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Guest
गर्मी की मार्मिक पीड़ा को दूर करने के लिए उसके हाथो की उंगलियाँ, कमीज़ के निच्छले हिस्से को ऊपर उठाने की कोशिश करने लगी ..अब तो दीप भी सो चुका था
" बेशर्म है तू पक्की "
एक मुस्कुराहट के साथ अगले ही पल उसने कमीज़ को अपने बदन से अलग कर दिया ..पसीने से लत - पथ जिस्म को ठंडी हवा मिलने के बाद भी शिवानी को सुकून नही आया और ब्रा का हुक खोल कर उसने, उसे अपनी कंमीज़ के ऊपर गिरा दिया
शरम के मारे उसका चेहरा लाल था ..जानती थी, दीप गहरी नींद मे है, फिर भी उसे अपने अंदर लज्जा की अनुभूति हो रही थी
" शादी के बाद मेरी ज़िंदगी कैसी होगी, ये तो नही पता ..लेकिन इतना ज़रूर जान गयी हूँ, अंकल बदल गये हैं ..सिर्फ़ मेरे लिए "
वो सरक्ति हुई दीप के नज़दीक आ गयी ..उसके सोते चेहरे मे शिवानी को तनाव सॉफ दिखाई दे रहा था ..चौड़ा सीना बालों से भरा और चेस्ट से नीचे जाती हेर लाइन, जिसका एंड पॉइंट कहाँ होगा, ये सोच कर उसके मोती जैसे दाँत बाहर आ गये
" कुछ भी सोचती है ..ज़रूरी तो नही हर किसी को बाल काटना पसंद हो ..हां पॅंट के अंदर सब क्लीन है, मुझे पता है "
बोलने के तुरंत बाद उसने ..अपनी बात पर, अपने हाथ से, अपने सर पर हल्की सी चपत लगा दी ..दीप के प्रति उसका नज़रिया बदलने लगा था ..हालाकी ये सही नही, सामने लेटा मर्द उसका होने वाला सुसुर है ..साथ पढ़ने वाली दोस्त नामिता का पिता भी ..लेकिन ये बात अभी उसके दिमाग़ से कोसो दूर थी ..बस इतना पता था कि डीप ने उसके हरे ज़ख़्मो पर मलम लगाया है ..उसे अपने घर की बड़ी बहू बनाने से इज़्ज़त बक्शी है ..दो दिन पहले की गयी हवाणियत की माफी माँगी है
उसका खोया प्यार अब दीप है ..यहाँ उसे कोई धोखा भी नही मिलेगा ..पैसे वाले घर की मालकिन बनेगी ..नामिता की भाभी और सबसे ख़ास बात, बेचारे रघु को इस दोज़ख़् भरी ज़िंदगी से छुटकारा दिलाने मे मदद करेगी ..वो हॉस्पिटल से डिसचार्ज हो कर अपने घर आ जाएगा, पूरे परिवार की आँखों के सामने रहेगा ..फिर क्या दिक्कत है शादी करने मे ..रही बात नीड्स की, तो अब दीप के अलावा किसी गैर मर्द के बारे मे सोचना ..अपने नये प्यार को गाली देने जैसा होगा
" मैं तैयार हूँ जी "
इतना कह कर वो खुशी से झूमती हुई, अपने प्रेमी के चेहरे पर अपना चेहरा झुकाने लगी ..जैसे - जैसे उसका चेहरा नीचे होता जाता, उसके होंठ खुलते जाते
धड़कनें थामे शिवानी का ये पहला कदम था, खुद की मंज़ूरी ज़ाहिर करने का ..अगर आज भी होंठो से शराब की गंध आ रही होती तो भी वो नही रुकती, पीछे नही हट - ती
कुछ देर तक दीप के मूँह से निकलने वाली गरम सांसो को सूंघने के बाद शिवानी ने उन्हे और बाहर नही निकलने दिया ..खुली बॉटल पर ढक्कन लगाते हुए उसने अपने होंठ दीप के होंठो से चिपका दिए
अगले ही पल दोनो के बदन मे कयि झटके लगे ..जहाँ शिवानी ने मस्ती मे आ कर अपनी आँखें बंद कर ली वहीं दीप की पॅल्को मे ..आहट हुई, कंपन हुआ
बस इसके बाद शिवानी ने अपनी आँखें दोबारा नही खोली और बड़े प्यार से उंगलियाँ, दीप की चेस्ट पर उगे घने बालो मे घुमाती हुई नींद के आगोश मे चली गयी
