• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

पापी परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
वहीं बाथरूम के हालात तो और भी बदतर थे ..निम्मी ने उसके भाई की सारी बातें सुनी लेकिन उसकी आँखों मे रत्ती भर भी नमी नही आई बल्कि उसका नंगा बदन तप कर शोलो मे बदल गया ..उसकी साँसे चढ़ि थी और वो किसी सोच की मुद्रा मे शवर के नीचे खड़ी थी

" आज जो कुछ भी घर पर हुआ वो सही नही हुआ ..याद रखना निकुंज चावला अगर मैने अपनी बेज़्ज़ती का बदला नही लिया तो मेरा नाम निम्मी नही ..अब देखना मैं क्या करती हूँ "

ये कहते हुए उसने शवर का टॅप घुमाया और भर - भर करता पानी उसके तन - बदन मे लगी आग को शांत करने लगा ....

--------------------

कॅफेट मे बैठे दीप और जीत अपनी अधूरी बातों को पूरा कने मे लगे थे ..पर दीप का ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ उस लड़की मे खोया था जिसने अभी 10 मिनट पहले दीप के लंड का रस चखा था ..कैसे भी कर के दीप को उसे चोदना था और इसके लिए उसने जीत का सहारा चाहा

" तू कहाँ खोया है कमीने ..जब से बड़बड़ा रहा हूँ पर तुझे तो जैसे मेरी बात से कुछ लेना देना ही नही "

जीत ने उसे किसी सोच मे डूबा देख कहा

" यार बुरा मत मान पर मुझे तेरी सेक्रेटरी की चूत चाहिए ..तुझे मंज़ूर हो तब भी और ना हो तब भी "

दीप ने अपनी सोच को आम करते हुए कहा ..उसकी बात से जीत का चेहरा थोड़ा गंभीर हुआ और वो अपनी चेर पर सीधा बैठ गया

" क्या बात है जीत ..क्या तू नही चाहता कि मैं उसे चोदु ..या तुझे उसे मुझसे शेर करने मे कोई तकलीफ़ है ..जो भी बात हो सॉफ - सॉफ बता "

दीप ने उसे शांत देख कहा

" यार अब मैं क्या कहूँ ..अच्छा एक काम करता हूँ उसे भी कॅफेट मे बुला लेते हैं "

जीत की बात सुन दीप का चेहरा खिल उठा

" जानता था तू मेरी बात कभी नही टालेगा ..दोस्त अब दोनो मिल कर उसकी चूत मारेंगे ..साली पक्की रांड़ लगती है ..पर जो भी हो माल काँटा है ..मैने बड़े सालो बाद ऐसा जिस्म देख होगा ..खेर जल्दी बुला उसे जाने से पहले उसकी मंज़ूरी जान लू तो दिल को सुकून आ जाएगा "

दीप तो जैसे पागल हो चुका था उस लड़की के पीछे ..पर जीत का मूँह उसकी असलील बातों से काफ़ी उतर गया ..उसने कॉल कर लड़की को कॅफेट मे बुलाया

थोड़ी देर तक दोनो दोस्त बिल्कुल शांत रहे ..जीत ने 3 कॉफी का ऑर्डर दे दिया और अब दोनो लड़की का इंतज़ार करने लगे ..इंतज़ार की घड़ियाँ ख़तम हुई और वो बंदी अपनी कमर मतकाती हुई उनकी तरफ आती दिखाई दी ..दीप उसकी चाल पर आह भरने लगा जिसे सुन कर जीत ने अपनी नज़रे दोनो से दूर कर ली

" मे आइ सीट हियर "

लड़की ने थोड़ा झुक कर पूछा जिससे उसके रेड टॉप मे बना बूब्स क्लीवेज और भी ज़्यादा विज़िबल हो गया

" या या शुवर "

दीप ने जल्दी से उसे इज़ाज़त दी और तब तक तीनो की कॉफी भी सर्व हो गयी

तीनो की बात स्टार्ट हो पाती कि अचानक से दीप का सेल बजा और उसकी सारी आशाओ पर पानी फिर गया ..निकुंज ने गुस्से मे आ कर दीप को फोन किया और वो सारी बात सुन उन दोनो से ज़रूरी काम का बोल कर घर के लिए रवाना हो गया ....
 
" बेटा तेरे डॅड नाराज़ होंगे ..तुझे उन्हे कॉल नही करना चाहिए था "

निकुंज और कम्मो बेड पर बैठे बातें कर रहे थे

" क्या करूँ मा आज निम्मी ने सारी हदें पार कर दी ..मैने उसे कितना चाहा है ये तुम भी जानती हो और वो भी ..पर रघु के बारे मे ऐसा गंदा बोलते हुए उसे शरम नही आई "

निकुंज का गुस्सा अभी भी बरकरार था

" छोड़ बेटा अगर इसी तरह डाट - डपट के निम्मी सुधर सकती होती तो कब का सुधर जाती ..मैं तो कहती हूँ उसे प्यार से ही समझाया जा सकता है ..माना थोड़ी ज़िद्दी है पर है तो तेरी बहेन ही ना "

कम्मो ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा

" वैसे मा एक बात कहूँ शायद आप को बुरा लगे ..रघु अगर इस घर मे पैदा ना हुआ होता तो ये जो दो वक़्त चैन की रोटी मिल रही है ना वो भी नसीब नही होती ..आज से 7 - 8 साल पहले था क्या हमारे पास ..एक किराए का कमरा और डॅड के बिज़्नेस के टूटे फूटे बर्तन - भाड़े ..पता है ना आप को जब कोई पार्टी का ठेका मिले महीनो बीत जाते थे तब रघु की ही कमाई से घर चलता था ..ना वो ग़रीबी के चलते गुंडा बनता ना हमारे दिन बदलते ..अरे ये दोनो जो इतनी शान से घूमती हैं वो भी सिर्फ़ रघु के डर की वजह से ..वरना निम्मी जिस हिसाब के फैशोनब्ल कपड़े पेहेन्ति है उन कपड़ो मे मुंबई की सड़को पर रात क्या दिन भी सेफ नही ..लोगो के कानो मे आज भी ये बात पड़ जाए की ये रघु की बहने हैं तो कोई आँख उठा कर भी नही देखता जबकि सब को पता है वो बेचारा किस हाल मे कहाँ भरती है ..लेकिन आज शायद सभी ने उसे अपने दिल से बाहर निकाल दिया ..निम्मी ने कहीं ना कहीं सही भी कहा कि उसे पैदा कर के जहन्नुम मे फेक दिया गया है ..क्या हम उसे घर नही ला सकते मा ..हो सकता है जो रिकवरी वो हॉस्पिटल मे ना कर पाए वो यहाँ हमारे बीच रह के कर ले "

निकुंज के माइंड मे एयूएस. से लौटने के बाद जो बात सबसे पहले आई थी वो उसने कम्मो को बता दी ..वो चाहता था कि रघु को पुणे से घर मे शिफ्ट करवा दिया जाए ताकि वो सबकी नज़रो के सामने तो रहे

" बेटा मन तो मेरा भी यही कहता है ..पर घर मे ऐसा माहॉल देख कर रघु को और भी ज़्यादा तकलीफ़ होगी "

कम्मो ने उसे समझाया

" कुछ भी हो मा उसे यहाँ लाना ही पड़ेगा ..वहाँ हॉस्पिटल मे कौन सा उसका ट्रीटमेंट होता होगा ..सिर्फ़ उस पर रेसेर्च ही करते होंगे सभी ..मैं आज डॅड से इस बारे मे बात करूँगा "

निकुंज इतना बोल कर फ्रेश होने बाथ रूम मे चला गया और कम्मो अपने बचे कामो को पूरा करने किचन मे

---------------------

दीप ऑफीस की पार्किंग से कार निकाल कर घर की तरफ लौट रहा था

" साला क्या मस्त माल है ..अगर चुदाई के लिए राज़ी हो जाए तो पटक - पटक के चोदुन्गा ..कितने साल बाद ऐसी आइटम नज़र मे आई ..बस जीत मना ले उसे कैसे भी कर के ..फिर तो मज़े ही मज़े हैं ..वैसे वो हां ही कहेगी क्यों कि पहली बार मे लड़की सिर्फ़ शर्मो - हया दिखाती है ..पर उसने तो मेरा लंड ही चूस लिया ..ऐसा लगता है जैसे अब तक उसके गरम होंठ मेरे लंड से चिपके हों "

ऐसी केयी बातें सोच दीप का बैठा लंड वापस अंगड़ाई लेने लगा ..उसने एक हाथ स्टेरिंग पर और दूसरे से लंड को पॅंट के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया

" आज बात पूरी हो जाती अगर निकुंज का कॉल बीच मे ना आया होता ..ये निम्मी भी ना ..ज़रूर कोई उल्टी सीधी हरकत की होगी तभी निकुंज ने मुझे घर बुलाया ..क्या करू इस लड़की का ..हर वक़्त सिर्फ़ लड़ाई - झगड़ा ..आज अच्छे से खबर लेनी पड़ेगी इसकी "

दीप अपनी सोच से बाहर निकलता जब तक उसकी गाड़ी घर के मैन गेट पर पहुच चुकी थी ..कार से उतर कर उसने तेज़ कदमो से हॉल कर रुख़ किया और देखा तो घर मे हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था

" कहाँ हो सब ..कम्मो ? "

दीप ने हॉल को खाली देख चिल्ला कर कहा

उसकी आवाज़ मे बेहद नाराज़गी थी जिसे सुन कर परिवार के सदस्य घबरा कर हॉल मे आने लगे ..कम्मो किचन से दौड़ी तो निकुंज और निक्की अपने - अपने कमरो से ..सिर्फ़ निम्मी को छोड़ कर अब सभी हॉल मे थे

