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नौकरी हो तो ऐसी

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नौकरी हो तो ऐसी--18

गतान्क से आगे…………………………………….

मैने उसे 15 दिन मे फिरसे पैसे लेने आउन्गा कहते हुए कपड़े पेहेन्के निकल पड़ा…ड्राइवर मेरा इंतेज़ार कर रहा था मैं गाड़ी मे बैठ गया और उसे बोला चलो और हम अगली वसूली करने निकल पड़े….

दिनभर मैं वसूली करते हुए बहुत सारे गाओ मे घूम के आया… सबो का एक ही नारा था कि फसल आनेपे पैसे दे देंगे… मैं 5 बजे तक गोदाम मे पहुच गया.. सेठ जी अभी वही थे.. मैने सब हक़ीकत उन्हे बता दी…. सेठ जी मुस्कुराए और बोले “ठीक है …. कोई बात नही … मैने तो तुम्हे इसलिए भेजा था कि तुम लोगो को जान सको पहचान सको.. क्यू कि अभी इन्ही लोगोसे तुम्हे कारोबार करना है….. ” सेठ जी थोड़ी देर मे हवेली की तरफ निकल गये…

मुझे कुछ हिसाब किताब करने को कह के… 6-6.30 बज चुके थे, दिन लंबा नही था… इसलिए अंधेरा जल्दी हो रहा था.. मैं गोदाम मे अकेला था… मेरा हिसाब किताब लगभग ख़तम होने को था… मैं उपर बैठा था उधर के बल्ब हमेशा ही जलते रहते थे… बाकी गोदाम मे कुछ कुछ कोनो मे बल्ब थे मतलब पूरा गोदाम प्रकाशित नही था….

तभी मुझे गोदाम के पिछले वाले बाजू का दरवाजा खुलने की आवाज़ आई.. इसका मतलब कोई तो अंदर आ रहा था …कोई भी इरादा हो सकता था ..चोरी या और कोई… जैसे कि सबको पता था 6 बजे के बाद गोदाम मे कोई नही रहता… इस चीज़ का कोई तो शायद फ़ायदा उठा रहा था… ऐसा मुझे लग रहा था …. मुझे दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुनाई दी…

मैं चुपकेसे नीचे उतरा… और अनाज से भरी बड़ी बड़ी बोरियोके पीछे से पिछले दरवाजे के पास वाली जगह जा पहुचा.. उधर से मुझे किसी आवाज़ की आहट हुई… मैं आवाज़ के थोड़ा नज़दीक गया… और बोरियो पीछे छिप गया… मैं जहाँ खड़ा था वहाँ अंधेरा था… मैं बोरियो पे चढ़ गया…. 20 से 40 बोरियाँ एक पे एक रखी थी… मैं चुपचाप उपर चढ़ के आवाज़ के नज़दीक पहुचा…. थोड़ा डर भी लग रहा था… समझ नही आ रहा था कि इधर क्या हो रहा है… हाथ मे पसीना आ रहा था… अब मैं जहाँ पहुचा उधर बल्ब लगा था और मैं जहाँ था वही से नीचे से बोरियोके बीच मे से आवाज़ आ रही थी..

मैने थोड़ी हिम्मत करके नीचे देखा… नीचे कोई और नही कल जिसने मेरा लंड मुँह मे लिया था वोही ताइजी का पति था…. गन्दू साला… पर मुझे समझ नही आ रहा था ये इस औरत के साथ जो उलटी खड़ी होने के कारण मैं देख नही पा रहा था… उसके साथ ये यहा क्या कर रहा है…

थोड़ी देर वो बाते करते रहे … मेरी धड़कन अभी शांत हुई आख़िर इस गन्दू से कौन डरनेवाला था… मैं इधर उधर करके देखा मुझे अंदाज़ा आ आ गया ये औरत दूसरी तीसरी कोई नही कॉंट्रॅक्टर बाबू की पत्नी है जिनको सब मैनी(माई) बुलाते है.. जब कल रात को हम खाना खा रहे थे तब ये भी वही थी….

पर ये यहाँ इस गन्दू के साथ क्या कर रही है..यही मुझे समझ नही आ रहा था… तभी वो थोड़ी तेज आवाज़ मे बात करने लगे और मैं सुनने लगा…

मैनी – पर इधर बुलाने की क्या ज़रूरत थी..

ताइजी का पति – ज़रूरत थी…. मेरा ये काम बस तुम कर सकती हो

मैनी – पर कैसा काम

ताइजी का पति – वोही काम

मैनी – वोही काम वोही कौनसा?

ताइजी का पति – जो मैने तुम्हे कुछ दिनो पहले बोला था

मैनी – वो काम मुझसे नही होगा… किसी को खबर लग गयी तो… नही बाबा नही नही…

ताइजी का पति – अरे नही किसी को पता नही लगेगी.. इसलिए तो तुम्हे यहाँ लेके आया हू…

मैनी – नही मैं पकड़ी गयी तो बहुत मुश्किल हो जाएगी

ताइजी का पति – अरे कुछ नही होगा…. अगर तुम मेरी ये बात नही मनोगी तो

मैं सेठ जी को तुम्हारी झोपड़ी वाली बात बता दूँगा

मैनी- अरे नही नही… ऐसा मत करना

ताइजी का पति – ठीक है तो मेरी बात मान जाओ जाना रंडी फिर

मैनी – पर तुम किसी को कुछ बताओगे तो नही ना..

