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प्यार - ( गम या खुशी )

शुक्रिया मित्र....

अब से इस कहानी की अपडेट रोज नहीं....

2 दिन में हुआ करेगी...

निराशा की बात नहीं है मेगा अपडेट हुआ करेगी...

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. अपडेट -15

एक उम्मीद आज सुबह ग्राउंड पर टूटी और दूसरी यहाँ । दी ने भी मेरा साथ नहीं दिया, मुझे लगा दी शायद मुझे हौंसला दे पर यहाँ तो वह मुझे अलग होने को कह रही हैं।

खैर दी अपनी बातें आगे बढ़ते हुए....

" देख गलत तब होता कि अगर यह सब वो तुम्हे न बताती और तेरे दिल में क्या है वो ना जानते हुए भी उसे बढ़ावा देती, और फिर जहां से तुम्हारा लौटना ना हो ऐसे समय पर तुम्हें बताती पर उसने तो सुरुआत में ही तुम्हे इस रिश्ते को ना आगे बढ़ाने को बोली "

"बेटू मैं भी एक लड़की हु और हर लड़की की कुछ परेशानियां होती हैं । दोस्त तक की बात तो ठीक है पर उसे भी शायद यह लगा हो तुमसे मिलना , बात करना, हँसना बोलना तुम्हे कोई गलतफहमी मे ना डाल दें इसीलिए वो भी सब कुछ सुरुवात में ही क्लियर कर दी " ।

अब मुझसे रहा ना गया मैं आंखों में आँसू लिए चिढ़ते हुए...

" मैंने ऐसा क्या गुनाह कर दिया मैं तो बस उसे देख कर ही खुश हो जाता था । हाँ जब मैं purpose करता तब मना करती , मैने तो उसे purpose भी नहीं किया । हम तो दोस्त भी थे फिर ये क्यों कहा की मुझसे मिलने की कोशिश मत करना "।

दी.... बेटू फिर गलत सोच रहा है । देख जबतक तू purpose करता तब तक शायद ज्यादा देर ना हो जाये इसीलिए सब क्लियर कर दी और शायद उसकी कोई मजबूरी भी रही हो ।

अब हम दोनों शांत बैठे थे फिर मैंने दी से मिन्नतों भरे शब्दों में कहा.... दीदी बस मेरी इतनी मदद करना कि किसी को यह मत बताना मेरे साथ क्या हुआ ,बोल देना की एक्सीडेंट में मेरा कोई दोस्त अब इस दुनियां में नहीं रहा इसीलिए मैं परेशान हो गया हूँ ।

सुन बेटू मैंने तेरी बात मान पर मेरा एक काम करोगे । मैंने पूछा "क्या" फिर दी बोली कुछ दिनों के लिए कही घूम आओ ।

मैंने अपना एटीएम दी को दिया और बोला सब arrange करके मुझे बता देना मैं अकेला ही जाऊंगा । मैं दी कि बात मान कर राजी हो गया और मैं अपनी तन्हाई के साथ ऊपर अपने रूम में चला गया ।

आज का दिन मेरे लिए काला दिन था । मैं रोता तड़पता अपने रूम से बाहर नहीं आया । दिया और माँ ने भी कई बार दरवाजा खटखटाया पर मैंने किसी को अन्दर नहीं आने दिया । मुझे मालूम भी नहीं कि आखिर रुही ने किस वजह से मुझे मना कर दिया और यह बात मुझे खटकी मुझे काफी बुरा लग रहा था ।

अगले दिन सुबह

मैं किरण से मिला चूंकि उसकी प्रैक्टिस करवाने की जिम्मेदारी मेरी थी तो उसे अंत में सारे नुस्खे बता कर बोल दिया कि मैं 10 दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ तो अब मैं ग्राउंड नहीं आ सकता । यदि मेरे आने तक तुम्हारा टेस्ट नहीं होता तो मैं एक बार चेक कर लूंगा । इतना बोल मैन उससे विदा ली और घर लौट आया ।

हॉल में ही मुझे दी मिल गई फिर उन्होंने मुझे पूरा प्रोग्राम समझाया । मुझे कुछ दिनों के लिए अपने मासी के घर जाना था जो कि दिल्ली में रहती हैं । सारी पैकिंग दी कर चुकी थीं और मुझे सुबह 10 बजे की ट्रेन से निकलना था ।

दी और मैं बात कर ही रहे थे कि तभी पापा वहाँ आये । पापा ने बहुत दुःख व्यक्त किया जो भी मेरे दोस्त के साथ हुआ था (दी को बताई कहानी पर ) फिर मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोले तू किसी बात की चिंता मत कर यह सब तो जीवन का ही एक पहलू है ।

