• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

नये पड़ोसी compleet

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
नये पड़ोसी पार्ट--1

में राज और मेरी पत्नी प्रीति मुंबई सहेर के सुबुर्ब मलाड में रहते हैं. ये कहानी करीब आज से छः महीने पहले शुरू हुई जब हमारे बगल के फ्लॅट में नये पड़ोसी रहने के लिए आए.

हमारे नए पड़ोसी मिस्टर. प्रशांत एक कन्सल्टेंट हैं, और उनकी पत्नी बबिता जो एक घरेलू महिला थी. वैसे तो मुंबई इतना बिज़ी सहेर है की यहाँ किसी को किसी के लिए फ़ुर्सत ही नही है. नए पड़ोसी होने के नाते हमारी जान पहचान बढ़ी और हम दो परिवार काफ़ी घुल मिल गये थे.

में और मेरी पत्नी प्रीति के विचार एक समान थे. हम दोनो ओपन सेक्स में विश्वास रखते थे. शादी के पहले ही हम दोनो सेक्स का मज़ा ले चुके थे. हम दोनो अपनी पुरानी सेक्स घटनाओं के बारे में अक्सर एक दूसरे को बताते रहते थे. चुदाई के किस्से सुनाते या सुनते वक़्त प्रीति इतनी उत्तेजित हो जाती कि उसकी चूत की प्यास मिटाना कभी मुश्किल हो जाता था.

मेने और प्रीति ने इस शनिवार प्रशांत और बबिता को अपने यहाँ खाने की दावत दी. दोनो राज़ी हो गये. प्रशांत एक शानदार व्यक्तित्व का मालिक था, 6.2 हाइट, कसरती बदन. बबिता भी काफ़ी सुन्दर थी, गोल चेहरा, लंबी टाँगे और खास तौर पर उसकी नीली आँखें. पता नही उसकी आँखों मे क्या आकर्षण था कि जी करता हर वक़्त उसकी आँखों में इंसान झाकता रहे.

शनिवार की शाम ठीक 7.00 बजे प्रशांत और बबिता हमारे घर पहुँचे. प्रशांत ने शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहन रखी थी, जिससे उसका कसरती बदन सॉफ झलक रहा था. बबिता ने कॉटन का टॉप और जीन्स पहेन रखी थी. उसकी कोटन के टॉप से झलकते उसके निपल साफ बता रहे थे कि उसने ब्रा नही पहन रखी है. जीन्स भी इतनी टाइट थी कि उसके चूतड़ की गोलाइया किसी को भी दीवाना कर सकती थी. उसे इस सेक्सी पोज़ में देख मेरे लंड में सुरसूराहट होने लग गयी थी.

मेने देखा कि प्रीति प्रशांत की ओर आकर्षित हो रही है. वो अपने अधखुले ब्लाउस से प्रशांत को अपने चुचियों के दर्शन करा रही थी. आज प्रीति अपनी टाइट जीन्स और लो कट टॉप में कुछ ज़्यादा ही सुन्दर दिख रही थी. वहीं बबिता भी मेरे साथ ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे हम कई बरसों पुराने दोस्त हों.

हम चारों आपस में ऐसे बात कर रहे थे कि कोई देख के कह नही सकता था कि हमारी जान पहचान चंद दिनो पुरानी है. पहले शराब का दौर चला और फिर खाना खाने के बाद हम सब ड्रॉयिंग रूम में बैठे थे.

मेने स्टेरीयो पर एक री-मिक्स की कसेट लगा दी. बबिता ने खड़ी हो प्रशांत को डॅन्स करने के लिए कहा, किंतु उसने उसे मना कर दिया शय्याद उसे नशा हो गया था, मगर उसने बबिता को मेरे साथ डॅन्स करने को कहा. बबिता ने मुझे खींच कर खड़ा कर दिया.

हम दोनो गाने की धुन पर एक दूसरे के साथ नाच रहे थे. बबिता ने अपने दोनो हाथ मेरी गर्दन पर रख मुझसे सात ते हुए नाच रही थी. उसके बदन की गर्मी मुझे मदहोश कर रही थी. मेने भी अपने दोनो हाथ उसकी कमर पे रख उसे अपने और करीब खींच लिया.

उसके बदन की गर्माहट और बदन से उठती खुश्बू ने मुझे मजबूर कर दिया और मैने कस्के के उसे अपनी छाती से चिपका लिया. मेरा लंड उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था. तभी मुझे ख़याल आया कि मेरी बीवी और उसका पति भी इसी कमरे में हैं, मेने गर्दन घुमा के देखा तो पाया कि प्रीति प्रशांत को खींच कर डॅन्स के लिए खड़ा कर चुकी है.

शायद मेरी बीवी की सुंदरता और खुलेपन ने प्रशांत को डॅन्स करने पे मजबूर कर दिया था, इसीलिए वो प्रीति को मना नही कर पाया. दोनो एक दूसरे को बाहों में ले हमारे पास ही डॅन्स कर रहे थे. नाचते नाचते प्रीति ने लाइट धीमी कर दी. कमरे में बहोत ही हल्की रोशनी थी. हम चारों कामुकता की आग में जल रहे थे.

बबिता मुझसे और चिपकती मेरे कानो में बोली, "अछा है थोड़ा अंधेरा हो गया." मेने उसे और कस के अपनी बाहों में ले अपने होठ उसके होठों पे रख दिए. उसने भी सहयोग देते हुए अपना मूह खोल दिया और जीभ मेरे मुँह में डाल दी. हम दोनो एक दूसरे की जीभ चुभलने लगे.
 
