• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

निदा के कारनामे complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
फिर मैं खुद को रोक नहीं पाई और मैंने झुक कर तनवीर का लण्ड अपने मुँह में ले लिया और खूब मजे मजे से चूसने लगी, मैं मजे में इतना मदहोश हो गई की मुझे तनवीर के उठने का पता ही नहीं चला, फिर जब उसने । अपने हाथ से मेरे बालों को सहलाया तो मैंने घबराकर उसका लण्ड अपने मुंह से निकाल दिया और उठकर बैठ गई।

मैं एकदम से घबरा कर बोली- “वाउ वूओव तन... तनवीर वो तुम सो रहे थे ववाउ..” घबराने की वजह से मेरे मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी।

तनवीर मुझे घबराता हुवा देखकर मुस्काराया और उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने ऊपर घसीट लिया और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए और मुझे किस करने लगा, अब मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं थी इसलिए मैं खुद भी उसके किस का साथ देने लगी।

मुझे जोश में देखकर तनवीर की हिम्मत बढ़ गई और वो कहने लगा- “निदा तुम बहुत खूबसूरत हो मैं तुम्हारा बदन देखना चाहता हूँ..”

मैं तो खुद यही चाहती थी और मैं बोली- “देख लो अब ये बदन तुम्हारा ही है...”

तनवीर ने मुझे लिटाकर एक एक करके मेरे सारे कपड़े उतारकर मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया और गौर से मेरा बदन देखने लगा।

मैं मुश्कुराई और बोली- “कैसा लगा मेरा बदन...”

तनवीर भी मुश्कुराकर बोला- “बहुत खूबसूरत है."

मैं कहने लगी- “क्या इस खूबसूरत बदन को प्यार नहीं करोगे...”

अंधे को क्या चाहिए दो आँखें, मेरी खुली आफर का तनवीर ने फौरन फायदा उठाया और वो मेरे बदन पर टूट पड़ा। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं मजे से सिसकारियां लेने लगी। तनवीर मेरे पूरे बदन को चाट रहा था जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था, थोड़ी देर बाद ही वो मेरी चूत को चाटने लगा और मैं लज़्ज़त से तड़पने । लगी, कुछ ही देर में उसने मेरी चूत में अपने हाथ की उंगली डाल दी और अंदर बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर में मेरी चूत से पानी निकल पड़ा।

उसने अपनी जुबान से मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया। मैं अब जोश से एकदम बेकाबू हो रही थी। वो मेरी चूत को चाटने और चूसने लगा। मेरी चूत को चाटने के साथ साथ वो एक हाथ से मेरे मम्मों को भी दबा रहा था। मेरे मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं- ऊओह... आअहह... सस्स्स्स्स्स्स स्स... तरह की।

कुछ देर तक मेरी चूत को चूसने के बाद वो हट गया वो बोला- “डार्लिंग अब तुम मेरा लण्ड चूसोगी। फिर वो मेरे सीने पर बैठ गया और अपना लण्ड मेरे मुँह के पास कर दिया। मैं एकदम जोश में थी और मैंने उसके लण्ड पर अपनी जुबान को फिराना शुरू कर दिया। वो आहें भरने लगा। मैं उसका लण्ड मुँह में लेकर चूसना चाटने लगी थी। उसका लण्ड बहुत मोटा था और मेरे मुँह में थोड़ा सा ही गया।

 
वो बोला- “निदा चूसो इसे...”

मैं उसका लण्ड चूसने लगी। थोड़ी देर तक चूसने के बाद उसका लण्ड एकदम टाइट हो गया। उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से निकाल लिया और मेरे पैरों के बीच आ गया। मैं समझ की गई अब मेरे दिल की मुराद पूरी होने वाली है। लेकिन में उसके लण्ड के साइज को देखकर घबरा भी रही थी।

उसने मेरे चूतड़ों के नीचे दो तकिये रख दिए। मेरी चूत एकदम ऊपर उठ गई। उसने मेरी टाँगों को पकड़ कर फैला दिया। अब उसने अपने लण्ड की टोपी को मेरी चूत के बीच में रखा और धीरे धीरे अंदर दबाने लगा। मुझे दर्द होने लगा और मेरे मुँह से चीख निकल गई आह्ह्ह...

