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दो भाई दो बहन compleet

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आशीष का लंड आकड़ा और वीर्य की ज़ोर की पिचकारी रिया के गले तक

छोड़ दी... रिया ने उसके लंड को पूरी तरह मे भींच लिया जिससे की

वीर्य बह कर बाहर ना आ जाए... इससे उसका पिचकारी पर पिचकारी

छोड़ने लगा और रिया सारा का सारा वीर्य गटक गयी.

जब आशीष का लंड पूरी तरह नीचूड़ गया तो रिया उठ कर अपनी

जगह पर बैठ गयी और अपने होठों को और मुँह को रुमाल से सॉफ

करने लगी. रिया खिड़की से बाहर देखने लगी.. उसका घर यहाँ से

ज़्यादा दूर नही था.

"विनोद प्लीज़ मुझे यही ड्रॉप कर दो.. मेरा घर यहाँ से पास ही

है... में चली जाउन्गी." रिया ने कहा.

"तुम्हे छोड़ने से पहले में चाहता हूँ कि तुम मेरे लिए कुछ करो."

विनोद ने गाड़ी को साइड की सड़क पर डालते हुए जवाब दिया.

विनोद ने गाड़ी एक मकान आगे रोकी जिसका शायद हाल मे ही रेनवेशन

हुआ था. विनोद गाड़ी से उतरा और रिया की तरफ का दरवाज़ा खोलते हुए

अपना हाथ बढ़ा दिया. रिया ने भी उसका हाथ पकड़ गाड़ी से उतर

गयी. मकान से जोरों से संगीत की आवाज़ आ रही थी जैसे की उपर

कोई पार्टी चल रही हो.

विनोद ने अपना हाथ रिया की कमर मे डाला और उसे लेकर मकान की

पहली मंज़िल पर आ गया.... संगीत का स्वर और ज़ोर से हो

गया... "मेरी दुनिया मे तुम्हारा स्वागत है रिया... ये हमारी दुनिया

है ऐश करने की." विनोद ने उसे अपने से चिपकाते हुए कहा.

खुले फ्लॅट के दरवाज़े से एक लड़का बाहर निकला और रिया को देख कर

ठिठक गया.. "यार विनोद तुम ये नई फुलझड़ियाँ रोज़ कहाँ से ले

आते हो यार?" उसने विनोद से कहा.

"मिल जाती है शायद मेरी पर्सनॅलिटी की वजह से." विनोद ने जवाब

दिया, "संजीव कहाँ है?"

"वो कमरे मे है.. और जब उसके लंड का पानी ख़तम हो जाएगा तो

बाहर आ जाएगा." उस लड़के ने जवाब दिया, फिर रिया की तरफ देख

उससे पूछा, "तुम कुछ ड्रिंक लेना पसंद करोगी?"

क्रमशः..................

 
21

गतान्क से आगे.......

रिया ने देखा कि विनोद उस लड़के के साथ फ्लॅट के अंदर चला गया

है. तो रिया भी उसके पीछे पीछे चली आई. दोनो किचन मे

पहुँचे तो रिया ने देखा की एक बड़े टब मे बहोत सारी बियर बर्फ के

साथ भरी हुई थी.... उस लड़के ने शेल्फ पर रखे ग्लास मे से एक

ग्लास उठाया और उसमे बियर डाल रिया को पकड़ा दी और फिर अपना ग्लास

भरने लगा."

"तुम आज सही मौके पे आई हो.. आज ज़्यादा भीड़ नही है.. वरना

इतना झंघट होता है हमेशा यहाँ.... वैसे मेरा नाम सुनील है

पर प्यार से लोग मुझे सन्नी कहते है."

"आइ आम रिया." कहकर रिया ने सन्नी से हाथ मिलाया.

"विनोद ने तुम्हे यहाँ आने के लिए तैयार कैसे कर लिया?" सन्नी ने

पूछा. "ये हमारा शैतानो का बसेरा है."

रिया सन्नी की बात सुनकर फ्लॅट के चारों तरफ देखने लगी.. देखने

मे उसे ऐसा कुछ नज़र नही आया जो शैतानो का बसेरा लगे.

सन्नी शायद उसके मन की बात भाँप गया, "थोड़ी देर मे मैं तुम्हे

नीचे बेसमेंट मे ले जाउन्गा... फिर तुम खुद समझ जाओगी की मेने

इसे शैतान का बसेरा क्यों कहा." सन्नी ने कहा.

सन्नी उसे लेकर बेसमेंट मे आ गया. लकड़ी की सीढ़ियाँ उतरते वक्त

रिया के कदम लड़खड़ा गये और उसने सहारे के लिए सन्नी को पकड़

लिया.. सन्नी ने इस मौके का फ़ायदा उठाते हुए उसकी चुचियों को पकड़ा

और जोरों से मसल दिया. रिया को एक बार गुस्सा तो आया लेकिन उसने

कुछ कहा नही.

बेसमेंट मे पहुँच कर रिया ने देखा कि वो काफ़ी बड़ा था और बीच

मे एक पूल टेबल रखी हुई थी. दीवार से लगे एक टेबल पर स्टेरीयो

रखा हुआ था जीपार की संगीत जोरों से बज रहा था. बाकी की तीन

दीवारों से चार दीवान लगे हुए थे शायद आराम करने के लिए या

फिर चुदाई करने के लिए.

बेसमेंट की दीवारे भीं चुदाई की तस्वीरों से भरी हुई

थी.... और कमरे मे बाकी टेबल पर कुछ ऐसी ही मूर्तियाँ सॅज़ी हुई

थी... रिया ये देख समझ गयी कि ये जवान लड़के यहाँ पर सामूहिक

चुदाई करते है... ना जाने कितनी लड़कियों को इन्होने यहाँ चोदा

होगा.

तभी सन्नी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे लेकर एक दीवान पर बैठ

गया.... रिया भी उसके बगल मे बैठ अपने पैरों से अपनी हाइ हील

की संडाल उतार दी.

"तो फिर क्या ख़याल है तुम्हारा... हमारे इस बसेरे के बारे मे."

सुनील ने पूछा.

 
रिया दीवान के साइड टेबल पर रखी मूर्ति को देखने लगी जो कि

काम्सुत्र की प्रातीमा थी..."तुम लोगो को ये ऐसी मूर्तियाँ कहाँ से

मिल जाती है?"

