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परदेसी से अंखिया लड़ी

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परदेसी से अंखिया लड़ी

डॉली गर्मियों की छुट्टी में अपनी मौसी के गांव आई थी। उस समय उसकी उम्र तकरीबन……साल की रही होगी। उसकी मौसी की लड़की ज्योति उससे एक साल ही छोटी थी लोकिन वो उसे दीदी कहकर बुलाती थी। डॉली ज्योति के साथ पूरे गांव में फ्राक पहनकर घूमा करती थी। हांलाकि गांव वाले उसे इस लिबास में देखकर फब्तियां कसा करते थे, लेकिन वो किसी की परवाह नहीं करती थी।

एक दिन डॉली और ज्योति गांव की चौपाल पर पहुंची जहां पहले से ही चार-पांच लड़के खड़े थे। उनमें एक लड़का अपेक्षाकृत कुछ बड़ा था, जिसका नाम राज था। डॉली को गांव में घूमते इतने दिन हो गए थे कि वो पहले से ही सभी को जानती थी।

राज ने उससे पूछा आइस-पाइस खेलोगी?\

वो कैसे खेलते हैं? डॉली ने पूछा।

हममें से एक लड़का चोर बनेगा और बाकी सभी छुप जाएंगे। चोर बना लड़का जिसे पहले ढूंढ़ लेगा अगली बार वो दाम देगा। राज ने बताया।

ठीक है, डॉली ने कहा।

चोर बनने का नंबर अमर का आया और वो दाम देने चला गया। सभी छुपने की जगह ढूंढने लगे। राज ने डॉली का हाथ पकड़कर कहा,

मेरे साथ आओ। मैं तुम्हे ऐसी जगह छुपाउंगा कि अमर तो क्या उसका बाप भी नहीं ढूढ पाएगा।

डॉली राज के साथ चली गई। राज उसे पास के एक घर के एकदम पीछे वाले कमरे में ले गया, जहां बहुत अंधेरा था।

डॉली ने कहा, यहां तो बहुत अंधेरा है मुझे डर लग रहा है।

घबराओ मत मैं तुम्हारे साथ हूं। राज ने कहा और डॉली का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। राज डॉली के पीछे खड़ा था और डॉली के चूतड़ उसकी जांघों को छू रहे थे। राज ने अपना एक हाथ डॉली के कंधे पर रख लिया। अचानक उसका हाथ फिसलकर डॉली की चूंचियों पर आ गया तो डॉली बोली,

डॉली =यहां से हाथ हटाओ न गुदगुदी होती है।

राज =लेकिन यहां हाथ लगवाने में मजा भी बड़ा आता है।

डॉली =तुम झूठ बोलते हो।

राज =कसम से डॉली अच्छा अगर तुम्हे ठीक न लगा तो मैं हाथ हटा लूंगा।

ठीक है। डॉली ने कहा।

डॉली के इतना कहते ही राज ने उसकी चूंचियां पकड़ ली और दबाने लगा। डॉली की चूंचियां हाथ में आते ही राज का लंड झटके से डॉली के चूतड़ों से टकराया तो वह उछल पड़ी। राज धीरे-धीरे उसकी चूंचियों को दबाने लगा और अब तो डॉली को भी मजा आने लगा। राज ने अपना एक हाथ डॉली की फ्राक में डाल दिया। डॉली की नंगी चूंचियां हाथ में आते ही उसका लंड एक बार फिर झटके के साथ डॉली के चूतड़ों से टकराया, तो डॉली उछलकर बोली,

ये तुम बार-बार मेरे चूतड़ों पर डंडा क्यों मार रहे हो।

राज =ये डंडा नहीं पगली मेरा लंड है। अच्छा ये बताओ तुमने कभी किसी का लंड देखा है।

डॉली =तुम्हे लड़कियों से ऐसी बात करते हुए शर्म नहीं आती। डॉली ने शर्मा कर कहा।

राज =देखो डॉली आदमी अगर शर्म से काम ले तो बहुत सी मजेदार चीजों से वंचित हो जाता है। बताओ न तुमने किसी का लंड देखा है।

डॉली =बड़ों का तो नहीं लेकिन बच्चों का जरूर देखा है। डॉली ने शरमाते हुए जवाब दिया।

राज =हाथ में लोगी।

इतना कहकर राज ने डॉली को कुछ कहने का मौका दिए बिना अपना लंड निकाला और उसके हाथ में रख दिया। जब डॉली ने राज का लंड पकड़ा तो उसे ऐसा लगा मानो उसने गरम-गरम लोहे की राड पकड़ ली हो, दूसरे ही क्षण उसने घबराकर राज का लंड छोड़ दिया। तभी शोर मच गया था। अमर ने किसी को ढूंढ लिया था, और दोनो बाहर आ गए। अब उस लड़के की चोर बनने की बारी आई और राज डॉली को पुरानी जगह पर ले आया।
 
भाग-2

राज डॉली की चूचियां दबाने लगा और डॉली उसके लंड से खेलने लगी। कभी वो उसको मुट्ठी में दबा लेती तो कभी उसके सुपाड़े को हटाकर देखती। राज का लंड हाथ में लेकर बॉबी अपने पूरे जिस्म में अजीब सी सनसनी महसूस कर रही थी। इधर राज उसकी चूचियों को हौले-हौले सहला रहा था, दबा रहा था। तभी राज जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबाने लगा तो डॉली चिल्लाई,

डॉली =क्या करते हो , जोर से दबाने से दर्द होता है न।

राज =सॉरी अब धीरे-धीरे दबाऊंगा। राज ने कहा और डॉली की चूचियां फिर से दबाने लगा।

अचानक राज डॉली की फ्राक के ऊपरी बटन खोलने लगा तो डॉली बोली-

बटन क्यों खोल रहे हो।

राज =तम्हारी चूचियां बाहर निकालने के लिए।

डॉली =क्यों?

राज = उन्हे चूसूंगा। राज ने धीरे से कहा।

डॉली = न बाबा न। बॉबी कांप कर बोली।

राज = क्यों क्या हुआ ? राज ने पूछा

डॉली = तुमने मेरी चूचियों को चूसते समय काट लिया तो?

राज = क्या पहले भी किसी ने तुम्हारी चूंचियों पर काटा है?

डॉली = चूंचियों पर तो नहीं हां मगर मेरे अंकल प्यार करते समय गाल पर जरूर काट लिया करते थे।

राज = घबराओ मत मैं तुम्हारे अंकल जैसा नहीं हूँ, मैं तुम्हारी चूंचियों को बड़े प्यार से चूसूंगा।

फिर ठीक है। डॉली ने कहा।

डॉली के इतना कहते ही राज ने उसकी फ्राक के बटन खोलकर चूंचियों को बाहर निकाल लिया। बॉबी की चूंचियां अभी विकसित होना शुरू ही हुई थीं। उनका आकार छोटे संतरे जैसा था। अग्रभाग पर छोटा सा गुलाबी निपल। राज उसकी चूंचियों को पहले तो धीरे-धीरे सहलाता रहा और फिर एक चूंची अपने मुंह में भरकर धीरे-धीरे चूसने लगा। राज के ऐसा करते ही डॉली के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी। उसके हाथ से राज का लंड छूट गया और राज के सिर को सहलाने लगी। राज कभी एक चूंची को मुंह में भरकर चूसता तो कभी दूसरी को। आनंद से बॉबी की आंखें मुंद गईं। वह आनंद के सागर में गोता लगा ही रही थी कि तभी अचानक बाहर शोर मच गया। डॉली जल्दी से अपनी फ्राक के बटन बंद कर राज के साथ बाहर आ गई। वहां पहले से ही सभी लोग जमा हो गए थे।