" क्या बात थी तो इस तरह मुझे घर बुलवाया ? "

दीप की दहाड़ से निम्मी तक अपने कमरे मे सहम गयी ..वो रूम की खिड़की से हॉल मे हो रही आवाज़ को सॉफ सुन सकती थी ..एक पल तो उसके चेहरे पर चिंता के बादल छाए पर अगले ही पल एक चिर परिचित मुस्कान से उसके होंठ हिलने लगे ..क्यों कि कुछ देर पहले उसने सभी बातों को जोड़ कर इस प्राब्लम का सल्यूशन ढूंड लिया था

" आप फ्रेश हो जाइए बाद मे बात करेंगे "

कामिनी ने दीप के चेहरे पर आते गुस्से को देख कर कहा ..इशारे से उसने निकुंज को भी छुप रहने की सलाह दी
 
" नही जो भी बात है अभी बताओ ..कब तक ऐसा माहॉल चलता रहेगा घर मे "

दीप ने सोफे पर बैठते हुए कहा

" डॅड मोम ठीक कह रही हैं ..आप फ्रेश हो जाइए मुझे कुछ ज़रूरी बात करनी है आप से "

निकुंज ने हालात समझते हुए कहा ..वो जानता था कि अगर निम्मी वाली बात डॅड को पता चली तो शायद उसे खूब डाट पड़ती ..भले वो अभी नादान है ..पर जो भी हो इस घर की जान भी है ..यही सोच कर निकुंज ने फ़ैसला किया कि मॅटर से निम्मी को बाहर कर डाइरेक्ट रघु को घर लाने की बात की जाए

" निम्मी कहाँ है ? "

दीप ने तेज़ आवाज़ मे कहा ..ये बात सुनते ही निम्मी खिड़की से हट कर बेड पर लेट गयी और बेड-शीट से खुद को कवर कर लिया ..उसने तय किया था कि चाहे कितने भी बुलावे आएँ वो नीचे हॉल मे नही जाएगी ..अगर दीप को उस से बात करनी है तो उसे निम्मी के कमरे मे आना ही पड़ेगा

" वो अपने कमरे मे है "

निक्की ने दीप को 1स्ट फ्लोर का इशारा कर दिया

" मैं निम्मी से अकेले मे बात करना चाहता हूँ ..कोई 1स्ट फ्लोर पर नही आएगा "

दीप ने कहा और अपने कदमो की रफ़्तार 1स्ट फ्लोर पर बने निम्मी के कमरे की तरफ बढ़ा दी ..नीचे खड़ी कम्मो ..निकुंज और निक्की बस यही खेर मना रहे थे कि दीप का गुस्सा शांत हो जाए और निम्मी उसके कहर से बचे

कमरे के बाहर आ कर दीप ने नॉक करना भी उचित नही समझा और तेज़ी से दरवाज़ा खोलते हुए अंदर आ गया ..रूम की ट्यूब लाइट जल रही थी और निम्मी बेड पर चादर ओढ़े लेटी थी ..दीप ने एक नज़र उसे घूरा और आवाज़ दी

" निम्मी ..ये बच्पना कब ख़त्म होगा तेरा ? "

दीप ने कमरे का गेट लॉक कर कहा ताकि वो बंद कमरे मे अपनी छोटी बेटी को समझा सके ..भले ही उसकी नाराज़गी का कोई पार नही था पर वो चाह कर भी अपने बच्चो को डाट नही पाता ..बचपन से ले कर आज तक शायद ही कभी ऐसा हुआ हो तो जब उसने तेज़ आवाज़ मे घर के किसी भी मेंबर से बात की होगी

" निम्मी सो गयी क्या ? "

दीप उसके बेड की तरफ बढ़ते हुए बोला ..शाम के टाइम तो कभी निम्मी सोती नही थी फिर आज क्यों ..बेड पर उसके बगल मे बैठ कर दीप ने महसूस किया कि निम्मी का बदन चादर के अंदर कप - कपा रहा है जिसे देख वो घबराया और तुरंत ही चादर थोड़ा नीचे खीची ..निम्मी के सर पर अपना हाथ रख दिया

" ओह गॉड ..इसे तो तेज़ बुखार है "

निम्मी का माथा बहुत गरम था ..पर अचानक ये सब कैसे हुआ अब इस पर नज़र डालते हैं

[ जब निकुंज ने दीप को घर आने के लिए कॉल किया था तब निम्मी ने उसके रूम मे हो रही सारी बातें छुप कर सुनी और फ्यूचर का सोचते हुए दौड़ कर किचन मे पहुच गयी ..वहाँ से उसने एक प्याज़ उठाया और मुस्कुराती हुई वापस अपने कमरे मे आ गयी

साइन्स की क्लास मे उसने पढ़ा था कि अगर बॉडी टेंपरेचर को हीट देना हो तो प्याज़ को छील कर अपनी आर्म्स के अंदर दबा लेने से बॉडी कुछ ही वक़्त मे बुरी तरह जलने लगती है और सामने वाला फीवर समझ कर घबरा जाता है ..बस आइडिया लगा कर निम्मी ने एक्सपेरिमेंट कर डाला ..शायद डाँट से बचने का इस से अच्छा कोई और सल्यूशन हो नही सकता ]

( अपने बचपन मे जिस - जिस ने इस उपाए को किया होगा ..शायद वो इसकी उपयोगिता से वाकिफ़ होंगे )

दीप ने निम्मी को आवाज़ दी तो उसने गहरी नींद से जागने का बहाना कर धीरे - धीरे अपनी आँखें खोल दी ..कुछ देर पहले तक दीप कितने गुस्से मे था और अब कितना घबराया सा ..ये देख निम्मी मन ही मन मुस्कुरा उठी

" बेटा तुझे तो बहुत बुखार है "

दीप ने एक बार फिर निम्मी की आँखें खुलने पर कहा

" डॅड "

निम्मी ने नाटक करते हुए दीप को पुकारा

" यस बेबी ..आर यू ओके "

दीप ने बड़े प्यार से उससे पूछा

" यस डॅड बाकी सब तो ठीक है ..पर बहुत पेन हो रहा है "

निम्मी ने जवाब दिया

" पेन कहाँ पर ? "

दीप ने बोलते के साथ साथ उसकी चादर को नीचे खिसकाया और अगले ही पल उसकी आँखें बाहर को निकल आई ..निम्मी ने जान कर बॉडी के उपरी हिस्से पर टॉप नही डाला था और केवल एक सिड्यूसिव सी ब्रा पहने ली थी

" द ..द ..डॅड मैने टॉप नही पहना है ..उफ़फ्फ़..... "

निम्मी को तो आक्टिंग का ऑस्कर मिलना चाहिए था ..एक तो उसने लड़खड़ाती ज़ुबान से अपनी पोजीशन बताई और दूसरा आह ले कर दर्द का नाटक भी किया

" सॉरी मुझे पता नही था "

दीप ने अपनी नज़रें दूसरी तरफ करते हुए कहा ..उसने सोचा कि चादर को निम्मी ऊपर खीच लेगी पर वो ज्यों की त्यों लेटी रही ..पहनी हुई वाइट ब्रा नेट वाली थी जिसमे से उसके निपल सॉफ दिख रहे थे

" डॅड एक पेन किल्लर दे दीजिए ..प्लीज़ीयीईयीई "

निम्मी ने दीप को अपनी तरफ़ देखने पर मजबूर करते हुए कहा

" पेन किल्लर ? "

निम्मी का दर्द भरा प्लीज़ सुन दीप पलटा पर नज़ारा वही था ..इस बार निम्मी ने उठने की कोशिश की

" ना ना लेटी रह ..दर्द कहाँ है "

दीप की आँखें उसकी की अधखुली छातियों से चिपक चुकी थी ..दुनिया भर की चूतो का स्वाद लेने के बाद अपनी बेटी का योवन देखना उसे बुरा तो लगा पर क्या करता ' मैं हूँ आदत से मज़बूर ' "

" वो डॅड मैं नहाते वक़्त बाथरूम मे फिसल गयी थी ..मेरी बॅक मे चोट लगी है ..जैसे तैसे जो पहेन पाई पहना और तभी से आराम ही कर रही हूँ "
 
निम्मी ने बड़े अफ़सोस के साथ अपनी झुटि कहानी उसे सुनाई ..दर्द की वजह से वो इस अध - नंगी हालत मे है ये भी कन्फर्म कर दिया

" रुक मैं तेरी मोम को बुलाता हूँ "

दीप ने देखा कि निम्मी उसे अपनी छातियों को घूरते देख रही है ..तो उसने बेड से उठ कर जाना चाहा

" नो डॅड ..मोम मुझसे पहले से ही नाराज़ है ..अब उन्हे और परेशान नही कर सकती ..आप तो मुझे एक पेन किल्लर दे दीजिए ..मैं ठीक हूँ "

निम्मी ने बड़ा भोला चेहरा बना कर कहा तो दीप वापस उसके बेड पर बैठ गया

" बॅक मे लगी ..कही फ्रॅक्चर तो नही "

दीप ने चिंता जताई

" नो डॅड फ्रॅक्चर होता तो मैं हिल भी नही पाती ..लगता है हल्की सी गुम चोट लगी है "

ये कहते हुए निम्मी ने बची चादर अपने ऊपर से हटाई और करवट ले कर अपने चूतड़ पर हाथ रख दिया ..लोवर बॉडी पर उसने एक टाइट कॅप्री डाली हुई थी जिसमे फसि उसकी बड़ी सी गान्ड को जान कर निम्मी ने और बाहर की तरफ़ निकाल रखा था ..करवट लेने से उसकी थ्रेड ब्रा की एक सिंगल नाट दीप को दिखाई दी और बाकी पूरी पीठ नेकड़

" दर्द ज़्यादा है क्या बेटा ? "

दीप की लड़खड़ाती आवाज़ सुन निम्मी का चेहरा खिल उठा ..उसका प्लान सक्सेस था ..बस अब उसे ये सोचना था कि इतना काफ़ी है या अपने नाटक को कंटिन्यू रखा जाए ....