सन्नी ने आगे बढ़ कर वो मूर्ति उठाई और रिया को पकड़ा दी.. रिया उस

मूर्ति को अच्छी तरह नज़दीक से देखने लगी तभी सन्नी ने कहा.

"छुट्टियों मे हम सभी दोस्त पूरी दुनिया की सैर करते है.. और वहीं

से ढूंड ढूंड कर खरीदी गयी है... बस एक के बाद एक इसी तरह

ये सब यहाँ जमा होती गयी. अच्छा कलेक्षन है ना?"

रिया ने उस मूर्ति को ध्यान से देखा जिसमे कि औरत जिसके कपड़े फटे

हुए थे और दो मजबूत हाथों ने उसकी चुचियों को पीछे से पकड़ा

हुआ था.... जब रिया ने उस मूर्ति को पलट कर देखा तो पाया कि उस

मर्द का लंड पीछे से उस औरत के चूत मे अटका हुआ था...

मूर्ति को देख रिया के बदन मे एक सनसनी से उठ गयी और उसकी चूत

मे चींतियाँ रेंगने लगी.. इतनी कलात्मक और उत्तेजञात्मक मूर्ति उसने

पहले कभी नही देखी थी. सिर्फ़ देखने से ही उसकी चूत मे खुजली

शुरू हो गयी थी.

"हां बहोत ही अच्छा कलेक्षन है." कहकर रिया ने मूर्ति सन्नी को

वापस पकड़ा दी और अपने ग्लास से बियर का घूंठ भरने लगी.

सन्नी ने मूर्ति वापस साइड टेबल पर रख दी और फिर रिया को अपने

नज़दीक खींच अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए.

रिया को सन्नी पसंद आ गया था और उसने भी उसका साथ देते हुए उसे

चूमने लगी. एक तो पहले से ही शराब का नशा और उपर से बियर और

फिर उस मूर्ति को देखना... रिया गरमा उठी थी.. और जब सन्नी ने

अपनी जीब से उसके मुँह को खोल अपनी जीब घुसाइ तो रिया ने भी उसके

जीब से अपनी जीब मिला दी.

रिया उन्माद मे उसकी जीब को चोसने लगी और उक्की चुचियों कठोर हो

गयी.. निपल तन कर खड़े हो गये... उसके दिल की धड़कने तेज हो

गयी.... वो पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थी.

पर मन ही मन रिया घबरा रही थी... वो डर रही थी कहीं उसके

साथ भी दीवारों पर लगी तस्वीरों जैसी चुदाई ना हो... उसने अपने

आप को सन्नी से अलग किया, "क्या तुम मुझे इसीके लिए यहाँ लाए

थे.." रिया ने सन्नी ने पूछा.

"हां और क्या... यही तो ज़िंदगी का मज़ा है."

रिया और सन्नी ने अपनी अपनी बियर ख़तम की, तभी रिया ने

पूछा... "तुम्हारे पास कोई सिग्रेट वग़ैरह है?"

"मेरे पास तो नही है.. लेकिन विनोद संजीव के पास से वही लाने के

लिए गया है.. वो अभी आता ही होगा." सन्नी ने जवाब दिया.

रिया को खुद पर विश्वास नही हो रहा था कि वो ऐसी जगह पर क्या

कर रही है... पर आज तो वो पूरी तरह से मस्ती के मूड मे थी..

उसने अपनी एक टांग दूसरी टांग पर रखी और सन्नी की तरफ मुँह

घूमा कर बोली.

"जब तक विनोद आएगा तब तक हम क्या करें," रिया ने एक शैतानी

मुस्कुराहट के साथ पूछा.. इस शैतानो के बसेरे मे वो भी शैतान

होना चाहती थी.

सन्नी अचानक रिया के व्यवहार से चौंक उठा और फिर मुस्कुराते हुए

बोला, "ज़रूर कुछ ना कुछ शैतानी ही करेंगे."

सन्नी ने अपना हाथ उसकी गर्दन मे डाला और एक बार फिर उसके होठों

को अपने होठों मे ले चूसने लगा... दोनो की जीब फिर खिलवाड़ करने

लगी.... दोनो के बदन मे गर्मी बढ़ने लगी.
 
रिया के गर्दन से अपने हाथ नीचे की ओर खिशक्ते हुए सन्नी ने

अपने हाथ उसके चूतदों पर रखे फिर स्कर्ट के नीचे से हाथ डाला

तो उसने पाया कि रिया ने कोई पॅंटी नही पहन रखी थी..... रिया की

पॅंटी तो विनोद ने अपनी जेब मे रख ली थी.... सन्नी उसके दोनो

चूतदों को भींचने लगा और मसल्ने लगा.

रिया उछल कर उसकी गोद मे बैठ गयी... सन्नी का खड़ा लंड उसके

चूतदों से टकरा रहा था और उसकी चूत मे घूसने के लिए

बेकरार था... उसकी जीब को चूस्ते हुए रिया अपनी नग्न चुचियों को

उसकी छाती से रगड़ने लगी.

तभी दोनो को विनोद के आने का अहसास हुआ.. जो सिग्रेट के पॅकेट

लिए उन्हे देख रहा था... विनोद ने देखा कि आज रात की उसकी साथी

उसी के दोस्त की गोद मे बैठी थी.

"में तुम्हे यहीं लाना चाहता था.." विनोद ने कहा, "अब अगर तुम

चाहो तो में तुम्हे घर छोड़ सकता हूँ... हां अगर तुम चाहो तो

हमारे साथ पार्टी मना सकती हो."

"में यहीं तुम दोनो के साथ पार्टी मनाउन्गि." रिया ने कहा और विनोद

को खींच कर अपने बगल मे बिठा लिया... अब वो दोनो के बीच मे

बैठी थी.

विनोद के आने से एक बार तो सन्नी के चेहरे पर झल्लाहट आ गयी..

विनोद ने सिग्रेट का पॅकेट खोला और एक एक सिग्रेट दोनो को पकड़ा

दी... सन्नी ने अपनी जेब से लाइटर निकाल उन्हे सुलगा दिया.... पहला

कश लेते ही रिया समझ गयी कि सिग्रेट किसी ड्रग से भरी हुई

है.. वो कश लेकर उसका मज़ा लेने लगी.