ज्योति ने डॉली से कहा- दीदी अब घर चलो।

डॉली =तुम चलो मैं अभी थोड़ा और खेलूंगी।

ज्योति =ठीक है मगर जल्दी आ जाना वरना मां नाराज होंगी। इतना कहकर ज्योति वहां से चली गई। नया लड़का दाम देने चला गया और सभी छुपने लगे। राज डॉली को लेकर पुरानी जगह आ गया। अचानक उसने कहा,

राज =क्यों न हम खेल बंद करवा दें। जिससे बार-बार बाहर नहीं भागना पड़ेगा और तुम्हे जी भर कर मजा दूंगा।

ठीक है। डॉली ने कहा।

इसके बाद राज बाहर आया और उसने सभी को बुलाकर खेल बंद करने को कहा। उसके सारे दोस्त चले गए, मगर बॉबी वहीं खड़ी रही। सबके जाने के बाद राज बॉबी को लेकर फिर उसी अंधेर कमरे में आ गया। न जाने क्यों इस बार राज के साथ आने पर बॉबी का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसके मन में अनजाना सा खौफ था, मगर उस आनंद के सामने वह खौफ छोटा पड़ गया जो कुछ समय पहले राज से उसे मिल रहा था। वह चुपचाप राज के साथ चली आई।
 
इस बार जब डॉली उसके साथ वहां आई तो न जाने क्यों उसका दिल धड़क रहा था। राज ने डॉली की चूंचियों को बाहर निकाला और चूसने लगा। डॉली राज के लंड से खेल रही थी और उसके मुंह से सिकारियां निकल रहीं थीं। तभी राज ने अपना एक हाथ डॉली के जांघिए में डाल दिया और उसके चूतड़ों को सहलाने लगा। जब कभी राज उसके चूतड़ों की बीच की रेखा पर उंगली फिराता तो डॉली सिहर उठती। अपनी चूंचियों पर राज के होंठों का स्पर्श पाकर तथा राज के लंड को हाथ में लेकर न जाने क्यों डॉली अपनी चूत पर खुजली सी महसूस करने लगी। तभी राज ने उसकी चूचिंयों से मुंह हटाया तो डॉली बोली,

रुक क्यों गए चूसते रहो न।

राज ने कहा, वो तो मैं चूसूंगा ही, मगर क्या तुम मेरे लंड को मुंह में ले सकती हो।

ना बाबा ना।

क्यों?

क्यों मतलब उसी से तुम पेशाब करते हो उसे मैं मुंह में लूं। मुझे घिन आती है।

डॉली तुम शायद नहीं जानती कि मैं अपने लंड की कितनी सफाई रखता हूं।

फिर भी तुम उसी से पेशाब करते हो न, मैं उसे मुंह में नहीं ले सकती।

राज ने जबरजस्ती की तो डॉली बोली,

देखो अगर तुम जबरजस्ती करोगी तो मैं यहां से चली जाऊंगी।

अच्छा नहीं करता जबरजस्ती। मगर मुझे तो करने दोगी।

क्या?

यहां की चुम्मी लेने। राज ने डॉली की चूत पर फ्राक के ऊपर से ही हाथ फिराकर कहा।

छी: तुम्हे इस गंदी जगह मुंह लगाते घिन नहीं आएगी।

घिन कैसी। डॉली तुम नहीं जानती कि जब कोई लड़का किसी लड़की की चूत चूमता है तो उसे कितना मजा आता है। प्लीज चूमने दो न।

ठीक है। डॉली ने कहा चूम लो।

डॉली के इतना कहते ही राज ने उसकी फ्राक ऊपर उठाकर चड्ढी सरका दी। हालांकि वहां अंधेरा था फिर भी डॉली का चेहरा शर्म से लाल हो गया। राज ने डॉली की चूत पर हाथ फिराया। उसकी चूत का रंग भी उसके रंग के समान ही गोरा था और वो एकदम चिकनी थी, उस पर अभी हलके-हलके रोंए आना शुरू हुए थे। राज डॉली की फाम सी मुलायम और मक्खन सी चिकनी चूत पर हाथ फिरा कर पगला सा गया। उसने डॉली की दोनों टांगों को थोड़ा सा खोला और उसके चूतड़ों पर अपने हाथ टिका कर चिकनी चूत पर मुंह रख दिया। डॉली सिहर उठी वो तो सोच भी नहीं सकती थी कि जब कोई लड़का किसी लड़की की चूत चूमता है, तो इतना मजा आता है। यह आनंद उस मजे से कई गुना ज्यादा था जो चूंची चुसवाने में मिल रहा था।

राज डॉली की चूत को पहले तो धीर-धीरे चूमता रहा फिर अपनी जीभ निकालकर चाटने लगा। जब राज ने जीभ निकाल कर उसकी चूत के बीच वाले हिस्से को चाटा तो डॉली सिसकारियां लेने लगी। फिर राज ने डॉली की चूत के बीच के भाग में उभरे चने के दाने के सामान रचना पर अपनी गीली जीभ फिराई और उसे जीभ से सहलाने लगा। सहलाते-सहलाते उसने धीरे से उस हिस्से को अपने होंठों के बीच दबाकर चूसना शुरू किया तो डॉली आनंद से पागल हो गई। उसे ऐसा लगा कि उसके शरीर में खून की जगह गरम-गरम लावा बह रहा है। उसके मुंह से जोर-जोर से सिकारियां निकलने लगी। तभी राज ने अपना मुंह डॉली की चूत से हटा लिया तो डॉली तड़पकर बोली रुक क्यों गए चाटते रहो न।

क्या? राज ने पूछा।

मुझे उसका नाम बोलने में शर्म आती है।

देखो डॉली जब तक तुम नहीं बताओगी मैं नहीं चूसूंगा। राज ने शरारत से कहा।

मेरी चूत। डॉली कंपकंपाते स्वर में बोली।

राज ने फिर से उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए और चाटने लगा। अचानक राज ने अपनी जीभ डॉली की चूत के छेद में डाल दी तो डॉली को इतना मजा आया कि उसने राज का सिर अपनी जांघों के बीच दबा लिया। ताकि वो जीभ का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा उसकी चूत में घुसेड़ सके। डॉली का आनंद चरम पर था और उसके शरीर में अजीब सी सनसनी दौड़ रही थी। उसे ऐसा लग रहा था कि वह किसी और ही दुनिया में है। वह आनंद के गहरे सागर में गोते लगा ही रही थी कि उनके कानों में ज्योति की आवाज पड़ी। वो डॉली को ही पुकार रही थी। डॉली और राज दोनों चौंक पड़े। राज ने उसकी चूत से मुंह हटा लिया और डॉली ने जल्दी-जल्दी चड्ढी पहन ली। वह बाहर जाने लगी तो राज ने उसे रोक लिया। डॉली बोली,

जाने दो वरना ज्योति यहीं आ जाएगी और सब गड़बड़ हो जाएगा।

ठीक है जाओ मगर वादा करो कल दोपहर मेरे घर आओगी। मां तीन से पांच के बीच सोती है। उस समय हमें देखने वाला कोई नहीं होगा। उसी समय आना।

ठीक है आऊंगी, मगर अभी जाने दो। राज ने बॉबी का हाथ छोड़ दिया और डॉली चली गई। जाने से पहले राज उसके चूतड़ों पर हाथ फेरना नहीं भूला था।
 
अगले दिन डॉली करीब आधा घंटा देरी से राज के घर पहुंची। राज बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार ही कर रहा था, कि तभी उसने खिड़की से डॉली को आते देखा। डॉली ने पैंट और टॉप पहन रखा था। कुछ देर बाद डॉली राज की नजरों से ओझल हो गई फिर उसके कमरे में प्रविष्ट हुई।

राज ने उसके आते ही पूछा

बड़ी देर कर दी।

क्या करूं ज्योति को नींद ही नहीं आ रही थी। अभी भी उसे सोता छोड़कर आई हूं, जो भी करना हो जल्दी कर लो वरना वो जाग गई तो मुझे ढूंढेगी।

