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निदा के कारनामे complete

Thanks to all

 
भाई के दोस्त

जैसा की आप जानते हैं, शुरू से ही मुझे लोगों की तवज्जो मिली और हर कोई ही मुझसे बात करने या मुझे सेट करने में लगा होता था और मैं बहुत से लोगों से सेट भी हुई और बहुत से लोगों ने मुझे चोदा भी, मुझे भी चुदवाने में मजा आता था इसलिए मैंने भी उन लोगों का साथ दिया और सबसे खूब चुदवाया।

आज मैं जो कहानी सुना रही हूँ उसमें मुझे मेरे चाचाजाद भाई जुबैर भाई के एक दो नहीं पूरे 5 दोस्तों ने चोदा था, जब मैं उनक घर रहने गई थी और अब मैं आती हूँ कहानी की तरफ।

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शादी के बाद मैं घर नहीं आई थी एक दिन जुबैर भाई के दो दोस्त रशीद और फरहान घर पर आये हुये थे। मैं सबके लिए चाय लेकर गई और चाय इस तरह से झुक-झुक कर देने लगी की वो मेरी चूचियां देखने लगे। मैंने दुपट्टा नहीं पहना था और मैं काफी खुले और बड़े गले का सूट पहनी हुई थी।

मैं नार्माली बहुत टाइट फिटिंग के और बड़े गले के कपड़े पहनती थी। मेरे झुकने से मेरे आधी से ज्यादा चूचियां बाहर निकल रही थीं। मैंने लाइट पिंक कलर के लान के सूट के नीचे ब्लैक कलर का ब्रेजियर और अंडरवेर पहना हुवा था। जो की मेरे सूट से साफ नजर आ रहे थे। मैं देख रही थी की जुबैर भाई के दोनों दोस्तों की नजरें मेरे चूचियों पर ही जमी हुई हैं।

फिर मैंने प्लान बनाया। घर में भाइ के एलवा कोई नहीं था और जुबैर भाई से कहा- “भाई वो अंकल ने आपको बुलाया था, उनकी काल आई थी। मुझे बताना याद नहीं रहा आपको। मेरी बात सुनकर हड़बड़ा कर उठे और अपने दोस्तों से कहा की मुझे जाना पड़ेगा और तुम लोग चाय पीकर जाना और मुझे बोले इनका ध्यान रखना और घर से बाहर चले गये और मैं जुबैर भाई की हरकत पर मुश्कुरा दी। जुबैर भाई के जाने के बाद मैं उन । दोनों के सामने जाकर बैठ गई और उनसे बातें करने लगी। एक तो मेरी ड्रेसिंग और ऊपर से मैं उन दोनों के बिल्कुल सामने अपने गरम जिश्म को उनकी तरफ करके बैठी हुई थी जिससे वो दोनों बिल्कुल गरम हो चुके थे।

रशीद कहने लगा- “निदा तुम बहुत खूबसूरत और सेक्सी हो...”

मैं मुश्कुराई और बोली- “रियली?”

रशीद बोला- “हाँ वाकई तुम बहुत सेक्सी हो मेरा दिल तो चाह रहे है...”

मैं बोली- “क्या चाह रहा है तुम्हारा दिल..”

वो बोला नहीं छोड़ो बस रहने दो..”

मैं बोली- “अरे बता दो शर्माओ नहीं मैं बुरा नहीं मानूंगी...”

रशीद ने फरहान को देखा तो वो बोला- “हम शर्मा नहीं रहे, तुम हमारे दोस्त की बहन हो इसलिए नहीं कह रहे।

मैं बोली- “फिर भी आप दोनों के दिल में जो है वो बोल दो और मुझे सिर्फ एक लड़की समझो अपने दोस्त की बहन नहीं...”

रशीद बोला- “अगर ऐसी बात है तो सुनो... तुम इतनी सेक्सी हो की हम दोनों का दिल चाह रहा है की हम दोनों तुम्हें अभी इसी समय चोद दें.”

मैं फिर मुश्कुराई और बोली- “अच्छा और अगर भाई को बता दें तो...”

