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पापा तुम गंदे हो Complete

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उन्होंने मेरी बात सुनकर मेरे बूब्स को दबा दिया, मैं झुककर उनके होंठों को चूसने लगी।

अब यह रोज की बात हो गयी थी। रोज ही पापा मम्मी के सोने के बाद आते और मेरे साथ नंगे होकर ये गर्म खेल खेलते। मैं पापा की दीवानी बन गयी थी, एक रात भी मैं उनके बगैर गुजारूं, ऐसी कल्पना भी नहीं कर सकती थी।

मैं पापा की हर वो ज़ायज़ नाज़ायज़ बात मानती जो वो कहते। जब भी वो मुझे अकेले देखते, दिन हो या रात… अपना लंड मेरे मुंह में डाल देते। मैं खुद भी उनकी इतनी आदी हो गयी थी कि मम्मी के घर से बाहर जाते ही उन पर टूट पड़ती। मैं हर पल उनके सामने बिछने को तैयार रहती।

इसी तरह 3 माह बीत गये। पापा और मेरा ये खेल रात दिन अपने शवाब पर बना हुआ था। मैं प्रेग्नंट न हो जाऊ इसलिए पापा मुझे दवाइयाँ भी देते रहते थे। लेकिन कभी भी कंडोम का इस्तेमाल नहीं करते थे।

एक दिन मेरी तबीयत ख़राब हुई, मेरे पेट में दर्द सा हो रहा था। शायद कुछ उल्टा सीधा खा लेने से हुआ था। पापा उस वक़्त घर पर नहीं थे, मम्मी ने मुझे परेशान देखा तो मुझे अपनी एक सहेली डॉक्टर के पास ले गयी।

मम्मी के साथ कहीं जाना मुझे अच्छा नहीं लगता था लेकिन उस वक़्त मैं मजबूर थी।

उस दिन उस लेडी डॉक्टर ने जाने मम्मी से क्या कहा पर उनकी आँखें गुस्से से लाल हो गयी।

जैसे ही हम घर पहुंचे पापा आ चुके थे। उनके सामने ही मम्मी मुझ पर टूट पड़ी… गालियाँ चाँटे… सब मुझे खाने को मिला।

पापा मम्मी की बात सुनकर अपने रूम से बाहर निकले और मम्मी से पूछा- क्या हुआ ? क्यों चिल्ला रही हो?

“पूछो अपनी बेटी से… किसको अपना खसम बनाया है इस कलमुही ने? तुम्हें तो अपने घर में झाँकने की फुर्सत ही कहाँ है!”

मम्मी की बात सुनकर पापा का चेहरा पीला पड़ गया।

मैं सोच रही थी कि पापा मुझे मम्मी से बचाएँगे लेकिन वो एक तरफ दुबके खड़े रहे। उस दिन पहली बार मुझे पता चला कि जो मैं पापा के साथ अब तक करती रही, वो गलत था। शायद इसलिए पापा खामोश थे और डरे सहमे मेरी ओर देख रहे थे। उन्हें यह चिंता हो रही थी कि कहीं मैं मम्मी के सामने पापा का भेद न खोल दूँ।
 
लेकिन मैं ऐसा कुछ भी नहीं करने वाली थी। मैं पापा के प्यार की आदी हो चुकी थी उन्हें मम्मी के सामने लाकर मैं उनसे दूर नहीं होना चाहती थी। मैं खामोश सुनती रही, गालियाँ और चाँटे ख़ाती रही लेकिन अपनी जुबान नहीं खोली।

पापा दूर खड़े अपनी बेबसी पर सर खुजाते रहे।

आखिरकार थक हार कर मम्मी सोफ़े पर बैठ गयी और रोने लगी। मैं भी सिसकती हुई अपने कमरे में चली गयी।

उसके बाद हॉल में क्या हुआ मुझे मालूम नहीं।

उस पूरे दिन पापा मेरे कमरे में नहीं आए। डिनर में मैं एक बार फिर मम्मी पापा के सामने हुई। लेकिन वहां पूरी शांति थी कोई कुछ भी बोलने में अपना अपमान समझ रहा था।

कुछ देर के बाद मम्मी मेरे रूम में आयी और मेरा सर अपनी गोद में लेकर मुझे दुलारने लगी। एक लम्बे अरसे बाद आज मम्मी मुझे वैसे ही प्यार कर रही थी जैसे मेरे बचपन में किया करती थी। मुझे उनका स्नेह से भरा हाथ बहुत अच्छा लगा और मैं मम्मी के गोद में सर छुपा कर सुबकने लगी।

मम्मी मुझे प्यार से दुलारती रही फिर बोली मुझे समझाने लगी। उस दिन मुझे मम्मी का प्यार अच्छा लगा। लेकिन उनके प्यार में उनके छूने में मुझे उतना अच्छा नहीं लगता था जितना की पापा के छूने और प्यार करने से मिलता था।

उस रात मम्मी देर तक मेरे साथ रही ढेर सारी नसीहतें दी फिर चली गई। अब पहले की तरह मम्मी मेरा पूरा ख्याल रखने लगी। मेरे जागने से लेकर सोने तक मेरी हर जरुरत का ख्याल रखती।

