नेहा:~ अरे नहीं पागल है क्या? लेकिन यार एक बात बताऊ तूने जो बताया ना वो सुनके मुझे ऐसा लग रहा है की तूने मुझसे ज्यादा मजा किया।
मैं:~ हा तो क्या हुआ आज तू करले।आज तो मुझमे बिलकुल भी ताकत नहीं की मैं चुदाई सह सकु।
नेहा:~ अरे यार मेरी भी तो हालात ऐसे ही है। आज तो मुझसे भी कुछ नहीं होगा।
हमने थोड़ी देर ऐसे ही बाते की और सो गयी। शाम को उठ के फ्रेश हो निचे गयी तो देखा नानाजी भी खेतो में नहीं गए थे। वो भी बहोत थके थके लग रहे थे। उस रात को कुछ नहीं हुआ हम सब आराम से सो गए.
दूसरा दिन हमेशा की तरह गुजरा। शाम को हम खेतो में गए। नानाजी हमारा वेट कर रहे थे। हम तीनो घूमते हुए ठंडी ठंडी हवा का मजा लेने लगे।
नेहा:~ तो दादाजी आखिर आम को पका ही डाला आपने।
नानाजी:~ हा क्या करता बेटी मौसम ही कुछ ऐसा है। अब तो तरबूज खाने है रात को.... नानाजी ने नेहा के गांड पे हाथ फिराते हुए कहा। "कहीँ मेरे दामाद ने तरबूजो का मजा तो नहीं चखा ना रातको?
नेहा:~ नहीं दादाजी आप फिकर मत कीजिये आपके लिए तरबूजो को संभाल के रखा है। आप के दामाद भी पीछे पड़े थे पर मैंने मना कर दिया।
दादाजी:~ ह्म्म्म्म चलो आज तुम्हारे तरबुजो का मजा लेंगे।
मैं:~ तो अभी ले लोजिये ना नानाजी रात तक का क्यू इंतज़ार करना?
मैं:~अरे रात को क्या और अब क्या....क्या फरक पड़ता है? रात को जागने का काम नहीं। देख जरा रात को जाग जाग के मेरी आखो मे डार्क सर्किल हो गए है।
नेहा:~चुप कर कमिनी तुझे बड़ी जल्दी हो रही है मेरी गांड फड़वाने की।
मैं:~ही ही ही मुझे कहा जल्दी है? मैं तो नानाजी के खातिर बोल रही थी।
नेहा:~ हा क्या? इतना ही है तो तू देदे अपनी गाँड तेरे प्यारे नानाजी को।
मैं:~ नही रे बाबा मुझे नहीं देनी।
नेहा:~क्यू अब क्या हुआ?
नानाजी:~चुप बैठो तुम दोनों .... रात को ही करेंगे आराम से।
मैं:~ हा नानाजी वो तो हम बस ऐसे ही मजाक् कर रहे थे।
रात के खाने के बाद हम सब टीवी देख रहे थे। मामाजी मुझपे और नेहा पे किसी जासूस की तरह नजर गड़ाये हुए थे। वो हमारी हर बात नोट कर रहे थे। मैंने नेहा के कान में कहा की मामाजी को शायद शक हो गया है। वो घबरा गयी। उसने मुझे तुरंत ऊपर ले गयी। मैंने उसे मामाजी वाली बात बता दी।
नेहा:~ अरे यार ये तो बड़ी मुसीबत हो गयी...अगर उन्होंने हमें पकड़ लिया तो मुसीबत हो जायेगी।
मैं:~ कुछ नहीं होगा।अगर वो आ भी गए तो मैं सभाल लुंगी उनको।
नेहा:~ हाय रे मेरी जान बड़ी बहादुर हो गयी है तू तो।पर मेरे पापा की भी नजर तुझपे है ये मैंने कभी एक्सपेक्ट नहीं किया था।
मैं:~ मैं भी चौक गयी थी उस दिन।
उतने में रितेश का फ़ोन आया। नेहा ने फिर से उसे कटा दिया।
नेहा:~जब सच्ची वाली चुदाई होने वाली है तो ये फ़ोन वाली कौन करना चाहेगा?
