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नाज़ुक नौकरानी चुदवाइ मेरी फ्रेंड ने

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Guest
नाज़ुक नौकरानी चुदवाइ मेरी फ्रेंड ने

दोस्तो एक और कहानी आपके लिए . डॉली मेरी ऑनलाइन दोस्त थी, वो हर रोज़ मुझसे सेक्स चैट करती थी, परन्तु धीरे-धीरे वो मेरी ख़ास दोस्त बन गई।

डॉली का अपना खुद का कारोबार है, उसकी आयु 28 साल की ही है। वो दिखने में बहुत ही सुन्दर और सेक्सी है। भले ही वो मैरिड है परन्तु उसकी चूत एकदम टाइट और फिगर फिट है। उसके पति कनाडा में रहते हैं। उसके घर में किसी चीज़ की कमी नहीं है। कोई कमी है.. तो बस एक सेक्सी लंड की कमी है, जो अब मैंने पूरी कर दी है।

फिर हम कभी-कभी वक्त निकाल कर मिलते और खूब चुदाई करते और फन करते।

इस बार भी डॉली ने मुझे बताया- मैं इस शनिवार और रविवार को फ्री हूँ। अगर वक्त है तो तुम शनिवार रात को आ जाओ, हम रात को एन्जॉय करेंगे।

मैंने शनिवार को जाने का प्लान बनाया। मैं उसके कहे अनुसार रात को करीब 8 बजे उसके घर के सामने था।

उसने मुझे नार्मल तरीके से नमस्ते की और गेट के अन्दर ले गई।

उसने ब्लैक स्कर्ट और वाइट टॉप पहना था।

जैसे ही मैं ड्राइंग रूम में घुसा.. मैंने डॉली को अपनी गोद में उठा लिया और उसे किस करने लगा। वो भी साथ देती हुई मुझे किस कर रही थी। कुछ पल बाद वो नीचे उतरने के लिए छटपटाने लगी।

मैंने उसे छोड़ दिया, तभी वो मेन गेट लॉक करके आई और मुझे ड्राइंग रूम में ले गई।

अब वो बोली- ले जानू, अब कर ले जो मन करता है.. अब ये जान आपकी हुई। ये कहते हुए वो मेरी गोद में आ गई।

मैंने डॉली को गोद में उठाया और फिर से किस करते हुए उसके टॉप में हाथ डाल दिया। मैं साथ ही उसके होंठों को चूसता हुआ.. उसके कान तक किस भी कर रहा था, कभी होंठों को.. कभी कान.. कभी आँखें.. यानि सभी जगह पर कपड़ों के ऊपर से ही किस कर रहा था।

मेरी इस हरकत से डॉली थोड़ी गर्म हो गई थी।

बोली- साले तड़पा दिया था.. कहाँ रहे इतनी देर।

मैंने कहा- अब आ गया हूँ, अब कर देता हूँ तेरी तड़प दूर.. साली कुतिया..

इसी के साथ ही मैंने उसे बेड पर बिठा दिया और ऊपर से उसका टॉप ऊपर करने लगा। उसने मेरा थोड़ा सहयोग किया और अपना टॉप अच्छे से ऊपर कर दिया।

उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी, शायद उसने अपने मेरे लिए ऐसे खुले रखे हों। अब उसके दोनों कबूतर नंगे हो चुके थे। मैंने सबसे पहले दोनों मम्मों को किस किया ही था कि उसके मुँह से मजेदार सिसकारी निकली।

मैंने उसकी एक चूची को पकड़ कर दूसरी चूची को जोर से चूसने लगा। वो अब काफी गर्म हो चुकी थी।

मैंने कहा- साली मादरचोद, आज अच्छे से तेरी बहन चोदूंगा।

डॉली बोली- साले.. मेरी बहन नहीं तू आज पहले मुझे चोद।

जैसे कि मेरे पुराने पाठकों को मालूम है कि हम सभी दोस्त, चुदाई में खुलकर गालियाँ देते हैं। इसी तरह डॉली भी गर्म हो रही थी। उसने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे लौड़े को पैंट के ऊपर से पकड़ना शुरू किया।

वो मेरे लंड को ऊपर से पकड़ते हुए बोली- अरे मेरे यार का लंड आज तो काफी जोश में लग रहा है।

मैंने फिर उसे किस की और उसके एक मम्मे को काटता हुआ बोला- बहन की लौड़ी साली.. जब लंड की दीवानी रांड इसके नीचे पड़ी होगी.. तो अभी जोश में नहीं आएगा तो और कब आएगा साली।

मैंने उसे एक बार फिर खड़ा कर लिया अब मैंने उसका टॉप पूरी तरह से उतार दिया था।

वो बोली- साले न चाय न पानी.. आते ही सीधे मुझे पकड़ लिया।

मैंने कहा- बहन की लौड़ी जिसे दूध मिले उसे चाय की क्या जरूरत.. पहले गाण्ड दिखा मादरचोदी।

उसने तुरंत आगे बढ़ कर अपना एक मम्मा मेरे मुँह में दे दिया और और अपनी गाण्ड को थोड़ा घुमाया, जिससे उसके चूतड़ आधे मेरी तरफ हो गए।

मैंने ऐसे ही ऊपर से उसके पूरे चूतड़ों पर अपना हाथ फेरा और उसका मम्मा छोड़ कर बोला- कुतिया तेरी तो गाण्ड भी काफी तड़प रही होगी।

उसने मुझे एक जोर से किस की और मेरे हाथों से छूट कर भाग गई। मैं देखता ही रह गया कि वो किचन में चली गई। कुछ ही देर में वो मेरे और अपने लिए दो कप चाय, स्नेक्स और पानी लेकर आई और बोली- पहले चाय ले लो फिर रात हमारी ही है।

मेरा स्वागत बढ़िया तरीके से हुआ था। मैं उसके साथ बैठ कर चाय पी रहा था और साथ में हमने कुछ घरेलू बातें की। उसके बाद वो मुझसे डिनर के बारे में बताने लगी।

‘डिनर दस बजे बनाऊँगी.. मैंने अपनी नौकरानी को बुलाया है, तब तक वो भी आ जाएगी।’

मैंने उससे कहा- यार आज तो रात हमारी है.. इसलिए नौकरानी को मना कर देती आने से।

उसने कहा- नहीं यार.. मेरी नौकरानी हमारे 20 पुराने परिवारक विश्वासपात्र नौकरों के परिवार से ही है। असल में मेरे पति बहुत जोर कर रहे थे कि तुम अकेली मत रहो। इसी के चलते एक बार तो उन्होंने मेरी माँ को मेरे पास भेज दिया था.. वो यहाँ आकर रहने लगी थीं। उस हालत में मुझे तुमसे मिलने में भी दिक्कत आ सकती थी। सो उनके ज्यादा जोर देने पर अब मैंने इस नौकरानी को रख लिया। ये ईमानदार और अच्छी है। अब मेरे पति को भी ये है कि मेरे पास कोई है। मैंने अपनी नौकरानी को ऊपर का जो खाली बेडरूम था.. वो दे दिया, उसका घर यहीं पास में ही है। अब वो अपने घर से कुछ देर तक आएगी.. फिर खाना बनाएगी और फिर सोने चली जाएगी। तुम चलो चाय पिओ, फिर मस्ती करते हैं।

मैंने चाय खत्म की और बोला- चल कुतिया साली.. जो होगा सो बाद में देखा जाएगा.. पहले तेरा हुस्न देख लूँ एक बार.. आ जा दिखा अपना जलवा मादरचोद..

ये सुनते ही डॉली मेरे पास आई और बोली- ले अब देख ले अपनी रांड का हुस्न साले ठरकी।

मैंने डॉली के मम्मों को एक बार ट्रक के हॉर्न जैसे दबाया और अपने हाथ से उसके चूतड़ों को पकड़ते हुए किस करने लगा। मैंने डॉली की पैंटी के अन्दर हाथ डालकर एक उंगली से उसकी चूत के दाने को टच किया।

वहाँ मुझे काफी गीलापन महसूस हुआ, तो मैंने कहा- कुतिया साली.. तुम तो पहले ही काफी पिघलने लगी हो, तेरी जवानी को अब मैं और पिघलाता हूँ मादरचोदी।

उसने एक कामुक सिसकी सी भरी और अपनी दोनों बाजू से मेरे बदन से लिपटाते हुए बोली- तो पिघला न साले.. ये जवानी अब तेरी जवानी से मिक्स होने को तड़प रही है।

मैंने तुरंत उसकी पैंटी को थोड़ा और नीचे किया तो वो सिसकते हुए बोली- साले मुझे अल्फ नंगी किए जा रहा है और खुद एक कपड़ा भी नहीं हटाया अभी तक.. तू भी तो दिखा अपनी जवानी का जलवा.. कमीने।

मैंने उसे छोड़ा तो डॉली ने तुरंत मेरी पैन्ट की हुक खोल कर उसे बाहर निकाल दिया। साथ ही मैंने अपनी शर्ट उतार कर एक साइड फैंक दी। इसके बाद मैंने अपनी बनियान तक उतार दी। अब मेरे शरीर पर केवल अंडरविअर ही बचा था।

मैंने डॉली को पकड़ा और इस बार चूंकि मैं डॉली को अल्फ नंगी कर चुका था।सो अब मैं डॉली के कानों को चूसते हुए नीचे की तरफ चाटते हुए जाने लगा। इससे डॉली बहुत तड़पने लगी थी।

मैं उसकी गर्दन, मम्मे, मम्मों की साइड और बैक, उसकी पीठ को अच्छी तरह चाट रहा था। मेरे हाथ उसकी चूत के ऊपर मालिश सी भी कर रहे थे।

फिर मैंने डॉली को घुमाया और उसकी पीठ को चाटते हुए उसके नीचे तक आने लगा। मैं बड़ी कामुकता से उसकी बांहों को.. जांघों को.. उसकी बगलें.. सभी जगह चूस रहा था, जिससे डॉली मचलने लगी थी।

वो बोली- उफ़.. अंह.. आपका यही अंदाज़ मेरी जान निकाल लेता है राजा..उन्ह..

