिसकते हुए वो उसकी टाँगो के बीच आ गया. उसकी ड्रेस

को उसकी कमर तक उपर कर वो उसकी नंगी जांघों को चूमने लगा.

अपनी जीब से चाटने लगा, फिर अपनी हथेली उसकी गीली हुई पॅंटी के

उपर से उसकी चूत के उपर रख दी.

फिर चूत को मसल्ते हुए वो अपनी जीब पॅंटी के साइड से उसकी चूत

के किनारों पर फिराने लगा, रिया की सिसकिया तेज हो गयी. काम अग्नि

की ज्वाला उसके शरीर मे तांडव मचाने लगी. उसने अपनी टाँगे आपस

मे जोड़ी और आज़य ने उसकी पॅंटी नीचे खिसका दी. रिया ने पॅंटी को

अपने पैरों मे फँसा निकाल डी और दूर उछाल कर फैंक दी.

एक बार फिर उसने अपनी टाँगे फैला दी और आज़य का चेहरा उसकी टाँगो के

बीच आ गया. उसने अपना मुँह उसकी चूत पर रखा और उससे छूटते

शहद को पीने लगा, वो जोरों से उसकी चूत को चूस रहा था.

आज़य की जीब ने तो जैसे उसकी अग्नि को और भड़का दिया, "ओ डेडडी

हां चूसो ऐसे ही चूवसो और ज़ोर से चूसो ऑश हाआना काअतो

मेरी चूओत को ऑश."

रिया ने दोनो हाथों से उसके सिर को पकड़ा और अपनी टाँगे उसकी गर्दन

मे फँसा अपनी चूत उपर को उठाते हुए उसके मुँह को अपनी चूत

पर और दबा दिया.

"हाआँ पाप चूवसिए अपनी इस गुड़िया की चूत को ऑश हाआँ और

चूवसिए. ऑश हाआँ मेरा छूटने वाला है..हां आरू ज़ोर से

चूसिए."

सिसकते हुए उसने अपनी टाँगे और कस दी, तभी जैसे ज्वालामुखी फट

पड़ा हो उस तरह उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत की अग्नि शांत तो

हो गयी लेकिन बुझी नही थी.

आज़य एक बार फिर घुटनो के बल हुआ और उसने अपनी शर्ट उतार दी फिर

अपनी पॅंट के बकल खोले और बैठ गया, उसकी बेटी ने उसकी पॅंट को

उसकी टाँगो से अलग कर दिया. अब रिया पीछ को हो लेट गयी और अपनी

टाँगे फैला दी.

आज़य उसकी टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को पकड़ उसकी चूत

के मुँह पर रख दिया. फिर धक्का देते हुए उसने अपने लंड को अंदर

घुसा दिया. रिया ने भी अपनी कमर को उपर उठा उसके लंड को अपनी

चूत को जड़ तक ले लिया.

आज़य अब उसकी चुचियों को पकड़ ज़ोर ज़ोर के धक्के मार रहा था.

रिया ने अपनी टाँगे उसकी कमर मे लपेट ली और नीचे से कमर उछाल

उसके हर धक्के का जवाब दे रही थी.

'ओह पापा चूडिए अपनी गुड़िया को ऑश हाआँ और ज़ोर से पापा ऑश

हाआँ और ज़ोर से." वो सिसक रही थी और वो धक्के मार रहा था.

'हां गुड़िया ले ले मेरे लंड को आं अपनी चूत मे जाकड़ ले इसे अपनी

चूत मे हाआना ले और लीयी"

फिर आज़य ने करवट बदली और रिया को अपने उपर ले लिया. उसके

चूतदों को नीचे से पकड़ वो अपनी कमर उठा लंड को अंदर

घुसाने लगा. रिया ने अपनी टाँगो को उसकी इर्द गिर्द ठीक से रखा और

फिर उछल उछल कर वो धक्के लगाने लगी. वो उपर उठती और ज़ोर से

नीचे बैठते हुए उसके लंड को अपनी चूत की जड़ तक ले लेती.

क्रमशः..................

 
14

गतान्क से आगे.......

दोनो की साँसे तेज हो चली थी और दोनो झड़ने की कगार पर थे.

रिया नीचे झुकी और अपन चुचि को अपने पापा के मुँह मे दे दिया. आज़य

ने भी उसके निपल को मुँह मे भर चूसने लगा.

ऑश पापा हाँ खा जाइए मेरी चुचि को ऑश हां मारो मेरी चूत

ज़ोर से ऑश हाअ और अंदर तक दूऊ ऑश में तो गयी...." और उसकी

चूत ने पानी छोड़ दिया.

आज़य ने भी अपनी कमर उपर तक उठा अपने लंड को और अंदर तक

धकेलते हुए पानी छोड़ दिया. रिया की चूत से उसके पानी और पापा के

वीर्य की मिश्रित धार बह रही थी, वो उसकी छाती पर गिर गहरी

साँसे लेने लगी.

शरीर की काम अग्नि शांत हुई, दिल की चाहत ठंडी पड़ गयी और

दिमाग़ पहली बार दिल पर हावी होने लगा.

"ये मेने क्या कर डाला," उसने अपने आपसे पूछा.

"मेने इन्हे क्यों ऐसा करने दिया? वो नींद मे बड़बड़ा उठी, जय उसकी

बगल मे गहरी नींद सोया हुआ था.

"मेने इस जानवर को कैसे दुबारा अपनी जिंदगी मे दाखिल होने

दिया," उसने अपनी आँखों से बहते आँसुओं को पौंच्छा, उसे अहसास हुआ

जो कुछ उस दिन हुआ वो उसकी ग़लती नही थी. वो बकरी की खाल ओढ़े

एक भेड़िया था जिसने उसे अपनी बातों से बहका और फुसला लिया था.

आख़िर जो कुछ हुआ रिया ने उसे स्वीकार कर लिया और पक्का मन बना

लिया कि फिर वो उसे अपनी जिंदगी मे दाखिल नही होने देगी. उसने अपने

बगल मे लेटे अपने भाई जय पर निगाह घुमाई फिर अपनी आँखों से

बहते आंशुओं को पौछ सो गयी.

सुबह का सूरज उग चुका था और अपनी रोशनी चारों तरफ फैलने

लगा था. सूरज की किर्ने कमरे के पर्दों से होती हुई कमरे को उजाले

से भरने लगी जिसमे रिया और जय एक ही बिस्तर पर सो रहे थे. आज

से पहले कभी दोनो पूरी रात साथ सोकर नही गुज़ारी थी.

पीछले कई सालों मे वो एक दूसरे को अछी तरह समझ चुके थे

थे. उन्होने कभी इस बात की परवाह नही की कि उनके रिश्ते को लेकर

समझ क्या कहेगा या फिर अगर मा को पता चला तो वो क्या कहेगी.

दरवाज़े पर हुई आहट ने रिया की नींद खोल दी. उसने जल्दी से अपने

शरीर को कंबल से ढका और अपने बगल मे लेटे अपने भाई जय को

देखने लगी.

जैसे ही दरवाज़ा खुला उसकी तो जैसे सांस ही हलक मे अटक गयी.

झटके से दरवाज़ा खुला और उसकी मा हाथ मे कपड़ों के बाल्टी लिए

कमरे मे आ गयी. उसने बाल्टी को नीचे रखा और अचानक उसकी नज़र

रिया पर पड़ी.

"ये क्या है? उनकी मा अस्चर्य भरे स्वर मे कहा, "तुम यहाँ इसके

कमरे मे क्या कर रही हो?

थोड़ी ही देर मे कमरे मे बिखरे दोनो के कपड़े देख उनकी मा के

समझ मे सब आ गया. उनका चेहरा गुस्से से लाल होने लगा.

"तुम दोनो समझते क्या हो अपने आप को? कोई लाज शरम है कि नही

है, मुझे तो देख कर और सोच कर ही तुम दोनो से घृणा होने लग

रही है. " उनकी मम्मी गुस्से से बोली," तुम दोनो की आज की हरकत

देख मुझे लगता है कि तुम दोनो की इस घर मे कोई ज़रूरत नही है

निकल जाओ हमारे घर से तुम दोनो अभी की अभी और कभी लौट कर

वापस मत आना."

मम्मी की बात सुनकर रिया गुस्से से बिस्तर से उठी. "आप हमे क्या

समझती है, पहले तो पापा के साथ ऐसा व्यवहार करती रही. उन्हे

जाने से रोकने के बदले आप चुप चाप बैठी रही. आपने हमे जनम

ज़रूर दिया होगा लेकिन आप हमारी मा कभी नही बन सकी. मुझे कई

बार अपनी जिंदगी मे आपकी जारोरत पड़ी लेकिन आपको मेरे लिए समय

ही नही था. आप ने जय की मा बनने की कोशिश ज़रूर की लेकिन आप

बन ना सकी, बल्कि आपकी जगह मेने उसे मा बनकर उसका साथ दिया.

