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प्यार - ( गम या खुशी )

अपडेट - 42

और गहरी नींद ने मुझे अपने आगोश में ले लिया....

सुबह मैं अपने रूटीन टाइम से उठ गया। आज बहुत फ्रेश लग रहा था । मन में एक ख्याल आया कि क्यों न सुबह सुबह परिधि कि नींद खराब कि जाए और मैं इसी इरादे से उसे फ़ोन लगा दिया.....

तिरिंग

परिधि..... उठ गए जानब ।

ये क्या, पहली घंटी भी पूरी नहीं हुई और ये कॉल पिक उप...

सब ठीक तो है न एक चिंता सा आभास

मैं.... परिधि प्लीज पहले ये बताओ कि इतनी सुबह क्यों जाग रही हो सब ठीक तो है वहा (घबराया सा आवाज़ में)

परिधि.... हँसते हुए, जी हाँ सब ठीक है ।

मैं..... तो इतनी सुबह 4 बजे तुम क्यों जग रही हो ।

परिधि....तुम जो सुबह उठते हो तो मैंने भी आदत डाल ली

अब मैं थोड़ा रिलैक्स होते हुए....

मैं..... तुम ने तो जान ही निकाल दी थी मेरी ।

परिधि.... और वो कैसे?

मैं.... वो ऐसे कि, जाओ मैं नहीं बताता ।

परिधि..... वैसे भी तुम मुझे कंहा कुछ बताते हो ।

मैं..........अब ये सुबह सुबह तुम क्या ले कर बैठ गायी, और मैडम जो बात आपको बताने वाली होती है सब बता देता हू ।

परिधि.... मतलब कल वाली बात बताने वाली नहीं थी ।

मैं.... कौन सी बात?

परिधि.... वो तो तुम्हारा दिल जनता है ।

मैं.... हाँ एक छोटी सी परेशानी थी पर प्लीज पूछना मत जब सोल्व हो जायेगी तो बता दूंगा ।

परिधि... बता देते तो मैं कुछ मदद कर देती ।

मैं... माना कि तुम स्मार्ट हो पर मुझे भी तो कुछ करने दो ।

चूटकी तो ले ली अब रिएक्शन भी देख लेता हू ।

परिधि.... मिल गयी कलेजे को ठंडक सुबह सुबह जो मुझे रुला रहे हो ।

मैं.... पड़ी ओ डियर पड़ी उफ्फ्फ्फ़! आप का ये गुस्सा होना ।

परिधि... जाओ मैं बात नहीं करती तुम तंग करते हो ।

मैं.... नहीं नहीं मैं तो बस....

बोलते बोलते बिच में ही ।

परिधि.... टाइम अप टाइम अप अब जाओ ग्रोउण्ड ।

मैं.... हाँ हाँ जाता हूँ वैसे भी जब तुम्हे मेरी बात ही नहीं सुन नी तो भला मैं क्यों बात करू ।

परिधि..... खिल-खिलकर हँसते हुए इतनी बेज्जती होने के बावजूद बात कर रहे हो अब जाओ ग्राउंड रात मैं बात करती हूण। बाई तब तक ।

उसकी बातों से मेरे चेहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी और मैं इसी मुस्कान के साथ ग्राउंड चल दिया।

सूबह सुबह मैं ग्राउंड पहुंचा पर अब तक ऋषभ का कोई पता नहीं था । फिर मैंने अपनी रूटीन एक्सरसाइज कि पर आज जयादा दौड़ नहीं पाया पौन अभी भी सूजन थी।

सूबह के 5 : 30 हो रहे थे कि मुझे किरण नज़र आई ग्राउंड पर। लेकिन ये क्या किरण के साथ ये क्या का रही है ग्राउंड में?

रूही को देखते ही मुझे लास्ट टाइम बिताये सारे लम्हे ताज़ा हो गए और जबकि उसने बोल ही दिया था कि कोई कांटेक्ट मत रखना तो जैसे दूसरे लोग ग्राउंड पर है मेरे लिए वैसे ही रूही ।

मेरे पास किरण आते हुए...

किराण.... वेलकम टू चंडीगढ़ हीरो, गुड मोर्निंग।

मैने भी किरण को गुड मॉर्निंग विश किया और प्रैक्टिस के बारे मैं पूछने लागा । बातों ही बातों मैं पता चला कि दो दिन बाद पुलिस ग्राउंड मैं किरण कि फिजिकल टेस्ट है। किरण ने मुझे रोक कर अपनी प्रैक्टिस को जज करने के लिए बोली और चली गायी।

मैन जंहा खड़ा था उसके दो कदम पीछे रूही खड़ी थी, मेरी पीठ रूही कि ओरे थी और मैं बिना ध्यान दिए किरण कि प्रैक्टिस देख रहा था ।

मै किरण कि प्रैक्टिस देख रहा था तभी पीछे से आवाज आई

"बहुत आरोगेंट हो गए हो आज कल"

मै बात को अनसुना कर बस किरण कि प्रैक्टिस देख रहा था । तभी रूही बिलकुल मेरे सामने खड़ी हो गई ।

रूही.... मैं पागल नहीं जो अपने आप से बात कर रही हू ।

मैं... जी आपने मुझसे कुछ कहा मिस..

रूही... "तुम समझते क्या हो अपने आप को" और इतना बोलकर मेरे गले लग गयी और रोने लागी।

मैन तो बस हैरान रह गया साथ ही साथ बहुत अजीब भी लग रहा था क्योंकि ग्राउंड में वो मेरे गले लगी थी, हर एक आदमी हमें ही देख रहा था,मैंने रूही को अपने से अलग करते हुए.....

"ये क्या बचपना है"

रूही.... बचपना तो तुम कर रहे हो , तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते ।

मैं.... किसने कहा कि मैं तुमसे बात नहीं करता ।

रूही...... तो जब मैने तुम्हे आवाज़ दी तो रेस्पोंड क्यों नहीं किए ।

मैं... तुमने किसी अररोगेंट को बुला रही थी जो मैं नहीं हू ।

रूही.... नाराज हो मुझपर (बड़ी मासूमियत से) ।

मुझे बहुत ही ज्यादा प्यार आ गया रूही कि बात पर मैंने अपने दोनों हांथों से उसके आंसू पोछते हुए...

मैं.... हाँ थोड़ा नाराज था पर अब बिलकुल भी नहीं ।

रूही.... मुझे मांफ करना मैं उस दिन बहुत बोल गायी, पर विस्वास मानो मुझे जादा भी अंदाजा नहीं था की....

ओर बोलते बोलते रूक गयी क्योंकि तबतक किरण वापस आ रही थी,

हालाँकि किरण ने भी हमें गले लगते देख चुकी थी लेकिन अब सारी बातें तो उसके सामने नहीं ही हो सकती थी।

किरण.... हँसते हुए ये क्या हो रहा था ग्राउंड पर तुम दोनों के बीच ।

मैं.... आप जैसा सोच रही है वैसा कुछ भी नहीं है ।

किरण..... हाँ हाँ हमें तो कुछ पता ही नहीं और गुनगुनाने लागि ।

आईसे भोले बनकर है बैठे

जैसे कोई बात नहीं ।

सब कुछ नज़र आ रहा है

दिन है ये रात नहीं

क्या है कुछ भी नहीं है अगर

होंठों पे है ख़ामोशी मगर

बातें कर रही हैन

बातें कर रही हैं नज़र चुपके चुपके.....

