मैं नीला 22 साल की खूबसूरत महिला हूँ। अभी दो साल पहले मेरी शादी जयपूर निवासी शरद से हुई है। मैं देल्ही के ग्रीन पार्क में रहती थी मेरी एक ननद रेशमा भी कारोल बाघ में रहती है। उनके पति राज कुमार ठाकुर का स्पेयर पार्ट का बिज़नेस है। रेशमा दीदी बहुत ही हँसमुख महिला हैं। राज जी मुझे अक्सर गहरी नजरों से। घूरते रहते थे मगर मैंने नजर अंदाज किया।
मैं बहुत सेक्सी लड़की थी। मेरे कालेज में काफी चाहने वाले थे मगर मैंने सिर्फ दो लड़कों को ही लिफ्ट दी थी। लेकिन मैंने किसी को अपना बदन छूने नहीं दिया। मैं चाहती थी की सुहागरात को ही मैं अपना बदन अपने पति के हवाले करूँ। मगर मुझे क्या पता था की मैं शादी से पहले ही सामूहिक संभोग का शिकार हो जाऊँगी। और वो भी ऐसे आदमी से जो मुझे सारी जिंदगी रौंदता रहेगा।
रेशमा दीदी ही मेरे घर उनके देवर का रिश्ता लेकर आई थी। शरद का परिवार काफी पैसे वाला था। शरद भी देखने में काफी हैंडसम है। मैं तो बस एक ही नजर में उनपर मर मिटी। सगाई और शादी के बीच आठ महीने
का गैप रहा। इस दौरान शरद अक्सर किसी ना किसी बहाने से मुझसे मिलने आ जाता। हम दोनों अंतरंग प्रेमी की तरह घूमते फिरते थे। शरद ने इस दौरान मुझसे कई बार सेक्स के लिए आग्रह किया था। मगर मैं बड़ी । सफाई से उन्हें कुछ दिन और सब्र करने के लिए राजी कर लेती थी। हाँ लिपटना चूमना तो सब चलता ही रहता था।
शादी की सारी बातचीत रेशमा दीदी ही कर रही थी इसलिए अक्सर उनके घर आना जाना लगा रहता था। कभीकभी मैं सारे दिन वहीं रुक जाती थी। मेरे घर वाले इसमें किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं करते थे। एक बार तो रात में भी वहीं रुकना पड़ा था। मेरे घर वालों के लिए भी ये नार्मल बात हो गई थी। वो मुझे वहाँ जाने से कभी नहीं रोकते थे।
एक शाम को उन्होंने बुलाया- “नीला फटाफट तैयार होकर आ जा..." उनकी आवाज में खुशी झलक रही थी।
क्या हुआ... मुझे भी तो बताओ..”
अरे तेरे होने वाले नंदोई जी शाहरुख की पिक्चर वीरजारा का टिकेट लेकर आए है। आज ही फिल्म रिलीज हो। रही है। बस हम तीनों रहेंगे। शाम का खाना भी बाहर कहीं ले लेंगे...”
मैं खुशी से उछल पड़ी। मैं जल्दी से तैयार होकर उनके घर पहुँची। हम तीनों वहाँ से पिक्चर हाल पहुँचे। पिक्चर बस चालू ही हुई थी। पूरा हाल खचा खच भरा हुआ था। हमें अपनी अंधेरे में सीट तलाशनी पड़ी। हमारी सीट बीच में थी। सबसे आगे राजकुमार जी थे उनके पीछे दीदी और फिर मैं। राजकुमार जी अपनी सीट ढूँढ़कर बैठ गये। दो सीट छोड़कर रेशमा दीदी भी बैठ गई। मेरे लिए दोनों ने अपने बीच की सीट छोड़ दी थी। लेकिन मैं स्क्रीन पर चल रही फिल्म को देखते-देखते धम्म अपनी सीट पर बैठने की जगह राजकुमार जी की गोद में बैठ गई।
राजकुमार जी शायद ऊपर वाले से यही दुआकर रहे थे। क्योंकी इससे पहले की मैं सम्हालती उनकी बाहें मेरे बदन को अपने आलिंगन में जकड़ लिया। मेरे दोनों स्तन उनकी बाहों के नीच दब गये थे। मैंने उस छणिक गलती के दौरान अपने नितंबों के बीच उनके लिंग का आभार महसूस किया। मैं टपक से अपनी गलती सुधारते हुए उनकी गोद से छटक कर खड़ी हो गई। दोनों मेरी गलती पर हँसने लगे। मैं तो शर्म से पानी-पानी हुई जा रही थी। मैं अपनी नजरें झुकते हुए अपनी सीट पर बैठ गई।
क्या बात है नीला मेरे पति की गोद ज्यादा भा रही है क्या... फिर मेरे भाई का क्या होगा..." रेशमा दीदी धीरे से मेरे कान में कहकर मेरी कमर में चिकोटी काटी।
दीदी आप बहुत वो हो। बस कुछ भी कह देती हो। राजकुमार जी ने सुन लिया तो क्या समझेंगे...”
