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परदेसी से अंखिया लड़ी

और उसी शाम बॉबी शहर चली आई। अगले ही दिन जाकर उसने कॉलेज की औपचारिकताएं पूरी की और उसका दाखिला हो गया। हालांकि वह शहर के जाने-माने उद्योगपति की पुत्री थी, इसलिए ज्यादा दिक्कत तो नहीं आई, मगर कॉलेज में जाते ही उसका सामना वहां के मनचले लड़कों से हो गया। रंजीत और विनोद। दोनों कॉलेज के गुंडे थे और पिछले चार साल से एक ही क्लास में फेल हो रहे थे। अब वे बॉबी की क्लास में थे।

बॉबी वहां अपनी मां शारदा देवी के साथ कार से पहुंची थी, मगर उसका पहनावा उसकी जवानी की नुमाईश कर रहा था। उसने घुटनों तक की स्कर्ट और टॉप पहन रखा था, जिसमें पीछे केवल एक गांठ बंधी थी। टॉप में सामने से उसकी चूंचियां का ऊपरी हिस्सा नजर आ रहा था और स्कर्ट छोटी होने के कारण उसकी गोरी चिकनी पिंडलियां, उसका यह पहनावा किसी को भी उत्तेजित करने के लिए काफी था। बॉबी की कार जैसे ही कॉलेज में आकर रुकी, वैसे ही कई लड़कों का ध्यान उस तरफ गया। एक तरफ दीवार पर रंजीत और विनोद बैठे थे, जैसे ही बॉबी कार से उतरी उसकी छोटी स्कर्ट थोड़ा सा ऊपर हुई और उसका लाल जांघिया नजर आ गया। बस दोनों मनचलों के लिए इतनी झलक ही दिलों और लौड़ों में आग लगाने के लिए काफी थी। दोनों की सीटियां एक साथ बजी और जैसे ही बॉबी ने उनकी तरफ देखा, रंजीत ने उंगली और अंगूठे से गंदा सा इशारा किया। बॉबी ने घृणा से मुंह घुमा लिया। तब तक उसकी मां भी दूसरी तरफ से उतरी, उसने बॉबी के चेहरे पर असामान्य भाव देखे और पीछे गंदा इशारा कर रहे रंजीत पर भी उसकी नजर पड़ गई।

शारदा देवी 40-45 की उम्र में पहुंच चुकी अधेड़ महिला थीं, इसके बाद भी उनका शरीर गठा हुआ था। पति की मौत के बाद सफेद साड़ी ही उनका पहनावा था। चेहरे पर रईसी का रुआब और जबड़े एकदम भिंचे। शारदा देवी को देखकर रंजीत और विनोद दोनों सकपका गए। जब तक वे कुछ कहतीं दोनों वहां से रफूचक्कर हो गए। शारदा देवी का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। वे बॉबी से बोली,

इसी कॉलेज में दाखिला लेने के लिए तुम इतना उतावली हो रही हो। देख रही हो यहां के लड़कों की हरकतें। इसीलिए मैं कह रही हूं कि लड़कियों के कॉलेज में दाखिला लो।

दोनों की हरकतें बॉबी के लिए भी असहनीय थीं और वह भी इस कॉलेज में अब ठहरना तक नहीं चाहती थी, मगर तभी उसे राज का ख्याल आ गया और वो बोली,

नहीं मां इस तरह के शोहदें तो हर तरफ होते हैं। लड़़कियों के कॉलेज के सामने भी बैठे ही रहते हैं। क्या ग्यारंटी की वहां इस तरह के वाकये से दो-चार नहीं होना पड़ेगा। और यह शहर का सबसे अच्छा कॉलेज है। कुछ मनचले हैं तो क्या, मुझे अपना भविष्य देखना है।

बेटी की जिद के आगे शारदा देवी की नहीं चल पाती थी। उन्होंने उसे बड़े लाड़ से पाला था। वे ठंडी सांस लेते हुए बोली,

ठीक है, जैसा तुम चाहो। इतना कहकर वे बॉबी को लेकर प्रिंसिपल के कमरे की तरफ बढ़ गईं। उनकी बात पहले से ही हो चुकी थी, इसलिए बॉबी के केवल आवेदन पत्र पर साइन करना पड़ा। प्रिसिपल ने उसका दाखिला पत्र हाथों-हाथ उसके हाथ में थमा दिया और कहा,

एक पखवाड़े में कॉलेज शुरू हो जाएंगे। तब तक छुट्टी मनाओ।

तभी शारदा देवी बोल पड़ी, सर आपके यहां कुछ लड़कों का व्यवहार मुझे पसंद नहीं आया। वे बदतमीजी कर रहे थे।

प्रिंसिपल ने कहा, आप चिंता न करें मैडम, मैं उनका इलाज कर दूंगा। आगे से वे ऐसी कोई भी हरकत नहीं करेंगे। आप निश्चिंत होकर इसे कॉलेज भेजिए।

तभी बॉबी बोल पड़ी, सर आपके यहां छात्रवृत्ति का क्या नियम है।

क्यों तुम्हें छात्रवृत्ति की क्या जरूरत पड़ गई।

मुझे नहीं, मौसी के गांव का एक गरीब लड़का है, उसने आपके यहां आवेदन दिया है।

क्या नाम है उसका है, प्रिंसिपल ने पूछा।

जी राज , बॉबी ने जवाब दिया। क्या उसकी छात्रवृत्ति मंजूर हो गई?

तभी शारदा देवी बोल पड़ीं, तुम्हें इससे क्या मतलब बॉबी। तुम्हारा दाखिला हो गया न।

नहीं मां वह मौसी के घर के काम करता था। बेचारा गरीब है। पिता पढ़ा नहीं सकते, मगर वह पढऩा चाहता है। अगर आप थोड़ी सिफारिश कर दें तो पढ़ लेगा।

बॉबी तुम इस तरह के लड़कों को नहीं जानती, इसलिए उससे ज्यादा सहानुभूति दिखाने की जरूरत नहीं।

मुझे कोई सहानुभूति नहीं है, मगर मौसी ने कहा था कि मैं उसके लिए आपसे बात करूं।

छोटी ने कहा था, फिर देखना पड़ेगा। शारदा देवी यह कहकर प्रिंसिपल की तरफ घूमी और पूछा, उसके आवेदन पर कुछ हुआ सर।

मैडम आवेदन तो आया है और उसका पिछला रिकॉर्ड भी काफी बेहतर है। हमे ऐसे विद्यार्थियों को अपने कॉलेज में दाखिला देकर खुशी ही होती है, मगर ट्रस्टियों से पूछना पड़ेगा।

आप दाखिला दे दीजिए, मैं ट्रस्टियों से बात कर लूंगी। आखिर मैं भी तो एक सदस्य हूं न। शारदा देवी ने कहा।

जी मैडम आप कहती हैं तो मैं अभी फायनल किए देता हूं। यह कहकर प्रिंसिपल ने राज की फाइल मंगवाई और उस पर साइन कर दिय.यह देखकर बॉबी का दिल बल्लियों उछलने लगा और वह कल्पना लोक में तैरने लगी कि 15 दिन बाद वह फिर से राज की बांहों में होगी। उससे अपनी खुशी संभाली नहीं जा रही थी, मन ही मन वह झूम रही थी, बाहर से खामोश बैठी रही।

जब वे बाहर निकलीं तो रंजीत और विनोद को गेट के सामने मंडराते देखा। बॉबी की नजर उन पर पड़ चुकी थी और उन दोनों ने नजरें मिलते ही बॉबी को फिर से गंदा इशारा किया। शारदा देवी ने यह नहीं देखा था। बॉबी ने मन ही मन चैन की सांस ली, उसने सोचा यदि मां फिर से इनकी हरकतें देख लेती तो उसका कॉलेज आना मुश्किल में पड़ जाता। प्रिंसिपल साहब शारदा देवी को छोडऩे बाहर तक आए थे। उन पर नजर पड़ते ही दोनों लड़के वहां से खिसक लिए। बॉबी ने मन ही मन ठान लिया कि कॉलेज आने के बाद दोनों को सबक जरूर सिखाएगी और इस काम में राज और अपनी सहेलियों की भी मदद लेगी।
 
