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प्यार - ( गम या खुशी )

कल तक समय दे दो भाई....

कल अभी तक कि मेगा अपडेट होगी....

हर 3 घंटे में मेगा अपडेट पर अपडेट मिलेंगी....

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अपडेट - 26

मैंने अपना बैग काउंटर पर रखा , पर यह क्या मेरे समान रखते ही ये सेक्युरिटी अलार्म क्यों बजने लगा ? मैं तो बिल्कुल सहम सा ही गया कि हे भगवान अब क्या होगा.....

मैं तो बिल्कुल हक्का बक्का रह गया कि आखिर ये हो क्या रहा है ? परिधि ने जब अलार्म सुना तो वो भी चोंक गई उसने संभावनाओं को समझते हुए शांत रहने को कहा, अपने बॉडी गॉर्ड को अपने पास बुला लिया और एक को बोली कि.... पापा को इन्फॉर्म करो कि हम यहाँ मुसीबत में है ।

बॉडी गॉर्ड मोहित जी से बात करने चला गया और मैं , परिधि अभी भी समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर मामला है क्या....

" क्या यही है वो " एक मैनेजर जैसे दिखने वाले आदमी ने अपने काउंटर के एम्प्लॉई से पूछा उसके साथ 3,4 लोग और भी थे जो वहां एक मैनेजमेंट टीम से लग रहे थे ।

एम्प्लॉई.... जी सर यहीं है ।

वो सब के सब मेरी ओर बढ़ रहे थे की परिधि ने उन्हें बीच में रोकते हुए....

" सुनिए अंकल हमने ऐसा कुछ नहीं किया है जिससे सेक्यूरिटी का कोई इशू हो आपका सिस्टम खराब है । अब जो कुछ भी हुआ हो यहाँ हमारे लीगल एडवाइजर आप से बात करेंगे "

परिधि एक सांस में पूरी बात बोल गई उसका हौसला देख मेरी भी हिम्मत थोड़ी बढ़ गई पर यह क्या उन लोगों ने परिधि की बात पर बिना कोई रियेक्ट किए हँसने लगे ।

उन सबको हँसता देख मैं और परिधि उन्हें हैरानी से देख रहे थे । तभी हमारे सभी सवालों का अंत करते हुए उनके मैनेजर ने कहा....

" सर कोई परेशानी की बात नहीं है । आप हमारे इस मंथ के वो ग्राहक है जो 1 लाख वाले नम्बर पर खरीदारी कर रहे है और आप हमारे वैल्यूड कस्टमर अवार्ड विनर है , और आप ने जीता है एक शानदार ऑडी कार " । और सभी लोग तालियां बजाने लगे ।

हैं यह साला हो क्या रहा है आज , इनाम की बात कर रहे है वो भी ऑडी कार , अच्छा अब मैं समझा यह सब किया कराया यह परिधि की बच्ची का है । इसने अपने बॉडी गॉर्ड के साथ मिलकर के सब प्लान किया होगा ।

मैंने मैनेजर से.... है सर आपके राजा भोज के खानदान से है जो हर 1 लाख नंबर वाले कार बंटाते है । अच्छा मजाक था परिधि , अब क्या हम चले यहाँ से या ये मजाक जारी रखना है तुम सबको ।

मैनेजर.... सर हम आपसे मजाक नहीं कर रहे है । फिर कुछ पेपर की कटिंग्स दिखाते हुए, यह देखिए पेपर जिसमे साफ साफ मेंशन है हमारी पालिसी ।

मैं.... यह पेपर्स तो पुराने है मतलब ओह माई गॉड मैंने अभी कार जीती है ।

मेरे लिए तो यह किसी जादुई पल से कम नहीं था । खुशी से दिल झूम उठा फिर मैं परिधि के पास गया....( उत्साह से ) देखा परिधि हमने कर जीती है । और इतना बोलकर मैंने उसे गले लगा लिया । परिधि मुझे इतना खुश देख कर वो भी खुश हो गई ।

परिधि मज़े लेते हुए... अंकल आप यह कार रख लो हमे नहीं चाहिए, हम तो 8सके साथ मजाक कर रहे थे ।

कौन किसके साथ मजाक कर रहा है परिधि बेटा...