हम तीनों फिल्म देखने लगे। मेरी और राजकुमार जी के बीच के हत्थे पर मैं हाथ रखी हुई थी। कुछ देर बाद राजकुमार जी ने मेरे हाथ पर अपने हाथ रख दिए। मैंने शर्मा कर धीरे से अपना हाथ वहाँ से हटा लिया। कुछ देर बाद उन्होंने मेरे कंधे के पीछे सीट की टेक पर अपना हाथ रख दिया। मैंने कुछ कहना उचित नहीं समझा। मैं चुपचाप फिल्म देख रही थी। कुछ देर बाद उनकी उंगलियों की छूवन अपने कंधे पर महसूस किया। मैं इस पोजीशन से बचने के लिए कुछ आगे झुक गई और दीदी की तरफ सरक गई। लेकिन उन्होंने अपना हाथ नहीं हटाया।
कुछ देर बाद उनकी उंगलियां अपने गले पर महसूस कर रही थी। मैं शर्म से एकदम साँस रोके बैठी रही। मैं । इतनी टेन्स हो गई की सामने स्क्रीन पर क्या चल रहा है मेरी समझ में नहीं आ रहा था। उनकी उंगलियां मेरे गले पर फिर रही थी। इसी तरह इंटर्वल हो गया। राज कुमार जी इंटर्वल में कोल्ड ड्रिंक्स और पापकार्न का एक बड़ा पैकेट लेकर आए। दीदी उस समय बाथरूम चली गई थी। हम दोनों ही बैठे हुए थे इसलिए मैंने उनसे दबी आवाज में शिकायत की।
आप क्यों परेशान कर रहे थे...”
क्यों मैं क्या परेशान कर रहा था...”
“क्यों अंधेरे का फायदा लेकर मेरे गले को सहला नहीं रहे थे...”
अरे इसमें परेशान होने की क्या बात है। मैं तुम्हारे इस सुंदर गले को ही तो सहला रहा था और कुछ तो नहीं सहलाया..."
मुझे मानो साँप सूंघ गया। मैं शर्म के मारे पशीने पशीने हो गई। एर कंडीशन की हवा भी मुझे ठंडक नहीं दे पा रही थी। “नहीं आप मुझसे दूर रहो। मुझे आपसे डोर लगता है...” मैंने अटकते हुए कहा- “मैं आपके साले की होने वाली बीवी हूँ अगर दीदी ने देख लिया तो क्या सोचेगी। मैं आपसे रिक्वेस्ट करती हूँ की आप ऐसा नहीं करें नहीं तो मेरी शादी टूट जाएगी...”
