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प्यार - ( गम या खुशी )

अपडेट -12

ऐसा लग रहा था ये मदहोशी हमारे कंट्रोल के बाहर है और एक दूसरे के समर्पित हम वाशरूम पहुंच गए ।

यूँ तो उस पल मैं और काजल एक अलग ही दुनिया में थे । काम का पूरा खुमार हम दोनों के तन बदन में सुलग चुका था ।

वाशरूम में आते ही काजल ने डोर लॉक किया और हम एक दूसरे से लिपट गये । मैं बस उसके आगोश में समाता चला गया । बाहों में भर कर काजल लगातार मुझे चूमे जा रही थीं । जिसका ना तो में विरोध कर रहा था और ना ही साथ दे रहा था ।

कुछ समय जब हम यूँ ही एक दूसरे के आगोश में लिपटे रहे फिर मैं आगे बढ़ कर काजल को चूमे जा रहा था । मेरे लिए यह पहला अनुभव था जब मैं किसी लड़की के साथ इतना आगे बढ़ा था ।

एक अलग ही दुनिया में खिंचे जा रहा था और काम सागर लगातार बढ़ता जा रहा था । कुछ देर हम यू ही एक दूसरे को चूमते रहे , हम दोनों इस समय पागल हो गए थे और हमे रोकने वाला कोई नहीं था ।

थोड़ा और आगे बढ़ ही रहे थे कि काजल के फोन की घंटी बजी । पहली घंटी तो पूरी बज कर कट चुकी थी फिर भी हमारे ध्यान में कोई फर्क नहीं आया । लेकिन दूसरी घंटी के साथ ही काजल अपनी वास्तविक स्थिति से अवगत हुई ।

काजल को जैसे 440v का झटका लगा और खुद से मुझ को अलग कर दिया । इस समय हम दोनों की सांसें काफी तेज चल रही थी । धड़कन की आवाज साफ सुनाई दे रही थी । मैं तो अब भी खुमार में सवालिया नजरों से काजल को देखने लगा था ।

कुछ देर बाद काजल भी खुद को नार्मल करती हुई वाशरूम से बाहर निकल गई । मैं भी जब अपनी चेतना में आया तो ख्याल आया यह क्या कर दिया । अब काजल क्या सोच रही होगी और ये सब कैसे हो गया । इन्ही सब बातों को सोचते हुए मैं बाहर चला आया और आकर काजल के बगल में बैठ गया । हम दोनों कुछ पल यूँ ही शांत बैठे रहे फिर काजल ही इस चुप्पी को तोड़ते हुए ....

काजल माहौल को हल्का करते हुए ... तुमने तो कहा था तुम्हे डांस नहीं आता लेकिन तुम तो अच्छा डांस करते हो ।

मैं ... नहीं ऐसी कोई बात नहीं वो एक दो स्टेप्स ही आते हैं ।

काजल.... कहाँ खोए हो जनाब ।

मैं... नहीं समझा काजल , क्या मतलव है इस सवाल का?

काजल... अरे इतनी सुंदर लड़की साथ में बैठी है और तुम हो कि ध्यान ही नहीं दे रहे हो ।

मैं.... ऐसा तुम्हारा सोचना है पर सच कहूँ तो तुम वो पहली लड़की हो जिसके साथ मैने डांस किया ।

इतने में काजल कुछ बोलने वाली थी मैं बीच में ही टोकते हुए बोला....

" सुनो काजल अभी जो कुछ भी हुआ उसके लिए सॉरी मैं अपनी भावनाओं पर कंट्रोल नहीं रख पाया पर मेरे दिल में कोई और हैं जिसे मैं धोखा नहीं दे सकता । प्लीज कौन , क्यों जैसे शब्द मत पूछना अगर तुम्हारी भावनाओं को मेरी वजह से ठेस पहुंची है तो सॉरी" ।

कुछ देर हम दोनों चुप रहे और फिर काजल अपनी बात रखते हुए ... " सॉरी तो मुझे कहना चाहिये कि मैं भी थोड़ा अनकंट्रोल हो गई जिस से तुम्हे यह मौका मिला आगे बढ़ने का । रही बात तुम्हारी गर्लफ्रैंड की तो वो बहुत लकी है जिसे तुम्हारे जैसा बॉयफ्रेंड मिला । लेकिन एक बात कहूं यदि मैं ना रुकती तो तुम भी नहीं रुकने वाले थे तो यह बात तुम रहने दो की तुम्हारे दिल में कोई है , यदि ऐसा होता तो तुम इतने आगे बढ़ते ही नहीं " ।

