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पापी परिवार

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" तू समझती क्यों नही ..सब मेरी ग़लती नही है ..यार मैने भी वही किया जो इस टीनेज मे सबके साथ होता है "

निम्मी ने अपनी बात जारी रखी

" अशोक को मैं भुला चुकी हूँ ..प्लीज़ निम्मी वापस मुझे कमज़ोर मत कर ..मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ ..मुझे अकेला छोड़ दे "

शिवानी बेड से उठ कर सामने बनी खिड़की की तरफ चली गयी ..बाहर उसे मेन रोड का नज़ारा दिखाई दे रहा था ..रफ़्तार के साथ चेहरे बदलते जाते ..लेकिन उन चेहरो मे जो चेहरा उसे देखना हमेशा से पसंद था वो अब शायद ही उसे कभी दिखाई दे पाता

" सुन ..लेट मी एक्सप्लेन ..हां मानती हूँ ग़लती मेरी भी है ..लेकिन तू ही बता ..जब एक लड़का हज़ार बार किसी लड़की को अपने प्यार का इज़हार करेगा ..घंटो उसकी तारीफो के पुल बाँधेगा ..हर वक़्त बेबसी की दलीलें ..यार फिर मैं कैसे पीछे हट जाती ..आइ मीन लाइफ मे 1स्ट टाइम इतना ज़्यादा अट्रॅक्षन झेला था मैने ..मानती हूँ जान बूझ कर मैने तुझे इग्नोर किया ..बट तू समझ यार एक लड़की कब तक अपनी फीलिंग्स छुपा कर रख सकती है "

निम्मी काफ़ी दिनो बाद सच बोली ..अशोक से मिल कर ही उसने जाना था प्यार क्या होता है ..इन्स्टिट्यूट के बाहर अक्सर दोनो घूमने जाते ..पार्टीस ..मौज मस्ती ..रात के 3 - 3 बजे तक फोन पर बातें करना ..शायद यही रीज़न था जो निम्मी ने शिवानी के सच्चे प्यार पर कभी ध्यान नही दिया और फिर बात यहाँ तक बढ़ गयी कि दोनो मे बेट लगने लगी ..कौन जीतेगा

निम्मी काफ़ी फॅशनबल कपड़ो मे अशोक से मिलने जाती ..सुंदर दिखने के लिए उसने हर वो चीज़ की जिससे शिवानी का पत्ता कट हो सके ..लेकिन दिन पर दिन उसे महसूस होने लगा कि उसका प्यार सिर्फ़ पैसो और उसके बदन पर ज़िंदा है

बात करते वक़्त अशोक की नज़रें हमेशा निम्मी के बूब्स और जाते वक़्त उसकी गांद पर जमी रहती ..घड़ी - घड़ी उसके कोमल बदन को छूना .. फिर चाहे हाथ हो ..गाल हो या चुचियाँ ..एक दिन तो हद हो गयी ..अशोक ने उसे अपने दोस्त के फ्लॅट पर बुलाया और कुछ देर तक प्यार भरे सपने दिखाने के बाद अपना हाथ उसकी स्कर्ट के अंदर डाल दिया

निम्मी इसके लिए बिल्कुल तैयार नही थी ..वो मना कर पाती इससे पहले ही अशोक ने पैंटी के ऊपर से उसकी कुँवारी चूत को सहलाना शुरू कर दिया ..1स्ट टाइम किसी मर्द का हाथ वहाँ तक पहुचा था ..निम्मी टूटने लगी ..खुमारी मे अपना हाथ उसके हाथ पर दबाते हुए ज़ोरों से आहें भरने लगी ..उसने तय कर लिया कि वो अब नही रुकेगी और जैसे ही दोनो के होंठ जुड़े ..अशोक का फोन बजने लगा

" फक !!!! "

तिलमिला कर उसने नंबर. देखा ..जो उसी दोस्त का था जिसके फ्लॅट पर दोनो अभी बैठे थे

" दो मिनट जान ..मैं अभी आया "

इतना कह कर अशोक ने अपने खड़े लंड को जीन्स के ऊपर से मसला और बात करने के लिए दूसरे कमरे मे चला गया

उसके रूम से बाहर जाते ही निम्मी ने अपनी स्कर्ट ऊपर उठा कर ..पैंटी चेक की जो फ्रंट से काफ़ी गीली हो गयी थी

" शिट !!!!! मुझे सूसू आया है शायद "

अंजान निम्मी के कदम बाथ - रूम की तरफ बढ़ गये ..लेकिन दूसरे कमरे के सामने से गुज़रते वक़्त उसने कुछ ऐसी बातें सुन ली जिससे वो तुरंत ही फ्लॅट छोड़ कर अपने घर वापस लौट आई

" अब तुझे क्या हुआ ? "

खिड़की से लौट कर ..निम्मी को ख्वाब मे डूबा देख शिवानी ने पूछा ..उसे बड़ी हैरानी हुई ..निम्मी की आँखों मे गीला पन आ गया था ..हमेशा दूसरो को रुलाने वाली आज खुद रोने वाली है ..शिवानी को झटका लगा

" क ..कुछ नही ..चल आज मैं तुझसे प्रॉमिस करती हूँ ..अब कभी नही लड़ूँगी ..बल्कि एक अच्छी फ्रेंड बन कर रहूंगी "

इतना बोल कर निम्मी वहाँ से जाने लगी ..लेकिन शिवानी ने आगे बढ़ कर उसका रास्ता रोक लिया

" बैठ यहीं ..पहले ये बता तू रो क्यों रही है ? "

उसका हाथ मजबूती से पकड़ कर शिवानी ने वापस उसे बेड पर बिठा लिया

" कोई बात नही है ..मुझे जाने दे "

निम्मी ने अपने आँसुओ को रोकने की भरकस कोशिस की लेकिन वो नही माने ..छलक कर उसके गालो को भिगाना शुरू कर दिया

" कोई तो बात है ..मुझसे मत छुपा ..जब इतने बड़े - बड़े एहसान किए हैं ..तो एक और कर दे "

अनायास ही शिवानी ने उसका लेफ्ट गाल पोंछ दिया ..वो हैरत भरी निगाहों से निम्मी का चेहरा देख रही थी

" अशोक मेरे साथ सिर्फ़ सेक्स करना चाहता था शिवानी ..इसी लिए मैं हमारे लव ट्राइंगल से अलग हो गयी ..चाहती तो तुझे बता देती ..पर शायद तेरा दिल इस बात को नही मानता ..तुझे लगता मेरी कोई नयी चाल है "

सुबक्ते हुए निम्मी ने कहा ..शिवानी को एक और झटका दे कर वो तेज़ी से रोने लगी

" रो मत ..क्या तेरे साथ भी उसने ज़बरदस्ती की ? "

शिवानी ने उसका चेहरा थाम कर कहा

" ह्म्‍म्म्मम !!!!! "

हां मे अपना सर हिला कर निम्मी कंट्रोल नही कर पाई और शिवानी के गले से चिपक गयी ..बड़े दिनो बाद वो रोई थी ..चाहती थी आज उसे संभालने वाला उसे समझे ..वो ऐसी नही जैसी दिखती है ..सिर्फ़ खाल ओढ़ लेने से कोई शेर नही बन जाता ..आन्द्रूनि रूह ही इंसान की सच्चाई का परिचय करवाती है

" जानती थी ..मेरे साथ भी उसने यही किया था ..लेकिन दर्द मुझसे सहा नही गया और मैने आगे कुछ भी करने से मना कर दिया ..शायद ये वजह भी हो सकती है जो उसने तुझे अपने जाल मे फसाया होगा "

