• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

प्यार - ( गम या खुशी )

अपडेट - 30

अब मैं गुंजन दी और सुनैना निकले शॉपिंग करने। पर मुझे क्या पता था की अचानक से इस गुंजन दीदी का खुश होना और शॉपिंग पर जाना एक प्लान था ऐसा प्लान जिसने मुझे चौंका दिया......

जब शॉपिंग मॉल पहुंच तो गुंजन भागते हुए किसी एक ओर जा रही थी मैं बस गुंजन को यूँ जाते देख मैं भी उसके पीछे जाने लगा पर सुनैना मुझे लगातार किसी दूसरी तरफ चलने का बहाना कर रही थी..

मैं नहीं माना और चला गया उनके पीछे पर ये क्या यंहा तो गुंजन किसी के आलिंगन मैं थी किसके पता नहीं दोनों एक दूशरे को पगलों की तरह चुमे जा रहे थे और पुरे बदन पर एक दूशरे के हाँथ फेर रहे थे.....

मुझे तो बिलकुल जैसे बिजली का झटका लगा मैं चिल्लाते हुए.....

"आखिर तुम कर क्या रही हो जरा भी शर्म है की नहीं"

मेरी बातों से जैसे अब दोनों को होश आया तो वो लड़का मुझे गौर से देख रहा था अबतक सुनैना भी आ गयी थी और गुंजन अपनी पलकें झुकाए.....

"राहुल ये तुम्हारे होने वाले जीजाजी है निखिल और निखिल ये है मेरा कजिन रहुल"

निखिल.....हेलो राहुल ।

में...सुन ले ओ जीजे अपनी हरकतों पर थोड़ा काबू रखो अगर तुम्हारा इंगेजमेंट न होता तो, आज तू नहीं बचने वाले थे ।

मेरे बात से माहौल थोड़ा सीरियस हो गया फिर मैं हँसते हुए......

"चिलल जीजे अब तो हमारा मज़ाक यु ही चलता रहेंगा" पर मैंने गुंजन को जरूर कड़ी-खोटी सुनायी।

खैर दोनों बहनें को मैंने ड्रेस सेलेक्ट करने भेज दिया और मैं निखिल के साथ बैठ गया उस से बातें करने के लिये। बातों बातों में पता चला की निखिल चौहान साब की होटल चैन का सीईओ है। पर अभी तक मेरे और उनके बड़े मैं किसी को पता नहीं था ।

बातों से ऐसा भी लगता था की वो चौहान अंकल की इज़्ज़त भी बहुत करता है एक तरह से फैन था, हर दो लाइन मैं उनका जिक्र जरूर करता था । अब मैं निखिल को छेरते हुए...."सर जब चौहान साब इतने अच्छे है तो मैं सोच रहा हूँ गुंजन दी की शादी का प्रपोजल चौहान सब के पास ही ले जाऊं ।

निखिल समझ चूका था मैं मज़ाक कर रहा हूँ इसलिए हस्ते हुए....

" यह लो मोबाइल नो..********** और यह एड्रेस *********** आज ही रिश्ता लेकर जाओ अपनी बहन का "

फिर हम दोनों मुस्कुराते हुए बातें करते रहे पर अब मैंने सोचा की इन दोनों निखिल और गुंजन को थोड़ी प्राइवेसी देनी चाहिए इसलिए मैंने उन्दोनो को वंही मॉल मैं छोर दिया और मैं और सुनैना निकल पड़े । हालाँकि मेरे और सुनैना के बिच मैं हमेसा 36क आंकड़ा रहा है पर हालत को मध्य नजर रखते हुए हम दोनों साथ में थे ।

सुनैना.... राहुल तू मुझे कंहा ले जा रहा है।

मैं.... पता नहीं ।

सुनैना....तो पता कर ना ।

मैं.... मुझे क्या मालूम मैं दिल्ली के बड़े मैं क्या जानू ।

सुनैना....तो तू जानता क्या है।

मैं.... तू मुझ से लड़ क्यों रही है।

सुनैना.... मैं क्यों लड़ने लगी तू लाया है यंहा तो तुझे मालूम होनी चहिये।

मैं....अच्छा चिल कर चलते है किसी कॉफ़ी शॉप मैं वंहा कॉफ़ी का मज़ा लेंगे और आराम से सोचेंगे कान्हा चलना है ।

सुनैना.... हाँ ये ठीक रहेगा ।

फिर मैंने ड्रेस का बिल पे किया और पहुंचा वही कॉफ़ी शॉप जंहा मुझे परिधि ले कर आई थी। अभी हम बैठे ही थे की सुनैना को किसी का कॉल आया और वो उठ कर चली गयी बात करने। मैं अकेला और अकेला दिमाग शैतान का घर फिर मैंने परिधि को थोड़ा परेशान करने का सोचा ।

फ़ोन से कॉल लगते हुए परिधि को...

तिरिंग- तिरिंग, तिरिंग- तिरिंग, तिरिंग- तिरिंग,

परिधि....

बोलिये सर कैसे यद् किया आप तो फ़ोन नहीं करने वाले थे ।

मैं.....पहले सोचा 2 दिन की तुम्हे सजा दूँ पर अब मैं तुम्हे अभी सजा देना चाहता हू ।

परिधि.....हा हा हा सजा वह! वह! और जरा हम भी तो सुने की मेरी सजा क्या तय हुई है।

मैं....इंतज़ार करो अभी बता ता हूँ ।

"ये आज कल मैं भी कितना दफर होते जा रहा हूँ फ़ोन करने से पहले मुझे सोचना था न कैसे तंग किया जाए, अब इसे क्या बोलूं" मैं अभी यही सब सोच रहा था की....

तिरिंग- तिरिंग, तिरिंग- तिरिंग, तिरिंग- तिरिंग ( परिधि का कॉल )

मैं....

मैने तुम्हे कहा की मैं फ़ोन करता हूँ तो फिर तुमने फ़ोन क्यों किया ।

परिधि....मैंने सोचा राहुल जी अब परेशान हो गए होंगे कुछ सूझ न रहा होगा की क्या सजा दे, तो मैंने सोचा मैं ही कुछ मदद कर दुं ।

मैं..... देखो तुम कुछ जायदा ही स्मार्ट बन रही हो वो तो में, मैं तुम्हे फ़ोन करने ही वाला था ।

परिधि... क्या हुआ मेरा बच्चा, घबरा गया अच्छा चलो सजा ही सुना दो ।

मैं....( झूठा गुस्सा बनाते हुए ) नहीं अब सजा तय समय पर ही मिलेगी बाई फ़ोन कट ।

"यार मैं उस से जयादा रूढ़ तो नहीं हो गया कंही नाराज न हो जै" दिल मैं अजीब अजीब ख्याल। , 5 मि,10मि ,15 मि, अब तक कॉल नहीं आयी पर सुनैना जरूर आ गायी।

"कन्हा थी तू अब तक और ये किस से बात कर रही थी" चिंता मुझे परिधि के कॉल की थी और झुँझलाकर मैंने सुनैना से बोल दिया मज़े की बात तो ये थी की फ़ोन पर बात करने के बाद मुझ से जयादा पदेसन तो सुनैना थी अब बस क्या....

"तु मेरा बाप बन ने कोसिस मत कर, कंहा थी, किस से बात कर रही थी, अपना काम से काम रख न। मेरा जयादा सागा वाला बनने की कोसिस मत कर"

मै बस रोया नहीं, सुनैना की बातें मेरे कलेजे को चीरती चली गायी, अभी मेरी आत्मा तक रो रही थी पर आज आँखों मैं आंसू नहीं आए । मेरा चेहरा उतर गया पर मैं खुद को सँभालते हुए बिलकुल रोये रोये से आवज़ में....

"मुझे माफ कर दो तुम इतनी देर तक मुझे अकेला छोरा था तो मैं थोड़ा चीड गया था"।

इसके बाद मैं एक सब्द नहीं बोल, यदि कुछ पूछती या कहति तो केवल क्लोज आंसर हुह्, नहीं और हाँ ही बोलता । उसको शाम को घुमने की जिम्मेदारी ली थी सो मैं उसे यंहा से वंहा ये मार्किट से वो मार्किट घुमता रहा ।

बाद मैं मैंने गुंजन को मॉल से पिक किया और सुनैना को लेकर चल दी कार घर के तरफ। मैं रस्ते भर चुप रहा गुंजन ने मेरे चुप रहने के बड़े मैं पुछा भी तो मैंने बोल दिया हेडाचे हो रहा है। घर पहुंच गए मेरी अभी किसी से बात करने को दिल नहीं कर रहा था इसलिए मासी को हेडाचे का बहाना बोल चला गया रूम मैं और रूम लॉक कर दिया । फ़ोन डिसट्रब करती तो उसे भी ऑफ कर दिया।

बहुत टूटा था आज में। कोई भी परेशानी उतनी बड़ी नहीं होति, कोई भी ज़खम उतना गहरा नहीं होता जितना गहरा सदमा किसी के कटाक्ष भरे शब्दों का होता है और वो भी यदि बोलने वाला आप का कोई अपना हो....

कहानी जारी रहेगी.....
 
