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प्यार - ( गम या खुशी )

शुक्रिया मित्रो....

भाइयों बोल कर अपडेट दे रहा हूँ...

जिस दिन का बोलता हूँ जैसा बोलता हूँ...

वैसे अपडेट दे रहा हूँ यार...

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अपडेट - 35

निकल गया मैं परिधि के घर से.....

मुझे उस थप्पड़ ने झुँझलाने पर मजबूर कर दिया, मैं नहीं जानता था कहाँ जाना है क्या करना है बस उदास था । तभी मुझे ख्याल आया भला मेरी वजह से दोनों माँ बेटी क्यों लड़े । इसी ख्याल से मैंने मेसेज किया.....

"कोइ मेरी वजह से अपनों से लड़े तो मैं उसे कभी पसंद नहीं करता आगे तुम्हारी मार्जि"

मेसेज भेजा फ़ोन ऑफ और चला शांति के तलाश में। पता नहीं कहा जाना है फिर मैंने कार को ग्राउंड के नजदीक लगाया और बैठ गया ग्राउंड के बेंच पर।

बास यूँ ही बैठा रहा क्योंकि मुझे 7 बजे अटेंड करना था इंगेजमेंट प्रोग्राम इसलिए मेरे पास अभी समय था ।

मुझे रह रह कर वो तमाचा ही याद आ रहा था ऐसा लग रहा था की गाल पर नहीं तमाचा दिल पर लगा हो।

मैन अंदर ही अंदर घुट रहा था फिर अचानक से मुझे क्या हुआ मैं ग्राउंड में, ग्राउंड के चक्कर लगाने लाग, एक वे'ल मेन्टेन लड़का जो किसी पार्टी के लिए तैयार था अभी उसी अवस्था में अब ग्राउंड के चक्कर लगा रहा था ।

मैन लगातार चक्कर लगाता रहा । क्यों लगा रहा हूँ कुछ मालुम नहीं , कितने लगा चूका होश नहीं, थक कर चूर हो गया गम नहीं, लगता रहा और चक्कर लगाते रहा । और अपने पुरे रफ़्तार मैं लगता रहा ।

अब साँसे नहीं बची मेरे पास और दौड़ने को।

मैन अपने अचेत अवस्था से जगा,अचानक से, की ये मैं क्या कर रहा हू ।मैने टाइम देखा 7 : 30 हो रहे था । मैं हडबडाते भगा कुछ न देख पाया की कंहा हूं। स्लिने की बोतल खिंच ति चली गयी और साथ मैं उसका स्टंड, जब मैंने सब नोच के अपने बदन से अलग किया कि तभी अचानक किसी ने सामने से मुझे गले लगा लिया।

मेरी चेतना जैसे लौटी हो। मैं हॉस्पिटल में और कोई मेरे गले से लग के रो रही है। मैंने अपने से अलग किया तो देखा परिधि रो-रो के अपना बुरा हाल कर लिया है।

मुझे उसका रोना देखा न गया मैंने कहा.... परिधि प्लीज चुप हो जाओ देखो टाइम ज्यादा हो गया है हमें इंगेजमेंट मैं जाना है दीदी इंतज़ार कर रही होगी।

अब भी चुप ना हुई । अब मुझे गुस्सा आया और ग़ुस्से में..... यह क्या लगा रखा है मैं यंहा जाने के लिए परेशान हूँ और तुम रो रही मैं क्या करूं बतओ, और खिंच कर हाँथ दे मरा कांच पर।

होना क्या था हतेली साइड से फट गयी ब्लीडिंग शुरू और परिधि बिलकुल चुप । कुछ टूटने की आवाज़ सुनकर हॉस्पिटल स्टाफ भी आ गै, कुछ ने कांच साफ की तो कुछ ने पट्टी की मेरे हाँथ की।

एक के बाद एक घटनाएं होती चली जा रही थी फिर मैंने अपने आप को कण्ट्रोल किया मैं परिधि को देखा अब मुझे ये अहसास हुआ की मैं उसे चुप नहीं करा रहा था उसे शॉक दे रहा था । वो किसी मूर्ति की तरह कड़ी थी बिना किसी आवाज़ के बस आँखों से आँसू बह रहे थे ।

उसका रोना मुझे बर्दास्त न हुआ मैं उसे चुप होने को कहा वो चुप हो गायी, पर कुछ बात नहीं कर रही थी बस सिसकियां ले रही थी। मैंने उसे पहले बाहर चलने को कहा, वो चुपचाप किसी परछाई की तरह मेरे पीछे आ गई ।

अबतक 8 बज चुके थे तभी फ़ोन आया मेरे फ़ोन पर लेकिन मोबाइल परिधि के पास था । उसने चुपचाप फ़ोन मेरी ओर बढ़ा दिया मैंने कोई रेस्पोंड़ नहीं किया।

अब परिधि खुद को नार्मल करते हुए कॉल वापस लगायी....

सिमरन..... कहाँ हो परिधी..

परिधि...... बहुत धीमी आवाज़ हम बस दीदी आधे घंटे तक पहुँच रहे है।

सिमरन.... राहुल से बात कराओ ।

परिधि.... जी.... और फ़ोन मेरी तरफ

मै.... जल्दी में बस दीदी पहुँच रहा हूँ बाई ।

फर मैं परिधि के पैरो में गिरते हुए....

"माते मेरी इज़्ज़त आप के हाँथ मैं है प्लीज अपने आप को ठीक करो और चलो" ।

परिधि रोते हुए....

"तुम्हारी बेरुखी देखना किसी दिन मेरी जान ले लेगी अब चलो गुंजन दीदी बोल रही थी बिना राहुल के मैं इंगेजमेंट नहीं करने वाली"

क्या बताऊँ इस समय परिधि को देख कर न तो मुझे किसी का तमाचा याद रहा और न ही इंगेजमेंट बस एक अपना पन का अहसास, क्या था पता नहीं मैं खुद को रोक न पाया और, परिधि को गले लगाते हुए....

"तुम प्लीज अब शांत हो जाओ"

फिर कुछ देर हम यूँ ही गले लगे रहे सारी दुनिया और सारे गमों से बेखबर की तभी फिर फ़ोन बजा....

परिधि....जी सिमराम दीदी आ रहे है, बस पहुँच गए ।

गुंजन.... सिमरन नहीं गुंजन बोल रही हू, राहुल को बोलो अपने समय से पहुँच जाए रखती हूँ बाई ।

(अभी भी हम एक दूसरे के बाँहों में ही है)

परिधि नार्मल हो चुकी थी और अब मुझे अपने से दूर हटाया, और जब मेरी नजर उस से मिली तो शर्माते हुए नजर नीचे करके.... जल्दी चलो , प्लीज सब इंतज़ार कर रहे हैं।

मैं.... चलो तो देर किस बात की ।

फिर परिधि ने मुझे मेरे हुलिए से अवगत कराया।

मैं.... यार ऐशे तो हम आम दिनों में घर नहीं जा सकते पर इंगेजमेंट में कैसे जायेंगे और ये 8 :30 का चक्कर क्या है।

परिधि.... चलो पहले बैठो कार मैं रस्ते मैं समझती हू ।

हम दोनों चल दिए परिधि ने कार एक सूट के शॉप के पास रोकि, वो अन्दर गयी और सैम सूट जो मैंने पहना था वो ले आई ।