मैं:~ नेहा बिचारे को क्यू तड़पा रही है ले ले उसका भी।
नेहा:~ हा यार मैं भी यही सोच रही हु। पर अभी तो कॉलेज सुरु होने में काफी दिन बाकी है।
मैं:~तो क्या हुआ बुला ले उसको खेतो में।
नेहा:~देखते है फिलहाल तो दादाजी का लेने के लिए तड़प रही हु।
मै:~हा यार मुझे भी अब रहा नहीं जा रहा।
नेहा:~ तो आ जा दादाजी नहीं आते तब तक मैं तेरी खुजली मिटा देती हु।
मैं:~चुप कर....अब क्या तू मेरे साथ भी करेगी क्या?
नेहा:~हा तो क्या हुआ....बहोत सी लडकिया करती है हम भी करेंगे।
उतने में दरवाजे पे टकटक हुई। नेहा ने दरवाजा खोला। वो नानाजी ही थे। नानाजी अंदर आये और दरवाजा बंद कर लिया।
नानाजी:~ह्म्म्म्म क्या चल रहा था तुम दोनों का?
नेहा:~ कुछ नहीं मैं माधवी से कह रही थी की आज मैं उसकी चुदाई करुँगी।
नानाजी:~अच्छा? तो करो मेरे सामने मैं भी तो देखु तू बिना लंड के कैसे चुदाई करती है?
नेहा मेरे पास आयी और मुझे बाहों में कस लिया और मैं कुछ समझ पाती उससे पहले उसने मुझे किस्स करना सुरु कर दिया। मैं उसे छुटने की कोशिश कर रही थी पर उसने मेरे होठो को इस तरह से अपने होठो में कैद किया हुआ था की मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी।
शूरु में मुझे अजीब लग रहा था पर थोड़ी देर बाद मैं भी उसका साथ देने लगी।
नानाजी:~उम्म्म्म्म क्या बात है...लगता है तुम दोनों को अब मेरी जरुरत नहीं।
नेहा ने मुझे किस्स करना बंद करते हुए कहा""अरे दादाजी आप बस अब देखते जाईये आपको भी मजा आने लगेगा।
नेहा ने उसके और मेरे सारे कपडे निकाल दिए। उसने मुझे बेड पे लिटा दिया और मेरी टांगो को फैलाके मेरी चूत पे उंगली रगड़ने लगी।
मैं:~उम्म्म्म्म नेहा पागल क्या कर रही है उफ़्फ़्फ़ग
नेहा:~ लंड का स्वाद तो देख लिया अब चूत का स्वाद देखना चाहती हु। दादाजी आप क्या देख रहे है? आपके प्यारे आम आपके सामने है टूट पड़िये।
नेहा ने मेरी चूत चाटना सुरु कर दिया और नानाजी मेरे बोबे दबाने लगे एक निप्पल मुह में लेके चूसने लगे। नेहा उधर मेरी चूत बहोत ही प्यार से चाट रही थी। दो लोग मेरे जिस्म के साथ एक साथ खेल रहे थे। मैं पागल सी हुई जा रही थी।
मैं:~औऊऊउछ्ह्ह्ह् उम्म्म्म्म आह्ह्ह्ह नेहा मेरी बहन अह्ह्ह्ह हा ऐसेही उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ नानाजी अह्ह्हब धीरे से दबाये ना अह्ह्ह काटिये मत उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ उईईईईई माँ मर गयी अह्ह्ह्ह्ह्ह।
नानाजी:~ उम्म्म्म आज क्या हुआ ? कल तो बहोत उड़ उड़ के चुदा रही थी.... नेहा कैसा है टेस्ट ? माधवी के चूत का पानी उम्म्म्म सच में बहोत टेस्टी है.