मैं तो वहीं करूंगा जिसमें तुम्हे मजा आता है।

मुझे तो अपनी चूत चटवाने में ही ज्यादा मजा आता है।

तो ठीक है मैं यही करूंगा।

इतना कहकर राज ने डॉली के तमाम कपड़े उतार दिए और उसे बिस्तर पर लेटा दिया। पहले तो कुछ देर वो उसकी चूंचियां दबाता रहा। फिर उसने डॉली की चूंचियो को बारी बारी से चूसा और उसकी चूत पर हाथ फिराता रहा। तभी डॉली बोली

जल्दी से मेरी चूत चाटना शुरू करो न।

और राज ने उसकी टांगों को थोड़ा फैलाया और उसकी चूत के होंठो पर अपना मुंह रख दिया, डॉली ने मारे आनंद के अपनी आंखे मूंद ली। उसके मुंह से आनंद भरी सिसकारी निकलने लगी। राज ने अपनी जीभ निकाल कर डॉली की चूत के बीच वाले हिस्से पर फिराना शुरू किया तो डॉली के मुंह से निकलने वाली सिसकारियों की आवाज भी तेज हो गई। राज ने उसकी चूत के बीच वाले भाग को अपने होंठो के बीच दबाकर चूसना शुरू किया तो डॉली आनंद से पागल हो गई। राज ने अपनी जीभ डॉली की चूत के छेद में घुसा दी और धीरे धीरे जीभ से चूत के छेद को सहलाने लगा। डॉली को इतना मजा आया कि उसने राज के सिर को जोर से अपनी जांघों के बीच दबा लिया। बॉबी को इतना मजा आ रहा था कि उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं।

आह…सी…सी… ओह राज जोर से चाटो न। आह… सी…सी.. मैं मर जाउंगी राज । मेरे शरीर में कुछ हो रहा है। बॉबी बिस्तर पर मचल रही थी और राज उसकी चूत को चाटने में जुटा हुआ था। बॉबी चरम पर पहुंचने ही वाली थी और उसका शरीर ऐंठने लगा था। उसे लग रहा था कि इससे बड़ा आनंद और कोई हो ही नहीं सकता, तभी राज ने अपना मुंह डॉली की चूत से हटा लिया तो वो तड़पकर बोली…

हाय राज रुक क्यों गए चाटते रहो न मेरी चूत। मुझे बहुत मजा आ रहा है।?

नहीं पहले तुम मेरा लंड अपने मुंह में लो तभी मैं तुम्हारी चूत चाटूंगा। राज ने आंखों में शरारत भरकर कहा।

नहीं मैं तुम्हारा लंड मुंह में नहीं ले सकती, मुझे घिन आती है। बॉबी राज की इस मांग से सकपका गई। वह नहीं चाहती थी कि राज उसकी चूत से एक पल के लिए भी अपना मुंह हटाए।

जब मुझे तुम्हारी चूत चाटते हुए घिन नहीं आई तो फिर भला तुम्हे मेरा लंड मुंह में लेने में कैसे घिन आएगी? राज ने कहा।

फिर भी तुम उसी से पेशाब करते हो, मैं उसे मुंह में नहीं ले सकती। बॉबी की आवाज में अब भी लरज थी।

देखों डॉली ये तो सौदा है। तुम मुझे मजा दो और मैं तुम्हे मजा देता हूं, वरना मैं तो चला सोने। अब राज ने बॉबी के सामने सीधे-सीधे शर्त रख दी।

राज की इस बात पर डॉली सोचने लगी।

राज जानता था कि बॉबी मना नहीं कर सकती। उसने उसे आनंद की जो अनुभूति करवाई थी, उसके लिए बॉबी कुछ भी करने को तैयार हो जाती। यह तो केवल लंड चूसने का मामला था। खैर कुछ ही पल बॉबी ने सोचने में लगाए और अपना सिर सहमति में हिला दिया। बॉबी उसके लंड को मुंह में लेने को तैयार हो गई। तब राज उसके सामने लेट गया। उसने राज की पैंट के बटन खोलकर उसका लंड बाहर निकाला। कुछ देर उसे वैसे ही देखती रही। राज ने उसकी तरफ प्रश्नवाचक नजरों से देखा। बॉबी से उसकी नजरें मिली तो एक बार फिर उसे सहमति में सिर हिलाया और उसे अपने मुंह में डाल लिया।

अब आनंद के सागर में गोते लगाने की बारी राज की थी। बॉबी की गीली जीभ का स्पर्श अपने लंड पर पाते ही राज के मंह से एक सिसकारी सी निकल गई। थोड़ी देर बाद डॉली को भी राज का लंड चूसने में मजा आने लगा और वो बड़े चाव से उसका लंड चूसने लगी। राज के मुंह से जोर-जोर से सिसकारियां निकलने लगी। कभी डॉली उसके लंड को जोर-जोर से चूसने लगती तो कभी वो लंड के ऊपर की चमड़ी हटाकर चाटने लगती। राज को बहुत मजा आ रहा था कि तभी डॉली को शरारत सूझी और उसने राज को लंड पर दांत गड़ा दिए। राज ने तड़पकर उसके मुंह से अपना लंड बाहर खींच लिया।

डॉली ने पूछा, क्यों मजा नहीं आया?

मजा तो आ रहा था, लेकिन तुम्हारे दांतों ने सब किरकिरा कर दिया।

अचछा अब नहीं काटूंगी। कसम से डॉली राज के लंड को प्यार से सहलाते हुए बोली।

ठीक है। राज ने कहा और डॉली उसके लंड पर झुकने लगी तभी उसके मन में कोई विचार आया और वह रुक गई। राज ने उसकी तरफ प्रश्रवाचक नजर से देखा तो वह बोली,

क्या ऐसा नहीं हो सकता कि तुम मेरी चूत चाटो और उसी समय मैं तुम्हारा लंड भी चूंसू? दोनों को एक साथ मजा आएगा।

हो क्यों नहीं सकता। राज ने कहा फिर डॉली को लेटा कर इस पोजिशन में आ गया कि उसका लंड डॉली के मुंह के सामने था और डॉली की चूत उसके मुंह के सामने।
 
राज ने डॉली की चूत पर अपना मुंह रख दिया और डॉली ने उसका लंड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। राज कभी डॉली की चूत को चाटने लगता तो कभी उसके बीच उभरे चने के दाने समान रचना को मुंह में दबा कर चूसने लगता। डॉली भी कहां पीछे रहने वाली थी वो कभी राज के लंड को चूसने लगती तो कभी उसके ऊपर की चमड़ी हटाकर चाटने लगती।

राज के दोनों हाथ बॉबी के चूतड़ों पर घूम रहे थे। वह अपने हाथों से धीरे-धीरे उन्हें सहलाता जा रहा था। राज की जीभ बॉबी की चूत पर कमाल दिखा रही थी। बॉबी के शरीर में कंपकंपाहट सी हो रही थी। उसे ऐसा लग रहा था कि राज जिंदगी भर ऐसे ही बॉबी की चूत चाटता रहे और वह मुंह में उसका लंड लेकर पड़ी रहे। अचानक राज ने जीभ से बॉबी की चूत के छेद को सहलाना शुरू किया। फिर जब जीभ को चूत के अंदर की तरफ ठेला तो बॉबी मस्ती में चूर होकर राज के लंड को लॉलीपॉप की तरह जोर-जोर से चूसने लगी। अचानक राज को ऐसा लगा कि उसके शरीर में लावा सा उबल रहा है उसने झट से डॉली के मुंह से अपना लंड निकाल लिया तो डॉली बोली,

निकाल क्यों लिया? कितना मजा आ रहा था।

अगर मेरा लंड थोड़ी देर और तुम्हारे मुंह में रहता तो सारा वीर्य मुंह में ही चला जाता।

ये वीर्य क्या होता है? बॉबी ने हैरानगी से पूछा।

तुम नहीं जानती?