पापा ने मुझे कुछ आध्यात्म की बाते बताई जो मुझे अब बिल्कुल भी सुन्ना पसन्द नहीं था । कुछ देर यूँ ही बाते चलती रही पापा ने फिर मुझे पैसे भी दिए ।

अब समय हो चुका था मेरे जाने का इसीलिए सब मुझे छोड़ने स्टेशन आ रहे थे पर मैंने सबको मना कर दिया पर मेरे मना करने से क्या होता हैं किसी ने मेरी बात नहीं मानी और मेरे साथ साथ स्टेशन चल पड़े । सबको दी ने कहानी बता दी थी इसीलिए कोई मेरे चुप रहने का कारण नहीं पूछ रहा था।

फाइनली स्टेशन पहुंचा वहाँ सीट कंफर्म कर मैं अपनी बर्थ पर पहुंचा । मेरे साथ मेरे घरवाले मुझे छोड़ने बर्थ तक आये फिर मैंने सबसे विदा लेकर उन्हें घर भेज दिया ।

सबके जाने के बाद मैं अपनी तन्हाई में फिर से डूब गया । वहाँ मेरे साथ कौन है कौन नहीं इससे मुझे कोई लेना देना नहीं था , अब शुरू हुआ मेरे चंडीगढ़ से दिल्ली का सफर मेरे उजड़े अरमानो के साथ ।

पर कहते हैं ना आपका बुरा वक़्त कभी जल्दी नहीं जाता वही इस समय इस सफर पर मेरे साथ हुआ । मैं अपने ग़मो के साथ अपनी बर्थ पर चुप चाप लेटा रहा और रूही के साथ बिताए हसीन लम्हो को याद कर अपने मायूसी को दूर करने की कोशिश कर रहा था । एक पल याद कर खुश हो जाता उसके दूसरे पल आंखों में आंसू होते ।

मुझे बाकी के बर्थ का पता नहीं पर हाँ चंडीगढ़ से यही कोई 5 घटे बाद ट्रेन गाजियाबाद जंक्शन पर रुकी मैं अबतक सोया था । मेरे पास कुछ लोग आपस में बात कर रहे थे उनमें से एक ने मुझे उठाया.... भाई साहब ।

मैं... हुन्न बताये ।

 
अपडेट - 16

आदमी 1.... हम ( 4 लोग थे ) जरा नीचे जा रहे है यह बच्चा मेरा सो रहा है प्लीज् इसका ध्यान रखयेगा । मुझे क्या करना था मैं तो खुद अपनी इस चेतना से नॉर्मल होने की कोशिश कर रहा था । मैंने उसे देखने की हामी भरते हुए उन्हें जाने के लिए बोला ।

फिर चारों नीचे उतर गए । ट्रेन जंक्शन पर खड़ी थी और अभी सिग्नल भी नहीं हुए थे मैं उदास तन्हा अकेला बैठा था ।

मेरे फ़ोन की घंटी बजी मैने उठाया कॉल दिया का था । वो मुझसे बात करने लगी आज वो भी बहुत इमोशनल थी पहली बार जो मैं उससे दूर जा रहा था , दिया मुझे मिस कर रही थीं ।

हमारी बातें यू ही चलती रही पर मैं अपने दर्द से बाहर नहीं निकल पा रहा था इसीलिए मैंने दिया को बाद में बात करने को कहा ।

अभी मैंने कॉल कट ही किया था कि 4,5 लोग ट्रेन के कंपार्टमेंट में अंदर आये सब के सब 5'8 से 6 फ़ीट के थे । देखने में फिट और किसी पहलवान की तरह । वो मेरी बर्थ के पास आये वहाँ का माहौल देखा , पर मैं अब भी अपनी चेतनाओं में डूबा हुआ था कोई मतलब नहीं । कि तभी एक आदमी ने उस बच्चे को उठा लिया । मुझे थोड़ा अटपटा लगा तो मैंने उन्हें टोक दिया ।

" हेल्लो सर लाल को कहाँ ले जा रहे हो "

उनमें से एक आदमी आगे आया मुझे गौर से देखा ( दोस्तो बताना चाहूंगा कि अभी मेरी फिजिकल कंडीशन ऐसी थी कि कोई भी देख कर या तो पागल या फकीर समझता )

जो मुझे घूर रहा था अब सवाल पूछते हुए ।

आदमी 1 ... क्या यह लाल तुम्हारे साथ है ।

मैं... नहीं ।

आदमी 1.... तो क्यों पूछ रहा है ?