शिवानी ने अपनी बात पूरी की ..इस वक़्त उसे बिल्कुल रोना नही आया ..बल्कि उसका चेहरा काफ़ी सीरीयस हो गया था

" सुन तू घर जा ..अब मैं वापस नही जाउन्गि ..यहीं रह कर जॉब करूँगी बट इन्स्टिट्यूट से कुछ ऐसी यादें जुड़ी है ..जो मैं वापस वहाँ नही जाना चाहती "

शिवानी ने उसे खुद से अलग करते हुए कहा ..निम्मी का पूरा चेहरा उसके आँसुओ से तर था ..अपना दुपट्टा उतार कर शिवानी ने उसका फेस सॉफ किया और गालो पर हल्की सी चपत लगा कर मुकुराने लगी

" बड़ी छुपि रुस्तम निकली तू तो ..ऐसे रोएगी तो तेरा ये महेंगा मेक - अप धूल जाएगा ..फिर बाहर लड़को पर बिजली कैसे गिराएगी ..बोल ? "

निम्मी शर्मा कर नीचे देखने लगी ..कभी कभी ग़लतफहमियो के मिटने के बाद बहुत कुछ ऐसा हो जाता है जिसकी आप कतयि उम्मीद नही कर पाते

" छोड़ ये सब ..मैं आज डॅड से बात करूँगी ..शायद उनकी फर्म मे तुझे जॉब मिल जाए ..हमारा फॅमिली बिज़्नेस तो तुझे पता ही है "

निम्मी ने उसकी हेल्प करने का मन बनाया और बेड से उठने लगी ..शिवानी ने भी इस बार उसे नही रोका ..लेकिन निम्मी के मूँह से उसके डॅड का नाम सुन कर वो सकते मे ज़रूर आ गयी

" रहने दे मैं खुद ट्राइ कर लूँगी ..खेर ये बता जब तू इतनी रोट्लु है तो अब तक शेरनी बनी क्यों घूमती रही "

शिवानी की बात सुन कर निम्मी ने अपने दाँत बाहर निकाल दिए ..वो अब काफ़ी नॉर्मल थी

" अपने जिस्म पर गुमान करना सीख ले ..प्यार - व्यार सब फालतू की बातें हैं मैं जान गयी हूँ ..अरे लड़की चाहे तो बाहरवालो को तो छोड़ घरवालो तक की फाड़ सकती है "

जल्दबाज़ी मे निम्मी के मूँह से ग़लत बात निकल गयी ..शिवानी का मूँह भी हैरत से खुला रह गया

" म ..मेरा मतलब है ..घर मे काम करने वाले नौकर ..ड्राइवर माली वगेरा वगेरा ..चल अब मैं चलती हूँ ..कल सुबह मिलने आउन्गि "

निम्मी अपने घबराए चेहरे को छुपा कर तेज़ी से दौड़ती हुई रूम से बाहर निकल गयी

" घरवाले !!!!! "

जाने क्यों शिवानी के चेहरे पर एक शैतानी भरी मुस्कान तैर गयी

" अशोक तू सद - सड़ कर मरेगा "

रूम का गेट लॉक कर शिवानी कमरे के अंदर चली गयी

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हॉस्टिल से बाहर आने पर निम्मी ने चैन की साँस ली

" गॉड ..अच्छा हुआ ये मेरे घरवालो को नही जानती वरना आज तो गजब हो जाता "

निम्मी अक्टिवा स्टार्ट करने लगी ..आज उसने जो भी बातें शिवानी से शेर की थी इसका मतलब तो यही था कि वो जान कर मर्दो को परेशान करती है

" वैसे मैने कुछ ग़लत भी तो नही कहा ..उस दिन डॅड मेरी पुसी लिक्क कर रहे थे ..यहाँ तक की आस होल भी नही छोड़ा ..अगर मैं खुद पर कंट्रोल नही करती तो ..फक !!!!! "

सोचते ही निम्मी को करेंट लगा ..उसके गालो पर लाली छा गयी

" पॅंट के अंदर कितना बड़ा हो गया था डॅड का "

निम्मी की गाड़ी बहेक ने लगी ..रह - रह कर बीता पूरा सीन उसकी आँखों के सामने घूमने लगा

" क्या सच मे डॅड उस दिन मेरे साथ सेक्स कर लेते ..जबकि मैं तो उनकी सग़ी बेटी हूँ "

निम्मी ने खुद से ऐसा सवाल किया जिसका जवाब उसे पता था

" हां - हां कर लेते ..क्यों कि बेटी होने से पहले मैं एक लड़की हूँ ..उन्होने खुद कहा था "

दाँत निकालते हुए वो घर की पार्किंग मे पहुच गयी

" एक और बार ट्राइ करती हूँ ..काफ़ी दिन हो गये मज़े किए "
 
अक्टिवा स्टॅंड पर लगा कर वो घर के अंदर पहुचि तो मोम - डॅड कही बाहर जाने के लिए तैयार खड़े मिले

" ओह ओ !!!!! घूमना हो रहा है "

अपने नॉटी अंदाज़ मे उसने पूछा

" चुप कर पागल ..एक फंक्षन मे जा रहे हैं "

कम्मो ने जवाब देते हुए उसके गाल मसल दिए

" डॅड मैं भी चलु "

हलाकी उसे कहीं नही जाना था फिर भी अड़ंगा देने की गर्ज से उसने पूछा ..दीप कयि दिनो बाद कामो के साथ बाहर जा रहा था ..दोनो बाप बेटी भी काफ़ी अरसे बाद आमने सामने आए थे ..या यूँ कहें उस के दिन उनकी पहली मुलाक़ात थी

दीप ने एक नज़र अपनी छोटी बेटी को देखा और फिर मूँह फेर कर घर से बाहर निकल गया ..निम्मी शॉक्ड रह गयी ..कहाँ अपने सभी बच्चो मे दीप का सबसे ज़्यादा लगाव निम्मी से था और आज कितनी बुरी तरह से उसने उसे नेग्लेक्ट कर दिया

" हुहह !!!!! "

पाव पटकती हुई निम्मी अपने रूम की तरफ चल दी ..कम्मो ने उसे पुकारा ..लेकिन ना तो उसने एक नज़र पलट कर अपनी मा को देखा और ना ही रुकी

" भड़ाआअक्कक !!!!! "

इस ज़ोरदार आवाज़ के साथ उसके कमरे का गेट बंद हो गया

" ये लड़की कभी नही सुधरेगी "

खुद से बातें करती हुई कम्मो भी घर से बाहर निकल गयी .....

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क्रमशः..........................
 
Kuch anchhuye ehsaas jinse aaj tak Nikki ka paala nahi pada tha ..Mard ke naam par usne sirf apne bhaiyon aur dad Deep ko jaana ..Jisme Nikunj to uske liye sab se badh kar hai aur isi wajah se ab feelings bhi badalne lagi thi

Nikki ne apna chehra oopar utha kar Nikunj ke face ko dekha ..Bhai ke haatho ki ungliyon ka pyar bhara sparsh apne reshmi baalon par mehsoos kar wo khush ho gayi ..lekin in sab ke beech Nikunj behad shant tha ..Bas uski ankhon ki putliyaan apni behen ke masoom chehre me khoyi thi ..Wahi chehra jo abhi kuch der pehle kaam se bhara tha

" Bhai mujhe maaf kar doge na ..Chhod ke to nahi jaaoge "

Nikki ne use neend se jagate huye poochha

" Nikki ye toone theek nahi kiya ..Beta ye sirf aur sirf paap hai "

Nikunj ne uske sawaal se hat kar jawaab diya ..Wo bilkul khush nahi tha

" Bhai mujhe nahi pata kaisa paap ..Bas itna janti hoon agar aap ne maafi nahi di ..To main khud ko mita loongi ..Mujhe kisi aur se koi matlab nahi "