डॉली का एक हाथ मेरे लंड पर चलने लगा था। मैंने उसे फिर घुमाया और उसके सामने नाभि और उसके नीचे का भाग चूसने लगा। नाभि से अब मैं धीरे-धीरे उसकी चूत की तरफ बढ़ रहा था। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और अब मैं उसकी चूत के बहुत करीब था। मैं उसके ऊपर आ गया और हम दोनों 69 पोजीशन में हो गए।

मैंने जैसे ही उसकी चूत को अपनी जीभ से टच किया.. तो वो बहुत मस्त सिस्कारियां भरने लगी और उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया।

मैं लगातार उसकी चूत को चूसे जा रहा था। मैं उसके दाने से लेकर अन्दर तक चाट रहा था। उसकी चूत में अन्दर तक उंगली भी डाल देता और कभी-कभी जीभ भी अन्दर डाल रहा था। वो मेरे लंड को जड़ तक मुँह में लेकर बेझिझक होकर चूस रही थी। मेरा लंड अपने पूरे जोश में आ चुका था।

मैंने उसे तड़पाने के लिए उसकी चूत में उंगली डाल दी और उसके दाने को अपने दांतों में लेकर चूसने लगा और कभी-कभी दाने पर जीभ फेरता.. तो वो बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगती थी।

उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी। मैंने भी उसको एक बार वहीं पर झाड़ने का फैसला कर लिया था।

दोस्तों चुदाई का सही मजा जब ही आता है.. जब एक बार की उत्तेजना बाहर ही झड़ जाए।

वो मेरे लंड को जोर-जोर से अन्दर-बाहर करने लगी थी, मेरे लंड के सभी तरफ वो अपनी जीभ को बहुत तेज-तेज अपनी जीभ चला रही थी.. जिससे मुझे भी काफी उत्तेजना महसूस हो रही थी।

मैंने अपने होंठों से फ्रेंच किस की तरह उसकी पूरी चूत को अपने मुँह में ले लिया, इससे डॉली बहुत उत्तेजित हो गई, मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में डाल रखी थी। अब की बार डॉली सिसकारी भी भर रही थी।

उसके दोनों मम्मे मेरी जांघों के नीचे थे, वो भी दब कर मज़ा दे रहे थे इसलिए ज़ल्दी ही उसकी जवानी का चश्मा (झरना) फूट पड़ा और डॉली की चूत से उसकी जवानी का रस पिघल कर मेरे मुँह में आने लगा।

वो काम आनन्द से सिसकारने लगी। मैंने उसका सारा रस अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

मैंने उसे और उत्तेजना देने के लिए उसके दाने पर भी लगातार जीभ से चुसाई जारी रखी।

वो मादकता से सिसकार रही थी और मेरे लंड को अपने मुँह में बहुत तेज-तेज आगे-पीछे कर रही थी जिसे मैं भी ज्यादा बर्दाश्त न कर पाया और मेरे लौड़े ने अपनी धार सीधे उसके मुँह में छोड़ दी।

मेरे लंड की पहली धार जैसे ही उसके मुँह में गिरी.. तो उसने मेरे लंड को हर बार की तरह जोर से कस लिया और अपने मुँह में गिर रहे लंड रस का मज़ा लेने लगी।

इधर नीचे से उसकी धार छोड़ रही चूत मेरे मुँह में थी और मैं भी उसकी चूत के रस को पिए जा रहा था।
 
करीब 2 मिनट तक हम ऐसे ही एक-दूसरे के रस को पीते रहे और एक-दूसरे के जिस्म को कस कर पकड़े रखा, उसकी टांगों को मैंने अपने हाथों में पकड़ा हुआ था।

मेरी दोनों टांगों को भी डॉली ने अपने हाथों में ले रखा था।

अब वो मेरे लंड का सारा रस पी चुकी थी और मेरे टट्टों को भी चूसने लगी थी। कुछ पल बाद हम दोनों अलग हुए और एक-दूसरे को छोड़ा और एक-दूसरे को चूमते हुए और हँसते हुए छेड़ने लगे।

मैंने उससे कहा- क्यों साली.. कैसा रहा तेरे मर्द का पहला राउंड मेरी कुतिया?

वो बोली- मादरचोद.. ये राउंड तो बढ़िया रहा.. बाकी रात को पता चलेगा.. चलो अब ज़ल्दी से कपड़े पहन लो.. पायल (उसकी नौकरानी का नाम पायल है) आने वाली होगी।

डॉली कपड़े पहन कर घर के काम में लग गई और मैं बाथरूम में नहाने चला गया।

जब तक मैं नहाकर बाहर आया.. तब तक पायल भी आ चुकी थी, डॉली और पायल दोनों किचन में काम कर रही थीं।

डॉली ने खाना लगवा दिया, मैं और डॉली एक साथ बैठकर खाना खाने लगे और पायल हमें खाना खिला रही थी।

तभी बातों बातों में डॉली ने मुझे धीमे स्वर में बता दिया था- पायल को मैंने बता दिया है कि तुम हमारे रिश्तेदार हो.. इधर किसी काम आए थे.. तो मिलने चले आए। रात को कहीं बाहर रुकने वाले थे तो मैंने जोर देकर तुम्हें यहीं पर रुकवा लिया।

नौकर होने की वजह से पायल ने कोई सवाल तो किया ही नहीं था।

हमने खाना ख़त्म किया और उन्होंने मुझे नीचे का दूसरा बेडरूम जो खाली पड़ा था, वो पायल से खुलवा दिया था.. मैं वहाँ चला गया।

पायल अपना काम खत्म करके ऊपर चली गई थी।

डॉली भी अब फ्री हो गई थी, डॉली दो गिलास दूध लेकर मेरे बेडरूम में आ गई और बोली- लो मेरे राजा.. अब हम दोनों फ्री हैं.. आप बैठ कर टीवी देखो.. मैं फ्रेश हो आऊँ और नहा आऊँ।

मैंने कहा- बाद में चली जाना।

बोली- नहीं.. एक बार मुझे नहा लेने दो प्लीज़, बस मैं गई और अभी आई।

कहते हुए वो मेरे कमरे के ही बाथरूम में चली गई। मैं उतनी देर मैं टीवी पर न्यूज़ देखने लगा।

वो कुछ देर बाद बाथरूम से बाहर निकली.. तो क्या कयामत ढा रही थी। बस ब्रा और पैंटी और एक जालीदार लॉन्ग नाईट गाउन जिसमें से उसकी लाल पैंटी और लाल जालीदार ब्रा साफ़ दिख रही थी।

उसने आते ही ट्रे में रखे दूध के गिलास के को आगे किया और मुझे पीने के लिए दिया, बोली- डार्लिंग ये बादाम किशमिश मिक्स दूध है.. पी लो.. तभी तो तुम्हारा दूध निकलेगा न!

हम दोनों हँसने लगे।

मैंने भी नहाने के बाद बस सादा सा जालीदार नाईट गाउन पहना था.. जो उतारना बहुत आसान था। उसके नीचे मैंने भी बस अंडरवियर ही पहना था।

मैं बेड के ऊपर आ गया और डॉली भी मेरे पास आ गई, हमने अपनी टांगों पर कम्बल डाल लिया और साथ बैठ कर दूध पीने लगे।

मैंने डॉली को कहा- जानेमन, बहुत दिन हो गए.. तेरा ये मखमली बदन छुए हुए।

वो तुरंत हँसते हुए बोली- अभी तो छुआ है।

हम दोनों ऐसे ही हँसी-मज़ाक कर रहे थे।

फिर मैं डॉली के बदन को चूमने लगा और उसके बदन को फिर से हर जगह पर चूमते हुए मज़ा देने लगा, उसके होंठों से लेकर उसकी बांहों को मदभरे तरीके से चूम रहा था।

मैंने चूमने के साथ ही उसका नाईट गाउन उतार दिया था, वो मुझसे लिपटी पड़ी थी और मैं भी उसे बेतहाशा चूमे भी जा रहा था।

डॉली भी सिस्कारती हुई मेरा साथ देने लगी थी। मैंने उसके शरीर से गाउन उतार कर दूर फेंक दिया था और उसके शरीर पर बस अब एक जालीदार ब्रा और पैंटी रह गई थी।

मेरे जिस्म पर तो पहले से ही मैंने बस अंडरवियर पहना था।

मैं बोला- मादरचोद कुतिया… अब बोल कितना डर्टी कर दूँ तुझे.. ज्यादा शौक है न तुझे मेरे लौड़े को चूसने का.. तो ले इसे अपने मुँह में बहन की लौड़ी।

कहते हुए मैंने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया।

डॉली भी सिसकार लेकर लंड को मुँह में लेती हुई बोली- हाँ कुत्ते कमीने कर आज कर दे मुझे हद से ज्यादा डर्टी.. जितना कर सकते हो.. चोद दे मेरी गांड तक.. पी ले मेरी जवानी का रस.. मेरे मम्मों और चूत से रस चाट ले बहन के लौड़े.. मेरे कुत्ते.. आह..

