नेहा= मुझे नहीं पता... नेहा शरमा के अपनी आखे बंद कर ली।
नानाजी:=(नानाजी उसका चेहरा चीन से पकड़ के ऊपर उठाते हुए) बताओ सिर्फ एक बार...
नेहा:= अपनी आखे खोलके बड़ी ही सेक्सी अदाओ से देखते हुए धीरे से....मेरी चूत में...अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
नानाजी:=उफ्फ्फ्फ्फ्फ स्सस्सह्ह्ह् कहते हुए उसे जकड़ लिया और पलट के उसके ऊपर आ गए। क्या मस्त लगा तुम्हारे मुह से सुनके।
और फिर नानाजी उसे बेतहासा चूमने लगे।नेहा भी उनको ऐसे लिपट गयी जैसे नागिन चन्दन के झाड़ से लिपटती है। नानाजी ने उसके शर्ट के बटन खोल दिए। और उसके बड़े बड़े आम देख के नानाजी के होश उड़ गए। वो उसे हाथो में लेके बोले "" आह्ह्ह उम्म्म ऐसी चुचिया तो पहली बार देख रहा हु उम्म्म मजा आ गया""
नेहा:=अह्ह्ह्ह धीरे ना दर्द होता है....आपके लिए ही है कही भागी नहीं जा रही।
नानाजी:= हाय मेरी जान ऐसा कड़क माल देख के किसको सब्र होता है।
नाना जी नेहा की चुचियो पे किसी भूखे जानवर की तरह टूट पड़े। वो चुचियो को जोर जोर से भींचने लगे। नेहा अह्ह्ह्ह स्स्स्स्स्स्सस्सस्स करके उस मीठे दर्द का मजा लेने लगी। नानाजी ने उसकी चुचिया बारी से चूसना सुरु किया उसके निप्पल्स को जैसे नानाजी ने अपने होठो में पकड़ा नेहा आआह्ह्ह्ह्ह्ह् ऊऊऊईईए माआआआ करके नानाजी का सर पकड़ के जोर से अपनी छातियो पे दबाने लगी। नेहा अब पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी। उत्तेजना में वो किसी बिन पानी के मछली जैसे तड़प रही थी। और नानाजी के होठ उसके लिए आग में घी का काम कर रहे थे।
नेहा:= उफ्फ्फ आह्ह्ह्ह दादाजी अह्ह्ह उम्म्म बहोत अच्छा लग रहा अह्ह्ह्ह और चूसिये ना अह्ह्ह
नानाजी ने अब अपना मोर्चा उसकी चूत की और ले गए।उन्होंने उसका स्कर्ट उठाया और टाँगो को फैलाके उसकी गुलाबी चूत को देखने लगे।चाँद की रोशनी में उसकी भीगी गुलाबी चूत किसी मोती की तरह चमक रही थी। नानाजी उसकी उस मदमस्त कुवारी चूत को देखे जा रहे थे।
नेहा:= उम्म्म्म्म क्या देख रहे हो दादाजी?
नानाजी:= उफ़्फ़ग क्या क़यामत है तुम्हारी चूत अह्ह्ह्ह आज तो जन्नत जैसा मजा आ गया।
नेहा:= सिर्फ देखकर ही....उसे छुओगे तो क्या होगा आपका?
नानाजी:= आज तो मैं इसे छुवुंगा भी और अपने लंड से चोदुंगा भी। देख कैसे हिचकोले खा रहा है अपनी पोती की चूत देखकर कमीना कही का।
ऐसा बोलके नानाजी ने अपनी अंडरवियर निकाल दी और अपना तना हुआ लंड लेके नेहा के पास गए नेहा उठ के बैठ गयी और उसे पकड़ते हुए कहा....