मै अब क्या रियेक्ट करू इस बात का मुझे समझ मैं ही नहीं आ रहा था तभी मेरी उलझनों को समझते हुए रूही...

"बहुत हुआ किरण अब तुम चुपचाप प्रैक्टिस करोगी"

किरण.... हाँ हाँ मेरा होना तो अब तुझे गवारा नहीं न जा रही हू ।

अब मेरा भी यंहा रुकना खतरे से खली नहीं और मैंने रूही को रेस्टोरेंट में मिलने को बोल चला आया ।

मै जल्दी से भागा इस खतरनाक माहौल से,ऐसा लग रहा था कि किरण अभी ही बोल पड़ेगी...

"कुबुल कर की तुम ही ने रूही का दिल चुराया है और तुम्हे सजाये प्यार दी जाती है"

खैर मैं जब वहा से निकला तो सोचा क्यों न ऋषभ के पास चला जाऊ । हालाँकि मैं ऋषभ के घर जाने से बहुत करता ता था और इसकी वजह थी उसकी जुड़वा बहन सैनी ।

हमारी पहली मुलाकात कुछ ऐसी थी कि सैनी नई एडमिशन थी हमारे क्लास में और मुझे मालूम नहीं था कि वो ऋषभ कि बहन है। इस से पहले वो अपने ननिहाल हरियाणा मैं रह कर पढ़ाई करती थी। ऐसा नहीं था कि मुझे पता नहीं था कि ऋषभ कि एक बहन है पर कभी भी देखा नहीं था ।

हुआ यूँ कि मैं स्कूल के गेट पर था और सैनी भी अंदर ही आ रही थी तो जल्दी जल्दी में मैं उस से टकरा गया। मेरी टक्कर से वो गिर गयी फिर क्या था लगी मुझे सुनाने ।

"लड़की देखि नहीं कि लगे लाइन मारने, छिछोरे, कमीने, बद्तमीज, अँधा है और पता नहीं क्या क्या"



अब मैं गेट पर देखा तो सरम से पानी पानी हो गया बहुत से स्कूल के स्टूडेंट, टीचर और स्टाफ जमा हो गए थे, और अपनी अलग ही इमेज थी स्कूल में।

फिर क्या था मैं भी भावनाओ मैं बह गया और बहुत जलील किया। मैं बहुत अपसेट हो गया इसलिए उस दिन स्कूल अटेंड नहीं की। और को-इंसिडेंट देखिये मुझे क्या सूझी और मैं इवनिंग टाइम मैं चला गया ऋषभ के घर । बेल्ल बजायी तो दरवाजा भी इसी ने खोला, और मुझे देखते ही.....

"तुम!मेरा पीछे मेरे घर तक चले आए, कंटिन्यू जो मन मैं आया वो बोलते चली गायी।

इस तरह से सैनी को बोलते देख उसके घर के लोग भी गेट पर आ गए और ऋषभ तो डंडा लेकर दौड़ा दौड़ा आया । जो अबतक मैं चुप था ऋषभ को यूँ देख कर....

"रूक क्यों गया मरता क्यों नहीं है डंडा"

मेरे इस तरह से बोलने पर सैनी ने मुझे हैरानी से देखा और ऋषभ ने मुझे अंदर बुला लिया। अंदर जब सबको पता चला तो सब हंस हंस कर लोट पॉट हो रहे थे लेकिन मेरा और सैनी का यंहा से कोल्ड वॉर शुरू हो चूका था जो अब तक चल रहा था ।

मै पहुंचा ऋषभ के घर बेल्ल बजायी। आंटी ने गेट खोला और......

"अरे राहुल बेटा तुम कब आए, आओ आओ अंदर आओ"

मैने आंटी से पुछा ऋषभ कंहा है तो पता चला कि वाक पर गया है। पर ये तो ग्राउंड पर मिला ही नहीं अच्छा बाद मैं पता करता हू । फिर मैंने सैनी के बारे में पुछा और "शैतान के बड़े मैं सोचा और शैतान हाजीर"।

"मा आज ये सुबह सुबह यंहा क्या कर रहा है आंटी ने घर से निकाल दिया कया"?

आंटी.... चुप कर बदमाश उसे कोई क्यों घर से निकलेगा? ल ले जा के चाय दे रहल को।

सैनी मेरे पास चाय लेकर आई और चाय देकर चली गायी।

कुछ देर इंतज़ार के बाद ऋषभ भी आ गया। फिर मैं चला गया उसके कमरे में। कल कि घटना से थोड़ा हल्का फील कर रहा था पर कहीं न कंही उसे ये बात खये जा रही थी ।

जब मैं उस से बात कर रहा था रेस्टोरेंट के बारे मैं तो मुझे रूही के साथ भी रेस्टोरेंट जाना याद आ गया और दिमाग का शैतान जग गया।

मै ऋषभ को बोला कि मैं जा रहा हूँ पर दिन मैं कंही मत जाना कॉल करके जंहा बुलाऊँ आ जाना ।

ऋषभ... पर तुझे अचानक हुआ क्या और ये दिन का क्या लफ़ड़ा है।

मैं.... मैं जा रहा हूँ मुझे अभी काम है तू दिन मैं मेरे बताये जगह पर मिल तू खुद समझ जाएगा ।

मै वहा से चला आया बस इस ख्याल से कि आज जो मैं तम्मना रेस्टोरेंट में करूँगा उस से उसको आज पता चल जायेगा की......

"किस आग में उसने हाँथ डाला है"............

कहानी जारी रहेगी......
 
हा भाई हा.....

यह रही मेगा अपडेट...

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अपडेट - 43

"किस आग में उसने हाँथ डाला है....

मैं एक नई एनर्जी के साथ घर पहुँच गया। हॉल में सिमरन मुझे नजर आयी मैं समझ गया की कल की बात पर क्लास लगनी है। इसलिए मैं आँख बचा कर उस से निकलने लगा लेकिन...

सिमरन.... बेटू पहले इधर आ फिर कंही जाना ।

मैं दीदी के पीछे गया और पीछे से गले लग गया.... ओह मेरी प्यारी दीदी कितना काम करती हो चलो आज मूवी चलते है।

सिमरन.... मुझे छोड़ पहले सामने बैठ ।

मैं चेयर पर बैठते हुए..... दीदी आप फाइनल इयर कम्पलीट करने के बाद क्या करने वाली हो?

सिमरन.... मुँह बंद और जो पूछती हूँ जवाव दे समझा.. ।

मैं बिना मुह खोले.... ह्म्म्म ।

सिमरन..... ये क्या नाटक है मैं कुछ बोल रही हू ।

मैं..... हम्म्म्म ।

सिमरन (ग़ुस्से में).... , अब बोलता क्यों नहीं ।

मैं... खुद ही तो कहा था मुंह बंद कर के बैठ ।

सिमरन...... शैतान रुक तू अभी , और उठ कर मारने के लिए आई ।

मैं..... अच्छा बैठ जाओ , अब परेशान नहीं करुँगा ।

सिमरन..... कल तू ड्रिंक कर के आया था ना ।

मैं...... ह्म्म्म ।

सिमरन...... देख बेतु ये सब अच्छी आदतें नहीं है। तू क्यों करता है ये सब ।

मैं..... दीदी वही तो मैं कह रहा हूँ अच्छी आदत नहीं है पर ये मेरी आदत थोड़े ही है न ।

सिमरन... फिर भी बेटू तू अपनी दीदी की बात नहीं मनेगा ।

मैं.... चलो ठीक है मैं नहीं करूँगा पर क्या कभी कभी?