मैं ... पता नहीं काजल आई एम रेरली सॉरी पता नहीं ये कैसे हो गया लेकिन मेरा विश्वास करो मैं वैसा बिल्कुल नहीं जैसा दूसरे लड़के होते हैं ।

काजल ... हाँ जानती हूँ ज्यादा सोचो मत और खबरदार जो इसकी चर्चा किसी से की , मैं भी ना पता नहीं क्या हुआ मुझे जो मैं भी काबू ना रख पाई ।

मैं... नहीं गलती मेरी भी है अच्छा किया जो मुझे रोक दिया ।

और हाँ मुझे अपनी गर्लफ्रैंड के बारे में कुछ बता रही थी उसके बारे में दोबारा सोचना पड़ेगा । वैसे taunt अच्छा कर लेती हो ।

आह काश मैं वो लड़की होती जो तुम्हारी गर्लफ्रैंड होती फिर मेरे गले लगते हुए , गर्लफ्रैंड ना सही दोस्त तो है ही । उसकी बात सुनकर मैं भी अपनी मुस्कान को नहीं रोक पाया और उसके सर पर हाथ मरते हुए ... पागल है तू ।

हमारे बीच बातो का सिलसिला यू ही चलता रहा और बातो बातो मैं उसे रूही के बारे में बताया और उसे जानकर बहुत हैरानी हुई कि अबतक मैंने उसे कोई purpose क्यों नहीं किया । काजल ने मेरी मदद करने का प्रोमिस किया कुछ देर उसके साथ वक़्त बिताने के बाद घर बापस लौट आया ।

घर में आते ही मैं अपने कमरे में सोने चला गया । सुबह कोई काम था नहीं इसीलिए देर तक सोता रहा । मेरी नींद 9 बजे सोनल के जगाने से खुली ... सोनल क्या कर रही हैं सोने दे ना आज कोई काम नहीं है ।

सोनल ..... क्या भैया भूल गए आज वो केमिस्ट्री क्लास की बात करने जाना है ।

सोनल की बात सुनते ही मुझे याद आया ओह आज तो अमित इंस्टीट्यूट जाना है फिर मैंने सोनल से कहा ...... जा तू और दिया नीचे इंतजार कर ।
 
अपडेट -13

सोनल नीचे गई कुछ देर बाद में भी फ्रेश होकर नीचे चला गया । हमलोग नास्ता करके इंस्टीट्यूट चल दिए । वहाँ का सारा काम करने के बाद हम वापस लौटे कुछ खास काम नहीं था बस एक ही काम को छोड़कर .... पड़े अपने बिस्तर में रूही के बारे में सोचना ।

" ओह रूही तुम कब मेरे दिल की आवाज सुनोगी "

रूही के खयालो में डूबते ही मेरी आँख लग गई और करीब 5 बजे खुली। फ्रेश होकर में नीचे हॉल में गया बस यूं ही टाइम पास करता रहा पर यह मुझे हुआ क्या है मेरा मन तो किसी काम में लग ही नहीं रहा और ना ही चेहरे पर खुशी थी । अभी लगभग 26 घंटे ही हुए रूही से मिले दिल तो बिल्कुल तड़प रहा था । और एक लंबी मायूसी की ..... क्या कभी रूही मेरे प्यार को समझ पाएगी ।

नीचे माँ , सिमरन, दिया तीनो बैठे हैं पर मेरा मन तो कहीं और ही था ।

मैं चुपचाप अपने कमरे में बिना कुछ बोले फिरसे वापस आ गया । एक भवर की तरह रूही के खयालो में बस डूबता ही चला जा रहा था । मेरे ऐसा करने से शायद मेरी फैमिली में सबको अटपटा लगा इसीलिए तीनो माँ , दिया और सिमरन मेरे कमरे में आ गए ।

मैं अभी अपने बिस्तर पर उदास बैठा था कि माँ मेरे बगल में बैठ जाती हैं । बड़े प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरते हुए ....