"विनोद रिया को ये मूर्तियाँ बहोत पसंद आई है." सन्नी ने विनोद से

कहा.

विनोद ने थोड़ा आगे झुक कर साइड टेबल पर रखी मूर्ति को

देखा, "अच्छा तो ये वाली... अच्छी है ना?" विनोद ने पूछा.

"हां बहोत अच्छी है... बहोत कम ऐसे मूर्तियाँ देखने को मिलती

है." रिया ने कहा.

थोड़ी ही देर मे शराब के साथ सिग्रेट का नशा भी तीनो पर

चढ़ने लगा. सन्नी ने अपना हाथ रिया के कंधों पर रखा और

सहलाने लगा.... रिया ने उसकी तरफ मुस्कुरा के देखा फिर अपने

होठों को उसके होठों पर रख चूमने लगी.

तभी विनोद ने अपने होंठ उसकी गर्दन के नीचले हिस्से पर रखे और

जीब से हल्के हल्के चुलबुलाने लगा... रिया के बदन मे एक सनसनी

सी दौड़ गयी..... विनोद ने अपना हाथ उसकी जांघों पर रखा और

फैलाते हुए उसकी जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सों पर सहलाने लगा.....

रिया मादकता मे सिसक पड़ी.

रिया आँखे नशे मे बोझल हो रही थी.. उसने महसूस किया कि कोई

उसकी जांघों को चूम रहा है.... उसकी टाँगो के बीच कौन बैठा

है उसे समझ नही आया.... वो विनोद था या फिर सन्नी... जो कोई

भी था उसकी जीब का स्पर्श अपनी जांघों पर उसे अच्छा लग रहा था..

"ज़ोर ज़ोर से करो इसे अच्छा लगता है..." उसे सुनाई दिया...तभी दो

हाथों ने उसकी शर्ट को पूरी तरह खोल दिया और उसकी चुचियों को

भींचने लगे..

"ऑश हाआअँ ऑश" वो सिसक रही थी.

दो गरम होंठ और दो गरम जीब अब उसके बदन से खेल रही थी...

तभी उसकी टाँगे और फैली और एक गरम जीब ने उसकी चूत को

छुआ..... ओह्ह्ह वो उन्माद मे भर उठी....

स्टेरीयो पर राक धुन बज रही थी और सिसकारियाँ उस धुन के साथ मिल

सी गयी थी......तभी दो उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसी और अंदर

बाहर होने लगी....और साथ ही एक जीब उसकी चूत को चाट रही

थी..... उत्तेजना मे रिया दीवान पर पसर गयी और वो अपनी टांगे उठा

अपनी चूत को उसके मुँह पर दबाने लगी....

"ऑश चूओड़ो मुझे कोई चूओड़ो प्लीज़ अब और मत तडपाऊ मुझसे

अब नही रहा जाता" रिया अपनी उखड़ी साँसों के साथ गिड़गिदा उठी.
 
रिया ने अपनी अधखुली आँखों से देखा कि जो लड़का उसकी चूत चूस

रहा था वो खड़ा हुआ और अपने कपड़े खोल कर नंगा हो गया.... और

उसका मोटा लंबा लंड तन कर खड़ा था.. रिया खिसक कर दीवान के

किनारे पर आई और अपनी टाँगे हवा मे उठा दी जैसे कि उसे खुला

निमंत्रण दे रही हो. उस लड़के ने अपने लंड को रिया की चूत पर

रखा और एक ही धक्के मे पूरा लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.

"ओह आआआहह" नशे मे भी रिया इस प्रहार से कराह उठी.

उसने रिया की दोनो टाँगो को पकड़ा और अपने लंड को उसकी चूत मे

अंदर बाहर करने लगा..... वो पूरी ताक़त से रिया को चोद रहा था.

तभी दूसरा लड़का दीवान पर चढ़ा और अपने खड़े लंड को रिया के

मुँह पर घिसने लगा..... रिया ने भी अपना मुँह खोला और उसके लंड

को अंदर ले चूसने लगी. उसने लड़के ने रिया के सिर को नीचे से

पकड़ा और तेज़ी से उसके मुँह को चोदने लगा. रिया भी चटकारे लेकर

उसके लंड को चूस रही थी.

नशे मे होने के बावजूद रिया मज़े लेकर दोनो से चुद्वा रही थी...

एक उसकी चूत को चोद रहा था तो दूसरा उसके मुँह को.... थोड़ी ही

देर मुँह मे घुसे लंड ने अकड़ना शुरू किया और उसके मुँह को वीर्य

से भर दिया...... बड़ी मुस्किल से रिया उस वीर्य को गटक पाई...

फिर भी थोड़ा वीर्या मुँह के कोने से उसके गालों पर बह गया.... रिया ने

उसके लंड को अपने मुँह मे से निकाला और जोरों से सिसक पड़ी.

"ऑश हां चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो ऑश हाआँ और जोर्र से श

तुम्हारा लंड कितना अछा लग रहा है....."

विनोद या सन्नी जो भी था... उसने उसके जांघों को खींच आपने और

नज़दीक किया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा.... हर धक्के पर

रिया का बदन कांप उठता.... वो अपने कूल्हे उठा उसके धक्कों का

साथ देते हुए झाड़ गयी... और उस लड़के ने अपने लंड को जड़ तक

घुसा अपने वीर्य की पिचकारी उसकी चूत मे छोड़ दी.

रिया ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया और अपनी उखड़ी सांसो पर

काबू पाने की कोशिश करने लगी....वो लड़का उसकी टाँगो से हट

गया....

वो उठ कर दीवान पर बैठी तो देखा कि विनोद और सन्नी दोनो नंगे

बैठे थे.... विनोद ने एक बियर का कॅन खोल रिया को पकड़ा दिया..

रिया धीरे धीरे बियर पीने लगी... उसकी आँखे नशे मे बार बार

बंद हो रही थी......

* * * * * * * * * *

रिया को लगा कि कोई उसे झंझोड़ कर उठा रहा है, "कहाँ हूँ

में.?" उसने अपनी नशे से बोझल आँखों को खोलते हुए पूछा.