मैं अब उनसे बोर होने लगी थी क्योंकि उनकी वजह से पापा मेरे क़रीब नहीं आ पा रहे थे। मैं जितना उनसे दूर रहने की कोशिश करती वो उतना ही मुझसे चिपकने लगी थी।

पूरा 1 माह बीत गया। मैं पापा के प्यार को फिर से नहीं हासिल कर सकी। कुछ देर के लिए मम्मी इधर उधर जाती तो हम दीवानों की तरह एक दूसरे को चूमने चाटने लगते लेकिन चुदाई को तरसते रहते।

एक दिन तक़दीर ने हमें वो मौका दिया। मेरी नानी की मृत्यु का समाचार मिला। हम लोग उनकी अन्तिम क्रिया में शामिल होने गए। नाना नानी भी मुंबई में ही रहते थे।

दोपहर तक नानी का अन्तिम संस्कार हो गया। मम्मी 13 दिनों के लिए वहीं रुक गयी, मैं पापा के साथ घर के लिए लौट पड़ी।

एक महीने से पापा से दूर रहने की वजह से मैं इतनी व्याकुल हो गयी थी कि मैं उन्हें रास्ते में ही नोचने खसोटने लगी। उन्हें चूम कर, छेड़ कर इतना गर्म कर दिया की मजबूरन उन्हें गाड़ी रोक कर मेरी चुदाई करनी पड़ी।
 
वे 13 दिन हमारे लिए बहुत शानदार रहे। पहले ही दिन पापा सुबह ही उठ गए। सुबह सुबह मैं सो रही थी तभी पापा ने मेरे पास आकर अपना लंड मेरे गाल से सटाने लगे. मैं शायद कोई सपना देख रही थी इसीलिए मैंने अपना मुंह खोल दिया, पापा ने मेरे मुंह में अपना लंड घुसा दिया और पेलने लगे. मैं सपने में ही पापा का लंड चूसने लगी, पापा को बहुत मजा आ रहा था इसीलिए वो कस कस कर धक्के लगाने लगे।

धक्कों की वजह से मेरी नींद खुल गई, मुझे देख कर बहुत आश्चर्य हुआ कि पापा को सुबह-सुबह क्या हो गया है। मैं भी खुश होकर पापा का लंड चूसने लगी, मैं उनके लंड को पूरा अंदर तक लेकर चूस रही थी। पापा इतना उत्तेजित हो गए कि सुबह-सुबह ही मेरे मुंह में झर गए। सुबह-सुबह ही मैं नाश्ते के बदले उनका पूरा बीज पी गई.

पापा ने मुझे पूरी नंगी कर दिया और बोले- आज से 13 दिन तक तुम कोई भी कपड़ा नहीं पहनोगी और मेरी रखैल बनकर रहोगी. मैं तुम्हें हर जगह, हर तरीके से चोदना चाहता हूं!

यह कह कर पापा ने मुझे गोद में उठा लिया और बाथरूम में ले गए.

सुबह सुबह का समय था, पापा ने मुझे सीट पर बैठा दिया और मेरे मुंह में अपना लंड घुसा दिया और बोले- मेरी जान तुम पॉटी भी करती रहो और मेरा लंड भी चूसती रहो, आज मैं सारा दिन तुम्हें चोदूंगा इसलिए सुबह से ही शुरुआत कर रहा हूं!

मैंने कुछ देर तक पॉटी की और पापा का लंड चूसती रही. फिर मैंने अपनी गांड साफ किया।

कुछ ही देर बाद पापा ने मुझे सीट के सहारे झुका दिया और फिर मेरी चूत में लंड घुसा दिया और मुझे कुतिया की तरह जोर जोर से पेलने लगे. वे मुझे इतनी तेजी से चोद रहे थे कि मैं आगे की तरफ झुक जा रही थी.

कुछ देर चोदने के बाद फिर उन्होंने मुझे सीट पर बैठा दिया और मेरे चेहरे पर मुट्ठ मारने लगे. कुछ ही देर में मेरे पापा का पूरा माल मेरे चेहरे पर था. फिर पापा उंगलियों से अपने वीर्य को मेरे मुंह में डालने लगे, मैं धीरे-धीरे उनका सारा रस चाटने लगी. 5 मिनट में ही उन्होंने मेरा चेहरा पूरा साफ कर दिया.

फिर पापा खड़े हुए और मेरे मुंह पर पेशाब करने लगे, पेशाब कर कर के उन्होंने मेरा पूरा चेहरा साफ कर दिया और कुछ पेशाब मुझे पिला भी दिया. मुझे उनका पेशाब बहुत खराब लगा.

फिर पापा ने मुझे नहलाया और खुद भी नहा कर हम दोनों बाहर आए।
 
बाथरूम से नहा कर बाहर आने के बाद भी पापा ने मुझे कपड़े नहीं पहनने दिये, बोले- बेटी, नाश्ता बना दो!

