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नयी माँ वही करेगी, जो तू कहेगा

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नयी माँ वही करेगी, जो तू कहेगा

रामू की माँ का देहांत हुए 1 महीना भी नहीं हुआ था की उसका बाप बंसी, 19 साल की दुल्हन ढूढ़ने लगा.

एक दिन, रामू घर में काफ़ी लोगों को देख अपने बाप से पूछता है की क्या बात है… इतने लोग…

उसका बाप, उसे समझाने की कोशिश करता है की दोनों को ज़रूरत है एक औरत की जो, घर संभाल सके.

रामू की माँ के बाद, उसकी बुआ घर के काम देख रही थी पर वो हमेशा तो रुक नहीं सकती.

रामू को समझाते समझाते, बंसी थक गया.

1 घंटे बाद, बुआ आकर अपने तरीके से समझाने लगी.

रामू की बात सही थी.

वो कैसे किसी और को, अपनी माँ एक्सेप्ट कर पाएगा.

रामू सब समझ रहा था पर उसका दिल बिल्कुल भी नहीं मान रहा था

थोड़ी देर बाद, बंसी फिर आया और बुआ को जाने के लिए कहा.

बंसी, रामू से बोला की शादी करना ज़रूरी है और वो और उसकी नयी माँ वही करेगी, जो तू कहेगा… कभी कोई प्राब्लम नहीं होगी…

रामू फिर भी इनकार करने लगा.

आख़िरी में बंसी ने रामू से कहा मेरी मजबूरी है… और बर्दाश्त नहीं होता… चाहे जो भी माँग ले पर इनकार मत कर… मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ… और, वहाँ से चल दिया.

“चुड़क्कड़ बाप” तरस रहा था और पीछे नहीं हटने वाला था.

आख़िर, में शादी हो ही गई.

दुल्हन का नाम, शीला था.. 19 साल की थी और शरीर भरा हुआ था..

देखा जाए तो रामू, उससे 4 साल ही छोटा था और उसका पति उससे दुगुनी उमर का था.

2-3 दिनों तक, सब घर में ही थे तो “सुहाग रात” तो हुई ही नहीं.

सबके जाने के बाद, शीला ने घर संभाला.

बंसी, सुबह खेत पर जाता और 5-6 बजे वापस आ जाता.

रामू, दोपहर 2 बजे स्कूल जाता और 6 बजे तक वापस आ जाता.

रामू के दिल में, नयी माँ के लिए कोई फीलिंग नहीं थी बल्कि गुस्सा था.

पहले दिन से ही, उसने नयी माँ को छोटे छोटे काम के लिए परेशान किया.

पर शीला ने, उसकी हर ज़रूरत का ख़याल रखा.

रामू ने नहलाने तक का काम, शीला से कराया.

शीला के घर में भी वो सब काम करती थी और उसे इन सबकी आदत थी.

गाँव की लड़कियों को, ये सब की आदत होती है.

शीला को पहले ही उसके पति ने कह कर रहा था की रामू को किसी चीज़ की तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए… जो वो कहे, वैसा ही करना…

शीला डरी हुई थी, पर साथ ही खुश भी थी.

बंसी रोज़ सुबह, जल्दी खेत में काम करने जाता.

पहले दिन से ही, रामू ने शीला को परेशान करना शुरू किया.

रामू बंसी के जाने के बाद उठा और संडास जा के शीला के पास गया और शीला को कहा – मुझे नहाना है… पानी गरम कर के दो…

घर में ही एक कुआ था, शीला कुए के पास गरम पानी रख कर खड़ी हो गई.

रामू सामने, अंडरवियर में खड़ा हो गया.

रामू ऐसे ही खड़ा रहा और शीला को देख रहा था.

शीला समझ गई की उसे स्नान भी करवा के देना होगा.

शीला ने साड़ी ऊपर की और बैठ गई.

सामने रामू को बिठाया और उस पर पानी डाल कर, साबुन लगाने लगी.

पूरे बदन पर साबुन लगा लिया पर अंडरवियर बाकी था.

रामू के अंडरवियर में भी, उसे हाथ डालना पड़ा.

रामू ये सब, “एंजाय” कर रहा था.

शीला के मुलायम हाथों का स्पर्श, अपने “लंड और ग़ुल्लों” पर पा कर मन में ही उछल रहा था.

साबुन घोते समय, शीला को महसूस हुआ की रामू का लंड खड़ा हो गया था.