कसम से मुझे नहीं पता। बॉबी मासूमियत से बोली।

अच्छा बताता हूं पहले यह बताओ चूत मरवाओगी।

वो कैसे करते हैं और मुझे तो अपनी चूत चटवाने में ही ज्यादा मजा आता है।

एक बार चूत मरवा कर तो देखो फिर कहना कि मजा आया या नहीं।

ठीक है, मगर पहले यह तो बताओ कि वीर्य क्या होता है। बॉबी अभी उसी सवाल पर अटकी थी।

राज ने कहा जब किसी लड़के का लंड चूसा जाए या उसे चूत में डालकर घर्षण किया जाए तो लिसलिसा सा सफेद तरल पदार्थ निकलता है। उसे ही वीर्य कहते हैं।

हे भगवान अच्छा हुआ तुमने मेरे मुंह से लंड निकला लिया। छी कितना गंदा होता होगा न वीर्य। अगर मेरे मुंह में चला जातो तो मेरा मुंह भी गंदा हो जाता। बॉबी ने नाक सिकोड़ते हुए कहा।

बॉबी ये पदार्थ दिखने में भले ही गंदा लगता हो, मगर इसी सारी सृष्टि चलती है। तुम्हें पता है न कि औरतें बच्चे पैदा करती हैं।

हां पता है। कुछ महीने पहले मेरी भाभी के भी एक स्वीट सा बेबी हुआ। वह उनके पेट में था। भाभी को अस्पताल ले गए तो उनके पेट से निकाला गया। बॉबी ने कहा।

जानती हो ये बच्चा कैसे बनता है। राज ने पूछा।

नहीं, बॉबी ने न में सिर हिला दिया।

ये बच्चा इसी वीर्य से बनता है जिसे तुम गंदा कह रही हो।

कैसे। बॉबी ने पूछा।

जब कोई लड़का किसी लड़की की चूत मारता है, तो आखिरी में ये वीर्य उसकी चूत में गिरता है। लड़की के पेट में उसी से बच्चा बनता है। ये ठीक वैसे ही जैसे जमीन में कोई बीज बोओ तो उससे पौधा निकलता है। राज ने किसी मास्टर की तरह विश्लेषण किय़ा।

अच्छा, बॉबी हैरानगी से केवल इतना कह सकी।

तभी राज बोला, खैर छोड़ो ये बताओ चूत मरवाओगी।

हां ठीक है, अगर तुम कहते हो कि उसमें चूत चटवाने से ज्यादा मजा आता है तो मैं तैयार हूं। बॉबी ने कहा।

डॉली के इतना कहते ही राज ने उसे पीठ के बल लिटा दिया और उसके चूतड़ो के नीचे तकिया लगा दिया। इसके बाद उसकी टांगों को थोड़ा फैला दिया। बॉबी की कुंवारी चूत का मुंह थोड़ा खुल गया था। डॉली कनखियों से उसकी एक-एक हरकत देख रही थी। राज जानता था कि बॉबी की चूत में जैसे ही लंड डालेगा वह ददर के मारे चिल्लाने लगेगी। मगर उसे कोई चिंता नहीं थी। उसका कमरा घर में सबसे पीछे था। दोपहर का समय होने से उसकी मां ही नहीं, पूरा गांव सो रहा था। एक तरह से गांव सुनसान पड़ा था। उसने डॉली की टांगों को थोड़ा और फैलाया और उसके बीच आ गया। इसके बाद बॉबी की आंखों में झांककर देखा। बॉबी की आंखों में अब भी कौतुहल झलक रहा था। वह सोच रही थी कि चूत कैसे मरवाते हैं। अब तक तो कोई मजा आया नहीं।

इधर बॉबी मजे के बारे में सोच ही रही थी कि राज ने उसकी चूत की छेद पर अपना लंड टिकाकर जोर से एक धक्का मारा। उसका चौथाई लंड डॉली की चूत में घुस गया। डॉली को ऐसा लगा कि जैसे उसकी चूत फट गई हो। वह जोर से चिल्लाने लगी,

हाय मर गई। ये तुमने क्या कर डाला। क्या इसी को मजा कहते हैं।

वह राज को लंड निकालने के लिए कहने लगी। लेकिन राज ने एक और धक्का मारा और आधा लंड उसकी चूत में घुस गया।

अब बॉबी दर्द से तड़प उठी। उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह गिड़गिड़ाते हुए चिल्लाने लगी। प्लीज अपना लंड बाहर निकाल लो। मुझे नहीं मरवानी अपनी चूत-वूत।

मगर राज कहां सुनने वाला था। वह बॉबी को समझाते हुए बोला। पहली बार में थोड़ा दर्द होता है, फिर मजा आने लगेगा।

तुम्हे मजे की पड़ी है और यहां मेरी जान निकली जा रही है। बॉबी जोर-जोर से रोते हुए बोली।

लेकिन राज नहीं माना वह डॉली की चूत में धक्का मारता रहा। डॉली जितना चिल्लाती, रोती और , रोती और गिड़गिड़ाती वह उतने जोश से धक्के पर धक्का मारता। कमरे में डॉली की चीख के साथ ही गचागच-फचाफच की आवाज भी गूंज रही थी। अचानक राज का सारा शरीर ऐंठा और उसके लंड से वीर्य की पिचकारी निकलकर डॉली की चूत में गिरी। यही एक क्षण था जब डॉली को मजा आया। राज के वीर्य की गरम धार ने मानो उसकी सारी पीड़ा हर ली हो। उसे ऐसा लगा कि खुद उसका शरीर भी ऐंठने लगा है। इस पल उसे इतना ज्यादा मजा आया कि उसने जोर से राज का लंड अपनी चूत में भींच लिया। थोड़ी देर तक राज उसके ऊपर वैसे ही पड़ा रहा। वह इस प्रकार हांफ रहा था मानों मीलों चढ़ाई करके आया हो। सांस नियंत्रित करने के बाद वह उठा और डॉली से कहा,

मजा आया?

मजा तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी। मगर आखिरी में जो मजा आया, वह मैं बता नहीं सकती। बॉबी ने आंसू पोछते हुए कहा।

पहली बार में हर लड़की के साथ ऐसा ही होता है। फिर वह लंड की ऐसी अभ्यस्त हो जाती है कि उसकी चूत बड़े से बड़ा लंड निगल जाती है। राज हंसते हुए बोला।

डॉली ने उठकर अपने कपड़े पहनने लगी तो बिस्तर पर खून के धब्बे देखे। खून देखकर उसे गश आने लगा। वह बोली, यह खून कहां से आया।

राज ने कहा कि जब कोई लड़की पहली बार चूत मरवाती है तो छेद पर लगी एक झिल्ली टूट जाती है और उसी से खून आता है।

बॉबी को अपनी माहवारी की याद आ गई और वह घबराकर बोली क्या हर बार ऐसे ही खून आएगा।

राज ने कहा नहीं आज पहली और आखिरी बार था।

बॉबी ने चैन की सांस ली कपड़े पहनने लगी। कपड़े पहनकर जाने लगी तो राज ने पूछा,

कल फिर आओगी?

हां आउंगी। अब तो मुझे भी तुम्हारा लंड चाहिए। यह कहकर डॉली वहां से चली गई। राज उसे जाते हुए तब तक देखता रहा, जब तक वह नजरों से ओझल नहीं हो गई। बॉबी की चाल बदल सी गई थी।
 
दूसरे दिन राज डॉली का रास्ता देखता रहा लेकिन वह नहीं आई। राज मन ही मन बड़बड़ात रहा, साली मादरचोद दे गई धोखा। शाम करीब चार बजे खिड़की से उसे डॉली आती दिखी। वह अलमस्त चाल से चली आ रही थी। उसने पचलून और शर्ट पहन रखा था तथा काफी खूबसूरत लग रही थी। थोड़ी देर बाद राज को वह नजर आना बंद हो गई तथा कुछ ही देर में बाहर वाले कमरे से उसकी और मां की बात करने का आवाज सुनाई दी। कुछ देर बाद डॉली उसके कमरे में थी। उसे देखते ही राज ने मुंह घुमा लिया तो डॉली बोली,

नाराज हो क्या?