Nikki ne vidroh karne jaisi baat kahi

" Main tera pyar nahi ..Bhai hoon ..Mat kar aisi baatein "

Nikunj ne use samjhaya

" Bhai ho to kya hua ..Kya aaj se pehle aap ne kabhi mujhse pyar nahi kiya ..Bas wahi pyar to main dobaara paana chaahti hoon "

Nikki katayi maanne ko taiyaar nahi thi ki jo ho raha hai wo sage bhai - behen ke beech nahi hona chaahiye ..Use to bas itna pata tha ki purani zindagi se abhi ki zindagi jyada achhi hai ..Shayad ye kaamdev ke kaam baan ka achook aaghaat tha ..Sexual needs ..Tadap ..Sedution ko aaj pehli baar jaana tha usne ..Mehsoos kiya tha ki behen hone se pehle wo ek ladki hai

" Chal mom aayen usse pehle hume kamre me wapas chale jaana chaahiye ..Mujhe office ke kaam se thoda baahar bhi jaana hai "

Nikunj use pot se uthate huye bola ..Ek mature man hone ke naate wo jaan gaya abhi Nikki ko samjhana uske bas se baahar hoga ..Jalbaazi me uthaya har kadam galat hota hai ..WaQt lagega ..Khumaari khatam hote hi Nikki bhi hosh me aa jaayegi

" To bhai mujhe maaf kiya na aap ne "

Nikki uski majboot baazuo ko thaam kar khadi ho gayi

" Main tujhse naraaz hua hi kab tha ..Tu to mujhe sab se pyari hai "

Nikunj ne kaha aur dono bath - room se baahar room me aa gaye

" Tu relax kar main dressing box le kar aata hoon "

Nikki ko bed par lita kar Nikunj hall se box le aaya ..Uski care se Nikki aur bhi jyada impress hone lagi

Nikunj ne pehle to lotion se poora wound clean kiya ..Fir chot ko patti se warp karne laga ..Halka dard mehsoos hote hi Nikki ne apni doosri taang mod li

" Ohhhhhhh Bhai !!!!! Thoda araam se "

Taang mudte hi Nikki ki ankhen band ho gayi ..Halaaki aisa usne jaan kar nahi kiya tha but frok length choti hone se uski choot ek baar fir se Nikunj ki ankhon ke saamne expose ho gayi

Turant Nikunj ne uska chehra dekha ..Use shaQ hua Kahin ye uski behen ne jaan - booch kar to nahi kiya ..lekin Nikki ka face expression pain se bhara dekhte hi wo galat saabit ho gaya

" Bas 2 minute aur "

Nikunj ne patti ki knot kasne ke baad apna haath uski frok ki taraf badhaya ..Choot dhaakne ki garaz se jaise hi uski ungliyaan frok ko neeche kheech paati ..Nikki ne apni taango ko wapas chipka liya aur isse Nikunj ka haath uski taango ki jad me fasa reh gaya

" Hichhhhhhhh !!!!! "

Nikki uchhal padi ..Hichki aane se use thaska laga aur zoro khaasne lagi ..Apni ankhen khol kar dekha to dang reh gayi ..Uske bhai ka haath seedha uski choot se chipka tha

" Achha !!!!! Starting khud karte ho aur baad me dosh mujhe dete ho ..Ab galti kis ki hai ..Batana zara ? "

Nikki ke sawaal se ghabra kar Nikunj ne apna haath choot se hataana chaha lekin theek isi pal Nikki ne uski kalaayi thaam li

" Ye saboot hai ..Ab mujhe blame mat karna ..Aisa ho gaya ..Waisa ho gaya "

Nikki muskuraane lagi ..Uske liye to jaise ye sab ek open game ho gaya tha ..Jo aksar shareefo ke ghar band kamro me khela jaata hai ..Yahan umar ka koi dosh nahi ..Na hi wo koi bachhi thi ..Bas jo ehsaas usne aaj paaye the wo dobaara sirf ek premi dwara hi mil sakte hain ..Na ki sage bhai se aur yahi soch kar usne apne dimaag se relation ko door kar diya ..Sex nahi use pyar chaahiye, jo Nikunj ne pehle bhi use bharpoor kiya tha lekin ab Nikki ke nazariye se haalaat badal gaye the

" Sorry !!!!! Wo ..Wo...... "

Nikunj ne taQaat laga kar apna haath peeche kheecha aur turant bed se neeche utar kar room se baahar jaane laga

" You naughty ..I love you "

Nikki ke shabd sun kar Nikunj ek akhiri baar uski taraf palta ..Abhi bhi wo sar jhukaaye Bade pyar se apni kunwaari yoni ko dekh rahi thi

" Sab galat ho raha hai "

Dheeme swar me Nikunj itna hi keh paaya aur tezi se room ke baahar nikal gaya

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Academy se nikal kar Nimmi ghar lautne lagi ..Uske dimmag me ek bahut badi baat chal rahi thi ..Shayad us baat ne use behed pareshaan bhi kar rakha tha

" Aaj kaafi imp. Day tha ..Final practical ..Sab aaye lekin Shivani kyon nahi aayi ? "

Yahi sochte huye wo apne ghar se aadhi doori tak aa chuki thi

" Call karti hoon ..Baat choti nahi ..Koi apne future se kaise khel sakta hai ..Waise Shivani padhne me to bahut intelligent hai ..Fir aisi bewakoofi "

Activa rok kar Nimmi ne Shivani ko call kiya .. 3 - 4 baar full ring jaane par jab usne call pick nahi kiya to Nimmi ne Activa uske hostel ki taraf mod li

Hostel ke counter par apni details dene ke baad wo seedhi Shivani ke room ki taraf badh gayi ..Haalaki is hostel me uski academy ki bahut si girls rehti hain par Nimmi ka aaj pehli baar yahan aana hua tha

Room door knock kar wo uske open hone ka intzaar karne lagi ..Kaafi time baad Shivani ne gate khola

Nimmi ke dekha wo gehri neend se just uth kar aayi thi

" Tu yahan ? "

Shivani shocked ho kar boli ..Kaise believe karti aaj uski sabse badi dushman uske room ke baahar khadi thi

" Andar aa jaau ? "

Nimmi ne simile dete huye kaha ..Use bhi bada achambha ho raha tha ..Jaane kya soch kar wo hostel chali aayi thi

" Nahi bulaaungi to nahi aayegi kya ? "

Ek vyang chhodte huye Shivani palat kar kamre ke andar chali gayi ..Uske peechhe Nimmi ke kadam bhi andar enter ho gaye

" Aa baith ..Waise yahan A/C ki thandak nahi hai ..Maaf karna gareeb hoon na "

Ek aur tont kaste huye Shivani ne kaha

" Chhod theek hai ..Main sirf itna jaan ne aayi thi ..Tu aaj institute kyon nahi aayi ? "

Nimmi ne direct apne Question par concentrate kiya ..Yun jhagdna to dono ki rozmarra ki aadat thi

" Tujhe isme bhi dikkat hai ..Kher main padhayi aage continue nahi karna chaahti ..Wapas ghar chali jaaungi "

Itna keh kar Shivani ko beeti raat yaad aane lagi ..Jaisa baap ..Beti bhi to theek usi ke padchhinho par chal rahi hai ..Majboor ki Majboori ka faayad uthana

" Ye kaisa mazaak hai ..I mean baaki sab ek taraf ..Yaar tera poora future spoil ho jaayega "

Nimmi ko Shivani ke wapas jaane ki wajah thodi - thodi pata chalne lagi thi ..lekin saari baat wo uske moonh se sunna chaahti thi ..Jaanti thi ek tarah se iski jimmedaar wo khud bhi hai

