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आज न दिन रहेगा, न रात होगी।
न जाने फिर कब आपसे बात होगी।
जितना होगा, हो सकेगा, मुलाकात होगी,
सिर्फ और सिर्फ यहॉ चुदाई की बात होगी।
बहुत खूबसूरत लगता है जब आप सभी लेखकों की कहानी पढ़ता हूं तो, आप लोगो की प्रतिभा , आपके लेखनी में कूट कूट के भरी पड़ी है, ऐसे ही आप लोग लिखते रहे और दूसरों को भी प्रेरित करते रहे।
आशा ही नही पूरा विश्वास है की आप सभी अच्छे, सकुशल, मंगलमय कामनाओं सहित खुश होंगे।
जब जब इस दिल की धङकन बढ़ती है, तब तब आपकी लिखी हुई बाते याद आती है।
न जाने में कहां था, कहा आ गया, और न जाने कहा जाऊंगा,
समझ से परे इस माहौल में, टूट के बिखर जाऊंगा।
आपका अपना हूँ, पराया नही,
कभी आजमा लेना, आपके दिल के करीब आ जाऊंगा।
अनगिनत ऐसे ही शेरे शायरी वाला पोस्ट फेसबुक पे लिखता रहता था, इसी लेखनी में एक दिन मेरे पास एक रिक्वेस्ट आया, नाम था उसका रीना, उस दिन मैंने उसका रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नही किया, दूसरे दिन उसका मैसेज आया, की आपने मेरे रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नही किया, फिर मैंने उसका प्रोफाइल चेक किया, न जाने क्यों मुझे ऐसा लगता था ये नाजुक कली न होकर एक गुब्बारा है, क्योंकि आज कल के जमाने मे लाइक और कमेंट के चक्कर मे भूतनाथ भी फीमेल बनके घूम रहे है, खैर मैंने उसका रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किया,
पोस्ट पे मुलाकात होती रहती थी, कमेंट का आदान प्रदान जारी था, शादी शुदा होने से एक फायदा ये भी रहता है कि मन भटकता है तो भटकने का रास्ता उपलब्ध रहता है, उसी में डुबकी लगा लो,
रीना मेरी चाहत में दीवानी, लिखने और पढ़ने की बेकरारी , एक भटकती हुई बेचारी न जाने कब मुझे मन ही मन मे दिल दे बैठी ये मुझे नही पता, कमेंट के बाद शिलशिला इनबॉक्स तकक आ ही गया,
रूप, गुण, गण, का मिलान होने ही वाला था कि मेरा धमाका हो गया, एक्सीडेंट होने के कारण में बिस्तर पे चला गया 1 महीने के लिए, इधर बेचारी रीना तड़पती रहती, इनबॉक्स में मैसेज करती रहती, और में सेव संतरे खाने में व्यस्त, और मस्त था, टांग का इलाज पक्के और कच्चे प्लास्टर के बाद ही निकलता है,
हॉस्पिटल से निकलने के बाद मोबाइल हाथ मे आया तो पता चला करीब सैकड़ो मैसेज भरे पड़े थे, 50 तो अकेले रीना के थे, मानो हम ऋण ले लिए हो और बैंक वाले खोज रहे हो, रीना को ऑनलाइन आते ही hi hello किया , फुरसत के झंझट तले रिप्लाई भी आया, बरसन लगी बदरिया, मानो सिलवट लोढा लेके हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ गई।
कहा थे
कैसे थे
कहा चले गए थे
कबसे तुमको मैसेज कर रही हूं
एक महीना से ज्यादा हो गया
तुम लड़को का यही काम है
तुम भी वैसे ही निकले मेरे पति के जैसे (यहाँ हमे भी मालूम पड़ा कि रीना की एकनाली बिल्कुल साफ है,)
उसके बाद बरबस उसके आंखों से आशु वाला तस्वीर आया। इनबॉक्स देखकर मन घबरा गया। पूछा मेरा गुनाह क्या है, कौन सी महबूबा हो मेरी जो इतनी डॉट लगाती हो,
क्या है रिश्ता हमारा तुम्हारा जो मेरे मन को भांति हो,
अनुलोम विलोम हो या अनुप्राश
कौन सी अलंकार हो तुम प्रिये
क्या चाहती हो खुल के बोलो।
ज्यादा न इतराओ प्रिये।
मैंने भी ठान लिया था आज रीना के मुह से सुनना चाहता हूँ आखिर ये बेकरारी क्या है, क्यों है, कैसे है, किसलिए है,
कुछ देर इनबॉक्स में सन्नाटा छाया रहा, उसके बाद उधर से एक तस्वीर आई,बिल्कुल कोमलांगी, नाजुक, आंखों में काजल लगा हुआ, नाक में नथुनी पहने हुए, सर पे गठीली जुड़ा बाधे हुए, मानो तो मेरा दिल कही अटक गया, तस्वीर के नीचे लिखा था, में आपको पसंद हूँ,
हाय दैया क्या जवाब दु, न दु समझ से परे, एक ही शब्द निकला रीना में शादी शुदा जिंदगी जी रहा हूँ, मुझे अपने जाल से निकाल के पोखरे के पानी मे जाने दो, गंडक और सागर का मेल नही, मिलाप नही,
