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Guest
सच बताता हू दोनो फांको को चियर कर मैने जब चूत के गुलाबी रस से भीगे च्छेद को देखा तो मुझे यही लगा की मेरा तो जानम सफल हो गया है. छूट के अंदर का भाग एक डम गुलाबी था और रस भीगा हुआ था जब मैने उस चीड़ को च्छुआ तो मेरे हाथो में चिप छिपा सा रस लग गया. मैने उस रस को वही बिस्तर के चादर पर पोच्च दिया और अपने सिर को आगे बढ़ा कर मा के बुर को चूम लिया. मा ने इस पर मेरे सिर को अपने चूत पर दबाते हुए हल्के से सिसकते हुए कहा "बिस्तर पर क्यों पोच्च दिया, उल्लू, यही मा का असली पायर जो की तेरे लंड को देख के चूत के रास्ते छलक कर बाहर आ रहा है, इसको चक के देख, चूस ले इसके"
"है मा चुसू मैं तेरे बुर को, है मा चतु इसको"
"हा बेटा छत ना चूस ले अपनी मा के चूत के सारे रस को, दोनो फांको को खोल के उसमे अपनी जीभ दाल दे और चूस, और ध्यान से देख तू तो बुर के केवल फांको को देख रहा है, देख मैं तुझे दिखती हू" और मा ने अपने चूत को पूरा चिदोर दिया और अंगुली रख कर बताने लगी "देख ये जो छ्होटा वाला च्छेद है ना वो मेरे पेशाब करने वाला च्छेद है, बुर में दो दो च्छेद होते है, उपर वाला पेशाब करने के काम आता है और नीचे वाला जो ये बरा च्छेद है वो छुड़वाने के काम आता है इसी च्छेद में से रस निकालता है ताकि मोटे से मोटा लंड आसानी से चूत को छोड़ सके, और बेटा ये जो पेशाब वाले च्छेद के ठीक उपर जो ये नुकीला सा निकला हुआ है वो क्लिट कहलाता है और ये औरत को गर्म करने का अंतिम हथियार है. इसको च्छुटे ही औरत एक डम गरम हो जाती है, समझ में आया"
"हा मा, आ गया साँझ में है कितनी सुंदर है ये तुम्हारी बुर, मैं चतु इसे मा.." "हा बेटा, अब तू चाटना शुरू कर दे, पहले पूरी बुर के उपर अपनी जीभ को फिरा के चाट फिर मैं आगे बेटाटी जाती हू कैसे करना है"
मैने अपनी जीभ निकल ली और मा की बुर पर अपने ज़ुबान को फिरना शुरू कर दिया, पूरी चूत के उपर मेरी जीभ चल रही थी और मैं फूली हुई गद्देदार बुर को अपनी खुरदरी ज़बान से उपर से नीचे तक छत रहा था. अपनी जीभ को दोनो फांको के उपर फेरते हुए मैं ठीक बुर के दरार पर अपनी जीभ रखी और धीरे धीरे उपर से नीचे तक पूरे चूत की दरार पर जीभ को फिरने लगा, बुर से रिस रिस कर निकालता हुआ रस जो बाहर आ रहा था उसका नमकीन स्वाद मेरे मुझे मिल रहा था. जीभ जब चूत के उपरी भाग में पहुच कर क्लिट से टकराती थी तो मा की सिसकिया और भी तीज हो जाती थी. मा ने अपने दोनो हाथो को शुरू में तो कुच्छ देर तक अपनी चुचियों पर रखा था और अपनी चुचियों को अपने हाथ से ही दबाती रही मगर बाद में उसने अपने हाथो को मेरे सिर के पिच्चे लगा दिया और मेरे बालो को सहलाते हुए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबने लगी. मेरी चूत चूसा बदस्तूर जारी थी और अब मुझे इस बात का अंदाज़ा हो गया था की मा को सबसे ज़यादा मज़ा अपनी क्लिट की चूसा में आ रहा है इसलिए मैने इस बार अपने जीभ को नुकीला कर के क्लिट से भीरा दिया और केवल क्लिट पर अपनी जीभ को तेज़ी से चलाने लगा. मैं बहुत तेज़ी के साथ क्लिट के उपर जीभ चला रहा था और फिर पूरे क्लिट को अपने होंठो के बीच दबा कर ज़ोर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा, मा ने उत्तेजना में अपने ****अरो को उपर उच्छल दिया और ज़ोर से सिसकिया लेते हुए बोली "है दैया, उईईइ मा सी सी..... चूस ले ओह चूस ले मेरे भज्नसे को ओह, सी क्या खूब चूस रहा है रे तू, ओह मैने तो सोचा भी ऩही थऽआअ की तेरी जीभ ऐसा कमाल करेगी, है रे बेटा तू तो कमाल का निकला ओह ऐसे ही चूस अपने होंठो के बीच में भज्नसे को भर के इसी तरह से चूस ले, ओह बेटा चूसो, चूसो बेटा......"
मा के उत्साह बढ़ने पर मेरी उत्तेजना अब दुगुनी हो चुकी थी और मैं दुगुने जोश के साथ एक कुत्ते की तरह से लॅप लॅप करते हुए पूरे बुर को छाते जा रहा था. अब मैं चूत के भज्नसे के साथ साथ पूरे चूत के माँस (गुड्डे) को अपने मुँह में भर कर चूस रहा था और, मा की मोटी फूली हुई चूत अपने झांतो समेत मेरे मुँह में थी. पूरी बुर को एक बार रसगुल्ले की तरह से मुँह में भर कर चूसने के बाद मैने अपने होंठो को खूल कर चूत के छोड़ने वाले च्छेद के सामने टिका दिया और बुर के होंठो से अपने होंठो को मिला कर मैने खूब ज़ोर ज़ोर से चूसना सुरू कर दिया. बर का नशीला रस रिस रिस कर निकल रहा था और सीधा मेरे मुँह में जा रहा था. मैने कभी सोचा भी ऩही था की मैं चूत को ऐसे चुसूंगा या फिर चूत की चूसा ऐसे की जाती है, पर सयद चूत सामने देख कर चूसने की कला अपने आप आ जाती है. फुददी और जीभ की लरआई अपने आप में ही इतनी मजेदार होती है की इसे सीखने और सीखने की ज़रूरत ऩही पार्टी, बस जीभ को फुददी दिखा दो बाकी का काम जीभ अपने आप कर लेती है. मा की सिसकिया और शाबाशी और तेज हो चुकी थी, मैने अपने सिर को हल्का सा उठा के मा को देखते हुए अपने बुर के रस से भीगे होंठो से मा से पुचछा, "कैसा लग रहा है मा, तुझे अक्चा लग रहा है"