शुक्रिया मित्रों....//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg
 
अपडेट - 31

बहुत टूटा था आज में। कोई भी परेशानी उतनी बड़ी नहीं होति, कोई भी ज़खम उतना गहरा नहीं होता जितना गहरा सदमा किसी के कटाक्ष भरे शब्दों का होता है और वो भी यदि बोलने वाला आप का कोई अपना हो....

मेरे आँखों से आंसू नहीं बहे पर मेरी रूह तक कंप गाई, इतना झकझोर के रख दी सुनैना की बातें। उस रात नींद कोसों दूर थी। कब सोया पता नहीं पर जगा सुबह के 4 बजे से ही था । और अन्दर ही अन्दर घुट रहा था । दरवाजा मैंने तब खोला जब मेरे कानो में माँ की आवाज़ पडी, क्या बोल रही थी वो भी पता नहीं ।

सच कहूँ उस समय का अहसास, मेरे पैर कांप रहे द, मेरा कान(एअर) बिलकुल गरम थे, आँखें बिलकुल मुर्झायी, होंठ बिलकुल सुखे, कोई देख कर कह सकता था की मैं बहुत परेशान हूँ ।

पर अचानक मुझे किसी की कही बातें याद आई कि आप अगर उदास होते हो तो आप के चाहनेवाले भी उदास होते है, और बस जल्दी से मुँह धोया पानी से, बाल ठीक किये और अंगड़ाई लेते हुए दरवाजा खोला ।

समने पूरा परिवार जमा था मेरी और मासी दोनों की और साथ में थी सुनैना । सब ने मुझे हॉल में बुलया। में जाकर माँ के पास बैठ गया चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान लिये।

पर कहते है न माँ तो आखिर माँ होती है, उनको मेरी उदासी मेरे बनावटी हंसी के ऊपर से दिख गाई । अभी मैं उनके पास ही बैठा था, की माँ.....

प्यार से मेरे हाँथ फेरते हुए.... " क्या हुआ बेटू कोई बात है"

इत्ने प्यार से मेरे सर पर हाँथ फेरा की में क्या बताऊ एक अद्भुत सुकूं में, पर अब मैं रोना चाहता त। में माँ के गले से लिपट गया, जोर से लिप्त और पीछे मेरे आंखों से आंसू बाह रहे थे ।

कुछ पल मैं यूँ ही सुकून से उन्हें गले लगाएं राख, अब अच्छा मेहसूस हो रहा था की तभी सामने दरवाजे पर परिधि खडी थी। उसे देख मैं जल्दी अपने आंसू पोंछे पर तबतक शायद उसने देख लिया था ।

माँ से लिपट कर रोंए से दिल तो शान्त था पर अब दिमाग मैं हलचल की..... "परिधि कल आने वाली थी पर ये यन्हा, यूँ अचनाक"।

अभी जिन आँखों में आंसू थे वो अब फटी के फटी बस गेट की ओर देखे जा रही थी और अभी भी मैं माँ से लिपटा था ।

मासी.... कौन हो बेटी तुम और किसे ढूंढ रही हो ( सबने सोचा की इंगेजमेंट के कारन सायद किसी ने बुलाया हो या किसी से मिलने आई हो)

अभी परिधि कुछ बोलने वाली थी की मैं....

"मासी ये परिधि है" बस मेरा इतना बोलना था की माँ, सिमरन, दिया तीनो ने ऐसे घेरा की पूछो ही मत ।

सबने उसे अंदर बुलाया फिर लगे स्वागत में, माँ तो उसे पाकर कर रोंने ही लगी और बोली.... तुम और तुम्हारा परिवार न होता तो मेरे बेटे का क्या होता?

मै बस हैरान था की.... " ये यंहा कर क्या रही है और मासी का अड्रेस इसे पता कैसे चला"

साब परिधि को घेरे उस से उसके बारे में फैमिली के बारे में पूछ रहे थे । परिधि सब अच्छे से बता रही थी पर मैं नहीं चाहता था की मोहित अंकल के बारे मैं अभी कुछ भी पता चले किसी को। जैसे ही परिधि की नज़र मुझसे मिली आंखों आँखों मैं एक इशारा हुआ और जैसे मेरे हर इक बात का अहसास हो वो फैमिली बैकग्राउंड को बड़े सफाई से टाल गई ।

अभी 2 घंटे हो गए उसे आये अब वो सब से इज़ाज़त ले रही थी वापस लौटने की इसपर माँ पूछ्ने लागी.... चली जाना पर ये तो बताओ की तुम आई क्यों और कैसे?

परिधि ने बताया की उसकी फ्रेंड इसी तरफ आ रही थी उसी के साथ आई है और ऑटो से चली जाएगी पर माँ के क्यों मैं उलझ गयी और सवालिया नज़रों से मेरी ओर देखने लागी।

मुझे समझते देर न लगी तो मैंने कहा की.... "आप्लोग यंहा आ रहे थे तो मैंने ही इसे बुलाया था आप सब से मिलने"।

माँ.... "ये तूने अच्छा किया बेटा"

अभी माँ की बात समाप्त हुए और उधर ये दिया ने अपना दिमाग लगा दिया.....

"पर भैया आप का मोबाइल तो कल इवनिंग से ऑफ है, और फिर मेरे मोबाईल पर रिंग करते हुए देखो अभी भी ऑफ है आपने बुला कब लिया"

अब परिधि की हलकी मुस्कान उसके हांथों पर आ गयी और में.....

"ये दिया जब देखो मेरी खिचाई करती है कल सरप्राइज को आग लगा दी और अभी जासूसी सूझ रही है वो तो अच्छा हुआ जो कल बात हुए थी परिधि से नहीं तो ये तो आज फँसा देती"

मै जल्दी से रूम से अपना मोबाइल ले करके माँ को दिखाया..... देख माँ कल शाम को बात हुए थी की नहीं। फिर मैंने भी तीर छोड़ा ,अब जरा इस से पूछो की ये इन्क्वायरी क्यों कर रही है क्या चल रहा है इसके मन में।

अब क्या था दिया की लग गयी क्लास क्योंकि थी वो सबसे छोटी और इन्क्वायरी भी किसकी की जिसने मेरी जान बचायी फिर क्या एक एक ने एक एक कर उसकी क्लास ली।

मै खुश तो था पर दिया को कुछ जयादा ही सुन्ना पद गया और मुँह लटक गया जो में कभी नहीं देख सकता था । पर अभी इस मेटर के लिए टाइम नहीं था मेरे पै। उसे तो मैं गिफ्ट देकर मना लूंगा ।

"अभी तो परिधि की चिंता थी की एक दिन पहले क्यों आई और अड्रेस कंहा से मिला इसे" ।

फाइनली परिधि जाने लगी तो माँ ने उसे रोका और मुझे बोलै ड्राप करने को पर मैं कोई इशू नहीं चाहता था इसीलिए.... " माँ वो बच्ची नहीं है चली जाएगी, आज कितने दिनों बाद देखा है आप को मैं आप के पास ही रहूँगा ( सफ़ेद झूठ )"।

परिधि सायद मेरा झूठ समझ चुकी थी इसलिए वो मुस्कुराये बिना नहीं रह सकी।

मेरी बात सुनकर सिमरन बोल पड़ी....... और तू तो अभी बच्चा है । जो गुम जायेगा अभी जाता है या खयेगा एक थप्पड़ ।

इधर परिधि ने भी दिमाग लगा लिया..... रहने दो आंटी छोड़ दो दीदी मुझे अभी 1,2 घंटे और लगेंगे मुझे अपने कुछ 12थ के स्टडी मटेरियल कलेक्ट करने है बुक शॉप से कंहा राहुल मेरे साथ भटकटा रहेगा ।

अब मैं बिना मुस्कुराये नहीं रह सका भगवान किस दिन इसका ब्रेन बनाया आपने

माँ.... कुछ नहीं होता बेटी तू रुक यंहा और मुझसे तू खड़ा खड़ा कर क्या रहा है 10 मं मैं रेडी होकर जा ईसे जो भी बुक चाहिए हेल्प कर दे और घर छोड़ कर आना ।

आब मैं जल्दी से रेडी हो गया माँ के दिए टाइम में और कार की के लेकर चल पड़ा परिधि को ड्राप करने पर अभी मैंने किसी को नहीं बताया था की मैंने कार जीती है इसलिए बड़ा भोला बाँटे हुए परिधि से.... कान्हा जाना है तुम्हे परिधि उसने जगह बतायी, फिर मैं निराज से .....भैया टैक्सी कंहा से मिलेगी उस जगह के लिये।

यारों मैंने तो जैसे कॉमेडी कर दिया हो ये पूछ कर सब के सब एक साथ हसने लागे ।

माँ ने कहा.... बेटा अपने कार से ले जा कंहा टेक्सी मैं तू यंहा से वंहा जायेगा और कंहा परिधि को भी भटकता रहेगा । इतना बोल माँ और उनके साथ सब हॅसने लागे ।

मैने सवालिया नज़रों से मासी निरज, गुंजन, और सुनैना के तरफ देखा तो...