मेरे दोनो हाथ अब उसके चूतड़ को सहला रहे थे. बबिता के हाथ मेरी पीठ पर थे और वो कामुक हो मेरी पीठ को कस के भींच लेती. मेरा लंड पूरा तन कर उसकी चूत को जीन्स के उपर से ही रगड़ रहा था. बबिता ने आपने आप को मुझे सोन्प दिया था. मेने पीछे से अपने दोनो हाथ उसकी जीन्स में डाल दिए और पाया की उसने पॅंटी नही पहनी है. मेरे हाथ अब उसके मुलायम चुतताड को ज़ोर से भींच रहे थे, वो भी उत्तेजित हो अपनी चूत मेरे लंड पे रगड़ रही थी.

मेरी बीवी प्रीति का ख़याल आते ही मेने गर्दन घुमा के देखा तो चौंक पड़ा. दोनो एक दूसरे से चिपके हुए गाने की धुन पर डॅन्स कर रहे है. प्रशांत के हाथ प्रीति के शरीर पर रैंग रहे थे. प्रीति भी उसे अपने बाहों में भर उसके होठों को चूस रही थी.

में बबिता को बाहों में ले इस पॉस्षन में डॅन्स करने लगा कि मुझे प्रीति और प्रशांत साफ दिखाई पड़े. प्रशांत का एक हाथ प्रीति की चुचियों को सहला रहा था और दूसरा हाथ दूसरी चुचि को सहलाते हुए नीचे की और बढ़ रहा था, और नीचे जाते हुए अब वो उसकी चूत को उसकी टाइट जीन्स के उपर से सहला रहा था.

मुझे हैरानी इस बात की थी उसे रोकने के बजाई प्रीति प्रशांत को सहयोग दे रही थी, उसने अपनी टाँगे थोड़ी फैला दी जिससे प्रशांत के हाथों को और आसानी हो. पर में कौन होता हूँ शिकायत करने वाला में खुद उसकी बीवी को बाहों में भरे उसे छोड़ने के मूड में था.

मेरे भी हाथ बबिता के चुतताड को सहला रहे थे. बबिता उत्तेजना में मुझे चूमे जा रही थी. तभी मेने देखा कि प्रशांत ने अपना एक हाथ प्रीति के टॉप में डाल कर उसके मम्मो पे रख दिया था. जब उसने प्रीति की तरफ से कोई रे-आक्षन नही देखा तो उसने हाथ पीठ की और लेजाकार उसकी ब्रा के हुक खोल दिए. मुझे उसे पारदर्शी टॉप से साफ दिखाई दे रहा था कि प्रशांत के हाथ अब प्रीति के मम्मो को सहला रहे थे.

महॉल में जब चुदाई का आलम फैलता है तो सब पीछे रह जाता है. मेने भी आगे बढ़ बबिता के चूतड़ से हाथ निकाल उसकी जीन'स के बटन खोल जीन'स उतार दी. फिर पॅंटी में उंगिलिया फँसा उसकी पॅंटी भी उतार दी.

"में सोच रही थी कि तुम्हे इतनी देर क्यों लग रही है." बबिता अपनी टाँगो से अपनी जीन्स और पॅंटी को अलग करते हुए बोली. "प्लीज़ मुझे प्यार करो ना!"
 
मेने अपना हाथ बढ़ा उसकी चूत पे रख दिया. हाथ रखते ही मेने पाया कि उसकी चूत एक दम सफ़ा चट थी. उसने अपने चूत के बाल एक दम शेव किए हुए थे, जो में हमेशा प्रीति से कहता था पर वो मेरी ये बात नही मानी.

बिना झांतों की एक दम नई चूत मेरे सामने थी, मेने अपना हाथ का दबाव बढ़ा उसकी चूत को ज़ोर से रगड़ने लगा. मेने अपनी एक उंगली उसकी चूत के मुहाने पर घुमाई तो पाया कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी.

"तुम अपनी उंगली मेरी चूत में क्यों नही डालते जिस तरह मेरे पति ने अपनी उंगली तुम्हरी बीवी की चूत में डाली हुई है." उसने कहा, में घूम कर देखा तो पाया कि प्रशांत का एक हाथ मेरी बीवी की चुचियों को मसल रहा है और दूसरा हाथ उसकी खुली जीन्स से उसकी चूत पे था. उसके हाथ वहाँ क्या कर रहे थे मुझे समझते देर नही लगी.

आचनक मेरी बीवी प्रीति ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखी. वो एक अंजान आदमी के हाथों को अपनी चूत पे महसूस कर रही थी और में एक पराई औरत की चूत में उंगली कर रहा था. वो मेरी तरफ देख मुस्कुरई और मैं समझ गया की आज की रात हम दोनो के ख्वाब पूरे होने वाले हैं. प्रीति ने मुस्कुराते हुए अपनी जीन्स और पॅंटी पूरी उतार कर नंगी हो गयी.

जैसे ही उसने अपनी जीन'स और पॅंटी उत्तरी उसने प्रशांत के कान में कुछ कहा, प्रशांत ने उसकी ब्रा और टॉप भी उतार दी. अब वो एक दम नंगी उसकी बाहों में थी. प्रशांत के हाथ अब उसके नंगे बदन पर रेंग रहे थे.

"लगता है हम उनसे पीछे रह गये." कहकर बबिता मुझसे अलग होते हुए अपनी जीन्स और टॉप उतार दिया. जैसे हम किसी प्रतिस्पर्धा मे हो, बबिता अपनी पॅंटी भी उतार नंगी हो गयी.

"लगता है कि हमें उनसे आगे बढ़ना चाहिए," कहकर बबिता ने मेरी जीन्स के बटन खोल मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया. बबिता मेरे लंड को सहला रही थी और मेरा लंड उसके हाथों की गर्माहट से तनता जा रहा था. बबिता एक अनुभवी चुड़ाकड़ महिला की तरह के मेरे लंड से खेल रही थी.

