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प्यार - ( गम या खुशी )

मेरे नहीं छोटी बहन के पेपर्स है...

उसे पड़ा रहा हूँ...

12थ बोर्ड है ना भाई इसीलिए....

अपडेट आती रहेगी....

टाइम पर...
 
शुक्रिया मित्रों....

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अपडेट - 39

लगता है मामला कुछ ज्यादा सीरियस हो चला है पर अब मैं जो करने जाउंगा उसे देख तुम्हारे होश न उड़ गए तो मेरा नाम बदल देना....

पर ये मुझे हुआ क्या है। मैं क्यों इतना सोचता हूँ परिधि के लिए । कहि....

नहीं- नहीं, हॉ, नहीं-नहीं, हां पर ये लव है तो रूहि, और वो लव है तो फिर मैं क्यों परिधि की तरफ खिंचा चला जा रहा हू ।

सायद वंहा केवल मेरी फीलिंग थी , और रूही मेरे साथ उतनी फ्रेंडली नहीं रही इसलिए मैं उसे इग्नोर करता चला गया। पर क्या इस वजह से की परिधि मुझ से अच्छे से बात करती है मैं ये मान लूँ की मैं.....

लेकिन परिधि क्या सोचती है, कंही उसे भी तो नहीं....

सायद हो सकता है क्योंकि बीते कुछ दिनों में जो हुआ है, उसका ऋषभ से बात करना और गर्लफ्रैंड की अक्ट, मेरे साथ ही रहाना, टेडी के बारे में भी अबतक नहीं पुछा जबकि मैंने उसे बोल कर लिया था कि किसी खास के लिए है कम से कम मुझ से सफाई तो माँगती की क्यों मुझे दी , वो भी नहीं हुआ। उसका यूँ मेरे लिए रोना , वो कॉफ़ी शॉप, यूँ मुझे बाँहों में लेना.....

मैं अपने मन में चल रहे अंतर द्वन्द से कुछ नतीजे नहीं निकल पा रहा था उल्टा उसमें फंसते चले जा रहा था । मैं लगातार अपनी सोच में ही डूबा रहा....

सिमरन.... कहाँ खोया है बेटू ।

मैं अपने ख्यालों से बाहर आते हुए...... "कुछ नहीं दीदी , बस आगे की प्लानिंग कर रहा था "।

सिमरन.... कैसी प्लॅनिंग ?

मैं..... "वही की अभी कुछ दिनों में रिजल्ट आ जाएगी तो उसके बाद कौन से कॉलेज में एडमिशन लूँ और CDS की तैयारी कहाँ से करू" ।

सिमरन.... पर तुझे देख कर तो लग रहा है कि मन में कुछ और ही चल रहा है ।

मैं सकपकाते हुए.... नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं ।

सिमरन..... मत बता फिर फँसना, फिर मुझ से झूठ बुलवाना और सब के सामने मुझे नीचे होते हुए देखना ।

मैं..... .....क्यों दीदी क्यों अब टॉन्ट कर रही हो, बताता हूँ ।

फिर मैंने एक एक करके सारी घटनाएँ बतायी, 40 % तो उन्हें मालूम ही था रूही तक, और रूही का मेरे प्रति सोचना , फिर मैंने एक-एक करके परिधि के साथ हुए पूरी घटनाएँ सुनाता चला गया। फिर मैंने अपनी द्विधा भी बतायी....

अब दीदी....

सुन बेटू ये एक पेचीदा सवाल है। मैं बहुत जायदा तेरी मदद तो नहीं कर सकती पर एक बात जरूर कहना चाहूंगी कि तेरे साथ "far from eyes far from heart" वाली बात हो रही है।

तेरे पास अभी परिधि है तो तू परिधि के बरे मैं सोच रहा है हो सकता है की जब तू वापस जाए और परिधि तुझ से दूर हो तो तेरी फीलिंग फिर से रूही के लिए सैम हो और आज जो रूही के बारे मैं तू सोच रहा कल उसकी जगह परिधि हो, या नहीं भी।

इसे " law of attraction" कहते है ।

मैं... मैं समझा नहीं ।

दीदी.....बतती हूं.....

अपोजिट सेक्स के प्रति हमेशा अट्रैक्शन बना रहता है इसलिए जब हम किसी को ,पाहली बार देखते है तो उसी के ख्यालों में खोए रहते है जिसे हम लव समझते है। ये अट्रैक्शन इतना स्ट्रांग होता है की हम दिन रात उसे किसी तरह पाने की कोसिस करते है, किसी को मिलती है किसी को नहीं । और जब वही हमें मिल जाती/जाता है और हमारा पर्पस सोल्वे हो जाता है तो हमारा अट्रैक्शन धीरे धीरे खत्म हो जाता है और हमारा अट्रैक्शन किसी और के लिए स्ट्रांग होता चला जाता है और ये निरंतर चलते रहता है। और कई एक दुषरे के साथ पूरी लाइफ गुजार देते है।

दीदी की बातें मेरे समझ में तो आ रही थी पर अभी भी कुछ क्लैरिफिकेशन बांकी थी।

मैं...... तो क्या दीदी लव होता ही नहीं केवल अट्रैक्शन ही होता है ।

दीदी...... नहीं ऐसी कोई बात नहीं पर जो तू पूछ रहा है लव ये एक उंडेफिनेड टॉपिक है। कोई ये नहीं कह सकता/सकती कि मेरी मास्टरी है टॉपिक लव के ऊपर और मैं इसे डिफाइंड कर सकता/सकती हू ।

वैसे मेरे पॉइंट ऑफ़ व्यू मैं लव एक ऐसी फीलिंग है जिसे तुम कभी किसी को नहीं कहते हो लेकिन फील करते हो। जरूरी नहीं ये फीलिंग एक लड़के को लड़की या लडकी को लडके के लिए हो ये किसी के लिए भी हो सकता है।

एक्साम्प्ले ऐषा मन लो कि एक छोटा सा बेबी जिसके माँ बाप का पता नहीं उसे तुम ने पाला पर अचानक से उसके माँ बाप आ गए लेने । तुम जानते हो की ये तुम्हारी संतान नहीं है पर तुम किसी भी हालत मैं उसे नहीं दे सकते और न ही वो बच्चा कभी एक्सेप्ट करता/करती है अपने खुद के पैरेंट को।ये है लव । लेकिन ये एक एक्सएम्पले है ऐसे बहुत सारे होंगे, जैसे अपने पेट के साथ , फॅमिलि, फ्रेंड्स एंड ऑफ-कोर्स बॉयफ्रेंड गर्लफ्रैंड, वाइफ एंड हस्बैंड्।

मै बस दीदी को गौर से सुन रहा था दीदी ने फिर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए....