नेहा:~हा दादाजी उम्म्म्म्म सच में बहोत अच्छा है।
मैं सब कुछ ना कुछ टेस्ट कर रहे है अह्ह्ह्ह्ह मुझे भी तो दो कुछ उम्म्म्म्म।
नानाजी:~ ह्म्म्म्म तो तुम मेरा लंड चूस लो मेरी जान।
नानाजी ने अपना लंड मेरे मुह में ठूस दिया। मैं उनका लंड जुबान से ऊपर से निचे तक चाटने लगी होंठो में पकड़ के चूसने लगी। नानाजी हलके से से मेरे निप्पल चुटकियो में मसल रहे थे जिससे एक अजीब सी कामुक लहर मेरे बदन में कोहराम मचाने लगी थी।
नेहा भी अब मस्ती में आ चुकी थी। उसने नानाजी से कहा की वो उसकी चूत चाटे। हम तीनो एक circle बनाके लेट गए थे। नानाजी नेहा की चूत नेहा मेरी चूत और मैं नानाजी का लंड चूसने लगे थे। काफी देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को मजा देने में लगे हुए थे।
नानाजी:~उम्म्म्म्म नेहा अह्ह्ह्ह्ह तुम्हे खेत में किया वादा याद है ना? आज तो सबसे पहले मैं तुम्हारी गांड ही चोदुंगा।
नेहा:~उम्म्म्म्म हा दादाजी उफ्फ्फ्फ़ मैं भी आज गांड चुदवाने के मूड में हु।
मैं:~ उम्म्म्म नहीं नानाजी अह्ह्ह्ह मेरी चूत की आग पहले मिटाइये फिर नेहा की खुजली उफ्फ्फ्फ़।
नानाजी:~ हा ठीक है मेरी जान...पहले तुम्हारी चूत फिर नेहा की गांड।
नेहा:~उम्म्म्म्म तब तक मैं क्या करू?
मैं:~तू आजा मुझे भी तेरी चूत का स्वाद चखा दे । मैं भी तू देखु मेरी बहन की चूत का स्वाद कैसा है जिसने मेरे पापा और नाना को दीवाना बना दिया है।
नेहा उठ के मेरे बगल मे आ गयी नानाजी उधर अपना लंड मेरे चूत पे सेट कर चुके थे।नानाजी धीरे धीरे करके अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे।
नेहा:~ह्म्म्म्म दादाजी आपने तो एक रात में ही माधवी की चूत खोल दी। कितनी आसानी से अंदर जा रहा है।
मै:~उम्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह धीरे नानाजी अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म... कहा यार आज भी दर्द हो रहा है।
नानाजी:~अरे एक बार में कहा खुलती है चूत इसे कम से कम 15 दिन लगातार चोदेंगे तभी खुलेगी।
मैं :~अह्ह्ह्ह नानाजी उम्म्म अब बर्दास्त नहीं हो रहा है प्लीज चोदिये मुझे निकाल दीजिये मेरा पानी।
नानाजी मेरे पैरो को पकड़ के जोर जोर से अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे। मेरा बस् होने ही वाला था। मैं अह्ह्ह्ह अह्ह्ह करके झड़ गयी।
नेहा ने जब देखा की मैं पस्त हो गयी हु तो उसने मेरी जगह लेली । नानाजी का भी शायद होने ही वाला था। वो नेहा को घोड़ी बना के सट सट उसकी चूत मारे जा रहे थे।
नेहा:~ वाओ अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म दादाजी अह्ह्ह आप तो काका से भी अच्छा चोदते हो अह्ह्ह्ह चोदिये और जोर से अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म्म।