नाराज नहीं होउंगा क्या? पूरे दिन तुम्हारा रास्ता देखता रहा और तुम अब आ रही हो।

क्या करुं ज्योति सो ही नहीं रही थी। थोड़ी देर पहले ही उसकी झपकी लगी और मैं चली आई। अब नाराज मत होओ जो भी करना हो कर लो।

अब तो कुछ नहीं किया जा सकता क्योंकि मां उठ गईं है। तुम कल आना।

डॉली कुछ देर राज से बातें करती रही। वह अपने बारे में उसे बताने लगी कि छुट्टियां खत्म हो रही है। उसे कुछ ही दिन बाद वापस लौटना पड़ेगा। इसी साल वह शहर के कॉलेज में एडमिशन लेने वाली है।

राज ने उसके मां-बाप के बारे में पूछा तो बॉबी बोली-

मेरे पिताजी नहीं है। कई साल पहले एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई थी। मां हैं। बड़ा कारोबार है। मां ही सारा कारोबार संभालती हैं। मैं इकलौती संतान हूं।

राज ने कहा, अरे वाह तुम तो काफी पैसे वाली हो।

हां हूं तो मगर बचपन से ही प्यार के लिए तरस रही हूं। पिताजी थे तो मां पार्टी, सहेलियों में व्यस्त रहती थीं। अब कारोबार में व्यस्त रहती हैं। मेरे लिए उनके पास जरा भी समय नहीं। राज ने कहा तो क्या हुआ, तुम्हारे तो मजे हैं। जैसे चाहो जिंदगी जियो। जो चाहे करो। किसी की रोक-टोक नहीं। कोई चिंता फिकर नहीं।

तुम नहीं जानते राज अकेले जिंदगी गुजारना कितना मुश्किल होता है।

हां लेकिन पैसे पास हों तो सब आसान लगने लगता है, राज ने कहा। मेरे पिताजी को ही लो दिनभर खेतों में काम करते हैं। शाम को घर आते हैं। मां पूरे दिन घर के काम में लगी रहती है। दोनों मुझे बहुत प्यार करते हैं, मगर पैसे की कमी से हर छोटी-बड़ी इच्छा मारना पड़ती है।

तुम फिर भी सुखी हो राज । तंगहाली है तो क्या, कम से कम मां-बाप का प्यार तो है। बॉबी ने आह भरते हुए कहा।

राज बोला, हां वो तो है और मैं संतुष्ट भी हूं अपनी जिंदगी से।

तो तुम्हारा भविष्य को लेकर क्या प्लान है।

कुछ नहीं इंटर कर लिया है और अब चाहता तो हूं आगे पढ़ाई करूं मगर इसके लिए शहर जाना होगा और घर के हालात ऐसे नहीं हैं कि पिताजी बाहर रहने का खर्च उठा सकें।

फिर क्या करोगे? बॉबी ने पूछा।

करना क्या है। तुम्हारे ही शहर के एक कॉलेज में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। यदि मिल गई तो पढ़ाई, नहीं तो खेती तो है ही। वही करूंगा। राज ने जवाब दिया।

तुम्हें छात्रवृत्ति जरूर मिलेगी। आखिर तुम्हें शहर जो आना है। आखिर मेरी और मेरी चूत की जरूरत कौन पूरी करेगा। यह कहकर बॉबी खिलखिलाकर हंस पड़ी।

राज ने कहा तुम्हें मजाक सूझ रहा है और यहां मैं चिंता में हूं कि पता नहीं क्या होगा?

कुछ नहीं होगा, सब ठीक हो जाएगा। बॉबी ने कहा।

अच्छा मैं चलती हूं। ज्योति उठ गई होगा। बॉबी ने कहा और चलने लगी।

राज बोला कल आओगी न। आज की तरह धोखा तो नहीं दे जाओगी।

बॉबी अगले दिन आने का वादा करके वहां से चली गई। अगले दिन दोपहर को जब वह वहां पहुंची तो राज नहीं मिला। उसने घर के सारे कमरे छान मारे लेकिन राज का कहीं पता नहीें था। अंत में वह मन ही मन बड़बड़ाती हुई वहां से चली गई। वह चूत मरवाने के बारे में जाने क्या-क्या सोच कर वहां गई थी। राज के न मिलने से उसके सारे मंसूबो पर पानी फिर गया। मौसी के घर आ कर वह ज्योति के कमरे में लेट गई। डबलबेड बिस्तर पर पास ही ज्योति सो रही थी। अचानक डॉली को एक ख्याल आया और उसने अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल और ज्योति के हाथ से अपनी चूचिंयां दबवाने लगी। डॉली के मुंह से सिसकारिया निकल रही थी। तभी ज्योति की नींद खुल गई और उसने कहा,

ये क्या कर रही हो दीदी। ज्योति का स्वर सुनकर डॉली एक बार तो सकपका गई लेकिन दूसरे ही पल बोली,

मेरी अच्छी बहन किसी से ये बात कहना मत।

लेकिन दीदी ये तो गंदी बात है।

तुम्हे नहीं मालूम इस खेल में कितना मजा आता है। तुमने कभी किसी के साथ यह खेल खेला है? ज्योति ने नकारात्मक सिर हिला दिया तो डॉली बोली,

मेरे साथ खेलोगी?

ज्योति ने हां में सिर हिलाया। तब डॉली ने पहले तो उसके तमाम कपड़े उतार दिए। फिर अपने कपड़े भी उतार दिए।
 
ज्योति की चूत भी डॉली की चूत के सामान ही चिकनी थी। उसकी चूत थोड़ी फूली हुई थी और चूत के बीच से उभरा हुआ चने के दाने समान रचना डॉली की चूत की अपेक्षाकृत थोड़ा बड़ा था। ज्योति काफी शरमा रही थी। डॉली ने कहा,

तू तो ऐसे शरमा रही है जैसे मैं कोई लड़का हूँ। डॉली ने ज्योति की चूत पर हाथ फेरते हुए कहा, जानती हो इसे क्या कहते हैं।

हां ज्योति ने कहा।

क्या कहते हैं?

इसे चूत कहते हैं।

अरे जियो मेरी जान मैं तो तुझे काफी सीधी सादी लड़की समझती थी।

ज्योति शरमा सी गई। तो बॉबी बोली, अरे मुझसे कैसा शरमाना। मैं भी तेरी तरह लड़की ही हूं ना। आज मैं तुम्हें ऐसा मजा दूंगी कि तुमने कभी सोचा भी न होगा।

इतना कहकर बॉबी ने ज्योति को चित लिटा दिया और उसकी चूंचियों को धीरे-धीरे दबाने लगी। ज्योति कसमसाने लगी थी। बॉबी धीरे-धीरे उसकी चूंचियों को दबाती रही, फिर एक चूंची पर अपना मुंह रख दिया। ज्योति के सारे शरीर में गुदगुदी वाली सिहरन दौड़ गई। बॉबी ने आहिस्ता से उसकी एक चूंची को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी। एक हाथ ज्योति की चूत पर रख दिया और सहलाने लगी। बॉबॉबी बारी-बारी ज्योति की दोनों चूंचियों को कुछ देर तक चूसती रही। ज्योति के मुंह से सिसकारी सी निकलने लगी-

ओह दीदी…ऐसे ही… चूसती रहो… अच्छा लग रहा है।

बॉबी ने उसकी चूंचियों से मुंह हटाया तो ज्योति उसकी तरफ प्रश्नवाचक नजरों से देखने लगी। वह बॉबी के अगले कदम का इंतजार कर रही थी। बॉबी ने कहा घबरा मत मेरी जान अब तुझे जन्नत की सैर करवाती हूं।