देखो तुम्हारा सोचना गलत नहीं है पर तू विचार कर के ये डिसाइड नहीं कर सकता कि तुम्हे रूही से रिलेशन आगे बढ़ाना है या परिधि से ।

ये भी हो सकता है की तुम अभी परिधि को पर्पस करो तो वो भी हा कह दे पर ये जल्दी होगी क्योंकि हो सकता है परिधि को भी अट्रैक्शन हो।

मेरे अबतक बहुत से डाउट क्लियर हो गए थे पर मन में अभी भी कुछ सवाल उठ रहा त। में.....

पर दीदी ये मान लो की मैं वापस गया और जैसा तुमने कहा अटट्रक्शन, उसी के तहत मैं अगर परिधि को भूल गया और रूही के साथ आगे बढ़ा तो क्या ये गलत नहीं होगा क्योंकि अट्रैक्शन तो दोनों तरफ था तो क्या फ़र्क परता है कि रूही के साथ कंटिन्यू करून या परिधि।

ओर इस बात का क्या जस्टिफिकेशन है की दोनों मे से किसी एक के साथ रिलेशन आगे बढ़ाता हूँ तो फिर मैं किसी दूसरे की तरफ अट्टरक्त न हो जाऊं।

दीदी मुस्कराते हुए..... बड़ी समझदारी वाली बात कर रहा है। बटाती हूं....

पहले तो ये क्लियर कर दूं कि attraction is the first step of love । किसी भी लव स्टोरी मैं पहले अट्रैक्शन ही होता है नहीं तो कभी सुना है कि कोई लड़का/लड़की किसी बदसूरत बहुत ही भद्दी सूरत वाला/वाली को अपना बॉयफ्रेंड/गर्लफ्रैंड बनाया हो।

आट्रक्शन वो स्टेप है जंहा लोग अपने कॉउंटरपार्ट को काटेगोरिसातिओं करते है कुछ लोग कोम्प्रोमाईज़ भी करते है की मैं ऐषा हूँ तो मुझे ऐसी ही मिल सकती/सकता है फिर भी अट्रैक्शन का 1 ही कॉमन रूल होता है की बेस्ट चोइस

। इसलिये तुम कॉलेज में देखते होंगे की कुछ लड़कियों के पीछे सब लरके पड़े रहते है और कुछ लड़कों के पीछे कॉलेज की सभी लड़कियां यही है लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन की फर्स्ट रूल है इसके अलावा भी है जैसे टॉपर्स तो टॉपर्स , रिच तो रिच ।

आब चूँकि कोई भी बॉयफ्रेंड/गर्लफ्रैंड जब अट्रैक्शन के बाद अपना रिलेशन आगे बढ़ाते है तो फिर दोनों एक दुसरे की फीलिंग से जुडते है और ये फीलिंग की जो जुड़ाव होती है ये एक स्ट्रांग बौंडिंग होती है। जिसका जितना स्ट्रांग उसका लव उतना देवीने और वीक बौंडिंग तो केवल अट्रैक्शन तक ही रहता है और जैसे ही उस से कोई बेस्ट मिलता है ब्रेक अप हो जाता है।

ऐसी बहुत सारी चीजें अभी भी बाकी है जो तुझे समझनी है पर इस लव सब्जेक्ट की थ्योरी हो चुकी है अब प्रक्टिकली एक्सपीरियंस करो। पर राहें आसान नहीं है।

मै तो दीदी की बातों मैं गुम ही हो गया कि मैं क्या सोच रहा था और होता क्या है मेरा तो ब्रेन वाश हो गया और लव को एक अलग ही एंगल से देखने लगा ।

दीदी एक आखरी सवाल ।

दीदी.... नहीं अब कुछ नहीं चॉइस इस यौर'स तो तुम्हे सोचना है की कैसे तुम अपने इस सवाल का आंसर ढूँढ़ते हो। और सिमरन वंहा से चली गायी।

चालो ये भी अच्छा रहा कि सिमरन से बात कर ली तो सारे डाउट क्लियर हो गए । अब तो अट्रैक्शन है या लव ये तो चंडीगढ़ पहुंच के ही पता लगेगा तबतक मैं अपने अट्रैक्शन और लव को काबू में करता हूँ और अब इस परिधि की बच्ची को बताता हूँ की मैं चीज क्या हू....

पहले तो मैंने बाथरूम गया गर्म पानी में पौन डाल कर अपने सूजन को कम करने की कोसिस की। टेबलेट ले ही चुका था तो अब दर्द तो नहीं था बस चलने में थोड़ी परेशानी हो रही थी। पर चूँकि अब मिशन परिधि को जलना एंड मनाना भी था यही सोच कर मैंने प्लान बनाना सुरु किया। पूरी कहानी प्लाट हो चुकी थी अब बस सरे करैक्टर से सही तरीके से अपना काम निकलवाना था... यही सोचते हुए मैंने अपने लीड करैक्टर के पास गया।

मै बाहर हाल में आया अभी चूँकि 1pm हो रहे थे तो सारे लोग खाने की तैयारी में लगे थे और मुझे जल्द ही काम शुरु करना था इसलिए वंहा मेरी नजर सुनैना को ढूँढ़ने लगी।

मैं मासी से... मासी सुनैना कंहा है।

मासी.... अपने रूम में है राहुल ।

बस इतना जानकर मैं सुनैना के रूम की ओर चल दिया पर जाते जाते मैं परिधि का रिएक्शन भी नोटिस कर रहा था , बहुत ही गुमसुम थी ऐसा लग रहा था हो कर भी नहीं है।

मुझे बहुत तरस आया क्योंकि वो आई थी मेरे साथ ही समय बिताने, पर खुद के जूठे ग़ुस्से ने उसे बांध रखा था और मैं भी कोई इंटरेस्ट नहीं दिखा रहा था उसे मानाने का शायद यही वजह उसकी उदासी का था ।