जब मैं नाश्ता बनाने लगी तो फिर पीछे से उन्होंने मुझे पकड़ लिया और अपना लंड मेरी चूत में डाल कर चोदने लग गए. किचन में ही नाश्ता बनाने के दौरान ही मुझे चोदते रहे, फिर जब नाश्ता बन गया, तब डाइनिंग टेबल पर उन्होंने नाश्ता लगाया और मुझे अपने लंड पर बिठा दिया. हम नाश्ता करने लगे.

इस दौरान उनका लंड मेरी चूत के अंदर था, वह मुझे बांहों में लेकर चोद रहे थे, नाश्ते के साथ साथ कभी कभी मेरी चूचियों को चूसने लगते शायद नाश्ते के साथ साथ उनको दूध की भी जरूरत थी. फिर कभी मेरे चेहरे को भी चूसने लगते और गालों को भी काटने लगते!

कुछ ही देर में हम लोगों ने नाश्ता कर लिया, नाश्ता करते ही उन्होंने मुझे टेबल पर ही झुका दिया और चोदने लगे, 10 मिनट तक चोदने के बाद जब उनके लंड से बीज निकलने वाला था तो उन्होंने उस बीज को मेरे ब्रेड पर गिरा दिया और मुझे खाने को बोले.

ब्रेड में मक्खन की जगह उनका वीर्य लगा हुआ था जिसे मैंने बड़ी मुश्किल से खाया।

नाश्ता करने के बाद मुझे बेडरूम में ले गए, मुझे नंगी कर डांस करने को कहा.

मैं डांस करने लगी।

डांस करने के दौरान पापा ने मुझे चोदना शुरू कर दिया। पापा कुछ देर मुझे चोदते और फिर छोड़ देते। फिर 10:15 मिनट तक सिर्फ मेरी चूचियों और चूत के साथ खेलते और फिर मुझे बिठाकर मेरे मुंह में लंड पेलने लगते।

जब लंड पूरा खड़ा हो जाता तो फिर से मुझे चोदना शुरु करते।

पापा का लंड जल्दी नहीं झड़ता था इसीलिए वे एक ही बार में आधा आधा घंटा तक पेलते रहते थे। इस तरह शाम तक उन्होंने मुझे कई बार बुरी तरह से पेला. शाम तक मैं पूरी तरह थक चुकी थी मेरी बुर बुरी तरह जल रही थी, शाम को मैंने पापा को बोल दिया- पापा, अब आज अपनी बेटी की चूत को छोड़ दीजिएगा, मैं आपका लंड चूसकर शांत कर दूंगी.

रात में मैंने उनका लंड चूस कर रस निकाल दिया और पी गई.

फिर दूसरे दिन सुबह सुबह ही पापा ने नींद में ही मुझे चोदना शुरु कर दिया. इस तरह 13 दिन तक पापा ने दिन रात मेरी चुदाई की, पापा मुझे कभी कुतिया बनाते तो कभी खड़ा करके हर तरह से चुदाई करते थे।

हम बाप बेटी दिन रात चुदाई करते रहे।

14वें दिन मम्मी वापस लौटीं। उस वक़्त 4 बज रहे थे, घर में सिर्फ मैं और पापा थे, उस दिन पापा ऑफिस नहीं गए थे।

मैं पापा का लंड चूस रही थी जब दरवाज़े का बेल बजी।

हम उस समय ये भूल गए थे कि मम्मी आज वापस आने वाली है। बेल की आवाज़ सुनकर पापा टॉवल लपेटकर दरवाज़ा खोलने चले गये। मैं बिस्तर पर नंगी बैठी उनके आने का इंतज़ार करती रही।
 
लगभग 5 मिनट बाद मेरे रूम का दरवाज़ा खुला। मैं सोच रही थी कि पापा ही होंगे।

दरवाज़ा खुलते ही मेरे मुंह से निकला- ओहह पापा, जल्दी आओ न… मैं…

मेरे आगे के शब्द हलक में ही घुट कर रह गये जब मेरी नज़र दरवाज़े पर खड़ी मम्मी पर पड़ी। मेरे हाथ जो पापा को बाँहों में भरने के लिए उठे थे नीचे झूल गये।

मम्मी की आँखों से चिंगारियाँ निकल रही थी, उनके गुस्से से भरे चेहरे को देखकर मेरी साँस रुक सी गयी थी, मैं डर के मारे थर थर काँप रही थी।

“किसका इंतज़ार कर रही थी नंगी होकर?” मम्मी चिल्लायी।

“कलमुही… कौन है तेरा यार जिसके साथ तू मेरे पीठ पीछे गुलछर्रे उड़ा रही है? लेकिन इस घर में तो अभी तुम और तुम्हारे बाप के अलावा कोई नहीं। कहीं तू…” मम्मी बोलते बोलते रुक गयी।

मैंने कोई जवाब न देकर चुपचाप अपनी नज़रें झुका ली।

मम्मी एकदम से पलटी और बाहर चली गई।

मुझे समझते देर नहीं लगी कि अब पापा की बारी है। मैंने जल्दी से कपड़े पहनी और बाहर आ गयी।

“अब गूंगे क्यों बने हुए हो… जवाब क्यों नहीं देते? कहते क्यों नहीं कि तुमने अपनी ही बेटी के साथ मुंह काला किया?”