अब हम चले पार्लर की ओर ।

परिधि ने मुझसे कहा..... 8:30 तक रेडी होकर आ जाऊ ।

बस फिर क्या खुद को पार्लर मैं ठीक किया कोट पहना, टाई पहनि, पेंट पह्न, एक ने हल्का फुल्का मेक-उप किया हो गए टिप टॉप आ गया बाहर ।

कुछ देर इंतज़ार के बाद परिधि भी बाहर आ गायी। हम दोनों की नजरें मिली और कुछ देर एक दूसरे को यूँ ही देखते रहे ।

तभी एक लड़के ने टोकते हुए.... सर पैसा पेड करो और रास्ते से हट कर फ़्लर्ट करो।

जी तो किया दूँ लड़के को खिंच के पर ऐसा कर न पाया । मेरी हालत शायद परिधि समझ चुकी थी इसलिये मंद मंद मुस्कुरा भी रही थी खैर उसे पैसे पेड किये और चालें इंगेजमेंट में।

मैं..... यह 8 : 30 का चक्कर क्या है।

परिधि..... तुम तो बेहोश थे और कुछ हुआ नहीं कि फ़ोन ओफ्फ्। तो मैं जब तुम्हारी हालत देखी तो हॉस्पिटल ले आयी और डॉ से पूछा की कब तक होश आएगा । जवाब आया बहुत ज्यादा चिंता की बात नहीं है हरस्मेंट के कारन है 1,2 घंटे में होश आ जाएगा । मैने समय देखा और तुम्हारी हालत ।

मैन बिच मैं टोकते हुए... और अपनी ।

परिधि.... हाँ अपनी भी , अब बोलूं या और कुछ बोलना है ।

मैं.... सॉरी तुम बोलो अब नहीं बोलुंगा ।

परिधि.... मैंने जब सब कैलकुलेट किया तो 8 कम से कम लग जायेंगे पहुँचने में तो मैंने टाइम फिक्स किया 8 : 30 ।

फिर मैंने अंकल (मेरे पापा) को फ़ोन लगा कर बोला रास्ते पर एक कार ख़राब हो गयी थी जिसमे एक प्रेग्नेंट लेडी को दर्द हो रही थी उसने हमारी कार रुकवाई और हेल्प मंगी, फिर पहले तो हमने पुछा की एम्बुलेंस के बरे मैं पर जब पता चला की 1 घंटे पहले फ़ोन किया है अबतक नहीं पहुंची तो हमने हेल्प कर दी ।

मै.... ओके और कुछ जो मुझे बोलना है या मालूम होनी चाहिए?

परिधि.... नहीं ।

मैं..... और तुम हॉस्पिटल मैं रो क्यों रही थी?

परिधि.... हॉस्पिटल कैसे पहुंचे इसपर कल चर्चा करे।

मैं.... कोई बात नहीं कल कर लेंगे बाते ।

पहिर परिधि बोल पड़ी...

पहले तुम माँ को माफ कर दो उन्हें बहुत अफ़सोस है उस बात का , वो तो खुद तुम्हारे पास रुकना चाहती थी पर मैंने समझा कर उन्हें इंगेजमेंट मैं भेज दिया।

मैं.... पर उन्होंने किया क्या था?

परिधि अस्चर्य से..... ऐसा क्यों पूछ रहे हो?

मैं.... जाने दो इतने दिन साथ रह कर भी तुम मुझे न समझ सकी तो फिर इस सवाल को क्या समझेगी?

परिधि एक शंका भरी नज़रों से मुझे देख रही हो और पूछ रही हो की माँ को माफ किया की नहीं ।

मैं...... चिंता मत करो मुझे कोई शिकायत नहीं आंटी से अब चलो जल्दी ।

अब कार रुकी और हम पहुंचे गार्डन के अंदर..

कहानी जारी रहेगी....
 
सब्र रखो मित्र कहानी बहुत रोमांटिक...

मोड़ लेने वाली है....
 
शुक्रिया मित्रों....

नहीं भाई में फोन से अपडेट लिखता हूँ यार...

ऐज भी 19 है ज्यादा चलाऊ तो मम्मी...

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अपडेट - 36

अब कार रुकी और हम पहुंचे गार्डन के अंदर.....

हमारे एंट्री होते ही हम पॉइंट ऑफ़ अट्रैक्शन लग रहे थे । मैं और परिधि साथ साथ ही चल रहे थे और स्टेज कि ओर बढ़ रहे थे । जहाँ एक तरफ हमारे घर के लोग हम दोनों को देख खुश हो रहे थे वंही अंकल आंटी बहुत आश्चर्य कर रहे थे ।

लाल कि नजर जैसे ही मुझपर पड़ी वो दौड़ कर मेरे पास चला आया । फिर मैं और परिधि पहुंचे अंकल आंटी के पास । जब मैंने आंटी का चेहरा देखा तो लगा कि आंटी गिल्टी फील कर रही है अब थी तो मेरी माँ समान ही मुझे अछा नहीं लगा ।

मैं आंटी के गले लगते हुए कान में कहा.... क्या आंटी अब तक नाराज है, वो गलती से हुआ, चाहो तो दुबारा मर लो पर नाराज मत हो।

अब आंटी को जैसे ही सब नार्मल लगा तो मेरे कान पाकर कर..... तू कल आ बताती हूं।

फिर मैं अंकल के पास गया उन्होंने कंधे पर हाँथ रखते हुए कहा.... मुझे पता चला शाम कि घटना।

अब मैं टोकते हुए अंकल से..... क्या हम भूल जय इस बात को जो होना था वो हो गया रहने दीजिये न।

आंटी..... तुम दोनों यंही आ रहे थे और हमें बताया भी नहीं ।

परिधि..... सरप्राइज था मोम ।

मैं..... आंटी अब हम जय वंहा दीदी से भी नहीं मिले।

आंटी...... जाओ बेटा वैसे भी कब से तेरा ही इंतज़ार हो रहा है।

हम दोनों गुंजन दीदी के पास पहुँच कर ।

मैं.... गुंजन दीदी से , बहुत प्यारी लग रही हो दीदी कंही मेरी नज़र न लग जाए ।

गुंजन.... तू तो रहने दे आज अपनी दीदी को परेशान किया है न इतना लेट क्यों हुआ?

मैं...... आप को अछा लगता कि मैं किसी को वैसी हालत मैं छोड़ आता ।

गुंजन.... नहीं काम तो दिल खुश करने वाला किया है ।

तभी निखिल मुझसे.....

"तो तुम मोहित सर को जानते हो"

मैं..... थोड़ा बहुत ।

निखिल.... और वो लड़की (तबतक परिधि दिया के पास थी) जो तुम्हारे साथ रहती है।

मैं..... वो परिधि है मेरी दोस्त, अब आप सब का बायो-देता बाद मैं लेना पहले मंगनी कि रस्म शुरू कीजिये।

चूंकी मैं सबसे लेट था इसलिए एक एक करके सबसे मिलते रहा उस दौरान परिधि भी मेरे साथ थी।

आज पता नहीं क्यों मैं भी नहीं चाहता था परिधि मेरे नज़रों से दूर हो इसलिए जब परिधि किसी से अकेले मिलती तो मैं इशारे से बुला लेता।

हम यूँ ही आपस मैं बात करते हुए घूम रहे थे और पार्टी का लुफ्त उठा रहे थे कि सामने से दिया और सुनैना आती दिखी ।

मैने अपना सर पीट लिया क्योंकि अगर दिया अब शुरू हुए तो भगवन ही मालिक है कि किस बात से किसको मारगी। इस बात को भांपते हुए मैं बिंदास तरीके किसी दूसरी ओर मुड़ गया।

पर कहते हैं न कि अगर आप को मारना है तो कोई नहीं बचा सकता और वही हुआ मेरे साथ्।

पीछे से.... भैया- भैया ।

मैं अंजन बनते हुए.... हाँ बोल।

दिया.... आप मुझे देख अवॉयड क्यों कर रहे है ।

बीच में परिधि..... नहीं वो मैंने कहा था मुझे कुछ स्वीट्स खाने थे ।

दिया..... बस इतना ही , सुनयना दी थोडा इनको आप स्वीट्स खिला के लाओ तबतक मैं भैया से बात भी कर लू ।

सुनैना परिधि को लेकर चली गयी और मैं मरता क्या न करता....