खैर मैं चला अपना प्लान फॉलो करने पहुंचे सुनैना के पास पहले उसकी रजामंदी ली फिर पूरा प्लान बताया। प्लान बताने के दौरान सुनैना ने भी उसमें कुछ सर्टेन चंगेस किये। सब बातें हो जाने के बाद मैं हॉल में आकर बैठ गया।

मै हॉल में बैठ कर सब से बातें कर रहा था पर रह रह के परिधि का उदास चेहरा मेरे सामने था ।

हे भगवान अभी सिमरन ने सारी बातें बताई समझ भी गया लेकिन मुझे ये हो क्या रहा है , क्यों मैं बार बार उसी के ख्यालों में डूबा जा रहा हूँ लगता है अब तो ये लव और अट्रैक्शन के बीच में मैं पिस के रह जाऊंगा । न बे स्ट्रांग जबतक की कोई कन्क्लूसिओं नहीं निकलता।

पर कहते हैं न "इश्क़ पर कोई जोर नहीं गालीब" वैसा ही कुछ त। अब मैं अपनी भावनाओं को काबू में कर बिना परिधि पर ध्यान दिए बस सब से बातें करता रहा ।

कुछ देर मैं यूँ ही बातें करता रहा कि सुनैना बहार आयी और परिधि से....

"लागता है आप को हम छोटे लोगों के यंहा रुकना पसन्द नहीं"

परिधि एक तो खेलों मैं थी दूसरी अचानक से पुछा गया ये सवाल वो बिल्कुल चौंक गयी पर थी तो मास्टर माइंड इसलिए परिधि बोली....

"मैं यह जानती हूँ की ये इनडाइरेक्ट क्वेश्चन है इसलिए डायरेक्ट वाला क्वेश्चन कीजिये"

परिधि के इस जवाब पर अब चोंक ने की बरी सुनैना कि थी , सुनैना एक मुस्कान के साथ....

"मान गए आपको , मैं ये जानना चाह रही थी आप उदास क्यों हो" ?

परिधि.... उदासी ! नहीं मैं उदास नहीं (मेरी ओर देखते हुए) बस यूँ ही कुछ उलझनों में थी, अब ये न पूछिये की कैसी उलझन, नहीं बता सकती ।

कुछ देर दोनों के बीच कुछ शान्ति के बाद, सुनैना....

"वैसे आप घर वापस जाकर क्या करेंगे"?

परिधि.... फिर इनडाइरेक्ट क्वेश्चन , डायरेक्ट क्वेश्चन प्लीज ।

सुनैना हस्ते हुए.... क्या आप मेरे साथ घूमने चलेंगी?

परिधि... कहाँ ।

सुनैना-वाटरफाल ।

इतना सुनने के बाद परिधि कुछ सोचने लगी अब मैं भी सोचा की कंही इसने कड़ियाँ जोड़ने सुरु की तो प्लानिंग फेल हो सकती है इसलिए मैं बोल पड़ा...

"कहाँ सुनैना तू भी इस दुखी आत्मा को अपने साथ ले जा रही है खुद उदास रहेगी और साथ साथ 4 लोगों को भी उदास करेगि ।

सुनैना..... तो तू है न इसे हँसते रहना , और चल तू भी हमारे साथ ।

मैं.... " मैं तो चल ही दूंगा पर परिधि मेरे साथ नहीं जाएगी"

मेरे इतना कहते ही परिधि झट से बोल पाडी..... सुनैना ने पहले मुझ से पुछा था तो यदि तुम्हे मुझसे डर लगता है तो तुम मत आओ मैं तो जाउंगी ।

मैं.... तुम से और डर , तुम क्या बंदीद क्वीन हो ।

परिधि.... वो तो पता चल ही जाएगा ।

मैं.... ठीक है मैं भी चलता हूँ फिर वक़्त आने पर समझ लेंगे कौन किस पर भारी है।

तिकककककक है...... हानंन्न तो ठीक है।

अक्तुअल्ली यंहा चल कुछ ऐसा रहा था की मैं अपने नेगेटिव आंसर से उसे चलने का चैलेंज दे रहा था और वो भी यही कर रही थी।

रान्डोम चंगेस हमारे कम्युनिकेशन मैं थोड़ा सा कॉम्प्लीकेशन्स लय पर प्लान का पहला पार्ट तो कम्पलीट हो गया अब बारी थी दुसरे पार्ट की।

अभी हम दोनों की बात खत्म ही हुई थी कि सुनैना को कॉल आया कुछ देर बात करने के बाद कॉल होल्ड पर रखते हुए। हम दोनों को इंडीकेट करते हुए...... सुनो उर्वशी का कॉल आया है वो अकेली बोर हो रही थी तो पूछ रही है की अगर मैं फ्री हूँ तो मुझसे मिलने आ रही है क्या जवाव दूँ ।

आब तो चेहरा देखने लटक था परिधि का काटो तो खून न निकले ।

चेहरा देखते ही समझ मैं आ गया की वो नहीं चाहती की उर्वशी हमारे साथ चले और इसी ख्याल से शायद परिधि बोली... उस से कहो 5 मिन मैं कॉल बैक करती हू ।

सुनैना ने वैसा ही किया खैर...

सुनैना.. . क्या सोचा क्या बोलू ।

परिधि.... मैं सोच रही थी तुम्हारी फ्रेंड है साथ चलनी चाहिए पर मैं चाहती हूँ की जब तुमने मुझे चलने के लिए कहा है तो आज मुझे टाइम दे दो हम एक दुसरे को अच्छे से समझ ले ।

मान गए भाई क्या सफाई से एक फ्रेंड को दूसरे फ्रेंड को क्यों नहीं चलना चाहिए समझा दी , पर ये मेरे बाउंसर का टाइम था ।

मैं सुनैना से....