कड़क आवाज के साथ मोहित की एंट्री हुई । वो किसी स्टार से कम नहीं थी । 10 बॉडी गॉर्ड गन के साथ , 4,5 सूट वाले आगे पीछे , 1 लैपटॉप लिए पी . ए . ।

हम दोनों एकदम से चौंकते हुए उनकी तरफ देखने लगे ।

परिधि... पापा आप कब आए ।

मोहित अंकल.... छोड़ो वो सब क्या परेशानी है और कौन परेशान कर रहा है ।

परिधि ने अपने पापा को शांत करते हुए सारी बात बताई । अब परिधि अपने पापा से.... आप तो किसी को भी भेज देते फिर आप खुद क्यों चले आए ।

मोहित अंकल... बेटा मैं तेरी परेशानी में नहीं आऊंगा तो फिर कब आऊंगा । क्या मतलव इतनी संपत्ति की जब मैं खुद अपने बच्चो के सुख दुख में साथ नहीं दे सकता ।

अपने पापा की बात सुनकर परिधि इमोशनल हो जाती है और गले लग जाती है । उनकी बातें सुनने के बाद मैं तो जैसे उनका फैन हो चुका था ।

तभी बीच में टोकते हुए उनके पी.ए. ने कुछ कहा । मोहित अंकल.... शर्मा जी आज की इवनिंग के सारे अपॉइंटमेंट कैंसिल सभी स्टाफ की छुट्टी कर दो अभी से यह मेरा फैमिली टाइम है सो नो डिस्टर्बेंस । कल बातें होंगी अब आफिस में ।

सब स्टाफ और बॉडी गॉर्ड को मोहित अंकल ने वापस भेज दिया केवल 4 बॉडी गॉर्ड, 2 परिधि और 2 मोहित अंकल के और 2ड्राइवर वहाँ रुके । मोहित अंकल ने हम दोनों को फॉर्मेलिटीस के लिए भेजा और हम उस मॉल के मैनेजर के साथ चले गए ।

अभी शाम के 6 बज चुके थे । फाइनली कार की सारी फॉर्मेलिटी पूरी हो गई थी । मैं तो बस खुशी से अंदर ही अंदर नाच रहा था । मेरी खुशी का अंदाजा परिधि को भी था वो भी मेरी खुशी में शामिल थी इस पल को मैं शब्दों में बयान नहीं कर पा रहा था ।

हम दोनों हँसी खुशी मोहित अंकल के पास पहुंचे । मोहित अंकल ने मुझे कार की बधाई दी और वहाँ पूरी चौहान फैमिली पहुंच चुकी थी । फिर हम सब एक साथ दिल्ली की सड़कों पर धामा चौकड़ी मचाते रहे । जहाँ हम तीनों मैं,परिधि और लाल मजे कर रहे थे वहीं अंकल आंटी भी हमारे साथ बच्चे बने हुए थे ।

फाइनली आज का दिन समाप्त हुआ पर आज मुझे एक बात का एहसास जरूर हो गया कि अपनी खुशी आपको उतना खुश नहीं रख सकती जितना आप दूसरों के होठों पर मुस्कान ला कर खुश रह सकते हो ।

मैं वापस आकर अपने कमरे में यू ही लेटा था यही रात के 10 बज रहे होंगे.....

कहानी जारी रहेगी......
 
आज का दु दूसरा अपडेट....

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अपडेट - 27

मैं वापस अपने कमरे में आ कर यू ही लेटा था यही रात के 10 बजे होंगे....

तभी रूम की बेल बजी मैंने सोचा परिधि होगी और दरवाजा खोला सामने अंकल और आंटी थे ।

मैं चोंकते हुए.... अंकल आंटी आप इस समय कुछ काम था तो मुझे बुला लिया होता ।

आंटी.... नहीं बेटा हमने सोचा कि कल तुम चले जाओगे इसीलिए तुमसे बातें करने आ गए ।

अंकल.... अगर तुम्हे सोने जाना है तो कोई बात नहीं ।

मैं... क्या अंकल यदि मैं लाल होता तो क्या आप ऐसे बोलते ? आपका तो हक है मैं सोया भी रहू तो जगा कर काम बताने का

आंटी.... राहुल तुम फ़िल्म ज्यादा देखते हो न ।

मैं... क्यों आंटी ?