वो बोला- “थोड़ा बर्दाश्त करो, फिर बहुत मजा आएगा...” वो अपना लण्ड मेरी चूत में धीरे धीरे घुसाने लगा। उसने अपना लण्ड धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। वो अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में डाले बिना मुझे चोदने लगा।

थोड़ी ही देर में मुझे मजा आने लगा और मैं आहें भरने लगी ऊऊओह... ऊऊह्ह... ऊओह... उफफ्फ़... उफफ्फ़... हाआंन्णणन्... उऊहह...

उसने जब देखा की मुझे मजा आ रहा है और मेरी चूत को उसके लण्ड के साइज की आदत पड़ना शुरू हो गई है।

तो उसने एक धक्का तेज लगा दिया।

मैं फिर से चीख उठी।

उसका लण्ड मेरी चूत में सारे का सारा अंदर घुस गया। उसने धीरे धीरे धक्कों के साथ मुझे चोदना शुरू किया

तो मुझे मजा आने लगा। वो मुझे इसी तरह चोदता रहा। 35 मिनट तक चोदने के बाद ही वो मेरी चूत में छूट गया। इस बीच मैं भी तीन बार छूट चुकी थी।

उसने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरे मुँह के पास कर दिया। मैं उसे फिर से चूसने लगी। थोड़ी ही देर में उसका लण्ड फिर से तन गया। उसने मुझे अब घोड़ी की तरह कर दिया (डागी स्टाइल) और मेरे पीछे आ गया। उसने मेरी चूत को फैलाकर बीच में अपने लण्ड को हँसा दिया और बोला- “अभी तक मैंने तुम्हें बहुत आराम के साथ चोदा है। अब तुम कितना भी चिल्लाओ, मैं कोई परवाह नहीं करूंगा.” उसने मेरी कमर को जोर से पकड़ लिया।

मैंने दिल में खुद से कहा निदा तू तो गई आज काम से, आज तेरी खैर नहीं है। उसने और एक जोरदार धक्का मारा तो उसका सारे का सारा लण्ड मेरी चूत में घुस गया। मैं चिल्लाने लगी लेकिन उसने कोई परवाह नहीं की और बहुत ही ताकत के साथ धक्के मारने लगा। मेरी चूत में बहुत तेज दर्द हुआ और फिर ठीक हो गया। मैं पसीने से एकदम तर हो गई। वो रुका नहीं और पूरी ताकत के साथ मेरी चुदाई शुरू कर दी। थोड़ी ही देर बाद उसने अपना पूरा का पूरा 9" इंच लंबा और तीन इंच मोटा लण्ड मेरी चूत के अंदर घुसा दिया।

 
फिर वो दो मिनट के लिए रुका और बोला- “डार्लिंग अब बर्दाश्त करना मेरे झटकों को...”

फिर उसने अपने हाथों से मेरी कमर को जोर से फिर पकड़ लिया और मेरी चुदाई करने लगा। अब तनवीर मुझे तूफानी रफ़्तार से चोद रहा था और मुझे अब बहुत मजा आने लगा था। वो मुझे बारौं बेदर्दी से चोद रहा था। लगभग 20 मिनट की चुदाई के बीच में तीन बार फारिघ् हो चुकी थी पर वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था। वो अभी छूटा ही नहीं था।



।।।

उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरी गाण्ड के छेद पर रख दिया। मैं डर के मारे थर-थर काँपने लगी। गाण्ड में इतना बड़ारा लण्ड तो मैंने ख्वाब में भी कभी नहीं लिया था। मैंने उससे बहुत मिन्नतें की की मेरी गाण्ड को छोड़ दो, लेकिन वो माना नहीं। उसका लण्ड मेरी चूत के पानी से एकदम गीला था। उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसाना शुरू कर दिया। मैं दर्द से तड़पने लगी लेकिन वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

वो बोला- “अब मैं तम्हारी गाण्ड के छेद को भी खोल देंगा..."

