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प्यार - ( गम या खुशी )

अपडेट - 7

दिया ....... वर्मा सर के कोचिंग के निचे पान की दुकान पर4,5 लड़के हमेसा रहते है जो हमे तंग करते है ।

अब मैंने फोन निकाला और नंबर मिलाया अपने बचपन से साथ रहे सबसे करीबी दोस्त ऋषभ को ।

ऋषभ ... बोल राहुल ।

मैं .... कहाँ है तू ?

ऋषभ .... नूतन अपार्टमेंट में क्या हुआ ।

मैं .... कुछ नहीं जल्दी स्व सबको बोल वर्मा सर् की कोचिंग के बाहर मिलने को ।

ऋषभ .... क्या हुआ बात क्या हो गई ?

मैं .... बात बाद में अभी लात का समय है तू सबको लेकर पहुंच मैं निकल रहा हु घर से ।

फिर मैंने दोनो को कार में बैठाया और चल दिए उस जगह पर वहाँ पहुंच कर मैंने कार थोड़ी दूर रोकी और दोनों से पूछा .... कोई है क्या अभी यहाँ ।

दोनो चुप थी क्योंकि जानती थी मैं क्या करने वाला हु । पर डर यह न था कि झगड़ा होने वाला है डर यह था कि अभी बता दिया तो में अकेला जाऊंगा सबको पीटने ।

उन्हें इस तरह चुप देख कर मुझे गुस्सा आया और मैं गुस्से से मेरी दोनो आंखें लाल हो गई जो दोनो को दिखाई दी तभी दिया ने उनमे से एक कि ओर इशारा किया।

मैंने गाढ़ी लॉक की और दोनों को शांत बैठने को कहा और अपना फोन दे दिया उन्हें रखने के लिए । गाढ़ी की डिक्की से मैंने होंकी स्टिक निकली और चला उनकी ओर ।

धीमे कदमो से उनके पास पहुंचा, उस लड़के को देख फिर हो गया शुरू । इससे पहले उन्हें कुछ समझ आता मेरी हॉकी स्टिक पड़नी शुरू हो गई।

मेरा मुकाबला करना उन 3 साथियों के अन्दर तो नहीं था क्योंकि अभी कुछ ही पलों में उनकी हालत खराब हो गई थी। उन्हें पिटता देख उनके कुछ और साथी भी आ गए अब वो करीब दस थे और मैं अकेला ।

अब मैं कोई हीरो तो था नहीं कि सब पर भारी पडू इसीलिए मार खाने की बारी अब मेरी थी मुझे भी मार लग रही थी और मैं भी मारे जा रहा था । कि अब मेरे मित्रो की एंट्री हुई घन - घन करते हुए 20-30 बाइक रुकी सब उतरे और बिना किसी सवाल किए उन्हें रुई की तरह धोने लगे ।

इतने लोगों को देख कर सब भाग गए पर मुख्य लड़का जो इन सब का कारण था उसे पकड़े रखा और दिया और सोनल को बुलाया फिर चेतावनी दी ..... " भविष्य में तुम या तुम्हारा कोई दोस्त इन लोगों को परेशान किया तो मैं तुमको दुनिया से ग़ायब कर दूंगा "

और फिर सब अपने अपने रास्ते चले गए ।

जब मैं कार में बैठा तो दिया मुझसे लिपट कर रोने लगी ।

मैं ... क्या हुआ पगली ।

कुछ ना बोली बस रोये जा रही थी तभी सोनल ने मुझे देखा और मुझसे लिपट कर रोने लगी । अब मेरे समझ से परे था कि दोनों क्यों रो रही हैं । मैं दोनो को चुप करवाया माथे पर किस किया और पूछा क्या हुआ क्यों रोये जा रहे हो तुम दोनों ।

दिया सिसकिया लेते हुए .... आपके सर से खून निकल रहा है।

अब मामला समझ में आया कि यह लोग ब्लड देख कर घबरा गई हैं ।

मैंने हँसते हुए कहा ... पागल मर्द को दर्द नहीं होता ।

अब चुप हो जा चल डॉक्टर के पास नहीं तो खून सब बह जयेगा और में इस लोक से उस लोक का निवासी हो जाऊंगा ।