" Tune baaki kuch chhoda hai mere liye ..Yahan pyar ke haatho haari ..Ab pata nahi gharwalo ko kya javaab doongi "

Bolte waQt Shivani ka gala bhar aaya ..lekin kal raat kiye apne faisle par adig rahi ..Kuch bhi ho jaaye par ansu nahi nikalne degi
 


" Tu samajhti kyon nahi ..Sab meri galti nahi hai ..Yaar maine bhi wahi kiya jo is teenage me sabke saath hota hai "

Nimmi ne apni baat jaari rakhi

" Ashok ko main bhula chuki hoon ..Please Nimmi wapas mujhe kamzor mat kar ..Main tere haath jodti hoon ..Mujhe akela chhod de "

Shivani bed se uth kar saamne bani khidki ki taraf chali gayi ..Baahar use main road ka nazara dikhayi de raha tha ..Raftaar ke saath chehre badalte jaate ..lekin un chehro me jo chehra use dekhna hamesha se pasand tha wo ab shayad hi use kabhi dikhaayi de paata

" Sun ..Let me explain ..Haan maanti hoon galti meri bhi hai ..lekin tu hi bata ..Jab ek ladka hazaar baar kisi ladki ko apne pyar ka izhaar karega ..Ghanto uski taareefo ke pul baandhega ..Har waQt bebasi ki daleelen ..Yaar fir main kaise peechhe hat jaati ..I mean life me 1st time itna jyada attraction jhela tha maine ..Maanti hoon jaan booch kar maine tujhe ignore kiya ..But tu samajh yaar ek ladki kab tak apni feelings chhupa kar rakh sakti hai "

Nimmi kaafi dino baad sach boli ..Ashok se mil kar hi usne jaana tha pyar kya hota hai ..Institute ke baahar aksar dono ghoomne jaate ..Parties ..Mauj masti ..Raat ke 3 - 3 baje tak phone par baatein karna ..Shayad yahi reason tha jo Nimmi ne Shivani ke sachhe pyar par kabhi dhyaan nahi diya aur fir baat yahan tak badh gayi ki dono me bet lagne lagi ..Kaun jeetega

Nimmi kaafi fashionable kapdo me Ashok se milne jaati ..Sundar dikhne ke liye usne har wo cheez ki jisse Shivani ka patta cut ho sake ..lekin din par din use mehsoos hone laga ki uska pyar sirf paiso aur uske badan par zinda hai

Baat karte waQt ashok ki nazren hamesha Nimmi ke boobs aur jaate waQt uski gaand par jami rehti ..Ghadi - ghadi uske komal badan ko chhoona .. Fir chaahe haath ho ..Gaal ho ya chhoochiyaan ..Ek din to hadd ho gayi ..Ashok ne use apne dost ke flat par bulaya aur kuch der tak pyaar bhare sapne dikhaane ke baad apna haath uski skirt ke andar daal diya

Nimmi iske liye bilkul taiyaar nahi thi ..Wo mana kar paati isse pehle hi Ashok ne panty ke oopar se uski kunwaari choot ko sehlaana shuru kar diya ..1st time kisi mard ka haath wahan tak pahucha tha ..Nimmi tootne lagi ..Khumaari me apna haath uske haath par dabaate huye zoron se aahen bharne lagi ..Usne taye kar liya ki wo ab nahi rukegi aur jaise hi dono ke honth jude ..Ashok ka phone bajne laga

" Fuck !!!! "

Tilmila kar usne no. dekha ..Jo usi dost ka tha jiske flat par dono abhi baithe the

" Do min jaan ..Main abhi aaya "

Itna keh kar Ashok ne apne khade lund ko jeans ke oopar se masla aur baat karne ke liye doosre kamre me chala gaya

Uske room se baahar jaate hi Nimmi ne apni skirt oopar utha kar ..Panty check ki jo front se kaafi geeli ho gayi thi

" Shitt !!!!! Mujhe susu aaya hai shayad "

Anjaan Nimmi ke kadam bath - room ki taraf badh gaye ..lekin doosre kamre ke saamne se guzarte waQt usne kuch aisi baatein sun li jisse wo turant hi flat chhod kar apne ghar wapas laut aayi

" Ab tujhe kya hua ? "

Khidki se laut kar ..Nimmi ko khwaab me dooba dekh Shivani ne poocha ..Use badi hairaaani huyi ..Nimmi ki Ankhon me geela pann aa gaya tha ..Hamesha doosro ko runaane waali aaj khud rone waali hai ..Shivani ko jhatka laga

" K ..Kuch nahi ..Chal aaj main tujhse promise karti hoon ..Ab kabhi nahi ladungi ..Balki ek achhi friend bann kar rahoongi "

Itna bol kar Nimmi wahan se jaane lagi ..lekin Shivani ne aage badh kar uska raasta rok liya

" Baith yahin ..Pehle ye bata tu ro kyon rahi hai ? "

Uska haath majbooti se pakad kar Shivani ne wapas use bed par bitha liya

" Koi baat nahi hai ..Mujhe jaane de "

Nimmi ne apne ansuo ko rokne ki bharkas khoshis ki lekin wo nahi maane ..Chalak kar uske gaalo ko bhigaana shuru kar diya

" Koi to baat hai ..Mujhse mat chhupa ..Jab itne bade - bade ehsaan kiye hain ..To ek aur kar de "

Anayaas hi Shivani ne uska left gaal ponch diya ..Wo hairat bhari nigaahon se Nimmi ka chehra dekh rahi thi

" Ashok mere saath sirf sex karna chaahta tha Shivani ..Isi liye main humaare love triangle se alag ho gayi ..Chaahti to tujhe bata deti ..Par shayad tera dil is baat ko nahi maanta ..Tujhe lagta meri koi nayi chaal hai "

Subakte huye Nimmi ne kaha ..Shivani ko ek aur jhatka de kar wo tezi se rone lagi

" Ro mat ..Kya tere saath bhi usne jabardasti ki ? "

Shivani ne uska chehra thaam kar kaha

" Hmmmmm !!!!! "

Haan me apna sar hila kar Nimmi control nahi kar paayi aur Shivani ke gale se chipak gayi ..Bade dino baad wo royi thi ..Chaahti thi aaj use samhaalne waala use samjhe ..Wo aisi nahi jaisi dikhti hai ..Sirf khaal odh lene se koi sher nahi bann jata ..Androoni rooh hi insaan ki sachhayi ka parichaye karwaati hai

" Jaanti thi ..Mere saath bhi usne yahi kiya tha ..lekin dard mujhse saha nahi gaya aur maine aage kuch bhi karne se mana kar diya ..Shayad ye wajah bhi ho sakti hai jo usne tujhe apne jaal me fasaya hoga "

Shivani ne apni baat poori ki ..Is waQt use bilkul rona nahi aaya ..Balki uska chehra kaafi serious ho gaya tha

" Sun tu ghar ja ..Ab main wapas nahi jaungi ..Yahin reh kar job karoongi but institute se kuch aisi yaadein judi hai ..Jo main wapas wahan nahi jaana chaahti "

Shivani ne use khud se alag karte huye kaha ..Nimmi ka poora chehra uske ansoon se tar tha ..Apna dhupatta utaar kar Shivani ne uska face saaf kiya aur gaalo par halki si chapat laga kar mukuraane lagi

" Badi chhupi rustam nikli tu to ..Aise royegi to tera ye mehenga make - up dhul jaayega ..Fir baahar ladko par bijli kaise giraayegi ..Bol ? "