अरे तुम घबराती क्यों हो। तुम्हारी शादी करवाने का जिम्मा तो मेरा है...” उन्होंने कहा।
मैं कुछ बोलती मगर तभी दीदी के लौट आने के कारण मुझे चुप हो जाना पड़ा। कोई भी औरत अपने पति की गलती तो मानती नहीं है दूसरे में ही कमियां ढूँढने लग जाती हैं। मैं चुपचाप उनके हाथ से कोल्ड ड्रिंक लेकर सिप करने लगी। दीदी भी आकर अपनी सीट पर बैठ गई। पापकार्न का पैकेट राज ने अपनी जांघों के बीच रख रखा था। हम वहीं से पोप कार्न लेकर खा रहे थे।
एक बार गलती से फिल्म देखते-देखते मेरा हाथ पापकार्न के पैकेट की जगह उनकी जांघों के जोड़ से जा टकराया। मैंने पापकार्न ढूँढ़ने की कोशिश में उनके लिंग को सहला दिया। मुझे अपनी गलती का अहसास होते ही मैंने अपना हाथ वहाँ से खींच लिया। मगर राज ने अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़कर अपने लिंग पर रखा। मैंने पूरी ताकत से अपने हाथ को उनसे छुड़या। मैं अब पापकार्न लेने का इरादा छोड़कर चुपचाप फिल्म देखने लगी। राज ने वापस मेरे कंधे पर अपनी बाँह रख दी और मेरे गले को सहलाने लगा। अब उसका हाथ गले से फिसलता हुआ मेरे सीने के खुले जगह पर घूमने लगा।
मैं चुपचाप अपने ध्यान को सामने लगाने की कोशिश कर रही थी। मैं अपने आपको कोस रही थी की क्यों मैंने इनके साथ फिल्म देखने का प्लान बनाया। तभी उन्होंने अपने हाथ को मेरे कंधे पर सरकया।
और... ओफफफ्फ़... मेरे बदन का रोवां-रोवां खड़ा हो गया... मेरा गला सूख गया... घबराहट के मारे मेरी साँस रुक गई। मेरा एक स्तन उनकी मुट्ठी में था और वो उसे अपने हाथों से मसल रहे थे। मैंने एक झटके से अपनी बगल में बैठी दीदी को देखा।
दीदी ध्यान से फिल्म देख रही थी। इधर-उधर देखने पर मैंने पाया की मेरे और राज के अलावा किसी को खबर नहीं थी की वहाँ क्या चल रहा है। मैंने उनके हाथ को पकड़कर अपने बदन से झटक दिया और दबी आवाज में चेतावनी दी की अगर आइन्दा कोई गलत हरकत की तो मैं शोर मचा देंगी।
अपने मकसद में कामयाब ना होता देख वो चुपचाप बैठ गये। उसके बाद उन्होंने किसी तरह की हरकत नहीं की मगर मुझे उनकी नियत का आभास हो गया था। वो मुझ पर कैसी गंदी नजर रखते हैं मुझे पता चल गया था। हम चुपचाप पिक्चर देखकर घर आए। पता नहीं मेरी धमकी की वजह से या किसी और कारण से उन्होंने काफी दिन तक अपनी ओर से कोई हरकत नहीं की। जब भी हम आमने सामने होते वो कतरा कर निकल जाते। मैंने भी उस घटना का जिक्र किसी से करना उचित नहीं समझा।
वो बात आई गई हो गई। अब अगली घटना के बारे में बताती हैं। बात उस समय की है जब शादी को सिर्फ बीस दिन बाकी थे।
अक्सर रेशमा दीदी मुझे अपने घर गहना या साड़ी पसंद करने बुला लेती थी। साड़ी परचेसिंग मेरी पसंद से हो रही थी इसलिए मैं तो इंतेजार ही करती रहती थी उनके फोन का। इस बार भी उन्होंने फोन कर कहा- “बन्नो । कल शाम को घर आ जा दोनों जेवरातों का आर्डर देने चलेंगे और शाम को कहीं खाना वाना खाकर देर रात तक घर लौटेंगे। बता देना अपनी मम्मी से की कल तू हमारे यहां रात को रुकेगी। सुबह नहा धोकर ही वापस । भेजूंगी...”
जी आप ही मम्मी को बता दो ना...” मैंने फोन मम्मी को पकड़ा दिया। उन्होंने मम्मी को कनविंस कर लिया।
अगले दिन शाम को 6:00 बजे तैयार होकर अपनी होने वाली ननद के घर को निकली। खूब गहरा मेकप कर रखा था। सरदियों के दिन थे इसलिए अंधेरा जल्दी छाने लगा था। मैं करोलबाग स्थित उनके घर पर पहुँची। गेट
पर दरवान ने मुझे देखकर एक रहस्मयी मुश्कुराहट अपने चेहरे पर बिखेरी।
दीदी ने बुलाया था...” मैंने कहा।
अंदर जाओ। सब मिल जाएगा..” उसने अपनी मूच्छों को सहलाते हुए कहा।
मैंने महसूस किया की उसके पैंट के ऊपर से उसके लिंग का साइज बढ़ने लगा है। मैं बड़ी असमंजस में पड़ गई। इस तरह का बर्ताव वो पहली बार कर रहा था। उसकी नजरें मेरी छातियों पर चिपकी हुई थी। मैंने अपने खयालों
को झटका और अंदर चली गई। मैंने तय किया की दीदी से मैं उसकी शिकायत करूंगी। अनपढ़ गॅवार उसकी इतनी हिम्मत की मुझ पर गंदी निगाहें डाले।
मैं सोचते हुए दरवाजे पर पहुँची। दरवाजा बाहर से बंद था। मैंने बेल बजाया। मगर अंदर से कोई हरकत नहीं हुई। मैंने “दीदी” आवाज लगाई और फिर दोबारा बेल बजाया। काफी देर बाद राज जी ने दरवाजा खोला।
दीदी हैं...” मैंने पूछा।
वो कुछ देर तक मेरे बदन को ऊपर से नीचे तक घूरते रहे कुछ बोला नहीं।
हटिए ऐसे क्या देखते रहते हैं मुझे। बताऊँ दीदी को..” मैंने उनसे मजाक किया- “कहाँ है दीदी...”