शीला, कुछ नहीं बोली.

स्नान होने के बाद, रामू को टॉवेल से पोंछ दिया.

रामू का लंड तब भी खड़ा हुआ.

अंडरवियर निकाल कर टॉवेल लपेट कर, रामू ने शीला को कहा की उसे भूख लगी है और सीधा रसोई में चला गया..

शीला की नज़र उसके लंड पर थी, जो टॉवेल में “टेंट” बन रहा था.

रामू, रसोई में गया और बैठ गया.

शीला आ कर, रामू को खाना परोस कर सामने बैठ गई.

एक दो नीवाला मुंह में डालने के बाद, रामू रुक गया.

शीला ने पूछा – क्या बात है… खाना ठीक नहीं बना क्या… ??

रामू कुछ नहीं बोला और खाना खाने लगा.

कुछ देर बाद, रामू बोला की उसे नुन्नी में दर्द हो रहा है… उसका लंड, अब भी खड़ा था…

शीला ने कहा के टॉवेल ढीला कर दे, बाद में तेल लगा दूँगी.

रामू बोला – अभी, तेल ले आओ…

शीला ने कहा की खाना ख़तम कर लो, उसके बाद…

पर रामू ज़िद करने लगा.

शीला ने कहा – ठीक है… और वो तेल की शीशी ले आई.

रामू वैसे ही, बैठा रहा.

शीला ने तेल थोड़ा हाथ में ले कर टॉवेल के अंदर हाथ डाल दिया और लंड को पकड़ कर रगड़ने लगी.

10 मिनिट के बाद, रामू का खाना हो गया पर मालिश चल ही रही थी.

रामू टॉवेल को हटा कर बोला की टॉवेल चुभ रहा है.

शीला के सामने, रामू पूरा “नंगा” बैठा था.

रामू अब बस झड़ने वाला था.

शीला हाथ में लंड लेकर खुद भी हैरान थी और सोच रही थी की ये सब क्या हो रहा है.

रामू, मज़े ले रहा था.

खाना ख़तम होने के 2 मिनिट बाद, रामू बोला – अभी, बस हो गया… आ आ आहा हा…

रामू के लंड से पिचकारी, सीधे सामने निकली.

शीला हैरान हो गई, ये सब देख कर..

पिचकारी, सीधे थाली में जा गिरी.

रामू बोला – अब अच्छा लग रहा है…

शीला की उंगली, रामू के वीर्य से सनी हुए थी.

शीला ने साड़ी के पल्लू से अपना हाथ और रामू का लंड पोंछ कर, साफ किया.

अब ये, रोज़ की बात हो गई थी.

रामू नहाते वक़्त, नंगा हो जाता.

शीला को भी ये ही लगता था क्यूंकि रामू खुश था.

रामू को अपनी सोच पर, बहुत अफ़सोस होने लगा.

वो सोचता था की शीला को परेशान करेगा, पर पहले दिन से ही शीला उसकी सब बात मानती थी.

रामू ने सोच लिया की वो शीला को बहुत प्यार देगा पर एक दोस्त की तरह, वो कभी “माँ” का दर्जा नहीं दे पाएगा.

एक दिन रात में, रामू को नींद नहीं आ रही थी.

रामू, उसका बाप और शीला साथ ही एक ही कमरे में सोते हे.

रामू ने देखा की चादर की अंदर, बंसी शीला के ऊपर सोया हुआ है और ज़ोर ज़ोर से हिल रहा है.

कमरे की खिड़की से स्ट्रीट लाइट की रोशनी, सीधे उन पर आ रही थी.

रामू, ध्यान से देखने लगा.

थोड़ी देर में चादर साइड में हो गई और दोनों का “नंगा बदन” सामने आ गया.

बंसी, चोदने में लगा हुआ था.

शीला, धीरे धीरे चिल्ला रही थी.

शीला की नज़र, रामू पर पड़ी.

पर वो, कुछ ना बोली.

रामू, चुप चाप देख रहा था.

थोड़ी देर बाद, बंसी ने शीला को “डॉगी स्टाइल” में चोदना चालू किया.

बंसी ने जब रामू को जागते हुए देखा तो ज़ोर से रामू पर चिल्लाया – ओय, सोया नहीं अभी तक… चल, मुंह उधर कर के सो… नहीं तो टाँगे तोड़ दूँगा…

रामू डर गया और डर के मारे, सो गया.