"घर पर हो." एक प्यारी मीठी आवाज़ उसे सुनाई दी.

"मेरा सिर फटा जा रहा है." रिया ने शिकायत की.

"मुझे पता है... कुछ याद है तुम्हे रात के बारे मे."

रिया ने दीमाग पर ज़ोर देते हुए सोचने की कोशिश की लेकिन उस

शैतानो के बसेरे के बाद मे उसे कुछ भी याद नही आ रहा

था. "नही.... मुझे कुछ याद नही आ रहा... मुझे ये भी नही

याद आ रहा है कि में घर कैसे पहुँची."

"किसी ने तुम्हे एक टॅक्सी मे घर तक पहुँचा कर घंटी बज़ा दी

थी.... में तुम्हे सहारा देकर तुम्हारे कमरे तक लाई और तुम्हारे

कपड़े बदालने जा ही रही थी कि तुमने उल्टियाँ करनी शुरू कर दी...

बड़ी मुश्किल से मेने तुम्हे सॉफ कर बिस्तर पर सुलाया....."
 
"कुछ तो याद होगा की घर से तुम कहाँ गयी और तुम्हारे साथ क्या

हुआ?" रोमा ने पूछा.

रिया बिस्तर पर सीधी लेट छत की तरफ घूर्ने लगी.. पंद्रह

मिनिट सोचने के बाद उसने कहा, "में यहाँ से सीधी एक पब मे गयी

थी... और वहाँ मुझे एक बहोत ही प्यारा और अछा साथी मिल गया

था."

"तुम्हे पता है ना कि किसी अजनबी से दोस्ती करना कितना ख़तरनाक हो

सकता है... तुम्हारी हालत देख एक बार के लिए तो में घबरा ही

गयी थी... मुझे तो लगा कि किसी डॉक्टर को बुलाना ना पड़ जाए."

रोमा ने कहा.

"रोमा मुझे माफ़ कर दो.. और जो कुछ भी तुमने मेरे लिए किया उसके

लिए शुक्रिया." रिया ने धीमे से कहा.

"शायद हम साथ साथ रहते हैं इसीलिए ये सब हो रहा है... में

जानती हूँ कि तुम राज से बहोत प्यार करती हो.. और मेरा यहाँ

मौजूद होना तुम्हारी आज़ादी मे बाधा बन रहा है.... तुम फिर कोई

ग़लत कदम उठायो इससे बेहतर है कि में ही यहाँ से चली जाती

हूँ." रोमा ने कहा.

रोमा की बात सुनकर रिया झटके से पलंग से खड़ी हुई और उसे बाहों

मे भर रोने लगी... "प्लीज़ मुझे यूँ छोड़ कर मत जाओ.... तुम दोनो

ही तो मेरा परिवार मेरा सहारा हो.. और कौन है मेरा इस दुनिया

मे... "

अपनी सबसे अच्छी दोस्त को इस तरह रोते देख रोमा की आँखों मे आँसू

आ गये..... उसकी आँखों के आयेज रिया के साथ वो सब हसीन लम्हे

तैरने लगे जो उन्होने साथ साथ गुज़रे थे. उसे वो दिन याद आया जिस

दिन उसने राज की जगह घर का कचरा फैंका था और उसे राज की वो

कीताब हासिल हो गयी थी... जिसमे उसने वो सब लीखा था... उसका दिल

प्यार से भर उठा.. उसने रिया को जोरों से अपनी बाहों मे भींचा

और उसके होठों को चूम लिया.

"जब तुम यहाँ सो रही थी मेने काफ़ी कुछ हम सब के बारे मे

सोचा.... हम दोनो राज से बहोत प्यार करते है.. और राज भी हम

दोनो से बहोत प्यार करता है.... मुझे पता है कि मुझे कभी

कभी तुमसे जलन होती है और में हमेशा उसे तुमसे दूर रखने की

कोशिश करती रहती हूँ...अगर तुम मुझसे वादा करो कि रात जैसी

ग़लती दुबारा नही करोगी शायद में भी अपनी सोच बदल दूं

में....."

रोमा बड़ी मुस्किल से अपने आखरी शब्दों को रोक पाई... वो अपना सब

कुछ दाँव पर लगा रही थी.. ये उसे पता था.. "में तुम्हे और राज

को ज़्यादा से ज़्यादा वक्त साथ गुज़ारने का मौका दूँगी.... मेरा मतलब

है कि अगर तुम दोनो अकेले बाहर घूमने जाना चाहते हो तो जा सकते

हो... में बुरा नही मानूँगी और ना ही राज को तुम्हारे साथ जाने से

रोकूंगी... अब ठीक है ना."

रिया को विश्वास नही हो रहा था कि रोमा ऐसा भी कह सकती है...

क्या वो हक़ीकत मे अपने प्यार अपने भाई को मेरे साथ बाँटना चाहती

है... पर वो सोच रही थी.. आख़िर ये सब कितने दिनो तक

चलेगा..?"

"रिया एक बात और.. ज़रूरी नही कि राज हर रात मेरे साथ ही

सोए.... में जानती हूँ तुम्हारी खुद की भी ज़रूरतें है.." रोमा

की आँखों से लगातार आँसू बह रह थे... "मेरी समझ मे नही आ

रहा कि में और क्या कहूँ."

"तुम इतना सब कुछ मेरे लिए करने को तैयार हो.. में इसी मे बहोत

खुश हूँ... अब कभी मुझे छोड़ कर जाने की बात मत करना...."

रिया ने रोमा को गले लगा लिया.

दोनो एक दूसरे को बाहों मे भर आने वाले कल की कल्पना करते हुए

एक दूसरे को चूमने लगे.

राज और रोमा अपनी कॉलेज की कीताबें खोले डिन्निंग टेबल पर बैठे

थे.... गंदे बर्तन सींक मे धोने के लिए पड़े थे... वैसे तो रोज

इन बर्तनो को रोमा और रिया मिलकर सॉफ किया करती थी लेकिन आज

दोनो मे से किसी ने भी उन्हे सॉफ करने की जहमत नही दिखाई थी.

रिया किचन के दरवाज़े के बीच शेल्फ का सहारा लिए खड़े थी...