 
3

Wahin doosri taraf Deep ke ghar par tandav macha hua tha ..Wajah koi aur nahi Nimmi thi

" Mom meri saari frnz ja rahi hain ..To mujhe bhi jaana hai "

College ke frnz ne aaj pub me raat bitaane ka faisla kiya tha ..Jiske chalte Nimmi kaafi excited thi ..Halaaki is waqt uska kisi se relation nahi par mumbai aisi jagah hai jahan raat kisi pub ya hotel ke baahar single chale jaao to couple bante der nahi lagti

" Nahi maane nahi ..Ab mera dimaag mat kha mujhe bahut kaam hai samjhi aur haan kitna ganda kamra kar rakha hai ..phataphat safayi me jut ja "

Kammo naraaz hote huye kamre se baahar jaane lagi

" Safaayi my foot ..Main jaungi ..Main jaungi aur zaroor jaungi "

Nimmi ne use jaate dekh chilla kar kaha ..Wakayi me uske jaisi ziddi ..Bigdel aur jhagdaalu ladki kisi dusre ke ghar me nahi hogi

" Mujhse jubaan mat lada ..Warna tere papa ko call laga dungi "

Kammo ne palat kar use Deep ka dar dikhaaya

" Haan haan bol dena ..Koi darta hai kya ..' Mujhe bhi unki saari kaali kartooto ka pata hai ' "

Nimmi ne is sentence ki last line thode dheeme swar me kahi Lekin Kammo ke kaano me ye baat chali gayi

" Kya boli tu ..Fir se bol ? "

Kaamo ne uske vaakya dohraane ko kaha

" maine kya kaha ? "

Nimmi ko thodi ghabrahat huyi ki kahi mom ne uski baat ko sun to nahi liya

" Wahi ..Kuch kaali kartoot ke baare me "

Kammo ne suna to tha par adhoora

" Kya kaali kartoot ..Maine to bola tha ki papa hote to mujhe jaane se kabhi nahi rokte ..Par tum hamesha se hi mujhe har kaam ke liye tokti rehti ho "

Nimmi ne baat ko change karte huye maahol ko senti banaana shuru kiya

" Dekh Nimmi mere liye sabhi bachhe baraabar hain ..Ye tere mann ke fitoor hi tujhe mujhse door le jaate hain ..Are main maa hoon teri koi dushman to nahi "

Kammo ko uski baat apne dil par ek chot lagi ..Wo chal kar wapas kamre me aane lagi

" Main sahi keh rahi hoon mom ..Didi ..Bhaiya aur yahan tak papa bhi mere shaath galat bartaav karte hain to mujhe dukh hota hai ..Jaise main is ghar ka khoon hi nahi hoon "

Nimmi apni jhuti baaton se Kammo ka dil paseeje ja rahi thi Magar sach to ye tha ki use ghar me jitna pyar aur azaadi milti thi wo shayad Nikunj ko bhi nahi thi

" Sun Beti ab tu badi ho gayi hai ..Is tarah ka bachpana chhod ..Tere alawa koi is ghar me itna ziddi nahi ..Ab tu koi 6 mahine ki bachhi to nahi jo teri har baat ko mana jaaye "

Kammo ne Is baar use pyar se samjhaya ..Bachpan se hi use Nimmi ka nature achhi tarah se pata tha ki wo jo than leti hai use kar ke maanti hai ..Chaahe iske liye use kitna bhi ladna pade

" Main ab bachhi nahi rahi mom ..Apna bura bhala samajh sakti hoon ..Ab tum jaao mujhe nahana hai ..Party me jaane ko der ho jayegi "

Itna keh kar Nimmi ne ek jhatke me apna top aur neeche pehni capri ko utaar kar door uchhal diya aur undergarments me aa gayi

" Haye ram Nimmi ..Sharam kar sharam "

Waise to Ye koi nayi baat nahi thi ..Wo aksar Kammo aur apni behen Nikki ke saamne poori nangi ho jaya karti thi ..Par aaj pehli baar uski maa ne usse is tarah ki baat kahi thi

" Kaisi sharam mom ..Kya hua ? "

Nimmi ne ek nazar kammo ke chehre par daali ..Wo uski nazron ka peecha karte huye apni panty par pahuchi ..Aur agle hi pal saara maazra use samajh aa gaya ..Actully baat ye thi ki kuch din pehle ki gayi shopping me Nimmi ne kuch jyada hi morden kapde khareede the aur uske undergarments to faishon ki saari had paar karne laayak the

" Ye kaise androoni kapde khareede toone ..Kuch chhup sakata hai inme ..Bol ? "

Nimmi ne muskura kar kammo ke gale me apni baahen daal di

" Ise crotch less panty kehte hain mom ..Isme Pussy ko chhod kar saara hissa dhaka rehta hai "

Nimmi ke moonh se pehli baar pussy shabd sun kammo ka chehra feeka pad gaya ..Maana wo uski maa thi par aaj tak is tarah ki sitution kabhi nahi bani thi ..Kammo ne use apne se door kar diya

" Besharam ..Wahi to pooch rahi hoon ..Is tarah ke kapde koi pehenta hai kya "

Kaamo ne apni aankh uski choot par gadaate huye kaha ..Baat sahi thi jo cheez dhakne ke liye panty ko banaaya gaya hai agar wahi cheez khuli rahe to panty kisi matlab ki nahi

" Mom isme mujhe khula - khula sa lagta hai ..Aap bhi pehna karo ..Relax feel hoga "

Nimmi ne use ankh maar kar kaha

" Maaroongi ek ..Main teri tarah koi pagal thodi hoon jo ye sab pehnu "

Kammo ne is baar use maarne ke liye jhuta natak kiya to Nimmi usse thoda door ja kar khadi ho gayi ..Ab position ye thi ki Kammo kamre ke andar aur Nimmi kamre ke gate par ..Jagah change hone ki wajah se Nimmi ki gaand kuch sec ke liye Kammo ki nazron ke saamne ghoomi aur pichwaade ka haal dekh kar to Kammo ne apna matha hi thok liya

" Ye kya hai ..Peeche to kuch hai hi nahi "

Kammo ki baat sun Nimmi ne khud ke chootado ko dekhne ki koshish ki to use zoron se hasi aa gayi ..Uske hasne se Kammo ka haal dekhne layak tha

" Behaya ek to galti karti hai aur fir hasti bhi hai "

Kammo ne use fir se daata

" oh mom ..Tumhe kuch pata nahi ..Is panty me peeche ki taraf ek patla sa strap diya hai par wo abhi mere ass cracks me fasa hai "

Ye keh kar Nimmi ne apne chootado ko Kammo ki taraf ghumaya aur thoda jhukte huye badi ada ke saath gaand ki daraaro me fase kapde ke patle se strap ko apni ungliyon se tatol kar baahar kheech liya

" Hey bhagwaan ..Tu ise pehen ke bhi nangi hi hai ..Is se achha to ise pehna hi mat kar ..Ghoom aise hi bina kapdo ke ghar me ..Besharam kahin ki "

Kammo ne bhale hi kayi baar apni choti beti ko poora nanga dekha tha par uske shareer par gaur pehli baar kiya ..Aur aaj use wo bachhi nahi waakayi ek gadraaye jism ki maalkin lag rahi thi ..Panty ke phate hisse se baahar jhaakti kunwaari bina jhaton ki choot ..Bade - bade bedaag chootad aur boobs kisi se kam nahi the ..Aaj Kammo Nimmi ke badan ko sochte huye Nikki ke jism tak pahuch gayi ..Waise Nikki ko usne 4 - 5 saalo se nanga nahi dekha tha ..Par jab choti aisi hai to badi ke kya kehne yahi soch kar uski choot me kujhlahat machne lagi saath hi Nimmi ke moonh se Nikle sexual shabd aur uski harkaten Kammo par kehar dhaane ke liye kaafi thi

" To theek hai ab se main poore ghar me nangi hi ghoomungi ..Thanks for your good suggestion mom "

Nimmi ne basharm ban kar ek flying kiss kammo ki taraf uchhali aur agle hi pal panty aur bra bhi jameen par pade the

" Tujh jaisi pagal ka koi bharosa nahi ..Ghar me tere alawa tera bhai aur dad bhi rehte hain ..Sharm kar sharam ..Ya to bol tujhe pagal khane bharti karwa diya jaaye ..Main aaj hi tere dad se baat karoongi "

Kammo itna bol kar wapas kamre ke gate ki taraf badhi par is baar jo baat Nimmi ke moonh se nikli usne Kammo ko andar tak jhakjhor diya

" Haan haan bhej to mujhe pagal khaane ..Tum sab yahi chaahte ho na ki main is ghar se door chali jaau ..To bharti kar do mujhe bhi us pagal insaan ke saath jise paida kar ke paalna bhi tumhe gawaara nahi "

Nimmi ne ek saans me apni saari bhadaas nikaal di ..Kuch waqt pehle tak kya topic chal raha tha aur ab baat kis matter par pahuch gayi ye dekh Kammo ki ankhon se ansoo behne lage ..Nimmi ne laakh baar apni maa ko staaya ho par is tarah ke laanchan ki ummeed Kammo ne kabhi nahi ki thi ..Dono ek doosre ki ankhon me dekhne lage aur ek cheekh ne dono ka dhyan Kamre ke gate ki taraf mod diya