मैं चिल्लाती रही और वो मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसाता रहा। 5 मिनट की कोशिश के बाद आखिर उसने अपना 9 इंच लंबा और तीन इंच मोटा लण्ड पूरा का पूरा मेरी गाण्ड में घुसा ही दिया। मैं अभी भी चिल्ला रही

थी और रो रही थी लेकिन वो रुक नहीं रहा था और तेजी के साथ अपने लण्ड को मेरी गाण्ड में अंदर बाहर कर रहा था। उसने लगभग 5 मिनट तक मेरी गाण्ड मारी लेकिन वो फिर भी फारिघु नहीं हुआ।

मैंने पूछा- “और कितनी देर चोदोगे मुझे...”

वो बोला- “मेरी उमर 38 साल है। मैंने बहुत चुदाई की है। मेरा दोबारा इतनी जल्दी नहीं छूटने वाला। अभी तो मैंने तुम्हें लगभग एक घंटा 20 मिनट ही चोदा है और अभी लगभग एक घंटे तक और चोदूंगा, तब जाकर मेरे लण्ड से पानी निकलेगा...”

मैं घबरा गई। मैंने कहा- “तुम अब रहने दो, बाद में अपनी हवस पूरी कर लेना...”

वो नहीं माना। उसने अपना लण्ड मेरी गाण्ड से बाहर निकाला और मेरी चूत में घुसा दिया। चूत में लण्ड घुसाने के बाद उसने बहुत तेजी के साथ मेरी चुदाई शुरू कर दी। 5 मिनट बाद ही उसने मेरी चूत से लण्ड को । निकालकर वापस मेरी गाण्ड में डाल दिया और चोदने लगा। वो इसी तरह हर 5 मिनट के बाद मेरी चूत और गाण्ड की चुदाई करता रहा।

लगभग 10 मिनट तक इसी तरह चोदने के बाद वो बोला- “मैं अब छूटने वाला हूँ। तुम बताओ की मेरे लण्ड का पानी कहाँ लेना चाहती हो, अपनी चूत में, गाण्ड में या अपने मुँह में..”

मैंने कहा- “तुम मेरी गाण्ड में ही पानी निकाल दो, चूत में तो तुम पहले भी निकल चुके हो..."

 
उसने अपना लण्ड मेरी चूत से निकाला और कहा- “नहीं जान-ए-मान अब मैं अपने लण्ड का पानी तुम्हारे मुँह में निकालूंगा...” ये कहकर उसने मुझे बालों से पकड़कर अपनी तरफ घुमाया और बड़ी बेदर्दी से अपना पूरा का पूरा

लण्ड मेरे मुँह में घुसा दिया और जोर जोर से अपना लण्ड मेरे मुँह में अंदर बाहर करने लगा। उसके छूटने का। वक़्त नजदीक आ गया था और वो अब एक तूफान की तरह मेरे मुँह को चोद रहा था। उसके झटकों से मेरा मुँह दुखने लगा था।

फिर उसके लण्ड ने झटका खाया और उसके लण्ड से मनी एक धार की सूरत में निकलकर मेरे हलाक से टकराई और मेरा पूरा मुँह मनी से भर गया। मैं मनी को पीने लगी मगर उसके लण्ड से बहुत मनी निकल रही थी जो मुझसे पूरी नहीं पी गई और वो मेरे मुँह से बहने लगी।