सिमरन..... इन में से किसी ने नहीं बताया ।

मैं..... तो फिर मेरे सुस्पेंस मैं आग किसने लगायी ।

सिमरन.... तू अभी सुस्पेंस मैं ही जा लौट कर आ तब बताती हूँ ।

ये हो क्या रहा था कल से पता नहीं जिसे भी सरप्राइज देना चाहा उसने उल्टा मुझे सरप्राइज दिया।

बेहरहाल अब मैं परिधि के साथ निकला मन में कई सवाल लिए.....

कहानी जारी रहेगी.....
 
शुक्रिया मित्रों....

आप सबने बहुत कहा बड़ी अपडेट दो....

सो मित्रों 2 दिन में मेगा अपडेट मिला करेगी अब से...

पहली आज एन्जॉय करो...//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg
 
अपडेट - 32

बहरहाल अब मैं परिधि के साथ निकला मन में कई सवाल लिये......

हम दोनों अब कार मैं बैठे, दोनों शांत, कार स्टार्ट और चल दिए हम । न तो मैं कुछ बोल रहा था और न ही परिधि दोनों ही शान्त बैठे थे इस शान्ति को हम दोनों केवल महसूस कर रहे थे । पूरा सन्नाटा सा छाया रहा, सायद तूफ़ान से पहले का हो। मैंने गाड़ी उसी कॉफ़ी शॉप के पास रोक दि। अब दोनों ही चले कॉफ़ी शॉप के अंदर, बैठ गए एक टेबल पर दोनों हम अभी भी शान्त थे, पर परिधि के साथ इस शांति में भी एक अलग ही आनंद मिल रहा था ।

हमारी शान्ति को भंग करते हुए वैटर..... सर, आप क्या लेंगे ?

दोनो एक साथ बोल पड़े......"सुनो" फिर परिधि ने मुझे इशारे मैं कंटिन्यू करने को कहा और मैं परिधि को।" अच्छा तुम्" सैम डायलॉग सैम टाइम फिर दोनों बोल पड़े, अब मैंने अपने मुँह पर ऊँगली लगायी साइलेंस के इशारे की और परिधि को कंटिन्यू करने को बोला । दो कॉफ़ी आर्डर की और चला गया वो वैटर ।

फिर हम दोनों शान्त अब मैंने बोला.... "क्य आज मौन वर्त है जो चुप हो"।

परिधि..... पहले तुम अपने सवाल करो फिर मैं बोलूंगी ।

मैं..... नहीं लेडीज फर्स्ट ।

परिधि..... नहीं पहले तुम क्योंकि बाद मैं तुम्हे शायद बोलने का मौका मिले या न मिले।

मैं.... ओके मेम, बस मेरे कुछ छोटे छोटे डॉब्टस है उसे क्लियर करना है ।

परिधि..... यही न की मैं कैसे आज आई और तुम्हारी मासी के पास कैसे पहुंची?

मै अनायास ही अपने दोनों हाँथ जोड़े क्या मेरे अन्दर कोई ट्रांसमीटर लगा है की मेरी हर बात बिना बताये तुम्हे ट्रांसफर हो जाती है।

परिधि थोड़ा स्माइल के साथ.... नहीं सवाल तुम्हारे चेहरे पर लिखा रहता है, वैसे मैं बता दूँ की मैं तुम्हारे वजह से यंहा हूँ ।

मैं..... कैसे?

परिधि.... तुमने तो कल अचानक फ़ोन कट दिया मुझे लगा की तुम झूठा गुस्सा दिखा रहे थे और मेरे कॉल आने का इंतज़ार कर रहे होगे। और यंहा मैं तुम्हारे कॉल का इंतजार कर रही थी की तुम्हे मेरा कॉल न आने पर सायद तुम खुद कॉल करोगे।

पर जब शाम ( अबतक परिधि बहुत सीरियस हो चुकी थी ) तक तुम्हारा कॉल नहीं आया तो मुझे लगा की सही में कहीं नाराज न हो। मैंने तुम्हे कॉल लगाया नम्बरऑफ पूरी रात कॉल लगायी पर फ़ोन स्विच ऑफ था । मुझे बहुत पछतावा हुआ इसीलिए सुबह ही यंहा पहुँच गायी ।

मैं..... तुम कल रात रोई हो ना ।

परिधि.... हड़बड़ाते हुए नहीं, मैं कभी नहीं रोती ।

मैं.... में उतना स्मार्ट तो नहीं जितनी तुम हो पर मैं जानता हूँ की तुम रोई हो ।

मेरा इतना कहना था और परिधि की आँखें भर आई और आंसू फूट पड़े उसके । उसे रोता देख मैं बिलकुल घबरा गया।

बास अंदर से इतनी फीलिंग आ रही थी की मैं उसे रोता नहीं देख सकता था । अभी हम आमने सामने बैठे थे अब मैं उसके बगल मैं बैठ गया अपने हाथों से उसके आंसू पूछे पर रोना उसका काम न हुआ।

मैने उसके सर को सिने से लगया, प्यार से उसके आंसू पोछता रहा और उसके गलों पर हाँथ फेरता रह। उसे जैसे किसी तरह का सुकून मिला हो।

हम ऐसे ही क़रीब 5 मि तक रहे, सारी दुनिया से बेख़बर, की हम कंहा बैठे है और आस पास कौन बैठा है। कुछ देर ऐसे ही वो मेरे आग़ोश मैं रही फिर अचानक मुझे अलग करते हुए

परिधि.... तुम क्या सिचुएशन का फायदा उठा रहे हो ।

मैं.... तू परिधि की बच्ची, अभी तो तुझे शांति मिल रही थि, तो मैं तेरा फायदा उठा रहा हूँ जाओ मैं अब तुमसे कोई बात नहीं करना चाहता ( एक बनावटी गुस्सा )।

परिधि.... ओ बाबु,बाबू जी सुन लो।

मैं..... हनननन! क्या है।

परिधि.... अले ले नाराज है पर ये क्या ये नाक लाल क्यों हो रही हैं ।

परिधि के इस प्रकार बोलने पर मैं खुद को हॅसने से नहीं रोक सका और वो भी एक मीठी सी स्माइल दी ।

मैं..... प्लीज तुम रोया मत करो मेरा दिल बैठ जाता है।

परिधि.... तुम ही तो रुलाये हो ।

मैं..... कैसे?

परिधि..... तुम बार बार मुझे क्या ये बहुत स्मार्ट हो बहुत स्मार्ट हो कहते रहते हो ।

मैं.... तुम हो बावा , ये तो कॉम्पलिमेंट है ।

परिधि.... पर मुझे गली लगती है वो भी जब तुम्हारे सब्दों में ये शुमार रहता है तो ।

मैं.... मुझे प्लीज माफ कर दो मैं जरूर टॉन्ट के रूप में कह्ता था पर मुझे पता नहीं था की तुम्हे ये बिलकुल पसंद नहीं।

परिधि..... कोई बात नहीं पर अब तुम फिर शुरू हो गए, माफ कर दो माफ कर दो ।

मैं.... तुम भी अजीब हो अभी कहति हो ये बातें बुरी लगी और जब मांफी मांगता हूँ वो भी बुरा लगता है। में बेचारा अब क्या करू ।

परिधि..... ( मुस्कुराते हुए ) तुम्हे कुछ नहीं करना है बस मेरा साथ देना है ।

मैं..... समझा नहीं क्या कहना चाह रही हो?

परिधि..... कुछ नहीं बाबा अब तुम्हारा राउंड ख़तम की अभी बांकी है ।

मै.... हाँ हान, वो अड्रेस कैसे पता लगया ।

परिधि....... बच्चों जैसी बातें करते हो तुम्हारे फ़ोन के जीपीएस ट्रैक किया।

मैं..... अस्चर्य से जीपीएस कैसे ट्रैक किया और मेरा फ़ोन तो ऑफ था ।

परिधि..... ये इस फ़ोन की फीचर है ये अपने सैटेलाइट से हमेशा कनेक्ट रहता है ऑफ होने पर। बस मैंने ट्रैक कर लिया।

मैं..... अच्छा तो तुम मुझपर नजर रखने के लिया प्लानिंग के तहत फ़ोन गिफ्ट किया है।

परिधि.... मिल गयी कलेजे को ठंडक मुझे चिढा कर या और भी कुछ बांकी है ।

मैं.... हस्ते हुए वह! आज कल मेरे सोना को टोना बहुत जल्दी लगती है।

परिधि.... Now it's my turn .

मैं..... ठीक है आओ बकरा सामने है हलाल कर लो।

परिधि..... अरे इतना भी नहीं पूछ्ने वाली मैं तो जिज्ञासा बस कुछ जानना चाहती हू ।

मैं..... ओके बोलो ।

परिधि...... पहले कल की बात बताओ की तुमने फ़ोन क्यों ऑफ किया और आंटी के पीछे छुप कर रो क्यों रहे थे?