मैं... क्योंकि इसकी जिम्मेदारी कुछ लोग मुझे सौप कर गए है।

आदमी2... कोन से लोग ।

मैं.... अभी आएंगे तो उन्ही से पूछ लेना ( मेरा व्याकुल मन अब थोड़ा भी उनसे बात करने का नहीं कर रहा था )

उसने मुझे फिर देखा आस पास बात की और वही बैठ गया । पर लाल अभी भी अचेत अवस्था में था । उसे उनलोगों ने काफी जगाने की कोशिश की पर उठा नहीं । मैं अपनी बर्थ पर लेटा सब देख रहा था इतने में ट्रेन ने हॉर्न देना शुरू किया । अब ट्रेन चल दी पर यह क्या वो चारो तो ट्रेन में बैठे ही नहीं । अब मुझे क्या कोई आये या जाए ,पर अब मुझे इन सब से ज्यादा प्यार लूट जाने की चिंता हो रही थीं । फिर मैंने सोचा अभी 10मि मे दिल्ली आ जायेगा लाल को यदि कोई लेने आया तो ठीक वरना मैं इसे पुलिस को दे दूँगा ।

मैं इन्हीं सब सोच में लगा कि तबतक दिल्ली भी आ गया ।

चारों जो लाल को घेरे बैठे थे अब गेट पर खड़े थे । स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही में लाल को उठाने लगा पर शायद वो बेहोश था इस वजह से नहीं उठ रहा था । मैंने किसी तरह अपने कंधे का सहारा दे उसे बाहर लाया । पर बाहर आते ही मुझे कुछ cops और कुछ रोते बिलखते लोगों ने घेर लिया ।

लेकिन मुझे अब भी इस सब से कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि मेरा अपना ही गम था और मैं उसमें खोया हुआ था । तो दोस्तो यह मामला किडनैपिंग का है जिसमें अब मैं शक के घेरे में था । सब ने बच्चे को मुझ से अलग किआ । बच्चे को उसके परिवार को सौंप दिया। और मुझे वहीं पास के थाने ले जाया गया ।

आप सब यही सोच रहे होंगे क्या बकवास है पर सच तो यही है जो प्यार का गम होता हैं इसमें जीना एक सजा के बराबर होता हैं और मौत वो खूबसूरत तोहफा हैं जो हँसके कबूल किया जाता हैं। तभी तो लोग प्यार में आत्महत्या कर लेते है खुद को इतनी तकलीफ देते है पर उफ तक नहीं करते ।

खैर वापस कहानी पर आते है पुलिस स्टेशन में...

.

मेरे गाल पर थप्पड़ पड़ रहे थे और कानों में एक सवाल

..

" बता तेरे साथ और कौन कौन है कबूल कर "

पर मैं तो जैसे उसका थप्पड़ तोहफे की तरह कबूल करता । आज तो जैसे यह लोग मेरा दर्द पर मरहम लगा रहे हो । 3र्ड डिग्री के लिए भी गया उधर मेरे ऊपर डंडे पर डंडे पड़ते गए और मैं बिना कुछ कहे उस सवाल पर मुस्कुरा देता । उनका गुस्सा इधर भड़क जाता और मैं राहत महसूस करता ।

फाइनली मैं बेहोश हो गया कितनी देर पता नहीं । यही करीब 8 बजे मेरी नींद खुली तो मैं किसी आलीशान बुगलौ मैं था......

कहानी जारी रहेगी.....

 
शुक्रिया मित्रों...

आज 2 अपडेट होंगे यह छोटा अपडेट अभी... और शाम में भी होगी अपडेट सो बने रहे....//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg
 
अपडेट - 17

मैं थोड़ी हैरानी मे की यहाँ कैसे पहुंचा ।

दर्द पूरे शरीर में था जो कि मुझे महसूस हो रहा था फिर मैं सारे घटनाक्रम को याद करने लगा । बीती बातो को याद करके मैं फिर से शून्य ( 0 ) की स्थिति में पहुंच गया और फिर अनयास ही मेरी आँखों से आंसू छलक आए ।

मैं फिर से उसी तड़प मै डूब गया तभी दरवाजे पर आहत हुई मैं पीछे मुड़ा और शॉक्ड हो गया.....

दरवाजे पर वही लाल और उसके साथ दिल्ली के मशहूर उद्योगपति मोहित चौहान भी साथ मे थे । ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ समझ से परे था ।

मोहित जी मेरे पास आते ही पूछने लगे... बहुत दर्द हो रहा है क्या ( शायद मुझे रोता हुआ देख पूछ रहे हो) अबतक उनके परिवार के दूसरे सदस्य भी आ पहुंचे ।

मैंने मोहित जी से पूछा... अंकल आप किस दर्द की बात कर रहे है ।

बड़ी हैरानी से देखते हुए.... वही जो पुलिस ने तुम्हें टॉर्चर किआ था..।

पता नहीं मुझे क्या हो गया मैंने हँसते हुए जवाब दिया... अंकल वहाँ तो मेरे दर्द पर मरहम लगा था इतना सुकून तो मैंने कई दिनों से महसूस नहीं किया पर हाँ दर्द अब हो रहा है ।