पापा चुप थे, मम्मी का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था।

जब पापा ने कोई जवाब नहीं दिया तो वो मेरी ओर पलटी- और तू हरामज़ादी… तुझे शर्म नहीं आयी अपने ही बाप को अपना खसम बनाने में? उस हरामी को तो जवान चूत मिल रही थी, वो बहक गया होगा… लेकिन तू… तुझे तो सोचना चाहिए था कि जिसके सामने तू अपनी चूत खोल रही है वो तेरा बाप है… इसी के लंड की पैदाइश है।

वो बोली और मुझे बालों से पकड़कर घसीटने लगी।

मैं दर्द से चीख़ पड़ी।

पापा से मेरा दर्द देखा नहीं गया, वो आगे बढ़े और मम्मी का हाथ जोर से झटक दिया। उनका झटका इतना अचानक था कि मम्मी खुद को संभाल नहीं पाई और फर्श पर लम्बी होती चली गयी।

मम्मी कराहती हुयी उठी और लड़खड़ाते कदमों से पापा की ओर बढ़ी फिर चीख़ी- तुमने मुझे धक्का दिया? मैं तुम्हें…

वो इतने गुस्से में थी कि उनसे बोला भी नहीं जा रहा था।

“जो करना है कर लो, जिसे बताना चाहो बता दो। मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। उल्टा तुम्हें इस घर से बाहर होना पड़ेगा। तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। पुलिस… कानून सब मेरी जेब में रहते हैं। तुम्हारी बात कोई नहीं सुनेगा। तुम्हारी बात केवल रास्ते पर चलने वाले लोग सुनेंगे और उनसे मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला!”

पापा आगे बोले- आज तक हम बाप बेटी छुप कर प्यार करते थे, अब तुम्हारी आँखों के सामने करेंगे। तुम मुझे नहीं रोक सकती। हाँ, मैं चाहूँ तो एक कॉल करुँगा और तुम्हें पागल करार देकर पागलखाने भिजवा सकता हूँ। अब तुम फैसला करो की तुम शांति से इस घर में रहना चाहती हो या पागलखाने में।”

मम्मी आँखें फाड़े पापा को घूरती रही। पापा की धमकी का पूरा असर हुआ था, वो गुस्से से पलटी और अपने रूम के अंदर चली गई।

मैं हक्की बक्की मम्मी पापा का तकरार देख रही थी।
 
मम्मी के जाने के बाद पापा मेरे पास आए- तुम चिंता मत करो… ये पागल औरत हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। ये ज़्यादा चूँ चा करेगी तो इसे पागलखाने भिजवा दूँगा।

पापा की बात सुनकर मेरे अंदर का सारा डर ग़ायब हो गया।

पापा सोफ़े पर बैठकर सिगरेट पीने लगे, मैं अपने रूम में आ गई, मम्मी अपने रूम में बैठी रोती रही, वो डिनर के वक़्त भी बाहर न निकली।

पापा ने उन्हें बुलाना जरूरी नहीं समझा।

पापा सोफ़े पर बैठकर सिगरेट पीने लगे, मैं अपने रूम में आ गई, मम्मी अपने रूम में बैठी रोती रही, वो डिनर के वक़्त भी बाहर न निकली।

पापा ने उन्हें बुलाना जरूरी नहीं समझा।

रात के 12 बज चुके थे। मैं अपने बिस्तर पर लेटी आज की घटना के बारे में सोच रही थी कि अचानक दरवाजे पर आहट हुई। मेरी नज़र उठी तो दरवाज़े पर पापा को खड़ा पाया।

“पापा…” मैं हैरानी से बोली।

“तू क्या सोच रही थी मैं अपनी प्यारी बेटी को अकेली छोड़ दूँगा। नहीं पिंकी… अब हम कभी अलग नहीं होंगे। अच्छा ही हुआ कि तेरी मम्मी को पता चल गया है। अब हम निडर होकर एक दूसरे से प्यार करेंगे।” कहते हुए पापा ने मेरे एक बूब को कस के दबा दिया।

मैं अपने पापा से लिपट गई- लेकिन मम्मी?

मैं कुछ बोलते बोलते रुक गयी।

“उसकी चिंता छोड़ो, इस शहर के पुलिस, जज, सभी पावरफुल आदमी मेरे हाथ में हैं। वो वही करेंगे जो मैं चाहूँगा।” पापा अपना पजामे को कमर से नीचे सरकाते हुए बोले।

फिर अपनी चड्डी को भी सरका कर लंड बाहर कर निकाल लिया. मैं पापा के लंड को देखने लगी।

उन्होंने मुझे गर्दन से पकड़ा और मेरा सर अपने लंड पर झुका दिया। मैं उनके लंड को मुंह में भर कर चूसने लगी। पापा प्यार से मेरे बालों को सहलाते रहे। आज मैं पूरी अज़ादी से पापा का लंड चूस रही थी, आज मुझे किसी का डर नहीं था।

मैं उनके लंड को अपने होंठों से पुचकारती रही दुलारती चूसती रही, पापा कमर उचका उचका कर लंड चुसवाते रहे।