वहाँ से हम तीनों हॉस्पिटल पहुंचे मेरे सर में 5 टांके आये , डॉक्टर ने नार्मल सारे काम करने को कहा भाग दौड़ वाले काम छोड़ कर क्योंकि ऐसा करने से ब्लड तेजी से circulate होगा और bleeding के चांसेस रहेंगे ।

हॉस्पिटल के बाद सोनल को छोड़ते हुए हम घर पहुंचे । एक - एक करके सबको मेरे सर के चोट के बारे में पता चलता रहा और दिया सबको कारण बताती रही ।

अगले दिन जब मैं मैदान नहीं पहुंचा तो किरण का फोन सिमरन के पास आया जिस से उसे भी सब पता चल गया । अब करीब 10बजे होंगे कि किरण और रूही मुझसे मिलने आ पहुंची ।

आह ।। रूही को देखते ही सारे गम दूर हो गए ऐसा अहसास जिसे ना तो दिखाया जा सकता ना ही बयान किया जा सकता था ।

कुछ देर किरण मेरे पास बैठी रही फिर चली गई दी के पास अपनी चित -चैट के लिए और अब मैं और मेरी जान रूही वहाँ अकेले थे ।

मैं ..... रूही शुक्रिया ।

रूही ..... किसलिए शुक्रिया ।

मैं ..... मुझसे मिलने आई ना इसीलिए ।

रूही मेरी बातों पर चुटकी लेते हुए .... मिलने तो आपसे किरण भी आई है पर उसे तो आपने थैंक्स नहीं बोला ।

अब मैं क्या कहूँ ..... वो वो अब हम फ़्रेंड है ना ।

आह। चलो मैंने उसे फाइनली फ्रेंड बोल ही दिया ।

रूही हंसती हुई .....मैंने कब की फ़्रेंडशिप ?

अब मैं क्या कहूँ ये लगता है मुझसे दोस्ती नहीं करना चाहती । मैं कुछ बोल ना पाया उसकी इस बात पर तबतक उसने फिर पूछ लिया ..... बताओ कब हुए हम फ्रेंड्स ।

मैं कहूँ तो क्या कहूं अपनी ही चिंताओं में घिरा था कि तभी ...... एक बार फिर दिया कमरे मे आते हुए नया रंग बिखेर दिया ।

कहानी जारी रहेगी ......

 
शुक्रिया मित्रों..... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
 
शुक्रिया मित्रों .....

सही कहा विराज भाई ......

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अपडेट -8

मैं कहूं तो क्या कहूं अपनी ही चिंताओं में घिरा हुआ था कि..... एक बार फिर दिया कमरे में आती हुए नया रंग बिखेर देती हैं । दिया जो अब तक गेट पर खड़े होकर हमारी बाते सुन रही थीं अंदर आते हुए ।

दिया .... वो ऐसा ह रूही जी के दोस्ती करने के लिए पूछना नहीं पड़ता ।

रूही .... हम्म्म्म ।

दिया ...... वैसे भी " A friend in need in a friend in deed "

रूही ..... ओके accepted दिया पर यह राहुल भी तो बोल सकता था , मैं क्या खा जाउंगी वो अगर ये बोल देता तो ।

दिया तिरछी नजरो से देखती हुई धीरे से मुझे बोलती है .... तुम्हे देख तो खाना भूल जाता हैं ये बात बोलना तो दूर की बात है ।

रूही .... समझी नहीं क्या कह रहे हो ।

दिया ...... मैंने कहा भैया को बाते बनाना नहीं आती ।

रूही ... ओ ' ऐसा क्या ? पर में एक आध बार example सुनी हु राहुल सर् से , example तो बिल्कुल ऐसा देते है कि सामने वाला चाह कर भी कोई जवाब ना दे सके ।

कुछ देर दोनो बात करती रही फिर दिया बाहर सोनल से बात करने चली गई । इधर में और रूही बात करने लगे मैं लगातार उसकी बात में खोता चला गया बस इस एहसास के साथ ही रूही ऐसे ही मुझसे बात करती रहे ।