सिमरन.... कभी भी नहीं , नहीं मतलब नहीं ।

मैं..... जो हुकुम मेरे आका नो मीन्स नो , पर यदि कभी बय चांस जरूरत पड़ी तो ।

सिमरन...... तो तू सब के लिए लेते आना हम सब भी कंपनी देंगे ।

मैं..... ठीक है अभी बता दो कितना लगने वाला है शाम को लेते आउन्गा ।

सिमरन..... रुक अभी बताती हु ।

हमारी कुछ देर यूँ ही बातें चलती रही वंहा से फिर माँ के पास गया कुछ देर उनके पास बैठने के बाद मैं चला फ्रेश होंने।

बाहुत दिन हो गए थे अपनी धूल से जमी किताबों को छुए तो आज सोचा क्यों न कुछ धूल साफ़ कर दी जाए । करीब 11बजे मैं अपने स्टडी रूम से बहार आया । हॉल में सुनैना बैठी थी और माँ से बातें कर रही थी।

मैं.... क्या चल रहा है आप दोनों में ।

सुनैना.... हमारी बातें छोड़, यंहा हूँ तो कंही ले जायेगा घूमने की नहीं ये बता ।

मैं.... ठीक है रेडी हो जा और दिया और दीदी को भी बोल दे । हम लोग पहले लंच करेंगे फिर वंहा से मूवी चलेंगे।

सुनैना.... तू मज़ाक तो नहीं कर रहा?

मैं..... हाँ , ना ले जाओ तो टाइम नहीं देते और बोलो चलने के लिए तो मज़ाक लगता है।

सुनैना.... ठीक है पर प्लान क्या है? प्लान तो बता कब निकलना है। ओए तू खो कंहा गया।

एक्चुअली जब सुनैना बोल रही थी तो मैं कुछ सोच रहा था...... १मिन रुक और चिल्लाते हुए...दीदि, दीदी ।

मेरी आवाज सुनकर दोनों सिमरन और दिया हॉल में पहुंचि ।

सिमरन.... क्या हुआ चिल्ला क्यों रहा है?

मैं.... सुनो आप सब का लंच आज बहार है आप सब मेरी कार से आ जाना मैं घर वाली कार ले के जा रहा हूँ और हाँ छोटी सोनल को भी ले लेना बहुत दिन हो गए मिले सोनल से हम लोग लंच के बाद मूवी भी चलेंगे।

सिमरन...... यूँ अचानक क्या सूझी जो तू ये लंच और मूवी का प्लान?

मैं...... सोचा सुनैना आयी है इसलिए ।

सिमरन.... तू सब जा मेरा मन नहीं है ।

दिया.... तो मैं भी नहीं जाउंगी ।

मैं.... क्या दीदी , नहीं चलना है?(बनावटी गुस्से से) ।

सिमरन..... ठीक है, पर तू जा कंहा रहा है ।

मैं.... मैं जा रहा हूँ कुछ और लोग को इनवाइट करना है तुम्हे फ़ोन कर के बता दूंगा किस रेस्टोरेंट में आना है आ जाना ।

सब फाइनल होने के बाद अब मैं घर से निकला और सीधे पहुंचा ऋषभ के घर चूँकि उसे आज बोला था कहीं नहीं जाने के लिए इसलिए मुझे पता था की ऋषभ मुझे घर पर ही मिलगा।

ऋषभ के घर पहुँच कर मैंने बेल बजायी, दरवाजा सैनी ने खोला ।

अंदर से आंटी की आवाज..... कौन है सैनी ।

सैनी.... कौन होगा तेरा बेटा घर पर है तो अपने निकम्मे दोस्तों को यंही बुला लिया है।

सैनी अभी भी दरवाजे पर खड़ी थी मैंने उसे "हट बे चुहिया" कह कर साइड कर दिया और हॉल में पहुँच गया। ऋषभ मुझे हॉल में ही मिल गया।

ऋषभ.... मैं तो तेरे ही फ़ोन का इंतज़ार कर रहा था ।

मैं..... वो सब छोड़ आज घर में सबको मूवी दिखाने का प्रोग्राम है तू 14 टिकट अर्रंगे कर ले । हैं तेरे पास काजल का नम्बर तो है न वो मुझे लिखा दे और सुन टिकट ले कर 2 बजे तक फ्री हो जाना मेरे कॉल आने पर बताये जगह पर आ जाना ।

ऋषभ..... मेरे बाप आदमी हूँ कोल्हू का बैल नहीं जो एक साथ इतने कम बता रहा है।

मैं.... तू न कामचोर हो गया है 1 ,2 काम क्या बता दिए तुझे लग रहा है की पहाड़ तोड़ने के बराबर है। बस जो बोला है वो कर ।

इतने में सैनी..... माँ देखो ये ऋषभ किसी लड़की का नम्बर राहुल को दे रहा है।

ऋषभ सैनी से..... तू अपना चोंच बंद नहीं रख साकती । और तू ये हमारी बात क्यों सुन रही है?

जब्तक आपसी विवाद चल रहा था सैनी और ऋषभ में तबतक आंटी भी पहुँच गायी ।

आंटी.... लल्ला (ऋषभ का नाम) ये क्या है तू ये सब क्या कर रहा है?

मैं..... क्या आंटी आप इस चुहिया की बात का ध्यान देते है मैं अपनी क्लासमेट काजल का नम्बर ले रहा था उसे लंच पर इनवाइट करने के लिये।

सैनी..... झूठ, झूठ माँ दोनों मिलकर उल्लू बना रहे है, ये दोनों कुछ तो खिचड़ी पका रहे है।

रीसभ..... माँ इसकी तो आदत है लड़ने भिड़ने की ऐसा कुछ भी नहीं है ।

आंटी.... तू सच कह रहा है न बेटा ।

क्या अजीब मुसीबत है मैं यंहा मेगा प्लान कर रहा हूँ और ये कामिनि आग लगाने में लगी है इसको तो मौका आने पर बतौँगा। खैर मामला अभी क्लोज करना होगा।

मैं.... आंटी सुनिये मेरे साथ सिमरन , दिया और उनकी भी कुछ फ्रेंड्स है कहो तो बात करवा दुं।

सैनी..... माँ ये झूठ बोल रहा है।

आंटी..... तू ज्यादा दिमाग मत लगा तुझे तो हमेशा से राहुल गलत लगता है। तुझे बहुत सनका है तो तू भी चली जा ।

अब ये क्या नाटक है खैर चलो ये भी अच्छा ही है जितने लोग होंगे उतना कामयाब प्लान ।

मैं..... तो ठीक है तय हो गया तू टिकट लेने के बाद सैन्य को पिक करके मेरे बातये रेस्टूरेंट में आ जाना ।

अब दिमाग ठनका ऋषभ का रेस्टोरेंट का नाम सुनकर , सब लोग होने की वजह से वो चुप रहा बस सही मौके की तलाश में ।

मैं फिर ऋषभ को सब समझा कर जैसे ही बहार आया मेरे पीछे पीछे ऋषभ भी बाहर आ गया और मुझे टोकते हुए.....