यह कहते हुए वो मेरा लौड़ा चूसने लगी, मैंने अपने दोनों हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और आगे से ब्रा को दांतों में पकड़ कर उसके मुँह के ऊपर से लहराते हुए उसकी चूत को छुला कर साइड पर फैंक दी।

एक-एक किस दोनों मम्मों पर करके उसका एक मम्मा मुँह में लेकर चूसने लगा, फिर दूसरा मम्मा भी थोड़ी देर चूस कर नीचे उसकी पैंटी की तरफ मुँह ले गया।

मैंने अपने होंठों से उसकी पैंटी को खोल कर दांतों से पैन्टी को उसकी टांगों से निकाल कर बिना हाथ लगाए उसकी चूत पर लहराने लगा।

फिर चूत के पास दोनों टांगों के बीच पैंटी को छोड़ कर चूत पर अपनी गर्म-गर्म साँसें छोड़ने लगा।

मेरी फीमेल पाठिकाएं जानती होंगी कि जब मर्द चुदाई से पहले खुल कर मज़ा दे-दे कर तड़पा-तड़पा कर ऐसा चुदाई वाला गर्म रोमांस करे.. तो उन्हें चुदाई से भी ज्यादा मज़ा आता है और इस हरकत से चूत पानी-पानी होने को आतुर हो जाती है।

अब फिर से डॉली की चूत पानी-पानी थी और वो बहुत तड़प रही थी, डॉली ने कामुकता से सिसकते हुए कहा- उन्ह.. आह.. सीसी यार अब करो न..

मैंने उसे तड़पाते हुए कहा- क्या करूँ साली..

तो वो थोड़ा चिढ़ कर और वासना में आकर बोली- अपनी नंगी चुदक्कड़ रांड को चोद दे.. कमीने कुत्ते.. तेरी कुतिया तेरे सामने नंगी पड़ी है बहन के लौड़े.. और तू है कि इसे तरसा रहा है… अब चोद दे मेरी चूत को माँ के लौड़े.. चोद इस फुद्दी को कमीने..

मैंने अब उसकी गांड में एक उंगली डाली और बोला- साली मादरचोद कमीनी कुतिया.. आज तेरी गांड भी फटेगी.. तू देख अभी बिठाता हूँ तुझे अपने लौड़े पर।

मेरा लंड जो उसने अपने मुँह से निकाल दिया था.. पूरा उठान पर था और चोदने के लिए खड़ा था।

मैंने जाँघों तक फंसा अपना अंडरवियर उतार दिया था। उसकी दोनों टांगों को ऊपर उठाया और पीछे से हो कर उसकी चूत को दो उंगलियों से खोल कर देखना चाहा। मैंने उसकी चूत की फांकों को खोला और देखा, देखते ही मैंने कहा- बहन की लौड़ी.. तेरी इस जवान चूत में अभी डालता हूँ अपना लौड़ा.. ले मेरी कुतिया.. गांड उठा अपनी..

मैंने अब भी उसकी चूत में लौड़ा डालने से पहले जीभ डाल दी और उसे और उत्तेजित कर दिया।

मेरी इस हरकत से डॉली बोली- उफ़ आह.. साले कुत्ते.. तू तो लंड डालने वाला था.. अब फिर जीभ का डाल दी कमीने.. लंड डाल.. नहीं तो मैं पेशाब कर दूंगी, तेरी जीभ पर कुत्ते।

मैंने तुरंत कहा- कर तो.. बहन की लौड़ी.. कर पेशाब.. देखूं तुझे.. मेरी जीभ यहीं है कुतिया.. ले कर सू सू.. मेरी रांड.. आह..

मैंने उसकी चूत को जीभ से तेज-तेज थोड़ा रगड़ा और फिर अपने लंड को आगे बढ़ा दिया और बोला- बहनचोद, अब गांड नीचे मत करना.. अब तेरी जवानी को मेरा लौड़ा मिलने वाला है कुतिया।

डॉली ने गांड उठा कर इशारा किया कि अब देर मत करो। मैंने तुरंत उसकी चूत के मुँह पर लंड रखा और एक हल्का सा धक्का लगाया.. जिससे मेरा लंड उसकी चूत के मुँह पर फिट हो गया।
 
अब मैंने साथ ही एक जोरदार झटका लगाया.. जिससे मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत के अन्दर चला गया। अब मैंने साथ ही दो-तीन झटके और लगाए और अपना लंड जड़ तक उसकी चूत में उतार दिया।

डॉली सिसकने लगी थी, उसकी मादक सीत्कारें निकलना लगातार जारी थीं, अन्दर घुसे हुए लंड का स्वागत वो गांड उठा-उठा कर कर रही थी।

मैंने आगे हाथ बढ़ा कर उसके दोनों चूचियों को पकड़ा और पीछे से मजेदार झटके लगाने लगा। डॉली मज़े से सरोबार होकर सिसकारियाँ भर रही थी।

वो कह रही थी- उ..ई.. आ..ह.. सी सी सी.. उई चोद.. भैन के लंड.. चोद ऐसे ही.. चोद.. मेरी बच्चेदानी तक ठोक भोसड़ी के.. चोद दो आह.. उई मेरी बहन चोद.. दे.. लौड़े.. साले कमीने चोद.. आह हाँ ऐसे ही.. मर्द बन कर पेलता रह.. मेरे कुत्ते.. साले चोद.. आह उई..

वो ऐसी चुदासी सीत्कारें भर रही थी कि मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसकी गांड में एक उंगली डाल दी।

उसकी गांड में उंगली जाने का मतलब तो आप समझ ही गए होंगे।

उसकी गांड पहले भी मैंने कई बार चोदी है.. इसलिए उसकी गांड में उंगली आराम से चली जाती है।

वो गांड में उंगली पाकर और सिसक गई और बोली- उई आह.. गांड फट गई साले.. उई आह.. सी सी.. आह चोद-चोद.. आह ऐसे ही गांड भी चोद..

अब उसकी चूत में मेरा लंड था और गांड में उंगली थी, मैंने देखा ऐसी स्थिति में डॉली काफी मज़ा महसूस कर रही है, मैंने उससे कहा- उन्ह.. साली.. एक साथ दो-दो लंड हों तो कैसा रहेगा.. एक तेरी चूत में और एक गांड में.. कुतिया.. और… ले साली.. लंड स्सश..

इसी के साथ ही मैं उसकी चूत में लंड के झटके लगा रहा था।

वो मेरी बात सुनकर बोली- आह्ह.. उई धीरे चोद सा..ले.. तेरा आईडिया तो.. अच्छा है.. आह.. चोदो.. पर मेरी.. हालत क्या हो जाएगी ऐसे.. कुत्ते.. उन्ह.. आई..

मैंने फिर एक जोरदार शॉट उसकी चूत में लगाया और उसकी चूचियां को दबोचता हुआ बोला- ले कुतिया.. और मज़ा ले ले लौड़ा कुत्तिया आह.. साली हालत नहीं होती.. मज़ा आएगा दो लंडों से रांड जब तेरी गांड में झटका लगेगा.. तो साथ ही तेरी चूत में भी झटका लगेगा और कभी एक साथ दोनों झटके.. कभी ताल से ताल मिला कर झटके.. आह उई..

कहते हुए मैं उसे चोदे भी जा रहा था, वो अपनी गांड उठा-उठा कर चुदने लगी थी।

मैंने अंदाजा लगा लिया था कि डॉली अब झड़ने के बहुत करीब है, तो मैंने उसे अपने ऊपर बिठा लिया, उसके मुँह में मैंने अपनी जीभ डाल दी और किस भी करने लगा।

अब हम दोनों किस करते हुए चुदाई कर रहे थे। उसके दोनों मम्मे मेरी छातियों में दबे हुए थे, वो मेरी जाँघों पर बैठी हुई चुद रही थी। मैं भी बैठा हुआ उसको चोद रहा था और वो चुदते हुए मेरी बात का जवाब देने लगी ‘साले आह.. मज़ा आ रहा है कुत्ते.. हाँ ऐसे.. ही चोद.. हाँ साले आ..ह.. तो ऐसा लंड मिलेगा.. कहाँ से.. मेरे यार.. ले चोद मेरी जवानी.. और मेरी गांड.. फाड़ दे.. आज… आह.. उई.. साले.. ले.. आह’

मैंने अंदाज़ा लगाया कि वो भी दो लंड की बात सुन कर ऐसा चाहती है और अब वो अपने पूरे जोश में थी और जोर-जोर से दहाड़ती हुई चुद रही थी।

मैंने उसे गालियाँ देते हुए कहा- कुतिया.. आह… उई ले चुद.. साली मादरचोद.. आह.. उई.. आह.. ले मेरी रांड साली मारूँ.. तेरी गांड.. आह.. उई ले चुद… चुद… चुद दूसरा लंड पैदा.. करने के लिए बैठा है तेरा यार.. साली में करूँगा.. कोई इंतजाम कुतिया… आह उ..ई .उ.ई.. उई.. आह.. ले चुद.. चु.द. चु.. द चुद… .चुद चुद आह चुद.. ले रांड तेरी… .बहन तक चुद.. जाएगी.. आज गांड भी फटेगी आज तेरी आह.. उई..