मेरी बात शायद सबके परे थी इसीलिए सब के सब मेरे जवाब के बाद मुझे बड़ी हैरानी के साथ देख रहे थे । अब सब चुप मेरी ओर देख रहे थे मैं चुप्पी तोड़ते हुए... अंकल यह तो बातये मामला क्या था और मैं यहाँ कैसे पहुंच गया ।

फिर अंकल ने सारी बात बता दी कैसे उसका बच्चा 1 हफ्ते पहले किडनैप हुआ पुलिस ने कैसे इन्वेस्टिगेशन की ।

फिर प्लानिंग कर उन्हें दिल्ली आने पर मजबूर किया, मेरा उस केस में फंसा और क्लीन होना और अंत में... मुझे माफ़ कर दो बेटा मेरी वजह से तुम्हारे साथ यह सब हुआ ।

मैं बिना किसी रिएक्शन के उनकी बातें सुनता रहा और बिना किसी एक्सप्रेशन उनसे कहा... अपने तो मेरे दर्द की दवाई करवाई है , शुक्रिया अंकल पर अब मैं चलता हूँ ।

मेरी बात जैसे उनके लिए पहेली थी समझ से परे लेकिन मेरी जाने की बात पर पूरा परिवार ज़िद पर आ गया... नहीं कुछ दिन यहाँ बिता कर जाओ । और फाइनली मैंने हाँ कर दी ।

लेकिन मुझे वहाँ किसी का भी होना अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि मैं तो अब बस रोना चाहता था । अपनी वीरान दुनिया में अकेला रहना चाहता था इसीलिए मैंने सब को बोल दिया कि... मैं अभी आराम करना चाहता हूँ ।

फिर अंकल ने मुझे मेरा फ़ोन दिया और वहाँ से चले गए कहा घर पर बता देना

और इसी बीच मेरे घर पर जिस दिन से दिल्ली के लिए निकला मतलब2 दिन पहले..

शाम का समय यही कोई 5 बजे

सिमरन दिया से

दी... बात हुई थी राहुल से ।

दिया... हैं 3 बजे के आसपास हुई थी ।

दी.. क्या सब बोल रहा था ।

दिया.... कुछ नहीं दीदी बस बोला दिल्ली पहुंच कर बात करता हूँ । अभी कॉल लगाऊ क्या भैया को ।

सिमरन... नहीं रहने दे दिया आराम कर रहा होगा तू एक काम कर मासी से पूछ लें पहुचा की नहीं ।

दिया अब मासी को फ़ोन लगते हुए

मासी... हेलो ।

दिया... नमस्ते मासी में दिया ।

मासी...हाँ बेटा बोल ।

दिया.... मासी राहुल भैया पहुँच गए?

मासी... अबतक नहीं बेटा ।

इतना सुनकर दिया ने बाई बोलकर फ़ोन कट कर दिया । अब फिर दिया सिमरन बात करने लगी ।

दिया... भैया नहीं पहुचे अभी तक ।

दी... लगता हैं ट्रेन लेट होगी।

दिया... हाँ दी मुझे भी ऐसा ही लगता है ।

फिर दोनों अपने काम मे लग जाते है । अब शाम 6 बजे दी ने मासी से बात की लेकिन फिर वही जवाब नहीं पहुंचा ।

अब थोड़ी सि चिंतित दी ने रेल इंक्यूरी में फ़ोन लगाया तो पता चला ट्रेन अपने समय पर दिल्ली पहुंच गई है यानी 3:45 पर ।

दी को अब और ज्यादा चिंता होने लगी राहुल को कॉल करने लगी पर फ़ोन स्वीच ऑफ ।

कहानी जारी रहेगी....

 


अपडेट - 18

दी बड़ी मायूसी के साथ गुमसुम अपने कमरे में बैठी थी और तभी । दिया उसे बुलाने आई.... दीदी माँ तुम्हे किचन में बुला रही हैं ।

दी बड़ी मायूसी और दर्द भरी आवाज के साथ.... दिया, बेटू अभी तक नहीं पहुंचा । मैंने पता किआ तो ट्रेन भी टाइम पर थी ।

अभी दिया भी थोड़ी चिंता में, और इसी चिंता में उसने राहुल को कॉल किआ फ़ोन अब भी स्विच ऑफ था ।

दोनो बहने अब चिंता के भवर में की... अभी तक नहीं पहुंचा, फ़ोन भी ऑफ, कहाँ गया होगा, एक कॉल तो कर देता ।