में भी अपनी जीन्स और अंडरवेर से बाहर निकल नंगा बबिता के सामने खड़ा था. बबिता ने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया, जो तन कर 8-5 इंच का हो गया था….. "बहुत मोटा और लंबा है" कहकर बबिता लंड को दबाने लगी.
 
मेने घूम कर देखा तो पाया कि मेरी बीवी मुझसे आगे ही थी. प्रीति प्रशांत के सामने घुटनो के बल बैठे उसके लंड को हाथों में पकड़े हुए थी. प्रशांत का लंड लंबाई में मेरी ही साइज़ का था पर कुछ मुझसे ज़्यादा मोटा था. प्रीति उसके लंड की पूरी लंबाई को सहलाते हुए उसके सूपदे को चाट रही थी.

मुझे पता था कि प्रीति की इस हरकत असर प्रशांत पर बुरा पड़ने वाला है. प्रीति लंड चूसने मे इतनी माहिर थी की उसकी बराबरी कोई नही कर सकता था. उसका लंड चूसने का अंदाज़ ही अलग था. वो पहले लंड के सूपदे को अपने होंठो में ले चुस्ती फिर धीरे धीरे लंड को अपने मुँह में भींचती हुई नीचे की और बढ़ती जिससे लंड उसके गले तक चला जाता. फिर अपनी जीभ से चाटते हुए लंड उपर की ओर उठती. यही हरकत जब वो तेज़ी से करती तो सामने वाले की हालत खराब हो जाती थी.

इसी तरह से वो प्रशांत के लंड को चूसे जा रही थी. जब वो उसके सूपदे को चूस्ति तो अपने थूक से सटे हाथों से ज़ोर ज़ोर से लंड को रगड़ती. में जानता था कि प्रशांत अपने आपको ज़्यादा देर तक नही रोक पाएगा.

करीब 10 मिनिट तक प्रीति प्रशांत के लंड की चुसाइ करती रही. में और बबिता भी दिलचस्पी से ये नज़ारा देख रहे थे. प्रशांत ने अपने लंड को प्रीति के मुँह से बाहर निकाला और मेरे और बबिता के पास आ खड़ा हो गया. बबिता मेरे लंड को सहला रही थी और प्रशांत ने अपने होठ बबिता के होठों पे रख उन्हे चूमने लगा. बबिता उससे अलग होते हुए बोली, "प्रशांत राज को बताओ ना कि मुझे किस तरह की चुदाई पसंद है."

फिर कामुकता का एक नया दौर शुरू हुआ. प्रशांत अपनी बीवी बबिता के पीछे आकर खड़ा हो गया और मुझे उसके सामने खड़ा कर दिया. फिर बबिता के माथे पे आए बालों को हटाते हुए मुझसे कहा, "राज इसके होठों को चूसो?"

मेने एक अग्यकारी शिष्य की तरह आगे बढ़ अपने होठ बबिता के होटो पर रख दिए. बबिता ने अपनी जीब मेरे मुँह में डाल दी. हम दोनो एक दूसरे की जीभ को चूस रहे थे. "अब इसकी चुचियों को चूसो?" प्रशांत ने कहा.

में नीचे झुक बबिता की चुचि को हाथों में पकड़ उसका निपल अपने मुँह में ले चूसने लगा. उसकी चुचियाँ बहोत भारी तो नही पर कसी ज़रूर थी. गोल चुचि और काले सख़्त निपल काफ़ी मज़ा दे रहे थे.

"दूसरे को नज़र अंदाज़ मत करो" कहकर उसने बबिता की दूसरी चुचि पकड़ मेरे मुँह की आगे कर दी. मेने अपने होठ बढ़ा उसके दूसरे निपल को अपने मुँह मे ले चूसने लगा.

करीब 5 मिनिट तक में उसके चुचियों को चूस्ता रहा, कि मेने पाया की प्रशांत के हाथ मेरे कंधों पे थे और मुझे नीचे की और दबा रहा था, मुझे इशारा मिल गया. कैसे एक पति दूसरे मर्द को अपनी बीवी से प्यार करना सिखा रहा था. में नीचे बैठते हुए पहले उसकी नाभि को चूमा और फिर उसकी कमर को चूमते हुए अपने होठ ठीक उसकी चूत के मुख पे रख दिए.

जब में उसकी चूत पे पहुँचा तो में दंग रह गया. प्रशांत ने बबिता के पीछे से अपने दोनो होठों से उसकी चूत की पंखुड़ियों को पकड़ के इस कदर फैला दी थी, जिससे मुझे उसकी चूत को चाटने मे आसानी हो. जैसे ही मेने अपने जीभ उसकी चूत पे फिराई में पाया कि मेरी बीवी प्रीति ठीक मेरे बगल में बैठी थी और उसकी निगाहें बबिता के चूत पे टिकी हुई थी.

प्रशांत को अच्छी तरह पता थी की मर्द की कौनसी हरकत उसकी बीवी की चूत में आग लगा सकती थी, "अब अपनी जीभ से इसकी चूत के चोरों और चॅटो?' उसने कहा.

आज में कई सालों के बाद किसी दूसरी औरत की चूत को चाट रहा था, वो भी जब की मेरी बीवी 6 इंच की दूरी पे बैठी मुझे निहार रही थी. मेने अपना एक हाथ बढ़ा प्रीति की चूत पे रखा तो पाया कि उत्तेजना में उसकी चूत भी गीली हो चुकी थी. मेने अपनी दो उंगली उसकी चूत में घुसा अंदर बाहर करने लगा. में बबिता की चूत को चाते जा रहा था, प्रीति मेरे लंड को पकड़ सहलाने लगी.