नानाजी का स्पीड बहोत बढ़ गया था। नेहा भी उस लंड के घर्षण को सह नहीं पायी और झड़ गयी। नानाजी का स्टैमिना सच में लाजवाब था। उन्होंने दो जवान लड़कियो को पानी पिला दिया था। हम भी कुछ कम नहीं थे। हम दोनों नानाजी के लंड पे टूट पड़े। उसे ऐसी ऐसी जगहों पे चाटा और ऐसे चूसा की नानाजी का पानी भी निकाल ही दिया।
नानाजी हम दोनों के चहरे पे पिचकारी उड़ा के धड़ाम से बेड पे सो गए।
नेहा:~उम्म्म्म माधवी क्या मस्त लग रही है तू। तू नानाजी की फेवरेट है इसलिए उन्होंने तेरे मुह पे ज्यादा पानी छोड़ा।
मैं:~ उम्म्म लेकिन तू तो पार्टनर इन क्राइम है। आजा बराबर बाट लेते है।
हम एक दूसरे के चहरे को पागलो की तरह चाटने लगे। नानाजी हमें बड़े प्यार से ये सब करते देख रहे थे।
थोड़ी देर हम ऐसेही लेटे रहे। फिर से हमारी छेड़ छाड़ सुरु हो गयी। एकदूसरे के अंगों को चूमते हुए हम फिर से उत्तेजित हो चुके थे।
नेहा:~ दादाजी उम्म्म्म्म आईये और अपनी इच्छा पूरी कीजिये।मारिये मेरी गांड।
मैं:~ उम्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह नानाजी मुझे भी खुजली होने लगी है न यहाँ। मैंने अपनी चूत मसलते हुए कहा।
नानाजी:~फिकर मत कर माधवी उसका इलाज है मेरे पास।
नानाजीने हम दोनों को घुटनो पे आने को कहा। उन्होंने पहले मेरी चूत में लंड डाल के मुझे चोदने लगे। उसी वक़्त वो नेहा की चूत और गांड दोनों उंगली से सहलाने लगे। अपने सलइवा से नेहा के गांड का छेद वेट भी कर रहे थे। फिर वो अपना लंड मेरी चूत से निकाल के नेहा की गांड में डालने लगे।
नेहा:~अह्ह्ह्ह्ह्ह उईईईईई माँ मर गयी अह्ह्ह्ह दादाजी बहोत दर्द हो रहा है अह्ह्ह्ह।
नानाजी:~ बस हो ही गया नेहा अह्ह्ह्ह्ह बहोत टाइट है ना तो थोडा दर्द होगा अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म पूरा गया अह्ह्ह्ह्ह कैसा लग रहा है ?
नेहा:~ओह्ह्ह्ह्ह दादाजी उम्म्म्म बहोत दर्द हो रहा है अह्ह्ह्ह्ह्ह
नानाजी:~ऐसेही रहने दो अह्ह्ह उम्म्म बड़ी मांसल है अह्ह्ह और होल बहोत ही टाइट उम्म्म्म्म मजा आ गया ओफ्फ्फ्फ़।
मैं:~ अह्ह्ह्ह नानाजी कैसा फिट जा के बैठा है आपका उम्म्म्म।
नेहा:~हा उम्म्म जब तेरे गांड में जाएगा तब मैं भी देखूंगी उम्म्म्म दादाजी अह्ह्ह्ह अब अच्छा लग रहा है उम्म्म्म्म
नानाजी अब धीरे धीरे नेहा की गांड में अपना लंड अंदर बाहर करने लगे। और मेरी चूत में उंगली डाल के हिलाने लगे। मैं और नेहा पागलो की तरह अह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ सीसीसीसीसी करने लगे थे। हम दोनों को मजा आने लगा था। नानाजी लंड निकाल के मेरी चूत में डाल देते और खप खप मेरी चूत चोदते तो अगले पल नेहा की गांड में डालके नेहा की गांड मारते। पुरे रूम में थप थप खप खप चप छप एयर अह्ह्ह्ह्ह सीसीसीसीसी उम्म्म्म्म और तेज अह्ह्ह आवाजे आने लगी थी।
नानाजी मेरी चूत में लंड डालके चोद रहे थे।
मैं:~अह्ह्ह्हम्मम्म और चोदिये अह्ह्ह्ह ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् सीसीसीसीसी आह मेरा होने वाला है अह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म चोदिये नानाजी और तेज जोर से अह्ह्ह्ह्ह।