एक काम कर सुनैना तुम दोनों चले जाओ मुझे एक काम याद आ गया।

मेरी बात सुनते ही क्या एक्सप्रेशन था परिधि का जैसे सांप लोट रहे हो बदन में, जैसे कोई घायल शेर अपने शिकार को देख रहा हो।

सुनैना..... अब कोई कमैंट्स नहीं तुम दोनों और उर्वशी भी आ रही है और हाँ परिधि में वंहा तुम्हारे लिए ही जा रही हूँ तुम्हे मैं ये जरा भी अहसास नहीं होने दूँगी की मैं तुम्हे इग्नोर कर रही हू । आखिर तुम हमारे लिए बहुत मायने रखती हो।

खैर एस पर प्लान सब खत्म हुआ मेरी प्लानिंग ही यही थी की परिधि, सुनैना, मैं और उर्वशी सब साथ जाए और बातों बातों में तो अब ये भी डिसाइड हो गया कि सुनैना अब परिधि को अकेले नहीं छोड़ने वाली ये तो और अच्छा हो गया।

हमने 2: 30 pm का टाइम तय किया चलने के लिये। प्लान अपने फाइनल स्टेज में था ।और मैं अपने अंदर एक रोमांच की अनुभूति करने लागा

अब देखते हैं क्या होता है। अब आएगा जलाने और मानाने का मजा....

कहानी जारी रहेगी....
 
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जी बिल्कुल हाजिर है मेगा अपडेट...

लुत्फ उठाये और बताए कैसी लगी..
 
अपडेट - 40

अब देखते हैं क्या होता है। अब आएगा जलाने और मानाने का मजा.....

हम सब दिए समय पर रेडी हो गए पर 2:30 pm तक्। अबतक घर के सभी लोग खाना खा कर या तो रेस्ट कर रहे थे या अपने कामों में लगे थे । चिढाने का पहला प्रोसेस यंही से शुरू हो रहा था इसलिए सुनैना मेरे पास आते ही.....

"राहुल ये ले एड्रेस और उर्वशी को भाई थोड़ा पिक अप कर लेना उसके घर से"

मैं भी एक्टिंग करते हुए..... नहीं हमलोग जाते समय पिक अप करते हुए चले जाएंगे ।

सुनैना... नहीं भाई दोनों अलग रूट में है इसलिए पहले पिक अप कर के आ फिर हम सब साथ चलेंगे।

मैं हाँ बोल कर निकल गया। अब मैं उर्वशी के साथ 3 : 45 pm तक पहुंचा प्लान के हिसाब से और इस प्लान की तीसरी और आखरी किरदार उर्वशी ही थी।

मेरे पहुंचते ही परिधि का चेहरा देखने लायक था और आग में घी का काम उर्वशी ने किया। पता नहीं इस वक़्त उसके दिमाग में क्या चल रहा था पर जो भी हो उसके लिए अब बहुत हो चूका था ।

मैं उसे इस हालत मैं देखना सेह नहीं पा रहा था मेरे अंतर आत्मा से ये आवाज़ आई बस अब बस करो।

पर अगले ही पल मैं इन सब बातों को भूलते हुए सुनैना को बुलया।

सुनैना गुस्से के एक्सप्रेशन मैं तमतमाते हुए आई...

"क्या वक़्त तय हुआ था और तुम इसे लेने गए थे या कंही से घुमा कर ला रहे हो"।

एक साँस मैं सब बोल दी जैसे कई दिनों से इस डायलॉग की प्रैक्टिस कर रही हो...

"मुझसे क्या पूछ रही हो अपने फ्रेंड से पूछ लो मुझे मत कहो" इतना कह मैं चुप हो गया।

अब उर्वशी........ नहीं वो मेरे सर में दर्द हो रही थी तो मैंने ही इसे फ़ोर्स किया था कॉफ़ी शॉप चलके 1 कप चाय के लिए ।

ये एक और झटका था परिधि के लिए लेकिन जितना उसे बुरा लगता उसका फेसिअल एक्सप्रेशन देख कर तो उस से ज्यादा बुरा तो मुझे लगता ।

सुनैना ने सबको चलने को कहा और हम निकल पड़े लेकिन घर से निकलते समय झटका लगने की बारी मेरी थी क्योंकि दिया भी हमारे साथ जा रही थी।

अब क्या मेरा मुँह लटक गया कि हो गया सब किये कराये पर चौपट। क्योंकि ये जाएगी तो मैं और उर्वशी कंही भी नहीं निकल पाएँगे।

खैर हम सब नीचे पहुंचे तो उर्वशी मेरे साथ आगे वाली सीट पर बैठ ने को हुए लेकिन सुनैना ने उसे अपने पास बुला लिया चूँकि ये पहले से प्लान था तो उर्वशी उस हिसाब से सही जगह बैठ रही थी पर सुनैना को मालूम था की जब दिया होती है तो फिर मेरे पास की सीट हमेशा उसके लिए रिज़र्व रह्ती है। बात कोई ध्यान देने वाली नहीं है लेकिन दिया के लिए ये बहुत मायने रखती है।

हम सब बढ़े अब अपनी मंज़िल की ओर अभी कुछ देर हम चले ही थे की दिया....

"क्या भैया मैंने सुना है की कल जिसका साथ आप 1मि के लिए भी न छोड़ रहे थे उसे आज आप इतना इग्नोर कर रहे हैं बात क्या है"?

इसका मैं क्या करूं भगवान। एक खून मनपफ़ कर दो तो अभी गला दबा दूँ पता नहीं जब भी मुंह खोलती है मेरा पोपट ही करती है....

"दिया तू क्या पूछ रही है और किसके बारे में" बड़े भोलेपन से और अनजान बनते हुए पूछा ।

दिया.... गुस्से में तो तुम्हे पता नहीं है, अब मुझसे 1 शब्द भी बात किये तो आप की कसम खा कर कहती हूँ मैं कार से कूद जाउंगी ।

ब्रेक अपने आप ही लग गए , कार रुक गयी और मेरे आँखें जैसे अब रो पडूंगा । बस इस ख्याल से की ये "कूद सकती है" मैंने कार रोक दि।

मैं बाहर आ गया, मेरे गले से आवाज़ भी नहीं निकल रही थी मैंने किसी तरह परिधि से रिक्वेस्ट की वो इन सब को वॉटरफॉल दिखा कर ले आये मैं नहीं जा पाऊंगा ।

जो अबतक मुझ से नाराज बैठी थी, जिसे कल से मैंने केवल और केवल तंग किया था, और अपना एगो सटिस्फी करने के लिए जिसे मैंने तड़पाया था , अब वो अपनी तड़प भूल कर बस मामला सँभालने में लगी थी।