नेहा:=उम्म्म ऐसे कमीना मत कहिये ना कमीनी तो मेरी चूत है जो जब से इसे देखा है तब से मुँह में पानी लिए इसके पीछे पड़ी है।
नेहा ने उनका लंड हाथ में पकड़ा हुआ था वो इतना बड़ा था की उसके हाथ में भी नहीं समां रहा था। वो उसकी स्किन को पीछे करके अपनी नाक उसके पास ले गयी उसकी खुशबू से नेहा पागल हो उठी । नानाजी भी उसके कोमल हाथो का स्पर्श अपने लंड पे पाके मदहोश हो गए।
इधर मैं भी होश खो चुकी थी। नानाजी का लंड देखके मेरे होश उड़ गए। मेरी चूत अब पूरी गीली हो चुकी थी। मन तो किया की जाऊ और मैं भी उनमे शामिल हो जाऊ। पर हिम्मत नहीं जुटा पायी।
नानाजी := हा कमीनी तो है ही तेरी चूत कल थोडा सा पानी चखा के भाग गयी। आज तो इसे निचोड़ निचोड़ के चखूंगा।..... नानाजी नेहा की चूत को सहलाते हुए कहा।
नेहा:=अह्ह्ह्ह सीसीसीसी उम्म्म हा दादाजी आज इसका सारा रस निचोड़ लीजिये अह्ह्ह्ह आज नहीं भागेगी ये।
नानाजी अब उठे और नेहा चूत के पास आके बैठ गए। उसको चौड़ा करके अपना लंड उसकी चूत के पास ले गए और उंगिलयों से उसके लिप्स को अलग किया और लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के अंदर के गुलाबी हिस्से पे रगड़ने लगे उसकी चूत का गिलापन और अपने लंड का गीलापन मिक्स करने लगे।
नेहा:=अह्ह्ह उम्म्म्म स्स्सस्ससीसीसी अहह मर गयी उफ्फ्फ आउच अह्हब्बहोत अच्छा लग रहा है उम्म्म्म
नानाजी थोड़ी देर ऐसे ही करते रहे। मैं सांस रोके ये सब देख रही थी मुझे लगा की नानाजी अब अपना लंड नेहा की चूत में डाल देंगे। लेकिन वो अपना लंड वहा से हटा लिया और अपनी जुबान से चाटने लगे। नानाजी नेहा की चूत को उंग्लियोसे फैला के चाट रहे थे चप चप चप ऐसी आवाज निकल रही थी। वो कभी ऊपर से निचे और फिर निचे से ऊपर अपनी जुबान चला रहे थे। वो नेहा के क्लिट को होठो में पकड़ क़र चूसते तो कभी काटते।
नेहा:=इस्स्स्स ऊऊह्हह्हह म्मम्म माँ मर गयी अह्ह्ह्ह्ह हां उम् ऐसेही ह धीरे ना अह्ह्ह्ह और और हा अह्ह्ह्हबहोत अच्छा अजह्ह्ह् लग राहाआआआ है उम्म्म काटिये मत ना उम्म्म्म डालिये ना अन्दरह्ह्ह्ह्ह्
नानाजी बड़े प्यार से अपनी पोती की चूत का रसपान कर रहे थे। अपनी जुबान नेहा की चूत में अंदर तक डाल दी और चोदने लगे अह्ह्ह्हूम्मम्ममआऔऊम्मम सपसप
नेहा ऐसी कलाबाजी के आगे टिक नहीं पायी और नानाजी का सर अपने चूत में जोर से दबा के उनके मुह में ही झड़ने लगी।
नेहा:=हाआआआ उम्म्म और तेज अह्ह्ह्ह मई तो गयी अह्ह्ह्ह्ह्ह
नानाजी उठे और नेहा के पास गए और उसे किस्स करने लगे। जब नेहा नार्मल हुई तो उसने आखे खोली।
नेहा:=ओह्ह्ह दादाजी आज तो मजा आ गया। उफ्फ्फ्फ्फ़ कमाल के हो आप सच में।
नानाजी:= ह्म्म्म अभी तो शुरूवात है। आगे आगे देखो और भी मजा आएगा।