वो इरते हुये बोले- “देखो प्लीज़... ऐसा मत करना। हम तो बस...” ये कहके वो चुप हो गये।

मेरे अंदर तो आग लगी हुई थी इतने दिन से लण्ड नहीं लिया था तो मैंने कहा- “अगर मुझे चोदने का इतना ही दिल चाह रहा है तो चोद लो मुझे, मैं तुम दोनों से चुदवाने के लिए राजी हूँ। पर ये एक राज़् रहेगा..." अगर भाई को बताया तो इज्ज़त लूटने का इल्ज़ाम लगा देंगी...”

फिर फरहान बोला- “मगर डर ये है की कही तुम्हारा भाई ना आ जाये...”

मैं मुश्कुराई और बोली- “आप दोनों इसकी फिकर ना करें जुबैर भाईजान अब नहीं आयेंगे। अंकल के पास गए हैं

फरहान बोला- “वो क्यों..."

मैं कहने लगी- “वो इसलिए की मैं तुम दोनों से चुदवा सकें, इसलिये मैंने जानबूझ कर उनको बहाना लगा के भेजा है...”
 


रशीद हैरान होकर बोला- “क्या?”

मैं मुश्कुराकर बोली- “वो इसलिए की मैं भी मजा लेना चाहती थी और मैंने तुम्हारी नीयत भाँप ली थी...”

मेरी बात पर वो दोनों बहुत हेरान हुये तो मैं बोली- “आप दोनों समय क्यों वेस्ट कर रहे हो?”

ये कहकर मैंने आगे होकर खुद से उन दोनों के लण्ड उनकी पैंट के ऊपर से पकड़ लिए तो वो दोनों भी मुझे चूमने और मेरी चूचियों को दबाने लगे। थोड़ी देर में ही वो दोनों मुझे नंगा कर चुके थे। अभी वो दोनों मेरे नंगे जिश्म को चूम और चाट रहे थे की फिर वो लोग मुझे लिटाकर मेरे जिश्म को चूमने और चाटने लगे। एक मेरे चूचियों को चूस रहा था, एक मेरी चूत, कोई मुझे किस कर रहा था, कोई मेरी गाण्ड में उंगली कर रहा था, मैं। आँखें बंद किए उन लोगों की इन हरकतों से बहुत गरम हो चुकी थी और मुझे बहुत मजा आ रहा था। काफी देर वो दोनों मुझे और मेरे जिश्म को चाटते रहे फिर वो दोनों भी नंगे होगे और मेरे इर्द गिर्द आकर खड़े हो गये।

वो दोनों मेरे चारों तरफ खड़े हो गये थे, फिर मैंने बारी-बारी दोनों का लण्ड चूसना शुरू कर दिया। काफी देर तक मैंने उन लोगों के लण्ड को चूसा।

फिर रशीद मुझसे बोला- “बताओ निदा तुम्हें किस तरह चोदें अकेले-अकेले या एक साथ दो?”

मैं बोली- “पूरा दिन है आप लोगों के पास इसलिए पहले तुम लोग मुझे अकेले-अकेले चोद लो फिर ग्रूप बनाकर चोद लेना..”

मेरा आइडिया सबको पसंद आया और फिर सबसे पहले मुझे रशीद ने चोदना शुरू किया। रशीद को डागी स्टाइल सबसे ज्यादा पसंद था इसलिए उसने मुझे डागी पोजीशन में किया और चोदना शुरू कर दिया। रशीद का लण्ड 8" इंच लंबा था जिससे मुझे बहुत मजा आने लगा।

और मैं लज़्ज़त भरी सिसकारियां लेने लगी- “आहहह... आहह्ह... ऊओह... ऊहह... उफफ्फ़... हाँणन्... जोरर से...”