मेरा लंड पूरी स्पीड से उसकी चूत से अन्दर-बाहर हो रहा था और उसने अपनी दोनों चूचियां मेरी छातियों से कस दी थीं, वो मेरे साथ पूरी तरह लिपट गई थी।

मैंने उसके अन्दर अपने लंड से एक और जोरदार झटका जैसे ही लगाया तो उसकी चूत से उसकी जवानी के रस की धार इतनी जोर से निकली के मेरे टट्टों तक को धार ने भिगो दिया था।

उसने मुझे कस कर पकड़ रखा था और उसकी चूत से उसकी जवानी का गर्म रस बहता ही जा रहा था और वो जोरदार सिसकियाँ भी ले रही थी और बहुत जोर-जोर से चिल्ला रही थी- उई आह आह.. कुत्ते चोद आह.. उई आह.. चुद गई.. चुद गई फूट गया मेरा रस.. आह आह.. ले चख ले.. मेरी जवानी आह उई.. आह मे..रे.. शेरू कुत्ते.. आह.. उ.ई.. चु.द .ग.ई.. मैं आज.. तेरे.. लंड.. से.. बहन.. चोद दी तूने… .आह उई आह सी सी..

ऐसे बोलती हुई वो बहुत जोर से चुद रही थी और साथ-साथ अपनी गांड भी हिला रही थी।

मैं अपने एक हाथ से उसकी गांड को सहला रहा था और लंड को आगे-पीछे भी कर रहा था। मैंने दूसरे हाथ से उसको पकड़ रखा था। उसका झड़ना जैसे ही बंद हुआ.. तो उसने मुझे इशारा किया और मैंने उसका इशारा पाकर अपना लौड़ा उसकी चूत से निकाल दिया।

मेरा लंड भी झड़ने की कगार पर था, पंरतु पहले एक बार झड़ जाने की वजह से वो थोड़ा झेल सकता था। तो इसी लिए मैंने अभी लंड उसकी चूत से निकाला और उसकी गांड में डालने लगा। उसने भी गांड उठा कर थोड़ा साथ दिया और वो घोड़ी बन गई, मैंने पीछे से लंड उसकी गांड में डाल दिया।

आधा लंड करीब उसकी गांड में चला गया था, मैं अब लंड को आगे-पीछे करने लगा.. मैं आधे लंड को ही आगे-पीछे कर रहा था।

डॉली भी गांड हिला-हिला कर लंड का गांड में स्वागत कर रही थी।

मेरा लंड काफी हद तक उसकी गांड के अन्दर था, उसकी चूत अभी भी थोड़ा थोड़ा पानी छोड़ रही थी। उसकी चूत में उसने अपनी एक उंगली डाल रखी थी। मैं अब जोर-जोर से उसकी गांड चोदने लगा था।

अब मेरा लंड रस भी निकलने वाला ही थी सो मैंने उससे पूछा- उह आह साली कहाँ गिराऊं.. उई आह..

उसने भी चूत में जोर-जोर से उंगली करते हुए जवाब दिया- गांड में ही डाल दे साले.. आह उई..

मैं जोर-जोर से झटके लगाने लगा, अब मैंने उसे कस लिया और मेरे लंड ने धार छोड़ दी, मेरी धार उसकी गांड में गिर रही थी और मैंने उसे कस लिया था।

मैं धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे कर रहा था, वो सिसक रही थी। कुछ पल बाद मेरा लंड उसकी गांड से बाहर आ चुका था। मेरा वीर्य उसकी गांड से बह कर जांघों तक जा रहा था।

मेरे वीर्य से उसकी गांड पूरी तरह से भीग गई थी।

डॉली ने पास पड़ा तौलिया उठाया और सब साफ़ कर दिया। इसके बाद मेरे लंड को कुछ देर के लिए अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

मेरे लंड से और भी वीर्य जो अभी नहीं निकल पाया था.. वो उसने चूस कर निकाल दिया।
 
अब डॉली की गांड और चूत दोनों चुद गई थीं, इधर मेरे लंड का रस भी दो बार रस बह चुका था।

हम एक बार तो पूरी तरह संतुष्ट हो चुके थे।

हम दोनों ने घड़ी पर टाइम देखा तो रात के साढ़े बारह से ऊपर का वक्त हो चुका था। हमने एक-दूसरे को किस किया और सोने की तैयारी करने लगे क्योंकि अगले दिन सन्डे को भी मैं उसके पास ही रहने वाला था।

दूसरे दिन मैं सुबह करीब 7 बजे उठा, सुबह डॉली मेरे कमरे से उठ कर अपने कमरे में चली गई थी। ताकि पायल को ऐसे लगे जैसे वो वहीं थी।

सुबह पायल ने चाय बना दी थी और डॉली चाय लेकर मेरे कमरे में आई, मैं भी तब तक उठ कर फ्रेश हो गया था।

हम दोनों चाय पीने लगे और बैठ कर रात वाली चुदाई की बातें कर रहे थे।

बातों-बातों में डॉली ने बताया- कल रात मुझे बहुत मज़ा आया, इतना मज़ा बहुत दिन बाद आया है।

मैंने उससे कहा- अगर तुम और ज्यादा मज़ा लेना चाहती हो तो सच में दो-दो लंडों का मज़ा लेकर देख सकती हो.. जिसमें एक लंड गांड में और एक चूत में होगा.. तो तुम्हें और ज्यादा मज़ा आएगा।

वो कहने लगी- बात तो सही है.. परन्तु यार मैं ऐसा कोई में रिस्क नहीं लेना चाहती.. कल को कोई ऐसी बात हो गई तो कैसे झिलेगी। अब तुम पर तो मुझे भरोसा है.. कोई और अगर मुझे ब्लैकमेल करने लगा या कोई ऐसी बात और हो गई तो?

मैंने उससे कहा- तुम डरो मत.. इसका इलाज़ मेरे पास है.. अगर तुम्हें ठीक लगे तो मैं अपने दोस्त संजय को बुला सकता हूँ।

संजय के बारे में मेरे वो पाठक-पाठिकाएं जानते होंगे.. जिन्होंने मेरी कहानी बीवी की चूत और दोस्त का लंड पढ़ी हुई है जो कई भागों में प्रकाशित हुई थी।

मैंने डॉली को बताया- संजय मेरा भरोसेमंद दोस्त भी है और उसकी वाइफ को मैंने उसके साथ चोदा भी है, इसलिए हम दोनों खुले विचारों के होने की वजह से तुमको कोई दिक्कत नहीं आने वाली।

डॉली बोली- फिर यार, वो कब तक आ सकता है, अगर हम अभी बुलाएं तो?

मैंने कहा- अगर तुम चाहो तो उसका रास्ता यहाँ से सिर्फ एक घंटे का है और अगर उसे हम सब बता देंगे.. तो वो 10-11 बजे तक आराम से पहुँच सकता है.. आज सन्डे भी है।

तो उसने फिर एक बार सोचा और फिर कहा- चलो बुला लो.. आज जो होगा देखा जाएगा।

मैंने चाय ख़त्म होते ही संजय को फ़ोन लगाया और कुछ देर हाल-चाल पूछने के बाद कहा- आज क्या कर रहा है?

बोला- कुछ नहीं फ्री हूँ।

मैंने कहा- यार तो फिर तुम अभी चंडीगड़ साइड आ सकते हो क्या?

वो बोला- क्यों क्या हुआ?

मैंने कहा- मैं रात का यहाँ मेरी दोस्त के पास रुका हुआ हूँ.. अगर फ्री हैं तो आजा एक साथ मस्ती करेंगे।

वो बोला- चल देखता हूँ।

मैंने कहा- देखना नहीं.. तू आ जा बस चले आ।

मैंने उसे थोड़ा जोर दिया तो वो आने के लिए तैयार हो गया।

अब मैंने फ़ोन काट कर डॉली को अपनी बांहों में भर लिया और एक किस करके उसके मम्मे दबाने लगा।

वो बोली- अभी घर का काम करने दो, तुम्हारे दोस्त को भी आना है इसलिए पहले साफ़-सफाई कर दूँ।

मैंने उसे छोड़ा.. और मैं थोड़ा टहलने लगा और वो पायल के साथ मिल कर सफाई करने लगी।

करीब 9 बजे तक नाश्ता तैयार हो गया था, उसने पायल को नाश्ता अपने बेडरूम में ही लाने को कह कर मुझे अपने कमरे में आने के लिए आवाज दी।

पायल वहाँ पर ही हमारे लिए नाश्ता ले आई, मैं और डॉली एक साथ नाश्ता करने लगे।

पायल हमें नाश्ता करवाती रही।

पायल जब किचन में थी तो डॉली ने मुझसे कहा- मैं तुमसे एक बात करना चाहती हूँ।

मैंने कहा- करो।

उसने बातें करते हुए बताया- अगर हम पायल को अपने साथ मिला लें तो इसका हम सभी को फायदा रहेगा.. एक तो कोई डर नहीं रहेगा। इसके बाद आप जब मर्जी आओ और जब मर्जी जाओ.. दूसरा हम खुल कर मजा ले सकते हैं, तीसरा पायल को कल को हमारे बारे में ऐसे पता चलता है.. तो वो आगे बता सकती है। अगर वो हमसे मिली होगी तो किसी भी तरह कोई बात आगे नहीं बताएगी और न ही अपने घर पर कोई बात करेगी।

मैंने कहा- ये होगा कैसे?