"बता ना क्या बात है"

दिया.... यहाँ नहीं चलो उस टेबल पर और खिंच कर मुझे टेबल पर ले गयी मैं पीछे मुड़ कर परिधि को देख रहा था और परिधि मिझे और जैसे एक दुसरे को कह रहे हो कान्हा फँस गए ।

दिया......भैया मुझे परिधि बहुत पसंद है आप सेलेक्ट कर लो।

मैं.... तू समझ रही है तू क्या बोल रही है ।

दिया..... हाँ पर वो भी तुम्हे पसंद करती है ।

मैं.... देख दिया तू मेरे साथ इतना रहती है पर कुछ सीखा नहीं, किसी भी चीज पर अपनी राय तभी बनानी चाहिए जब आपको यकीन हो। तो मेरी बहन तू कैसे यकीन है?

दिया.... मैं कुछ नहीं जनती ।

मैं.... दिया बहुत हुआ अब हम इस पर कोई चर्चा नहीं करेंगे

इतने में सुनैना और परिधि भी आ गयी आते ही ।

सुनैना.... क्या बातें हो रही थी ।

दिया.... परिधि के बारे में ।

अब मैंने सर पीट लिया कि ये लड़की आज कोई न कोई कांड यंहा जरूर करेगि।

परिधि..... ऐसी क्या बातें हो रही थी हमरे बारे में जरा हमे भी बताइये, अगर ऐतराज़ न हो तो ।

दिया..... मुझे लगता है आप के 1,0(जीरो,निल) बॉयफ्रैंड होगा पर सुनयना दीदी कह रही थी कि आप के 2 से जयादा होंगे । वही भैया से क्लियर कर रही थी।

लो हो गया कल्याण मैं तो चला यंहा से अगर और थोडी देर रहा तो ये लड़की मेरा हार्ट-अटैक करवा के छोडेगी।

मुझसे रहा नहीं गया और उठकर वंहा से चल आया पर अपनी तिरछी नज़रों से परिधि को देखा और परिधि ने मुझे ।

घूमते घूमते मैं फिर गुंजन दी के पास पहुँच गया, जंहा गुंजन और सिमरन दी, निखिल पार्टी मैं अपने फ्रेंड और रिलेटिव्स को अटेंड कर रहा था ।

गंजन दी मुझे छेड़ते हुए.... देख ले राहुल इन में से एक कोई पसंद हो तो बता देना तेरा भी मामला सेटल कर दूंगी ।

अब सिमरन बोल पडी...... बेचारा अभी तो दो में ही डिसाइड नहीं कर पा रहा होगा कि रूही या परिधि क्या चहिये।

मै क्या करता वंहा से भागने के अलावा कोई चारा न था । आज सब के सब मज़ा ले रहे थे मुझसे।

वहाँ से मैं मोम डैड के पास आ गया। वंही उन लोगों से चर्चा होती रही । सामने से मोहित अंकल और आंटी ने भी हमें ज्वाइन कर लिया। हम सब कुछ देर यूँ ही बातों में लगे रहे फिर मैं वंहा से नीरज भैया कि तरफ चलने लगा लेकिन सोचा एक झलक परिधि कि भी ले लू इसी मंशा से मैं फिर परिधि को देखा तो पाया कि परिधि अकेली बैठी है और दिया और सुनैना वँहा नहीं थी ।

अब जो कदम नीरज भैया कि ओर बढ़ रहे थे वो जल्द ही परिधि के तरफ बढ़ने लगे और मैं कुछ ही छड़ो मैं परिधि के सामने बैठा था ।

परिधि मुझे देखते हुए.... खाना खा लिए क्या....

मैं.... नहीं क्यों ।

परिधि.... तो आ जाओ और हमें ज्वाइन करो, तबतक दिया एक वेटर के साथ दिखी जिसके हाँथ में 2 प्लेट खाना था ।

मैंने कहा.... तुमलोग शुरू करो मैं तुम्हे ज्वाइन करता हूँ और अब मैंने भी खाने कि प्लेट लेने चला गया।

वापस मैंने दिया और परिधि को ज्वाइन किया। हम तीनो आपस मैं कुछ खट्टी कुछ मीठी और नोक झोंक के साथ खाने का लुफ्त उठाते रहे ।

अभी कुछ समय बीते थे कि सुनैना हमारे पास आते हुए........क्या हम भी यंहा बैठ सकते है, उसके साथ एक और लड़की थी जिसे हम तीनो में से कोई नहीं जानता था ।

दिया......... क्या दीदी अब आप को भी पूछ कर बैठना पडेगा।

सुनैना बैठ ते ही..... आप लोग इनसे मिले ये है मेरी बेस्ट फ्रेंड उर्वशी ।

उसके बाद हम सब को सुनैना ने इंट्रोडस करवाया। बांकी सब तो ठीक ही रहा पर जब हमारा इंट्रो हुआ तो उर्वशी सुनैना से....

यार कान्हा छिपा रखी थी इस हीरो को फिर मुझसे......अगर कल फ्री है तो वाना डेट विथ मी ।

इस से पहले कि मैं कुछ बोलता दिया बोल पड़ी....

"देखिये मैडम यंहा पहले ही त्रिअंगुलार सीरीज कि नौबत है जिस से मैं परेशान हूँ अब 4थ पार्टिसिपेंट का तो सवाल ही नहीं होता"

उर्वशी.... कोई बात नहीं मैं केवल वन डे फ्रेंडली मैच के लिए इनवाइट कर रही हूं ।

जहाँ उर्वशी इतनी फ्रैंक होकर मुझे डेट पर चलने कह रही थी वंही दिया अपनी नराजगी जाता रही थी, सुनैना तो बस अंपायर कि तरह जज कर रही थी। लेकिन परिधी

परिधि को देखा तो मैं बिना हसे नहीं रह सका पर बाहर से बिलकुल नोर्मल। परिधि अपनी चुन्नी को दो उँगलियों मैं लपेट घुमा रही थी । चेहरे का रंग उड़ हुआ, गुस्से से लाल आँखें और चेहरा बिलकुल गम्भीर।

मैन परिधि को और चिढ़ाने के ख्याल से....

मैं उर्वशी को अपना फ़ोन देते हुए....

इसमे अपना नम्बर सेव कर दे और मेरा नम्बरअपने पास ले ले।

मेरे इस तरह से करने पर अब तो दोनों दिया और परिधि दोनों चिढ़ गयी पर कर कुछ नहीं सकती थी , इसी दौरान उर्वशी......