" Nimmiiiiiiii.......... "

Ye awaaz Nikunj ki thi jisne seedhiyaan chadte huye Nimmi ke moonh se nikli aakhiri baat sun kar uske kamre ka rukh kiya tha ..Par use is baat ka zara bhi andaaza nahi tha ki kamre me uski choti behen poori tarah se nangi khadi hogi

Nikunj ne gate par pahuch kar chillaya to Nimmi aur Kammo dono ke hosh ud gaye ..Lagbhag 5 - 10 sec tak Nikunj ki ankhen behen ke nange jism par padi aur jab tak use hosh ata Nimmi ka nanga badan poori tarah se uski ankhon me utar gaya ..Haalat Nimmi ki bhi kuch aisi hi thi ..Bhale hi chote kapdo me baap aur bhai ne hamesha se use dekha ho par is tarah se bina gate lock kiye nanga khada hona uske besharam hone ka Jaayaz saboot tha aur to aur jo baat Nimmi ne apne bhai Raghu ke liye kahi wo sun kar Nikunj khud ko rok nahi paya aur aaj pehli baar is tarah se apni behen par chilla diya

" Besharam apne kapde pehen ..Main aaj tujhe nahi chhodne waala ..Saari charbi khatam kar doonga aaj teri "
 


Hosh me aate hi Nikunj Darwaze se thoda peeche ho gaya aur Nimmi ghabra kar Bathroom ke andar ghus gayi ..Kammo bhi ab tak khud ko samhaal chuki thi ..Use Nikunj ke jaldi ghar laut aane ke baare me zara bhi anumaan nahi tha warna baat band kamre me hoti

" Beta tu chal mere saath ..Bachhi hai ..Zara sa bhi dimaag nahi isme "

Kammo ne pehli baar Nikunj ko itne gusse me dekha tha ..Hamesha cool aur pyar se rehne wala uska chota beta aaj itna naraaz is liye bhi hua kyon ki Raghu ko usne Deep se bhi badh kar mana tha

" Nahi Maa ..Aaj se ye is ghar me nahi rahegi ..Humare laad - pyar ka ye sila milega socha na tha ..Are Nikki bhi to isi ghar ka khoon hai use dekho ..Shayad hi aaj tak usne kisi ka dil dukhaya ho aur ye Besharam ..Chhiii sharam aati hai ise behen kehte huye bhi "

Ye keh kar Nikunj apne kamre ki taraf chala pada ..Kammo bhi uske saath thi ....

--------------------

Wahin baathroom ke haalat to aur bhi badtar the ..Nimmi ne uske bhai ki saari baatein suni lekin uski ankhon me ratti bhar bhi nami nahi aayi balki uska nanga badan tap kar sholo me badal gaya ..Uski saanse chadhi thi aur wo kisi soch ki mudra me shower ke neeche khadi thi

" Aaj jo kuch bhi ghar par hua wo sahi nahi hua ..Yaad rakhna Nikunj Chawla agar maine apni bezzati ka badla nahi liya to mera naam Nimmi nahi ..Ab dekhna main kya karti hoon "

Ye kehte huye usne shower ka tap ghumaaya aur bhar - bhar karta paani uske tan - badan me lagi aag ko shant karne laga ....

--------------------

Cafet me baithe Deep aur Jeet apni adhuri baaton ko poora kane me lage the ..Par Deep ka dhyaan sirf aur sirf us ladki me khoya tha jisne abhi 10 min pehle Deep ke lund ka ras chakha tha ..Kaise bhi kar ke Deep ko use chodna tha aur iske liye usne Jeet ka sahaara chaaha

" Tu kahan khoya hai kameene ..Jab se badbada raha hoon par tujhe to jaise meri baat se kuch lena dena hi nahi "

Jeet ne use kisi soch me dooba dekh kaha

" Yaar bura mat maan par mujhe teri secretary ki choot chaahiye ..Tujhe manzoor ho tab bhi aur na ho tab bhi "

Deep ne apni soch ko aam karte huye kaha ..Uski baat se Jeet ka chehra thoda gambheer hua aur wo apni chair par seedha baith gaya

" Kya baat hai Jeet ..Kya tu nahi chaahta ki main use chodu ..Ya tujhe use mujhse share karne me koi takleef hai ..Jo bhi baat ho saaf - saaf bata "

Deep ne use shant dekh kaha

" Yaar ab main kya kahoon ..Achha ek kaam karta hoon use bhi cafet me bula lete hain "

Jeet ki baat sun Deep ka chehra khil utha

" Jaanta tha tu meri baat kabhi nahi taalega ..Dost ab dono mil kar uski choot maarenge ..Saali pakki raand lagti hai ..Par jo bhi ho Maal kaanta hai ..Maine bade saalo baad aisa jism dekh hoga ..Kher jaldi bula use jaane se pehle uski mazri jaan lu to dil ko sukoon aa jayega "

Deep to jaise pagal ho chuka tha us ladki ke peeche ..Par jeet ka moonh uski asleel baaton se kaafi utar gaya ..Usne call kar ladki ko cafet me bulaya

Thodi der tak dono dost bilkul shant rahe ..Jeet ne 3 coffee ka order de diya aur ab dono ladki ka intzaar karne lage ..Intzaar ki ghadiyan khatam huyi aur wo bandi apni kamar matkaati huyi unki taraf aati dikaayi di ..Deep uski chaal par aah baharne laga jise sun kar jeet ne apni nazre dono se door kar li

" May i sit here "

Ladki ne thoda jhuk kar poocha jisse uske red top me bana boobs cleavage aur bhi jyada visible ho gaya

" Ya Ya sure "

Deep ne jaldi se use izaazat di aur tab tak teeno ki coffee bhi serve ho gayi

Teeno ki baat start ho paati ki achanak se Deep ka cell baja aur uski saari aashaao par paani fir gaya ..Nikunj ne gusse me aa kar Deep ko phone kiya aur wo saari baat sun un dono se zaroori kaam ka bol kar ghar ke liye ravaana ho gaya ....

" Beta tere dad naraaz honge ..Tujhe unhe call nahi karna chaahiye tha "

Nikunj aur Kammo bed par baithe baatein kar rahe the

" Kya karoon maa aaj Nimmi ne saari hadein paar kar di ..Maine use kitna chaaha hai ye tum bhi jaanti ho aur wo bhi ..Par Raghu ke baare me aisa ganda bolte huye use sharam nahi aayi "

Nikunj ka gussa abhi bhi barkaraar tha

" Chhod beta agar isi tarah daat - dapat ke Nimmi sudhar sakti hoti to kab ka sudhar jaati ..Main to kehti hoon use pyar se hi samjhaaya ja sakta hai ..Maana thodi ziddi hai par hai to teri behen hi na "

Kammo ne uske sar par haath pherte huye kaha

" Waise maa ek baat kahun shayad aap ko bura lage ..Raghu agar is ghar me paida na hua hota to ye jo do waqt chain ki roti mil rahi hai na wo bhi naseeb nahi hoti ..Aaj se 7 - 8 saal pehle tha kya humaare paas ..Ek kiraaye ka kamra aur dad ke business ke toote phoote bartan - bhaade ..Pata hai na aap ko jab koi party ka theka mile mahino beet jaate the tab Raghu ki hi kamaayi se ghar chalta tha ..Na wo gareebi ke chalte gunda banta na humaare din badalte ..Are ye dono jo itni shaan se ghoomti hain wo bhi sirf Raghu ke dar ki wajah se ..Warna Nimmi jis hisaab ke faishonable kapde pehenti hai un kapdo me mumbai ki sadko par raat kya din bhi safe nahi ..Logo ke kaano me aaj bhi ye baat pad jaaye ki ye Raghu ki behne hain to koi aankh utha kar bhi nahi dekhta jabki sab ko pata hai wo bechara kis haal me kahan bharti hai ..Lekin aaj shayad sabhi ne use apne dil se bahar nikaal diya ..Nimmi ne kahin na kahin sahi bhi kaha ki use paida kar ke jahannum me fek diya gaya hai ..Kya hum use ghar nahi la sakte maa ..Ho sakta hai jo recovery wo hospital me na kar paaye wo yahan humaare beech reh ke kar le "

Nikunj ke mind me Aus. se lautne ke baad jo baat sabse pehle aayi thi wo usne Kammo ko bata di ..Wo chahta tha ki Raghu ko Pune se ghar me shift karwa diya jaaye taaki wo sabki nazro ke saamne to rehe

" Beta mann to mera bhi yahi kehta hai ..Par ghar me aisa maahol dekh kar Raghu ko aur bhi jyada takleef hogi "

Kammo ne use samjhaya

" Kuch bhi ho maa use yahan laana hi padega ..Wahan Hospital me kaun sa uska treatment hota hoga ..Sirf us par reserch hi karte honge sabhi ..Main aaj Dad se is baare me baat karoonga "

Nikunj itna bol kar fresh hone bath room me chala gaya aur Kammo apne bache kaamo ko poora karne kitchen me

---------------------

Deep office ki parking se car nikaal kar ghar ki taraf laut raha tha

" Saala kya mast maal hai ..Agar chudaayi ke liye raazi ho jaaye to Patak - patak ke chodunga ..Kitne saal baad aisi item nazar me aayi ..Bas Jeet mana le use kaise bhi kar ke ..Fir to maze hi maze hain ..Waise wo haan hi kahegi kyon ki pehli baar me ladki sirf sharmo - haya dikhaati hai ..Par usne to mera lund hi choos liya ..Aisa lagta hai jaise ab tak uske garam honth mere lund se chipke hon "