मैं इन्ही ख़यालों मैं खोया था कि मुझे रूही मेरी ओर अपना हाथ बढ़ते हुए .... " please shake hands for new friendship "

आह। क्या मधुर एहसास था रूही से हाथ मिलाने का मैंने पहली बार रूही को टच किया था , उसके हाथ इतने सॉफ्ट थे कि मै एकदम से गुम हो गया । किसी फिल्मी सीन की तरह मैंने उसका हाथ पकड़े ही रह गया कि तभी अचानक दिया अंदर पहुंची .... भैया भैया कहाँ गुम हो ।

मैं अपने ही ख्यालों में गुम था और दिया और रूही दोनो मंद मंद मुस्कुरा रही थी और उन्हें देख कर में शर्मा गया।

अभी मेरा सम्भालना भी नहीं हुआ था कि दिया ने फिर से बोम्ब फोड़ दिया...

" क्या आप भी पहली बार कोई दोस्त घर आई हैं और आप लड़कियों की तरह शर्मा रहे हो Be A Man और कहीं खाने पर ले जाओ "

ओह दिया क्या बोल रही है कई दिनों बाद तो दोस्त कह के पुकारा अब क्या चाहती है कि आज ही ब्रेकअप हो जाए मैं मन में ऐसे विचार सोचते हुए कहा.... सॉरी रूही वो दिया ने बिना सोचे हुए कहा आई एम extremely sorry ।

पर पता नहीं आज तो मेरे ऊपर बोम्ब ही बोम्ब गिर रहे थे।

रुही... बिना सोचे ना तो दिया ने बोला ना तुम ने ।

मैं .... समझा नहीं ।

रूही .... दिया तो बस खाने पर ले जाने के लिए बोल रही थी और तुम तो बहुत बड़े कंजूस निकले जो पहले ही मना कर रहे हो ।

मुझे समझ नहीं आया रूही की बात पर क्या रिएक्शन दु , मेरा मुह खुला रह गया और मेरी प्रतिक्रिया देख कर दिया और रूही खिल खिलाकर हँस रही थी । दोनो को हँसते हुए देख में तो पानी पानी हो गया ।

इतना होने के बाद अब मेरी बारी थी । मैंने उन्हें 2 मि रुकने को बोल कर फ़टाफ़ट बाथरूम चला गया और तैयार हो कर आ गया ।

जब मैं बाहर आया तो दोनों मुझे आचार्य से देख रही थीं । मैंने उनसे पूछा ... क्या हुआ ?

दिया .... भैया क्या हुआ कही जा रहे हो क्या ?

मैं ... मैं नाम हम जा रहे हैं वो भी अभी रेस्टॉरेंट खाने के के लिए ।

मेरी बात सुन कर रूही थोड़ा असहज हुई .... आप तो सीरियस हो गए मैं तो मजाक कर रही थी ।

मैं.... पर मैं तो सीरियस हु मैं मजाक नहीं करता चाहे तो किसी से भी पूछ लो ।

फिर क्या था ... हाँ ना हाँ ना करते हुए तय हुआ कि हम जा रहे है रेस्टोरेंट ।

हम तीनों फिर निकले रेस्टोरेंट के लिए , बात करते करते हम रेस्टोरेंट पहुंच गए । आज मुझे पहली बार ऐसा फील हो रहा था कि जैसे मैं आज किसी खास काम से निकला हु । रेस्टोरेंट में खाने का आर्डर देकर हम आपस मे बात करने लगे ।

पर आज तो दिया पूरी शरारत के मूड में थी ।

खाते हुए दिया एक बार फिर रूही को छेड़ते हुए .... " आपको मालूम है रूही जी भैया की अबतक 3 गर्लफ्रैंड है "

रूही आश्चर्य से ..... सच में तब तो राहुल ने मुझसे झूठ कहा कि उसकी कोई गर्लफ्रैंड नहीं है ।