ऐसा बोल के नानाजी ने नेहा का सर अपने लंड की और धकेल दिया। नेहा समझ गयी उसे क्या करना है। उसने नानजी को लेटाया और उनका लंड अपने मुह में भर लिया और उसे आराम से चूसने और जुबान से चाटने लगी। लंड इतना लंबा था की जब नेहा उसे मुह में लेती आधा ही अंदर जा पाता। नेहा अब सिर्फ उसका सुपाड़ा ही मुह में लेके चूस रही थी और बाकी हिस्से को अपने मुट्ठी में पकड़ कर ऊपर निचे कर रही थी।
नानाजी:= उम्म्म अह्ह्ह्ह नेहा ऐसेही मेरी जान उम्म्म क्या मस्त चूस रही हो तुम अह्ह्ह्ह।
नानाजी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और नेहा की चूत को सहलाने लगे। फिर उन्होंने नेहा को अपने मुह पे बिठा लिया और फिरसे उसकी चूत चाटने लगे अह्ह्ह्ह्ह्ह कितना भी चाटो नेहा तुम्हारी चूत को मन ही नहीं भरता अह्ह्ह्ह और तुम्हारी गांड अह्ह्ह्ह इसको तो मैं जिंदगी भर सहलाता रहु तो भी मन नहीं भरेगा।
नेहा:=उम्म्म्म्म हा दादाजी आपका लंड भी बहोत अच्छा है। इतना लंबा और गरम अह्ह्ह्ह्ह चूस के तो मेरा रोम रोम चहक उठा है। दादी बड़ी खुशकिस्मत थी जो रोज इस लंड से चुदती थी अह्ह्ह्ह्ह
दोनों अब वासना की आंधी में घिर गए थे।नेहा नानाजी का लंड और नानाजी नेहा की चूत पागलो की तरह चूसे जा रहे थे। नेहा फिर एक बार पानी छोड़ चुकी थी। नानाजी भी बस अब झड़ने वाले थे। उन्होंने नेहा को लेटाया और उसके मुह में ऊपर लंड डाल उसका मुह चोदने लगे।
और 4, 5 झटको में मे ही अपना सारा पानी नेहा के मुह पे छोड़ने लगे। और जब सारा पानी निकल गया तो निढाल हो के बाजू में गिर पड़े। नेहा के मुह पे इतना वीर्य छोड़ा था नानाजी ने उसकें मुह फिसलता हुआ उसके चूचियो पे आ रहा रहा था।
मैं इधर उनके चूत चटाई और लंड चुसाई खेल में अपनी चूत रगड़ रगड़ के दो बार झड़ चुकी थी। मैंने आखे बंद की और सोचने लगी जैसे नानाजी ने मेरे चहरे पे उनका पानी गिराया हो।
मेरी तंद्रि टूटी नानाजी के फ़ोन की कर्कश रिंगटोन ने। केशव चाचा का फ़ोन था। नानाजी के खेत के बाजू के खेत में जंगली सूअर और दूसरे जानवर घुस गए थे। नानाजी ने फट से कपडे पहने और नेहा को कहा की "मुझे जाना पड़ेगा क्यू की केशव के पास बन्दुक नहीं है तुम्हारी चूत को बोलना की उसकी चुदाई उधर से आने के बाद होगी""
नानाजी चले गए और नेहा उनके वीर्य में नहाईं नंगी वही पे लेटी रही।
मैं रूम से निकल के नेहा के पास गयी। वो बेसुध लेटी हुई थी जैसे शराब के नशे में हो। उसकी आखे बंद थी। उसका बदन नानाजी के वीर्य से लथपथ था। चाँद की रोशनी में चमक रहा था। मैंने उसे आवाज दी। उसने आखे खोली और मेरी तरफ देख के मुस्कुराने लगी।
मैं:~ नेहा क्या बात है मेरी जान आज तो मुझे लगा की नानाजी चोद ही देंगे तुझे।
नेहा:= तू सब देख रही थी? नेहा ने उठते हुए रजाई से अपने आप को ढकते हुए पूछा।