नानाजी खच खच किसी मशीन की तरह से लंड मेरी चूत में पेल रहे थे। मैं अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ करके जोरदार तरीके से झड़ गयी। मैं बिस्तर पे निढाल हो के गिर पड़ी। नानाजी ने नेहा को अब पलटा के उसकी गांड चोद रहे थे। नेहा अपनी चूत खुद ही रगड़े जा रही थी। मैं बस उनके इस खेल को देखे जा रही थी।
नानाजी:~अह्ह्ह्ह्ह नेहा उम्म्म्म क्या गांड है तुम्हारी उफ्फ्फ्फ्फ्फ स्सस्सस्ससीसीसीसीसीसीसीसी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
नेहा:~ हां हां ओर हूऊऊऊऊऊऊ बहोत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्ह्ह्ह माधवी अह्ह्ह्ह्ह एक बार जरूर गांड मरवा के देख अह्ह्ह्ह्ह बहोत मजा आता है अह्ह्ह्ह्ह दादाजी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ग उम्म्म्म्म मैं भी झड़ने वाली हु अह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म डाल दीजिये अपना पानी मेरी गांड में अह्ह्ह्ह्ह्ह
नानाजी:~ अह्ह्ह उम्म्म हा नेहा बस मेरा भी होने वाला है।
वो दोनों भी कुछ ही देर में झड़ गए। नानाजी ने अपना सारा पानी नेहा की गांड में छोड़ दिया। नानाजी भी बेड पे लेटके जोर जोर से साँसे लेने लगे। नेहा भी इस दमदार गांड चुदाई के बाद मस्त हो चुकी थी।
5 min बाद हम नार्मल हुए। कोई कुछ बोल पाता दरवाजे पे टकटक हुई। हम सब घबरा गए। कोन हो सकता है ये सवाल हमारे ज़हन में दौड़ने लगा। हमने फटा फट कपडे पहने और नानाजी को बाथरूम में छुपा दिया और नेहा दरवाजा खोलने चली गयी। जैसे उसने दरवाजा खोला उसकी और साथ साथ मेरी भी आखे खुली की खुली रह गयी...................
"" माँ""" नेहा लगभग चिल्लाते हुए बोली। मैं भी मामी को देख के हैरान थी। मुझे तो लगा की मामाजी होंगे। और उनको कैसे हैंडल करना है ये मैं सोच के बैठी थी पर ये तो सब अजीब ही हो रहा था।
नेहा:~आप ??? क्या हुआ???
मामी बहोत गुस्से में लग रही थी। वो किसी थानेदारनी की तरह हमें घूरे जा रही थी। वो अंदर आयीं और इधर उधर कुछ तलाशने लगी।
मामी:~क्या चल रहा है यहाँ? किस की आवाजे आ रही थी?
नेहा:~ किसी की भी नहीं। हम ही बाते कर रहे थे।लेकिन हुआ क्या ये तो बताईये?
मामी:= ज्यादा होशियार बनने की कोशिश मत कर...मैं क्या तुम्हे बेवकूफ लगती हु?
मैं:~ मामी ऐसी कोई बात नहीं है आप शांत हो जाइए पहले और बोलिये क्या हुआ?
मामी:= ज्यादा चु चपड़ मत करो तुम दोनों वरना एक खीच के दूंगी। अच्छा है मैं पढ़ी लिखी हु अनपढ़ होती तो पता नहीं क्या करते?
उन्होंने नींद की गोली का खाली रैपर हमारे मुह पे फेकते हुए कहा"" क्या है ये? किसको दी तुमने ये गोली?
नेहा:=ये आपको कहा मिली?
मामी:=तुम्हारे बैग में जो तुम लोग निचे भूल के आयीं हो। तुम को क्या लगता है लोग अंधे है इस घर में? तुम लोग कुछ भी करते रहोगे और किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा?