उसके चेहरे से सॉफ झलक रहा था कि आज वो ड्रिंक के लिए बाहर

जाना चाहती थी....पर उसने अपनी ज़ुबान से कुछ कहा नही... रोमा

सब समझ रही थी... पर उसे और उसके भावों को अनदेखा कर उसने

अपना चेहरा अपनी कीताब पर झुका रखा था. रोमा राज के दिल उठते

भावों से भी अंजानी नही थी... दोनो किसी छोटे बच्चो के तरह

थे जो बाहर जाकर खेलना चाहते थे.. लेकिन शायद अपने दिल की

बात कहते हुए डर रहे थे.

रोमा ने रिया के मुरझाए हुए चेहरे की तरफ देखा... एक बार फिर

उसके दिल मे जलन की भावना पैदा हो गयी.... पर तभी उसे ख़याल

आया कि उसने रिया से कोई वादा किया था..... उसने अपनी निगाह राज पर

डाली.

रोमा अपनी जगह से उठी और राज के पास आकर चूमा लिया और

कहा, "राज आज जो कुछ भी तुम कर रहे हो मुझे नाज़ है तुम्हारी

मेहनत और लगन पर....प्लीज़ ज़रा ये झूठे बर्तन सॉफ कर दो...

फिर तुम रिया के साथ बाहर जा सकते हो... लेकिन प्लीज़ रात को

ज़्यादा लेट मत करना... में अकेले बोर हो जाउन्गी."

"थॅंक्स रोमा" राज ने कहा.

रोमा तिर्छि नज़रों से दोनो को सींक पर खड़े हो कर बर्तन धोते

देखते रही.....दोनो आपस मे कुछ बातें कर रहे थे और बात बात

पर बच्चो की तरह हंस पड़ते थे..... राज ने कई बार रिया के

कुल्हों को उपर से सहला तक दिया था...

क्रमशः..................
 
22

गतान्क से आगे.......

सही मे राज को रोमा के साथ ये सब मज़ाक या शैतानी करने का मौका

ही नही मिला था... रोमा काफ़ी कुछ अपनी पढ़ाई मे वय्स्त रहती थी...

राज हर बार अपने दिल की भावनाओ को दबा के रह जाता था.. और आज

इतने दिनो बाद उसे खुल कर मज़ा लेने का मौका मिला था.. रिया के

साथ था तो क्या हुआ.... आख़िर वो भी दोस्त थी.

जब दोनो ने मिलकर बर्तन और किचन सॉफ कर ली तो रिया राज से

बोली..." राज में दो मिनिट मे कपड़े बदल कर आई.. अगर तुम्हे भी

बदलने हो तो बदल लो."

"नही में ऐसे ही ठीक हूँ." राज ने जवाब दिया.

दोनो के किचन से बाहर निकलते ही किचन एक दम शांत हो गया...

कहने को तो रोमा की नज़रें कीताबों पर गढ़ी हुई थी... लेकिन उसके

जेहन मे राज और रिया ही दौड़ रहे थे... उसे इस बात का अच्छी तरह

एहसास था कि दोनो की जोड़ी कितनी अच्छी लगती थी... और दोनो की आपास

मे दोस्ती भी अच्छी थी... उसे लगने लगा कि वो ज़बरदस्ती राज और

रिया के बीच आ रही है.. पर दिल मे बसे राज का प्यार उसे छोडने

को तैयार ही नही था.

"प्लीज़ ऐसा मत करो ना?" रिया की जोरों की आवाज़ गूँजी.

रोमा ने देखा कि रिया दौड़ते हुए किचन मे आई और रुक गई... और

राज उसके पीछे दौड़ते हुए आआया... रिया ने एक सेक्सी पीले रंग की

स्कर्ट और उसपर हल्के प्रिंट की सफेद शर्ट पहन रखी थी... इस

ड्रेस मे वो बहोत ही सेक्सी लग रही थी...शर्ट का उपरी बटन

खुला हुआ था जिससे उसकी चुचियों की घाटी सॉफ नज़र आ रही

थी.... रोमा अपनी कुर्सी से उठी और रिया को अपनी बाहों मे भर लिया.

"थॅंक्स रोमा आज के एहसान का बदला में ज़रूर एक दिन चुका

दूँगी.." रिया उसके कान मे फुसफुसा और उसके होठों को चूम लिया.

"अब जाओ और आज की रात एंजाय करो." रोमा ने अपनी सहेली को राज

की और धकेलते हुए कहा.

रिया के हटते ही राज ने आगे बढ़ कर रोमा को अपनी बाहों मे भर

उसके होठों को चूम लिए.. "तुम जानती हो ना में तुमसे बहोत प्यार

करता हूँ."

"में भी तुमसे बहोत प्यार करती हूँ राज." रोमा ने उसे बाहों मे

भरे हुए कहा.

राज ने उसके होठों को चूमते हुए अपनी जीब से उसके मुँह को खोला और

अपनी जीब उसके मुँह मे दे दी.. रोमा ने भी प्यार से अपना मुँह खोलते

हुए उसकी जीब से अपनी जीब मिला दी और उसे चूसने लगी..... आज कई

दिनो बाद दोनो एक दूसरे को इस अंदाज़ मे प्यार कर रहे थे.... रोमा

के शरीर मे गर्मी भर गयी और उसके निपल तन कर राज की छाती मे

धँसने लगे.... उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी..और उसे विश्वास था कि

अगर इस वक्त वो उसे लेकर कमरे मे जाती तो राज निसंकोच उसके साथ

चल देता.

पर रोमा ने अपने जज्बातों पर काबू किया और अपने आप को राज से

छुड़ाते हुए बोली... "अब तुम जाओ नही तो तुम्हे लेट हो जाएगी और

फिर रात को आने मे भी देर कर दोगे."

राज रोमा से अलग हुआ और अंदर कमरे मे अलमारी की तरफ बढ़ गया.

"मेने अलमारी से 200/- रुपये लिए है... क्यों ठीक रहेंगे ना?"

राज ने रोमा से कहा.

राज और रोमा जब से यहाँ आए थे खर्चे के लिए बॅंक से रुपये

निकाल कर अलमारी रखते थे और लेने से पहले एक दूसरे से सलाह कर

लिया करते थे.