फिर सिमरन ने पापा को फ़ोन लगाया ऑफिस.... हेल्लो पापा ।

पापा... हाँ बेटा बोलो ।

सिमरन.... पापा अभी तक राहुल नहीं पहुंचा ।

पापा... ट्रेन लेट होगी ।

सिमरन... नहीं पापा ट्रेन तो टाइम पर दिल्ली पहुंच गई और राहुल का फोन भी ऑफ है ।

पापा... बेटा हो सकता है दिल्ली घूम रहा हो अभी रात तक फ़ोन आ जायेगा ।

इसी तरह अब 8 बज चुके थे राहुल का कोई फ़ोन नहीं आया , दी उदास अपने कमरे में आंसू बहा रही थीं । एक अनजाने से डर के बीच.. " राहुल ने कही कोई गलत कदम तो नहीं उठा लिया "

अब दिया सिमरन के पास आती हैं उसे उदास रोता देख वो भी चुपचाप अपनी बहन के बगल में बैठ जाती है और आंसू तो उसके भी छलक जाते है । तभी दोनो को ढूंढते माँ अंदर आ जाती है । दिया और सिमरन की हालत देख माँ बिल्कुल शॉक्ड हो जाती है फिर करण जानने के बाद कहती हैं...

" चलो शांत हो जाओ दोनो , अब उसे बड़ा हो जाने दो , अकेले घूमेगा तभी दुनियादारी की समझ आएगी..."

लेकिन अंदर ही अंदर माँ के मन में भी चिंता जाग जाती है ।

अगले दिन सुबह 5 बजे

ट्रिंग ट्रिंग... हेल्लो मासी... हाँ बोल बेटा.... राहुल पहुंचा.... अभी तक नहीं बेटा फ़ोन कट ।

माँ , पापा, छोटी, तुम सब सोते रहो मैं जा रही हूं । माँ कमरे से बाहर आते हुए.... क्या हुआ सिमरन सुबह - सुबह क्यों सारा घर सर पर उठाया है ।

अबतक घर के सारे लोग हॉल में आ चुके थे ।

दी सब से... राहुल अबतक नहीं पहुंचा, पता नहीं कहाँ होगा , ये लड़का भी ना सबको परेशान करता है आने दो इसे इसकी तो मैं खबर लेती हूँ ।

दी कि बात वाकई चिंता वाली थी माँ और पापा के लिए । अब चिंता की लकीरें सबके चेहरे पर साफ नजर आ रही थीं । अब जैसे जैसे वक़्त बीते बैचैनी बढ़ती जा रही थीं ।

अभी दिन के 12 बज रहे थे दी बहाना मार कर किरण के घर चली गई । अभी किरण के घर रूही और किरण की माँ थी ।

आंटी किचन में खाना बना रही थी और रूही हॉल में बैठकर टीवी देख रही थीं । जैसे ही रूही की नजर सिमरन पर पड़ी तो वो चोंक गई । क्योंकि इस समय सिमरन के चेहरे से साफ लग रहा था कि बहुत रोई और चिंता में थी ।

जब रूही ने सिमरन की ऐसी स्थिति देखी तो दौड़ कर सिमरन के पास गई और अंदर अपने रूम में ले गई । रूही ने सिमरन को हैरान भरी नजरों से देखते हुए... " यह आपने क्या हाल बना रखा है , क्या बात है बताओ ना प्लीज "

सिमरन ने फिर सारी बात बताई ग्राउंड से लेकर दिल्ली जाने की प्लानिंग तक फिर दिल्ली ना पहुँचना । और अंत मे..

" मैं ये नहीं कहूंगी की तुमनें गलत किया क्योंकि मैं भी एक लड़की हूँ और लड़की की परेशानी समझ सकती हूं पर इतना जरूर कहना चाहूंगी कि तुम्हे इतनी जल्दी फैसला नहीं लेना चाहिए था । क्योंकि संसार में एक बार भगवान मिल सकता हैं पर सच्चा आशिक़ नहीं "

रूही बस दी को चुपचाप सुनती रही और दी इतना बोलकर वहाँ से घर लौट आई ।

अब समय बीतता चला गया शाम 5 बजे तक हमारे सारे दोस्त, रिस्तेदार, और जानकारों को सूचना मिल चुकी थी मेरे गायब होने की और रात होते होते घर में मातम छा गया ।

अगले दिन भी यही हालत थी ।

अब यहां मेरा फ़ोन ऑन...