हम दोनों के पैरो के निचे से जमींन ही खिसक गयी। नेहा तो पसीने पसीने हो गयी। मैं भी थर थर काँप रही थी। मामी का प्यार भरा रूप ही मैंने देखा था ये रूप पहली बार देख रही थी।
मामी:= ये निंद की गोली का राज तुम लोग मुझे सच सच बताओगी। तुम लोगो ने महाबलेश्वर में क्या गुल खिलाये है ये तो मैं तुम लोगो की चाल देखते ही समझ् गयी थी। लड़की कुवारी है या नहीं ये तो मैं बस उसकी चाल देख के बता सकती हु। इतना तो exp है ही मुझे।
मामी ने बम फोड़ा। मेरे तो हलक से आवाज ही नहीं निकल रही थी। नेहा तो रोने भी लगी थी। फिर मैं बहोत हिम्मत करके बोली"" मामी आपको सच में गलत फहमी हो गयी है।""
मामी:~ देख माधवी मेरा पारा और मत चढ़ाओ...चुप चाप बताओ। और निकालो उसको बाहर जो अभी था तुम्हारे साथ यहाँ।
मैं:~य्य्यहा कककोई नहीं मामी....
मामी:~ज्यादा नाटक मत करो....और तू (नेहा) रोना बंद कर....इन का कोई असर नहीं होने वाला मुझ पे।
नानाजी सब सुन रहे थे। उनको लगा की उन्हें ही जाके संभालना होगा। वो बाहर आये।
नानाजी:~क्या हुआ सुमन? क्यू चिल्ला रही हो इन पे?
मामी नानाजी को देख के चौक गयी।
मामी:=बाबूजी आप? आप क्या कर रहे हो यहाँ?
नानाजी:~नींद नहीं आ रही थी तो बस टहलने छत पे आया था और बाथरूम इस्तेमाल करने इनके कमरे में आया था।इसमे इतना क्या हो गया?
मामी:~माफ़ कीजिये लेकिन मैं 10 min से दरवाजे से कान लगा के सुन रही हु क्या चल रहा था अंदर....तो वो आप थे जो इनके साथ रंग रैलियां मना रहे थे।मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी।
अब नानाजी भी कुछ नहीं बोल पा रहे थे। हम सब अपराधी बन के उनके साथ खड़े थे। हम लोगो को जैसे सांप सूंघ गया था। फिर भी नानाजी बड़े थे वो हिम्मत करके बोले""चलो ठीक है हम मानते है की हम मस्ती कर रहे थे। और हमसे गलती हो गयी दुबारा नहीं करेंगे इस बात को यही खत्म करो और जाओ सो जाओ।""
मामी:=ऐसे कैसे खत्म करू.........आपकी बाते सुन रही हु पिछले 10 min से चाहती तो तभी अंदर आ सकती थी। लेकिन मैं चाहती थी की आप का खेल खत्म हो जाय और मैं ये भी जानती थी की अंदर आप ही हो क्यू की मैं पहले आप के कमरे में गयी थी देखने क्यू की मुझे आप पे ही शक था। आपकी रंगीन मिजाज के बारे में अनजान तो हु नहीं। मालती सब बताती है मुझे। और आप पिछले कुछ दिनों से उसके पास नहीं गए तो मुझे यकीं हो गया की आप और इनके बीच कुछ गड़बड़ है।कम से कम इनको तो छोड़ देते।
नानाजी:=तो चाहती क्या हो तुम?
मामी:=वही जो आप इन दोनों के साथ कर रहे थे.....।
आ....???????ये क्या था। मुझे मेरे कानो पे यक़ीन नहीं हो रहा था। मामी भी नानाजी से चुदवाना चाहती थी???