अगले दिन, रामू ने नहाते वक़्त शीला से पूछा की रात मैं क्या चल रहा था…

शीला, कुछ नहीं बोली.

रामू के बार बार पूछने पर शीला ने कहा की ये सब बड़े लोगों का खेल है… तुम नहीं समझोगे…

रामू ने कहा की उसे भी ये “खेल” खेलना है…

शीला डाँट कर बोली की ऐसा, ये सब नहीं बोलना चाहिए वरना वो शिकायत करेगी, बंसी से…

रामू चुप हो गया पर उसके दिमाग़ में कुछ चल रहा था.

रामू, रोज़ खाना खाते खाते मूठ मरवाता.

इस कहानी को कैसे आगे बढ़ाऊं कुछ समझ नहीं आ रहा है.

अब, बाप बेटा दोनों खुश थे.

शीला, बेटे और पति को खुश रखने की कोशिश में जुटी थी.

बंसी ने कहा था की रामू को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और जो कहे, जो माँगे, दे देना.

अपने पति की आग्या का पालन कर रही थी और रामू की कभी शिकायत नहीं की.

बंसी रात को आता और खाना खा कर सो जाता.

रामू दिन भर खेलता कूदता और बाप के आते ही, किताब ले कर बैठ जाता.

शीला, सुबह रामू को संभालती और शाम को बंसी को.

3-4 महीनो बाद बंसी की रिश्तेदार, रामू की चाची आई.

सब की खबर, लेने के लिए.

रेखा की शादी नहीं हुए थी और उमर बढ़ने के कारण, वो “वर्जिन एंड अनमॅरीड” ही रह गई.

रेखा (चाची) को लग रहा था की सब कुशल मंगल है, सब खुश लग रहे थे.

वो कुछ दिनों के लिए, आई थी.

अगले दिन, सुबह उठ कर वो पहले संडास करने के लिए खेतो में गई.

उसके बाद वापस आ कर, घर के कामो में शीला का हाथ बटाने लगी.

शीला ने फिर कुछ देर बाद, रामू को उठाया.

रामू का लंड, सुबह की ठंडी में कड़क हो गया था.

रेखा ने देखा की उसकी पतलून में उभार है, और समझ गई की लड़का अब जवान हो गया है.

रामू, संडास करके आया और कुए (वेल) के पास जाकर कपड़े निकालने लगा.

तब तक शीला, गरम पानी बाल्टी में लेकर आई.

रेखा, दोनों को देख रही थी.

रेखा को होश तब आया जब शीला, रामू के सिर पर पानी डाल कर साबुन लगाने लगी.

रेखा यूही देखती रही और सोचने लग गई की ये तो “जवान लड़का” है, थोड़ी तो शरम आनी चाहिए.

शीला ने सारे बदन पर साबुन लगा दिया और एक पत्थर से, बदन घिसने लगी.

रामू शीला से बोला – चाची को यहाँ से हटाओ… मुझे शरम आती है…

शीला हँसते हुए रेखा से बोली – आप ज़रा रसोई में जाइए… मेरे मुन्ना को, शरम आ रही है…

चाची बोली – काहे की शरम… मैं तो तेरी माँ जैसी हूँ ना…

रामू ज़िद करने लगा.

शीला के फिर से कहने पर चाची अंदर गई और हँसते हुए बोली – कितना शरमाता है… शादी के बाद, क्या होगा तेरा…

रामू शीला से कहता है – नुन्नि को भी सॉफ कर दो…

शीला कहती है – तू अब बड़ा हो गया है… ये सब, खुद से करना चाहिए… चाची देखेगी तो क्या बोलेगी…

रामू बोला – चाची तो एक दो दिनों के लिए है…

शीला ने फिर एक हाथ से एलास्टिक खींचा और दूसरे हाथ को अंदर डाल कर नुन्नि को मुट्ठी में पकड़ लिया.

रामू बोला – अच्छे से सॉफ करो… इसमें से, बदबू आती है…

शीला, रामू के लंड पर साबुन लगा कर हिलाने लगी.

रामू भी मज़े ले रहा था.

रेखा थोड़ी देर के बाद आई और फिर ये सब देख कर सोच में पड़ गई.

रामू की नुन्नि, असल में एक लंड के आकर की हो गई थी.

शीला को भी पता था पर वो रामू को बच्चा ही समझ रही थी.

रेखा, रामू के हाव भाव देख कर समझ गई की दाल में कुछ काला है.