ऋषभ.... राहुल मुझे तुझ से कुछ बात करनी है ।

मैं..... जल्दी बता टाइम नहीं है मेरे पास ।

ऋषभ.... तू सबको तमन्ना रेस्टुरेंट में बुला रहा है न?

मैं हँसते हुए......... ज्यादा दिमाग मत लगा जैसा बोला है वैसा कर ।

ऋषभ.... मैं तो दिमाग नहीं लगाउंगा पर तेरे दिमाग में चल क्या रहा है?

मैं..... मिशन मन की शंति, अब तू कुछ मत पूछ बस जैसा कहा है वैसा कर ।

आपास में सहमति होने के बाद मैं निकला वंहा से और पहले कॉल लगाया कुणाल को....

कुणाल..... कौन बोल रहा है?

मैं.... तेरा बाप राहुल बोल रहा हु,नंबर भी नहीं पहचाना।

कुणाल.... मेरे बाप, पिता जी , ये तू अननोन नंबर से कॉल करेगा तो कैसे पहचानु ।

ओह शिट, ये काम भी रह गया, ये परिधि भी न सिम तोड़ने की क्या जरूरत थी, खैर इसे मैं बाद में देखता हू ।

मैं.... सुन भाई तू अपनी वाली को फ़ोन कर दे लंच और मूवी का प्लान है ।

कुणाल.... पर ये अचनाक ।

मैं..... सब अचानक ही होता है तू उसको बोल मैं उसके घर के पास कार लेकर खड़ा हू , आ जाए ।

कुणाल..... ठीक है भाई , मैं भी तैयार हूँ मुझे भी पिक कर लेना ।

मैं..... सुन बे ओए, तू तैयार है अच्छी बात है पर अभी वो मेरे साथ कंही और जाएगी, और जब मैं फ़ोन करूँगा तब तू मेरे बताये जगह पर आ जाना ।

कुणाल..... भाई, जान से मार दे लेकिन ऐसी बातें क्यों कर रहा है? भाई वो मेरी गर्लफ्रैंड है। तेरी भाभी है वो ।

मैं.... सुन बे छिछोरे जितना दिमाग है उतना ही लगा ज्यादा इस्तमाल मत कर और हाँ मैं जा रहा हूँ उसके घर के पास कम हो जानी चाहिए नहीं तो तूने जो चड्ढी की ऐड की है उसे मैं तेरे घर मैं बता ढुंगा ।

अब बोले तो क्या बोले सांप-छुछन्दर वाली कहावत है न उगलते बने न निगलते बने.....

बड़ा मायुस होकर..... काम हो जाएग, पर ये तू गलत कर रहा है। काम तो तेरा कर देता हूँ पर आज के बाद तुझे मैं अपनी जिंदगी से डिलीट करता हू ।

बक्त ख़तम और काम सुरू, अभी 12 बज रहे है मतलब मेरे पास बस 1 : 30 घंटे है और अब मैं सब अकेला नहीं कर सकता । यही सोचते हुए मैंने अब असीस को फ़ोन लगया। हम लोगों के बीच ये बंदा मैनेजिंग गुरु के नाम से फेमस है। कोई ऐसा लफरे वाला काम नहीं जो ये सोल्वे नहीं कर सकता।

आसीस..... हेललो ।

मैं..... राहुल बोल रहा हू ।

आसीस.... हाँ बोल भाई ।

मैं.... ध्यान से सुन, फिर मैंने उसे सारा प्लान बताया ।

आसीस.... मेरे लिए क्या आदेश है ।

मैं..... 50% मैंने कर दिया है, आगे अपने हिसाब से एडजस्ट कर के तमन्ना मैं टेबल बुक कर देना और हाँ सिंगल टेबल पर सब अरेंज होना चाहिए वो भी बिलकुल मिडिल में ।

आसीस.... मैं कोसिस करता हूँ, अब तू सब मुझ पर छोड़ दे तू अब टेंशन फ्री हो जा ।

मैं.... और हाँ भाई तू कुणाल को पिक कर लेना उसे मेरी किसी बात का सदमा लगा हुआ है अभी तो वो मेरा फ़ोन भी पिक नहीं करेंगा। और हाँ तू कुछ मत बताना प्लान के बारे में।

आसीस.... ठीक है तू जा मैं मैनेज कर लुंगा ।

अब मैं चला कुणाल की गर्लफ्रैंड अनन्या को पीक करने। जब मैं पहुंचा तो अनन्या पहले से मेरा इंतज़ार कर रही थी। पता नहीं कैसे मनाया कुणाल ने और कैसे मन गायी, मैं होता तो अबतक घर जाकर मार के आता ऐसा बोलने वाले को। मुझे ये सोच कर हंसी आ गायी।

खैर मैंने उसे पिक किया और रस्ते से काजल को फ़ोन लगया। काजल से मेरी बात हुई तो मैंने बता दिया की अनन्या आ रही है उसके घर (बोथ बेस्ट फ्रेंड)। दोनों तैयार होकर रहे फिर लंच और मूवी का प्लान बताया।

काजल को थोड़ा अजीब लगा मगर मान गायी। इस खेल में काजल का भी अपना ही रोले था क्योंकि ये हमारे ऐश आई की बेटी थी।

अब जब सब मैनेज हुआ तो अब मैं थोडा रिलैक्स फील करने लागा । अब मैंने रूही को फ़ोन लगया। रूही से मेरी बात हुए वो भी तैयार थी पर किरण भी उसके साथ आना चाहती थी। मैं समझ गया किरण क्यों आना चाहती है इसलिए मैंने भी इस बात पर तूल नहीं दिया और हाँ बोल दिया।

सब करते करते अब 12 : 30 हो चुके थे मैं रूही और किरण को पिक उप,करने चला गया। प्लान अपने फाइनल स्टेज में था और मैं परिधि के साथ अपने रिलेशन को भी आगे बढ़ने के फाइनल प्रोसेस मैं था ।

मै अपने काम को देख कर एक रोमांच मैं था पर पता नहीं कहीं न कहीं कुछ खाली खाली सा आभास हो रहा था । कुछ ऐसा जो जरूरी न हो कर भी जरूरी लग रही थी पर क्या ये पता नाहीन। खैर मैंने अब कंसन्ट्रेट किया रूही को पिक अप करने की।

जैसे जैसे मैं रूही की ओर बढ़ रहा था अंदर ही अंदर एक उलझन खाये जा रही थी। ऐसा लग रहा था की मेरी जिंदगी की एक अहम कदम और मैंने ये क्या कर दिया।

कहिं मैं अपनी ही फीलिंग के साथ मज़ाक तो नहीं कर रहा ।

आज जो भी मेरी और रूही के बीच होना है उसका जिम्मेदार भी तो मैं ही हू । यदि रूही को भी मुझसे प्यार हुआ तो , मैंने तो खुद ही परिधि को चुना बावजूद इसके कि मेरी चाहत रही है। मुझे ये क्या हो गया मैं दोनों को कैसे पसंद कर सकता हू ।

अब जो भी हो मैं सच का रास्ता चुना पसंद करूंग। अब मैं अपनी किस्मत का फैसला भगवन पर छोरता हू । आज मेरे और रूही के बीच जो भी होगा वो मुझे मंजूर होगा फिर चाहे मिझे परिधि को ही क्यों न भूलना पडे.......