"किस नाम से अपना नाम सेव करून जो आप को याद रहे"

मैं..... आपने मेरा नाम किस नाम से सेव किया है ।

उर्वशी.... किलर राहुल ।

मैं.... फिर अपना नाम उर्वशी अप्सरा से सेव कीजिये।

वो थोड़ा मुस्कुराई मैंने भी सैम रेस्पोंद किया, इतने मैं परिधि उठी कंही जाने के लिये।।

मैं..... कंहा जा रही हो ?

परिधि..... मैं लॉन मैं जा रही हू ।

मैं.... कुछ देर बैठो हम सब चलते है साथ में ।

परिधि...... नहीं तुम अपनी रास लीला चालू रखो मैं क्यों कबाब मैं हड्डी बनु । इतना कहा और बड़े गुस्से मैं वंहा से निकली और साथ में दिया भी।

लागता है कुछ ज्यादा ही हो गया, देखते है अब इसका रिएक्शन कि कल क्या होता है।

पार्टी ऑलमोस्ट खत्म हो रही थी सारे गेस्ट और रिलेटिव जा रहे थे सारा कार्यक्रम समाप्त हो चूका था परिधि अपने पापा के साथ घर जा रही थी। अब यंहा केवल हम फैमिली मेंबर रह गए थे तो पापा और मौसा जी को छोड़ कर बाकी सब वंहा से रवाना हुए मासी के घर ।

सब थके हुए थे इसलिए सब अपने अपने कमरे मैं चले गए सोने पर इस समय मुझे अपने दर्द का अहसास हो रहा था प्यार वाला नहीं पागल पान वाला जो ग्राउंड मैं कर आया था ।

पैर बिलकुल किसी हेलीकाप्टर कि पंखी कि भाँति धररर धरररर कर रहा था और हवा में उड़ने को तैयार थे । अब रात भी इतनी हो गयी थी कि किसे बताऊ । पर जब अंत में दर्द बर्दाश्त न हुआ तो मै सिमरन के पास चला गया क्योंकि माँ तो पूरा दिन काम करती रही इसलिए सोचा उन्हें न बताऊ ।

मै सिमरन के कमरे मैं गया वंहा गुंजन दी और सिमरन दोनों आपस मैं बात कर रही थी , रूम अभी भी खुला था ।

मै जैसे ही अंदर गया दोनों ने मेरा चेहरा देखते ही समझ गयी कि कि मुझे कोई तकलीफ है।

सिमरन.... क्या हुआ बेटू बता मुझे ।

मैं.... दीदी पैर बहुत दुःख रहे हैं सोया नहीं जा रहा मैं कहराती आवाज़ मैं बोला ।

सिमरन.... तू जा चेंज कर के लेट मैं अभी आई ।

मै वापस कमरे मैं शॉर्ट्स पहन कर लेट गया, कुछ देर बाद सिमरन और गुंजन दी दोनों मेरे कमरे में आई । सबसे पहले मुझे एक पेनकिलर दी खाने के लिए उसके बाद सिमरन दी मेरे पैर दबाने लगी साथ साथ गुंजन दीदी के साथ बातें भी कर रही थी।

कुछ देर मैं रहत भी मिलने लगी और जब रहत लगी तो दिमाग भी चलने लगा और परिधि के कल के रिएक्शन के ख्याल से ही मेरे अंदर एक अजीब सी फीलिंग दौड़ने लगी और इन्ही सब बातों को सोचते मैं सो गया।

मैं सो गया अपने अंदर एक रोमांच को महसूस करके कि कल क्या होगा......

कहानी जारी रहेगी.......
 
बिल्कुल भाई....

सही कहा देखते हैं क्या होगा....

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शुक्रिया मित्रों.....

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अपडेट - 37

मैं सो गया अपने अंदर एक रोमांच को महसूस करके की कल क्या होगा....

जब सुबह मेरी आँख खुली...

पहली बार ऐसा हुआ की जब में जागा तो मुझसे पहले सब जाग चुके थे सब मुझे चारो ओर से घेर सावलिया नजरों से घूरते हुए, दिया, सिमरन, गुंजन, सुनैना, निरज, मोम, मासी सब घेर थे मुझे।

मुझे कुछ देर विस्वास न हुआ की ये सच है या सपना और में सपना समझ कर फिर से आंखें मूंद लि, लेकिन अब कुछ छींटे पानी की बून्द के मेरी ऊपर गिरे मैंने आँखें खोली और वही नजारा फिर से आँखों के समने ।

"नहीं यार ये सपना नहीं है ये तो हकीक़त है पर क्यों सब के सब मुझे घेरे है"?

इतना सोच ही रहा था की माँ....

"क्यों बेटा तेरे पैरो का दर्द कैसा है"?

"अब समझा मेरे पौन की दर्द के वजह से ऐसा है पर मुझे माँ के सब्द में वयंग क्यों नज़र आ रहा है"?

मैं इतना सोच ही रहा था की नीरज भैया....

"बेटू कल यूट्यूब पर एक फैंटास्टिक घटना अपलोड हुए है और व्यूज देख तक़रीबन 12 घंटे में 5 लाख"

मैं..... भैया थोड़ा बाथरूम हो के आउ फिर देखता हूं।

नीराज भैया.... बेटू देख ले शायद बाथरूम जाने की जरूरत ही न हो ।

"अब ये क्या पहली है और ये सब मुझे घूर क्यों रहे है नहीं डायरेक्टली पूछता हू"

तभी सिमरन बोली.... देख ले वीडियो बेटू, ये बार बार जो तू अपने खेलों में गुम हो जाता है इसे देखने के बाद तू कंही गुम ना हो पायेगा।

मैं..... पहले बात क्या है कोई बताएगा (झुंझलाते हुए) ।

माँ और मस्सी दोनों मेरे सर पर हाँथ फेरने लगी और माँ अब बोलते हुए....

"क्या बेटा हम सब पर गुस्सा आ रहा है"

अजीब द्विधा में सब फँसा के रखे है, सब टॉन्ट कर रहे है ये तो मामला कुछ ज्यादा ही सीरियस लग रहा है भलाई इसी में है जैसे बोल रहे है वैसा करते जाऊं नहीं तो इतने घूरते चेहरे...

इतने में अब गुंजन दी बोली वो भी वयंग करते हुए...

"देखो हमारा राहुल फिर सपनो में चला गया"

मैं.... दिखाओ नीरज भैया नहीं तो आप लोगों की पहेली से में पागल हो जाऊंगा ।

नीराज भैया ने मुझे वो वीडियो दिखाया और अचानक ही मेरे हाँथ से फ़ोन छूट गायी।

ये वीडियो कल शाम में किसी ने सूट की थी जब में ग्राउंड में दौड़ रहा था किसी पागल की तरह तरह, यूट्यूब पर भी अपलोड कर दिया था ।

मेरे तो पैरो तले से जमीन खिसक गयी और भगवन से..

"हय भगवन में समझ गया की में आप से मिलने नहीं आता हूँ इसलिए आप मुझे झटके पर झटका दे रहे हो। आप भी कम बदमाश नहीं हो। अब इनको में क्या जवाब दूं"।

दिया, अब उसने ने भी बोला...

"भैया मेरा प्यार भैया यूँ बार बार गायब न हो हम सब है, यंही है"

तूझे तो मौका मिलना चाहिए अपना मुंह खोलने को इतना सोच में घूरा दिया की तरफ पर भूल गया की और भी लोग है ।

फिर गुंजन दि....