ताइजी का पति – नही मेरी रानी… किसी को नही बताउन्गा…. तुम्हारे इन बिना ब्रा पहने आमो की कसम… जाओ तुम उस बोरी के पीछे खड़ी रहो जब मैं बुलाऊ.. तब आना…ठीक है……

मैं इस द्रुश्य को देख के दंग रह गया… आख़िर क्या चाहता था ताइजी का पति … कॉंट्रॅक्टर बाबू की पत्नी से…
 


वो पिछले दरवाजे से बाहर निकल गया और उसके निकलने के बाद पूरी गोदाम मे शांति हो गयी…

थोड़ी देर बाद पिछले दरवाजे से थोड़ी आहट हुई मैने देखा तीन बड़े बड़े लोग अंदर आ रहे है… उनके साथ ताइजी का पति भी है…… वो तीनो बड़े ही काले ख़ूसट मालूम हो रहे थे… शरीर एक दम घाटीला और मजबूत लग रहा था… एक से एक भरे हुए बदन थे उनके…. दो चार अनाज की बोरिया एक ठुसे मे नीचे गिरा दे ऐसे उनके हाथ थे….काले कपड़ो मे और काले शरीर से उनके शरीर चमक रहे थे… मैने इन्हे पहले नही देखा था…

उनमे से एक बोला – यहा तो कोई नही है बे गन्दू…

दूसरा ताइजी के पति की गर्देन पकड़ते हुए बोला – एडा बना रहा है क्या साले हमे यहाँ लाके…

ताइजी का पति – (खांसने लगा …) है यही है बस एक मिनट एक मिनट

दूसरे ने उसकी गर्दन छोड़ दी… ताइजी के पति ने आवाज़ दी ..मैनी जी बाहर निकल के आई और देखते ही ये कौन लोग है कौन लोग है पूछने लगी…..

ताइजी का पति – वोही जो मैने तुम्हे बोला था

मैनी – नही नही बाबा ये लोग तो बहुत ही ख़तरनाक लग रहे है मुझेसे ये नही होगा

एक बोला – क्यू नही होगा….

और वो मैनी जी के पास जाके उनका सौन्दर्य निहारने लगा

और बोला – वाह क्या माल है …कब्से इसे चोदने की चाह लगा रखी है हम ने

ताइजी का पति –तुम्हे अब मेरा काम करना होगा …अभी बोल दो हाँ या नही… नही तो तुम इसे छू भी नही सकते

उनमे से एक बोला – तुम्हारा काम हो गया समझो, ऐसे चूतरो के लिए हम तुम्हारा कुछ भी काम कर देंगे

मैनी जी देखते रह गयी, उन्हे कुछ समझ ही नही आ रहा था… और मुझे पूरी बात पता ना होनेके कारण मैं भी भ्रमित हो गया था….

एक ने ताइजी के पति को खिचा और बोला चल अब बाजू हट….

मैनी जी वही खड़ी थी… और वो थोड़ी डर भी गयी थी… ऐसे काले बन्दरो को देख के कोई भी डर सकता था

मैनी – नही ये मुझसे नही होगा… मुझे नही पता था तुम्हारी ऐसी करतूत करने तक मज़ाल जाएगी………

ताइजी का पति – तो क्या हुआ… मेरा मुँह बंद रखवाना है कि नही …

इतने मे उनमे से एक चिल्लाया – आए चल ज़्यादा बात मत कर चुपचाप खड़ी रह नहितो…

मैनी जी चुपचाप हो गयी. वो तीनो उसके पास आ गये… एक पीछे से चिपक गया… और गांद से अपना लंड घिसने लगा… एक ने सामने से जाके गालो को चाटना शुरू किया तो एक कपड़े उतारने लगा

जैसे ही उसने कपड़े उतारे वो जाके सामने से मैनी जी से चिपक गया और बाकियोने भी कपड़े उतार दिए… और मैने देखा… मा कसम …. क्या लंड थे उनके….लंबाई मे बिल्कुल मेरे जितने और मोटाई मेतो मेरे लंड से भी बड़े… उनके लंड देख के मैनी जी बोलने लगी ये क्या है इतने बड़े लंड मैने जिंदगी मे कभी नही देखे… मेरी चूत ने इतने बड़े लंड कभी नही देखे है ….

एक बोला तो अब देखेगी तेरी बुर हमारे लंड और तेरी इस मस्त बुर को मदमस्त बना देंगे ये…. और हसने लगे……

तीनो नंगो ने मैनी जी को बीच मे जाकड़ लिया….एक ने पीछे से हाथ डाल के सारी उपर उठा ली और पॅंटी के बीच से चूत मे उंगली करना शुरू किया ….आहह आआअहह… आवाज़े निकल रही थी…. तीन शरीर के बीच मे मैनी जी बहुत गरम हो रही थी तीनो उसे दबा रहे थे….. मैनी जी ने ब्रा नही पहनी थी इसलिए उनके लाल लाल निपल बाहर से अस्पष्ट दिख रहे थे एक ने उनके ब्लाउस के उपर से उनको चूसना शुरू किया और चबाना भी शुरू किया आहह आआआआअहह की आवाज़ अब बढ़ने लगी …इतने बलिष्ठ शरीरो के बीच का मज़ा अब मैनी जी को आने लगा था….
 


अब एक नीचे बैठ गया और पॅंटी पाँव से बाहर निकाल के बुर मे घुस गया और उन घने बालो की बनी उस दरार मे अपना मुँह घुसा दिया….. उपर दोनो ने ब्लाउज निकाल दिया और एक एक आम को मुँह मे लेके चूसने लगे…. आअहह आहह की आवाज़ अभी गोदाम मे गूंजने लगी…. उपरके दोनो ने भी अपने हाथ नीचे लाके बुर के बालो को सहलाना शुरू किया… तीन तीन बड़े काले हाथ बुर को घिसने से मैनी जी पूरी पागल हुए जा रही थी … नीचे जो बैठा था उसने बुर के लाल लाल होंठो को चाटने के साथ बुर मे एक उंगली घुसा दी और मस्त अंदर बाहर करने लगा… बुर थूक से चमक रही थी …उपर दोनो निपल्स को अपने मुँह मे भरके चुसते चुसते पप्पिया लेते हुए उम्म्म्म… उम्म्म्मम आवाज़े निकाल रहे थे….