रोमा को पता नही क्यों राज का रिया के साथ बाहर जाना अच्छा नही लग

रहा था... एक डर एक गम के मारे उसकी आँखो मे आँसू आ गये..

कहने को तो उसने रिया से वादा किया था लेकिन फिर कहीं दिल के किसी

कोने मे उसके डर समाया रहता था कि अगर राज रिया से ज़्यादा घुल मिल

जाएगा तो एक दिन वो उससे दूर चला जाएगा..और उसकी जुदाई के ख़याल

से ही वो डर जाती थी.

रोमा ने अपनी गर्दन हिला कर राज को जवाब मे हां कहा और राज और

रिया फ्लॅट से बाहर चले गये... उनके जाने के बाद रोमा ने टेबल पर

पड़ी किताब को बंद कर दिया क्यों कि उसका मन पढ़ाई मे नही था...

और ऐसे हालत मे पढ़ाई हो भी नही सकती थी.

रोमा के आँखों से आँसू बह रहे था....वो सोचने लगी, "भगवान

काश राज भी मुझे उतना ही और वैसा ही प्यार करता जैसा में उससे

करती हूँ.... उसे मेरी आँखों मे प्यार क्यों नही दिखाई देता.. वो

मेरे जज्बातों क्यों नही समझ पाता..."

रोमा को वो रात याद आने लगी जब महीनो पहले तालाब किनारे रिया ने

उससे कहा था... वो आज भी उन शब्दों को नही भूल पाई थी... "हो

सकता है कि ये सब तुम्हारा एक ख़याल एक सपना हो." रोमा सोचने लगी

की रिया की कही बाते सच तो नही है.

राज के चुंबन ने उसके शरीर को उत्तेजना मे भर दिया था... उसके

निपल तन कर खड़े हो गये थे और ब्रा के अंदर चुभ रहे थे...

और पेट के नीचे हिस्से मे गर्मी बढ़ती जा रही थी.

"शायद मुझे भी उनके साथ चले जाना चाहिए था..." वो सोचने

लगी... "में भी रात के मज़े ले सकती थी."

पर रोमा को पता था कि राज और रिया दोनो ही उसके इस फ़ैसले से

खुश नही होते....वो नही चाहते कि रोमा उनके प्यार के बीच

आए... वो ये भी अच्छी तरह जानती थी कि दोनो आपस मे काफ़ी खुश

रहेंगे.... उसे अपना भविश्य अंधकार मे डूबता नज़र आ रहा था.

रोमा ने अपनी आँखों को पोंच्छा और कमरे मे जाकर उसी अलमारी से

100/- निकाले और अपने कपड़े बदलने लगी. नीले रंग की जींस और

हल्के आसमानी रंग की शर्ट पहन कर वो फ्लॅट से बाहर निकल गयी.
 
फ्लॅट से निकल कर वो सड़क पर ऐसे ही चहेल कदमी करने लगी....

दुकाने करीब करीब बंद हो चुकी थी... तभी उसकी निगाह सड़क के

सामने की ओर एक खुले बार पर पड़ी... ना जाने क्या सोच कर

हिचकिचाते हुए उसने बार मे कदम रखा.

बार बहोत बड़ा नही था.... हॉल मे रोशनी काफ़ी कम थी.. टेबल के

उपर लगी हल्की रोशनी के बल्ब जल रहे थे.... कोने मे एक ड्ज

रेकॉर्डर पर गाने बज रहा था.

रोमा एक टेबल पर जाकर बैठ गयी. तभी कहीं अंधेरा से एक 35

साल का मर्द प्रगट हुआ और रोमा को देख मुस्कुराने लगा.

"ज्योति ये लड़की जो भी पीना चाहे इसे लाकर दे दो." उसने टेबल के

पास खड़ी एक वेट्रेस से कहा.

रोमा के मन मे एक बार तो आया कि वो मना कर दे... लेकिन वो आदमी

दीखने मे काफ़ी स्मार्ट और इज़्ज़तदार लग रहा था इसलिए उसने कुछ

कहा नही.

"जी बहोत बहोत शुक्रिया आपका," रोमा ने उससे कहा और वेट्रेस को

एक वोड्का वित लाइम लाने को कह दिया.

"मेरे ख्याल से तुम इसी सहर के कॉलेज मे पढ़ती हो... है ना?"

उसने मुस्कुराते हुए पूछा.

"हां अभी दाखिला लिया है, ज़रूर आप ज्योतिष् विद्या जानते है."

रोमा ने जवाब दिया.

"नही ज्योतिष् तो नही हूँ.... पर हां मुझे ऐसा लगा.... वैसे

मुझे जीत कहते है." उस मर्द ने कहा.

"मुझे रोमा."

वेट्रेस ज्योति ने ड्रिंक लाकर रोमा के टेबल पर रख दी... रोमा

अपना ग्लास उठाकर धीरे धीरे सीप करने लगी.

"अगर आपको बुरा ना लगे तो क्या में आपके साथ बैठ सकता हूँ?"

जीत ने पूछा.

रोमा इस स्तिथि मे नही थी कि उसे मना कर सके, "प्लीस बैठिए

मुझे कोई ऐतराज़ नही है."

"तो, तुम्हारी कॉलेज लाइफ कैसे चल रही है?" जीत ने उसके सामने

की कुर्सी पर बैठते हुए पूछा.

"सच कहूँ तो बहोत मुश्किल हो रही है... नई साथी नई जगह और

साथ ही पढ़ाई भी थोड़ी डिफिकल्ट है... काफ़ी मेहनत करनी पड़ती

है." रोमा ने जवाब दिया.

"वैसे कौन से विषय मे परेशानी होती है तुम्हे?" जीत ने एक बार

फिर पूछा.

"सबसे ज़्यादा तकलीफ़ मॅतमॅटिक्स मे होती है.... अलगेबरा तो मेरी

समझ मे नही आता है." रोमा ने जवाब दिया.

रोमा को जीत से बाते करते हुए अच्छा लग रहा था... आज पहली

बार किसी ने उससे उसकी परेशानियाँ या फिर उसकी पढ़ाई के बारे मे

इतने अप्नत्व से पूछा था.... उसने अपनी ठंडी ड्रिंक से एक घूंठ

लिया और उसकी तरफ देखने लगी.... जीत एक हॅंडसम नौजवान था...