" क्या हुआ बेटू बहुत दिनों से देख रही हूं तू बहुत उदास रहता है क्या हुआ बता मुझे "

मैं कुछ नहीं बोल पाया बस माँ की गोद में लेट जाता हूँ । और माँ फिर से मेरे सर पर हाथ फेरते हुए ... क्या हुआ बेटू ।

अब मेरा बर्दास्त कर पाना मुश्किल था अनयास ही मेरे आंखों से आंसू निकलने लगते है और मैं रोने लगता हूँ । अब सब बिल्कुल मौन होकर मेरा रोना देख रहे थे ।

रोते रोते मेरा रोना सिसकियों में बदल गया पर ना तो मुझे पता था कि यह आंसू मेरी आंखों में क्यों आए और ना ही मैं किसी के सवाल का जवाब दे पाता कि मैं क्यों रो रहा हूँ ।

इसीलिए मैंने माँ से धीरे से कहा .... माँ इस समय मैं अकेले रहना चाहता हूँ प्लीज ।

फिर माँ के कहने पर सभी नीचे चले गए और इधर मैं अभी भी अपने आंसुओ को रोकने की कोशिश करता हूँ । पर आज तो दिल के हाथों मजबूर था । अब रोना धीरे धीरे कम हुआ पर मायूसी वो कहाँ से जाने वाली थी वो तो अभी भी मेरे पास ही थीं ।

अभी रात के 11बज रहे थे कि अचानक मेरे फ़ोन की घंटी बजती है ।

अभी मैंने कॉल तो पिक नहीं किया था लेकिन दिल धक धक चेहरे पर चमक , और कंपते हाथो से पिक किया कॉल ....

कॉल पिक करते ही दूसरी साइड से रूही के नम्बर से किरण बात करती हैं ।

मैं ... हेलो रूही इतनी रात में कैसे कॉल किया ।

किरण ... हेलो राहुल ।

अब ये क्या है रुही के फोन से इसने क्यों कॉल किया ... इतनी रात सब ठीक तो है ।

किरण .... हाँ सब ठीक है अच्छा सुनो लो पहले रूही से बात कर लो ।

रूही से ही बात करने के लिए तो फोन उठाया था तुम तो जबरदस्ती बीच में आ रही हो ।

रूही .... हेलो राहुल ।

मैं ... कैसे हो रूही मैम इतनी रात कैसे याद किया ।

रूही .... मैं अच्छी हु , चोट कैसी है राहुल ।

( मैं खुश होते हुए लगता हैं इसके दिल में भी मेरे लिए कुछ तो है )

मैं ( खुशी से ) ... अब तो आराम है वैसे सब ठीक तो है इतने रात कॉल किया ।

रूही ... सब ठीक है चिंता की कोई बात नहीं बस एक बात पूछनी थी ।

टाइम पॉज हो गया जैसे अभी मेरे लिए ।

दिल धक - धक

पैर कंपते हुए

कान बिल्कुल खड़े

आंखे बड़ी

मन में हलचल ।

ऐसा की अब रूही ने purpose किया तो हार्ट फैल हो जाएगा ।

रूही ... राहुल क्या हुआ तुम सुन रहे हो ना ।

मैं ... हाँ हाँ मैं यही हु पूछो क्या पूछना हैं ।

रूही ... क्या कल तुम ग्राउंड पर आओगे ?

मैं ( धत्त ये भी ना ) .... हाँ आऊंगा ।

रूही .... फिर ठीक है कल मिलते है ग्राउंड पर ।

इसने तो पूरे अरमानो का कचरा कर रात काली कर दी अब सुबह क्या सवाल करेगी यही ख्याल से नींद नहीं आएगी ।

मैं ... " रूही बात को अटका कर क्यों सुबह तक जगाना चाह रही हो इससे अच्छा तो फ़ोन ही नहीं करती "

रुही .... कल बात करती हूं सुबह कुछ जरूरी बात है सामने ही हो सकती हैं ।

मैं ... ठीक है बाई गुड़ नाईट ।

वो कहते है ना अंत भला तो सब भला वही मेरे साथ हो रहा था । सारा दिन आग में तपने के बाद अंत में कुछ राहत मिली ।ये प्यार भी कितना अजीब होता हैं । कुछ समय पहले जो मेरी आँखों में पानी की वजह एक चमक थी अब । चेहरा बिल्कुल खिला हुआ , सागर की लहरों की बनती दिल में हजरों तरंगे उठती हुई । एक अजीब सा सुकून जो मैं अपने आप मे महसूस कर रहा था ।