तनवीर ने मेरा सिर पकड़कर अपने लण्ड पर दबाया हुवा था जिसकी वजह से मैं अपना मुँह हटा नहीं सकती थी। सारी मनी मेरे मुँह में निकालकर वो थक कर लेट गया। मैं भी थक चुकी थी और मैं भी उसके साथ ही लेट गई। थोड़ी देर हम दोनों इसी तरह लेटे रहे। फिर मैं उठी और अपनी हालत देखने लगी। मेरी चूत और गाण्ड कई जगह से कट गई थी। बिस्तर पर भी ढेर सारा खून लगा था। मेरी चूत एकदम डबल रोटी की तरह सूज गई थी। मेरी चूत और गाण्ड में चुदाई का मजा खतम होने का बाद अब दर्द बहुत हो रहा था लेकिन मुझे जो मजा इस चुदाई से मिला, उसके आगे यह दर्द कुछ भी नहीं था।

उसने कहा- “तुम्हारी चूत में दर्द बहुत हो रहा होगा...”

तो मैंने अपना सर हाँ में हिला दिया। वो किचन से पानी गरम करके ले आया और मेरी चूत को सेंकने लगा और बोला- "इससे दर्द कम हो जाएगा..."

कुछ देर तक सिकाई के बाद मेरा दर्द बहुत हद तक कम हो गया। अब तक शाम हो चुकी थी। मैं बाथरूम जाना चाहती थी पर उठ नहीं पा रही थी। मैंने उससे कहा मैं बाथरूम जाना चाहती हैं लेकिन उठ नहीं पा रही हूँ। वो। मुझे गोदड़ में उठाकर बाथरूम ले गया।

मैंने उससे कहा तुम बाहर जाओ मुझे नहाना है।

वो बोला- “मुझे भी नहाना है। हम दोनों साथ ही नहाते हैं...” उसने मेरे सारे बदन पर साबुन लगाया और अपने बदन पर भी।

नहाने के बाद वो मुझे गोद में ही उठाकर बिस्तर पर ले आया। वो मेरे बदन को देखने लगा। मेरे बदन की खूबसूरती उसे बर्दस्त नहीं हुई और वो फिर से जोश में आ गया। उसका लण्ड फिर तन गया तो मैं घबरा गई। उसने मेरे मना करने के बाद भी मुझे अपनी गोद में दूसरी तरफ मुँह करके बिठाकर फिर से मेरी चुदाई शुरू कर दी। इस बार उसने सिर्फ मेरी चूत की ही चुदाई की। उसने इस बार मुझे लगभग 20 मिनट तक चोदा तब कहीं जाकर उसके लण्ड से पानी निकला।

इस दौरान मैं दो बार फिर से छूटी। चुदाई खतम होने के बाद मैंने उससे कहा- “मैं चल नहीं पा रही हूँ। मेरी मम्मी आ जाएँगी तो क्या जवाब देंगी...”

वो बोला- "तुम पहले खाना खा लो। मैं अभी बाजार से दवा ले आता हूँ..”

कुछ देर बाद हमने खाना खा लिया तो तनवीर पास के बाजार चला गया। एक घंटे के बाद वो एक क्रीम और कुछ गोलियां लेकर आया। उसने मुझे दवा खिला दी और मेरी चूत पर क्रीम लगाने लगा। क्रीम लगाने के बाद वो बोला- “अब तुम सो जाओ, जब तुम उठोगी तो तुम बिल्कुल ठीक हो चुकी होगी।

मैं भी बहुत थक चुकी थी इसलिए फौरन ही सो गई। मैं सारी रात सोती रही सुबह 9:00 बजे उसने मुझे उठाया, मैंने अपनी चूत को देखा तो उसकी हालत काफी बेहतर हो चुकी थी जिससे मैं सकून का सांस लिया। फिर हम दोनों ने मिलकर नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद तनवीर ने डाइनिंग टेबल पर ही मुझे पकड़कर लिटा दिया और वहीं मेरी चुदाई शुरू कर दी।

अम्मी तीन दिन के बाद आईं और इन तीन दिनों में तनवीर ने मुझे खूब चोद-चोदकर मुझे चोदाई का आदी । बना दिया। और अब मैं बस लण्ड ही ढूँढ़ती रहती हूँ।