मैं...... एक एक करके मैंने सारी घटनाएँ में परिधि को बताता गया शुरू से कैसे गुंजन को मॉल लाया, निखिल से मिलन, उनको अकेला छोड़ना, फिर सुनैना के साथ कंही चलने के लिए चिट चैट फिर उसका फ़ोन पर बात करना और मेरा परिधि को फ़ोन लगाना ।

यहाँ तक तो ठीक था पर जैसे जैसे में मुख्या कारन की ओर बढ़ रहा था मतलब सुनैना को टोकना और उसका रिप्लाई, परिधि उसका चेहरा देकने से ही लाल लग रहा था । मनो अभी सुनैना सामने आ जाये तो कच्चा चबा लेगी।

परिधि.... एक लम्बी साँस लेते हुए मुझे मांफ कर दो तुम इतनी परेशानी में थे और मुझे जरा भी फील न हुआ।

मैं...... अब तुम्हे क्या हुआ तुमने थोड़े न किया है। जाने दो बहन है मेरी वो भले ही कुछ भी सोचे पर रहूँगा तो मैं उसका भाई ही चिंता तो बानी ही रहेगी।

अब प्लीज अपना चेहरा ठीक करो गाल फूल के लाल हो गया है।

परिधि कुछ न बोली पर अपने आप को नार्मल करने की कोसिस कर रही थी।

मैं.... क्या हुआ?

परिधि.... ..... कुछ नहीं , बस यूँ ही सोच रही थी की क्यों ऐसे बोली सुनैना ।

मैं.... जैसे ही मुझे पता चलेगा वैसे ही बता दूंगा ।

परिधि...... (अपने पुराने रंग में आते हुए)ओके , पर मुझे अभी और भी बहुत कुछ जानना है?

मैं..... हाँ जानता हूँ पूछ लो अब ।

परिधि...... तुम्हारी फैमिली से तो मिल चुकी ये भी समझ गयी की हम साथ साथ वाली तुम्हारी फैमिली है, सब के सब पर दो लोग कुछ खास समझ मैं नहीं आए ।

मैं..... कौन?

परिधि...... दिया, वो तुम्हारी इतनी खिचाई क्यों कर रही थी और तुमने भी उसे मौका देख कर डांट भी पड़वा दी , और दूसरी वो सुनैना हालाँकि तुम्हारी मासी के परिवार में मैं किसी को नहीं जन्ति पर तुम इतने अच्छे हो फिर भी ऐसा व्यवहार?

मैं...... सबसे पहले मैं सुरु किया सुनैना की कहानि

की हम दोनों कुछ ही दिन के छोटे बड़े है तो हम उम्र के कारण हमारा आपस मैं कभी नहीं बनी, एक्साम्स में मेरे रिजल्ट हमेसा अच्छे होते और सुनैना किसी तरह पास तो उसको ये भी चिढ थी , फिर जब भी मैं मासी के यंहा आता तो मेरा उद्धरण देकर हमेसा उसको डांट पड़ती ये बातें उसके दिल मैं नफरत का बीज बोती राहि।

उसके दोनों भाई बहन मुझे बहुत प्यार करते है और निराज भैया तो मेरे फ़ेवरिट है ये भी एक वजह थी कि, क्यों उसके अपने भाई बहन उसे इतना प्यार करते है नफरत नहीं?

पर मेरे दिल में कभी भी इस बात का मलाल नहीं रहा , वैसे उसका नेगेटिव पॉइंट ऑफ़ व्यू मेरे लिए है पर दिल की बहुत अच्छी है । बहुत व्यवहार कुसल, मुझे कभी सिकायत नहीं रही की क्यों वो मुझ से नफरत करती है क्योंकि कंही न कंही मैं ही इसकी वजह था और फिर हर कोई तो स्टडी मैं अच्छा नहीं होता सबका एरिया ऑफ इंटरेस्ट अलग अलग होता है।

अगर तुम उस से मिले और मेरे साथ क्या करती है उसको छोड़ कर, तो तुम उसकी फेन हो जाऒगी। सबको पल मैं हंसा देती है, इसलिए मेरी रिक्वेस्ट है यदि तुम मेरी वजह से उस से नफरत करोगी तो तुम मेरी नफरत की पात्र होगी क्योंकि ये कुछ अलग मामला है, हाँ अगर कोई पर्सनल इशू है तो मैं नहीं रोकने वाला ।

मैने थोड़ी साँस ली तबतक परिधि की ओर देखा वो बहुत ही हैरान थी मेरी बात सुन्कर ।

अब मैंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए.....

दिया में तो मेरे प्राण है, जब दिया के बारे मे जान रही हो तो उसकी सहेली सोनल के बारे में भी जानना होगा। ये दोनों दिखने में दो है पर है एक जां। में पक्का कह सकता हूँ की यदि सोनल ने या दिया किसी ने भी एक दुसरे को याद किया तो या तो उनका कॉल आ जायेगा या खुद मिलने। बहुत गहरी दोसति, इसलिए सोनल भी बहुत प्यारी है मेरे लिये।

अब रही बात खिचाई की तो मेरी लाडली है तो मुझे छेड़ना अपना हक़ समझती है, पर असली रूप देखना हो तो मेरे बारे मैं कुछ बोल के देख, माँ और सिमरन तो फिर भी बात करने के तरिके से बात करेगी पर वो एक पल तुम्हे देखना बर्दाश्त नहीं करेगी ।

अब देखना में जानता हूँ की उसको डांट पड़ी थी अबतक वो खाने को हाँथ भी नहीं लगायी होगी उसे जब तक मैं उसे मना न लूँ और अपने हाँथ से खिला न दूँ हो ही नहीं सकता की खा ले।

परिधि बड़ी शांति से पूरी बात सुनती रही फिर बोली.....

तूम क्या हो,इतना पॉजिटिव कोई कैसे हो सकता है।

मैं...... इसमें पॉजिटिव वाली क्या बात है ये तो अपनी अपनी सोच है।

परिधि...... फिर भी बहुत गहराई है तुम्हारी बातों में।

मैं..... तुम भी न, हो गया, अब ताड के झार पर मत चढ़ाओ ।

परिधि..... ओके पर मेरी एक शर्त है मैं तुम्हे दिया को मनाते देखना चाहती हू ।

मैं...... ये क्या बचपना है कैसी जिद है ये?

परिधि...... अब जो है सो है या फिर क्या तुम अब मुझे भी खिलाओगे अपने हाँथ से ।

मैं...... मैं क्या हुन एक तुच्छ प्राणी भला मुझे आप की ही साये मैं रहना है। जो हुकुम मेरे आका ।

परिधि...... हम खुश हुए।

मैं....... पर हम घर पर क्या बोलेंगे तुम्हे क्यों वापस लया तो क्या कहुंगा।

परिधि..... बस इतना ही वो मैं मैनेज कर लुंगी तुम पहले बुक शॉप चलो ।

मैं..... बुक शॉप क्यों?

परिधि..... अभी तुम बच्चे हो हमे घर से आये क़रीब 1 घंटे से ज्यादा हो गए अब बुक न ले के गए तो.....

फिर परिधि ने पूरी सांभर और टोमेटो सॉस अपने ऊपर डाल ली ।

मैं.....अब ये क्या है

परिधि..... हँसते हुए तुम्हारे घर की एंट्री एक्सक्यूसे सारे कपड़े गंदे हो गए ।

मैं.... तुम्हारा दिमाग सिर्फ इन्ही सब बातों मैं चलता है या अच्छे कामो मैं भी इस्तेमाल करती हो।

परिधि.... अभी तो मुलाकातें शुरू हुए है धीरे धीरे आप हमारी सारीअदाओँ से वाकिफ़ हो जाएंगे।

बस अब क्या , प्लान तैयार है सुरु करे खेल

हम चल पड़े अपने प्लान को फाइनल टच देने, हम किताब लेकर घर पहुंच, घर पर परिधि को वापस आया देख सब चकित हो गए फिर अब कामन सम्भाला परिधि ने । और फिर प्लान सफल होता चला गया।

साब बातें तो हो गयी पर अब एक समसया थी की परिधि चेंज कर पहनेगी क्या? इसका हल कर दिया गुंजन दीदी ने वो कल वाला जीन्स टॉप परिधि को दे दि।

परिधि को अब सब जिद करने लगे की खाना खा कर जाओ तो वो मन गयी पर मुझे घर बात करके माँ को इन्फॉर्म करने को बोलि, की लेट घर पहुँचुँगी।

मुझे अस्चर्य लगा पर फिर भी मैंने आंटी को इन्फॉर्म कर दिया। इधर परिधि तो ऐसे मिली हमारे फैमिली से की जैसे वर्षों से पहचान हो। पर बार बार इशारा कर के मुझे डेली शो दिखाने को बोल रही थी।

मैने ईशारों मैं उसे मना किया प्ल्ज़ ये कोई गेम नहीं है सो मुझे मेरे हिसाब से काम करने दो ।

मासीऔर माँ कल की तैयारियों में लगी थी। पापा और मौसा जी बाहर का काम देख रहे थे चूँकि मेरे मौसा की फैमिली और मेरी फैमिली सभी रिस्तेदारों मैं काफी क्लोज थी इसलिए हम सब घर पर थे बांकियों का इन्तज़ाम पास के होटल में किया गया था ।

हम बच्चों को सारे कामों से दूर रखा गया था क्योंकि सभी काम टेंडर पर दे दिया गए थे सो किसी बात की किसी को चिंता नहीं थी। पापा और मौसा जी फाइनल टच के लिए बहार का कम देख रहे थे और घर में माँ और मासी ।

इधर गुंजन दी, सिमरन दी , निराज भैया , और परिधि एक साथ बातें कर रहे थे । सुनैना अकेली किसी कमरे में थी और दिया के बारे में तो सब जनते थे की अब मैं आ गया हूँ तो वो भी सब को ज्वाइन कर लेगी।

पर मुझे सुनैना के लिए अफ़सोस हो रहा था की क्यों वो ऐसा बोल पड़ी और अभी सब यंहा आपस मैं मज़े कर रहे हैं और वो सजा काट रही है। पर मैं इस बार उसके लिए कोई मदद करने वाला नहीं था उसकी गलती छोटी नहीं थी।

खैर दिया सब के साथ नहीं थी तो वो भी मुझे ख़राब लग रहा था । मैं.....