अब उन्होने उसे घोड़ी की तरह झुका दिया और गांद और बुर मे उंगलिया डालना शुरू किया… सामने से एक ने लंड मैनी जी के मुँह घुसा के चुसवाने लगा….

अब एक काले ने मैनी जी को अपने हाथो से उठाया और छोटी बच्ची की तरह उपर उठा कर कमर के उपर तक ले आया… और नीचेसे बराबर निशाना लगा के मैनी जी की बुर मे अपना लॉडा घुसेड दिया…. मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गाइिईईईईईईईईईईईईईई बचााआआआआाआऊऊऊ…. इस जुन्गाआआआआअलिईईए से बचाआााू……. एक दम आवाज़ आई… वो काला लंड नीचे से एक दम बुर मेघुसने के कारण पूरा अंदर तक घुस गया था इस वजह से वो चिल्ला रही थी… और वो कला मैनी जी की एक ना सुनते हुए उनको अपने बड़े काले हाथो मे उठाए लंड पे उपर नीचे करते जा रहा था ….. मैनी जी एक दम बड़ी साँसे ले रही थी… और अपनी आवाज़ को नियंत्रण मे लाने की कोशिस कर रही थी …उस काले ने अब और ज़ोर्से दबा के गपॉगप लंड अंदर बाहर चालू किया और मैनी जी की पीठ को एक अनाज की बोरी से चिपका के झटके मारने लगा…. उसके झटको के प्रहार से मैनी जी की आँख से पानी निकल आया था, वो लगभा कसमसा रही थी… पाँव अकड़ रहे थे …अभी ऐसी चुदाई का अनुभव ना होने के कारण ये सब हो रहा था…..

उस पहले काले ने अपने पूरे लंड को उस कोमल मुलायम बालोसे भरी बुर मे उतार दिया था और घुड़सवारी किए जा रहा था… झटको की गति अचानक बहुत बढ़ गयी…मैनी जी पूरी कोशिश के साथ अपनी आवाज़ पे नियंत्रण पा रही थी … क्यूँ कि उनकी आवाज़े अगर कोई सुन लेता तो पूरा भंडा फुट जाता…. उस काले ने मैनी जी को नीचे उतारा और सारी उपर कर दी…. एक पैर हवा मे उठा के उसे एक हाथ से पकड़ लिया अब मैनी जी के दोनो हाथ सामने वाली बोरी पे थे…. और एक पैर हवा मे और एक ज़मीन पर…. उस काले ने पीछे से आके ज़ोर्से धक्के मारने शुरू किए… मैनी जी के चूतर और दूध बहुत ज़्यादा गति से आगे पीछे हो रहे थे… तभी वो काला रुक गया.. और उसने अपना पानी मैनी जी की चूत के अंदर छोड़ दिया …कुछ पानी नीचे टपकने लगा….

अब दूसरा आया और उपर मुँह करके नीचे सो गया और मैनी जी को लंड पे बिठाया. मैनी जी के हाथ अपने हाथो मे लिए और जमके पकड़के दबा के, नीचेसे बुर मे लंड घुसा दिया और अपनी गांद को उपर हिलाते हुए, उस बहती बुर के अंदर घुसाने लगा….. लंड अंदर घुसते गया… मैनी जी की साँसे बढ़ती गयी थोड़ी देर मे वो भी मैनी जी की बुर के अंदर ढेर हो गया और अब उस सूजी हुई बुर से और ज़्यादा पानी बहने लगा…..

तीसरा भी कहाँ रुकने वाला था उसने मैनी जी की घोड़ी बना दी और सवार हो गया…. मानो जैसे कोई लड़ाई करने जा रहा है ..एक पल मे उसने अपना पूरा लंड मैनी जी की चिकनी फूली सूजी बुर मे घुसा दिया और अपने रथ को बुर की सीमा की तरफ दौड़ने लगा…. ग्ाअपप्प्प्प्प्प…गाप्प्प्पालक्

कक्कक…..पकचह पापक्चह….पचाकककक पकक्ककचहाककक…. आवाज़े आ रही थी…. मैनी जी अभी भी अपनी आवाज़ पे काबू पाई हुई थी … पर उनका शरीर बहुत ही ज़्यादा कसमसा रहा था….. वो एक दम से अकड़ गयी थी … इसलिए एक ने आके मैनी जी की गांद को फैलाया और फिर तीसरे ने अपने धक्के फिरसे पूर्ववत करारे झटके मारने शुरू किए…. उपर से बुर एक दम लाल लाल और फूली हुई दिख रही थी… इन काले लुंडो का प्रहार उससे सहा नही जा रहा था….. आख़िर मे तीसरा भी गिर पड़ा उसने पूरा वीर्य अंदर तक छोड़ दिया….. मैनी जी के बुर के बाल पूरे सफेद लग रहे थे उनपे पूरा वीर्य जम गया था…. और सब बाल एक दूसरे से चिपक गये थे अभी घोड़ी अवस्था मे होनेके कारण तीनो का रस मैनी जी की बुर से नीचे गिर रहा था…..

क्रमशः...................

 
नौकरी हो तो ऐसी--19

गतान्क से आगे…………………………………….