 
SID4YOU wrote: ↑ 01 Jan 2019 16:10
बहोत मस्त कहानी है बेहद हॉट और सेक्सी
 
03 जीजाजी

हाय दोस्तों आपको मेरी कहानियां पढ़ के मजा तो आ रहा होगा।

चुदाई की तो मैं बहुत शौकीन हूँ, आप सब लोग जानते हैं। बात तब की है जब मैं अपनी बड़ी बहन के घर रहने गई थी, बाजी की तबीयत खराब थी तो उन्होंने काम के लिये मुझे बुलाया था क्योंकी वो गर्भवती थीं इसलिये काम नहीं कर सकतीं थीं।

मैं बाजी के पास चली गई। दो दिन हो गये थे। बस सब बोर ही गुजरता था इसलिये मेरा दिमाग अपने जीजाजी पर ही खराब होने लगा था। दो दिन तो मैंने सोचा की कुछ नहीं होगा। पर फिर मैंने एक दिन दीदी से कहा की आप आज अपने रूम में ना सोना, वहाँ बहुत गर्मी है आप मेरे रूम में सो जाना कुछ मौसम ठीक है वहाँ पर।।

दीदी बोली- “ठीक है ऐसे कर लो...”

रात हुई तो दीदी खाना खाकर अपने रूम में चले गईं मतलब की मेरे रूम में। मैंने चीजें संभाली और जल्दी से दीदी के रूम में चली गई। मैंने जीजाजी के आने से पहले सोचा की लेट जाऊँ और बेड पर लेटके बारीक सी। चादर अपने ऊपर ले ली और जानबूझ कर अपनी शलवार नीचे को कर दी। कुछ देर बाद जीजाजी अंदर आए और दरवाजा बंद करके अपनी कमीज उतारी और बेड पर बैठते हुये लेट गए। जीजाजी ने मेरे वाली चादर को खींचा और उसी के अंदर जानेमन कहते हुये घुस गए।

और मेरी चूचियों पर हाथ फेरते हुये बोले- पता नहीं कब ये बच्चा होगा और मैं तुम्हें चोदूंगा...”

पर मैं कुछ नहीं बोली।

फिर जीजाजी ने मेरे पीछे अपना लण्ड सेट किया और साथ ही मेरी चूत पर हाथ रखके बोले- “उउफ इसकी बहुत याद आती है..” ये बोलते ही एकदम चुप हो गए क्योंकी मेरी चूत और गाण्ड नंगी थी जीजाजी ने हाथ फेरते हुये पूछा- “क्या तुम्हारा भी दिल कर रहा है...”

मैंने कुछ बोले बिना ही हाँ में सर हिला दिया।

जीजाजी तो जैसे टूट ही पड़े और फौरन ही लण्ड बाहर निकाल लिया और बोले- “जानेमन, लो आज तो आग ठंडी कर ही लेते हैं दोनों..” और मेरी टांग उठाई और अपने हाथ से लण्ड को पकड़के मेरी चूत के सुराख पर। रखकर अंदर को दबाया तो टोपी अंदर चली गई तो बोले- “इतनी टाइट चूत है इएस हालत में भी...”

तभी मेरे मुँह से- “आह्ह... आह्ह्ह.. उफफ्फ़... उफफ्फ़..” की आवाज निकली।

इतने में जीजाजी ने मेरे पेट पर हाथ रखा और दीदी का पेट ना पाकर एकदम से कौन है कहते हुये चादर उठा दी और मुझे देखकर बोले- “तुम निदा यहाँ क्या कर रही हो..”

 
मैंने कहा- “जीजाजी आग लगी है बुझा दो ना प्लीज़...”

जीजाजी बोले- “अच्छा... आग लगी है तो वैसे ही बता देती...”

मैंने कहा- “वैसे आपने मानना नहीं था..”

