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प्यार की दिवानगी

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प्यार की दिवानगी



कभी-कभी ज़िन्दगी में कुछ लोग अचानक ही मिलते हैं! वो, शायद कुछ दूर ही साथ चलते हैं, और फिर जुदा हो जाते है! लेकिन इस बीच उन लोगो के बीच में जो बातें, घटनाये होती है, शायद वो एक याद बन के ही रह जाती हैं! ऐसा ही एक किस्सा मेरे साथ हुआ।

मैं ऑफिस में अपना काम कर रहा था कि, मेरे मोबाइल पर एक कॉल आया, मैंने हेल्लो कहा, तो उस तरफ से एक महिला की बहुत ही मीठी आवाज ने मुझे, एक बार उससे बात करने पर मजबूर कर दिया, जानता था कि, वो एक रॉंग नंबर था तो, मैंने रॉंग नंबर कह कर फ़ोन रख दिया! लेकिन मेरे कानो में उस महिला की आवाज़ रह-रह कर सुनायी दे रही थी।

जब मुझसे रहा नहीं गया, तो मैंने उसे लैंडलाइन नंबर पर वापस फ़ोन किया, तो उसी महिला ने फ़ोन उठाया, मैंने उससे कहा कि, आपसे मेरी अभी कुछ मिनट्स पहले बात हुई ही थी! मैं कुछ कहना चाहता हूँ, उसने कहा बोलिये, मैंने बड़े ही विनम्रता से कहा कि, आप की आवाज़ बहुत मीठी है, फिर मैंने उसकी आवाज़ से उसके बारे में बताना शुरू किया, जो बिलकुल ठीक था! अब उस महिला का इंटरेस्ट और बढ़ने लगा कि, मैं उसके बारे यह सब कैसे जानता हूँ? उसने पूछा कि, अगर मैं उससे पहले, कहीं मिला हूँ? मैंने कहा "नहीं"।

मैं जान चूका था कि, वो महिला किसी ऑफिस में काम करती है, अब हम दोनों एक फोनर फ्रेंड्स की तरह बात करने लगे. उसने अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया थ, लेकिन मैं फ़ोन न करू, जब-तक वो ना कहे! क्यूंकि वो एक शादीशुदा 38 साल की 2 लड़कियों (12 साल और 16 साल) की माँ थी।

अभी तक हम दोनों ने एक दुसरे को फोटो में भी नहीं देखा था! तो, हमने मिलने का प्लान किया! अपने ऑफिस के ही पास उसने मुझे एक दिन कॉफ़ी पीने के लिये बुलाया! देखने में वो महिला सुन्दर थी, उसके शरीर की बनावट आकर्षित करने वाली थी, जो उसने कर दिया था! हम दोनों करीब 30 मिनट्स बैथे, और फिर वो अपने ऑफिस चली गयी, लेकिन मेरे दिल में एक छाप छोड़ गयी।

हम दोनों अब, धीरे-धीरे एक दुसरे के साथ, खुल रहे थे, मैं भी उसे बहुत पसंद था! बातो-बातो में पता लगा कि, उसका पति उस पर हमेशा शक करता है, मारता है, खूब दारु पीता है, कर्जे में डूबा हुआ है, कहीं काम करता है लेकिन घर में एक पैसा नहीं देता, इसलिए वो अपनी लड़कियों के लिए नौकरी कर रही थी। साथ ही एक ऐसे दोस्त की तलाश थी, जिसके साथ वो खुश रह सके! जो उसे मिल चुका था!

उसके मेरे बीच की दूरियां कम हॊने लगी, हम और ज्यादा बातें करने लगे. अब आलम यह था कि, एक दुसरे से मिले बिना नहीं रहा जा रहा था! मन में एक उमंग थी, मैं भी उसकी और खिच रहा था कि, एक दिन उसने कहा कि, वो मुझे अपने हस्बैंड से मिलवाना चाहती है, वो चाहती थी कि, एक बार मैं उसके घर, उसके हस्बैंड और बच्चों से मिल लूं तो मेरे आने जाने पर फिर कभी कोई शक नहीं करेगा! मैं तैयार हो गया! और एक दिन प्लान के मुताबिक वो अपना ऑफिस ख़त्म करके, मुझसे मिली, और अब हम दोनों उसके घर की और चल दिये! उसके घर में उसके हस्बैंड और उसकी.