अब तीनो थोड़े सुस्त हो गये और अपने कपड़े पहेन के निकल लिए… उनके पीछे ताइजी का पति निकल गया और अब बस बची थी मैनी जी - वो हल्केसे उठी उसने अपनी सारी के पल्लू से बुर से निकल रही लार को पोछा और सारी पहेन ली और ब्लाउस चढ़ा लिया ….और निकलने लगी… बोरियो का सहारा लेते हुए हल्के हल्के वो पिछले दरवाजे की तरफ बढ़ रही थी…. उसकी चाल से ये ज़रूर पता चल रहा था कि इस चुदाई ने उनकी चूत की लगा डाली है…. धीरे धीरे वो दरवाजे पे पहुचि और दरवाजा बाहर से खिच लिया… बाहर से कड़ी लगाने की आवाज़ आई थोड़ी देर मे गाड़ी जाने की आवाज़ आती रही..

मैं जहाँ छुपा था बोरियो के उपर वही था… और सोच रहा था कि ऐसा कौनसा राज़ होगा जिसके कारण कॉंट्रॅक्टर बाबू की पत्नी – मैनी जी इस चुदाई के लिए तैय्यार हो गयी…. और ताइजी के पति का उन तीनो के पास क्या काम था जो उसने मैनी जी को उनसे चुदवाया…

बाहर बहुत अंधेरा था, मैं बोरियोसे नीचे उतरा… गोदाम के बाहर निकाला और हवेली की तरफ चल दिया. हवेली पहुचते पहुचते 8 बज गये मैं फ्रेश होके बैठा ही था कि मालंबंती – कॉंट्रॅक्टर बाबू की छोटी लड़की आई और मुझे खानेपे बुलाया है कह के चली गयी…

मैं रसोई घर मे पहुचा, सब लोग बैठे थे मैने नीचे गर्दन की और जाके अपनी जगह पे बैठ गया… तभी

रावसाब बोले – और कैसे चल रहा है काम?

मैं- काम ठीक चल रहा है....

राव साब – तुम्हे वसूली का काम भी सौंपा है मैने सुना है?

मैं – हां…..

राव साब – अच्छा काम है …..मेहनत लगन से करोगे तो बहुत कुछ पाओगे

इस बात पर कॉंट्रॅक्टर बाबू और वकील बाबू राव साब की तरफ देख के आँखे मिचकाने लगे और हल्केसे हस्ने लगे…

ताइजी का पति भी वही बैठा था पर वो इन साबो की बातो पर ध्यान ना देते हुए खाना खा रहा था… मैनी जी दिख नही रही थी लग रहा था कि जबरदस्त चुदाई के कारण विश्राम करने गयी हो… ताइजी भी नही थी कही पे कल रात की चुदाई की वजह से उनकी भी हालत पतली होगी शायद…. और उसमे उन्हे पता भी नही था कि उसे चोदा किसने है…..

मैने बाकी महिलाओ पे नज़र डाली, छोटी बहू मेरे लिए खाने की प्लेट लेके आई… वो मस्त पल्लू वाली सारी पहनी हुई थी… और उसमे उसकी गांद के उभार और ज़्यादा घुमावदार लग रहे थे…. मैने एक नज़र सब पे डाली…. तभी मेरे दिमाग़ मे कुछ चमका…. किसी के तो निपल स्पष्ट मेरे दिमाग़ मे चमके…. मैने धीरे फिर नज़र घुमाई तो देखा छोटी बहू ने ब्रा नही पहनी थी और पीले रंग के ब्लाउस मे से उसके निपल चमक रहे है…. छोटी बहू की तरफ एक बार फिर देखा उसने मुझे हलकीसी आँख मारी …और आँख मारते मारते अपनी चुचियो की तरफ इशारा किया…

मैं चुपचाप नीचे देख कर खाना ख़ाता रहा, मुझे अक्सर लगता था कि सभी औरतो की नज़रे इस घर मे मेरे पे ही टिकी रहती है… इसलिए मैं उपर देखना टालता था पर जब भी कोई सब्जी या रोटी देने आता तो अपनी बड़े बड़े आमो का दर्शन दिए बिना नही जाता और अक्सर ज़्यादा टाइम तक मुझे दर्शन मिलता…

थोड़ी देर मे रसोईघर मे नलिनी आई…वोही नलिनी जिसको खुद अपने बाप-वकील बाबू और बाप जैसे दूसरे राव साब ने चलती गाड़ी मे चोदा था….

मैने देखा कि जैसे ही वो आई कॉंट्रॅक्टर बाबू बैचेन हो गये…… उनकी बैचैने का राज़ मुझे भली भाँति पता था ….वो सीधे पीछे चली गयी हाथ धोके आई और जहाँ पे बाकी लड़किया बैठी थी वही बैठ गयी… इधर लड़कियो के बारे मे एक विशिष्ट बात ऐसी थी कि वो ब्रा मतलब कमीज़ के अंदर कुछ भी नही पहनती थी…. इसीलिए उनके दूध जैसे ही वो चलने लगती उछलने लगते…. और मस्त लय ताल मे अपने दर्शन देने लगते…. फिर सामने वाला बूढ़ा भी क्यू ना हो उसका उठना ही उठना है….
 


मेरा खाना ख़तम हो गया मैं मुँह हाथ धोके दीवान खाने मे आ गया…. थोड़ी देर सेठ जी से बात की और उनकेपास ही बैठा रहा…. फिर सब लोग सोने जाने लगे…. मैने देखा मालंबंती- कॉंट्रॅक्टर बाबू की छोटी लड़की और नसरीन- वकील बाबू की छोटी लड़की मेरे पास आई …. और बोलने लगी

मालंबंती – आज हमे कहानी सुनाएँगे ना

नसरीन – हन आज वो हमे ज़रूर कहानी सुनाएगे

मैं – आज अभी……

मालंबंती – हां आपने ही तो कल बोला था

नसरीन – हां हां अपने बोला था कल सुनाउन्गा कहके….