आंटी... नहीं तुम्हारे डायलॉग फिल्मी है । और फिर सब हँसने लगे ।

हमलोग आपस मे बात करते रहे बातों बातों में मैंने अंकल से पूछा... " अंकल ना तो मैने लाल की कोई हेल्प की किडनैपर्स से बचाने में और न तो कोई ऐसा काम की आप जो शहर की इतनी बड़ी हस्ती होकर मुझे अपने घर ले आए ।

मेरी बातों से अंकल , आंटी थोड़ा मुस्कुराते हुए...

" बेटा हमारी जिंदगी मैं कई ऐसे लोग आते है जिन्हें हम ढंग से परख नहीं पाते । यह दौलत ,यह शोहरत क्या है कुछ भी नहीं अगर आपके पास आपके चाहने वाले नहीं । मित्र नही आपका अपना परिवार नहीं "

" तो अब रही बात तुम्हारी की क्यों तुम यहाँ हो? तो सुनो तुम अपनी बेवकूफी और इंसानियत की वजह से यहाँ हो ।

मैं बड़े आश्चर्य से अंकल को देख रहा हूं था । अंकल ने बात को आगे बढ़ाते हुए....

" बेवकूफी यह कि तुम ऐसी हालात मैं घर से अकेले निकले जब तुम्हें अपना होश तक नहीं था । कुछ लोगों ने तुम्हे मेरे बच्चे को देखने को कहा और तुमने बिना सोचे समझे जिम्मेदारी उठाई । और अब जब तुम्हे देश के सबसे खतरनाक पुलिस स्कॉड सवाल कर रहे थे तो तुम बिन घबराए जवाब देते रहे बिना किसी बात की परवाह किए । लाल को उनके पास नहीं रहने देना चाहते थे वो भी बिना कुछ जाने कुछ पल की मुलाकात में " ।

" और यही से तुम्हारी इंसानियत शुरू होती है । मेरा लड़का बेहोश था तुमनें उसे सहारा दिया अपने कंधे का । कुछ लोग उसे तुमसे पहले ही अलग कर रहे थे पर तुमनें उसे केवल पुलिस के हाथों ही छोड़ा । जब तुमने मुझे यहां देखा तो तुमने पहचान लिया कि मैं कौन हूं पर मेरा पूरा परिवार स्टेशन पर मौजूद था वो तुम्हें कुछ याद नहीं । तुमने तो स्टेशन पर मुझे ऐसे नजर अंदाज किया जैसे तुम्हारे लिए कोई राह चलता आदमी " ।

कुछ देर रुक कर फिर बोलना शुरू किया....

" मैं जब पुलिस स्टेशन पहुचा तो तुम बेहोश थे पर जब तुम्हारे बारे में उनलोगों ने बताया कि इतना टॉर्चर के बाद तो लोग चिल्लाते है पर तुम मुस्कुराते रहे उनके हर डंडे पड़ने के बावजूद । मेरा कालेज जल उठा तुम्हारी हालत देख कर , मुझे बहुत पछतावा हुआ तुम्हारी इस हालत पर और सच कहूं तो उस वक्त मुझे अपने बेटे तक से नफरत होने लगी थी कि उसकी वजह से एक सच्चे आदमी की यह हालत हुई " ।

और अंत मे.... मुझे माफ़ कर दो बेटा मेरी वजह से तुमनें बहुत परेशानी उठाई ।

मैंने अपना बनावटी गुस्सा दिखाते हुए....

" मैं आप कौन है? कोई नहीं । तो मैं अभी जा रहा हूँ अपनी मासी के घर " ।

अंकल... क्या हुआ बेटा नाराज क्यों हो गए कोई गलती हुई क्या ?

मैं... क्या अंकल नाराज नहीं होऊ तो क्या ? आप बार बार माफी क्यों मांगते हो अपना कहते हो फिर एक पल में पराया कर देते हो ।

मेरी बात खत्म होते ही अंकल आंटी हँसने लगे । फिर हम उस रात बहुत देर तक बातें करते रहे । और अंत मे सबने एक दुसरे को गुड़ नाईट बोला और सोने चले गए ।

अब जब मैंने नार्मल था तो नींद भी नॉर्मलली खुली लेकिन रुटीन टाइम से थोड़ा लेट । अभी 5 : 30 हो रहे थे फिर मैंने अपना ट्रैक सूट पहना और पास के ग्राउंड पर पहुंच गया अपने रूटीन एक्सरसाइज करके 8 बजे वापसी हुई ।