इससे पहले कि आप हमारे बारे मे कोई राई कायम करे आप अपने आप को

आईने मे देख लीजिए, ना आप पत्नी बन सकी ना ही आप अपने बच्चो

की मा बन सकी."

रिया ने ज़मीन पर बीखरे कपड़ों मे से अपने कपड़े उठाए और पहन

लिए. जय भी उठ चुका था और लेटा हुआ अपनी बेहन को और अपनी मा

को देख रहा था जो दरवाज़े पर खड़ी थी.

"जय उठो यहाँ से और अपना समान पॅक करो, अभ यहाँ पर हमारी

ज़रूरत नही है," रिया ने अपनी मम्मी की ओर देखते हुए कहा. "हम

यहाँ से कहीं दूर जाकर अपनी जिंदगी नये सीरे से शुरू करेंगे."

"में क्या कर सकती थी? उसकी मा रोते हुए बोली, "तुम्हारे पिता ने

कभी इस घर को अपना घर नही समझा, हमेशा एक अजनबी की तरह

रहे वो घर मे. उनके जानवर जैसे व्यवहार के आगे हम कर भी क्या

सकते थे?"

रिया ने अपने आँसुओं को रोकने की बहोत कोशिश की लेकिन वो रोक ना

पाई. अब भी दिल के किसी कोने से वो अपनी मा को प्यार करती थी,

लेकिन फिर भी जो कुछ हुआ उसके लिए वो अपनी मा को कभी माफ़ नही

कर सकती थी, "आख़िर तुम उन्हे रोकने की कोशिश तो कर सकती थी."

जब रिया घूम कर आल्मिराह से अपने और जय के कपड़े निकाल कर बिस्तर

पर रखने लगी तो उनकी मा वहाँ से चली गयी. जय पलंग से उठा

और वही कपड़े जो उसने रात को पहन रखे थे पहन कर तैयार हो

गया.

"जय इन सब समान को दो तीन बॅग और कार्टून मे पॅक कर लो." रिया

ने कहा.

"लेकिन हम जाएँगे कहाँ? उसने रिया से पूछा.

रिया ने अपने भाई की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली, "चिंता मत

करो, सब ठीक हो जाएगा, में तुम्हारा ख्याल रखूँगी और तुम मेरा

ख्याल रखना."

थोड़ी देर बाद जय स्टोर रूम से दो बड़े कार्टून ले आया. रिया अपने

और जय के कपड़ों को अछी तरह समेटने लगी. फिर कमरे मे नज़रें

घूमाने लगी कि कहीं कुछ छूट तो नही गया.

"तुम समान पॅक करो." रिया ने कहा, "में अभी आती हूँ."

रिया अपने कमरे से निकल कर नीचे हाल आ गयी. जिस घर को उसने

बचपन से अपना समझा था पता नही क्यों आज वो एक पराए घर

जैसा लग रहा था. पुरानी यादें पुरानी बातें, इस घर मे बीताए

हुए लम्हे उसकी आँख मे फिर आँसू ले आए. उसने बहोत कोशिश की

लेकिन फिर चंद कतरे आँखेओं से बह ही गये. उसके कानो मे अपने

बाप की आवाज़ अभी गूँज रही थी.

"तुम पापा की प्यारी गुड़िया हो ना?"

रिया को लगा कि इन आवाज़ों से उसके कान फॅट जाएँगे, उसने अपने दोनो

हाथ कानो पर रख दिए और एक कुर्सी पर बैठ गयी, आँसू तर तर

उसकी आँखों से बह रहे थे.

"तुम अपने पापा से प्यार करती हो ना?"

"वो मेरी ग़लती नही थी, तुम ही वहशी जानवर बन गये थे," वो ज़ोर

से चिल्लाई जैसे की अपने कानो मे गूँजती आवाज़ को अपने से दूर

भागना चाहती हो जो चाह कर भी उसके कानो से नही जा रही थी.

"मेने कुछ पैसे तुम्हारे लिए भी बचा कर रखे है,"

"वो मेरी ग़लती नही थी," वो एक बार फिर ज़ोर से चिल्लाई. हराम जादे

वो मेरी ग़लती नही थी, तुमने मुझे इस्तामाल किया था."

अपने जज्बातों को संभाल वो वापस अपने कमरे मे आई और अपनी

आल्मिराह के लॉकर को खोल उसने वो पैसे निकाले जो वो आज तक वो जमा

करती आई थी.

"क्या तुम तैयार हो?" उसने जय को पूछा.

"हां ऐसा लगता है," जय को अब भी विश्वास नही हो रहा था कि वो

ये घर छोड़ कर जा रहे है.

 
थोड़ी देर बाद रिया की गाड़ी उस घर से दूर होने लगी. रिया ने अपना

एक हाथ जय के हाथ पर रखा और उसे सहलाने लगी.

"जय जो भी होगा अच्छे के लिए होगा, में हूँ ना तुम्हारे साथ."

* * * * * * * * * * * *

उस रात राज ने दो बार रोमा के बिस्तर से निकलने की कोशिश की लेकिन

रोमा की बाहें उसके बदन से ऐसे लिपटी थी कि वो निकल ना सका, अगर

वो उसकी बाहों को हटता तो रोमा की नींद खुल जाती जो वो नही

चाहता था.

"प्लीज़ मुझे छोड़ कर मत जाओ," रोमा नींद मे बड़बड़ाई.

राज ने रोमा को कस मे अपनी बाहो मे भर के अपने से चिपका लिया और

उसके चेहरे को चूमते हुए बोला, "डरो मत में कहीं नही जा रहा."

"अगर तुम्हारी इच्छा हो रही है तो तुम मुझे चोद सकते हो." रोमा ने

उसे चूमते हुए कहा.

"में तुमसे प्यार करता हूँ इसलिए यहाँ तुम्हारे पास हूँ ना कि

तुम्हारे शरीर के लिए," राज ने उसके कान मे फुसफुसाते हुए

कहा, "हां अगर तुम्हारी इच्छा हो रही है...."

राज अपने हाथ को उसके शरीर पर फिराने लगा, अपनी उंगलियों से उसके

बदन के नाज़ुक हिस्सों को घिसने लगा. रोमा के शरीर मे एक नई मस्ती

छाने लगी. उसे राज की हर्कतो से गुदगुदी होने लगी थी साथ ही

चूत मे हलचल भी हो रही थी.

"प्लीज़ राज मत करो ना गुदगुदी हो रही है आउच....."

गुदगुदी की वजह से उसे हँसी छूट रही थी. अपनी हँसी को रोकने के

लिए उसने अपना चेहरा तकिये में छुपा लिया, लेकिन राज था कि उसे

छेड़ता जा रहा था. उसे पता था कि रोमा के किस अंग को किस समय

छूना चाहिए.

रोमा अपनी हर कोशिश से राज को रोकने की कोशिश कर रही थी, आँख

बंद किए वो उसे मार रही थी धक्का दे रही थी लेकिन राज फिर भी

उस पर हावी था. आख़िर हंसते हंसते रोमा की साँसे उखाड़ने लगी और

आँखों मे आँसू आ गये तो राज ने अपने हाथ पीछे खींच लिए.

"तुम सच मे कभी कभी पागल हो जाते हो?" रोमा ने एक गहरी सांस

लेते हुए कहा.

राज ने कुछ कहा नही. रोमा पीठ के बल लेटी हुई थी, राज उसकी

पीठ पर लेट गया और अपना हाथ उसके नीचे करते हुए उसकी फूली

हुई चुचियो को अपने हाथ मे ले भींचने लगा. वो उसके निपल से

खेलने लगा, उसका लंड तन खड़ा रोमा की गंद पर ठोकर मारने लगा.

"अब आगे तुम्हारा क्या करने का इरादा है?" रोमा ने अपने भाई से

पूछा.

"में तो तुम्हे चोदने की सोच रहा था." राज ने उसकी चुचियों को

जोरों से भींचते हुए कहा.

"जिंदगी मे आगे क्या करने का इरादा है? में ये पूछ रही थी,"

रोमा ने कहा, "या फिर ये चुदाई, ये घर और तुम्हारी वो कहानिया

और तालाब का किनारा यही तुम्हारे लिए जिंदगी है."

"मुझे लगा कि तुम्हे मेरी कहानियाँ पसंद है." राज ने कहा.