जीजाजी बोले- “साली छोड़ सारी बातें..." और जीजाजी ने उठते हुये अपने आपको मेरे ऊपर सिधा किया और लण्ड को और अंदर को पुश करके अपनी कमर को हिला-हिला कर पूरे जोश से झटके मारने लगे। और मेरे मुँह से उफफ्फ़... उफफ्फ़... उफफ्फ़... जीजाजी हाआन्... ऐसेए... ही यएस यएसस्स उऊह्ह... उऊह्ह... हमम्म्माआअ... हमम्म्म...माआ... हमम्म्ममा.. उफफ्फ़... उफफ्फ़...

और जीजाजी लगातार मुझे दस मिनट तक ऐसे ही चोदती रहे और दस मिनट बाद मेरी चूत में ही पानी छोड़ दिया और बोले- “सुबह आई-पिल ले लेना, दराज़ में पड़ी है...”

मैंने कहा- “ठीक है...”

उस रात जीजाजी ने मुझे दो दफा 20 मिनट की लगातार चुदाई की और लण्ड को ठंडा किया और साथ में मेरी चूत को भी। फिर हम ऐसे ही गले लग के सो गए।

समाप्त *****

 
04 सोबिया अंकल के साथ

जैसा की आप लोग जानते हैं मेरे हुश्न के चर्चे कहाँ नहीं हैं, चाहे परिवार हो या फिर कालेज, हर जगह मेरी शोहरत है।

मेरा ये हाल है की मैं लड़कों को जानबूझकर अपनी जवानी दिखाती हूँ, बहकाती ती हूँ और खूब मज़ा करती हूँ।

ये मेरा अपनी ओरिजिनल वाकिया है। ये बात है जुलाई के महीने की, मेरी की कजिन की शादी थी जिसमें मुझे भी जाना था, मैं खूब अच्छी तरह तैयार होकर डीसेंट सा मेकप करके जिसमें सेक्सी टच भी था, ब्लैक ड्रेस में । जिसकी कमीज स्लीवलेश थी और डीप गले वाला भी थी और साथ में चूड़ीदार पाजामा, ये सूट पहन के मैं शादी में गई।

वहाँ काफी लागों से मिलना हुआ। उन्हीं में एक 38-40 साल के अंकल भी थे जो की काफी हैंडसम भी थे उनसे मुलाकात हुई, परिचय के दौरान ही मैंने उनसे हाथ भी मिलाया जिससे उनको आइडिया हो गया की मैं एक । माडर्न लड़की हूँ। बात करने से पता चला की वो हमारे दूर के रिलेटिव हैं। मैंने उनसे हाथ मिलाया। बातचीत के दौरान ही नोट कर लिया था की इनका ज्यादातर ध्यान मेरे चेहरे के बजाय थोड़ा नीचे, जहाँ से मेरे 34” साइज की गोल-गोल, गोरी-गोरी चूचियां झाँक रही थी और वो घूर-घूर कर देख रहे थे और मुझे उनका इस तरह देखना कोई नई बात नहीं थी क्योंकी इस तरह तो मुझे सभी देखते हैं। मेरे साथ मेरी एक दो कजिन्स भी थी लेकिन 2-3 मिनट बाद वो इधर उधर हो गईं, और हम तन्हा हो गये।

उन्होंने मोके से पूरा फायदा लेते हुये वो कहने लगे की- “तुम अपनी कजिन्स में सबसे ज्यादा खूबसूरत हो...”

मैंने कहा- “अच्छा..” मैंने शरारत भरे अंदाज में पूछा की- “मुझमें ऐसा क्या अच्छा है उनसे...”

मेरे इस अंदाज से उनके कान्फिडेन्स में इजावा हुआ और मुझसे बिल्कुल ही चिपक गये की उनका एक हाथ मेरे हाथ से छूने लगा, वो कहने लगे की- “तुम्हारी आँखें बहुत गहरी और आकर्षक हैं और तुम्हार होंठ भी बहुत अच्छे हैं इनको देखके ही ये अंदाजा होता है की बहुत मुलायम होंगे...”

अभी वो मजीद कुछ कहते की उनकी वाइफ वहाँ आ गई और हमें घूरने लगी। मैंने तो उनकी कोई परवाह ना की लेकिन अंकल जरा घबरा गये और वो गुस्से से बोली- “आप यहाँ क्या कर रहे हैं और ये लड़की कौन है.. मैं आपका वहाँ वेट कर रही थी...”