स्नान होने के बाद, रामू कमरे में कपड़े पहनने गया.

शीला ने उसके सर पर चमेली का तेल लगाया.

रामू बोला की थोडा तेल नुन्नि को भी लगाओ…

शीला ने पूछा – क्यू… ??

तो रामू बोला – ऐसा करने से, मैं जल्दी जवान हो जाऊंगा… ऐसा, मेरे दोस्तो ने कहा है…

शीला बोली – चल हट, बदमाश… जा कर खुद लगा… मुझे बहुत काम है…

रामू बोला – बाद मैं मालिश कराऊंगा… मुझे नहीं आता…

शीला, रूम से बाहर चली गई.

रामू ने फिर खुद ही तेल लगा लिया.

खाना खाते हुए, रामू बोला की दर्द हो रहा है.

शीला बोली – नहीं अभी चाची है… उनको अच्छा नहीं लगेगा…

रामू, कुछ नहीं बोला.

शीला बोली की बाद में, तुझे मालिश करवाती हूँ…

खाना खाने के बाद, सब सो गये पर रामू तो मालिश करवाने के लिए उत्तेजित था.

रेखा, रूम में सोई थी.

रामू शीला को लेकर रसोई में गया और कपड़े उतार कर, अंडरवियर में लेट गया.

शीला तेल की शीशी लेकर, उसकी मालिश करने लगी.

फिर हाथ पैर की मालिश कर दी..

उतने में रामू का लंड, टाइट हो गया था.

रामू ने कहा – जिसके लिए आया था… वो तो छोड़ दिया…

शीला ने पूछा – क्या… ??

तो रामू ने झट से जवाब दिया – मेरी नुन्नि…

शीला ने मुस्कुराते हुए हथेली में काफ़ी तेल लिया और दोनों हाथ से लंड पकड़ कर हिलाने लगी.

10 मिनिट के बाद रामू बोला – रूको मत, ज़ोर ज़ोर से करो…

शीला बोली – तेरा रस निकल जाएगा… ऐसा मत कर…

रामू बोला – रस निकलने के बाद ही चैन मिलता है… आप जल्दी करो…

शीला फिर हिलाने लगी और थोड़ी देर के बाद, गरम वीर्य लंड से निकल आया.

शीला ने फिर अपने पल्लू से लंड और हाथ सॉफ किया.

शीला, ने रामू को कपड़े पहनकर सोने के लिए कहा और खुद भी सो गई.

शाम को बंसी आया, हंसी मज़ाक का माहोल बना हुआ था.

चाची अपने गाँव के किस्से सुना रही थी और बंसी भी घर की गाँव की बात करता.

रात में खाना खाते वक़्त, शीला रामू से बोली की चाची, तुम्हारे साथ सोएगी…

रामू ने ज़िद की, की अकेले सोना है.

रेखा ने कहा की तुम्हारे साथ ही सोउंगी…

शीला ने कुछ कहा नहीं पर सोच में पड़ गई.

खाना खाने के बाद, शीला ने रेखा से कहा की रात में आप, जाग जाओगी…

रेखा समझ गई और हंस कर बोली – चिंता मत कर… मैं एक बार सो गई तो आसानी से नहीं उठती… तुम दोनों चाहे, जितना आवाज़ करो… मुझे पता नहीं चलेगा और पता भी चला तो क्या हुआ… ?? मैं तो घर की ही, हूँ ना…

शीला मुस्कुर कर बोली – क्या आप भी… कुछ भी कहती हो…

रात में, सब सो गये.

रेखा, शीला के बगल में थी और दूसरी साइड में बंसी.

रामू, दूसरे कोने में सोता था.

बंसी को चुदाई बिना, नींद नहीं आती थी.

रेखा और रामू को सोता हुआ देख, बंसी शीला के कपड़े उतारने लगा.

शीला को शरम आ रही थी, मना भी किया पर बंसी के सिर पर सेक्स चढ़ा हुआ था.

शीला को नंगा कर खुद भी नंगा हो गया और आधी रात तक सेक्स होता रहा.

बंसी, शीला पर रोज़ भारी पड़ता था.

शीला, बंसी के लंड को कुछ देर बर्दाश्त करने के बाद टूट जाती थी और किसी तरहा फिर से ताक़त जुटा कर, दूसरी बार झड़ जाती.

उस रात भी, कुछ ऐसा ही हुआ.

शीला ने कोशिश की, की आवाज़ ना निकले पर चीख तो निकल ही जाती थी.