Aisi kayi baatein soch Deep ka baitha lund wapas angdaaiyaan lene laga ..Usne ek haath staring par aur doosre se lund ko pant ke oopar se sehlaana shuru kar diya

" Aaj baat poori ho jaati agar Nikunj ka call beech me na aaya hota ..Ye Nimmi bhi na ..Zaroor koi ulti seedhi harkat ki hogi tabhi Nikunj ne mujhe ghar bulaaya ..Kya karu is ladki ka ..Har waqt sirf ladaayi - jagda ..Aaj achhe se khabar leni padegi iski "

Deep apni soch se baahar nikalta jab tak uski gaadi ghar ke main gate par pahuch chuki thi ..Car se utar kar usne tez kadmo se hall kar rukh kiya aur dekha to ghar me har taraf sannata pasra hua tha

" Kahan ho sab ..Kammo ? "

Deep ne hall ko khaali dekh chilla kar kaha

Uski awaaz me behad naraazgi thi jise sun kar pariwar ke sadasya ghabra kar hall me aane lage ..Kaamo kitchen se daudi to Nikunj aur Nikki apne - apne kamro se ..Sirf Nimmi ko chhod kar ab sabhi hall me the

" Kya baat thi to is tarah mujhe ghar bulwaya ? "

Deep ki dahaad se Nimmi tak apne kamre me sehem gayi ..Wo room ki khidki se hall me ho rahi awaaz ko saaf sun sakti thi ..Ek pal to uske chehre par chinta ke baadal chhaye par agle hi pal ek chir parichit muskaan se uske honth hilne lage ..Kyon ki kuch der pehle usne sabhi baaton ko jod kar is problem ka solution dhoond liya tha

" Aap fresh ho jaaiye baad me baat karenge "

Kaamo ne Deep ke chehre par aate gusse ko dekh kar kaha ..Ishare se usne Nikunj ko bhi chhup rehne ki salaah di

" Nahi jo bhi baat hai abhi bataao ..Kab tak aisa maahol chalta rahega ghar me "

Deep ne sofe par baithte huye kaha

" Dad mom thik keh rahi hain ..Aap fresh ho jaaiye mujhe kuch zaroori baat karni hai aap se "

Nikunj ne halaat samajhte huye kaha ..Wo jaanta tha ki agar Nimmi waali baat Dad ko pata chali to shayad use khoob daat padti ..Bhale wo abhi nadaan hai ..Par jo bhi ho is ghar ki jaan bhi hai ..Yahi soch kar Nikunj ne faisla kiya ki Matter se Nimmi ko baahar kar direct Raghu ko ghar laane ki baat ki jaaye

" Nimmi kahan hai ? "

Deep ne tez awaaz me kaha ..Ye baat sunte hi Nimmi khidki se hat kar Bed par let gayi aur bed-sheet se khud ko cover kar liya ..Usne taye kiya tha ki chaahe kitne bhi bulaawe aayen wo neeche hall me nahi jaayegi ..Agar Deep ko us se baat karni hai to use Nimmi ke kamre me aana hi padega

" Wo apne kamre me hai "

Nikki ne deep ko 1st floor ka ishara kar diya

" Main Nimmi se akele me baat karna chaahta hoon ..Koi 1st floor par nahi aayega "

Deep ne kaha aur apne kadmo ki raftaar 1st floor par bane Nimmi ke kamre ki taraf badha di ..Neeche khadi Kammo ..Nikunj aur Nikki bas yahi kher mana rahe the ki Deep ka gussa shant ho jaaye aur Nimmi uske khehar se bache

Kamre ke baahar aa kar Deep ne knock karna bhi uchit nahi samjha aur tezi se darwaza kholte huye andar aa gaya ..Room ki tube light jal rahi thi aur Nimmi bed par chaadar odhe leti thi ..Deep ne ek nazar use ghoora aur awaaz di

" Nimmi ..Ye bachpana kab khatm hoga tera ? "

Deep ne kamre ka gate lock kar kaha taaki wo band kamre me apni choti beti ko samjha sake ..Bhale hi uski naraazgi ka koi paar nahi tha par wo chaah kar bhi apne bachho ko daat nahi pata ..Bachpan se le kar aaj tak shayad hi kabhi aisa hua ho to jab usne tez awaaz me ghar ke kisi bhi member se baat ki hogi

" Nimmi so gayi kya ? "

Deep uske bed ki taraf badhte huye bola ..Shaam ke time to kabhi Nimmi soti nahi thi fir aaj kyon ..bed par uske bagal me baith kar Deep ne mehsoos kiya ki Nimmi ka badan chadar ke andar kap - kapa raha hai jise dekh wo ghabraaya aur turant hi chadar thoda neeche kheech ..Nimmi ke sar par apna haath rakh diya

" Oh God ..Ise to tez bukhaar hai "

Nimmi ka maatha bahut garam tha ..Par achanak ye sab kaise hua ab is par nazar dalte hain

[ Jab Nikunj ne Deep ko ghar aane ke liye call kiya tha tab Nimmi ne uske room me ho rahi saari baatein chhup kar suni aur future ka sochte huye daud kar kitchen me pahuch gayi ..Wahan se usne ek pyaaz utaaya aur muskurati huyi wapas apne kamre me aa gayi

Science ki claas me usne padha tha ki agar body temperature ko heat dena ho to pyaz ko chheel kar apni arms ke andar daba lene se body kuch hi waqt me buri tarah jalne lagti hai aur saamne wala fever samajh kar ghabra jaata hai ..Bas idea laga kar Nimmi ne experiment kar daala ..Shayad daant se bachne ka is se achha koi aur solution ho nahi sakta ]

( Apne bachpan me jis - jis ne is upaaye ko kiya hoga ..Shayad wo iski upyogita se waakif honge )

Deep ne Nimmi ko awaaz di to usne gehri neend se jaagne ka bahaana kar dheere - dheere apni ankhen khol di ..Kuch der pehle tak Deep kitne gusse me tha aur ab kitna ghabraaya sa ..Ye dekh Nimmi mann hi mann muskura uthi

" Beta tujhe to bahut bukhaar hai "

Deep ne ek baar fir Nimmi ki ankhen khulne par kaha

" Dad "

Nimmi ne naatak kate huye Deep ko pukaara

" Yes baby ..Are you ok "

Deep ne bade pyar se usse poocha

" Yes dad baaki sab to theek hai ..Par bahut pain ho raha hai "

Nimmi ne jawaab diya

" Pain kahan par ? "

Deep ne bolte saath uski chaadar ko neeche khiskaaya aur agle hi pal uski ankhen baahar ko nikal aayi ..Nimmi ne jaan kar body ke upper hisse par Top nahi daala tha aur kewal ek seducive si Bra pehne leti thi

" D ..D ..Dad maine Top nahi pehna hai ..Ufff..... "

Nimmi ko to acting ka oscar milna chaahiye tha ..Ek to usne ladkhadaati zubaan se apni postion bataayi aur doosra aah le kar dard ka natak bhi kiya

" Sorry mujhe pata nahi tha "

Deep ne apni nazren doosri taraf karte huye kaha ..Usne socha ki chaadar ko Nimmi oopar kheech legi par wo jyon ki tyon leti rahi ..Pehni huyi white bra net waali thi jisme se uske nipple saaf dikh rahe the

" Dad ek pain killer de dijiye ..Pleaseeeeeeeeeeee "

Nimmi ne Deep ko apni tarf dekhne par majboor karte huye kaha

" Pain killer ? "

Nimmi ka dard bhara please sun Deep palta par nazara wahi tha ..Is baar Nimmi ne uthne ki koshish ki

" Na na leti reh ..Dard kahan hai "

Deep ki ankhen uski ki adhkhuli chaatiyon se chipak chuki thi ..Duniya bhar ki chooto ka swad lene ke baad apni beti ka yovan dekhna use bura to laga par kya karta ' Main hoon aadat se mazboor ' "

" Wo dad main nahate waqt bathroom me fisal gayi thi ..Meri back me chot lagi hai ..Jaise taise jo pehen paayi pehna aur tabhi se araam hi kar rahi hoon "

Nimmi ne bade afsos ke saath apni jhuti kahani use sunaayi ..Dard ki wajah se wo is adh - nangi haalat me hai ye bhi confirm kar diya

" Ruk main teri mom ko bulata hoon "

Deep ne dekha ki Nimmi use apni chaahiyon ko ghoorte dekh rahi hai ..To usne bed se uth kar jana chaha

" No dad ..Mom mujhse pehle se hi naraaz hai ..Ab unhe aur pareshaan nahi kar sakti ..Aap to mujhe ek pain killer de dijiye ..Main theek hoon "

Nimmi ne bada bhola chehra bana kar kaha to Deep wapas uske bed par baith gaya

" Back me lagi ..Kahi fracture to nahi "

Deep ne chinta jataayi

" No dad fracture hota to main hil bhi nahi paati ..Lagta hai halki si gum chot lagi hai "

Ye kehte huye Nimmi ne bachi chaadar apne oopar se hataayi aur karwat le kar apne Chootado par haath rakh diya ..Lower body par usne ek tight capri daali huyi thi jisme fasi uski badi si gaand ko jaan kar Nimmi ne aur bahar ki tarf nikaal rakha tha ..Karwat lene se uski thread bra ki ek single knot Deep ko dikhaayi di aur baaki poori peeth naked

" Dard jyada hai kya beta ? "

Deep ki ladkhadi awaaz sun Nimmi ka chehra khil utha ..Uska plan sucess tha ..Bas ab use ye sochna tha ki itna kaafi hai ya apne naatak ko continue rakha jaaye ....