सब लोगों से दिया कंहा है।

गुंजन......क्यों तू नहीं जानत, इतना दाँट खिलवाया है कंहा होगी।

मै..... आप लोग भी न, उसे ला नहीं सकते थे ।

सिमरन....... हम सबको मालूम है अब हमें बात करने दे और ले आ अपनी लाड़ली को ।

मै चला आया वंहा से और बैठ कर सोच ने लगा की ये गलत है सब उसे मेरे भरोसे छोड़ देते है कोई उसके पास नहीं जात। में अपनी इन्ही ख्यालों मैं खोया था और उधर गुंजन,सिमरन, परिधि और निराज भैया आपस में।

परिधि..... सुनैना नज़र नहीं आ रही ।

नीराज भैया समर्थन करते हुए..... हाँ गुंजन दी कंहा है सुनैना ।

गुंजन दी.... क्या बताऊ कल लगता है दोनों राहुल और सुनैना मैं कुछ हुआ है। राहुल तो कल से अब तक कुछ खाया भी नहीं, देखा नहीं कैसे मासी से लिपट गया जैसे पीछे मुद कर रो रहा हो।

सिमरन..... में बात करून क्या राहुल से?

गुंजन.... सिमरन कोई बड़ी बात है नहीं बतायेगा मैंने कल पुछा था ।

नीराज..... अभी मैं इस सुनैना की खबर लेता हूँ की ये राहुल को क्यों परेशान करती है ।

गुंजन..... तू क्या राहुल को नहीं जानता उसकी फिलॉसफी वो अभी भाग जायेगा अगर सुनैना को डांटे तो ।

नीराज..... हाँ दीदी ये तो सही कहा ।

परिधि..... जन भुझ कर पूछति हुए, वैसे मुझे इंटरफेर नहीं करनी चाहिए पर क्या किसी के बिच का इशू उन्ही पर शार्ट आउट करने छोड़ देते है क्या?

सिमरन..... परिधि तुम नहीं जनति, दिया को तो हम सब जान बूझ कर छोड़ देते है अभी कुछ देर मैं डेली शो सुरु होग, सुबह हम सबने भी केवल यही शो को ध्यान मैं रख कर उसे डांट दिया ।

बीच मैं निराज भैया टोकते हुए

नीराज..... हीरा है मेरा भाई, वो कभी नहीं चाहता की सुनैना को हम सब उसकी वजह से डांटे क्योंकि राहुल अच्छा है स्टडी मैं और सुनैना हमेसा पीछे रही उस स। फिर वही सब जो मैंने बताया परिधि को।

सिमरन.... पर भैया मुझे अच्छा नहीं लग रहा सुनैना का अकेले रहना । मुझे बहुत बुरा लग रहा है।

नीराज..... बस इतना रहुल, रहुल ।

मै अभी सब सोच ही रहा था की भैया ने पुकारा मैं निराज भैया के पास गया ।

मैं....

"जी भैया क्या बात है"

नीरज....कल क्या हुआ था तेरे और सुनैना के बीच।

मैने परिधि की तरफ आँख दिखाई और मेरा इशारा समझते ही मुझे इशारो मैं समझाया की उसने कुछ नहीं बताया है।

तभी निराज भइया.... कुछ पुछा है, बतायेगा ।

मै.... भैया कुछ भी नहीं हुआ वो आप को गुंजन दीदी मिर्च मसाला लगा कर बताई होंगी पर मेरे सर मैं दर्द था । सच में ।

गुंजन दी.... तू मुझे इतने लोगों के पास झूठा बना रहे हो तो खा मेरी कसम की कोई बात नहीं।।

मैन बिलकुल चुप चाप

नीराज.... अब बता क्यों नहीं रहा मेरे भाई?

मैं.... निराज भैया केवल आप है इसलिए इस टॉपिक पर बात कर रहा हूँ नहीं तो मैं सोचता भी नहीं , पर सॉरी बात क्या है मैं बता नहीं सकता पर हाँ मैं सुनैना को सब के साथ शामिल कर सकता हूँ ।

अब प्लीज कोई भी , कोई मतलब कोई भी नहीं मुझसे पूछेगा की बात क्या थी , और हाँ मेरे पीछे कोई नहीं आएगा मैं जा रहा हूँ सुनैना के पास ।

मुझे इस तरह से रोटी आवाज़ मैं बात करते देख सब हैरान थे पर माहोल को ध्यान मैं रखते हुए कोई कुछ नहीं बोल।

अब मैं सुनैना के पास ।

मैं.... तू यंहा क्या कर रही है, हॉल मैं सब बैठे हैं फिर वयंग भरे सब्दों मई "यह सॉरी मैंने पूच लिया मैं कौन सा तेरा सगा वाला हूँ"

सुनैना जो अबतक चुप थी कुछ न बोलि मेरी ओर बस देखि

मैन तो उसे देख कर हैरान हो गया ऐषा लग रहा था खुद को कल रात से बहुत तकलीफ दी हो।

मैन तो हैरान रह गया उसे देख अब वो बॉली....

"तु हैरान क्यों हो रहा है कौन सा तू मेरा सागा वाला है?

ओ इतनी उखड़ी थी , इतनी हताश की मैं खुद मैं अफ़सोस किया की कल ही बात शार्ट आउट क्यों नहीं की।

आब हम दोनों का बाद विवाद शुरू सारे गिले शिकवे दूर उसको हँसाया फिर मैंने कहा की कुछ भी हो जय किसी को कल वाली बात मत बताना ।

मेरी इस बात पर वो बोली.... "तुम इतने अच्छे क्यों हो, मुझे माफ कर दो"

मैं....अब चल जल्दी जा बाथरूम से आ हुलिया ठीक कर अभी एक और बांकी है।

अब चूँकि ये बात किसी से छिपी थी जो वो न जानती हो..... .... क्या अभी तू दिया के पास जाने वाला है रुक रुक 2 मि में आई ।

जलदी गयी फटाफट तैयार होकर बाहर , चेहरे पर अब हम दोनों के स्माइल था हम हस्ते हुए बहार निकले ।

अब चला मैं मेरी लाड़ली छोटी को मनाने.....

कहानी जारी रहेगी.....
 
शुक्रिया मित्रों....//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

बिल्कुल मित्र आज अपडेट जरूर मिलेगी...

अभी कुछ काम बाकी है...

कुछ ही समय में मिलेगी....
 
अपडेट - 33

अब चला मैं मेरी लाडली छोटी को मनाने.....

सुनैना बाहर आते ही अपने चिर परिचित अंदाज़ मैं सबके पास एक स्ट्रांग एंट्री की। अब मीटिंग का माहोल खिलखिला तो हंसी से गूँजने लागी । अब सब जब नार्मल हो चुके थे फिर सब के सब कल क्या बात हुए उसके बारे में जानना चाह रहे थे ।

ये जिज्ञासा भी अजीब होती है जब तक सवालों का जवाब न मिल जाय तबतक मन में बेचैनी रहती है और वही हाल अभी निरज, गुंजन, और सिमरन का था ।

मुझे ऐसा लगा कि प्रेशर में कंही सुनैना बोल न दे इसलिए मैं ही बोल पड़ा....एक्चुअली कल जब हम कॉफ़ी शॉप गए तो सुनैना जिद करने लगी उसे और घूमने जाना है पर मैंने साफ मना कर दिया तो सुनैना ने मुझे पलट कर जवाब दी की...... " मैं तेरी सगी बहन थोड़े ही हूँ जो तू मेरी जिद पूरी करेगा अभी यंहा दिया होती तो क्या तू ऐसे ही बोलता" ।

अब बताओ दिया सबसे छोटी है उसकी जिद तो ये सुनैना भी पूरी कर देती है फिर इसमें अपना पराया कहाँ से आ गया।

सटेस्फ़ी या वैरी सटिस्फी हो चुके थे सब मेरी बात सुनकर बात जयादा ओड भी नहीं थी जिस से सुनैना को शर्मिंदा होना पड़े और मेरा झूठ सुनकर दो लोग मंद मंद मुस्का भी रहे थे परिधि और सुनैना ।

खैर फिर समझाने का दौर चला सुनैना को , और मैं इधर सबको उलझा देख चला आया नीचे कार से बचे लोगों का गिफ्ट लेने ।

फिर मोम, डैड और सिमरन का गिफ्ट सिमरन के हाँथ में दे दिया और दिया का गिफ्ट उसे देने जाने लागा, इतने मैं गुंजन दीदी टोकते हुए...