"अब इसकी चूत को नीचे से उपर तक चॅटो और करते जाओ?" प्रशांत ने बबिता की चूत और फैलाते हुए कहा. मैने वैसे ही किया जैसा उसने करने को कहा, बबिता की चूत से उत्ति मादक खुश्बू मुझे और पागल किए जा रही थी.

"अब अपनी जीब पूरी बबिता की चूत में डाल दो?" प्रशांत ने कहा. बबिता ने भी अपनी टाँगे और फैला दी जिससे मुझे और आसानी हो सके. में अपनी जीब उसकी चूत में घुसा उसे ज़ोर से चोद रहा था. बबिता की सिसकारिया शुरू हो चुकी थी, "हाआँ राआज चूसूऊऊ मेरी चूत को निचोड़ लो मेरे चूत का सारा पानी, ओह ह्बीयेयेययाया" प्रशांत बबिता के चूत को फैलाए उसके पीछे खड़ा था. में और तेज़ी से उसकी चूत को चूसने लगा. इतने में बबिता का शरीर आकड़ा और जैसे कोई नदी का बाँध खोल दिया गया हो उस तरह से उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. मेरा पूरा मुँह उसके रस से भर घाया. बबिता ज़मीन पे बैठ अपनी उखड़ी सांसो को संभालने लगी.

थोड़ी देर सुसताने के बाद उसने मेरे चेहरे को अपने नज़दीक कर मुझे चूम लिया, "राज अब में चुदवाने के लिए तय्यार हूँ" इतना कहकर बबिता मेरा हाथ पकड़ मुझे सोफे के पास ले गयी.

क्रमशः...............
 
Nai Padosib paart--1

Mein Raj aur meri patni Preeti Mumbai seher ke suburb Malad mein rehte hain. Ye kahani kareeb aaj se cheh mahine pehle shuru hui jab hamare bagal ke Flat mein nai padosi rehne ke liye aaye.

Hamare nai padosi Mr. Prashant ek Consultant hain, aur unki patni Babita jo ek gharuli mahila thi. Waise to Mumbai itna busy seher hai ki yahan kisi ko kisi ke liye phursat hi nahi hai. Nai padosi hone ke nate hamari jan pehchan badhi aur hum do parivar kafi ghul mil gaye the.

Mein aur meri patni Preeti ke vichar ek saman the. Hum dono open sex mein vishwas rakhte the. Shaadi ke pehle hi hum dono sex ka maza le chuke the. Hum dono apni purani sex ghatnaon ke bare mein aksar ek dusre ko batate rehte the. Chudai ke kisse sunate ya sunte waqt Preeti itni uttejit ho jati ki uski choot ki pyaas mitana kabhi mushkil ho jata tha.

Meine aur Preeti ne is shanivar Prashant aur Babita ko apne yahan khane ki daawat di. Dono razi ho gaye. Prashant ek shaandar vyaktitva ka maalik tha, 6.2 hieght, kasrati badan. Babita bhi kafi sunder thi, gol chehra, lambi tange aur khas taur par uski neeli aankhen. Pata nahi uski aankhon meiy kya aakarshan tha ki ji karta har waqt uski aankhon mein insaan jhankta rahe.

Shanivar ki shaam thik 7.00 baje Prashant aur Babita hamare ghar pahunche. Prashant ne shorts aur T-shirt pehan rakhi thi, jisse uska kasrati badan saaf jhalak raha tha. Babita ne Cotton ka top aur jeans pehen rakhi thi. Uski cotoon ke top se jhalakte uske nipple saaf bata rahe the ki usne bra nahi pehan rakhi hai. Jeans bhi itni tight thi ki uske chuttad ki goliyan kisi ko bhi deewana kar sakti thi. Use is sexy pose mein dekh mere Lund mein sursurahat hone lag gayi thi.

Meine dekha ki Preeti Prashant ki aur aakarshit ho rahi hai. Wo apne adhkhule blouse se Prashant ko apne chuchiyon ke darshan kara rahi thi. Aaj Preeti apni thight jeans aur low cut top mein kuch jyada hi sunder dikh rahi thi. Wahin Babita bhi mere sath aise behave kar rahi thi jaise hum kai barson purane dost hon.

Hum charon aapas mein aise baat kar rahe the ki koi dekh ke keh nahi sakta tha ki hamari jaan pehchan chand dino purani hai. Pehle sharab ka daur chala aur phir khana khane ke baad hum sab drawing room mein baithe the.

Meine stereo par ek re-mix ki caseete laga di. Babita khadi ho Prashant ko dance karne ke liye kaha, kintu usne use mana kar diya shayyad use nasha ho gaya tha, magar usne Babita ko mere sath dance karne ko kaha. Babita ne mujhe khinch kar khada kar diya.

Hum dono gane ki dhun par ek dusre ke sath naach rahe the. Babita ne apne dono hath meri gardan par rakh mujhse satt te hue nach rahi thi. Uske badan ki garmi mujhe madhosh kar rahi thi. Meine bhi apne dono hath uski kamar pe rakh use apne aur kareeb khinch liya.

Uske badan ki garmahat aur badan se uthhti khushboo ne mujhe majboor kar diya aur maine kaske ke use apni chaati se chipka liya. Mera Lund uski choot pe thokar mar raha tha. Tabhi mujhe khayal aaya ki meri biwi aur uska pati bhi isi kamre mein hain, meine gardan ghuma ke dekha to paya ki Preeti Prashant ko khinch kar dance ke liye khada kar chuki hai.

Shayad meri biwi ki sunderta aur khulepan ne Prashant ko dance karne pe majboor kar diya tha, isiliye wo Preeti ko mana nahi kar paya. Dono ek dusre ko bahon mein le hamare paas hi dance kar rahe the. Nachte nachte Preeti ne light dhimi kar di. Kamre mein bahot hi halki roshni thi. Ham charon kamukta ki aag mein jal rahe the.