इस ग्राउंड से वापसी के समय मुझे फिर ग्राउंड वापसी और रूही की याद आई पर अब मैं बहुत मायूस नहीं था क्योंकि कहि ना कहि मुझे लगने लगा था कि शायद मेरा एकतरफा प्यार था जो रूही को सता रहा था यदि मेरे ना मिलने से वो खुश है तो यही सही बस वो खुश रहे ।

यही सब सोचते मैं घर पहुंचा । अब तक सभी लोग जाग चुके थे , मैंने सभी लोगों को गुड़ मोर्निंग विश किया फिर ऊपर अपने कमरे में चला आया ।

कुछ देर सॉन्ग सुने फिर फ्रेश होने चला गया । जब लौटा तो मुझे कल का परिधि का मेरे रूम में आना याद आया । मैंने सोचा थोड़ा परिधि का हाल समाचार लिया जाए और चल दिया परिधि के रूम की ओर ।

मैं जब उसके रूम में पहुंचा तो रूम खुला था पर परिधि नहीं थी । मैंने सोचा शायद नीचे नाश्ते पर मेरा इंतजार कर रही होगी और मैं नीचे चल पड़ा । परिधि का अब भी कोई पता नहीं, मैं थोड़ा निराश हुआ फिर सोचा....

" चलो ठीक है कोई काम में होगी "

अब नास्ता भी हो गया और समय भी बीतता जा रहा था । 11 बजे तक जब मुझे परिधि नहीं दिखी तो अंत में मैं आंटी के पास गया पता करने , पर आंटी ने जब बताया कि वो अपने अंकल के पास आज सुबह ही चली गई । मैं थोड़ा निराश हो गया पर आंटी ने जब मुझे ऐसे देखा तो हँसते हुए बोली.... तुम्हारे लिए मैसेज छोड़ कर गई है ।

मैं उत्सुकता से... क्या आंटी ।

आंटी... बोल के गई है 2 दिन मे आ जाएगी और हाफ डे का सफर पूरा करेगी । और उसके बेड पर तुम्हारे लिए कुछ रखा है जाकर कलेक्ट कर लेना ।

अब मैं थोड़ा हल्का फील कर रहा था । मैं अब जा रहा था परिधि के रूम , पर कदम अचानक रुक से गए । आंटी के आंख में आंसू थे पता नहीं किस बात के । मैं आंटी के पास गया अपने हाथों से आंसू पोछे फिर पूछा... क्या बात है आंटी ।

आंटी.... कुछ नहीं बेटा बस ऐसे ही दिल भर आया ।

मैं.... बेटा भी कहती हो और बताती भी नहीं ।

आंटी..... नहीं राहुल मैं चाह कर भी बात नहीं कर सकती क्योंकि परिधि ने साफ मना किया है । अगर उसे मालूम हो गया तो मेरी बच्ची फिर से टूट जाएगी ।

मैं बहुत गंभीर होते हुए.... ठीक है आंटी मत बताइये क्योंकि यह विश्वास की बात है ।

आंटी.... बेटा मेरी एक बात मानोगे ।

मैं... क्या आंटी ?

आंटी.... " तुमसे मिलने के बाद बहुत दिनों बाद मैंने अपनी बच्ची को दिल से खुश होते हुए देखा है , अपना दुख वो कभी किसी के पास नहीं रोई आज तक अंदर ही अंदर बहुत दुख समेटे है । कल मोहित ने जब परिधि को इतना खुश होते हुए देखा तो रह नहीं पाए और मुझे फ़ोन करके बताए । ( रोते हुए ) बहुत अच्छा लगा कल अपनी बच्ची को खुश देख कर । प्लीज हमेशा कांटेक्ट में रहना " ।

मैंने दोनो हाथों से उनके आंसू पोंछे फिर.... आंटी मैं हमेशा आप लोंगो के कांटेक्ट में रहूँगा ।

आंटी के चेहरे पर एक धीमी से मुस्कान आई और मुझे जाकर अपना सामान लेने को बोला ।

और मैं उत्साह के साथ चल पड़ा परिधि के कमरे की ओर की आखिर रखा क्या है परिधि ने मेरे लिए....

कहानी जारी रहेगी......
 
पिक्चर अभी बाकी है....

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अपडेट - 28

अब मैं उत्साह के साथ चल पड़ा परिधि के कमरे की ओर आखिर रखा क्या है परिधि ने मेरे लिए....