"ला दिखा तो क्या लाया है दिया के लिये"

मैने बैग दिया और सब ने देखा इसपर सुनैना बोली....

"देखा न तुमलोगो ने हमारे लिए केवल फॉर्मेलिटी की है और दिया का गिफ्ट देखा

लांहगा वो भी इतना महंगा और साथ मैं मैचिंग, एअर रिंग, पर्स , नेल पोलिश और क्या क्या"

सब लेडीज मेरी ओर देखते हुए.... "हूँ! सुनैना तेरी बात मैं पॉइंट है"

पर मेरा तो तीर इस मामले में हमेशा तैयार था....

"अच्छा ये बताओ तुम सब, की सबने शॉपिंग कर ली होगी"

सब.... हाँ

अच्छा सिमरन दी आप तो किरण के साथ शॉपिंग की होगी..... हाँ

और गुंजन दी आप और सुनैना साथ में..... हाँ

ये बताओ अबतक आप ने अपने ड्रेसेस भी एक दूसरे को दिखा चुकी होंगी..... हाँ

अब यह भी बता दो कि किस-किस ने दिया की ड्रेस के बारे में पूछा "कि तू इंगेजमेंट मैं क्या पहनेवाली है"

सब चुप नहीं इसमें आप लोगों को सोचने की जरूरत नहीं क्योंकि उसको मार्किट मैं ही लेकर जाता हूँ अब यदि मैं नहीं था तो उसने फ़ोन पर ही डिमांड कर दिया।

अगर फिर भी लगता है आप सब को कि मैं ने कुछ भेद-भओ किया है तो बता दो मैं वापस कर देता हूँ इसे ।

इतना सब को फील करवाने के बाद अब थोड़े ही न कोई सवाल उठना था पर हाँ उन सबको अपनी बात का अफ़सोस ज़रूर था और हमारी परिधि मैडम वो तो आज फुल फैमिली ड्रामा एंटरटेन कर रही थी। इशारों इशारों में मुझे शाबाशी भी दे रही थी।

अब मैं चला अपनी लाड़ली के कमरे में, कमरे में दिया लेटी हुई थी शायद सो रही थी। बड़ी ही प्यारी लग रही थी।

मैन उसके सर के पास बैठ गया और प्यार से सर पर हाँथ फेरा मेरा अस्पर्श पाकर वो धीरे से आँख खोली, मुझे देखा एक नाराजगी ( बनावटी ) दिखाई और मुँह फेर कर सो गायी। मैंने प्यार से फिर उसके सर पर हाँथ फेरा....

दिया.... क्या कर रहे हो अब शांति से सोने दो न।

मैं..... छोटी देख तो क्या है?

दिया..... कुछ भी हो मैं अभी सो रही हूँ सोने दो न (नक् से आवाज़ निकालते और अपने हाँथ पैर पटकते बोली)

मैं...... पगली पहले देख ले नीन्द तो तेरी ऐशे ही गायब हो जाएगी ।

दिया...... क्या है जल्दी दिखाओ ।

अब उसने बैग खोला और अपना पूरा सामान देख कर अंदर से खुश तो बहुत थी फिर भी....

दिया..... कितने पैसे लगे बता देना पापा से दिलवा दूंगी (मुझे चिढ़ाने के लिए बोली)

(अब यंहा से मेरा नाटक शुरू)

मैं कुछ न बोले चुपचाप उसके पास से उठ कर दूसरे कमरे में आ गया । पीछे जितने दरसक थे वो भी अपनी अपनी जगह ले लिए हॉल में।

अभी कुछ समय बीते होंगे की दिया पहुँचि मेरे कमरे में....

"अब उठोगे मुझे बहुत भूख लगी है"

मैं..." तो जा ना मैं ने थोड़े ही रोका है"

आब पीछे से मेरे गले पड़ते...

"चलो न भैया प्लीज अब बहुत भूख लगी है, नाटक-नाटक मैं कंही तुम्हारी बहिन भूख से मर न जाए"

मैने उसे मरने वाली बात पर डांटते हुए।।।।"चअल्, चल कर खाते है"

तबतक खाने पर सब लोग आ चुके थे हम भाई बहन के अलाव, पापा और मौसा जी ने भी हमें ज्वाइन कर लिया था । अबतक दोनों परिधि से मिल चुके थे और उनकी बातें भी हो गयी थी। माँ और मासी सबको खिला रही थी।

इतने लोगों के बीच मैं भी दिया मेरे हांथों से ही खाना खायी। खैर अब इंगेजमेंट को 1 दिन रह गया था इसलिए सब उसी पर चर्चा कर रहे थे ।

अब इंटरस्टिंग फैक्ट ये था की मोहित अंकल अपने हर एम्प्लोयी (मैनेजर या उस से ऊपर) के हर फंक्शन में शामिल होते थे अगर सिटी में अवेलेबल हो और यदि न हो तो आंटी और बचे अटेंड करते है।

और जब बात मोहित अंकल की चली तो इतनी बड़ी हस्ती है उनसे सब मिलने वाले है और तो और मौसा जी तो लगता है वो भी बिलकुल फैन हो। मोहित जी ऐसे मोहित जी वैस, जंहा एक तरफ अपने पापा की तारीफ सुनकर परिधि बहुत खुश नजर आ रही थी वंही मैं अब चुटकी लेते हुए....

"ना मौसा जी यदि मोहित सर इतने ही बड़ी हस्ती है तो चलो उन्हीं के पास गुंजन दीदी का रिश्ता ले कर चलते है"।

मेरा इतना बोलने से जंहा किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा पर मौसा जी के चेहरे का रंग उड़ गया। सायद उन्हें बात पसंद नहीं आई और मैं ये भांप गया....

मैं.... " सॉरी मौसा जी मैं तो वो मजाक मैं बोल गया"

मौसा जी.... "राहुल तुम अब बच्चे नहीं जो कुछ भी बोलते रहो और देख कर बोला करो कि किसके बारे में बोल रहे हो, हमारे और तुम्हारे जैसे न जाने उनके कितने नौकर होंगे मोहित जी के पै"

अब तो मेरा चेहरा भी उतर गया। दिया वो तो अभी ही कुछ बोलने को हुए तो मैंने उस से चुप रहने का इशारा किया और उसे शांत करवाया। एक और ऑडियंस थी वंहा जिसका रिएक्शन देख मैं समझ गया की इसे भी बुरा लगा है। खैर बांकी मौसा जी के समर्थन में, और सब ने बोला की मुझे ऐसी बातें नहीं करनी चहिये।

भोजन के पश्चात मैं परिधि को उसके घर छोड़ने चला गया पुरे रस्ते शांत थी कुछ न बोलि, बस मैं ही बोलता रहा और परिधि हान, हुण, न मैं बोलती रही ।

परिधि अपने कमरे में चली गयी और मैं आंटी से जाकर मिला और कल परिधि को इंगेजमेंट में ले जाने की परमिशन भी ले ली।

घर पहुंच, घर पहुँच कर आराम किया थोड़ी देर फिर यूँ ही कभी इसे से दो बातें तो कभी उस से । देख के शांति मिल रही थी कि दिया ने मौसा जी की बात को ज्यादा दिल से नहीं लिया और वो भी इंगेजमेंट मैं क्या क्या धमाल करना है उसके बड़े मैं सोच रही थी।

मूड तो मेरा भी ऑफ था मौसा जी की बातों से क्योंकि बहुत रूडली बोले।

लेकिन इन सब बातों को दरकिनार कर अब मुझे भी कल की तैयारियां करनी थी इसलिए मैंने परिधि को करीब 5: 30 pm पर फ़ोन लगाया ।

परिधि.... हाँ बोलिये सर ,

मैं.... जल्दी तैयार होकर मुझे पिक करने आओ ।

परिधि.... ओके , न कोई सवाल, की क्यों और कान्हा चलना है।

अभी 15 मिन हुए होंगे की परिधि का कॉल आया । मैं भी यंहा तैयार बैठा था इसलिए कॉल आते ही बहार चला गया, परिधि ने घर से कुछ दूर पर कार पार्क की थी।

मैने परिधि को ड्राइविंग सीट से उठकर बगल में बैठ ने को कहा वो बिना कोई सवाल किये चुपचाप बैठ गायी।

दोनो शांत और कार लगी कॉफ़ी शॉप पर।

आंडार टेबल पर बैठते हुए...

"क्या है परिधि प्लीज अब कुछ बोलो न ऐसे नाराज क्यों होती हो"

परिधि.... मैं क्यों नाराज होने लगी ।

फिर हमारा वाद-विवाद यूँ ही चलता रहा । कुछ देर बाद परिधि भी नार्मल हो गयी और फिर उसकी शरारतें शुरू हो चुकी थी। पर वो जो भी करती मुझे बहुत प्यारा लागता ।

पर अब मुझ से न रहा गया तो मैं बोल ही दिया.....