उसकी बात सुनकर रोमा मुस्कुरा दी. "मुझे तुम्हारी कहानिया बहोत

पसंद है, लेकिन इससे तो जिंदगी नही चलेगी, आगे भी तो कुछ

करना पड़ेगा और में जानती हूँ कि जिंदगी में तुम बहोत कुछ कर

सकते हो."

राज उसके पीठ से उतर उसके बगल मे लेट गया, "लेकिन अचानक ये सब

बातें क्यों?' उसने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा.

"मेरे फाइनल एग्ज़ॅम अगले महीने शुरू हो रहे हैं," रोमा ने उसे याद

दिलाते हुए कहा, "उसके बाद कॉलेज तो जाना नही है, तो मेने सोचा

कि क्यों ना हम साथ साथ रहें."

"तुम मुझसे बहोत प्यार करती हो ना?" रा ने पूछा.

"तुम जानते हो कि में तुमसे बहोत प्यार करती हूँ. पर क्या तुम

मुझसे इतना ही प्यार करते हो कि यहाँ से निकल मेरे साथ एक नई

जिंदगी शुरू कर सको?" रोमा ने उसके हाथ को अपने हाथ मे लेते हुए

कहा.

राज उसकी भावनाए और उसके प्यार को समझ रहा था. थोड़ी देर वो

सोचता रहा फिर बोला, "में क्या करूँ?

"कोई अछी सी नौकरी ढूंड कर कर लो." रोमा ने कहा, "साथ साथ

अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करो. कुछ ऐसा करो कि जिंदगी मे फिर

पीछे मूड कर देखने की ज़रूरत ना हो."

राज को रोमा पर झल्लाहट आने लगी थी, वो कई बार ये भाषण अपने

माता पिता के मुँह से सुन चुका था, क्या बुराई थी कि अगर वो कुछ

नही कर रहा था तो.

"राज" रोमा ने उसे पुकारा.

"क्या है बोलो, में सुन रहा हूँ." उसने खीजते हुए कहा.

"नही मुझे लगता है कि तुम मेरी बात नही सुन रहे हो" राज के इस

रूखेपण से रोमा का दिल भर आया और उसकी आँखों मे आँसू आ

गयी. "अगर तुम यहाँ रहना चाहते हो तो में तुम्हे रोकूंगी नही

लेकिन मेरे लिए रहना शायद मुश्किल हो." रोमा ने जवाब दिया.

"रोमा में तुम्हे रोकुंगा नही, तुम्हारी भी अपनी जिंदगी है." राज

ने रूखेपण से कहा.

रोमा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, "तुम बहोत ही मतलबी हो, क्या

तुम मेरे लिए इतना भी नही कर सकते..... तुम्हारे लिए ये तालाब का

किनारा ही सब कुछ है, में तुम्हारे लिए कुछ भी नही?"

राज रोमा की बात सुनकर कुछ बोला नही. उसके बगल मे लेटा हुआ वो

सोच रहा था कि वो क्या करे. वो सोचता रहा.

"राज" रोमा ने उसे पुकारा.

राज कुछ कहना चाहता था लेकिन उसकी आँखों मे आँसू आ गये. एक

अंजाने डर ने जैसे उसके अंदर की सारी ताक़त छीन ली थी. वो यहाँ

रहते हुए तो रोमा को जय जैसे लोगों से तो बचा सकता था. पर

समाज और दुनिया के बीच रहकर उसकी रक्षा करना उसका ख़याल

रखना, ये सब वो कैसे करे उसकी समझ मे नही आ रहा था.

"राज"

राज ने कुछ कहा नही बल्कि अपने चेहरे को उसके चेहरे से सटा दिया.

रोमा को जब राज के रोने का अहसास हुआ तो वो समझ गयी और उसने अपनी

बाहों खोल उसे अपनी बाहों मे बाँध लिया. उसकी आँखों से बहते

आँसुओं को उसने चूम लिया.

"में तुमसे बहोत प्यार करती हूँ, और बड़ी मुश्किल से तुम्हे पाया

है और में तुम्हारे प्यार को और तुम्हे खोना नही चाहती" रोमा ने

उसे चूमते हुए कहा, "अब हिम्मत से काम लो और मेरे साथ चलो,

में तुम्हारे बिना ज़्यादा दिन नही रह पाउन्गि."

"रोमा तुम्हे जिंदगी मे कोई मुझसे भी अच्छा मिल जाएगा?" राज ने

कहा.

"लेकिन तुम तो नही ना." कहते हुए उसने राज के आँसुओं से भरे

चेहरे को अपने हाथों मे लिया और उसके होठों को चूसने लगी.

राज सोचने लगा, उसकी जिंदगी कितनी आकेली और तन्हा रही थी आज

तक. जब उसके दिल मे रोमा के लिए भावनाए जनम ले रही थी, तो

वो कितना डर रहा था कि कहीं इसे पता ना चल जाए. उस समय उसे

नही पता था कि रोमा के दिल मे भी उसके लिए वही जज़्बा वही प्यार

था. पर आज जब कि दोनो एक दूसरे से अपने जज्बातों का इज़हार कर

चुके थे एक दूसरे को अपना चुके थे तो अचानक वो रोमा को खोने

के डर से कांप उठा. उसे लगा कि वो रोमा के बिना नही रह पाएगा.

"ठीक है में चलूँगा तुम्हारे साथ," राज ने आख़िर अपने दिल की

बात कह ही दी.

"सच मे, तुम आओगे मेरे साथ," रोमा को अपने कानो पर विश्वास नही

हो रहा था, "एक बार फिर से कहो की तुम आओगे."

"हां मे आउन्गा तुम्हारे साथ" उसने कहा, वो अपनी प्यारी बेहन और

प्रेमिका को खुश देखना चाहता था.

"ओह्ह्ह्ह राज में बता नही सकती कि में कितनी खुश हूँ," रोमा ने

खुशी मे कहा, "राज हम दोनो आने वाली जिंदगी मे साथ साथ

रहेंगे और एक दूसरे को खुश रखेंगे."

खुशी के मारे रोमा ने राज को अपने उपर खींच लिया. उसने अपनी टाँगे

फैला दी और अपनी टाँगे उसकी कमर मे लपेट ली, "क्या तुम तयार हो?"

इन जज्बाती बातों के बीच उसकी उत्तेजना बह गयी थी और लंड एक बार

मुरझा कर ढीला पड़ गया था, "नही." उसने धीरे से कहा.

"मुझे छुओ..... मुझे भीचो.... मुझे मस्लो...." उसने राज से

कहा, "और जब तुम्हारा लंड खड़ा और तन जाए तो मुझे प्यार

करो....... हमारी आने वाली जिंदगी के लिए हम जश्न मनाएँगे."

राज ने अपने होंठ उसके होठों पर रखे फिर उसके होठों को खोलते

हुए अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी. रोमा ने भी उसकी जीब से अपनी

जीब मिला दी और उसकी जीब को चूसने लगी.

क्रमशः..................

 
15

गतान्क से आगे.......

राज ने अपने दोनो हाथ उसकी चुचियों पर रख उन्हे मसल्ने लगा.

कभी वो उसके निपल को भींचता तो कभी उसकी चुचियो की गोलियों

को. उसने अपना चेहरा नीचे झुकाया और उसके निपल को अपने दांतो

मे ले हौले हौले काटने लगा.

रोमा के शरीर मे उत्तेजना बढ़ने लगी, वो उन्माद मे सिसकने

लगी, 'ऑश राज्ज्जज्ज्ज ऑश हाआँ काटो मेरी चूचियों को.... ओह हन

भींच डालो इनहूओ."

उत्तेजना मे रोमा अपनी कमर उठा अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़

रही थी.उसने महसूस किया कि राज का लंड तनने लग रहा है. उससे

रहा नही जा रहा था वो उसके लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती

थी.

राज ने अपनी टाँगो से रोमा की टाँगे और फैला दी और अपने को इस तरह

उसके उपर कर दिया कि उसका लंड ठीक उसकी चूत के मुँह पर लगा

था, लेकिन उसे अंदर घुसाने के बजाय वो अपने लंड को धीरे धीरे

उसकी चूत पर रगड़ने लगा.

ओह राज..... क्यों तडपा रहे हूऊऊ..... प्लीज़ घुसा दो ना

अंदर.... देखो ना मुझसे अब नही रहा जाता.... प्लीज़ चोदो ना

मुझे.." रोमा सिसक पड़ी.