इतना कहकर बॉबी ज्योति की जांघो की तरफ खिसक आई। उसने ज्योति की चूत पर धीरे से हाथ फिराया। ज्योति समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या करने वाली है। अचानक बॉबी ने अपना मुंह ज्योति की चूत पर रखा तो वह सिहर उठी। उसे तो कल्पना भी नहीं थी बॉबी उसकी चूत को चूम लेगी। बॉबी ने केवल चूमने पर ही बस नहीं किया बल्कि कई बार उसकी चूत को यहां-वहां चूमा।

ज्योति कंपकंपाते हुए बोली, दीदी यह क्या कर रही हो। यह गंदी जगह होती है।

मगर बॉबी कुछ नहीं बोली उसे पता था कि ज्योति को मजा आ रहा है। उसने जीभ निकाली और चूत के बीच की रेखा पर फिराने लगी। गुदगुदी और मजे के कारण ज्योति के रोंये खड़े हो गए। बॉबी ने यहीं बस नहीं किया वह जीभ से ज्योति की चूत तो चाटने लगी। ज्योति की चूत का हलका नमकीन स्वाद उसे काफी पसंद आ रहा था। उसने ज्योति की पूरी चूत को चाटा और फिर हलके से उसकी टांगों को फैलाकर बीच में जीभ से सहलाने लगी।

…और ज्योति वह तो मानो इस दुनिया में ही नहीं थी। आनंद के कारण उसके मुंह से जोर-जोर से सिसकारियां निकल रही थी। बॉबी उसकी चूत के बीच उभरे हिस्से को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी। वह कल्पना कर रही थी कि मानो राज का लंड चूस रही हो। आनंद के कारण ज्योति का पूरा शरीर कांपने लगा। अचानक बॉबी ने उसकी चूत से मुंह हटा लिया तो ज्योति जैसे किसी सपने से जागी।

उसने कहा दीदी रुक क्यों गई, बहुत मजा आ रहा था। प्लीज और चाटो न।

बॉबी ने कहा तुमने खूब मजा ले लिया। अब मेरी बारी है।
 
ज्योति ने पूछा, मतलब?

तो बॉबी बोली- जैसा-जैसा मैने तुम्हारे साथ किया है, वैसा ही तुम मेरे साथ भी करो।

इतना कहकर बॉबी लेट गई और ज्योति का मन तो नहीं हो रहा था, मगर उसके सामने बॉबी की बात मानने के अलावा कोई और रास्ता था भी नहीं। उसने पहले बारी-बारी बॉबी की चूंचियों को दबाया और फिर उन्हें चूसने लगी। बॉबी की चूंचियां चूसने में उसे भी मजा आने लगा। बॉबी उसके सिर पर हाथ रखकर सहला रही थी। काफी देर तक ज्योति उसकी चूंचिया ही चूसती रही तो बॉबी बोली,

बस कर मेरी लाड़ो अब क्या खा जाएगी, इन्हें। नीचे आ जरा मेरी चूत पर भी अपनी जीभ का कमाल दिखा।

ज्योति नीचे सरक गई, मगर वह झिझक रही थी। बॉबी की चूत पर मुंह लगाने में उसे घिन सी आ रही थी। वह सोच रही थी कि इसी अंग से पेशाब की जाती है, वह इसे कैसे चूम सकती है। बॉबी ने जब देखा कि ज्योति का हाथ तो उसकी चूत पर है, मगर वह वैसे ही बैठी है तो उसने कहा,

क्या हुआ ज्योति , तू चाटती क्यों नहीं?

दीदी मुझे घिन सी आ रही है। मैं नहीं चाट पाउंगी। प्लीज आप ही मेरी चूत तो चाटो न। मैं हाथ से सहलाकर आपको मजा देती हूं।

बॉबी ने कहा, वाह हाथ से कहीं मजा आता है। देख ज्योति ये तो सौदा है। तू मुझे पूरा मजा दे, तभी मैं तुझे मजा दूंगी। नहीं तो तेरी मर्जी मैं तो चली सोने।

बॉबी ने इतना कहकर मुंह घूमा लिया तो ज्योति बोली, अरे दीदी आप तो नाराज हो रही हो।

नाराज नहीं होउं तो क्या करूं। अभी जब मैं तेरी चूत चाट रही थी तो कैसे उछल-उछलकर मजा ले रही थी। मेरी बारी आई तो तुझे घिन आने लगी।

ठीक है दीदी, तुम कहती हो तो मैं भी चाट लूंगी।

अरे वाह बॉबी चहककर बोली। यह हुई न बात।

इसके बाद बॉबी फिर चित होकर लेट गई। ज्योति को उसकी टांगे भी नहीं फैलानी पड़ी। बॉबी ने खुद ही खोल दी। इसके बाद ज्योति ने उसकी चूत पर मुंह रख दिया और चूमने लगी। बॉबी की चूत पर पहले मुंह लगाने में उसे घिन आ रही थी, मगर जब चूमना शुरू किया तो चूमती ही चली गई। चूमने के साथ जीभ से आहिस्ता-आहिस्ता चाटने भी लगी। ज्योति ने कुछ देर बॉबी की चूत को चाटा। इसके बाद बोली

दीदी अब मेरी बारी है।

बॉबी बोली रुक, हम दोनों एक साथ एक-दूसरे को मजा देंगे।

इसके बाद बॉबी ने ज्योति को एक करवट पर लिटाया और खुद अपना मुंह उलटी तरफ करके इस तरह लेटी कि ज्योति की चूत उसके मुंह के सामने और उसकी चूत ज्योति के मुंह के सामने थी। इसके बाद वह बोली,

चल शुरू हो जा मेरी जान। दिखा दे अपना पूरा हुनर।

दोनों ने एक दूसरे की चूत तो चाटना और चूसना शुरू कर दिया। काफी देर तक दोनों एक दूसरे की चूत पर अपनी जीभ से चित्रकारी सी करती रहीं।

इसके बाद बॉबी उठी और कहा अब तुझे दूसरी तरह से मजा देती हूं।

उसने ज्योति को लिटाया और उसकी चूत पर अपनी चूंची रगडऩे लगी। जब कभी वह निपल को ज्योति की चूत में घुसडऩे की कोशिश करती तो ज्योति को इतना मजा आता कि वह आनंद से चूत को भींच लेती। कुछ देर तक बॉबी ऐसे ही खिलवाड़ करती रही फिर बोली,

चल उठ अब मेरी बारी।

इतना कहकर बॉबी लेट गई। ज्योति जब बॉबी की चूत की तरफ आई और अपनी चूंची से उसे रगडऩा शुरू किया तो अचानक बॉबी को एक खयाल आया और वह बोली,

ऐसे नहीं। तू एक काम कर मेरे ऊपर लेट जा और अपनी चूत का दाना मेरी चूत पर रगड़।

ज्योति ने कहा मगर दीदी तुमने तो ऐसा नहीं किया था।

बॉबी बोली, अरे पगली मेरी चूत का दाना छोटा है, अंदर ही दबकर रह गया। तेरी चूत का दाना काफी उभरा हुआ है।

ज्योति समझ गई और वह अपनी चूत को बॉबी की चूत से मिलाकर उसके ऊपर लेट गई। इसके बाद चूत को बॉबी की चूत पर रगडऩे लगी। बॉबी को वैसा मजा तो नहीं आ रहा था जैसा राज के लंड को चूत में लेकर आया था, मगर मजा तो आ ही रहा था। दोनों शाम ढले तक यही खेल खेलती रहीं। इसके बाद थककर एक-दूसरे की बांहों में नंगी ही सो गईं।
 
अगले दिन बॉबी सुबह उठी ही थी कि पोस्टमैन आ पहुंचा। उसने एक चिट्ठी बॉबी की मौसी को थमा दी। चिट्ठी बॉबी के नाम थी और उसकी मां ने भेजी थी। मौसी चिट्ठी खोलकर पढऩे लगी। उन्होंने बॉबी को आवाज लगाई, तो बॉबी सामने आ खड़ी हुई।