मैं:= वो सब छोड़ चल अंदर साफ़ कर खुद को बाकी बाते बाद मे करते है।
हम लोग रूम में आये नेहा ने खुद को साफ़ किया और आके बेड पे लेट गयी।
मैं:=नेहा की बच्ची बड़े मजे किये तूने आज। मेरा मन भी कर रहा था यार की मैं भी आ जाऊ पर वो नानाजी का लंड देखके हिम्मत ही नहीं हुई।
नेहा:= अरे पागल कुछ नहीं होता लंड जितना बड़ा उतना ही मजा आता है।
मैं:= बात तो ऐसे कर रही है जैसे बहोत लंड लिए बैठी है।
नेहा:= लंड नहीं लिया तो क्या हुआ पर पता तो है ना। और रुक थोड़ी देर दादाजी को आने दे अभी तो सबसे पहले लंड ही डालने को बोलती हूँ चूत में।
मैं:= तू कर इंतजार अपने यार का मैं तो सो रही हूँ... बहौत नींद आ रही है। पर मुझे उठा देना।
सुबह जब मेरी आँख खुली तो देखा 8 बज चुके थे। नेहा मेरे पास नहीं थी। मैं नीचे गयी तो वो किचन में थी। मैंने उसके पास जा के पूछा तो उसने बताया की नानाजी अब तक नहीं लौटे है। मैंने नास्ता किया और नहाके वापस आयीं तो देखा की नानाजी अब तक नहीं लौटे थे। उनका फ़ोन भी नहीं लग रहा था।
मामाजी उनको देखने के लिए खेतो में गए हुए थे। थोड़ी देर बाद हमने देखा की केशव चाचा नानाजी को सहारा देते हुए ला रहे थे। उनके कमर पर पट्टा लगा हुआ था। नानाजी को हमने सहारा देते हुए उनके कमरे में ले जाके सुला दिया। केशव चाचा ने बताया की नानाजी का पैर गड्ढे में जाने की वजह से उनकी कमर में मौच आ गयी है डॉक्टर ने कहा है की आराम करने से दो दिन में ठीक हो जायेंगे।
मुझे बहोत बुरा लग रहा था। मैं नानाजी के पास जाके बैठ गयी। नानाजी ने मेरा चेहरा देखा वो बोले...
नानाजी:= अरे कुछ नहीं है ये दो दिन में ठीक हो जायेगा और अब दर्द भी नहीं है बस थोडा हिलने में दिक्कत होती है।
मैं:= फिर भी नानाजी मुझे आपको ऐसा देखने की आदत नहीं है।
नानाजी:= फिर कैसा देखने की आदत है? बोलो कैसे देखना चाहती हो मुझे?
नानाजी बेड पे लेटे हुए थे पर अब भी सेक्स का भूत उनके सर से नहीं उतरा था। मैंने भी अब तय कर लिया था की बेशरम बन के ही मजे लुंगी।
मैं:= जैसा आप सोच रहे हो वैसा ही देखना चाहती हूँ।
नानाजी:= मैं तो तुमसे पूछ रहा हु। तुम बताओ। तुम जैसा मुझे देखना चाहोगी वैसे दिखा दूंगा। मैं तो बहोत कुछ सोचता हु।
मैं:= अच्छा? क्या सोचते हो आप?
नानाजी:= अब मैं क्या क्या बताऊ की मैं क्या सोचता हु।
मैं:= सब बता दीजिये।
नानाजी:= सब बताऊंगा तो तुम भाग जाओगी।
मैं:=नहीं भागूंगी अब....
नानाजी:= ह्म्म्म बहोत बहादुर हो गयी हो....
मैं:= हा वो कल रात को नेहा को और आप को........मेरे मुह से अचानक निकल गया।
नानाजी:= क्या क्या?.... ओह तो तुम सब देख रही थी।
मैं:= (शरमाते हुए) हा वो अअ..आ.. हा सब देख लिया।
नानाजी ने मेरे हाथो पे हाथ रखा और उसे सहलाने लगे।
नानाजी:= फिर मजा आया देख के?