फ़ोन ऑन होते ही 400 मिस्ड कॉल मेरे मोबाइल पर जिसमें अधिकतर घर से कॉल था , फिर कुछ कॉल ऋषभ के , कुछ रिलेटिव और कुछ अननोन कॉल थे ।

अब मेरा दिमाग दोहरी चिंता में था एक तो अपने प्यार के लूट जाने का गम और दूसरी की अब घर पर क्या बताऊ क्योंकि मैं उन्हें किडनेपिंग वाली बात बता कर परेशान नहीं कर सकता था । मैं इन्हीं सब बातो को सोच रहा था कि मुझे ऋषभ का ख्याल आया और मैंने कॉल लगा दी ।

ट्रिंग ट्रिंग

 
अपडेट - 19

ऋषभ... राहुल मेरे भाई कहा है यार सब बहुत परेशान है ।

मैं... इसीलिए तो तुझे फ़ोन किआ है ।

ऋषभ... हाँ तू तो अब हीरो बन गया है ना हम सब की क्या चिंता तुझे ( गुस्से में ) ।

मैं... तेरा हो गया तो मैं कुछ बोलू ।

ऋषभ... हाँ कमीने बोल ,2 दिन से परेशान हैं सब तेरी कोई खबर नहीं पर तु बोल ।

मैं... सॉरी भाई गलती हो गई मुझे माफ़ कर दे , अब मेरी बात सुनेगा या और कुछ है ।

ऋषभ.... नहीं अब बता ।

मैं.... सुन मैं यहाँ दिल्ली आते ही किसी के साथ डेट पर था , 2 दिनों तक मैं उसके साथ मजे कर रहा था लेकिन गड़बड़ ये हो गई कि मैं कोई डिस्टरबेंस नहीं चाहता था इसीलिए फ़ोन ऑफ कर दिया । पर मैं उसके साथ इतना बिजी हो गया कि समय का पता ही नहीं चला ।

( एक पूरी नई कहानी बना दी क्योंकि सच में उसे बता नहीं सकता था और इस से अच्छा कोई झूठ हो नहीं सकता था क्योंकि इस तरह के झूठ होने पर ज्यादा सवाल नहीं होते )

ऋषभ.... कमीने साले तूने इतना बड़ा कांड कर दिया और अब बता रहा है । मैं कुछ नहीं जानता अब मैं तेरे घर सब बता दूंगा की तू कहा लगा हुआ था । ( बनावटी गुस्सा )

मैं... भाई नाराज क्यों हो रहा है मैं तो बस कुछ देर टाइम पास कर रहा था मुझे क्या पता था कि वो मुझे2 दिन नहीं छोड़ने वाली ।

ऋषभ... पर तु यह बात तब बता देता जब डेट पर जा रहा था तो मैं मैनेज कर लेता ।

मैं.... भाई मैने सोचा एक बार की कहानी है तो 2 घंटे से ज्यादा नहीं लगेंगे पर मुझे क्या पता था कि उसकी fantasy इतनी बढ़ जाएगी कि मुझे 2 दिन लग जाएंगे ।

ऋषभ... साले मजे अकेले करो और फंस जाओ तो दोस्त को याद करो ।

मैं... छोड़ न यार कुछ सोच घर पर क्या जवाब दू ।

ऋषभ कुछ सोचते हुए... तू एक काम कर घर फ़ोन करके बोल दे कि जब तू दिल्ली जा रहा था तो नशा खुरानी ग्रुप ने तुझे बेहोश कर दिया और तू अभी होश में आया है ।

मैं.... यार तू कुछ भी बता रहा है , उस दिन 3 बजे दिया से बात हुई थी और 3:45 पर ट्रेन भी दिल्ली पहुंच गई थी । और कही सुना है नशा खुरानो ने अगर बेहोश किया तो 2 दिन होश नहीं आया हो ।

ऋषभ... ( चिढ़ते हुए ) पागल पहली बात यह कि ड्रग ओवरडोज़ से 2 दिन क्या हफ़्तों तक होश नहीं आता बेहोश रहते हैं पता कर लेना दूसरी यह कि , यह तो कहानी की आउटलाइन है तू जोड़ तोड़ तो सकता हैं । जरूरी है कि तुझे बेहोश चंडीगढ़ में ही किया गया हो दिल्ली पहुंचने के कुछ समय पहले भी तो कर सकते है ।

ऋषभ की बात मुझे कुछ ठीक लग रही थी इसीलिए मैंने बाई बोलकर फ़ोन कट कर दिया और उसकी बातों पर विचार कर रहा था । सोचते सोचते मैं अपने कदम पीछे किए की तभी आउच ।।।।।

कहानी जारी रहेगी.....

 
माफी चाहूँगा मित्रों....

avi भाई की कहानी में इतना खो गया....

की खुद की कहानी पर ध्यान नहीं दे पाया....

कल से डेली अपडेट मिलेगी सबको....

टाइम भी फिक्स है सुबह 9 से 10 के बीच...

अगर लेट हुआ तो माफ कर देना समझ लेना तबियत खराब है....