मैं भागते कदमों से परिधि के रूम पहुंचा, अंदर बेड पर कार की और एक लेटर रखा था । मैंने जल्दी से वो लेटर उठाया और पढ़ना शुरू किया....

हे,

डियर

मैं 2 दिनों के लिए अपने अंकल के पास जा रही हूं । बहुत दिन पहले से प्लान था उनके पास जाने का इसीलिए जाना पड़ा । सुबह मैं आई थी तुमसे मिलने पर तुम शायद मोर्निंग वाक पर गए थे । इसीलिए मुलाकात नहीं हो पाई ।

मैं कल के लिए तुमसे माफी मांगना चाहती हूँ जो मैंने कहा कि " अभी अपनी पहचान इतनी गहरी नहीं हुईं कि सब बातें तुम्हें बता दूँ " लेकिन बात कुछ ऐसी है कि सही समय पर मैं खुद तुम्हे बता दूंगी । तबतक मेरी विनती है कि हम इसपर चर्चा नहीं करेंगे । और हाँ अपने आप को रेडी रखना क्योंकि जब मैं लौटकर आउंगी तो अपना अधूरा सफर पूरा करेंगे ।

तबतक के लिए बाई तुम अपनी मासी के पास जा सकते हो तुम्हारा समान कार में रख दिया है। और हाँ लेटर पढ़ना हो गया हो तो एक बार कॉल जरूर कर देना ।

बाई... तुम्हारी दोस्त ।

परिधि....

लेटर पड़ने के बाद मुझे बहुत अच्छा लग रहा था । अब शॉक देने की बारी मेरी थी इसीलिए मैंने कार की चाबी ली और भागते हुए कार से वो टेडी निकाल ली और परिधि के रूम में रख दिया ।

फाइनली मुझे अब मासी के यहाँ पहुंचना था इसलिए मैं आंटी से मिला उनसे मिला विदा ली और निकल पड़ा मासी के घर । चूंकि मुझे मासी को सरप्राइज देना था इसीलिए बिना उनको इन्फॉर्म किए उनके घर की ओर चल दिया ।

हालांकि अपनी मासी के घर का पता मेरे पास नहीं था , उनलोगों ने हाल ही में अपना फ्लैट चेंज किया था । इसलिए मैंने माँ को फ़ोन किया....

माँ ने कॉल उठाते हुए... कैसा है मेरा बच्चा ?

मैं... जी अच्छा हूँ माँ ।

माँ.... मासी के पास कब तक पहुंच जाएगा ।

मैं... अभी उनके पास पहुंच जाऊंगा कुछ देर में पर मेरे पास पता नहीं है ।

माँ.... तू कॉल करले न , पिक करने निर्मला दीदी ( मासी ) आ जाएंगी ।

मैं... नहीं माँ सरप्राइज देना है आप पता भेज दो ।

माँ ने मुझे पता लिखवाया, फिर कुछ देर तक माँ से बात करने के बाद मैंने फ़ोन कट कर दिया । मैं अभी रास्ते में ही था कि सोचा क्यों ना एक बार परिधि के साथ बात कर ली जाए पर कुछ सोच कर मैं रुक गया और एक मैसेज लिखा और परिधि को भेज दिया ।

मेसेज कुछ इस तरह था....

" तुम बिना बताए चली गई इसीलिए सजा के तौर पर मैं तुमसे बात नहीं करूंगा । तुम अब सजा भुगतो , जब मिलेंगे तब बात करेंगे " ।

मैं अब मासी के घर जा रहा था अभी कुछ देर ही हुए थे कि परिधि का मैसेज आया....

" हर सजा कबूल है सरकार, पर हम भी चौहान कहलाते है । सोच लो अभी मेरे साथ एक शाम और बाकी है " ।

मेरा रिप्लाई....

" इसका मतलब क्या समझू तुम मुझे डरा रही हो , कोई बात नहीं मैं हर संभावनाओं के लिए तैयार हूँ । तुम्हे जो अच्छा लगे कर लेना पर किसी बात का डर नहीं हमें " ।

परिधि रिप्लाई... तो ठीक है मिलते है 2 दिन बाद ।

इसके बाद कोई मेसेज नहीं हुए और मैं मासी के घर की तरफ चल पड़ा । पता पूछते पूछते मैं मासी के गजर पहुंच गया । मैंने डोर बेल बजाई....

टिंग डाँग...