"बड़ी प्यारी आँखें है बेटू जरा हमें भी तो दिखा "

हो गया अब कुछ नहीं हो सकता एक चुप तो दूसरा शुरू और दुसरे चुप तो तीसरा मुझे अपने बचाव में कुछ कहना ही होग, पर क्या?...

तभी मासी कुछ बोलने को होती है तो में...

"अब प्लीज मुझे यूँ सब मत घेरो बाथरूम जाने दो बहुत जोर की आई है" (बड़ी विनती भरे शब्दों में बोला)

पर उनके हाव-भाव में कोई परिवर्तन नहीं ।

अबतक में जिस पोजीशन में लेटा था मेरा पैर सैम पोजीशन में था पर जैसे ही उठने को हुआ लड़खड़ा कर गिर गया और कराह... उठा दर्द भरी आवाज़ में..

"बाप रे मर गया"

दोनो जांघें सूज चुकी थी और पैर जमीं पर रखे नहीं जा रहे थे ।

अब सब के सब गुस्से भरी निगाहों से देख रहे थे ।

तभी नीरज भैया ने मुझे सहारा देकर बाथरूम ले गए कुछ देर में मैं बाथरूम से फुर्सत होकर दिवार के सहारे बिस्तर तक आया ।

अभी भी सब अपनी जगह बने थे फर्क सिर्फ घूरने में था पहले सिर्फ घूर रहे थे अब गुस्से से सब देख रहे थे । की तभी सिमरन के स्वर गूंजे उस माहौल में और शांति को भंग करते हुए....

"माँ मुझे माफ़ कर दो मुझे इसके दिल्ली आने की कहानी आप सब को पहले ही बता देनी चाहिए थी पर इसके मोह ने मुझे बताने नहीं दिया"....

लो अब तो पुराने पन्ने भी पलटने लगे मैंने भीख मांगने वाली नज़रों से देखा सिमरन की ओर पर सिमरन....

"नहीं बेटू तू जानता नहीं कितना बोझ है मेरे ऊपर पता है वो 2 दिन मैंने किस चिंता में काटे थे जब तू गायब हो गया था । ऐसे मत देख तेरी नाराजगी मंजूर है पर इस राज पर से पर्दा उठाना ही पडेगा"

दीदी का इतना बोलना और सब एक टक निगाहें दीदी पर और अब सिमरन शुरू....

"कहानी के पहले भाग में मेरी फीलिंग रूही के प्रति से लेकर ग्राउंड की घटना और ग्राउंड से आने के बाद मेरा बिलखते हुए रोना, फ्रेंड के साथ मौत की घटना की प्लानिंग और मेरा दिल्ली आना"।

सब बस चुपचाप मुझे देखते हुए लेकिन दिया अब मेरे समर्थन में....

"भाइया आप से उम्मीद नहीं थी की इतना ड्रामा आप ने क्रिएट किया सिमरन दी के साथ मिलकर लेकिन चलो आप के दिल को धक्का लगा था तो समझ सकती हूँ पर कल क्या हुआ था

"

ओर फिर दूसरों को समर्थन के इरादे से...

"क्यों सही कहा ना मैंने"

अब माँ से न रहा गया और दिया को काफी गुस्से से डाँटते हुए.....

"चुप भैया की चमची उसके साथ इतना कुछ हो गया हमें पता नहीं और देखो इस बित्ते भर की लड़की को अपने भाई को सही बता रही है"

बेचारी दिया रोनी सी सूरत हो गयी मेरे तरफ से बोलने के कारण ।

अब चूंकि बात मेरी दोनों बहनो पर आ गयी थी और सब उन दोनों को कोस रहे थे इसलिए अब मैं अपनी चुप्पी तोड़ते हुए......

"सुनो आप लोग, आप इन्हे क्यों डांट रहे है....

लेकिन माँ का गुस्सा वो तो जैसे आज किसी की सुनने ही नहीं वाली । मुझे बीच में रोकते हुए...

"देखा दीदी (मासी को इंडीकेट करते हुए) तीनों को देखा बड़ी बोलती है उसकी गलती है, छोटी कहती है कोई बात नहीं दिल को धक्का लगा था और ये शैतान बोल रहा है की इन्हे क्यों डांट रहे हो मुझे कहो जो कहना है मैं तो कुछ हूँ ही नहीं इनकी " ।

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए....

"ऐसे ही कुछ दिन पहले मार पीट में अपना सर फुड़वा लिया था और अगले दिन ये सिमरन इसको नाचने के लिए डिस्को भेज दी । तीनो अपने में ही खिचड़ी पकाते है मुझे तो कुछ मालूम ही नहीं होता । मैं जब मर जाऊं तो करते रहना अपनी मन मानी"

माँ के इस तरह के रिएक्शन से जंहा सिमरन और दिया रोने लगी वंही मेरा दिमाग ब्लॉक हो गया और अब मामला बहुत जायदा बिगड़ते देख नीरज भैया ने कमान सम्भलि। और नीरज भैया के लॉजिक को न मानना ये तो अच्छे अच्छों के बस की बात न थी.....

अब नीरज भैया माँ को थोड़ी ऊँची आवाज़ में.....

"मासी आप को क्या बुरा लग रहा है इनका आपस का प्यार या इन लोगों ने झूठ बोला है? और आप इतना क्यों ओवर रिएक्ट कर रही है आप को तो अभी ये चिंता सता रही है कि किस हालात मैं ये घर से दिल्ली निकला और इसे कुछ हो जाता तो?

कुछ रुकते नीरज भैया फिर बोले लेकिन बड़े प्रेम से....

देखो इनके बीच का प्यार और सोचो कि क्या बीती होगी सिमरन पर, दो दिन जब राहुल का कोई अता-पता नहीं था । बेचारी के गले से खाना भी नहीं उतरता होगा।

अब रही बात सिमरन के झूठ की तो आप मुझे बताओ कि अगर ये अपनी बात वो भी रोते हुए जिसका रोना कोई नहीं देख सकता आप को पहले बताता तो क्या आप नहीं झूठ बोलती?

वाह! क्या गूगली मारी है नीरज भैया ने अब माँ बिलकुल नार्मल होते हुए....लेकिन नीरज ।

फिर नीरज भैया बीच में टोकते हुए....

अभी नहीं मासी अभी पूरी बात होने दो । तुम्हे मालूम है दो दिन पहले सुनैना ने इसे क्या-क्या कहा फिर पूरी कहानी बतायी। कोई दूसरा होता तो पलट कर देकता भी नहीं पर ये राहुल है, हिरा है मेरा भाई, इसने जब देखा की सुनैना हम भाई बहन के बीच नहीं बैठी है तो सुनैना को उल्टा मना कर लाया और यह जाता कर कि, कोई बात नहीं उसके मुंह से गलती से वो शब्द निकले थे ।

और सुनो जब हम सब लगे थे अपने अपने अरमानो में की इंगेजमेंट में ऐसा करना है वैसा करना है अरे इसकी अपनी माँ तक नहीं समझ पायी की सुनैना कितनी बड़ी तकलीफ मैं है, फिर नीरज भैया ने वो कहानी भी बताई वीडियो क्लिप वाली , इस लड़के ने 2 घंटे में पूरी प्रॉब्लम सॉल्व कर दी, और जैसे जैसे नीरज भैया ये बात बताते गए उनके आंखों से और साथ साथ सब के आँखों से आंसू आ गए ।

मैं तो हैरान सुनैना की तरफ देखा तो सुनैना ने मेरे सवालों का जवाब देते हुए....