साथियों चूत की आग बहुत तेज होती है जब ये भड़कती है तो आगे-पीछे कुछ नहीं देखती है।

वो बोली- यार इसका जिम्मा मेरा रहा, तुम बस सहमति दो.. और हाँ, ध्यान रहे कि ये अभी कुंवारी लड़की है। अभी तक चुदी नहीं है ये.. तो मैं पक्का नहीं कह सकती.. परन्तु हाँ, ये हमसे सहमत जल्दी हो जाएगी ये मेरा विश्वास है।

मैंने कहा- एग्री होगी.. वो तुम्हें कैसे पता?

उसने बताया- एक दिन चुदाई की मूवी लगा कर वो छोड़ कर बाहर चली गई थी.. ये कमरे में सफाई करने आई तो ये खड़ी होकर वो मूवी देखने लगी और एक हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी। मैं जब अन्दर आने लगी तो मैंने इसे देख लिया परन्तु इसने मुझे नहीं देखा। तो मैं भी इसका ये नज़ारा एक तरफ खड़ी होकर देखने लगी। पहले इसने अपनी चूत को सलवार के अन्दर हाथ डालकर सहलाया और फिर अपने दोनों मम्मों को भी दबाने लगी। ये करीब 10 मिनट तक ऐसा करती रही और फिर बाथरूम में घुस गई। मैं पीछे हो गई फिर अन्दर कुछ देर बाद सफाई करने लगी। मुझे पक्की उम्मीद है उस दिन इसने सफाई करते हुए वो मूवी देखकर इसने चूत में उंगली की थी।

मैंने कहा- तू बता फिर.. मुझे इसमें क्या करना होगा?

उसने बताया- अभी तुमने कुछ नहीं करना.. जो करना है.. मैंने करना है.. जहाँ तुमको करना होगा.. वहाँ बता दूंगी।

उसने लंच ख़त्म किया और पायल को किचन में जाकर बोला- आज सफाई जरा ज़ल्दी कर दे.. किसी को आना है।

मैं घर के ऊपर जाकर बैठ कर अखबार पढ़ने लगा।

डॉली ने पायल को सफाई करने के बाद अपने कमरे में बुलाया और कहा- मैं तुमसे एक बात करना चाहती हूँ।

‘क्या..?’

उसने पायल को कहा- देखो पायल मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूँगी और न ही तुम मुझसे डरना.. मैं बस तुमसे एक बात पूछना चाहती हूँ और तुम उसका जवाब मुझे सच-सच बताना.. हाँ या न में।

तो पायल ने कहा- ऐसी क्या बात है दीदी जी.. आप पूछो क्या पूछना चाहती हो?

डॉली ने उससे पूछा- क्या कुछ दिन पहले तुमने मेरे कमरे में पोर्न मूवी चलती देखी थी?

पायल एक बार घबरा सी गई और बोली- दीदी मैं समझी नहीं.. आप क्या कह रही हो?

डॉली ने बड़े प्यार से कहा- पायल.. तुम घबराओ नहीं.. ये बताओ तूने कुछ दिन पहले मेरे कमरे में सेक्सी मूवी चलती हुई देखी थी क्या?

पायल ने घबरा कर कहा- ओहओ.. दीदी देखी थी.. परन्तु मैंने टीवी बंद कर दिया था.. मैंने कोई ध्यान नहीं दिया था।

डॉली ने कहा- देखो पायल, मैंने ये बात तुझसे इसलिए पूछी है.. क्योंकि मैंने उस दिन तुझे देखा था कि तुमने अपने आप को बाथरूम में जाकर शांत किया था। घबराओ मत, ये हर जिस्म का जरूरी हिस्सा है और अगर सेक्स अच्छा न होता तो भगवान् इसे बनाते ही क्यों.. इसलिए तू घबरा मत, मैं तुझे कुछ नहीं कह रही हूँ।

इतना बोल डॉली ने देखा कि उसके चेहरे पर एक शर्मिंदगी थी और वो लग रहा था कि जैसे कुछ बोलना चाह रही हो.. पर झिझक रही थी।

डॉली ने उसकी झिझक को खोलने के लिए कहा- मैं तो सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ कि मेरा भी फ़र्ज़ बनता है कि मैं भी तेरा ख्याल रखूं, अगर तू चाहे तो तुझे उस मूवी जैसे मज़े दिलवा सकती हूँ, पर शर्त एक है कि इस बात का किसी को पता नहीं लगना चाहिए। अगर तुझे उस मूवी जैसे मज़े असली ज़िन्दगी में मिल जाएं.. तो तू खुद ही सोच ले तुझे कितना मज़ा आएगा और अगर मजा नहीं लेना चाहती.. तो तेरी मर्जी है।

पायल कुछ नहीं बोली और इधर-उधर देखने लगी।

डॉली ने उससे फिर बोला- चल जा तू अपना काम कर ले।

पायल को बाहर भेज कर उसने फिर अपने कमरे में वही मूवी चालू कर दी और पायल को आवाज़ दे कर बुलाया और बोली- ये देख पायल ये वही मूवी है जो उस दिन तूने देखी थी.. तू देखना चाहेगी?

पायल ने सर हिला दिया कि वो नहीं देखना चाहती।

डॉली ने उससे कहा- चल न देख तो.. दो मिनट यहाँ बैठ और मेरे कपड़ों की तह भी लगा दे। मैं अभी ऊपर जाकर आती हूँ।

यह बोल कर डॉली ऊपर मेरे पास आ गई। जो बात मैंने आपको बताई ये सब डॉली ने मुझे आकर बताई कि उसकी और पायल की क्या बातचीत हुई।
 
डॉली मेरे पास आकर बताने लगी- शायद अब तुम्हारी नीचे जरूरत पड़े।

मैंने कहा- कोई बात नहीं जानेमन, तू बुला तो सही.. मैं एकदम रेडी हूँ।

डॉली फिर नीचे चली गई, उसने अपने रूम में जाकर देखा कि मूवी चल रही थी और पायल कपड़े भी तह लगा रही थी और साथ-साथ मूवी भी देख रही थी।

डॉली ने कहा- देख.. कहो तो आज तेरे पास चांस है। आज मैं भी तुझे कह रही हूँ, फिर मैं भी नहीं कहूँगी। सोच ले और दस मिनट के अन्दर-अन्दर मुझे अपना फैसला बता देना।

पायल बोली- दीदी थोड़ा डर लग रहा है।

डॉली ने कहा- अरे डर किस बात का.. ये तो सभी करते हैं और फिर मैं तेरे पास रहूँगी न.. अगर तुझे कोई दिक्कत आएगी तो मैं सम्भाल लूँगी।

पायल ने फिर कुछ सोच कर मना कर दिया।

तब डॉली ने कह दिया- चलो ठीक है तेरी मर्जी।

पायल घर के बाकी काम करने लगी।

इधर मुझे संजय का फ़ोन आ गया था कि वो वहाँ से निकल गया है और मैंने उसे डॉली के घर का एड्रेस मैसेज कर दिया।

डॉली ने मेरे पास आकर बताया कि पायल तो मना कर गई।

कुछ देर बाद मैं भी नीचे ही आ गया और जाने की तैयारी करने लगा ताकि पायल को ऐसा लगे कि मैं आज चला जाऊँगा।

तभी डॉली ने अपने कमरे में जाकर देखा पायल वहाँ खड़ी थी और वो मूवी देख रही थी।

डॉली ने कहा- अरे कुछ नहीं होता, ले ले मज़ा अपनी जवानी का।

तो पायल ने धीरे से कहा- दीदी ये बात आप किसी को बताओगी तो नहीं न?

डॉली ने उसे बांहों में लेते हुए कहा- अरे मेरी रानी, ऐसे तू सोच भी कैसे लिया.. चल आजा मेरे साथ.. मैं करवाती हूँ आज तेरी जवानी का उद्घाटन।

यह कहते हुए उसने मुझे आवाज दी और अपने कमरे में बुलाया।

मैंने जाकर देखा दोनों एक साइड में खड़ी थीं और सामने टीवी पर पोर्न मूवी चल रही थी।

मैंने उससे कहा- हाँ जी..

तो डॉली ने कहा- ये मेरी बहुत ही प्यारी मुनिया है.. इसकी जवानी का उद्घाटन करवाना है आपसे.. और देखिए ये बात हम तीनों के अलावा किसी को पता नहीं चलना चाहिए और न ही इसे कोई दिक्कत आनी चाहिए।

मैंने कहा- ओह तो ये बात है.. अरे कोई बात नहीं मेरी जान, अभी कर देते हैं, आओ मेरे आगोश में आओ।

पायल घबराने और शर्माने लगी.. डॉली ने धक्का देकर पायल को मेरे आगोश में धकेल दिया। मैंने उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके मम्मों पर हाथ फेरा और शरीर के ऊपर हाथ फिराना शुरू कर दिया।

मैंने देखा कि पायल शर्मा रही थी।

मैंने कहा- स्वीटी पहले तो अपनी शर्म छोड़ो.. पहले कभी किया है ऐसा?