क्या हुआ मौसी, बॉबी ने पूछा।

तेरी मां की चिट्ठी आई है, तुझे तुरंत बुलाया है। कॉलेज में एडमिशन हो गया है, तेरा उसी के लिए कुछ औपचारिकताएं करना है।

अरे वाह बॉबी खुशी से झूम सी उठी, मजा आ गया। वह हमारे यहां का सबसे बड़ा कॉलेज है। मुझे उसमें दाखिला मिल ही गया।

बॉबी तू शाम की बस से ही रवाना हो जा। मैं तैयारी कर देती हूं।

ठीक है मौसी, इतना कहते-कहते बॉबी अचानक उदास हो गई। उसे राज का ध्यान आ गया था।

क्या हुआ, चेहरे पर उदासी क्यों आ गई। मौसी ने लाड़ से पूछा।

कुछ नहीं मौसी, अब आपको और ज्योति को छोड़कर जाना पड़ेगा न, इसलिए। बॉबी बात बनाते हुए बोली।

अरे तो कौन सा दूर है। और फिर ज्योति का इंटर भी इस साल हो जाएगा, उसका दाखिला भी तेरे ही कॉलेज में करवा दूंगी। तब दोनों बहनें मिलकर रहना।

ओ मां तुम कितनी अच्छी हो, वहां खड़ी ज्योति यह कहकर मां से लिपट गई। उसे कल दोपहर बॉबी के साथ बिताए पल याद आ गए। वह सोच रही थी कैसे कटेगा एक साल और वह फिर बॉबी के साथ होगी और मजे करेगी।

मौसी बोली, तुम दोनों नहा लो, तब तक मैं खाने का इंतजाम करती हूं। यह कहकर वे अंदर चली गईं।

ज्योति ने बॉबी से कहा, दीदी आज दोपहर हम फिर एक साथ सोएंगे दीदी। कल बहुत मजा आया था।

नहीं ज्योति आज मुझे कहीं जाना है। अब जब तू वहां आएगी तब करेंगे। बॉबी राज के बारे में सोचते हुए बोली।

बॉबी की बात सुनकर ज्योति का चेहरा लटक गया, तो बॉबी बोली, उदास मत हो मेरी लाड़ो। अभी तो तेरी छुट्टी चल ही रही है न। कुछ दिन बाद तू वहां आ जाना। अब खुश हो जा।

ज्योति हंस दी। बॉबी सोच रही थी कि आज भी राज नहीं मिला तो वह क्या करेगी। अब उसने केवल एक बार चुदवाया था और उसमें भी पूरे समय दर्द से ही चिल्लाती रही। अब वह पूरी तरह खुलकर चुदाई करवाना चाहती थी। उसने सोच लिया, दोपहर में जैसे ही ज्योति सोएगी वह राज के पास जाएगी।

दोपहर हुई मौसी अपने कमरे में सोने चली गईं और वह ज्योति के साथ उसके कमरे में। ज्योति ने उससे एक बार फिर कहा कि दीदी कल वाला खेल खेलो न। बॉबी ने मना कर दिया, नहीं आज मुझे कहीं जाना है। तू अभी सो जा। कुछ देर बाद आउंगी तब खेलेंगे। ज्योति को इस तरह बहला कर बॉबी निकल गई और सीधे राज के घर जा पहुंची। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसके मन में आशंकाओं के बादल मंडरा रहे थे, राज आज भी नहीं मिला तो वह क्या करेगी? मगर उसकी सारी आशंकाएं गलत साबित हुई। राज अपने कमरे में ही था और कोई किताब पढ़ रहा था। बॉबी के आने की आहट सुनकर नजरें उठाईं और बॉबी से नजरें मिलते ही उसके होंठों पर शरारती मुस्कान थिरक उठी।

बॉबी बोली, मादरचोद कल कहां चले गए थे। मैं कितना परेशान हुई पता है।

क्यों परसो जब तुम नहीं आई तो मैं नहीं परेशान हुआ। राज ने हंसते हुए कहा।

अ’छा तो बदला लिया जा रहा था। बॉबी झूठमूठ गुस्सा होने का नाटक करते हुए बोली कि मैं जा रही हूं। तुम पड़े रहो अपना लंड पकड़कर।

अ’छा बाबा लो कान पकड़ता हूं। अब ऐसा नहीं करूंगा। अब तो रुक जाओ।

अचानक बॉबी उदास हो गई। तो राज ने पूछा क्या हुआ, बोला न अब नहीं करूंगा ऐसा।

अब ऐसा कर भी नहीं पाओगे राज ।

क्यों, राज ने पूछा।

क्योंकि मैं आज शाम की बस से ही वापस जा रही हूं। बॉबी ने उदास स्वर में जवाब दिया, मेरा एडमिशन शहर के बड़े कॉलेज में हो गया। उसके लिए जाना पड़ेगा।

कौन से कॉलेज में हुआ तुम्हारा एडमिशन? राज ने पूछा।

बॉबी ने कॉलेज का नाम बताया तो राज खुशी से उछल पड़ा। उसने बॉबी को बांहों में भर लिया।

क्या हुआ मेरे जाने से इतना खुश क्यों हो रहे हो?

तुम्हें नहीं पता बॉबी मैने भी उसी कॉलेज में एडमिशन और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। भगवान ने चाहा तो मैं कुछ ही दिनों में तुम्हारे पास होउंगा।

अब बॉबी भी खिल उठी। वह खुशी से बोली, अरे फिर तो मजा आ जाएगा।

तब तक राज का हाथ बॉबी की फ्राक ऊपर कर उसकी चड्ढी में पहुंच चुका था और वह धीरे-धीरे उसके चूतड़ों को सहला रहा था।

राज पता नहीं क्यों मगर मुझे लग रहा है कि मुझे तुमसे प्यार हो गया है।

हां बॉबी मैं भी तुम्हें चाहने लगा हूं। अब ऐसा लगता है कि जिंदगी में और किसी लड़की की जरूरत ही नहीं है।

राज आमतौर पर लड़के-लड़की में पहले प्यार होता है, फिर चूत-लंड का खेल। मगर हमारे मामले में उलटा हुआ। पहले चूत-लंड का खेल हुआ और फिर प्यार।

इधर राज का हाथ बॉबी के जांघिए में थिरक रहा था, तभी अचानक बॉबी के जांघिए की इलास्टिक टूट गई और वह सरककर नीचे आ गिरा।

बॉबी चिल्लाई, यह तुमने क्या कर दिया। अब मैं घर कैसे जाउंगी।

क्या मतलब कैसे जाउंगी। जांघिया यहीं छोड़ जाओ। तुम्हारी निशानी के तौर पर मेरे पास रहेगा। तुम ऐसे ही चली जाओ। फ्राक तो पहन ही रखी है न।

अ’छा और अगर हवा से मेरी फ्राक उड़ी और किसी ने मेरी चूत और चूतड़ देख लिए तो।

संभलकर जाओगी तो ऐसा नहीं होगा। राज ने मासूमियत से जवाब दिया।

अच्छा तो मैं जाऊं? बॉबी ने शरारत से पूछा।

क्यों चूत नहीं मरवाओगी क्या। राज ने कहा।

देखो राज मैं आई तो इसीलिए थी। उसदिन आखिरी में ही पूरा मजा आया और आज मैं खुलकर मजा लेना चाहती हूं। मगर जो भी करना है जल्दी करो, क्योंकि ज्योति से बहाना बनाकर आई हूं। ज्यादा देर हो जाएगी तो वह मुझे ढूंढने लगी।
 