कहानी जारी रहेगी......
 
अपडेट - 44

अब जो भी हो मैं सच का रास्ता चुनना पसंद करूंग। अब मैं अपनी किस्मत का फैसला भगवन पर छोड़ता हूँ । आज मेरे और रूही के बीच जो भी होगा वो मुझे मंजूर होगा फिर चाहे मुझे परिधि को ही क्यों न भूलना पड़े.....

लेकिन भूलना वो भी.........

सिर्फ भूलने के ख्याल से मेरा रोम-रोम कांप गया। आँखों में आँसू छलक आए । मैं अपनी भावनाओं को काबू में नहीं कर पाया, कार का ब्रेक कब लगा पता नही । मन विचलित हो उठा अब मैं परिधि से बात किये नहीं रह पाया और उस से बात करने के ख्याल से जैसे ही फ़ोन निकला की फ़ोन की घंटी बज गई.........ये कॉल परिधि की थी।

मैं खुद को कण्ट्रोल करते हुए.... बोलिये आप ने तो कहा...

इतना कहने के बाद मेरे अल्फाज़ मेरे जुबान से बाहर ही नही निकल, मेरा दिल भर आया और आँखों से आँसू गिरने लगे मैंने फ़ोन कट कर दिया ।

5 मिनट तक व लगातार फ़ोन करती रही और मैं फ़ोन कट करता रहा । मैंने अपने आप को कुछ कंट्रोल करके वापस फ़ोन लगया।

परिधि..... चिंता से, सब ठीक है न?

परिधि की आवाज़ सुनी और मैं अपने आप को रोक नहीं पाया रोने से ।

परिधि....... बताते क्यों नहीं , कुछ तो बोलो ( वो भी रो रही थी)

मैने सिसकते हुए कहा.... मैं ठीक हू...

इतना ही बोल पाया मैं इस से ज्यादा बोल न सका । बस फ़ोन पर एक दुसरे को रोते हुए महसूस कर रहे थे ।

बहुत हिम्मत जुटाने के बाद बोला..... चिंता की बात नहीं है मैं खुद तुम्हे फ़ोन करते हू ।

मै अपनी भावनाओ को काबू नहीं कर पा रहा था । सिर्फ उसे भूलने के ख्याल से ही मैं अपनी जिंदगी हार चुका त। हाँ! ज़िंदगी ।

मै अंदर से टूट चूका था और अब पूरा फैसला रूही का था । 20 मिनट तक खुद को किसी तरह नार्मल कर के रूही के पास पहुंचा । मैंने दोनों को पिक किया और निकल गया तमन्ना रेस्टूरेंट। रस्ते भर मेरी किसी से कोई बात नहीं हुए हम चुपचाप पहुंचे तमन्ना रेस्टूरेंट।

रेस्टूरेंट मैं जब पहुंचा तो वंहा के कुछ स्टाफ ने मुझे देख, घूरा और लग गए अपने काम पर। ओनर अभी नहीं था रेस्टूरेंट में ।

खैर मैंने देखा की उनके कुछ स्टाफ मिडिल की तीन राउंड टेबल साइड कर रहे थे मुझे लग गया कि असीस ने अपना काम कर दिया है, पर कुछ खास खुशी नहीं हो रही थी।

हम तीनो साइड के एक टेबल पर बैठे और कुछ स्नैक्स का आर्डर दिया। तीनो शांत बैठे थे । चूँकि ये मेरी इम्तिहान की घड़ी थी इसलिए मैंने ही चुप्पी तोड़ते हुए बोला...

"परिधि सॉरी रूही हमरे ग्राउंड की बात कुछ अधूरी थी"

तभी बीच में किरण बोल पड़ी.... बताओ बताओ मैं बेचैन हो रही हूँ जानने के लिए कि तुम लोगो के बीच क्या सीन चल रहा है?

मैं..... किरण प्लीज बुरा मत मानिए पर क्या आप यंहा केवल दरसक बन के रह सकती है क्योकि.....

मैन चुप हो गया कहना तो चाह रहा था की, क्योंकि जैसा आप सोचती है वैसा बिलकुल भी नहीं पर यदि रूही ने हाँ कर दिया तो । इसलिए मैं चुप हो गया।

मै अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए.....

"हाँ तुम ग्राउंड पर कुछ बोल रही थी"

रुही..... (बहुत संजीदा होते हुए) मैं उस दिन के लिए तुमसे मांफी चाहती हूं। मैं कुछ ज्यादा ही बोल गयी मुझे इस बात की जरा भी अंदाजा नहीं था की तुम्हे मेरी बातों का इतना चोट पहुंचे गी ।

एक लम्बी सी साँस खींचते हुए....

"जब तुम बिना बताए गायब थे तब अलीशा मुझ से मिलने आई , उसकी हालत के बारे में मैं बयां नहीं कर सकती की कैसी थी, उसकी बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर किया की ये मैंने क्या कर दिया"?

फिर एक गहरी सांस लेते हुए.....

"उस दिन तुम्हे वो कॉल मैंने ही किया था पर सर्मिंदगी इतनी महसूस हो रही थी की मेरे शब्द मेरे जुबान में ही कैद होकर रह गै। पर जब तुम ने मुझे पहचान लिया तो पहली बार ये अहसास हुआ की तुम मुझसे कितना.....

अब पूरी शांति थी। मुझे रूही की बातें एक अँधेरे की ओर खिंच रही थी अब ये चिंता साफ घेरने लगी थी की कंही....... जो भी हो लेकिन ये मैं ही था जो इन सब का रचयता था इसलिए अब तो पीछे हटने की कोई सवाल ही नहीं था, बस एक म्यूसि, की ये क्या हो गया?

मैं..... पहले तो मैं मांफी चाहूंगा कि मेरी वजह से तुम्हे परेशानी उठानी पड़ी । अब जब तुम सब जान चुकी हो और देख चुकी हो तो फैसला मैं तुम पर छोरता हू । पर एक बात मैं बोलना चाहूंगा कि तुम्हारा जो भी फैसला होगा वो मुझे दिल से स्वीकार होगा।

मैन कुछ टाइम लेते हुए.....