 
अंकल ने कहा की- “ये उनकी बेटी है (यानी मेरे फादर का नाम लिया)

उन्होंने एक नजर मुझपर डाली और बुरा से मुँह बना दिया। लेकिन मैंने सोचा की थोड़ी सी तफरी हो जाय। मैं आंटी के पास गई और उनको “हाय” बोल के हैंड शेक किया और मैंने मजीद उनको गुस्सा दिलाने के लिए उनसे कहा की- “आप बहुत खुशनसीब हैं की आपको अंकल जैसे हैंडसम और अच्छी पर्सनालिटी वाले शोहर मिले हैं...”

वो और गुस्सा हो गई और कहने लगी की- “क्या तुम्हें शर्म नहीं आती अपने से इतनी ज्यादा उमर वाले आदमी के बारे में ऐसी बातें कर रही हो...”

मैंने कहा- “ये तो आप अंकल से ही पूछे.."

(अंकल तो पहले ही साइड में हो गये थे)

मेरी बात सुन के वो बोली- “क्या मतलब..." और फिर बोली- “आजकल तो लड़कियां... हुउऊनह...” और अपने शोहर से कहने लगी- “माँ सब समझती हूँ..." और वो अंकल उनके साथ जाने लगे।

और मैंने अंकल को आँख मार दी और वो भी मुश्कुरा दिए।

मुझे अच्छा खासा मजा आ गया इस तफरीह में। और मैंने सोचा की ये मामला और आगे बढ़ेगा ही। वैसे मैंने आइंदा का भी सोच लिया था की क्या होगा। यकीनन आप भी वोही सोच रहे होंगे।

अंकल ने मोका पाकर मुझसे मेरा नंबर ले लिया ताकी जैसे ही उनको मोका मिले वो मुझसे संपर्क कर लें। तीन चार दिन के बाद अंकल का फोन आया की वो मुझसे मिलना चाहते हैं।

मैंने कहा- “आप मुझे पिक कर लें...”

मैंने हल्का मेकप किया और जिस ड्रेस में थी, उसी में (मैंने टी-शर्ट और जीन्स पहनी थी) जाने के लिए तैयार हो गई। आलमोस्ट 45 मिनट में अंकल ने मुझे पिक किया और मैंने कहा की अंकल किसी शापिंग माल चलें, मुझे शापिंग करनी है। 12:00 का टाइम था। प्रोग्राम ये डिसाइड हआ की शापिंग के बाद लंच फिर अंकल के घर। क्योंकी 2-3 दिनों के लिए उनकी वाइफ और बच्चे आउट आफ सिटी थे।

थोड़ी देर बाद हम शापिंग सेंटर में एंटर हो रही थे। अंकल ने पूछा- “क्या कुछ लेना है?"

मैंने कहा की- “काफी चीजें..."

और उन्होंने मुश्कुराकर पूछा- “क्या क्या?”

मैंने भी सोचा की शर्म कैसी, मैंने एक दो टी-शर्ट, जीन्स, और अंडरगार्मेंट्स और साथ में मुश्कुरा दी। अंकल कहने लगे की तुम खूबसूरत होने के साथ-साथ बेबाक भी हो, मुझे यही चीज बहुत पसन्द है। फिर हम एक वेस्टर्न ड्रेसेस की दुकान में एंटर हुये। सेल्समैन हम दोनों को हैरत से देख रहा था, क्योंकी हमारी उमर में काफी फर्क था। मैंने अपने लिए दो टी-शर्ट ली और दो जीन्स भी जो मैंने बारी-बारी ट्राइ भी की रूम में। मैंने ब्रा नहीं पहना था इसलिए मेरी रसीली चूचियां टी-शर्ट में बहुत ही टाइट हो गई थी और निपल्स नुकीले हो रहे थे।

अंकल की आँखों में चमक थी और सेल्समैन भी मुझे खूब ताड़ रहा था।

फिर अंकल ने पूछा की- “और कुछ भी लाना है यहां से?”