दिया .... ना ना 3 गर्लफ्रैंड है , मैं सबको जानती हूँ ।

इधर मैं मन मे सोचा पागल यहां एक का पता नहीं यह 3 बता रही हैं , मैंने गुस्से भारी नजरो से एक बार दिया को देखा ।

दिया .... भैया यह लुक देना बंद करो और खाने पर ध्यान दो ।

मैं अब बेचारा चुप चाप खाने लगा ।

रूही .... दिया तुम गर्लफ्रैंड के बारे में कुछ बता रही थीं ।

दिया मजे लेते हुए .... आपको बहुत इंटरेस्ट आ रहा है भैया की गर्लफ्रैंड में खैर भैया की पहली गर्लफ्रैंड में दूसरी सोनल और तीसरी आप है ।

रूही .... मैं कैसे हो गई राहुल की गर्लफ्रैंड ।

दिया .... जैसे हम दोनों है मैं और सोनल वैसे ही आप है । बस आप जो वो वाला सोच रही हैं वो लवर्स वाली तो उसका कॉन्फॉर्मेशन तो आप दोनों को ही देनी होगी ।
 
अपडेट -9

लगता हैं आज दिया रूही को अपनी बातों में फंसा के ही रहेगी । क्या बात है ।

रूही ....हम्म्म्म।

दिया ... वैसे ये इनके इलावा किसी से बात तक नहीं कर पाता ।

रूही ... क्यों ?

दिया .... भैया से ही पूछ लीजिये अपने स्कूल का टॉपर है फिर भी शर्माते है बात करने में लड़कियों से । लड़की क्या ये तो लड़को से भी मिलने में शर्माते है ।

अब मुझसे रहा नहीं गया मैंने दिया को टॉपिक बदलने को बोला , फिर हम तीनो बाते करते रहे । कुछ देर बाद हम लौटे और रूही को उसके घर छोड़ा फिर हम अपने घर आ गए।

घर पहुंचते ही मैं आराम करने चला गया , अपने कमरे में और उस दिन की सारी घटनाओ को याद करके मन्द मन्द मुस्कुराते हुए सो गया।

शाम को 6 बजे के आस पास नींद खुली । नींद खुली तो देखा सोनल मेरे पास बैठी थी । मैंने सोनल से पूछा तू कब आयी ।

सोनल ... जी भैया अभी आई ।

मैं .... जगाया क्यों नहीं ।

सोनल ... बस आपको देख रही थीं आप सोते हुए देख कर सुकून मिलता है ।

मैं .... सुन तुम दोनों वर्मा सर् के यहाँ केमिस्ट्री के लिए जाती थी ना ?

सोनल .... हाँ तो क्या हुआ ।

मैं ... कल से मत जाना ।

सोनल .... क्यों ?

मैं ,....कल से अमित इंस्टीट्यूट में चले जाना मेरी बात हो गई हैं ।

सोनल ....( आश्चर्य से ) क्यों भैया ।

मैं ...क्योंकि मैं नहीं चाहता ।

सोनल ( उदास मन से ) ठीक है भैया ।

सोनल की उदासी में समझ सकता था .........

कहानी जारी रहेगी ....

 
शुक्रिया मित्रों....

पूरा प्रयास करूंगा विराज भाई....

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अपडेट -10

मैं सोनल की उदासी समझ सकता था इसीलिए उसे समझाते हुए कहा .....

देख तुम दोनों में मेरे प्राण बास्ते है अब यदि वर्मा सर् के यहां वो लड़के तुम्हे परेशान करते है, तो में उन्हें जान से मार दूंगा पर सोच में हर वक़्त वहां नहीं रहूँगा अगर तुम दोनों को कुछ हो जाता हैं तो मैं क्या करूँगा इसीलिए अपनी सेफ्टी के लिए । और हाँ यदि तेरा कोई बॉयफ्रेंड है उस कोचिंग में तो बता दें मैं उसके लिए भी बात कर लूँगा ।

मेरी बात सुन कर सोनल शर्मा गई ..... जाओ भैया आप भी मुझे छेड़ते रहते हो , जाओ में नहीं करती बात आपसे ।