मैं – पर अभी बहुत ज़्यादा वक़्त हो गया है मैं कल संध्या को सुनाउन्गा तुम लोगो को

वहाँ बाजू मे सेठ जी भी बैठे थे, वो हमारी बातें सुन रहे थे, उनको देख के लड़किया बोलने लगी

मालंबंती – दादाजी इन्हे कहिए ना हमे कहानी सुनाए

नसरीन – हां हां दादाजी कहिए ना कहिए ना………… मैं सेठ जी की तरफ देखने लगा

सेठ जी – अरे तुम लोग अभी इतनी बड़ी हो गयी हो अच्छे कॉलेज मे जाती हो अभी क्या कहानी सुनोगी…

मैं – आपका कहना बिल्कुल उचित है सेठ जी

मालंबनती – क्यू नही सुन सकते दादाजी, नलिनी दीदी तो आज भी कहानी सुनती है

नसरीन – वो कुछ नही दादाजी हमे कहानी सुननी ही है….

सेठ जी – ठीक है पर उसे थोड़ा काम है… (और मेरी तरफ देख कर सेठ जी बोले)…. वो छोटी बहू को तुम्हारे पास कुछ काम है… उससे ज़रा मिलके आना…

नसरीन – फिर हमारी कहानी का क्या

सेठ जी – वो आ जाएगा तुम्हे कहानी सुनाने थोड़ी ही देर मे …जाओ तुम लोग तब तक जाके अपनी पढ़ाई करो….

मैं सेठ जी का आदेश लेके छोटी बहू के कमरे पे पहुचा दरवाजे पे थपथपाया… दरवाजा खुला… दरवाजा खोलने वाला और कोई नही सेठानी जी थी ...

मैं बोला – आप्प्प्प…..

सेठानी – अरे तुम्हारी चुदाई बहुत याद आ रही थी

छोटी बहू- हां इसलिए ये इंतज़ाम किया है

मैं – पर मैं यहाँ नही रुक सकता इधर का निपटा के मुझे सेठ जी ने लड़कियो को कहानी सुनाने के लिए कहा है

छोटी बहुत – वो बाद मे देखेंगे पहले तुम अंदर तो आओ

सेठानी और छोटी बहू मस्त दिख रही थी…. सेठानी के गाल और छाती मेरे लंड को आवाहन दे रही थी और छोटी बहू के वो बड़े बड़े ब्लाउस मे से दिखने वाले निपल मुझे चूसने के लिए आम्न्त्रित कर रहे थे…. सेठानी मेरे पास आई और मेरी जाँघो पे हाथ रख के सहलाने लगी… मेरा लंड मे तनतना शुरू हो गया… उधर छोटी बहू ने अपनी सारी और ब्लाउस उतार दी… और बाद मे पॅंटी भी उतार के पूरी नंगी हो गयी… और दीवान पे लेट गयी… और मुझे आँख मारने लगी…

मैने अपनी पॅंट उतार दी उधर सेठानी ने भी अपने सारी निकाल दी…. जैसे ही मैने पॅंट निकाला सेठानी ने मेरा लंड अपने मुँह घुसेड लिया और पच्चाआक पकचाककक पुच पुचह पचाककककक आआवाज़ निकाल के उसे चूसने लगी….. मैने उसके मुँहे से लंड निकाला और सेठानी को छोटी बहू की बुर को गीला करने को कहा

सेठानी ने पचाक से उसकी बुर पे थूक दिया और मस्त बुर और मस्त दिखने लगी मैने अपना सूपड़ा उस कोमल गुलाबी योनीप्रवेश द्वार पे रखा और अगली ही पल अपने गन्ने को बिल मे घुसा दिया…. आअहह आआहह मसत्थत्टटटटटटटटटतत्त………… चोदूऊऊऊऊऊऊ मुज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज ईईई ईईईईई…. .बहुउऊुुुुुउउत्त्त तदपि हहुउऊउ 2 डिन्नस्ीईई …तुम्हरीईई इस लुंदड़ड़ के लिए.ईईईईई मैं धक्के मारते रहा वो मुँह के उपर तकिया रख के आवाज़े निकालती रही….. उतने मे बाजू मे अपनी चूत फैला के सेठानी सो गयी… मैने अपना नाग बिल से निकाला और सेठानी के फूल मे अपना हथौड़ा घुसा दिया… सेठानी मदमस्त होने लगी….. माआआआआआररर्र्र्र्र्र्र्र्ररर मेररीइ….आअहह माआआआआअज़ाआाआआआ आआआआआ रहाआ हाइयाीइ…… ज़ॉर्सीई….. ज़ोर्से…

मेरा इतना बड़ा लंड अभी पूरा का पूरा सेठानी की बुर मे फसने लगा, और किसी के बुर मे मेरा पूरा लंड नही समा सकता था अलावा सेठानी के… सेठानी के चूतर जगह पे ही फैल रहे थे और जमे रहे थे … बहू ने सेठानी की चुचिया अपने मुँह मे भर के उनको मस्त चूसना शुरू किया था उसकी वजह से सेठानी के बूब एक दम कड़क और निपल एक दम सख़्त हो गये….