Babita mujhse aur chipakti mere kano mein boli, "Acha hai thoda andhera ho gaya." Meine use aur kas ke apni bahon mein le apne hoth uske hothon pe rakh diye. Usne bhi sahyog dete hue apna muh khol diya aur jibh mere munh mein dal di. Hum dono ek dusre ki jibh chubhlane lage.

Mere dono hath ab uske chuttad ko sehla rahe the. Babita ke hath meri pith par the aur wo kamuk ho meri pith ko kas ke bhinch leti. Mera Lund pura tan kar uski choot ko jeans ke upar se hi ragad raha tha. Babita ne aapne aap ko mujhe sonp diya tha. Meine piche se apne dono hath uski jeans mein dal diye aur paya ki usne panty nahi pehni hu hai. Mere hath ab uske mulayam chuttad ko jor se bhinch rahe the, wo bhi uttejit ho apni choot mere Lund pe ragad rahi thi.

Meri biwi Preeti ka khayal aate hi meine gardan ghuma ke dekha to chounk pada. Dono ek dusre se chipke hue gaane ki dhun par dance kar rahe hai. Prashant ke hath Preeti ke sharir par raing rahe the. Preeti bhi use apne bahon mein bhar uske hothon ko choos rahi thi.
 
Mein Babita ko bahon mein le is postion mein dance karne laga ki mujhe Preeti aur Prashant saf dikhayi pade. Prashant ka ek hath Babita ki chuchiyon ko sehla raha tha aur dusra hath dusri chuchi ko sehlate hue niche ki aur badh raha tha, aur niche jate hue ab wo uski choot ko uski tight jeans ke upar se sehla raha tha.

Mujhe hairani is baat ki thi use rokne ke bajai Preeti Prashant ko sahyog de rahi thi, usne apni tange thodi faila di jisse Prashant ke hathon ko aur aasani ho. Par mein kaun hota hun shikayat karne wala mein khud uski biwi ko bahon mein bhare use chodne ke mood mein tha.

Mere bhi haath Babita ke chuttad ko sehla rahe the. Babita uttejna mein mujhe chume ja rahi thi. Tabhi meine dekha ki Prashant ne apna ek hath Preeti ke top mein dal kar uske mamo pe rakh diya tha. Jab usne Preeti ki taraf se koi re-action nahi dekha to usne hath pith ki aur lejakar suki bra ke hook khol diye. Mujhe use pardarshi top se saf dikhayi de raha tha ki Prashant ke haath ab Preeti ke maamo ko sehla rahe the.

Mahol mein jab chudai ka aalam failta hai to sab piche reh jata hai. Meine bhi aage badh Babita ke chutad se hath nikal uski jeen's ke button khol jean's uttar di. Phir panty mein ungiliyan phansa uski panty bhi uttar di.

"Mein soch rahi thi ki tumhe itni der kyon lag rahi hai." Babita apni tango se apni jeans aur panty ko alag karte hue boli. "Please mujhe pyaar karo na!"

Meine apna haath badha uski choot pe rakh diya. Haath rakhte hi meine paya ki uski choot ek dum safa chat thi. Usne apne choot ke bal ek dum shave kiye hue the, jo mein hamesha Preeti se kehta tha par wo meri ye baat nahi maani.

Bina jhanton ki ek dum nai choot mere samne thi, meine apna haath ka dabav badha uski choot ko jor se ragadne laga. Meine apni ek ungli uski choot ke muhane par ghumaai to paaya ki uski choot gili ho chuki thi.

"Tum apni ungli meri choot mein kyon nahi dalte jis tarah mere pati ne apni ungli tumhhari biwi ki choot mein daali hui hai." Usne kaha, mein ghoom kar dekha to paya ki Prashant ka ek haath meri biwi ki chuchiyon ko masal raha hai aur dusra hath uski khuli jeans se uski choot pe tha. Uske haath wahan kya kar rahe the mujhe samajhte der nahi lagi.

Aachanak meri biwi Preeti ne apni aankhen kholi aur meri taraf dekhi. Wo ek anjan aadmi ke haathon ko apni choot pe mehsus kar rahi thi aur mein ek parayi aurat ki choot mein ungli kar raha tha. Wo meri taraf dekh muskurai aur mien samajh gaya ki aaj ki raat hum dono ke khwab pure hone wale hain. Preeti ne muskurate hue apni jeans aur panty puri uttar kar nangi ho gayi.

Jaise hi usne apni Jean's aur panty uttari usne Prashant ke kan mein kuch kaha, Prashant ne uski bra aur Top bhi uttar di. Ab wo ek dum nangi uski bahon mein thi. Prashant ke hath ab uske nange badan par reng rahe the.

"Lagta hai hum unse piche reh gaye." Kehkar Babita mujhse alag hote hue apni jeans aur top uttar diya. Jaise hum kisi pratispardha mien ho, Babita apny panty bhi uttar nangi ho gayi.

"Lagta hai ki hamen unse aage badhna chahiye," kehkar Babita ne meri jeans ke button khol mere Lund ko apne hathon mein le liya. Babita mere Lund ko sehla rahi thi aur mera Lund uske hathon ki garmahat se tanta ja raha tha. Babita ek anubhavi chudakad mahila ki tarah ke mere Lund se khel rahi thi.

Mein bhi apni jeans aur underwear se bahar nikal nanga Babita ke samne khada tha. Babita ne mere Lund ko apne hathon mein liya, jo tan kar 8-5 inch ka ho gaya tha….. "Bahot mota aur lamban hai" kehkar Babita Lund ko dabane lagi.