मैं:= मुझे नहीं पता....(मैं शरमा के दूसरी ओर देखने लगी)
नानाजी:= माधवी सच कहूँ तो ... नेहा के बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था। जब से तुम आयीं हो बस तुम्हारी ये बड़ी बड़ी चुचिया मेरी नजरो से हटती ही नहीं। ना जाने कितनी बार इनके बारे में सोच के मैंने अपना पानी निकाला है।
नानाजी बहोत ही खुलके बात कर रहे थे। मैं भी अब सब शर्मो हया छोड़ के उनसे नजरे मिला के बात करने लगी।
मैं:= इतनी पसंद है आपको मेरी चुचिया?
नानाजी:= हा माधवी.... बेहद पसंद है।
मैं:= तो सब दिखा दूंगी आपको आप एक बार ठीक हो जाइए।
नानाजी:= देखने या छूने के लिए कमर की जरुरत नहीं है ना....।
मैंने उनका हाथ उठा के अपनी चुचियो पे रख दिया और आखे बंद कर ली। नानाजी मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरी चुचिया सहलाने लगे।धीरे धीरे एक एक करके दबाने लगे। मैं उनके हाथो के सख्त स्पर्श से सिहर उठी मेरे रोम रोम में मस्ती सी छाने लगी।
नानाजी:= आओह्ह् माधवी आहा कितनी अच्छी है ये.... इतनी बड़ी है और कितनी सख्त है दबाने में जो मजा आ रहा है उससे पुरे बदन में एक ताकत सी महसूस हो रही है। और देखो जरा मेरा घोडा कैसे उड़ने लगा है।
मैंने उनके लंड को पकड़ा उफ्फ्फ्फ्फ़ किसी बड़े के रॉड जैसा प्रतीत हो रहा था। वो इतना गरम था की उसकी गर्माहट मुझे कपड़ो में से महसूस हो रही थी। मैं उसे मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी पर वो मेरी मुट्ठी में भी नहीं समां रहा था।
मैं:= उम्म्म नानाजी कितना बड़ा है आपका.... ऐसा तो कभी मैंने किसी मूवी में भी नहीं देखा।
नानाजी:= कौन सी मूवी?
मैं उन्हें कुछ बता पाती उतने में किसी के कदमो की आहट हुई। हम लोग संभल के बैठ गए। नेहा नानाजी के लिए खाना लायी थी। हमने नानाजी को सहारा देके बिठाया और उनहोंने खाना खाया। फिर हम थोड़ी देर बैठ के बाते करते रहे फिर नानाजी सो गए। हम भी अपने कमरे में जाके आराम करने लगे। नानाजी के पास मामाजी और मामी थे।
रात के खाने तक मामाजी और मामी नानाजी के पास मंडराते रहे। लेकिन रात को सोने के वक़्त नेहा ने उनसे कह दिया की मैं और माधवी दादा जी के पास रुकेंगे। मामा ने मना किया तो नानाजी ने उनको कह दिया की उन्हें 2 दिन खेतो का काम संभलना है और वो आराम करे। मामा जी उनकी बात को नहीं टाल सके।
हमने अपना बिस्तर निचे जरूर लगाया था। पर हम नानाजी के दोनों तरफ से जाके पैर लंबे करके पलंग से पीठ टीकाके बैठे हुए ऐसे ही हँसी मजाक की बाते कर रहे थे। नानाजी अचानक से दोपहर वाली बात का जिक्र करते हुए बोले.....
नानाजी:= अरे माधवी तुम दोपहर में किस मूवी की बात कर रही थी?
नेहा:= क्या मूवी दादाजी ? क्या बात कर रही थी?
नानाजी := अरे ये बता रही थी मेरे जैसा लंड उसने किसी मूवी में भी नहीं देखा।
नेहा:= क्या? ऐसी बाते करती है तू अपने नानाजी से? तुझे शर्म नहीं आती?
नेहा मुझे झुठमुठ का डाँटते हुए बोली।
मैं:= तू चुप कर... मैं तो सिर्फ बाते कराती हु तू तो ना जाने क्या क्या कर बैठी है।
नानाजी:= अरे झगड़ा क्यू कर रही हो ... माधवी तू बता क्या बोल रही थी?