 
दोस्तो अपडेट दे दिया है अब आप बताओ कि क्या ये मस्त कहानी है या नही
 
पापी परिवार--4

" डॅड यहाँ दर्द से मेरी जान निकली जा रही है और आप को बातों का मज़ाक सूझ रहा है "

निम्मी ने अपने एक चूतड़ को हाथ के पंजे मे दबोच कर मसल दिया ..उसकी सिसकारियों का तो कोई पार ही नही था

" नो बेटा ..आइ'म नोट किडिंग ..तुझे बेवजह ऐसा लग रहा है "

दीप की लार उसकी हाफ - न्यूड पीठ पर गिरती इस से पहले उसने खुद को समहाला और निम्मी के दर्द को महसूस कर अपने माइंड को डाइवर्ट करने की कोशिश की

" डॅड लगता है आप को भी मेरी कोई फिकर नही ..एक काम करो वहाँ वॉर्डरोब से एक पेन किल्लर निकाल दो ..मैं खा लूँगी "

निम्मी ने दीप को सेंटी डाइयलोग मारा और वापस पीठ के बल लेट गयी ..कहीं ना कहीं उसकी भी हालत बिन पानी की मछ्ली की तरह हो रही थी ..आज अपने भरे योवन मे पहली बार ऐसा मौका आया था जब एक बाप अपनी बेटी को अध - नंगी हालत मे देख रहा था और शायद उत्तेजित भी हो

निक्की के करवट लेने से उसकी थ्रेड नेट ब्रा थोड़ी लूज हुई और उसके एक कंधे पर अटका स्ट्रॅप खिसक कर कप के पॅरलेल आ गया ..वैसे भी ब्रा के अंदर छुपे बूब्स का हर हिस्सा पूरी तरह से विज़िबल था और नुकीले निपल्स नेट से बाहर निकलने को आमदा हो रहे थे ..दीप ने अपने सूख चुके गले को थूक निगल कर राहत पहुचाई ..दोनो की आँखें फिर मिली और दीप ने घबरा कर अपनी नज़रें नीची कर ली

" सिर्फ़ पेन किल्लर खाने से कुछ नही होगा निम्मी ..अक्सर बाथरूम मे गिर कर लगने वाली चोट फ्यूचर तक प्राब्लम देती है ..तो हमे डॉक्टर को बुला लेना चाहिए "

दीप एक तरफ मर्द की तारह सोच रहा था और दूसरी तरफ बेटी के दर्द को ले कर परेशान भी था ..पर सिचुयेशन बहुत हॉट थी निम्मी के दर्द की वजह से लंबी - लंबी साँसे लेना जिस से बूब साइज़ काफ़ी तेज़ी से बढ़ता कम होता जा रहा था

" नो वे डॅड ..डॉक्टर से मुझे बहुत डर लगता है ..प्लीज़ हेल्प मी डॅड ..प्लीज़ "

निम्मी ने अब रोने का नाटक स्टार्ट किया ..छटपताकर उसने ब्रा इतनी ढीली कर दी कि एक निपल लगभग पूरा बाहर निकल आया ..दीप का तो मानो खून जम चुका था और पॅंट के अंदर खड़े लंड ने ऐन्ठ कर रहम की भीख माँगनी शुरू कर दी

" सँभाल अपने आप को निम्मी "

दीप ने ना चाहते हुए अपने हाथ उसके गरमाये सपाट पेट पर रखे और उसे छटपटाने से रोकने लगा ..पर निम्मी तो सोच कर लेटी थी या तो आज अपने बाप को काबू मे करेगी या हमेशा के लिए उसके दिल से उतर जाएगी ..वो और भी ज़्यादा मटकने लगी ..कभी - कभी दीप का हाथ उसके बूब्स से टकराता तो दोनो की आह एक साथ निकल जाती

" डॅड कोई और रास्ता तो होगा ना ? "

निम्मी ने अपनी उखड़ती सांसो को चालू रखते हुए दीप के हाथो को ज़ोर से पकड़ ..अपने पेट पर दबा कर कहा ..दीप के मन मे इलाज को ले कर जो बात आई वो बोलना तो चाहता था पर ज़ुबान कहीं से कहीं तक उसका साथ नही दे रही ही ..यहाँ निम्मी उसके हाथ को पेट से ऊपर लाते हुए कयि बार अपने बूब्स पर दबा चुकी थी

" डोंट वरी सब ठीक हो जाएगा बेटा ..पर उसके लिए .... "

इतना बोल कर दीप छुप हो गया ..निम्मी ने उसकी बात सुन कर अपनी आँखें खोली जिनमे से बहते आँसुओ को दीप देख ना सका और अपने हाथ उसकी पकड़ से आज़ाद करते हुए उसे पेट के बल लिटाने की कोशिश की ..निम्मी को एक पल तो समझ नही आया कि दीप उसे पलटा क्यों रहा है पर फिर भी वो किसी कठपुतली की तरह उसके हाथ के सपोर्ट से उल्टा लेट गयी

" यस डॅड जो भी इलाज हो जल्दी करो "

निम्मी ने अपने हाथ से चूतडो को वापस मसलते हुए कहा ..कसी बेहद टाइट कॅप्री मे फसि उसकी गान्ड किसी नामर्द को भी मर्द बना देने मे सक्षम थी फिर दीप तो जनम से ही मर्द था

" बेटा तुझे मालिश से तुरंत राहत मिलेगी और उसके बाद टॅबलेट खा कर सारा दर्द रफूचक्कर हो जाएगा "

दीप को कहते देर नही हुई कि निम्मी ने उसके एक हाथ को पकड़ा और अपने चूतड़ से सटा दिया ..दीप उसकी लेफ्ट मे अपने घुटनो के बल बैठा था

" तो मालिश कर दो डॅड ..लेकिन जल्दी करो "

निम्मी के द्वारा प्रेशर देने से दीप का हाथ उसके मखमली गोल चूतडो मे धँस गया ..निम्मी ने पहली बार सिड्यूस हो कर आह भरी पर दीप को लगा कि उसने दर्द की दरकार से ऐसा किया होगा ..दीप भोचक्का हो कर निम्मी की नंगी पीठ और कॅप्री मे फसि गांद देखे जा रहा था

" यस डॅड प्लीज़ थोड़ा टाइट्ली दबाओ "

निम्मी के मूँह से रज़ामंदी पा कर दीप अपने आपे से बाहर हुआ और अपना दूसरा हाथ भी गांद दबोचने मे लगा दिया ..अब निम्मी के हाथो की कोई ज़रूरत नही थी तो उसने उन्हे अपने पेट के नीचे डाल लिया ..एक बाप के नज़ररिय से अगर दीप इस घटना को देखे तो वो ग़लत था लेकिन अगर एक मर्द की हैसियत समझ कर सोचे तो निम्मी के मस्त - बदन ने उसके दिल और दिमाग़ पर अपना जादू चला दिया था ..निम्मी कुछ देर ज्यों की त्यों बेड पर पैर सीधे किए लेटी रही पर जब उसकी चूत रस ने बाप के प्रति बुरी भावनाओ से रस छोड़ना चालू किया तो वो सडन्ली बेड पर घुटने मोडती हुई उकड़ू बैठने को हुई और दीप को ना चाहते हुए भी ठीक उसके पीछे आना पड़ा ..हाथ पेट के नीचे ले जाने से निम्मी का प्लान था कैप्रि के बटन को अनलॉक कर उसे लूज करना और अब उकड़ू बैठने से उसकी गांद हवा मे बहुत ज़्यादा ऊपर उठ गयी थी जिसके चलते कॅप्री फिसल कर पैंटी स्ट्रॅप लाइन तक पहुचि और उसकी खूबसूरत गांद की दरार से दीप की आँखों का मिलन हो गया

" ओह डॅड यू आर आ रियल पेन किल्लर "

निम्मी ने मस्त होते हुए अंगड़ाई ली और जान कर अपनी ब्रा के स्ट्रॅप लगभग दोनो कंधो से नीचे उतार लिए

" अच्छा फील हो रहा है ना ? "

दीप ने काम के वशीभूत हो उसके चूतडो की दरार मे अपनी उंगली फिरा कर पूछा

" यस डॅड आप के हाथो मे जादू है ..वैसे मूव भी है मेरे कमरे मे "

इतना बोल कर निम्मी चुप हो गयी ..दीप के लिए ये खुला आमंत्रण था उसकी गांद को कॅप्री और पैंटी से पूरा आज़ाद होते नंगा देखने का

" क ..कहाँ रखी है मूव बता मुझे "

अब दीप वाकई अपने लंड रूपी दिमाग़ से सोचने पर मजबूर हो गया ..जानता था कि निम्मी तो अभी बच्ची है पर उसे तो एक बाप होने के नाते उसके चूतडो को छ्चोड़ देना चाहिए था ..वो बेड से नीचे उतरा पर रूम से जाने की वजाए निम्मी के इशारे पर वॉर्डरोब से मूव लेने

" मिल गयी "

जब मूव ले कर दीप पलटा तो नज़ारा और भी ज़्यादा भड़काने वाला था ..निम्मी ने कॅप्री को पैंटी सहित गांद के कोमल भूरे छेद तक उतार लिया था और ब्रा तो झूल कर बिल्कुल उतरने को थी ..डीप की पलकें तो झपकना ही भूल गयी ..उकड़ू अपनी नंगी गान्ड को हवा मे उठाए उसकी बेटी का जिस्म और छाती से नीचे लटकती बड़ी बड़ी चूचियाँ उसे पागल करने को काफ़ी थी ..दीप निम्मी के सर की साइड मे खड़ा था ..एक पल वो उस नज़ारे को देख कर रुका कि कही ये सब उसकी बेटी का कोई नाटक तो नही लेकिन अगले ही पल उसकी आँखें निम्मी की आँखों से जा टकराई और उनमे छुपि मासूमियत को देख दीप का सारा शक़ कूफर हो गया ..उसे लगा जैसे निम्मी उसकी अपनी बच्ची दुनिया की सबसे इनोसेंट लड़की है