बॉबी के इतना कहते ही राज ने उसकी फ्राक भी उतार दी। जांघिया तो उसका पहले ही उतर चुका था। इसके बाद राज ने अपने भी सारे कपड़े उतार दिए और बॉबी को बिस्तर पर लेटा दिया। बॉबी बलिहारी होने वाली नजरों से राज के तन चुके लौड़े को निहार रही थी। राज आया और धीरे-धीरे उसकी चूंचियों को दबाया और फिर होंठ एक चूंची पर रख दिए। इधर उसका हाथ बॉबी की चिकनी चूत पर थिरक रहे थे, उधर वह बॉबी की चूंची को बड़े प्यार से चूस रहा था। बॉबी के सारे शरीर में सनसनी दौडऩा शुरू हो गई। राज ने बारी-बारी बॉबी की दोनों चूचियों को चूसकर उसे काफी उत्तेजित कर दिया। इसके बाद सिर नीचे लाया और मुंह उसकी चूत पर रख दिया। बॉबी की चूत की खुशबू आज कुछ अलग ही थी। राज जीभ निकालकर मजे से उसे चाटने लगा। इधर बॉबी का हाथ राज के सिर पर था और वह उसके बालों को प्यार से सहला रही थी। राज काफी देर तक बॉबी की चूत तो चाटता रहा, बीच के हिस्से को मुह में दबाकर चूसता रहा। कभी-कभी अपनी जीभ गोलकर उसकी चूत के छेद में घुसेड़ देता और बॉबी के मुंह से निकलने वाली सिसकारियों की आवाजें तेज होती जा रही थीं। आखिर राज ने बॉबी की चूत से मुंह हटाया और उसके ऊपर लेटने लगा तो बॉबी बोली-

रुको।

क्यों क्या हुआ, आज दर्द नहीं होगा।

नहीं उसके लिए नहीं।

तो फिर क्या बात है।

कुछ नहीं पहले तुम लेटो।

ठीक है। यह कहकर राज लेट गया।

बॉबी ने उसका लंड अपने हाथ में थाम लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर उसने जीभ निकाली और लंड पर फिराने लगी। राज की कमर अपने आप थिरकने लगी। कुछ देर तक वह जीभ से खिलवाड़ करती रही फिर उसने राज का लंड मुंह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। राज को इतना मजा आ रहा था कि वह जोर-जोर से अपनी कमर हिलाने लगा। कुछ देर बॉबी उसके लंड को चूसती रही और फिर राज ने खुद ही उसके सिर को हटा दिया।

बस करो बॉबी, अब और नहीं सह पाउंगा।

क्यों क्या हुआ। बॉबी शरारत से बोली।

हुआ तो कुछ नहीं, मगर कुछ देर और यह तुम्हारे मुंह में रहता तो हो जाता, राज ने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा, चलो अब तुम लेट जाओ और इसे अपनी चूत में ले लो।

बॉबी बोली नहीं मैं नहीं लेटूंगी। हमेशा मैं ही क्यों नीचे लेटूं। अगर तुम्हें आता है तो ऐसे ही चूत मारकर दिखाओ। बॉबी शरारत के मूड़ में आ गई।

राज ने कहा, अच्छा यह बात। चुनौती दे रही है।

यही समझ लो, बॉबी ने हंसते हुए कहा।

ठीक है, राज ने कहा। ऐसा हो तो सकता है कि मैं ही नीचे लेटा रहूं, मगर मेहनत तुम्हें करना होगा। मंजूर है।

ठीक है मंजूर है। बॉबी बोली।

तो राज ने उससे कहा कि उसकी कमर के दोनों तरफ अपने पैर करके बैठ जाए। डॉली ने ऐसा ही किया तो राज ने अपना लंड हाथ में पकड़ा और बॉबी की थोड़ा उठने को कहा। बॉबी के घुटने उसकी कमर के दोनों तरफ थे, वह घुटनों पर ही थोड़ा उठी तो राज ने उसकी चूत के छेद पर अपना लंड टिका दिया और बोला बस अब बैठ जाओ।

बॉबी जैसे ही बैठी, एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। बॉबी की चूत में अचानक दर्द की एक लहर सी उठी तो वह चिल्लाकर बोली।

मादरचोद यह क्या किया, फिर से मेरी चूत फाड़ दी। यह कहकर वह उठने लगी तो राज ने उसकी कमर को थामकर वापस बैठा लिया।

बॉबी कुछ देर हाथ-पैर झटकती रही, मगर अचानक ही उसे चूत में राहत सी महसूस होने लगी और राज का लंड सुरसुरी पैदा करने लगा तो उसने हाथ-पैर पटकने बंद कर दिए।

क्यों मजा आने लगा, राज ने एक आंख मारते हुए कहा।

हां आ तो रहा है, मगर शुरुआत में तो जान ही निकाल दी थी। बोल नहीं सकते थे। एक झटके में पूरा डाल दिया।

राज हंसते हुए बोला, मैने कहां डाला, तुम्हीं ने तो किया है। और चुनौती दो।

चुनौती की तो बहन की चूत। बॉबी गाली बकते हुए बोली। अब जल्दी बताओ करना क्या है। मुझसे रहा नहीं जा रहा है।

अब क्या करना है, बस मेरी कमर पर उछलो, मजा खुद-ब-खुद आने लगेगा।

राज के इतना कहते ही बॉबी उसकी कमर पर कूदने लगी और राज का लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होने लगा। बॉबी आनंद के सागर में गोते लगा रही थी और धीरे-धीरे उसकी कूदने की स्पीड भी बढऩे लगी। इधर राज अपने हाथ से उसकी दोनों चूंचियों को दबाकर, सहलाकर उसके मजे को और भी बढ़ा रहा था। बॉबी काफी देर राज के लंड पर कूदती रही, कमरे में उसकी चूत से निकलने वाली फचाफच-गचागच की आवाज गूंजती रही। अचानक बॉबी का सारा शरीर ऐंठने लगा। उसे ऐसा लगा कि वह आनंद के चरम पर है, तभी राज के लंड से वीर्य की पिचकारी छूटी और बॉबी की चूत में गिरी। बॉबी आनंद के चरम पर पहुंच चुकी थी। उसने जमकर राज की कमर को अपनी टांगों के बीच कस लिया और निढाल होकर उसके ऊपर गिर गई। बॉबी पसीने से तरबतर हो रही थी। उसकी चूत में आनंद की लहरें उठ रही थीं, आंखें बंद करके वह उन्हें पी रही थी। काफी देर तक वह वैसे ही राज के लंड को चूत में लिए पड़ी रही। इधर राज का लंड सिकुड़कर उसकी चूत से अपने आप बाहर आ गया तो वह उठी और उसके लंड को देखते हुए बोली,

अरे इसे क्या हुआ।

कुछ नहीं। चुदाई के आखिरी में जब वीर्य निकलता है तो लंड इसी तरह सिकुड़ जाता है।

अरे मगर पिछली बार तो ऐसा नहीं हुआ था। बॉबी ने हैरत से कहा।

हुआ था, मगर दर्द के कारण तुम ध्यान नहीं दे पाई और जल्दबाजी मेें चली भी गई थी।

अ’छा अब यह फिर कब तनेगा।

जब तुम चाहो, अगर तुम चाहो तो यह फिर खड़ा हो जाएगा।

न बाबा न आज के लिए इतनी मेहनत काफी है। शहर आओ फिर मैं देखती हूं कि यह कितनी बार खड़ा होता है।

राज मुस्कुरा दिया। बॉबी उठी और अपनी फ्राक पहन ली। और बोली,

अ’छा मैं चलती हूं।

ठीक है, राज ने कहा और उठकर प्यार से बॉबी की चूत को एक बार सहला दिया।

बॉबी बोली, राज जल्दी आना। मैं तुम्हारा इंतजार करुंगी। और इतना कहकर वह निकल गई। उसकी आंखों में आंसू थे, जो वह राज को नहीं दिखाना चाहती थी। आंसू राज की आंखों में भी मचल रहे थे, मगर वह उन्हें पी गया।
 
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