भाग -12

मधु, बॉबी की पुरानी सहेली थी। दोनों स्कूल के समय से साथ थे, हांलाकि उसकी उम्र बॉबी से एक साल ‘यादा थी, मगर दोनों साथ ही रहती थीं। बॉबी जितनी शर्मीली और अंतर्मुखी थी, मधु उतनी ही तेज-तर्रार। स्कूल के समय से ही उसकी दोस्ती कई लड़कों के साथ थी और आज भी नित नए लड़कों से दोस्ती करना उसका शौक है। मधु को जानने वाले तो यहां तक कहते हैं कि वह पुराने लंड को ज्यादा दिनों तक नहीं झेल पाती। उसकी चूत को हर दिन नया लंड चाहिए। जब तक इसे कोई नया लंड न मिल जाए, इसकी चूत की प्यास ही ठंडी नहीं होती। बॉबी, लड़कों के मामले में मधु की इस बेबाकी को जानती तो थी, मगर कोई मतलब नहीं रखती थी और मधु भी उसे अपनी रास लीला से दूर ही रखती थी। इसीलिए दोनों आज भी अच्छी सहेलियां थी। इस वक्त बॉबी, मधु के ही घर पर थी। उसके कमरे में बैठी थी और दोनों सहेलियों में छुट्टियों की बातें हो रही थीं।

हां तो मेरी जान क्या कह रही थी तू, गांव में तुझे कोई लड़का मिला। मधु ने बॉबी को छेड़ते हुए कहा।

कुछ देर पहले ही बॉबी ने मधू को राज से मिलने और दोस्ती होने की बात बताई थी। तब से ही मधू उसे छेड़ रही थी कि मामला केवल दोस्ती तक ही है या बिस्तर तक भी पहुंचा।

मधु ने जब फिर से यही बात दोहराई तो बॉबी दिखावटी गुस्सा करते हुए बोली, देख अगर तू बार-बार यही सब पूछेगी तो मैं चली जाऊंगी।

अ’छा मत बता, तेरी मर्जी। मगर मैं मान ही नहीं सकती कि किसी लड़के, लड़की में दोस्ती हुई हो और बाद में चूत-लंड तक बात न पहुंची हो। तू तो गांव में काफी दिन रही।

मधू, तू भी न कैसी गंदी बातें करती है।

अरे चल अब बता भी दे। अपनी अच्छी सहेली से कैसा शरमाना।

मधू ने बार-बार जोर दिया तो बॉबी ने शरमाते-शरमाते बता ही दिया कि कैसे खेल-खेल में उनके बीच चूत-लंड का खेल भी शुरू हो गया और वह दो बार चूत भी मरवा चुकी है।

अरे वाह, तू बड़ी ही छुपी रुस्तम निकली। यहां कितने लड़के तेरे पीछे पड़े रहते हैं, तू किसी को घास तक नहीं डालती और चूत खोली भी तो गांव के लड़के के सामने।

बस मधु पता नहीं कैसे ये सब हो गया और अब मुझे लगता है कि शायद यही मेरी तकदीर में था। मैं अब राज से प्यार करने लगी हूं और वह भी मुझे टूटकर चाहता है।

बॉबी के मुंह से राज की तारीफ और दोनों के बीच खेल का वर्णन सुन मधु की चूत में खुजली होने लगी, मानो उसकी चूत राज का लंड मांग रही हो। राज की गोरे-चिट्टे लंड के वर्णन ने मधु को और भी उत्तेजित कर दिया था। उसने मन ही मन ठान लिया कि कैसे भी हो राज का लंड अपनी चूत में लेकर रहेगी, ऊपर से अपनी भावनाएं दबाते हुए पूछा,

अच्छा यह तो बता कब आ रहा है तेरा परदेशी।

अरे हां यह तो बताना ही भूल गई। वह दो-तीन दिन में कभी भी आ सकता है। उसने हमारे ही कॉलेज में दाखिला लिया है। उसके रहने का इंतजाम तुझे ही करना है। मैने तेरे घर का ही पता दिया है।

अरे बाप रे, यह क्या किया तूने। मेरे घर पर कहां रहेगा?

माना मेरे मां-बाप गांव गए हैं, मगर पास-पड़ोस वालों ने बता दिया तो मेरी खैर नहीं।

देख मैं कुछ नहीं जानती यह तुझे ही करना है। चाहे तो आज से ही उसके लिए कोई कमरा देखना शुरू कर दे।

कमरा तो खैर मेरे ही घर में एक खाली है, जो किराए पर भी देना है। मगर पता नहीं, मां-बाप तैयार होंगे या नहीं।

सब तैयार हो जाएंगे, तू मना लेना। वैसे भी राज काफी शरीफ लड़का है।

वह तो देख ही रही हूं कि जनाब कितने शरीफ हैं कि खेल-खेल में एक लड़की की चूत ले ली।

तू भी न बस। अरे वह तो बस हो गया। ऐसा कोई इरादा नहीं था हमारा। बॉबी ने शरमाते हुए कहा।

चल ठीक है, तू कहती है तो मैं ये कमरा उसे दे दूंगी। मधू थके से स्वर में बोली, मगर उसका मन बल्लियों उछल रहा था। उसे लगने लगा कि भाग्य भी उसका साथ दे रहा है और अब राज का लंड आसानी से उसकी चूत में चला जाएगा।

अभी दोनों बातें ही कर रही थीं कि दरवाजे पर दस्तक हुई।

मधू ने उठकर दरवाजा खोला तो लोहे की छोटी से पेटी लिए एक लड़के को खड़ा पाया।

मधू उसकी तरफ सवालिया निशान से देख ही रही थी कि तभी अंदर बैठी बॉबी की नजर भी उस पर पड़ गई और वह उछलते हुए बोली,

अरे राज तुम। आज कैसे आ गए। तुम तो दो दिन बाद आने वाले थे न।

बस वो खेतों का सारा काम हो गया था, तो मैने सोचा कि निकल चलता हूं। रहने और खाने का भी इंतजाम करना है। इन दो दिनों में वह कर लूंगा।

उसकी चिंता तुम मत करो। तुम्हारे रहने का इंतजाम मैने कर दिया है। बॉबी चहककर बोली।

कैसे? राज ने पूछा।

ये मेरी सहेली है, बॉबी ने मधू की तरफ इशारा करते हुए कहा। यह इसी का घर है और यहां एक कमरा खाली भी है जो तुम्हें किराए पर मिल जाएग.
 
मधू अब तक राज को ही निहार रही थी और उसकी चूत की खुजली बढऩे लगी थी। वह खयालों में खो गई कि जब राज यहां रहेगा तो वो कैसे जवानी का जलवा दिखाकर उसे पटाएगी और अपनी चूत मारने के लिए राजी करेगी।

तभी बॉबी ने उसे कोहनी मारते हुए, ऐ कहां खो गई।

आं..कहीं नहीं बस तेरी किस्तम पर जल रही हूं।

जलती है तो जलती रह, मगर खबरदार इस पर लाइन मारने की कोशिश मत करना। बॉबी ने मुस्कुराते हुए कहा।

राज यह सुनकर शरमा सा गया और नजरें चुराने लगा, तभी मधू चहककर बोली।

अरे मेरी बन्नो, मैं क्यों इन पर लाइन मारूंगी, मुझे क्या कमी है लड़कों की। तू अपने परदेशी को अपने पास ही रख।

यह कहकर वो अपनेपन से राज का हाथ पकड़कर घर के भीतर खींच लाई। राज दोनों सहेलियों की बात सुनकर बेचारगी से बॉबी का चेहरा देख रहा था। बॉबी उसकी हालत पर मुस्कुरा रही थी। अंदर कुर्सी पर बैठाकर मधू बोली, तुम दोनों बातें करों, मैं चाय लेकर आती हूं। यह कहकर वह कमरे से निकलकर चली गई।
 
भाग - 13

मधु के जाते ही राज ने बॉबी को बांहों में भर लिया। बॉबी कसमसाते हुए बोली,

क्या करे हो। क्यों इतने उतावले हो रहे हो। मधु आ जाएगी तो क्या सोचेगी।

राज शरारती ढंग से मुस्कुराकर बोला, मधु अब इतनी जल्दी नहीं आने वाली। वह जानती है कि दो प्रेमी कई दिनों बाद मिल रहे हैं। वह हमें मौका देने के लिए ही तो कमरे से बाहर गई है।

यह कहकर राज ने बॉबी के होंठ चूम लिए और इधर उसका हाथ बॉबी के चूतड़ों तक पहुंच चुका था। बॉबी ने उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करते हुए कहा,

अच्छा बाबा माना कि मधु नहीं आएगी, मगर दरवाजा तो बंद करो लो कम से कम। अगर आ भी गई तो जान जाएगी कि अंदर क्या चल रहा है और चली जाएगी।

राज ने कहा, हां यह ठीक है। इसके बाद वह मुड़ा और दरवाजा बंद करने लगा। जैसे ही दरवाजा बंद करके घूम तो पाया कि बॉबी पलंग पर लेटी है और उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देख रही है।