" मिल गया डॅड ..अब जल्दी से मालिश को पूरा कर दो "
 
निम्मी की आवाज़ सुन दीप का ध्यान भंग हुआ और वो हौले हौले बेड की तरफ बढ़ने लगा ..दोनो बाप बेटी फुल तरीके से रोमांचित थे ..डॅड का खड़ा लंड निम्मी की चूत को और भी ज़्यादा फड़का रहा था पर दीप चाहता था कि उसकी बेटी को उसके सिड्यूस होने का पता ना चले ..8" का लंड था कोई 1" की लुल्ली नही जो छुपायि जा सकती थी ..दोनो ये सोच कर भी पानी - पानी हो रहे थे कि एक बाप की आँखों का सामना अपनी बेटी के गान्ड के छेद से कुछ ही पॅलो मे होने वाला था ..दीप बेड पर चढ़ा और निम्मी के ठीक पीछे बैठ कर अपनी उंगली मे मूव की एक लेयर निकाल ली लेकिन अभी तक उसने एक नज़र भी बेटी के खुले पिच्छवाड़े पर नही डाली थी ..शायद मेच्यूर होना इसी को तो कहते हैं ..निम्मी उसका खून थी फिर आज वो इतना आगे कैसे बढ़ गया ..उसने खुद को इस बात के लिए कोसा और फ़ैसला लिया कि वो अपनी आँखें बंद रख के जल्दी से मालिश निपटाएगा और कमरे से बाहर चला जाएगा ..वहीं निम्मी इस पल के इंतज़ार मे थी कि कब उसके डॅड का हाथ उसकी खुली गांद को सहलाता और क्या रिक्षन होगा दीप का जब उसकी आँखें अपनी ही बेटी के आस होल पर पड़ेंगी

दीप को बिल्कुल शांत बैठा महसूस कर निम्मी ने अपनी गर्दन को पीछे घुमाया तो पाया कि डॅड की आँखें बंद और वो कुछ सोचने की मुद्रा मे बैठे हैं ..निम्मी के तन बदन मे आग लगी थी और दीप का इस तरह से एक दम चुप हो जाना निम्मी को गवारा नही हुआ ..कैसे भी कर उसे डॅड की प्रतिक्रिया नोट करनी थी ..पॅंट के अंदर बने तंबू से उसे ये तो पता लग गया था कि बेटी के जिस्म ने बाप के अंदर का मर्द जगा दिया लेकिन वो तो हर नंगी लड़की कर सकती है ..सही बात तो आँखों से बयान होती तभी कुछ सोच कर निम्मी ने कहा

" डॅड मूव थोड़ा देख कर लगाना कहीं ग़लत जगह ना लग जाए ..आप समझ रहे हो ना ..वहाँ लगा तो जलन होगी "

निम्मी ने सोते दीप की आँखे खुलवाने के लिए जो बात कही उससे दीप कब तक बच पता ..उसने फिर भी बंद आँखो से निम्मी के पिछवाड़े का अनुमान लगाया लेकिन पहली ही बार मे निशाने पर गांद का कुँवारा छेद आ गया ..उंगली मे लगी मूव सीधे आस होल से जा टकराई

" अहह.............. डॅड "

निम्मी ने जो कहा था हुआ उसका बिल्कुल उल्टा ..दीप की उंगली का एहसास अपनी गांद के कुंवारे छेद पर महसूस होते ही निम्मी की टाँगे जवाब दे गयी और वो बेड पर करवट ले कर लेट गयी ..दीप ने हड़बड़ा कर अपनी आँखें खोली तब तक उसकी बेटी ने अपने घुटनो को मोड़ लिया था और टाइट कॅप्री मे फासी गांद की दरार आपस मे चिपकी पड़ी थी

" क्या हुआ निम्मी ..सब ठीक तो है ? "

पता दीप को सब था कि उसकी उंगली कहाँ जा कर टकराई थी पर सीधे स्पस्ट शब्दो मे पूछना उसके बस से बाहर था

" उफफफफ्फ़ डॅड ..मैने आप को बोला था कि मूव देख कर लगाना पर आपने तो मेरी जान ही ले ली "

निम्मी को छेद मे जलन शुरू हो गयी ..अब किया हुआ नाटक ख़तम हो कर सब रियल मे बदल गया

" आइ'म सॉरी बेटा ..इस वक़्त तेरी मा को यहाँ होना चाहिए था "

दीप ने अपने बाप रूपी दिमाग़ से सोच कर कहा ..वो मैने अपनी आँखें बंद रखी थी ..तभी ये ग़लती हो गयी ..दीप की बात से उसकी केर सॉफ झलक रही थी

" मोम होती तो वो जान कर ऐसा करती और शायद आप ने भी वही किया ..डॅड मुझे जलन हो रही है "

ये कह कर निम्मी रुआसी हो गयी ..वाकाई मे जब मूव बॉडी के किसी एक्सटर्नल पार्ट पर लगती है तभी जलन का अनुमान हो जाता है और यहाँ तो बात शरीर के इतने सेन्सिटिव अंग की थी ..जल्दबाज़ी मे दीप ने मूव को मला भी नही था अपने हाथो पर ..उसने सोचा था कि डाइरेक्ट उंगली से चूतडो पर मूव लगा कर मालिश करेगा

" ऐसा नही है निम्मी ..मैं तुझे दुख नही दे सकता ..बच्चो मे सबसे ज़्यादा मुझे तुझसे प्यार है "

दीप ने उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा

" प्यार माइ फुट डॅड ..ऊईए मा ..कितना स्ट्रेंज सा लग रहा है "

निम्मी ने करवट ले कर खुद के पेन को और ज़्यादा बढ़ाया था ..अगर वो अपने आस होल के क्रॅक्स को नही जोड़ती तो शायद उसे इतनी जलन महसूस नही होती ..ऊपर से वो मटक भी तो नागिन की तरह रही थी ..बूब्स पर से ब्रा पूरी तरह अलग थी और उसकी हर थिरकन से चूचियाँ इधर - उधर डोले जा रही थी

" दिखा मुझे "

जो काम दीप की ग़लती से बिगड़ा था उसे ठीक करने के लिए उसने निम्मी को वापस उसी पोज़ीशन मे लाना चाहा जैसे वो पहले ओकडू बैठी थी ..शायद अब दीप के दिमाग़ मे छुपा शैतान ख़तम होने की कगार पर था

" नो वे डॅड ..आप जाओ ..हर बार की तरह इस बार भी मैं दर्द बर्दास्त कर लूँगी ..मुझे कुछ नही दिखाना "

निम्मी ने उसकी पकड़ से छूट ते हुए कहा तो दीप को और भी ज़्यादा अफ़सोस हुआ

" बेटा अगर दिखाएगी नही तो इलाज कैसे होगा ..मैं प्रॉमिस करता हूँ तेरा दर्द कम कर दूँगा "

दीप ने इस बार अपने दोनो हाथो के ज़ोर से उसे पेट के बल लिटाया और उसे अपनी तरफ खीचना शुरू किया ..निम्मी के पास भी इस वक़्त हालात से समझोता करने के अलावा और कोई चारा नही बचा था ..एक सोचा - समझा मज़ाक ऐसा दर्दनाक मोड़ ले लेगा उसने कल्पना भी नही की थी ..बस दीप को थोड़ा सा परेशान कर वो अपने कमरे से रुखसत कर देती ..लेकिन बात कहाँ तक पहुच गयी

" ऊपर तो उठा इसे "

जब निम्मी के चूतर उसकी सीध मे आ गये तब दीप ने उन्हे हाथ से थप थपा ऊपर उठाने को कहा ..निम्मी ने पहली बार किसी अग्याकारी बच्चा होने का सबूत दिया और अब उसकी गान्ड ठीक डॅड के चेहरे के सामने थी ..दीप ने एक लंबी साँस ली और अपनी नज़रें उसके दरार बंद चूतडो से जोड़ दी

" डॅड जो भी करो जल्दी करना ..मुझे सच मे बहुत पेन है "

निम्मी की बात पूरी भी नही हो पाई कि दीप की पॉकेट मे रखा सेल बजने लगा ..उसने सोचा तो था कि मोबाइल जेब से बाहर ना निकाले पर निम्मी ने अपनी गर्दन पीछे मोड़ कर उसे इशारे से कॉल पिक करने को कहा ..वो चाहती थी कि इस कॉल के बाद अगली सारी रुकावट ख़तम हो जाएँ और उसे अपने दर्द से जल्दी निजात मिल सके ..दीप ने जल्दी से सेल बाहर निकाला तो कॉल जीत का था ....