Meine ghum kar dekha to paya ki meri biwi mujhse aage hi thi. Preeti Prashant ke samne ghutno ke bal baithe uske Lund ko hathon mein pakde hue thi. Prashant ka Lund lambai mein meri hi size ka tha par kuch mujhse jyada mota tha. Preeti uske Lund ki puri lambai ko sehlate hue uske supade ko chaat rahi thi.
 
Mujhe pata tha ki Preeti ki is harkat asar Prasahant par bura padne wala hai. Preeti Lund choosne mien itni mahir thi ki uski barabari koi nahi kar sakta tha. Uska Lund choosne ka andaz hi alag tha. Wo pehle Lund ke supade ko apne hotho mein le chusti phir dhire dhire Lund ko apne munh mein bhinchti hui niche ki aur badhti jisse Lund uske gale tak chala jata. Phir apni jeebh se chatte hue lund upar ki aur utthi. Yahi harkat jab wo teji se karti to samne wala ki halat kharab ho jati thi.

Isi tarah se wo Prashant ke Lund ko choose ja rahi thi. Jab wo uske supade ko choosti to apne thuk se sate hathon se jor jor se Lund ko ragadti. Mein janta tha ki Prashant apne aapko jyada der tak nahi rok payega.

Kareeb 10 minute tak Preeti Prasahant ke Lund ki chusai karti rahi. Meine aur Babita bhi dilchaspi se ye nazara dekh rahe the. Prashant ne apne Lund ko Preeti ke munh se bahar nikala aur mere aur Babita ke paas aa khada ho gaya. Babita mere Lund ko sehla rahi thi aur Prashant ne apne hoth Babita ke hothon pe rakh unhe chumne laga. Babita usse alag hote hue boli, "Prashant Raj ko batao na ki mujhe kis tarah ki chudai pasand hai."

Phir kamukta ka ek naya daur shuru hua. Prashant apni biwi Babita ke peeche aakar khada ho gaya aur mujhe uske samne khada kar diya. Phir Babita ke mathe pe aaye balon ko hatate hue mujhse kaha, "Raj iske hothon ko chuso?"

Meine ek agyakari shishak ki tarah aage badh apne hoth Babita ke hoton par rakh diye. Babita ne apni jeeb mere munh mein daal di. Hum dono ek dusre ki jeebh ko chuds rahe the. "Ab iski chuchiyon ko chuso?" Prashant ne kaha.

Mein niche jhuk Babita ki chuchi ko hathon mein pakad uska nipple apne munh mein le chusne laga. Uski chuchiyan bahot bhari to nahi par kasi jarur thi. Gol chuci aur kale sakht nipple kafi maza de rahe the.

"Dusre ko nazar andaz mat karo" kehkar usne Babita ki dusri chuchi pakad mere munh kea age kar di. Meine apne hoth badha uske dusre nipple ko apne munh me le chusne laga.

Kareeb 5 minute tak mein uske chuchiyon ko chusta raha, ki meine paya ki Prashant ke hath mere kandhon pe the aur mujhe niche ki aur daba raha tha, mujhe ishara mil gaya. Kaise ek pati dusre mard ko apni biwi se pyar karna sikha raha tha. Mein niche baithte hue pehle uski nabhi ko chuma aur phir uski kamar ko chumte hue apne hoth thik uski choot ke mukh pe rakh diye.

Jab mein uski choot pe pahuncha to mein dang rah gaya. Prashant ne Babita ke piche se apne dono hothon se uski choot ki pankhudiyon ko pakad ke is kadar faila di thi, jisse mujhe uski choot ko chatne mien aasani ho. Jaise hi meine apne jeebh uski choot pe firayi mein paya ki meri biwi Preeti thik mere bagal mein baithi thi aur uski nigahen Babita ke choot pe tiki hui thi.

Prashant ko acchi tarah pata thi ki mard ki kaunsi harkat uski biwi ki choot mein aag laga sakti thi, "Ab apni jeebh se iski choot ke choron aur chato?' usne kaha.

Aaj mein kai salon ke baad kisi dusri aurat ki choot ko chat raha tha, wo bhi jab ki meri biwi 6 inch ki duri pe baithi mujhe nihar rahi thi. Meine apna ek hath badha Preeti ki choot pe rakha to paya ki uttejna mein uski choot bhi gili ho chuki thi. Meine apni do ungli uski choot mein ghusa andar bahar karne laga. Mein Babit ki choot ko chate ja raha tha, Preeti ne mere Lund ko pakad sehlane lagi.

"Ab iski choot ko niche se upar tak chato aur karte jao?" Prashant ne Babita ki choot aur failate hue kaha. Meien waise hi kiya jaisa usne karne ko kaha, Babita ki choot se utthi madak khushboo mujhe aur pagal kiye jaa rahi thi.

"Ab apni jeeb puri Babita ki choot mein dal do?" Prashant ne kaha. Babita neb hi apni tange aur faila di jisse mujhe aur aasani ho sake. Mein apni jeeb uski choot mein ghusa use jor se chod raha tha. Babita ki siskariya shuru ho chuki thi, "HAAAN RAAAAJ CHUSOOOOOO MERI CHOOOT KO NICHOD LO MERE CHOOT KA SAARA PANI, OHHHHHH HAAAAAAA" Prashant Babita ke chut ko failaye uske piche khada tha. Mein aur teji se uksi choot ko chusne laga. Itne mein Babita ka sharir akda aur jaise koi nadi ka bandh khol diya gaya ho us tarah se uski choot ne pani chod diya. Mera pura munh uske ras se bhar ghaya. Babit jameen pe baith apni ukhdi sanso ko sambhalne lagi.

Thodi der sustane ke baad usne mere chehre ko apne nazdik kar mujhe chum liya, "Raj ab mein chudwane ke liye tayyar hun" itna kehkar Babita mera hath pakad mujhe sofe ke paas le gayi.

kramashah...............

 
नए पड़ोसी पार्ट--2

गतान्क से आगे.........