"मैं नहीं चाहता कि तुम मेरे किसी बात या हरकत के दबाव में कुछ बोलो जो भी बोलना है खुल कर बोलना। इस बात का विस्वास मैं तुम्हे दिलाता हूँ कि न मुझसे या मेरे किसी भी हरकत तुम्हे कभी शर्मिंदगी महसूस होगी और न ही कोई परेसनी"।

रुही....... "मुझे बहुत ख़ुशी है तुम्हारी इस तरह की सकारात्मक बातों से । मैं भी यही चिंताओं से घिरी थी मैं क्या बोलूं"

"पिछले कुछ दिनों में मैं भी कम परेशान नहीं रही हू । तुम्हारी जिन हरकतों से मुझे पहले गुस्सा आता था जब तुम नहीं थे तो उसी पर प्यार आने लागा"

"एक अजीब सी बैचैनी हरदम रहती कि तुम मेरे पास क्यों नहीं हो। मेरी सोयी हुए जिज्ञासा कब जग गयी पता नहीं चला । मैं ये तो नहीं कह सकती की मुझे तुम से प्यार है पर तुम मेरे लिए बहुत प्यारे हो"।

"जब ग्राउंड पर तुम ने अनदेखा किया तो मुझे बहुत बुरा लगा पता नहीं मेरे आंसू कब मेरे आँखों में आ गए, तुम से लिपट के रोने में मुझे एक अलग ही सुकून मिला, इतने लोग थे वहाँ पर मुझे सिर्फ तुम ही नजर आए"।

"मैं ये मानती हूँ कि दिल के किसी कोने में तुम्हारे लिए बेशुमार प्यार है। मैं नहीं इंकार कर सकती इस से कि मैं तुम से प्यार नहीं करती हू"

"पर और भी रणजो-गम है मोहब्बत के सिवा। हम दोस्त रहे तो ही अच्छा है। अब जब सब तुम्हे बता दिया की मेरे दिल में क्या है तो तुम्हे ये भी जानने का पूरा हक़ है की क्यों मैं इस रिलेशनशिप को नहीं बढ़ाना चाहती"?

मैं.... "ये मैं नहीं पूछना चाहता की क्यों तुम इस रिश्ते को आगे बढ़ा नहीं सकती पर क्या तुम मुझे भूला पाओगी वो भी तब जब मैं तुमसे रोज-रोज मिलुंगा"?

रुही..... "तुम कारन जानते तो ये सवाल न पूछते खैर अच्छा लगा कि तुमने इस बात पर जोर नहीं दिया शायद मेरा दिल भी नहीं चाहता था की मैं ये सब बातें करू .... रहा सवाल भूलने का तो कौन कहता है की मैं तुम्हे भूल जाउंगी"

"तुम तो मेरे प्यारे एहसास हो इसे तो मैं खुद भूलने नहीं चाहूँगी। तुम मुझसे न मिलो ऐसी भी खाइऐश नहीं अच्छा लगता है जब तुम पास होते हो"।

"रही बात फीलिंग की तो तुम उसकी चिंता मत करो जब तुम्हरा नजरिया बदलेगा मेरे प्रति तो मुझे भी कोई प्यार वाली फीलिंग नहीं रहेगी क्योंकि मैं रिश्तों में मिलावट नहीं करती पर्सन तो तुम्हारे लिए हू"।

"मैंनेअपनी बात पूरी कर ली। कोई मिलावट कोई झूठ नहीं है मेरे बात में । बस चिंता तो तुम्हारी है कि क्या तुम इस को एक्सेप्ट कर के एक नयी सुरुआत कर सकते हो की हम अच्छे दोस्त रहेंगे"।

मैं..... "जैसा की मैंने पहले ही तुमसे वादा कर दिया है तो मैं नहीं मुकर सकता , तुम ने अपनी दिल की बात बताई अच्छा लगा"।

"अब हम सिर्फ अच्छे दोस्त है। मैं न तो कभी दुबारा इस विषय पर चर्चा करूँगा न कभी ऐसी हरकत जो ये अहसास कराये कि मैं तुम्हे चाहता हू"।

"So friends.... Yes of course "

माहॉल बहुत सीरियस हो चला था तो अब किरण बोली....

"Knock knock , may I have permission to say something"?

हम दोनों का ध्यान किरण की ओर गया और दोनों ही हँसने लगे और रूही बोली...

"Yes mam please"

किरण..... यार मैं भी कान्हा तुम दोनों दुखियों के बीच फांसी। चलो अब जब सारी बातें क्लियर हो गयी है और यदि सोच सकारात्मक है राहुल की , तो जल्द से जल्द एक गर्लफ्रैंड बनाओ तभी मुझे लगेगा कि तुम सिर्फ दोस्त हो।

रुही....पहली बार तू कुछ परफेक्ट बोली है।

मैं.... तुम लोग भी क्या टॉपिक लेकर बैठ गायी। मैं कमिट तो नहीं कर सकता पर ऐसा कभी हुआ तो सबसे पहले तुम दोनों से मिलवाऊंगा ।

माहॉल थोड़ा हल्का हुआ फिर रम गए हम लोग अपनी हसी-मज़ाक में दिल का बोझ उतार गया। अब मैंने भी राहत की सांस ली।

लेकिन मुझे अभी राहत कंहा मिलनेवाली थी अब जब सोचने की शक्ति जागृत हुए बिलकुल पागल हो उठा....

कहानी जारी रहेगी.....
 
thanks for your support......

love you all.... for one... lack views....

abhi.... kahani... start bhi.... nhi... hui.

shukriya.... or update kl... milegi......//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f618.svg
 
अपडेट - 45

लेकिन मुझे अभी राहत कंहा मिलनेवाली थी अब जब सोचने की शक्ति जागृत हुए बिलकुल पागल हो उठा....

यार अब सब ओके है पर ये क्या मुझे अब जल्दी करना होगा। मैं रूही और किरण ओनर सम्बोधित करते हुए....

"तुम दोनों बातें करो मैं अभी आया"

रूही... पर ये अचानक हुआ क्या?

मैं.... कुछ नहीं हमारे इस नई सुरुवात पर कुछ लोग और भी शामिल हो रहे है, मैं अभी 10 मि मैं लौटा तबतक तुमलोग कुछ आर्डर कर दो ।

अब मैंने थोड़ा माहौल का जायजा लिया बिलकुल मिडिल में 20 लोगों के लिए चेयर अरेंज कर दी गयी थी और साथ में कुछ लोग मुझ पर नजर भी रखे हुए थे ।

मै बहार आया काजल को फ़ोन किया। उस से बात होने के बाद मैं निकल गया काजल और अनन्या को लेने ।

फिर प्लान के मुताबिक पहले असीस को फ़ोन किया...... टाइम हो गया है तू कुणाल को पिक कर लेना, असीस के बाद घर और फिर ऋषभ को फ़ोन लगया। सबको 10 मिनट में इकठ्ठा होने को कहा । काजल और अनन्या को मैंने काजल के घर से पिक किया और पहुँच गया तमन्ना रेस्टूरेंट।

रेस्टूरेंट में काजल और अनन्या को रूही और किरण से इंट्रोडस करवाया फिर सब को लेकर मिडिल टेबल पर बैठ गया। मुझे बैठ ता देख 1 वेटर "सर ये बूकेड है"

मैंने कहा "हमने ही कारवाई है" देककर चला गया।

मै अब बहार निकला सबको रिसीव करने। सबसे पहले एंट्री हुए मेरे फैमिली ग्रुप की सबको अंदर किरण के पास बैठने को बोला । सिमरन किरण का नाम सुनकर खुश हो गायी। फिर एंट्री हुए असिस, कुणाल, और साथ में थे हमारे अड्डे के दो लड़के राजन भाई और नीलेश भाई, दोनों हमसे 2 साल सीनियर थे पर मिलते मिलते पहचान हो गयी थी मैंने असीस को रोका और बांकियों ओनर अंदर भेजा।

मै असीस से.... तू इन दोनों को क्यों ले आया ।

आसीस.... भाई भरोसा रख बहुत अच्छे है कोई प्रॉब्लम नहीं होगी यंहा कम से कम 6 लोग चाहिए थे मैनेज करने के लिये।

मैं... चल कोई बात नहीं बस देखना गड़बड़ न हो और ये कुणाल कुछ बोल भी रहा था ।

आसीस..... पन्गा क्या किया है, ल*डू को घर से घीच कर लया हू । रूम बंद करके पड़ा था पुरे रस्ते खोया रहा है।

मैं...... चल कोई बात नही, कुछ देर बाद इसको भी शांत कर देंगे ।

जब्तक हम बात कर रहे थे तबतक ऋषभ और सैनी की भी एंट्री हुए। उनके साथ हम भी अंदर पहुंचे अंदर बहुत ही फ्रेंडली माहौल था । लेडीज़ एक साथ थी और एक तरफ कुणाल चुपचाप बैठा था ऋषभ के साथ मैं और असीसभी अंदर पहुंचे।

सायद सैनी ने दूसरे लड़कियों को नहीं देखा नजर हम चरों पर थी, वो अचानक से बोल पड़ी....