सुबह उठने के बाद, सब अपने अपने काम पर लग गये.

रेखा ने शीला की तरफ़ देखा.

शीला नॉर्मल बिहेव कर रही थी, जैसे कल आधी रात तक रात सेक्स किया ही ना हो.

संडास करने, दोनों साथ में गये.

संडास करते करते, रेखा ने शीला से कहा – क्या बात है… ?? रात में इतनी देर जागने के बाद भी तुम काफ़ी फ्रेश लग रही हो…

शीला बोली – आप को कैसे पता… ?? आप तो सोई थी… ??

रेखा बोली – रात में तुम्हे बहुत दर्द हो रहा था… अंजाने में, तुमने मेरा हाथ पकड़ लिया था… मैंने आँखें खोली तो देखा की बंसी तुम्हारी जम कर चुदाई कर रहा है…

चुदाई नाम सुन कर, शीला शर्माकर बोली – क्या आप भी… मुझे शरम आ रही है… आप किसी को मत कहना, प्लीज़…

रेखा बोली – बोली भी दिया तो क्या… सब को पता है की तुम्हारी चुदाई तो रोज़ होती होगी…

दोनों हँसते हुए, गांड धो कर घर आ गई.

शीला और रेखा, दोनों एक दूसरे के सामने थोड़ा खुल गई थी.

रामू उठने के बाद, हॅगने गया और वापस आ कर नहाने कुए के पास आया.

रोज़ की तरह शीला से स्नान करवाया और लंड मालिश भी करवाई.

दोपहर में तेल मालिश करवाने रसोई में दोनों गये और हमेशा की तरहा, लंड मालिश हो रही थी की अचानक रेखा आ गई और उसने देख लिया.

रेखा को देख कर, दोनों डर गये.

रेखा का खून खौलने लगा पर वो कुछ ना बोली.

शाम को बंसी को, रेखा ने सब कुछ बता दिया.

बंसी को याद था की उसके बेटे ने शर्त रखी थी की नयी माँ के साथ, वो किसी भी तरहा रह सकता है.

बंसी ने लंबी साँस ली और रेखा को सब कुछ बता दिया.

शीला, दरवाजे के बाहर खड़ी सब सुन रही थी और रामू बाहर खेलने गया था.

रेखा, फिर बोली की ये सब ग़लत है.

बंसी बोला – जाने दो… घर की ही बात है, आपस में देख लेंगे…

रेखा का दिमाग़ घूम गया था और बहुत कुछ बोल देती पर चुप रही.

रात में खाना खाने के बाद, सब सो गये पर असल में सिर्फ़ रामू सोया था बाकी सब सोने का नाटक आर रहे थे.

कुछ देर बाद, बंसी मूतने के लिए बाहर गया और रूम के अंदर आते ही, कपड़े निकाल कर नंगा हो गया.

बंसी को देख, शीला ने भी खुद के कपड़े नीकाल लिए.

बंसी, शीला की टाँग फैला कर उसके ऊपर आ गया और चूमने लगा.

“सेक्स का प्रोग्राम” स्टार्ट हो गया.

रेखा, इसका आनंद लेने के लिए आँखें खोल कर देख रही थी.

बंसी का ध्यान, सिर्फ़ शीला पर था.

1 घंटे के बाद, दोनों सो गये.

रेखा का मन, बहुत करता सेक्स करने के लिए पर, कुछ नहीं कर पा रही थी.

अगले दिन, रेखा और शीला दोनों संडास करते करते बाते कर रही थी..

रेखा ने कहा – तुम बहुत नसीब वाली हो… जो इतना प्यार करने वाला पति और बेटा मिला है…

ये कह कर रेखा की आँखें नम हो गई थी..

शीला ने देखा और पूछा – क्या बात है… आप को कोई दुख है क्या… ??

रेखा बोली – कुछ नहीं, चलो…

एक दो बार पूछने पर भी, रेखा कुछ नहीं बोली.

रात में जब बंसी चोद रहा था तो शीला ने देखा की रेखा, उन दोनों को देख रही है और बदन को सिकोड कर सोई है.

शीला को पहले ही शक हो गया था और अब यकीन हो गया की रेखा की चुत में “आग” लगी है.

अगले दिन, शीला ने बंसी को सब बता दिया..