मैने अपना लंड बाहर निकाला…. छोटी बहू के मुँह मे दिया उसने मस्त थूक डाल के उसको मस्त चूसा और फिर अपनी बुर मे ले लिया बहू की दूध से भरी चुचिया घोड़ी अवस्था मे जबरदस्त हिल रही थी… मैने धक्को की गति को तीव्र किया…. उतने मे सेठानी ने आकर लंड बाहर निकाल के मुँह मे भर लिया…गोतिया मुँह मे भर के उनकी अपनी जीब से मस्त मालिश कर दी…

 


सेठानी का हाथ पकड़ के मैने सेठानी को ज़मीन पे लिटाया और उनकी टांगे नीचे उपर करते हुए उनके हाथो के पास दबा दी…. और अपना सूपड़ा उस खुली मदमस्त बुर मे चढ़ा दिया …. सेठानी मदमस्त हो रही थी और इतने बड़े लंड से मिलने वाले महान सच का अनुभव कर रही थी…. बहू ने बीच बीच मे मेरा लंड निकाल के अपने मुँह मे भर के चिकना करने की ठान रखी थी…. अब मेरे नियंत्रण के बाहर बात जाते दिखी मैने बहू को लंड निकाल ने से मना कर दिया और ज़ोर्से धक्का मार कर पूरा का पूरा वीर्य सेठानी की बुर मे उतार दिया…. धीरे से मैने अपना लंड बाहर निकाला उसे छोटी बहू ने मुँह मे लेके उसे मस्त सॉफ किया और मैं फटाफट कपड़े पहेन के सेठ जी के पास वापस आ गया….

सेठ जी दीवानखने मे ही बैठे थे…लगभग 9.30 बज रहे थे … मुझे देखकर बोले – अरे तुम इतने वक़्त वही थे क्या…

मैं- हां सेठ जी… ज़रा मालकीन ने काम बोला था

सेठ जी – ठीक है पर ये तुम्हारे बाल और कपड़े इतने खराब कैसे हो गये…

मैं – वो कुछ सामान उपर के कपाट से निकालना था उसमे मे थोड़ी धूल थी इसलिए…..

सेठ जी – ठीक है ठीक है...

सेठ जी को मेरी हर एक बात पर बहुत जल्दी भरोसा हो जाता था.... उतने मे ही मालंबंती अपने संतरो को हिलाते हिलाते आ गयी. उसके निपल्स कमीज़ के उपर से तने हुए दिख रहे थे और मैं अभी कामवासना शांत करने पर भी गरम होने लगा था , वो मेरे पास आके बोली- हो गया ना काम तो चलो अभी हमे कहानी सुनाने……

मैं – पर वक़्त बहुत हो गया है

सेठ जी – जाने दो जिद्द कर रही है तो सुना दो इसे और नसरीन को एक कहानी…

पर एक ही सुनना …सबेरे इन्हे जल्दी उठना है ….

मालंबंती खुश हो गयी और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे लेके अपने कमरे मे आई… मैने देखा दीवान पे कुछ किताबे पड़ी थी और नसरीन वही पढ़ रही थी… वो कुछ लिख रही थी गद्दे पे किताब रख कर इसलिए पूरी झुकी हुई थी इस वजह से उसके बूब कमीज़ से बाहर झाँक रहे थे… गोरे गोरे कोमल बूब्स मस्त महॉल बना रहे थे…. पता नही मैं तो बस कहानी सुनाने आया था पर……

मैं दीवान पे बैठ गया… नसरीन मुझे देख कर खुश हो गयी…

मालंबंती भी बैठ गयी वो दोनो मेरे सामने बैठी थी और मैं देवान को पीठ लगाए सामने अपने पैर लंबे करके आराम से बैठा था…

मालंबंती – तो सूनाओ कहानी

मैं – कौनसी कहानी सुनोगी

नसरीन – कोई भी पर एक दम मस्त होनी चाहिए

मैं – मस्त कहानी ठीक है

मैने अपनी पदवी शिक्षण(डिग्री एजुकेशन) के 3 साल के दरम्यान बहुत सारी किताबे पढ़ी थी, जिनमे एक से एक कहानिया थी… और मैं पहलेसे ही कहानियो मे बहुत ही ज़्यादा शौक रखता था…. इसलिए मुझे बहुत सारी कहानिया पता थी….

मैने एक कहानी चुनी जिसमे बहुत सारे उतार चढ़ाव थे.. और बीच मे रहस्यमय और दिल की धड़कने तेज़ करनेवाले प्रसन्ग थे…

क्रमशः...................

 
नौकरी हो तो ऐसी--20

गतान्क से आगे…………………………………….

मैने कहानी शुरू की तो दोनो भी मस्त ध्यान लगाके कहानी सुनने लगी… जैसे ही कहानी आगे बढ़ने लगी वैसे वो लोग और मशगूल हो गये…. अभी कहानी मे नाटकीय पड़ाव आया जिसमे लड़का लड़की को ढूँढ रहा है बीच घने जंगल मे और वो उसे मिल नही रही है… थोड़ा सा डरावना प्रसंग था...

इतने मे मालंबंती और नसरीन मेरे बाजू आई मैने कहा – क्या हुआ

दोनो – डर लग रहा है

मैं – अरे येतो सिर्फ़ कहानी है

नसरीन- नही पर ये डरावनी है

मालंबंती - हम दोनो आपके पास बैठे?