करीब 5 मिनट तक मैं पापा का लंड चूसती रही, पापा लंड चुसवाते हुए मेरे चूचियों को टीशर्ट के ऊपर से ही मसलते रहे।

फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और मुझे नंगी करने लगे।

मुझे नंगी कर लेने के बाद वो खुद भी नंगे हो गये।

उनके बिस्तर पर बैठते ही मैं उछल कर उनके गोद में बैठ गयी। पापा ने मेरे एक बूब को हाथ में भर कर मसल दिया तो दूसरे को मुंह में भर कर चूसने लगे। मैं प्यार से उनके सर को सहलाती हुई उन्हें अपनी छाती में दबाने लगी।

पापा बिल्कुल बच्चों की तरह मेरे बूब्स पर बारी बारी से मुंह मारते रहे, कभी कभी दाँतों से हल्के से काट भी देते तो मैं मस्ती में भर कर चिहुंक पड़ती।

पापा ने मेरे बूब्स को चूसते हुए अपनी एक उंगली मेरी गांड में घुसा दिया और तेजी से उंगली अंदर बाहर करने लगे, मैं मस्ती में डूबकर पापा के लंड को सहलाने लगी।

अब मैं बहुत व्याकुल हो उठी थी। मैं एकदम से उठी और अपनी चूत पापा के चेहरे के पास ले गयी और टाँगें फैलाकर खड़ी हो गयी।

पापा एक नज़र मेरे चेहरे पर डाल कर फिर मेरी गीली चूत को निहारने लगे। पापा की जीभ बाहर निकली और मेरी चूत के ऊपर रेंगने लगी। मैं मदहोशी में उनके सर को अपनी चूत में दबाते हुए सिसकने लगी।

मेरी चूत से बहते पानी की एक एक बूँद को पापा बड़े प्यार से चाट रहे थे। मेरी चूत आज जरूरत से ज़्यादा पानी छोड़ रही थी। मैंने पापा को बिस्तर पर गिराया और एक झटके में उनके मोटे लंड पर चूत रख कर बैठती चली गयी।

‘फच…’ के आवाज़ के साथ मेरे पापा का लंड मेरी चूत में धँसता चला गया। जड़ तक उनके लंड को निगलने के बाद मैं अपनी गांड उछालने लगी।

13 दिनों में ही पापा ने मुझे हर आसन में चुदने का ज्ञान दे चुके थे, यह मेरा पसंदीदा आसन था।

मैं हुमच हुमच कर उनके लंड पर धक्के मारने लगी, पापा मेरे बूब्स को मसलते हुए सिसकारियाँ भरते रहे।

15 मिनट उनकी जांघों पर उछलने के बाद मेरी पिचकारी छुटी, मैं चीखती हुयी पापा के ऊपर ढह गयी।

उस रात पापा मुझे 5 बजे तक पेलते रहे। हम बाप बेटी आनन्द में डूबे चीखते चिल्लाते एक दूसरे से गुत्थम गुत्था होते रहे। हमारी चीख़ें और हंसी के ठहाके इतने तेज होते थे कि मम्मी के कमरे तक असानी से पहुंचती होगी लेकिन अब हमें उनका भय जरा भी नहीं था। हम पूरे बिन्दास होकर रात भर एक दूसरे की सवारी करते रहे। कभी वो मेरे मुंह पर मूत देते तो कभी मैं उनके मुंह पर मूत देती।

ऐसे ही यह सिलसिला 20 दिनों तक चलता रहा।
 
एक दिन पापा मुझे शॉपिंग कराने ले गये और ढेर सारी सेक्सी ट्रांसपेरेंट छोटी छोटी ड्रेस खरीद कर दी। मैं घर पहुंचकर उन सभी कपड़ों को बारी बारी से पहन कर पापा को दिखाने लगी। उन सेक्सी कपड़ों में देखकर पापा की आँखों में लाल डोरे तैरने लगे, वे बोले- पिंकी आज रात हमें एक पार्टी में जाना है।

मैं पापा की बात सुनकर चौंक गयी, मैं आज तक कभी किसी पार्टी में नहीं गई थी। मुझे पार्टी के रूप में सिर्फ अपना बर्थडे पार्टी ही याद था जिसमें सिर्फ 3 लोग ही होते थे… मम्मी, पापा और मैं खुद!

आज पापा के मुंह से पार्टी की बात सुनकर मेरा चेहरा उतर गया।

“तुम ये वाली ड्रेस पहन लो… इसमें तुम बहुत अच्छी लगोगी।” पापा मेरे भावनाओं की परवाह किये बगैर मुझसे बोले।

मैंने अनमने भाव से सहमति में सर हिलाया।

मैं उस ड्रेस को पहन कर तैयार हो गयी और जब हॉल में पहुंची तो पापा भी तैयार बैठे थे। मैं उस ड्रेस में खुद को कम्फर्टेबल नहीं महसूस कर रही थी। एक तो वो ड्रेस बहुत छोटी थी, वो ड्रेस सिर्फ मेरे नितम्बों को ढकने में ही कामयाब थी और ऊपर से मेरे बूब्स आधे बाहर निकल रहे थे।