बंसी गुस्से में बोला – बहन चोद को एक करेला दे, कुछ दिन के लिए… अगर, सिर पर चढ़ गई तो मुसीबत होगी…

शीला बोली – आप की बात सही है पर एक बार तो उसको वो सुख दे ही सकते है ना…

बंसी, कुछ ना बोल कर निकल गया.

शीला फिर दोपहर में खाते समय रेखा से पूछा – आपको कैसे लगते है… ??

रेखा ने पूछा – क्या… ??

शीला बोली – रामू के बापू… ??

रेखा, खाना खाते खाते बोली – अच्छा तो है… काम भी बहुत करता है… कमाता भी अच्छा है और क्या चाहिए…

शीला बोली – रात में, कैसे लगते है…

रेखा बोली – मैं समझी नहीं… ??

शीला बोली – मैंने देखा है आपको, रात में आँखें खुली थी..

रेखा, कुछ नहीं बोली.

शीला बोली – शरमाती क्यू हो… ?? आपने ही तो कहा था की चुदाई सब करते है… आज रात मे, मैं नहीं करूंगी… मेरा व्रत है ना… पर बंसी को नहीं पता… एक मुसीबत है…

रेखा पूछती है – क्या… ??

शीला बोली – बंसी, रात में सुनते ही नहीं… सीधा, हल जोतना चालू कर देते है… एक काम करते है आप मेरी जगह पर सो जाना और मैं आपकी… बंसी, मुझे दूसरी तरफ़ देख कर कुछ नहीं करेंगे क्यूंकी उस तरफ दीवार है…

रेखा कुछ ना बोली और सोचने लगी.

रेखा को अजीब लगा पर उसे कोई दिक्कत भी नहीं थी.

शीला बोली – चलो, सो जाते है…

रेखा और शीला, दोनों सो गये.

रात में सोने से पहले, बंसी को शीला ने समझा दिया की वो आज रात में चुदाई नहीं करेगी, आप चाहो तो रेखा को चोद लेना, वो कुछ नहीं बोलेगी.. उसकी चुत में भयंकर आग लगी है..

बंसी बोला – कैसी बाते कर रही हो… ?? मैं तुम्हारे साथ ही सोऊंगा… ??

पर शीला, मान ही नहीं रही थी.

रात में शीला, रेखा की दूसरी तरफ सोई थी और उस तरफ थोड़ी दूर बंसी सोया था.

रात में, सब सो गये.

बंसी ने चुदाई किए बगैर ही, रात निकाल ली.

अगले दिन भी ऐसा ही होना था.

शीला ने रेखा से कहा की रात में ध्यान से सोना, बंसी रात को नींद मैं भी चुदाई कर सकता है, कोई भरोसा नहीं.

रेखा मन ही मन सोचने लगी की चुदाई के लिए, अगर लंड आ रहा है तो वो रोकेगी नहीं.

अगली रात, सब सो गये.

रात में, शीला ने रेखा की साड़ी को ऊपर उठा दिया.

कुछ देर बाद, बंसी को होश आया.

सामने चूत का द्वार देख उससे रहा नहीं गया और वो रेखा के करीब जाकर, पैर सहलाने लगा.

रेखा, आधी नींद में थी.

दोनों घुटने ऊपर करके, वो पीठ के बल आ गया.

बंसी ने रेखा की साड़ी उतार दी और चिपक कर सो गया.

रेखा तुरंत जाग गई और देखा की बंसी का एक हाथ चड्डी के अंदर था और एक से पीठ पकड़ी थी.

रेखा की गर्मी कम नहीं हुई थी और फिर “हवस की ज्वाला” भड़क उठी.

आधी रात तक, दोनों “प्रेम लीला” में मग्न थे.

रामू भी आवाज़ सुन कर जाग उठा पर दोनों एक दूसरे में इतने खो गये थे की उनका ध्यान ही नहीं गया.

सुबह, दोनों लेट उठे.

दोनों के चेहरे पर गिल्टी की फीलिंग सॉफ दिख रही थी और साथ ही साथ, एक दूसरे को प्यार करने की चाहत भी.

उस दिन भी रात में बंसी से, रहा नहीं गया.

रेखा भी सोई नहीं थी.

बंसी रेखा के पास गया और बिना कुछ कहे, रेखा से लिपट गया.

आप सोच रहे होंगे की “शीला और रामू” का क्यू हुआ.

अब तक शीला ने अपने पति और रेखा को एंगेज करा लिया था तो अब वो फ्री हो गई थी, रामू को आज़माने के लिए.
 
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