गेट खुला और एक लड़के ने दरवाजा खोला पर इसे मैं नहीं जानता था । लड़का.... बताइये क्या काम है ।

मैं... मिस्टर क्षितिज वर्मा ( मौसा जी ) का घर यही है ।

लड़का... नहीं आप गलत गेट पर आए है ।

मैं... ओह सॉरी । और गेट बंद कर लड़का अंदर चला गया ।

लगता है माँ ने गलत पता बता दिया है एक और बार कंफर्म करता हूँ ।

मैं... हेल्लो माँ ।

माँ.... हाँ बोल बेटा ।

मैं.... माँ एक बार पता फिर बताना ।

पता पूछकर फिर फोन कट कर दिया । पर यह क्या दोनो पता एक ही है अब कैसे पता करूँ । मैं अब भी उसी गेट पर था और असमंजस में फंसा था । मैंने अब मासी को कॉल किया...

मैं... हेल्लो मासी ।

मासी... कब आ रहा है मेरा बच्चा जल्दी आ ।

मैं.... मासी अभी आ रहा हूँ पता बताओ ।

मासी... तू कहाँ है यह बता मैं खुद आती हूँ तुझे लेने ।

मैं... अरे आप क्यों परेशान हो रही है पता तो बता दो । इतने में फ़ोन कट ।

अरे यार यह फ़ोन भी अभी कट होना था । मैं यह सब सोच ही रहा था एक बार फिर वो गेट खुला और अब मैं वहाँ सबको जानता था सिवाय उस लड़के को छोड़कर..

कहानी जारी रहेगी....
 
आज भाई दूज है सो...

थोड़ा भाई का फर्ज भी निभा लू...

लास्ट अपडेट 9 बजे मिलेगी...//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
 
शुक्रिया मित्रों...

गुड़ नाईट आज बहुत थका देने वाला दिन था...

यह रहा आखिरी अपडेट...

अब कल मिलते है बाई...

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अपडेट - 29

अरे यार यह फ़ोन भी अभी कट होना था । मैं यह सब सोच ही रहा था एक बार फिर वो गेट खुला और अब मैं वहाँ सबको जानता था सिवाय उस लड़के को छोड़कर..

यहाँ मैं सबको देखकर हैरान हो रहा था वहीं सब के सब हँस रहे थे । गेट पर मेरी मासी... निर्मला वर्मा , साथ मे उनकी बड़ी बेटी गुंजन ( 24 ) , बेटा नीरज ( 22 ) और छोटी बेटी सुनैना ( 19 ) और वही लड़का जो पहले गेट खोला था ।

मैं सबको देख कर अंदर से चिढ़ गया....

" बहुत अच्छा , मैं परेशान हो गया और तुम हँस रहे हो मैं अब नहीं रूकने वाला यहाँ "

तभी गुंजन दी बोली... " बेटू नाराज क्यों हो रहा है वो हाँथ में जो पैकेट है अगर हमारे लिए है तो देकर चले जाना " ।

अब तो जैसे मुझे अंदर से ऐसे फील हुआ कि क्या बताऊँ इतना चिढ़ गया कि पूरे गिफ्ट के पैकेट को वहीं दरवाजे पर फेंक दिया और वापस मुड़ गया जाने के लिए ।

तभी नीरज भैया ने मेरा हाथ पकड़ा और बोल पड़े....

" क्या तू यह इतना attitude क्यों दिखा रहा है , मतलव अब हम तुमसे मजाक भी नहीं कर सकते । इतनी गर्मी क्यों दिखा रहा है " ।

इधर भैया की डांट पड़ी उधर मेरी अक्ल ठिकाने आई । मैंने फिर अपनी हरकत के लिए सबसे माफी मांगी ।

मासी... अब हो गया ना सब लोग गेट पर क्या कर रहे हो, राहुल चल बेटा तू अंदर चल । इतना बोलकर मासी मुझे अंदर ले आई और पीछे सभी लोग भी आए ।

मासी ने मुझे खाने का पूछा तो मैंने मना कर दिया फिर हम सब भाई बहन बैठ गए एक साथ एक फैमिली मीटिंग के लिए , और फिर शुरू हुआ हमारी बात चीत का सिलसिला ।

