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लेखक : जूजा जी
“निशा जल्दी करो, स्कूल के लिए देर हो रही है !” कहते हुये किशन अपने किरायेदार राजेन्द्र सिंह की बहन के कमरे में दाखिल हुआ, निशा उस समय स्कूल ड्रेस पहन कर झुकी अपने जूते पहन रही थी।
झुकी हुई निशा के स्कूल शर्ट से बाहर आने को बेताब उसकी मुसम्मियों के उभार और झुके होने से घुटने के ऊपर तक के स्कर्ट से झांकती उसकी गोरी सुडोउल नंगी टाँगों को देख किशन के अंदर एक अजीब सी कसमसाहट हुई। किशन बहुत दिनों से निशा को भोगने की ताक में था।
27 साल का किशन एक जवान युवक था और राजेन्द्र की बीवी सविता और राजेंद्र की छोटी बहन निशा को अपने मकान में किरायेदार के रूप में रखे हुये था। किशन के परिवार में सिर्फ उसकी माँ ही रहती थी और किशन एक सरकारी नौकरी करता था। घर में खाना की दिक्कत थी तो उसने राजेंद्र को इसी शर्त पर अपने घर में रखा हुआ था कि उसकी बीबी सविता ही उसके और उसकी माँ के लिये खाना बनाएगी और बदले में वो उनसे किराया नहीं लेगा।
राजेन्द्र की नौकरी पक्की नहीं थी और वो एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था और उसको कम्पनी के काम से कई कई दिन बाहर टूर पर रहना पड़ता था, तो उसको यह शर्त सहर्ष मंजूर भी हो गई थी और राजेन्द्र को दारु पीने की लत भी थी, किशन अपने पैसे से उसको दारु पिला कर उसकी इस तलब को पूरी करता था।
निशा पढ़ाई के लिए शहर आई हुई थी और अपने भैया और भाभी के साथ ही रहती थी, वो एक कमसिन और खूबसूरत 18 साल की किशोरी थी जो गाँव में रहने के कारण अभी बारहवीं में पढ़ रही थी। जवानी में कदम रखती वो लड़की दिखने में ग़ज़ब की सुंदर तो थी ही, उस पर उसके अल्लहड़पन, शोखी और चंचलता ने उसको और भी खूबसूरत बना दिया था।
स्कूल की ड्रेस में उसकी चूचियों के बड़े उभार साफ दिखाई देते थे और उसके ड्रेस की स्कर्ट के नीचे दिखती गोरी-गोरी चिकनी टाँगें किशन को पागल बना देती थी।
किशन जानता था कि सविता भाभी की ननद को भोगने की इच्छा करना ठीक नहीं है पर वो वासना के अधीन हो चुका था और उसकी जवानी का रस लेने के लिए बेताब था पर कोई सही मौका हाथ नहीं लग रहा था। एक बात और थी कि वो अपनी सविता भाभी से छुपा कर यह काम करना चाहता था क्योंकि उसको डर था कि कहीं उसकी भाभी सविता गुस्सा न हो जाए।
सविता जैसी हरामी और चुड़क्कड़ औरत उसने कभी नहीं देखी थी। बेडरूम में अपने रंडियों जैसे अंदाज़ से शादी के 3 माह के अंदर ही उसने अपने मकान मालिक किशन को अपना चोदू बना लिया था और उसका पति भी बेबस होकर कुछ नहीं बोलता था क्योंकि साला नपुंसक था, सविता की गांड और चूत की खुजली मिटाने में असफल रहता था।
चूंकि किशन दौलतमंद भी था सो सविता के पति को दारु भी मिल जाती थी और वो भी कुछ नहीं बोलता था और इस तरह किशन को सविता ने अपना दीवाना बना लिया था। किशन को डर था कि सविता को यह बात पता चल गई कि उसकी निगाह निशा की कमसिन जवानी पर है तो ना जाने वो गुस्से में क्या कर बैठे।