हम लगभग 8 बजे पार्टी में पहुंचे, वहां काफी भीड़ थी। मैं जैसे ही वहां पहुंची कई प्यासी नज़रों को अपनी ओर घूरते पाया। मैं डर के पापा का हाथ पकड़ कर उनसे सट कर चलने लगी।

पापा मुझे बारी बारी से वहां मौजूद लोगों से परिचय कराते रहे। मुझसे मिलने वाला हर आदमी मुझे ऐसे घूर कर देख रहा था जैसे खा जाना चाहता हो। मैं डरी सहमी पापा के साथ अनमने भाव से उन लोगों से मिलती रही।

पापा ने ठीक ही कहा था कि उनकी पहचान बहुत पावरफुल लोगों से थी। पार्टी में मौजूद हर इंसान किसी न किसी बड़े औहदे से सम्बन्ध रखता था। वहां कोई पुलिस का बड़ा अफसर था तो कोई जज, डॉक्टर, पॉलिटिशियन तो कोई बड़ा बिजनेसमैन।

लेकिन मुझे उनमें जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। मैं तो बस जल्द से जल्द उस पार्टी के ख़त्म हो जाने की प्रार्थना कर रही थी। मुझे वो शोरगुल का माहौल बहुत बुरा लग रहा था। जोर जोर से बजता डीजे का साऊंड मेरे कान के परदे फाड़ रहा था। वहां मौजूद हर आदमी का बस एक ही काम था… ड्रिंक डांस और नए आने वाले लोगों से हाथ मिलाना बात करना।

मेरी समझ से परे थी ये बात… लोग इस बोरिंग काम के लिए इतने पैसे क्यों बर्बाद करते है।

मैं अभी अपने इन्ही ख्यालों में खोयी थी की एक लड़की बहुत कम कपड़ों में लिपटी हुई हमारे ओर आयी और पापा से कस के लिपट कर उनके गालों में किस किया- हाय अंकल… कैसे हैं आप?

“एब्सोल्यूटली फाइन… रिया इससे मिलो… ये है मेरी बेटी पिंकी!” पापा मेरी और इशारा करते हुए उस लड़की से बोले।

“हाय… पिंकी!” रिया अपना हाथ बढ़ाती हुई बोली।

“हाय…” मैं एक टूक बोलकर चुप हो गयी, मुझे उसका पापा से लिपटना बहुत बुरा लगा था।
 
रात लगभग 2 बजे तक पार्टी चलती रही। मैं उतनी देर में कितनी बोर हो गयी थी बता नहीं सकती। घर पहुँचते ही बिस्तर पर गिर पड़ी, थकी होने के कारण नींद भी जल्दी आ गयी।

अगले रोज मेरे स्कूल से आने के बाद पापा भी जल्दी घर आ गये, आते ही मुझे तैयार होने को कहा।

“क्या आज भी पार्टी में जाना है… पापा?” मैंने उदास होकर पापा से पूछा।

“नहीं बेटा… आज हम घूमने जा रहे हैं और डिनर भी बाहर ही करेंगे।”

पाप की बात सुनकर मैं ख़ुशी से झूम उठी और जल्दी से तैयार होकर बाहर हॉल में आ गयी। कुछ ही देर में पापा भी तैयार होकर बाहर आ गये।

ठीक एक घंटे बाद हम एक आलिशान होटल के अंदर घुसे।

“पापा हम तो घूमने जाने वाले थे न… फिर आप होटल क्यों आये?” जब मैं समझने में नाक़ाम रही तो पापा से पूछ बैठी।

“पिंकी… मुझे एक दोस्त से मिलना है, फिर घूमने चलेंगे, आओ मेरे साथ!” वो मेरा हाथ पकड़कर होटल के लिफ्ट की ओर बढ़ गये।

लिफ्ट के रुकने के बाद हम बाहर निकले, फिर कुछ गैलरी में चलने के बाद पापा एक रूम के बाहर रुक गये।

उन्होंने दरवाज़े में दस्तक दी, कुछ देर बाद दरवाज़ा खुला।

दरवाज़े में 45 की उम्र के एक अंकल खड़े थे, मुझे उनकी सूरत जानी पहचानी लग रही थी। शायद मैंने उन्हें कल रात की पार्टी में देखा था।

मैं पापा के साथ अंदर गयी, अंदर पहुँचते ही मैं चौंक पड़ी… बिस्तर पर एक आधी नंगी लड़की लेटी हुयी थी। और ये वही लड़की थी जो पार्टी में पापा से लिपट रही थी और जिसका नाम पापा ने रिया बताया था।

हमारे अंदर पहुँचते ही वह लड़की बिस्तर से उठी और पापा के तरफ लपकी। फिर पापा के गले में बाहें डाल कर उनके होंठों को चूसने लगी।

मैं हैरानी से उसे देखती रह गयी, उसने मेरी मौजूदगी की भी परवाह नहीं की।

पापा भी उसके होंठों को चूसते हुए उसकी एक चूची को दबाने लगे और दूसरे हाथ से अपनी पैन्ट की चैन सरकाने लगे।