उन्होंने बेडरूम की तरफ इशारा किया और दरवाजे को मेरे पीछे बंद कर दिया।
तब तक भी मुझे किसी खतरे का आभास नहीं हुआ था। मगर बेडरूम के दरवाजे पर पहुँचते ही मुझे चक्कर आ गया। अंदर दो आदमी बेड पर बैठे हुए थे। उनके बदन पर सिर्फ शार्टस था। ऊपर से वे निर्वस्त्र थे। उनकी हाथों में शराब के ग्लास थे। और सामने ट्रे में कुछ स्नैक्स और एक आधी बोतल रखी हुई थी।
अचानक पास में नजर गई। पास में टीवी पर कोई ब्लू-फिल्म की सी.डी. चल रही थी। मेरा दिमाग ठनका मैंने वहाँ से भाग जाने में ही अपनी भलाई समझी। वापस जाने के लिए जैसे ही मुड़ी मैं सीधी राज की छाती से। टकरा गई।
जानू इतनी जल्दी भी क्या है। कुछ देर हमारी महफिल में भी तो बैठो। दीदी तो कुछ देर बाद आ जाएगी। तब तक हमसे मिल लो...” कहकर उसने मुझे जोर से धक्का दिया। मैं उन लोगों के बीच जा गिरी। उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
मैं हालत की नाजुकता को समझकर घबरा गई। मेरा बदन डर से काँपने लगा। मैं वहाँ से उठने की कोशिश की तो उन लोगों ने मुझे जकड़ लिया।
मुझे छोड़ दो मेरी कुछ ही दिनों में शादी होने वाली है। जीजाजी आप तो मुझे बचा लो मैं आपके साले की होने वाली बीवी हूँ...” मैंने उनके सामने हाथ जोड़कर मिन्नतें की।
भाई मैं भी तो देखू तू मेरे साले को संतुष्ट कर पाएगी या नहीं..." उन्होंने एक भद्दी सी गाली दी और कहादोस्तों बड़ी रसीली चीज है। मैं कब से फेंक रहा हूँ इसके लटके झटको को देखते हुए। मगर साली है की हाथ ही नहीं धरने दे रही है। इसके मुम्मे बड़े मुलायम हैं। मजा आ जाएगा। मैंने उन्हें खूब मसला है...”
मैं उनकी पकड़ से अपने को छुड़ाकर दरवाजे की ओर भागी। मैं दरवाजे को ठोंकने लगी- “दीदी दीदी मुझे बचाओ...” की आवाज लगाने लगी- “दरवान जी मुझे बचाओ... कोई बचाओ मुझे...”