बरबस रिना ने मुझे एक झटका और देते हुए बिल दिया में भी तो आपके जैसा ही हूँ, लेकिन मुझे सिर्फ आपसे दोस्ती करनी है, आपकी लेखनी की में कायल हूँ, मुझे दोस्त बना लो, मन की उमंग धीरे धीरे डांवाडोल होने लगी, मुझे तो मालूम ही था कब दोस्ती चूत के चक्कर मे दिल्ली निकल गई, अब न जाने कहा निकलेगी,
मैन कहा आपके बारे में कुछ नही जानता, न तो आप मेरे बारे में जानते, जान पहचान कैसे होगी,
कुछ अपनी कहो कुछ मेरी सुनो जलता है जमाना जलने दो।
रीना एक शादी शुदा औरत थी, जो एक मारवाड़ी की बोली भाली पत्नी थी, उसके पति का ट्रांसपोर्ट का कारोबार था, समय न देने के कारण रीना को फेसबुक पे एक सच्चे साथी की तलाश थी, जिसे मैंने पूरा किया।
दो बच्चे की माँ रीना 40 की अवस्था मे आ गई थी, एक लड़का एक लड़की,
महिमा
उम्र 22 साल
रिना की बेटी, दिखने में होनहार, बड़ी बड़ी चुचिया, मानो किसी को कह रही है आ जाओ, आ जाओ, मेरे स्तन का दूध पी जाओ,
रोहित
रिना का लड़का उम्र 10 साल,
रिना ने अपनी जवानी में एक काम बड़ा बढ़िया किया था, बच्चों में अंतर, इसलिए रिना 40 के बजाय 30 से ज्यादा नही दिखती थी,
रौनक
उम्र 50 साल, मानो जवानी अब रही ही नही, बुढापा बिज़नेस का आ गया, लोड उठ नही रहा तो लोंडा कहा से खड़ा होगा, छिनार एक नंबर का, काम काज बड़ा होने के चक्कर मे सेकेट्री के चक्कर मे लगा रहता था,
रौनक अपने आफिस में अपने सेकेट्री मधु के साथ,:/& मजा नहीं आ रहा क्या, जो कहना है खुलकर बोलो, इस समय ये कोड वर्ड मेरे दिमाग में नहीं घुसने वाले |
मधु – तुम तो मुझे चूम चाट कर मस्त हो और उसे क्या ऐसे ही तड़पाते रहोगे | रौनक ने इशारे से सवालिया मुद्रा बनायीं |
मधु वासना के समंदर में गोते लगा रही थी फिर भी झिझक रही थी, लेकिन उसने झिझक किनारे रख बेशर्मी ओढ़ने में ही भलाई समझी, आखिर अपने जिस्म की आग भी तो बुझानी थी, अगर इसी तरह झिझकती रहेगी तो कैसे होगा – मुझे पता है तुम क्या सुनना चाहते हो, जान बूझकर मासूम बन रहे हो, सुनना चाहते हो तो सुनो | मै कह रही हूँ अपने लंड को कब तक ऐसे तड़पाते रहोगे, उसे मेरी चूत में डालोगे या नहीं | चूत बहुत देर से झरने की तरह बह रही है | अब चोद भी दो न |
रौनक को अपने कानो पर यकीं नहीं हुआ – क्या कहा तुमने मैंने ठीक से सुना नहीं |
मधु भी बेशर्म बन गयी – हाय कितने दुष्ट हो तुम, मैंने सब कुछ तो साफ़ साफ़ बोला है फिर भी नाटक कर रहे हो, अपना मुसल लंड डालो न मेरी चूत में, देखो न बिना लंड के कैसे मेरी चूत तड़प रही है | चोदो न उसे प्लीज
रौनक– सच में चोदु |
मधु– हाँ अब चोदो भी, देखो कितना समुंदर जैसा धार लिए पानी बहा रही है मेरी चूत चुदने के लिए |
रौनक- मुझसे क्यों कह रही हो अगर तुम्हारी चूत तुम्हारे बस में नही है तो तुम भी तो चोद सकती हो | अपने हाथ से मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत में डाल लो |
इतना कहकर वह मधु को लिए लिए ही उल्टा हो गया | अब मधु रौनक के ऊपर आ गयी थी और रौनक बिस्तर पर पीठ के बल लेता था | उसने लेटे लेटे ही फिर से मधु के मम्मे चूसने शुरू कर दिया और उसी में मगन हो गया | वो चाहता था इस चुदाई को मधु ड्राइव करे और जब कुछ देर तक जब मधु सिर्फ तना हुआ गरम लंड ही सहलाती रही और कुछ नहीं किया तो रौनक बोल पड़ा – देखो मुझे तो अभी इन्हें आधे घंटे और चुसना है, इतने सुघड़ सुडौल गोल गोल सफ़ेद तने हुए ठोस स्तन और उस पर विराजमान नुकीली चुचियाँ कहाँ मिलते है, इसलिए तुम्हे जो करना है वो अपने आप कर लो |
मधु चुड़ैल की तरह इस समय चुदने के लिए वयाकुल थी, लेकिन रौनक को इस समय मजा लेना था, मधु खीझते हुए – इतना मोटा है इतना बड़ा है ऊपर से फूल कर अकड़ गया तुमारा लंड, कैसे डालू इसको मै अन्दर, मेरी तो इसे देखकर ही जान सुखी जा रही है |
रौनक -एक बार लंड को कसकर अपने हाथ से पकड़ो , अपनी चूत के छेद पर लगावो तो सही, फिर धीरे धीरे उसके ऊपर अपने बदन का वजन बढाओ | जितना जोर लगावोगी उतना ही घुसेगा, पूरा थोड़े ही घुस जायेगा एक साथ |