परिधि हड़बड़ाते हुए नीचे उतरी और मुझे समझते हुए...... बच्ची है राहुल ऐसा वो बोल गयी केवल , उसका कहने का ये मतलब नहीं था ।

अबतक कार से सब उतर आये थे कार के पास अब ट्रैफिक बढ़ रही थी फिर परिधि ने सबको कार में बैठने को कहा मगर मैं अभी इस हालत में नहीं था की किसी से कुछ बोल पाऊं या दिया के साथ बैठ कर जाऊ, इसलिए मैंने परिधि से कहा की सब को वॉटरफॉल से घुमा लाओ मैं कॉफ़ी शॉप मैं इंतज़ार करता हू ।

परिधि मौके की नजाकत को देखते हुए कार बढ़ा दी और मैं टैक्सी लेकर कॉफ़ी शॉप चला गया । मैं अब भी बहुत चिंता में था कि क्यों वो ऐसी बात बोल गयी और इतना सीरियस होकर। मेरा तो कलेजा फट गया था ।

मैं कॉफ़ी शॉप में बैठा रहा और खुद को नार्मल करता रहा । पर जब आप को किसी बुरे ख्याल का अहसास होता है तो वो ख्याल दिल से जाने का नाम ही नहीं लेता और वही हुआ था मेरे साथ्।

बैठे बैठे 8,10 कॉफ़ी भी पी गया। पता नहीं कितनी देर बैठा बस एक गम सा खाया जा रहा था और साथ ही साथ इतना गुस्सा कि क्या बताऊ । कि तभी मुझे सामने गेट से अब दिया और परिधि आती हुई नजर आई ।

आकर दोनों मेरे पास बैठ गयी अब दिया....

दिया..... भैया चलो घर चलते है ।

मैं... परिधि इस से बोल दो कि मैं अभी बहुत गुस्से मैं हूँ मुझे ये अभी छोड़ दे मैं घर आता हूँ तो बात करता हू ।

दिया.... बहुत मिन्न्नते भरे स्वर में... भैया गलती हो गयी मैं उस वक़्त, उस वक़्त पता नहीं मुझे क्या हो गया था ।

मुझे अब मेरा गुस्सा संभालना मुश्किल हुआ तो मैं बोल पड़ा..... मैं क्या हूँ पागल या तुम लोगों की मुझे फ़िक्र होती है ये गलती है। कभी वो सुनैना सुना के चली जाती है, तो कभी तू सुना देती है, तो कभी मुझे थप्पड़ खाने पड़ते है। मालूम है आज कल क्या बीत रही है मुझ्पर, मैं चिरचिरा होता चला जा रहा हू । परिधि की तरफ इशारा करते हुए पता है इस चिरचिरेपन का बदला मैं कल से इस से ले रहा हू । यह मेरे लिए आयी है आज सुबह से मैंने ठीक से बात तक नहीं कि कल भी ये मुझे हॉस्पिटल ले कर गयी एक स्माइल तक नहीं दी मैंने इसे ।

दिल की जितनी भड़ास थी सब निकलने के बाद मैं शांत बैठ गया सिर निचे कर के लेकिन तभी मेरे कंधे पर हाँथ परा मै सर उठा के देखा तो सिमरन थी।

मैने अपने आप को शांत करते हुए..... बैठो दीदी आप यंहा कैसे ।

सिमरन परिधि और दिया को बोलते हुए....

मालूम क्या है, जब हमलोग गुस्सा होते हैं तो हम किसी से ठीक से बात तक नहीं करते लेकिन ये ऐषा लड़का है जिसकी समझ गुस्से में भी काम करती है। दिया मुझे तुझ से इस तरह की उम्मीद नहीं थी।

अब मेरे चेहरे पर हलकी मुस्कान थी और दीदी भी मुस्कुरा रही थी क्योंकि मुझे मालूम था कि जो कुछ भी हुआ होगा वो घर पर ही हो चूका होगा सिमरन यंहा केवल ड्रामा कर रही है।

फिर मैंने दिया के कान पकरते हुए........ अगली बार यदि सपने में भी ऐसी गलती की तो मैं तुझसे कभी बात नहीं करुन्गा।

हम सब के सब वंहा 1 कॉफ़ी पी फिर मैंने सिमरन और दिया को ड्राप कर परिधि को उसके घर ड्रॉप करने निकल गया।

मैने कार को एक पार्क के नजदीक रोका और परिधि को साथ अंदर चला गया। पार्क में हम एक बेंच पर बैठ गए लेकिन दोनों ही खामोष, पर दिल में इतनी हलचल इतनी हलचल की क्या बताऊ ।

पता नहीं एक अजीब सा अहसास था.। मैं बैठा था और मेरे कंधे पे परिधि का सिर, ऑंखें मेरी और परिधि दोनों की बन्द थी । मेरे कानों के बगल से हवा गुजरती तो एक मधुरमय संगीत का आभास सी होता और उन्हीं हवाओं में उसके बाल जब मेरे चेहरे पर आते तो एक अजीब सी सिरहन दिल मैं पैदा कर जाती। पंछियों की चहचहाट से असीम शांति की अनुभूति हो रही थी।

प्यार ये तो होना ही था । मैं परिधि को ख्यालो से बाहर निकलते हुए....

"परी, परी....... हुं (खुमारी भरे स्वर में).......... उठो तो..... नहीं अभी नहीं....सुनो तो परी... कितना अच्छा लग रहा है कुछ देर और............ सुनो कल मैं वापस चंडीगढ़ जा रहा हू ।

अचानक से मेरे कंधे से अलग होती है और एक लम्बी सी साँस अन्दर खिंचति हुई...