उसने ‘न’ में सर हिलाया तो मैंने कहा- तभी इतना शर्मा रही है लाडो.. कोई बात नहीं अभी सिखा देते हैं।

मैंने उसकी कमीज़ उतार दी और उसने मम्मों के ऊपर ब्रा पहनी थी, तो मैंने ब्रा को ऊपर किया और उसका एक मम्मा मुँह में लेकर चूसने लगा और डॉली को उसकी सलवार उतारने का इशारा किया।

डॉली ने इशारा पाकर पायल की सलवार को उतार दिया, उसके नीचे पायल ने पैंटी पहनी थी। मैंने एक हाथ को उसकी पैंटी में डाल दिया, मुझे मालूम था कि कुंवारी लड़की को कहाँ तक छेड़ना है। इसलिए मैंने अपनी उंगली को उसकी चूत में नहीं डाला.. बस उसकी चूत के ऊपर हाथ फिराता रहा और अपनी उंगलियाँ चलाता रहा।

अब पायल भी गर्म होने लगी थी, उसके मुँह से मजेदार सिसकारियाँ निकलने लगी थीं।

तभी आगे होकर डॉली ने पायल से पूछा- बेबी.. मज़ा आ रहा है न..?

तो पायल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, उधर टीवी पर चल रही पोर्न मूवी में एक लड़का लड़की की चूत में लंड डाल कर उसे चोद रहा था और एक लड़का पीछे से उस लड़की की गाण्ड मार रहा था और लड़की मजेदार सिसकारियाँ ले रही थी।

डॉली ने मूवी की आवाज़ थोड़ा ऊँची कर दी और अब हम सभी को चुदाई की मादक आवाजें साफ़ सुनाई देने लगीं।

मैंने पायल की ब्रा को उतार दिया और अब उसके दोनों मम्मे नंगे हो चुके थे और मैंने पायल के मम्मे चूसने जारी रखे थे।

अब पायल और ज्यादा सिसकारने लगी थी, मैं पायल के दोनों मम्मों को लगातार चूसे जा रहा था और पायल की पीठ पर भी हाथ फेर रहा था.. पायल की पीठ सहलाए जा रहा था।

डॉली ने फिर पूछा- अब कैसा लग रहा है पायल.. मज़ा आ रहा है न?

पायल ने कहा- हाँ आह.. हाँ दीदी आह..

पायल सिसकार रही थी।
 
इस बार डॉली ने भी अपने हाथ पायल की कमसिन बॉडी पर चलाने शुरू कर दिए।

पायल थोड़ा शर्मा रही थी.. तो डॉली बोली- अरे शर्मा मत.. देख अभी तेरी शर्म उतार देती हूँ।

ये कह कर डॉली ने एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार दिए, यहाँ तक कि अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी।

डॉली अब बिलकुल अल्फ नंगी थी। अब पायल के शरीर पर भी बस पैंटी थी.. जिसके अन्दर मेरी उंगलियाँ चल रही थीं। मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया।

डॉली मुझसे कहने लगी- देखो अब आप भी अपने कपड़े उतार दो।

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया। तभी डॉली मेरा लंड पकड़ कर पायल से बोली- देख पायल, ये है असली चीज़.. जिससे तू डर रही थी। ये चीज़ डरने वाली नहीं होती.. प्यार करने वाली होती है.. ले पकड़ कर देख इसे।

ये कहते हुए उसने मेरा लंड पायल के हाथों में दे दिया और बोली- इसे मुँह में लेकर देख मज़ा आएगा।

पायल ने मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और थोड़ा चूसने लगी, मैं भी पायल के सर को ऊपर से पकड़ कर उसका मुँह आगे-पीछे करने लगा।

डॉली ने ऊपर से मुझ किस करते हुए कहा- अब इसकी बुर का उद्घाटन कर दो मेरे राजा।

मैंने पायल को बेड पर चित्त लिटाया और उसकी चूत को अपने मुँह की जद में ले लिया और जीभ की नोक से उसकी चूत को कुरेदते हुए चाटने लगा।

पायल एकदम से गर्मा गई और कामुकता से सिसकारने लगी।

अब उसे काफी मज़ा आने लगा, डॉली भी आगे से पायल के मम्मे दबाने लगी।

मैं पायल की चूत के अन्दर जीभ डाल कर चूस रहा था और उसकी गांड तक जीभ फिरा रहा था। उसकी चूत और गांड के बीच के रास्ते को भी जीभ से चाट रहा था.. जिससे पायल के जिस्म में थरथराहट हो रही थी और सिसकारियाँ निकल रही थीं- आह उई.. आह सीई.. दीदी आह दीदी.. मज़ा आ रहा है.. सी सी..

वो मादक स्वर में ऐसे ही बोले जा रही थी।

डॉली ने पायल को हौसला देते हुए कहा- रुक बेबी.. अभी तो और मज़ा आएगा.. आज तेरी जवानी का उद्घाटन होने जा रहा है बेबी।

मैंने पायल को कहा- पायल मज़ा आ रहा है न?

पायल ने अपने दूध मसलते हुए ‘हाँ’ में सर हिलाया और बोली- आह हाँ जी.. जी.. आह..

अब मैंने उसकी चूत को चूसना छोड़ कर उसकी चूत की फांकों को अलग-अलग करके देखा.. तो उसकी चूत बिल्कुल बंद पड़ी थी।

मैंने उसकी चूत की दोनों फांकों को दोनों हाथों से अलग-अलग करके डॉली को भी दिखाया.. तो देखकर डॉली बोली- दिखाते क्या हो यार.. आज मेरी प्यारी पायल की सील खोल दो न..

मैंने डॉली की गांड पर भी एक चपत लगाई और कहा- हाँ साली.. वो तो अभी खोलूँगा ही.. मुझे लगता है पायल से ज्यादा तू ज्यादा उतावली हो रही है अपनी सील खुलवाने के लिए!

मैंने मज़ाक किया था।

डॉली बोली- पहले पायल की खोल दो फिर बताती हूँ कौन उतावला है.. आज तेरा दम मैं भी देखती हूँ। इस कच्ची कली की सील खोल कर दिखा तो मानूँ।

डॉली ने भी मज़ाक का जवाब मुझे मज़ाक में दिया।

आज मैं अपनी चुदाई के सफर में एक और नया इतहास रचने जा रहा था।

मैंने पायल से एक बार फिर पूछा, क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि पायल के साथ कोई जबरदस्ती हो।

मैंने पायल से पूछा- पायल बेबी.. सच सच बता.. अब तेरा दिल करता है इस मज़े के खेल में शामिल होने के लिए.. आज सील तुड़वाने के लिए तू सहमत है न बेबी?

तो डॉली ने मेरी तरफ एक बार थोड़ा गुस्से से देखा.. परन्तु पायल ने सिसकते हुए जवाब दिया- उन्ह आह.. हाँ जी.. अब तो जो मर्जी हो जाए.. मैं पूरी तैयार हूँ.. आह उन्ह.. ये जवानी बहुत तड़पाती है।

वो सिसकती हुई आवाज़ से बोली..

तो मैंने अब उसकी चूत की खुली फांकों जो एक तरबूज की तरह लाल दिख रही थीं.. में अपना लंड रखा और पायल की चूत के अन्दर अपना विशाल लंड पेल दिया।

मेरे लंड और पायल की चूत को पहले ही डॉली ने क्रीम लगाकर लुब्रिकेट कर दिया था, अब मेरा लंड थोड़ा सा आगे गया और आगे जाकर थोड़ा रुक गया.. जैसे आगे कोई फाटक बंद हो।

मैं समझ गया था कि ये पायल की झिल्ली (सील) है। मैंने अब एक और झटका लगाया और पायल की जीभ को अपने मुँह में ले लिया और उसके मम्मों को अपनी छाती से दबा दिया।

मैंने जैसे ही झटका लगाया तो पायल सिसकने लगी और जिस पायल को अभी मज़ा आ रहा था, वही पायल अब दर्द से तड़प उठी।

अगर मैंने उसे अपनी बांहों से पकड़ा न होता तो शायद उठ कर भाग जाती।

मैंने पायल के होंठों और जीभ को मुक्त नहीं किया.. क्योंकि मुझे मालूम था कि अगर इसे छोड़ दिया तो ये चीखने लगेगी।
 
मैंने नीचे से धक्के लगाने जारी रखे और उसकी मुलायम रेशमी चूत में मेरा विशाल लौड़ा अन्दर तक चला गया और मेरे लंड को गर्म सी धार महसूस हुई जो उसकी चूत से बह रही थी।

इधर ऊपर से पायल ने भी बहुत छटपटाना शुरू कर दिया, डॉली पास खड़ी ये सब देख रही थी, वो बोली- मेरी पायल बर्दाश्त कर थोड़ा.. बस अभी मज़ा आएगा.. बस बेबी।

मैंने समझ लिया कि ये गीलापन पायल के कुंवारापन फूटने की निशानी है, मैंने हल्के-हल्के झटके लगाने जारी रखे और अब मुझे लगा कि उसका दर्द थोड़ा कम हो गया.. तो मैंने उसके होंठों और जीभ को आज़ाद कर दिया।

जैसे ही मैंने पायल के होंठ छोड़े तो वो बोली- उफ़ आह.. छोड़ दो मुझे प्लीज़.. दीदी छुड़वा दो मुझे.. मैंने नहीं करवाना कुछ भी..