"तो पूरी छुछन्दरों की टोली मौजूद है"

इतना सुनते ही सब सन्न हो गए की ये सबके सामने कैसे बोल रही है जंहा सब सन्न थे वही दिया को बर्दास्त नहीं हुए ये बात और बोल पाडी.....

"भाइया ये चुहिया कौन है"

इतना सुनते ही हम चरों हंस पड़े क्योंकि मैं भी उसे चुहिया ही बुलाता था और अचानक से दिया भी बोल पाडी। मुझे दिल ही दिल में बहुत ख़ुशी हुए लकिन मैंने दिया को डांटते हुए....

"तूझे अकाल नहीं है क्या अपने सीनियर्स से कैसे बात करते है"

.

अब जब नजर गयी सब पर उसकी और उसने अपनी क्लासमेट काजल और अनन्या कोदेखा तो थोड़ी झेंप गायी।

हम सब अपनी अपनी जगह ले लिए अबतक राजन और नीलेश भी आ गए थे । लेकिन जिस तरह से किरण और सिमरन उन दोनों से बात कर रही थी मुझे और मेरे मित्रों को झटका लगा क्योंकि उनको बात करता देख लग नहीं रहा था की पहली मुलाकात है।

अब हमें लगा 440 वोल्ट का झटका जब हमें पता चला की दोनों सिमरन और किरण के ही क्लासमेट है। मैं असीस को देख गुर्राया उसने शांत रहने का इशारा किया।

अब हमरी पार्टी शुरू हो चुकी थी हंसी मज़ाक और छोटे मोटे नोक झोंक से । एक बार फिर लोग हंस हंस के लोट पोट हो रहे थे मेरी और सैनी की पहली मुलाकात जानकार। अबतक तमन्ना का ओनर भी आ चूका था ।

पार्टी जब एन्ड पर थी तो मैंने एक वेटर को खींच कर मरा। सब देख कर दांग रह गए । चूँकि वंहा कुछ होने वाला है ये केवल हम चार मित्रों को ही पता था बांकी तो सब अंजान थे सारी बातो से ।

चुँकि खतरे का अंदेशा उन लोगों को भी था इसलिये देखते देखते उनके 10 लोग जमा हो चुके थे । ओनर ने आते ही पूछ..... तुम ने इसे क्यों मारा, दादागीरी है क्या बे ।

सबको आते देख मैंने पहले ही इशारा कर दिया असीस को। असीस ने काजल को पुलिस बुलाने बोल दिया उसने भी जब इतने लोगों ओनर देखा तो अपने पापा को फ़ोन कर दी और इधर ।

साजन भाई... ओनर से , देखिये थोड़ा तमीज से बात कीजिये ये बे,बे क्या लगा रखा है पहले जान तो लीजिए की मामला क्या है?

ओनर.... तुम सब अभी रुक मैं तुम लोगों की होश्यारी तेरे ****** मैं गुज़रता हू ।
 
अपडेट - 46

निलेश भाई.... तेरी खुश किस्मती की यंहा अभी मैं अपने फ्रेंड्स के साथ हूँ अभी अगर ये न होती तो तुम्हारे बदन से तुम्हारी चमड़ी अलग कर देता।

जब्तक इतनी बातें हुए तबतक नजदीकी थाने के इंचार्ज (ईसप) और उसके साथ ५,६ हवलदार भी पहुँच गए ।

पुलिस को देखते ही सबके चेहरे से हवाइयां उड़ने लगी उनके ही नहीं हमारे तरफ से भी। तभी इंस्पेक्टर ।

इंप..... काजल बेटी क्या बात है?

काजल.... अंकल पता नहीं पर देखो न हम सब फ्रेंड्स एंड फैमिली लंच करने आये थे और ये रेस्टूरेंट वाला बहुत बद्तमीजी कर रहा है।

इंतना सुना और आ गया इंस्पेक्टर अपने ताऊ मैं गरम के बोला....

"यहाँ का मैनेजर कौन है"

ओनर... मै हूँ ।

इंस्पेक्टर...तो तू इस रेस्टूरेंट का मैनेजर है ।

अब जब मामला इंस्पेक्टर ने संभाला तो मैंने मौका देख कर असीस को इशारा कर दिया, मेरा इशारा समझ कर तबतक उसने मीडिया को भी इन्फॉर्म कर दिया।।और इधर ।

ओनर.. नहीं मैं मैनेजर नहीं यंहा का ओनर हू ।

इंस्पेक्टर.... गरजते हुए, तू ओनर है तो बद्तमीजी करेंगा। अपने गुंडे लाकर इन्हें डरायेगा । देख इन लड़को को सब स्टूडेंट लगते है अगर यंहा ये न होती तो अबतक तो हमलोग जन आक्रोश का केस नोट कर रहे होते, बोलता क्यों नहीं बे ।

ओनर... नहीं सर ऐसी बात नहीं हैं वो कल ।

इंसपेक्टर.... ये कल परसो पर मत जा पहले हुआ क्या ये बाता ?

लो इतनी बात हुए तो अबतक मीडिया भी आ गायी, मीडिया को देख ।

"काजल बेटा तुमलोग जाओ बस दो लोग रुको"

फिर मैंने भी सहमति देकर ऋषभ को बोला ।

"ऋषभ तू सबको लेकर मल्टीप्लेक्स पहुच मैं और असीस आते है"

वैसे तो जाने का किसी का मन नहीं था लेकिन जब पुलिस थी तो उन्हें अब कोई डर नहीं था और ये मेरे लिए भी अच्छा था क्योंकि अगर बात फ़्लैश बैक मैं जाती तो सब भेद खुल जाता ।

सभी चल दिए मल्टीप्लेक्स की ओर और इधर मीडिया अपने काम में और इंसपेक्टर ।

इंसपेक्टर..... हाँ तो बता की क्या हुआ जो गुंडागर्दी पर उतर आए ।

ओनर.. . इसने मेरे स्टाफ को थप्पड़ मारा ।

इंस्पेक्टर.... तुझे पता है क्यों थप्पड़ मारा ?

ओनर... नही ।

इंस्पेक्टर.... तूने पूछा था क्या कारण है?