"आज कल देख रहा हूँ की तुम बहुत जल्दी नाराज हो जाती हो"

परिधि...... तुमहे कोई कुछ बोलता है तो मुझे अच्छा नहीं लगता और न चाहते हुए भी गुस्से आ जाता है।

मैं..... और वो क्यों?

परिधि....इस क्योँ पर सरमा गयी और बोली हर बात का जवाब देना मैं जरूरी नहीं समझती ।

खैर माहौल खुशनुमा हो चला था । और अब मैं परिधि को कल का प्लान बताने लागा । अब हमारी कल की पूरी प्लानिंग हो चुकी थी बस एक बात के....

परिधि अब चलो किसी बुटीक में.....क्योँ। ....चलो तो ।

फिर हम चल दिए बुटीक सेंटर पहुँच कर मैंने उसे अपने लिए एक मैरून कलर की एक लंहगा ले लो।

परिधि.... मैं क्यों लूँ मुझे समझ में नहीं आ रहा ।

मैं.... वो ऐसा है बीबी जी कि, जब मेरी सं आप के नाम थी तो आपने मुझे अपने पसंद के कपड़े दिए, और कल मेरी बारी है इसलिए अब चुपचाप ले लो।

परिधि.... ओके सर ।

फाइनली मेरी तयारी भी पूरी हुई । परिधि को घर ड्रॉप किया और 5pm को पिक अप का बोल कर चला गया।

घर आया तो सब अपनी अपनी तैयारियों में लगे थे, मुझे देख दिया मेरे पास आ गयी और हम दोनों आपस मैं यु ही बातें करते रहे ।

लोग बहुत ही उत्साहित थे कल के लिये। हम सब खाना खा कर सोने चले गै। रूम में आकर मेरी थोड़ी ऋषभ से बात हुए, जल्दी आने को बोल रहा था । फिर कुछ देर परिधि से बात हुए कल के बारे में और फिर आई नींद और सो गया।

और अब हुई सुबह....

कहानी जारी रहेगी....
 
अब हर अपडेट मेगा नहीं कर सकते ना मित्रों इसीलिए कभी कभी वक़्त के साथ चलना चाहिए... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg
 
शुक्रिया मित्रों....

इस कहानी में कोई सेक्स नहीं है इसीलिए शायद इतनी व्यू नही आ रहे हो मगर यह मेरी यह बहुत पसंदीदा कहानी है....//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

और इसे मैं ऐसेही पसंद करूँगा....
 
अपडेट - 34

और अब हुई सुबह.....

सुबह मेरी नींद अपने रुटीन टाइम 4 बजे पर खुली। अब तक किसी के भी जागने का कोई सवाल ही नहीं होता । मैं घर में ही आज कुछ एक्सरसाइज की 5 बजे मैं हॉल में आया। हॉल में पापा अकेले बैठे थे । मैं पापा के पास जकर.....

"पापा आप इतनी सुबह"

पापा मेरे कंधे पर हाँथ रकते हुए..... मैं जानता था अभी तुम ही जागे होंगे इसलिए बहार तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था ।

मैं.... क्या पापा आप मेरे रूम भी आ सकते थे ।

पापा.... रहने दे बेटू कोई बात नहीं ।

मैं.... पापा कोई खास बात है ।

पापा.... नहीं उतनी भी खास नहीं ।

मैं.... बात क्या है पापा ।

पापा.... नहीं मैं कल क्षितिज़ जी ( मौसा जी ) की बातों के लेकर तुम से बात करने आया हू ।

मैं..... वो गलती से निकल गया पापा मैं आप से भी मांफी चाहता हूँ की मेरे कारण आप को शर्मिंदा होना पड़ा ।

पापा.... नहीं बेटा कैसी बात कर रहा है तू तो मेरा शेर है, मुझे तेरे नहीं क्षितिज़ जी की बातें बुरी लागी।

मैं...... क्या पापा वो मेरे बड़े है क्या हुआ थोड़े नाराज ही हो गए तो ।

पापा.... चल तू तो बहुत बड़ा हो गया है।

फिर मैं और पापा बहुत देर तक बातें करते रहे अब धीरे-धीरे लोग भी जागने लागे, अभी कुछ ही देर हुए थे कि मौसा और मौसी जी ने भी हमें ज्वाइन किया।

मौसा जी... राहुल कल की बात से नाराज है क्या मुझसे ।

मैं.... क्या मौसा जी आप भी न कैसी बातें करते है, मुझे तो लग रहा था की आप कहीं न नाराज हो मुझसे।

मौसा जी........ नहीं बेटा पता नहीं कल क्या हुआ, तू जो कभी कोई बुरा नहीं किया और मैं कल तुझ पर ही नाराज हो गया।

में।।।।। अब क्या आप सब इसी पर बहस करते रहेंगे कि सब जाके तैयारी में लगेंगे इंगेजमेंट की।

फिर सब निकल गए अपने अपने काम से , पर पापा मेरे कंधे पर हाँथ रखा और जेब से ₹ 20000 मुझे निकल कर देने लगे ।

मैं..... क्या है पापा पैसे हैं मेरे पास ।

पापा..... मुझे पता है अब कोई बहस नहीं..... जबरदस्ती पापा ने मुझे पैसे थमा दिए ।

अभी सुबह के 6 बज रहे थे माँ-पापा, मौसा-मौसी और मुझे छोड़ कर सब सो रहे थे । मैंने सोचा बहुत दिन हो गए सिमरन दीदी के पास बैठे। फिर चला मैं सिमरन दीदी के कमरे में । गुंजन और सिमरन दी एक साथ सोती थी।

मैन रूम में पहुंच, गेट नॉक किया सोयी सूरत के साथ गुंजन दी ने गेट खोली...... तू इतनी सुबह क्यों आ गया ।

मैं.... तो जाऊ क्या ।

गुंजन... खायेगा एक आ बैठ ।

गंजन दी बाथरूम चली गयी और मैं सिमरन दी के सर के पास बैठ गया, बहुत चैन से सो रही थी सिमरन दी , मैं उसके सर पर हन्त फेरा । कुछ देर ऐसे ही करता रहा अचानक से सिमरन दी जाग उठी ।

सिमरन.... बेटू कब आया ।

मैं..... दीदी बस ऐसे हि, बहुत दिन से बात नहीं की थी तो सोचा कुछ देर बैठ लूं ।

सिमरन.... आ ईधर आ। दीदी बैठ गयी और मेरे सर को अपनी गोद में ले लिया और सर पर प्रेम से हाँथ फेरते हुए हम कुछ इधर उधर की बातें करते रहे ।

गंजन दी भी बाथरूम से आ गयी हम दोनों को ऐसे देख मुस्कुरा कर चली गायी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था कुछ देर यूँ ही बैठने और बात करने के बाद मैं चला आया ।

अब मैं पहुंचा हॉल में। सब उठ चुके थे और सब अपनी अपनी तैयारियों में लगे थे । अभी मैं हॉल में बैठा था की मेरी नज़र सुनैना पर पड़ी । उसे देख ऐसा लग रहा था की अन्दर ही अन्दर कोई समसया लिए है जिसका कोई उपाय न मिल रहा हो। चिंता और परेशानीचेहरे से साफ झलक रही हो।

मैं उठा और सुनैना के पास गया तो चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान लाते हुए..... "और भाई कैसे हो"

मै कुछ न बोला उसका हाँथ पाकर बाहर ले आया और कार में बैठने को कहा । वो मेरा इस तरह का बेहेवियर देख कर हैरान थी और बिना बोले कार मैं बैठ गायी।

(मुझे लगा सब लोगों को देख बात को टाल न जाय इसलिए उसके साथ अकेले ग्राउंड ले आया)

मैने कार स्टार्ट की और पास के एक ग्राउंड में रोक दी । ग्राउंड के अंदर हम बेंच पर बैठ गए, अभी भी सुनैना मुझे हैरानी से ही देख रही थी की आखिर मामला क्या है?

मैं.... बात क्या है ।

सुनैना.... क्या , कौन सी बात ।

मैं..... वही जो तेरे मन में है ।

सुनैना...... देख तू फालतू में दिमाग लगा रहा है ।

मैं..... नहीं जरूर कोई बात है ।

फर हम दोनों के बीच हॉ, न, हॉ, न होते होते सुनैना ने बात सुरु की....

"मुझे कॉलेज में एक लड़के ने पर्पस किया पर मैंने मन कर दी, वो मुझे लगातार परेशान करता रहा मैं फिर भी न मानी । अभी 10 दिन पहले मैं गुंजन दी के साथ मॉल गयी थी वहा मैंने कुछ ड्रेस ट्राय करने के लिए चेंजिंग रूम में गाई । और.....

मैं..... और क्या बता ना ।

सुनैना..... वो लड़का, उसने मेरी ड्रेस बदल ने की पूरी वीडियो निकल ली। अगले दिन उसका मेसेज मेरे मोबाइल पर आया मैंने देखा तो मेरे होश उड़ गए । मैंने उसे कॉल करके विनती की प्लीज इसे डिलीट कर दो । तो.....

मैं..... बता ना प्लीज ।

सुनैना.... उसने शर्त रखी की एक शाम उसके साथ....