सबसे पहले मैंने उस लड़के के बारे में पूछा तो पता चला कि वो उनके बुआ का बेटा सन्नी है जो एग्जाम के बाद दिल्ली घूमने आया है । बाद में मैंने यह जानकारी भी ली कि मेरे सरप्राइज में आग किसने लगाई तो पता चला दिया थी । उसके बाद हमलोग घंटो बातें करते रहे ।

उनलोगों को फिर ट्रैन और दिल्ली की सारी घटनाएं बताई ( झूठी कहानी ) की कैसे मैं बेहोश हुआ, लगातार बेहोश रहा , फिर 2 दिन चौहान फैमिली के साथ रहा । पर ना तो उनलोगों ने यह जानने की कोशिश की कौन चौहान फैमिली और ना ही मैं कोई डिटेल में गया ।

कार के बारे मे जानकर सब बहुत खुश हुए और शाम को घुमने का प्रोग्राम भी बना पर मैंने सबको इस बात के लिए मना किया कि कार के बारे मे घर पर किसी को ना बताए क्योंकि मैं उन्हें सरप्राइज देना चाहता था । पर ना जाने क्यों अब मेरी इस बात पर हँस रहे थे, खैर....

फिर मैंने जिसके लिए जो जो गिफ्ट लिया था सबको दे दिया लेकिन वो छोटा सन्नी उसके बारे में मुझे मालूम ही नहीं था , और उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि वो कुछ सोच रहा हो कि " सबको कुछ ना कुछ मिला पर मुझे नहीं " । फिर मुझे कुछ ख्याल आया और मैंने ऋषभ के लिए एक रे वैन का चश्मा लिया था वो मैंने सन्नी को दे दिया ।

गिफ्ट पाकर सब लोग खुश नजर आ रहे थे वो अलग बात थी कि वहाँ मैं सबसे छोटा था ( मासी की फैमिली मे ) और फॉर्मेलिटी के लिए सब बोल रहे थे कि इसकी क्या जरूरत थी । पर गुंजन दी मुझे काफी मायूस दिखी ।

मैंने उनके पीछे से गले लगते हुए.... क्या हुआ गुंजन दीदी को गिफ्ट पसंद नही आया क्या ?

गुंजन.... क्या राहुल अब मैं यह जीन्स और टॉप लेकर क्या करूँगी यह मेरे किस काम के ?

मैं बड़े आश्चर्य से.... क्यों दीदी आओ यही परिधान पसंद करती थी ना ?

गुंजन... वो करती थी अब नहीं ।

मैं... क्यों ऐसा क्या हो गया ।

गुंजन.... मेरे भाई तू इस दुनिया में है ना ।

मैं... ( अब चिढ़ते हुए ) दीदी ऐसे पहेलियों में बताओगी तो बात कहाँ से समझ आयेगी ।

आब गुंजन दीदी थोड़ी नाराजगी दीखते हुए...

2 दिन बाद मेरा इंगेजमेंट है और तुझे पता भी नहीं है। अब ये भी मत कहना की कल मौसी, दिया , सिमरन और मौसा जी आ रहे है और तुझे पता भी नहीं ।

"भगवान ये चल क्या रहा है, गुंजन दी का इंगेजमेंट और मुझे पता नहीं जबकि मासी से लगातार टच मैं हूं। घर से सब आ रहे है मुझे पता नहीं, जबकि घर रोज बात हो रही है। कंही परिधि का भूत तो सवार नहीं सब पर जो सब मिलकर मुझे मामू बना रह। हो भी सकता है या गुंजन दीदी की बात सच भी हो सकती है क्योंकि दिया ने भी तो लंहगे की डिमांड की थि"

आब जो भी हो सच तो पता करना ही था और वो पापा को फ़ोन करने से पता चल जाएग।

अब मैं...

"मेरी प्यारी गुंजन दीदी मुझे मांफ कर दो । आप को तो पता ही है आप के दिलवालों की नगरी मैं मेरा कैसा स्वागत हुआ और उस से पहले मेरे दोस्त के साथ घटना (फ्रेंड डाई एक और झूठ) मैं कुछ न जान पाया"

"दीदी अब माफ भी कर दो या उठक बैठक करु "

गंजन दीदी हँसते हुए..... हाँ हाँ बस बस अब मस्का मत मर ये बता की मैं इस जीन्स टॉप का क्या करु ।

मैं....

"बस इतना ही मैंने गलती की है तो अब आपकी इंगेजमेंट की ड्रेस मैं दिलवाउंगा वो भी अभी "

अब मासी से रहा न गया और बोल पाडी....