राहुल ने मना किया था किसी को ये बात नहीं बताने पर जब पुलिस स्टेशन से हम बाहर आये तो मुझे बहुत रोना आया और मैंने पूरी कहानी नीरज भैया को बता दी ।

सब के सब रो रहे थे और सब के सब हैरान क्योंकि इतनी बड़ी बात हो गयी और किसी को पता तक न चली ।

आंशुओं के साथ सबका गुस्सा और मेरे झूठ बोलने का मामला भी खत्म हो चूका था । पर एक बात से हैरान हम सब अब भी थे जो नीरज भैया की बातों में इतना खोये थे की ध्यान ही न दिया...

मेरे रूम के गेट पर चौहान एंड फैमिली खड़ी थी और उन सब के आंखों में भी आंसू थे बस लाल को छोड़ कर उसे तो शायद पता भी न था की क्या हो रहा है।

मोहित अंकल ने लाल को बाहर भेज दिया खेलने अब रंजना आंटी , मोहित अंकल और परिधि ने हमें ज्वाइन किया।

मेरे पूछने पर पता चला की मोहित अंकल उस समय से खड़े हमारी बात सुन रहे है जब माँ मेरे सर फूटने की बात कर रही थि, आने का कारण ये था की उन्होंने ने भी वीडियो देखा और सोचा की मैं जवाब क्या देता इसलिए खुद चले आये रंजना आंटी के साथ इसका क्लैरिफिकेशन देने ।

अब रंजना आंटी ने सूरु की कहानी....

कैसे मेरा और परिधि का प्लान बना सब को सरप्राइज देने का चूँकि न तो हमें (मिस्टर एंड मिस चौहान) पता था की ये दोनों यही इंगेजमेंट अटेंड करने आ रहे है और न ही आप को पता था की राहूल को हम जानते हैं इसलिए ये 5 बजे पर ही पिक अप करने आ गया परिधि को और वंहा से दोनों 7 बजे इंगेजमेंट में पहुंचते जब हमारी फॅमिली पहुँच चुकी होती ।

अब पूरी कहानी की कैसे मैंने परिधि के कहने पर हुक लगाया और कैसे वो अचानक से पैर फस्ने की वजह से गिरि, मुझे परिधि को सँभालते हुए देखना और चांटा मार् कर मुझे घर से भगाना ।

राहुल के घर से जाने के बाद मैं अपनी बेटी पर बहुत गुस्सा थी और मेरा वयवहार देख कर ये मुझ से ज्यादा गुस्सा मैं की मैंने बिना जाने क्या किया।

परिधि रो रही थी और चिल्ला रही थी और मैं भी इसे ग़ुस्से में खरी खोटी सुना रही थी की तभी अचानक इसके मोबाइल पर राहुल का मेसेज आया और परिधि बिलकुल शांत कुछ न बोली पर अब मुझे उसका चुप रहना किसी सांप डसने के बराबर था पर जैसे ही मैं कुछ बोलने को हुए परिधि ने मुझे अपना मेसेज दिखाया मेसेज का एक्सप्लेने करते हुए मेरे तो होश उड़ गए की जिसे मैंने इतना बेइज्जत किया वो ऐसा सोचता है मेरे आंसू न रुके फिर परिधि ने पूरी कहानी बतायी। मुझे पछतावा हो रहा था और मैंने मोहित को बताया उसे भी सब जानकर हैरानी हुए।

लेकिन जब हमने फ़ोन लगाया तो फ़ोन स्विच ओफ्फ्। मैं और मोहित बहुत परेशान हुए पर क्या कर सकते थे जबतक राहुल से बात न होती।

फिर परिधि ने हमें आप के पास भेज दिया ये बोलकर की.... माँ आप जाओ जो इतना सोच सकता है वो थपड वाली बात को दिल से नहीं लगा मैं मना कर ले आउंगी घर।

फिर इसने जीपीएस से इसकी ट्रैकिंग की और जब ग्राउंड पहुंची तो वीडियो वाला एक्ट चल रहा था ।

परिधि जब पहुंची तबतक राहुल बेहोश था इसने राहुल को हॉस्पिटल मैं एडमिट करवाया और जब डॉ से पूरी टाइम का डेटाइले ली तो एक टेंटेटिव टाइम पर आने का बोल कर आपको एक कहानी सुना दी ।

इतना ही नहीं कुछ देर बाद जब इसे होश आया तो भगा बाहर की इसे जल्द से जल्द इंगेजमेंट मैं पहुंचना है। बहुत प्यार करता है आप लोगों से । इतना भागने के बाद तो लोग 10 दिन तक उठ नहीं पाते बिस्तर से पर इंगेजमेंट में आया तो पता तक नहीं चलने दी की ये इतनी तकलिफ में भी है।

जब ये मेरे गले लगा तो मैं बता नहीं सकती की मुझे कितनी सुकून मिला आत्मा का बोझ हल्का हो गया इतना ही नहीं, मालूम है यह क्या केहता है... आंटी अगर आप को बुरा लगा हो तो एक चांटा और मार लीजिए पर नाराज न हो जाएये।

अरे मोहित जी से तो अच्छे अच्छे बात नहीं कर पाते पर इस लड़के कद इतना बड़ा है की हम इस से बात नहीं कर पाते ।

फ्रेंड्स सारे गिले शिकवे दूर, सारे गम दूर आँखों मेंआंसू तो थे पर ख़ुशी के।

पर इन सब बातों से मुझे बहुत सुकूं था की चलो मेरे झूठ का तो अंत हुआ पर एक राज और था पर वो राज ही रहे तो अच्छा था ।

अब होना क्या था सब लोग मुझ पर गर्व मेहसूस कर रहे थे पर मैं तो नीरज भैया का आभारी था की हमेसा मेरे साथ और मेरे लिए खड़े रहे ।

फ्रेंड्स 2 घंटे बीत चुके थे बातों बातों में अब मासी सभा को भंग करते हुए सबको हॉल मैं चल्ने को कहा और मोहित अंकल एंड फॅमिली को खाना खा कर जाने को बोलने लगी जिसे रंजना आंटी (परिधी'की माँ) ने सहर्ष स्विकार किया।

सब चले गए बाहर मुझे आराम करने को बोल कर लेकिन मैंने परिधि को इशारा किया की प्ल्ज़ कुछ देर और बैठो अच्छा लग रहा है लेकिन चली गयी परिधि बिना कोई रिएक्शन दिए और कुछ देर बाद मेसेज आया....

बेस्ट ऑफ लक फॉर डेट भला मैं कबाब में क्यों हड्डी बनु ।

ओह हो बातों बातों मैं तो मुझे कल के बड़े मैं ध्यान ही नहीं रहा । अब क्या करू ?

क्या करूँ मैं अब?......

कहानी जारी रहेगी......
 
माफ़ी चाहूँगा मित्र...

बोर्ड की परीक्षा की वजह से बिजी था...

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अपडेट - 38

क्या करूँ मैं अब?.....