मैंने कहा- “नहीं अंकल...”

 
मेरे मुँह से अंकल का लफ्ज़ सुनकरर सेल्समैन के चहरे पर अजीब से भाव आ गये। अंकल भी पूरे शौकीन ही थे। कहने लगे की एक ड्रेस मेरी पसन्द का भी ले लो और यही तुम अभी ट्रायल रूम में जाकर पहन लेना।

मैंने कहा- “ठीक है..” अंकल ने सेल्समैन से एक ब्लू रंग की टी-शर्ट निकलवाई, जिसको देखके ही मुझे अंदाजा हो गया था की ये मेरे बेल्ली बटन को भी नहीं छुपा पाएगी और साथ में वो लो कट भी थी और यकीनन बहुत टाइट भी होगी, और फिर मेरी वेस्ट की साइज की एक ब्लैक कैप्री जो की वाकई ही बहुत छोटी थी। मेरे घुटनों से जरा नीची तक ही और मुझे कोई ऐतराज ना था क्योंकी मैं इस ही किस्म की कैप्री पसन्द करती हूँ। वैसे तो हमारे यहाँ लड़कियां ऐसी कैप्री को बहुत कम ही पहनती हैं मगर मेरी शुमार उन 5-10% लड़कियों में होती है।

जो ऐसी कैप्री पसन्द करती हैं।

खैर, मैं ट्रायल रूम में गई और कैप्री चेंज करके आई। मेरा आइडिया ठीक था, टी-शर्ट मेरी बेल्ली बटन से भी उँची थी और मेरी चूचियों की कर्व लाइन साफ नजर आ रही थी। अगर मैं थोड़ा झुकती तो मेरी आधी नंगी चूचियां भी आसनी से नजर आ जातीं और कैप्री भी घुटनों तक ही थी अंकल समेत वहां जितने भी मर्द थे सब की भूखी नजरें मेरी तरफ थी और यकीनन उनके लण्ड भी खड़े हो गये होंगे। अंकल मुझे देखके मुश्कुराये और फिर अंकल ने पेमेंट की जब तक मैं दुकान पर रही सब अपने-अपने काम छोड़कर मुझे ही ताड़ते रहे और मैं उनकी नजरों से मजे लेते रही।

फिर हमारा रुख उस दुकान की तरफ था जहाँ पर अंडरगार्मेंट्स मिलती हैं। अंकल ने कहा की मैं ही तुम्हें अपनी मर्जी का खरीदवाता हूँ और मैंने कहा ओके।

अंकल ने मेरा साइज पूछा और मैंने बता दिया की 34सी और चूतड़ों का 36” यहाँ भी सब हमें देखके हैरान हुये। और उस वक़्त उस दुकानदार के हैरत की इंतहा ना रही, जब अंकल ने कहा की 3-4 34सी की डिजाइन दिखाओ। दुकानदार ने पहले मुझे देखा और फिर अंकल की तरफ।

अंकल ने कहा- “सुना नहीं क्या?”

उसने जल्दी से 2-3 सिंपल डिजाइन दिखा दिये। अंकल ने कहा की ऐसे नहीं कुछ सेक्सी स्टाइल्स के। वो शायद नया-नया आया था इसलिए कुछ घबराया हुआ था। इतनी में एक दूसरा दुकानदार आया और कहने लगा की। आप मुझे बतायें। उसके चेहरे पर एक शरारत भरी मुश्कुराहट थी और अंकल ने फिर से अपनी बात दोहरा कर दी। उसने 4-5 तरह के डिजाइन दिखाये और साथ में कहने लगा की मेरे जिश्म पर सारे ही बहुत अच्छे लगेंगे। ये बात सुनकर मैं हँस पड़ी और उसके भी दाँत निकल पड़े, लेकिन शयद अंकल को उसका फ्री होना अच्छा ना लगा।

 
Back
Top