"हहहह! इतनी जल्दी क्यों जा रहे हो"

मैं..... जाना तो पड़ेगा ही फिर आज जाऊ या कल ।

परिधि.... अब थोड़ी भारी स्वर में.... लेकिन आज तो पूरा दिन तुमने मुझसे बात कंहा की ।

मैं... मैं क्या करता मैं तुमसे कितना बेचैन था बात करने के लिए लेकिन पता नहीं तुम हमेशा मेरे बोलने से पहले ही टाइम उप कर देती हो।

परिधि..... मुझे अच्छा लगता है जब मैं तुम्हे टाइम अप कहती हूँ और तुम बोलते बोलते रुक जाते हो।

मैं.... मालूम है आज वॉटरफॉल जाना सब प्लान था मैंने और सुनैना ने की थी ।

परिधि.... मुझे भी मालूम था कि ये प्लान है क्योंकि जब तुम यूँ अचानक सुनैना के पास गए तभी मैं समझ गायी।

परिधि मैं तुम से एक बात बोलू...... ।यशःह्ह्ह! अभी चुप अभी मुझे सोना है तुम्हारे कंधे पर सर रख कर।

हम दोनों इस पल में समाये चले गए बहुत देर तक बैठे रहें वइसे ही। न कोई मन में विचार, न कोई गइले-सिक्वे न कोई सिकायत हमारे बीते आज के दिन के बारे में, बस इस पल को हम महसूस कर रहे थे ।

मैने परिधि को अपने से थोड़ा हटते हुए... चलो अब हमें चलना चहिये ।

परिधि.... प्लीज् थोड़ी देर और ।

मैं..... देखो अगर तुम यूँ ही प्यार जता ति रही तो मुझे तुम से प्यार हो जाएगा ।

परिधि..... तो हो जाने दो... प्लीज कुछ देर और ।

पर खुद बोलकर फिर अचानक उठ गयी और उठते ही.....मुझे मनपफ़ करना मैं थोड़ी भावनाओ में बह गायी ।

मैं...... लेकिन परिधि ।

इतना ही बोल पाया की परिधि ने फिर टाइम अप और एक मीठी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लेट हुए........ तो क्या चलें सर ।

परिधि को लेकर मैं उसके घर पहुंचा, घर में सब लोग मिल गए मोहित अंकल , रंजना आंटी , लाल।

हम सब बातें करने लगे और परिधि अपने रूम में चली गायी। कुछ देर मैं यूँ ही बातें करता रहा सब लोगों से फिर मैंने जाने की आज्ञा ली पर सोचा की जाने से पहले एक आखरी बार परिधि से मिल लिया जाए ।

मैं.... आंटी चलो थोड़ा परिधि के कमरे तक ।

आंटी.... मैं काम कर रही हूँ तू चला जा ना ।

पर जैसे ही मैं दो कदम बढ़ाया परिधि के पास जाने के लिए की पीछे से आंटी टोकते हुए.... इधर आ बदमास तुझे अभी बताती हु ।

मैने एक स्माइल दी आंटी को और बोला... गाल लेके अभी हाजिर हुआ ।

और कहते हुए मैं परिधि के रूम के पास पहुंचा ।

मैन गेट पर से "may I come in" करते अभी दो कदम बढ़ा ही था की परिधि आकर मेरे गले से लग गायी।

मैने भी उसे बाँहों में भर लिया। हम दोनों कुछ देर यूँ ही एक दूसरे की बाँहों में रहे फिर मैंने परिधि से कहा..... जाओ नहीं तो आंटी आज सच में कटवा देगी मुझे।

लेकिन परिधि उसे तो जैसे एक ख़ुमार सा चढ़ा था और मुझसे एक पल के लिए अलग नहीं होना चाहती थी।

मैने उसको अपने से अलग किया वो सर नीचे किये हुए मुझ से अलग हुए। मैंने परिधि का चेहरा अपनी दोनों हांथों में लेते हुए उसे ऊपर उठाया ।

"ये क्या पड़ी तुम रो क्यों रही हो"

आंखों में आंसू और चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान लिये।।

"आंशु तो अपने आप ही निकल गए शायद तुम से बिछड़ने का गम है"

मैने उसके आँशु पोछे और कहा "जा रहा हूं" ।

कुछ न बोल पाए और फिर से उसके आँखों में आँसू आ गै

मैन उसके आंशू पोछते हुए...

"जाने दो मुझे यूँ न रोको अब , मुझे अपने आंशूं के साथ विदा मत करो"

परिधि.... मेरी एक बात मनोगे.... क्या?

परिधि.... " बस एक बार अपनी इस दोस्त को रोज याद कर लेना वंहा जाकर भूल मत जाना "

अब मुझ से मेरे अरमान काबू कर पाना मुश्किल हो चला था , मैं कुछ न बोल पाया सिवाय "हनणण" के।

मैन पीछे मुड़ा और बिना दुबारा उसे देखे निकल गया।

घर पंहुचा और सीधा अपने रूम में चला गया और जाते ही अपने ख्यालो में गुम हो गया। ये एक अहसास ही था जो परिधि के पास न होते हुए भी पास होने की अनुभूति दे रहा था

मैन बस परिधि के ख्यालों में खोए रहना चाहता था इसलिए आज खाना भी जल्दी खा लिया और चुपचाप अपना गेट लॉक कर फिर से डूबा रहा परिधि के ख्यालों में।

कब सोया पता नहीं । और देखते देखते अब हम सब को दिल्ली से विदा लेने का वक़्त आ गया। दिल्ली के बिताये मेरे कुछ दिन ये मेरे लिए मेरी जिंदगी के बहुत ही खास दिन थे ।

अब फाइनली विदा ली दिल्ली और परिधि दोनों से और साथ छोड़ आया अपना दिल जो अब अपना नहीं था.....//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f622.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f622.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f622.svg

कहानी जारी रहेगी....
 
माफी चाहूँगा मित्रों...

मैं ग्वालियर से हूँ...

और आपको पता ही है यहाँ के हालात...

इंटरनेट भी बंद कर दिया गया था....

आज खुला है तो शाम तक अपडेट आएगी...
 
Bhaiyo..... maafi chahunga... yr

aapko pta hi hoga Gwalior me...

dange hue the... or internet sewa bhi....

bnd Kr di thi... uske.. baad jv woh chalu...

hui to mera... phone... bnd.. pd gya

new wala order... kiya hu... Monday Ko..

delivery h... uski so friend's Monday se hi update milegi... daily...

sorry.... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f625.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f625.svg
 
भाइयों माफी चाहूँगा...

मगर फ़ोन एक दिन में नही आता ना...

मंडे बोला था मैंने आज वाला...

तो अपडेट शुरू आज से....

रुकावट के लिए बहुत बहुत माफी..
 