क्या इरादा है, राज ने पूछा।

वही, जो तुम्हारा है। अब जल्दी से आओ और मेरी चूंचियों और चूत पर अपना कमाल दिखाओ। मधु को इतनी ज्यादा देर भी नहीं लगने वाली।

इधर मधु कहकर तो गई थी कि चाय लेकर आती है, मगर वह कमरे के बाहर निकलते ही ओट में हो गई थी। उसने अंदर से दोनों की आवाजें सुनी और मन ही मन कुछ सोच लिया। जैसे ही राज ने दरवाजा बंद किया वह दरवाजे पर पहुंच गई। उसकी आंख दरवाजे की झिरी पर जम गईं।

अंदर राज ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बॉबी ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े भी अलग कर दिए। अब बॉबी बिस्तर पर नंगी लेटी थी। राज गौर से उसकी चूत देख रहा था, मगर दरवाजा बंद होने के कारण कमरे में थोड़ा अंधेरा हो गया था। चूंकि राज की पीठ दरवाजे की तरफ थी, इसलिए मधु को उसका लंड नजर नहीं आ रहा था। वह बेताब थी राज का लंड निहारने को। तभी बॉबी की आवाज आई,

क्या कर रहे हो, जल्दी आओ न। मधु के आने के पहले जो करना है जल्दी कर लो।

राज उसके पास पहुंच गया और बॉबी की चूत पर हाथ फिराने लगा। बॉबी मुस्कुरा रही थी। अचानक राज उठा और घूमकर स्टडी टेबल के पास पहुंचा। इसी क्षण मधु को उसका लंड नजर आ गया। हलकी रोशनी में भी राज के लंड का आकार और उसकी मोटाई देखकर मधु के मुंह में पानी आ गया। उसकी चूत में सुरसुरी सी होने लगी और उसका मन हुआ कि अभी कमरे में घुस जाए और राज का लंड अपने मुंंह में लेकर खा डाले।

इधर राज ने स्टडी टेबल पर रखा टेबल लैंप बिस्तर की तरफ घुमाया और उसे जला दिया। इसके बाद उसकी रोशनी का दायरा बॉबी की चूत पर फोकस कर दिया। बॉबी बोली,

क्या कर रहे हो?

कुछ नहीं, तुम्हारी चूत को गौर से देखना चाहता हूं। इसके पहले मौका ही नहीं मिला।

राज के यह कहते ही बॉबी मुस्कुरा दी। राज बॉबी के पास पहुंचा और उसकी चूत को निहारने लगा। बॉबी की गोरी, चिकनी चूत देखकर राज का लंड झटके लेने लगा। उसने बॉबी की चूत की दोनों फांके फैलाई तो अंदर गुलाबी रंग चमक उठा। वह चूत को अलग-अलग एंगल से फैला-फैलाकर देखता रहा और इधर बॉबी उसकी उंगलियों की हरकतों से ही सिसकारियां भरने लगी थी। अचानक वह बोली,

अब बस करो। जल्दी से चाटना शुरू करो न।

राज ने भी मुंह बॉबी की चूत पर रख दिया और उसकी दरार को खोलकर गुलाबी हिस्से को जीभ से चाटने लगा। इधर बॉबी सिसियाने लगी और उधर दरवाजे के बाहर खड़ी मधु दिलचस्प नजरों से राज का यह कमाल देख रही थी। उसे अब तक यह सुख ही नहीं मिला था। जितने भी लड़कों से उसने चूत मरवाई थी, किसी ने भी उसकी चूत को इतने प्यार से चूमा-चाटा नहीं था। मधु की चूत में अब जोरदार खुजली हो रही थी।

इधर राज बॉबी की चूत को चाटते-चाटते अपनी जीभ उसकी चूत के छेद में घुसेडऩे लगा और बॉबी के मुंह से सी…सी… की जोरदार आवाज निकल रही थी, जो बाहर खड़ी मधु के कानों में भी पड़ रही थी। उसकी चूत को चाटते-चाटते ही राज घूम गया और बॉबी ने उसका लंड पकड़कर अपने मुंह में डाल लिया। यह दृश्य देखकर मधु का हाथ अपने आप ही अपनी चड्ढी में पहुंच गया और उसे बॉबी से जलन होने लगी, जो इस समय राज का लंड जोर-जोर से चूस रही थी। कुछ देर तक दोनों एक दूसरे के यौनांग मुंह से चाटते-चूसते रहे। इसके बाद राज हटा और अपना लंड बॉबी की चूत के छेद पर टिकाकर उस पर लेट गया। बॉबी तो मानो इसी पल की प्रतीक्षा कर रही थी। राज के लंड का स्पर्श ही अपनी चूत के छेद पर पाते ही उसने अपनी आंखें मूंद ली। राज ने उसकी चूंची को मुंह में लिया और कमर को एक धक्का लगाया। बॉबी की चिकनी चूत में उसका लंड फिसलता चला गया। अंदर बॉबी के मुंह से जोरदार सिसकारी निकली और बाहर मधु के मुंह से।

राज बॉबी की चूंचियों को चूसते हुए उसकी चूत में लंड को अंदर-बाहर कर रहा था। राज का लंड हर धक्के के साथ बॉबी की चूत में जाता और बाहर आता। कमरे में चुदाई की आवाज गूंज रही थी और गूंज रही थी बॉबी के मुंह से निकलने वाली

आनंदकारी सिसकारियों की आवाजें। बॉबी ने अपनी दोनों टांगों को राज की कमर पर कस लिया और खुद भी नीचे से कमर उचका-उचकाकर धक्के का जवाब देने लगी। दोनों पसीने से लथपथ हो रहे थे, अचानक राज के मुंह से तेज सिसकारी की आवाज निकली और उसने अपना पूरा लंड बॉबी की चूत में जड़ तक ठेल दिया। उसके लंड से वीर्य छूटकर बॉबी की चूत की दीवारों से टकरा रहा था और इधर बॉबी का शरीर भी ऐंठने लगा और उसने कसकर राज के लंड को अपनी चूत में जोर से भींच लिया।

बाहर मधु की हालत खराब हो चुकी थी। वह दरवाजे के सामने से हटी और कुछ ही देर में चाय लेकर आ गई। तब तक बॉबी और राज भी कपड़े पहन चुके थे। मधु ने जैसे ही दरवाजा खटखटया, बॉबी ने तुरंत खोल दिया। मधु ने उसकी तरफ आंख मारते हुए फुसफुसाकर पूछा,

क्या हो रहा था, मेरी जान?

कुछ नहीं, बॉबी ने शरमाते हुए जवाब दिया। बस इधर-उधर की बातें चल रही थीं।

मैं जानती हूं कि दरवाजा बंद करके कौन सी इधर-उधर की बातें की जाती हैं। मधु फिर फुसफुसाई।

बॉबी ने शरम से नजरें झुका ली। राज बिस्तर पर बैठा दोनों सहेलियों को टुकुर-टुकुर देख रहा था। उसे उनकी बातों की आवाज तो नहीं आ रही थी, मगर वह समझ गया कि क्या बातें हो रही थीं। मधु ने चाय का प्याला उसकी तरफ बढ़ाया तो उसके होंठों पर शरारती और भेदभरी मुस्कुराहट थी। राज ने उससे नजरें चुराते हुए चाय का प्याला थाम लिया। तीनों ने चुपचाप चाय पी और फिर बॉबी बोली,

मधु मैं चलती हूं। इसका ध्यान रखना। फिर राज की तरफ मुड़कर बोली, अब यहां नहीं आउंगी। दो दिन बाद कॉलेज में ही मिलते हैं।

ठीक है, राज ने कहा।

और बॉबी चली गई। कुछ देर बाद मधु भी खाली कप लेकर चली गई और राज अकेला रह गया कमरे में। वह अपना सामान निकाल कर करीने से जमाने लगा। मधु अपने कमरे में लेटी योजना बना रही थी कि कैसे राज का लंड अपनी चूत में उतार सके।
 
भाग -14

मधु सारी रात बस इसी सोच में डूबी रही। इधर राज अपने कमरे में रातभर बॉबी के खयालों में करवटें बदलता रहा। उसे रह-रहकरस बॉबी के साथ बिताए हसीन लमहे याद आ रहे थे। बॉबी की मखमली चूत और गेंद सी चूचिंयों के स्पर्श का अहसास उसे सोने नहीं दे रहा था। वह जानता था कि अब बॉबी के साथ अकेले होना और हसीन पलों का मौका निकालना आसान नहीं होगा। राज बॉबी की जुदाई और उसकी याद में तड़प रहा था तो मधु राज का लौड़ा अपनी चूत में लेने की योजनाएं बनाने की सोच में करवटें बदलती रही। रात दोनों की ही जागते बीत गई और मधु के जेहन में एक खयाल घर कर गया कि सुबह उठते ही राज को अपनी जवानी का जलवा दिखाकर पटा लेगी और उसकी चूत में राज का लंड होगा।