Nimmi sharma kar neeche dekhne lagi ..Kabhi kabhi galatfehmiyoon ke mitne ke baad bahut kuch aisa ho jaata hai jiski aap katayi ummeed nahi kar paate

" Chhod ye sab ..Main aaj dad se baat karoongi ..Shayad unke firm me tujhe job mil jaaye ..Humaara family business to tujhe pata hi hai "

Nimmi ne uski help karne ka mann banaya aur bed se uthne lagi ..Shivani ne bhi is baar use nahi roka ..lekin Nimmi ke moonh se uske dad ka naam sun kar wo sakte me zaroor aa gayi

" Rehne de main khud try kar loongi ..Kher ye bata jab tu itni rotlu hai to ab tak sherni bani kyon ghoomti rahi "

Shivani ki baat sun kar Nimmi ne apne daant baahar nikaal diye ..Wo ab kaafi normal thi

" Apne jism par gumaan karna seekh le ..Pyar - vyar sab faaltu ki baatein hain main jaan gayi hoon ..Are ladki chaahe to baharwaalo ko to chhod gharwaalo tak ki faad sakti hai "

Jaldbaazi me Nimmi ke moonh se galat baat nikal gayi ..Shivani ka moonh bhi hairhat se khula reh gaya

" M ..Mera matlab hai ..ghar me kaam karne waale naukar ..Driver maali wagera wagera ..Chal ab main chalti hoon ..Kal subah milne aaungi "

Nimmi apne ghabraaye chehre ko chhupa kar tezi se daudti huyi room se baahar nikal gayi

" Garwaale !!!!! "

Jaane kyon Shivani ke chehre par ek shaitaani bhari muskaan tair gayi

" Ashok tu sad - sad kar marega "

Room ka gate lock kar Shivani kamre ke andar chali gayi

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Hostel se baahar aane par Nimmi ne chain ki saans li

" God ..Achha hua ye mere gharwaalo ko nahi jaanti warna aaj to gajab ho jaata "

Nimmi activa start karne lagi ..Aaj usne jo bhi baatein Shivani se share ki thi iska matlab to yahi tha ki wo jaan kar mardo ko pareshaan karti hai

" Waise maine kuch galat bhi to nahi kaha ..Us din dad meri pussy lick kar rahe the ..Yahan tak ki ass hole bhi nahi chhoda ..Agar main khud par control nahi karti to ..Fuck !!!!! "

Sochte hi Nimmi ko current laga ..Uske gaalo par laali chha gayi

" Pant ke andar kitna bada ho gaya tha dad ka "

Nimmi ki gaadi behek ne lagi ..Reh - reh kar beeta poora scene uski ankhon ke saamne ghoome laga

" Kya sach me dad us din mere saath sex kar lete ..Jabki main to unki sagi beti hoon "

Nimmi ne khud se aisa sawaal kiya jiska jawaab use pata tha

" Haan - haan kar lete ..Kyon ki beti hone se pehle main ek ladki hoon ..Unhone khud kaha tha "

Daant nikaalte huye wo ghar ki parking me pahuch gayi

" Ek aur baar try karti hoon ..Kaafi din ho gaye maze kiye "

Activa stand par laga kar wo ghar ke andar pahuchi to mom - Dad kahi baahar jaane ke liye taiyaar khade mile

" Oh o !!!!! Ghoomna ho raha hai "

Apne naughty andaaz me usne poocha

" Chhup kar pagal ..Ek function me ja rahe hain "

Kammo ne jawaab dete huye uske gaal masal diye

" Dad main bhi chalu "

Halaaki use kahin nahi jaana tha fir bhi adanga dene ki garaz se usne poochha ..Deep kayi dino baad kaamo ke saath baahar ja raha tha ..Dono baap beti bhi kaafi arse baad aamne saamne aaye the ..Ya yun kahen us ke din unki pehli mulaaQat thi

Deep ne ek nazar apni choti beti ko dekha aur fir moonh fer kar ghar se baahar nikal gaya ..Nimmi shocked reh gayi ..Kahan apne sabhi bachho me Deep ka sabse jyada lagaav Nimmi se tha aur aaj kitni buri tarah se usne use neglect kar diya

" Huhhhhhhhh !!!!! "

Paav patakti huyi Nimmi apne room ki taraf chal di ..Kammo ne use pukaara ..lekin na to usne ek nazar palat kar apni maa ko dekha aur na hi ruki

" Bhadaaaaakkk !!!!! "

Is zordaar awaaz ke saath uske kamre ka gate band ho gaya

" Ye ladki kabhi nahi sudharegi "

Khud se baatein karti huyi kammo bhi ghar se baahar nikal gayi .....

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क्या बात है दोस्तो कोई प्रतिक्रिया नही आ रही है आपकी तरफ से अगर ये कहानी अच्छी नही लग रही है तो इसको बंद कर के दूसरी कहानी शुरू की जाय
 
Dost aapki kahaani bahut achhi chal rahi hai . maaf karna main aapki kahaani par tippani nahi kar pata .

vajah ye hai ki main kuch jyada hi vyast rahta hun . aap kahaani ko badhaate rahe . agar aap dekhe to aapki kahaani ke 7000 view ho chuke hain jo ab tak RSS par kisi kahaani ko nahi mile .
 
पापी परिवार--31

" सुनो बहू से मिलने जा रहे हैं ..कुछ साथ ले कर जाना चाहिए ..अगर रिश्ता तय हो गया तो मूँह दिखाई भी तो देनी पड़ेगी "

कार मे बैठे ही कम्मो ने कहा ..दीप ने बिना कुछ कहे गियर डाला और दोनो मेन रोड पर निकल आए

" कहाँ आप निम्मी की बात पर नाराज़ हो गये ..बच्ची है ..देखना एक बार बहू घर मे आ जाएगी फिर सब सम्हल जाएगा ..वैसे भी तनवी विदेश रही है ..इस हिसाब से तो दोनो की बहुत पटरी खाएगी "

कम्मो ने दीप की नाराज़गी दूर करने की कोशिश की ..लेकिन अब भी वो शांत बैठा कुछ सोच रहा था ..काफ़ी देर बाद उसने अपना मूँह खोला

" क्या ले कर जाना चाहिए ..कोई कपड़े या ज्यूयलरी ? "

आख़िर - कार दीप ने कार को एक शॉपिंग माल की पार्किंग मे रोक कर कहा

" मेरे ख़याल से तो एक अंगूठी ले लेते हैं और उसके साथ साड़ी भी ठीक रहेगी "

कम्मो ने अपनी पसंद ज़ाहिर की

" यही सोच कर मैं सोनी की दुकान पर आया हूँ ..साड़ी भी माल मे मिल जाएगी "

कार से उतर का दोनो माल लिफ्ट मे एंटर हो गये और कुछ ही पलो मे वो ज्यूयेलर सोनी की शॉप के सामने थे

" और सोनी जी कैसे हो ? "

शॉप के अंदर आते ही डीप ने अपने मित्रा का हाल - चाल पूछा

" अरे दीप बाबू ..आहो भाग्य हमारे ..आइए भाभी जी ..अंदर आइए "

सोनी काउंटर से बाहर निकल आया ..दीप से गले मिलने के बाद उसने कम्मो को भी स्वागत किया

" कैसे हैं भाई साब ? "

कम्मो ने जवाब मे कहा

" मैं तो एक दम ठीक हूँ ..आप लोगो को याद करते हुए वक़्त काट रहा है ..लेकिन दीप बाबू तो जैसे अपने मित्र को भूल ही गये ..आज कल इनके दर्शन बेहद दुर्लभ हो गये हैं "

सोनी ने दोनो मिया - बीवी को सोफे पर बिठाया और उनके चाइ नाश्ते का इंतज़ाम करवाने लगा