अपडेट - 41

अब फाइनली विदा ली दिल्ली और परिधि दोनों से और साथ छोड़ आया अपना दिल जो अब अपना नहीं था ।

सपरिवार हम पहुंचे चंडीगढ़ और साथ मे आयी मस्सी की बिटिया सुनैना ।

सब कुछ वही था , घर भी वही , परदे , चादर और तकिये भी वही , लोग भी वही पर जाने क्यों सब नया नया लग रहा था ।

बेहरहल हम सब 2 बजे तक पहुँच गए चण्डीगढ़, सफ़र की थकावट सब पर भरी थी इसलिए सब चले गए सोने पर न तो मैं थका था और न ही नींद आ रही थी तभी एक मोबाइल पर मैसेज आया और दिल खुश हो गया।

ये परिधि का मैसेज था....

"कुछ भी अच्छा नहीं लगता एक बार बात करना" ।

एक छन को तो ऐसा लगा की परिधि मेरे कानों में कह रही हो अपने मार्मिक स्वरों में। खैर मैं अपने सपनो की कल्पनाओं से निकलते हुए चल कुछ रियल का काम हो जाए ।

यही सोच कर मैंने ऋषभ को फ़ोन लगया....

ऋषभ.... हाँ गुरु आ गया वपस ।

मैं.... हाँ तू कहाँ है अभी ।

ऋषभ.... कंही नहीं बस अपने अड्डे पर ।

मैं..... रुक अभी आया ।

चाहता तो था की मैं अपने बाइक से ही जाऊ पर ऋषभ कार के बारे में बताना था इसलिए मैंने कार निकली और पहुँच गया अड्डे पर।

अड्डे पर जाने से पहले आइये इसकी कुछ जानकारियां ले ले ।

ये अडडा सहर के हाई प्रोफाइल एरिया नूतन अपार्टमेंट के पार्किंग के साइड में है जंहा की एक आम टी स्टाल है,आम इसलिए की ये बांकियों की शॉप की तरह ही-फी नहीं थी।

अवैध रूप से 30 फ़िट कब्ज़ा किया हुआ जिसके निचे मामूली फ्लोर और ऊपर अलवेस्टर्स की छत ।

यहाँ हमारी महफ़िल जमती थी। हम सभी यारों का अड्डा । इस अड्डे की खास बात ये थी की यूँ तो सब लोगों का अपना अपना ग्रुप था किसी के 4 का तो किसी का कम तो किसी का ज्यादा । पर लगातार आते आते सब लोगों की एक दूसरे से गहरी पहचान हो चुकी थी।

इस अड्डे पर हम कॉमन मिलने वाले जो फ्रेंड्स थे--मैं , ऋषभ, कुणाल , और असिस ।

अब चलते हैं कहानी में....

मै जब पहुंचा तो मुझे वंहा तीनों त्रिमूर्तियाँ ऋषभ , कुणाल और असीस सिगरेट सुलगाए दिख गए । मैं कार से उतरा और तीनों के पास पहुंच ।

कुणाल... भाई मस्त कार है, किसकी है ।

मै....मेरी है पर्सोनाल ।

तीनो एक साथ पर्सोनाल।

ऋषभ.... हाँ साले तेरे बाप ने कहा होगा की अले ले चल बेटा तुझे मैं कार दिला देता हू , साला आज कल ये भी फेंक ने लगा है।

मैं.... मादरचोद ये देख रजिस्ट्रेशन, फिर मैंने रजिस्ट्रेशन कार्ड दिखाते हुए अब विस्वास हुआ। साले इतने बड़े हरामी हो, दोस्त के साथ कुछ अच्छा होता है तो उल्टा बधाई देने के बदले कन्फर्म करने लगते हो।

ऋषभ.... भाई ग़लती हुई पर ये बता अंकल माने कैसे ?

फिर मैंने दिल्ली की कहानी बतायी की कैसे मुझे ये कार मिली ।

कुणाल.... भाई पार्टी तो बनती है ।

मैं... आज नहीं दोस्तों आज ही लौटा हूँ ।

आसीस.... मादरचोद कभी तो पैसा निकलने के नाम पर हाँ कर दिया कर कंजुस साला उस दिन भी...

ऋषभ बीच में टोकते हुए.... साले दुखी आत्मा जब देखो तब फ्लश बैक मैं चला जाता है तू चूप, मुझे इंडीकेट करते हुए तू दे रहा है पार्टी तो बता नहीं तो साफ़ मना कर दे ये कल वल न बताया कर ।

कुणाल... पैसे की दिक्कत है तो मैं फाइनेंस कर देता हू ।

आसिस कुणाल से.. मादरचोद अभी तो सिगरेट के लिए बोला पर्स घर भूल आया ।

कुणाल... अरे हम सब मिलकर कर देंगे ।

मैं.... चल भाई कंहा चलना है किसी को कुछ करने की जरूरत नहीं।

चारों निकले वंहा से, सबसे पहले वाइन शॉप गए 2- 2 बियर घटकने के बाद डकार लेते हुए...

ऋषभ... चल भाई अब तम्मना रेस्टोरेंट ।

मै.... अबे बियर पीने के बाद काहे का रेस्टूरेंट चल कंही और चलते हैं।

ऋषभ... नहीं मुझे वंही जाना है तू चल रहा है या मैं खुद जाऊ ।

मैं... तू जो काहे मेरे भाई कार मे बैठ मैं पेसाब कर के अभी आया और पीछे से कुणाल का हाँथ पकड़ के इशारा किया चल मेरे साथ ।

मै कुणाल से... ये इसको क्या हुआ बियर कब से चढ़ने लगी ।

कुणाल... भाई बहुत बड़ा सीन हो गया हमारे साथ उस रेस्टूरेंट में । तो जब कभी भी थोड़ा सा होश खोता है तो ध्यान वंही चला जाता है।

मैं.... क्यों क्या हुआ था ।

कुणाल..... तू जिस दिन दिल्ली गया था उसके 1 दिन बाद की बात है हम तीनों और आकाश

(क्लासमेट , बहुत ही छिछोरा और लड़कियों को गंदे तरीके से घूर्ण)

इतने में मैं टॉकटे हुए.... वो चुतिया क्या कर रहा था वो होगा तो कांड होगा ही न।

कुणाल.... हम सब पहुंचे रेस्टूरेंट और इस मादरचोद आकाश ने एक को देखना शुरू किया और वो रेस्टूरेंट के मालिक की बेटी थी फिर क्या था विवाद बढ़ता गया और..