नेहा:= हम तो ऐसे ही मजाक कर रहे थे दादाजी।
मैं:= वो नानाजी वैसी वाली मूवी होती है ना उसकी बात कर रही थी।
हम तीनो अब ऐसे पेश आ रहे थे एक दूसरे के साथ जैसे बहोत अच्छे दोस्त हो। जिनमे कोई पर्दा नहीं कोई लिमिटेशन नहीं। जैसे मैं और नेहा थे।
नेहा := कैसी मूवी माधवी? जरा खुलके बता ना।( नेहा मेरी टांग खीचने के हिसाब से बोली)
नानाजी:= हा माधवी अछे से बता।
मैं:= वो चुदाई वाली मूवी.... मैं झट से बोल दिया।
वो दोनों हस पड़े। मैं भी फिर हँसने लगी।
नानाजी:= क्या होता है उसमे मैंने तो कभी नहीं देखी चुदाई वाली मूवी।
मैं:= हा बनिए मत हमें पता है की आप कितने बड़े चोदु है।
ऐसी बाते करना बड़ा अजीब लग रहा था अपने नाना के साथ पर एक अजीब सी लहर दौड़ जाती शरीर में जो सीधा चूत तक जाके खत्म होती।
नानाजी:= चोदु? क्यू मैंने ऐसा क्या किया?
मैं:= हमने देखा था आपको वो मालती चाची को चोदते हुए। कितनी गन्दी थी वो और उनकी चूत....छी..।
नानाजी:= अगर मुझे पता होता की तुम दोनों अपनी चूत फैलाये मेरे लिए बैठी हो तो मैं क्यू चोदता उसको।
नेहा:= हमें भी कहा पता था की आप हमें चोदने के लिए रेडी हो... इसका तो पता नहीं पर मैं तो बहोत पहले ही आपका लंड ले लेती।
नेहा ने ऐसा बोल के नानाजी का लंड पकड़ लिया और उसे दबाने लगी।
नानाजी:= सच कहते है लोग की पोती नातिन अपने दादी और नानी का दूसरा रूप होती है।
मैं:= नानाजी बताईये ना हमें नानी के बारे में.... वैसे तो हम जानते ही है पर वो चुदाई में कैसी थी?
नानाजी:= क्या बताऊ बेटा वो कैसी थी। वो बहोत ही कामुक औरत थी। उसे जबतक दिन में एक बार और रात को दो बार ना चोदु उसे अच्छा ही नहीं लगता था। उसकी वजह से ही तो मैं भी इतना चोदु बन गया हु। उसे खुश रखने के लिए मुझे कसरत करके खुद अभी तक तंदरुस्त रखना पड़ा। वो भी मुझे अच्छा सेहतमंद खाना और उसे ना जड़ी बूटियों की बहोत जानकारी थी। वो मुझे उन जड़ी बूटियों का रस पिला पिला के मेरी काम शक्ति को बहोत बड़ा दिया था।
वो बहोत ही सुन्दर थी ये तो तुम भी जानते हो पर वो उतनी ही मन से अछि थी। जब तक वो अछि थी मुझसे खूब चुदवाती थी। लेकिन जब उसे उस लाइलाज बिमारी ने जकड़ा तो उसमे ताकत नहीं रही लेकिन उस वक़्त भी उसने मेरे लिए मालती का इंतजाम किया। मालती का पति उसे सुख नहीं दे पाता था। उसने मेरे हर सुख दुःख में मेरा साथ दिया पर वो मुझे अकेला छोड़ के चली गयी ये बाते बताते हुए उनकी और हमारी भी आंखे भर आयीं। वो चुप हो गए नानी की यादो में खो गए।
नेहा ने माहोल को थोडा हल्का करने के लिए हँसते हुए कहा...
नेहा:= वाओ दादाजी दादी ने आपके लिए मालती चाची को सेट किया था।
मैं:=ह्म्म्म मतलब मालती चाची को आप तबसे चोदते आ रहे हो... और उनका बेटा मेरा मामा है?