" कुछ नही सोनी जी ..मैं बिज़्नेस मे बिज़ी हूँ और मेडम घर सँभालने मे ..याद तो मुझे सब है लेकिन इधर कम ही आना हो पता है "

दीप ने झूठी स्माइल दे कर कहा ..इस वक़्त कुछ भी तो उसके मन मुताबिक़ नही हो रहा था

" तो बताइए आज कैसे आना हुआ और भाभी जी आप को कर्धनि पसंद आई कि नही ? "

इधर - उधर की बातों से निपट कर सोनी सीधा मुद्दे पर आ गया

" कर्ध्नी ? "

एक साथ दोनो चौंक पड़े ..दीप कम्मो के चेहरे को देखने लगा और कम्मो दीप के

" हां बेटा निकुंज आया था 3 - 4 दिन पहले ..होने वाली बहू भी साथ थी ..जाते वक़्त आप के लिए एक कर्ध्नी पॅक करवाई ..लेकिन मुझे लगता है अब तक गिफ्ट दिया नही उसने "

सोनी को भी आश्चर्य हुआ ..बात 3 - 4 दिन पुरानी हो चली थी ..फिर भाभी क्यों गिफ्ट से अंजान हैं ..लेकिन यहाँ उसने ये बात छुपा ली कि निकुंज ने बहू के लिए भी सेम आइटम लिया था

" अच्छा !!!!! चलो कोई बात नही ..मा - बेटे के बीच का प्यार है ..हो सकता है सर्प्राइज़ कुछ दिन रुक कर देना चाहता हो "

दीप ने बीच मे आ कर बात काट दी ..उसे एक शरम सी महसूस हुई ..तनवी के साथ उसके बेटे की इतनी हिम्मत ..कि उनके फॅमिली ज्यूयेलर के पास चला आया ..वहीं सबसे ज़्यादा हैरत मे पड़ी कम्मो ..शॉप पर बैठे होने के बाद भी उसके दिमाग़ मे सिर्फ़ निकुंज ही घूम रहा था

" धात तेरे की ..मैं भी कितना मूरख हूँ ..सर्प्राइज़ गिफ्ट का पूरा मज़ा किरकिरा कर दिया ..खेर एक बात ज़रूर कहूँगा ..निकुंज जैसा बेटा पा कर आप धन्य हो गये दीप बाबू ..पता है भाभी जी क्या कह रहा था वो ...... "

सोनी बोलते - बोलते रुक गया ..कम्मो अधीर हो उठी ..क्यों कि सोनी का संबोधन उसके लिए था

" क्या कह रहा था ? "

हल्की मुस्कुराहट के साथ कम्मो ने पूछा

" कह रहा था ..जब से जॉब स्टार्ट की है आज तक घर के लिए कुछ नही किया ..तभी तो उसने ख़ास आप के लिए कर्ध्नी गिफ्ट करवाई ..ईश्वर ऐसी काबिल औलाद सब को दे "

सोनी ठहरा व्यापारी ..उसे तो हर ग्राहक को मक्खन लगाना था ..दोस्ती ..रिश्तेदारी अपनी जगह और दुकानदारी अपनी जगह

कम्मो की छाती गर्व से फूल गयी ..निकुंज उसे कितना प्यार करता है सोच - सोच कर वो दोहरी होती जा रही थी ..उसने बीते शक़ के लिए खुद को धिक्कारा और अपने बेटे के लिए उसके दिल मे असीम प्रेम उमड़ पड़ा ..हादसा मानते हुए लगे हाथों उसने निकुंज को माफी भी दे दी

दीप को ना तो सोनी की बातों मे इंटेरेस्ट आ रहा था ना ही कम्मो के खुश होने मे ..फिर भी नॉर्मल मुस्कान के साथ उसे सोनी का शुक्रिया अदा करना पड़ा

" चलिए ये तो तय है कि आप आज बहू के लिए गहने खरीदने आए हैं ..तो बताइए शुरूवात कहाँ से की जाए ? "

सोनी सोफे से उठ कर काउंटर के अंदर चला गया ..जैसे ही उसने दराज़ मे अपना हाथ डाला ..दीप की आवाज़ सुन कर रुक गया

" नही आज पूरी शॉपिंग नही करनी ..बस बहू से मिलने जा रहे थे ..इनका विचार हुआ साथ मे अंगूठी या साड़ी ले जाना ठीक रहेगा ..इसलिए आ गये "

पहली बार दीप के मूँह से तनवी के लिए बहू शब्द निकला ..या यूँ कह लीजिए अब वो भी मान गया था कि तनवी को उसके घर मे आने से कोई नही रोक सकता

" छोटू !!!!! वो मिश्रा जी की शॉप पर चला जा और कहना 330 नंबर. के 4 - 5 बढ़िया पीस निकाल दें "

सोनी ने दुकान के नौकर को समझाया और दूसरी दराज़ मे हाथ डाल ..अंगूठियों का बॉक्स निकाल कर काउंटर - टेबल पर रख दिया

" आइए भाभी जी ..पसंद कर लीजिए ..और आप के मन मुताबिक़ 4 - 5 महनगी साड़ी भी यहीं मंगवा दी हैं "

सोनी के कहने पर कम्मो सोफे से उठ कर काउंटर - चेर पर बैठ गयी ..क़ायदे से तो दीप को भी उसके साथ आना चाहिए था ..लेकिन वो किसी सपने मे डूबा वहीं बैठा रहा

" लगता है दीप बाबू थोड़े परेशान हैं "
 
दीप की मनोदशा सोनी एक पल मे ताड़ गया ..हलाकी उसकी बात सिर्फ़ कम्मो के कानो मे पड़ी ..लेकिन उसने कुछ ना कहते हुए जल्दी - जल्दी अंगूठियों को देखना शुरू कर दिया ..जानती थी दीप का मूड तो घर से निकलने के पहले ही खराब हो गया था और तब तक नौकर भी साड़ी का बंच ले कर वापस लौट आया

ब्लू साड़ी पसंद करने के बाद कम्मो ने रिंग भी लगभग सेम मॅचिंग की चूज़ कर ली

" देखिए ये कैसी रहेगी ? "

दीप की तंद्रा तोड़ते हुए उसने दोनो आइटम उसे दिखाए और फिर ज़्यादा ना रुकते हुए दोनो शॉप के बाहर निकलने लगे

" आते रहिएगा "

सोनी ने स - सम्मान उन्हे विदा किया और पति - पत्नी माल से वापस मेन रोड पर आ गये

" फोन कर दो भाई साब को ..एक दम से किसी के घर जाना ठीक नही लगता "

कम्मो के कहने पर दीप ने जीत को कॉल किया और 20 मिनट. से बंगले पर पहुचने की सूचना दे दी

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वहीं जीत के घर हालात आज भी सेम थे ..किचन मे खड़ी तनवी शाम की कॉफी बना रही थी और हॉल के सोफे पर बैठा जीत ईव्निंग कॉफी का इंतज़ार कर रहा था

फोन पर बात होने के बाद जीत फॉरन हरक़त मे आया और दौड़ कर किचन मे पहुच गया

" डॅड आप को बिल्कुल भी सबर नही ..फिर आ गये ..अभी तो इसे बिठाया था "

दोनो बिल्कुल नंगे थे ..तनवी ने उसके बैठे लंड पर अपने हाथ से चपत लगा कर कहा

" नही ..वो दीप का कॉल आया है ..20 मिनट. से घर आ जाएगा "

जीत ने उसे किचन के अंदर आने की वजह बताई

" तो क्या हुआ ..आज ससुर जी के साथ भी थोड़ी मस्ती कर लूँगी "