पर राज ने उसकी करहों पर ध्यान नही दिया और अपने लंड को उसकी

चूत पर घिसता रहा. उसका लंड रोमा की चूत से छूटे पानी से पूरा

गीला हो चुका था. फिर अपने आपको थोड़ा नीचे खिसकाते हुए उसने

उसकी एक चुचि के निपल को अपने मुँह मे ले किसी बच्चे की तरह

चुलबुलाने लगा.

रोमा उत्तेजना मे किसी पंछी की तरह फड़फदा रही थी... उसे अब

बर्दाश्त नही हो रहा था. वो राज के सिर को पकड़ जोरों से अपनी

चुचि पर दबा रही थी.

"ऑश राज क्यों तडपा रहे हूऊ.... ओह प्लीज़ चोदो ना

मुझे .... डाल दो अपने लंड को मेरी चूओत मे......" रोमा अब उत्तेजना

मे जोरों से सिसक रही थी.

लेकिन आज की रात तो राज रोमा के साथ पूरी तरह खेलने के मूड मे

था, वो उछल कर रोमा के पेट पर बैठ गया और अपने खड़े लंड को

उसकी चुचियों के बीच की घाटी मे रख दिया. फिर उसकी दोनो

चुचियो को पकड़ अपने लंड पर दबाया और अपना लंड आगे पीछे

करने लगा.

रोमा भी अपने प्रेमी के खेल को समझ गयी और जब भी राज अपने

लंड को आगे की ओर धकेल्ता तो वो पहले तो अपनी जीब से उसे चाटती

और फिर दूसरी बार अपना मुँह खुला रखती जिससे लंड सीधा उसके मुँह

मे पल भर के लिए घूस्ता और बाहर निकल जाता.

राज ज़ोर ज़ोर से रोमा की चुचियों को चोदने लगा, रोमा उसके गीले

लंड को चाटती तो कभी चूस्ति. लेकिन रोमा की उत्तेजना आपे चरम

सीमा पर पहुँच चुकी थी, और अब एक पल भी रुकना उसके लिए

मुश्किल हो रहा था.

रोमा ने राज को धक्का दिया और उसे अपने से अलग कर दिया. राज पीठ

के बल बिस्तर पर था, और इसके पहले कि वो कई और शैतानी करता

रोमा उसके उपर चढ़ गयी और अपनी टाँगों को उसके अगल बगल मे

ढंग से रख उसके लंड को अपनी चूत से लगाया और उस पर बैठती

चली गयी.

थोड़ी देर उसके लंड पर बैठ वो उसके लंड को अपनी चूत मे अड्जस्ट

करती रही फिर थोडा सा उपर उठ ज़ोर से नीचे बैठ गयी और उसके

लंड को पूरा अपनी चूत मे ले लिया.

"ओह राज तुम्हारा गरम लंड मेरी चूत मे कितना अछा लग रहा

है....."

रोमा अब उछल उछल कर उसके लंड को अपनी चूत मे ले रही थी. रोमा

जब ठप की आवाज़ से उसके लंड पर बैठती तो राज भी अब अपनी कमर

उपर कर अपने लंड को और अंदर तक घुसा देता.

राज अब उसके कुल्हों को पकड़ नीचे से धकके मार रहा था. रोमा थी

कि वो और उछल उछल कर उसे चोद रही थी. उसने झुकते हुए अपनी

चुचि राज के मुँह मे दे दी. रोमा जब उपर उठती तो राज अपनी कमर

उपर उठा अपने लंड को अंदर घुसा देता और जब उसकी कमर नीचे को

होती तो रोमा ज़ोर से उसकी कमर पर बैठ जाती. दोनो ताल से ताल मिला

चुदाई कर रहे थे.

"हां राज ऐसे ही अंदर तक घुसा कर चोदो मुझे ओह राज आअज

भर दो मेरी चूत को अपने लंड से ओह. हाां और ज़ोर से धकक्के

मारो... और ज़ोर से... हाआँ "

राज ने रोमा को कमर से पकड़ा और करवट बदल ली. उसका लंड अभी

भी उसकी चूत मे घुसा हुआ था. करवट बदाल्ते ही रोमा ने अपनी

टाँगे उसकी कमर से लपेट ली और उसे बेतहाशा चूमने लगी.

राज ने उसकी दोनो चुचियों को मसल्ते हुए ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने

लगा. हर धक्के पर वो अपने लंड को उसकी चूत की जड़ तक पेल देता.

"ऑश राज हाआँ और ज़ोर से ऑश हाआँ फाड़ दो मेरी चूऊत को ऑश

मेरा छूटने वाला है ओह हाआअँ में गयी.." सिसकते हुए रोमा

की चूत ने पानी छोड़ दिया.

राज भी झड़ने की कगार पर था. पर उसने अपना लंड को रोमा की चूत

से बाहर निकाला और उसकी पेट पर बैठ अपने लंड को उसके मुँहे मे दे

दिया.

रोमा ने भी अपना मुँह खोला और उसके लंड को चूसने लगी. राज ने दो

तीन धक्के ज़ोर के उसके मुँह मे लगाए और अपना पानी रोमा के मुँह मे

छोड़ दिया जिसे रोमा पी गयी. दोनो की साँसे उखाड़ रही थी. राज उसके

उपर से हट उसके बगल मे लेट गया.

"राज मुझे कभी छोड़ कर मत जाना." रोमा उसकी छाती पर अपना सिर

रखते हुए फुसफ्साई.

"कभी नही जाउन्गा मेरी जान." राज उसके बालों मे हाथ फेरते हुए

बोला.

"राज मुझे अपने से चिपका लो, में थोड़ी देर सोना चाहती हूँ."

* * * * *

दूसरी सुबह राज अपने किचन मे अपने लिए चाइ बना रहा था. रोमा

अभी भी सो रही थी.

तभी फोन की घंटी बजी, वैसे तो वो कभी फोन उठाता नही था,

लेकिन कई बार घंटी बजने पर उसने फोन उठाकर "हेलो" कहा.

"राज में जय बोल रहा हूँ."

जय का फोन इस समय आना उसे अच्छा नही लगा. माना कि वो उसका

ख़ास दोस्त था लेकिन अब भी उसे उस पर गुस्सा आ रहा था फिर भी

अपने गुस्से को छिपाते हुए वो बोला, "हां जय."

अपने दोस्त की बदली हुई आवाज़ से वो समझ गया कि राज अब भी गुस्सा

है फिर भी हिम्मत कर उसने कहा, देखो राज मेरा रिया और मम्मी का

झगड़ा हुआ और मम्मी ने मुझे और रिया को घर से बाहर निकाल दिया

है.....अब में सहर मे रिया के साथ हूँ.... मेने फोन इसलिए

किया जो कुछ भी उस दिन रोमा के साथ मेने किया उसके लिए में बहोत

शर्मिंदा हूँ प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना. मेने नही सोचा था कि

बात इतनी बढ़ जाएगी... प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना और रोमा से भी

कह देना ."

राज को जय की बात पर विश्वास नही हुआ फिर भी उसने धीरे से

कहा, "हां क्यों नही.... तो तुम आज कल रिया के साथ हो."

"हाआँ" जय ने कहा, "वैसे तो रिया की रूम मेट रानी भी उसके साथ

है..."

मुझे नही पता था कि तुम रिया के साथ सहर मे रहोगे" राज ने

कहा.

"मेने भी नही सोचा था," जय ने कहा, "पर मेरे पास दूसरा कोई

चारा भी नही था."

"ऐसा क्या हो गया कि घर छोड़ना पड़ गया? राज ने पूछा, वो जानना

चाहता था कि आख़िर हुआ क्या है जो इतनी जल्दी इतनी बड़ी बात हो

गयी.

जय ने कुछ जवाब नही दिया और विषय को बदलते हुए कहा, "तुम

दोनो खुद आकर नही जगह नही देखना चाहोगे."

 
राज रिया के बारे मे सोचने लगा, उसे पता था कि उसे देखते ही वो

किसी भूकि शेरनी की तरह उस पर टूट पड़ेगी, पर उसकी रोमा का क्या

होगा, क्या फिर से जय उसके साथ वैसा ही व्यवहार करेगा?

"हां शायद किसी दिन हम आ जाएँ." राज ने कहा.

रोमा सोकर उठ चुकी थी, वो किचन से गुज़री तो उसने राज को फोन

पर बात करते हुए देखा, राज की उसपर नज़र पड़ी तो उसने माउत

पीस पर हाथ रखते हुए कहा, "जय है."

रोमा ने सिर्फ़ नज़रें झपकर हां कहा और आगे बढ़ कर राज की

कमर मे हाथ डाल उसे अपनी बाहों मे भर लिया. राज ने फोन को थोड़ा

इस तरह कर दिया कि दोनो बात चीत सुन सके.