ओर रोने लागी।

अब मेरी बात समझ में आ रही थी कि क्यों उस दिन सुनैना ऐसा बोल गयी और वो कॉल उसी लड़के का था ।

मैने सुनैना को कार में बिठाया और पहुँच गया वही पुलिस स्टेशन जंहा मेरी खातिरदारी हुए थी , बस मन में ये विस्वास लिए की वंहा लोग मेरी मदद कर सकते है।

वँहा तीन लोगों ने मुझे पहचान लिया और इस से पहले कुछ बोलते मैंने उन्हें साइड मे चलने के लिए बोला । वो मान गए ।

पहले तो उन्हें मैंने ये बताया की मैं अरेस्ट हुआ था ये घर मैं किसी को पता नहीं और मैं जिसके साथ आया हूँ वो मेरी सिस है तो प्लीज उस दिन की चर्चा न करे और फिर सुनैना की परेशानी बताई ।

उनलोगो ने मेरी बात समझते ही सुनैना से उस लड़के का नंबर लिया और हम से हमारा नंबर । फिर मुझे बोला अभी तुम जाओ 1 घंटे में कॉल करता हू ।

वहाँ से मैं और सुनैना लौट कर वापस ग्राउंड चले गए और कॉल का वेट करने लागे । यही कोई 9 बजे के आस पास इनफार्मेशन देने के डेढ़ घंटे बादकॉल आया और हमें पुलिस स्टेशन आने को बोला ।

हम दोनों पुलिस स्टेशन पहुंचे तो वंहा कुछ लड़के, और सायद उनके माँ बाप भी थे। सुनैना ने सभी लड़को को पहचान लिया और उसे भी जिसने ये वीडियो बनाया था ।

ये जितने भी लड़के थे सब सुनैना के कॉलेज के थे और इन सब को वो वीडियो mms से सेंड किया गया था ।

फिर हम से इंस्पेक्टर सब ने पूछ...... क्या करना चाहते हो कहो तो FIR कर दे ।

मैने 1 बार सब की तरफ देखा फिर उनके माता पिता की तरफ । अब मैं..... सर इनसे से वीडियो डिलीट करवा के छोर दीजिये अगर FIR हो गया तो फ्यूचर में कुछ नहीं कर पाएंगे और तुम लोग सरम नहीं आती एक लड़की ने न कर दिया तो उसे इस तरह से परेशान करते हो और ब्लैकमैल। अभी रिपोर्ट हो गयी तो मालूम है क्या होगा।

सब को अपने किये पर पछतावा हो रहा था उनके माँ बाप तो जैसे गिर ही पड़े हमारे कदमो में। फिर सब ने हम से मांफी मांगी और इन फ्यूचर न कभी वो सुनैना को कभी परेशान नहीं करेंगे ऐसा वादा किया ।

वीडियो डिलीट कर सब को पुलिस वालो ने छोड़ दिया और मेरे किए को सराह रहे थे ।

तब मैंने कहा.... सर मैंने सिर्फ उनको अपनी बहन के वजह से छोड़ा है की आज न कल वो बहार आते ही और आते ही बदला लेते अगर ये चंडीगढ़ में होता तो अबतक पता नहीं क्या हो गया होता मैंने यह सिर्फ ये बात सुनैना की वजह से बर्दास्त की है "।

फिर मैंने मदद के लिए सबको धन्यवाद बोला और मेरा बिंदास अंदाज़ देख कर एक ने पूछ ही दिया....

तुम पुलिस स्टेशन में ऐसी बात कर रहे हो डर नहीं लगता ।

मैं.... सर ये फैमिली मैटर है 2,4 साल के लिए चला भी गया तो ग़म नहीं हाँ आप मुझे जितना चाहे उतना परेशान करे कोई गम नहीं ।

वही पुलिस वाला.... आदमी अच्छे हो नंबर दो अपना कभी चंडीगढ़ आना हुआ तो जरूर मिलुंगा। फिर मैंने उन्हें नंबर । दिया और चले वापस घर की ओर

सुनैना...... मुझे माफ कर दो मैंने तुम्हे क्या समझा और तुमने मेरी कितनी मदद की ।

मैं...... पागल फॉर्मेलिटी छोर और ये बता तू इतनी परेशान थी तो नीरज भैया को क्यों नहीं बताया।

सुनैना.... मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था ।

मैं......... देख तेरे अपने समझ के कारण तू मर रही थी मेरी बात मान कोई भी परेशानी हो और खास कर लडको की तो घर मैं जरूर बताया कर इस से आने वाली परेशानी कम हो जाती है।

फिर मैंने सुनैना को बहार ही नास्ता करवाया अब तक 12 बज चुके थे और हम घर वापस आए ।

आब सुनैना एक्चुअल सुनैना के रूप मई चहक रही थी। घर पर भी सब अपने रंग में थे । मैंने सोचा क्यों न एक बार परिधि से बात की जाय तो मैंने फिर परिधि को फ़ोन लगगया।

हमारी क़रीब 15 मिन की बात हुए बात के दौरान हमारा प्रोग्राम कुछ यूँ तय हुआ की परिधि को मैं 5 बजे पिक करूण। वंहा से हम दिल्ली डेंजरस ग्रुप से मिले, फिर 7 बजे हम इंगेजमेंट पार्टी के लिए जाए और इन सब बातों पर मैंने हामी भर दी ।

काई काम था नहीं तो मैं नीरज भैया के पास चला गया, वंहा से दिया के पास, वंहा से फिर भोजन, भोजन के बाद थोड़ा सा रेस्ट, रेस्ट के बाद फॅमिली मीटिंग और अब बज गए 4 ।

मैंने घर पर बोल दिया की मैं अपने कपड़े नहीं ख़रीदा हूँ तो मैं शॉपिंग कर परिधि को साथ लेते हुए 7 बजे तक पहुँच जाऊंगा ।

साढ़े 4 बजे मैं परिधि के यंहा पहुँच गया परिधि अबतक अपने कमरे मे थी और मेरे आने का इंतज़ार कर रही थी। हॉल में कोई नहीं था बस कुछ नौकरों को छोड़ कर। सबसे पहले मैं गेस्ट रूम में गया जंहा पहले ठेहर था 20 मिन लग गए मुझे तैयार होते होते ।

अब में चल पड़ा परिधि के रुम....

और परिधि को देख कर तो मेरी नज़र ही फिसल गायी। वो लंहगे मैं क्या खूबसूरत दिख रही थी। मैं न चाह कर भी उसे देखने से खुद को नहीं रोक पा रहा था ।

परिधि थोड़ी शर्माते हुए......... प्लीज माँ को मेरे कमरे में भेज दो ।

मैं.... क्या हुआ कोई बात हो तो बोल दो न, परिधि शर्माते हुए पीछे मुड़ी और अपनी चोली की तरफ इशारा करते हुए......., ये आखरी हुक नहीं लग रहा है क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो।

मैन क्या बोलता मेरे तो गला ही सुख चुके था , रुको मैं आंटी को भेजता हूं। फिर गया आंटी को बुलाने पर आंटी भी तैयार हो रही थी। मैंने आंटी से पुछा की कही जा रही है तो उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी के किसी एम्प्लोयी की आज इंगेजमेंट है उसी में सब जा रहे है। जाना तो परिधि को भी था पर वो तुम्हारे साथ जा रही है।

आप चलिये तो आज हम भी वही पहुँच रहे है (मन में सोचते हुए)

इतने मैं परिधि की आवाज़ आई..... मोम, मोम ।

आंटी.... बेटा जरा देख क्या कह रही है ये लड़की भी न मुझे बस परेशान करती रहती। मैं अभी तैयार हो रही हूँ लेट हो गयी तो मोहित भी मुझ पर चिलायेंगे।

मैं.... ठीक है आंटी कह कर मैं चला परिधि के रूम में ।

मुझे देख कर इस बार बड़े बेबाक अंदाज मैं......अब जल्दी से इसे लगाओ नहीं तो जाओ यंहा से ।

मरता क्या न करता मैं चला आगे, मेरे हाँथ काँप रहे थे और काँपते हांथों से मैं परिधि की चोली का हुक लगा दिया पर जैसे ही वो आगे की ओर मुड़ी तो लंहगे में उसका पैर फँस गया और वो गिरते गिरते बची पर पोजीशन कुछ इस तरह थी......

उसके दोनों हाँथ मेरे कंधे पर और मेरे दोनों हाँथ उसके पेट पर उसे सँभालते हुए।

और अब हुए आंटी की एंट्री.....

बेटी को चिल्ल्या सुन भगते रूम में आई और इस पोजीशन में हमें देख, अब आओ देखा न ताव और एक तमाचा मेरे गाल पर और चिल्लाते हुए........"निकल मेरे घर से एक मिनट भी रुका तो काट कर फिकवा दूंगी " ।

इतने कम समय में ये सब हुआ कि न तो परिधि कुछ बोल पायी और जबतक उसने बोलने को मुँह खोला तबतक बहुत देर हो चुकी थी।

मुझे बहुत जिल्लत महसूस हुई और मैं एक पल भी बिना गवाये निकल गया मैं परिधि के घर से...

कहानी जारी रहेगी....
 
Back
Top