तनवी मुस्कुरा कर बोली ..जहाँ एक तरफ जीत थोड़ा घबराया सा था ..वहीं उसकी बेटी के चेहरे पर इस बात से शिकन तक नही आई

" मज़ाक छोड़ तनवी ..भाभी भी उसके साथ हैं ..शायद दोनो शादी की बात फाइनल करने आ रहे हैं "

तनवी का हाथ अपने लंड से अलग कर जीत कपड़े पहनने की गरज से बाहर जाने लगा और अगले ही पल तनवी ने उसे रोक लिया

" डॅड टेन्षन मत लो ..ये रिश्ता हो कर रहेगा ..फिर चाहे किसी को प्राब्लम हो या ना हो ..अभी वक़्त है उन्हे आने मे ..कॉफी पी कर रेडी हो जाएँगे "

बरनर ऑफ करते हुए तनवी ने दो कप कॉफी से भर लिए और जीत के साथ हॉल मे आ गयी

" डॅड क्या पहनु ..वेस्टर्न या ट्रडीशनल ? "

कॉफी की चुस्की ले कर तनवी ने पूछा ..उसे इस तरह रिलॅक्स देख जीत हैरानी से भर गया

" साड़ी पहेन ना तो तुझे आती नही ..जल्दी से कॉफी ख़तम कर और एक सिंपल सा सलवार कमीज़ पहेन ले "

अभी भी जीत के मुरझाए चेहरे पर तनवी को काफ़ी टेन्षन दिखाई दे रही थी ..उससे रहा नही गया और वो सोफे पर सरक्ति हुई बिल्कुल जीत से सॅट कर बैठ गयी

" डॅड एक बात कहूँ ..दीप अंकल मुझे अपने घर की बहू नही बनाना चाहते और बनाएँगे भी क्यों ..मेरा चरित्र जो उनके सामने आ गया है ..लेकिन मैं हार नही मान ने वाली ..मेरी पहचान जान ने से पहले तो उनका रोम - रोम तड़प रहा था मुझे पाने के लिए ..यहाँ तक कि उन्होने एक बाप से उसकी बेटी को सेक्स के लिए राज़ी करने को बोला दिया ..लेकिन जैसे ही उनकी आँखों ने मेरी तस्वीर देखी होगी ..उनका मन बदल गया ..डॅड अगर वो मुझे बहू के रूप मे स्वीकार करना चाहते होते तो अब तक आप को हां कर दिया होता ..इस तरह बात को नही टालते "

तनवी एक साँस मे अपनी बात कह कर चुप हो गयी ..फिर कॉफी का लोंग सीप ले कर उसने वापस बोलना शुरू किया

" डॅड मैने उनकी आँखों मे एक अलग किस्म का वहशिपन देखा ..जो अक्सर सेक्स के प्रति ज़्यादा रुझान रखने वालो मे पाया जाता है ..जाने क्यों मन नही मानता कि उनकी बेटियाँ अब तक कुँवारी बची होंगी या नही ..नज़रों का क्या है ..जब खराब हो जाएँ तो रीलेशन'स की कोई वॅल्यू नही रह जाती ..आप टेन्षन मत लो ..निकुंज मेरी मुट्ठी मे क़ैद है ..अगर चाहु तो दो मिनट. मे अंकल को भी अपने बस मे कर सकती हूँ ..लेकिन नही ..उन्होने मेरे साथ आपकी बचपन की दोस्ती पर भी उंगली उठाई है ..अगर तडपा - तडपा कर इसका बदला नही लिया तो मेरा नाम तनवी नही ..इल्ज़ाम देने से पहले इंसान को अपने गिरेबान मे झाँक कर देखना चाहिए कि आप खुद कितने पानी मे है "

इतना कह कर उसने खाली कप उठा लिए और किचन की तरफ जाने लगी

" बेटा इन सब बातों से तेरा हस्ता - खेलता फ्यूचर बर्बाद हो जाएगा ..ज़रूरी नही तेरी शादी उसी घर मे हो ..याद रख बदला हमेशा दो तरफ़ा वार करता है ..जिससे लिया जाए वो तो नष्ट होता ही है साथ ही लेने वाला भी उसकी चपेट से नही बच पाता ..एक बाप होने के नाते तो मैं यही सलाह दूँगा कि बीती बातें भूल जा और सब किस्मत पर छोड़ दे ..बदले की भावना रखने से केवल दुख हासिल होता है "

जीत बेड रूम की तरफ बढ़ते हुए बोला ..आज उसे अपनी बेटी का नया रूप देखने को मिला ..हमेशा खुश रहने वाली लड़की की आँखों मे उसने शोले उबलते देखे ..जाने आगे क्या होना है ..लेकिन उसके दिल से तो अपनी बेटी के सुखी जीवन के लिए दुआ ही निकली ..बाप है बद्दुआ तो दे नही सकता

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अगले 5 मिनट मे जीत रेडी हुआ और बेहद ढीला - ढाला सफेद कुर्ता पाजामा पहेन कर वापस हॉल मे लौट आया

" तैयार होज़ा तनवी वो लोग आते ही होंगे "

बेटी को सोच मे डूबा देख उसने उसे समझाया ..जाने क्यों अब उसकी चिंता ने डर का रूप ले लिया था

" डॅड एक लास्ट बात कहनी है ..दीप अंकल के सामने घबराना मत ..एक दम नॉर्मल रहना ..जैसे आप को कुछ मालूम ही ना हो ..बाकी सब मुझ पर छोड़ दो ..आज वो यहाँ से रिश्ता क़ुबूल कर के ही वापस जाएँगे "

तनवी ने सोफे से उठ कर कहा ..जीत के सामने पहुच कर उसके होंठो को चूमा और बेड - रूम की तरफ बढ़ गयी

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ठीक 10 मिनट बाद घर का मेन डोर नॉक हुआ ..जीत ने एक नज़र बेड रूम की तरफ देखा और सब कुछ सही जान कर गेट खोलने के लिए आगे बढ़ गया

" आओ आओ ..नमस्ते भाभी "

दीप से गले मिलने के बाद उसने कम्मो को भी ग्रीट किया और तीनो घर के अंदर आ गये

" इतने दिनो से कहाँ था भाई ..ना कोई खोज ..ना खबर "

फेस पर नॉर्मल एक्सप्रेशन लाते हुए जीत ने पूछा ..हलाकी अभी उसके दिल की धड़कने काफ़ी रफ़्तार से दौड़ रही थी ..लेकिन बेटी के रिश्ते के खातिर उसने खुद पर कंट्रोल बनाए रखा

" कुछ नही ..बस थोड़ा अफीशियल कामो मे बिज़ी था "

जवाब मे दीप ने उसे घूर कर देखा ..रिश्ते से ना - खुश आज उसे अपने बचपन का दोस्त भी दुश्मन बराबर लग रहा था

" भाभी आप को पहचान पाना बेहेद मुश्क़िल है "

जीत ने दीप की फीलिंग ताड़ कर अपना ध्यान कम्मो की तरफ मोड़ने की कोशिश की ..तनवी का कहा एक - एक शब्द सच साबित हुआ था

" कहाँ !!!!! वैसी ही तो हूँ ..हां बुढ़ापा ज़रूर आ गया है "

कम्मो ने स्माइल दे कर कहा ..आज 25 सालो बाद वो जीत को वापस देख रही थी ..ढूंडली यादों का पीछा करते हुए उसने बीते वक़्त से आज के जीत का मिलान किया ..जिसमे चेंजस ना के बराबर दिखाई दिए

" नही भाभी !!!!! मुझे लगता है आप क़ी जगह ये बूढ़ा होने लगा है "