रशीद ने बहुत तूफानी झटकों के साथ मुझे 8 मिनट तक चोदा फिर वो हट गया और मुझे फरहान चोदने लगा।

फरहान को गाण्ड मारना पसंद था इसलिए उसने मेरी खूब गाण्ड मारी और मेरी खूब उफफ्फ़... उफफ्फ़... ऊऊऊऊह्ह... म्म्माआआ... उफफ्फ़... चीखें भी निकाली। हाआन्न फरहान्न ऐसे ही हहाँ ऊओह म्म्माआअ और मेरी गाण्ड में ही अपना पानी छोड़ दिया।

कोई दो घंटे बाद दोनों फिर तैयार हो गये फिर उन लोगों ने मेरे साथ ग्रूप सेक्स करने का फैसला किया, फिर रशीद ने तो अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दिया और फरहान ने मेरी गाण्ड में, फिर रशीद और फरहान खूब झटके मारकर मुझे चोदने लगे। अब मुझे हर जगह से हर तरह का मजा मिल रहा था, और मजे से उफफ्फ़... म्माआ... उफफ्फ़... माआ... उफफ्फ़... म्माआअ... कर रही थी, ये अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था इसलिए मुझे इस स्टाइल में बहुत मजा आने लगा और मैं अपनी चुदाई से बहुत खुश होने लगी और भरपूर मजा भी लेने लगी।

फिर वो लोग मुझे इस पोजीशन में चोदने लगे। फिर मुझे इस तरह चुदवाते हुये आधे घंटे से ऊपर हो गया था। पर उनमें से कोई भी झड़ नहीं रहा था, जबकी मैं कई बार झड़ चुकी थी, मुसलसल चुदाई से मेरी चूत और गाण्ड में दर्द भी होना शुरू हो गया था। पर मैं बर्दाश्त करके चुदवा रही थी। फिर मजीद दस मिनट और मैं इसी तरह चुदती रही

फिर सबसे पहले फरहान झड़ा और उसने अपने लण्ड की मनी मेरी गाण्ड में ही निकाल दी, और थोड़ी देर बाद रशीद ने भी अपनी मनी मेरी चूत में ही छोड़ दी फिर मैं थक कर गिर पड़ी और लंबी-लंबी सांसें । लेने लगी, आधे घंटेर तक मैं लेटी रही। इतनी देर में रशीद, और फरहान के लण्ड फिर से ताजादम हो चुके थे। मैं बोली- “बस अब नहीं अब मुझमें और हिम्मत नहीं है चुदवाने की। तुम लोग मुझे फिर किसी दिन बुला लेना, आज बस करो।

रशीद बोला- “बाद की बात बाद में अभी तो हम लोगों ने तुमको और चोदना है। अभी तो हम सबर नहीं कर सकते..” फिर मेरे मना करने के बावजूद रशीद लेटा और उसने मुझे अपने ऊपर बिठाकर अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दिया। फिर फरहान भी मेरे पीछे आ गया और अपना लण्ड मेरी चूत में डालने की कोशिश करने लगा। मेरी चूत में पहले से ही रशीद का लण्ड था पर फरहान कोशिश करता रहा। थोड़ी देर में ही फरहान ने भी अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दिया।

अब मेरी चूत में एक साथ दो लण्ड थे। अब एक साथ दो लण्ड मेरी चूत में थे, शुरू में तो मुझे बहुत दर्द हुवा और मैं बहुत चीखी फिर मुझे भी मजा आया और मैं भी उनका साथ देने लगी। अब वो लोग अपनी जगह बदल बदल कर मुझे इसी तरह चोदने लगे फिर मजीद दो मिनट बाद वो सभी एक के बाद एक करके झड़ गये। मैंने सुबह 11:00 बजे से उन लोगों से चुदवाना शुरू किया था और इन लोगों ने मुझे मुसलसल 4 घंटे तक चोदा था, फिर उन लोगों ने जाने का फैसला किया।

रशीद मुझसे बोला- “निदा डार्लिंग बताओ आज तुमको चुदाई में कितना मजा आया?”

मैं बोली- “मजा तो बहुत आया पर दर्द भी बहुत हुवा, जिस तरह तुम लोगों ने मुझे चोदा है आज तक किसी ने भी मुझे इस तरह से नहीं चोदा...”

फिर वो लोग मुझे किस करके चले गए।

******** समाप्त ***
 
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