मधु अभी भी दुविधा में थी | रहेगी क्यों नही बेचारी बिन मा बाप की एक अंतिम थी, रौनक और रीना ने इसे टिनसूतिया बस स्टैंड पे जो पाया था, उस समय मधु की उम्र 3 साल थी, न जाने किस अभागन ने मधु को अपनी बुर से निकाला था, और बस स्टैंड पे छोड़ दिया था, रौनक जी राजस्थान के मूलतः निवासी थे लेकिन बाप दादाओ के समय से तिनसुकिया में रह गए थे, वही इनका अपना अच्छा सा कारोबार था, मधु की उम्र 25 साल थी, रौनक ने मधु को अपने ही आफिस में, अपनी रखैल, सेकेटी बना के रक्खा था, मधु BCom कर चुकी थी टैक्स लेने देने की जानकारी हो गई थी, इसलिए रौनक ने मधु को अपने साथ ही रख लिया था,
मधु रौनक को पापा, और रिना को मम्मी बोलती थी, रौनक मधु को जबसे अपने आफिस में लाया था, तभी से मधु की कुर्सी रौनक के सामने लग गई थी, आफिस में अंदर आने के बाद रौनक बेल बजा के किसी को अंदर बुलाता था, जब तक बेल न बाजे मजाल किसी का की कोई अंदर आ जाये, चाहे कितना भी जरूरी काम हो, कोई अंदर नही आ सकता,
मधु जबसे कॉलेज से निकली थी तभी से वयाकुल थी, न तो उसकी चूत का पानी कोई निकालने वाला था, और न ही वो अपने बुर में उंगली कर सकती थी, काहे की सुबह 10 बजे से लेकर शाम को 6 बजे तक वो अपने बाप रौनक के सामने रहती थी, उसके बाद घर जा कर अपनी बहन के साथ, रौनक धीरे धीरे मधु को तड़ता रहता था, रौनक एक पहुचा हुआ व्यापारी था, चूत का आदान प्रदान करवा कर ही वो आगे बढ़ा था, उसे मालूम था बिन ब्याही लड़की की चूची कितनी बड़ी होनी चाहिए, ब्याह के बाद उनके चूची की साइज चुचे से होना चाहिए, और मधु तो एक खिलाड़ी, न जाने कितने लड़को से छूट मरवा चुकी थी, बीकॉम के बहाने पूरे आशाम और नागालैंड में घु घु कर के चूत चुदवाई थी,
रौनक– ठीक है मै तुमारी मदद करता हूँ लेकिन एक बार सुपाडा तुमारी चिकनी चूत में घुस गया, फिर आगे तुम्हे ही सब करना होगा | मधु मादक नजरो से रोनक की शरारत समझ रही थी | रौनक ने मधु को अपना तपता गरम मोटा लंड पकड़वाया और उसे ऊपर की तरफ अपने से ९० डिग्री पर सीधा करवाया | फिर मधु की कमर को अपने दोनों हाथो से जकड लिया और लड़ को थोड़ा आकर प्रकार देते हुए लगड़ा प्रकार बनाया, उसके बाद बिजगाडित और रेखा गड़ित की तरह ऊपर नीचे करने लगा, छूट खुलने के पहले और बाद में बड़ा अंतर होता है, लेकिन जो चुदककर नारी होती है वो सब समझती है, दोनों पैरों को दाब कर मधु रोनक को ये एहसास दिला दी कि मेरी चूत आज आपने पहली बार छुई है, में छुईमुई की कली थी आपने अपने लंड से मेरी बुर का भोसड़ा बनाने में पहला कदम रक्खा है, रोनक ने भी ताड़ते हुए अपना लंड मधु के बुर से निकाल लिया, और पेशाब करने चला गया, इधर मधु बुर से पानी निकलवाकर अचंभे में पड़ गई, मधु की बुर फूल के पूवा जैसी हो गई थी, और रोनक जो मजा हुआ खिलाड़ी था, चूत जब तक पानी पानी न मांगे तब तक चोदता था, मुक्त मुक्त के लंड ढीला कर देता था,
रोनक बाथरूम से आते ही मधु की चोटिया पकड़ के उनके मुह को अपने लंड के नीचे आंड पे घूमने लगा, रोनक का लंड लटक गया था, इस समय रोनक का लंड सिथिल अवस्था मे था, और मधु की चूत चरम सीमा पे थी, मानो भारत पकिस्ताननक मैच हो रहा है, और पाकिस्तानी ये जनता है कि भारत तो जीत ही रहा है आज टीवी फोड़ना ही है, तो क्यों न टीवी को पहले ही फोड़ दिया जाय,
रोनक की हाल पाकिस्तान जैसी थी, उसे मालूम था, मधु उसकी है, उसी की रहेगी, रहेगी क्यों नही 25 साल तक मधु को अपना दाना पानी खिला के जवान जो किया है,
मधु के मुह से खू खा की खी की आवाज आ रही थी और इधर रोनक का लंड वापस अपने रूप पे आने लगा,
रोनक ने मधु को अपने टेबल पे सीधा लिटा दिया, मानो एक बेजान सी जान अपनी चूची लटकाए हुए रोनक की लंड की तरफ ललचाई नजरो से मधु देखने लगी।
रोनक ने मधु की चूत पर लंड रगड़ने के बाद वो अब लंड लेने को बेकाबू होने लगी. रोनक भी देर न करते हुऐ उससे पूछा- जान डाल दूँ अन्दर?