मैं.... और क्या तुम चारों की खूब कुटाई हुई ।

कुणाल.... नहीं भाई हम चारों के कपड़े उतरवा के रख लिए और चड्डी में वापस भेजा ।

मैं तो चकित रह गया और गुस्सा अपने पुरे उफान पर लेकिन अभी सही वक़्त नहीं था कोई भी एक्शन के लिए इसलिए खून के घूँट पीना पड़े ।

मै आया ऋषभ के पास आते ही गले लग गया मैं अपने यार के। आँखों मैं तो आंशू पता नहीं कब आ गए थे ।

अब एक तमाचा मारते हुए....

"मादर्चोद मैं तुझे अपनी हर बात बताता हूँ और तूने मुझसे इतनी बड़ी बात छिपायी"

ऋषभ समझ चुका था की कुणाल ने सब बता दिया है मुझे। उसके आँखों मैं भी आंशू थे घोर अपमान के आंशु ।

ऋषभ..... भाई जब तू दिल्ली में था दो दिन तक कोई कांटेक्ट नहीं था फिर जब तू फ़ोन किया तो बहुत खुश लग रहा था और मैं बोल न सका । मांफ कर दे भाई ।

हम दोनों के आंखों से आँशु बहते चले जा रहे थे । हम दोनों खुद को नार्मल किया फिर...

मैं.. चल भाई जरा हम भी उसकी सक्ल देख ले आज ।

ऋषभ.... छोड़ यार कंही और चलते है ।

मै.... अपनी पूरी अवाज़ मैं चिल्लाते हुए.... तुझे मेरी बात समझ में नहीं आती क्या?

ऋषभ, कुणाल और असीस तीनों मेरा गुस्सा देख मुझे शांत करवाने में लग गए ।

तू तू मैं मैं होते होते मैंने कहा..... देख मैं अभी कुछ नहीं कहूंगा बस मुझे 1 बार उस लड़की और उसके बाप को देखना है।

ऋषभ.... भाई तुझे मेरी कसम अभी कोई सीन मत करना ।

मैं.... साले फट्टू सब चुप हो जाओ, कुछ नहीं करूँगा चल पहले चल कर बियर पिटे है फिर चलते है रेस्टूरेंट ।

हमलोग वापस 1 - 1 बोतल बियर की और ली। गुस्सा से तो पूरा बदन में आग लगी थी पर अभी कुछ भी करने का सही समय नहीं था क्योंकि मुझे उसे मारना नहीं बल्कि बदला लेना था । अपने दोस्त के बेज्जती का बदला ।

हमलोग पहुंचे रेस्टूरेंट तो कुणाल ने मुझे आँखों के इशारे किया वही है ओनर लेकिन मैंने ऊँगली से इशारा कर दिया वही है क्या?

मैने जान भुझ कर ऊँगली की थी, इस से उनका ध्यान मेरी तरफ खिंचा और इस बात को देखते हुए मैंने किसी 1 टेबल के खाने की प्लेट को गिरा दी और क्लियर व्यू था की मैंने ये जान भुझ कर किया है।

मामला बिगड़ते देख तीनों मुझे चलने के लिए बोलने लगे लेकिन मैंने उन्हें 2 मिनट वंही रुकने के लिए बोला ।

ओनर और उसके 4 चमचे मेरे पास आते हुए....

"तुम्हारी ये मजाल, तुम सब गुण्डागर्दी करने आये हो"

मै बिलकुल दोनों हाथों को जोड़े और सर झुकना कर...

"अरे अंकल मुझे माफ़ कर दो ग़लती से हुए" और अगले ही पल सीना चौड़ा करते हुए उसके मुँह पर ₹ 5,000 फेंकते हुए "ये ले उठा लेना एक प्लेट के ₹ 5,000 बहुत होते है" ।

वो बस मुझे घूरते ही रहे, मेरे दिल को कुछ तो सुकून जरूर मिला था, और मन में......., जबतक उस ज़िल्लत का बदला पूरा नहीं होता तुझे मै रोज रोज नए करतब जरूर दिखाउंगा।

कुछ न कुछ तो सुकून जरूर मिला सबको। ऋषभ कुछ बोला नहीं बस गले लग गया और आंखों में आंसू थे उसके ।

फिर हम सब उस दिन रात तक साथ रहे उस दौरान हमने काफी मस्ती की। ऐसा लग रहा था की कब के बिछड़े मिले हो ।

रात के 9 बजे मैं घर पहुंचा और सिमरन को बोलते हुए की मैं ऋषभ के साथ खाना खा चुका हू , अपने कमरे मैं चला जा रहा था तभी सिमरन.....

"बेटू मेरे पास आना"

मै उनकी तरफ मुड़ा स्माइल की और चल दिया अपने रूम। दीदी भी समझ गयी मैं ड्रिंक कर के आया हूँ इसलिए कुछ न कहा बस जाने दिया।

मै अपने रूम मैं पहुंचा तो ख्याल आया की परिधि को अबतक फ़ोन नहीं किया बेचारी ने कब कहा था की कॉल करना ।

मैने परिधि को कॉल लगया....

तिरिंग-तिरिंग, तिरिंग-तिरिंग

परिधि.... जी सर अब फूर्सत हुए।

मैं.... नहीं यार, वो बहुत दिनों बाद सब दोस्तों से मिला तो उसी के साथ था (और जब दोस्तों की बात चली तो एक बार फिर सब याद आ गया)।

परिधि.... सब ठीक तो है ना।

मैं.... हा, तुमने खाना खा लिया क्या?

परिधि..... सच सच बताओ वंहा क्या हुआ।

मैं.... कुछ भी तो नहीं ।

परिधि...... कोई बात नहीं तुम आराम करो मैं कल बात करती हू ।

एक छोटी सी चिट चाट के बाद मैं भी अब आराम करना चाहता था । एक तो अभी भी पैरो में थोड़ी सूजन थी उसके ऊपर 8 घन्टे का सफर, और फिर बियर कुल मिलकर मुझे बिस्तर की तरफ खिंच रहे थे । और गहरी नींद ने मुझे अपने आग़ोश मैं ले लिया।

कहानी जारी रहेगी.....
 
sir ji.... mat bola kro bhai.....

abhi only 19 saal ka hoon yr....//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f602.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f602.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f602.svg
 
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