मैं – क्यू

नसरीन – आप के पास आपका हाथ पकड़ कर बैठेंगे तो हमे डर नही लगेगा… दादी जब हमे कहानी सुनाती है और हम डर जाते है तो हम उनका हाथ थाम के बैठ जाते है

मैं – ठीक है ….आओ बैठो मेरे पास

दोनो एक एक बाजू से मुझसे चिपक गयी… वैसे ही मेरे शरीर मे लहर दौड़ गयी… उन हसीन जवान स्पर्शा ने मेरे अन्ग अन्ग मे ज्वाला लगा डाली… मैं सोचने लगा इस अवस्था मे हवेली मे मुझे किसीने देख लिया तो मेरे तो लग जाएँगे.. मैं बोला – एक काम करो ये दरवाजा बंद कर लो

नसरीन – हाँ मुझे भी ऐसे ही लग रहा है क्यू कि ऐसा लगता है कि दरवाजे के बाहर से कुछ तो आवाज़े आ रही है

मालंबंती उठी और गांद हिलाते हुए जाके दरवाजा बंद कर दिया अब मैं निश्चिंत हो गया. अभी ये दोनो मुझसे कितनी भी चिपके मुझे कोई फ़र्क नही पड़नेवाला था.. मेरा लंड नीचे अभी सलामी देने लगा था…

हम तीनो साथ मे बैठ गये वैसे मैने आगे कहानी बताना शुरू किया, जैसे ही कहानी आगे बढ़ी मैने कहानी मे और थोड़े डरावने किस्से डाल दिए इस वजह से वो दोनो मुझसे और चिपक गयी…

नसरीन ने अपना सर मेरे बाए कंधे से पूरी तरह चिपका लिया मानो जैसे कंधे पे रख दिया हो… उसकी वो गरम साँसे मुझे उत्तेजित करने लगी. मेरी छाती पे उसकी हर एक गरम साँस मेरी शर्ट को भेदकर हलचल मचाने लगी…. उसके वो मुलायम गाल मुझसे कुछ इंच की दूरी पे थे… पर मैने अपने पे काबू रखा हुआ था….
 


उधर मालंबति बोली – मुझे आपकी गोद मे बैठना है

मैं – अरे क्या हुआ............अब?????????

मालंबति - दादीजी हमे जब भी कहानी सुनाती है तो और हमे बहुत ज़्यादा डर लगने लगता है तो अपने गोद मे बिठा के कहानी सुनाती है

मैं – क्या …. गोद मे

नसरीन – हां… और वो हमे कभी ना नही बोलती

मैं – पर मैं तुम्हे गोद मे नही बिठा सकता

मालंबंती – अरे आप हमे गोद मे नही बिठाएँगे तो मैं दादाजी को बोल दूँगी

मैं – ठीक है आओ बैठो

मैने अपनी टाँगे मोड़ ली… और पालती डालकर उसको अपने गोद मे बिठा दिया… बाजू मे नसरीन अपना सर पूरा मेरे कंधे पे टिकाए आँखे लगाकर मस्त हो रही थी… उसके शरीर मे मेरे स्पर्श से ज़रूर कुछ तो हलचल हो रही थी इसलिए उसने आँखे बंद कर रखी थी…. मालंबंती जैसे ही मेरी गोद मे बैठ गयी मेरी जाँघो मे एक दम से उर्जा दौड़ गयी…. उनमे अचानक से ताक़त आ गयी मानो…. मेरी जंघे उसकी वो मस्त गांद से मदमस्त होके चिपक रही थी…

मेरे लंड महाराजा का हाल बहुत ही ज़्यादा बुरा हो चुका था…. वो चुदाई से पहले वाला रस उगल रहा था और मेरी पॅंट मे तंबू बनाके बैठा था

मैं बहुत ही बड़ी कशमकश मे था कुछ करू तो दुविधा नही करू तो लंड दुविधा… कहानी से ध्यान काफ़ी भटक रहा था तब भी मैं सुना रहा था… तभी मैने देखा नसरीन का हाथ मेरी पॅंट पे है और वो मेरी पॅंट के उपर से हल्के हल्के हाथ घुमा रही है… मेरी उत्तेजना की सीमाए बढ़ रही थी उधर मैं कहानी बताए जा रहा था

तभी मैने पाया मालंबंती का हाथ भी मेरी पॅंट पे घूम रहा है वो मूड के थोड़ा चेहरा मेरी तरफ करके फिरसे मेरी एक टाँग पे गांद रख के बैठ गयी और दोनो मिलके मेरी पॅंट को सहलाने लगे…

मैं मदहोश हुए जा रहा था मैं तो यही चाहता था…. पर थोड़ा विरोध दर्शाना मैने ठीक समझा

मैने कहा –अरे कककक .. क्या ………????

नसरीन – कुछ नही आप बस कहानी सुनाइए….

मैं अपनी कहानी बड़बड़ाने लगा. दोनो ने नीचे मेरी पॅंट की चैन खोल दी… और मेरे लंड को बाहर निकाल के उससे खेलने लगी दोनो के निपल्स एक दम टाइट हो गये थे.. और चेहरे पूरे लाल… मैने भी थोडिसी हरकत करना ठीक समझा और मालंबंती की पीठ को पीछे से सहलाने लगा…. वो और गरम हो रही थी…. दोनो मिलके मेरे सूपदे की चमड़ी उपर नीचे खिच रही थी….

तभी मालंबंती उठी और उसने दीवान पर खड़े होके अपनी सलवार निकाल दी और बाद मे पॅंटी भी मैं देखते रह गया वो गोरी गोरी मांसल जंघे ओए वो कमसिन जवानी …वाह क्या माल थी वो सलवार निकाल के वो मेरे पास आई और मेरी पॅंट का हुक खोल दिया नसरीन थोड़ा बाजू सरक गयी और मालंबंती ने मेरी पॅंट के साथ मेरी अंडरवेर भी पाव से बाहर खिच ली मैं नीचे पूरा नंगा हो गया….
 


मालंबंती ने फिरसे मुझे गोद मे बिठा ने कहा और मैने पालती मार के उसे गोद मे बिठा लिया उधर नसरीन ने अपनी कमीज़ निकाल दी…. वाह क्या नज़ारा बन रहा था उसने कमीज़ निकाली और उसके वो मस्त संतरे जैसे दूध एक दम सख़्त अवस्था मे थे…. वो निपल्स अपने गुलाबी लाल रंग से मुझे मदहोश करने लगे…

मेरा कहानी सुनाना अभी भी जारी था… और कहानी मे एक से एक सुरीले पड़ाव लाके सुना रहा था….