जबकि वास्तव में उसका यह डर सिर्फ़ एक डर ही था क्योंकि सविता किशन की इच्छा को बहुत अच्छे से पहचान गई थी। निशा को घूरते हुये किशन के चेहरे पर झलकती वासना उसने तो कब की पहचान ली थी, सच तो यह था कि वो खुद इतनी कामुक थी कि किशन से हर रात चुद कर भी उसकी कामुकता को तृप्ति नहीं मिलती थी और ऊपर से वो अपने पति की बहन को भी बिगाड़ कर उसे अपने वश में करना चाहती थी क्योंकि शादी से पहले सविता एक लेस्बियन लड़की थी और उसने अपने स्कूल के दिनों में अपनी कुछ टीचर्स और ख़ास सहेलियों के साथ संबंध बना रखे थे। उसको लेस्बियन सेक्स में काफ़ी आनन्द आता था।
रात की चुदाई के बाद दोपहर तक उसकी चूत में फिर से खुजली होने लगती थी, वासना से उद्दीप्त योनि की अग्नि पर किसी कमसिन कन्या या खाई खेली औरत की जीभ की ठण्डक पाने के लिए उसकी निगाह भी निशा पर थी लेकिन फिलहाल उसे हस्तमैथुन से अपनी आग शांत करनी पड़ती थी।
शादी के बाद वो किसी और मर्द से संबंध नहीं रखना चाहती थी लेकिन क्योंकि राजेन्द्र जैसे नपुंसक से उसकी शादी और घर में ही मजबूत काठी का किशन और उसकी मस्त जवानी और मज़बूत लंड उसके पुरुष सुख के लिए पर्याप्त था। वो भूखी तो थी ही पर उसकी पहली पसंद तो लेस्बियन सेक्स ही थी। अब उसकी इच्छा यही थी कि कोई उसके जैसी चुदक्कड़ लड़की या औरत मिल जाए तो मज़ा आ जाए।
पिछले दो माह में वो भी निशा की उभरती जवानी की ओर बहुत आकर्षित होने लगी थी। अब सविता मौका ढूँढ रही थी कि निशा को कैसे अपनी चंगुल में फंसाया जाए। किशन के दिल का हाल पहचानने पर उसका यह काम थोड़ा आसान हो गया।
“निशा जल्दी करो, स्कूल के लिए देर हो रही है !” कहते हुये किशन अपने किरायेदार राजेन्द्र सिंह की बहन के कमरे में दाखिल हुआ, निशा उस समय स्कूल ड्रेस पहन कर झुकी अपने जूते पहन रही थी।
झुकी हुई निशा के स्कूल शर्ट से बाहर आने को बेताब उसकी मुसम्मियों के उभार और झुके होने से घुटने के ऊपर तक के स्कर्ट से झांकती उसकी गोरी सुडोउल नंगी टाँगों को देख किशन के अंदर एक अजीब सी कसमसाहट हुई। किशन बहुत दिनों से निशा को भोगने की ताक में था।
27 साल का किशन एक जवान युवक था और राजेन्द्र की बीवी सविता और राजेंद्र की छोटी बहन निशा को अपने मकान में किरायेदार के रूप में रखे हुये था। किशन के परिवार में सिर्फ उसकी माँ ही रहती थी और किशन एक सरकारी नौकरी करता था। घर में खाना की दिक्कत थी तो उसने राजेंद्र को इसी शर्त पर अपने घर में रखा हुआ था कि उसकी बीबी सविता ही उसके और उसकी माँ के लिये खाना बनाएगी और बदले में वो उनसे किराया नहीं लेगा।
राजेन्द्र की नौकरी पक्की नहीं थी और वो एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था और उसको कम्पनी के काम से कई कई दिन बाहर टूर पर रहना पड़ता था, तो उसको यह शर्त सहर्ष मंजूर भी हो गई थी और राजेन्द्र को दारु पीने की लत भी थी, किशन अपने पैसे से उसको दारु पिला कर उसकी इस तलब को पूरी करता था।