चीख जितना चीख सकती है चीख ले। कोई नहीं आएगा बचाने। दरवान को जो बचेगा उसमें से एक टुकड़ा डाल दिया जाएगा तो उसके भी होंठ सिल जाएंगे। हाहाहा...” राज आज किसी दो टके हिन्दी फिल्म के विलेन से कम
नहीं लग रहा था। मैं उसके घुटनों के पास बैठी उनसे रहम की भीख माँग रही थी।
तेरी दीदी तो अचानक अपने मायके जयपूरे चली गई तुम्हारी होने वाली सास की तबीयत अचानक कल रात को खराब हो गई थी..." नीचे झुक कर उन्होंने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में पकड़ा और मुझे लगभग घसीटते हुए बेड तक ले गये- “मुझे तेरा ख्याल रखने को कह गई थी इसलिए आज सारी रात हम तेरा ख्याल रखेंगे...” कहकर उसने मेरे बदन से चुन्नी नोच कर फेंक दिया। तीनों मुझे घसीटते हुए बेड पर लेकर आए। कुछ ही देर में मेरे बदन से सलवार और कुर्ता अलग कर दिए गये। मैं रोते हुए दोनों हाथों से अपने योवन को छुपाने की असफल कोशिश कर रही थी। मगर उन तीनों दानवों के आगे मैं तो एक छोटे से फूल की तरह थी। उनकी ताकत के आगे भला मेरा क्या बस चलता।
तीन जोड़ी हाथ मेरी छातियों को बुरी तरह मसल रहे थे। और मैं छूटने के लिए हाथ पैर चला रही थी और बारबार उनसे रहम की भीख मांगती। फिर मेरी छातियों पर से ब्रस्सिएर नोच कर अलग कर दी गई। तीनों मेरी छातियों को मसल मसलकर लाल कर दिए थे। फिर निपल्स चूसने और काटने का दौर चला। तीनों किसी भूखे भेड़िए की तरह मेरे स्तनों पर टूट पड़े। तीनों मेरे दोनों स्तनों के साथ बुरी तरह से पेश आ रहे थे। ऐसा लग । रहा था की वो मेरी दोनों छातियों को मेरे बदन से अलग करके ही दम लेंगे। मैं दर्द से चीखे जा रही थी। मगर सुनने वाला कोई नहीं था, एक ने मेरे मुँह में कपड़ा ठूसकर उसे मेरी ओघनी से बाँध दिया जिससे मेरे मुँह से आवाज ना निकले।
अब मैं चीख भी नहीं पा रही थी। मुँह से बस “गों... गों...” जैसी आवाजें निकल रही थी।
मगर दर्द आँखों से आँसू बनकर बह रहे थे। अब तीनों ने मेरी सलवार के नाड़े को तोड़ कर उसे मेरे बदन से अलग कर दिया। मैंने शर्म के मारे अपनी दोनों टाँगें सिकोड़ ली जिससे मेरी योनि उनके सामने आने से बच जाए। मगर दो आदमियों ने मेरी टाँगों को पकड़कर चौड़ा कर दिया। मैं अपने आपको बई ही कमजोर हालत में पा रही थी।
अचानक किसी ने अपनी उंगलियां मेरे टाँगों की जोड़ पर रखकर पैंटी को एक तरफ सरका दिया। मैं छटपटाने की कोशिश कर रही थी। मगर मेरी हालत किसी शिकार के लिए बँधे जानवर जैसी हो रही थी। मेरे लिए हिलना भी मुश्किल हो रहा था। तभी दोनों उंगलियां बड़ी बेदर्दी से मेरी योनि में प्रवेश कर गई। कुँवारी चूत पर यह पहला हमला था इसलिए मैं दर्द से चिहँक उठी।।
अरे यार ये तो पूरा सालिड माल है। बिल्कुल अनछुई। अभी तक इसकी सील नहीं टूटी। इसे ठोंकने में तो मजा ही आ जाएगा..." उन लोगों की आँखों में भूख कुछ और बढ़ गई। मेरी पैंटी को छः हाथों ने फाड़कर टुकड़े टुकड़े कर दिए। मैं अब बिल्कुल निर्वस्त्र उनके बीच लेटी हुई थी। मैंने भी अब अपने हथियार डाल दिए थे।
"देख हम तो तुझे चोदेंगे जरूर। अगर तू भी हमारी मदद करती है तो तुझे भी खूब मजा आएगा और यह घटना जिंदगी भर याद रहेगी। लेकिन अगर तू हाथ पैर मारती रही तो हम तेरे साथ बुरी तरह से बलात्कार करेंगे।
सुबह तक तू बिस्तर से उठने लायक भी नहीं रहेगी। जिसे भी तू सारी उम्र नहीं भूलेगी। अब बोल तू हमारे खेल में शामिल होगी या नहीं...”
मैंने मुँह से कुछ कहा नहीं मगर अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। इससे उनको पता लग गया की अब मैं उनका विरोध नहीं करूँगी।
तीनों खुश हो गये। उन्होंने मेरे मुँह से कपड़ा हटा दिया। मैं कुछ देर तक गहरी गहरी सांसें लेती रही।
प्लीज भैया मैं कुँवारी हूँ..” मैंने एक आखिरी कोशिश की।
हर लड़की कुछ दिन तक कुँवारी रहती है। अब चल उठ..” राज ने कहा- “अगर तू राजी खुशी करवा लेती है तो दर्द कम होगा और अगर हमें जोर जबरदस्ती करनी पड़े तो नुकसान तेरा ही होगा...”