दोनों बेटियों से मिला, उसने ये कहकर कि, मैं उसी के ऑफिस में काम करता हूँ, और आज किसी काम से उसी और जा रहा था, तो सोचा की उसे छोड़ दूं! मैं करीब 1 घंटे बैठा, उसके हस्बैंड और बच्चो से बातें की, उन्हें मुझसे बात करके बहुत अच्छा लगा, और मुझे फिर आने को कहा।

अब वो मुझसे बहुत खुश थी, क्यूंकि मैं उसकी लड़िकयों से भी फ़ोन पर बाते (जब वो घर पर होती थी) करता था! उसका मेरे पर विशवास बढ़ता जा रहा था! उसके इस विश्वास में मुझे प्यार की सुगंध आने लगी! मैं भी उसके करीब जा था, उसके लिये मेरे अंदर रहा फीलिंग्स थी, लेकिन प्यार, मैं नहीं कर पा रहा था! और यही कारण था कि, अब हम दोनों शायद बहुत करीब आ चुके थे! फिर एक शाम हम दोनों की इतनी इच्छा हुई कि, एक दुसरे तो टच किये बैगर नहीं रहा जा रहा था कि, तो हमने अगले ही दिन मिलने का प्लान बना डाला! तय हुआ कि, कल सुबह मैं उसे दिन 9 बजे मिलूँगा, और फिर वो मेरे कमरे में मेरे साथ चलेगी और दुसरे हाफ में वो अपने ऑफिस चली जायगी।

अगले दिन बहुत तेज बारिश होने से वो मुझे करीब 10:30 पर मिली, मैं उसे अपने कमरे में ले आया, तो उसने मुझसे कहा की आज प्रॉब्लम हो गयी है! मेरे पूछने पर "क्या प्रॉब्लम" तो उसका कहना कि, उसको "मासिक धर्म" शुरू हो गए है! मेरे लिये तो जैसे KLPD (खड़े L*** पर धोखा) हो गया! लेकिन वो मेरे करीब आयी, और बोली निराश मत हो, क्यूंकि उसे मेरा साथ चाहिये था! मेरे कहने पर कि, अब क्या हॊगा? उसने कहा कि, अगर मेरी चाह है, तो वो मुझे, अपने पीछे से संतुष्ट करा सकती है!

वो भी मेरी तरह प्यासी थी! हम एक दुसरे को चूमने लगे, एक दुसरे के कपडे उतारे, उसका एकदम गोरा छर-हरा बदन देख कर मैं, जैसे पागल हो गया! मैंने उसे हर जगह चूमा! और अब वो उलटी लेट गयी, मैंने उसके पीछे तेल लगाया और पीछे से संतुष्ट करने लगा, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था!, फिर मेरे पूछने पर कि, क्या उसे दर्द हो रहा है, उसका कहना कि, प्यार में वो इस दर्द को भी सह लेगी।

फिर धीरे धीरे हम ऐसे जुड़े जैसे मानो हम दोनों एक जिस्म और एक जान हो. हम दोनों करीब 10-15 मिनट्स तक इसी पोजीशन में लेटे रहे, इस दौरान मैं उसके स्तनों को दबाते हुए, उसके पीछे से, उसके होटो को चूमते हुए, हॊले-हॊले नीचे आनंद ले रहा था! अब उसे भी मज़ा आ रहा था! हम दोनों की ये क्रिया उसे इतनी पसंद आयी कि, हम दोनों आज भी वो दिन याद करते हैं! शायद यही उसके प्यार की दीवानगी मेरे लिये थी!
 
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