मैं ....कल तुम और दिया तैयार रहना सुबह चल कर इंस्टीट्यूट में बात करते है ।

सोनल " ठीक है भैया " बोलते हुए चली गई मैं भी फ्रेश होने चला गया , जब बाथरूम से बाहर आया तो मेरा फोन बज रहा था ।

मैं .... बोल ऋषभ

ऋषभ .... क्या कर रहा है तू ।

मैं .... कोई खास नहीं तू बता ।

ऋषभ .... आज रात 8 बजे तैयार रहना डिस्को चलेंगे ।

मैं .... आज नहीं फिर कभी ।

ऋषभ .... क्यों ?

मैं .... पागल तू तो रहने दे पूछ मत ।

ऋषभ .... क्यों क्या हुआ ?

मैं .... एक तो लेट आया वहाँ और जब मेरा सिर फटा तो डॉक्टर के पास चलने के बदले वहाँ से खिसक लिया ।

ऋषभ ..... नहीं भाई ऐसी बात नहीं है वहाँ दिया और सोनल भी थी फिर कहाँ में उन दोनों को इतने लोगो के साथ चलने को कहता, कभी कभी तेरा भी दिमाग काम नहीं करता ।

मैं ... ok dude फिर भी यार मूड नहीं है।

ऋषभ .... कुछ नहीं सुन्ना मुझे मैं 8 बजे आऊंगा तैयार रहना ।

मैं ... ठीक है चल बाई मिलते है 8 बजे ।

अभी 7 ही बजे थे और घर में परमिशन लेनी थी क्योंकि जैसी हालात मेरी हुई थी यदि इस हालत में बिना बताये निकला तो माँ मेरे प्राण ही खा जाएंगी। इसीलिए मैंने दिया को पूरा मैटर समझाया और फिर चले हम दोनों सिमरन दी के पास ।

रीज़न ये था कि घर के बाहर जाने की परमिशन देती तो केवल माँ ही थीं पर माँ केवल दी कि बात ही सुनती थी । इसलिए कोई भी काम हो फसने वाला तो पहले दी को शीशे में उतारना पड़ता था फिर जाकर हमारा काम बनता था ।

मैं ओर दिया दी के अगल बगल बैठ कर दोनों लेफ्ट से दिया और मै राइट से गले लग गए ।

हम दोनों के गले लगते ही दीदी वोली ...... हटो क्या कर रहे हो दोनो ।

दिया ..... दीदी से प्यार ।

दी .... आज बड़ा प्यार आ रहा है तुम दोनों को ।

मैं .... क्या दीदी आपको तो हमारी कोई बात पसंद नहीं ।

दिया ..... हाँ भैया सही कहा देखो न जब देखो तब इनके लिए तो अपने दोस्त किरण, सुस्मिता, मिनाक्षी, कोमल यही सब हैं । हम दोनों तो जैसे पराये है।

दी हम दोनों के कान पकड़ कर अपने से हटाते हुए ....

" चल - चल मस्का मारना बंद कर काम बता" ।

मैं ... क्या दीदी कोई काम होगा तभी आएंगे।

दी .. तो में यह मान लू की कोई काम नहीं तुमको मुझसे ।

दिया .... हाँ दी कोई काम नहीं तुमको ऐसा क्यों लगता हैं कि मैं कोई काम होगा तभी आउंगी ।

दी .... तो चल अभी हट अभी किचन में जाना है आती हु आधे घंटे में ।

मैं.... पर दीदी बात तो सुन लो ।

दी ( मुस्कुराते हुए ) ... अभी तो बोला की कोई काम नहीं।

दिया .... वो तो मैंने कहा था सच मे कोई काम नहीं , दीदी में तो चल कर तुम्हे किचन में हेल्प करूँगी ।

दी ... अरे वाह रहने दीजिए मेरी गुड़िया क्यों हम पर अहसान कर रही है, आप बस खाना खा लीजिए वो भी अपने हाथों से वो ही काफी है ।

मैं ... तू चुप कर छोटी , जाने दो न दी मेरी बात सुनो ।

दी .... हाँ बोल भी दे वरना आज तुम दोनों कोई काम थोड़ी ना करने दोगे ।

दिया ... अच्छा सुनो ना दी ।।

दी .... अब बोलेगा या जाऊँ ।

मैं .... वो मुझे आज लेट नाईट छुट्टी चाहिए ।

दी .... और वो किस लिये ।

मैं .... वो डिस्को जाना है ।

दी .... किसी गर्लफ्रैंड के साथ जा रहा है ।

मैं ... नहीं ऋषभ के साथ ।

दी .. not approved

मैं .... but why दी ?