वो- हां.. कब से तड़प रही हूं लंड लेने को … अब डाल भी दो.
रोनक उसकी चूत पर लंड अच्छे से फिट किया और उसके मुँह पर एक हाथ रखा और एक जोरदार झटके के साथ एक ही बार में लंड उसकी चूत में उतार दिया. पर चूत थोड़ा टाइट थी तो आधा ही जा पाया. उसके चेहरे पर दर्द नजर आ रहा था. रोनक एक बार फिर लंड बाहर निकाला औऱ फिर दूसरे जोरदार झटके के साथ पूरा लंड अन्दर उतार दिया.
वो कराहने लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ रोनक को ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी. पर रोनक था एक मजा हुआ खिलाड़ी उसने झटके जारी रखे, फिर रोनक उसके मुँह से हाथ हटा दिया.
वो- बापू जरा धीरे से अन्दर करते.. तुमने मेरी चूत फाड़ दी. मुझे दर्द हो रहा है.
रोनक- अरे चुदी तो हो तुम पहले से ही. कुंवारी होती तो जरा ध्यान रखता.
वो- बापू दो ही बार तो चुदी हूं. कुछ तो रहम करते मेरे पर.
रोनक* रानी चुदी तो तू बहुत बार लगती है. पर तेरी चूत फिर भी ठीक ठीक है. चोदने में मजा आ रहा है. चल अब दर्द नहीं होगा. चुदाई का मजा ले.
अपने से छोटी उम्र की लड़की की चूत चोदने में रोनक का मजा भी बहुत बढ़ गया था. रोनक कभी उसकी टांगें कंधे में रखकर, कभी उसे कुतिया बना कर उसकी जोरदार चुदाई की. वो भी उछल उछल कर चुदाई के मजे ले रही थी.
बहुत दिनों बाद चुदने के कारण उसे थोड़ा दर्द भी हो रहा था. पर उसे मजा भी बहुत आ रहा था. थोड़ी देर में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. पर रोनक चोदना जारी रखा.
वो- हो गया बापू अब छोड़ दो मुझे. आपने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली. अब सहन नहीं हो पा रहें हैं तुम्हारे झटके. मुझे जलन हो रही है.
रोनक* ये बता मजा आया कि नहीं?
वो- मजा तो बहुत आया, पर अब जलन हो रही है, शायद मेरी चूत छिल गयी है. आपने मुझे बहुत बेदर्दी से रगड़ा है.
रोनक* तेरी जैसी चूत मिलेगी तो कौन नहीं रगड़ेगा.. अभी तो मेरा हुआ ही नहीं है. पर चल पहले मैं तेरी जलन ठीक करता हूँ.
रोनक * लंड उसकी चूत से निकाला और उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी. थोड़ी ही देर में वो फिर गरम होने लगी तो रोनक ने अपना लंड उसके आगे कर दिया.
रोनक* चल जरा तू भी चूस दे इसे. मादरचोद रिना तेरी माँ तो आज कल भाव हो नही देती, अपनी माँ चुद्वती है, रात में उसकी चूत में उंगली करता हूं तो चुतमारी के बोलती है आपके मुह से गंध आ रही है शराब की, साली रंडी तुझे और तेरी माँ को दोनों की चुदाई एक साथ करनी है, मधु रोनक के लंड की फैलाव देख के चौक सी गई
रोनक* क्या हुआ लंड नहीं देखा है क्या पहले कभी?
वो- देखा तो है पर आपका लंड कुछ जाना पहचाना सा लग रहा है. माँ का नाम लेते ही आपके जुबान से आपका लंड भाव दिखाने लगा, अभी अभी मेरी चूत में गया था, लेकिन वापस उससे भी बड़ा हो गया,
रोनक* -चल अब शिकवे गिले छोड़ और मेरे लंड को चूस भी ले, नही तो बार बार तू अपनी चूत में उंगली करती रहेगी।
वो भी मजे से मेरा लंड चूसने लगी. थोड़ी देर चुसवाने के बाद रोनक ने उसे फिर से लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया. वो भी गरम हुई पड़ी थी, रोनक ने पूछा- अब चुदाई शुरू करूँ.
वो- हां, अब जलन व दर्द कम है. अब पेल दो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर मेरे बॉयफ्रेंड.