ये सुनके हम सब हस पड़े।
नेहा:= नानाजी और बताईये ना दादी के बारे में.. आपकी सुहागरात और (आँख मारते हुए) मालती चाची के साथ पहली बार चुदाई वाली कहानी।
नानाजी:= क्या बताऊ बेटा.... जवानी में वो किसी अप्सरा से कम ना थी। उसकी चुचिया बिलकुल माधवी जैसी थी गोल और बड़ी मैं घंटो उनसे खेलता रहता।
और गांड बिलकुल तुम्हारी(नेहा) की तरह थी। मन तो करता की दिन रात उसकी गांड को सहलाते रहूँ। उसकी दरारों में लंड डाल के सोता था मैं।
हमारी सुहागरात के वक़्त वो बड़ी सहमी सहमी सी थी। लेकिन जब मैंने उसके बदन को नंगा करके एक बार चोदा तो वो एकदम खुल गयी। उस रात मैंने उसे चार बार चोदा। उफ्फ्फ्फ़ क्या क़यामत की रात थी वो। उसके होठों में जैसे जादू था मेरा लंड चुसके दो मिनट में खड़ा कर देती थी। उसे नेहा की तरह मेरे लंड का पानी बहोत पसंद था।
और मालती को जब मैंने पहली बार चोदा था वो दो दिन तक ठीक से चल नहीं पायी थी। उसकी जवानी भी लाजवाब थी। अब तो उसकी चूत का भोसड़ा बन गया है।
भोसड़ा शब्द सुनके मेरी हँसी निकल गयी।
नेहा:= चुप कर ना... और किस किस को इस लंड से पेला है आपने?
नानाजी :=वैसे तो बहोत औरतो को चोदा है पर तुम्हारी दादी के अलावा मुझे सबसे ज्यादा मजा आया था वो थी अपने गाव की टीचर.... उसने मुझे और मालती को खेतो में देख लिया था। वो भी मेरा लंड देख के उससे चुदने को बेकरार हो गयी थी। उम्म्म्म्म क्या चूदी थी वो अह्ह्ह्ह्ह ऐसे मटक मटक के कूद कूद कर रंडियो की तरह उसने मुझसे चुदवाया था। 6 महीने थी वो यहाँ लेकिन हर रात को मुझसे चुदवाती थी। कभी अगर मैं उसके घर ना जा सका तो वो रात को खेतो में चली आती थी। बहोत ही चुद्दकड़ थी वो।
नेहा:=क्यू दादाजी आप को कल रात मेरे साथ मजा नहीं आया क्या?
नानाजी:=अरे बहोत मजा आया ...तुम दोनों के साथ मुझे बहोत मजा आया। इसलिए तो कह रहा हूँ की तुम दोनों मुझे मेरी बीवी की याद दिला देती हो।
मै:=लेकिन मेरे साथ तो आपने कुछ किया ही नहीं।
नानाजी:= उस रात तुम भाग नहीं गयी होती तो तुम्हारे साथ भी कर लेता। कोई बात नहीं आज कर लो जो करना है।
मैं:=मुझे तो आपका लंड चूसना है सब से पहले...मैं बेशर्मो की तरह उनका लंड दबाते हुए बोली।
नानाजी:=तो चुस लो मैंने मना किया है क्या?