काली आँखें........ काले घने बॉल... चौड़े कंधे... और काफ़ी

हॅंडसम लग रहा था.. रोमा खुश थी कि वो उस के साथ बैठी थी.

"अगर तुम चाहो तो में तुम्हारी मदद कर सकता हूँ... जिस कॉलेज

मे तुम पढ़ रही हो मेने उसी कॉलेज से ग्रॅजुयेशन किया है और बाद

मे मेने Bएड का सर्टिफिकेट भी ले लिया है... में प्राइवेट अकॅडमी

मे पढ़ाता हूँ जो यहाँ से ज़्यादा दूर नही है... मेद्स और हिस्टरी

मेरे खास विषय है... में अकेला रहता हूँ और शाम के वक्त मेरे

पास काफ़ी समय रहता है." जीत ने उसकी आँखों मे आँखे डालते हुए

कहा.

रोमा तो खुशी उछल पड़ी, "क्या सच मे ऐसा हो सकता है?"

"हां अगर तुम चाहो तो," जीत ने उसके खुशी से भरे चेहरे पर

नज़र डालते हुए कहा, "जाने से पहले मेरा फोन नंबर ले लेना.... तुम

किसी भी वक्त मुझे फोन कर सकती हो... तुम्हारी मदद करके मुझे

खुशी होगी."

"आज में बहोत खुश हूँ और में चाहती हूँ कि आप मेरी मदद

करें." रोमा ने जवाब दिया.

राज और रिया दोनो रोमा के दीमाग से इस समय निकल चुके थे... आज

कितने दिनो बाद उसे एक राहत सी महसूस हो रही थी... दोनो बातो

मे खो गये.... वक्त कब बीत गया दोनो को पता ही नही चला.

* * * * * * * * * * *
 
"राज पता नही क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि रोमा को हमारा साथ

साथ बाहर जाना अछा नही लगा." रिया ने राज का हाथ पकड़े गाड़ी की

और बढ़ते हुए कहा.

"गाड़ी तुम चलाओगी या में चलूं?" राज ने पूछा.

रिया राज को पकड़ गाड़ी के पास आगाई और ड्राइवर साइड के दरवाज़े पर

उसे हल्का सा धक्का देते हुए अपने होंठ उसके होठों पर रख चूसने

लगी.... उसके होठों को चूसने के बाद वो धीरे से उसके कान मे

फुस्फुसाइ, "मेरी गाड़ी की पीछले सीट काफ़ी चौड़ी है अगर तुम

चाहो तो....."

"फिलहाल मेरी कुछ समझ मे नही आ रहा."राज ने धीरे से कहा...

उसके ख़यालों मे अब भी रोमा का चेहरा बसा था जहाँ उसके चेहरे

पर जलन की भावना उसे सॉफ दिखाई डी थी.

"राज उस दिन तुम हमारे साथ नही थे..... मेने कसम खा कर कहती

हूँ कि उसने खुद कहा था कि अगर में उस रात वाली हरकत वापस ना

दोहराऊ तो वो तुम्हे मेरे साथ बाँटने के लिए तैयार है...." रिया ने

उसे गालों पर हाथ फिराते हुए कहा, "फिर भी मेने एक महीने तक

इस बात का इंतेज़ार किया कि शायद मुझे तुम्हारे साथ कुछ समय

बिताने का मौका मिल जाए."

"हां तुमने बाद मे बताया था और में खुश हूँ कि तुम्हारे सभी

टेस्ट सही गये.. उस रात की वजह से तुम्हे कोई बीमारी नही हुई."

राज ने उसके होठों को हल्के से चूमते हुए कहा, "वैसे क्या हुआ था

उस रात?.... कितना डर गये थे हम दोनो."

रिया एक गहरी साँस ले कर रह गयी.... उस भयानक रात की काली

परछाईयाँ आज भी उसे नींद मे सताती थी........और दर्द की टीस

उसके पूरे बदन मे दौड़ जाती थी.

"प्लीज़ राज आज की रात उस हादसे की बात मत करो.. वो रात मेरी

जिंदगी की एक भयानक हादसा था जिसे में भुला देना चाहती हूँ"

रिया ने रोते हुए कहा, "आज की रात में तुम्हारे साथ हंसते हुए

गुज़ारना चाहती हूँ... तुम नही जानते एक महीना मेने आज के लिए

इंतेज़ार किया है.. कितनी अकेली थी में गुज़रे एक महीने तक."

"फिर भी में जानना चाहता हूँ कि उस रात तुम्हारे साथ क्या हुआ?

रोमा भी मुझे कुछ बताने को तैयार नही है." राज ने कहा.

राज की ज़िद ने रिया के मन मे दबे गुस्से और झल्लाहट को जैसे हवा

दे दी, "क्या तुम ये चाहते हो कि में तुम्हे बताऊ की में तुमसे

कितना प्यार करती हूँ.... में कितनी अकेली थी तुम्हारे बिना....

मेने अपनी सेहत अपनी जान इस लिए जोखम मे डाली कियों कि में

तुम्हे पा नही सकती थी... में सारी सारी रात बिस्तर पर करवट

बदलते हुए तुम्हारे सपने देखा करती थी और तुम रोमा की बाहों मे

चैन की नींद सोते थे... और क्या करती में... मुझे तुम पर गुस्सा

आ रहा था... मेने सोचा था कि हम दोनो का वक्त साथ साथ अछा

गुज़रेगा लेकिन ऐसा नही हुआ...." रिया ने रोते रोते कहा.

"हां में तुम्हारे मुँह से यही सुनना चाहता था" राज ने मुस्कुराते

हुए कहा.

राज को मुस्कुराते देख रिया का गुस्सा काफूर हो गया और उसके होठों

पर एक मधुर मुस्कान आ गयी, "बड़े हरामी हो तुम?" रिया ने उसके

छाती पर हल्के मुक्के मारते हुए कहा.

"अब चलॉगी या फिर यहीं खड़े रहने का इरादा है" राज ने रिया को

अपने गले लगाते हुए कहा.