धीरे धीरे अब ये अहसास हो चला था कि कंही न कंही परिधि बहुत ही ज्यादा नाराज है क्योंकि कल जिस तरीके से मैंने उसे इग्नोर किया था परिधि ने बात दिल से लगा ली तभी तो मैं इतना परेशान था और वो बिना बात किये चली गायी।

पर इस का क्या करें अब तो कंही उठ कर भी नहीं जा सकते और न ही आज कोई निकलने देगा,

हाय रे क्यों मैं अंधी दौर मैं खुद से ही रेस लगा लिया।

लेकिन एक है जो इस सिचुएशन मैं भी मेरी मदद कर सकती है दिया । हाँ उसे ही बुलाता हूँ वही मुझे यंहा से निकल सकती है।

पहिर मैंने दिया को कॉल करने के लिए फ़ोन उठाया पर ये क्या इतने मिस कॉल और मेसेज किसके है।

फ़ोन को ऊपर से नीचे स्क्रॉल किया तो पता चला कि सुबह से परिधि के 25 मिस कॉल पड़े है जो फ़ोन साइलेंट मैं होने के कारन सुन न सका। ये क्या 25 से 30 मेसेज भी पड़े है परिधि के। तभी तो गुस्से मैं ताम-तामयी है। उसे अब भी लग रहा होगा कि मैं उसे अवॉइड कर रहा हू । सबसे पहले तो इस हरामखोर को रिंग मोड़ पर डालो ये भी आज मेरा काम बिगाड़ने में लगा है।

अभी मे फ़ोन लगा ही रहा था कि दरवाजे से गुंजन दीदी आते हुए.....

"सुन बेटू गरम पानी में पैर डाल लेना और ये टेबलेट ले ले रिलीफ मिल जाएगी"

मैं.... ठीक है दीदी । फिर गुंजन दीदी जाने को हुए तो... दीदी सुनो तो ।

गुँजन... क्या है बोल ।

मैं... वो तीनो का मिजाज कैसा है।

गुँजन... किसका।।

मैं... माँ, सिमरन और दिया का ।

गुँजन.... मासी नार्मल है बस ।

मैं..... एक काम करो न सिमरन को भेज दो न प्लीज उसको कितना सुन न पड़ा मेरे कारण ।

गुँजन.... और दिया ।

मैं.... वो सिमराम के बाद ।

गुँजन दीदी.... ठीक है बोल कर चली गायी।

कुछ देर बाद सिमरन दी आई चेहरे पर थोड़ी मायूसी थी मैं जानता था कि क्यों मायूसी थी क्योंकि सबसे ज्यादा फील उन्ही को हो रहा था इस पूरी घटनाक्रम में, मेरे लिए झूठ बोली उसका और डिस्को कि परमिशन दी उसका दोनों बातों क़। अन्तः मैं तो सब मेरी गुणगान कर सब चले गए राहुल ए, राहुल ऐसा पर सब मेरी सिस को भूल गए ।

मैने दोनों कान पकड़ कर.... नाराज हो क्या दीदी ।

सिमरन.... जो बहावनाएँ अबतक अन्दर थी अब वो बाहर आते हुए और खुद को नाकाम कोसिस से रोकने के बावजूद रोते हुए ।... मैं क्यों नाराज होने लगी ।

यही कोई 25 मि लगा होगा उन्हें मानाने में पूरी तरह टूट गयी थी। सिमरन के इतनी समझदार होने के बावजूद आज मेरे कारन इतना सुन न पड़ा । मुझे इसका अफ़सोस हमेशा रहेगा ।

फिर सिमरन से पूछा दिया कहाँ है कि इतने मैं वो भी आ गयी लेकिन वो सिमरन को बुलाने आयी थी।

मैने सिमरन को नहीं जाने दिया और उसे भी बिठा लिया। फिर क्या था तीनो लगे अपने अपने गिले शिकवे दूर करने। दिया सबसे छोटी थी तो उसके सारे नखरे हम दोनों को ही उठा ने पड़ते थे ।

जब दोनों नहीं गयी तो माँ , मासी और रंजना आंटी(परिधि माँ) , तीनो मेरे तरफ रूम में आई और माँ बोल पाडी.... मासी और रंजना आंटी को इंडीकेट करते हुए....

"देखो तीनो को हमेशा ऐसे ही करते है अपनी माँ को भूल जाते है"

अब चूंकि हम तीनो भी नार्मल थे फिर क्या सूझी सैतानी फिर जो बुलाने आये थे हमने उनको भी बिठा लिया और लगे पंचायत करने देखते देखते फिर एक बार सभी लोग उसी कमरे मैं जमा हो गए लेकिन जंहा पहले सब रो रहे थे वही हांसी कि किलकारियां गूंज रही थी। पर एक सदस्य ऐसा भी था जो वंहा पार्टिसिपेट नहीं कर रही थी। परिधि यूँ तो साथ मैं थी पर झूटी हांसी हँस रही थी।

अब मैं परिधि को छेड़ते हुए.... "जो भी ओड मन है वो यंहा से आउट हो जाय नहीं तो पूरा पार्टिसिपेट करे"।

सभी ये समझने कि कोसिस कर रहे थे कि मैं क्या बोलना चाह रहा हूँ वही परिधि एक गुस्से वाले एक्सप्रेशन में मेरी तरफ घूरते हुए नज़रों से देख रही थी।

जब मेरी बात नहीं समझ में आयी किसी को तो मासी ने पूछ ही लिया...

"बेटा क्या कहना चाह रहा है"?

मैने परिधि कि तरफ इशारा कर....

"देखो जब भी हम हँसते है तो झूठ मूठ के दांत बाहर निकल कर हिन् हिन् करती है।

अगर हो तो दिल से साथ रहो ऐसे झूठ का साथ निभाने किस काम का"

तभी गुंजन दी... तू उसे छेड़ क्यों रहा है...... ......और परिधि से सही तो कह रहा है राहुल तुम्हे क्या हुआ क्यों शांत हो।

बीच में मैं फुदकते हुए, मैं बताता हूँ दीदी.....

कल जब हम हॉस्पिटल से निकले तो मुझे आप के पास पहुँचने कि चिंता थी वैसे तो ठीक ही दिख रही थी उस वक़्त लेकिन ये जिद करने लगी कि जबतक तुम कपड़े चेंज करोगे मैं पार्लर से मेक उप कर लूंग़ी। फिर क्या था , मुझे लगा ये लड़कियां भी न पार्लर गयी तो हुआ कल्याण आज का प्रोग्राम कल अटेंड करवाएंगी इसलिए मैने चने के झाड़ पर चढ़ा दिया फिर क्या था जब पहुंची तो इस सुनैना कि सहेली उर्वशी ने टोक दिया कि थोड़ा तो मेक उप कर लेती, फिर क्या था तब से चेहरा उतरा है ।

झुट सफ़ेद झूट जबकि सब लोगों ने कल देखा था बड़ी ही प्यारी लग रही थी किसी डॉल कि तरह ।

ईधार मेरी बात का समर्थन सुनैना और दिया ने भी कर दिया हाँ मैं हाँ मिला के।

अब क्या था गुस्सा , भयंकर गुस्सा देवी के प्रकोप वाला पर इतने लोगों के बीच में कर भी क्या सकती थी और अकेले उसके साथ इस रोमांच के लिए मे कब से तैयार था ।

अब एक बार और परिधि ने मेरी ओर देखा धीमी स्माइल दी जैसे खुला निमंत्रण दे रही हो कि तुम्हारा हो गया अब मैं बताती हू ।

हम सब आपस मैं यूँ ही एक दूसरे कि खिंचाई करते हुए हांसी मजाक कर रहे थे, कभी ये बंदा सेंटर पॉइंट तो कभी वो , और परिधि अपने मोबाइल से खेल रही थी।

अभी कुछ देर हुए ही कि मेरे फ़ोन कि रिंग बजी मुझे लगा कि कंही ये उरवसी का फ़ोन तो नहीं और मैं बिना फ़ोन देखे कॉल कट कर दी ।

इतने में परिधि बोल पड़ी...."ये गलत है"।

सब..... क्या गलत है ।

परिधि... अभी तो कह रहा था ओड मेन आउट और अभी इसकी फ़ोन कि रिंग ओड है इसे सजा मिलनी चहिये।

अब चूंकि मैं सेंटर पॉइंट था तो सब लोगों ने रुख मेरी ओर किया और परिधि के समर्थन में तुम ही सजा तय कर दो ।

मैने सोचा चलो ठीक है इतने लोगों कि बीच सजा वो भी भुगत लेंगे । पर मुझे क्या मालूम मैंने मधुमक्खी के जाल में हाँथ डाला था सुनिये सजा भी.....