यह खयाल आते ही मधु का जिस्म रोमांच से भर उठा और वह मन ही मन मुस्कुरा उठी कि अब बच्चू बचकर कहां जाएगा। मधु जानती थी कि दूसरे लड़कों की तरह राज भी मधु के जिस्म की एक झलक देखते ही दीवाना हो जाएगा और उसके साथ वह सब करने के लिए खुद ही मिन्नतें करने लगेगा, जो वह चाहती थी। यही सोचते-सोचते मधु निद्रा देवी की गोद में चली गई और राज के साथ बिस्तर पर होने वाले उस खेल के सुखद आनंद वाले सपने में डूब गई। राज भी बॉबी की याद में कब तक जागता। आधी रात के बाद नींद ने उसे अपने आगोश में ले ही लिया।

सुबह जब राज उठा तो साढ़े आठ बज रहे थे। चूंकि कॉलेज अगले दिन से खुलने वाले थे, इसलिए उसे घर पर ही रहना था। बॉबी पहले ही कह गई थी कि वह उससे कॉलेज के दिन ही मिलेगी। उसके आने की भी कोई संभावना नहीं थी। उसने आसपास थोड़ा घूमने का सोचा और बिस्तर छोड़कर बाथरूम में घुस गया। कुछ देर बाद वह नहा धोकर निकला और आईने के सामने खड़े होकर बाल संवारने लगा। तभी मधु उसके कमरे में चाय का कप लेकर दाखिल हुई। किसी के आने की आहट सुनकर राज पलटा तो सामने मधु को चाय का प्याला लिए खड़ा पाया। मधु को देखकर राज सकपका गया। मधु ने मैक्सी पहनी हुई थी और गले से नीचे दो बटन खुले थे, जिससे उसकी चूंचियों का ऊपरी हिस्सा नुमायां हो रहा था। राज ने हड़बड़ाते हुए पूछा,

जी, आप। यहां?

क्यों नहीं आ सकती क्या? मधु ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

नहीं जी आ क्यों नहीं सकती। आखिर घर तो आपका ही है। आपने जो किया उसके लिए मैं हमेशा आपका शुक्रगुजार रहुंगा।

अरे-अरे मैं यहां शुक्रिया लेने नहीं बल्कि चाय देने आई हूं। मुझे पता है कि तुम्हारे पास अभी चाय का सामान नहीं होगा। मधु की मुस्कान और गहरी हो गई।

राज ने खामोशी से उसके हाथ से चाय का प्याला ले लिया और बिस्तर पर बैठकर चुस्कियां लेने लगा। मधु अब भी वहीं खड़ी उसे ही देखे जा रही थी। मधु की नजरों से राज असहज हुआ जा रहा था। वह सोच रहा था कि अब तक वह खड़ी क्यों है, जा क्यों नहीं रही, मगर वह उसे जाने के लिए कह नहीं सकता था।

राज सोचों में गुम ही था कि अचानक मधु जोर से चिंहुंकी,

ऊई मां, मर गई?

क्या हुआ, राज ने हकबकाते हुए पूछा।

कुछ नहीं लगता है किसी चींटी ने काट लिया, मधु सिसकते हुए बोली।

कहां? बस यूं ही राज के मुंह से निकल गया।

मधु तो मानो इसी का इंतजार कर रही थी, वह राज के करीब पहुंची और मैक्सी के दो और बटन खोलकर अपनी एक चूंची बाहर निकालकर बोली, राज को दिखाते हुए बोली,

यहां…यहां काटी है।

मधु की इस हरकत से राज हड़बड़ा गया। वह सोच भी नहीं सकता था कि मधु यूं ही अचानक उसके सामने अपनी चूंची खोलकर रख देगी। मधु की चूंची गोरी और आगे गुलाबी निपल, जैसा की मधु सोचती थी, वाकई किसी की भी नीयत पलभर में बिगाड़ऩे के लिए काफी थी, मगर राज ने हड़बड़ाकर मुंह दूसरी तरफ फेर लिया।

मधु बोली, क्या हुआ। देखो न मुझे चींटी ने काटा। कुछ करो न।

आप अपनी चूंची को मैक्सी में डाल लीजिए मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।

क्यों क्या हुआ, मधु घूमकर राज की तरफ आ गई और मासूमियत से पूछा मैने क्या किया।

आप जो कर रही हैं या जो करना चाह रही हैं, वह ठीक नहीं है।

क्या ठीक नहीं है, मधु अब भी मासूम होने की एक्टिंग कर रही थी। नंगी चूंची अभी उसके हाथ में ही थी।

राज मधु को इस हालत में देखकर काफी असहज हो गया। वह बोला,

देखिए मधु जी आप बॉबी की सहेली हैं, इस नाते मैं आपकी काफी इज्जत करता हूं, मगर आप इसे अंदर कर लीजिए। मैं वैसा लड़का नहीं हूं। मैं बॉबी के अलावा किसी और के साथ यह सब नहीं कर सकता।

क्यों क्या मैं खूबसूरत नहीं हंूं, मधु को अंदर ही अंदर झुंझलाहट हो रही थी, मगर प्रकट में वह उसी तरह मुस्कुराते हुए बोली।

बहुत खूबसूरत हैं, कोई भी लड़का आप पर मर-मिट सकता है, मगर मैने बॉबी से प्यार किया है और उसी का होकर रहूंगा। राज ने शांत स्वर में जवाब दिया।

मधु कुछ देर उसका चेहरा देखती रही और फिर बोली, राज मैं तुम्हें पाना चाहती हूं। बस एक बार तुम मेरे जिस्म को भरपूर प्यार दो, यह कहते-कहते मधु ने अपनी मैक्सी उतार दी।

मधु कागोरा जिस्म सोने की तरह चमक

मधु गंभीरता ओढ़ते हु

राज ने केवल हां में सिर हिला दिया। मधु वहां से चली गई। उसके जाने के बाद राज ने चैन की सांस ली। वह कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा, फिर बाहर निकल गया।ए बोली,

अरे पागल, मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रही थी और अब मुझे भरोसा है। फिर ऐसा क्यों

और हां तुम कहीं नहीं जा रहे हो, यहीं रहोगे। समझे। करुंगी। यह कहकर वह चलने के लिए पलटी, मगर फिर घूमकर बोली,

अरे क्या फर्क पड़ता है, मैं तो वैसे ही बदनाम हूं। मैं नहीं चाहती थी कि मेरी पक्की सहेली को भी कोई ऐसा ही लड़़का मिल जाए l
 
इसलिए ये सब किया। वादा करो बॉबी से इसका जिक्र नहीं करोगे।

जी मैं उससे कुछ नहीं कहूंगा। मगर आप फिर ऐसा कभी मत करना।

अरे पागल, मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रही थी और अब मुझे भरोसा है। फिर ऐसा क्यों करुंगी। यह कहकर वह चलने के लिए पलटी, मगर फिर घूमकर बोली,

और हां तुम कहीं नहीं जा रहे हो, यहीं रहोगे। समझे।

राज ने केवल हां में सिर हिला दिया। मधु वहां से चली गई। उसके जाने के बाद राज ने चैन की सांस ली। वह कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा, फिर बाहर निकल गया।

अगले दिन राज कॉलेज पहुंचा तो पाया बॉबी मेन गेट पर ही उसका इंतजार कर रही थी। बॉबी को देखते ही राज खिल उठा और मुस्कुरा दिया। बॉबी ने भी मुस्कुरा कर राज का स्वागत किया।

वह इस बात से अनजान थी कि रंजीत और विनोद अपनी मंडली के साथ तब से ही उसके आसपास न सिर्फ मंडरा भी रहे थे बल्कि उस पर फब्तियां भी कस रहे थे, जब से वह वहां आई थी। बॉबी राज के खयालों में इतनी खोई थी कि उसे उन लोगों का अहसास भी नहीं था।

राज के आते ही बॉबी ने उसका हाथ पकड़ लिया और यह देखकर रंजीत और विनोद दोनों जलभुनकर खाक हो गए। रंजीत ने विनोद से कहा,

देख रहा है, हमें देखकर ये और इसकी मां कैसे उछल रही थी और अब सरेआम एक लड़के का हाथ पकड़कर घूम रही है।