नानाजी की बाते सुनके वैसे ही मै बहोत उत्तेजित थी। मैंने उनका पैजामा धीरे से निकाल दिया और उनका नंगा लंड पहली बार अपने हाथो में पकड़ा उफ़्फ़्फ़ग़ाफ़ झटका सा लगा उम्म्म्म। मैंने उसकी स्किन को पीछे किया और देखा उसका सुपाड़ा प्रीकम से भीगा हुआ था। मैंने उसे स्मेल किया आह्ह्ह उम् क्या मस्त खुशबू थी। मैंने उनका प्रीकम अपने अंगूठे से सुपाड़े पे फैलाया और गप से सुपाड़ा मुह में भर लिया। नानाजी आह्ह्ह्ह्ह् स्स्स्स्स् की आवाजे करने लगे। मैं इत्मिनान से धीरे धीरे लंड को चूसने लगी।
नेहा भी नानाजी को किस्स्स कर रही थी और नानाजी उसकी चुचिया मसल रहे थे। नेहा ने अपने कपडे उतार दिए और नानाजी के मुह में अपना निप्पल घुसेड़ दिया। नानाजी सीधे लेटे हुए थे उनकी मूवमेंट नहीं कर पा रहे थे। फिर भी नेहा की चुचिया मुह में भर के चूस रहे थे। और मैं इधर उनका लंड ऐसे चूस रही थी जैसे फिर कभी मुझे नहीं मिलेगा। मुझे नानाजी के लंड का सेंसिटिव पॉइंट मिल गया जिसे जुबान से चाटते ही नानाजी अह्ह्ह्ह्ह्ह कर उठे।
नानाजी:= ओह्ह्ह्ह्ह्ह माधवी उम्म्म्म कहा छु लिया तुमने उफ्फ्फ्फ़ मजा आ गया।
मैंने देखा नेहा नंगी नानाजी के पास लेटी है। उसने मुझसे ""कहा मुझे भी तो बता जरा कहा छु लिया तूने। वो उठके मेरे पास आयीं मैंने उसे दिखया तो वो भी उसे जुबान से चाटने लगी .... नानाजी"""अह्ह्ह्ह स्ससीसीसी मत करो अह्ह्ह्ह"""' करने लगे।
नेहा:= उम्म्म अह्ह्ह अब पता चला दादाजी आपको जब आप मेरे क्लिट को काट रहे थे तब कैसा लगा होगा मुझे.
नानाजी:=हम्म्मह्ह् हा मेरी जान सीसीसीसी
मैं और नेहा अब दोनों बारी बारी उनका लंड चूस रहे थे। मैं अपनी चूत को सहलाने लगी तो नानाजी बोले"""क्या हुआ माधवी चूत में खुजली शूरु हो गयी क्या आओ यहाँ मेरे पास लेकिन उसके पहले ये अपनी मस्त चुचिया तो दिखाओ मुझे।
मैंने शरमाते धीरे धीरे सारे कपडे उतार दिए। उफ्फ्फ्फ़ पहली बार किसी मर्द के सामने नंगी खड़ी थी मैं। अह्ह्ह्ह्ह ।
नानाजी := उफ्फ्फ माधवी क्या जिस्म पाया है तुमने अह्ह्ह आओ यहाँ आओ मेंरे पास।
मैं उनके पास जा के लेट गयी। वो मेरी चुचियो को पकड़ कर मसलने लगे मैं मस्त हो के आखे बंद करके उस अहसास को अपने जेहन में कैद करने लगी। उम्म्म्म अह्ह्ह्ह धीरे ना नानाजी उफ़्फ़्फ़्फ़ग आउच अहह ऐसी आवाजे मेरे मुह से अपने आप निकलने लगी फिर नानाजी ने मेरी चुचियो को अपने तपते हुए होठो में पकड़ लिया अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म और वो उनको बारी बारी इस अदा से चूसे जा रहे थे की मेरी चूत तक उसकी लहर दौड़ रही थी।
मैं उनके मुह में अपनी चुचिया दबाये जा रही थी और उनका हाथ पकड़ के अपनी चूत पे दबा रही थी। लेकिन पोजीशन ठीक नहीं होने के कारण उनका हाथ मेरी चूत तक नहीं पहूँच रहा था। मेरी छटपटाहट देख नेहा लंड चूसना छोड़ बोली..."हाय रे देखो तो जरा मेरी बहन किस तरह तड़प रही है हाय... दादाजी कुछ कीजिये नहीं तो बेचारी ऐसेही तड़पती रहेगी।
मैं अपनी चूत नानजी के हाथ पे रगड़ती हुई बोली..."" अह्ह्ह्ह्ह चुप कर सीसीसीसी उम्म्म खुद को देख जरा अपनी हाथो से अपनी चूत रगड़ रही है।