मैंने कहा- बेबी बस.. अब तो जो होना था हो गया.. अब बस मज़ा आएगा तुझे।

पायल दर्द से अभी भी थोड़ा कराह रही थी, तो मैंने उसका ध्यान और दर्द बंटाने के लिए कहा- पायल बेबी, तुम सुन्दर तो बहुत हो.. क्या लगाती हो.. अरे तुमने तो अपने आपको बहुत सम्भाल कर रखा हुआ है।

वो थोड़ा मुस्कराते हुए शर्मा गई पर बोली कुछ नहीं।

मैंने बातों को जारी रखते हुए फिर कहा- बेबी, तुम्हारे घर में कौन-कौन है?

मैं तो बस उसका ध्यान कुछ देर के लिए उसके दर्द से हटाना चाहता था। वो थोड़ा सिसकते हुए बोली- उन्ह आह.. सी उन्ह.. बाऊ जी.. माताजी.. छोटी बहन और भाई बस उन्ह..’

सिसकते हुए ही उसने ये वाक्य पूरा किया ही था कि मैंने एक हल्का सा झटका और लगा दिया। अब तक पायल का दर्द मजे में बदल चुका था।

मैंने पायल की चूत से एक बार पूरा लंड बाहर निकाल कर दुबारा अन्दर करके एक झटका लगाया, जिससे उसे असीमित आनन्द की अनभूति हुई।

वो मजेदार सिसकी लेकर बोली- उन्ह आह आई.. सी सी.. मज़ा आ गया उई माँ..

अब मुझे यकीन हो गया था कि अब पायल का दर्द खत्म हो चुका है और अब उसे बस मज़ा ही आएगा।

तभी उसके आगे जाकर डॉली ने उसका एक चुम्मा लिया और बोली- देखा मेरी लाडो.. अब आ रहा है न मज़ा.. अब तो इस से भी ज्यादा मज़ा आएगा।

यह कहकर उसने मुझे पायल को बेड पर पूरा लिटाने के लिए कहा।

मैंने पायल को बेड पर लिटा कर उसकी दोनों टाँगें अपने कधों पर रख लीं और उसकी चूत में जोर-जोर से शॉट लगाने लगा।

पायल लौड़े के झटकों से मिलने वाले मजे से मादक सिसकियाँ लेती रही।

डॉली आगे से उसके मम्मों को मसल और सहलाती रही, जिससे पायल को और मज़ा आने लगा था।

डॉली को भी बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था, मुझे महसूस हुआ कि अब पायल के कुंवारेपन का चश्मा कभी भी फूट सकता है।

मैंने उसके अन्दर अपने लंड के झटके थोड़ा तेज कर दिए ताकि वो अपनी जवानी का पहला कामरस छोड़ कर अपनी जवानी के पहले कामदेव के मज़े को प्राप्त कर ले।

मैंने जैसे ही झटका लगाया तो पायल के मुख से बस सिसकारियां ही निकल रही थीं।

पायल ने मुझे कस कर पकड़ लिया और उसका शरीर एकदम से अकड़ गया और उसके मुख से अस्पष्ट शब्द निकलने लगे।

मैंने अंदाजा लगा लिया कि अब पायल, अपनी जवानी का पहले मर्द का चरमसुख प्राप्त करने वाली है, मैंने भी उसे अपने आगोश में ले लिया और कस कर उसे पकड़ लिया।

अब उसकी जवानी का सैलाब बरस पड़ा और उसकी चूत से कामरस का चश्मा फूट पड़ा जो मेरे लंड को भिगोता हुआ नीचे की तरफ बहने लगा।

मैंने पायल को अपने आगोश में पूरी तरह कस रखा था, ताकि वो अपनी जवानी का सुख अच्छी तरह प्राप्त कर ले।

उसके मुँह से अस्पष्ट से शब्द निकल रहे थे.. वो जैसे डॉली का धन्यवाद कर रही थी, वो कह रही थी- उन्ह आह्ह…. सी.. सी उई दीदी आह.. ओह मज़ा… आ रहा है उई दीदी.. पकड़ लो आह… उई मैं गई… आह उई…

इस तरह पायल का पहला कामरस बह चुका था।

पायल को आगे बढ़ कर डॉली ने भी पकड़ लिया और बोली- मज़ा आ रहा है न मेरी रानी.. मैंने कहा था न कि तुझे बहुत मज़ा आएगा।

इस तरह कुछ देर और पायल और मैं इसी अवस्था में रहे और कुछ देर बाद मैंने पायल को छोड़ दिया। अब पायल मेरे से अलग हुई तो डॉली ने उसे एक तौलिया दिया.. जिससे पायल ने अपनी चूत को साफ़ किया। हमारी चुदाई देख कर डॉली की चुदास भड़क उठी थी, उसने तुरंत मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे बड़ा करने लगी।

कुछ देर बाद ही, संजय का फ़ोन आ गया, वो शहर में आ चुका था और बस घर का रास्ता पूछ रहा था।

मैंने उसे रास्ता समझाया और हमने सब कुछ छोड़ा और पहले उसे मिलने की तैयारी करने लगे।

अब हम सभी नंगे थे, तो मैंने पायल को कहा- पायल साली.. इधर आओ, आज से तू मेरी साली.. ठीक है?

पायल ने मुस्कुरा कर ‘हाँ’ में सर हिलाया, वो अभी भी शर्मा रही थी।

मैंने कहा- देख पायल शर्माना मत, अगर शर्माना है तो फिर हम तुझे अपने पास नहीं बुलाएंगे.. देख हम भी तो खुल कर बोल रहे हैं न.. तू भी खुल कर बोल और बता.. तुझे कितना मज़ा आया है और क्या अब तुझे ऐसा मज़ा दुबारा लेना है?

इस बार पायल थोड़ा शर्माते हुए बोली- हाँ जी मज़ा तो बहुत आया जी.. आपको ‘थैंक्स’ मज़े के लिए।

मैंने उससे फिर पूछा- ऐसा मज़ा दुबारा लेना है.. अब साली, शरमाना बंद कर.. और मुझे जीजू कह कर बुला।

इसी बीच डॉली भी बोली- पायल यार आज से तू मेरी छोटी बहन है और तू इन्हें जीजू कह और खुल कर बोल साली.. अब तो तूने खूब मज़ा भी ले लिया है।

इसी के साथ ही डॉली ने उसे आँख मार दी।

पायल फिर थोड़ा खुल कर बोली- हाँ जीजाजी.. कभी ले लेंगे फिर।

डॉली बोली- अरे फिर क्यों.. आज ही फिर से ले लेंगे.. अभी मैंने भी नहीं लिया, तेरे बहाने आज मैं भी ले लूंगी।

पायल शर्मा कर अपने कपड़े पहनने लगी तो मैंने कहा- अरे कपड़े पहनने की क्या जरूरत है?

मैंने उसे फिर से पकड़ लिया और किस करने लगा।

हम चाहते थे आज पायल भी अच्छी तरह खुल जाए, तभी पायल ने भी साथ देना शुरू कर दिया।

अब मैंने एक हाथ उसकी गांड के ऊपर फेरना शुरू कर दिया, आगे से डॉली ने अपनी उंगली उसकी चूत में डाल दी।

मेरा लंड भी फिर से खड़ा होने लगा था।
 
हालाँकि हमें मालूम था कि संजय यहाँ आने वाला है.. परन्तु मैं उसे संजय के आने तक नंगी ही रखना चाहता था ताकि उसकी शरम अच्छी तरह से उतार दूँ।

मैंने पायल की चूचियों को अपने मुँह में ले लिया और उसे एक बार फिर से सिसकने पर मजबूर कर दिया। अब पायल जोर जोर से सिसक रही थी और मजेदार सिसकियाँ उसके मुँह से ऐसे निकल रही थीं.. जैसे पक्की रांड हो ‘उमह.. आह.. सीसी.. उई उई.. आह’

तभी डॉली ने उससे पूछा- पायल, अब तेरी गांड और चूत एक साथ चुद जाए क्या? मज़ा आएगा बेबी.. मैं खुद दोनों छेदों का मज़ा लेती हूँ.. आज दोनों छेदों में लंड डलवा दूँ क्या.. बोल?

पायल तो बस आँख बंद करके मादक सिसकारियाँ ले रही थी, उसने ‘न’ में इशारा किया.. तो डॉली ने उसे उत्साहित किया- अरे बेबी.. एक बार ले कर देख.. अगर मज़ा नहीं आए.. तो अगली बार नहीं करवाना.. बोल.. दोनों छेदों में लंड लेगी.. ले ले.. अभी मौका है फिर जगह जगह चूत उठाए फिरेगी और कोई चोदने वाला भी नहीं मिलेगा.. ले ले.. और नहीं तो क्या!

तभी वासना से सिसकते हुए पायल बोली- उन्ह दीदी.. आह.. इस्स.. सीई.. दो लंड आएंगे कहाँ से दीदी आह..’