घूमने दे रंजीत। इसको साली को एक दिन सबक जरूर सिखाएंगे। इस मादरचोद की गांड और चूत दोनों में लौड़ा न पेला तो मेरा नाम विनोद नहीं।

तू सही कहता है और यह गांव का छोकरा, इसकी साले की गांड में तो मूसल डालूंगा। मादरचोद को आए देर नहीं हुई और कॉलेज की पटाखा को पटा लिया।

वे इस तरह की बातें करते रह गए और राज का हाथ पकड़े-पकड़े ही बॉबी कॉलेज में दाखिल हुई और प्रिंसिपल के कमरे तक छोड़ दिया। रास्ते भर वह राज को कॉलेज की खूबियां गिनाती रही। राज केवल हां-हूं में जवाब देता रहा। वह तो बॉबी का साथ पाकर ही इतना खुश था कि उसे होश ही कहां था दूसरी ओर देखे।

एक तरफ कॉलेज के लड़के राज के भाग्य से ईष्र्या कर रहे थे और दूसरी ओर लड़कियां राज का सादगी भरा रूप और उसके आकर्षक व्यक्तित्व पर मर मिटी थीं। वे समझ नहीं पा रही थीं कि गांव से आए इस छोकरे से बॉबी पहले ही दिन इतनी बेतकल्लुफ कैसे हो गई। उन लड़कियों में कुछ बॉबी की स्कूल टाइम की सहेलियां भी थीं, जो बॉबी की तुनकमिजाजी को अच्छे से जानती थीं और यह भी जानती थीं कि बॉबी किसी लड़के को तो मुंह लगा ही नहीं सकती।

ये लड़कियां बॉबी की राज के साथ बेतकल्लुफी पर हैरत में भी थीं और जल भी रहीं थीं। वे सोच रही थीं कि काश वे बॉबी के स्थान पर होती तो राज का हाथ पकड़कर प्रिंसिपल के कमरे तक नहीं ले जा रही होती, बल्कि किसी एकांत स्थान पर ले गई होती और वहां बैठकर प्यार की बातें कर रही होती। उन लड़कियों को क्या पता था कि बॉबी और राज प्यार की उस सीमा को भी पार कर चुके हैं जो वे सोच भी नहीं रही थीं और वह भी पहली ही मुलाकात में।

राज प्रिंसिपल के सामने बैठा था और बॉबी बेसब्री से बाहर उसका इंतजार कर रही थी। तभी मधु वहां आ पहुंची। उसने आते ही बॉबी को गले लगा लिया और पूछा,

यहां क्या कर रही है? क्लास में नहीं चलना क्या?

राज सर के कमरे में गया है, उसका ही इंतजार कर रही हूं।

अरे वाह मेरी बन्नो, इतना प्यार। लैला-मजनू को फेल कर दिया तुम दोनों ने तो।

बॉबी केवल मुस्कुरा दी, मगर उसकी मुस्कान में भी एक अलग तरह का गर्व झलक रहा था। अचानक मधु बोली,

बॉबी संभलकर रहना, ये लड़के जो होते हैं न बड़े ही हरामी होते हैं। नई लड़की देखकर इनके मुंह में पानी आ जाता है। उसकी चूंची और चूत से जीभर खेलते हैं और फिर कोई और लड़़की मिलते ही छोड़ देते हैं।

मेरा राज ऐसा नहीं है, मधु। बॉबी ने गर्दन ऊंची कर घमंड से कहा।

हर लड़का ऐसा ही होता है, बॉबी। मैं अच्छे से इनकी जात जानती हूं। जहां नई चूत देखी नहीं कि जीभ निकालकर दुम हिलाने लगते हैं।

तू कुछ भी कह मधु, मगर मुझे राज पर पूरा भरोसा है।

और अगर यह भरोसा मैं तोड़ दूं तो? मधु ने पूछा।

कैसे? बॉबी ने उसकी तरफ मुंह घुमाकर कहा।

देख बॉबी तू तो मुझे जानती ही है। मुझे एक लड़के साथ कभी संतुष्टि नहीं मिली। मैं कपड़ों की तरह उन्हें बदलती हूं। तू कहे तो मैं राज पर लाइन मारती हूं। अगर वह दूसरे लड़कों की तरह हुआ तो जीभ निकालते हुए मेरे पास चला आएगा, नहीं तो मुझे बड़़ी खुशी होगी कि मेरी सहेली को एक सच्चा प्रेमी मिल गया।

तुझे जो करना है कर ले मधु, मुझे भरोसा है कि राज तेरा नंगा जिस्म देखकर भी नहीं पिघलेगा।

मधु, बॉबी के क्या बताती कि पिछली रात कुछ ऐसा हो चुका है, जब राज ने उसका नंगा जिस्म ठुकरा दिया था। मगर वह एक चांस और लेना चाहती थी। इस बार बॉबी को इसलिए बता रही थी कि कहीं राज उसे बता दे तो उसके पास यह बहाना रहेगा कि दोनों उसकी परीक्षा ले रही थीं। प्रकट में वह बोली,

मैं आज से ही उसे भाव देना शुरू कर देती हूं। तू देख लेना दो दिन बाद वह मेरे बिस्तर पर होगा और मेरी चूत चाट रहा होगा।

तू वहम में है मधु। माना तू बहुत खूबसूरत है, मगर वह राज है। तेरी जैसी हजार लड़कियां भी चुत खोलकर खड़ी हो जाएं तो भी वह मेरा ही रहेगा।

तो लगी शर्त, मधु ने हाथ बढ़ाकर कहा।

लग गई। बॉबी ने उसके हाथ पर हाथ मारकर कहा।

शर्त जीत गई तो क्या मिलेगा। मधु ने पूछा।

जो तू कहेगी। बॉबी ने आत्मविश्वास भरे लहजे में जवाब दिया।

मधु ने सोच लिया कि यदि राज उसकी खूबसूरती के जाल में फंस जाता है तो वह बॉबी को रंजीत और विनोद के साथ चूत-लंड का खेल खेलने के लिए राजी कर लेगी। दोनों कई बार उसे बॉबी की चूत दिलवाने की गुजारिश कर चुके थे, मगर हर बार वह अपनी भोली सहेली का पक्ष लेती। राज के आने के बाद उसी भोली सहेली से वह जलने लगी थी और अब वह उससे पता नहीं किस बात का बदला लेना चाहती थी।

तभी राज प्रिंसिपल के कमरे से बाहर आ गया और दोनों की बातचीत बंद हो गई। मधु ने मुस्कुराकर राज का अभिवादन किया और पूछा,

जब एक ही कॉलेज आना था तो रुक नहीं सकते थे। दोनों साथ आते।

जी मुझे सुबह जल्दी उठने और निकलने की आदत है। पैदल-पैदल यहां तक चला आया। फिर प्रिंसिपल सर से मिलकर आवेदन भी भरना था।

मधु कुछ कहती इसके पहले बॉबी बोल पड़ी, हो गया दाखिला।

हां हो गया और सर ने कहा मैं आज से ही क्लास में बैठ सकता हूं।

तो चलो। बॉबी ने फिर से उसका हाथ पकड़ते हुए कहा, देर किस बात की है। क्लास शुरू हो चुकी है।

तीनों क्लास की तरफ चल दिए।
 
कुछ दिन ऐसे ही कॉलेज की मस्ती में गुजर गए। बॉबी कॉलेज में या तो मधु के साथ होती थी या राज के। विनोद और रंजीत बॉबी की खूबसूरती के दीवाने थे और किसी भी तरह उसे चोदने की प्लानिंग किया करते थे।

मधु को कई बार उन्होंने जाल में फंसाने की कोशिश की कि वह बॉबी को एक बार फंसाकर शहर के बाहर खंडहर में ले आए, मगर मधु उनकी बातों के जाल में नहीं आई। राज को लेकर उसकी दीवानगी भी बढ़ती जा रही थी।

वह बॉबी से जलने लगी थी, मगर उसे धोखा भी नहीं देना चाहती थी। इधर रंजीत और विनोद ने बॉबी और राज के संबंधों को लेकर कॉलेज में अफवाहें फैलाना शुरू कर दीं। बॉबी ने इसकी कोई परवाह नहीं की।

वह क्लास में, बगीचे में यहां तक कि लाईब्रेरी में भी राज के साथ ही नजर आती थी। इसके बाद भी दोनों को उसका मौका नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण दोनों में नजदीकियां बढ़ीं थीं। चाहकर भी वे जिस्म की प्यास नहीं बुझा पा रहे थे। खुजली बॉबी की चूत में भी होती और राज का लंड भी बॉबी को देखते ही खड़ा हो जाता, पर क्या करें मजबूर थे दोनों।