"राज रिया की सहेली रानी कुछ दिनो के लिए बाहर जा रही है, तो

क्यों ना तुम दोनो कुछ दिनो के लिए हमारे पास आ जाओ." जय ने कहा.

"मुझे पता नही जय, शायद रोमा इतनी जल्दी तुमसे मिलना नही

चाहे." राज ने कहा.

पर तभी रोमा की मुस्कुराहट ने राज को चौंका दिया.

दूसरी तरफ जय थोडा हिचकिचाया, "हां में समझ सकता हूँ."

"एक मिनिट रूको शायद में उसे किसी तरह तैयार कर लूँ," राज ने

रोमा के चेहरे की तरफ देखते हुए कहा."

रोमा ने तभी अपना हाथ राज की शॉर्ट्स के उपर से उसके खड़े लंड पर

रखा और मुस्कुराने लगी. वो धीरे धीरे उसके लंड को मसल्ने

लगी.

जब उसका लंड खड़ा होने लगा तो रोमा घुटनो के बल उसके सामने

नीचे बैठ गयी. राज ने अपने आपको किथ्चेन के काउंटर से टिका

दिया और खिड़की का परदा थोड़ा हटा दिया जहाँ से उसकी मा बाहर

लॉन मे दिखाई दे रही थी.

"राज तुम मेरी बात सुन रहो ना?" दूसरी तरफ से जय ने कहा.

"हां में सोच रहा था की अपनी बेहन को तुम दोनो के पास आने के

लिए किस तरह तैयार करूँ." राज ने अपनी शॉर्ट की ज़िप खोलते हुए

कहा.

अपने खड़े लंड को काबू मे रखना और साथ ही जय के साथ फोन पर

बात करना , राज को बड़ी तकलीफ़ हो रही थी. रोमा ने उसकी शॉर्ट्स के

अंदर से उसकी अंडरवेर मे हाथ डाला और उसके खड़े लंड को बाहर

निकाल लिया. वो अपन नाज़ुक उंगलियों को उसके लंड पर फिराने लगी साथ

ही उसकी गोलियों को भी सहला रही थी.

तभी रोमा अपनी जीब उसके लंड के सूपदे पर रख फिराने लगी, एक

अजीब सी सनसनी राज के शरीर मे दौड़ गयी.

"क्या में रिया से कह दूँ कि तुम आ रहे हो? जय ने खुशी भरे

स्वर मे कहा, वो राज से दूर नही रह सकता था आख़िर वो बचपन के

दोस्त थे और करीब करीब हर समय साथ ही रहते आए थे.

उसके लंड पर फिरती रोमा की जीब उसे बात नही करने दे रही थी, एक

अजीब गुदगुदी मची हुई थी उसके बदन मे फिर भी किसी तरह उसने

कहा, "हाँ जय तुम रिया से कह दो कि में इस साप्ताह के आख़िर मे आ

रहा हूँ और कोशिश करके रोमा को भी साथ मे लेकर आउन्गा."

राज का जवाब सुनकर उसके भी मन मे खुशी मच गयी, वो भी रिया के

साथ को तरस रही थी, एक खुशी भरी मुस्कुराहट आ गयी उसके

होठों पर.

राज की मन मे डर बसा हुआ था कि अगर उसकी मा ने इस तरह रोमा को

उसके सामने घुटनो के बल बैठ उसके लंड को चूस्ते देख लिया तो क्या

होगा, पर इन सब सोचों के बावजूद उत्तेजना उसके बदन मे भरती जा

रही थी.

उसने फ़ोन को रख दिया और अपना पूरा ध्यान अपनी बेहन की तरफ कर

लिया जो अब उसके लंड को अपनी जीब से उपर से नीचे तक चाट रही

थी.

राज ने अपना हाथ रोमा के सिर पर रखा और अपनी उंगलिया उसके बालों

मे फिराने लगा, रोमा ने भी अपने मुँह को खोल उसके खड़े लंड को

अंदर ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी ही देर मे उसके लंड से वीर्य

की बूंदे निकलने लगी जिसे रोमा बड़े प्यार से चाट रही थी और

साथ ही अपने मुँह को उपर नीचे कर उसके लंड को चूस रही थी.

राज का लंड अपनी चरम सीमा पर था वो पूरी तरह तन कर किसी

पिस्टन की तरह रोमा के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था कि तभी

दोनो को घर के मेन दरवाज़े के खुलने की आवाज़ सुनाई दी. पल भर

के लिए दोनो की साँसे रुक गयी, उन्हे लगा कि उनकी मा अभी यहाँ आ

जाएगी. पर उत्तेजना डर पर भारी थी.

"तुम्हे अच्छा लग रहा है ना?" राज ने जोरों से आने लंड को उसके मुँह

मे अंदर बाहर करते हुए पूछा.

रोमा ने कोई जवाब नही दिया और और जोरों से उसके लंड को चूसने

लगी. वो अपने मुँह को पूरा खोल उसके लंड को अपने गले तक लेकर

चूस रही थी.

तभी दोनो ने आनी मा की आहट खुद के कमरे की ओर बढ़ती सुनाई

दी तो जैसे दोनो के जान मे जान आ गयी.

राज अब और जोरों से उसके सिर को पकड़ अपने लंड से उसके मुँह को

चोद रहा था . रोमा भी दोनो हाथो से लंड को मसल्ते हुए चूस

रही थी. इतने मे राज का शरीर आकड़ा और उसके लंड ने वीर्य की

पिचकारी रोमा के मुँह मे छोड़ दी. रोमा भी उसके लंड को पूरी तरह

मुँह मे ले उसके वीर्य को पीने लगी.

राज ने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और अपने कपड़े ठीक कर रोमा के

साथ बाहर हॉल मे आ गया जहाँ उसकी मा डिन्निंग टेबल पर नाश्ता

लगा रही थी.

* * * * * * * * * *

राज की समझ मे नही आ रहा था कि मम्मी से गाड़ी की चाबी कैसे

माँगे वो. वो गाड़ी से जय और रिया से मिलने जाना चाहता था. लेकिन

जब उसने अपनी मम्मी को बताया कि वो रोमा को साथ ले कॉलेज जा रहा

है अपनी आगे की पढ़ाई के लिए तो हंसते हंसते उनकी मम्मी ने गाड़ी

की चाबी दे दी.

शुक्रवार की शाम जब रोमा कॉलेज से वापस आई तो दोनो गाड़ी मे

बैठ जय और रिया से मिलने चल पड़े.

रास्ते मे राज ने अपनी छोटी बेहन रोमा से कहा, "क्या बात है इतनी

नर्वस क्यों हो? एक हफ्ते पहले तक तो डर नाम की चीज़ नही थी

तुम्हारे अंदर और आज क्या हो गया?"

गाड़ी की पॅसेंजर सीट पर बैठी रोमा चुप चुप सोचती रही, "पता

नही राज क्यों उस दिन के बाद आज भी मुझे जय से डर लग रहा है

लेकिन रिया के साथ मुझे अच्छा लगता है." आख़िर उसने जवाब

दिया, "हां तुम ये कह सकते हो कि जय के डर से ज़्यादा मुझे रिया का

साथ अच्छा लगता है."

राज रोमा की ओर देख कर मुस्कुरा दिया, "उस रात के बाद तुम दोनो

काफ़ी करीब आ गये हो है ना?" राज ने कहा.

रोमा ने घूर कर अपने भाई को देखा, "हम दोनो, वो तुम दोनो ही

ज़्यादा करीब आ गये थे जब तुम दोनो हम सब को छोड़ अंधेरे मे

भाग गये थे." रोमा को शायद आज भी ये दुख था कि अगर वो और

रिया उसे छोड़ कर ना गये होते तो जय की हिम्मत नही होती उसके साथ

वैसा सब कुछ करने की.

उस दिन को याद कर रोमा के अंदर का गुस्सा बाहर आने लगा. उसने

गुस्से मुँह फेर लिया और खिड़की के बाहर देखने लगी.

राज ने उसे मनाने के लीहाज़ से अपना हाथ उसके कंधों पर रखा तो

उसने उसके हाथ को झटक दिया, राज समझ गया कि उसकी प्यारी बेहन

इस समय गुस्से मे है. पर रिया के घर तक पहुचते पहुँचते उसने

उसे किसी तरह मना ही लिया.

रिया के मकान पर पहुँच जब राज ने दरवाज़े की घंटी बजाई तो

रिया ने ही दरवाज़ा खोला, राज की नज़रें जय को ढूँढने लगी.