उसकी इस बात से हम दोनों को थोड़ा उम्मीद हो गई कि अब पायल खुलने लगी है और दो लंड लेने के लिए भी तैयार है।

मैंने कहा- साली साहिबा, इसका इंतजाम मैं कर देता हूँ, मेरा दोस्त आ रहा है.. कुछ देर में पहुँच जाएगा। उसके आते ही तेरा पिछवाड़ा भी खुलवा देता हूँ।

मैंने डॉली को इशारा करते हुए कहा- तू साली ऐसा कर.. एक पतली और एक मोटी मोमबत्ती ला ज़ल्दी से.. उसके आने से पहले इसकी थोड़ी गांड भी खोल देता हूँ।

डॉली भाग कर किचन में गई, इधर पायल घबरा कर बोली- उई जीजू.. आह रहने दो मुझे दर्द होगा।

मैंने उसे समझाया कि बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा.. बल्कि मज़ा आएगा।

इस तरह हम दोनों ने उसे गांड मराने के लिए भी मना लिया था।

डॉली ने आते ही मुझे मोमबत्ती दी।

मैंने पायल को लिटाया और घोड़ी बनने को कहा.. तो पायल घोड़ी बन गई।

अब मैंने डॉली से कहा- तू इसकी चूत में धीरे-धीरे उंगली करती रह!

डॉली ने पायल की चूत का एरिया थाम लिया। मैं उसके पीछे आ गया और धीरे-धीरे पहले पतली मोमबत्ती में चिकनाई लगा कर उसकी गांड के छेद के अन्दर उतारी और फिर वो निकाल कर मोटी मोमबत्ती उसके अन्दर उतार दी।

फिर कुछ देर मोमबत्ती आगे-पीछे करने के बाद उसकी खुली हुई गांड के छेद में मैंने अपना लंड उतार दिया।

इससे पहले एक मोमबत्ती डॉली ने उसकी चूत में डाल दी थी और अब पायल को मज़ा आ रहा था। तभी बाहर घर की डोर बेल बजी, हम समझ गए कि संजय आ गया है, डॉली ने ज़ल्दी से कपड़े पहने और वो भाग कर दरवाजे पर गई।

इधर मैंने अन्दर पायल की गांड चुदाई जारी रखी।

डॉली मेरे दोस्त को बाहर ड्राइंग रूम में बिठा कर मेरे पास आई.. तो मैंने कहा- उसे अन्दर ही ले आओ।

डॉली ने कहा- सोच लो..

मैंने कहा- सोच लिया.. उसे अन्दर आने दो।

डॉली ने उसे अन्दर ही भेज दिया, पीछे-पीछे खुद डॉली भी आ गई।

आते ही संजय ने हमें देखा और बोला- अरे वाह, यहाँ तो बड़ा मस्त मौसम है।

मैंने कहा- अब तुम चाय पानी छोड़ो, बातें बाद में करना। पहले जिस काम के लिए बुलाया है.. वो करो। अपने ज़ल्दी से कपड़े उतारो और इस कमसिन कली के आगे जहाँ मोमबत्ती डाली है.. वो निकाल कर अपना हथियार डाल दो।

पायल और डॉली थोड़ा शर्मा रही थीं, तो मैंने डॉली को कहा- साली कुतिया, तू भी निकाल दे अपने कपड़े!

मैंने इशारे से उसको पास बुलाया और उसे संजय की तरफ धकेल दिया, संजय ने उसे पकड़ा और डॉली को नंगी कर दिया।

डॉली को संजय ने बहुत स्पीड से नंगा किया और खुद भी ही नंगा हो गया, अगले ही पल वो अब डॉली के मम्मों को चूसने लगा।

मैंने कहा- यार पहले इस कमसिन को दो लंड का मज़ा तो दे दो।

उसने ये सुनते ही अपना लंड आगे रखा और कुछ ही झटकों में पायल के अन्दर उतार दिया। संजय ने पायल के मम्मे आगे से चूसने भी शुरू कर दिए थे।

हम दो मर्दों के बीच पायल चुद रही थी, पायल का सेंडविच बना हुआ था और पायल को पहले थोड़ा दर्द हुआ और फिर उसे बहुत मज़ा आने लगा।

पायल अब चिल्लाटे मार-मार कर मज़ा ले रही थी, वो तो बहुत ऊँची-ऊँची आवाज में अपनी चुदाई की सीत्कारें भर रही थी और पूरे कमरे में उसकी ही आवाज़ गूंज रही थी।

हो सकता है पायल की आवाज कमरे के बाहर भी जा रही हो।

पायल की जवानी का रस लगातार बह रहा था और वो जोर-जोर से आगे-पीछे से चुद रही थी।

हम दोनों के लंड उसकी गांड और चूत को चोद रहे थे, हम दोनों मर्द ताल से ताल मिला कर पायल को चोद रहे थे। कभी हम दोनों के लंड एक साथ उसकी जवानी के अन्दर होते और कभी जब मेरा लंड अन्दर होता तो संजय का बाहर और जब संजय का लंड बाहर होता तो मेरा अन्दर।

इस तरह एक साथ पायल की चूत और गांड चुद रही थी, डॉली ये सब देख कर अपनी चूत में तेज-तेज उंगली कर रही थी।

मैंने डॉली के होंठों को अपने होंठों में ले लिया और अपनी एक उंगली डॉली की चूत में उतार दी।

उधर संजय ने पायल के होंठों को अपने होंठों में ले रखा था और पायल के मस्त आम, संजय की छातियों के नीचे थे।

अब हम सभी कामदेव के रथ पे सवार थे, डॉली की चूचियों को भी मैं दबा रहा था और डॉली की चूत में कभी उंगली कर देता था, कभी मैं उसकी चूचियों को सहला देता था।

अब मैंने पायल की गांड में जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिए, मेरे धक्के से पायल की चूत आगे को हो जाती और सीधा जाकर संजय के लंड पर बजती और आगे से संजय धक्का लगा देता तो पायल की गांड मेरे लंड पर बजती।

पायल फ़ुटबाल जैसी चुदाई का मज़ा ले रही थी।

अब पायल काफी बार झड़ चुकी थी और हम दोनों भी झड़ने के करीब थे।

डॉली ने मुझसे कह दिया- संजय को पायल के अन्दर गिरने देना और तुम मेरे मुँह में आना साले..

मैंने कहा- ओके साली.. तेरा मुँह भी चोद देता हूँ।

मैंने कुछ धक्के पायल की गांड में लगाए और तभी पायल ने जोर से एक दहाड़ लगाई ‘ऊह्ह आईई… मज़ा… आआ..’

अगले ही पल उसकी चूत से ऐसी धार निकली जैसे वो पेशाब कर रही हो।

तभी उसे आगे से संजय ने उसे अपनी बांहों में कस लिया, उसकी चूत की धार संजय के लंड पर गिर रही थी, संजय भी अब सिसकार रहा था।

हम सभी की सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं।

तभी मैंने पायल की गांड को छोड़ा और डॉली की चूत में लंड डाल दिया, मैं अब जोर-जोर से डॉली को चोद रहा था।

डॉली की चूत ज्यादा उंगली करने की वजह से अपना रस छोड़ने की कगार पर थी, कुछ ही देर में डॉली भी सिसकारने लगी थी।

इधर हम संजय और पायल दोनों बहुत ज्यादा आहें भर रहे थे। कमरे में ‘अंह आह.. सी सी.. उई आह उई.. आह आह उह..’ की मादक सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं।

अब मैंने देखा कि संजय ने अपनी धार उसकी चूत में छोड़ दी और संजय ने अपने झटके कम कर दिए और दोनों एक-दूसरे से लिपट कर बेड पर गिर गए।

इधर मैंने भी डॉली की चूत से पानी निकाल दिया, डॉली की चूत तो बहुत ही ज्यादा झड़ रही थी.. क्योंकि डॉली की चूत पहले से ही ज्यादा झड़ती है।

डॉली की चूत की धार नीचे गिर रही थी, उसकी चूत भी ऐसे झड़ रही थी जैसे वो पेशाब कर रही हो।

मैंने उसकी चूत झड़ते ही अपना लंड चूत से निकाला और डॉली के मुँह में दे दिया।

डॉली ने कुछ देर ही लंड चूसा होगा कि मेरे लंड की धार फूट पड़ी और जैसे ही लंड की बरसात उसके खुले मुख पर हुई.. तो उसने साथ ही लंड की वर्षा को निगलना शुरू कर दिया।

इसी के साथ ही अपनी आखों और मम्मों पर भी कुछ वीर्य वर्षा करवा ली, बाद में उसने अपने हाथ से अपने जिस्म पर मल लिया।

बाद में जब हम सभी शांत हुए तो पायल ने उससे पूछ ही लिया- दीदी, आपने वो जीजू का रस अपने मुँह में क्यों लिया?

तो डॉली बोली- प्यारी पायल, मर्द का रस पीने से और मम्मों पर मालिश करने से औरत की कई बीमारियाँ ख़त्म होती हैं.. इसके इलावा मम्मे भी बड़े होते हैं और भी कई फायदे हैं। इसके और क्या-क्या फायदे हैं.. वो मैं बाद में बताऊंगी।’

फिर चाय-पानी पीने के बाद मैंने और संजय ने मिल कर डॉली को भी पायल की तरह चोदा और पायल को एक बार अकेला भी संजय ने चोदा।

अब पायल भी हमारे बीच खुल चुकी थी। हम सभी ने शाम तक कई बार चुदाई की और सभी बेबाक बातें करते रहे।

हमने कैसे-कैसे चुदाई की होगी.. उसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हो।

शाम को मेरा और संजय का वापिस जाने का समय आ गया था, हमने दोनों को किस की और संजय के साथ ही पायल और डॉली से फिर मिलने का वादा करके मैं भी अपने शहर को लौट आया।

दोस्तो, यह तो थी मेरी और डॉली और पायल की चुदाई की दास्तान।
 
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