ऐसी कोई जगह ही नहीं थी जहां वे जाकर एक दूसरे को मजा दे सकें। मधु के घर राज के कमरे पर एक बार मौका मिला था, लेकिन अब मधु के माता-पिता के आ जाने से बॉबी वहां भी नहीं जा सकती थी। दोनों इसी उहापोह में थे कि करें तो करें क्या? एक-दो बार बॉबी ने राज से कहा कि शहर के बाहर खंडहर में जाकर वे मस्ती कर सकते हैं, मगर राज ने यह कहकर मना कर दिया कि सुरक्षित नहीं है। और एक दिन एक ही क्लास के बाद राज ने खुद ही बॉबी से कहा,

बॉबी आज तुम्हें मेरे साथ चलना है।

कहां, बॉबी ने पूछा।

यहीं एक बगीचा है, वहां चलना है।

मगर अभी तो एक ही क्लास हुई है।

तो क्या हुआ, आज हम दूसरा ही पाठ पढ़ेंगे।

क्या बात है, बगीचे में ले जाकर मुझे चोदोगे क्या? बॉबी शरारत से बोली।

कुछ ऐसा ही समझ लो। राज ने मुस्कुराते हुए कहा।

देखो राज यह मत सोचना कि मैं बगीचे में खुल्लम-खुल्ला तुमसे चुदवाने को तैयार हो जाऊंगी। मैं उस तरह की लड़की नहीं हूं।

अरे बाबा तुम चलो तो सही। फिर कहना।

ठीक है तुम कहते हो तो चलती हूं।

इतना कहकर बॉबी मधु को इशारा कर क्लास से निकल गई। राज भी उसके पीछे ही था। सबसे पीछे बैठे रंजीत ने विनोद को कोहनी मारते हुए कहा,

गुरू दाल में कुछ काला है। चिडिय़ा कहीं जा रही है और पीछे लल्लू भी है।

विनोद भी बॉबी और राज को जाते देख चुका था। उसने कहा तो इंतजार किस बात का है। हम भी इनके पीछे चलते हैं। आज तो इसको चोदकर रहेंगे।

विनोद और रंजीत भी क्लास से निकल गए।

इधर राज , बॉबी को साइकिल पर बैठाकर जा चुका था। विनोद और रंजीत जब तक अपनी साइकिलें उठाते दोनों जा चुके थे। रंजीत ने कहा,

गुरू चिडिय़ा तो उड़ गई।

उड़कर जाएगी कहां। प्रेमियों के मिलन का एक ही तो स्थान है इस शहर में। बाहर किले का खंडहर। दोनों जरूर वहीं गए होंगे।

तुम ठीक कहते हो गुरू, तो हम भी वहीं चलें।

हां, मगर अपने चेलों को भी साथ ले लो।

क्यों गुरू उसका भंडारा करना है क्या?

अरे नहीं, उसकी चूत तो हम ही मारेंगे। वे साले चोद नहीं पाएंगे तो क्या इसकी चूत देखकर ही तमन्ना पूरी कर लेंगे। वो साला लल्लू हाथ-पैर मारेगा तो उन्हें तोडऩे को भी कोई चाहिए।

रंजीत ने अपने जैसे कुछ और लड़कों को लिया और सभी पुराने किले की तरफ चल दिए।

इधर राज बॉबी को लेकर शहर के बाहर तरफ बने एक बगीचे में पहुंचा, जो किले से थोड़ी दूर था। वह बॉबी को लेकर सीधे चौकीदार के कमरे पर गया। उन्हें देखते ही चौकीदार बाहर आया और चला गया। राज , बॉबी को अंदर ले आया। आखिर बॉबी ने पूछा,

यह कहां ले आए।

ये मेरे ही गांव का है, यहां चौकीदारी करता है। उसे मैने मना लिया कि दो घंटों के लिए कमरा हमें दे दे। दो रुपये में ही तैयार हो गया। अब दो घंटे तक हम जो चाहे कर सकते हैं।

बॉबी ने मुस्कुराकर बांहें फैला दी। राज ने उसे बांहों में समेट लिया और गोद में उठाकर वहीं पड़ी चारपाई पर लेटा दिया। इसके बाद एक-एक कपड़े बॉबी के तन से अलग होते गए। बॉबी टुकुर-टुकुर राज को निहारती रही। राज ने अपने भी कपड़े उतारे और बॉबी के पास लेट गया। दो नंगे जिस्म एक ही चारपाई पर एक-दूसरे के तन की आग बुझाने को बेताब थे।

राज ने धीरे से बॉबी के होंठों को चूम लिया और उसका हाथ उसकी चूंचियों पर था। बॉबी भी राज के तने लंड को थाम चुकी थी और बड़े ही प्यार से उसे सहला रही थी। राज ने होंठों के बाद बॉबी की चूंचियों को बारी-बारी चूसा और उसकी चिकनी सफाचट चूत को सहलाता रहा। बॉबी राज के बालों में उंगलियां फिरा रही थी। बॉबी की चूंचियों पर अपने होंठों की मोहर लगाने के बाद राज नीचे सरका और उसकी चूत पर होंठ टिका दिए। बॉबी के मुंह से सिसकारी सी निकल गई…

ओ…ह….राज ….कितने दिनों बाद मेरी चूत को तुमने चू…मा….है….सी….सी…आ…ह….

राज ने उसकी तरफ कनखियों से देखा, बॉबी का आंखें आनंद से बंद हो चुकी थीं। वह धीरे-धीरे उसकी चूत को चाटने लगा और जीभ से फांकों के बीच कुरदने लगा। बॉबी आनंद से सिसरियां ले रही थी। कुछ देर राज उसकी चूत को चाटता और चूसता रहा, फिर बॉबी बोली,

ब…स…. अब और नहीं सह पाउंगी, जल्दी से लंड मेरी चूत में डाल दो।

राज ने उसकी चूत से मुंह हटाया और कहा आज दूसरे तरीके से। आज बारी तुम्हारी है। बॉबी उसके इशारे के समझ गई और उठ गई। राज चारपाई पर चित लेट गया। उसका तना लंड छत को निहार रहा था। बॉबी ने पहले तो उसके लंड को प्यार से सहलाया और मुंह में लेकर चूसने लगी। थूक से लंड को पूरी तरह गीला करने के बाद बॉबी अपनी टांगे राज की कमर के दोनों तरफ फैलाकर बैठ गई। राज का लंड उसकी चूत को चूम रहा था। बॉबी ने अपने हाथ से उसके लंड को चूत के छेद पर लगाया और थोड़ा ऊपर होकर एकदम से बैठ गई। एक ही झटके में राज का लंड उसकी चूत में जड़ तक घुस गया। बॉबी जोर से कराही,

आ…

ह…..हाय….मैं….म….र….गई….सी….ई….ई…..

क्या हुआ, राज ने कहा।

आ…ह…. राज कितने दिनों बाद चूत की प्यास बुझी है।

यह कहकर वह जोर-जोर से राज की कमर पर कूदने लगी। राज का लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। राज ने सिर उठाकर बॉबी की चूंची को मुंह में ले लिया और बॉबी की गति में अजब की तेजी आती जा रही थी, मानो वह कई दिनों की भूखी हो और अब खाना मिला तो सब एक साथ खा जाना चाहती है।

बॉबी के हर धक्के के साथ राज भी अपनी कमर उछाल रहा था। आखिर दस मिनिट में बॉबी पस्त हो गई उसके मुंह से तेज सिसकारी निकली…

ओ…ह….राज …आ…ह….सी…सी….