रिया ने राज को गाड़ी की चाभी पकड़ी....राज ने ड्राइवर सीट का दरवाज़ा

खोला और अंदर बैठ गयी.. रिया भी दूसरी तरफ से घूम कर आई

और उसके बगल मे बैठ गयी.... राज ने जैसे ही गाड़ी पार्किंग से

बाहर निकाली रिया उससे और चिपक कर बैठ गयी.... उस रात के

ख़याल से अभी भी उसका बदन कांप रहा था और दिल मे हल्का सा डर

समाया हुआ था.

"राज क्यों ना हम आज किसी पब या बार मे जाने की बजाई ड्राइव पर

जाएँ." रिया ने राज से चिपकते हुए कहा.

राज ने उसकी बात मानते हुए गाड़ी सहर के बाहर के रास्ते पर बढ़ा

दी. राज ने महसूस किया कि रिया के शब्दों मे कुछ अजीब सा था...

उसे अफ़सोस होने लगा कि उसने उस रात वाला विषय छेड़ा ही क्यों.

शायद रिया ने राज के मन की बात पढ़ ली थी, "में ठीक हूँ राज

तुम चिंता मत करो.... मुझे तो खुद पर गुस्सा आ रहा है कि उस

रात मेने ऐसा क्यों किया... पर कहते है ना कि प्यार मे लोग पागल

हो जाते है... और अक्सर कुछ पागलों वाली हरकत कर बैठते है..

शायद मेने भी कुछ ऐसा ही किया था.... कितनी बेवकूफ़ हूँ में

मुझे समझ लेना चाहिए था कि में तुम्हे नही पा सकती.... पर

क्या करूँ ये दिल है कि ये बात मानने को तैयार ही नही है."

राज ने कोई जवाब नही दिया उसके दीमाग मे एक तूफान सा उठा हुआ

था... वो रिया को प्यार करता था पर साथ ही वो अपनी प्यारी बेहन

रोमा को भी बहोत प्यार करता था.... साथ ही रोमा की इज़्ज़त भी

बहोत करता था .. कितनी मेहनत कर रही थी वो अपना एक अच्छा

भविश्य बनाने के लिए.... उसकी समझ मे नही आ रहा था कि वो

क्या करे... वो एक ऐसे दो राहे पर खड़ा था कि उसकी कुछ समझ मे

नही आ रहा था.

"राज आगे एक पार्किंग एरिया है और इस समय सुनसान होगा गाड़ी वहाँ ले

लेना" रिया ने राज से कहा.

राज ने रिया के कहे अनुसार गाड़ी पार्किंग एरिया मे रोक दी.. उसने देखा

की जगह वाकई मे सुनसान पड़ी थी.

गाड़ी के रुकते ही रिया राज की तरफ चेहरा किया उसकी गोद मे बैठ

गयी. राज ने उक्सी गर्दन मे हाथ डाला और उसके घने बालों मे अपनी

उंगलियाँ फिराने लगा, "मुझे तुम्हारे ये घने बाल बहोत अच्छे लगते

है."
 
रिया के चेहरे पर थोड़ी शैतानी आ गयी...."और वो क्यों?" उसने

पूछा.

राज थोड़ी देर सोचता रहा फिर बोला, "क्यों कि ये इतने लंबे और

घने है और एकदम रेशम की तरह मुलायम है... ठीक जैसे किसी

शॅमपू की आड़ मे देखाए जाते है."

रिया राज की बात सुनकर मुस्कुरा दी और उसके गालों पर अपने गुलाबी

होठ रगड़ने लगी.... "क्या तुम्हे ये भी अच्छे लगते है?"

राज की उत्तेजना बढ़ने लगी... उसका लंड पॅंट के अंदर उछलने लगा

था.... "मुझे तुम्हारे होंठ भी बहोत पसंद है."

"ओह्ह्ह अच्छा.... तो फिर बताओ तुम्हे मेरे होठ क्यों पसंद है?"

"इसलिए कि ये जो भी करते है बहोत अच्छा करते है..." राज ने उसके

होठों पर हल्के से उंगली फिराते हुए कहा.

रिया अंधेरे मे मुस्कुरा दी...."और तुम क्या चाहते हो... कि ये क्या

करें?"

इस ख़याल से ही रिया के होठ उसके लंड पर क्या क्या कर सकते है

उसका लंड पॅंट के अंदर पूरी तरह तन गया... उसे पता था कि उसके

कहने की देर है रिया उसके लंड को चूसने और चूमने लगेगी..

रिया ने जब देख की राज ने कोई जवाब नही दिया तो उसने उसके सूखे

होठों को चूमते हुए कहा... "राज बताओ ना तुम क्या चाहते हो कि मेरे

होठ वो सब करें...."

राज ने अपने हाथों से उसके चेहरे को अपने नज़दीक खींचा और उसके

होठों पर अपने होठ रख दिए... दोनो की जीब एक दूसरे से खिलवाड़

करने लगी.. दोनो एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे.

"पीछले एक महीने मेने तुम्हे कितना मिस किया है पता है तुम्हे?"

रिया ने उसके होठों को जोरों से चूमते हुए कहा. "में जब भी

तुम्हे उसके साथ देखती तो मुझे ऐसा लगता कि मेरी जान ही निकली

जा रही है."

"पर में तुम दोनो से बहोत प्यार करता हूँ.... रिया." राज ने उसके

गालों पर हाथ फिराते हुए कहा.

"पर आज की रात तुम मेरे हो.... सिर्फ़ मेरे...." रिया ने राज से

कहा, "कहो कि तुम मुझे प्यार करते हो"

"में तुम्हे अपने दिल की गहराइयों से चाहता हूँ... सच..." राज ने

कहा...."मेरी गुड़िया में तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ."

"में भी तुम्हे मेरी जान.... बहोत प्यार करना चाहती हू," कहकर

रिया ने राज को जोरों से बाहों मे भींच लिया और अपनी चुचियों को

उसकी छाती पर रगड़ने लगी.

रात के अंधेरे मे पार्किंग लॉट मे गाड़ी के अंदर दोनो की साँसे तेज

होने लगी... मुँह से हल्की उन्माद भारी सिसकियाँ फूटने लगी....

"पता है मुझे वो तालाब का किनारा बहोत याद आ रहा है... उस

चाँदनी रात मे तुम्हारा मुझे प्यार करना... सच मे बहोत अछा लगा

था उस दिन..." रिया ने उसे चूमते हुए कहा.

क्रमशः..................

 
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