"जय को ढूंड रहे हो? वो यहाँ नही है. तुम्हे विश्वास नही होगा

राज, जय ने नौकरी कर ली है."रिया ने उन्हे अंदर आने को कहते

हुए कहा.

"जय और नौकरी?" राज और रोमा दोनो हैरानी से रिया को देखने लगे.

"हन विश्वास नही हो रहा ना," रिया ने दरवाज़ा अंदर से बंद करते

हुए कहा, "उसे अचानक मेरी सहेली रानी से प्यार हो गया है. दोनो

रोज़ रात को साथ साथ बाहर जाते है और जय की हर रात मुझसे

ज़्यादा रानी के बिस्तर मे उसके साथ गुज़रती है."

रिया की बात सुनकर राज और रोमा एक दूसरे की शकल देखने लगे

जैसे की उन्हे विश्वास नही था कि जो रिया कह रही है वो सच है.

"अब भोले बनने की कोशिश मत करो," रिया ने दोनो से कहा, "में

जानती हूँ कि तुम दोनो एक दूसरे से बहोत प्यार करते हो. जब में

राज से बात करती हूँ तो मेने रोमा की आँखों मे मेरे लिए जलन

देखी है लेकिन वो अलग बात है. में ये भी मानती हूँ कि में और

जय दो चार बार साथ साथ सो चुके है लेकिन तुम दोनो की कहानी ही

कुछ अलग है. मेरा तो एक ही विश्वास है कि अगर प्यार है तो प्यार

को मानना चाहिए उसे पाना चाहिए."

रिया उन्हे अपना घर दीखाने लगी, राज रानी ने ही जय को मजबूर

किया कि वो कोई नौकरी कर ले."

"रानी ने?' राज ने पूछा.

"हां रानी ने, वो डोमिनोज़ मे पिज़्ज़ा डेलिवरी का काम करती है. उसके

बहोत ज़िद करने पर जय ने नौकरी कर ली और आज वो नाइट शिफ्ट कर

रहा है जिससे कि कल का दिन वो तुम दोनो के साथ गुज़ार सके." रिया

ने कहा, "लेकिन एक बात में कहूँगी कि वो तुम दोनो को बहोत मिस

करता है."

तीनो सोफे पर बैठ कर बातें करने लगे. रिया दाईं तरफ बैठी

थी, राज बाई तरफ और रोमा बीच मे. रोमा और रिया आपस मे

बाते कर रहे थे और राज की आँखे रिया की दिखाई देती

चुचियों पर टिकी थी.

रिया ने एक सफेद रंग की डेनिम की शॉर्ट्स पहन रखी थी और उसके

उपर हल्के गुलाबी रंग का स्लीव लेस ब्लाउस. उसने बीच के सिर्फ़ दो

बटन बंद कर रखे थे जिससे उसकी चुचियाँ सॉफ दिखाई दे रही

थी.

क्रमशः..................
 
16

गतान्क से आगे.......

कहने को तो राज दोनो की बातें सुन रहा था लेकिन हक़ीकत मे वो रिया

की सुंदरता मे खोया हुआ था. रिया ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरा

दी. राज देख रहा था कि रिया की चुचियाँ ब्लाउस के नीचे फूल

रही थी और उसके निपल तन कर खड़े हो रहे थे. रिया की नज़रें

राज के चेहरे से फिसल उसकी जांघों पर आ गयी जहाँ उसका लंड तन

कर पॅंट के अंदर एक तंबू सा बनता जा रहा था.

अचानक रिया ने रोमा के चेहरे की ओर अपना चेहरा बढ़ाया और

बोली, "रोमा मेने तुम्हे कितना मिस किया है पता है? आज के दिन तुम

ही मेरी सबसे प्यारी सहेली हो."

राज दोनो लड़कियों को आपस मे एक दूसरे को चूमते देख रहा था,

उसका लंड पॅंट के अंदर मचलने लगा. रोमा सीधी होकर बैठ

गयी और रिया उसकी गोद मे उसकी तरफ मुँह कर के बैठ गयी. फिर

उसने रोमा के चेहरे को अपने हाथों मे लिया और उसके होठों को

चूसने लगी, साथ ही उसने अपनी जीब रोमा के मुँह मे डाल दी. एक

दूसरे की जीब को चूस्ते हुए दोनो सिसकारियाँ भर रही थी.

"ओह्ह्ह बहोत अछा लगा" रोमा रिया से अलग होते हुए बोली.

रोमा को वैसे तो राज के सामने रिया को चूमने मे संकोच हो रहा

था, लेकिन उस पल का नशा आज भी उसके दीमाग मे छाया हुआ था जब

उसने और रिया ने उस दिन तालाब के किनारे अंधेरे मे साथ बीताए

थे.

रिया के स्पर्श ने ही उत्तेजित कर दिया था, उसके निपल तन कर किसी

के स्पर्श को तड़प रहे थे. रोमा जानती थी कि रिया उसके साथ सेक्स का

खेल खेलना चाहती है पर रोमा अपने भाई के सामने ये सब करने से

हिचकिचा रही थी.

"रोमा अभी तो शुरआत है," रिया ने रोमा को नर्वस देखा तो

बोली, "और मेरा विश्वास करो तुम्हे अच्छा लगेगा."

जब रिया ने उसके टॉप को नीचे से पकड़ उपर उठाने की कोशिश की तो

एक बार के लिए तो रोमा हिचकिचाई लेकिन उसने विरोध नही किया और

अपने दोनो हाथ उठा दिए. रिया ने उसके टॉप को उतार दिया. रिया ने

अपने भी ब्लाउस के दोनो बटन खोल उसे निकाल कर उछाल दिया.

राज फटी आँखों से रिया की भारी भारी चुचियाँ और तने निपल को

देख रहा था.

दोनो लड़कियों ने एक दूसरे को बाहों मे भर लिया और चुचि से

चुचि रगड़ते हुए एक दूसरे को चूमने लगी. कमरे मे उनकी

सिसकारियों और तेज होती साँसों की आवाज़ गूंजने लगी. रिया का उसकी

चुचियों से अपनी चुचियाँ का रगड़ना रोमा को अछा लग रहा था

उसकी धड़कनो के साथ रिया के दिल की धड़कन भी उसे सुनाई दे रही

थी.

"ऑश रिया तुम्हारे बदन का स्पर्श कितना अच्छा लग रहा है...

ऑश" रोमा धीरे से उसके कान मे फुस्फुसाइ.

दोनो लड़कियों को अपनी मस्ती मे लगे देख राज का लंड पॅंट के अंदर

पूरी तरह तन गया था. आख़िर उसने अपनी पॅंट की ज़िप खोली और अपने

लंड को बाहर निकाल लिया. उसने दाँये हाथ से अपने लंड को पकड़ा और

मुठियाने लगा.

थोड़ी देर बाद रिया ने अपना मुँह रोमा के मुँह पर से हटा लिया.

तिर्छि नज़रों से उसने राज के नंगे और खड़े लंड को देखा और

इशारे से उसे शामिल होने के लिए कहा.

रिया रोमा की गोद से उतार उसके पैरों के पास घुटनो के बल हो

गयी. अपने हाथों को उसकी चुचियों पर रख वो धीरे धीरे उन्हे

मसल रही थी और उसके निपल पर हल्की हल्की चिकोटी काट रही थी.

रोमा की सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी, "ऑश आआआः ऑश रियाअ."

रिया ने अपना चेहरा उसकी चुचियों पर रखा और उसके खड़े निपल

को मुँह मे ले चूसने लगी. साथ ही वो उसकी चुचि को मुठ्ठी मे भर

मसल रही थी.

"ऑश रिया चूसो और ज़ोर से चूसो हां ऐसे ही." रोमा सिसक पड़ी.

राज से अब रहा नही जा रहा था. वो झुक कर रोमा के होठों को

अपने होठों मे ले चूसने लगा. फिर उसके मुँह को खोल उसने अपनी जीब

रोमा के मुँह मे डाल दी और रोमा काम विभूर हो अपने भाई की जीब

चूसने लगी.

दोनो एक दूसरे की जीब से खेल रहे थे और चूस रहे थे और रिया

रोमा की चुचियों को मसल मसल कर चूस रही थी.

रिया के हाथ और जीब नीचे की ओर खिसकने लगे, उसकी चुचि, उसका

पेट उसकी नाभि को चूमते हुए नीचे बढ़ रहे थे. रोमा कामग्नी मे

जलने लगी थी, और उसका शरीर उत्तेजना मे काँपने लगा था.