निशा पढ़ाई के लिए शहर आई हुई थी और अपने भैया और भाभी के साथ ही रहती थी, वो एक कमसिन और खूबसूरत 18 साल की किशोरी थी जो गाँव में रहने के कारण अभी बारहवीं में पढ़ रही थी। जवानी में कदम रखती वो लड़की दिखने में ग़ज़ब की सुंदर तो थी ही, उस पर उसके अल्लहड़पन, शोखी और चंचलता ने उसको और भी खूबसूरत बना दिया था।
स्कूल की ड्रेस में उसकी चूचियों के बड़े उभार साफ दिखाई देते थे और उसके ड्रेस की स्कर्ट के नीचे दिखती गोरी-गोरी चिकनी टाँगें किशन को पागल बना देती थी।
किशन जानता था कि सविता भाभी की ननद को भोगने की इच्छा करना ठीक नहीं है पर वो वासना के अधीन हो चुका था और उसकी जवानी का रस लेने के लिए बेताब था पर कोई सही मौका हाथ नहीं लग रहा था। एक बात और थी कि वो अपनी सविता भाभी से छुपा कर यह काम करना चाहता था क्योंकि उसको डर था कि कहीं उसकी भाभी सविता गुस्सा न हो जाए।
सविता जैसी हरामी और चुड़क्कड़ औरत उसने कभी नहीं देखी थी। बेडरूम में अपने रंडियों जैसे अंदाज़ से शादी के 3 माह के अंदर ही उसने अपने मकान मालिक किशन को अपना चोदू बना लिया था और उसका पति भी बेबस होकर कुछ नहीं बोलता था क्योंकि साला नपुंसक था, सविता की गांड और चूत की खुजली मिटाने में असफल रहता था।
चूंकि किशन दौलतमंद भी था सो सविता के पति को दारु भी मिल जाती थी और वो भी कुछ नहीं बोलता था और इस तरह किशन को सविता ने अपना दीवाना बना लिया था। किशन को डर था कि सविता को यह बात पता चल गई कि उसकी निगाह निशा की कमसिन जवानी पर है तो ना जाने वो गुस्से में क्या कर बैठे।
जबकि वास्तव में उसका यह डर सिर्फ़ एक डर ही था क्योंकि सविता किशन की इच्छा को बहुत अच्छे से पहचान गई थी। निशा को घूरते हुये किशन के चेहरे पर झलकती वासना उसने तो कब की पहचान ली थी, सच तो यह था कि वो खुद इतनी कामुक थी कि किशन से हर रात चुद कर भी उसकी कामुकता को तृप्ति नहीं मिलती थी और ऊपर से वो अपने पति की बहन को भी बिगाड़ कर उसे अपने वश में करना चाहती थी क्योंकि शादी से पहले सविता एक लेस्बियन लड़की थी और उसने अपने स्कूल के दिनों में अपनी कुछ टीचर्स और ख़ास सहेलियों के साथ संबंध बना रखे थे। उसको लेस्बियन सेक्स में काफ़ी आनन्द आता था।
रात की चुदाई के बाद दोपहर तक उसकी चूत में फिर से खुजली होने लगती थी, वासना से उद्दीप्त योनि की अग्नि पर किसी कमसिन कन्या या खाई खेली औरत की जीभ की ठण्डक पाने के लिए उसकी निगाह भी निशा पर थी लेकिन फिलहाल उसे हस्तमैथुन से अपनी आग शांत करनी पड़ती थी।
शादी के बाद वो किसी और मर्द से संबंध नहीं रखना चाहती थी लेकिन क्योंकि राजेन्द्र जैसे नपुंसक से उसकी शादी और घर में ही मजबूत काठी का किशन और उसकी मस्त जवानी और मज़बूत लंड उसके पुरुष सुख के लिए पर्याप्त था। वो भूखी तो थी ही पर उसकी पहली पसंद तो लेस्बियन सेक्स ही थी। अब उसकी इच्छा यही थी कि कोई उसके जैसी चुदक्कड़ लड़की या औरत मिल जाए तो मज़ा आ जाए।
पिछले दो माह में वो भी निशा की उभरती जवानी की ओर बहुत आकर्षित होने लगी थी। अब सविता मौका ढूँढ रही थी कि निशा को कैसे अपनी चंगुल में फंसाया जाए। किशन के दिल का हाल पहचानने पर उसका यह काम थोड़ा आसान हो गया।