"अब जो भी इसके पास कॉल लायेगा चाहे जिसका भी हो स्पीकर ऑन कर के बात करनी होगी बिना बताये कि यंहा फैमिली मेंबर है"

मैं.... यह कैसी शर्त है मेरे कई दोस्त है । और कहते कहते रुक गया ।

अब बोले नीरज भैया पहले तो लगा समर्थन कर रहे है मेरा पर मुझे क्या पता था मेरी मारने मे लगे है..

नीराज भैया बोले.... ये गलत है सब कि अपनी ...

इतना बोले ही थे कि फिर फ़ोन बजा मेरा और मैंने फिर काटा और नीरज भैया....

ये गलत है सबको अपनी पर्सनल बातें होती है जिसे इस तरह सुनना ठीक नहीं । (आह मेरा दिल खुश) पर यदि राहुल कि बात है तो मैं भी सुनना चाहूंगा कि जो घर मैं इतना अछा है उसके फ्रेंड्स कैसे है।

लो हो गया कल्याण नाम बड़े और दर्शन छोटे ।

मुझे एक आईडिया आया और मैं चुपके से फ़ोन ऑफ कर दिया पर ये हरामखोर फ़ोन बंद होते होते भी आवाज़ करने लगा फिर क्या था फ़ोन ऑन और फ़ोन नीरज भैया के पास और जयादा इंतज़ार भी नहीं करना पड़ा फिर फ़ोन आया उसी का लेकिन ये फ़ोन उर्वशी का नहीं बल्कि ऋषभ का था ।

लो वैसे तो 3 दिन हो गए बात किये लेकिन जनाब को आज ही समय मिला कॉल करने का , खैर फँस तो चूका ही था अब देखता हूँ ।

स्पीकर ऑन...

मैं..... क्या हाल है ऋषभ ?

ऋषभ... कमीने जब से दिल्ली गया है बात तो करता नहीं है खैर, इतनी देर से फ़ोन लगा रहा हूँ तो काटे जा रहा है, हाँ पहले तो केवल घर और दोस्त था पर अब तो तू हीरो हो गया है ना ।

आज लगता है ये मरवायेगा भगवन थोड़ी सद्बुद्धि देना इसको ।

मैं... एक ही साँस मैं कितना बोल गया मेरे भाई बता न फ़ोन क्यों किया नाराज है क्या?

ऋषभ.... चल कोई बात नहीं , ये बता सब कैसे है, और इंगेजमेंट कैसी राहि।

मैं.... सब बढ़िया मेरे भाई, अच्छा रहा पर तुझे कैसे पता चला ।

आह! भगवन धन्यवाद, मेरा दोस्त है मजाक थोड़े है कितनी चिंता रहती है उसे मेरी। यही सोचति, अपने आप मैं प्राउड फील करते और कॉंफिडेंट से सबको ओर देखा जैसे सब से कह रहा हू , देखा मेरा दोस्त है पर....

ऋषभ... हरामखोर 2 दिन पहले सपना आया था, तू तो लगा था ,अपनी दिल्ली वाली के साथ ।

(पॉज , अभी पॉज है ) हरामजादे चुप हो जा सब यही है मारवा मत देना(मन कि भावना) एक चोर वाली नजर सब पर मारी कंटीन्यू.....

सला मैं देख रहा हूँ तू उस लड़की के चक्कर मैं सब भूल रहा है। और तू मेरा एहसान...

फ़ोन काट दिया क्योंकि अहसान बोला है तो साला दिल्ली आया और 2 दिन डेट पर था वो भी न बक दे अब सब को बोलते हुए....

"क्या आप लोग परेशान कर रहे है अच्छा लगता है यूँ बात सुनना " मैं गंभीर होते बोला ।

इसपर नीरज भैया बोले...

"वो बाद में जज करेंगे"। और ए भाई तू ये फ़ोन ना काटा कर ।

अब मैं परिधि कि तरफ देखा उसे देखने से ऐसा लग रहा था कह रही हो देख, ये तो बस सुरुवात है ।

अभी हमारे नज़रों कि बद विवाद चल ही रही थी कि फिर फ़ोन बजा और सैम कॉल ऋषभ का था । स्पीकर ऑन बातें शुरू...

मैं... बोल भाई ।

ऋषभ.... सॉरी यार, वो गुस्से में था ग़लती से अहसान वाली बात निकल गायी।

मैं... चल कोई बात नहीं, और सब बढ़िया है ।

ऋषभ.... मेरा तो बढ़िया है पर ये काजल (डिस्को वाली लड़की एंड माय क्लासमेट) का क्या चक्कर है, 2 दिन से परेशान कर रखा है तेरा ने मांग रही थी।

मैं.... तूने दिया तो नहीं ।

ऋषभ... पागल है क्या नहीं दिया, चल तू आराम कर लगता है जैसे किसी परेशानी मे है बाद में बात करता हू ।

मैं... ओके बाय डूड जल्द मिलते है।

फिर क्या फ़ोन कट खिंचाई शुरू । सबने क्या खिंचाई की ।

पर अब मैं जयादा परेशान नहीं करना चाहता था परिधि को। (खुद में सोचते हुए) पर इसे अकेले निकालूँ कैसे?

जब सब आपस मे लगे थे तो मैंने परिधि को मेसेज टाइप कर दिया प्लीज मुझे बात करनी है। प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्लज़

परिधि ने ओके एंड वेट लिख कर सब के साथ फिर से लग गयी और मैं भी माहोल का मज़ा लेने लाग। फिर धीरे धीरे रूम से चले गए । बचे सिर्फ मैं परिधि दिया ।

मैने दिया से कहा.... छोटी बाथरूम में गरम पानी थोड़ा कर दे ।

अब बचे मैं और परिधि.....

परिधि काफी बेरुखी से... जल्दी बताओ मुझे जाना है ।

मैन डायरेक्ट पॉइंट पर आते हुए......"मुझे तुम से बात करनी है"।

परिधि- बोलो।

मैं-यंहा नाहीन

परिधि...... तुम्हारा समय समाप्त होता है और मे चली , इतना कह कर निकलने को होती कि मैं पीछे से टोकते हुए।

मैं..........सोच लो मैं लडख़ड़ाते हुए सिढ़ियों से गिर सकता हूं

परिधि......... जो करना है सो करो मुझे कोई लेना देना नहीं

लागता है मामला कुछ ज्यादा सीरियस हो चला है पर अब मैं जो करने जाउँगा उसे देख तुम्हारे होश न उड़ गए तो मेरा नाम बदल देना....

कहानी जारी रहेगी....
 
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