मालंबंती की गोरी गोरी जंघे मेरी जाँघो पे घिस रही थी और मेरे हाथोसे नसरीन के कोमल स्थान… मालंबति की गांद के बीच की दारर मे मेरा लंड फिट बैठ था और संभोग पूर्व पानी छोड़ रहा था…. नसरीन से रहा नही गया उसने मेरे गालो पे चूमना शुरू किया इसका असर ये हुवा कि मेरा बोलना बंद हो गया… कहानी रुक गयी और हक़ीकत रंग लाने लगी… नसरीन के कोमल होठ मेरे गालो पे फूल के अनुभव जैसा रोमांच पैदा कर रहे थे… मेरे गोद मे मालंबंती गरमा हो हो के लावा बन चुकी थी.. उसका पूरा चेहरा काम वासना से भर गया था…. और नसरीन अभी मेरी छाती को चूमे जा रही थी….

उतने मे मैने कहा – चलो अभी कुछ अलग करते है

नसरीन – अलग…. अलग क्या?

मैं – अलग मतलब कुछ …तुम्हे पता है जैसे…

मालंबंती – जैसे ??... जैसे तैसे क्या… ये मस्त है

मैं – ये तो है ही पर इससे भी कुछ अच्छा है… अगर तुम चाहो तो?

नसरीन – हाँ हाँ हमे चाहिए बताओ ना और क्या और क्या ….

मैं – वो जो तुम्हारी बुर है उसमे ….

मालंबंती – उसमे क्या…. उसमे तो मेरी उंगली भी नही जाती…. और उधर बहुत कुछ होता है

मैं – हाँ वो जो होता है… उससे भी ज़्यादा मज़ा आता है ….

नसरीन – नही पर उधर नही… उधर उंगली डालने पे बहुत दुखता है… इससे अच्छा आप हमे बस गोद मे बिठा के कहानी सूनाओ

मालंबंती – हाँ हमे आप की गोद मे ही मज़ा आता है….

मैं इन दोनो लड़कियो को कैसे समझाऊ कि जो तुम कर रहे हो वो तो बस काम क्रीड़ा की पहली सीढ़ी है… पर समझाना इतना आसान नही लग रहा था क्यू कि ये तो उधर उंगली डालने को भी नही दे रही थी… मैने कुछ सोचा और उनकी तरफ मूड के बोला

मैं – ठीक है…. पर उधर अगर तुम्हे दर्द होता है तो और …

मालंबति – और क्या…..???

मैं – और एक जगह है जहा तुम्हे उंगली डालने से कम दर्द होगा..

नसरीन – कहाँ कहाँ…..???

मैने मालंबंती को थोड़ा सा उपर उठाया और उसकी गांद के छेद पे उंगली रख के दोनो से कहा यहाँ
 


दोनो एक साथ बोली – यहाँ …. यहाँ कैसे…. यहा तो कुछ छेद दिखता भी नही

मैं – पर तुम लोगोने कभी यहा उंगली डाल के देखा है

दोनो – नही तो …

मैं – इसलिए तुम्हे पता नही ….

दोनो – क्या???

मैं – यही कि इधर उंगली डालने से बहुत कम दर्द होता है और मज़ा भी बहुत आता है …. और इससे तुम्हारा जो उपर वाला जो छेद है उसको भी खोलने की ज़रूरत नही ….मालंबती के छेद के उपर हाथ रखते हुए कहा

नसीन – पर ये कैसे होगा …इधर तो कुछ छेद है ही नही ???

मैं – मैं दिखाता हू ना तुम्हे ….

मैने मालंबंती को घोड़ी के जैसी अवस्था मे झुकाया.. नसरीन को उसके चूतरो को फैलाने को कहा और मालंबंती की नाज़ुक गोरी लाल लाल गांद के छेद पे नसरीन को बोला

मैं – ये देखो…. है ना छेद

नसरीन – पर ये तो बहुत छोटा है …इधर उंगली कैसे जाएगी

मैं – यहा उंगली नही मेरा लंड भी जाएगा

मालंबनती – क्या तुम इधर अपना लंड डालोगे?

मैं – हां… और तुम्हे सबसे ज़्यादा मज़ा आएगा

मालंबंती – नही नही नही बाबा मुझे नही इतना बड़ा लंड अपने इतने छोटे से छेद मे डलवाना है मेरा दिल बोल रहा है कि इसमे आप की कोई चाल है

नसरीन – अगर इसमे बहुत मज़ा है तो आप मेरी गाड़ के छेद मे ये लंड डाल दो… पर मज़ा आएगा ना बहुत …जैसे गोद मे बैठने से आया था (मालंबती नसरीन की हिम्मत और तंग शरीर की तरफ देखती रह गयी)

मैं – (नसरीन की चुचियाँ हाथ मे मसलते हुए)हाँ तुम्हे बहुत मज़ा आएगा पर उससे पहले हमे कुछ करना पड़ेगा…

मालंबती – क्या करना पड़ेगा…

मैं – तुम कपड़े पहेन कर जाओ … और किचन से तेल की शीशी लेके आओ

मालंबनती – क्यू तेल क्यू…

मैं – इसमे लगाने के लिए …तभी तो मेरा लंड इसमे जाएगा….. नहितो फिर दर्द होगा…

नसरीन – नही नही दर्द नही होना चाहिए… मालू तू जा गुपचुपसे किचन से तेल की सीशी लेके आजा

मैं – पर ख़याल रहे चुपके से लाना और किसिको नही बताना….. और कोई पूछ भी ले तो बोलना कि पाव मे मोच आई है इसलिए लगाने लेके जा रही हू

क्रमशः...................

 
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