दी ... गर्लफ्रैंड के साथ डिस्को जाने की उम्र में लड़कों के साथ डिस्को जाना not acceptable ।

मैं .... दी ... मासूम चेहरा बनाते हुए ।

दी .... अच्छा ठीक है11 बजे तक आ जाना मैं माँ को बता दूंगी ।

मैं ....... ok दी माय lovely दी वहाँ से कुछ लाना है ।

दी ... अब मस्का लगाना बन्द कर और जा जाकर तैयार हो जा ।

Ok दी बोलकर मैं और दिया वहाँ से निकले की तभी ।

दी .... तू कहा चली छोटी चल किचन में ।

दिया .... ठुनकते हुए दी ।

दी .... आज कुछ नहीं मैं सुनने वाली तूने खुद हेल्प करने को कहा है ।

दिया मुझे घूरते हुए " तुम जाओ डिस्को में मजे करो और मुझे यहां फंसा दिया जाओ में बात नहीं करती " ठुनकते हुए चली गई ।

दीदी के साथ 7 : 30 बज चुके थे सो में भी उठकर तैयार होने चला गया ।

 
अपडेट -11

8 बजे ऋषभ भी आ गया फिर दीदी को बोलकर हम भी निकल लिए । डिस्को पहुंचा तो पूरा ग्रुप था सामने , सबने अपना टिकट पास दिखाया और हम डिस्को के अंदर चले गए । डांस फ्लोर पर सभी लड़के लडकिया डांस कर रहे थे ।

डिस्को केवल कपल allow होता है तो जिनके बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रैंड नहीं होते वो बाहर सिंगल वैट करते हैं जब उन जैसा कोई सिंगल मिलता है तो कपल में अंदर जाते है ।

अंदर फिर आप की मर्जी की पार्टनर कंटिन्यू करते है या अकेले एन्जॉय करते हैं ।

तो मैं जिनकी गर्लफ्रैंड नहीं थी उनके लिए भी सैम एग्रीमेंट था , लेकिन मैं किसी से ज्यादा मेल जोल नहीं रखता इसीलिए उसे बोल दिया ... " You can enjoy alone bec'z I didn't know how to dance "

मैंने अबतक देखा भी नहीं कि मेरे साथ कौन अंदर आई थी , लेकिन में हमेशा ही ऐसा करता था जब कभी डिस्को आता था ।पर उसकी अपनी ही लॉजिक थी । वो प्यार भरे सब्दो में समझाते हुए ... सब यहां कपल में आये हैं सो प्लीज को ऑपरेट और बस एक डांस ।

उसकी बात सुनते हुए पहले तो मैंने उसे देखा फिर चोंकते हुए कहा ... काजल तुम डफ़र ।

काजल .. डफर मैं हु या तू । डांस के लिए मना कर रहा है । मैं अब क्या दूसरे लड़को के साथ जाऊ डांस करने । यार बड़ी मुश्किल से आई हूं ऊपर से तुम भी मना कर रहे हो । चल ना एक डांस से कुछ नहीं होता ।

काजल हमारे साथ पढ़ने वाली ही हमारी क्लासमेट थी जो हमारी दोस्त भी थी । लेकिन उतने दिनों में पहली बार काजल को डिस्को में देखा था । खैर अब तो मजबूरी थी मेरे साथ उस डांस फ्लोर पर थिरकना इसीलिए मैं भी मजबूरन चला ।

मैं जब डांस फ्लोर पर पहुंचा तो पहली बार गौर किया काजल के फिगर पर , काजल किसी ब्यूटी क्यूईन से कम नहीं दिख रही थी ।