यह कह कर मधु मुस्कुराने लगी.
रोनक * ओह्ह बापू से सीधे बॉयफ्रेंड. चल ठीक है ले अब सम्हाल अपने बॉयफ्रेंड का लंड.
न जाने फिर कब आपसे बात होगी।
जितना होगा, हो सकेगा, मुलाकात होगी,
सिर्फ और सिर्फ यहॉ चुदाई की बात होगी।
बहुत खूबसूरत लगता है जब आप सभी लेखकों की कहानी पढ़ता हूं तो, आप लोगो की प्रतिभा , आपके लेखनी में कूट कूट के भरी पड़ी है, ऐसे ही आप लोग लिखते रहे और दूसरों को भी प्रेरित करते रहे।
आशा ही नही पूरा विश्वास है की आप सभी अच्छे, सकुशल, मंगलमय कामनाओं सहित खुश होंगे।
जब जब इस दिल की धङकन बढ़ती है, तब तब आपकी लिखी हुई बाते याद आती है।
न जाने में कहां था, कहा आ गया, और न जाने कहा जाऊंगा,
समझ से परे इस माहौल में, टूट के बिखर जाऊंगा।
आपका अपना हूँ, पराया नही,
कभी आजमा लेना, आपके दिल के करीब आ जाऊंगा।
अनगिनत ऐसे ही शेरे शायरी वाला पोस्ट फेसबुक पे लिखता रहता था, इसी लेखनी में एक दिन मेरे पास एक रिक्वेस्ट आया, नाम था उसका रीना, उस दिन मैंने उसका रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नही किया, दूसरे दिन उसका मैसेज आया, की आपने मेरे रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नही किया, फिर मैंने उसका प्रोफाइल चेक किया, न जाने क्यों मुझे ऐसा लगता था ये नाजुक कली न होकर एक गुब्बारा है, क्योंकि आज कल के जमाने मे लाइक और कमेंट के चक्कर मे भूतनाथ भी फीमेल बनके घूम रहे है, खैर मैंने उसका रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किया,
पोस्ट पे मुलाकात होती रहती थी, कमेंट का आदान प्रदान जारी था, शादी शुदा होने से एक फायदा ये भी रहता है कि मन भटकता है तो भटकने का रास्ता उपलब्ध रहता है, उसी में डुबकी लगा लो,
रीना मेरी चाहत में दीवानी, लिखने और पढ़ने की बेकरारी , एक भटकती हुई बेचारी न जाने कब मुझे मन ही मन मे दिल दे बैठी ये मुझे नही पता, कमेंट के बाद शिलशिला इनबॉक्स तकक आ ही गया,
रूप, गुण, गण, का मिलान होने ही वाला था कि मेरा धमाका हो गया, एक्सीडेंट होने के कारण में बिस्तर पे चला गया 1 महीने के लिए, इधर बेचारी रीना तड़पती रहती, इनबॉक्स में मैसेज करती रहती, और में सेव संतरे खाने में व्यस्त, और मस्त था, टांग का इलाज पक्के और कच्चे प्लास्टर के बाद ही निकलता है,
हॉस्पिटल से निकलने के बाद मोबाइल हाथ मे आया तो पता चला करीब सैकड़ो मैसेज भरे पड़े थे, 50 तो अकेले रीना के थे, मानो हम ऋण ले लिए हो और बैंक वाले खोज रहे हो, रीना को ऑनलाइन आते ही hi hello किया , फुरसत के झंझट तले रिप्लाई भी आया, बरसन लगी बदरिया, मानो सिलवट लोढा लेके हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ गई।
कहा थे
कैसे थे
कहा चले गए थे
कबसे तुमको मैसेज कर रही हूं
एक महीना से ज्यादा हो गया
तुम लड़को का यही काम है
तुम भी वैसे ही निकले मेरे पति के जैसे (यहाँ हमे भी मालूम पड़ा कि रीना की एकनाली बिल्कुल साफ है,)
उसके बाद बरबस उसके आंखों से आशु वाला तस्वीर आया। इनबॉक्स देखकर मन घबरा गया। पूछा मेरा गुनाह क्या है, कौन सी महबूबा हो मेरी जो इतनी डॉट लगाती हो,
क्या है रिश्ता हमारा तुम्हारा जो मेरे मन को भांति हो,
अनुलोम विलोम हो या अनुप्राश
कौन सी अलंकार हो तुम प्रिये
क्या चाहती हो खुल के बोलो।
ज्यादा न इतराओ प्रिये।
मैंने भी ठान लिया था आज रीना के मुह से सुनना चाहता हूँ आखिर ये बेकरारी क्या है, क्यों है, कैसे है, किसलिए है,
कुछ देर इनबॉक्स में सन्नाटा छाया रहा, उसके बाद उधर से एक तस्वीर आई,बिल्कुल कोमलांगी, नाजुक, आंखों में काजल लगा हुआ, नाक में नथुनी पहने हुए, सर पे गठीली जुड़ा बाधे हुए, मानो तो मेरा दिल कही अटक गया, तस्वीर के नीचे लिखा था, में आपको पसंद हूँ,
हाय दैया क्या जवाब दु, न दु समझ से परे, एक ही शब्द निकला रीना में शादी शुदा जिंदगी जी रहा हूँ, मुझे अपने जाल से निकाल के पोखरे के पानी मे जाने दो, गंडक और सागर का मेल नही, मिलाप नही,