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अपडेट - 20

मैं पीछे मुडा तो परिधि ( मोहित चौहान बड़ी लड़की उम्र लगभग मेरे बराबर ) को देख कर हैरान हो गया ।

मैंने पूछा परिधि से.... आप कब आई यहां और मुझे बताया क्यों नहीं ।

परिधि... मैं तो तब से यहाँ हु जब से आप दिल्ली में मजे कर रहे हो ।

परिधि की बात सुनकर मैं थोड़ा झेप गया और बोला... किसी की बाते सुनना वो भी छुप कर गलत बात है ।

परिधि... वो सब रहने दीजिए पहले घर बात कीजिए सब चिंता में होंगे ।

फिर मैंने कहा... बात तो कर लूं पर पहले सोच लू कहना क्या है ।

परिधि... मैं एक बात कहूँ ।

मैं... हाँ कहो ।

परिधि... आप सब सच बता दीजिए इससे आपको आगे परेशानी नहीं होगी ।

मैं... नहीं बता सकता घर पर पहले से ही सब परेशान हैं मैं उन्हें और परेशान नहीं कर सकता ।

परिधि... फिर तो नशे वाली बात बता दीजिए लेकिन उससे पहले एक काम करना होगा ।

मैंने पूछा... क्या करना होगा ।

उसने मेरा फ़ोन अपने पास लिया और उसे स्विच ऑफ कर दिया । और सिम कार्ड निकलने लगी । अबतक जो मैं चुप बैठा था पूछ ही बैठा... अरे ये आप क्या कर रही हैं, सिम कार्ड क्यों निकाल रही हैं

परिधि ने मुझे शांत रहने का इशारा किया और सिम कार्ड निकाल कर तोड़ दिया । मेरा फ़ोन अपने पास रख लिया और अपने फ़ोन में नया सिम कार्ड डाल कर... लीजिए अब इससे अपने घर बात कीजिए ।

पर मैं तो हैरानी से उसे देख रहा था उसे शायद यह बात पता थी कि मैं क्यों हैरान हूं इसलिए मुझे समझाने लगी...

" देखिए आप को नशा दिया गया है और सारा सामान चोरी हो गया है, 2 दिन तक बेहोश थे पर जब आपको होश आया तो पता चला कि आप लुट चुके है । आपके समान मे केवल आपका खाली पर्स था जिसमें आपका ATM और कुछ id थी क्योंकि यह चीज़े उनके किसी काम की नहीं थी । आपने नया फ़ोन लिया है सिम कार्ड आपको उस फैमिली की वजह से मिला जिन्होंने आपकी मदद की । आप 2 दिन से उसके घर रह रहे हो और उन्ही लोगो ने आपको पर्स वापस किया और उन्हीं की ज़िद की वजह से आपको उनके घर रुकना पड़ा "

यह क्या था, दिमाग है या टीवी सीरियल की कैरेक्टर, या विकिपीडिया, या कंप्यूटर ब्रेन ।

सब कुछ ऐसे प्लान किया कि मैं तो दंग रह गया । इतना तेज दिमाग मैने अपने दोनों हाथ जोड़कर उसे दिखाते हुए कहा...आप महान है माते ।

परिधि मेरी बातों पर खिलखिला कर हँसने लगी , अपना फ़ोन मुझे दिया और मेरे कॉल डिटेल से सबके नम्बर डायरी पर लिख दिए थे उसने । तो अब मुझे फ़ोन करना था घर पे , परिधि मुझे फ़ोन देकर बात करने को बोली । अभी 9:30 बज रहे थे कॉल दिया ने उठाया....

दिया... हेल्लो कहिए किस्से बात करनी है ( मेरा अननोन नम्बर था )

मैं... हाँ छोटी ।

मैं बस अब इतना ही बोला की सामने से रोने की आवाज शुरू हो गई दिया सिसक सिसक कर बस रो रही थीं ।

मैं... छोटी बात करेगी या फोन रख दूं ।

पर कोई जवाब नहीं आया बस सिसकिया , तभी मैने फ़ोन कट किया और पापा को फ़ोन लगाया ।

पापा... जी कहिए कौन ।

मैं... पापा मैं ।

पाप ने जैसे ही मेरी आवज सुनी एकदम से खुश हो गए वो अपनी खुशी बयान नहीं कर पाए फिर हमारी बाते शुरू हुई , परिधि ने जैसा मुझे बताया सैम बोलता गया । पापा बिना किसी शक के मेरी बात पर यकीन कर चुके थे । उन्होंने परिधि से बात कर उसे और उसकी फैमिली को धन्यवाद किया ।

मैं अब.... पाप प्लीज सबको समझा दीजिए क्योंकि उनका रोना मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा और मैं किसी से बात नहीं करूँगा ।

फाइनली पापा ने फ़ोन कट करने को कह कर खाकी वापस तेरे पास कॉल करता हु ।

करीब 10 मि बाद सबके कॉल आए रोते गाते सबने मुझसे बात की और परिधि से भी बात की । इतनी तेज दिमागी बातों में मेरी माँ से 2 दिन और रुकने की इजाजत भी ले ली ।