मैं अभी आँखें फाड़े पापा और रिया का खेल देख रही थी कि अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे कोई मेरी गांड को सहला रहा हो।

मैं तेजी से मुड़ी तो हैरान रह गयी, ये वही अंकल थे जिन्होंने दरवाज़ा खोला था।

मेरे मुड़ते ही उनके होंठों पर एक पैशाचिक मुस्कान दिखाई दी। मैं कुछ कहती उससे पहले उन्होंने अपना एक हाथ मेरी चूत पर रख दिया। फिर जीन्स के ऊपर से ही जोर से मेरी चूत को दबा दिया।

“यह क्या कर रहे हैं आप?” मैं गुस्से में बोली और आगे हट गई।

“क्यों… क्या तुम्हें अच्छा नहीं लगा?” वो बोले और मेरी तरफ तेजी से बढ़े।
 
मैं घबराकर पापा की तरफ मुड़ी लेकिन जैसे ही मेरी नज़र पापा पर पड़ी मैं हैरान रह गयी। पापा का मोटा लम्बा लंड बाहर निकला हुआ था और रिया उसे अपने मुंह में भर कर चूस रही थी। मैं ये सब बरदाश्त नहीं कर पाई… मेरे पापा पर कोई और अधिकार जमाये मुझे अच्छा नहीं लगा।

मैं तेजी से आगे बढ़ी और पापा के पास पहुँच गयी- पापा ये आप क्या कर रहे हैं?

पापा ने अपनी बंद आँखों को खोला और मुझे देखते हुए मुस्कुराये फिर बोले- पिंकी… तुम भी रिया के पापा के साथ एन्जॉय करो। जाओ उनके पास… उन्हें देखो… वो कितने बेचैन हो रहे हैं तुम्हें प्यार करने के लिये।

मैंने एक सरसरी सी निगाह रिया के पापा की तरफ डाली तो आँखें आश्चर्य से फ़ैल गई। वो अपना लंड बाहर निकाले हिला रहे थे लेकिन मैं वापस पापा की तरफ मुड़ी- पापा, मैं आपसे प्यार करती हूँ। मैं उनके साथ ये सब नहीं कर सकती, मुझे ये पसंद नहीं, प्लीज पापा घर चलो।

मेरी बात सुनकर पापा रिया से अलग हुये, फिर मुझे बाँहों में भर मेरे होंठों को चूमते हुए बोले- ठीक है, जैसा तुम कहोगी मैं वही करूंगा लेकिन इस वक़्त मैं बहुत गर्म हूँ, बिना चुदाई किये मुझसे रहा नहीं जाएगा।

“तो फिर मुझे चोदिये पापा… मैं हूं ना… मेरे होते आप किसी और को चोदो, मुझे यह पसंद नहीं।” ये कहकर मैं झुकी और पापा का लंड मुंह में भरकर चूसने लगी।

पापा मेरे बालों को सहलाते हुए सिसकारी भरते रहे।

लंड चूसते हुए मेरी नज़र रिया की तरफ घूमी तो मेरा पूरा शरीर मस्ती से झनझना उठा। रिया की जीन्स घुटनों तक सरकी हुई थी और उसके पापा घुटनों के बल बैठे उसकी चूत चाट रहे थे, रिया अपनी कमर हिला हिला कर अपनी चूत अपने पापा से चटवा रही थी।

अचानक उसकी नज़र मुझसे टकरायी, मुझे अपनी ओर देखती पाकर उसने एक कामुक सिसकारी भरी, फिर वो अलग हुई और अपने बाकी के कपड़े उतारने लगी। उसे नंगी होती देख उसके पापा भी कपड़ों में न रह सके।

मैं उन दोनों की तेजी देखकर हैरान थी।

रिया ने अपने पापा को बिस्तर पर धकेल कर गिराया और उनके लंड को चूसने लगी। उसके पापा बिस्तर पर लेटे हुए थे लेकिन उसके दोनों पाँव फर्श पर थे। रिया उनकी टाँगों के बीच फर्श पर बैठी हुई लंड चूस रही थी।

कुछ देर लंड चूसने के बाद वो उठी और अपने पापा का लंड पकड़कर अपनी चूत में घिसने लगी। फिर अपनी गर्दन घुमाकर मुझे देखा, अगले ही पल उसने लंड को अपनी चूत के छेद पर टिकाया और एक करारा झटका… “आ… आह्ह…” उसके मुंह से चीख़ निकली। उसका धक्का इतना तेज था की एक ही झटके में उसके पापा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया था।

उसने पलट कर मुझे देखा जैसे मुझे चिढ़ा रही हो। वो सच में सेक्स में माहिर थी उसकी हरकतें बहुत कामुक थी। उसके इस कामुकता भरे सीन को देखकर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।

वो मुस्कुराती हुई अपने पापा के लंड पर धक्के लगाने लगी। उसकी चीखों से पूरा रूम गूंज रहा था।

मैंने पापा को देखा, वो भी फटी फटी आँखों से उधर ही देख रहे थे। मैं जलभुन गयी और उस जलन से मेरा पूरा बदन सुलग उठा। मैं एकदम से खड़ी हुई और पलक झपकते ही अपने शरीर से सारे कपड़े उतार फेंके, फिर पापा को भी नंगा करती चली गई।