बरबस रिना ने मुझे एक झटका और देते हुए बिल दिया में भी तो आपके जैसा ही हूँ, लेकिन मुझे सिर्फ आपसे दोस्ती करनी है, आपकी लेखनी की में कायल हूँ, मुझे दोस्त बना लो, मन की उमंग धीरे धीरे डांवाडोल होने लगी, मुझे तो मालूम ही था कब दोस्ती चूत के चक्कर मे दिल्ली निकल गई, अब न जाने कहा निकलेगी,
मैन कहा आपके बारे में कुछ नही जानता, न तो आप मेरे बारे में जानते, जान पहचान कैसे होगी,
कुछ अपनी कहो कुछ मेरी सुनो जलता है जमाना जलने दो।
रीना एक शादी शुदा औरत थी, जो एक मारवाड़ी की बोली भाली पत्नी थी, उसके पति का ट्रांसपोर्ट का कारोबार था, समय न देने के कारण रीना को फेसबुक पे एक सच्चे साथी की तलाश थी, जिसे मैंने पूरा किया।
दो बच्चे की माँ रीना 40 की अवस्था मे आ गई थी, एक लड़का एक लड़की,
महिमा
रिना की बेटी, दिखने में होनहार, बड़ी बड़ी चुचिया, मानो किसी को कह रही है आ जाओ, आ जाओ, मेरे स्तन का दूध पी जाओ,
रोहित
रिना ने अपनी जवानी में एक काम बड़ा बढ़िया किया था, बच्चों में अंतर, इसलिए रिना 40 के बजाय 30 से ज्यादा नही दिखती थी,
रौनक
रौनक अपने आफिस में अपने सेकेट्री मधु के साथ,:/& मजा नहीं आ रहा क्या, जो कहना है खुलकर बोलो, इस समय ये कोड वर्ड मेरे दिमाग में नहीं घुसने वाले |
मधु – तुम तो मुझे चूम चाट कर मस्त हो और उसे क्या ऐसे ही तड़पाते रहोगे | रौनक ने इशारे से सवालिया मुद्रा बनायीं |
मधु वासना के समंदर में गोते लगा रही थी फिर भी झिझक रही थी, लेकिन उसने झिझक किनारे रख बेशर्मी ओढ़ने में ही भलाई समझी, आखिर अपने जिस्म की आग भी तो बुझानी थी, अगर इसी तरह झिझकती रहेगी तो कैसे होगा – मुझे पता है तुम क्या सुनना चाहते हो, जान बूझकर मासूम बन रहे हो, सुनना चाहते हो तो सुनो | मै कह रही हूँ अपने लंड को कब तक ऐसे तड़पाते रहोगे, उसे मेरी चूत में डालोगे या नहीं | चूत बहुत देर से झरने की तरह बह रही है | अब चोद भी दो न |
रौनक को अपने कानो पर यकीं नहीं हुआ – क्या कहा तुमने मैंने ठीक से सुना नहीं |
मधु भी बेशर्म बन गयी – हाय कितने दुष्ट हो तुम, मैंने सब कुछ तो साफ़ साफ़ बोला है फिर भी नाटक कर रहे हो, अपना मुसल लंड डालो न मेरी चूत में, देखो न बिना लंड के कैसे मेरी चूत तड़प रही है | चोदो न उसे प्लीज
रौनक– सच में चोदु |
मधु– हाँ अब चोदो भी, देखो कितना समुंदर जैसा धार लिए पानी बहा रही है मेरी चूत चुदने के लिए |
रौनक- मुझसे क्यों कह रही हो अगर तुम्हारी चूत तुम्हारे बस में नही है तो तुम भी तो चोद सकती हो | अपने हाथ से मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत में डाल लो |
इतना कहकर वह मधु को लिए लिए ही उल्टा हो गया | अब मधु रौनक के ऊपर आ गयी थी और रौनक बिस्तर पर पीठ के बल लेता था | उसने लेटे लेटे ही फिर से मधु के मम्मे चूसने शुरू कर दिया और उसी में मगन हो गया | वो चाहता था इस चुदाई को मधु ड्राइव करे और जब कुछ देर तक जब मधु सिर्फ तना हुआ गरम लंड ही सहलाती रही और कुछ नहीं किया तो रौनक बोल पड़ा – देखो मुझे तो अभी इन्हें आधे घंटे और चुसना है, इतने सुघड़ सुडौल गोल गोल सफ़ेद तने हुए ठोस स्तन और उस पर विराजमान नुकीली चुचियाँ कहाँ मिलते है, इसलिए तुम्हे जो करना है वो अपने आप कर लो |
मधु चुड़ैल की तरह इस समय चुदने के लिए वयाकुल थी, लेकिन रौनक को इस समय मजा लेना था, मधु खीझते हुए – इतना मोटा है इतना बड़ा है ऊपर से फूल कर अकड़ गया तुमारा लंड, कैसे डालू इसको मै अन्दर, मेरी तो इसे देखकर ही जान सुखी जा रही है |
रौनक -एक बार लंड को कसकर अपने हाथ से पकड़ो , अपनी चूत के छेद पर लगावो तो सही, फिर धीरे धीरे उसके ऊपर अपने बदन का वजन बढाओ | जितना जोर लगावोगी उतना ही घुसेगा, पूरा थोड़े ही घुस जायेगा एक साथ |