मामी :=ये लडकिया सच में बहोत तेज निकली...जो काम मैं कई सालो से करना चाहती थी वो इन्होंने कुछ दिनों में ही कर लिया। बाबूजी मैंने आपके बहोत किस्से सुने है मालती से माँ जी से। और तब से मैं आप के साथ....जब से माधवी यहाँ आयीं तब सुरु सुरु में मुझे कुछ नहीं लगा। लेकिन बाद में मुझे बहोत गड़बड़ लगी। तब से मैं आप लोगो पे नजर रखे थी। और आज मैंने जब आप लोगो को ये सब करते सुना तो मेरी भी इच्छा होने लगी। प्लीज बाबूजी आज मेरी भी तमन्ना पूरी कर दीजिये।
हम सब मामी की बात सुन के दंग थे। मामी जो बहोत शांत स्वाभाव की थी उनमे इतनी कामुकता भरी पड़ी थी ये मैं सोच भी नहीं सकती थी। जाहिर है नेहा उनपे ही गयी थी शायद इसीलिए वो इतनी कामुक है।
नानाजी:=तुमने तो हमारी जान ही निकाल दी थी। देखो इनके चहरे जरा अभी भी डरी हुई है। और तुम मुझसे क्यू चाहती हो? तुम्हारा पति तुम्हे सुख नहीं देता क्या?
मामी:=नहीं वो तो मुझे बहोत सुख देते है। पर आपकी दमदार चुदाई के किस्से सुन सुन के आपसे एक बार जिंदगी में जरूर चुदवाना चाहती थी।
नानाजी:=अच्छा??ठीक है अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो ठीक है।
मामी:= हमारी तरफ देख के मुस्कुरा रही थी। ""ह्म्म्म बेटियां कितनी जल्दी जवान हो जाती है। पता ही नहीं चलता । मैं तुमसे नाराज नहीं हु। बस थोड़ी सी खिंचाई कर रही थी। मुझे पता है जवानी में चुदने की लालसा कुछ भी करवाती है। अब तुम दोनों जाओ नीरज के कमरे में और आज मुझे और बाबूजी को अकेला छोड़ दो।
नानाजी:=अरे सुमन रहने दो इन्हे भी यही। लेकिन अगर तुम्हारा पति उठ गया तो?
मामी:=ह्म्म्म उसे तो मैंने आज नींद की गोलिया खिला दी है इसमे बची हुई।
नानाजी:=ओह्ह्हज अच्छा है।
बहोत ही अजीब लग रहा था। ये कैसेकैसे मोड़ ले रही थी हमारी जिंदगी? पहले पापा मामाजी अब मामी.....और ना जाने क्या क्या होने वाला था। पर अब जो होने वाला था उसके बारे में सोच सोच के मैं स्तब्ध थी.........................!!!!
मुझे बहोत ही अजीब सी फीलिंग आ रही थी। नेहा भी कुछ बोल नहीं पा रही थी। क्यू की हम दोनों ये जानते थे एक बार अगर मामी नानाजी से चुद गयी तो वो उनका पीछा नहीं छोड़ेंगी। इससे हमें बहोत दिक्कत हो जाती। पर हम कुछ भी तो नहीं कर सकते थे शिवाय ये देखने की मामि किस बेशर्मी से हमारे सामने ही नानाजी का लंड लेने वाली थी।मामी:=क्या सोच रही हो तुम दोनों??चुप क्यू हो??नेहा क्या हुआ?
मैं:=कुछ नहीं मामी बहोत अजीब लग रहा है।
मामी हमारे पास आयीं।
मामी:=देखो मैं भी एक औरत हु मैं तुम दोनों की भावना समझ सकती हु। ये शारीरिक सुख की लालसा हमें वो चीजे भी करने पे मजबूर कर देती है जो की समाज के नजरो में गलत होता है। अगर तुम मुझे भी सिर्फ एक औरत की नजर से देखोगी या अपनी दोस्त की तरह देखोगी जो की तुम्हारे नानाजी से सुख पाना चाहती है तो तुम्हे कुछ अजीब नहीं लगेगा। मुझे बताओ अगर तुम्हारी कोई फ्रेंड होती और तुमसे कहती की उसे तुम्हारे नानाजी से चुदवाना है तो क्या तुम उसकी इच्छा पूरी नहीं करते??