रिया के हाथ अब उसकी शॉर्ट्स के बटन को खोलने लगे. बटन खोलने

के बाद रिया ने रोमा को खींच कर सोफे के किनारे पर कर दिया और

उसकी शॉर्ट्स को नीचे खिसकाने लगी. रोमा ने भी अपनी गंद को थोड़ा

उपर कर रिया की मदद की. अब रोमा की चूत उसकी पॅंटी से धकि हुई

थी.

रिया ने उसके घुटनो को नीचे से पकड़ा और उसकी टाँगो को उठाते हुए

फैला दी. फिर उसने रोमा के चेहरे की तरफ देखा जहाँ उसका चेहरा

उत्तेजना मे लाल हो गया था साथ ही पसीने की बूंदे उसके माथे पर

उभर आई थी.

रिया सब समझती थी, जब भी कोई लड़की दूसरी लड़की के साथ सेक्स का

मज़ा लेती थी तो ऐसे ही उसके चेहरे पर अस्चर्य और माथे पर

पसीना आ जाता था.

"रोमा आराम से रहो और मज़े लो तुम्हे और अच्छा लगेगा." रिया ने

कहा.

रोमा ने अपने आप को सोफे की पुष्ट से टिका दिया. रिया उसकी टाँगो को

पकड़े उसकी जांघों के अंदुरिनी हिस्सों को चूमने लगी. रिया ने देखा

कि रोमा की पॅंटी चूत मे थोड़ी घुस सी गयी थी और पॅंटी चूत के

आगले हिस्से पर गीली भी हो गयी थी. रिया ने उसकी चूत को पॅंटी

सहित मुँह मे भर लिया और अपनी जीब को पॅंटी के साइड से चूत

चारों और फिराने लगी. रोमा की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी.

"ऑश रिया बहोट अककचा लग रहा है काब्से तड़प रही थी तुम्हारे

स्पर्श के लिए ऑश "

उत्तेजना रोमा पर सवार होती जा रही थी और अब वो अपनी कमर उठा

अपनी चूत को रिया के मुँह पर दबाने लगी. उसने रिया के सिर को

पकड़ अपनी और खींचा और अपनी चूत पर दबाने लगी.

"ऑश रिया अब मत तद्पाओ चूसो ना मेरी चूत को ऑश देखो कैसे

आग लगी ही है प्लीज़ चूवसूओ ना......"

तभी राज सोफे पर से उठा और कपड़े उतार नंगा हो गया. फिर वो

रिया के पीछे आया और उसकी शॉर्ट्स के बटन खोल दिए. शॉर्ट्स

ढीली हुई तो उसे खींच उतार दिया. राज पीछे से रिया की

चूतदों पर हाथ फेर उसकी मुलायम और गुलाबी चूत को देखने

लगा. रिया ने भी आपी टाँगे थोड़ी फैला दी जिससे उसकी चूत और

खुल गयी.

राज ने उसके चूतदों को पकड़ा और अपने लंड को उसकी चूत पर टिका

दिया. फिर उसके चूतदों को अपनी तरफ खींचते हुए उसने हल्के से

धक्का मार अपने लंड को रिया की गुलाबी चूत के अंदर घुसा दिया.

राज अब हल्के धक्के मार रिया को चोदने लगा.

रिया ने अपना हाथ रोमा की पॅंटी मे फँसाया और उसे नीचे खिसकाते

हुए उतार दी. अब रोमा की मुलायम और नमकीन चूत रिया के सामने

थी. उसने उसकी चूत को फैलाते हुए अपनी जीब उसमे डाल घूमाने

लगी. अपनी जीब को उपर से नीचे फिरा वो उसकी चाटने लगी.

रोमा ने अपनी टाँगे रिया के गर्दन के इर्द गिर्द लपेट ली और उसके

चेहरे को अपनी चूत पर दबाने लगी साथ ही अपनी कमर उठा अपनी

चूत को और उसके मुँह मे देने लगी.

राज ने वैसे कभी सामूहिक चुदाई का मज़ा नही लिया था, लेकिन

उसने अपनी कहानियों मे कई बार लीखा था. और आज वो अपनी सग़ी

बेहन और अपने ख़ास दोस्त की बेहन के साथ चुदाई मे लगा हुआ था.

राज अब अपने ज़ोर ज़ोर के धक्के रिया की चूत मे मार रहा था.

राज ने देखा की रिया का चेहरा करीब करीब रोमा की जाँघो के बीच

छिप सा गया था और वो उसकी बेहन की चूत को जोरों से चूस रही

थी. जैसे कोई बिल्ली दूध पीते वक्त आवाज़ करती है वैसे ही एक

मधुर ध्वनि सी कमरे मे गूँज रही थी.

हर क्षण के बाद रोमा का शरीर और कांप उठता और उत्तेजना मे

फड़फदा उठता. रिया ने तभी अपनी जीब के साथ अपनी दो उंगलियों

उसकी चूत के अंदर डाल दी और उसे उंगली से चोदने लगी. अब रिया को

दोहरा मज़ा मिल रहा था, उसने अपनी जीब को त्रिकोण का आकार दिया था

और जब भी राज का लंड उसकी चूत मे घूस्ता तो उसकी जीब रोमा की

चूत मे अंदर तक घुस जाती.

राज ने देख की हमेशा रोमा अपनी सिसकियों को मम्मी के डर से दबा के

रखती थी लेकिन आज घर से इतनी दूर उसका डर गायब हो गया था

और वो जोरों से सिसक रही थी.

'ऊहह रिया ऑश हाआँ ऐसे ही चूओड़ो मुझे अपनी जीएब से ऊवू

हाां और ज़ोर से चूड़ो हाआँ मेरा चूओटने वाला है बस थोड़ी ही

देर है... छोड़ो मुझे..."

राज ज़ोर ज़ोर के धक्के मार रिया को चोद रहा था साथ ही अपनी बेहन

के देख रहा था जो अपनी कमर उठा रिया से अपनी चूत चूस्वा रही

थी. राज ने देखा कि रोमा ने एक ज़ोर की आह के साथ अपनी चूत रिया

की मुँह पर दबाई और झाड़ गयी. रोमा की चूत से बहता रस उसकी

झांते भीगो रहा था साथ ही रिया का चेहरा भी भीग गया था.
 
रोमा अपनी उखड़ी सांसो पर काबू पाने के लिए सोफे पर अध लेटी मुद्रा

मे लेट गई थी. राज ने अपना लंड रिया की चूत से निकाला और रोमा के

बगल मे बैठ गया. रोमा अपने भाई के लंड को देखने लगी जो उसके

और रिया के रस से भीगा हुआ था रिया उठी और राज की टाँगो के इर्द

गिर्द अपनी टाँगे रखते हुए उसकी गोद मे बैठ गयी. फिर पंजो के बल

थोड़ा सा खड़े होते हुए उसने उसके लंड को अपनी चूत से लगाया और

उस पर बैठती चली गयी. राज का पूरा लंड उसकी चूत मे घुस चुका

था.

रोमा रिया और राज को चुदाई करते हुए देख रही थी, लेकिन आज जलन

नाम की चीज़ नही थी उसके दिल मे. बल्कि आज जो कुछ हुआ उससे उसे

रिया पर प्यार आ रहा था, वो देख रही थी कि किस तरह अपनी उसकी

नई सहेली अपनी चुचि को राज के मुँह मे देकर वो उछल उछल कर

उसके लंड को अपनी चूत मे ले रही थी.

पहले जब भी राज को वो किसी और लड़की के साथ देखती तो एक अंजाना

डर उसे सताते रहेता की कहीं राज उससे दूर ना चला जाए, लेकिन

आज जिस तारह रिया ने उसे खुश किया था वो हैरान थी. आज पहली बार

उसकी चूत ने दिल खोलकर पानी छोड़ा था, राज से चुद्वा कर भी उसकी

चूत इस कदर तृप्त नही हुई थी. वो रिया की सिसकारियों मे खोई

हुई थी.

"ऑश राज हाआँ ऐसे ही नईएचए से चोदो अपने लंड को मेरी चूओत मे

ऑश हाां और थोड़ा ज़ोर सीईए राज."

रिया ज़ोर से उछल कर राज को चोदने लगी. वो उसके लंड को और अंदर

तक लेने की कोशिश कर रही थी. राज भी अब उसकी चूतदो के नीचे

हाथ देकर अपने लंड को और अंदर तक घुसा रहा था. दोनो की छूटने

की कगार पर था.