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" बेशर्म है तू पक्की "
एक मुस्कुराहट के साथ अगले ही पल उसने कमीज़ को अपने बदन से अलग कर दिया ..पसीने से लत - पथ जिस्म को ठंडी हवा मिलने के बाद भी शिवानी को सुकून नही आया और ब्रा का हुक खोल कर उसने, उसे अपनी कंमीज़ के ऊपर गिरा दिया
शरम के मारे उसका चेहरा लाल था ..जानती थी, दीप गहरी नींद मे है, फिर भी उसे अपने अंदर लज्जा की अनुभूति हो रही थी
" शादी के बाद मेरी ज़िंदगी कैसी होगी, ये तो नही पता ..लेकिन इतना ज़रूर जान गयी हूँ, अंकल बदल गये हैं ..सिर्फ़ मेरे लिए "
वो सरक्ति हुई दीप के नज़दीक आ गयी ..उसके सोते चेहरे मे शिवानी को तनाव सॉफ दिखाई दे रहा था ..चौड़ा सीना बालों से भरा और चेस्ट से नीचे जाती हेर लाइन, जिसका एंड पॉइंट कहाँ होगा, ये सोच कर उसके मोती जैसे दाँत बाहर आ गये
" कुछ भी सोचती है ..ज़रूरी तो नही हर किसी को बाल काटना पसंद हो ..हां पॅंट के अंदर सब क्लीन है, मुझे पता है "
बोलने के तुरंत बाद उसने ..अपनी बात पर, अपने हाथ से, अपने सर पर हल्की सी चपत लगा दी ..दीप के प्रति उसका नज़रिया बदलने लगा था ..हालाकी ये सही नही, सामने लेटा मर्द उसका होने वाला सुसुर है ..साथ पढ़ने वाली दोस्त नामिता का पिता भी ..लेकिन ये बात अभी उसके दिमाग़ से कोसो दूर थी ..बस इतना पता था कि डीप ने उसके हरे ज़ख़्मो पर मलम लगाया है ..उसे अपने घर की बड़ी बहू बनाने से इज़्ज़त बक्शी है ..दो दिन पहले की गयी हवाणियत की माफी माँगी है
उसका खोया प्यार अब दीप है ..यहाँ उसे कोई धोखा भी नही मिलेगा ..पैसे वाले घर की मालकिन बनेगी ..नामिता की भाभी और सबसे ख़ास बात, बेचारे रघु को इस दोज़ख़् भरी ज़िंदगी से छुटकारा दिलाने मे मदद करेगी ..वो हॉस्पिटल से डिसचार्ज हो कर अपने घर आ जाएगा, पूरे परिवार की आँखों के सामने रहेगा ..फिर क्या दिक्कत है शादी करने मे ..रही बात नीड्स की, तो अब दीप के अलावा किसी गैर मर्द के बारे मे सोचना ..अपने नये प्यार को गाली देने जैसा होगा
" मैं तैयार हूँ जी "
इतना कह कर वो खुशी से झूमती हुई, अपने प्रेमी के चेहरे पर अपना चेहरा झुकाने लगी ..जैसे - जैसे उसका चेहरा नीचे होता जाता, उसके होंठ खुलते जाते
धड़कनें थामे शिवानी का ये पहला कदम था, खुद की मंज़ूरी ज़ाहिर करने का ..अगर आज भी होंठो से शराब की गंध आ रही होती तो भी वो नही रुकती, पीछे नही हट - ती
कुछ देर तक दीप के मूँह से निकलने वाली गरम सांसो को सूंघने के बाद शिवानी ने उन्हे और बाहर नही निकलने दिया ..खुली बॉटल पर ढक्कन लगाते हुए उसने अपने होंठ दीप के होंठो से चिपका दिए
अगले ही पल दोनो के बदन मे कयि झटके लगे ..जहाँ शिवानी ने मस्ती मे आ कर अपनी आँखें बंद कर ली वहीं दीप की पॅल्को मे ..आहट हुई, कंपन हुआ
बस इसके बाद शिवानी ने अपनी आँखें दोबारा नही खोली और बड़े प्यार से उंगलियाँ, दीप की चेस्ट पर उगे घने बालो मे घुमाती हुई नींद के आगोश मे चली गयी
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