अब इस रात मे तो नींद भी नहीं आएगी । नींद तो अब जैसे मुझसे कोसों दूर हो फिर भी सुबह जागने के ख्याल से मैं सोने की नाकाम कोशिश करता रहा । अंत में मुझे नींद आ ही गई । कब वो तो पता नहीं पर मैं उठा अपने रूटीन टाइम पर 4 बजे ही ।

 
मैं एक पल भी अब गवाना नहीं चाहता था इसीलिए सीधा फ्रेश होकर ग्राउंड पहुंच गया । मैं ( किसी छोटे बच्चे की भांति जिसे अभी- अभी कोई ज़िद पूरी हो और वो चहक रहा ) बिल्कुल चहक रहा था । अजीब सा खुमार जो मेरे दिल और दिमाग में छाया हुआ था ।

किसी से मिलने की बेसब्री आज तक इतनी ना रही हो जितनी कि आज थी ।

कहानी जारी रहेगी .......
 
शुक्रिया मित्रों ....

लेकिन माफी चाहूँगा मैटर खत्म होने तक,

कोई अपडेट नहीं हो पायेगी और ...

मुझे एडमिन जी पर पूरा भरोसा है ...

. या जो यह कहानी पढ़ रहे हैं समझेंगे बात को...

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यह बहुत ही निराशाजनक है....

कोई कद्र नहीं करता लेखक की दोस्त...
 
बिल्कुल भाई आपका कहना सही ह...

मैं जो काम शुरू करता हूँ उसे खत्म करके ही रहता हूँ ....

यह मेरी पहली कहानी है इसकी वजह से मैं इसे पूरा जरूर करूँगा ....

मगर अब कोई नई कहानी अपडेट नहीं होगी जबतक....

की व्यूअर अपनी बात ना रखें ....

खैर कल मेरा जन्मदिन है तो किसी को निराश नहीं करूंगा ।
 
शुक्रिया मित्रों...

आज मैं किसी को निराश नहीं कर सकता....

लेकिन प्लीज आप भी समझे आपके होंसला बढ़ाने...

से ही लेखक आपको ज्यादा से ज्यादा अपडेट...

और नई कहानियां लाएगा ।

खैर सब आपकी मर्जी है एन्जॉय द अपडेट.....

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अपडेट - 14

खैर ग्राउंड पहुंच कर मैं ऋषभ से मिला । इतना खुश होता देख ऋषभ से रहा नहीं गया और पूछ बैठा ।

" क्या भाई आज कुछ ज्यादा ही खुश हो रहे हो बात क्या है "

मैं कुछ इस तरह जवाब देता हूँ ।

" प्रेमी आशिक , आवारा

पागल,मजनू,दीवाना ।

मोहोब्बत ने यह नाम हमको दिए हैं,

तुम्हें जो पसंद हो अजी फरमाना "

मेरी बात सुनते ही ऋषभ बोल पड़ा ... तू तो बिल्कुल बदला लग रहा है , कौन है वो मुझसे अबतक नहीं मिलवाया ।

मैं .... मिल लेना मेरे भाई पहले कुछ इकरार ए मोहोब्बत तो होने दो ।

मेरी बात सुनकर ऋषभ हँसने लगा हमारी बाते यूँ ही चलती रही, फिर 5:30 तक किरण भी आ गई और अब निगाहों में वो चेहरा भी आ गया जिसके दीदार मात्र से मैं अलौकिक सुख सागर में गुम हो जाता हूँ । अब मैं ऋषभ को अलविदा बोल कर रूही और किरण के पास पहुंचा ।

किरण से नॉर्मली कहा .... गुड़ मोर्निंग और फिर रूही से हाथ मिलाकर गुड़ मोर्निंग कहा ।

मेरे इस प्रकार व्यव्हार करने से किरण को बर्दाश्त नहीं हुआ और पूछ ही दी एक धीमी मुस्कान के साथ ..... क्या बात है हीरो हाथ मिला रहे हो और मुझसे सिर्फ गुड़ मोर्निंग ।