"ऑश राज हाआँ बस में तो घाईईईईई राज ओःःःः," सिसकते हुए रिया की

चूत ने पानी छोड़ दिया और तभी राज ने अपनी कमर को उठाया और

अपने लंड को और अंदर तक घुसाते हुए अपने वीर्य की पिचकारी रिया

की चूत मे छोड़ दी. दोनो के वीर्य का संगम हुआ और उसकी कुछ कतरे

रिया की चूत से टपकने लगे.

दोनो थक चुके थे और दोनो शरीर पसीने से भीग चुका था. रिया

ने अपना सिर राज के कंधे पर टिका दिया, "राज तुम बहोत अच्छे हो,"

कहकर उसने उसके गालों को चूम लिया, "रोमा बहोत खुशनसीब है."

रिया राज की गोद से उठी और रोमा के पास आकर खड़ी हो गयी. राज और

रिया का मिश्रित वीर्य अब भी रिया की चूत से टपक रहा था. रिया

ने रोमा का हाथ पकड़ा, "चलो बाथरूम मे चलते हैं."

राज दोनो लड़कियों को बाथरूम की और जाते देखता रहा, उसकी निगाह

दोनो की गंद पर टिकी हुई थी और दोनो की गंद मारने की लालसा उसके

मन मे जागने लगी. दोनो बाथरूम के दरवाज़े पर पहुँच एक पल के

लिए रुके और राज को देखते हुए एक दूसरे के होठों को चूसने लगे.

दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़ बाथरूम मे घुस गये और किसी ने

दरवाज़ा बदन करने की जर्रोरत नही समझी, इसलिए राज को बाथरूम

के अंदर का नज़ारा सॉफ दिखाई दे रहा था.

रिया ने बाथरूम के अंदर टब की नाल चालू कर दी फिर उसने लिक्विड

साबुन टब मे डाली और और टब मे घुस गयी. रोमा भी उसकी पीछे

टब मे आई और उसे अपनी बाहों मे भर लिया.

"रोमा सही बताना एक लड़की के साथ सेक्स करने मे कैसा लगा?" रिया ने

चुचियों को मसल्ते हुए पूछा.

रोमा कि लगा की रिया ही उसकी सच्ची सहेली और वो उससे अपने दिल की

बात खुल कर सकती है, "रिया सच कहूँ तो पहले तो में डर रही

थी, और मुझे नही लग रहा था कि में तुम्हारे साथ ये सब कर

पाउन्गि. पर मुझे तुम पर विश्वास था और एक बार आगे बढ़ी तो

पीछे हटने का दिल ही नही किया."

"मुझे पता है, में भी ऐसा ही महसूस कर रही थी," रिया ने

कहा, "क्या तुम्हे मज़ा आया?"

रोमा ने उसके हाथ अपने हाथ मे ले लिए, "सच मे रिया बहोत मज़ा

आया, आज जितना में झड़ी हूँ इसके पहले मेरी चूत ने इतना पानी

कभी नही छोड़ा, राज के साथ भी नही, ऐसा लगा है कि मेरी चूत

अंदर से एकदम खोक्ली हो गयी और उसके अंदर कुछ बचा ही नही है."

रोमा की बात सुनकर रिया मुस्कुरा दी, "लड़कों के साथ मज़ा आता है

और मुझे भी लड़के पसंद है, लेकिन एक औरत को खुश एक औरत ही

कर सकती है, एक बार जब तुम ये सिख जाओगी तो तुम्हे और मज़ा

आएगा."

रिया थोड़ी देर रोमा के शरीर को मसल्ने के बाद उसकी चुचियों को

मसल्ने लगी, उसे लगा की रोमा के निपल तन कर खड़े हो रहे

है, "तुम नाराज़ तो नही हो ना कि मेने तुम्हारे सामने राज के साथ

चुदाई की?

"नही बिल्कुल भी नही," रोमा ने उसे आश्वासन देते हुए कहा, "पहले

मुझे लगा था कि तुम दोनो को चुदाई करते देख मुझे जलन होगी,

लेकिन जब मेने तुम दोनो को इतने प्यार से एक दूसरे का साथ देते

देखा तो मुझे बिल्कुल भी जलन नही हुई, मुझे लगा कि कोई और भी

तो है जो मेरे भाई को इतना प्यार करता है."

जब रिया ने रोमा की चुचियों को मसल और साबुन लगा धो दिया तो

रोमा रिया की चुचियों पर साबुन लगा मसल्ने लगी, शायद कभी

में भी तुम्हारी चूत इसी तरह चूस सकूँ जिस तरह तुमने आज

मेरी चूत चूसी है," रोमा ने डरते हुए कहा, रिया ही एक ऐसी थी

जिसके साथ वो सब कुछ कैसे भी कर सकती थी.

"आराम से रोमा इतनी जल्दी जल्दी नही, अभी काफ़ी वक़्त हमे साथ

गुज़रना है." रिया ने उसे चूमते हुए कहा.

रोमा अपनी इस नई सहेली को देख रही थी जिसके दिन प्यार ही प्यार

भरा था सबके लिए.

रोमा के इम्तिहान ख़तम हो चुके थे और उसकी कॉलेज की छुट्टियाँ

शुरू हो चुकी थी. समय गुज़रता जा रहा था, उसे पता नही था कि

आगे उसे क्या करना चाहिए.

राज का भी स्वाभाव कुछ कुछ बदल गया. उसका ज़्यादातर वक़्त अकेले

तालाब के किनारे ही गुज़ारता है. जब भी रोमा उससे अपने और उसके बारे

मे पूछती वो कुछ खिज सा उठता था. इसी खिज और झल्लाहट ने उन

दोनो के बीच के रिश्ते को भी थोड़ा ठंडा कर दिया था.

रोमा किचन मे खड़ी अपने आपको बहोत अकेला महसूस कर रही थी.

उसकी समझ मे नही आ रहा था कि छुट्टियों के बाद उसे क्या करना

चाहिए. रोज़ की तरह आज भी राज तालाब किनारे पर था.

तभी फोन की घंटी बजी, और रोमा ने फोन उठा लिया, "हेलो"

"हाई डार्लिंग, कितनी याद आ रही है तुम्हारी."

इस उदासी और एकांत के वातावरण मे रिया की प्यारी आवाज़ पहचान कर

वो खुश हो गयी. "में भी तुम्हे ही याद कर रही थी, जब में और

राज तुम्हारे यहाँ आए थे उसके बाद हमारा मिलना ही नही हुआ,

करीब तीन महीने हो गये ना उस बात को."

"में जानती हूँ और तुम्हारे बारे मे ही सोच रही थी... लेकिन क्या

करूँ... एक तो फाइनल इम्तिहान उपर से ये नौकरी... इन दोनो के बीच

वक्त ही नही मिला." रिया ने उसे समझाते हुए कहा.

"में भी अपने कॉलेज और इम्तिहान मे बिज़ी थी," रोमा ने कहा, "पर

अब ये अलाम है कि मेरे पास करने को कुछ भी नही है."

"काश मेरे साथ भी कुछ ऐसा होता लेकिन कॉलेज के बाद एक्सट्रा शिफ्ट

पर शिफ्ट में बहोत थक गयी हूँ काम कर कर के, इसलिए तुम्हे

फोन किया है. मेने इस हफ्ते ऑफीस से छुट्टी ले ली है, क्या में

तुमसे मिलने तुम्हारे यहाँ आ सकती हूँ?" रिया ने पूछा.

"अरे ये भी कोई पूछने की बात है, मज़ा आ जायगा.' रोमा ने खुशी

मे कहा, "कब आ रही हो?"

"सोच रही हूँ कल पहुँच जाउ जिससे हम हफ्ते के आखरी दिन

तुम्हारे साथ बीता सकूँगी." रिया ने जवाब दिया.

"हां आ जाओ तुमसे मिलकर मुझे बहोत खुशी होगी." रोमा ने कहा.

"देखो रोमा मुझे अभी जाना है," रिया ने कहा, "मेरा बॉस मुझे

गुस्से मे घूर रहा है, में तुमसे कल बात करूँगी."

ठीक है बाइ." कहकर रोमा ने फोन रख दिया.

फोन रख कर रोमा ने महसूस किया कि रिया से बात करते ही उसके

बदन मे सनसनी सी मच गयी थी. आज जब से उसके इम्तिहान ख़तम

हुए थे ये पहली अछी खबर थी इतने महीनो मे. अब वो पूरे हफ्ते

रिया के साथ रह कर मस्ती कर सकती थी. तभी उसे राज का ख़याल

आया जो आजकल कुछ उखड़ा उखड़ा रहता था. उसने मन ही मन निस्चय

कर लिया कि वो राज को उसकी ये छुट्टियाँ बर्बाद नही करने देगी.

* * * * *

क्रमशः..................
 
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