मधु अभी भी दुविधा में थी | रहेगी क्यों नही बेचारी बिन मा बाप की एक अंतिम थी, रौनक और रीना ने इसे टिनसूतिया बस स्टैंड पे जो पाया था, उस समय मधु की उम्र 3 साल थी, न जाने किस अभागन ने मधु को अपनी बुर से निकाला था, और बस स्टैंड पे छोड़ दिया था, रौनक जी राजस्थान के मूलतः निवासी थे लेकिन बाप दादाओ के समय से तिनसुकिया में रह गए थे, वही इनका अपना अच्छा सा कारोबार था, मधु की उम्र 25 साल थी, रौनक ने मधु को अपने ही आफिस में, अपनी रखैल, सेकेटी बना के रक्खा था, मधु BCom कर चुकी थी टैक्स लेने देने की जानकारी हो गई थी, इसलिए रौनक ने मधु को अपने साथ ही रख लिया था,
मधु रौनक को पापा, और रिना को मम्मी बोलती थी, रौनक मधु को जबसे अपने आफिस में लाया था, तभी से मधु की कुर्सी रौनक के सामने लग गई थी, आफिस में अंदर आने के बाद रौनक बेल बजा के किसी को अंदर बुलाता था, जब तक बेल न बाजे मजाल किसी का की कोई अंदर आ जाये, चाहे कितना भी जरूरी काम हो, कोई अंदर नही आ सकता,
मधु जबसे कॉलेज से निकली थी तभी से वयाकुल थी, न तो उसकी चूत का पानी कोई निकालने वाला था, और न ही वो अपने बुर में उंगली कर सकती थी, काहे की सुबह 10 बजे से लेकर शाम को 6 बजे तक वो अपने बाप रौनक के सामने रहती थी, उसके बाद घर जा कर अपनी बहन के साथ, रौनक धीरे धीरे मधु को तड़ता रहता था, रौनक एक पहुचा हुआ व्यापारी था, चूत का आदान प्रदान करवा कर ही वो आगे बढ़ा था, उसे मालूम था बिन ब्याही लड़की की चूची कितनी बड़ी होनी चाहिए, ब्याह के बाद उनके चूची की साइज चुचे से होना चाहिए, और मधु तो एक खिलाड़ी, न जाने कितने लड़को से छूट मरवा चुकी थी, बीकॉम के बहाने पूरे आशाम और नागालैंड में घु घु कर के चूत चुदवाई थी,
रौनक– ठीक है मै तुमारी मदद करता हूँ लेकिन एक बार सुपाडा तुमारी चिकनी चूत में घुस गया, फिर आगे तुम्हे ही सब करना होगा | मधु मादक नजरो से रोनक की शरारत समझ रही थी | रौनक ने मधु को अपना तपता गरम मोटा लंड पकड़वाया और उसे ऊपर की तरफ अपने से ९० डिग्री पर सीधा करवाया | फिर मधु की कमर को अपने दोनों हाथो से जकड लिया और लड़ को थोड़ा आकर प्रकार देते हुए लगड़ा प्रकार बनाया, उसके बाद बिजगाडित और रेखा गड़ित की तरह ऊपर नीचे करने लगा, छूट खुलने के पहले और बाद में बड़ा अंतर होता है, लेकिन जो चुदककर नारी होती है वो सब समझती है, दोनों पैरों को दाब कर मधु रोनक को ये एहसास दिला दी कि मेरी चूत आज आपने पहली बार छुई है, में छुईमुई की कली थी आपने अपने लंड से मेरी बुर का भोसड़ा बनाने में पहला कदम रक्खा है, रोनक ने भी ताड़ते हुए अपना लंड मधु के बुर से निकाल लिया, और पेशाब करने चला गया, इधर मधु बुर से पानी निकलवाकर अचंभे में पड़ गई, मधु की बुर फूल के पूवा जैसी हो गई थी, और रोनक जो मजा हुआ खिलाड़ी था, चूत जब तक पानी पानी न मांगे तब तक चोदता था, मुक्त मुक्त के लंड ढीला कर देता था,
रोनक बाथरूम से आते ही मधु की चोटिया पकड़ के उनके मुह को अपने लंड के नीचे आंड पे घूमने लगा, रोनक का लंड लटक गया था, इस समय रोनक का लंड सिथिल अवस्था मे था, और मधु की चूत चरम सीमा पे थी, मानो भारत पकिस्ताननक मैच हो रहा है, और पाकिस्तानी ये जनता है कि भारत तो जीत ही रहा है आज टीवी फोड़ना ही है, तो क्यों न टीवी को पहले ही फोड़ दिया जाय,
रोनक की हाल पाकिस्तान जैसी थी, उसे मालूम था, मधु उसकी है, उसी की रहेगी, रहेगी क्यों नही 25 साल तक मधु को अपना दाना पानी खिला के जवान जो किया है,
मधु के मुह से खू खा की खी की आवाज आ रही थी और इधर रोनक का लंड वापस अपने रूप पे आने लगा,
रोनक ने मधु को अपने टेबल पे सीधा लिटा दिया, मानो एक बेजान सी जान अपनी चूची लटकाए हुए रोनक की लंड की तरफ ललचाई नजरो से मधु देखने लगी।
रोनक ने मधु की चूत पर लंड रगड़ने के बाद वो अब लंड लेने को बेकाबू होने लगी. रोनक भी देर न करते हुऐ उससे पूछा- जान डाल दूँ अन्दर?