जीत की बात पर तीनो हँसने लगे ..लेकिन यहाँ दीप की हसी बनावटी थी

" बहू कहाँ है ? "

कम्मो की नज़र ने पूरे घर का मुआएना किया ..सामने की दीवार पर उसकी आँखें जीत की मृत पत्नी ( रश्मि ) की तस्वीर पर आ कर रुक गयी और वो सोफे से उठ कर उस तस्वीर के नज़दीक जाने लगी

" रश्मि ..तनवी की मा "

जीत ने कम्मो को तस्वीर की तरफ जाते देख कहा

" इन्होने बताया था ..सुन कर बेहद दुख हुआ "

कुछ देर तस्वीर को निहार कर कम्मो ने तनवी का चेहरा इमॅजिन किया ..हलाकी दीप के सेल मे उसकी रीसेंट फोटो वो देख चुकी थी फिर भी खुद को तारीफ़ करने से नही रोक पाई

इसी बीच बेड - रूम का गेट खुला और पिंक सलवार कमीज़ पहेने तनवी हॉल मे आने लगी ..बेहद धीमी चाल ..सर पर दुपट्टा ..लाइट मेक - अप ..ज़रूरत के हिसाब की ज्यूयलरी ..कुल मिला कर पहली ही नज़र मे उसने कम्मो का दिल जीत लिया

ट्रडीशनल बिहेवियर दिखाते हुए जीत सोफे से उठ कर खड़ा गया ..कम्मो भी उनके करीब पहुच गयी

" प्रणाम अंकल जी "

पास आते ही तनवी ने दीप के पैर छुये ..बाकी लोगो की मौजूदगी मे उसे भी आशीर्वाद स्वरूप तनवी के बालो पर अपना हाथ फेरना पड़ा

इसके तुरंत बाद तनवी कम्मो के आगे झुकी ..लेकिन उसने तनवी को अपने सीने से चिपका लिया

" भाई साब बहू की ज़रूरत का समान पॅक करवा दीजिए ..हम इसे आज ही अपने साथ ले जाएँगे ..क्यों जी ठीक कहा ना मैने ? "

कम्मो ने तनवी का माथा चूम कर कहा ..अपने बेटे के लिए इतनी सुंदर और शुशील पत्नी पा कर उसकी खुशी का कोई ठिकाना नही था

" हां हां क्यों नही ..भाई जीत तेरी भाभी को इसी लिए यहाँ लाया था ..बड़ी ज़िद कर रखी थी ..बहू से मिलना है ..बहू से मिलना है ..अब जब होम मिनिस्टर ने तनवी को पसंद कर लिया है ..तो मेरी तरफ से भी हां हुई "

दीप सोफे से उठ कर जीत के गले मिला और अपने हाथ मे पकड़ा गिफ्ट पार्सल उसने कम्मो को थमा दिया

" ये लो बेटी हमारी तरफ से मूँह दिखाई ..अब घर के बड़े बुज़ुर्ग तो यहाँ हैं नही ..तो सब हमारा ही फ़र्ज़ बनता है "

कम्मो ने पॅकेट तनवी के हाथो मे दे कर कहा ..जीत की चिंता पूरी तरह से ख़तम हो गयी और उसकी आँखें रश्मि की तस्वीर को देखने लगी ..शायद पत्नी से किया वादा अब जल्द ही पूरा होने वाला था

" बेटी तनवी ..मूँह मीठा कर्वाओ सब का "

जीत के कहने पर तनवी सक्रिय हो गयी और कुछ ही पलो बाद वहाँ खुशी का जश्न मनाया जाने लगा

" यार कम से कम अपना घर तो दिखा दे "

खा - पी कर दीप ने जीत से कहा ..जीत ने फॉरन तनवी के चेहरे को देखा तो उसकी बेटी ने इशारे से उसे कुछ समझाया

" भाई अब तो अपनी बहू से ही अपनी सेवा करवा ..क्यों भाभी ? "

इशारा समझते ही जीत ने कम्मो से पूछा

" हां हां क्यों नही ..जाइए आप घर देखिए जब तक हम शादी की तैयारियों का सोचते हैं ..भाई साब जल्दी ही किसी अच्छे पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवाना चाहिए ..मुझसे तो बिल्कुल सबर नही होगा "

हॉल मे एक और ठहाका गूंजा लेकिन जब तक दीप तनवी के साथ घर देखने मे व्यस्त हो गया ..ये तो मात्र एक बहाना था ..दीप खुद चाहता था कि अकेले मे कुछ देर तनवी के साथ बातें कर सके

" वाउ !!!!! गार्डेन भी है ..इसे तो मैं ज़रूर देखूँगा "

हॉल मे वापस लौट कर दीप ने कहा ..अब एकांत मे जाने के लिए यही आख़िरी ऑप्षन बचा था

" तो देख ले ना ..तेरा ही तो घर है "

कम्मो के सामने जीत की अनुमति मिलते ही दोनो गार्डेन की तरफ चल पड़े ..किसी भी प्रकार के शक़ से बचने के लिए जीत और कम्मो की अनुमति लेना ज़रूरी था

" अंकल आप मुझे यहाँ क्यों लाए हैं ? "

गार्डेन मे पहुचते ही तनवी ने कहा ..टॉपिक स्टार्टिंग मे उसे यही क्वेस्चन करना उचित लगा

" इतनी भोली मत बन तनवी ..मैं तो कतयि तुझे बहू स्वीकार नही करूँगा ..बस अपनी बीवी और बेटे के कारण मुझे झुकना पड़ा वरना तू कभी मेरे घर की चौखट नही चढ़ पाती "

दीप ने अपने अंदर भरी भडास बाहर निकालते हुए कहा

" उस वक़्त कहाँ थी आप की बातें जब मुझसे अपना लंड चुस्वा रहे थे ..बड़ा प्यार आ रहा था उस टाइम तो ..याद हैं खुद के शब्द .. ' अब लंच कब कर्वाओगि ' "

तनवी ने भी ईट का जवाब पत्थर से दिया
 
दीप :- " उस वक़्त मुझे कहाँ पता था कि तुम जीत की बेटी हो "

तनवी :- " पता चल भी जाता तो भी मेरे साथ सेक्स करते ..अंकल ये जिस्मानी भूक है ..इसे जितना रोको उतनी ही बढ़ती है "

दीप :- " तुझे शायद मुझसे ज़्यादा पता है "

" ज़रूरी नही जानकारी होने से मैं रंडी बन गयी ..आज भी वर्जिन हूँ ..चाहें तो सामने बने स्टोर रूम मे चेक कर सकते हैं "

तनवी की इस जवाब से दीप निरुत्तर हो गया ..अपलक कुछ देर तक उसकी आँखों मे देखता रहा

" तनवी मैं बाहर की लाइफ कैसी भी जीता हूँ लेकिन मेरे घर मे ऐसा माहॉल नही ..मेरी दो बेटियाँ हैं ..निकुंज से छोटी ..बस डर इतना सा है ..कहीं...... "

इसके आगे दीप के शब्द नही निकले ..एक तरह से उसने अपना सच तनवी पर ज़ाहिर कर दिया

" फिकर ना करें ..कुछ ग़लत नही होगा ..घर मे जैसे सब रहते हैं मैं भी रहूंगी ..अब वापस चलिए हम काफ़ी देर से यहाँ हैं "

तनवी ने उसका हाथ अपने दोनो हाथो के बीच रखते हुए कहा ..जैसे उसे इस बात का विश्वास दिला रही हो

" देखता हूँ कब तक सब सही रहता है "

शंकित मन से दीप घर की तरफ लौटने लगा और वहीं तनवी के चेहरे पर विजयी मुस्कान तैर गयी ....
 
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