इस समय लगता हैं मैं बिल्कुल बावला हो गया था मैंने तुरंत दोनो बाहें फैलाकर .... आओ तुम्हें हग करूँ ।

मेरा इतना बोलना था कि दोनो हँसने लगी ।

उन्हें हँसते हुए देख मैं थोड़ा शर्माया की तभी किरण ने एक क्यूट सा एक्सप्रेशन देती हुई मेरे सर पर हाथ फेरते हुई बोली ..... शुरू करे प्रैक्टिस ।

फिर हमने प्रैक्टिस शुरू की मैं तो दौड़ नहीं सकता था , इसीलिए स्टार्ट कैसे करना है और कंसिस्टेंसी कैसे बनाए रखना है किरण को बता कर जल्द से रुही के पास पहुंचा ।

रूही अभी थोड़ी सीरियस मूड में शान्त खडी थी ।

मैं ... क्या सोच रही हो रूही ।

रूही ... कुछ नहीं ।

मैं ... आज ग्राउंड कैसे आना हुआ ?

रूही ... तुमसे कुछ बात करनी थी बताई तो थी ।

रूही के मुँह से ये बात सुनते ही एक बार फिर समय मेरे लिए थम सा गया । अब तो दिल की धड़कनें मेरा सीना चीरकर बाहर आने को तैयार धक - धक ।

मैं ... हाँ बताओ ना क्या बात है ( कंपते होठो से पूछा ) ।

रूही .... ( सीरियस होते हुए ) क्या तुम मुझे लाइक करते हो ?

ओह ये कौन सा पल है मेरा तो कलेजा ही बाहर आ गया , जो बात मैं बोल ना सका वो रूही ने खुद सामने से बोल दी ।

मैं चेहरे पर अनगिनत भाव लेते हुए कुछ नहीं बोला केवल सहमति भारी नजरो से रूही की ओर देखता रहा ।

रूही अब फिर सीरियस होते हुए ...

" मैं जनती हु की तुम मुझे पसंद करते हो पर बेहतर यही होगा कि अब इस बात को आगे ना बढ़ाया जाए "

मैं अपने आप से ही ....

" हे भगवान ये क्या हो गया किस बात की सजा है कहीं यह नाराज तो नहीं , नहीं मुझे लगता हैं कुछ और ही बात बोल रही हैं पर मैं समझ नहीं पा रहा "

अब मैं अनगिनत सवालों भरी नजरों से बस रूही को देख रहा था ।

एक बार फिर रूही अपनी बात बढ़ते हुए ...

" देखो तुम बहुत अच्छे हो , हैंडसम हो,स्मार्ट हो, तुम्हे मुझ से भी अच्छी लड़की मिल जाएगी पर एक बात तय है कि यदि तुमने मुझसे कोई उम्मीद रखी कि मैं कोई कम्मिटेड रिलेशनशिप निभाऊं तुम्हारे साथ तो पॉसिबल नहीं है क्योंकि तुम्हारा और मेरा कोई मेल नहीं "

हे भगवान यह क्या हो रहा है मैं पागल हो जाऊंगा ।

पर रूही अपनी बात रखते हुए ...

" देखो शुरुआत में ही अपने अरमानों को काबू में कर लो तो यह ज्यादा अच्छा रहेगा हम दोनो के लिए क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मेरा तुमसे मिलना बात करना तुम्हें किसी गलत फहमी की ओर ले जाये "

मैं बस मौन अपनी आँखों से उसे देखता रहा । मेरी तो दुनियां ही उजड़ गई टूटे अरमानो और टूटे हुए दिल से बस उसे देखता रहा ।

रूही फिर से ....