बबिता सोफे पे झुक कर घोड़ी बन गयी, और थोड़ा नीचे झुकते हुए उसने अपने गोरे चुतताड उपर उठा दिए. उसकी गुलाबी और गीली चूत और उठ गयी थी. मैने अपने हाथ से उसके चुतताड सहलाने लगा. फिर मेने अपना लंड उसके चूत पर रख घिसने लगा. मेने गर्दन घुमा कर देखा कि प्रशांत और प्रीति मेरे बगल मैने खड़े एक दूसरे की नंगे बदन को सहला रहे थे, मगर उनकी आँखें मेरे लंड पे टिकी हुई थी. मेने अपने लंड को धीरे से बबिता की चूत मैने घुसा दिया.

बबिता की चूत काफ़ी गीली थी और एक बार वो झाड़ भी चुकी थी फिर भी मुझे बहोत ज़ोर लगाना पड़ रहा था उसकी चूत में लंड घुसाने में. इतनी किसी चूत थी उसकी. मेने एक ज़ोर का धक्का मार अपना लंड उसकी चूत की जड़ तक डाल दिया और उसे चोदने लगा.

मेने देखा की प्रशांत और प्रीति हमारे पास आगाये. प्रीति ने ठीक बबिता के बगल मे सोफे पर लेट अपनी टाँगे फैला दी. उसकी चूत का मुँह और खुल गया था. उसकी गुलाबी चूत इतनी प्यारी थी और जैसे कह रही हो कि आओ मुझे चोदो. प्रशांत उसकी टाँगो के बीच आ अपना खड़ा लंड उसकी चूत पे घिसने लगा.

में बबिता की चूत को पीछे से चोद रहा था इसलिए मुझे साफ और अच्छी तरह दिखाई दे रहा था कि प्रशांत किस तरह अपना लंड प्रीति की चूत पे रगड़ रहा था. बबिता ने अपना एक हाथ बढ़ा प्रशांत के लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसे प्रीति की चूत के मुँह पे रख दबाने लगी.

क्या नज़ारा था, एक औरत दूसरे मर्द से चुदवा रही थी और अपने पति का लंड उस मर्द की बीवी की चूत पे रगड़ उसे चोदने को कह रही थी. में उत्तेजना के मारे बबिता के चुतताड पकड़ कस कस के धक्के लगा रहा था. बबिता ने प्रीति की चूत को अपने हाथों से और फैला दिया और प्रशांत के लंड को ठीक वही पे रख दिया. प्रशांत ने इशारा समझ एक ही धक्के में अपना लंड पूरा पेल दिया.

प्रशांत मेरी बीवी प्रीति को ज़ोर के धक्को के साथ चोद रहा था और में उसकी बीवी बबिता के चूत मे अपना लंड पेल रहा था. मेने अपने धक्को स्पीड बढ़ाई की बबिता पीछे की ओर घूम कर बोली, "राज थोड़ा धीरे धीरे चोदो और अपनी बीवी को देखो."

मेने देखा कि प्रीति की टांग मूड कर उसकी चुचियों पे थी और प्रशांत धीमे धक्को के साथ उसे चोद रहा था. उसका मोटा लंड वीर्य रस से लासा लाइट में चमक रहा था. इतने में बबिता ने अपनी एक उंगली प्रीति की चूत में डाल अंदर बाहर करने लगी. बबिता की उंगली और प्रशांत का लंड एक साथ प्रीति की चूत में आ जा रहे थे. प्रीति भी पूरी उत्तेजना में अपने चुतताड उछाल प्रशांत के धक्को का साथ दे रही थी.
 
इतनी ज़ोर दर चुदाई देख मेने भी अपने धक्को में तेज़ी ला दी. बबिता भी अपने चुतताड पीछे की ओर धकेल ताल ताल से मिला रही थी. मेने अपनी एक उंगली बबिता की चूत में डाल गीली की और फिर उसके गांद के छेद पे घुमा कर धीरे से अंदर डाल दी. बबिता सिसक पड़ी, "ओह राज कियेयीययाया कर रहे हो?" मेने उसकी बात पे ध्यान नही दिया और उसे ज़ोर से चोद्ते हुए अपनी उंगली उसकी गांद के अंदर बाहर करने लगा. अब उसे भी मज़ा आने लगा था. वहीं पर प्रशांत भी जम कर प्रीति की चुदाई कर रहा था. मेने बबिता के शरीर को अकड़ता पाया, उसने मेरे लंड को अपनी चूत की गिरफ़्त में ले लिया.

में ज़ोर ज़ोर के धक्के लगा रहा था, मेरा भी पानी छूटने वाला था. मेने दो चार धक्के मारे और मेरे लंड ने बबिता की चूत में बौछार कर दी, साथ ही बबिता की चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया.

में फिर भी धक्के मारे जा रहा था और अपनी बीवी प्रीति को देख रहा था, उसकी साँसे तेज थी और वो सिसक रही थी, "ओह आहह प्रशांत चोदो मुझे और जूऊओर से हााआअँ ऐसे ही छोड्ड्ड्ड्ड्ड्डो और ज़ोर सूऊऊ."

में समझ गया कि प्रीति का समय नज़दीक आ गया है, उसने ज़ोर से अपने चुतताड उपर उठा प्रशांत के लंड को अपने गिरफ़्त मे ले अपना पानी छोड़ दिया. प्रशांत का भी काम होने वाला था उसने अपना लंड प्रीति की चूत से बाहर निकाल हिलाने लगा और फिर प्रीति के पेट और छाती पर अपने वीर्य की बरसात कर दी.