पापा को नंगा करने के बाद मैं अपनी चूत सहलाती हुई पापा को देखने लगी। पापा मेरा इशारा समझ गए वो मेरी टांगों के नीचे बैठ गए और अपनी जीभ निकाल कर मेरी चूत पर रख दी। पापा मेरी चूत चाटते हुए अपनी एक उंगली मेरी चूत में घुसा कर जोर से अंदर बाहर करने लगे। मैं सिसकारी भरती हुई उनका सर अपनी चूत में दबाने लगी।

पापा मेरी चूत को कुछ देर चाटने के बाद ऊपर उठे और मेरे बूब्स को मसलते हुए मेरी गर्दन को चूमने लगे, मेरी आँखें मस्ती से बंद होने लगी।

“पिंकी…” अचानक पापा की आवाज़ से मेरी आँख खुली।

“जी पापा?” मैं काँपते स्वर में बोली।

“आज मुझे रिया को चोदने का मन कर रहा है, प्लीज एक बार मुझे उसे चोदने दो। फिर कभी किसी दूसरी लड़की को नहीं चोदूँगा।”

मैं पापा को देखने लगी, वो मेरी आँखों में झाँकते हुए मेरे बूब्स दबाते रहे।

“लेकिन… पापा…”

“प्लीज पिंकी… मान जाओ!”

“ओ के… पापा… लेकिन सिर्फ एक बार!” मैं थोड़ा उदास होते हुए बोली।

“लेकिन रिया मुझसे तभी चुदेगी जब तुम उसके पापा से चुदोगी। प्लीज मेरी ख़ुशी के लिए एक बार मल्होत्रा अंकल से प्यार कर लो।”

मैं उस वक़्त पापा की बाँहों में मस्ती में डूबी हुई थी फिर भी उनका प्रस्ताव मुझे बुरा लगा!
 
मैं उस वक़्त पापा की बाँहों में मस्ती में डूबी हुई थी फिर भी उनका प्रस्ताव मुझे बुरा लगा लेकिन मैं उन्हें खोना नहीं चाहती थी… सिर्फ एक बार ही की तो बात है। यह सोचकर मैं पापा से अलग हुयी और मल्होत्रा अंकल के पास चली गई।

रिया मुझे अपनी ओर आती देख अपने पापा के ऊपर से उठी और मुस्कुराती हुई मेरे पापा की ओर बढ़ गई।

मल्होत्रा अंकल बिस्तर पर उठ बैठे और मुझे देखते हुए अपने लंड को सहलाने लगे, मैं उनके पास बगल में जाकर बैठ गयी।

“इसे मुंह में लो पिंकी…” वो लंड हिला कर बोले।

मैं झिझक के साथ उनके विशाल लंड को देखती रही।

अचानक अंकल ने मुझे गरदन से पकड़ा और अपने लंड पर झुका लिए फिर एक हाथ से अपना लंड पकड़कर मेरे होंठों पर रगड़ने लगे। फिर अपने लंड के सुपारे से मेरे होठों को खोलने लगे लेकिन वो नाक़ाम रहे।

अचानक उन्होंने मेरा गर्दन दबा दिया मैं चीखी… उसी वक़्त अंकल ने मेरे खुले मुंह में अपना लंड घुसा दिया। मुझे न चाहते हुए भी उनका लंड चूसना पड़ा, मैं धीरे धीरे उनका लंड चूसने लगी।

तभी अचानक अंकल उठे और घुटनों के बल बिस्तर पर खड़े हो गये, फिर मुझे अपनी टाँगों के बीच खींच लिया, मैं उनकी टाँगों के नीचे पीठ के बल लेटी हुई थी। उन्होंने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थाम कर ऊपर उठाया और अपना मोटा लंड मेरे मुंह में डाल कर मेरा मुंह में पेलने लगे।

मल्होत्रा अंकल का लंड मेरे गले तक पहुँच रहा था, मेरी साँस घुटती हुई सी महसूस हुई लेकिन उन्हें परवाह नहीं थी। मैं उन्हें जोर का धक्का देकर आगे धकेलने की कोशिश करने लगी लेकिन मैं नीचे लेटी होने की वजह से मेरी शक्ति कम हो गयी थी।

कुछ देर मेरा मुंह चोदने के बाद उन्होंने अपना गीला लंड बाहर निकाला, फिर मेरी कमर को पकड़ कर मेरी गांड अपनी ओर कर लिया।

“पिंकी डॉगी बन जाओ!” वो मेरी गांड सहलाते हुए बोले।

मैंने यह सोचकर राहत की साँस ली कि अब वो मेरी चूत चोदकर जल्दी से मुझे छुट्टी देंगे, मैं बिना देर किये बिस्तर पर हाथों और घुटनों के बल हो गयी।

अंकल मेरे आगे आये और मेरे नितम्बों को चाटने लगे फिर मेरी गांड में थूक दिए और अपनी एक उंगली गांड के छेद में घुसा कर अंदर बाहर करने लगे।

मेरे मुंह से दर्द भरी सिसकारी निकल गई।
 
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