और इधर राज के लंड ने भी वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। बॉबी ने कसकर उसे अपनी चूत में भींच लिया मानो उसकी एक-एक बंूद को निचोड़ लेना चाहती हो। बॉबी यूं ही राज के ऊपर लेट गई। कुछ देर बाद राज ने कहा,

बॉबी उठकर नाली में पेशाब कर लो।

क्यों बॉबी ने पूछा।

ऐसा करने से वीर्य तुम्हारी चूत से निकल आएगा और तुम गर्भवती नहीं होओगी।

ठीक है।
 
बॉबी ने कहा और उठकर नाली पर बैठ गई। राज उसे यूं ही देखता रहा। बॉबी की चूत से पानी की धार छूटी और नाली में गिरने लगी। राज उसे एकटक ऐसे ही निहारता रहा और बॉबी पेशाब करते हुए मुस्कुराती रही। इसके बाद वह उठी और राज के पास लेट गई। तब तक राज का लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा था। बॉबी ने उसे फिर से थाम लिया। चौकीदार के आने तक राज तीन बार बॉबी की चुदाई कर चुका था। चौकीदार के आने के पहले ही दोनों कपड़े पहन चुके थे।

उन्हें बस उसके आने का इंतजार था। चौकीदार के आते ही राज ने उसे दो रुपये थमाए और बॉबी को लेकर निकल गया।

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राज , बॉबी को साइकिल पर बैठाकर मस्ती से चला आ रहा था। इधर पुराने किले पर विनोद और रंजीत पहुंचे तो थे, मगर दोनों को वहां न पाकर मायूस हो गए। काफी देर उन्होंने वहां इंतजार किया और अब बाहर खड़े होकर यही सोच रहे थे कि दोनों कहां गए होंगे। वे लोग भी बस निकलने का सोच ही रहे थे कि तभी एक लड़के ने दोनों को इधर ही आते देख लिया और वह चिल्ला पड़ा,

गुरू वो देखो, चिडिय़ा अपने यार के साथ आ रही है।

तब तक विनोद की नजर पर भी दोनों पर पड़ चुकी थी, वह आदेश देते हुए बोला,

देख क्या रहे हो, दोनों को पकड़ लो और ले चलो अंदर। आज तो किस्मत भी हमारा साथ दे रही है।

राज और बॉबी मस्ती में बातें करते हुए चले जा रहे थे, इस बात से बेखबर की आगे बड़ी मुसीबत उनका इंतजार कर रही है। दोनों का ध्यान तब टूटा जब सामने विनोद और रंजीत को अपनी टोली के साथ सड़क के बीचो-बीच खड़े देखा। उन्हें देखते ही राज की भौंहें तन गई। वह जानता था कि वे बॉबी पर बुरी नजर रखते हैं और हमेशा बदतमीजी करने का बहाना ढूंढा करते हैं। वह गुस्से से बोला,

यह क्या हरकत है। इस तरह हमारा रास्ता क्यों रोककर खड़े हो?

हरकत तो तुझे हम बताएंगे भैनचोद। साले मजनूं की औलाद। विनोद साइकिल का हैंडल थामकर बोला। उसकी नजरें लगातार बॉबी पर ही टिकी हुई थीं। राज कुछ कहता इसके पहले बॉबी बोल पड़ी,

यह तुम ठीक नहीं कर रहे हो। तुम जानते नहीं मेरी मम्मी को।

तेरी मम्मी से हमे क्या लेना छमिया, हम तो तेरी चूत के दीवाने हैं। इस बार रंजीत बेशर्मी से बोला।

रंजीत के मुंह से इतना सुनते ही राज आपे से बाहर हो गया।

वह गुस्से से चिल्लाया- साले, तेरे मुंह से बॉबी के लिए ऐसी वाहियात बात निकली कैसे?

क्यों, प्यारे इसकी चूत पर क्या तेरे नाम का ठप्पा लग गया है। मादरचोद, तू चोदे और हम बात भी नहीं कर सकते। विनोद हंसते हुए बोला।

राज की मुट्ठियां गुस्से से भिंचने लगी। तभी बॉबी बोली, राज इनके मुंह लगने का कोई मतलब नहीं। चलो यहां से।

जाओगी कैसे मेरी रानी, इस बार विनोद ने बॉबी का हाथ पकड़ लिया और कमीनगी से बोला- बड़े दिनों से तेरी चूत मारने के सपने देख रहे थे। आज तो सपना पूरा होने जा रहा है।

अब राज के सब्र का बांध टूट गया उसने विनोद को एक थप्पड़ रसीद कर दिया और चिल्लाया,

साले, बॉबी को हाथ भी लगाया तो तेरी मां चोद दूंगा।

विनोद का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, वह बोला,

साले तू क्या हमारी मां चोदेगा, आज तो तेरी छमिया तेरी ही आंखों के सामने हम सबसे चुदेगी। फिर वह अपनी टोली से बोला, पकड़ लो दोनों को और ले चलो अंदर।

रंजीत और चार-पांच लड़कों ने राज को पकड़ लिया और उसे घसीटने लगे। राज संघर्ष कर रहा था, मगर इतने लड़कों से वह अकेले नहीं लड़ सकता था। इधर विनोद ने बॉबी को कंधे पर उठाया और किले की तरफ बढ़ गया। अंदर जाकर रंजीत और सारे लड़कों ने राज को जमीन पर पटक दिया और उसे लात-घूंसों से पीटने लगे। तब तक विनोद भी बॉबी को उठाए पहुंच गया। उसने बॉबी को उतार दिया। बॉबी राज की तरफ दौड़कर गई और उसके ऊपर लेट गई।

वह हाथ जोड़कर विनती करने लगी, – इसे मत मारो। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं।

विनोद उसे खींचते हुए बोला,- मेरी जान हाथ जोडऩे से क्या होगा। अब तू तय कर ले कि प्यार से चुदेगी या तेरा बलात्कार करना पड़ेगा। सोच ले प्यार से हमारी बात मान लेगी तो तेरे यार को छोड़ देंगे नहीं तो मार-मार कर इसका हुलिया बिगाड़ देंगे। चूत तो तेरी फिर भी चुदेगी।

राज चिल्लाया, नहीं बॉबी इन कमीनों की बात मत मानना। तुम यहां से भाग जाओ।

भागकर कहां जाएगी साले मादरचोद। भागने के लिए तो इसे नहीं पकड़ा है। रंजीत कहकहे लगाते हुए बोला।

विनोद ने फिर बॉबी से कहा, – सोच क्या रही है, साली तेरी चूत घिस तो जाएगी नहीं। कितनी बार अपने यार से चुद चुकी है। एक बार हमे भी मौका दे। खुश न कर दिया तो कहना।

बॉबी उनके हाथ जोडऩे लगी,- हमे छोड़ दो प्लीज। हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं। ऐसा मत करो प्लीज।

तो हम कौन सा तेरा प्यार मांग रहे हैं। बस एक बार तेरी चूत ही तो मारना चाहते हैं। फिर तू इससे प्यार करती रहना, कौन रोक रहा है। यह कहकर विनोद ने बॉबी को छोड़ दिया और बोला, – अब तू कपड़े उतारना शुरू कर रही है या तेरे यार की और पूजा की जाए।

राज चिल्लाया, – नहीं बॉबी इन कमीनों के सामने कपड़े मत उतारना। तुम भाग जाओ।

राज के इतना कहते ही रंजीत ने उसे फिर पीटना शुरू कर दिया और बोला, – साले तेरे अंदर बहुत चर्बी है, पहले उसे बाहर करता हूं।

राज को यूं पिटता देख बॉबी से रहा नहीं गया – वह जोर से चिल्लाई, प्लीज मत मारो इसे, मैं कपड़े उतारती हूं।

नहीं बॉबी, राज ने चिल्लाकर कहा- तुम्हें मेरी कसम। इनके सामने नंगी मत होना।

नहीं राज मेरी चूत तुम्हारी जान से ज्यादा कीमती नहीं। तुम्हारे लिए तो मैं जान भी दे सकती हूं, ये चूत तो चीज ही क्या है।

राज नीचे पड़ा-पड़ा बेबसी से कसमसा रहा था और इधर बॉबी ने अपने शर्ट की बटन खोलनी शुरू कर दी। विनोद और रंजीत के साथ उनकी पूरी टोली होंठों पर जीभ फेरते हुए बॉबी को ही देख रहे थे। अचानक पता नहीं क्या हुआ कि बॉबी ने बाहर की तरफ दौड़ लगा दी।

यह देख रंजीत चिल्लाया, – गुरू चिडिय़ा तो भाग रही है।

पकड़ो उसे, विनोद ने चिल्लाकर कहा।

सारे लड़के बॉबी के पीछे भागे। अंदर केवल विनोद और रंजीत रह गए। वे अपना गुस्सा राज पर निकालने लगे। इधर बॉबी तेजी से निकलकर सड़क पर आ गई थी। और एकाएक एक कार आकर उसके सामने रुकी। वह उससे टकराते-टकराते बची। कार का दरवाजा खुला और बॉबी उसमें समा गई।
 
बॉबी को कार में बैठता देख सारे लड़के वापस भीतर लौट गए। उनमें से एक ने कहा – गुरू चिडिय़ा तो उड़ गई। एक कार में बैठकर निकल गई।

विनोद और रंजीत गुस्से में लाल हो गए। अचानक विनोद चीखा – उतारो इसकी साले की पतलून। आज इसकी गांड ही मारेंगे। यही सोच लेंगे कि बॉबी नहीं तो उसके यार की गांड ही सही।

सारे लड़के राज की पतलून खींचने लगे। तभी वहां गोली की आवाज गूंजी…धांय…. और इसी के साथ एक रौबदार आवाज आई – इसे छोड़ दो, नहीं तो एक-एक को भूनकर रख दूंगा।