ओनर... नहीं ।

इंस्पेक्टर तो माँ********* तू मामला सुलझा रहा था की यंहा लेडिस के बिच मैं गुंडागर्दी दिखा रहा था ।

ओनर... वो सर, ये लोग ।

इंसपेक्टर.... चुप वे , हाँ तो कौन वीर है जो अपने फ्रेंड और फैमिली के साथ होते हुए भी थपड मारा है, इतना दिमाग नहीं की लेडीज रहे तो थोड़ा गम सह लेना चाहिए और बाद में जो कुछ भी गलत हो तो हमें इन्फॉर्म करना चहिये। बता कौन है तुम दोनों में से और क्यों किया?

मैं... सर मैंने किया ।

इंसपेक्टर ... नाम बता और काजल को कैसे जनता है ?

मैं.... सर मैं राहुल है और दोनों साथ मैं पढ़ते है ।

इंसपेक्टर, सुर बदलते हुए.... तुम ही राहुल हो जो चंडीगढ़ का नाम ऊँचा किया था 10 थ बोर्ड में राहुल मेरा बेटा भी तुम्हारे ही स्कूल मैं पढ़ा है, तुम्हारा तो वो फैन है, कभी आओ हमारे घर भी।

मैने नजरों से इशारा कर बताया की यंहा मीडिया है ।

इंस्पेक्टर... हाँ तो राहुल बताया नहीं क्यों मारा ।

मैं... सर मैंने जिसे मारा वो बड़ी गन्दी नजरों से घूर रहा था मेरे फ्रेंड्स को , फैमिली थी सर मैं शांत रहा, दो बार समझाया भी फिर भी वही हर्कतें। अब आप ही बताइए की मैं क्या करता?

इंस्पेक्टर.... कौन है बे , साला फैमिली के साथ तो ये रेस्टूरेंट रह ही नहीं गया आने के लायक, कौन है सामने क्यों नहीं आता ।

तभी वही वेटर सामने आया डरा और सहमा सा ।

इंस्पेक्टर...... चल थाने वंहा तू आँख दिखाना हम सब को और तुम (ओनर ओनर इंडीकेट करके) चल तू भी मामला बिना जाने गुंडागर्दी करता है।

अब आया पसीना सारे स्टाफ और कोओनर फिर बिच मैं बोलते हुए....

"सर रहने दीजिये इस वेटर को, क्योंकि ये अपने मालिक के सह पर ही इतनी हिम्मत दिखा रहा था वरना इनकी क्या औकात की मना करने के बावजूद ये वही गलती करे"।

इंसपेक्टर..... हाँ ये सही कहा चलो रे ले कर चलो इनके ओनर को और तुम दोनों भी आओ FIR रजिस्टर्ड करनी हैं इनके अगैंस्ट।

ओनर.... सर पहले ही बहुत तमासा हो चूका है मीडिया भी बुलवा ली है पर मुझे अरेस्ट करना ये सही नहीं है। आप समझ रहे है ना ।

इंस्पेक्टर. ठीक है आप इन लोगो से सब के सामने मांफी मांग लो, मैं केस अभी रहा दफा करवाया हू ।

पता नहीं उन दोनों के बीच मामला कितने मैं सेटल हुआ हो पर मुझे क्या करना था मुझे तो इस बात की ख़ुशी थी की ये कमीना मांफी मांगने वाला है। अब इंस्पेक्टर ने हम लोगो को समझाया की FIR न रजिस्टर करे वो ओनर मांफी मांग रहा है और इस बात से हमें भी कोई ऐतराज़ नहीं थी।।

ओनर.... "मैं बहुत शर्मिंदा हूँ मुझे मांफ कर दो"
 
अपडेट - 47

मैं. .. सर जी क्या कहना चाह रहे है समझ में नहीं आया ।

ओनर.... थोड़ा ज़ोर से मैं मांफी चाहता हूँ जो भी यंहा हुआ। प्लीज मुझे मांफ करो, और अपने स्टाफ को बोलै की सर से बिल मत ले ।

मीडिया वाले माफी नामा सुनकर जा चुके थे और इंस्पेक्टर साहब हमें भी अब जाने को बोल रहे थे लेकिन मैं 1 मिन बोलकर वापस आया और ओनर से....

"बड़ी जल्दी मांफी मांग लिए ख़ैर", फिर मैंने बिल पूछा और उनको पूरा पैसा टिप के साथ उस ओनर को दिया और "तु मालिक है न तुझे तो नौकरों से जायदा देना पड़ेगा इसलिये 1000₹ टिप तेरे लिये"।

ओनर ने बहुत गंदे से घूरा जैसे निचे से उसकी चड्ढी खींच दी हो और ये एक्सप्रेशन मेरे और असीस के लिए बहुत आनंदमय था दोनों देखते ही हंस पड़े ।

खैर प्लान १०० नहीं न सही पर उस से कम भी नहीं सक्सेस हुआ था । हमारा प्लान ही यही था की बहुत सारे लोग और इस रेस्टूरेंट के ओनर की बेज्जती।

बहुत ही सुकून मिला, ऐसा लगा की मैंने अपने लिए कुछ किया। हम दोनों चल दिए अब मल्टीप्लेक्स की ओर । सबको पिक्। दिखाई और लौटे अपने अपने घर ।

मीडिया कवरेज भी लगातार तमन्ना रेस्टूरेंट की न्यूज़ फ़्लैश किये थे जो हम अपने अपने घर की टीवी पर इंजॉय कर रहे थे।



आज का दिन मेरे लिए बहुत ही अच्छा रहा जंहा एक ओर रूही ने मेरी जिंदगी मुझे वापस लौटा दी वही मैंने अपने दोस्त के बेज्जती का बदला ले लिया। पर प्यार तो अभी भी अधूरा था ।

अब मुझे क्या करना चहिये, फ़ोन पर बात करू , मैसेज करून नही, हाँ ये ठीक रहेग। यदि उसकी चाहत भी उतनी ही है जितनी मेरी तो कल मैं उसे अपने प्यार का इज़हार कर दूंग



मैन एक हसीं प्यार के अहसास के साथ अपने ही ख्याल मैं डूब गया। कल मुझे मेरा प्यार मिलने वाला है। अह्हह्ह्ह्ह! अजब सी धुन साँसों मैं बस गयी थी।

मेरा रोम-रोम एक अलग ही सुख की अनुभूति में डूबा चला जा रहा त। कल के ख्याल से ही एक गुदगुदी पुरे शारीर मैं दौर रही थी। आज रात मुझपर बहुत भारी पड़ने वाली थी क्योंकि परिधि ही परिधि मेरे ख्याल में थी....

कहानी जारी रहेगी....
 
शुक्रिया मित्रो आपने इस कहानी को इतनी सफलता दी....

हिंदी फ्रंट में अपडेट देना बहुत कठिन है मित्रो....

और निसाद भाई का बहुत बहुत शुक्रिया जो कहानी को इतना आगे ले गए...

अभी मैंने नई कहानी लिखना शुरू की है गॉसिप पर धड़कन...

आप लोग चाहे तो हिंदी फ्रंट में उसे डाल सकते है...

शुरुआत तो मेरी यही से हुई थी...

बहुत खुश हूं वापस आ कर... मिस यू भाई लोग...

चलो बाई गुड़ नाईट... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f44c.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f44c.svg
 
और हाँ इस कहानी को भी मैं ही खत्म करूँगा...

निसाद तो भाग गए उन्हें लगा बहुत आसान काम है...

अंग्रेजी से हिन्दी फ्रंट में लिखना...

लेकिन चिंता के दिन गए दोस्तों...

" I am Back "
 
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