"गुंजन मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा, सुन तुझे शर्म नहीं आती वो तेरे से इतना छोटा है एक तो अपने पॉकेट मनी से सब के लिए गिफ्ट लाया है और तू डिमांड कर रही है। या तो तेरा दिमाग खराब है या तुझे लालच ने घेर लिया है"।

ओह ऐसे कटाक्ष भरे शब्द अब भला बिना फैमिली ड्रामा हुए, बिना रुठना मनना हुए थोड़े ही न खत्म हो सकता था और तो और सेंटर पॉइंट भी कौन तो मैं ही।

हा हा हा हा(मन मैं ऐसे ही हँसते हुए) जंहा देखो आज कल मैं ही सेंटर पॉइंट बन जाता हूँ ।

खैर 4 : 30 के आस पास सारा मामला सेटल हुआ, रोना और रुठना सब शान्त त। गुंजन दीदी को मैंने तैयार होने को बोलै पर अब वो कान्हा मानने वाली थि, लेकिन मुझे ये बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था की मेरी वजह से दीदी को इतना सुन न पड़ा वो भी उनकी जिंदगी के सबसे सुनहरे पलों में।

मै उठ कर बाहर आया और मैंने माँ से बात की , सबसे पहले तो इंगेजमेंट के बारे मैं कन्फर्म किया, फिर थोड़ी नाराजगी की क्यों मुझे सब बातों से अनजान रखा गया, और फिर मेरी द्विधा की मेरे गिफ्ट की वजह से ऐसा हुआ। माँ को सारी बात समझ में आ गयी उन्होंने फ़ोन रखने को कहा ।

कुछ देर बाद मासी मेरे पास आई और आते ही मुझे कान पकड़ कर बोली....

"तु इतना सैतान क्यों हो गया है, तू ये बता पहले की तेरे पास इतने पैसे आये कान्हा से की तू उसके इंगेजमेंट ड्रेस दिलाने की बात कर रहा है"

फिर मैंने जवाव दिया....

"पहली बात मासी आपने लालच वाली बात बोल कर दिल तोडा है, लोग अपने लोगों से ही आशा करते है अगर मैं कुछ आप से माँग लूँ तो क्या आप को लालच लगेग। और अगर इसे लालच कहते है तो यही सही ।

गंजन दी तो बस इतना पुछा की मैं जीन्स टॉप का क्या करूंगी हो सकता है वो सोच रही हो इतने प्यार से लाया है और पहन भी न पाऊँ, इस से अच्छा तो वापस कर साड़ी ही ले लू । मासी मुझे बहुत बुरा लगा है आप की बातों का । "

"और रही बात पैसों की तो मुझे नीरज भैया ने ही सजेस्ट किया था की स्टडी में मैं अच्छा हूँ और 2 क्लास 10 थ के स्टूडेंट के लेने की। मेरे पास अभी 4 लाख होंगे टुअशन के पैस, 2 साल से तो मैंने पापा से भी पैसे नहीं लिए पर वो तो पापा है की जबरदस्ती मुझे पैसे देते रहते है और उनका जोड़ दूं तो मेरे पास 5 लाख है"।

अब दूसरे तरफ से गुंजन दीदी कान पकरते हुए.... "तु तो बड़ी बड़ी बातें कर रहा है पैसे भी कमाने लगा है कह तो तेरी भी इंगेजमेंट करवा दूँ"। मैंने इस बात पर हल्की मुस्कान दी और मुझे ऐसा एक्सप्रेशन देते देख दोनों हसने लाग।

अब तक 5 हो चूका था फिर गुंजन दी ने मुझे तैयार होने के लिए बोल कर चली गायी।

मै अपने कासुअल ऑउटफिट मैं बाहर आया इधर गुंजन दी और सुनैना भी तैयार थी। चूँकि हम सब भाई बहन का इवनिंग टूर का प्रोग्राम था इसलिए मैं नीरज भैया और सुन्नी के बारे मैं पुछा तो पता चला की दोनों किसी काम से बाहर गए है।

अब मैं गुंजन दी और सुनैना निकले शॉपिंग करने। पर मुझे क्या पता था की अचानक से इस गुंजन दीदी का खुश होना और शॉपिंग पर जाना एक प्लान था ऐसा प्लान जिसने मुझे चोंका दिया।

कहानी जारी रहेगी.....
 
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