" अगर तुम्हारे मन में कोई सवाल या कुछ जानना हो तो अभी पूछ लो क्योंकि मैं नहीं चाहती कि अभी के बाद हम इस बारे मे दोबारा बात करे । और हाँ यदि मुझे थोड़ा भी चाहते हो 1% भी तो आज के बाद मुझसे इस बात की कोई उम्मीद नहीं रखना की कोई कम्मिटेड रिलेशनशिप है हमारे बीच । हम सिर्फ दोस्त हैं उसके आगे कुछ नहीं "

मेरी हालत बयान करने को शब्द नहीं थे , ये क्या हो रहा है मेरे साथ । बस अपने उजड़े अरमानो के साथ रोया सा मुँह लेकर बोला .... जैसा तुम कहो ।

" तुम खुश रहो "

एक पल में ही अब मेरी पूरी दुनिया उजड़ चुकी थी । मैंने केवल नम आंखों से रूही की सूरत एक बार देखी पीछे मुड़ा और वापस वापस अपने घर चला गया ।

माँ शायद मन्दिर गई थी दिया अभी तक सो रही थी और दी मोर्निंग वाक कर अभी लौटी थी । वो हॉल में बैठकर न्यूज़पेपर पढ़ रही थीं । मैंने उन्हें देखा नजरें नीचे किया और जल्दी से अपने रूम की ओर जाने लगा क्योंकि अब दिल इतना रोयासा हो गया था और मैं नहीं चाहता था कि कोई भी मेरा रोना देख ले ।

 
अपडेट -15

दीदी ( पीछे से टोकते हुए ) .... सुन बेटू इधर आ ।

मैं ( धीमी आवाज में ) .... मुझे कुछ काम है नास्ते पर मिलता हूँ

वो तो मेरी दी थी मुझे बचपन से देखती और समझति आ रही थी । मेरी बदली आवज ने जैसे उनके दिल में दस्तक दी हो और वो जल्दी से मेरे पास आ गई ।

मैं बस नीची नजरों से दी को बोला .... बाद में मिलता हूँ ।

पर दी कहाँ मानने वाली थी उन्होंने जबरदस्ती हॉल में बैठा लिया और मेरा चेहरा ऊपर करते हुए .... " क्या हुआ मेरे भैया को कल से परेशान हैं, बता मुझे क्या बात है "

मैं कुछ देर शांत रहा फिर दी ने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए .... " क्या अपनी दीदी को भी नहीं बताएगा "

अब मेरी हालत ऐसी थी कि मुझसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था मैं दीदी से लिपट गया और रोने लगा । दी यूँ तो बहुत मजबूत दिल की थी मगर मेरा दर्द इतना गहरा, मेरा रोना इतना दर्दनाक था कि उनकी आंखें भी नम हो चुकी थी ।

पर अगले ही पल खुद को संभालते हुए उन्होंने मुझसे पूछा .....

क्या हुआ रूही ने ऐसा क्या बोल दिया ।

अब मैं अपने चेतना से बाहर निकलते हुए सवालिया निगाहों से दीदी की ओर देखा । दीदी शायद मेरी बात समझ गई और बोल पड़ी .... किरण का फोन आया था वही बता रही थीं कि तुम अचानक से चले आए ।

मैं खुद को नाकाम नॉर्मल होने की कोशिश करते हुए ... रूही से नहीं पूछा किरण ने की मैं क्यों आया ।

दी ... रूही ने किरण को कुछ नहीं बताया बस इतना बोली राहुल से ही पूछ लेना ।

मैं कुछ सोचता रहा फिर दीदी से बोला कि किरण को फोन करके बोल दो की मुझे कुछ जरूरी काम था ।

दीदी ने मुझे कुछ नॉर्मल होता देख बोली ... " वो तो मैं किरण को जो बोलना है बोल ही दूंगी " । उन्होंने मेरा हाथ अपने सर पर रखते हुए .. " पहले तुझे मेरी कसम तू सच सच बताएगा क्या बात है " ।

लाचार होकर मैंने पूरी बात बता दी अपने पहले दिन के एहसास से लेकर अब तक की पूरी कहानी । मेरी बात सुनकर दी कुछ देर शांत रही फिर बोली ...

" सुन भाई मैं तुम्हें यह नहीं कह रही कि तुम रूही को भूल जाओ पर रूही अपनी जगह बिल्कुल सही है "

इतना सुना तो मैं दी को बस हैरत भारी नजरों से देखता रहा । मुझे इस तरह के जवाब की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी दी से...

कहानी जारी रहेगी ......

 
सभी मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया....

अब लग रहा है इस फोरम में जान है...

ऐसे ही सहयोग देते रहो और विचार भजते रहो...

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