" हेलो जीत "

दीप ने कॉल पिक किया

" दीप तेरे लिए एक खुश - खबरी है "

जीत ने हंसते हुए जवाब दिया

" खुश - खबरी ? "

दीप पहले तो हैरान हुआ पर तुरंत ही उसे याद आया कि उसने जीत से उसकी सेक्रेटरी को चुदवाने के लिए राज़ी करने की बात कही थी

" हां साले ..खेर तू कर क्या रहा है अभी ? "

जीत ने उसका सवालिया जवाब सुन पूछा

" कुछ नही एक ज़रूरी मीटिंग मे बिज़ी हूँ ..हम 1 घंटे से बात करें "

दीप उसकी बात को सुन ना तो चाहता था पर उसकी नज़र निम्मी के दरार बंद चूतडो से हट कर उसके चेहरे पर पड़ी जिसमे उसकी बेटी मदद की गुहार लगाती दिखाई दी ..ये सोच कर दीप ने जल्दी कॉल को डिसकनेक्ट करने का मन बनाया

" तू और तेरी मीटिंग ..झूठे ज़रूर किसी चूत को चोदने मे लगा होगा ..खेर कैसी चूत है उसकी ..कभी मुझे भी शामिल कर भाई ..मिल कर चोदेन्गे "
 
जीत की इस बात ने दीप के अंदर छुपे शैतान को जगाने का काम किया और उसका फ्री हाथ अपने आप निम्मी के एक चूतड़ को मसल्ने के लिए बढ़ गया

" खेर जो भी होगा बता दूँगा ..अभी रख और समझ मेरी बात को ..मैं तुझे 1 घंटे से कॉल करता हूँ "

दीप ने थोड़ी ताक़त से निम्मी का चूतड़ मसला तो उसकी बेटी की दर्द और मज़े से भरी आह जीत के कानो मे भी जा पहुचि

" हा हा हा हा लगा रह ..छोड़ना नही भाई ..रगड़ कर चोदना रांड़ को ..चल मे रखता हूँ "

जीत ने इतना बोल कर हस्ते हुए कर कॉल काट दिया

दीप पर उसकी बातों का इतना गहरा असर पड़ा कि सामने उकड़ू बैठी निम्मी मे उसे रंडी की छवि दिखाई देने लगी

" डॅड अगर बात हो गयी हो तो कुछ करो ..आइ कान'त कंट्रोल अनीमोर "

निम्मी ने उसे नींद से जगाया और दीप अपनी सोच की कयास को पूरा करने मे जुट गया

" निम्मी पहली बात तो जो इस बंद कमरे मे हो रहा है प्रॉमिस मी ..बात सिर्फ़ हम दोनो तक ही रहेगी "

दीप ने सेफ हॅंड खेला

" शुवर डॅड ..प्रॉमिस किया "

निम्मी ने उसकी बात को रज़ामंदी दी और अगले ही पल दीप का दूसरा हाथ भी उसकी गान्ड को सहलाने मे लग गया

" बेटा इस कॅप्री तो थोड़ा और नीचे खीचना होगा "

दीप ने गांद की लकीर पर अपनी उंगली फेर कर कहा

" नीचे क्यों डॅड ? "

निम्मी ने शरम से बहाल होते हुए पूछा अगर कॅप्री और नीचे सरकती तो गांद के छेद के साथ उसकी अन्छुइ कुँवारी चूत भी दीप को दिखाई देती

" मैं जैसा कहता हूँ कर ..तुझे रिलॅक्स फील होगा बेटा "

दीप ने उसकी हां सुन ने से पहले ही अपने हाथ से कॅप्री को काफ़ी नीचे खीच दिया ..निम्मी ने पूरी ताक़ात लगा कर अपनी गान्ड को सिकोडा ताकि दरार ना खुल पाए और दीप चूतड़ो के कड़क पन से उसकी इस हरकत को ताड़ गया

" बेटा इन्हे ढीला छोड़ और पूरी तरह रिलॅक्स हो जा "

उसने हाथ के प्रेशर से चुतडो के पट को खोलते हुए कहा

" डॅड मुझे शरम आ रही है "

निम्मी ने और ज़ोर लगा कर उसके हाथो को ऐसा करने से रोकने की कोशिश की

" डॅड से कैसी शरम बेटा ..वैसे मैं जानता हूँ ये ग़लत है लेकिन मान मैं एक डॉक्टर हूँ और तू मेरी पेशेंट है ..तेरे इलाज के लिए ही मैं ऐसा कर रहा हूँ "

दीप ने उसे समझाया और निम्मी ने अपने पिछवाड़े को पूरी तरह से ढीला छोड़ दिया ..और अलगे ही पल एक बाप की आँखों के सामने खुद की बेटी का सुर्ख भूरा गांद का छेद और कुँवारी बिना झाटों की फूली चूत थी ..कॅप्री काफ़ी नीचे थी जिस से ये सीन और भी ज़्यादा कातिलाना था

" अब मैं तेरे दर्द का इलाज करता हूँ "

दीप ने उसे हल्का सा करवट दिलवाया और खुद का कंट्रोल खोते हुए बहुत सारा थूक गांद के छेद मे उडेल दिया ..इस ठंडे एहसास से निम्मी की जान ही निकल गयी ..वो खुद को संभाल पाती की इस से पहले ही दीप ने अपने होंठ छेद पर रखे और इतनी तेज़ी से थूक को सांसो से ज़रिए मूँह के अंदर खीचा कि निम्मी तड़प उठी ..उसे लगा कि जैसे उसकी आत्मा गान्ड के छेद से बाहर निकल जाएगी ..वो ज़ोर दे कर अपने आप को दीप की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी ..उसकी सिसकारियो से पूरा कमरा गूँझ रहा था ..पर दीप ने उसे कोई चान्स ना देते हुए अपनी जीब बाहर निकाल कर कुत्ते की तरह उस मुलायम छेद को चाटने लगा ..ना चाहते हुए भी निम्मी ने अपने हाथ से चूतडो की दरार को इतनी ताक़त से अलग किया कि उसे अपनी जाँघो मे फसि केप्री से दर्द महसूस होने लगा

" डॅड कॅप्री मेरी जाँघो मे फसि है ..मुझसे इस पोजीसन मे रहा नही जाएगा "

निम्मी ने अपना चेहरा पीछे घुमाया तो देखा दीप फटी आँखों से उसके यौवन को निहार रहा था ..तो क्या ये सिर्फ़ उसकी सोच थी कि डॅड उसके आस होल को बेरहमी से चाटे जा रहे थे ..सपने से बाहर निकल उसे अपने दर्द के ऊपर मदहोशी छाने लगी और लगा जैसे उसकी चूत बहने को तैयार हो

" तो कॅप्री उतार ले बेटा ..ला मैं मदद करता हूँ "

दीप के तो मन की मुरादें पूरी हो रही थीं ..जीत ने उसे जिस खुश - खबरी से रूबरू करना चाहा उससे दीप ने अनुमान लगा लिया था कि दोस्त ने दोस्ती निभाते हुए उस लड़की को चुदवाने के राज़ी कर लिया है और इस बात का असर ये हुआ कि निम्मी मे उसे इस वक़्त उसे वही लड़की दिखाई दी जिसने आज सुबह ही उसका का माल चखा था ..दीप ने आगे हाथ ले जा कर कॅप्री के सारे बटन अनलॉक किए और धीरे - धीरे कॅप्री को उसकी टाँगो के बाहर का रास्ता दिखा दिया ..अब निम्मी के जिस्म पर सिर्फ़ एक छोटी सी पैंटी रह गयी जो उसकी पुसी एरिया से नीचे थी और थ्रेड वाली ब्रा जिसके कप से बूब्स बाहर को लटके थे

" डॅड यहाँ जलन है "

निम्मी को अब दर्द तो नही था पर गान्ड के छेद मे उठ रही जलन उसे काफ़ी मीठा - मीठा एहसास करवा ने लगी और रही - सही कसर उसके सपने ने पूरी कर दी थी ..उसने सोचा जब दीप ने इतना सब देख ही लिया है तो क्यों ना अपने सपने को सच किया जाए ..ऐसा मन मे विचार कर उसने दीप का हाथ पकड़ा और उसकी उंगली को अपने मुलायम छेद से चिपका दिया ..दीप को ऐसा अनुमान कताई नही था और वो खुमारी के चलते उसी हाथ की दूसरी उंगली से अपनी बेटी की कुवारि चूत का ऊपरी हिस्सा खुजलाने लगा

" क्या यही दर्द है बेटा ? "

दीप ने अपनी उंगली को छेद पर घुमाव देते हुए कहा ..उसने छेद पर हल्का सा दवाव भी बना रखा था

" अहह........ यस डॅड "

निम्मी ने मादक सिसकी लेकर कहा

" तो एक काम कर ये पैंटी भी उतार दे ..इलाज करने मे मुझे आसानी रहेगी "

दीप ने बड़ी चालाकी से उसकी थ्रेड ब्रा की ढीली नाट को खोला और अलगे ही पल ब्रा बेड पर पड़ी थी ..हालाकी निम्मी को उसकी उंगलियों का स्पर्श अपनी पीठ पर हुआ ..लेकिन जो दीप कर रहा था कहीं ना कहीं वो भी तो यही चाहती थी

" ओके डॉक्टर "

निम्मी ने मुस्कुरा कर सिर्फ़ इतना कहा और बड़ी कातिल अदा के साथ अपनी पैंटी को टाँगो के बाहर कर दिया ..अब निम्मी पूरी तरह से नंगी थी

" बेटा थोड़ा क्रॅक्स तो फैलाना ..तब तक मैं सोचता हूँ आगे का इलाज कैसे करना है "

निम्मी ने उसकी बात को मानते हुए अपने दोनो हाथो से चूतडो की दरार को चौड़ा लिया ..नज़ारा ऐसा था कि दीप का हाथ खुद - ब - खुद पॅंट के ऊपर से अपना लंड सहलाने मे बिज़ी हो गया

" डॅड इस से ज़्यादा नही खोल सकती "

निम्मी ने फिर से अपना चेहरा पीछे घुमा कर कहा ..दीप को अपना लंड सहलाते देख उसकी चूत से रस की पहली धार बह निकली ..वो बुरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी
 
Back
Top