विनोद और रंजीत सहित सबने पलटकर देखा तो कोट-पैंट पहने एक व्यक्ति को सामने खड़े पाया, जिसके हाथ में रिवाल्वर था। उसके पीछे बॉबी खड़ी थी।

आगंतुक ने एक बार फिर चेतावनी देने वाले लहजे में कहा, – उसे छोड़ो और यहां से दफा हो जाओ, नहीं तो अपने अंजाम के जिम्मेदार तुम लोग खुद होओगे।

इस बार जैसे सभी नींद से जाए और भाग खड़े हुए। बॉबी राज को संभालने में लग गई। वह बुरी तरह घायल था। उसे मुंह से खून बह रहा था। कपड़े फट गए थे। हाथ-पैर में भी चोट आई थी। बॉबी ने अपने मददगार की सहायता से राज को उठाया और बाहर तक लाकर कार की पिछली सीट पर लेटा दिया। आगंतुक ने ड्राइविंग सीट संभाली और कार फर्राटे मारती हुई निकल गई। कुछ ही दूर छिपकर बैठे विनोद और उसकी टोली के लड़के हाथ मलते रह गए।

कार में बॉबी पीछे की सीट पर राज का सिर गोद में लेकर बैठी थी। उसने कहा, – तुम ठीक तो हो ना?

राज ने कहा हां मैं ठीक हूं। मगर ये कौन हैं?

बॉबी बोली, – भगवान का शुक्र है कि सही समय पर कार की आवाज सुन ली और मैं बाहर दौड़ पड़ी। कार में डॉक्टर अंकल निकले। उन्हें सारी बता बताई तो वे तुरंत मेरे साथ अंदर आ गए।

डॉक्टर अंकल उन्हें अपने क्लिनिक ले आए और वार्ड ब्याय की सहायता से राज को उतारकर एक बेड पर लेटा दिया। फिर बॉबी से बोले, – तुम घर जाओ। तुम्हारी मम्मी चिंता कर रही होंगी।

लेकिन राज , बॉबी ने कुछ कहना चाहा।

उसकी चिंता तुम मत करो। अब ये मेरी क्लिनिक पर है। इसे ठीक होने के बाद ही यहां से जाने दूंगा। तुम जाओ।

बॉबी ने हां में सिर हिलाया और राज के पास आकर उसका माथा चूमा और फिर भरी आंखों से वहां से निकल गई। डॉक्टर अंकल का ड्राइवर कार लिए बाहर उसका इंतजार कर रहा था।
 
बॉबी भरे मन से घर तो आ गई, मगर उसका मन अस्पताल में राज के साथ ही था। नीचे ड्राइंग रूम में शारदा देवी बैठी कुछ फाइलों को देख रही थीं। बॉबी को गुमसुम देख उसकी मां को चिंता हुई, मगर बॉबी उनसे कुछ कहे बिना अपने कमरे में चली गई।

राज चार दिन क्लिनिक पर ही रहा। उसे अंदरूनी चोट आई थी और जख्मों पर रोज मरहम-पट्टी भी करना पड़ती थी। बॉबी रोज घर से कॉलेज के लिए निकलती और सीधे क्लिनिक पहुंच जाती। पूरे दिन राज की सेवा में लगी रहती। दोनों दिनभर में खूब बातें करते। गांव की, कॉलेज की, चुदाई की और प्यार की। बॉबी ने फिर कभी उस हादसे का जिक्र नहीं किया और राज भी इसे भूलना चाहता था।

पांचवे दिन राज को छुट्टी मिल गई। बॉबी चाहती थी कि वह उसे लेकर उसके कमरे पर जाए, मगर बॉबी जानती थी कि वहां मधु के माता-पिता थे और वे राज से उसकी नजदीकी जानकर शारदा देवी को खबर भी कर सकते थे। शारदा देवी से उनकी काफी घनिष्ठता थी। इसलिए बॉबी ने भरे मन से क्लिनिक से ही राज को अलविदा कहा और घर लौट आई।

इधर विनोद और रंजीत ने कॉलेज में बॉबी की बदनामी शुरू कर दी थी। दीवारों पर राज और बॉबी को लेकर तरह-तरह के नारे लिखे गए थे। कॉलेज के छात्र-छात्राओं में उनके प्यार-मोहब्बत के साथ चुदाई के किस्से मशहूर हो रहे थे। लड़के-लड़कियां चुदाई के किस्से गढ़ते और चटखारे लेकर एक-दूसरे को सुनाते।

बॉबी की चूत किसके लिए, राज के लिए।

राज का लंड घुसा बॉबी की चूत में।

बॉबी की चूत की चकाचक सफाई के लिए इस्तेमाल करें लाइफबॉय साबुन।

बॉबी की चड्ढी खुली, राज के लिए।

कुछ इसी तरह के नारों से कॉलेज की दीवारें रंग गईं थीं।

राज और बॉबी जब कॉलेज पहुंचे तो उनका सामना इसी तरह के नारों से हुआ। कॉलेज में हरेक केवल उन्हीं दोनों के किस्से चटखारे लेकर सुनता और सुनाता।

राज बॉबी को तसल्ली देना चाहता था, मगर वह कुछ कह नहीं पा रहा था।

बॉबी इस पर ध्यान नहीं देती बल्कि वह अब और ज्यादा खुलकर राज के साथ ही रहने लगी थी, मानो अब बदनामी का डर भी खत्म हो चुका था। यह सब देखकर विनोद और रंजीत अंदर ही अंदर जलते मगर कुछ कर नहीं पा रहे थे। उन्हें डर था कि बॉबी ने यदि उनकी शिकायत प्रिंसिपल को कर दी वे कॉलेज से निकाल दिए जाएंगे।

प्रिंसिपल के कानों तक भी बॉबी और राज के संबंधों की चर्चा पहुंच चुकी थी। रही-सही गवाही दीवारों ने दे दी। उन्होंने बॉबी को बुलाकर इस मामले में पूछताछ करने की कोशिश की।

वह केवल इतना ही बोली कि शरारती लड़कों की हरकत है सर आप प्लीज मेरे घर पर मत बताना नहीं तो कॉलेज आना बंद कर दिया जाएगा।

मगर बॉबी इस तरह कैसे चल पाएगा। इस तरह तो तुम पढ़ाई नहीं कर पाओगी।

कुछ नहीं सर कुत्ते हैं। कुछ दिन भौंकेंगे फिर खामोश हो जाएंगे।

ठीक है प्रिंसिपल ने कहा, मगर तुम कुछ दिन कॉलेज आना बंद कर दो। तुम्हें न देखकर शायद चर्चाएं भी थम जाए।

बॉबी विरोध करने लगी तो प्रिंसिपल ने कहा, देखो बॉबी तुम अगर मेरी बात नहीं मानोगी तो मुझे मजबूरन तुम्हारी मां को सब बताना होगा। तुम कॉलेज आना बंद कर दो। एक सप्ताह ही बात है। यहां मैं सब संभाल लूंगा।

ठीक है, बॉबी मजबूरी भरे स्वर में बोली और केबिन से निकल गई।

कॉलेज के बगीचे में राज के साथ बॉबी बैठी थी, मगर गुमसुम, चुपचाप सी थी।

राज ने पूछा, क्या हुआ। आज इतनी खामोश क्यों हो।

हमे लेकर जो बातें चल रही हैं, वह सर को पता चल गईं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन कॉलेज मत आओ। वे सब ठीक कर देंगे।

राज , बॉबी की आंखों में झांकता, जिनमें आंसू तैर रहे थे। वह उसका हाथ थामकर बोला। सर ठीक कह रहे हैं बॉबी। तुम्हें कुछ दिन यहां न देखकर बातें खत्म हो जाएंगी।

लेकिन राज , तुम्हारे बिना अब एक पल नहीं रहा जाता। बॉबी उदास स्वर में बोली।

कौन सा हमेशा के लिए जा रही हो। कुछ ही दिन की तो बात है। फिर हम साथ होंगे।

बॉबी ने राज के कंधे पर सिर रख दिया और राज उसका सिर हौले-हौले सहलाने लगा।

बॉबी ने अगले दिन से कॉलेज आना बंद कर दिया। उसने यह केवल मधु को ही बताया था। राज का लंड पाने की मधु की हसरत खत्म नहीं हुई थी। उसे लगा कि इससे अच्छा मौका उसे नहीं मिल सकता। उसने रंजीत को लालच दिया कि बॉबी की चुदाई करवा देगी और राज को हासिल करने का प्लान बनाया।
 
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