स्लीवलेस शर्ट और मिनी स्कर्ट में कमाल दिख रही थी काजल ऊपर से जो आज वो मेक अप कर के आई थी वो किसी के भी ऊपर बिजली गिराने के लिए काफी था । curly बाल जो हेयर स्टाइल था सच कहूँ तो कातिलाना था उसके ऊपर उसकी मुस्कान एकदम जानलेवा ।

मैं इतने analysis से पहली बार काजल को इस तरह देख रहा था । वैसे भी इस उम्र में खूबसूरत लड़की को यू देखना किसी भी लड़के के लिए नार्मल बात थी । पर मैं जो पहले इन सब मामलो में कभी इन्वॉल्व नहीं हुआ पहली बार मैं भी थोड़ा attract सा हो गया ।

काजल जब मुझे देखी की मैं उसे बड़े ध्यान से देख रहा तो अपनी एक प्यारी सी मुस्कान के साथ मुझे अपने साथ फ्लोर तक ले आई और मेरे हाथों को अपनी कमर पर रखते हुए मुझे डांस करने का इशारा करने लगी ।

मैं ( कंपते हाथो से ) ... k .. k काजल मुझे डांस करना नहीं आता ।

काजल ने मेरे होंठ पर उंगली रखते हुए ... shhh dance time no talk ।

फिर हम दोनों डांस करने लगे , उनके दोनों हाथ मेरी गर्दन पर और राइट पैर मेरे दोनो पैरो के बीच में और खुद को मुझसे चिपकते हुए बस खो जाने वाली धुन पर कमर हिलाने लगी।

अपनी आंखें बंद करके बस कमर और पैर हिला रही थी और मैं सर ऊपर करके सब फील कर रहा था । काजल के लगातार मुझसे चिपके रहने की वजह से मैं उत्तेजित हो गया था । आह हा क्या अनुभव था ।

मैं तो बिल्कुल काम सागर में गोते लगा रहा था । अब तो काजल से ज्यादा में excited हो था डांस के लिए । अब मेरी पकड़ मजबूत हो गई थी हाथ उसके waist के नीचे दूसरी पीठ पर बिल्कुल पकड़ मजबूत बनाये ।

आलम यह था कि अब हमारे बीच से हवा भी नहीं गुजर रही थी उसका हर अंग मुझे महसूस हो रहा था । ओह हो ये क्या हो रहा है मैं तो बिल्कुल काजल में डूब जाने को बेकरार बैठा था । एक तो कच्ची उम्र और ऐसा होना काम सागर की चाहतों को गोता खाना ही था ।

ऐसा नहीं मैं डिस्को पहली बार आया था , डिस्को तो पहले भी आ चुका था लेकिन आज तक किसी के साथ डांस करने नहीं गया और सबको वही बोलता जो काजल को बोला "sorry alone enjoy कर लो "

पर आज जब काजल के साथ डांस किया तो एक अलग ही सुख का अनुभव हुआ । जिसे दूसरे सब्दों में वासना भी कहते है क्या बताऊँ कैसा लग रहा था ।

फाइनली जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने काजल को खुद से अलग किया बस इतना कहा "वाशरूम से आ रहा हूँ " पर अब तो ऐसा लग रहा था कि आग दोनो तरफ बराबर लगी थी। काजल की आँखे बिल्कुल नशे में ऐसा की अपना सुध बुध खो चुकी हो , सरीर अब उसके बस में नहीं हो ।

जब मैंने उसे कहा कि मैं वाशरूम जा रहा हूँ तो वह कुछ नहीं बोली पर वो भी मेरे साथ चल दी ।

ऐसा लग रहा था कि मदहोशि हमारे कंट्रोल के बाहर है और एक दूसरे के समर्पित हम वाशरूम पहुंच गए ।

कहानी जारी रहेगी ......

 
शुक्रिया अदा मित्रों

आपको पसंद आई बहुत बहुत शुक्रिया .... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f44d.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f44c.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
 
अगली अपडेट कुछ ही देर में बने रहे

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