अब सब खुश थे , परिधि ने मुझे फिर बताया कि ऋषभ से बात करूं और उसे कहूँ की घर पर यह ना बताए कि कॉल मेरे नम्बर से आया था ।

अब फिर ऋषभ से.... ऋषभ ।

ऋषभ... आप कौन ।

मैं.... तेरा चाचा राहुल ।

ऋषभ... बोलिए अंकल ।

फिर मैंने उसे बताया कि किसी को यह न बताए कि कॉल मेरे नम्बर से आया था । और मैने उसे प्लानिंग समझा दी अंत मे उसने मुस्कुराते हुए कहा.... " साले तू अभी भी है ना उसी के साथ क्योंकि यह प्लानिंग तेरी नहीं हो सकती, मैने प्लान बताया नहीं, कोई दूसरे को फ़ोन कर नहीं सकता, दिल्ली में तुझे बस वही लड़की जानती है "

फ्रेंड्स परिधि मेरे पास ही खड़ी थी और ऐसा भी नहीं कि बहुत दूर खड़ी हो उसे मेरे और ऋषभ के बीच चल रही बात कुछ कुछ सुनाई दे रही थीं ।

ऋषभ.... एक बार बात तो करा दे मेरे भाई ।

मैं कुछ बोलने वाला होता हूं कि उससे पहले फ़ोन परिधि ने अपने पास ले लिए जैसे ही मैं फ़ोन उसके हाथ से वापस लेना चाहता उसने शांत रहने का इशारा किया ।

परिधि.... ( लहराती आवाज में ) हेल्लो....।

ऋषभ.... तो आप है जिसने हमारे दोस्त को गायब कर दिया है ।

परिधि... हाँजी बस एक गुजारिश है आपसे ।

ऋषभ... जी हुक्म कीजिए ।।

परीधि.... आपका दोस्त तो आपके ही पास रहेगा बस मुझे 2 दिन और दे दीजिए आपके दोस्त के साथ बिना किसी डिस्टर्बेंस के ।

ऋषभ... बाई मैडम जी , ले लीजिए 2 दिन । और फ़ोन कट....

मैं हैरानी से परिधि की ओर देखते हुए " ( मन मे) कितनी शरारती लड़की है " फिर रहा नहीं गया तो पूछ ही बैठा कि.... क्यों आप मेरे झूठ को सच करने में लगी हैं ।

परिधि.... अभी आप सस्पेंस में रहे कि मैंने ऐसा क्यों किया , बस आप इतना जान ले कल आप मिस परिधि चौहान से मिलेंगे और फिर देखएगा आगे क्या होता है । अब आप फ्रेश होकर खाने पर चले ।

वो मुझे देख कर स्माइल दी और चल दी । उसे इस तरह से खुश होता देख में भी मुस्कुराया । आज बहुत दिनों के बाद यह बो पल था जब मेरा ख्याल बिल्कुल भी रूही की ओर नहीं था

और अब मैं परेशान क्योंकि दिमाग तो मैं देख ही चुका था परिधि का और शरारत भी और कल का ख्याल मुझे एक अजीब असमंजस में ले जा रहा था ।

खैर में पहले से बहुत नॉर्मल महसूस कर रहा था और हर परिस्थिति की अपनी ही मुश्किले होती हैं और वही मैं महसूस कर रहा था । दर्द ही दर्द प्यार नहीं मार के दर्द, दर्द जो पुलिस स्टेशन में मिला था ।

मैं खुद में मुस्कुराते हुए... यह दर्द भी कम नहीं है सालो ने बहुत मारा है ।

अभी रात के 10 बज रहे थे मैं फ्रेश होकर हॉल में पहुंचा । हॉल में डिंनिंग टेबल पर केवल परिधि बैठी थी ।

मैं डिंनिंग टेबल पर बैठा और परिधि स्माइल के साथ... आप तो वकाई में बहुत हैंडसम है आपकी पर्सनैलिटी भी लाजवाब है ।

मैं थोड़ा शर्माया इसपर परिधि बोल पड़ी... इसस आपका शर्माना क्या कातिल अदा है ।

अब मैं बिना हँसे नहीं रह सका और हँसते हुए मैंने परिधि से कहा.... क्या आप भी मेरा मजक उड़ा रहे हो ।

हम इसी तरह की बातें करते रहे , खाना आ गया तो खाते खाते भी बात करने लगे । सच कहूँ तो मुझे परिधि का साथ अच्छा लगने लगा ।

खाना खाने के बाद भी हम वहीं बैठे रहे , कुछ वो अपने बारे में बताती रही और कुछ मेरे बारे मे पूछती रही ।

कहानी जारी रहेगी....

 
शुक्रिया मित्रों....

छोटा है पर रोज करूँगा भाई...

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