वो- हां.. कब से तड़प रही हूं लंड लेने को … अब डाल भी दो.
रोनक उसकी चूत पर लंड अच्छे से फिट किया और उसके मुँह पर एक हाथ रखा और एक जोरदार झटके के साथ एक ही बार में लंड उसकी चूत में उतार दिया. पर चूत थोड़ा टाइट थी तो आधा ही जा पाया. उसके चेहरे पर दर्द नजर आ रहा था. रोनक एक बार फिर लंड बाहर निकाला औऱ फिर दूसरे जोरदार झटके के साथ पूरा लंड अन्दर उतार दिया.
वो कराहने लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ रोनक को ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी. पर रोनक था एक मजा हुआ खिलाड़ी उसने झटके जारी रखे, फिर रोनक उसके मुँह से हाथ हटा दिया.
वो- बापू जरा धीरे से अन्दर करते.. तुमने मेरी चूत फाड़ दी. मुझे दर्द हो रहा है.
रोनक- अरे चुदी तो हो तुम पहले से ही. कुंवारी होती तो जरा ध्यान रखता.
वो- बापू दो ही बार तो चुदी हूं. कुछ तो रहम करते मेरे पर.
रोनक* रानी चुदी तो तू बहुत बार लगती है. पर तेरी चूत फिर भी ठीक ठीक है. चोदने में मजा आ रहा है. चल अब दर्द नहीं होगा. चुदाई का मजा ले.
अपने से छोटी उम्र की लड़की की चूत चोदने में रोनक का मजा भी बहुत बढ़ गया था. रोनक कभी उसकी टांगें कंधे में रखकर, कभी उसे कुतिया बना कर उसकी जोरदार चुदाई की. वो भी उछल उछल कर चुदाई के मजे ले रही थी.
बहुत दिनों बाद चुदने के कारण उसे थोड़ा दर्द भी हो रहा था. पर उसे मजा भी बहुत आ रहा था. थोड़ी देर में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. पर रोनक चोदना जारी रखा.
वो- हो गया बापू अब छोड़ दो मुझे. आपने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली. अब सहन नहीं हो पा रहें हैं तुम्हारे झटके. मुझे जलन हो रही है.
रोनक* ये बता मजा आया कि नहीं?
वो- मजा तो बहुत आया, पर अब जलन हो रही है, शायद मेरी चूत छिल गयी है. आपने मुझे बहुत बेदर्दी से रगड़ा है.
रोनक* तेरी जैसी चूत मिलेगी तो कौन नहीं रगड़ेगा.. अभी तो मेरा हुआ ही नहीं है. पर चल पहले मैं तेरी जलन ठीक करता हूँ.
रोनक * लंड उसकी चूत से निकाला और उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी. थोड़ी ही देर में वो फिर गरम होने लगी तो रोनक ने अपना लंड उसके आगे कर दिया.
रोनक* चल जरा तू भी चूस दे इसे. मादरचोद रिना तेरी माँ तो आज कल भाव हो नही देती, अपनी माँ चुद्वती है, रात में उसकी चूत में उंगली करता हूं तो चुतमारी के बोलती है आपके मुह से गंध आ रही है शराब की, साली रंडी तुझे और तेरी माँ को दोनों की चुदाई एक साथ करनी है, मधु रोनक के लंड की फैलाव देख के चौक सी गई
रोनक* क्या हुआ लंड नहीं देखा है क्या पहले कभी?
वो- देखा तो है पर आपका लंड कुछ जाना पहचाना सा लग रहा है. माँ का नाम लेते ही आपके जुबान से आपका लंड भाव दिखाने लगा, अभी अभी मेरी चूत में गया था, लेकिन वापस उससे भी बड़ा हो गया,
रोनक* -चल अब शिकवे गिले छोड़ और मेरे लंड को चूस भी ले, नही तो बार बार तू अपनी चूत में उंगली करती रहेगी।
वो भी मजे से मेरा लंड चूसने लगी. थोड़ी देर चुसवाने के बाद रोनक ने उसे फिर से लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया. वो भी गरम हुई पड़ी थी, रोनक ने पूछा- अब चुदाई शुरू करूँ.
वो- हां, अब जलन व दर्द कम है. अब पेल दो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर मेरे बॉयफ्रेंड.
यह कह कर मधु मुस्कुराने लगी.
रोनक * ओह्ह बापू से सीधे बॉयफ्रेंड. चल ठीक है ले अब सम्हाल अपने बॉयफ्रेंड का लंड.