अब चल उठकर खड़ी हो जा। देखें तो सही कितना सालिड माल हाथ आया है...”
मैं रोते हुए उठकर खड़ी हो गई।
हाँथों को अपने सिर पर रखो..
.” मैंने वैसा ही किया।
टाँगों को चौड़ी करो...” दूसरे ने कहा।
मैंने वैसा ही किया। मेरा पूरा नग्न बदन अब उनके सामने था। बेपर्दा। तीनों अपने होंठों पर जीभ फिरा रहे थे।
अब पीछे गुमो.” मैं पीछे घूम गई। मेरे नितंबों को देखकर उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी।
उन्होंने मेरे नग्न शरीर को हर आंगल से देखा। फिर तीनों उठकर मेरे बदन से जोंक की तारह चिपक गये। मेरे अंगों को तरह तरह से मसलने लगे। मुझे खींचकर बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी टाँगों को चौड़ा करके लिटा दिया। एक ने मेरी योने से अपने होंठ चिपका दिया। दूसरा मेरे स्तनों को बुरी तरह से चूस रहा था और मसल रहा था। मेरे कुंवारे बदन में आनंदपूर्ण सिहरन दौड़ने लगी। मेरा विरोध पूरी तरह समाप्त हो चुका था। मैं म्म्म्म म आ ऊवू” कर सिसकारियां लेने लगी।
मेरी कमर अपने आप उनकी जीभ को अधिक और अधिक अंदर लेने के लिए ऊपर उठने लगी। मैं उत्तेजना में अपने हाथों से दूसरे का मुँह अपने स्तनों पर दबाने लगी। तीसरे ने झुक कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मेरे मुँह के अंदर अपनी जीभ डालकर उसे पूरे मुँह में घुमाने लगा।
अचानक मेरे बदन में एक अजीब से थरथराहट हुई और मेरी योनि में कुछ बहता हुआ मैंने महसूस किया। ये था। मेरा पहला वीर्यपत जो किसी का लण्ड अंदर गये बिना ही हो गया था। मैं निढाल हो गई।
मगर कुछ ही देर में उनकी हरकतों से वापस गर्म होने लगी। तबतक राज मेरे होंठों को छोड़कर उठ खड़ा हुआ। वो अपने कपड़े खोलकर पूरी तरह नग्न हो गया था। मैं एकटक उसके टनटनाए हुए लिंग को देख रही थी। उसने मेरे सिर को हाथों से थामा और अपना लिंग मेरे होंठों से सटा दिया।
“मुँह खोल..." उन्होंने कहा।
न्न्णंह...” मुँह को जोर से बंद किए हुए मैंने इनकार में सिर हिलाया।
अभी ये साली मुँह नहीं खोल रही है। इसका इलाज कर..” राज ने मेरी योनि से सटे हुए आदमी से कहा।
उसने मेरी क्लाइटारिस को दाँतों के बीच दबाकर काट दिया।
मैं “आआआआ” करके चीख उठी और उसका मोटा तगड़ा लिंग मेरे मुँह में समाता चला गया। मेरे मुँह से “गून गूओं” जैसी आवाजें निकल रही थी। मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार किसी का लिंग अपने मुँह में लिया था। मैं किसी के लिंग को मुँह में लेना गंदी चीज मनती थी क्योंकी वहाँ से मर्द पेशाब भी करते हैं। लेकिन उनके बीच हँसी मैं अशहाय सा महसूस कर रही थी।
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उसके लिंग से अजीब तरह की स्मेल आ रही थी, सड़े हुए पेशाब जैसी। मुझे जोर से उबकाई आई और मैं उसके लिंग को अपने मुँह से निकल देना चाहती थी मगर राज मेरे सिर को सख्ती से अपने लिंग पर दबाए हुए था।
अब उसके लिंग का टेस्ट उतना बुरा नहीं लग रहा था। जब मैं थोड़ी शांत हुई तो उसका लिंग मेरे मुँह के अंदरबाहर होने लगा। मैं धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। आधा लिंग बाहर निकालकर फिर से तेजी से अंदर कर देता था। लिंग गले तक पहुँच जाता था। इसी तरह कुछ देर तक मेरे मुँह को चोदता रहा तब तक बाकी दोनों भी। नग्न हो चुके थे।