प्रशांत अपना लंड फिर उसकी चूत में घुसा धक्के मारने लगा. थोड़ी देर बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला तो वो प्रीति की चूत के पानी और खुद के सफेद वीर्य से लिथड़ा हुआ था. प्रशांतने थोड़ा साइड में हो अपना लंड प्रीति के मुँह में दे देता है. और बबिता अपने आप को अड्जस्ट कर अपना मुँह प्रीति की चूत पर रख उसे चाटने लगी.

मेरे लंड फिर तनाव आ गया था और में ज़ोर के धक्को के साथ बबिता को चोदे रहा था. बबिता मेरी बीवी की चूत को चूस रही थी और प्रीति प्रशांत के लंड को. महॉल में काम की आग दहेक रही और तीनो उत्तेजना से भरे पड़े थे.

दो चार कस्के धक्के मार मेने एक बार फिर अपना पानी बबिता की चूत में छोड़ दिया. प्रीति की चूत ने भी बबिता के मुँह में अपना पानी छोड़ दिया वही प्रीति प्रशांत के लंड से छूटे पानी को पी रही थी.

हम चारों पसीने में लठ पथ थे और साँसे तेज हो गयी थी. ऐसी जमकर चुदाई शायद सभी ने पहली बार की थी. हम सब लेट कर सुसताने लगे. बबिता ने मुझे बाहों भर चूमते हुए कहा, "राज ऐसी चुदाई मेने आज पहली बार की है, तुम्हारे चोदने का अंदाज सही में निराला है." "बबिता ये तो मुझे प्रशांत ने सिखाया कि तुम्हे किस तरह की चुदाई पसंद है." मेने उसे चूमते हुए जवाब दिया.
 
रात के 12.00 बज चुके थे और दूसरे दिन काम पर भी जाना था. प्रशांत और बबिता खड़े हो अपने कपड़े पहनने लगे. कपड़े पहन दोनो ने हमसे विदा ली और अपने घर चले गये. में और प्रीति भी एक दूसरे को बाहों में ले सो गये.

अगले कुछ दीनो तक हमारी मुलाकात प्रशांत और बबिता से नही हो पाई. उस रात की चुदाई ने हमारी सेक्स लाइफ को एक नया मोड़ दिया था. अक्सर रात को बिस्तर में हम उस रात की चर्चा करते और जमकर चुदाई करते. हम दोनो की इच्छा थी कि प्रशांत और बबिता के साथ एक रात और गुज़ारी जाए.

तीसरे दिन शाम के 6.00 बजे प्रशांत हमारे घर आया. उसने बताया कि वो ऑफीस के काम इतना मशगूल था इसलिए हम लोगो से नही मिल पाया. बातचीत के दौरान मेने प्रशांत को बताया अगले वीकेंड पर में प्रीति गोआ घूमने जा रहे है. मेने प्रशांत से कहा, "प्रशांत तुम और बबिता क्यों नही साथ चलते हो?"

प्रशांत कुछ देर सोचते हुए बोला में तय्यार हूँ पर हम लोग आपस में एक शर्त लगाते है. जो शर्त हार जाएगा उसे घूमने का सारा खर्च उठाना पड़ेगा बोलो मंजूर है."

"पर शर्त क्या होगी?" मेने प्रशांत से पूछा.

"शर्त ये होगी कि अगले 10 दिन तक हम सफ़र तय्यारी करेंगे. इन 10 दीनो में हम चारों चुदाई गुलाम होंगे. हम दूसरे से कुछ भी करने को कह सकते हैं, जो पहले काम के लिए मना करेगा वो शर्त हार जाएगा." उसने कहा.

प्रीति ये बात सुनते ही उछल पड़ी "मुझे मंजूर है." जब प्रीति हां बोल चुकी थी तो में कौन होता था ना करने वाला बल्कि में तो तुरंत बबिता के ख़यालों में खो गया कि में उसके साथ क्या क्या कर सकता हूँ, और अगर उसने इनकार किया तो छुट्टियाँ फ्री में हो जायगी, पर मुझे क्या मालूम था कि आगे क्या होने वाला है.

"ठीक है प्रशांत हमे मंजूर है." मेने कहा.

"तो ठीक है हमारे शर्त कल सुबह से शुरू होगी." कहकर प्रशांत चला गया.

मुझमे और प्रशांत में शर्त लग चुकी थी. अब हम अपनी ख्वाशे आज़माने का इंतेज़ार करने लगे. दूसरे दिन प्रशांत शाम को हमारे घर आया और शर्त को शुरू कर दिया. उसने प्रीति को अपने पास बुलाया, "प्रीति तुम अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ."

प्रीति ने अपने पूरे कपड़े उतारे और नंगी हो गयी. प्रशांत ने उसकी चूत पे हाथ फिराते हुए कहा, "प्रीति पहले तुम अपनी झटें सॉफ करो, मुझे चूत पे बाल बिल्कुल भी पसंद नही है."

प्रीति वहाँ से उठ कर बाथरूम में चली गयी. थोड़ी देर बाद प्रीति बाथरूम से बाहर निकल कर आई. मेने देखा की उसकी चूत एकदम चिकनी और साफ लग रही थी. बाल का नामो निशान नही था. प्रशांत ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसे चूमते हुए उसकी चूत में अपनी उंगली डाल दी.

"वाह क्या चूत है तुम्हारी!" कहकर प्रशांत अपनी दूसरी उंगली उसकी चूत में डाल अंदर बाहर करने लगा. "शायद में पहला व्यक्ति होऊँगा जो तुम्हारी बिना बालों की चूत को चोदेगा."

प्रशांत ने प्रीति को खड़ा किया और खुद खड़ा हो अपने कपड़े उतारने लगा. उसका खड़ा लंड शॉर्ट्स के बाहर निकल फुन्कर रहा था. प्रीति आगे बढ़ उसके लंड को अपने हाथों में ले सहलाने लगी.
 
Back
Top